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5जी का शुभारंभ भारत में दूरसंचार क्षेत्र के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है: श्री अश्विनी वैष्णव

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संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। उन्होंने कहा कि दूरसंचार, डिजिटल इंडिया का द्वार है और बदलाव के दौर में आज मजबूत दूरसंचार क्षेत्र की जरूरत है। श्री वैष्णव इंडिया मोबाइल कांग्रेस, 2022 के छठे संस्करण के उद्घाटन सत्र में सभा को संबोधित कर रहे थे, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में 5G सर्विस को लॉन्च करते हुए किया है।

श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दूरसंचार क्षेत्र को रणनीतिक क्षेत्र का दर्जा दिया है और उन्होंने इस क्षेत्र के सभी आयामों पर मार्गदर्शन दिया है और अब दूरसंचार तकनीक के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस क्षेत्र को नियामक निश्चितता दी है और उस क्षेत्र को एक पारदर्शी व्यवस्था दी है, जो अब तक मुकदमों में उलझा रहता था। आज इन सुधारों के चलते, दूरसंचार एक उभरता हुआ उद्योग बन गया है।
श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आज 5जी के लॉन्च के साथ ही अब शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल अर्थव्यवस्था में जमकर विकास होगा और संचार का चेहरा बदल जाएगा। कोशिश यह है कि इनोवेटिव मॉडल के साथ ऑप्टिकल फाइबर के जरिए आखिर तक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाए।
श्री अश्विनी वैष्णव ने बीएसएनएल को बाज़ार स्थिरीकरण बल का दर्जा दिए जाने और 1,64,000 करोड़ का पैकेज उपलब्ध कराने के लिए धन्यवाद दिया, जो बीएसएनएल के लिए ऐतिहासिक घटना है। आज दूरसंचार निर्माण में बुनियादी बदलाव आए हैं। उन्होंने कहा की श्री मोदी जी ने 4जी और 5जी के लिए स्वदेशी तकनीक को विकसित करने की चुनौती दी थी और अब भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, साथ ही अब दुनिया भारत की दूरसंचार उद्योग की तरफ देख रही है।

संचार राज्यमंत्री श्री देवूसिंह चौहान ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के आहवान के बाद भारत आत्मनिर्भर भारत की तरफ बढ़ रहा है। इसके तहत भारत ने 4जी और 5जी का विकास किया है और भविष्य में 6जी का विकास किया जाएगा। प्रधानमंत्री जी के निर्देश में दूरसंचार में बड़े सुधार हुए हैं। नतीजतन, इस तकनीक का स्पेक्ट्रम इसी दिन टेलीकॉम ऑपरेटरों को आवंटित हो गया है। आधुनिक दूरसंचार क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के मोड़ पर हमें यकीन है कि इससे नई ऊर्जा, नई आशा और एक नई जिंदगी का निर्माण होगा।
इस मौके पर रिलायंस इंडस्ट्री के चेयरमैन श्री मुकेश अंबानी, भारती एंटरप्राइज के चेयरमैन श्री सुनील मित्तल, आदित्य बिरला समूह के चेयरमैन श्री कुमार मंगलम बिड़ला, दूरसंचार विभाग के सचिव श्री के राजारमन और अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।

खान के फैन अरमान ‘तस्वीर इश्क की’ रोमांटिक फिल्म से करने जा रहे हैं डेब्यू

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मुम्बई। बॉलीवुड में रोमांटिक फिल्में जब जब नए चेहरों के साथ रिलीज हुई है तब तब उसका जादू चला है और दर्शक उन किरदारों पर मोहित हुए हैं। हर युवा वर्ग ऐसी फिल्मों में अपनी छवि ढूंढता है और उसके किरदार को अपने दिल के करीब महसूस करने लगता है। फिल्में चाहे किसी भी जॉनर की हो लेकिन रोमांस के बिना अधूरा ही रहता है। हिंदी सिनेमा में दिलीप कुमार, राजकपूर, राजेश खन्ना, जितेंद्र, अमिताभ बच्चन, आमिर खान, सलमान खान, शाहरुख खान, ऋतिक रोशन, रणबीर कपूर जैसे कई अभिनेताओं ने रुपहले पर्दे पर रोमांटिक भूमिका में अपने विशेष अंदाज़ से दर्शकों के दिल-दिमाग पर अमिट छाप छोड़ी है।
इनमें खान तिकड़ी (आमिर, शाहरुख, सलमान) तो आज भी लोगों के दिलों में बसते हैं जिनके ब्लॉकबस्टर रोमांटिक फिल्में अनंतकाल तक यादगार बन चुके हैं। इन्हीं खान से प्रेरित होकर नवोदित अभिनेता अरमान खान भी एक रोमांटिक वेब फिल्म ‘तस्वीर इश्क की’ से बॉलीवुड में डेब्यू कर रहे हैं।
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के इस्लामपुर निवासी अरमान खान वैसे तो पढ़ाई में होनहार छात्र रहे हैं और उन्होंने हैदराबाद में इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी है लेकिन ग्लैमर की दुनिया उन्हें आकर्षित कर गई। वह 2018 में कोरोना काल से पहले मुम्बई आ गए और स्वयं को अच्छे ढंग से लॉन्च करने के लिए बढ़िया स्क्रिप्ट की तलाश में जुट गए। यूं तो अरमान विविधतापूर्ण किरदार करने में खुद को सहज व सक्षम पाते हैं लेकिन उन्होंने से सबसे पहले एक ऐसी रोमांटिक फिल्म को चुना जो दर्शकों को कुछ हटके लगे। फिर उन्हें ‘तस्वीर इश्क की’ फिल्म की कहानी पसंद आ गई। इस फिल्म को लेकर वह बेहद उत्साहित हैं क्योंकि उन्होंने पूरे लगन के साथ काम करते हुए हर पहलू पर बारीकी से ध्यान दिया है।
अरमान खान ने बताया कि मेरी पहली फिल्म ‘तस्वीर इश्क की’ एक खूबसूरत फिल्म बनकर तैयार हुई है। इस फिल्म के निर्माण के साथ मैंने बहुत कुछ सीखा और समझा है। यह 6 अक्टूबर 2022 को दुनिया भर में ओटीटी प्लेटफॉर्म जैसे हंगामा प्ले, एम एक्स प्लेयर, वी आई मूवीज एंड टीवी, एयरटेल एक्सट्रीम एंड और भी कई ओ टी टी प्लेटफार्म पर रिलीज होगी।


29 सितंबर 2022 को अखांन फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले बनी ‘तस्वीर इश्क की’ वेब फिल्म का ट्रेलर अखांन फिल्म्स के यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया। साथ ही इसका खूबसूरत रोमांटिक गाना ‘साहेबाँ’ का ऑडियो भी रिलीज हुआ जो सुर्खियों में बना हुआ है।
‘तस्वीर इश्क की’ फिल्म के निर्देशक अज़ीम शेख और छायाकार संतोष के गुप्ता हैं।
इस फिल्म में अरमान खान के साथ अंजली शर्मा की मुख्य भूमिका है। साथ ही संदीप चटर्जी, पल्लवी शर्मा और अमर निवेश भी प्रमुख भूमिका में दिखाई देंगे।
इस वेब फिल्म के निर्माता जाकिर हुसैन, प्रिया गुप्ता, वसीम अकरम हैं।
सह-निर्माता शिव नाथ गुप्ता, सुभाष चौधरी, राम सिंह यादव, उजैर हाशमी हैं तथा कार्यकारी निर्माता आदिल खान और सहयोगी निर्माता प्रभजोत सिंह (अनख प्रोडक्शन) हैं।
इसके संपादक राम सिंह यादव हैं जबकि पोस्ट प्रोडक्शन का काम सैटेलाइट पिक्चर्स द्वारा किया गया है।
इस फिल्म के संगीतकार रूपेश वर्मा, कला निर्देशक प्रशांत शेडेकर,
प्रोडक्शन डिजाइनर निकिता शेडेकर हैं। मेकओवर सकिला सिद्दीकी, जावेद और टीम द्वारा किया गया है। वहीं कॉस्ट्यूम्स डिजाइनर फरजाना खान और कॉस्ट्यूम्स स्टाइलिस्ट कविशा सिंह, गायक आरिया लाहा, कोरियोग्राफर संजय यादव हैं।

– संतोष साहू

मुम्बई में ११ पशु रक्षा और उनकी चिकित्सा के लिए एनिमल एम्बुलेंस का उद्घाटन महाराष्ट्र राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी तथा केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला केहाथो संपन्न

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मूक पशुओं की सेवा के लिए एम्बुलेंस के उद्घाटन के अवसर पर पशुपालन और डेयरी केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने अपने सम्बोधन में आह्वाहन करते हुए कहा कि -” हमें उन पशु चिकित्सक का भी सम्मान करना चाहिए जो इन अबोध मूक पशुओं की पीड़ा को समझ कर उनका ईलाज करते है , हम लोग तो अपनी तकलीफ़ बता सकते है मगर इन अबोध मूक पशुओं का क्या जो बोल नहीं सकता है , यैसे में ये हमारे पशु चिकित्सक उनकी पीड़ा को समझ कर उनका ईलाज कर के उनको ठीक करते है जो अपने आप में बहुत बड़ी बात है। ” ज्ञात हो कि इस तरह के पशु एम्बुलेंस की बहुत जरुरत थी , मुम्बई महानगर में बहुत ही कम संख्या में एनिमल एम्बुलेंस है यैसे में समस्त महाजन के द्वारा ११ एनिमल एम्बुलेंस का दान महानगर को देना बहुत बड़ा और सराहनीय कार्य है। ” 

मुम्बई – जीवदया को ले कर काम करने वाली संस्था समस्त महाजन के माध्यम से कल राजभवन मुम्बई में ११ पशु रक्षा और उनकी चिकित्सा के लिए एनिमल एम्बुलेंस का उद्घाटन महाराष्ट्र राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी तथा केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला के साथ राजभवन मुंबई से 11 पशु चिकित्सा एम्बुलेंस को झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
समाचार के अनुसार समस्त महाजन के गिरीश भाई शाह के प्रयासों से बृहन्मुंबई क्षेत्र में मूक जानवरों और गौवंश की सेवा के लिए ११ पशु चिकित्सा एम्बुलेंस प्रदान की गईं। समस्त महाजन संगठन की पहल पर इन पशु चिकित्सा एंबुलेंस को राजभवन से हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के समय बड़ा गरिमामय माहौल रहा।
इस दौरान पर्यटन एवं महिला बाल कल्याण मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, पशुपालन विभाग के मुख्य सचिव जे पी गुप्ता, समस्त महाजन संस्था के विश्वस्त गिरीश शाह मौजूद थे.संस्था के प्रमुख गिरीश भाई शाह के अनुसार इस एम्बुलेंस को वसई विरार, दहिसर से मलाड, गोरेगांव से जुहू पार्ले, बांद्रा-खार-सांताक्रूज, दादर, दक्षिण मुंबई, मुलुंड, ठाणे, भिवंडी और नवी मुंबई के इलाकों में उपलब्ध करवाया जायेगा।
इस को प्रोजेक्ट: अर्हम अनुकंपा के तहत किया जा रहा है ,समस्त महाजन (सुपर स्पेशलिटी एनिमल एम्बुलेंस ) जो टोल फ्री नंबर पर कॉल करने से घटना स्थल पर एम्बुलेंस तुरंत मदद के लिए पहुंचेगा।

गिरीश जयंतीलाल शाह पेशेवर रूप से एक व्यवसायी हैं, लेकिन वे अपनी दिनचर्या की शुरुआत सामाजिक गतिविधियों से करते हैं। उन्होंने खुद को आम आदमी से जोड़ने के लिए माध्यम चुना है, पशु और पर्यावरण एक स्वैच्छिक संगठन है जिसे “समस्त महाजन” कहा जाता है।
समस्त महाजन पर्यावरण, पारिस्थितिकी तंत्र, ग्रामीण विकास की पारंपरिक प्रणाली की रक्षा और गाय संरक्षण, संरक्षण और संरक्षण गतिविधियों को बढ़ावा देकर मनुष्य और पशु के लिए दया और करुणा के लिए समर्पित है। उनके गतिशील नेतृत्व और मार्गदर्शन के कारण, समस्त महाजन गुजरात और राजस्थान जैसे विभिन्न राज्यों में सराहनीय कार्य कर रहे हैं। महाराष्ट्र राज्य में उत्कृष्ट सेवाओं को जल संरक्षण के लिए सरकार द्वारा मान्यता दी गई है। पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के लिए, उनका संगठन राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्तकर्ता है।

सरकार ने प्रदेशभर में गौवंश सवंर्धन व संरक्षण के लिए भिजवाए 45 करोड़: गर्ग

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जींद, 30 सितंबर । हरियाणा गौ सेवा आयोग के चेयरमैन श्रवण कुमार गर्ग ने कहा कि सरकार द्वारा इस वर्ष प्रदेश की गौशालाओं में गौवंशों के संवर्धन व संरक्षण के लिए 45 करोड़ रुपये की राशि भिजवाई गई है। गौ सेवा आयोग द्वारा गौवंश के कल्याणार्थ निरंतर कार्य किया जा रहा है। इससे पहले प्रदेश में यह व्यवस्था नहीं थी। वे शुक्रवार को विश्राम गृह में अधिकारियों व गौशालाओं के प्रतिनिधियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पिछले दिनों गौवंश में लंपी बीमारी फैली। इस बीमारी को रोकने के लिए तुरंत प्रदेश के 19 लाख गौवंशों के लिए 20 लाख वैक्सीनेशन की व्यवस्था की गई और पशुपालन विभाग तथा गौसेवकों की मदद से सात दिनों में सभी गौवंशो का टीकाकरण किया गया। जिससे हरियाणा में इस बीमारी पर काबू पाया गया और इस बीमारी से गौवंश की मृत्यु का प्रतिशत कुल दो प्रतिशत रहा। आयोग द्वारा गोबर को डीएपी खाद के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने हेतू कार्य किया जा रहा है, जिसके लिए लैब टैस्टिंग का कार्य पूरा हो चुका है। अब इसे क्षेत्र में भेजा जाएगा। इस व्यवस्था के पूरा होने से किसानों को डीएपी खाद के विकल्प के रूप में एक अच्छी खाद मुहैया होगी। इसके साथ-साथ गोबर के इस्तेमाल से पेंट, मूर्तियां, गौमूत्र से दवाईया इत्यादि बनाने का कार्य किया जा रहा है।
बैठक के दौरान चेयरमैन ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सरकार द्वारा गौशाला के लिए दो रुपये प्रति यूनिट बिजली का रेट फिक्स किया गया है। इससे अधिक के रेट का बिल गौशाला में नहीं जाना चाहिए। बैठक के बाद चेयरमैन श्रवण कुमार गर्ग ने सोमनाथ गौशाला का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और पौधा रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर नगराधीश अमित कुमार, नगरपरिषद चेयरमैन के प्रतिनिधि डा. राज सैनी, आदित्य गर्ग, महेश, सिया राम, भीम सिंह व गउशालाओं के संचालक भी उपस्थित रहे।

गौ हत्या करते हुए रंगे हाथ पकड़े थे आरोपी , आरोपियों के मकान को ढहाया गया

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Chhattisgarh Cow Killing: छत्तीसगढ़ के नवगठित मनेंद्रगढ़-चिरमिरी भरतपुर (Manendragarh Chirmiri Bharatpur) जिले में 13 सितंबर को एक व्यक्ति और उसके पूरे परिवार को गौ हत्या (Cow Killing) करते हुए पकड़ा था. पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी खुर्शीद आलम सहित उसके परिवार के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया था. अब प्रशासन ने रेलवे (Railway) की रिपोर्ट के अनुसार आरोपियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए इसके मकान को ढहाया है. आरोपी का घर मनेंद्रगढ़ शहर के वार्ड क्रमांक 4 में है, जहां आरोपी गौ हत्या कर मांस बेचते थे.
गौ हत्या के मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों का घर जहां स्थित है, वह रेलवे की जमीन है. इस पर रेलवे को तहसीलदार ने रिपोर्ट भेजी कि उक्त मकान रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जा कर बनाया गया है. इस रिपोर्ट के अनुसार फिर तहसीलदार ने उस घर को 3 दिन में गिराने का आदेश भी दिया. रेलवे ने इस मामले की जांच की तो पाया गया कि खुर्शीद का मकान सही में रेलवे की ही जमीन पर बना हुआ है. अब तहसीलदार के आदेश पर गौ हत्या के आरोपियों का अवैध मकान तोड़ा गया. वहीं अब रेलवे की जमीन पर जितने भी अवैध कब्जा कर मकान बनाए गए हैं, उन सभी को खाली करने के लिए रेलवे विभाग जल्द ही नोटिस जारी करेगा. आज गौ हत्या के आरोपी के मकान को तोड़े जाने के वक्त रेलवे प्रशासन के साथ स्थानीय पुलिस भी सुरक्षा के मद्देनजर मौजूद रही.
इस मामले को लेकर मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी सचिन सिंह ने बताया कि रेलवे प्रशासन द्वारा पुलिस को सूचना दी गई थी. इस सूचना में पुलिस को बताया गया था कि जो अवैध रूप से मकान बनाए गए हैं उसे तोड़ने की कार्यवाही की जाएगी और पुलिस बल की मांग की गई थी. जिसके बाद उन्हें बल उपलब्ध कराया गया था और फिर विधिवत मकान तोड़ने की कार्रवाई की गई. उन्होंने आगे बताया कि पिछले दिनों गौ हत्या का मामला सामने आया था, जिसमें 4 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.
गौ हत्या करते हुए रंगे हाथ पकड़े थे आरोपी
रेलवे टीआई सुनीता मिंज ने बताया कि 13 तारीख को खुर्शीद आलम गौ हत्या करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया था. इस मामले में खुर्शीद आलम और उसका पूरा परिवार गिरफ्तार हुआ है. इस संबंध में रेलवे को तहसीलदार द्वारा एक रिपोर्ट मिली. जिसमें बताया गया था कि खुर्शीद आलम का जो मकान है वह रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जा कर बनाया गया है. उसे 3 दिन के अंदर तोड़ने का निर्देश दिया गया था.
रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जा कर बनाया था घर
जब रेलवे विभाग द्वारा जांच की गई तो पाया गया कि खुर्शीद आलम का मकान रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जा कर बनाया गया था. इसमें नियमानुसार उसके घर में नोटिस चस्पा किया गया था. आज उसके मकान को तोड़ा जा रहा है. उन्होंने आगे बताया कि रेलवे की जमीन पर कई सारे मकान बनाए हुए हैं, रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग द्वारा नोटिस दिया जाएगा. इसके बाद कार्रवाई की जाएगी.

चुप में कन्फेशन बॉक्स के पीछे की प्रेरणा पर कला निर्देशक संदीप रावड़े ने क्या कुछ कहा, यहाँ पढ़ें!

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संदीप रावडे को ये जवानी है दीवानी, पीके, बेबी और कई अन्य फिल्मों के लिए कुछ अनोखे सेट डिजाइन करने के लिए जाना जाता है। यह उनका ख़ास हुनर है जो फिल्मों में और भी अधिक जान डालता है और इसे और अधिक वास्तविक अनुभव देता है।

हाल ही में, इस कला निर्देशक ने आर बाल्की द्वारा निर्देशित फिल्म चुप के लिए एक आकर्षक सेट बनाया। फिल्म में निश्चित रूप से देखने के लिए कुछ बहुत ही आकर्षक प्रॉप्स थे, जिनमें से एक कन्फेशन बॉक्स था। इसके पीछे के आईडिया के बारे में बोलते हुए, संदीप ने समझाया, “बेसमेंट सेट पर बहुत बहस और चर्चा हुई क्योंकि पहली बार हम गुरु दत्त साहब को एक पोस्टर में दिखाने जा रहे थे। डैनी एक कलाकार हैं, तो पोस्टर के प्रति उनकी राय क्या होगी जो हमारी सबसे बड़ी चुनौती में से एक था। गुरुदत्त शाहब जिन्हें डैनी पूजते थे और हत्याओं के बाद उनके सामने सभी फूल, ट्यूलिप को समीक्षक रेटिंग के रूप में चढ़ाते थे।

इसलिए, मैंने एक सप्ताह की स्क्रिप्ट बनाने का फैसला किया, जिसे हम पढ़ सकते हैं और अपनी राय तय कर सकते हैं क्योंकि यह एक बहुत ही नाटकीय जगह की तरह दिखना चाहिए, न कि एक साधारण तहखाने की तरह, जिसमें एक बड़ा सा पोस्टर हो और फिर मुझे चर्च का कन्फेशन बॉक्स रखने का विचार आया क्योंकि वह कैथोलिक है।

और फिर हमने एक कॉन्फेशन बॉक्स रखा, जिसके ऊपर डैनी गुरुदत्त के पोस्टर को मोमबत्तियों के साथ रख सकते थे और उनकी पूजा कर सकते थे। तो, कन्फेशन बॉक्स से लेकर एक छोटी सी ओपनिंग से आने वाली रोशनी तक, इन सभी छोटी-छोटी चीजों ने इसे बहुत ही नाटकीय एहसास दिया, जैसा कि आर-बाल्की सर चाहते थे और यहां तक कि हमारे डीओपी को भी यह आईडिया पसंद आया, वे सचमुच में इस आइडिया से खुश थे और इस तरह हमने एक कॉन्फेशन बॉक्स को उसके असली रूप में बनाया जैसा कि किसी भी चर्च में देखते है, जब हम एक फादर के पास स्वीकार करने के लिए जाते हैं और उसी विचार को हम डैनी के तहखाने में ले आए, जहां वह गुरुदत्त के पोस्टर के सामने बैठकर अपनी हत्याओं के संबंध में अपने सभी अपराधों को स्वीकार करेंगे।”

चुप के सेट को डिजाइन करने के लिए संदीप रावडे की दूरदर्शिता ने वास्तव में फिल्म में उस असामान्य वजह को जोड़ा है।

‘नेशनल ज्वैलरी अवार्ड्स – 2022’ के अंतर्गत टी एस कल्याणरमन ‘अनमोल रत्न’ से सम्मानित

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नेशनल ज्वैलरी अवार्ड्स 11वें संस्करण का संचालन अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह ने किया

मुंबई। कल्याण ज्वैलर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर टी एस कल्याणरमन नेशनल ज्वैलरी अवार्ड्स-2022 के अंतर्गत ‘अनमोल रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किए गए हैं। ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी काउंसिल की ओर से आयोजित समारोह में टी एस कल्याणरमन को यह अवार्ड प्रदान किया गया। कल्याणरमन को उनकी उद्यमशीलता की भावना के लिए सम्मानित किया गया, जिसके आधार पर वे ब्रांड कल्याण ज्वैलर्स को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में कामयाब रहे हैं।
टी एस कल्याणरमन की ओर से यह सम्मान कल्याण ज्वैलर्स के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजेश कल्याणरमन ने प्राप्त किया। इस अवसर पर जीजेसी के चेयरमैन आशीष पेठे, जीजेसी के वाइस चेयरमैन सैय्यम मेहरा, जीजेसी के कन्वीनर नितिन खंडेलवाल और अन्य गणमान्य और प्रतिष्ठित लोग उपस्थित रहे। इनमें अशोक मीनावाला, हरेश सोनी, श्रीधर गुर्रम, नीलेश शोभावत और सुनील पोतदार के नाम प्रमुख हैं। ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी काउंसिल के नेशनल ज्वैलरी अवार्ड्स के इस 11वें संस्करण का संचालन अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह ने किया।
राजेश कल्याणरमन (एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, कल्याण ज्वैलर्स) ने कहा, ‘‘मैं अपने पिता की ओर से यह विशेष सम्मान प्राप्त करके बहुत खुश हूं, और इसे कल्याण ज्वैलर्स के परिवार को समर्पित करना चाहता हूं, जिसने अपने डेडिकेशन के जरिये ब्रांड को इन ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और ब्रांड की सफलता को संभव बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक क्षेत्रीय से एक वैश्विक इकाई के रूप में कंपनी का विकास विश्वास के मूल मूल्य की नींव पर था, और यह वह विश्वास है जो हमारे ग्राहकों के साथ सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। कल्याण ज्वैलर्स ने हमेशा प्रत्येक क्षेत्र में अपने निष्ठावान ग्राहकों पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसमें स्थानीय संस्कृति के लिए विशिष्ट स्थान रखा गया है। मेरा मानना है कि यह एक ऐसा दृष्टिकोण है जिसने हमें अपने घरेलू बाजारों के साथ-साथ विदेशों के बाजारों में भी सफल होने के लिए प्रेरित किया है।
प्रतिष्ठित ‘अनमोल रत्न’ पुरस्कार एक ऐसे व्यक्ति को मान्यता देता है जिसने भारतीय रत्न और आभूषण उद्योग में लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन किया है। साथ ही, यह अवार्ड व्यावसायिक समुदाय के भीतर व्यक्तियों की निरंतर उपलब्धियों को भी मान्यता प्रदान करता है।

सड़कों पर पाए जाने वाले पशुओं को मनरेगा में बनी गौ-शालाओं में रखें : स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि

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गौ-संवर्द्धन बोर्ड ने की लम्पी की जिलेवार समीक्षा
भोपाल, 29 सितंबर । मध्यप्रदेश गौ-संवर्द्धन बोर्ड कार्य परिषद के अध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने कहा कि मनरेगा के वित्तीय सहयोग से जिन गौ-शालाओं का संचालन प्रारंभ हो गया है, उनका पंजीयन करवाएँ। स्थानीय निकायों के अधिकारी सड़कों पर बेसहारा भटक रहे गौ-वंश को इन गौ-शालाओं में शिफ्ट कर देखभाल करें। ऐसे गौ-वंश के लम्पी के चपेट में आने की संभावना अधिक है।
स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने यह निर्देश गुरुवार को बोर्ड की कार्य परिषद की बैठक में दिये। उन्होंने गौ-वंश संरक्षण एवं गौ-शालाओं की वर्तमान स्थिति और लम्पी स्किन डिसीज की रोकथाम के लिये प्रदेश में गौ-शालाओं में चिकित्सकीय कार्यों की समीक्षा की। बैठक में लम्पी की जिलेवार समीक्षा करते हुए स्थानीय आवश्यकता के अनुसार रोकथाम के उपायों की रणनीति तैयार की गई।
संचालक डॉ. आरके मेहिया ने बताया कि पड़ोसी राज्यों में उद्भेद के साथ ही मध्यप्रदेश में रोकथाम के सभी उपाय शुरू कर दिये गये थे, जिससे स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में है। गौ-संवर्द्धन बोर्ड ने 17 जिलों में गौ-वंश के प्राथमिक उपचार और टीकाकरण के लिये एक-एक लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की। सदस्यों ने अशासकीय स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संचालित गौ-शालाओं में अधो-संरचनागत निर्माण कार्यों के लिये आर्थिक सहायता दिये जाने की भी अनुशंसा की।
बैठक में पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के प्रबंध संचालक डॉ. एच.एस. भदौरिया सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन, किसान-कल्याण एवं कृषि और पशुपालन विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
मुकेश / डा. मयंक

Cow Economy of India – Jharkhand – गौ-मूत्र से आप कैसे कमा सकते हैं पैसा, झारखंड की महिलाओं का देखिए स्टार्टअप

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कैरो (लोहरदगा), [शंभू प्रसाद सोनी]। Jharkhand News झारखंड के लोहरदगा में गौ-मूत्र के कमाल से किसान मालामाल हो रहे हैं। किसानों को रासायनिक खाद में होने वाले खर्च और फसलों में कीटनाशक के छिड़काव में होने वाले महंगे खर्च से मुक्ति मिल गई है। ऐसा कैरो प्रखंड की महिलाओं द्वारा गौमूत्र से तैयार किए जा रहे खाद व कीटनाशक के कारण हुआ है। काफी संख्या में किसान अपने खेतों और फसलों के लिए इसे उपयोग में ला रहे हैं।
लोहरदगा जिले के कैरो प्रखंड में महिलाएं गौमूत्र से औषधीय मटका खाद व कीटनाशक तैयार कर रही हैं। जिसे क्षेत्र के किसान उनके घर से ही खरीद लेते हैं। महिलाएं घर बैठे ही महीने में 5-6 हजार की आमदनी कर रही हैं। इस कार्य को कैरो के उतका गांव निवासी छेनवा उरांव व हीरामनी उरांव, खंडा गांव में जितनी उरांव, डूमरटोली में संगीता उरांव तथा नगड़ा धुरिया टोली में संध्या उरांव कर रही हैं।

खाद और कीटनाशक के निर्माण में क्या-क्या किया जाता है उपयोग 

औषधीय मटका खाद को बनाने में 10 लीटर गौमूत्र, एक किलोग्राम गोबर, 200 ग्राम गुड़, आधा-आधा किलोग्राम नीम, करंज व सिंदुवार का पत्ता का इस्तेमाल किया जाता है। महिलाएं बताती हैं कि इस खाद व कीटनाशक से फसल को काफी लाभ मिलता है। क्षेत्र के किसान महिलाओं के घर से औषधीय मटका खाद व कीटनाशक को खरीद कर ले जाते हैं। इस कार्य से महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है। औषधीय खाद व कीटनाशक का खेतों में इस्तेमाल करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ रही है, इसके अलावे रासायनिक खादों का उपयोग कम हो रहा है।

महिलाएं कैसे बनाती हैं कीटनाशक

कैरो प्रखंड के चार गांवों में एलजीएसएस के सहयोग से महिलाएं समूह बनाकर औषधीय खाद व कीटनाशक तैयार कर रही हैं। प्रखंड के उतका, डूमरटोली, नगड़ा व खंडा गांव में खाद बनाया जाता है। इसे बनाने की विधि काफी आसान है। दस लीटर गौमूत्र में एक किलोग्राम गोबर, दो सौ ग्राम गुड़ व आधा-आधा किलोग्राम करंज, सिंदुवार व नीम के पत्ते मिलाकर इसे तैयार किया जाता है। सभी सामग्रियों को मिलाकर इसे एक समय सीमा तक छोड़ दिया जाता है। जब कीटनाशक तैयार हो जाता है तो इसे किसान खरीद कर ले जाते हैं।

महिलाओं को महीने में 5-6 हजार की हो रही है आमदनी

कैरो प्रखंड के विभिन्न गांवों में दर्जन भर से अधिक महिलाएं औषधीय खाद व कीटनाशक तैयार कर रही हैं। जिसे किसान खरीद कर अपने खेतों में डालते हैं। इस कीटनाशक से फसलों में कीट-पतंग नहीं लगते हैं। इसे तैयार करने का काफी आसान तरीका है। कैरो के उतका, खंडा, डूमरटोली व नगड़ा गांव में दर्जन भर से अधिक महिलाएं इस कार्य से जुड़ी हुई हैं। उनका कहना है कि खाद व कीटनाशक बेचकर महीने में 5-6 हजार की आमदनी हो जाती है। हालांकि अभी बहुत किसान इससे अनभिज्ञ हैं, उन्हें जागरूक किया जा रहा है कि इसका उपयोग करें।

जैविक खेती पर भी किसानों को प्रेरित कर रही हैं महिलाएं

लोहरदगा जिला कृषि पदाधिकारी शिवपूजन राम का कहना है कि कैरो प्रखंड के किसानों को महिलाएं जैविक खेती करने के लिए भी प्रेरित करने का कार्य कर रही हैं। औषधीय मटका खाद व कीटनाशक खरीदने वाले किसानों को महिलाएं जैविक खेती करने के तरीकों को बताती हैं। जैविक खेती में धान, मकई, मडुवा सहित अन्य फसल किसान कर सकते हैं।
महिलाएं किसानों को बताती हैं कि जैविक खेती करने से फसलों को कीड़ा लगने का खतरा नहीं रहता है। साथ ही जैविक खेती की उपज को खाने से किसी भी प्रकार की शरीर में हानि नहीं होती है। जैविक खेती से फसलों का उपज भी बेहतर होता है। रासायनिक खेती से वर्तमान में कई बीमारियों की चपेट में लोग पड़ रहे हैं।
जैविक खेती पर कृषि विभाग जोर दे रही है। अगर महिलाएं इस प्रकार की कार्य कर रहीं तो काफी सराहनीय है। आने वाले भविष्य में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ने के साथ वायु प्रदूषण में भी नियंत्रण होगा। रासायनिक कीटनाशक और खाद का प्रयोग करने से बीमारियां काफी बढ़ रही हैं।

 

Edited By: Sanjay Kumar ( साभार )

बाल विवाह’ रोकने के लिए कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन ने स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं का किया सम्‍मेलन

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मुंबई। महाराष्‍ट्र एक ऐसा राज्‍य, जिसकी राजधानी मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है। ये वही मुंबई है, जिसे सपने पूरे करने वाला शहर कहा जाता है। इन सबके बाद भी महाराष्‍ट्र में बाल विवाह की कुरीति प्रचलन में है। भारत सरकार की साल 2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार महाराष्‍ट्र में 11,60,655 लोगों का बाल विवाह हुआ है। यह पूरे देश के बाल विवाह का करीब 10 प्रतिशत है। बाल विवाह के मामले में राज्‍य की स्थिति काफी खराब है। बाल विवाह के मामलों में महाराष्‍ट्र का देशभर के 29 राज्‍यों में चौथा स्‍थान है। यह दिखाता है कि राज्‍य में ‘बाल विवाह’ की समस्‍या कितनी विकराल है।
नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित कैलाश सत्‍यार्थी द्वारा स्‍थापित कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन(केएससीएफ) द्वारा यहां आयोजित ‘बाल विवाह मुक्‍त भारत’ अभियान में जुटी स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं ने महाराष्‍ट्र की इस स्थिति पर चिंता जाहिर की और सरकार से अपील की कि ‘बाल विवाह’ रोकने के लिए कानून का सख्‍ती से पालन करवाया जाए ताकि अपराधियों के मन में खौफ पैदा हो और ‘बाल विवाह’ की सामाजिक बुराई को खत्‍म किया जा सके। इस संबंध में केएससीएफ ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, राज्‍य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के साथ मिलकर मुंबई में एक सम्‍मेलन का आयोजन किया। इसमें ‘बाल विवाह’ के पूर्ण खात्‍मे को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ।
राष्‍ट्रीय परिवार स्‍वास्‍थ्‍य सर्वेक्षण-5 के ताजा आंकड़े भी साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों की तस्‍दीक करते हैं। इसके अनुसार देश में 20 से 24 साल की उम्र की 23.3 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जिनका बाल विवाह हुआ है। वहीं, राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्‍यूरो(एनसीआरबी) के अनुसार महाराष्‍ट्र में साल 2019 में 20, साल 2020 में 50 और साल 2021 में 82 बाल विवाह के मामले दर्ज किए गए। इससे साफ है कि ‘बाल विवाह’ जैसी सामाजिक बुराई के प्रति लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं और सुरक्षा एजेंसियां इसे गंभीरता से नहीं ले रही हैं। सम्‍मेलन में इस स्थिति पर चिंता जाहिर की गई। साथ ही इस अवसर पर जनता, सरकार और सुरक्षा एजेंसियों से बाल विवाह के मामलों में गंभीरता बरतने व सख्‍त से सख्‍त कदम उठाने की अपील की गई। इस बात पर सहमति जताई गई कि सख्‍त कानूनी कार्रवाई से ही बाल विवाह को रोका जा सकता है।
सम्‍मेलन में बाल विवाह रोकने के लिए कानूनी पहलुओं पर चर्चा की गई। इसमें प्रमुख रूप से बाल विवाह के मामले में अनिवार्य एफआईआर दर्ज करने, बाल विवाह को जुवेनाइल जस्टिस एक्‍ट और पॉक्‍सो एक्‍ट से जोड़ने पर विमर्श हुआ।
इसका मकसद कानून तोड़ने वालों को सख्‍त से सख्‍त सजा दिलाना है। साथ ही देश के हर जिले में बाल विवाह रोकने वाले अधिकारी(सीएमपीओ) की नियुक्ति की मांग भी उठाई गई। इन अधिकारियों को बाल विवाह रोकने के लिए उचित प्रशिक्षण देने और उन्‍हें अभिभावकों को इसके खिलाफ प्रोत्‍साहन देने की भी बात कही गई।
इस मौके पर राज्‍य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्‍यक्ष सुसीबेन शाह, महिला एवं बाल विकास की कमिश्‍नर आर. विमला, मुंबई चाइल्‍ड वेलफेयर कमेटी के अध्‍यक्ष मिलिंद बिदवई, जिला कानूनी सेवा प्राधिकार के सचिव आरडी पाटिल केएससीएफ के सलाहकार बोर्ड के सदस्‍य योगेश दुबे और कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक राकेश सेंगर समेत अनेक गणमान्‍य हस्तियां मौजूद रहीं।
राज्‍य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्‍यक्ष सुसीबेन शाह ने कहा, ‘बाल विवाह हमारे समाज में एक परंपरा के तौर पर प्रचलित है। इसको खत्‍म करने के लिए जागरूकता का प्रसार करना होगा। साथ ही अभिभावकों को भी इस बुराई के प्रति सचेत करना होगा। सरकारी एजेंसियों व नागरिक संगठनों को भी बाल विवाह रोकने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा।’ हाईकोर्ट जिला कानूनी सेवा प्राधिकार के सचिव आरडी पाटिल ने कहा, ‘बाल विवाह के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जरूरी है कि कानूनों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाई जाए।’ महिला एवं बाल विकास की कमिश्‍नर आर. विमला ने बाल विवाह पर चिंता जताते हुए कहा, ‘हम समस्‍या को जानते हैं लेकिन हमें समाधान की ओर देखना होगा। महिलाओं के संगठनों का उपयोग करना होगा, किशोरी योजना जैसी सरकारी योजनाओं का इस्‍तेमाल कर लड़कियों को सक्षम बनाना होगा। जागरूकता कार्यक्रमों में पुरुषों को भी जोड़ना होगा।’
मुंबई चाइल्‍ड वेलफेयर कमेटी के अध्‍यक्ष मिलिंद बिदवई ने कहा, ‘यह समस्‍या खासकर जनजातियों में काफी है। हमें लोगों की मानसिकता में बदलाव लाना होगा और सभी बच्‍चों को स्‍कूल भेजना होगा।’ केएससीएफ के सलाहकार बोर्ड के सदस्‍य योगेश दुबे ने कहा, ‘महाराष्‍ट्र की धरती सावित्रीबाई फुले की है, जिन्‍होंने महिलाओं और उनकी शिक्षा के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। बाल विवाह के मामले में देश में दूसरा स्‍थान होना काफी चिंताजनक है। जिस तरह सभी लोग बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के लिए एकजुट होकर काम कर रहे हैं, ठीक उसी तरह हमें भी मिलकर बाल विवाह के खिलाफ एकजुट होकर काम करना होगा।’
बाल विवाह से बच्‍चों के खराब होते जीवन पर चिंता व्‍यक्‍त करते हुए कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक राकेश सेंगर ने कहा,  ‘बाल विवाह सामाजिक बुराई है और इसे बच्‍चों के प्रति सबसे गंभीर अपराध के रूप में ही लिया जाना चाहिए। बाल विवाह बच्‍चों के शारीरिक व मानसिक विकास को खत्‍म कर देता है। इस सामाजिक बुराई को रोकने के लिए हम सभी को एकजुट होकर प्रयास करना होगा।’ उन्‍होंने कहा, ‘उनका संगठन कैलाश सत्‍यार्थी के नेतृत्‍व में सरकार, सुरक्षा एजेंसियों एवं नागरिक संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि राजस्‍थान को बाल विवाह मुक्‍त किया जा सके।’