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फिल्म “अनटोल्ड ट्रुथ ऑफ सुभाष चंद्र बोस” के निर्माण की औपचारिक घोषणा

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मुंबई। आधुनिक भारत के महानतम सपूत, आज़ाद हिंद फौज के संस्थापक और अदम्य साहस के प्रतीक नेताजी सुभाष चंद्र बोस के 129वें जन्मोत्सव, दिनांक 23 जनवरी 2026 के पावन अवसर पर, प्रख्यात लेखक, वरिष्ठ पत्रकार एवं निर्माता मानसिंह दीप अत्यंत गर्व और राष्ट्रभाव के साथ अपनी बहुप्रतीक्षित ऐतिहासिक फिल्म “अनटोल्ड ट्रुथ ऑफ सुभाष चंद्र बोस” के निर्माण की औपचारिक घोषणा कर रहे हैं।

यह फिल्म केवल एक सिनेमाई प्रस्तुति नहीं, बल्कि इतिहास के उन पन्नों को उजागर करने का साहसिक प्रयास है, जिन्हें दशकों तक जानबूझकर धुंध में रखा गया। गहन शोध, अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज़ों और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर निर्मित यह फिल्म वर्तमान वैश्विक भू-राजनीति की जड़ों को हिला देने वाले तथ्यों को सामने लाने का दावा करती है।

मान सिंह दीप द्वारा प्रस्तुत इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कल्याणी सिंह एवं वेदांत सिंह कर रहे हैं, जबकि इसका निर्देशन जाने-माने फिल्मकार अशोक त्यागी करेंगे। निर्माता और निर्देशक की यह फ़िल्म स्थापित ऐतिहासिक कथानकों को चुनौती देते हुए यह सिद्ध करने का प्रयास करेगी कि भारत की स्वतंत्रता की वास्तविक लड़ाई और निर्णायक भूमिका नेताजी सुभाष चंद्र बोस की थी, न कि केवल अहिंसा के एकमात्र विमर्श की।

फिल्म में यह भी दर्शाया जाएगा कि किस प्रकार द्वितीय विश्व युद्ध के विजेता देशों की सत्ता-राजनीति नेताजी के विचारों से भयभीत थी और कैसे एक सुनियोजित साजिश के तहत उनकी नृशंस हत्या की गई, जिसे आज तक रहस्य और दुर्घटना के आवरण में छुपाया गया।

“अनटोल्ड ट्रुथ ऑफ सुभाष चंद्र बोस” देशवासियों को न केवल इतिहास का एक नया दृष्टिकोण देगी, बल्कि राष्ट्रवाद, बलिदान और सच्ची स्वतंत्रता के अर्थ पर भी पुनर्विचार करने को विवश करेगी। यह फिल्म आने वाली पीढ़ियों के लिए नेताजी के विचारों, संघर्ष और बलिदान को नई चेतना के साथ प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम बनेगी।

टीपीएस म्यूजिक पर एस. के. तिवारी और बिग बॉस फेम हेमा शर्मा का हिन्दी एल्बम “वक़्त” शीघ्र होगी रिलीज

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मुंबई। अभिनेता, निर्माता और निर्देशक एस. के. तिवारी टीपीएस म्युज़िक यूट्यूब चैनल पर एक खूबसूरत हिन्दी म्युज़िक एल्बम वक़्त लेकर आ रहे हैं. इस म्युज़िक वीडियो में एस. के. तिवारी हीरो हैं और बिग बॉस फेम हेमा शर्मा हीरोइन हैं. दोनों ने गाने में बहुत बढ़िया अभिनय किया है.

इस गाने की सबसे खास बात यह है कि इस मेलोडी भरे सांग की शूटिंग मुम्बई में कर ली गयी है और अब जल्द ही ये गीत दर्शकों के रुबरु होगा.

इसके गायक और संगीतकार सुधीर त्रिवेदी और गीतकार संगीता त्रिवेदी हैं. वीडियो के कोरियोग्राफर डीसी चतुर्वेदी हैं. एस के तिवारी के इस नए प्रोजेक्ट का शानदार पोस्टर आउट कर दिया गया है.

एस. के. तिवारी का कहना है कि ये एक हिन्दी म्युज़िक एल्बम है जिसमें वक़्त की अहमियत दिखाई गई है. इसके बोल कुछ इस तरह हैं वक्त इतना जालिम होता है कि पहले बचपन फिर जवानी लेके जाता है. इस गीत वक़्त से हर कोई रिलेट कर पाएगा क्योंकि हर इंसान वक्त से पीड़ित भी है और वक्त से मरहम भी मिला है. ये दुनिया क्या पूरी कायनात वक्त के अनुसार चलती है और वक्त ही राजा भी है रंक भी.”

इसके संगीतकार सुधीर त्रिवेदी ने बड़ी शिद्दत से इसे गाया है जो दर्शकों को अवश्य पसन्द आने वाला है. एस के तिवारी एवं हेमा शर्मा ने इसमे अपना जानदार अभिनय का जादू दिखाया है.

तिवारी प्रोडक्शन प्रेजेंट एल्बम “वक्त” टीपीएस म्युज़िक पर रिलीज होने जा रहा है. ये एक ऐसा यूट्यूब चैनल है जिस पर रिलीज होने वाले सभी गीत दर्शकों के दिलों में उतर जाने वाले होते हैं. ये गीत भी मन और आत्मा को सुकून पहुंचाने वाला एल्बम है.

एस. के. तिवारी यूट्यूब चैनल TPS म्यूजिक के अंतर्गत एक से बढ़कर एक गाने रिलीज करते रहते हैं. तिवारी प्रोडक्शंस के बैनर तले एस. के. तिवारी अपने निर्देशन में ऐसे ऐसे गीत प्रस्तुत करते आ रहे हैं जिन्हें ऑडियंस का खूब प्यार मिलता है. सबसे बड़ी बात यह है कि वह हर शैली के गाने दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत करते हैं. ये गीत भी उन्होंने प्रोड्यूस और डायरेक्ट किया है.

वायरल भाभी के नाम से मशहूर हेमा शर्मा इस गीत को लेकर बहुत उत्साहित हैं. उनका कहना है कि जब उन्होंने वक़्त गीत सुना तो इसका हिस्सा बनने को तैयार हो गई. एस. के. तिवारी ने इसका वीडियो बड़ी खूबसूरती से डायरेक्ट किया है और इसमे उन्होंने बखूबी ऐक्ट भी किया है. दर्शकों के लिए ये म्युज़िक वीडियो एक बेहतरीन ट्रीट होगा.

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि तिवारी प्रॉडक्शन के अंतर्गत होने वाली शूटिंग बड़ी शुद्धता से की जाती है. उनके सेट पर धूम्रपान, मांसाहारी खाना या अल्कोहल की बिल्कुल अनुमति नहीं होती. पिछले कई वर्षों से तिवारी प्रॉडक्शन अपने काम में बड़ी शिद्दत से लगा हुआ है बिना परिणाम की परवाह के.

पर्दे पर दिखने वाली दुनिया और पर्दे के पीछे की सच्चाई बिल्कुल अलग होती है : पूजा मिश्रा 

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मुंबई। अभिनय की दुनिया में निरंतर आगे बढ़ रहीं अभिनेत्री पूजा मिश्रा इन दिनों अपने फिल्मी करियर को लेकर काफ़ी उत्साहित नज़र आ रही हैं। पूजा मिश्रा की जल्द ही दो हिंदी फिल्में रिलीज़ होने वाली हैं, वहीं उनकी एक फिल्म की शूटिंग फिलहाल जारी है और एक अन्य फिल्म प्रोजेक्ट को लेकर बातचीत चल रही है। पूजा मानती हैं कि यह समय उनके लिए सीखने और खुद को साबित करने का है, इसलिए वह हर किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाने के लिए बेहद एक्साइटेड हैं।

खास बात यह है कि पूजा मिश्रा एक अपकमिंग फिल्म में पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाने जा रही हैं। इस दमदार किरदार को लेकर उनमें खास जोश देखने को मिल रहा है। अब तक उन्होंने ज़्यादातर सकारात्मक, सशक्त और प्रेरणादायी रोल किए हैं, जो समाज को अच्छा संदेश देते हैं। उनका मानना है कि ऐसे किरदार दर्शकों के दिलों तक सीधे पहुँचते हैं और कलाकार की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।

पूजा मिश्रा ने फिल्मों के साथ-साथ कई विज्ञापन और प्रिंट शूट्स में भी काम किया है। उन्होंने प्रसिद्ध बिंदी ब्रांड ‘सुरुचि’ का प्रचार किया, जिससे उनकी लोकप्रियता और बढ़ी। इसके अलावा दिल्ली के फैशन शो में उन्होंने मिसेज़ इंडिया और मिस इंडिया का ताज जीतकर यह साबित कर दिया कि उनकी प्रतिभा अभिनय तक ही सीमित नहीं है।

भाषाओं की विविधता में भी पूजा मिश्रा का कोई मुकाबला नहीं। उन्होंने हिंदी, राजस्थानी, हरियाणवी, पंजाबी जैसी कई भाषाओं के म्यूज़िक वीडियो सॉन्ग्स में अभिनय किया है। साथ ही उन्होंने मशहूर भोजपुरी अभिनेत्री आम्रपाली दुबे के साथ एक एंकरिंग शो भी किया, जिसमें उनकी सहजता और आत्मविश्वास को खूब सराहा गया।

अगर उनकी सुंदरता की बात करें, तो पूजा मिश्रा की खूबसूरती सिर्फ़ चेहरे तक सीमित नहीं है। उनकी सादगी, सौम्य मुस्कान, प्रभावशाली आँखें और आत्मविश्वास से भरा व्यक्तित्व उन्हें खास बनाता है। कैमरे के सामने उनकी मौजूदगी स्वाभाविक और आकर्षक लगती है, जो हर किरदार में जान डाल देती है। उनकी सुंदरता में एक अलग-सी गरिमा और सहजता है, जो दर्शकों को लंबे समय तक याद रहती है।

पूजा मिश्रा के पसंदीदा कलाकारों में अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, ऋतिक रोशन और अभिनेत्री कैटरीना कैफ शामिल हैं। वहीं वे करण जौहर, अनीस बज़्मी, संजय लीला भंसाली और ज़फर अली जैसे नामचीन निर्देशकों की फिल्मों में काम करने की इच्छा रखती हैं। अभिनय के प्रति उनका सम्मान इस बात से भी झलकता है कि वह दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी के सीता-गीता और बसंती जैसे बबली और सशक्त किरदारों को रीक्रिएट करना चाहती हैं।

अपने फिल्मी सफर के बारे में पूजा मिश्रा बताती हैं कि लॉकडाउन के समय उनकी मुँहबोली बहन के बेटे ने उनके प्रतिभाशाली व्यक्तित्व को देखकर उन्हें फिल्मों में करियर बनाने की सलाह दी। पूजा ने इस सलाह को गंभीरता से लिया, पहले मॉडलिंग की, फिर अभिनय की ट्रेनिंग ली और इसके बाद अभिनय की दुनिया में कदम रखा। मेहनत और लगन का ही नतीजा है कि आज उन्हें लगातार काम के अवसर मिल रहे हैं।

पूजा मिश्रा एक बहुमुखी प्रतिभा की धनी कलाकार हैं। वह स्वाभिमानी, बबली, बेबाक और खुशमिज़ाज स्वभाव की इंसान हैं। उनका कहना है कि अगर कोई अभिनय की दुनिया में आना चाहता है, तो उसे पहले खुद को लगनशील, धैर्यवान, मेहनती और सीखने की ललक वाला बनाना चाहिए।
वह साफ़ शब्दों में कहती हैं, “पर्दे पर दिखने वाली दुनिया और पर्दे के पीछे की सच्चाई बिल्कुल अलग होती है। अगर आपने इस इंडस्ट्री में कदम रख लिया है, तो हार मत मानिए, लगातार कोशिश करते रहिए।”

पूजा मिश्रा का यह आत्मविश्वास, उनकी सकारात्मक सोच और उनकी मेहनत उन्हें आज की उभरती अभिनेत्रियों में एक प्रेरणादायी और भरोसेमंद नाम बनाता है। आने वाले समय में दर्शकों को उनसे और भी दमदार किरदारों की उम्मीद है।

नकारात्मक और अपराध कंटेंट की भरमार के खिलाफ गो स्पिरिचुअल का डिजिटल अभियान लॉन्च

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मुंबई: डिजिटल और पारंपरिक मीडिया में लगातार बढ़ती अपराध खबरों, सनसनीखेज हेडलाइंस और नकारात्मक समाचारों और कंटेंट की भीड़ के बीच, गो स्पिरिचुअल ने एक सकारात्मक और सुकून देने वाला डिजिटल अभियान शुरू किया है। यह अभियान लोगों के मन में शांति, सकारात्मकता और भावनात्मक संतुलन लौटाने का प्रयास है।
इस अभियान का शीर्षक है –
“दिन भर अपराध, नकारात्मक और बुरी खबरों और कंटेंट से परेशान? गो स्पिरिचुअल न्यूज़ मैगज़ीन ऐप पर पाएं सकारात्मक, प्रेरणादायक, वेलनेस और आध्यात्मिक कंटेंट”।
अभियान यह बताता है कि लगातार नकारात्मक खबरें देखने से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और इससे बाहर निकलने का रास्ता आध्यात्मिक और सकारात्मक कंटेंट है।

शोध और वास्तविक अनुभव बताते हैं कि अपराध और नकारात्मक खबरों का लगातार सेवन चिंता, डर और मानसिक थकान बढ़ाता है। इससे रोज़मर्रा की जिंदगी में तनाव आता है, रिश्तों पर असर पड़ता है और व्यवहार में चिड़चिड़ापन या दूरी पैदा हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह अभियान लोगों को सकारात्मक और सुकून देने वाले कंटेंट की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

अभियान के तहत एक आकर्षक वीडियो जारी किया गया है, जिसमें शांत दृश्य, सॉफ्ट म्यूज़िक और प्रभावशाली टेक्स्ट के ज़रिये नकारात्मकता और आध्यात्मिक शांति के बीच का अंतर दिखाया गया है।

गो स्पिरिचुअल न्यूज़ मैगज़ीन ऐप, जो अब गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है, यूज़र्स को एक आसान और सहज मोबाइल अनुभव देता है। यह ऐप सकारात्मक और प्रेरणादायक कंटेंट से भरपूर है, जो मन की शांति और संपूर्ण विकास की दिशा में मार्गदर्शन करता है।

यह ऐप एक डिजिटल आध्यात्मिक आश्रय की तरह है, जहां योग और ध्यान के आसान स्टेप-बाय-स्टेप गाइड, वेलनेस और माइंडफुलनेस पर विशेषज्ञों की राय, आयुर्वेद और ऑर्गेनिक लाइफस्टाइल से जुड़ी जानकारी, सीनियर सिटिज़न्स के लिए विशेष स्वास्थ्य टिप्स उपलब्ध हैं। इसके साथ ही पवित्र तीर्थ स्थलों की यात्रा जानकारी, मंदिरों का इतिहास, त्योहारों की कवरेज, प्रेरणादायक कहानियां, आध्यात्मिक गुरुओं के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू, फीचर आर्टिकल्स, किताबों की सिफारिशें, हेल्दी और पारंपरिक भारतीय व्यंजन, तथा आध्यात्मिक आयोजनों और सामुदायिक गतिविधियों की जानकारी भी मिलती है।

गो स्पिरिचुअल एक समर्पित आध्यात्मिक और वेलनेस संगठन है, जो आध्यात्मिक जागरूकता, समाजसेवा, मानसिक स्वास्थ्य, समग्र स्वास्थ्य, आध्यात्मिक पर्यटन, मीडिया, आयोजनों और ऑर्गेनिक जीवनशैली को बढ़ावा देता है। हाल ही में इसने अपने संस्था की सफलता के बाद गो स्पिरिचुअल न्यूज़ मैगज़ीन ऐप लॉन्च किया है। साथ ही, यह जल्द ही गो स्पिरिचुअल ओटीटी लॉन्च करने की तैयारी में है, जो पूरी तरह सकारात्मक, प्रेरणादायक और आध्यात्मिक कंटेंट पर आधारित होगा।

अप्रोच एंटरटेनमेंट एंड कम्युनिकेशंस ग्रुप की आध्यात्मिक और सामाजिक इकाई के रूप में, गो स्पिरिचुअल समाज की भावनात्मक और आध्यात्मिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह ग्रुप सोनू त्यागी द्वारा स्थापित और संचालित है और मुंबई, दिल्ली, गुरुग्राम, गोवा, देहरादून, चंडीगढ़, कोलकाता, हैदराबाद और जालंधर में सक्रिय है।

सोनू त्यागी एक पुरस्कार विजेता लेखक, निर्देशक और निर्माता हैं। उन्हें विज्ञापन प्रबंधन, पत्रकारिता और फिल्ममेकिंग में पेशेवर योग्यता हासिल है। उन्होंने भारत की प्रमुख विज्ञापन एजेंसियों और मीडिया हाउसेज़ में काम किया है। वे चर्चित आध्यात्मिक वेब सीरीज़ ‘टू ग्रेट मास्टर्स’ के को-प्रोड्यूसर हैं, अंतरराष्ट्रीय फिल्म ‘लिबरेशन’ का निर्माण कर रहे हैं और आने वाली सटायर कॉमेडी फिल्म ‘कैंप डीसेंट’ के क्रिएटिव प्रोड्यूसर हैं।

अप्रोच एंटरटेनमेंट एंड कम्युनिकेशंस ग्रुप को बिज़ इंडिया 2010 अवॉर्ड, वर्ल्ड मार्केटिंग ऑर्गेनाइज़ेशन का सर्विस एक्सीलेंस अवॉर्ड और बिज़नेस टाइकून अवॉर्ड्स में पीआर कंपनी ऑफ द ईयर जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं।

इस अभियान पर अपने विचार साझा करते हुए गो स्पिरिचुअल और अप्रोच एंटरटेनमेंट के संस्थापक सोनू त्यागी ने कहा,
“आज की दुनिया में नकारात्मक, आपराधिक खबरे और कंटेंट मानसिक शांति और सामाजिक संतुलन को नुकसान पहुंचा रही है। ऐसे में हमें ऐसा कंटेंट चुनने की ज़रूरत है जो हमें सुकून दे और आगे बढ़ाए। यह अभियान तनाव भरी खबरों से बाहर निकलकर भारत की प्राचीन आध्यात्मिक विरासत से जुड़ने का एक निमंत्रण है। गो स्पिरिचुअल न्यूज़ मैगज़ीन ऐप के ज़रिये हम सकारात्मकता और संतुलन को सीधे लोगों तक पहुंचा रहे हैं।”

आज ही सकारात्मकता और आंतरिक शांति की इस मुहिम से जुड़ें।
गो स्पिरिचुअल न्यूज़ मैगज़ीन ऐप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें:
https://play.google.com/store/apps/details?id=com.spiritual.gospiritual&hl=en

गाय के प्रति ऐसा प्रेम कि ढोल-थाली के साथ निकाली अंतिम यात्रा

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पाली के बिजनेसमैन जगदीश रावल ने 15 साल तक अपनी प्रिय गाय ‘काजल’ की सेवा की. उसकी मृत्यु पर उन्होंने शोक संदेश पत्रिका छपवाई और फार्म हाउस में ढोल-थाली के साथ अंतिम यात्रा निकाली. रावल 7 बीघा जमीन पर 12 बेसहारा गायों की देखभाल करते हैं और सभी गायों के नाम परिवार के सदस्यों पर रखते हैं. शोक सभा और प्रसादी में गांव के लोग शामिल हुए और गायों के लिए लापसी बनाई गई. उनका फार्म पूरी तरह गोवंश की सेवा के लिए समर्पित है.

पाली. राजस्थान के पाली जिले में एक ऐसा शोक संदेश सामने आया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया. यह शोक संदेश किसी इंसान का नहीं, बल्कि एक गौ माता का था. एक बिजनेसमैन ने इसे अपने परिवार के सदस्य की तरह 15 साल तक सेवा की और फार्म पर मृत्यु के बाद शोक सभा तथा प्रसादी का आयोजन भी किया. यह अनोखा शोक संदेश पत्रिका से लेकर पूरे राजस्थान ही नहीं, देश भर में चर्चा का केंद्र बन चुका है. हम बात कर रहे हैं पाली के बिजनेसमैन और गोसेवक जगदीश रावल की, जिन्होंने 15 साल तक एक गाय की सेवा की.

16 दिसंबर को उनकी सबसे प्रिय गाय ‘काजल’ की मौत हो गई. इसके लिए उन्होंने शोक संदेश की पत्रिका छपवाई. इतना ही नहीं, 26 दिसंबर को अपने फार्म हाउस पर शोक सभा और प्रसादी का आयोजन भी रखा, जिसके लिए गांव के लोगों को निमंत्रण भेजा गया. खास बात यह है कि उन्होंने अपनी बाकी गायों के नाम पत्नी, बेटी, बहू और भाइयों की पत्नियों के नाम पर रखे हैं.  जगदीश कुमार का गुजरात के सिलवासा में इलेक्ट्रिक सामान का बिजनेस है. जगदीश ने बताया कि 15 साल पहले आहोर में रहने वाले उनके भांजे राकेश रावल ने गोतस्करी के लिए ले जाए जा रही गायों में से एक गाय पकड़ी थी. इसमें से एक गाय उन्हें गिफ्ट की गई, जिसका नाम उन्होंने काजल रखा. जगदीश रावल ने बताया कि काजल के आने के बाद उनके मन में गोसेवा का भाव जागृत हुआ. तखतगढ़ गांव के पास बलाना में उनका 7 बीघा का फार्म हाउस है. इसी फार्म हाउस में उन्होंने काजल को रखा और उसकी सेवा शुरू की.

गोवर्धन इको विलेज इस्कॉन में मनाया गया नेटिव फूड डे, पालघर थाली हुआ लॉन्च

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पालघर। इस्कॉन के गोवर्धन इकोविलेज (GEV), पालघर ने अपनी ‘मेरी माटी मेरी थाली’ कैंपेन के तहत नेटिव फूड मैटर्स पहल के हिस्से के रूप में नेटिव फूड डे मनाया, जिसमें पालघर थाली का अनावरण किया गया। यह एक खास खाने का अनुभव है जो इस क्षेत्र की जैव विविधता, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक भोजन ज्ञान पर आधारित है।

इस कार्यक्रम में गोवर्धन इकोविलेज के संस्थापक HH राधानाथ स्वामी उपस्थित थे। जाने-माने वैश्विक लेखक, वक्ता और पर्पस कोच जय शेट्टी, अपनी पत्नी राधी देवलोकिया शेट्टी के साथ, जो एक जानी-मानी प्लांट-बेस्ड पाक विशेषज्ञ और वेलनेस एडवोकेट हैं, इस पहल के समर्थक के रूप में कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

अपनी किताबों, पॉडकास्ट और माइंडफुलनेस और वेलबीइंग पर वैश्विक काम और अरबों व्यूज़ वाले बड़े सोशल मीडिया फॉलोअर्स के लिए व्यापक रूप से पहचाने जाने वाले जय शेट्टी सचेत और स्थायी जीवन शैली के प्रबल समर्थक रहे हैं। राधी शेट्टी ने अपने पाक कला और वेलनेस प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगातार प्राकृतिक, पारंपरिक और समग्र भोजन प्रथाओं को बढ़ावा दिया है जो नेटिव फूड मैटर्स के विज़न के साथ मेल खाती हैं।
इस्कॉन के गोवर्धन इकोविलेज के निदेशक और नेटिव फूड मैटर्स पहल के रणनीतिक प्रमुख, गौरांग दास ने कहा, “जय शेट्टी और राधी शेट्टी अपने परोपकारी योगदान के माध्यम से ‘नेटिव फूड मैटर्स’ पहल का उदारतापूर्वक समर्थन कर रहे हैं और इससे इस पहल को पहचान मिली है और भारत की मूल भोजन विरासत से फिर से जुड़ने की प्रासंगिकता को रेखांकित किया गया है।

सह्याद्री की तलहटी में स्थित, गोवर्धन इकोविलेज पारिस्थितिक जीवन के एक मान्यता प्राप्त मॉडल के रूप में उभरा है, जो सौर ऊर्जा संचालित बुनियादी ढांचे, वर्षा जल संचयन प्रणालियों, बायोगैस इकाइयों और एक दुर्लभ बीज बैंक द्वारा समर्थित है। नेटिव फूड मैटर्स के माध्यम से, GEV (गोवर्धन इको विलेज) भारत के पारंपरिक भोजन ज्ञान को पुनर्जीवित करने और एक सचेत खाद्य प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है जो स्वस्थ, सांस्कृतिक रूप से निहित और पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार है।

वैश्विक खाद्य प्रणालियों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। औद्योगिक खाद्य प्रथाओं ने स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र को कमजोर किया है, स्वदेशी खाद्य संस्कृतियों को विस्थापित किया है और दुनिया भर में पोषण संबंधी चुनौतियों को तेज किया है। 733 मिलियन लोगों को वैश्विक स्तर पर भूख का सामना करना पड़ रहा है (FAO, 2023) और कृषि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 26 प्रतिशत का योगदान करती है, यह बढ़ती मान्यता है कि स्वदेशी भोजन ज्ञान लचीले, पौधे-आधारित पोषण और स्थायी खाद्य प्रणालियों की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है। इन चुनौतियों का जवाब देते हुए, गोवर्धन इकोविलेज प्रोफेसर रंजन कुमार घोष और उनकी टीम के नेतृत्व में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद और प्रोफेसर अतुल गोखले और उनकी टीम के नेतृत्व में सिम्बायोसिस स्कूल ऑफ कलिनरी आर्ट्स एंड न्यूट्रिशनल साइंसेज जैसे नॉलेज पार्टनर्स के साथ मिलकर एक समग्र दृष्टिकोण विकसित करने पर काम कर रहा है, जो पाक विरासत, सामुदायिक भागीदारी और नीति स्तर की सोच को एकीकृत करता है।

गोवर्धन इकोविलेज के निदेशक गौरंगा दास ने कहा, “भोजन सिर्फ पोषण नहीं है। यह पहचान, पारिस्थितिकी, समानता और चेतना का प्रतिनिधित्व करता है। नेटिव फूड मैटर्स का लक्ष्य इस एकीकृत समझ को सार्वजनिक जीवन में कार्रवाई में बदलना है।”

इस कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण पालघर थाली रहा, जिसे स्वदेशी सामग्री, पारंपरिक खाना पकाने की तकनीकों और क्षेत्र के मौसमी भोजन पैटर्न पर लगभग एक साल के शोध के बाद विकसित किया गया था। जय और राधी शेट्टी, अन्य अतिथियों के साथ, थाली का अनुभव करने वाले पहले लोगों में से थे, जो स्थानीय, पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन परंपराओं पर अभियान को दर्शाता है।

पालघर थाली बड़े ‘मेरी माटी मेरी थाली’ आंदोलन का हिस्सा है, जो राज्यों में स्थानीय फसलों और व्यंजनों को फिर से खोजकर भारत की क्षेत्रीय खाद्य विविधता का उत्सव मनाता है। पालघर पायलट में पोषण उत्सव, सामुदायिक आउटरीच और जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं, खासकर आदिवासी और ग्रामीण समुदायों की महिलाओं और बच्चों को शामिल किया गया है।

इस कार्यक्रम में पालघर कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया, जिसमें जिले की पाक विरासत, पारंपरिक सामग्री और व्यंजनों का दस्तावेजीकरण किया गया है। गोवर्धन इकोविलेज आने वाले आगंतुक हर सप्ताहांत गोविंदा रेस्टोरेंट में मदन मोहन थाली के माध्यम से क्षेत्रीय व्यंजनों का अनुभव कर सकते हैं, जो पारंपरिक भारतीय भोजन के स्वास्थ्य और पारिस्थितिक मूल्य को उजागर करने वाली एक विशेष पेशकश है।

नेटिव फूड मैटर्स एक साल से अधिक समय से सक्रिय है और अब पूरे भारत में अपने शोध और कार्यान्वयन प्रयासों का विस्तार करने की तैयारी कर रहा है, जिसका दीर्घकालिक लक्ष्य सचेत भोजन को एक मुख्यधारा और महत्वाकांक्षी जीवन शैली बनाना है।

सद्भावना से ही होगा विश्व कल्याण, हृदय-परिवर्तन से राष्ट्र निर्माण -सतपाल जी महाराज

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सिलीगुड़ी 31 दिसंबर : मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में स्थानीय सालूगाड़ा के निकट मझुआ ग्राम में आयोजित दो दिवसीय सद्भावना सम्मेलन के प्रथम दिन मानव धर्म के प्रणेता सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज ने देश–विदेश से पधारे संत–महात्माओं, भक्तों एवं श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि संसार को बदलने से पहले स्वयं के भीतर परिवर्तन आवश्यक है। व्यक्ति के हृदय में आया परिवर्तन ही समाज, राष्ट्र और अंततः विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।

इस अवसर पर सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज ने नववर्ष 2026 के उपलक्ष्य में देश-विदेश में रह रहे समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नया वर्ष मानवता, शांति, सद्भावना और नैतिक मूल्यों के नव जागरण का वर्ष बने। उन्होंने कामना की कि नववर्ष प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि और आत्मिक उन्नति लेकर आए।
श्री हंसी जी महाराज की 125वीं जयंती के पावन अवसर पर उनके आध्यात्मिक, सामाजिक एवं मानव कल्याणकारी विचारों का स्मरण करते हुए श्री गुरुमहाराज जी ने कहा कि संतों की ज्ञान केवल सुनने की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन में उतारने की साधना हैं। इन्हीं मूल्यों को आत्मसात करना गुरुओं के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

श्री सतपाल जी महाराज ने ऐतिहासिक जन-जागरण पदयात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि बागडोगरा से प्रारंभ हुई 14 दिवसीय यह पदयात्रा लगभग 250 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करते हुए दार्जिलिंग के मार्ग से गंगटोक पहुंची थी। इस पदयात्रा का उद्देश्य सामाजिक चेतना, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता का विस्तार था। उन्होंने विशेष रूप से नेपाली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने के लिए किए गए इस जन-जागरण अभियान को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और इसमें सहभागी सभी साथियों के योगदान की सराहना की।

सम्मेलन के दौरान मानव सेवा दल की परेड की प्रशंसा करते हुए श्री गुरुमहाराज जी ने कहा कि मानव सेवा दल के सदस्यों एवं सेविकाओं ने अनुशासन, समर्पण और एकता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया। साथ ही विभिन्न तहसीलों से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत झांकी, नृत्य, बैंड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को उन्होंने भावपूर्ण साधना का स्वरूप बताया।
देश और समाज की वर्तमान परिस्थितियों पर विचार व्यक्त करते हुए श्री गुरुमहाराज जी ने कहा कि नववर्ष का संदेश “नव जीवन, नव उत्कर्ष” होना चाहिए। राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए आंतरिक आत्मिक शक्ति का जागरण अनिवार्य है। गीता के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जैसे अर्जुन मोहग्रस्त हुआ, वैसे ही आज समाज भी दुविधा में है, और ऐसे समय में आध्यात्मिक ज्ञान ही कर्तव्य पथ का मार्गदर्शन करता है। जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब अधर्म के नाश हेतु शक्ति का उदय होता है।

उन्होंने कहा कि परिवार से लेकर समाज, नगर, जिला और राष्ट्र—सभी स्तरों पर सद्भावना का विस्तार आवश्यक है। सद्भावना से ही विश्व कल्याण संभव है। इसी भाव के साथ उन्होंने संदेश दिया— “धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो और प्राणी मात्र में सद्भावना हो।”

उल्लेखनीय है कि अपराह्न सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज ने मानव सेवा दल की परेड का निरीक्षण किया। इसके उपरांत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सम्मेलन की भव्यता को और अधिक गरिमा प्रदान की।

सद्भावना सम्मेलन का प्रथम दिन आध्यात्मिक चेतना, राष्ट्रीय एकता और मानव मूल्यों के सशक्त संदेश के साथ संपन्न हुआ।

सिलीगुड़ी पहुंचे सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज

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भव्य स्वागत से गूंज उठा मानव धर्म आश्रम, आज से दो दिवसीय सद्भावना सम्मेलन
देश–विदेश से उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, कड़ाके की ठंड भी नहीं रोक सकी आस्था
सिलीगुड़ी (हिम बहादुर सोनार), 30 दिसंबर : मानव एकता, शांति, सद्भाव और चरित्र निर्माण का संदेश लेकर मानव धर्म के प्रणेता, पूज्य सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज मंगलवार देर शाम सिलीगुड़ी पहुंचे। मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से आयोजित बहुप्रतीक्षित दो दिवसीय सद्भावना सम्मेलन में भाग लेने के लिए उनके आगमन पर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। 

बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचने के बाद पूज्य सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज सीधे सालूगाड़ा के मझुआ ग्राम स्थित मानव धर्म आश्रम पहुंचे। आश्रम परिसर में मानव सेवा दल के अनुशासित कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। परेड निरीक्षण के पश्चात सलामी ग्रहण कर सद्गुरुदेव दिव्य आवास की ओर प्रस्थान कर गए।

आश्रम पहुंचते ही वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो उठा। विभिन्न सांस्कृतिक टोलियों, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और आकर्षक बैंड की प्रस्तुतियों के बीच श्री महाराज जी का भव्य स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच श्रद्धालु “सद्गुरुदेव की जय” के गगनभेदी जयकारे लगाते नजर आए। श्रद्धालुओं की अपार खुशी और श्रद्धा देखते ही बन रही थी।
मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित यह सद्भावना सम्मेलन 31 दिसंबर और 1 जनवरी को आयोजित किया जाएगा, जिसमें पूज्य सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज हजारों श्रद्धालुओं को अपने दिव्य आशीर्वचनों से कृतार्थ करेंगे। सम्मेलन को लेकर विशाल, सुसज्जित एवं भव्य पंडाल का निर्माण किया गया है, जहां एक साथ हजारों श्रद्धालु बैठकर सत्संग का लाभ ले सकेंगे।

कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। उत्तर बंगाल के विभिन्न जिलों के अलावा सिक्किम, बिहार से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। वहीं पड़ोसी देश नेपाल और भूटान सहित अन्य देशों से भी श्रद्धालुओं का आगमन जारी है। आश्रम परिसर श्रद्धालुओं से पूरी तरह गुलजार हो चुका है।

व्यवस्थाओं को लेकर मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए हैं। स्वच्छता, सुरक्षा, आवागमन, पेयजल एवं भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है। जगह-जगह स्वयंसेवकों की टीमें तैनात हैं, जिन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। समिति के अनुसार श्रद्धालुओं की सुविधा और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
मानव धर्म आश्रम परिसर में इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा, सेवा और सद्भाव का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। श्रद्धालुओं को विश्वास है कि सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज के प्रवचन समाज में प्रेम, भाईचारे और मानवता के भाव को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।

“मेरे कृष्ण” नाट्य में श्रीकृष्ण की भूमिका में सौरभ राज जैन

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मुंबई। “मेरे कृष्ण” — श्रीकृष्ण की दिव्य यात्रा को दर्शाने वाला एक भव्य रंगमंचीय नाट्य प्रस्तुति दी जाएगी।
इस नाटक में सौरभ राज जैन श्रीकृष्ण की भूमिका में, पूजा बी. शर्मा राधा एवं महामाया के रूप में, तथा अर्पित रांका दुर्योधन एवं कंस की भूमिकाओं में दिखाई देंगे।
नाटक का निर्देशन राजीव सिंह दिनकर ने किया है। इसका निर्माण विवेक गुप्ता, राजीव सिंह दिनकर एवं विष्णु पाटिल द्वारा किया गया है। नाटक के लेखक डॉ. नरेश कात्यायन हैं तथा इसका मौलिक संगीत उद्भव ओझा द्वारा रचित है।
2 घंटे 45 मिनट की अवधि वाला “मेरे कृष्ण” एक गहन रंगमंचीय अनुभव है, जो श्रीकृष्ण के जीवन के दिव्य, मानवीय और दार्शनिक आयामों की यात्रा कराता है।
यह नाटक 20 जीवंत दृश्यों में प्रकट होता है, जिनमें श्रीकृष्ण के जीवन के प्रमुख अध्यायों को दर्शाया गया है — वृंदावन में उनके बाल्यकाल से लेकर द्वारका में उनके अंतिम क्षणों तक।
शाश्वत दर्शन में निहित होते हुए भी, इसकी कथा शैली मनोरंजक, दृश्यात्मक रूप से समृद्ध और भावनात्मक रूप से प्रभावशाली है — जिसमें नाट्यकला, संगीत, नृत्य और मल्टीमीडिया का सुंदर समन्वय है।
यह नाटक श्रीकृष्ण के जीवन के कुछ कम ज्ञात प्रसंगों और दृष्टिकोणों को भी उजागर करता है।
निर्देशक राजीव सिंह दिनकर के अनुसार, निर्देशन की शैली अभिनयात्मक कथा-वाचन को इमर्सिव विज़ुअल्स और प्रतीकात्मक मंच-भाषा के साथ जोड़ती है — जहाँ स्थान, ध्वनि और प्रकाश का उपयोग कर भावनाओं को अनुभव में बदला जाता है।
नाटक का स्वर काव्यात्मक होने के साथ आधुनिक है, दार्शनिक होते हुए भी मनोरंजक है।
प्रत्येक दृश्य को गतिमान चित्रकला की तरह परिकल्पित किया गया है — जहाँ रंगमंच, दृश्य कला और आध्यात्मिक अन्वेषण एक-दूसरे से मिलते हैं।
इस नाटक के माध्यम से निर्देशक एक संवाद जागृत करना चाहते हैं — पूजा के बारे में नहीं, बल्कि जागरूकता के बारे में।
उद्देश्य यह है कि हर दर्शक यह प्रश्न लेकर न जाए कि “श्रीकृष्ण कौन हैं?” बल्कि यह अनुभूति लेकर जाए कि “श्रीकृष्ण मेरे भीतर हैं।”
प्रत्येक कलाकार का व्यक्तिगत लुक शीघ्र ही जारी किया जाएगा।

प्रियंका चोपड़ा को अपना प्रेरणास्रोत मानती है रुचि गुर्जर 

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अभिनेत्री रुचि गुर्जर इन दिनों ग्लैमरस लुक, आत्मविश्वास और अपने काम के प्रति समर्पण के कारण लगातार सुर्खियों में हैं। 2025 के कान्स फिल्म फेस्टिवल में उन्होंने ऐसा प्रभाव छोड़ा, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर वाला उनका स्टेटमेंट नेकलेस सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ और फैशन जगत ने उनके इस अनोखे आइडिया को साहसिक तथा क्रिएटिव बताया। रुचि ने भी बताया कि यह कॉन्सेप्ट उनकी खुद की सोच थी, जिसे डिजाइनर ने खूबसूरती से तैयार किया।

कान्स के बाद रुचि 56वें आईएफएफआई गोवा फिल्म फेस्टिवल में भी नजर आईं, जहाँ उनका ग्लैमरस और एलीगेंट अंदाज़ हर किसी का ध्यान खींचता रहा। रेड कार्पेट पर उनकी आत्मविश्वास भरी एंट्री को दर्शकों, फोटोग्राफर्स और मीडिया ने खुले दिल से सराहा। कई फैशन विशेषज्ञों ने उनकी स्टाइलिंग को “क्लासी, ग्रेसफुल और इंटरनेशनल स्टैंडर्ड” तक कहा।

रुचि गुर्जर उन कलाकारों में हैं, जो सिर्फ सुंदरता या ग्लैमर से नहीं, बल्कि अपने प्रोफेशनल रवैये और मेहनत से पहचानी जाती हैं। वह कई वर्षों से मुंबई में मॉडलिंग और एक्टिंग कर रही हैं। अभिनेता अमन वर्मा के साथ उनका म्यूजिक वीडियो “एक लड़की” काफी पसंद किया गया। इसके अलावा वह कई हिंदी और हरियाणवी वीडियो में भी नजर आ चुकी हैं। उनकी कुछ वेबसीरीज़ और फिल्में जल्द शूटिंग फ्लोर पर जाने वाली हैं, जिनसे उन्हें और भी बड़ा पहचान मिलने की उम्मीद है।

रुचि का सफर प्रेरणादायक रहा है। राजस्थान के एक छोटे से गाँव से निकलकर उन्होंने मिस हरियाणा का ताज जीता, पढ़ाई की, सॉफ्टवेयर कंपनी में काम किया और फिर अपने सपनों की दुनिया मुम्बई का रुख किया। छोटे शहर से आने वाली लड़कियों के लिए वह आज एक मजबूत उदाहरण बन चुकी हैं कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास से हर सीमित दायरा तोड़ा जा सकता है।

उनका कहना है कि “फैशन हो, अभिनय हो या जीवन, जो भी करो, उसमें एक नियम, एक मर्यादा और एक अनुशासन होना जरूरी है।”
रुचि इस बात पर भी जोर देती हैं कि नए कलाकारों को जल्दबाजी में कोई भी प्रोजेक्ट स्वीकार करने से बचना चाहिए, क्योंकि गलत चुनाव भविष्य में रुकावट बन सकता है।

रुचि निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्मों की बड़ी प्रशंसक हैं और मानती हैं कि उनकी फिल्में भव्यता, संस्कृति और शानदार अभिनय का बेहतरीन संगम हैं। प्रियंका चोपड़ा को वह अपना प्रेरणास्रोत मानती हैं। अगर अवसर मिला तो वह “जब वी मेट” की ‘गीत’ जैसा खुशमिजाज़ और बिंदास किरदार निभाना चाहेंगी, क्योंकि वह खुद भी वास्तविक जीवन में काफी पॉज़िटिव, जिंदादिल और आत्मनिर्भर हैं।

फैशन शो में रुचि हमेशा से आकर्षण का केंद्र रही हैं। आगे चलकर वह फैशन इंडस्ट्री में अपना खुद का बिज़नेस शुरू करना चाहती हैं। उनकी ऊर्जा, आत्मविश्वास, और लगातार बेहतर करने की चाह उन्हें बॉलीवुड की उभरती हुई प्रतिभाओं में मजबूती से शामिल करती है।