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नित्यानंद बाबा ज्ञान की गंगा

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ज्ञान की गंगा – गायत्री साहू
महाराष्ट्र राज्य में मुम्बई के समीप के थाने जिले में गणेशपुरी नाम का एक गाँव है। जहाँ नित्यानंद महाराज का भव्य मंदिर है। इस स्थान पर देश विदेश से लोग दर्शन करने हेतु आते हैं। गणेशपुरी में श्री भीमेश्वर सद्गुरु नित्यानंद संस्थान द्वारा संचालित विशाल आध्यात्मिक केंद्र और गुरुदेव सिद्धपीठ है। यह स्थान सिद्धयोग के स्वामी श्री नित्यानंद और उनके शिष्य स्वामी श्री मुक्तानंद की समाधियों के लिए प्रसिद्ध है। स्वामी नित्यानंद ने 1936 से 1961 तक गणेशपुरी में ही रहकर तप, योग और मनन किया था।
स्वामी मुक्तानंद यहां सन 1956 में आए थे। 70 के दशक में 75 एकड़ क्षेत्र में बना यहां का विशाल सिद्धपीठ तथा गणेशपुरी उपवन के किनारे संगमरमर से निर्मित विशाल श्री भीमेश्वर महादेव मंदिर उन्हीं द्वारा स्थापित किया हुआ है। ‘गणेशपुरी’ नाम पड़ने के पीछे लोकोक्ति यह है कि त्रेता काल में महर्षि वशिष्ठ ने यहां गणेशजी की प्रतिमा की स्थापना करके भीषण तपस्या भी की थी। यह स्थान भगवान राम और परशुराम के चरण पड़ने से भी पवित्र माना जाता है। नाथों की धरती होने के कारण यह संपूर्ण क्षेत्र ‘नाथ भूमि’ के नाम से भी प्रसिद्ध है।
गणेशपुरी में गुरुदेव सिद्धपीठ के भव्य हॉल में गुरुदेव की भव्य प्रतिमा के समक्ष भक्तगणों को मनन और ध्यान करते देखा जा सकता है। कैलास निवास में स्वामी नित्यानंद सात वर्षों तक रहे और बैंगलोरवाला में उन्होंने 1961 में देह त्याग किया था। इसके अलावा स्वामी मुक्तानंद, शालिग्राम स्वामी, गोविंद स्वामी और दिगंबर स्वामी की समाधियां यहां के अन्य आकर्षण केंद्र हैं। यहां अतिथिगृह और भोजनशाला की व्यवस्था भी है। गुरु पूर्णिमा गणेशपुरी का सबसे प्रमुख उत्सव है।
गणेशपुरी परिसर और आस-पास दर्शन के लिए रामेश्वर महादेव, भद्रकाली, हनुमान, गणेश, जलाराम धाम, साई धाम और ग्रामदेवी के कई मंदिर और मिलेंगे।
एक लोक कथा के अनुसार, केरल के तुनेही गांव में एक तूफानी रात में चतु नायर नाम के मजदूर को एक नवजात मिला। इस शिशु के पास में एक कोबरा फन फैलाये हुए शिशु की रक्षा कर रहा था। चतु नायर और उन्नी अम्मा ने अपने नियोक्ता और स्थानीय वकील ईश्वर अय्यर के पास बच्चे को लाया और नवजात के बारे में बताया। फिर दोनों ने मिलकर बच्चे को पाला और उसका नाम रामन रखा। बाल्यकाल से ही यह बच्चा अनोखी प्रतिभा का धनी था। लोगों ने भी उनका चमत्कार देखा।

जब ईश्वर अय्यर अपने अंतिम दिनों के करीब पहुंचे, उन्होंने रामन से भगवान सूर्य नारायण के दर्शन पाने का अनुरोध किया। उनकी यह इच्छा पूरी हुई और जब अय्यर ने इस घटना का अनुभव किया, तो वह अभिभूत हो गया और रामन से कहा कि आपने मुझे सर्वोच्च आनंद दिया है, इसलिए आप मेरे नित्यानंद हैं। नित्यानंद जब युवा हुए तो योग और तपस्या में लीन हो गए। उन्होंने हिमालय, वाराणसी, कोलंबो, रामेश्वरम, उडिपी, मंगलौर आदि की यात्रा की। वे जहां भी गए वहाँ लोगों को दिव्य उपचार के माध्यम से बीमारी, दुख और गरीबी से मुक्त किया। जब तक श्री नित्यानंद कान्हागढ़ पहुंचे, तब तक उनकी प्रसिद्धि ने अनगिनत भक्तों को आकर्षित किया और अब उनकी कीर्ति दूर-दूर तक फैल चुकी थी।
कान्हांगड और पास के गुरुवन में, उन्होंने निवास और ध्यान के लिए गुफाओं की एक बस्ती की स्थापना की। उन्होंने पेड़ भी लगाए और एक धारा का निर्माण किया, जिसे बाद में पापनाशिनी गंगा नाम दिया गया जो आज भी बह रही है।
उनकी यात्रा का अंतिम चरण उन्हें मुंबई ले आया जहां लोगों ने उनके उपचार क्रिया और चमत्कार को देखा। 1937 में, वह तानसा घाटी से अकोली और वज्रेश्वरी के लिए रवाना हुए। जहाँ उन्होंने स्कूलों, विश्राम गृहों, चिकित्सालयों की स्थापना की और मंदिरों का जीर्णोद्धार किया और ध्यान पर जोर देते हुए अपना उपदेश जारी रखा।
इसके तुरंत बाद वे पास के गणेशपुरी आए और प्राचीन श्री भीमेश्वर महादेव मंदिर के पास बस गए। आध्यात्मिक भौतिक उत्थान की तलाश में आने वाले लोगों के लिए आस-पास के गांवों और दूर-दूर से हजारों आगंतुक इस नए निवास में आते थे, जो धीरे-धीरे तीर्थ यात्रा के एक शक्तिशाली केंद्र के रूप में विकसित हो गया है।

पशुओं में लम्पि बीमारी (एल० एस० डी० ) के रोकथाम हेतु उत्तर प्रदेश पशुचिकित्सा विज्ञानं विश्वविद्यालय द्वारा पशुपालकहित में जारी अनुदेश

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पशुओं में लम्पि बीमारी (एल० एस० डी० ) के रोकथाम हेतु उत्तर प्रदेश पशुचिकित्सा विज्ञानं विश्वविद्यालय द्वारा पशुपालकहित में जारी अनुदेश
लम्पि बीमारी गाय, भैस में होने वाला एक संकामक रोग है । राजस्थान, हरयाणा, पंजाब, उत्तराखंड राज्यों में मवेशियों में लंपी बीमारी का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिससे  भारी तादाद में पशु बीमारी की चपेट में आ रहे हैं ।  इस बीमारी से मवेशियों की सभी उम्र और नस्लें प्रभावित होती हैं, लेकिन विशेष रूप से कम उमर के दुधारू मवेशी अधिक प्रभावित होती हैं। इस रोग से पशुधन उत्पादन में भारी कमी आती है । ऐसे में यह अनुदेश प्रदेश के पशुपालकों को, समय रहते बीमारी की पहचान एवं बचने के उपायों से अवगत कराने में सहायक सिद्ध होगी।
 लक्षण
  • तेज बुखार (41 डिग्री सेल्सियस ) ।
  • आँख एवं नाक से पानी गिरना ।
  • पैरों में सूजन।
  • वायरल संक्रमण के 7 से 19 दिनों के बाद पूरे शरीर में , कठोर, चपटे गांठ उभर आना।
  • गाभिन पशुओं के गर्भपात।
  • दुधारू गायों में दुग्ध उत्पादन काफी कम।
  • पशुओं में वजन घटना , शारीरिक कमजोरी।
रोग संचरण
  • रोग के विषाणु बीमार पशु के लार, नासिका स्राव, दूध, वीर्य में भारी मात्रा में पाए जाते हैं। 
  • स्वस्थ पशु के बीमार पशु के सीधे संपर्क में आने से।
  • रोग ग्रसित पशु के स्राव से संदूषित चारा पानी खाने से ।
  • बछड़ों में रोग ग्रसित पशु के दूध से।
  • मच्छरों, काटने वाली मक्खियों, चमोकन/किलनी आदि जैसे खून चूसने वाली कीड़ोंके काटने से।
उपचार
  • यह एक विषाणुजनित रोग है जिसका कोई उचित अनुशंसित उपचार नहीं है। चिकित्सक के परामर्श से लक्षणात्मक उपचार किया जा सकता है।
  • बुखार की स्थिति में ज्वरनाशक का प्रयोग ।
  • सूजन एवं चर्म रोग की स्थिति में पशु चिकित्सक की सलाह से दवाईयां तथा द्वितीयक जीवाणु संक्रमण को रोकने हेतु 3-5 दिनों तक एन्टीबायोटिक दवाईयों का प्रयोग ।
  • घावों को मक्खियों से बचाने हेतु नीम की पत्ती, मेहंदी पत्ती, लहसुन, हल्दी पाउडर को नारियल या सीसेम तेल में लेह बनाकर घाओं पर लेप का प्रयोग ।
निवारण :
बीमारी की रोकथाम के लिए टीकाकरण सबसे अच्छा तरीका है। इंडियन इम्युनोलॉजिकल अथवा हेस्टर बायोसाइंस द्वारा निर्मित गॉटपॉक्स टिका पशुओं को बीमारी से बचाने में अत्यंत कारगर है। इस टिके को ३-५  मी ली मात्रा चमड़े में दिए जाने से एक वर्ष तक प्रभावी प्रतिरक्षा प्रदान करता है।
 रोग प्रकोप के समय क्या करें, क्या नहीं करें ?
 क्या करें,
  • निकटतम सरकारी पशुचिकित्सा अधिकारी को सूचित करें।
  • प्रभावित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग करें ।
  • प्रभावित पशुओं की आवाजाही को प्रतिबंधित करें ।
  • रक्त-आश्रित की कीट के काटने से बचने के लिए पशुओं के शरीर पर कीट निवारक का प्रयोग करें.
  • स्वस्थ पशुओं को दाना चारा देने दूध निकलने के बाद ही रोग-ग्रसित पशुओं को देखभाल करें।
  • बीमारी को फैलने से बचाने के लिए परिवेश और पशु खलिहान की फिनोल (2%/15 मिनट), सोडियम हाइपोक्लोराइट (2–3%), आयोडीन यौगिकों (1:33), चतुर्धातुक अमोनियम यौगिकों (0.5%) और ईथर (20%) इत्यादि का छिड़काव कर उचित कीटाणुशोधन करें।
  • रोग प्रकोप फैलने पर पशु मेला एवं प्रदर्शनी पर रोक लगा देनी चाहिए ।
क्या नहीं करें
  • सामुहिक चराई के लिए अपने पशुओं को नहीं भेजें ।
  • पशुओं को पानी पीने के लिए आम स्रोत जैसेकि तालाब, धाराओं, नदियों से सीधे उपयोग नहीं करना चाहिए, इससे बीमारी फैल सकती है |
  • प्रभावित क्षेत्र से पशुओं की खरीदी न करें।
  • मृत पशुओं के शव को खुले में न फेंके ।
  • लंपि  रोग का विषाणु मनुष्यों को प्रभावित नहीं करता अतः रोगी पशु के दूध को उबाल कर पीने या रोगी पशु के संपर्क में आने से मनुष्यों में रोग फैलने की कोई आशंका नहीं है।अवांछित अफवाहों से खुद को बचाएं।

वरिष्ठ फिल्म पत्रकार काली दास पाण्डेय झारखंड में सम्मानित

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15 अगस्त 2022 को आज़ादी के 75वें वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रीय स्तर पर संकल्पित आयोजन ‘अमृत महोत्सव’ के अवसर पर स्थानीय स्तर पर हजारीबाग बार एसोसिएशन के द्वारा आयोजित भव्य समारोह में अधिवक्ता संघ के तमाम सदस्यों व हजारीबाग व्यवहार न्यायालय के सभी न्यायिक पदाधिकारियों की मौजूदगी में, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री राजकुमार राजू द्वारा अधिवक्ता काली दास पाण्डेय को स्मृति चिन्ह व अंगवस्त्र दे कर  सम्मानित किया।
हजारीबाग बार एसोसिएशन के तरफ से यह सम्मान उन्हें वकालत पेशे के अलावा सामाजिक सरोकार से जुड़े  कार्यों व अतिरिक्त फिल्मी गतिविधियों के लिए दिया गया। विदित हो कि इस वर्ष 26 मार्च को मालाबार हिल, वालकेश्वर रोड मुम्बई स्थित राज भवन में आयोजित राष्ट्रीय सेवा सम्मान समारोह में वरिष्ठ फिल्म पत्रकार/ अधिवक्ता काली दास पाण्डेय को महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी ने ‘राष्ट्रीय सेवा सम्मान’ अवार्ड दे कर सम्मानित किया था।
4 मई को अंधेरी (वेस्ट) मुम्बई स्थित मेयर हॉल में कृष्णा चौहान फाउंडेशन (केसीएफ) के द्वारा आयोजित भव्य समारोह में वरिष्ठ फिल्म पत्रकार काली दास पाण्डेय को लीजेंड दादा साहेब फाल्के अवार्ड दे कर सम्मानित किया जा चुका है। इसके साथ ही16 मई को अंधेरी (वेस्ट)मुम्बई स्थित मुक्ति फाउंडेशन के प्रेक्षागृह में आयोजित सिनेमा आजतक एचीवर्स अवार्ड 2022 समारोह में वरिष्ठ फिल्म पत्रकार सह अधिवक्ता काली दास पाण्डेय को फिल्म निर्माता निर्देशक सुजॉय मुखर्जी (अभिनेता स्व जॉय मुखर्जी के पुत्र) के द्वारा बेस्ट जर्नलिस्ट अवार्ड से नवाजा गया था।
यहाँ उल्लेखनीय है कि बॉलीवुड के चर्चित फिल्म पत्रकार काली दास पाण्डेय ने अपना करियर 1981 में स्वतंत्र पत्रकार के रूप में जमशेदपुर (झारखंड) से प्रकाशित हिंदी दैनिक समाचार पत्र ‘उदित वाणी’ से किया था। 80 के दशक से वर्तमान समय तक  बतौर फिल्म पत्रकार बॉलीवुड में सक्रियता जारी है । हजारीबाग (झारखंड) बार एसोसिएशन की सदस्यता ग्रहण कर 1992 से वकालत के पेशे में क्रियाशील काली दास पाण्डेय को बॉलीवुड में फिल्म निर्माता व निर्देशक रमेश सिप्पी की कालजयी फिल्म-‘शोले’ के इतिहास के साथ एक नया अध्याय जोड़ने वाले फिल्म पत्रकार के रूप में जाना जाता है।
70 के दशक की सर्वाधिक कमाई करने वाली फिल्म के रूप में ‘शोले’ की चर्चा आज के दौर में भी होते रहती है। 3 घंटा 24 मिनट की म्यूजिकल/कॉमेडी युक्त एक्शन फिल्म ‘शोले’ सिर्फ रमेश सिप्पी की नहीं, बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा की अबतक की सदाबहार फिल्म है। 15 अगस्त 1975 को प्रदर्शित इस फिल्म की सफलता का श्रेय इसकी पटकथा और पार्श्व संगीत को ही दिया जाता है। आसमान में गोलियों की गूंजती आवाज, झूले के चरचराहट, डाकुओं की फिल्म होते हुए भी नई कहानी के जरिये मध्यमवर्गीय जीवन के नए पहलू उद्घाटित हुए थे , इसी सबने मिलकर ‘शोले’ को महान बनाया।
वर्ष 2005 में 50वें फिल्मफेयर समारोह में फिल्म को पिछले 50 साल की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का दर्जा दिया गया था। साथ ही ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट ने वर्ष 2002 की वोटिंग में शीर्ष 10 भारतीय फिल्मों की सूची में ‘शोले’ को प्रथम स्थान दिया था। ‘शोले’ के प्रदर्शित होते ही फिल्म के संवाद और कुछ साइलेंट पात्र की जीने वाले कलाकार बेहद लोकप्रिय हो गए थे उनमें से चरित्र अभिनेता मेजर आनंद का नाम सर्वोपरि है। वैसे अभिनेता मेजर आनंद अब इस दुनिया में नहीं हैं, उन्होंने 3 सितंबर 2020 को इस दुनियां को अलविदा कहा। फौज की नौकरी छोड़ कर 70 के दशक में ही रामसे ग्रुप की फिल्म-‘अंधेरा’ से फिल्मी कैरियर शुरू करने वाले अभिनेता मेजर आनंद ने अपने जीवन काल में ‘शोले’ समेत 75 फिल्मों में काम में काम किया।
अभिनेता मेजर आनंद के अभिनय कौशल और लोकप्रियता को देखते हुए बी एफ सी पब्लिकेशन्स (लखनऊ) के द्वारा अभिनेता मेजर आनंद की बायोग्राफी प्रकाशित की गई है । इसके लेखक काली दास पाण्डेय हैं। इसके साथ ही रमेश सिप्पी की फिल्म-‘शोले’ के इतिहास के साथ एक नया अध्याय जुड़ गया है। इसके पूर्व ‘शोले’ के नामचीन कलाकारों को छोड़ कर फिल्म से जुड़े किसी भी कैरेक्टर आर्टिस्ट की बायोग्राफी अब तक प्रकाशित नहीं हुई थी। फिल्म पत्रकार काली दास पाण्डेय द्वारा लिखी गई बायोग्राफी ‘मेजर आनंद- ख़्वाबों की मंज़िल का नायक’ (सफरनामा फौज से फिल्मों तक)  की खास बात यह है कि इसमें  अभिनेता मेजर आनंद के फिल्मी कैरियर से जुड़े अनछुए पहलुओं को शामिल किया गया है। साथ ही साथ फिल्म विधा में रुचि रखने वाले नवोदित कलाकारों व फिल्म निर्माताओं के लिए इस बायोग्राफी में फिल्म डायरेक्टरी का भी समावेश किया गया है। पाठकों के लिए यह बायोग्राफी काफी उपयोगी साबित होगी। बायोग्राफी का किंडल (ई बुक) संस्करण और पेपर बैक संस्करण अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में अर्जुन देशपांडे ने जेनेरिक आधार के तहत 51 नई दवाओं को लॉन्च किया

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जेनेरिक दवाइयों के लॉन्च के अवसर पर खली और गुलशन ग्रोवर की भी उपस्थिति रही

ठाणे। भारत में हेल्थकेयर को और भी अधिक किफ़ायती बनाने के लक्ष्य के एक कदम और नज़दीक पहुँचते हुए जेनेरिक आधार के संस्थापक व सीईओ अर्जुन देशपांडे ने भारत में उपभोक्ताओं के लिए 51 नई दवाएँ शुरू करने की घोषणा की। यह दवाएँ अब लोगों को 80% कम कीमत पर उपलब्ध होंगी। इन उत्पादों के लॉन्च की घोषणा के अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर द ग्रेट खली और अभिनेता गुलशन ग्रोवर उपस्थित रहे।


भारत के अग्रणी फार्मा स्टार्टअप, जेनेरिक आधार ने पुराने फ़ार्मा जगत के समकक्ष एक नया इकोसिस्टम खड़ा कर दिया है। 16 वर्ष की अल्पायु में अर्जुन द्वारा स्थापित यह कंपनी अपने फ्रैंचाईज़ी स्टोर्स के माध्यम से लोगों को किफ़ायती दामों पर उच्च-गुणवत्ता वाली दवाएँ उपलब्ध कराने के लिए सीधे विनिर्माताओं के साथ काम करते हुए फ़ार्मा सेक्टर में नई क्रान्ति लेकर आई है।
जेनेरिक आधार एक ऐसे समय पर सीधे एंड-यूज़र्स तक उच्च गुणवत्ता वाली दवाएँ पहुंचाने के काम कर रही है जब लोग कोविड महामारी और बढ़ती महंगाई की दोहरी मार झेल रहे हैं। ऐसे में जेनेरिक आधार ने अपने ब्रांडेड प्रतिपक्षियों की तुलना में दवाओं की कीमत को 80% तक कम रखा है। उदाहरण के तौर पर आमतौर पर ₹13 रुपए में मिलने वाली दवा फ्लुकोनाज़ोल 150 mg का दाम जेनेरिक आधार द्वारा मात्र ₹4.53 ही रखा गया है। ₹195 में मिलनेवाली नॉर्ट्रिपटाइलीन 10mg + मिथाइलकोबालामीन 1500mcg + प्रीगाबालीन 75mg की कीमत जेनेरिक आधार द्वारा ₹38.85 के लगभग (80% कम कीमत पर) ही रखी गई है।
इनका फार्मेसी-ऐग्रिगेटर फ़्रैंचाईज़ी मॉडल उपभोक्ताओं को जेनेरिक आधार ऐप के माध्यम से दवाएँ ऑर्डर करने में समर्थ बनाता है जो उन तक दो घंटों में ही डिलीवर कर दी जाती हैं। इसके अलावा भौतिक रूप से स्टोर्स पर भी वॉक-इन ग्राहकों का स्वागत किया जाता है। फरवरी 2019 में लॉन्च होने के बाद से ही जेनेरिक आधार देश के 150 से भी अधिक शहरों में अपनी 1500 फार्मेसी खोल चुका है।
जेनेरिक आधार के संस्थापक व सीईओ अर्जुन देशपांडे कहते हैं कि छोटे शहरों पर विशेष रूप से फ़ोकस करते हुए जेनेरिक आधार निम्नतम संभव लागत में लोगों के लिए दवाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अपने इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए हमने जेनेरिक आधार के सभी प्लैटफ़ार्म पर 51 नई दवाएँ लॉन्च की हैं। यह कुछ आम समस्याओं की दवाएँ हैं जैसे कि पथरी, न्यूरोपैथिक दर्द, सामान्य सर्दी, खांसी, एलर्जी व फंगल इन्फेक्शन। हम देश के 130 करोड़ लोगों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली दवाएँ तैयार कर रहे हैं। उद्यमिता की बढ़ती मांग के साथ ही हमें भविष्य में सफलता की कई कहानियों में अपना योगदान देने पर गर्व महसूस हो रहा है।
वर्तमान में जेनेरिक दवाओं के मामले में भारत दुनिया के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक है जिसकी वैश्विक फार्मास्युटिकल बाज़ार में 20% की हिस्सेदारी है। अपने फ़्रैंचाईज़ी मॉडल के माध्यम से जेनेरिक आधार न केवल रोज़गार पैदा कर रहा है बल्कि ढेरों सूक्ष्म-उद्यमियों के विकास को भी बढ़ावा दे रहा है। इस क्रम में अब तक 1500 से भी अधिक सूक्ष्म-उद्यमियों व रोज़गार के 8000 से अधिक प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष अवसरों का सृजन हो चुका है।

जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान- पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नौवीं बार देश को लाल किले से संबोधित किया। 76वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री ने लाल किले से झंडा फहराया और 83 मिनट तक देश को संबोधित किया। इससे पहले 2021 के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री 88 मिनट बोले थे। 2014 में प्रधानमंत्री ने पहली बार देश को 65 मिनट तक संबोधित किया था।
2015 में नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा था
2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 86 मिनट का भाषण देकर पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा था। नेहरू ने 1947 में लाल किले से 72 मिनट लंबा भाषण दिया था।
अब तक सिर्फ एक बार एक घंटे से कम बोले प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री अब तक कुल नौ बार लाल किले से देश को संबोधित कर चुके हैं। केवल एक बार उन्होंने देश को एक घंटे से कम समय के लिए देश को संबोधित किया। 2017 के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री का भाषण केवल 56 मिनट का रहा था। ये उनका सबसे छोटा भाषण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नौवीं बार देश को लाल किले से संबोधित किया। 76वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री ने लाल किले से झंडा फहराया और 83 मिनट तक देश को संबोधित किया। इससे पहले 2021 के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री 88 मिनट बोले थे।  2014 में प्रधानमंत्री ने पहली बार देश को 65 मिनट तक संबोधित किया था।
2015 में नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा था
2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 86 मिनट का भाषण देकर पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा था। नेहरू ने 1947 में लाल किले से 72 मिनट लंबा भाषण दिया था।

अब तक सिर्फ एक बार एक घंटे से कम बोले प्रधानमंत्री 
प्रधानमंत्री अब तक कुल नौ बार लाल किले से देश को संबोधित कर चुके हैं। केवल एक बार उन्होंने देश को एक घंटे से कम समय के लिए देश को संबोधित किया। 2017 के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री का भाषण केवल 56 मिनट का रहा था। ये उनका सबसे छोटा भाषण है।

Addressing the nation on Independence Day. https://t.co/HzQ54irhUa

पीएम मोदी के भाषण की प्रमुख बातें;

  • मैं विश्व भर में फैले हुए भारत प्रेमियों को, भारतीयों को आजादी के इस अमृत महोत्सव की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। हमारे देशवासियों ने भी उपलब्धियां की हैं, पुरुषार्थ किया है, हार नहीं मानी है और संकल्पों को ओझल नहीं होने दिया है।
  • अमृतकाल का पहला प्रभात Aspirational Society की आकांक्षा को पूरा करने का सुनहरा अवसर है। हमारे देश के भीतर कितना बड़ा सामर्थ्य है, एक तिरंगे झंडे ने दिखा दिया है
  • आज का ये दिवस, ऐतिहासिक दिवस है। एक पुण्य पड़ाव, एक नई राह, एक नए संकल्प और नए सामर्थ्य के साथ कदम बढ़ाने का ये शुभ अवसर है
  • दुनिया आज भारत को गर्व, आशा और समस्या समाधान के रूप में देखती है।
  • दुनिया भारत को एक ऐसे गंतव्य के रूप में देखती है जहां आकांक्षाएं पूरी होती हैं।
  • आज विश्व पर्यावरण की समस्या से जो जूझ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग की समस्याओं के समाधान का रास्ता हमारे पास है। इसके लिए हमारे पास वो विरासत है, जो हमारे पूर्वजों ने हमें दी है।
  • पिछले 8 वर्षों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के द्वारा आधार, मोबाइल जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं का उपयोग करते हुए, गलत हाथों में जाने वाले 2 लाख करोड़ रुपये को बचाकर उन्हें देश की भलाई में लगाने में हम कामयाब हुए हैं।

अमृत काल के पंच-प्रण

  • पहला प्रण – विकसित भारत का लक्ष्य
  • दूसरा प्रण – गुलामी के हर अंश से मुक्ति
  • तीसरा प्रण – अपनी विरासत पर गर्व
  • चौथा प्रण – एकता और एकजुटता
  • पांचवां प्रण – नागरिकों में कर्तव्य की भावना

    हम वो लोग हैं, जो नदी को मां मानते हैं

    पीएम मोदी कहा कि हम वो लोग हैं, जो जीव में शिव देखते हैं, हम वो लोग हैं, जो नर में नारायण देखते हैं, हम वो लोग हैं, जो नारी को नारायणी कहते हैं, हम वो लोग हैं, जो पौधे में परमात्मा देखते हैं, हम वो लोग हैं, जो नदी को मां मानते हैं, हम वो लोग हैं, जो कंकड़-कंकड़ में शंकर देखते हैं।

आत्मनिर्भर भारत समाज का जनआंदोलन है, सरकारी एजेंडा नहीं- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत, ये हर नागरिक का, हर सरकार का, समाज की हर एक इकाई का दायित्व बन जाता है। आत्मनिर्भर भारत, ये सरकारी एजेंडा या सरकारी कार्यक्रम नहीं है। ये समाज का जनआंदोलन है, जिसे हमें आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि कल 14 अगस्त को भारत ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हमने उन लोगों को भारी मन से याद किया जिन्होंने हमारे तिरंगे के सम्मान और मातृभूमि के प्रति प्रेम लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

हमारी कोशिश है युवाओं को रिसर्च के लिए भरपूर मदद मिले- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि हमारा प्रयास है कि देश के युवाओं को असीम अंतरिक्ष से लेकर समंदर की गहराई तक रिसर्च के लिए भरपूर मदद मिले। इसलिए हम स्पेस मिशन का, Deep Ocean Mission का विस्तार कर रहे हैं। स्पेस और समंदर की गहराई में ही हमारे भविष्य के लिए जरूरी समाधान है।

देश के सामने दो बड़ी चुनौतियां- पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली चुनौती- भ्रष्टाचार और दूसरी चुनौती- भाई-भतीजावाद, परिवारवाद है। एक तरफ वो लोग हैं जिनके पास रहने के लिए जगह नहीं है और दूसरी तरफ वो लोग हैं जिनके पास चोरी किया माल रखने की जगह नहीं है। ये स्थिति अच्छी नहीं है। जब तक भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी के प्रति नफरत का भाव पैदा नहीं होता होता, सामाजिक रूप से उसे नीचा देखने के लिए मजबूर नहीं करते, तब तक ये मानसिकता खत्म नहीं होने वाली है।

भाई-भतीजावाद से देश की प्रतिभा को हो रहा नुकसान- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि मैं भाई भतीजावाद, परिवारवाद की बात करता हूं तो लोगों को लगता है मैं सिर्फ राजनीतिक क्षेत्र की बात कर रहा हूं। दुर्भाग्य से राजनीति की इस बुराई ने हिन्दुस्तान की सभी संस्थाओं में परिवारवाद को पोषित कर दिया है। इससे मेरे देश की प्रतिभा को नुकसान होता है।

देश को लूटकर भागने वालों की जब्त की जा रही संपत्तियां- पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि जो लोग पिछली सरकारों में देश को लूटकर भाग गए, उनकी संपत्तियां ज़ब्त करके वापिस लाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि जिन्होंने देश को लूटा है उन्हें लौटाना पड़े वो स्थिति हम पैदा कर रहे हैं। हम भ्रष्टाचार के खिलाफ एक निर्णायक कालखंड में कदम रख रहे हैं।

बिरसा मुंडा, अल्लूरी सीताराम राजू और गोविंद गुरु को किया याद

पीएम मोदी ने कहा कि जब हम आज़ादी के जंग की चर्चा करते हैं तो हम आदिवासी समाज का गौरव करना हम नहीं भूल सकते हैं। आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों जैसे बिरसा मुंडा, अल्लूरी सीताराम राजू और गोविंद गुरु ने भारत के हर कोने में स्वतंत्रता संग्राम को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा।

मुझे 130 करोड़ देशवासियों पर पूरा भरोसा है- पीएम मोदी

ये ठीक है कि चुनौतियां बहुत हैं। अगर इस देश के सामने करोड़ों संकट हैं, तो इतने ही समाधान भी हैं। मेरा 130 करोड़ देशवासियों पर भरोसा है। निर्धारित लक्ष्य के साथ, संकल्प के प्रति समर्पण के साथ जब 130 करोड़ देशवासी आगे बढ़ते हैं, तो हिंदुस्तान 130 कदम आगे बढ़ जाता है।

जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान- पीएम मोदी

जय जवान, जय किसान का लाल बहादुर शास्त्री जी का मंत्र आज भी देश के लिए प्रेरणा है। अटल जी ने जय विज्ञान कह कर उसमें एक कड़ी जोड़ दी थी। लेकिन अब अमृत काल के लिए एक और अनिवार्यता है, वो है जय अनुसंधान। जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान।

 

 

 

 

 

भारत को जय हिंद शब्द का नारा देने वाले अज्ञात हीरो चेम्पाकरमन पिल्लई पर बनेगी बायोपिक

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अंजुम रिज़वी, राघवेंद्र एन और रिजू बजाज ने 15 अगस्त पर की ये बड़ी घोषणा

मुम्बई। यदि आपने कभी सोचा है कि जय हिंद शब्द कहां से आया, तो आपको स्वतंत्रता सेनानी चेम्पाकरमन पिल्लई के जीवन पर घोषित इस बायोपिक को देखने की जरूरत है।
भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अंजुम रिजवी फिल्म कंपनी, अनुराग एंटरटेनमेंट और लिफ्ट इंडिया स्टूडियोज ने की घोषणा
जय हिंद, अंग्रेजी में एक अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म बनाने की जी डॉ चेम्पकरमन पिल्लई के जीवन पर एक बायोपिक होगी जो एक राजनीतिक कार्यकर्ता और क्रांतिकारी थे जिन्होंने “जय हिंद” का नारा गढ़ा था।
डॉ. चेम्पाकरमन पिल्लई ने 1907 में “जय हिंद” शब्द की कल्पना की, जिसे 1940 के दशक में आबिद हसन सफरानी के सुझाव पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भारतीय राष्ट्रीय सेना के नारे के रूप में अपनाया गया था। भारत की स्वतंत्रता के बाद, जय हिंद भारत के राष्ट्रीय नारे के रूप में उभरा, जिसका आज देश की सेनाओं में व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है।
प्रथम विश्व युद्ध के फैलने के बाद, पिल्लई ने ज्यूरिख में अंतर्राष्ट्रीय भारत समर्थक समिति की स्थापना की। बाद में उन्होंने इसे बर्लिन समिति में मिला दिया, जो यूरोप में सभी भारतीय समर्थक क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए मार्गदर्शक और नियंत्रण संस्था बन गई, जिसने भारत की स्वतंत्रता में योगदान दिया।
पिल्लई एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने उस समय भारतीयों पर अपनी अपमानजनक टिप्पणियों के लिए एडॉल्फ हिटलर से लिखित माफी मांगने की हिम्मत की थी।हालाँकि, चेम्पाकरमन पिल्लई नाम भी आज अधिकांश भारतीयों को अज्ञात लगता है।
फिल्म जय हिंद, चंपाकरमन पिल्लई और अन्य भूले हुए दिग्गजों के आसपास केंद्रित भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की सच्ची घटनाओं पर आधारित है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित, अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक राजेश टचरिवर द्वारा लिखा और निर्देशित किया जाएगा।
इस फिल्म की मुख्य भाषा अंग्रेजी होगी, वहीं इसे हिंदी और तमिल समेत अन्य प्रमुख भारतीय भाषाओं में भी रिलीज किया जाएगा।अंजुम रिज़वी, राघवेंद्र एन और रिजू बजाज अपने बैनर अंजुम रिज़वी फिल्म कंपनी, अनुराग एंटरटेनमेंट और लिफ्ट इंडिया स्टूडियो के तहत ‘जय हिंद’ का निर्माण कर रहे हैं।

भारत ने रचा कीर्तिमान: विश्व के सबसे ऊंचे रेल पुल के दोनों सिरे जुड़े

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कश्मीर को सीधा राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने की सबसे अहम कड़ी और विश्व के सबसे ऊंचे रेल पुल के दोनों सिरे ‘गोल्डन ज्वाइंट’ रस्म निभाते हुए शनिवार जोड़ दिए गए। आतिशबाजी, राष्ट्रीय गान और भारत माता की जय के नारों के बीच इंजीनियरिंग के इतिहास की इस दुर्लभ उपलब्धि पर जश्न मनाया गया। उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना के तहत चिनाब दरिया की सतह से 359 मीटर की ऊंचाई पर पुल की अंतिम आर्क जुड़ते ही कोड़ी और बक्कल रेलवे स्टेशन आपस में जुड़ गए हैं। यह पुल पेरिस के एफिल टावर से 30 मीटर ऊंचा है। हालांकि, पुल का अभी 98 फीसदी निर्माण पूरा हुआ है, जिसे दिसंबर में अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।
भारतीय रेलवे समेत दुनिया के रेलवे इतिहास के सबसे ऊंचे पुल पर 1,436 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। 17 स्तंभों पर बने पुल की कुल लंबाई 1315 मीटर है। शनिवार को पुल की आर्क को जोड़ने से पहले मौके पर एक तिरंगा रैली निकाली गई। कोड़ी की तरफ से शुरू हुई यह रैली आर्क जोड़े जाने वाले स्थान पर पहुंची, जहां आर्क के जुड़ते ही भारत माता का जयघोष किया गया। मौके पर नॉर्दर्न रेलवे के सीएओ एसपी माही मुख्य रूप से मौजूद रहे।
पुल बनाने का काम करने वाली अफकांस इंफ्रास्ट्रक्चर के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गिरिधर राज गोपालन और प्रोजेक्ट मैनेजर एसएम विश्वमूर्ति ने कहा कि पुल का काम इसी वर्ष अंत तक पूरा होगा। कंपनी ने पुल को बनाने का काम एक चुनौती के तौर पर लिया था, जिसमें हर मैटेरियल बेहतरीन लगाकर इसको भूकंप रोधी बनाया गया है। शनिवार को ओवर आर्क को आपस में जोड़े जाने का काम पूरा किया गया।
कर्मचारियों में था गजब का उत्साह
आर्क जोड़े जाने के समय अफकांस के अधिकारियों के साथ कर्मचारियों में गजब का जोश रहा। पुल के दोनों तरफ तिरंगा लगाया गया था। साथ ही आर्क के जुड़ते ही आसमान में तीन रंगों के गुब्बारे छोड़े गए। कर्मचारियों ने कहा कि इतिहास में इस पुल को बनाने वालों का नाम लिखा जाएगा। चिनाब दरिया पर बना विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे पुल दुनिया का एक और अजूबा है, जिसको देखने दुनिया आएगी। आर्क जुड़ते ही रंग बिरंगे फूलों को हवा में फेंका गया और आतिशबाजी कर खुशी जताई गई।
1300 वर्कर, 300 इंजीनियर दिन-रात जुटे, फहराया तिरंगा
निया के सबसे ऊंचे रेल पुल को मूर्त रूप देने में 1300 वर्कर और 300 इंजीनियर दिन रात जुटे हैं। 111 किलोमीटर लंबे कटड़ा-बनिहाल सेक्शन में निर्माणाधीन पुल का काम वर्ष 2004 में शुरू हुआ था, लेकिन वर्ष 2008-09 में लगातार तेज हवाओं के चलते काम को रोकना पड़ा था। 120 साल की अवधि के लिए तैयार किए जा रहे पुल पर 260 किलोमीटर प्रतिघंटे के रफ्तार से चलने वाली हवाएं भी असर नहीं डाल सकेंगी। गोल्डन ड्वाइंट रस्म के साथ सबसे ऊंचे रेल पुल पर तिरंगा भी लहराया गया।

केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला Har GharTiranga अभियान में शामिल हुए

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नई दिल्ली – आज़ादी का अमृत महोत्सव भारत की आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने और यहां के लोगों, संस्कृति और उपलब्धियों के गौरवशाली इतिहास को याद करने और जश्न मनाने के लिए किया जा रहा है। इसी शृंखला के तहत आज़ादी के 75 वे अमृत महोत्सव के शुभ अवसर पर भारत सरकार के ‘मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने अपने गृह नगर ( गांव ईश्वरिया ) में #HarGharTiranga अभियान के अंतर्गत भाजपा अमरेली तालुका द्वारा आयोजित भव्य तिरंगा यात्रा में शामिल हुए। जहां उनका भव्य स्वागत किया गया।
ज्ञात हो कि श्री पुरुषोत्तम रूपाला का जन्म गुजरात के अमरेली के ईश्वरिया गांव में हुआ है। वह अपने भाषणों में अक्सर मजाकिया लहजे और स्थानीय भाषा के शब्दों के प्रयोग के लिए जाने जाते हैं। वह हमेशा पारंपरिक कपड़े पहनते है। सन 1991 में यही से पुरुषोत्तम रूपाला पहली बार अमरेली से विधायक के तौर पर चुने गए थे।
#HarGharTiranga अभियान में श्री पुरुषोत्तम रूपाला के साथ स्थानीय समुदाय के हर वर्ग के लोगो के साथ साथ बच्चों ने भी बढ़ चढ़ भाग लिया और इस अभियान को सफल किया।

डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के लीड इंडिया फाउंडेशन ने देश के 111 राष्ट्रीय स्तंभ में से एक घोषित कर सम्मानित किया डॉ अनुषा श्रीनिवासन अय्यर को

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लीड इंडिया फाउंडेशन के द्वारा मुम्बई में आयोजित एक भव्य समारोह में फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. हरि कृष्ण मरम ने 111 मिनट की अवधि में आईएएस, आईपीएस, आईआरएस, आईएफएस, केएएस अधिकारियों, फिल्म हस्तियों, उद्योग जगत के नेताओं, एनजीओ नेताओं और खेल हस्तियों सहित 111 पावर वुमन को सम्मानित करके वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड बनाया। इस क्रम में लीड इंडिया फाउंडेशन द्वारा देश के 111 राष्ट्रीय स्तंभ में से एक घोषित कर समतावादी पृथ्वी योद्धा डॉ अनुषा श्रीनिवासन अय्यर को सम्मानित किया गया। अनुषा श्रीनिवासन अय्यर ने सामाजिक, पर्यावरण के साथ-साथ सांस्कृतिक कारणों के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं के लिए भी सम्मान अर्जित किया है।
उसी के लिए, उन्हें 2019 में लाइफ्स रियल हीरोज अवार्ड्स ऑफ़ इंडिया के विजेता के रूप में कई पुरस्कार, प्रशंसा और मान्यताएँ मिली हैं, द इकोनॉमिक टाइम्स आइकन अवार्ड फॉर स्ट्रेटेजिक ब्रैंडमेकर और सोशल एंटरप्रेन्योरशिप, द इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा ईटी राइजिंग इंडियन के रूप में स्वीकृति, मिड-डे आइकन अवार्ड्स, फोर्ब्स इंडिया द्वारा ‘ब्रांड रणनीति की रानी’ के रूप में नामित किया गया। वह अंतर्राष्ट्रीय महिला उत्कृष्टता अधिकारिता पुरस्कार, राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार, महिला प्रभाव पुरस्कार, पीपुल्स एक्सीलेंस अवार्ड, इंस्पायर अवार्ड, दादासाहेब फाल्के फिल्म फाउंडेशन अवार्ड, मैं हूं बेटी अवार्ड, समाज रत्न पुरस्कार, दादा साहेब गोल्डन कैमरा अवार्ड की प्राप्तकर्ता भी हैं।
आइकॉनिक अचीवर्स अवार्ड, हरियाणा गरिमा अवार्ड, परफेक्ट वुमन अचीवर्स अवार्ड, कर्मिक अवार्ड्स, गुरुग्राम अचीवर्स अवार्ड, समग्र विज्ञान के राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में समतावादी पृथ्वी योद्धा पुरस्कार, और एम आई टी, पुणे द्वारा उनकी सामाजिक चेतना के लिए सम्मानित किया गया है और श्री स्वामी समर्थ अन्नक्षेत्र ट्रस्ट, अक्कलकोट द्वारा राष्ट्रीय कल्याण पुरस्कार से भी नवाज़ा गया है।
डॉ. अनुषा श्रीनिवासन अय्यर का संगठन, मेक अर्थ ग्रीन अगेन मेगा फाउंडेशन ग्रह की रक्षा के लिए प्रयासरत है। मानव जाति के कारण पर्यावरणीय क्षति को दूर करने के मिशन के साथ। वह, अपने असंख्य तरीकों से, न केवल पृथ्वी को हरे रंग में रंगती है, बल्कि युवाओं को भी इसके लिए खड़े होने के लिए प्रेरित और प्रेरित करती हैं। समान विचारधारा वाले जिम्मेदार व्यक्तियों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और संगठनों को एक साथ लाने में उत्प्रेरक के रूप में काम करते हुए, अनुषा नागरिक कल्याण के लिए सरकार और उसके मंत्रालयों के साथ मिलकर काम करती है।
वह आदिवासी कल्याण, वरिष्ठ नागरिक सुरक्षा, एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास और लैंगिक समानता, एलजीबीटीक्यू सशक्तिकरण, स्ट्रीट चिल्ड्रेन वेलफेयर, कॉन्क्लेव में भागीदारी और प्रेरणादायक वार्ता, एक कारण और युवाओं के साथ फिल्म निर्माण के मुद्दों पर अपने रुख के लिए भी जानी जाती हैं। अपने काम के मोर्चे पर, अनुषा श्रीनिवासन अय्यर वर्तमान में नारद पीआर एंड इमेज स्ट्रैटेजिस्ट्स की प्रबंध निदेशक हैं, जो भारत के प्रमुख पीआर, ब्रांड स्ट्रेटेजिज़ेशन और इमेज मैनेजमेंट एजेंसी में से एक हैं, इसके अलावा सम्मानित अभिनेताओं के ब्रांड कस्टोडियन भी हैं।
एक फायरब्रांड पत्रकार के रूप में जानी जाने वाली डॉ. अनुषा श्रीनिवासन अय्यर वेदांत अभिनीत बाल श्रम, आशा और खुशी पर उनकी फिल्म ‘सारे सपने अपने हैं’ के साथ वैश्विक पुरस्कार विजेता लेखक-निर्देशक के रूप में भी चर्चा में हैं।
सिद्धांत गिल और कृष्णवेनी श्रीनिवासन और रामचंद्रन श्रीनिवासन द्वारा निर्मित, इस फिल्म ने 120 से अधिक पुरस्कार जीते और यह फिल्म 150 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित होने के बाद फिल्म समीक्षकों द्वारा काफी सराही गई है।
भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा स्थापित लीड इंडिया फाउंडेशन अपने स्थापना काल से ही राष्ट्र विकास के लिए परिवर्तन की दृष्टि के साथ सामाजिक प्रेरणादायक कार्यों से जुड़ी महिलाओं को सम्मानित कर इस सहस्राब्दी में बदलाव लाकर अपने नाम पर खरा उतर रहा है।

दिव्यांगजनों के लिए समर्थनम ट्रस्ट ने किया रोजगार मेला का आयोजन

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मुम्बई। पिछले दिनों समर्थनम ट्रस्ट द्वारा एनसीएससी एटीआई कैम्पस, चूनाभट्टी, मुम्बई में एक रोजगार मेला का आयोजन सम्पन्न हुआ। जिसमें मुम्बई, ठाणे, पालघर, नवी मुंबई के 163 दिव्यांगजनों ने भाग लिया। उसमें से 30 उम्मीदवार का चयन हुआ और 60 उम्मीदवार को शॉर्टलिस्ट किया गया।


इस जॉब फेयर के माध्यम से दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सफल प्रयास किया जा रहा है। नौकरी मिलने से उनके जीवन को नई दिशा मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगी।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती शिरीन लोखंडे (एडिशनल लेबर कमिश्नर), एस के कुशवाहा (एचओओ, एनसीएससी, वीआरसी), सतीश के (पैन इंडिया प्लेसमेंट हेड), चंद्रशेखर (पैन इंडिया प्रोग्राम हेड) उपस्थित रहे।