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शांति के अग्रदूत रामकृष्ण परमहंस* 

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(बिजेन्द्र कोहली-विभूति फीचर्स)
श्री राम कृष्ण परम हंस एक सच्चे त्यागी और सात्विक व्यक्तित्व के स्वामी थे। बंगाल का ग्राम कामारपूकूर धन्य हो गया जब श्री खुदीराम जी के घर एक दिव्य पुंज ने जन्म लिया। मां चंद्रादेवी के पुत्र रत्न रामकृष्ण का बचपन का नाम गदाधर था। सात वर्ष की आयु में पिता का साया उसके सिर से उठ गया था। उनका जीवन संघर्षमय था। सांसरिक सुख और धन दौलत के पीछे वे नहीं फिरे। उनके भक्त हजारों रूपये उनको भेंट के रूप में दे देते  थे परन्तु वे स्वीकार न करते थेे।
           हिन्दी पंचांग के अनुसार रामकृष्ण परमहंस का जन्म फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर हुआ था। अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से परमहंसजी का जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल के कामारपुर में हुआ था। उनकी मृत्यु 16 अगस्त 1886 को कोलकाता में हुई थी।
          जन्म के 23 वर्ष बाद वे कलकत्ता में रानीरसमणि के मंदिर में पुरोहित पद पर आसीन हुये। रामकृष्ण जी काली मां की आराधना एवं पूजा अर्चना में संलग्न रहते। मंदिर की सेवा करते और सादा जीवन उच्च विचार रखते। उनका मानना था कि जब ईश्वर कृपा हो जाए तो दुनिया के दुख नहीं रहते। यदि हम ईश्वर की दी हुई शक्तियों का दुरूपयोग करेंगे तो वह हमसे शक्तियां छीन लेगा। पुरूषार्थ से ईश्वर कृपा का पात्र बना  जा सकता है। सिर्फ राजहंस ही दूध में से दूध का दूध और पानी का पानी कर पाता है परन्तु दूसरे पक्षी ऐसा नहीं कर सकते।  इसी प्रकार साधारण पुरूष माया  के जाल में फंस कर परमात्मा को नहीं देख सकते। चिंताओं और दुखों का रूक जाना ही ईश्वर पर पूर्ण निर्भर रहने का सच्चा स्वरूप है। मात्र ईश्वर ही विश्व का पथ प्रदर्शक और सच्चा गुरू है। जिसने आध्यात्मिक ज्ञानप्राप्त कर लिया उस पर क्राम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार का  विष प्रभाव नहीं करता। इन्हीं गुणों एवं उपदेशोंं के फलस्वरूप स्वामी विवेकानंद उनके परम शिष्य बन गए। श्री रामकृष्ण परमहंस के परलोकगमन के बाद उनकी संस्थाओं की गद्दी पर स्वामी विवेकानंद बैठे।
1886 को स्वामी रामकृष्ण परमहंस गले के रोग के कारण मृत्यु शैया पर पड़ गए। 16 अगस्त 1886 वे नश्वर शरीर को त्याग कर इस भवसागर को पार कर गए। उनका अंतिम संस्कार काशीपुर घाट पर किया गया। चन्दन की चिता पर श्री राम कृष्ण परमहंस के शरीर के तत्व धरा और वायुमंडल में समा गए और हमें आत्मज्ञान आत्म गौरव का पाठ पढ़ा गए।  (विभूति फीचर्स)

विविधता में एकता की अवधारणा और – एक राष्ट्र एक चुनाव

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      –  न्यायमूर्ति रोहित आर्य
       प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड कीन्स ने एक बार कहा था, ‘कठिनाई नए विचारों को विकसित करने में नहीं, बल्कि पुराने विचारों से मुक्त होने में है।‘ संभवत: एक देश एक चुनाव का विरोध कर रहे राजनीतिक दल और नेता पुराने विचारों से मुक्‍त होने में ही कठिनाई महसूस कर रहे हैं, या सिर्फ विरोध की राजनीति के तकाजे उन्‍हें इस अभिनव प्रयास का समर्थन करने से रोक रहे हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिसकी नींव  विविधता में एकता की अवधारणा पर टिकी हुई है। “एक राष्ट्र, एक चुनाव” इसी विचारधारा को सशक्त बनाता है, जिससे संसद और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराये जा सकें। यह विषय न केवल प्रशासनिक सुधार से जुड़ा है, बल्कि यह हमारे लोकतंत्र को अधिक संगठित, कुशल और प्रभावी बनाने की दिशा में एक एतिहासिक कदम भी है। यह प्रणाली चुनावी प्रक्रिया को सरल बनायेगी, शासन को स्थिरता प्रदान करेगी और अर्थव्यस्था पर पड़ने वाले अनावश्यक बोझ को कम करेगी।
*पहले भी होते रहे हैं एक साथ चुनाव*
हालांकि “एक राष्ट्र, एक चुनाव” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस दिशा में की गई पहल के बाद से चर्चा का विषय बना है, लेकिन यह कोई नया विचार नहीं है। भारत में 1952 के पहले आम चुनाव से ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराये जाते थे, इसके बाद राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव होते थे। उससे पहले यही प्रकिया ब्रिटिश सरकार द्वारा 1935 के भारत शासन अधिनियम में भी अपनाई गई थी। हालांकि, 1967 के बाद राजनैतिक और सामाजिक बदलावों के कारण यह व्यवस्था टूट गई। 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने संसद को भंग कर समय से पहले चुनाव कराए, जिसके बाद यह प्रवृत्ति और मजबूत हो गई। नतीजा यह हुआ कि आज हम वर्षभर में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अलग-अलग चुनाव होते हुए देखते हैं। इसका प्रतिकूल प्रभाव शासन व्यवस्था, आर्थिक संसाधनों और प्रशासनिक कार्यों पर पड़ा है। 1962 में भारतीय चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि “अगर संभव हो तो प्रयास और खर्च की पुनरावृत्ति से बचना चाहिये “। 1983 की वार्षिक रिपोर्ट में भी संसदीय और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की आवश्यकता को दोहराया गया। 170वीं विधि आयोग की रिपोर्ट ने तो इसे और आगे बढ़ाते हुये अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग को इसका प्रमुख कारण बताया। इस अनुच्छेद का अत्यधिक प्रयोग भारत के संघीय ढांचे के लिये चिन्ता का विषय बना रहा है। 2015 में 79वी स्थाई समिति की रिपोर्ट ने भी एक साथ चुनाव कराने के विचार का समर्थन किया।
*दूषित हो गई लोकतांत्रिक प्रणाली*
देश में होने वाले बहु-चरणीय चुनावों ने कई समस्याओं को जन्म दिया है और इनके कारण पैदा हुई बुराईयों ने हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ही दूषित कर दिया है। चुनावों में बाहुबल का बढ़ता प्रयोग लोकतंत्र के लिये खतरा बन गया है। मतदान के दौरान होने वाली हिंसा जैसी घटनाएं चुनावी प्रक्रिया को बाधित करती हैं। बहु-चरणीय चुनावों में कानून व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ता है। चुनावों में फर्जी समाचार, सोशल मीडिया में दुष्प्रचार और मतदाताओं को गुमराह करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल रहा है। बार-बार होने वाले चुनावों के कारण ध्यान शासन से हटकर चुनाव प्रचार पर  चला जाता है, जिससे नीतियों के कियान्वयन में देरी होती है। इससे मुफ्तखोरी की राजनीति की शुरुआत हुई जो राज्‍य की वित्‍तीय स्थिति को नुकसान पहुंचाती है। बार-बार होने वाले चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता विकास कार्यक्रमों और प्रशासन को बाधित करती है, जिससे नीतिगत गतिरोध उत्पन्न होता है और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी होती है। हर बार के चुनावों में भारी सुरक्षा बल और कर्मचारियों की तैनाती होती है, जो न सिर्फ सरकारी संसाधनों पर दबाव डालती है, बल्कि‍ आवश्‍यक सेवाओं को भी बाधित करती है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में ही 70 लाख अधिकारियों की तैनाती हुई थी। बार-बार के चुनावों से मतदाताओं पर सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पडता है। वे उदासीनता और थकान महसूस करने लगते हैं। जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी सीमित हो जाती है।
*देश के लिए हितकारी*
केन्द्र सरकार ने ‘एक देश, एक चुनाव’ के विचार को आगे बढ़ाने के लिये पूर्व राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्‍यक्षता में “कोविन्द समिति ” का गठन किया था। इस समिति के सुझावों के आधार पर 129वां संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किया गया। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एक साथ चुनाव होने से खर्च और प्रशासनिक लागत की  बचत होगी। कम चुनाव निर्बाध शासन और नीतियों का क्रियान्‍वयन सुनिश्‍चित करेंगे। एक साथ होने वाले चुनाव केन्द्र और राज्य की नीतियों के बीच समन्वय में सुधार करेंगे। मतदान प्रतिशत बढेगा और एक साथ होने वाले चुनावों से राजनीतिक स्थिरता तथा आर्थिक विकास की राह प्रशस्‍त होगी, जो निवेशकों के विश्वास को बढ़ावा देगी। समिति ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव का अनुमानित खर्च 1.35 लाख करोड़ बताया है। समिति के अनुसार एक देश, एक चुनाव से कम से कम 12000 करोड़ की बचत तो होगी ही, काले धन और भ्रष्‍टाचार पर भी रोक लगेगी। समिति के अनुसार ‘एक देश, एक चुनाव’ देश के जीडीपी के 1.5 प्रतिशत की बचत कर सकता है। इससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, अप्रत्याशित प्रचार खर्च कम होंगे और चुनाव के बाद मुद्रास्फीति में कमी होगी। यदि सभी चुनाव एक साथ कराए जाएँ, तो सरकार को पूरे पाँच साल तक निर्बाध रूप से कार्य करने का अवसर मिलेगा। इससे विकास की गति तेज होगी, सामाजिक योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया जा सकेगा और जनता को वास्तविक लाभ मिलेगा।
*सबका साथ, सबका विश्‍वास के साथ आगे बढती प्रक्रिया*
कोविंद समिति ने एक देश, एक चुनाव के मुद्दे पर व्‍यापक विचार विमर्श किया। समिति ने कुल 62 राजनीतिक दलों से इस प्रस्ताव पर सुझाव मांगे। इनमें से 47 दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी, जिनमें से 32 दलों ने इसका समर्थन किया और 15 ने इसका विरोध किया। इसके अतिरिक्त, भारत के चार पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने भी अपनी राय दी और सभी ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि यह संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन नहीं है। उच्च न्यायालयों के 9 पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकी 3 ने असहमति व्यक्त की। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों ने भी समकालिक चुनावों के पक्ष में राय दी। इसके साथ ही समिति ने पूर्व राज्य चुनाव आयुक्तों, बार कॉंसिल, एसोचेम , फिक्की  और सी.आई. आई.  के अधिकारियों से भी चर्चा की। जनता से मांगे गए सुझावों में से 83 प्रतिशत प्रतिक्रियाएं (13,396) एक देश, एक चुनाव के पक्ष में थीं, जबकी केवल 17 प्रतिशत (2,276) ने इसका विरोध किया। इससे साफ है कि वर्तमान विधेयकों को प्रस्तुत करने से पहले एक व्यापक परामर्श प्रक्रिया अपनाई गई थी।
सार रूप में कहें तो “एक राष्ट्र एक चुनाव” भारत के संविधान की मूल संरचना से प्रेरित है। इस देश के लोगों ने स्वयं ये संविधान अपनाया है, इस भावना से कि प्रत्येक नागरिक को आर्थिक, सामाजिक एवं राजनैतिक न्याय सुलभ होगा। आर्थिक एवं सामाजिक न्याय के परिप्रेक्ष्‍य में तो केन्द्र एवं राज्य सरकारों ने अतीत में कई कदम उठाए हैं, कई नीतियां बनाई हैं, परंतु राजनैतिक न्याय के क्षेत्र में प्रयास नगण्य ही रहे हैं। “एक राष्ट्र, एक चुनाव” का विचार हालंकि नया नहीं है, परंतु इच्छा शक्ति के अभाव में इसके क्रियान्‍वयन के प्रयास नहीं किए गए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के अथक प्रयासों से इस सोच पर नए सिरे से विमर्श शुरू किया गया, ताकि धरातल पर इसका क्रियान्वयन संभव हो सके। यह कदम संविधान की अधोसंरचना के अनुरूप है, क्योंकि “एक राष्ट्र एक चुनाव” जनता को राजनैतिक न्याय दिलाने की दिशा में एक साहसिक एवं अहम पहल है, जो कि देश के नागरिकों के संदर्भ में निश्चित रूप से सार्थक भी  है।
*निष्कर्ष*
जॉन एफ. कैनेडी ने कहा था, “छत की मरम्मत का सही समय तब होता है जब धूप खिली हो”। अब समय आ गया है कि समाज के विकास और सुशासन के लिए “एक राष्ट्र, एक चुनाव” के विचार को अपनाया जाए। जो “जो अधिकतम शासन न्यूनतम सरकार ” के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा।
“एक राष्ट्र एक चुनाव ” केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं है, बल्कि यह भारत के लोकतंत्र को अधिक संगठित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इस विचार को आगे बढ़ाते हुए कहा “एकता के अपने प्रयासों के तहत, हम अब एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर काम कर रहे हैं, जो भारत के लोकतंत्र को मजबूत करेगा, संसाधनों का अधिकतम उपयोग करेगा और ‘विकसित भारत’ के सपने को नई प्रगति और समृद्धि की ओर ले जाएगा।”
आइए, हम सब इस ऐतिहासिक पहल का समर्थन करें और भारत को एक अधिक संगठित, शक्तिशाली और समृद्ध लोकतंत्र बनाने में अपना योगदान दें।”एक भारत, श्रेष्ठ भारत”।
(विभूति फीचर्स) *(लेखक उच्‍च न्‍यायालय के पूर्व न्‍यायमूर्ति हैं।)*

गोदरेज ने लॉन्च की स्मार्ट सिक्योरिटी की नई रेंज 

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मुंबई (अनिल बेदाग) : गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के सुरक्षा समाधान व्यवसाय ने प्रीमियम, तकनीक-सक्षम होम लॉकर्स की अपनी नवीनतम रेंज पेश की है, जिससे सुरक्षा क्षेत्र में इसके पोर्टफोलियो और बाजार हिस्सेदारी को मजबूती मिली है। आधुनिक घरेलू सौंदर्य के साथ सहजता से डिजाइन किए गए, ये होम लॉकर्स सोफस्टिकेटेड डिजाइन को तकनीक के साथ जोड़ते हैं, जिससे बिना किसी समझौते के सुरक्षा और आकर्षक अपील दोनों सुनिश्चित होती है। व्यवसाय ने वित्त वर्ष 26 में 20% की वृद्धि का लक्ष्य रखा है।
गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के एक्जीक्यूटिव वाइस-प्रेजिडेंट  और सुरक्षा समाधान व्यवसाय के व्यापार प्रमुख श्री पुष्कर गोखले ने कहा, “एक सदी से भी अधिक समय से एक पसंदीदा ब्रांड के रूप में, हमने लगातार खुद को नया रूप दिया है और एक ऐसी श्रेणी बनाई है जो भारतीय घरों के साथ-साथ विकसित हुई है। होम लॉकर्स की हमारी नवीनतम रेंज के साथ, हम एक बार फिर सुरक्षा को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं। हम लॉकर्स की अपनी नई रेंज लॉन्च करने के लिए उत्सुक हैं जो उपभोक्ताओं की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कई अनूठी विशेषताओं, मजबूत सुरक्षा और विशाल डिजाइन से लैस हैं। हमने अपने ब्रांड की उपस्थिति को और मज़बूत करने के लिए टियर 2 बाजारों को ध्यान में रखते हुए लॉकर्स भी लॉन्च किए हैं। हम बाजार में आगे रहने के लिए लगातार नई तकनीकी साझेदारी और निवेश की खोज कर रहे हैं। हमने उन्नत सुरक्षा उत्पादों और समाधानों का एक मज़बूत पोर्टफोलियो बनाने के लिए पिछले 3 वर्षों में काफ़ी निवेश किया है।”
उन्होंने आगे कहा, “हम होम लॉकर श्रेणी में अग्रणी बने हुए हैं और हमारा लक्ष्य वित्त वर्ष 2026 तक इस श्रेणी में करीब 70% बाजार हिस्सेदारी हासिल करना है, और ये अत्याधुनिक उत्पाद सिक्योरिटी सॉल्यूशंस बाजार में हमारे नेतृत्व को और मजबूत करेंगे”।
घरों, संस्थानों, बीएफएसआई और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में सुरक्षा समाधानों का एक व्यापक सूट प्रदान करने वाली एकमात्र कंपनी के रूप में, गोदरेज रणनीतिक रूप से उपभोक्ता और संस्थागत दोनों क्षेत्रों में अपने स्टोर का विस्तार करने के लिए तैयार है। इस गति को आगे बढ़ाते हुए, कंपनी की नवीनतम होम लॉकर रेंज विविध उपभोक्ता आवश्यकताओं को पूरा करती है; विवेकपूर्ण, जगह बचाने वाले डिज़ाइन से लेकर प्रीमियम और सौंदर्यपूर्ण मज़बूत सुरक्षा समाधान तक। इस वृद्धि का एक प्रमुख चालक अनुसंधान और विकास में निरंतर निवेश है जिसमें गोदरेज महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। होम लॉकर्स की नई रेंज भविष्य के लिए तैयार सुरक्षा समाधान पेश करने की गोदरेज की प्रतिबद्धता को पुष्ट करती है जो विकसित हो रही उपभोक्ता आवश्यकताओं के अनुरूप है।
होम लॉकर्स की नई लॉन्च की गई रेंज में एनएक्स प्रो स्लाइड, एनएक्स प्रो लक्स, राइनो रीगल और एनएक्स सील शामिल हैं। विभिन्न उपभोक्ता आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किए गए इन उत्पादों में डुअल-मोड एक्सेस (डिजिटल और बायोमेट्रिक), इंटेलिजेंट इबज़ अलार्म सिस्टम, कुशल स्टोरेज और सुरुचिपूर्ण इंटीरियर हैं जो आधुनिक घर के सौंदर्यशास्त्र के साथ सुरक्षा को सहजता से एकीकृत करते हैं। इसके अलावा, गोदरेज ने डिफेंडर ऑरम प्रो रॉयल क्लास ई सेफ भी लॉन्च किया है, जो ज्वैलर्स के लिए डिजाइन किया गया एक बीआईएस-प्रमाणित उच्च-सुरक्षा वाला सेफ है, जो जून 2024 से प्रभावी नए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) को पूरा करता है। एक्यूगोल्ड आईईडीएक्स सीरीज़ ज्वैलर्स, बैंकों और हॉलमार्किंग केंद्रों के लिए सटीक, गैर-विनाशकारी सोने की जांच को सक्षम बनाती है। गोदरेज एमएक्स पोर्टेबल स्ट्रांग रूम मॉड्यूलर पैनल उच्च सुरक्षा, आसान परिवहन और सेटअप प्रदान करते हैं।

*प्रयागराज महाकुंभ में साकार हुई मोदी-योगी की संकल्पना*

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                (सुरेश पचौरी-विनायक फीचर्स)
*माघे मासे गंगे स्नानं यः कुरुते नर: ।*
*युगकोटिसहस्राणि तिष्ठंति पितृदेवताः।।*
            स्कंद पुराण में उल्लेख है कि माघ मास में गंगा में स्नान करने वाले व्यक्ति के पितर युगों-युगों तक स्वर्ग में वास करते हैं। कितना ही बिरला अवसर है कि प्रयागराज में संगम किनारे श्रद्धा का महाकुंभ आयोजित हुआ और सनातनियों ने आस्‍था की डुबकी लगाई। यूं तो यह आयोजन सदियों से चला आ रहा है लेकिन इस वर्ष इस आस्‍था को सम्‍मान देने में भाजपा की सरकारों का अथक योगदान भी रहा है। महाकुंभ जैसे महाआयोजन में करोड़ों श्रद्धालुओं का सुचारू रूप से प्रबंधन एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्‍व में उत्‍तर प्रदेश की योगी सरकार ने जिस कुशलता से इस वृहत्‍तर दायित्‍व को संभाला है वह वर्षों तक सराहना के साथ याद किया जाएगा। धर्म के प्रति निष्‍ठा और समर्पण के इस अद्भुत आयोजन ने ऐसा संगम रचा जो कल्‍पनातीत है। सुरक्षा, सुविधाएं और सुगमता प्रदान करने के जतन के साथ ही साथ इस आयोजन को पर्यावरण अनुकूल बनाने के विशेष प्रयास हुए यह स्‍तुत्‍य है। इन प्रयासों ने महाकुंभ को केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक एवं पर्यावरणीय सरोकरों के प्रति चेतना का संदेश भी दिया।
          हमारी भारतीय सनातन संस्कृति और परंपरा में कुंभ पर्व सहस्राब्दियों से श्रद्धा, आस्था और ज्ञान की साधना का पर्व रहा है। भगवान आदि शंकराचार्य ने भारतीय जनमानस में धर्म की भावना जगाने और संस्कृति की चेतना मजबूत करने के लिए देश के चार कोनों पर चार मठ बनाये। पूर्व में जगन्नाथपुरी, पश्चिम में द्वारिका, उत्तर में जोशीमठ तथा दक्षिण में श्रृंगेरी मठ। आदि शंकराचार्य जी ने देश की चार प्रमुख नदियों गंगा, यमुना, क्षिप्रा व गोदावरी के तट पर चार शहरों प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में चार कुंभ-मेलों के आयोजन की रूपरेखा रची। कुंभपर्व का आधार खगोलीय घटना है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहों की गति और उनके मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन कर कुंभ मेलों के आयोजन की तिथियां और स्थान तय होते है। 12 साल के अंतराल से सूर्य और गुरू की राशि विशेष में स्थिति कुंभ पर्व का समय और स्थल निर्धारित करते है।
    गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में उल्लेख किया है: *“ माघ मकरगत रवि जब होई। तीरथ पतिहि आव सब कोई’’* अर्थात् मकरराशि में सूर्य एवं वृषभ राशि में गुरू का प्रवेश होता है तब तीर्थ राज प्रयाग में कुंभ पर्व आयोजित होता है।
        कुंभ को लेकर पौराणिक आधार भी है। देवताओं और दानवों ने समुद्रमंथन किया। इस मंथन में अमृत निकला। अमृत के बंटवारे की छीना छपटी में अमृत कलश से कुछ बूंदे छलकी। ये अमृत बूंदे प्रयाग, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में गिरीं। इन शहरों के पास से बहने वाली नदियां गंगा, यमुना, गोदावरी, एवं क्षिप्रा अमृतमयी हो गई। इन्ही स्थलों पर कुंभपर्व आयोजित किया जाता है।
         कुंभ पर्व नदियों के महत्व का महापर्व है। यह विविधता में एकता प्रदर्शित करने में केन्द्रीय भूमिका निभाता है। कुंभ पर्व ‘वसुधैव कुटंबकम‘ की भावना को साकार करता है। यह आयोजन सर्वसमावेशी संस्कृति एवं भारतीय चिंतन की वैज्ञानिकता का प्रतीक है। कुंभ महापर्व हमें आत्मशुद्धि, परोपकार एवं सामाजिक सद्भाव का संदेश देता है। महाकुंभ के माध्यम से भारतीय संस्कृति और भारतीय जीवन दर्शन को वैश्विक पहचान मिली है। कुंभ पर्व भारतीय संस्कृति की गहराई, सहिष्णुता और एकता का अद्भुत संगम है। यह पर्व केवल स्नान का पर्व नही है बल्कि जीवन के गूढ़ रहस्यों को जानने आत्मचिंतन करने और मानवता के प्रति समर्पण व्यक्त करने का अवसर है। भारतीय सनातन परंपरा में यह आयोजन अनूठी आस्था, संस्कृति और दर्शन का सदियों से परिचायक रहा है और आगे भी रहेगा।
          इस वर्ष 2025 में प्रयागराज में आयोजित कुंभ अपने आयोजन के आरंभ से ही अद्भुत दृश्‍य प्रस्‍तुत करता रहा है। मकरसंक्रांति से महाशिवरात्रि तक लगभग 45 दिन चलने वाले कुंभ महापर्व की छटा ही निराली रही है। प्रतिदिन औसतन 1.5 करोड़ लोग कुंभ में गंगा स्नान के लिए प्रयागराज पहुंचे हैं। देश ने सनातन की ऐसी जबरदस्त ताकत पहले कभी नहीं देखी। विश्व चकित है। पूरी दुनिया अचरज से सनातन संस्कृति की प्रस्फुटित होती इस शक्ति को समझने की कोशिश कर रही है। महाकुंभ के भव्‍य दृश्‍यों ने हमें हतप्रभ किया है और अपनी संस्‍कृति और धार्मिक मान्‍यताओं के प्रति गहन आस्‍था और गौरव से भर दिया है।
         महाकुंभ का संपूर्ण मानवता को स्पष्ट संदेश है कि आस्था और आध्यात्म में कोई भेद नहीं होता। यहां कोई भी जाति या वर्ग का भेद नहीं होता। यहां राजा हो या रंक, साधु हो या गृहस्थ सब मां गंगा की गोद में पुण्य अर्जित करने आते है। यह समरसता ही कुंभ की सबसे बड़ी विशेषता है। प्रयागराज का कण-कण अलौकिकता का स्मरण कराता है। त्रिवेणी स्नान के दौरान जो शान्ति और दिव्यता का अनुभव होता है उसे शब्दों में व्यक्त करना असंभव है। महाकुंभ में स्नान केवल धार्मिक कार्य मात्र नहीं है, बल्कि आत्मशुद्धि की प्रक्रिया है। महाकुंभ में आकर यह अनुभव होता है कि सनातन धर्म केवल पूजा पद्धति नहीं बल्कि जीवन जीने की एक महान परंपरा है। साधु संतो के प्रवचन मंत्रों की ध्वनि अखाड़ों की भव्यता और गंगा आरती का सौन्दर्य मन में ईश्वरीय अनुभूति  कराता है।
      मेरे लिए वे असीम शांति और गौरव के पल थे जब मैंने पुण्य भूमि प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम में स्नान कर मां गंगा की पूजा-अर्चना कर अपनी आस्‍था प्रकट की। किसी भी श्रद्धालु की तरह मेरे लिए भी यह असीम आनंद के क्षण थे। गंगा तटों पर गूंजती मंत्रध्वनियां, हवनकुडों से उठती धूप की सुवास आयोजन को दिव्यता प्रदान करती है। इस संकल्पना के लिए माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्‍यनाथ जी का नेतृत्‍व स्तुत्य और स्मरणीय है। मैंने अनुभव किया कि गंगा मैया में लगाई गई हर डुबकी एक अलौकिक आनंद की अनुभूति करवाती हैं। आत्मा निर्मल होकर परमतत्व से साक्षात्कार करती है। इसी साक्षात्‍कार के उपरांत यह कह सकता हूं कि 2025 का प्रयागराज महाकुंभ एक आयोजन ही नहीं अपितु सनातन की जीवंत धरोहर बनकर प्रकट हुआ है।
     इस दिव्‍यता को माननीय मोदी जी के कथन में भी अनुभूत किया जा सकता है। प्रयागराज में गंगा स्‍नान के उपरांत  यशस्वी एवं तपस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा था, “प्रयागराज में महाकुंभ में आकर धन्य हो गया। संगम पर स्नान एक दिव्य जुड़ाव का क्षण है और इसमें भाग लेने वाले करोड़ों अन्य लोगों की तरह मैं भी भक्ति की भावना से भर गया। मां गंगा सभी को शांति, ज्ञान, अच्छे स्वास्थ्य और सद्भाव का आशीर्वाद दें।”
       प्रधानमंत्री मोदी जी की प्रार्थनाओं में हमारी प्रार्थना के स्‍वर भी शामिल हैं। यशस्वी एवं तपस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के सभी सनातनधर्मियों को नया गौरव प्राप्त हुआ है। उनके शासनकाल में हमारी आस्था के प्रतीकों और धार्मिक स्थलों का पुनरूत्थान हुआ है। मोदी जी के कार्यकाल में अयोध्या में रामलला की प्राणप्रतिष्ठा, काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरीडोर, महाकाल लोक परियोजना, केदारनाथ मंदिर एवं जगन्नाथ मंदिर का सौंदर्यीकरण जैसे श्रेष्‍ठतम कार्यों से भारत का सांस्कृतिक वैभव प्रतिष्ठित हुआ है  तथा लोक आस्था के महत्व में अद्वितीय वृद्धि हुई है।
        भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का यह महाकुंभ उत्सव सभी के जीवन में नयी ऊर्जा और उत्साह का संचार करे, यही ईश्वर से प्रार्थना है। मेरा मानना है कि महाकुंभ 2025 के माध्यम से जागृत हुई सनातन की यह चैतन्य धारा राष्ट्रहित में प्रवाहित होकर एक नये भारत के निर्माण में सहायक सिद्ध होगी। (लेखक भाजपा के वरिष्‍ठ नेता तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं।)(विनायक फीचर्स)

दिल्ली सरकार :आकांक्षाओं,अपेक्षाओं पर खरे उतरने की चुनौती* 

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दिल्ली सरकार :आकांक्षाओं,अपेक्षाओं पर खरे उतरने की चुनौती*
             (जोगिंदर पाल जिंदर-विनायक फीचर्स)
     दिल्ली की नवनिर्वाचित मुख्य मंत्री रेखा गुप्ता की प्रेस कांफ्रेंस से स्कूली दिनों की याद ताजा हो गई । जैसे ही हम पुरानी क्लास से नयी क्लास में जाते तो नयी क्लास के टीचर कहते पिछली क्लास में क्या पढ़ कर आए हो ? और अगले साल फिर यही क्रम दोहराया जाता । नयी क्लास में फिर टीचर पूछते पिछली क्लास में क्या पढ़ कर आए हो ? यही हाल सरकारों का है जब भी कोई नयी सरकार बनती है आते ही पिछली सरकार पर पहला सीधा हमला, ” पिछली सरकार खजाना खाली कर के गयी है ।” पिछली क्लास में क्या पढ़ कर आए हो की तरह यह वाक्य बार-बार दोहराया जाता है चाहे सरकार जिस की भी बने ।
      ढेर सारे वादे और योजनाएं पुरानी आप सरकार की हैं । बहुत से वादे भाजपा भी कर के आई है कि पिछली सभी योजनाओं के साथ-साथ उसके दावों का अतिरिक्त लाभ दिल्ली की जनता को मिलेगा । इतना ही नहीं इस बार स्वयं मोदी की भी गारंटी है ।
            अब अगली बात यह कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने भी  मुख्यमंत्री के कार्यालय में लगी बाबा साहब अंबेडकर और भगत सिंह की फोटो हटाने का आरोप लगाया । जिस पर स्पष्टीकरण यह आया कि हटाई नहीं बल्कि स्थान बदला गया है । चलो इसी बहाने से जनता को पता तो चला कि बाबा साहब भीम राव अंबेडकर  और भगत सिंह का इनके दिलों में कितना और कहां स्थान है ? या फिर बाबा साहब और भगत सिंह के  नाम का उपयोग मात्र उनके अनुयायियों को भ्रमित करने के लिए प्रयोग किया जाता है ?
     इस मामले में आम आदमी पार्टी भी कोई दूध की धुली हुई नहीं है । इनका भी बाबा साहब, भगत सिंह और दलित‌ प्रेम दिखावा मात्र ही था । क्योंकि यह वही पार्टी है जिसने बाबा साहब की 22 प्रतिज्ञाएं लेने पर अपने ही मंत्री राजेंद्र पाल गौतम से इस्तीफा ले लिया था । केजरीवाल करेंसी नोटों पर किसी विशेष देवी-देवता का चित्र प्रकाशित करने के हिमायती थे । खुद को हनुमान भक्त साबित करते थे । बुजुर्गों को तीर्थ यात्राएं करवाते थे । इतने अधिक धार्मिक लोग बाबा साहब और भगत सिंह के अनुयाई कैसे हो सकते हैं ?
     खैर नयी सरकार को आते ही नया कुछ करना ही पड़ता है चाहे फोटो लगाई जाएं या हटाई जाएं ‌। अपनी-अपनी सुविधा, आस्था और विश्वास का मामला है । जनता को इससे क्या सरोकर ! दिल्ली चुनाव प्रचार की एक बात अच्छी लगी कि इसमें बंटोगे तो कटोगे का नारा नहीं दिया गया । समझदार दिल्ली की जनता ने भाजपा के सर पर ताज रखा है । बस नयी सरकार जनता की आशाओं, अपेक्षाओं पर खरी उतरे, यही कामना की जानी चाहिए ।(विनायक फीचर्स)

विशेष अधिवेशन की विषयवस्तु ‘भारत -पीयूष गोयल

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पीयूष गोयल ने सप्लाई चेन को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उच्च गुणवत्ता वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद उपलब्ध कराने का आह्वान किया


श्री गोयल ने इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री से संरक्षणवाद को छोड़कर उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया

भारत को इलेक्ट्रिकल वस्तुओं का वन स्टॉप शॉप बनना चाहिए, सात वर्षों में 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार निर्यात लक्ष्य: श्री गोयल

भारत की इलेक्ट्रॉनिक गुड्स इंडस्ट्री को अधिक लचीली सप्लाई चेन, गुणवत्ता मानकों का अद्यतन करने और प्रतिस्पर्धी दरों पर दुनिया को उच्च गुणवत्ता वाले सामान व सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए। यह बात आज नई दिल्ली में इंडियन इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईईईएमए) की ओर से आयोजित ‘इलेक्रमा’ के 16वें संस्करण में मुख्य अतिथि के तौर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने अपने संबोधन के दौरान कही।  मंत्री ने प्रतिभागियों से विनिर्माण में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया।

मंत्री ने इस विषय पर प्रकाश डाला कि उपभोक्ताओं को बेहतर सौदा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करके उपभोक्ताओं की देखभाल करना इंडस्ट्री की जिम्मेदारी है।  उन्होंने मौजूद उद्योग जगत के नेताओं और प्रतिभागियों से संरक्षणवाद से दूर रहने और उद्योग, खासकर एमएसएमई क्षेत्र के हितों को संतुलित करने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। एक सीमा के बाद संरक्षणवाद उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाने लगता है। उन्होंने कहा कि ग्राहकों के साथ-साथ एमएसएमई क्षेत्र के हितों को संतुलित करना इंडस्ट्री की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

मंत्री गोयल ने बताया कि देश 2025 में इलेक्ट्रॉनिक गुड्स का निर्यात मात्रा के आधार पर दूसरे पायदान पर है, जबकि 2015 में यह 167वें पायदान पर था। उन्होंने कहा कि जनवरी,  2025 में अकेले इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का निर्यात मात्रा 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी। उन्होंने कहा कि भारत को इलेक्ट्रॉनिक गुड्स के लिए वन स्टॉप शॉप बनना चाहिए और इंडस्ट्री से अगले सात वर्षों में 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार निर्यात लक्ष्य तक पहुंचने का लक्ष्य रखने का आग्रह किया।

मंत्री ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स इंडस्ट्री ने बीते दशक में अपने ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और संस्थापित क्षमता को दोगुना कर दिया है।  उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने देश में 1,800 वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) सेटअप करने में मदद की है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य भविष्य के लिए तैयार कार्यबल विकसित करना और देश में उत्पादित एसटीईएम स्नातकों की उच्च संख्या का लाभ उठाते हुए नवाचार को प्रोत्साहन देना है।

विशेष अधिवेशन की विषयवस्तु ‘भारत – एक विश्व मित्र’ पर बोलते हुए, श्री गोयल ने कहा कि भारत राष्ट्र को एक परिवार के तौर पर देखने में गर्व महसूस करता है, जो दुनिया के सभी देशों के साथ एक दूसरे के साथ निष्पक्ष, न्यायसंगत और संतुलित साझेदारी में काम करना चाहता है।  भारत विकसित दुनिया के साथ मजबूत स्थिति में जुड़ना चाहता है और उन्हें सस्ती कीमतों पर उच्च गुणवत्ता की वस्तुएं और सेवाएं प्रस्तुत करना चाहता है।

मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’, ‘मेक इन इंडिया’,  ‘डिजाइन इन इंडिया’ और ‘सर्व फ्रॉम इंडिया’ जैसी विभिन्न पहलों के साथ ग्राहकों को स्थानीय उत्पाद खरीदने और व्यवसायों को वैश्विक स्तर पर जाने में योग्य बनाने के प्रयासों से देश के विकास में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, “अर्थव्यवस्था को बदलने, उच्च गुणवत्ता वाले विनिर्माण और सेवाओं के प्रावधान, नीति निश्चितता और विकास की गति और पैमाने के लिए कार्यबल को प्रशिक्षित करने की सरकार की प्रतिबद्धताओं ने इस मील के पत्थर को जन्म दिया है”।

महाशिवरात्रि पर दूल्हा बनकर सजते-संवरते हैं महाकाल*

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     उज्जयिनी धर्म और कर्म की वह पौराणिक नगरी है जहां सनातन धर्म की परम्पराएँ जीवंत हो उठती है। पौराणिक तथ्य और कथ्य उज्जयिनी के प्राण हैं। हजारों वर्षो की प्राचीन परम्पराएँ कितने ही राजा महाराजाओं के चले जाने के बाद भी आज तक निर्बाध रूप से चल रही है। ये परम्पराएँ आस्था और भक्ति का अनूठा संगम है। जहां भक्त के वशीभूत भगवान भी सामान्य मनुष्य जीवन की परम्परा का निर्वाहन करते है और भक्तों को उनकी इच्छा अनुरूप दर्शन भी देते है।
        भूतभावन आदिदेव महादेव के महाकाल रूप में अवंतिकापुरी को पावन करते है। वे महाकाल भी अपने विवाह की वर्षगांठ याने  शिवरात्रि के अवसर पर भक्तों के वशीभूत हो जाते है। हर वर्ष शिव नवरात्रि पर नौ दिन तक महाकाल दूल्हे के रूप में सजे संवरे नज़र आते है। शिव नवरात्रि के दौरान महाकालेश्वर के दरबार की छटा निराली होती है। मंदिर नौ दिवसीय उत्सव का साक्षी बनता है, जिसमें भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार और भव्य पूजन संपन्न होता है। यह आयोजन फाल्गुन कृष्ण पंचमी से महाशिवरात्रि के अगले दिन तक चलता है, जो शिवभक्तों के लिए असीम श्रद्धा और आध्यात्मिकता का केंद्र बन जाता है।
*शिव नवरात्रि की पौराणिक महत्ता*
मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने हेतु शिव नवरात्रि के दौरान कठिन तपस्या और आराधना की थी। इसी कारण श्रद्धालु इस अवधि में उपवास, पूजा-अर्चना और साधना कर भगवान शिव को प्रसन्न करके उनकी कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
*महाकाल का दिव्य श्रृंगार*
महाशिवरात्रि को भगवान शिव एवं माता पार्वती के विवाह का पर्व माना जाता है। जिस प्रकार विवाह से पहले वर को हल्दी लगाई जाती है, उसी प्रकार महाकाल मंदिर में नौ दिनों तक भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किया जाता है। वैसे तो भगवान शिव को हल्दी लगाना निषेध हैं। परंतु इस अवधि में उन्हे हल्दी, चंदन, केसर का उबटन, सुगंधित इत्र, औषधि और फलों के रस से स्नान कराया जाता है। इसके बाद आकर्षक वस्त्र, आभूषण, मुकुट, छत्र, और विभिन्न मुखारविंदों से भगवान महाकाल को अलंकृत किया जाता है।
*पूजन विधि और अनुष्ठान*
शिव नवरात्रि के पहले दिन पुजारियों द्वारा नैवेद्य कक्ष में भगवान चंद्रमौलेश्वर और कोटेश्वर महादेव की पूजा के साथ संकल्प लिया जाता है। प्रतिदिन ब्राह्मणों द्वारा पंचामृत अभिषेक और रुद्रपाठ किया जाता है। इसके बाद भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार होता है, जिसमें विभिन्न स्वरूपों में भगवान के दर्शन किए जाते हैं:
1.  चंदन श्रृंगार
2.  शेषनाग श्रृंगार
3. घटाटोप मुखारविंद श्रृंगार
4. छत्रधारी श्रृंगार
5. होलकर मुखारविंद श्रृंगार
6. मनमहेश स्वरूप श्रृंगार
7. उमा-महेश स्वरूप श्रृंगार
8. शिव तांडव श्रृंगार
9. सप्तधान श्रृंगार
प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक विशेष पूजन होता है।
*भस्म आरती एवं हरिकथा*
शिवरात्रि के दिन भस्म आरती दोपहर में संपन्न होती है, जो वर्ष में केवल एक बार होती है। शिव नवरात्रि के दौरान भगवान महाकाल हरिकथा श्रवण करते हैं, जिसमें मंदिर परिसर में 113 वर्षों से नारदीय संकीर्तन की परंपरा चली आ रही है। मंदिर प्रांगण में आकर्षक विद्युत सजावट और पुष्प अलंकरण किया जाता है।
*महाशिवरात्रि एवं सेहरा दर्शन*
        महाशिवरात्रि के दिन भगवान महाकाल को विशेष जलाभिषेक और पूजन के बाद अर्धरात्रि में महानिशा काल की विशेष पूजा की जाती है। अगले दिन भगवान का सेहरा दर्शन होता है, जिसमें सवा मन पुष्पों एवं फलों से अलंकृत मुकुट, छत्र, कुंडल, तिलक, त्रिपुंड, रुद्राक्ष की मालाओं से भगवान महाकाल को श्रृंगारित किया जाता है। भक्तगण इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आनंद से अभिभूत हो जाते हैं।
*श्रद्धालुओं की आस्था*
भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन से भक्तगण आत्मिक शांति और आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति करते हैं। इस दिव्य दर्शन के बाद श्रद्धालु यहां से लौटने का मन नहीं करते और उनके मन में भगवान महाकाल की कृपा प्राप्त करने की प्रबल भावना जाग्रत होती है।
(विनायक फीचर्स)

(देशना जैन-विनायक फीचर्स)*

प्रयागराज महाकुंभ-2025 के अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि के लिए तैयारियों अंतिम चरण में

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 रेलवे, हवाई अड्डों और यातायात प्रबंधन की विशेष व्यवस्था लागू


महाशिवरात्रि के पावन पर आयोजित होने वाले पवित्र स्नान को सफल एवं सुरक्षित बनाने के लिये प्रशासन द्वारा विभिन्न प्रकार की व्यवस्थाओं से जुड़े टीमों को फील्ड में रहकर व्यवस्था को सुनिश्चित करने के दिये गये हैं निर्देश

प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी के बीच आयोजित किये जा रहे  महाकुंभ में 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर होने वाले अंतिम स्नान को लेकर प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां की  जा रही हैं। प्रशासन द्वारा महाशिवरात्रि स्नान को सुरक्षित एवं सफल बनाने के लिए तैयारियां अंतिम चरण में है। महाकुंभ 2025 में अब तक  करोड़ों श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम पर पवित्र स्नान किया ।

महाशिवरात्रि स्नान के दौरान श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित अनुभव प्रदान करने के लिए रेलवे, हवाई अड्डों, सड़क परिवहन और पार्किंग व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया गया है। प्रयागराज में आने – जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेनों की व्यवस्था की है, जबकि बस और निजी वाहनों के लिए विशेष यातायात प्रबंधन लागू किया गया है। प्रमुख स्नान घाटों, प्रवेश मार्गों और पार्किंग स्थलों पर पर्याप्त दिशा-निर्देश चिह्न लगाए गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

भीड़ नियंत्रण के लिए जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी लगातार फील्ड में रहकर व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। प्रयागराज के जिलाधिकारी श्री रविन्द्र कुमार माँदड़ ने बताया कि महाकुंभ के अंतिम स्नान पर्व को सुचारु रुप से सम्पन्न कराने के लिये एक विस्तृत योजना तैयार की गयी है, जिसमें भीड़-प्रबंधन, यातायात प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाएं और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को प्राथमिकता दी गई है। सभी सुरक्षा एजेंसियां और आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट मोड पर रखा गया हैं, जिससे किसी भी स्थिति से त्वरित और प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

महाकुंभ के दौरान विभिन्न व्यवस्थाओं से जुड़े टीमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिये नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। एडीजी जोन और मंडलायुक्त प्रयागराज के नेतृत्व में इन बैठकों के माध्यम से व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी की जा रही है। महाशिवरात्रि के अवसर पर स्नान के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

*विकसित भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी भोपाल जीआईएस* 

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                (पवन वर्मा-विभूति फीचर्स)
डॉ मोहन यादव ने जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की सवा साल पहले शपथ ली थी, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि वे एक विजनरी नेता भी साबित होंगे। वे अपने विजन के साथ न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 के विकसित भारत के विजन के लिए भी साथ में कदमताल करते हुए दिखाई देने लगे हैं। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेर्स्ट समिट इसी का परिणाम है। भोपाल में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर समिट हो रही है। जैसे-जैसे इन समिट के दिन करीब आते जा रहे हैं, प्रदेश के नागरिकों में इसे लेकर उत्सुकता और उत्साह भी बढता जा रहा है।
मध्य प्रदेश की राजधानी पहली बार देश ही नहीं वरन दुनिया भर के उद्योगपतियों के स्वागत के लिए सज रही है। राजा भोज और तालों की नगरी के नाम से अब दुनिया भर में विख्यात भोपाल मध्य प्रदेश में उद्योगों का जाल फैलाने और बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए नई इबादत लिखने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस समिट से पहले मध्यप्रदेश के संभागीय मुख्यालयों पर  रीजनल इंडस्ट्री कान्क्लेव का आयोजन किया। जब उन्होंने रीजनल इंडस्ट्री कान्क्लेव करने की करने की घोषणा की थी तब भी किसी को  यह यकीन करना आसान नहीं था कि  यह कॉन्क्लेव हकीकत में सफल होगी, लेकिन यह हुआ और हर संभाग में अलग-अलग उद्योगपति शामिल हुए और उन्होंने यहां पर उद्योग लगाने के वादे किए। इन पर अब तेजी से काम चल रहा है। इधर मध्य प्रदेश में निवेश लाने के लिए मोहन यादव के प्रयास सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रहे, वे यूके, जर्मनी और जापान की भी यात्रा कर निवेश प्रस्ताव लाने में सफल रहे।
रीजनल इंडस्ट्रीज कॉनक्लेव की सफलता ने ही यह संकेत दे दिए थे कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की सोच मध्यप्रदेश के विकास को लेकर एकदम स्पष्ट है। भोपाल में 24 और 25 फरवरी को होने जा रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ऐतिहासिक होगी, यह भरोसा राजनीतिक ही नहीं बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों और आम नागरिकों को भी हो गया है।
अपने अमेरिका की सफलतम यात्रा से लौटने के ठीक दस दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समिट का उद्घाटन करेंगे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस समिट में आना ही यह संकेत देता है कि मध्य प्रदेश में इस बार की ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट पुरानी सभी जीआईएस से ज्यादा कामयाब होगी।
 *विश्व स्तरीय संस्थाएं भी होगी शामिल*
जीआईएस में विदेशों से भी उद्योगपति आएंगे, इनके अलावा विश्व बैंक सहित 11 प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय वैश्विक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगें। वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एजेंसीज अपनी विशेषज्ञता यहां प्रदान करेंगी। जापान एक्सटर्नल ट्रेड आर्गनाईजेशन (जेटो) और ताइवान एक्सटर्नल ट्रेड डेवलपमेंट काउंसिल (टेटा) भी इसमें भागीदारी करेगें। इससे इंडो पैसिफिक आर्थिक साझेदारी संभव हो सकेगी। सिंगापुर इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स और इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स इन कोरिया की भागीदारी क्षेत्रीय संबंधों को मजबूत करेगी। इसी तरह यूरोपिय हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए जर्मनी ट्रेड एंड इन्वेस्ट, इंडो जर्मन चेंबर ऑफ कॉमर्स, इंडिया आयरलैंड काउंसिल और इटालियन ट्रेड एजेंसी भी यहां पर अपनी भागीदारी करेगी। यूरोपिय हितों से जुड़ी एजेंसियों का भोपाल में होने वाली जीआईएस में शामिल होना मध्य प्रदेश की विकास यात्रा में यूरोप की गहरी रूचि को बताता है। इस समिट में ओटावा कनाडा और उत्तर अमेरिका से जुड़े उद्योगपतियों का सम्मिलित होना भी उनके यहां पर निवेश करने की संभावनाओं को बढाता है।
 *तीस देशों के प्रवासी भारतीय भी होंगे शामिल*
जीआईएस में पहली बार अलग से प्रवासी भारतीय समिट भी होगी। इसमें तीस देशों के 550 से अधिक प्रवासी भारतीय शामिल होंगे। इसमें अमरीका, ब्रिटेन, जापान, जर्मनी, यूएई से प्रतिनिधि आएंगे। ब्रिटेन की गैरार्ड क्रॉस टाउन काउंसिल की पहली महिला मेयर प्रेरणा भारद्वाज  और हाउस ऑफ लॉर्डस के सदस्य रेमी रेंजर भी इस सम्मिट में शामिल होंगे। इसी तरह अमेरिका में फ्रेंडस ऑफ एमपी के अध्यक्ष प्रमीत माकोडे, ब्रिटेन में फ्रेंडस ऑफ एमपी रोहित दीक्षित, यूएई अबू धाबी चैप्टर की अध्यक्ष लीना वैद्य, यूएई चैप्टर के संयोजक जितेंद्र वैद्य भी इसमें शामिल होंगे।
 *जीसीसी नीति  होगी सहायक*
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जीसीसी पॉलिसी 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लांच कर दिया है। जीसीसी के क्षेत्र में राज्य नई उंचाईयों तक पहुंच सकता है। मध्य प्रदेश इस सेक्टर में अपनी भागीदारी को तेजी से बढाने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह नीति विशेष रूप से आइटी, इंजीनियरिंग, वित्त, बिजनेस प्रोसेस,आउटसोर्सिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित करने पर केंन्द्रित है और राज्य का औद्योगिक परिदृश्य पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखती है। इस समिट से जीसीसी के लिए बड़ी संख्या में निवेश प्रस्तावों की उम्मीद जागी है। जीसीसी वे केंद्र है जिन्हें अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अपने मुख्यालय से अलग अन्य देशों में स्थापित करती है। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर अपने ऑपरेशंस को सुचारू रूप से चलाना और अत्याधुनिक तकनीकों का लाभ उठाना होता है। इन केंद्रों में साफ्टवेयर डेवलपमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स, वित्तीय सेवाएं, अनुसंधान एवं विकास, सप्लाई चेन मैनेजमेंट और ग्राहक सहायता जैसी सेवाएं दी जाती हैं। (विभूति फीचर्स)

म्युज़िक वीडियो “टिक टॉक ड्रीम्स” हुआ लॉन्च 

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निर्देशक निलेश मल्होत्रा और सह निर्देशक डॉ. सुरैना मल्होत्रा के निर्देशन में बनी है अलबम से डैनियल का डेब्यू

मुंबई। निर्माता निर्देशक निलेश मल्होत्रा का अंग्रेजी म्यूजिक वीडियो “टिक टॉक ड्रीम्स” 17 फरवरी 2025 को लॉन्च हुआ। इसके वीडियो में न्यूकमर एक्टर डैनिएल ने अभिनय किया है, जिन्होंने एमिल मोहन के साथ इसे गाया भी है। मुम्बई में अंधेरी स्थित इंपा के ऑफ़िस में इसका अनावरण किया गया। ‘मल्होत्रा प्रोडक्शंस’ के सहयोग से पैनोरमा विज़ुअल्स के बैनर तले बने म्युज़िक वीडियो “टिक टॉक ड्रीम्स” में डैनिएल और पोली की जोड़ी दिखाई देगी। वीडियो के सह निर्देशक डॉ. सुरैना मल्होत्रा, सिंगर एमिल मोहन और डैनिएल, गीतकार कैरिन वाट, संगीतकार अमर प्रभाकर देसाई, कोरियोग्राफ़र अजीत गडे और एडिटर वैभव कांबले हैं। मुम्बई में फिल्माया गया यह गीत एक्टर डैनिएल का पहला वीडियो है। यह गीत पीवी (पैनोरमा विजुअल्स म्युज़िक) के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर रिलीज होगा। निर्माता निर्देशक, अभिनेता, मॉडल होने के साथ साथ निलेश मल्होत्रा एक बहुमुखी और अनुभवी पर्सनालिटी हैं। उनका कहना है कि इस वीडियो सॉन्ग का कॉन्सेप्ट आजकल सोशल मीडिया के इर्दगिर्द घूमती यंगस्टर्स की जिंदगी पर आधारित है। फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से युवा लड़के लड़की एक दूसरे से दोस्ती करते हैं, एक दूजे को पसन्द करते हैं, प्यार करने लगते हैं, सपने देखने लगते हैं। लेकिन फिर वीडियो के अंत में ऐसा क्लाइमेक्स है कि लड़के को झटका लगता है और दर्शक भी हैरान रह जाएंगे। डायरेक्टर निलेश मल्होत्रा ने आगे बताया कि हम इस सॉन्ग के पार्ट 2 के बारे में भी सोच रहे हैं जो इसी स्टोरी को आगे बढ़ाएगा। बतौर हीरो 5 फिल्में, 15 टीवी शोज़, मॉडल के रूप में 35 प्रोडक्ट्स के विज्ञापन में निलेश मल्होत्रा ने काम किया है। बतौर फ़िल्ममेकर वह 3 फिल्में बना चुके हैं। वह लगातार म्युज़िक वीडियो करते रहते हैं। बतौर निर्माता निर्देशक टिक टॉक ड्रीम्स उनका 8वां अल्बम है। इससे पहले 6-7 म्युज़िक वीडियो उन्होंने विदेशों में शूट किए हैं।
डॉ. सुरैना मल्होत्रा, राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी – शरदचंद्र पवार पक्ष की वरिष्ठ नेता हैं। वह पार्टी के – अध्यक्ष राष्ट्रीय – ऑल इंडिया आय टी सेल व सोशल  मीडिया – राष्ट्रवादी महिला काँग्रेस – शरदचंद्र पवार; – राष्ट्रीय महासचिव – NMCSP; महाराष्ट्र प्रवक्ता – NCPSP, निरीक्षक – मुम्बई महिला पदों पर है।
निर्माता निर्देशक और मुख्य अभिनेता के रूप में निलेश मल्होत्रा की पहली अंग्रेजी फिल्म ‘हेन्कि पेन्कि’ 2013 में ‘कान्स फिल्म फेस्टिवल’ (शॉर्ट फिल्म कॉर्नर) में चुनी गई थी और उसी साल मुंबई में ‘मिनी बॉक्स ऑफिस फिल्म फेस्टिवल’ से इस फिल्म के लिए उन्हें “सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरुस्कार” भी मिला। उनकी एक और हिंदी फीचर फिल्म ‘मिस्टी पे’ है जिसमें जीनत अमान, जावेद शेख, करण खन्ना, निकिता आनंद, रजत बेदी, रोजा और निलेश मल्होत्रा ने काम किया है। अभिनेता के रूप में, उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी फीचर फिल्मों में कई प्रसिद्ध निर्देशकों के तहत अभिनय किया है। निलेश मल्होत्रा ने तीन हॉलीवुड फिल्मों में भी काम किया है और एक हॉलीवुड फिल्म ‘द डिसीवर्स’ में हॉलीवुड स्टार पियर्स ब्रॉसनन के साथ अभिनेता के रूप में काम किया है।निलेश मल्होत्रा ने ‘महाभारत’, ‘चाणक्य’, ‘द ग्रेट मराठा’, चंद्रकांता, युग और जय गणेश सिलसिला जैसे सीरियल्स में भी अभिनय किया। उन्होंने ही यूट्यूब में अपना म्यूजिक चैनल “पैनोरमा विजुअल्स म्यूजिक चैनल” भी शुरू किया, जिसके अंतर्गत उनका यह नया अल्बम टिक टॉक ड्रीम्स आ रहा है। उनके और डॉ. सुरैना मल्होत्रा के पुत्र डैनिएल उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं और अभिनय जगत में कदम रखने को तैयार हैं।