T20 World Cup Final – बिना हार के खेल संभव है?
टी ट्वंटी की विश्व विजेता बन गयी इंग्लैंड की टीम। भारतीय टीम की जिस पाकिस्तान से सेफा में हार हुई,उसी पाकिस्तान की टीम को भी फाइनल में हार का सामना करना पड़ा। खेल है तो हार भी है जीत भी है। ये अलग बात है कि हमारी आग्रही समझ हारने वाली टीम और उसके खिलाडियों को मुजरिम की तरह पेश करती है। उन्हे कटघरे में ला देती है।
वहीँ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वाले हार की तार्किक समीक्षा की जगह खिलाडियों के खिलाफ जनता में गुस्सा भरते नज़र आते है. इस बार लगभग यही दिखा। सेफा मे हार के बाद यही मीडिया अपने दर्शकों से पूछता दिखा कि हार का मुजरिम कौन है? मीडिया वाले यही समझ विकसित कर रहे है कि हार स्वीकार नही है।
खेल में हार न हो , ऐसा संभव है क्या? जिन्हे ये खलनायक बना कर पेश कर रहे है, उनके हिस्से वैश्विक कीर्तिमान भरे पड़े है। खेलो के इतिहास में हार और जीत की अनेक उदाहरण दर्ज है। फिर हार को लेकर इतनी व्यग्रता क्यों? क्या खेल भावना यही है?
मुझे तो यही लगता है कि इन्हे न खेल भावना की समझ है, न पत्रकारिता की। सम्यक प्रतिक्रिया की जगह उग्रता जब स्थान ग्रहण कर ले तो वो मौलिकता के लिए खतरा पैदा कर देता है। मीडिया में अगुआई कर रहे व्यक्तियों को समझना होगा,खासकर चैनल वालो को कि उनकी विश्वसनीयता खतरे में है जो किसी के लिए अच्छा नही है।(युवराज)
सूरज रजक
संजय राउत के बोल बचन के मायने
– अश्विनी कुमार मिश्र
जेल से छूटने के बाद उद्धव सेना के नेता संजय राउत के बदले बोल को लेकर तरह तरह की राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म है. आखिर संजय राउत महाराष्ट्र की नयी सरकार की प्रशंसा क्यों कर रहे हैं.? उनके गोल वचन और और अंदाजे बयां से यह कहा जाने लगा है कि वह कोई नया पांसा फेंक रहे हैं. समझा जा रहा है कि उपमुख्यमंत्री के निर्णयों की सराहना कर वह भाजपा और शिंदे सेना के बीच भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं. वह कौटिल्य शास्त्र के सूत्र को पकड़कर पुराने रिश्तों को खंगालने और नए रिश्तों में दरार डालने की नीति पर चल रहे हैं. संजय राउत ने महाविकास आघाडी सरकार के दौरान फडणवीस सरकार पर जिस तरह के प्रहार किये थे शायद वह भूल गए. और अब जेल से छूटने के बाद उनका हृदय परिवर्तन सचमुच कोई संकेत है. उन्होंने जिस तरह से शिवसेना को भाजपा से दूर ले जाकर नई राजनीति गढ़ी उसका परिणाम सामने आ गया. सत्ता के लिए एक सिद्धांतहीन गठबंधन बनाकर शिवसेना की बुरी गत करा दी. एक राजनीतिक हाराकिरी हो जाने के बाद श्री राउत भाजपा वालों पर सुमन वृष्टि कर रहे हैं. यह आशंका और कुशंका दोनों पैदा करता है. यह तो सत्य है कि शिवसेना को जितना बर्बाद राजनीति ने नहीं किया उतना संजय राउत की जिद्द ने किया. आखिर जिन शिवसैनिकों ने शिवसेना को फर्श से उठाकर अर्श तक पहुँचाया वे ही अलग हो गए. अपनी गलतियों में झाँकने के बजाय उन्हें गद्दार कहा जो इस सिद्धांतविहीन राजनीति में अपना अस्तित्व संभाल रहे थे.जिस व्यक्ति ने कभी चुनाव नहीं लड़ा ,कभी मतदाताओं का सामना नहीं किया उसने एक ऐसा चक्र चलाया कि शिवसेना में ही बगावत हो गयी.
अब संजय राउत जब बाजी हार चुके हैं तो उन्हें भाजपा वालों की याद आ रही है. अब रिश्ते सुधारने के लिए देवेंद्र फडणवीस की एकतरफा स्तुति कर शिंदे सेना और भाजपा में नया भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. देवेंद्र फडणवीस की सरकार में शिवसेना भी थी तब तो अंदाजा लग ही जाना चाहिए था कि फडणवीस की कार्यशैली कैसी है. फिर ढाई ढाई साल का शिगूफा छेड़ कर युति तोड़वाने का पाप संजय राउत ने किया. उसी का भान उन्हें जेल में 100 दिन रहकर हो गया होगा. और अब वे प्रायश्चित करने के लिए स्तुति सुमन की वर्षा कर रहे हैं. यह सही है महाविकास आघाड़ी सरकार में राज्य की कई क्रियाशील गतिविधियों को रोक दिया गया. मुख्य मंत्री वर्क फ्रॉम होम के मोड़ में थे।
राज्य का फेसबुकिया संचालन गजब का था. पुलिस अधिकारी ही जिलेटिन रखते पकड़े गए.ऐसे कई उदाहरण है जो अब पुराने पड़ गए हैं लेकिन शिंदे -फडणवीस की सरकार में काम ने गति पकड़ी है.एक सक्रिय सरकार अड़चनों को पार करते हुए काम कर रही है. कई प्रकल्प पर काम रफ़्तार से बढ़ रहा है. मेट्रो. कोस्टल रोड सहित मुंबई न्हावा सेवा लिंक पर काम का महत्वपूर्ण चरण पूरा हो चुका है. सरकार कई कल्याणकारी निर्णय ले चुकी है. म्हाडा को दिया गया अधिकार उनमें से एक है.जो कि सही निर्णय है.म्हाडा एक स्वतंत्र संस्था है. जो सरकारी अड़चनों में पड़कर काम नहीं कर पा रही थी, उसे उसके अधिकार दिए जा रहे हैं. इस निर्णय का संजय राउत ने सराहना की है. .
संजय राउत गलतफहमी और खुश फहमी दोनों में हैं. जेल से निकलकर वह सोच रहे हैं कि उन पर लगा आरोप समाप्त हो गया है. लेकिन ऐसा नहीं है.उनकी जमानत को निरस्त करने के लिए मामला हाईकोर्ट में चला गया है,जिस पर 25 को सुनवाई होनी है. हाईकोर्ट ने संजय राउत से इस बारे में शपथ पत्र देने को भी कहा है. विशेष अदालत ने जो टिप्पणी की है वह सरकार के एक महकमे पर आक्षेप है. इतनी बड़ी संस्था किसी बेक़सूर को पकड़ने का दुःसाहस कैसे कर सकती है.? विशेष अदालत का यह निर्णय एकतरफा लगता है. ईडी ने इस निर्णय के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है क्योंकि अदालत के कमेंट्स ने पूरी संस्था को कटघरे में खड़ा कर आरोपी को निर्दोष साबित करने का प्रयास किया है. अगर हाईकोर्ट का फैसला संजय राउत के विपरीत आया तो श्री राउत की कठिनाई बढ़ सकती यही. इसे समझते हुए वह अपने बयान में नरमी लाने का प्रयास कर रहे हैं.
दूसरा यह कि श्री राउत अपने को अब भी बड़ा किंगमेकर समझ रहे हैं. उनकी इस नासमझी ने ही उद्धव ठाकरे के कुनबे का बेडा गर्क किया है. इसका नतीजा यह है कि जिनके खिलाफ स्वर्गीय बाल ठाकरे ने आजीवन कमरकसी ,आज उन्हीं की पदयात्रा में शामिल होकर वैचारिक दिवालियेपन का प्रदर्शन उद्धव सेना कर रही हैं. संजय राउत को यह भी खुशफहमी है कि राजनीति के ढोल को हर तरफ से बजा सकते हैं. जो बदली हुई परिस्थिति में लाभदायक नहीं कही जा सकती. यह भी कि फडणवीस,मोदी और अमित शाह के प्रति मीठे बोल बोलकर अपना राजनीतिक खाता सीधा कर सकते हैं,जो अब संभव नहीं है. श्री राउत ने युति की जड़ पाताल तक खोद कर शिवसेना को शरद पवार का गुलाम बना लिया है. वह फडणवीस की नीतियों की प्रशंसा कर दूर की चाल चल रहे हैं. उन्हें यह गलतफहमी हो गयी है कि शिंदे खेमाँ और भाजपा के बीच अनबन चल रही है. हाल में ऐसे कई घटना क्रम हुए जिसमें दोनों गुटों के नेताओं में अनबन हुई. इसमें बच्चू कडू-राणा प्रकरण,अब्दुल सत्तार ,गुलाब राव पाटिल और संतोष बांगर जैसे नेताओं की मचमच को वह शिंदे गट की बेचैनी समझ रहे हैं।
और इसलिए इस पूरे गुट को नजरअंदाज कर संजय राउत ने फडणवीस की तारीफ़ के पुल बांधने शुरू कर दिए हैं. उधर संजय राउत के जेल से छूटने को लेकर किसी अदृश्य हाथ के मदद की चर्चा रंगने लगी है. क्योंकि राष्ट्रवादी गुट में फुस फुस होने लगी है कि अनिल देशमुख और नवाब मलिक तो जेल में रह गए संजय कैसे बाहर आ गए. क्या यह किसी शर्त पर मिली जमानत है या कुछ और, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। (युवराज)
(अश्विनी कुमार मिश्र ,लेखक–निर्भय पथिक के संपादक व राजनीतिक विश्लेषक हैं. )
राकांपा के राष्ट्रीय महासचिव नरेन्द्र वर्मा का जन्मदिन सेवा सप्ताह के रूप में संपन्न
मुंबई। हाल ही में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नरेन्द्र वर्मा का जन्मदिन सेवा सप्ताह के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर अंधेरी पश्चिम के जानकी देवी पब्लिक स्कूल में रात्रिभोज का भी आयोजन किया गया। इससे पहले नरेंद्र वर्मा ने अपने हाथों से वर्सोवा के हाऊस ऑफ चैरिटी में अन्न एवं खाद्य सामग्री प्रदान किया। साथ ही वृद्धाश्रम में निवास करने वालों को खाद्य सामग्री वितरण किया। देर शाम जानकी देवी पब्लिक स्कूल में पार्टी के कार्यकतार्ओं संग केक काटकर तथा रात्रि भोज आयोजित कर सादगीपूर्ण ढंग से उनका जन्मदिन मनाया गया।
रात्रि भोज में राष्ट्रवादी कांग्रेस मुंबई की कार्यकारी अध्यक्ष राखी जाधव, नरेन्द्र राणे, राकांपा की महाराष्ट्र महिला अध्यक्ष विद्या चौहान, राकांपा मुंबई की उपाध्यक्ष अल्पना ताई पेंटर, मुंबई राकांपा की महिला अध्यक्ष सुरेखा पेडनेकर, पार्टी के स्लम सेल अध्यक्ष श्रीधर पुजारी, राकांपा मुंबई सेवादल के अध्यक्ष दीपक पवार, नेशनल स्टूडेंट कांग्रेस मुंबई के अध्यक्ष एडवोकेट प्रशांत दिवाते के अलावा राकांपा के वरिष्ठ नेता प्रभाकर चालुके, मनोज व्यूअरे, नितिन विष्णू कदम, संजय करांदे, शरद सिंगरे, उत्तम राव मोरे, अरविन्द तिवारी, रुपेश खांडके, संतोष धुवाली, उमेश येवले तथा राकांपा नेत्री और अभिनेत्री कृषा खंडेलवाल आदि ने उपस्थित रहकर नरेन्द्र वर्मा को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी।
पच्चीस हजार रुपये के इनामी गौ तस्कर गिरफ्तार
लखनऊ। बंथरा थाना की पुलिस ने शुक्रवार को एक गो तस्कर को गिरफ्तार किया है। उस पर पुलिस की ओर से पच्चीस हजार रुपये के इनाम घोषित था। प्रभारी निरीक्षक, आशीष मिश्रा ने बताया कि वांछित और वारंटियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत शुक्रवार को पुलिस ने गो तस्कर हफीजुर्रहमान ऊर्फ मुन्ना को गिरफ्तार किया है। निरीक्षक ने बताया कि हफीजुर्रहमान काफी दिनों से फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तार न होने पर पुलिस के उच्चाधिकारियों ने पच्चीस हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।









