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महाराष्ट्र में गोसेवा आयोग स्थापित करने की मांग – दिया मुख्यमंत्री को ज्ञापन

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खामगांव. भारतीय संस्कृती का मुलाधार होनेवाले गोवंश संगोपन से रोजगार िनर्माण में वृध्दि हो उसी तरह ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढीकरण एवं खेती पुरक व्यवसाय बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र में आदि राज्य अनूसार गोसेवा आयोग की स्थापना कि जाए, ऐसी मांग गोशाला महासंघ महाराष्ट्र राज्य एवं बुलढाणा जिले के सामाजिक संस्था के प्रतिनिधि ने बुलढाणा जिलाधिकारी के जरिए मुख्यमंत्री एकनाथ शिदें, पशुसंवर्धन आयुक्त को ज्ञापन भेजा हैं।

डज्ञापन में नमुद हैं कि, आज के स्थिति में राज्य में छोटे बड़े ९५० गौशाला होकर जिसमें वृध्द, भाकड, दिव्यागं एव हादसाग्रस्त उसी तरह पुलिस ने अवैध यातायात से पकडणे १,८७,००० गोवंश के पालन पोषण हो रहा हैं। जिसके लिए गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ, राजस्थान, उत्तर प्रदेश हरियाणा, पंजाब एवं आदि राज्य नुसार महाराष्ट्र में गोसेवा आयोग की स्थापना कर गौशाला को आर्थिक सहयोग करें, गोशाला आत्मनिर्भर करने के लिए विविध उपाय योजना, पशु चिकित्सा, गोशाला व्यवस्थापन, चारा उत्पादन, गौ आधारित कृषि, गौ आधारित ग्रामोद्योग समेत २५ मागो का ज्ञापन सौंपा गया।

उक्त मांगे पुरे नहीं किए तो लोकशाही मार्ग से आंदोलन किया जाएगा, ऐसी चेतावनी भी उक्त ज्ञापन के जरिए दी गई। ज्ञापन देते समय राजेश धानुका, उध्दव नेरकर, महेंद्र सौभाग्ये, डा गावंडे, नंदु दलाल, नारायण होलकर, निवृत्ति वाघ, एड मल, आशुतोष चौधरी, पुरूषोत्तम हाके, कैलास फाटे, प्रशांत सानंदा, अमित गोयंका, प्रकाश राठी, दिपक खंडेलवाल, संतोष सातपुते, पुरूषोत्तम हाके, विठ्ठल चौहान, राजेश पि़गले, वनिता बोराडे, मुरारी टिपरे, गजानन देऊलकार,शिला मोहोड उपस्थित थे।

जिलाध्यक्ष की तारीफ कर रहे लोग, घायल गौ माता की सेवा में लगे

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कोरिया। जिले के गौ रक्षा वाहिनी के जिलाध्यक्ष की ओर से गायों और लोगों को सड़क हादसे से बचाने के लिए एक अभिनव पहल किया जा रहा है। इस पहल के तहत जिलाध्यक्ष ने कोरिया सहित मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के नेशनल हाइवे सहित अन्य प्रमुख चौक-चौराहों पर घूमने वाले लगभग 350 गोवंशों को रेडियम पट्टी बांधी है। ताकि सड़क पर बैठी गाय दुर्घटना का शिकार होने से बच सके।

उल्लेखनीय है कि गौ रक्षा वाहिनी की ओर से पिछले 7-8 सालों से लगातार कोरिया जिले में गोवंशों की सड़कों पर सुरक्षा की दृष्टिकोण से उनकी जानमाल की रक्षा के लिए विशेष अभियान चला कर समय-समय पर गोवंशों के गले में चमकदार रेडियम पट्टी लगा रहे हैं। यह रेडियम बैल्ट (पट्टी) सड़क पर घूमने वाले पशुओं को रात के अंधेरे में दुर्घटना का शिकार होने से बचाने के लिए लगाया जाता है। इससे सामने की ओर से आने वाले वाहन चालक आसानी से देख सके और अपनी सहित गोवंश की भी रक्षा की जा सके।

७ नवंबर की कहानी – आचार्य रामरंग(एक प्रत्यक्षदर्शी ) की जुबानी , पढ़िए इंदिरा गाँधी की बर्बरता की कहानी

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5000 साधुओं का बलिदान और 10 लाख भारतीयों का प्रयास तब सफल होगा, जब भारत में पूर्ण गौवंश रक्षा होगी, अर्थात कत्ल खाने, तस्करी और मांस निर्यात बंद हो जाए।

आज भी याद है वो मंजर जब गौरक्षा के लिए सुबह से ही संसद के बाहर लोग जुटने लगे थे। 7 नवम्बर 1966 को सुबह आठ बजे से ही लोग जुटना शुरू हो गए थे। गोरक्षा महाभियान समिति के संचालक व सनातनी करपात्री जी महाराज ने चांदनी चौक स्थित आर्य समाज मंदिर से अपना सत्याग्रह आरंभ किया।  एकमंत्री और पूरी घटना के गवाह आचार्य सोहनलाल रामरंग के अनुसार, यह हिंदू समाज के लिए सबसे बड़ा ऐतिहासिक दिन था।

नई दिल्ली का पूरा इलाका लोगों की भीड़ से भरा था। संसद गेट से लेकर चांदनी चैक तक सिर ही सिर दिखाई दे रहे थे। कम से कम 10 लाख लोगों की भीड़ जुटी थी, जिसमें 10 से 20 हजार तो केवल महिलाएं ही शामिल थीं। जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक के लोग गोहत्याबंद कराने के लिए कानून बनाने की मांग लेकर संसद के समक्ष जुटे थे। गौहत्या रोकने के लिए इंदिरा सरकार केवल आश्वासन ही दे रही थी, ठोस कदम कुछ भी नहीं उठा रही थी। सरकार के झूठे वादे से तंग आकर संत समाज ने संसद के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया था।”

रामरंगजी के अनुसार, ”दोपहर एक बजे जुलूससंसद भवन पर पहुंच गया और संत समाज के संबोधन का सिलसिला शुरू हुआ। करीब तीन बजेका समय होगा, जब आर्य समाज के स्वामी रामेश्वरानंद भाषण देने के लिए खड़े हुए। स्वामी रामेश्वरानंद ने कहा, ‘यह सरकार बहरी है। यह गो हत्या को रोकने के लिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठाएगी।

इसे झकझोरना होगा। मैं यहां उपस्थित सभी लोगों से आह्वान करता हूं कि सभी संसद के अंदर घुस जाओ और सारे सांसदों को खींच-खींच कर बाहर ले आओ, तभी गो हत्या बंदी कानून बन सकेगा।’  ”इतना सुनना था कि नौजवान संसद भवन की दीवार फांद-फांद कर अंदर घुसने लगे। लोगों ने संसद भवन को घेर लिया और दरवाजा तोड़ने के लिए आगे बढ़े। पुलिसकर्मी पहले से ही लाठी-बंदूक के साथ तैनात थे। पुलिस ने लाठी और अश्रुगैस चलाना शुरू कर दिया। भीड़ और आक्रामक हो गई। इतने में अंदर से गोली चलाने का आदेश हुआ और पुलिस ने भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। संसद के सामने की पूरी सड़क खून से लाल हो गई। लोग मर रहे थे, एक-दूसरे के शरीर पर गिर रहे थे और पुलिस की गोलीबारी जारी थी।

नहीं भी तो कम से कम, पांच हजार लोग उस गोलीबारी में मारे गए थे।”  ”बड़ी त्रासदी हो गई थी और सरकार केलिए इसे दबाना जरूरी था। ट्रक बुलाकर मृत, घायल, जिंदा-सभी को उसमें ठूंसा जाने लगा। जिन घायलों के बचने की संभावना थी, उनकी भी ट्रक में लाशों के नीचे दबकर मौत हो गई।

हमें आखिरी समय तक पता ही नहीं चला कि सरकार ने उन लाशों को कहां ले जाकर फूंक डाला या जमीन में दबा डाला। पूरे शहर में कफ्र्यू लागू कर दिया गया और संतों को तिहाड़ जेल में ठूंस दिया गया। केवल शंकराचार्य को छोड़ कर अन्य सभी संतों को तिहाड़ जेल में डाल दिया गया। करपात्री जी महाराज ने जेल से ही सत्याग्रह शुरू कर दिया। जेल उनके ओजस्वी भाषणों से गूंजने लगा।

उस समय जेल में करीब 50 हजार लोगों को ठूंसा गया था।” रामरंग जी के अनुसार, ”शहर की टेलिफोन लाइन काट दी गई। 8 नवंबर की रात मुझे भी घर से उठा कर तिहाड़ जेल पहुंचा दिया गया। नागा साधु छत के नीचे नहीं रहते, इसलिए उन्होंने तिहाड़ जेल के अदंर रहने की जगह आंगन में ही रहने की जिद की, लेकिन ठंड बहुत थी।

नागा साधुओं ने जेल का गेट, फर्निचर आदि को तोड़ कर जलाना शुरू किया। उधर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गुलजारीलाल नंदा पर इस पूरे गोलीकांड की जिम्मेवारी डालते हुए उनका इस्तीफा ले लिया। गुलजारीलाल नंदा उस वक्त गृहमंत्री के पद पर आसीन थे। गुलजारीलाल नंदा गौहत्या क़ानून हटाने के पक्ष में थे जिसके बाद उन्हें उनके पद से निष्कासित कर दिया और मंत्रिमंडल में कहीं भी जगह नहीं दी गयी, तत्कालीन महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री व चीन से हार के बाद देश के रक्षा मंत्री बने यशवंत राव बलवतंराव चैहान को गृहमंत्री बना दिया गया।

तिहाड़ जेल में नागा साधुओं के उत्पाद की खबर सुनकर गृहमंत्री यशवंतराव बलवतंराव चैहान खुद जेल आए और उन्होंने नागा साधुओं को आश्वासन दिया कि उनके अलाव के लिए लकड़ी का इंतजाम किया जा रहा है। लकड़ी से भरे ट्रक जेल के अंदर पहुंचने और अलाव की व्यवस्था होने पर ही नागा साधु शांत हुए।” बाद में सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम को एक तरह से दबा दिया।

आज के ही दिन सात नवंबर 1966 को गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने का कानून मांगने के लिए संसद के बाहर जुटी साधु-संतों की भीड़ पर गोलियां चलाई गई थीं

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आज के ही दिन सात नवंबर 1966 को गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने का कानून मांगने के लिए संसद के बाहर जुटी साधु-संतों की भीड़ पर गोलियां चलाई गई थीं। इस गोलीबारी में कितने साधुओं की मौत हुई थी, इस पर आज भी विवाद है। यह संख्या आठ-दस से लेकर सैकड़ों के बीच बताई जाती है, लेकिन यह भारतीय इतिहास की एक बड़ी घटना थी, जिसने तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर दी थी। इस घटना की 53वीं वर्षगांठ पर गुरुवार को कुछ संगठनों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर पूरे देश में गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। जिस चौराहे पर साधुओं पर गोली चलाई गई थी, संगठनों की मांग है कि उस चौक का नाम ‘गो भक्त बलिदानी चौक’ रख दिया जाए।

क्या था मामला

दरअसल, पचास के दशक के बहुत प्रसिद्ध संत स्वामी करपात्री जी महाराज लगातार गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक कानून की मांग कर रहे थे। लेकिन केंद्र सरकार इस तरह का कोई कानून लाने पर विचार नहीं कर रही थी। इससे संतों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा था। उनके आह्वान पर सात नवंबर 1966 को देशभर के लाखों साधु-संत अपने साथ गायों-बछड़ों को लेकर संसद के बाहर आ डटे थे।

नंदा को देना पड़ा था इस्तीफा

संतों को रोकने के लिए संसद के बाहर बैरीकेडिंग कर दी गई थी। कहा जाता है कि इंदिरा गांधी सरकार को यह खतरा लग रहा था कि संतों की भीड़ बैरीकेडिंग तोड़कर संसद पर हमला कर सकती है। कथित रुप से इस खतरे को टालने के लिए ही पुलिस को संतों पर गोली चलाने का आदेश दे दिया गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा को इस बात का अहसास था कि वे बातचीत से हालात को संभाल लेंगे, लेकिन मामला हाथ से निकल गया और गोलीबारी तक पहुंच गई। नंदा को इस घटना के बाद इस्तीफा देना पड़ा था।

सरकार को अस्थिर करने की कोशिश

इस घटना के पीछे कुछ लोग तत्कालीन राजनीति को भी जिम्मेदार बताते हैं। जानकारी के मुताबिक इंदिरा गांधी को सत्ता संभाले कुछ ही समय हुआ था। कई दूसरे दलों के नेताओं के साथ-साथ कांग्रेस के भी कुछ लोग उनके नेतृत्व से असहज थे, इसलिए सोच-समझकर इस आंदोलन के बहाने इंदिरा सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की गई थी। स्वामी करपात्री जी महाराज के इस आंदोलन को आरएसएस और जनसंघ का भी पूरा समर्थन हासिल था।

हरियाणा के करनाल के सांसद स्वामी रामेश्वरानंद इस आंदोलन का पूरा समर्थन कर रहे थे। आंदोलन के बाद कई सालों तक संघ ने इस मुद्दे को उठाया भी, लेकिन यह एक बड़ा मुद्दा नहीं बन सका। इस घटना की जांच के लिए एक कमेटी भी बनाई गई थी। इस कमेटी में कई हिंदूवादी नेता शामिल थे, लेकिन इसका भी कोई बड़ा परिणाम नहीं निकला। बाद में इस कमेटी को भंग कर दिया गया।

लाखों लोग पहुंचे थे संसद

इस घटना के प्रदर्शन के समय कितने लोग संसद पहुंचे थे, इस पर भी विवाद है। कुछ हजारों से लेकर इस संख्या को लाखों तक में बताया जाता है। इसी प्रकार इस गोलीबारी की घटना में कितने साधुओं की मौत हुई थी, इस पर भी विवाद है। लोग यह संख्या आठ-दस से  लेकर सैकड़ों में बताते हैं। इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी रहे विश्व हिंदू परिषद के नेता डॉक्टर सुरेंद्र जैन ने अमर उजाला को बताया कि वे अपने नाना जी के साथ इस प्रदर्शन में भाग लेने आये थे। उनका कहना है कि इस गोलीबारी में मरने वालों की संख्या सौ से ऊपर थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारी गोभक्तों को डीटीसी की बसों में भरकर गुड़गांव जैसे दूर इलाकों में ले जाकर छोड़ दिया था।

इन राज्यों में है गोहत्या कानून

सिक्किम देश का पहला राज्य माना जाता है, जिसने गोहत्या पर प्रतिबंध का कानून बनाया है। सिक्किम के अलावा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में गोहत्या पर प्रतिबंध है। दिल्ली और चंडीगढ़ में भी गोहत्या प्रतिबंधित है। केंद्र सरकार के स्तर पर गोहत्या रोकने के लिए अभी तक कोई कानून नहीं बनाया गया है, जबकि कई हिंदू संगठन इसके लिए लगातार मांग करते रहे हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने मई 2017 में द प्रिवेंशन ऑफ क्रूएलिटी टू एनीमल्स कानून को नोटिफाई कर दिया था।

इसके तहत यह सुनिश्चित करना था कि मवेशी बाजार में कोई पशु हत्या के लिए न बेचा जा सके।  तब इस कानून पर खूब विवाद हुआ था। दक्षिण और पूर्व के राज्यों से इसको लेकर विरोध व्यक्त किये गए थे। केंद्र सरकार ने ‘कामधेनु आयोग’  का गठन किया है जिसका काम दुधारु पशुओं की रक्षा और संवर्धन करना है।

Video News -असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की ललकार यहाँ सिर्फ बीजेपी ही जीतेगी -Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma’s challenge, only BJP will win here

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असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “अगर त्रिपुरा में दुनिया के सभी राजनीतिक दल एक साथ आ जाएं, तो भी बीजेपी को यहां जीतने से कोई नहीं रोक सकता है।”

EWS Quota SC Verdict: आर्थिक आधार पर जारी रहेगा 10 फीसदी आरक्षण, SC के 5 में 3 जजों ने जताई सहमति

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SC On EWS Reservation: आर्थिक आधार पर देश में आरक्षण अब आगे भी जारी रहेगा. चीफ जस्टिय यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक बेंच में से  तीन जजों ने आरक्षण के पक्ष में अपना फैसला दिया है. जबकि दो जजों ने पर अपनी असहमति जताई है. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय बेंच की तरफ से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था पर फैसला सुनाया जा रहा है. पांच जजों में से तीन जजों ने आर्थिक आधार पर आरक्षण का समर्थन किया है. जस्टिस माहेश्वरी ने कहा कि आर्थिक आरक्षण संविधान के मौलिक ढांचे के खिलाफ नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि 103वां संशोधन वैध है.

जस्टिस बेला त्रिवेदी ने भी इस फैसले पर सहमति जताई है. उन्होंने कहा कि मैं जस्टिस माहेश्वरी के निष्कर्ष से सहमत हूं. उन्होंने कहा कि एससी/एसटी/ओबीसी को पहले से आरक्षण मिला हुआ है. उसे सामान्य वर्ग के साथ शामिल नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने आरक्षण सीमित समय के लिए रखने की बात कही थी. लेकिन 75 साल बाद भी यह जारी है. अब जस्टिस जेबी पारडीवाला फैसला पढ़ेंगे.

जस्टिस रविन्द्र भट ने जताई असहमति

आर्थिक आधार पर आरक्षण फैसला देते हुए जस्टिस रविन्द्र भट ने असहमति जताई है. रविन्द्र भटा ने कहा कि आबादी का एक बड़ा हिस्सा SC/ST/OBC का है. उनमें बहुत से लोग गरीब हैं. इसलिए, 103वां संशोधन गलत है. जस्टिस एस रविंद्र भाट ने 50 प्रतिशत से ऊपर आरक्षण देने को भी गलत माना है. जस्टिस एस रविंद्र भाट ने 50 प्रतिशत से ऊपर आरक्षण देने को भी गलत माना है.उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 15(6) और 16(6) रद्द होने चाहिए. जबकि, चीफ जस्टिस ललित ने भी आर्थिक आधार पर आरक्षण का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि मैं जस्टिस रविंद्र भाट के फैसले से सहमत हूँ. यानी सुप्रीम कोर्ट ने 3-2 के बहुमत से EWS आरक्षण को बरकरार रखा है.

महाराष्ट्र प्रदेश संयोजक झारखंड प्रकोष्ठ पद पर प्रेम कुमार की नियुक्ति

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मुंबई. महाराष्ट्र बीजेपी ने हिंदी भाषियों को जोड़ने के लिए प्रेम कुमार को महाराष्ट्र प्रदेश संयोजक झारखंड प्रकोष्ठ पद पर नियुक्त किया है.

मूल रूप से झारखंड के रहने वाले प्रेम कुमार मुंबई और आसपास के जिलों में रहने वाले झारखंड मतदाताओं पर अच्छा खासा प्रभाव रखते हैं। उत्तर भारतीय मोर्चा, भाजपा महाराष्ट्र के अध्यक्ष डॉ. संजय पाण्डेय व उपाध्यक्ष कपिल राज वर्मा ने प्रेम कुमार को नियुक्ति पत्र दिया.

गौरतलब है कि मुंबई की 227 सीटों में से 50 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं, जहां हिंदी भाषियों का वर्चस्व है। मुंबई से सटे मीरा-भायंदर, वसई-विरार-नालासोपारा, ठाणे, नवी मुंबई, उल्हासनगर को भी जोड़ दिया जाए, तो यह संख्या 100 सीटों के पार चली जाती है। इन सभी महानगरपालिकाओ में चुनाव होने हैं। यही कारण है कि बीजेपी पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। इसी कड़ी में झारखंड में अपना खासा प्रभाव रखने वाले प्रेम कुमार को उत्तर भारतीय मोर्चा, महाराष्ट्र प्रदेश संयोजक झारखंड प्रकोष्ठ पद पर नियुक्त किया गया है। उत्तर भारतीय मोर्चा, भाजपा महाराष्ट्र के अध्यक्ष डॉ. संजय पाण्डेय ने नियुक्ति पत्र देकर उनसे पार्टी की विचारधारा और नीति के अनुसार पार्टी की प्रगति के लिए हर संभव प्रयास करने की प्रेरणा दी।

झारखण्ड में लोकप्रिय हैं प्रेम कुमार

बीजेपी का ये फैसला एक तीर से दो निशाने नहीं बल्कि एक तीर से कई निशाने लगाने जैसा है. मूल रूप से झारखंड के रहने वाले प्रेम कुमार मुंबई और आसपास के जिलों में रहने वाले झारखंड मतदाताओं पर अच्छा खासा प्रभाव रखते हैं। इसके साथ ही उनके पास जमीनी स्तर पर काम करने का गहरा राजनीतिक अनुभव है। ऐसे में इनको झारखंड प्रकोष्ठ पद की कमान मिलने से कार्यकर्ताओं में सीधा-सीधा संदेश ये भी गया है कि पार्टी में जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और परिश्रम का सम्मान होता है, जो कार्यकर्ताओं के मनोबल और ऊर्जा को सातवें आसमान पर पहुंचाने में कारगर साबित होगा।

बीएमसी जीतने की कवायद तेज

मुंबई: एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री और देवेंद्र फडणवीस के उप मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बीजेपी ने राज्य की सत्ता पर कब्जा कर लिया। ढाई साल बाद बीजेपी उद्धव ठाकरे नीत कांग्रेस, एनसीपी सरकार को हटाने में सफल रही। एकनाथ शिंदे के साथ शिवसेना के 39 विधायकों के बीजेपी के साथ आने से मुंबई सहित पूरे एमएमआर का राजनीतिक दृश्य बदल गया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मदद से और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में बीजेपी ने देश की सबसे समृद्धशाली मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) सहित अन्य 14 महानगर पालिकाओं को जीतने का लक्ष्य रखा है। राज्य में सत्ता परिवर्तन होते ही मुंबई बीजेपी ने ट्वीट कर अपने इरादे जाहिर कर दिए। बीजेपी ने अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को सक्रिय कर दिया है।

बीएमसी का पिछला चुनाव

वर्ष 2017 के बीएमसी चुनाव में शिवसेना-बीजेपी ने आमने-सामने चुनाव लड़ा था। तब शिवसेना के 84 और बीजेपी के 82 नगरसेवक चुन कर आए थे। वहीं कांग्रेस के 31, एनसीपी के 9, मनसे के 7, सपा के 6, एमआईएम के 2 नगरसेवक चुन कर आए थे। लगभग 46 हजार करोड़ रुपये के बजट वाली मुंबई महानगर पालिका में शिवसेना 26 वर्षों से सत्ता में है।

मुंबई में 236 चुनावी वार्ड हैं

अतिरिक्त नगर आयुक्त डॉ संजीव कुमार ने कहा, “हमने चुनाव आयोग द्वारा बनाई गई मतदाता सूचियों का उपयोग किया है और इसे वार्ड-वार विभाजित किया है. शहर में 236 चुनावी वार्ड हैं. नागरिकों को वेबसाइट पर जाकर अपने नाम, पता, आयु की जांच कर सकते हैं.” कुमार ने नागरिकों से अपील की कि यदि वे अपना नाम नहीं ढूंढ पा रहे हैं या इसे गलत तरीके से दूसरे वार्ड में शामिल किया गया है या यदि कोई स्पेलिंग और क्लेरिकल मिस्टेक है, तो नागरिक संबंधित प्रशासनिक वार्ड से असेसमेंट विभाग में संपर्क कर सकते हैं और इसे मतदाता सूची सही कर सकते हैं.यदि नागरिक भारत से बाहर हैं, तो वे अपने सुधार एमसीजीएम को मेल कर सकते हैं.

पांच वर्षों में 7 लाख 12 हजार 925 मतदाताओं की वृद्धि हुई है

बीएमसी के अनुसार, वर्ष 2017 में 91,64,125 मतदाता थे और 2022 में यह बढ़कर 98,770,50 हो गए हैं. आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में 7 लाख 12 हजार 925 मतदाताओं की वृद्धि हुई है. 4 मई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) ने बीएमसी को आगामी चुनाव के लिए आगे की प्रक्रिया आयोजित करने का निर्देश दिया था. तदनुसार, 30 मई को, बीएमसी ने बांद्रा के रंगशारदा सभागार में एक चुनावी वार्ड आरक्षण लॉटरी आयोजित की थी, जिसमें 118 वार्ड महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रखे गए थे.

 

 

पंचकूला- 108 कुंडीय गौ संवर्धन गायत्री महायज्ञ , पूजन में सैंकड़ों लोगों ने देवताओं का आह्वान किया

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पंचकूला, 7 नवंबर ) गौशाला ट्रस्ट, गायत्री परिवार द्वारा आयोजित 108 कुंडीय गौ संवर्धन गायत्री महायज्ञ से पूर्व रविवार को देवताओं का आह्वान किया गया। श्री माता मनसा देवी गौधाम में श्री श्याम बिहारी दुबे ने देव पूजन करवाया।

इस पूजन में सैंकड़ों लोगों ने देवताओं का आह्वान किया और आहुतियां दीं। पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। पूरे पंडाल में लोग पीले वस्त्र धारण करके बैठे थे। इस अवसर पर गौशाला ट्रस्ट के प्रधान एवं महापौर कुलभूषण गोयल, महासचिव डा. नरेश मित्तल सहित आयोजकों ने वरिष्ठ संघ प्रचारक प्रेम जी गोयल, विजिलेंस के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर, एएजी परमिंद्र चौहान, हरियाणा बाल कल्याण परिषद मानद महासचिव रंजीता मेहता को स्मृति चिन्ह भेंट किए।

गायत्री परिवार पंचकूला के सुरेंद्र सिंह तोमर ने रविवार को देव पूजन एवं यज्ञ के बाद अखिल भारतीय गायत्री परिवार शांतिकुंज के कथावाचक श्याम बिहारी दुबे ने प्रवचन देते हुए नारी सशक्तिकरण के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर तेजपाल गुप्ता, संदल सिंह राणा, रितू गोयल सहित काफी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।

ताजनगरी आगरा में ‘ग्लोबल ताज इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2022’

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ग्लैमर लाइव फिल्म्स, आईटीएचएम संस्थान, डॉ.बीआर अम्बेडकर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में ‘ग्लोबल ताज इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2022’ का आयोजन पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी ताजनगरी आगरा में हो रहा है। 11 से 13 नवंबर तक अम्बेडकर विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय फिल्म फेस्टिवल के लिए अब तक 15 फिल्मों का पंजीकरण हो चुका है।

फिल्म फेस्टिवल में फीचर फिल्मों के अलावा चयनित शॉर्ट फिल्म, डॉक्यूमेंट्री, एनीमेशन और म्यूजिक वीडियो की भी स्क्रीनिंग की जाएगी। फेस्टिवल के ज्यूरी सदस्य फिल्मों को अंक प्रदान करेंगे। इसी आधार पर निर्माता और निर्देशकों को पुरस्कार दिए जाएंगे। इस फिल्म समारोह का सह-आयोजक डा.अम्बेडकर विवि का आईटीएचएम संस्थान है। इसके निदेशक डॉ यूएन शुक्ल और डॉ. लव कुश मिश्रा के मुताबिक, समारोह के मास्टर्स टॉक शो और फिल्मी कार्यशालाएं आकर्षण का केंद्र रहेंगी। फिल्मों का प्रदर्शन विवि के खंदारी परिसर के जे.पी. सभागार में किया जाएगा।

फिल्म फेस्टिवल के संरक्षक एवं उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के सदस्य रंजीत सामा ने बताया कि समारोह में फेस्टिवल में कलाकार बृजेन्द्र काला, एक्टर उमेश बाजपाई, के अलावा फ्रांसीसी अभिनेत्री मरीनो बोर्गो और इटली के फिल्मकार डेमेट्रियो कैसिले भी शिरकत करेंगे। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर वि.वि. के कुलपति प्रो. आशु रानी, मेयर नवीन जैन, सांसद एस.पी. सिंह बघेल, सांसद राजकुमार चाहर, कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, स्क्वाड्रन लीडर ए.के सिंह, कुलसचिव हिंदी संस्थान डॉ चंद्रकांत त्रिपाठी, डॉ. महेश धाकड़, भगत सिंह बघेल, राजेन्द्र सचदेवा, वरिष्ठ कवि प्रो. सोम ठाकुर, गीतकार रामेन्द्र मोहन त्रिपाठी, गीतकार सुरेंद्र साथी, गायक करतार सिंह यादव, कवि ईशान देव, मंगल सिंह धाकड़, अरविन्द गुप्ता, नितिन गोयल आदि भी इस दौरान उपस्थित रहेंगे। समारोह में दादा साहेब फाल्के लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और दादा साहब की पत्नी सरस्वती (जो भारतीय फिल्म जगत की पहली तकनीशियन थीं) को समर्पित एक अवॉर्ड भी दिया जाएगा।

फेस्टिवल के निदेशक और ग्लैमर लाइव फिल्म्स के संचालक सूरज तिवारी के मुताबिक इस तीन दिवसीय फिल्म फेस्टिवल के दौरान देश- विदेश के निर्माता, निर्देशक, प्रोडक्शन हाउस, लेखक, अभिनेता भी हिस्सा लेंगे। इन लोगों को आगरा और इसके निकटवर्ती इलाकों में उपलब्ध शूटिंग की लोकेशन भी दिखाई जाएगी। जिससे भविष्य में वो यहां अपनी फिल्मों को शूट करने का विचार बनाएं। इस से आगरा शहर और उत्तर प्रदेश को पहचान मिलेगी। फ़िल्म व पर्यटन से संबंधित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।

संवाद प्रेषक: काली दास पाण्डेय

T20WC 2022 के सेमीफाइनल में पहुंचे भारत, पाकिस्तान, इंग्लैंड व न्यूजीलैंड

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नई दिल्ली,  Semi final schedule for T20 World Cup 2022: टी20 वर्ल्ड कप 2022 के सुपर 12 में से अब चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं जिसमें ग्रुप 1 से न्यूजीलैंड और इंग्लैंड की टीम है तो वहीं ग्रुप 2 से भारत और पाकिस्तान की टीम इसमें शामिल है। अब इन चारों टीमों में से दो टीम फाइनल में पहुंचेंगी, लेकिन उससे पहले सेमीफाइनल की जंग अभी बाकी है। टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल मैचों की बात करें तो पहला सेमीफाइनल मुकाबला 9 नवंबर को तो वहीं दूसरा सेमीफाइनल मैच 10 नवंबर को खेला जाएगा जबकि 13 नवंबर को फाइनल मैच खेला जाएगा।

पहले सेमीफाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड का सामना पाकिस्तान के साथ होगा तो वहीं दूसरा सेमीफाइनल मैच इंग्लैंड और भारत के बीच होगा। आइसीसी शेड्यूल के मुताबिक पहले सेमीफाइनल में ग्रुप 1 के पहले नंबर की टीम (न्यूजीलैंड) का सामना ग्रुप 2 के दूसरे नंबर की टीम (पाकिस्तान) के साथ जबकि दूसरे सेमीफाइनल में ग्रुप 2 के पहले नंबर की टीम (भारत) का सामना ग्रुप 1 के दूसरे नंबर की टीम (इंग्लैंड) के साथ होगा।

सेमीफाइनल मैचों के शेड्यूल

पहला सेमीफाइनल- न्यूजीलैंड बनान पाकिस्तान, 9 नवंबर (सिडनी)

दूसरा सेमीफाइनल- भारत बनाम इंग्लैंड- 10 नवंबर (एडिलेड)

सुपर 12 के दोनों ग्रुप में ऐसी रही टीमों की स्थिति

सुपर 12 के ग्रुप 1 की बात करें तो इसमें 7-7 अंक के साथ न्यूजीलैंड पहले और इंग्लैंड की टीम दूसरे नंबर पर रही। न्यूजीलैंड की टीम बेहतर रन रेट से आधार पर इंग्लैंड से आगे रही तो वहीं 7 अंक के साथ ही आस्ट्रेलिया की टीम तीसरे नंबर पर रही। वहीं श्रीलंका 4 अंक के साथ चौथे, जबकि आयरलैंड 3 प्वाइंट के साथ पांचवें जबकि अफगानिस्तान की टीम 2 अंक के साथ छठे स्थान पर रही।

वहीं ग्रुप 2 की बात करें तो इसमें भारत 8 अंक के साथ पहले जबकि पाकिस्तान की टीम 6 अंक के साथ दूसरे नंबर पर रही। इसके बाद 5 अंक के साथ साउथ अफ्रीका की टीम तीसरे नंबर पर जबकि 4-4 अंक के साथ नीदरलैंड व बांग्लादेश की टीम पांचवें व छठे स्थान पर रही। वहीं इस ग्रुप में 3 अंक के साथ जिम्बाब्वे सबसे आखिरी यानी छठे स्थान पर रही। भारतीय टीम सुपर 12 में सबसे ज्यादा अंक हासिल करने वाली टीम रही और किसी ने भी 8 अंक हासिल नहीं किया।