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नेहरू सेंटर में इंडियन आर्ट फेस्टिवल का आयोजन

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– काली दास पाण्डेय

Mumbai – 2 साल कोरोना महामारी के बाद इंडियन आर्ट फेस्टिवल का आयोजन 26 मई से 29 मई तक नेहरू सेंटर (मुम्बई) में किया गया है। जहाँ पर 45 आर्ट गैलरीज लगाई गई हैं, जिसमे 550 आर्टिस्ट अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं जो 4 ग्लोबल शहरों से आये हैं। इसके पहले दिल्ली और बैंगलोर में इंडियन आर्ट फेस्टिवल का 10वां सीजन काफी सफल रहा और अब इसे मुंबई में लोगों का ढेर प्यार मिल रहा हैं। इंडियन आर्ट फेस्टीवल में अपनी बेटी एरियाना के साथ पहुंची एक्ट्रेस महिमा चौधरी साथ ही पायल रोहतगी और संग्राम सिंह ने भी दीप प्रज्वलित कर कहा “कला का आनंद लो और फिट रहो”।
इसके अलावा इंडियन आर्ट फेस्टिवल में पद्मश्री शोमा घोष, विख्यात सिंगर मनहर उधास, तबला मास्टर और म्यूजिक प्रोड्यूसर जीतू शंकर ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर इस फेस्टिवल की शोभा बढ़ाई। साथ ही डॉ. सरयू दोषी, विलास शिंदे,चरन शर्मा, निमिषा शर्मा, पृथ्वी सोनी और गौतम पटोलें जैसे वेटेरन आर्टिस्ट और डॉ अनुषा श्रीनिवासन अय्यर ने अपनी अद्भुत कला का प्रदर्शन कर इस फेस्टिवल में एक जान डाल दी।

भारतराष्ट्र की अर्थव्यवस्था का आधार हें गोमाता;

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गाय हमारी अर्थव्यवस्था का आधार है। गाय को पालने से दूध, दही, छाछ, घी जैसे पोषक पदार्थ प्राप्त होते हैं। गाय से ही बैल मिलते हैं जो कि हल चलाने, सामान ढोने और खेती के काम में सहायक होते हैं। गोधन का गोबर ईंधन बचाने व ऊर्जा उत्पादन में काम आता है। इससे पर्यावरण प्रदूषण कम होता है। गोबर की खाद भी होती है। गोधन को पालने से ग्वालों की दिनचर्या अनुशासित रहती है। इससे जीवन पूरी तरह स्वस्थ रहता है। गोमूत्र से अनेक रोगों का उपचार होता है। एक अनुसन्धान के अनुसार हमारे देश को कृषि के लिए नब्बे प्रतिशत ऊर्जा गोवंश से ही मिलती है। इस तरह गाय को ग्राम विकास का आधार मानना पूर्णतया उचित है।

गाय के घी से होने वाले हवन का धुआँ कीटाणु अथवा बैक्टीरिया को नष्ट करता है। गाय का गोबर खेतों में खाद के काम तथा ईंधन के काम आता है। इसका मूत्र अनेक असाध्य रोगों के इलाज में उपयोगी रहता है। इस प्रकार गाय का हमारे जीवन में अत्यधिक महत्त्व है। यह गरीबों के परिवारों का पालन-पोषण करने में उपयोगी रहती है। इससे खेती और कृषि के कामों में सहायता मिलती है। गाय के बछड़े बैल बनते हैं, जो हल चलाने एवं भार ढोने के काम आते हैं। गोधन के मरने पर भी इसका चमड़ा अनेक चीजों को बनाने के काम आता है। गाय की उपयोगिता एवं महत्त्व को देखकर ही इसे ‘गोमाता’ कहते हैं।

भारतीय जन-जीवन में परिवार के पालन तथा कृषि कार्य की दृष्टि से गाय का विशेष महत्त्व है। इससे दूध जैसा पौष्टिक पदार्थ मिलता है। इसके गोबर एवं गोमूत्र का अनेक तरह से उपयोग किया जाता है। वेदों एवं पुराणों में गाय को पूज्य और रक्षणीय बताया गया है। यहाँ पर गोपालन की सनातन परम्परा रही है।

आयुर्वेद में अनेक रोगों के उपचार आदि में गाय के घी को उपयोगी माना गया है। गाय के घी से हवन करने पर जो धुआँ फैलता है, वह हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करता है। वह ओजोन परत के छेद को पाटने का काम करने में व पर्यावरण शुद्धि में भी उपयोगी रहता है।

भारतीय जन जीवन में गाय का अपना विशेष महत्त्व है। गाय चौपाया प्राणी है और उसे माँ के बराबर आदर दिया गया है। यह हमारी पारिवारिक व कृषि संस्कृति की आधार रही हैं। गाय को गोधन कहा है। पौराणिक काल में जिसके पास जितनी अधिक गायें, वह उतना ही धनी माना जाता था। अतएव गायों की सुरक्षा को एक मानवीय कर्तव्य के रूप में परिभाषित किया गया है। गाय को वेदों में रक्षणीय, सुरक्षा के योग्य, इसी अर्थ में स्वीकारा गया है कि वे सर्वोपरि धन हैं। गायों के जाये बैलों ने कृषि कार्य में इतना सहयोग किया कि वे गायों के साथ ही पूजा के योग्य भी माने गये।

जफर कुरेशी बना चैतन्य सिंह – महामंडलेश्वर स्वामी चितम्बरानंद बोले- घर वापसी

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मंदसौर. मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में एक मुस्लिम शख्स ने सनातन धर्म स्वीकार कर लिया है. अब शेख जफर कुरेशी अपने नए नाम चैतन्य सिंह राजपूत से जाना जाएगा. शुक्रवार को मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर प्रांगण में जफर ने सनातन धर्म गृहण कर लिया है. इस मौके पर महामंडलेश्वर स्वामी चितम्बरानंद महाराज, सांसद सुधीर गुप्ता और विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया भी मौजूद रहे. शेख जफर ने पूरे हिंदू रीति रिवाजों के अनुसार हवन कर मुस्लिम धर्म छोड़कर सनातन धर्म अपना लिया है. धर्म परिवर्तन करवाने वाले महामंडलेश्वर स्वामी चितम्बरानंद महाराज ने कहा कि ये घर वापसी है, सबके पूर्वज हिन्दू हैं. चितम्बरानंद ने शुक्रवार को कहा कि मंदसौर के भगवान पशुपतिनाथ महादेव मंदिर पर घर वापसी का कार्यक्रम चल रहा है.

महामंडलेश्वर स्वामी चितम्बरानंद महाराज ने मंदसौर के रहने वाले मुस्लिम युवक शेख जफर कुरेशी की घर वापसी करवाई है. सनातन धर्म के रीति रिवाज के अनुसार शेख जफर को सनातन धर्म की दीक्षा दी है. अब जफर का नाम चैतन्य सिंह राजपूत हो गया है. वहीं चेतन्य सनातन धर्म गृहण करने के बाद कहा कि मैं अपने मूल में लौटा हूं. अगर कोई इसका विरोध करता है तो गलत है. वहीं इस मौके पर चितम्बरानंद महाराज ने कहा कि सभी के पूर्वज हिंदू थे. जफर ने चैतन्य बनकर अपने सनातन धर्म में घर वापसी की है. इस पावन क्षण के साक्षी सैकड़ों लोग बने हैं. पूरे रीति रिवाज के अनुसार चैतन्य को दीक्षा दी गई है. बता दें कि जफर ने करीब 10 साल पहले एक हिंदू युवती से ही शादी की थी. अब जफर ने भी हिंदू धर्म अपना लिया है. जफर से चैतन्य बने शख्स की पहले से ही हिंदू धर्म में आस्था थी. हिंदू धर्म के त्योहारों में वह पहले से ही शामिल हुआ करता था. साथ ही हिंदू धर्म के त्योहारों को भी धूमधाम से मनाया करता था. इतना ही नहीं चैतन्य ने पहले से ही अपने घर में मंदिर बनाया हुआ था. साथ ही इसके पहले भी हिंदु देवी देवताओं में भी काफी आस्था रखा करता था. दीक्षा समारोह के मौके पर मंदर प्रांगण में काफी लोग मौजूद रहे. यहां सांसद सुधीर गुप्ता और विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया भी मौके पर मौजूद रहे. महामंडलेश्वर स्वामी चितम्बरानंद महाराज ने चेतन्य को सनातन धर्म की दीक्षा दी है.

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महाराष्ट्र के अस्पताल में बड़ी लापरवाही, खून चढ़ाने के बाद चार बच्चे एचआईवी संक्रमित, एक की मौत

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महाराष्ट्र के नागपुर स्थित एक अस्पताल में बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां खून चढ़ाने के बाद चार बच्चे एचआईवी संक्रमित हो गए हैं। इनमें से एक बच्चे की मौत हो गई है। थैलेसीमिया के इलाज के लिए इन बच्चों को खून चढ़ाया गया था। फिलहाल इस मामले में राज्य के स्वास्थ विभाग ने उच्च स्तरीय जांच कराने की बात कही है। सहायक उप निदेशक डॉ. आर के धाकाटे ने कहा है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। खाद्य एवं औषधि विभाग ने मामले में प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है।

अस्पताल में उपचार कर रहे डॉक्टर का कहना है कि इलाज के लिए जब बच्चों का टेस्ट किया गया तो वे एचआईवी संक्रमित मिले। डॉक्टर का मानना है कि ब्लड बैंक से दूषित खून दिया गया था। उसी ब्लड को बच्चों के चढ़ा दिया गया, जिससे वे संक्रमित हो गए हैं। डॉक्टर ने बताया कि खून की जांच के लिए एनएटी परीक्षण करना जरूरी होता है, लेकिन ब्लड बैंक में यह जांच सुविधा नहीं है। इसी वजह से बच्चों को बिना जांच किए बिना ही खून चढ़ा दिया गया। एक पीड़ित बच्ची के परिजन ने बताया कि उनकी बेटी पांच साल की है। अगर जांच करके ब्लड चढ़ाया गया होता तो बच्ची संक्रमित नहीं होती।

MP – गौ तस्कर शहनाज, रफीक और इकबाल गिरफ्तार, 5 गौवंशों को कराया मुक्त

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मध्यप्रदेश के राजगढ़ में सारंगपुर थाना पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना पर हाइवे स्थित होटल के सामने से घेराबंदी कर पिकअप वाहन को पकड़ा। वाहन से क्रूरतार्पूवक भरे पांच गौवंश मिले, जिन्हें कब्जे में लेकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। साथ ही मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने शुक्रवार को आरोपियों के खिलाफ पशु अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर पूछताछ शुरु की।

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थाना प्रभारी आशुतोष उपाध्याय के अनुसार बीती रात मुखबिर की सूचना पर हाइवे स्थित कमलेश होटल के सामने से घेराबंदी कर एक पिकअप वाहन को पकड़ा, तलाशने पर वाहन में पांच गौवंश क्रूरतापूर्वक बंधे हुए मिले, जिन्हें मुक्त कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। पुलिस ने मौके से शहनाज उर्फ सानू पुत्र शहजाद मंसूरी निवासी पिंजारा बाखल, रफीक (30) पुत्र गुलाम पठान और इकबाल पुत्र शब्बीरखां निवासी डंडियावाड़ी थाना सारंगपुर को गिरफ्तार किया।

आरोपियों के कब्जे से साढ़े चार लाख का पिकअप वाहन, 40 हजार के गौवंश जब्त किए गए। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 11(1)घ, 4,6,9 गौवंश प्रतिषेध अधिनियम 2004 ,4,6,10 कृषक पशु अधिनियम , 130/177 (3) एमवी.एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
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मुंबई क्रूज ड्रग्स केस के मामले में शाहरुख खान के बेटे आर्यन को NCB ने दी क्लीन चिट

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मुंबई: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने हाई-प्रोफाइल मुंबई क्रूज ड्रग्स मामले में बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान (Aryan Khan) को ‘क्लीन चिट’ दे दी है. न्यूज एजेंसी एएनआई ने इस बारे में जानकारी दी है. आर्यन खान को पिछले साल मुंबई में एक क्रूज पर छापेमारी के दौरान एनसीबी ने कई अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया था और उनके पास ड्रग्स बरामद करने का दावा किया था. कई सप्ताह तक जेल में बंद रहने के बाद आर्यन खान को कोर्ट से जमानत मिली थी.

ड्रग-ऑन-क्रूज मामले में एनसीबी ने शुक्रवार को स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को आरोपी नहीं बनाया गया है. एनसीबी के डीडीजी (ऑपरेशंस) संजय कुमार सिंह के एक बयान में कहा गया है कि आर्यन और मोहक को छोड़कर सभी आरोपियों के पास से नशीले पदार्थ बरामद किए गए. एनसीबी अधिकारी के बयान में कहा गया है कि 14 लोगों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है. बाकी 6 लोगों के खिलाफ सबूतों के अभाव में शिकायत दर्ज नहीं की जा रही है.

क्या था पूरा मामला, क्यों हुई थी आर्यन की गिरफ्तारी?
आपको बता दें कि आर्यन खान को एनसीबी की टीम ने 2 अक्टूबर, 2021 की रात मुंबई के क्रूज शिप टर्मिनल से पकड़ा था. आर्यन खान के साथ उनके दोस्त अरबाज मर्चेंट को भी एनसीबी ने अपनी गिरफ्त में लिया था. एनसीबी का आरोप था कि मुंबई से गोवा जा रहे क्रूज शिप पर ड्रग्स पार्टी होने वाली थी और आर्यन खान इस पार्टी का हिस्सा बनने वाले थे. अरबाज के जूतों से ड्रग्स पकड़ी गई थी, हालांकि एनसीबी को आर्यन के पास के कोई नशीला पदार्थ नहीं मिली था.

मामले में आर्यन खान 26 दिन आर्थर रोड जेल में बंद रहे
आर्यन खान कुछ दिन तक एनसीबी की कस्टडी में रहे थे, फिर 7 अक्टूबर को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया. आर्यन को मुंबई की आर्थर रोल जेल में रखा गया था और अदालत से 2 बार उनकी जमानत याचिका खारिज हुई थी. आर्यन खान को 26 दिनों तक आर्थर रोड जेल में रहने के बाद 28 अक्टूबर, 2021 को कोर्ट से जमानत मिली थी. इस मामले में आर्यन खान के अलावा जिन 19 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, उनमें 2 को छोड़कर सभी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं.

हार्दिक हुंडीया के हाथों से स्टार अमृत सम्मान से सम्मानित हुए भाजपा के लोकप्रिय राजनेता अतुल शाह

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Mumbai – भारतीय राजनीति को ही अपने जीवन के साथ जोड देने वाले महाराष्ट्र के भारतीय जनता पार्टी के तेज तर्रार और सदैव सक्रिय रहकर लोगों के बीच रहेने वाले लोकनेता अतुलभाई शाह के बारे में यह कह सकते हैं की उनका हर कार्य अतुलनीय है । कोरोंना की महामारी को नेस्तनाबूद करने के लिए भारत सरकार द्वारा जारी कि गई वेक्सिनेशन की मुहीम को अतुल भाई शाह ने दक्षिण मुंबई स्थित माधवबाग देवस्थान में वातानुकूलित सेन्टर स्थापित करके उन्होंने लोगों को वेक्सिनेशन की सुविधा प्रदान की । उनके इस प्रयास की नोंक अन्तरार्ष्ट्रीय स्तर पर ली गई है । इस कार्य के लिए अतुल भाई ने दिन रात मेहनत करके लोगों को वेक्सिनेशन के लिए प्रेरित कर के पुरे वर्ष इस कार्य को अविरत चालु रखा था ।
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उनके इस कार्य की सराहना करते हुए आझादी के ७५ वे अमृत महोत्सव के उपलक्ष में स्टार रिपोर्ट के प्रधान संपादक हार्दिक हुंडिया जी के द्वारा स्टार अमृत सम्मान का आयोजन किया गया है । इस उपलक्ष में कोरोनां महामारी को दुर करनेवाली वेक्सिनेशन का सेन्टर दक्षिण मुंबई के प्रसिद्ध देवस्थान माधवबाग में भारतीय जनता पार्टी के लोकप्रिय विधायक अतुल शाह जी ने एक साल तक पूरी तरह वातानुकूलित सेन्टर चलाकर सेवा यज्ञ चलाये जाने पर उनका स्टार अमृत सम्मान से सम्मानित करते हुवे स्टार रिपोर्ट के संपादक हार्दिक हुंडीयाजी ।

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मंदिर चाहिये या रोजगार ? हमारे मंदिर देते है करोड़ो लोगों को रोजगार कैसे ?

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इस प्रश्न में दूषित मानसिकता छिपी है। लेकिन क्या इसका उत्तर वही है, जो हम दे रहे है। जी हां तो आईये इस प्रश्न पर एक नजर डालते है। आप लोग अपने परिवार के साथ मंदिर जाते पूजा से पहले दुकान से प्रसाद लेते , चढ़ाने के लिए माला ली । हम तो तुरंत दर्शन कर लिये , बाकी लोग विधि विधान के साथ पूजा पाठ कर रहे थे। जिज्ञासु प्रवृत्ति से मैं मंदिर के चारों तरफ घूमने लगा। हर दुकान , हर ठेलिया को देखे कौन क्या बेच रहा है।फिर सब लोग एक जगह चाट खाये , एक जगह जलेबी , फिर एक दुकान से महिलाओं ने अपने लिए श्रृंगार आदि के सामान लिए फिर आगे आकर सब लोग चाय पीये। फिर अचानक ध्यान आया यह मंदिर दो से ढाई हजार लोगों को रोजगार दे रहा है। यह काम तो हजार करोड़ लगाकर कोई कम्पनी नहीं कर सकती है।

जैसे हम जानते है –

तिरुपति मंदिर और शिर्डी मंदिर ऐसे 4 लाख मंदिर है जहां से एक लाख करोड रूपए अल्पसंख्यक आयोग को जाते है तिरूपति मंदिर से आंध्र प्रशासन चला जाता है। ऐसे बहुत से उदहारण है। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात है कि मंदिर किसको रोजगार दे रहा है ! यह वह लोग है ,जिनके पास किसी संस्थान से डिग्री नहीं है। इतना धन नहीं है कि कोई बड़ा निवेश कर सकें। अर्थव्यवस्था में समाज के ये निचले स्तर के लोग है।

हमारे मंदिर देते है करोड़ो लोगों को रोजगार। कैसे ?

१.धार्मिक पुस्तक बेचने वालों को और उन्हें छापने वालों को रोजगार देते हैं।

२. माला बेचने वालों को घंटी-शंख और पूजा का सामान बेचने वालों को रोजगार देते हैं।

३. फूल वालों को माला बनाने और किसानों को रोजगार देते हैं।

४. मूर्तियां-फोटुएं बनाने और बेचने वालों को रोजगार देते हैं।

५. मंदिर प्रसाद बनाने और बेचने वालों को रोजगार देते हैं।

६. कांवड़ बनाने-बेचने वालों को भी रोजगार देते हैं।

७. रिक्शे वाले गरीब लोग जो कि धार्मिक स्थल तक श्रद्धालुओं को पहुंचाते हैं उन रिक्शा और आटो चालकों को रोजगार देते हैं।

८. लाखों पुजारियों को भी रोजगार देते हैं।

९. रेलवे की अर्थव्यवस्था का १८% हिस्सा मंदिरों से चलता है।

१०. मंदिरों के किनारे जो गरीबों की छोटी-छोटी दुकानें होती है उन्हें भी रोजगार मिलता है।

११. मंदिरों के कारण अंगूठी-रत्न बेचने वाले गरीबों का परिवार भी चलता है।

१२. मंदिरों के कारण दिया बनाने और कलश बनाने वालों को भी तो रोजगार मिलता है।

१३. मंदिरो से उन ६५,००० खच्चर वालों को रोजगार मिलता है जो किश्रद्धालुओ श्रद्धालुओं को दुर्गम पहाड़ों पर प्रभु के द्वार तक ले जाते हैं।

१४. भारत में दो लाख से अधिक जो भी होटल हैं और धर्मशालाएं हैं उनमें रहने वाले लोगों को मंदिर ही तो रोजगार देतें हैं।

१५. तिलक बनाने वाले- नारियल और सिंदूर आदि बेचने वालों को भी ये मंदिर रोजगार देते हैं।

१६. गुड-चना बनाने वालों को भी मंदिर रोजगार देते हैं।

१७. मंदिरों के कारण लाखों अपंग और भिखारियों और अनाथ बच्चों को रोजी-रोटी मिलती है।

१८. मंदिरों के कारण लाखों वानरों की रक्षा होती है और सांपों की हत्या होने से बचती है।

१९. मंदिरों के कारण ही हिंदू धर्म में पीपल-बरगद -पिलखन- आदि है वृक्षों की रक्षा होती है।

२०. मंदिर के कारण जो हजारों मेले हर वर्ष लगते हैं- मेलों में जो चरखा-झूला चलाने वालों को भी तो रोजगार मिलता है।

२१. मंदिरों के कारण लाखों टूरिस्ट मंदिरों में घूमते हैं और छोटे-छोटे चाय-पकौडे-टिक्की बेचने वाले सभी गरीबों का जीवन यापन भी तो चलता है।
गौ सेवा भी होती भोज भंडारे संतो द्वारा चलते शिर्डी अखंड भोजनालय चलता रहता है

सनातन धर्म उन करोड़ों लोगों को रोजगार देता है जो गरीब हैं जो ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं और जिन के पास धन-जमीन और खेती नहीं है जो बचपन में अनाथ हो गए हो।

    जिनका कोई नहीं उनका राम है।
    उनका श्याम है उनका शिव है।

    यह मंदिर कई सौ वर्ष तक चलता रहेगा।
    तब तक रोजगार देता रहेगा।

    यह सामाजिक , धार्मिक उन्नयन का केंद्र है।
    यदि आर्थिक दृष्टि से देखे तो मंदिर , अपने निवेश से कई हजार गुना रोजगार दे रहा है शायद हमनें अपनी धार्मिक आस्था के कारण इसको देखा नहीं हमारे मंदिर , आर्थिक वितरण के बहुत बड़े , स्थाई केंद्र है
    हमारे अराध्य परम श्रद्धेय भक्त के से दान धर्म धरोहर स्थल सुरक्षित समृद्ध और विशालतम सेवा स्थापित है अंत क्या कोई और प्रार्थनीय स्थल इतना करते है या कर पायेंगे।

    (लेखक श्री राम कुमार पाल आत्मनिर्भर भारत अभियान के राष्ट्रीय कार्यकारणी अध्यक्ष है )

पाकिस्तान में 30 रुपये महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल

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इस्लामाबाद, एजेंसियां। पाकिस्तान में आज आधी रात से डीजल-पेट्रोल 30 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है। बता दें कि पाकिस्तान के वित्त मंत्री मिफ्ता इस्माइल ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के वस्तुओं पर सब्सिडी को समाप्त करने पर जोर देने के बाद पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है। वित्त मंत्री के ट्वीट कर पेट्रोल-डीजल और केरोसिन तेल के दामों में हुई बढ़ोतरी की जानकारी दी है। बढ़ती महंगाई के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आई अचानक उछाल से पाकिस्तान की जनता की परेशानी बढ़ने वाली है।
पाकिस्तान में अब पेट्रोल की नई कीमत 179.86 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 174.15 रुपये प्रति लीटर हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कल आइएमएफ (IMF) की वार्ता विफल होने के बाद आधी रात से पेट्रोल-डीजल प्रति लीटर 30 रुपए की वृद्धि हुई है।
देश के वित्त मंत्री ने कहा कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह है कि पाकिस्तान को 6 बिलियन डालर के बाहरी वित्त पोषण सुविधा का साहयता मिलना बंद ना हो। समाचार एजेंसी रायटर्स के मुताबिक, दोहा में मौजूद सूत्रों ने बताया कि गुरुवार को आइएमएफ और पाकिस्तान ने 900 मिलियन डालर से अधिक की धनराशि जारी करने के लिए समझौता किया था, हालांकि इस समझौते पर मुहर लगाने के लिए पाकिस्तान को ईंधन सब्सिडी हटाना पड़ेगा और तेल कीमतें बढ़ानी होगी। पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को इसी मद्देनजर बढ़ाया है।

दोहा में वार्ता समाप्त होने के बाद सूत्रों ने जानकारी देते हुए कहा, ‘जब हम ईंधन की कीमतें बढ़ाएंगे, तो सौदा हो जाएगा। हमने एक सौदे की रूपरेखा तैयार कर ली है। बता दें कि पाकिस्तान की नई सरकार, जिसने अप्रैल में कार्यभार संभाला था, ईंधन की कीमतों की सीमा को हटाने के लिए अनिच्छुक रही है। गौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार ने वार्ता के बाद आर्थिक स्थिति पर चर्चा करने के लिए गुरुवार को संसद का संयुक्त सत्र बुलाया था। बताते चलें कि 16 महीने के भीतर पाकिस्तान में आम चुनाव होने की संभावना है। इस बीच ईंधन सब्सिडी को हटाने पर राजनीतिक बहस भी छिड़ सकती है।

जड़ी -बूटियों से ही होगा आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार

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जिसने रामायण पढ़ी या सुनी होगी वो “संजीवनी बूटी”के बारे अवश्य जानता होगा कि कैसे लक्ष्मण मूर्छित हुए थे और हनुमान जी उनके लिए संजीवनी बूटी लेकर आये थे और उनके प्राणों की रक्षा की थी। हमारा भारत मे ऐसी कई तरह की संजीवनियो के लिए समृद्ध है। जड़ी-बूटी से रोगों का इलाज करना भारत की प्राचीन परम्परा हैl आयुर्वेद एक चिकित्सा पद्धति तो है ही, ये जीवन का विज्ञान भी हैI विशेष गुणों के कारण आयुर्वेदिक दवाईयों का दुष्प्रभाव नहीं होता हैI इसलिए आयुर्वेद से इलाज सरल व सुरक्षित हैI

चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद फिर से प्रचलित हो रही है। न सिर्फ देश में, बल्कि विदेश में भी इसकी मांग बढ़ रही है। वर्तमान केंद्र सरकार भी इसके प्रचार-प्रसार में सक्रियता दिखा रही है। राजधानी नई दिल्ली में आयुर्वेद चिकित्सा पर आधारित एम्स की स्थापना इस दिशा में एक बड़ा कदम है।विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ ) ने वैश्विक पारंपरिक औषधि केंद्र (India Traditional Medicine) की स्थापना के लिए भारत सरकार के साथ समझौता किया है। गुजरात के जामनगर में यह केंद्र स्थापित होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर प्रसन्नता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक औषधि और बेहतर स्वास्थ्य के तरीके दुनियाभर में काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। उन्होंने कहा यह डब्लूएचओ सेंटर हमारे समाज में तंदुरुस्ती बढ़ाने में काफी मदद करेगा।

ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रैडिशनल मेडिसिन की स्थापना से संबंधित समझौते पर स्विट्जरलैंड के जिनेवा में भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री की मौजूदगी में विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने ५ वें आयुर्वेद दिवस पर १३ नवंबर, २०२० को इसकी घोषणा की थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक पारंपरिक औषधि केंद्र की स्थापना को ९ मार्च को मंजूरी दे दी।विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया है कि पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक ज्ञान के इस केंद्र के लिए भारत सरकार ने २५० मिलियन डॉलर की सहायता की है। इसका उद्देश्य लोगों और पृथ्वी की सेहत में सुधार के लिए आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से दुनियाभर में पारंपरिक चिकित्सा की क्षमता का दोहन करना है।

आज के समय में दुनिया की करीब 80 प्रतिशत आबादी पारंपरिक चिकित्सा का उपयोग करती है।आज डब्लूएचओ के १९४ सदस्य देशों में से १७० ने पारंपरिक चिकित्सा के इस्तेमाल की सूचना दी है। इन देशों की सरकारों ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और उत्पादों पर विश्वसनीय साक्ष्य और डेटा का एक निकाय बनाने की दिशा में विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग करने के लिए कहा है। आयुर्वेद की बढ़ती मांग को देखते हुए कई बड़ी कंपनियां इस कारोबार में उतर आई है और बेहतर पैकेजिंग और मार्केटिंग के बूते अंग्रेजी दवा कंपनियों को मात देने लगी है। इसके बावजूद जंगलों से जड़ी-बूटी लाकर आयुर्वेद की दवा तैयार करनेवाले गांव के वैद्यों की बात ही कुछ और है। अपने पूर्वजों से चिकित्सा का ज्ञान लेकर ये वैद्य आज भी सामान्य से लेकर असाध्य रोगों तक के मरीजों की उम्मीद हैं।