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शारीरिक गतिविधियां बढ़ाती हैं मस्तिष्क की सक्रियता, अमेरिकी शोधकर्ताओं ने अध्ययन के आधार पर दी जानकारी

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वाशिंगटन, एएनआइ। हम अपने शरीर को जितना ज्यादा चलाएंगे और दैनिक गतिविधियों में व्यस्त रहेंगे उतने ही अधिक स्वस्थ रहेंगे। शारीरिक गतिविधियों का सीधा संबंध मस्तिष्क की सक्रियता से भी होता है। यह बात एक नवीन अध्ययन में सामने आई है। यूनिवर्सिटी आफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो स्कूल आफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में पाया गया है कि मध्यम आयु वर्ग और बुजुर्गो के मस्तिष्क की सक्रियता बढ़ाने में दैनिक शारीरिक गतिविधियां अहम भूमिका निभाती हैं। यह अध्ययन जेएमआइआर एमहेल्थ एंड यूहेल्थ में प्रकाशित किया गया है।

यह जानने का किया गया प्रयास

शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के जरिये शारीरिक गतिविधियों और संज्ञानात्मक प्रदर्शन में संबंध पता लगाने का प्रयास किया। अध्ययन के लिए 90 मध्यम आयु वर्ग और बुजुर्गो को शामिल किया गया। उनकी दैनिक शारीरिक गतिविधियों का पता लगाने के लिए उन्हें एक्सेलेरोमीटर लगाया गया। अध्ययन में शामिल लोग अपने-अपने घरों में ही दैनिक शारीरिक गतिविधियों में लगे रहे, जबकि शोधकर्ता एक्सेलेरोमीटर के माध्यम से दूर से उनकी गतिविधियों पर निगरानी करते रहे।

यह आया सामने

यूसी सैन डिएगो स्कूल आफ मेडिसिन में मनोचिकित्सा विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और अध्ययन के प्रमुख अन्वेषक रेएन मूर के मुताबिक, अध्ययन में हमने पाया कि 50 से 74 आयु के प्रतिभागियों में जिन दिनों शारीरिक गतिविधियों में वृद्धि हुई, उन दिनों में मस्तिष्क की सक्रियता भी बढ़ी। वहीं, जिन दिनों में शारीरिक गतिविधियों में गिरावट दर्ज की गई, उन दिनों में उनके संज्ञानात्मक प्रदर्शन में भी गिरावट देखी गई। मूर के अनुसार, यह एक बहुत ही रैखिक संबंध था। हमें अनुमान था कि शारीरिक गतिविधियों का संबंध मस्तिष्क की कार्यप्रणाली से होता है, लेकिन हम आश्वस्त नहीं थे। अध्ययन के दौरान हमने लोगों से उनकी शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए नहीं कहा, बल्कि उन्होंने वही किया जो वे रोज सामान्य तौर पर कर रहे थे। अभी तक हम यह जानते थे कि व्यायाम का असर मस्तिष्क पर पड़ता है, लेकिन क्या दैनिक शारीरिक गतिविधियां भी मस्तिष्क को प्रभावित करती हैं इसके पुख्ता साक्ष्य नहीं थे। इस अध्ययन के जरिये यही पता लगाने का प्रयास किया गया है।

पुलिस के अन्याय पर गौभक्तों की विजय

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मुंबई – मामला १५ भैंसो से जुड़ा था, मजिस्ट्रेट न्यायालय ने गौशाला के पक्ष में निर्णय दिया और सत्र न्यायालय ने कसाइयों के पक्ष में, गौशाला ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की और पशुओं को कसाइयों के हाथ में देने से मना कर दिया, पुलिस ने शत्रुता की भावना मन में रख के उंब्रज पुलिस ठाणे (सातारा, महाराष्ट्र) के एक कुबुद्धि अफसर ने कानून का दुरूपयोग करके गौशाला के संचालक पर भारतीय दंड संहिता की धारा ४०६ के तहत प्राथमिकी दर्ज कर दी और बहुत परेशान किया समाचार के अनुसार अधिवक्ता राजीव गाँधी जी के माध्यम से अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की गयी और उन्होंने कुशल युक्तिवाद करके न्यायालय को पुलिस का असली चेहरा दिखाके जमानत का आदेश अपने पक्ष में लिया सभी गौभक्तो ने अधिवक्ता राजीव गाँधी जी को साधुवाद किया और अभी सारे पशु गौशाला में सुरक्षित है।

हर गांव में एक गौशाला खोलने का आग्रह -कर्नाटक उच्च न्यायालय

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नई दिल्ली – बड़ी अच्छी खबर सुनने और पढ़ने को मिली है कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पिछले हफ्ते राज्य सरकार से गोहत्या को रोकने के लिए कर्नाटक मवेशी वध रोकथाम और संरक्षण अधिनियम के अनुसार हर गांव में एक गौशाला (गोशाला) खोलने का आग्रह किया है।
उच्च न्यायालय कानूनी सेवा समिति बनाम कर्नाटक राज्य और अन्य स्थानों पर गौशाला खुले इससे गौवंश के रख रखाव में बड़ी सुबिधा होगी।

कर्नाटक उच्च न्यायालय की इस पहल का स्वागत सभी गौ भक्तो ने की है।

मंगलवार को MPC की बैठक

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नई दिल्ली। रिजर्व बैंक के गवर्नर डा. शक्तिकांत दास की अगुआई में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक मंगलवार से शुरू होगी और आम बजट 2022-23 के बाद पहली बार मौद्रिक नीति समीक्षा में लिए फैसलों का एलान गुरुवार को किया जाएगा। सोमवार को कई बैंकों की तरफ से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि ढाई वर्ष के अंतराल के बाद केंद्रीय बैंक सस्ते कर्ज की दरों पर पर्दा गिराने का सिलसिला शुरू कर देगा। हालांकि जिस तरह से हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हो रही है उसे देखते हुए यह भी संकेत है कि केंद्रीय बैंक जो भी फैसला करेगा उस पर क्रूड की कीमतों का बड़ा असर होगा। दिसंबर, 2021 से जनवरी, 2022 के दौरान क्रूड 24 प्रतिशत तक महंगा हुआ है।क्रूड की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार की ¨चता भी सामने आ रही है।

सोमवार को राज्यसभा में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप ¨सह पुरी ने एक लिखित सवाल के जवाब में बताया कि भारत जिन बाजारों से क्रूड खरीदता है वहां क्रूड एक दिसंबर, 2021 को 71.32 डालर प्रति बैरल थी जो 31 दिसंबर, 2022 को बढ़कर 89.41 डालर प्रति बैरल हो गई है। बता दें कि जिस हिसाब से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होता है उसी हिसाब से पेट्रोल व डीजल भी महंगे होते हैं। सरकार की तरफ से यह भी बताया गया है कि क्रूड की महंगाई को लेकर वो तेल उत्पादक देशों के साथ संपर्क में है और उन्हें मंहगे क्रूड से होने वाली परेशानियों के बारे में बताया गया है।

खुदरा कीमतों में वृद्धि का सिलसिला हो सकता है शुरू आंकड़ों के हिसाब से देखें तो तकरीबन नौ वर्षों बाद ऐसी स्थिति आ रही है कि क्रूड बहुत तेजी से महंगा हो रहा है। सिर्फ जनवरी, 2022 में क्रूड की कीमतों में 19 प्रतिशत का इजाफा हुआ है जो वर्ष 1997 के बाद किसी एक महीने में दर्ज सबसे बड़ी वृद्धि है।

सरकारी तेल कंपनियों की तरफ से मार्च, 2022 के शुरुआत से पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में वृद्धि का सिलसिला शुरू करना पड़ सकता है। इसका असर महंगाई पर पड़ेगा जिसको लेकर रिजर्व बैंक पहले ही चिंता जता चुका है। हालांकि महंगे क्रूड से रुपये की कमजोरी और चालू खाते में घाटे पर (देश में आने वाली विदेशी मुद्रा व देश से बाहर जाने वाली विदेशी मुद्रा का अंतर) भी विपरीत असर होगा। इन दोनों हालातों का घरेलू बाजार पर व्यापक असर हो सकता है जिससे निपटने के लिए आरबीआइ को अभी से लामबंदी करनी होगी।

श्रीलंका के आर्थिक संकट के लिए चीन की ‘कर्ज नीति’ जिम्मेदार, अमेरिकी थिंक टैंक ने किया सतर्क

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वाशिंगटन, एएनआइ। श्रीलंका में गहराते आर्थिक संकट के बीच एक अमेरिकी थिंक टैंक ने कहा है कि द्वीपीय राष्ट्र को अपनी अर्थव्यस्था को बचाने के लिए फिर से विचार करने की जरूरत है, जो चीनी कर्ज के जाल में उलझती जा रही है। वाशिंगटन स्थित ग्लोबल स्ट्रैट व्यू ने अपने विश्लेषण में कहा कि श्रीलंका का वित्तीय संकट, मानवीय संकट की ओर बढ़ रहा है और आखिरकार देश को दिवालियापन की तरफ धकेल देगा। कई विश्लेषकों का मानना है कि देश के वित्तीय संकट के लिए प्रारंभिक तौर पर चीन की कर्ज के जाल में फांसने वाली नीति जिम्मेदार है।

विदेशी कर्ज का बोझ सात अरब डालर के पार

रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका का विदेशी कर्ज वर्ष 2014 (जीडीपी का 30 प्रतिशत) के बाद धीरे-धीरे बढ़ाना शुरू हुआ और वर्ष 2019 में सकल घरेलू उत्पाद का 41.3 प्रतिशत हो गया। द्वीपीय राष्ट्र के विदेशी मुद्रा भंडार में भी तेजी से गिरावट आ रही है और अब सिर्फ 1.6 अरब डालर रह गई है। इससे महज कुछ हफ्तों तक बेहद जरूरी सामग्री का आयात किया जा सकता है। द्वीपीय राष्ट्र पर विदेशी कर्ज का बोझ सात अरब डालर को पार कर गया है, इनमें जनवरी में 50 करोड़ डालर व जुलाई में एक अरब डालर के बांड का भुगतान शामिल है।

श्रीलंका में बढ़ी महंगाई

श्रीलंका में नवंबर 2021 में महंगाई दर 9.9 प्रतिशत थी, जो दिसंबर में 12.1 फीसद हो गई। इस अवधि में खाद्य सामग्री 22 प्रतिशत महंगी हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि नकदी संकट से गुजर रहे द्वीपीय राष्ट्र के आयातकों को अत्यावश्यक सामग्री के कार्गो कंटेनरों के लिए भुगतान करने में परेशानी हो रही है, जबकि निर्माताओं तक कच्ची सामग्री भी नहीं पहुंच पा रही है।

बीआरआइ ने भी किया श्रीलंका को खस्ताहाल

ग्लोबल स्ट्रैट व्यू ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था की खस्ताहाली के लिए चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआइ) भी जिम्मेदार है। चीन द्वारा प्रायोजित परियोजनाओं के कारण श्रीलंका कर्ज के जाल में फंसता चला गया। चीन को दुनिया के दूसरे हिस्सों से जोड़ने वाली बीआरआइ परियोजना के तहत ड्रैगन विभिन्न देशों को बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए कर्ज उपलब्ध करा रहा है। हंबनटोटा पोर्ट परियोजना का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन, श्रीलंका का चौथा सबसे बड़ा कर्जदाता बन गया है।

मात्र गाय का दूध ही नन्ने बच्चे को पिलाया जाता

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हे इंसान, अगर तू सच्चा इंसान है, हिन्दू, मुस्लिम सिख ईसाई, पारसी या और कोई – इस धरती माँ के किसी भी हिस्से में रहता है, कोई भी भाषा बोलता है, मांसाहारी है या शाकाहारी ! कहीं न कहीं किसी भी अवस्था में गाय का दूध जरूर पीता है ! बचपन में माँ के स्तनों से दूध प्रचूर मात्रा में न मिलने के कारण, बच्चे को जल्दी हजम होने वाला गाय के दूध से ही पाला जाता है ! बड़े होने पर उसे चाय, काफी, मिल्क शेख, ठंडाई में भी दूध की जरूरत पड़ती है ! गांधी जी ने जन्मभर बकरी का दूध पीया है, आज तक किसी राजनेता, धर्मगुरु, संत महात्मा ने बकरी को माँ का दर्जा नहीं दिया ! भैंस का दूध, गाय का दूध, बकरी का दूध यहां तक भेद का दूध और ऊँट तक का दूध इंसान इस्तेमाल करता है !

किसी राजनेता, धर्माधिकारी, संत महात्मा ने गाय के अलावा किसी को माँ का दर्जा नहीं दिया ! क्यों ? कहते हैं जब देव – दानवों ने समुद्र मंथन किया था और १४ रत्न समुद्र से निकले थे, उन रत्नों में एक रत्न काम धेनु नाम की गाय भी शामिल थी ! रामायण की एक कथा के अनुसार सत्यनारायण विष्णु भगवान् ने यह कामधेनु गाय महर्षि वशिष्ट जी (जो बाद में भगवान् राम के परिवार के सम्मानीय पुरोहित हुए ) को दे दी थी ! ये गाय महर्षि वशिष्ट जी को पत्नी सहित सारे आश्रम वासियों को सारी सुविधाएं उपलब्ध कराती थी ! उन दिनों अयोध्या नरेश विश्वामित्र हुआ करते थे ! उन्हें आखेट खेलने का बड़ा शौक था ! एक बार वे अपनी सैना के साथ जंगल में आखेट को गए, रात होगई, जंगल घना था, भटकते हुए वे महर्षि वशिष्ट जी के आश्रम में पंहुच गए ! आश्रम में महर्षि वशिष्ट जी ने पत्नी सहित अयोध्यापति महाराज विश्वामित्र जी का स्वागत किया और सारे सैनिकों सहित विश्वामित्र जी को खान-पान और सोने तक का बेहतरीन इंतजाम करके दिखा दिया ! अगली सुबह महाराज विश्वमित्र जी ने ब्रह्मऋषि का धन्यवाद किया, साथ ही यह भी पूछ लिया की ‘आश्रम में आपने इतने सारे लोगों की उनकी हैसियत के मुताबिक़ शाकाहारी पौष्टिक,भोजन और रात को सोने की इतनी उच्च कोटि की व्यवस्था कैसे की ? महर्षि वशिष्ट जी ने सारा श्रेय कामधेनु को दे दिया ! सम्राट विश्वामित्र जी के मन में खोट आगया, उनहोंने सोचा, “इतने उच्च कोटि की सर्वगुण संपन्न कामधेनु गाय यहां आश्रम में शोभा नहीं दे रही है, इसे तो अयोध्या नरेश के निजी गौशाला की शोभा बढ़ानी चाहिए” .

प्रकट में उन्होंने महर्षि वशिष्ट जी से कहा, “ऋषिवर, आश्रम में ये देवलोक की गाय शोभाहीन होगई है, इसकी असली जगह अयोध्या नरेश के गौशाला में है, आप इसे मुझे दे दीजिये और बदले में जितना धन, सोना चांदी चाहिए, ले लीजिए ” ! लेकिन वशिष्ट जी ने गाय देने से इंकार कर दिया ! विश्वामित्र जी ने भी कामधेनु गाय को जबरन उठाने की ठान ली और अपनी पूरी सैनिक शक्ति गाय को अपनी राजधानी ले जाने के लिए लगा दी ! महाराजा के इस कुकृत से कामधेनु गाय ने रूष्ट होकर जितने सैनिक थे उतने ही रूप बनाकर सारे सैनिकों को घायल कर धरती पर गिरा दिया ! महाराज विश्वामित्र इस अप्रत्याशित हार से आहत हुए और बिना कामधेनु गाय के ही अपने घायल सैनिकों के साथ अयोध्या लौट गए ! राजधानी लौटते ही उनहोंने अपना राजपाट अपने पुत्र को सौंप दिया और स्वयं भगवा वस्त्र धारण करके वे ब्रह्म ऋषि बनने के लिए तपस्या करने के लिए जंगल में चले गए ! यह केवल कहानी ही नहीं है, बल्कि पौराणिक कथाओं में अंकित है ! मां के दूध के बाद बच्चे की पाचन शक्ति को दुरुस्त करने के लिए मात्र गाय का दूध ही नन्ने बच्चे को पिलाया जाता है !

भैंस या बकरी का दूध नन्ने दुधमुंहे बच्चे को नहीं पिलाया जाता ! गांधी जी केवल बकरी का ही दूध पीते थे आम जनता भैंस का दूध पीती है लेकिन कोइ “भैंस माता या बकरी माता नहीं कहता” ! गौ माता का लालन पालन मात्र एक धर्म या जाति विशेष के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता ! समाचारों और टी वी चैंनलों में दिखाया जाता है, रामदेव बाबा के आश्रम में बहुत सारी गाएं पाली जाती हैं और शुद्ध दूध और गाय का घी जनता तक पहुंचाया जाता है ! बहुत सारे मुस्लिम धर्मालम्बी परिवार भी गाय पालते हैं और उनकी देख भाल और सेवा ठीक ऐसे ही की जाती है जैसे हिन्दू करते हैं ! पाठकों को शायद याद होगा, भारतीय राजनीति में सबसे पहले कांग्रेस ने अपना चुनाव चिन्ह दो बैलों की जोड़ी ली थी, भारत कृषि प्रधान देश है, इस प्रकार ये चिन्ह जनता की आस्थाओं से जुड़ा हुआ था, नरेंद्र देव, जय प्रकाश नारायण, डाक्टर राम मनोहर लोहिया.

उन दिनों प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े थे जिनका चुनाव चिन्ह वरगद का पेड़ था ! लेकिन हर बार कांग्रेस की बैलों की जोड़ी ही जीत हासिल करती थी ! १९६७ में कांग्रेस में बिखराव हुआ, पुरानी कांग्रेस और नयी कांग्रेस बनी, इंद्रा गांधी ने नयी कांग्रेस खड़ी की और चुनाव चिन्ह गाय-बछिया को अपनी पार्टी का चुनाव चिन्ह गाय संग नन्नी बछिया को लिया !! ये चिन्ह भी आम जनता की आस्थावों से जुड़ा रहा ! कांग्रेस में फिर से बिखराव हुआ, बड़े बड़े कांग्रेस के ओल्ड फोल्ड नेता, चौधरी चरणसिंह, मोरारजी देसाई, लिंजगलप्पा जैसे नेता प्रधान मंत्री की कुर्सी पर बैठने का ख़्वाब देखते देखते लुढ़कने लगे तो उन्होंने, प्रधान मंत्री की कांग्रेस पद को एक परिवार की निजी सम्पति बनाने के लिए इंद्रागाँधी के मनसूबे पर ही सवालिया चिन्ह लगा दिया !

अब के इंद्रागाँधी जी को चुनाव चिन्ह मिला ‘हाथ’ “थप्पड़” और ये थप्पड़ आज भी विद्यमान है ! देश में एमरजेंसी लगी, १९७७ के चुनाव में इंद्रा जी की पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा, मोरारजी देसाई प्रधान मंत्री बने, लेकिन दो साल के अंदर चौधरी चरणसिंह जी ने अपना दावा ठोक दिया प्रधान मंत्री की कुर्सी पर हक़ जमाने के लिए ! वे पीएम तो बने पर केवल कार्यवाहक, उन्हें संसद में हार का सामना करना पड़ा, संसद को भंग करना पड़ा और १९८० के चुनाव में इंद्रा गांधी फिर सत्ता में आगयी ! आस्थाओं से जुड़ी “गौ माता” !! पूजा के स्थान को स्वच्छ और पवित्र करने के लिए गौ मूत्र और गौ गोबर से लिपाई की जाती है ! गौमूत्र कही अंदरूनी बीमारियों में रामवाण का काम करती है ! देश में ही नहीं विदेशों में भी बहुत से मुसलिम भाई गाय को बड़ा स्थान देते हैं ! देश में बहुत सारे आश्रम चल रहे हैं, जहां गौशालाओं में बहुत सारी गायें पाली जाती हैं ! गाय को माता का दर्जा देने वाले सच्ची आस्था के साथ इन आश्रमों में खुले दिल से चन्दा देते हैं ! हम दूर क्यों जांय हरिद्वार में रामदेव जी के आश्रम में जांय और देखें की वहां गौशाला में बहुत सारी गायों की देख-भाल और सुरक्षा की जाती है ! गज धन और वाजिधन एक राजा द्वारा दूसरे पड़ोसी राजा से आत्म रक्षा का साधन जुटाता है लेकिन ‘गौधन सम्राट से लेकर आम जनता को मानसिक, शारीरिक रोगों से मुक्ति देता है ! ये धार्मिक आस्थाओं से भी जुड़ा हुआ है ! मन्त्रों में गाय के दूध से बना आचमन शुद्ध माना जाता है ! गाय के दूध से बनी खीर का मजा ही कुछ और है ! दूध के अलावा घी, मट्ठा, गर्मियों में लू से बचाता है ! गौ माता सर्व श्रेष्ट है, पूजनीय है – “गौ माता की जय “” हरेंद्र

बनने जा रही हैं दुल्हन, तो इंस्टेंट ग्लो पाने के लिए ट्राई करें ये स्पेशल फेस पैक

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Face Pack For Instant Glow: शादी (Marriage) का दिन हर लड़की के लिए बेहद खास होता है. उस दिन वो दुनिया की सबसे सुंदर दुल्हन (Bride) दिखना चाहती है और इसके लिए वो हर जतन करती है. महंगे से महंगा पार्लर, लहंगा, ज्वैलरी सब कुछ बुक करती है. लेकिन कई बार इसके बावजूद भी चेहरे पर नेचुरल ग्लो की कमी रह जाती है. ऐसे में अगर आप चाहें तो नैचुरल इंस्टेंट ग्लो पाने के लिए घर में बने ये स्पेशल फेस पैक (Face pack) ट्राई कर सकती हैं. ये फेस पैक एकदम हर्बल हैं और इनके साइड इफेक्ट्स होने का डर भी आपको नहीं होगा. इतना ही नहीं इन फेस पैक को बनाना और इस्तेमाल करना भी बहुत ही आसान है. तो आइये जानते हैं कि इन फेस पैक को किस तरह से बनाया और इस्तेमाल किया जा सकता है.

चंदन-केसर फेस पैक

चंदन-केसर फेस पैक बनाने के लिए आप दो-तीन बड़ा चम्मच कच्चा दूध लें. इसमें एक चुटकी केसर मिक्स कर के करीब पंद्रह मिनट के लिए रख दें. जिससे केसर का असर दूध में आ सके. इसके बाद इस दूध और केसर के मिक्सचर में दो चम्मच चंदन पाउडर मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें.

इसके बाद इस पेस्ट को अपने चेहरे और अपनी गर्दन पर अच्छी तरह से अप्लाई करें. इसके बाद इस पैक को करीब बीस मिनट लगा रहने दें, फिर सादे पानी से धो लें.

बादाम-दूध फेस पैक

बादाम-दूध फेस पैक बनाने के लिए सबसे पहले सात-आठ बादाम को करीब चार बड़े चम्मच दूध में रात भर के लिए भिगोकर रख दें. सुबह बादाम को दूध के साथ बारीक पीसकर गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें. इसके बाद इस पेस्ट को अपने चेहरे और गर्दन पर अच्छी तरह से लगायें और करीब बीस मिनट के लिए ऐसे ही लगा रहने दें. इसके बाद दो मिनट गोलाई में मसाज करके सादे पानी से साफ़ कर लें.

अंडर-19 वर्ल्ड कपः भारत पांचवी बार बना चैंपियन

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पहले राज बावा और रवि कुमार की जबरदस्त गेंदबाज़ी और फिर उपकप्तान शेख़ रशीद, ऑलराउंडर राज बाबा और निशांत सिंधु की दमदार बल्लेबाज़ी की बदौलत भारत ने अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप में इंग्लैंड को चार विकेट से हराकर पांचवी बार ट्रॉफ़ी जीत ली है.

इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 189 रन बनाए. इसके जवाब में भारतीय उपकप्तान रशीद और निशांत सिंधु की अर्धशतकीय पारियों की बदौलत भारत ने इंग्लैंड को चार विकेट से हराया. इसके साथ ही इंग्लैंड का 24 साल बाद अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने का ख़्वाब पूरा न हो सका और यश ढुल पांचवे ऐसे भारतीय कप्तान बन गए जिन्होंने अंडर-19 वर्ल्ड कप की ट्रॉफ़ी पर भारत का नाम अंकित कर दिया. यश ढुल से पहले विराट कोहली, मोहम्मद कैफ, उन्मुक्त चंद और पृथ्वी शॉ भी भारत के लिए अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप जीत चुके हैं. सर विवियन रिचर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए फ़ाइनल में इंग्लैंड की तरह ही भारतीय पारी की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही और पहला विकेट शून्य पर गिर गया.

पाकिस्तान और चीन को क़रीब आने से रोकना है – राहुल गांधी

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पिछले हफ़्ते लोकसभा में कहा था कि मोदी सरकार ने चीन और पाकिस्तान को साथ लाकर सबसे बड़ा अपराध किया है.

राहुल गांधी ने कहा था, ”भारत की विदेश नीति में एक सबसे बड़ा लक्ष्य रहता था कि पाकिस्तान और चीन को क़रीब आने से रोकना है, लेकिन इस सरकार ने दोनों को साथ ला दिया है. भारत के लोगों के ख़िलाफ़ इस सरकार ने ऐसा कर सबसे बड़ा अपराध किया है.” राहुल गांधी की इस टिप्पणी का जवाब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तत्काल ट्विटर पर दिया था.

एस जयशंकर ने ट्वीट कर कहा था, ”राहुल गांधी ने लोकसभा में आरोप लगाया है कि हमारी सरकार ने पाकिस्तान और चीन को साथ कर दिया. इतिहास की सच्चाइयां ये हैं- 1963 में पाकिस्तान ने चीन को शाक्सगम घाटी सौंपी. चीन ने पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कश्मीर से होते हुए 1970 के दशक में काराकोरम हाइवे बनाया. 1970 के दशक में ही दोनों देश परमाणु सहयोग को लेकर भी क़रीब आए. 2013 में चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर शुरू हुआ. ऐसे में आप ख़ुद से पूछिए कि क्या चीन और पाकिस्तान तब दूर थे?”

कई विश्लेषकों का कहना है कि राहुल गांधी जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करने को लेकर पाकिस्तान और चीन के क़रीब आने की बात कर रहे थे, लेकिन उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने का ज़िक्र करने से परहेज़ किया.

कइयों का ये भी कहना है कि राहुल गांधी ये नहीं कह सकते कि मोदी सरकार में चीन और पाकिस्तान क़रीब आए, लेकिन ये बिल्कुल सच है कि देश की कोई भी सरकार दोनों देशों को क़रीब आने से रोकने में सफल नहीं रही है.

इमरान-जिनपिंग का संयुक्त बयान

इमरान ख़ान ने जब रविवार को बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात की और दोनों ने साझा बयान जारी किया तो यही लगा कि चीन-पाकिस्तान की क़रीबी लगातार बढ़ रही है और जानकारों के मुताबिक़, यह भारत के लिए चुनौती है. चीन और पाकिस्तान ने रविवार को कहा कि वे कश्मीर में किसी भी एकतरफ़ा कार्रवाई का विरोध करते हैं क्योंकि इससे कश्मीर मुद्दा जटिल हो जाता है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान चीन के दौरे पर हैं. रविवार को इमरान ख़ान की मुलाक़ात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई थी.

बीजिंग में हुई इस मुलाक़ात के बाद एक संयुक्त बयान जारी किया गया. इस बयान में कहा गया है, ”दोनों देशों ने अपनी चिंताओं और अहम हितों से जुड़े मुद्दों पर एक दूसरे को मदद देने की बात दोहराई है. इस बात को भी रेखांकित किया गया कि दोनों देशों के बीच मज़बूत रक्षा सहयोग इस इलाक़े में शांति और स्थिरता के लिए बेहद अहम है.”

पाकिस्तान में बानी सीनेटर दलित हिन्दू लड़की कृष्णा कुमारी कोहली है चर्चा में

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पाकिस्तानी मीडिया में वहाँ की हिन्दू सीनेटर कृष्णा कुमारी कोहली सुर्खियों में हैं. पाकिस्तानी मीडिया में इन्हें दलित हिन्दू सीनेटर बताया जा रहा है.

कोहली पाकिस्तान की विपक्षी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की सीनेटर हैं. वह 2018 में पीपीपी के टिकट से पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक रिज़र्व सीट जीती थीं. शुक्रवार को पाकिस्तान की सीनेट के अध्यक्ष की कुर्सी पर कृष्णा कुमारी कोहली थीं और उन्हीं की अध्यक्षता में भारत प्रशासित कश्मीर को लेकर एक प्रस्ताव पास किया गया. भारत की संसद में भी कई बार होता है कि लोकसभा अध्यक्ष की ग़ैर-मौजूदगी में किसी सांसद को अध्यक्ष के आसन की ज़िम्मेदारी दी जाती है. शुक्रवार को पाकिस्तानी सीनेट में अध्यक्ष के आसन पर कोहली थीं और यह ख़बर पाकिस्तानी मीडिया में छाई हुई है.

पाकिस्तान के अंग्रेज़ी अख़बार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने लिखा है, ”हिन्दू सीनेटर की अध्यक्षता में पाकिस्तान की सीनेट ने शुक्रवार को भारत प्रशासित कश्मीर के लोगों के साथ एकजुटता को लेकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया. सीनेट ने पाँच अगस्त 2019 के भारत की मोदी सरकार के उस क़दम को ख़ारिज कर दिया, जिसमें जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को ख़त्म कर दिया गया था.”

पाकिस्तान की सत्ताधारी तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के सीनेटर फ़ैसल जावेद ख़ान ने ट्वीट कर कहा है, ”एक हिन्दू ने पाकिस्तानी सीनेट में कश्मीर पर एक सत्र की अध्यक्षता की. सीनेट के चेयरमैन ने हमारी सहकर्मी कृष्णा कुमार कोहली को यह सम्मान दिया. पाकिस्तान ने भारत को कश्मीर को लेकर एक मज़बूत संदेश दिया है. पाकिस्तान अल्पसंख्यकों के लिए खड़ा है जबकि भारत अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ है.” पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो ने भी इसे लेकर ट्वीट किया. उन्होंने कहा, ”थार, सिंध, पाकिस्तान से पीपीपी सीनटेर कृष्णा कोहली ने कश्मीर एकजुटता पर सीनेट सत्र की अध्यक्षता की. यह वह पाकिस्तान है, जिसका पीपीपी प्रतिनिधित्व करता है, देशभक्ति, समानता और बहुलतावाद वाला पाकिस्तान.”

ख़ुद को ये सम्मान दिए जाने को लेकर कृष्णा कोहली ने ट्वीट किया, ”कश्मीर एकजुटता दिवस के मौक़े पर भारत के अवैध कब्ज़े वाले जम्मू और कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर चर्चा के लिए सीनेट सत्र की अध्यक्षता करना बहुत सम्मान की बात है. पाकिस्तान की संसद का सदस्य बनने का मौक़ा देने के लिए पाकिस्तान की संसद और अध्यक्ष बिलावल भुट्टो को धन्यवाद.”

सोशल मीडिया यूज़र अयाज़ गुल ने सीनेट अध्यक्ष का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, ”अल्पसंख्यक हिंदू दलित समुदाय से पाकिस्तान की महिला सीनेटर कृष्णा कुमारी कोहली सीनेट सत्र की अध्यक्षता करती हुईं.”