“मल्टीप्लेक्स प्ले ओटीटी” एप के मुंबई में नए कार्यालय के उद्घाटन समारोह में पहुंचे बॉलीवुड के मशहूर कलाकार
मुंबई। भारत के ऐसे पहले ओटीटी “मल्टीप्लेक्स प्ले” की ऑफिस का मुम्बई के रिलायबल बिजनस सेंटर में उद्घाटन किया गया जो सर्विस प्रोवाइडर है। इसके संस्थापक रेहान अली बिहार के मोतिहारी जिला के रहने वाले हैं। वह इंजीनियर हैं लेकिन तकनीकी क्षेत्र में माहिर होने और फिल्मों का शौक होने की वजह से वह बॉलीवुड इंडस्ट्री में आ गए। मल्टीप्लेक्स प्ले एप्प के नए कार्यालय की ओपनिंग के अवसर पर एडवोकेट शैलेश दूबे, आनंद बलराज विज, अली खान, राजा कॉपसॆ, ताहिर कमाल खान, सनी चार्ल्स, निर्माता निर्देशक डॉ कृष्णा चौहान, जर्नलिस्ट किशन शर्मा सहित कई हस्तियां मेहमान के रूप में उपस्थित रहे। एडवोकेट शैलेश दूबे के हाथों से फीता काटकर ऑफिस का शुभारंभ किया गया।
इस शुद्ध देसी ओटीटी ऐप के संचालन के लिए फाउंडर रेहान अली ने शाहनवाज़ खान, सिकन्दर खान, ज़ुबैर सिद्दीकी, मुश्ताक खान, नूर अली अंसारी, दीपक बलराज विज का विशेष आभार जताया।
संस्थापक रेहान अली ने
तीन चार साल के अध्ययन, रिसर्च और मेहनत के बाद मल्टीप्लेक्स प्ले ओटीटी लांच किया है, जो अपनी तरह का भारत का पहला सर्विस प्रोवाइडर ऐप है जो मेक इन इंडिया के अभियान को बुलंदी देता है।

बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता अली खान ने इस अवसर पर रेहान अली को बधाई देते हुए कहा कि मल्टीप्लेक्स प्ले एक देसी एप है जो लोगो को एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म मुहैया कराता है। मैं रेहान अली को मुबारकबाद देता हूं कि उन्होंने ऐसा नया ऐप अविष्कार किया है जो कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक वरदान साबित होगा। इनका नया ऑफिस मुम्बई की फ़िल्म इंडस्ट्री के केंद्र में स्थित है।
इस ओटीटी ऐप पर हिंदी, मराठी इंग्लिश सहित कई भाषाओं के कंटेंट्स का समावेश है। उच्च तकनिकी संसाधनों से सुसज्जित होने के कारण इस पर प्रसारित होने वाले सभी कार्यक्रम अच्छी गुणवत्ता के साथ दिखाई देंगे।
रेहान अली का कहना है कि इस ऐप पर शानदार फिल्मे, वेब सीरीज, कंटेंट्स दिखाए जाएंगे जो दर्शकों के लिए एक नया अनुभव होगा। तकनीकी रूप से काफी विकसित इस ऐप से निर्माता निर्देशक एक्टर्स कंटेंट क्रिएटर्स डायरेक्ट लाभ ले सकते हैं।
इसके अलावा हम समाज को प्रभावित करने वाले कंटेंट पर ध्यान देंगे। इंटरटेनमेंट के नाम पर गंदी फिल्मों से दूरी बनाकर रखेंगे और युवावर्ग को प्रोत्साहित करने वाली विषय पर बनी फिल्मों को हमारी ओटीटी पर प्रस्तुत करेंगे।
प्रधानमंत्री ने जैविक किसान श्रीमती पप्पाम्मल के निधन पर शोक व्यक्त किया
Deeply pained by the passing away of Pappammal Ji. She made a mark in agriculture, especially organic farming. People admired her for her humility and kind nature. My thoughts are with her family and well wishers. Om Shanti. pic.twitter.com/3JR9LqlMmB
— Narendra Modi (@narendramodi) September 27, 2024
New Delhi प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित जैविक किसान श्रीमती पप्पाम्मल के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। श्री मोदी ने कहा कि उन्होंने कृषि, विशेषकर जैविक खेती के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग उनकी विनम्रता और दयालु स्वभाव के लिए उनकी प्रशंसा करते थे।
प्रधानमंत्री ने एक एक्स पोस्ट में कहा;
“पप्पाम्मल जी के निधन से बहुत दुःख हुआ। उन्होंने कृषि, विशेषकर जैविक खेती के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। लोग उनकी विनम्रता और दयालु स्वभाव के लिए उनकी प्रशंसा करते थे। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और शुभचिंतकों के साथ हैं। ओम शांति।”
बांग्लादेश में दुर्गापूजा पर संकट के बादल
(मनोज कुमार अग्रवाल -विनायक फीचर्स)
बांग्लादेश में मजहबी कट्टरपंथी ताकतों का अराजकता भरा उन्माद सिर चढ़कर बोल रहा है इसी के चलते हजारों साल से चली आ रही दुर्गा पूजा भी उनकी आंखों में चुभ रही है। इस बार बांग्लादेश में शारदीय नवरात्रि पर होने वाली दुर्गा पूजा कट्टरपंथी लोगों के निशाने पर है। बांग्लादेश से प्रधानमंत्री शेख हसीना के निर्वासन के बाद वहां हिन्दू विरोधी कट्टरपंथी ताकतों द्वारा कदम कदम पर हिन्दुओं का सामाजिक, धार्मिक ,सामुदायिक दमन किया जा रहा है।
बांग्लादेश में एक बार फिर हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। राज्य में इस्लामी कट्टरपंथी समूहों ने हिंदूओ के कई मंदिरों और समितियों को धमकी भरे पत्र भेजे हैं। जिनमें 5 लाख बांग्लादेशी टका की मांग की गई है। इस पत्र में कहा गया है कि अगर ये रकम नहीं भेजी गई तो उन्हें पूजा नहीं करने दी जाएगी। हिंदू समुदाय के सदस्यों का कहना है कि दुर्गा जी की प्रतिमा को तोड़ने और जबरन वसूली के लिए उन्हें कई ऐसी ही धमकियां मिली है। इन धमकियों के चलते बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के आयोजन पर संकट के बादल छा गए हैं। बांग्लादेश में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है हालांकि अतीत में मुगल काल तक में भी मौजूदा बांग्लादेश में दुर्गा पूजा की जाती रही थी।
दुर्गा पूजा का उत्साह केवल भारत में ही नहीं, बल्कि सारे विश्व में दिखाई देता है। हमारे पड़ोसी बांग्लादेश में भी माँ दुर्गा की पूजा बड़े आयोजन के रूप में होती है। सिर्फ हिंदू समुदाय के लोग ही यह त्यौहार नहीं मनाते, बल्कि लिबरल मुसलमान भी इसमें बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। वहां यह अब एक सार्वभौमिक त्यौहार है।
यह जानना कम सुखद नहीं है कि 2022 में बांग्लादेश में 32,168 दुर्गा पंडाल लगाए गए थे। अकेले ढाका में पूजा पंडालों की संख्या 241 थी।
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में स्थित ढाकेश्वरी मंदिर इस बात का प्रमाण है कि इस क्षेत्र में माँ दुर्गा की उपासना सदियों से होती चली आ रही है। माना जाता है कि ढाकेश्वरी मंदिर की स्थापना 12वीं शताब्दी में बल्लाल सेन नाम के एक हिंदू राजा ने की थी। बल्लाल सेन को माँ दुर्गा ने सपने में आकर कहा था कि उनकी प्रतिमा पास के जंगल के एक विशेष स्थान पर दबी हुई है, वह उस प्रतिमा को वहां से लेकर मंदिर में स्थापित करें।
ढाकेश्वरी माँ के नाम पर ही बांग्लादेश की राजधानी का नाम ढाका पड़ा, ऐसी मान्यता है। तभी से ढाका में माँ दुर्गा की यह पारंपरिक पूजा होती आ रही है। बांग्लादेश में ढाकेश्वरी मंदिर के अलावा सिद्धेश्वरी मंदिर, रमना काली मंदिर और रामकृष्ण मिशन मंदिर भी दुर्गा और काली पूजा के लिए विश्वविख्यात है। सिलहट जिले के पंचगांव की दुर्गापूजा लगभग 300 साल पुरानी है। यह पूरे उपमहाद्वीप में एकमात्र लाल रंग की दुर्गा है ।
सच कहे तो आज जिस रूप में हम दुर्गा पूजा का आयोजन करते हैं, उसकी शुरुआत बंगाल से हुई। आज भी धूमधाम और भव्यता में बंगाल की दुर्गापूजा का कोई मुकाबला नहीं है। भारत विभाजन से पहले बांग्लादेश बंगाल का ही हिस्सा था, दोनों की संस्कृति भी एक ही थी।
पहले बंगाल का एक भाग पूर्वी पकिस्तान के रूप में पाकिस्तान का हिस्सा बना और फिर 1971 में स्वतंत्र देश बन गया । इधर के कुछ वर्षों में बांग्लादेश में भी इस्लामिक कट्टरपंथी सर उठाने लगे हैं। दुर्गा पूजा के पिछले कुछ आयोजनों में विघ्न डालने के प्रयास किए गए। पिछले साल तो किसी कट्टरपंथी ने पंडाल में कुरान की प्रति रख दी और अफवाहें फैला दीं। कई जगह पंडाल में तोड़ फोड़ भी की गई। अब प्रधानमंत्री शेख हसीना के निर्वासन के बाद कट्टरपंथी ताकतों ने बड़े पैमाने पर हिन्दुओं के साथ हिंसा और आगजनी ,महिलाओं खासकर नाबालिग लड़कियों के साथ दरिंदगी, पूजा स्थलों पर तोडफ़ोड़ और मूर्ति भंजन की वारदातों को अंजाम दिया है। हाल ही में कट्टरपंथी तत्वों ने एक पत्र भेज कर खुली अवैध वसूली और धमकी देने का एलान किया है।
इन तत्वों ने चेतावनी दी है कि ‘अगर आप दुर्गा पूजा मनाना चाहते हैं, तो हर मंदिर समिति को 5 लाख टका दान देना होगा। अगर आप इसका पालन नहीं करते हैं, तो आप उत्सव नहीं मना पाएंगे। हम जो जगह बताएंगे, वहां एक हफ़्ते के अंदर पैसे जमा कर दें। याद रखें, अगर आपने प्रशासन या प्रेस को बताया, तो हम आपके टुकड़े-टुकड़े कर देंगे।’
चेतावनी पत्र में आगे लिखा है कि’हम अल्लाह की कसम खाते हैं, अगर हमें पैसे नहीं मिले, तो हम तुम्हें टुकड़े-टुकड़े कर देंगे। हमारी नज़र तुम पर है।’
दुर्गा पूजा से पहले तनाव के चलते बांग्लादेशी अधिकारियों ने देश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए उपायों को बढ़ाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा है कि दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास सतर्कता बढ़ाई जाएगी। पुलिस महानिरीक्षक मोइनुल इस्लाम ने कहा कि दुर्गा पूजा समारोहों के लिए तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था अपनाई जा रही है। यह मूर्ति विसर्जन तक लागू रहेगी।
अगर दुर्गा पूजा समितियों को कोई धमकी देता हैं तो वे आपातकालीन नंबर 999 पर संपर्क कर सकते हैं। दुर्गा पूजा के लिए सादे कपड़ों में सुरक्षाकर्मी, संकट प्रतिक्रिया दल और स्वाट को स्टैंडबाय पर रखा जाएगा। वहीं, डाकोप पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज सिराजुल इस्लाम ने कहा, ‘शुक्रवार को चार मंदिरों ने जीडी दर्ज कराई है। हम इस मामले की जांच कर रहे हैं और नियमित रूप से सेना दल के साथ गश्त कर रहे हैं।
बांग्लादेश की सरकार ने बाकायदा फरमान जारी कर हिंदुओं को आदेश दिया है कि दुर्गा पूजा पंडालों में बजने वाले म्यूजिक सिस्टम मस्जिदों में होने वाली अजान और नमाज के वक्त बंद कर दिए जाएं । बांग्लादेश की सरकार के इस तालिबानी फरमान का अब चौतरफा विरोध शुरू हो गया है।
बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक बांग्लादेश में गृह मामलों के सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मोहम्मद जहांगीर आलम चौधरी ने यह आदेश जारी किया है। इस फरमान में जहांगीर आलम ने कहा है कि दुर्गा पूजा पंडालों के दौरान मस्जिद में अजान से 5 मिनट पहले म्यूजिक सिस्टम को बंद करना अनिवार्य होगा। इसके बाद जब तक मस्जिदों में नमाज चलेगी, तब तक पंडालों में बजने वाले सभी म्यूजिक सिस्टम और लाउडस्पीकर बंद रहने चाहिए । बांग्लादेश की यूनुस सरकार के इस तालिबानी फरमान का भारत में विरोध शुरू हो गया है। इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने एक्स पर पोस्ट कर इस आदेश पर विरोध जताया है।
पोस्ट में दास ने लिखा, बांग्लादेश में गृह मंत्री के सलाहकार फरमान जारी कर रहे हैं कि हिंदुओं को अजान से 5 मिनट पहले अपनी सभी पूजा- अनुष्ठान और संगीत बंद कर देना चाहिए वरना उनकी गिरफ्तारी हो सकती है। ये नया तालिबानी बांग्लादेश है।
इन हालातों में क्या हजारों साल से चली आ रही दुर्गा पूजा इस साल परम्परागत उत्साह से संपन्न हो पाएगी इसमें संदेह की काफी गुंजाइश है । लेकिन यह अजब दुर्योग कहा जाएगा कि बांग्लादेश में हिन्दूओं के साथ बर्बरता की वारदातों के बावजूद भारत में भारतीय क्रिकेट टीम बांग्लादेश की टीम के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेल रही है और बांग्लादेश में हो रही अराजकता के खिलाफ तनिक भी विरोध नहीं जता रही है। सेकुलरिज्म ने हमारे राष्ट्रीय चरित्र और चेतना का किस हद तक पतन किया है यह इस बात का सटीक सत्यापन है।
(विनायक फीचर्स)
मुख्यमंत्री धामी ने लांच की प्रवासी उत्तराखण्ड प्रकोष्ठ की वेबसाइट
28 सि.2024,शनिवार, देहरादून
-संजय बलोदी प्रखर
मीडिया समन्वयक उत्तराखंड प्रदेश
देश-विदेश के समस्त प्रवासी उत्तराखण्डी बंधुओं के जुड़ने से राज्य के विकास कार्यों को मिलेगी नयी शक्ति *
07 नवम्बर 2024 को देहरादून में आयोजित किया जायेगा प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन।
देहरादून,28 सितम्बर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज शनिवार को सचिवालय में प्रवासी उत्तराखण्ड प्रकोष्ठ की वेबसाइट www.pravasiuttarakhandi.uk.gov.in लांच की। प्रवासी उत्तराखण्ड प्रकोष्ठ की वेबसाइट आइटीडीए के माध्यम से तैयार की गई है। वेबसाइट के माध्यम से प्रवासियों को राज्य सरकार की विभिन्न नीतियों, कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की जानकारी प्रदान की जायेगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि 07 नवम्बर 2024 को प्रस्तावित प्रवासी उत्तराखण्ड दिवस के अवसर पर देहरादून में देश के विभिन्न प्रदेशों में रह रहे प्रवासियों को आमंत्रित कर भव्य सम्मेलन आयोजित किया जाए। उन्होंने कहा कि अपनी मातृभूमि से सबका जुड़ाव होता है। राज्य सरकार का प्रयास है कि उत्तराखण्ड के प्रवासियों का राज्य के विकास के लिए सहयोग लिया जाए और उनको अपनी मातृभूमि से जुड़ाव के लिए उन्हें हर संभव सहयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि हमारे उत्तराखण्ड के प्रवासियों ने देश-दुनिया में अपने कार्यों के बल पर अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि देश-दुनिया में रहने वाले सभी उत्तराखण्ड वासियों से हमारा नियमित सम्पर्क होना चाहिए। हमारा प्रयास है कि हम हर सुख-दुःख में भागीदार बनें।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि विदेशों में रह रहे प्रवासी उत्तराखण्डियों को भी आमंत्रित कर राज्य में जल्द एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाए। विदेशों में रह रहे सभी प्रवासी उत्तराखण्डियों का डाटाबेस अपडेट रखा जाए। उन्होंने कहा कि विदेश भ्रमणों के दौरान हमारे प्रवासी भाई-बहनों द्वारा जिस तरह भव्य रूप से स्वागत किया जाता है, इससे उनका अपनी पैतृक भूमि से लगाव और अपनी संस्कृति से जुड़ाव स्पष्ट परिलक्षित होता है।
उत्तराखण्ड राज्य से विभिन्न देशों एवं भारत के विभिन्न प्रदेशों में निवासरत उत्तराखण्डी प्रवासियों तक राज्य सरकार की पहुंच बनाने और प्रावासी उत्तराखण्डियों को उनकी मातृ भूमि के साथ जोड़ने, राज्य के विकास में उनकी विशेषज्ञता, अनुभव एवं वित्तीय क्षमताओं का लाभ लिये जाने तथा उल्लेखनीय उपलब्धि वाले प्रवासियों को सम्मानित करने के उद्देशय से राज्य में प्रवासी उत्तराखण्ड प्रकोष्ठ की स्थापना की गई है। विदेशों में रह रहे प्रवासियों की सुविधा के लिए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय एवं उनकी महत्वपूर्ण योजनाओं के लिंक भी वेबसाइट में दिये गये है। प्रकोष्ठ द्वारा विभिन्न स्रोतो से देश के अन्दर एवं विदेशों में कार्यरत प्रवासी संगठनों एवं प्रतिष्ठित प्रवासियों के सम्पर्क सूत्र एकत्र किये है। अभी तक 18 देशों में रह रहे प्रवासी उत्तराखण्डियों से सम्पर्क स्थापित किया जा चुका है।
इस अवसर पर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, डा. बी.वी.आर.सी पुरूषोत्तम, श्री दीपेन्द्र चौधरी, एस.एन.पाण्डेय, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, निदेशक आईटीडीए श्रीमती नीतिका खण्डेलवाल, प्रवासी उत्तराखण्ड प्रकोष्ठ के सदस्य सुधीर चन्द्र नौटियाल एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज जी को अरुणाचल प्रदेश के एयरपोर्ट पर रोका गया
जगद्गुरु शंकराचार्य जी गौ ध्वज स्थापना भारत यात्रा पर निकले हैं।पहले जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज जी को अरुणाचल प्रदेश के एयरपोर्ट पर रोका गया फिर नागालैंड के एयरपोर्ट पर रोका गया और अब तो त्रिपुरा के अगरतला एयरपोर्ट से मेघालय के शिलांग एयरपोर्ट के लिए शंकराचार्य जी को चार्टर प्लेन से जाने ही नहीं दिया जा रहा है।
Punjab News: मस्जिद के पास हमलावरों ने आठ गायों को चाकुओं से गोदा
जागरण संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार , रूपनगर। स्थानीय पुल बाजार में जामा मस्जिद के निकट डेयरी फार्म में अज्ञात लोगों ने आठ गायों पर तेजधार चाकुओं से हमला कर उन्हें घायल कर दिया। इसमें एक गाय की मौत हो गई जबकि सात की हालत गंभीर है। हमलावर एक गाय के पेट में ही चाकू छोड़ गए जिले तुरंत पशु अस्पताल लाकर उसके पेट से चाकू निकाला गया।
शेष घायल गायों का डेयरी में ही उपचार किया जा रहा है। डेयरी फार्म के मालिक परमजीत कुमार ने बताया कि वह और उसकी बहन रिया वासुदेवा डेयरी फार्म चलाते हैं। सुबह उन्होंने डेयरी में आकर देखा तो आठ गायों पर चाकू से वार किए गए थे।
इनमें से एक की मौत हो चुकी थी जबकि एक के पेट में ही आरोपित चाकू छोड़ फरार हो चुके थे। उन्होंने कहा कि पहले भी उनके डेयरी फार्म में गायों को मारने का प्रयास हुए हैं और चार गाय मर चुकी हैं।
हिंदू संगठन ने दी चेतावनी
डेयरी में कई बार सिरिंज की सुइयां व अन्य आपत्तिजनक चीजें मिल चुकी हैं। उन्हें अपने पड़ोसी पर संदेह है जो उनसे कई बार झगड़ा कर चुका है। एसएसपी गुलनीत सिंह खुराना ने कहा कि गायों पर किए गए अत्याचार को लेकर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
उन्होंने कहा कि जल्द ही आरोपितों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। उधर, हिंदू संगठनों ने घटना की निंदा करते हुए चेतावनी दी है कि अगर 48 घंटे में पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार नहीं किया तो वे संघर्ष करने को मजबूर होंगे।
बजरंग दल ने गोवंश से भरी पिकअप पकड़ी
बजरंग दल ने बुधवार रात गोवंश से भरी पिकअप पकड़ी। बजर दल फाजिल्का के जिला सुरक्षा प्रमुख कपिल ढाका निवासी गांव खानवाना ने बताया कि 25 सितंबर को रात करीब 10:45 बजे उन्होंने एक पिकअप रोक चालक से पूछताछ की तो वह टालमटोल करने लगा। पुलिस को बुलवा पिकअप की जांच की गई तो उसमें से सात गोवंश बरामद हुए।
एक पिता की क्या थी मजबूरी? 4 बेटियों के साथ की आत्महत्या
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बार बुराड़ी जैसा कांड सामने आया है और संत कुंज के रंगपुरी गांव में एक ही परिवार के 5 लोगों ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली है. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह 10:18 बजे पड़ोसियों से सूचना मिलने के बाद पुलिस ने फ्लैट का ताला तोड़कर शवों को बाहर निकाला गया. पुलिस ने बताया कि एक व्यक्ति और उसकी चार बेटियों ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली.
जानकारी के अनुसार, 50 साल के हीरालाल मूल रूप से बिहार के रहने वाले थे और परिवार के साथ वसंत कुंज के रंगपुरी इलाके में किराए के मकान में रहते थे. उनकी पत्नी की मौत एक साल पहले कैंसर से हो गई थी. अब उन्होंने अपनी चार बेटियों 18 साल की नीतू, 15 साल की निशि, 10 साल की नीरू और 8 साल की निधि के साथ आत्महत्या कर ली है.
आत्महत्या के कारणों का नहीं चल पाया है पता
घटनास्थल के कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है और इस वजह से अब तक आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया है. लेकिन, जानकारी के अनुसार, चारों बेटियां दिव्यांग थी और चल-फिरने में असमर्थ थीं. एक बेटी को आंख से दिखता नहीं था और एक को चलने में थी. इस वजह से शख्स परेशान रहता था और पत्नी की मौत के बाद से परेशानी ज्यादा बढ़ गई थी. पुलिस को मौके से सल्फास के पाउच मिले हैं.
जांच में जुटी पुलिस, तलाश रही अलग-अलग एंगल
पुलिस ने बताया कि घटना के बाद सभी के शव एक कमरे में पड़े थे. मौके पर पहुंची दिल्ली FSL, सीबीआई FSL और सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने घटनास्थल से सबूत जुटाए हैं. पुलिस इस केस को हर एंगल से जांच कर रही है. पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि पांचों ने आत्महत्या जैसा कमद क्यों उठाया? क्या किसी ने इनको उकसाया?
Disclaimer: जीवन अनमोल है. जी भरकर जिएं. इसका पूरी तरह सम्मान करें. हर पल का आनंद लें. किसी बात-विषय-घटना के कारण व्यथित हों तो जीवन से हार मारने की कोई जरूरत नहीं. अच्छे और बुरे दौर आते-जाते रहते हैं. लेकिन कभी जब किसी कारण गहन हताशा, निराशा, डिप्रेशन महसूस करें तो सरकार द्वारा प्रदत्त हेल्पलाइन नंबर 9152987821 पर संपर्क करें.
मेघालय में भी ‘गौ ध्वज यात्रा’ का आयोजन अनिश्चित
शिलांग/कोहिमा, 28सितंबर नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के बाद मेघालय में भी ‘गौ ध्वज स्थापना भारत यात्रा’ का आयोजन अनिश्चित बना हुआ है, क्योंकि पूर्वी खासी हिल्स जिले के जिला मजिस्ट्रेट ने धारा 163 बीएनएसएस के तहत निषेधाज्ञा जारी कर जिले में पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पहले गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने और गोहत्या रोकने के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग करते हुए पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों में ‘गौ ध्वज स्थापना भारत यात्रा’ आयोजित करने की घोषणा की थी।
लेकिन ‘गौ ध्वज स्थापना भारत यात्रा’ को क्षेत्र के कई राज्यों में विभिन्न संगठनों की ओर से कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
नागालैंड और मेघालय ईसाई बहुल राज्य हैं, जबकि कई पूर्वोत्तर राज्यों में गोमांस लोगों द्वारा खाया जाने वाला सबसे आम और लोकप्रिय मांस है।
मेघालय राज्य की राजधानी शिलांग के पूर्वी खासी हिल्स जिले के जिला मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा कि प्रशासन के संज्ञान में आया है कि कुछ संगठन शिलांग में गौ ध्वज स्थापना भारत यात्रा आयोजित करने की योजना बना रहे हैं, हालांकि आयोजकों ने यात्रा निकालने के लिए अनुमति नहीं मांगी है।
डीएम आर.एम. कुरह ने अपने आदेश में कहा, “…..ऐसी रैली से शिलांग शहर और पूर्वी खासी हिल्स जिले में कानून और व्यवस्था बिगड़ सकती है,…..और किसी भी समूह को जुलूस/रैली निकालने से रोकने के उद्देश्य से, जो सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित कर सकती है, शिलांग शहरी क्षेत्र सहित पूरे शिलांग शहर की सीमा के भीतर किसी भी रैली या जुलूस के उद्देश्य से पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया जाता है।”
उन्होंने कहा: “उक्त आदेश का कोई भी उल्लंघन बीएनएस की धारा 223 के तहत दंडात्मक प्रावधानों को आकर्षित करेगा, और कोई भी अन्य जो उचित और उचित समझा जाएगा।”
जगद्गुरु शंकराचार्य को अपने दल के साथ शुक्रवार को शिलांग हवाई अड्डे पर पहुंचना था, लेकिन हिंदू संत के चार्टर्ड विमान से शनिवार को हवाई अड्डे पर उतरने की संभावना थी। जगद्गुरु शंकराचार्य महाराज के प्रवक्ता शैलेंद्र योगीराज सरकार ने कहा कि वह (जगद्गुरु शंकराचार्य) शनिवार को गौ ध्वज स्थापना भारत यात्रा के तहत गाय का झंडा स्थापित करेंगे, जिसमें गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने और गौहत्या रोकने के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग की जाएगी। इससे पहले शुक्रवार को खासी छात्र संघ (केएसयू) सहित विभिन्न संगठनों के सैकड़ों प्रदर्शनकारी उमरोई में शिलांग हवाई अड्डे के बाहर एकत्र हुए, ताकि संत और उनके दल को हवाई अड्डे से बाहर जाने से रोका जा सके। री-भोई के जिला अधिकारियों ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए हवाई अड्डे पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए। भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के अधिकारियों ने कहा कि लोगों ने हवाई अड्डे के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया और फिर तितर-बितर हो गए। दबाव समूहों के कार्यकर्ताओं ने घोषणा की कि वे मेघालय में गौ ध्वज स्थापना भारत यात्रा आयोजित नहीं होने देंगे।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि राज्य के साथ-साथ री भोई और पूर्वी खासी हिल्स जिले में कानून और व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े, मेघालय सरकार ने कथित तौर पर भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण से शनिवार को अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विमान को उतरने की सुविधा देने से इनकार करने का अनुरोध किया।
इस बीच, गुरुवार को चार्टर्ड विमान से अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के हवाई अड्डों पर पहुंचने के बाद अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को वापस भेज दिया गया।
अरुणाचल प्रदेश के होलोंगी में डोनी पोलो हवाई अड्डे पर पहुंचे आध्यात्मिक नेता को अखिल अरुणाचल प्रदेश छात्र संघ (AAPSU) के सदस्यों के विरोध का सामना करना पड़ा।
सरस्वती, जिन्हें 28 सितंबर को कोहिमा में ‘गौ ध्वज स्थापना भारत यात्रा’ को संबोधित करना था, को गुरुवार को दीमापुर हवाई अड्डे से अपने निर्धारित कार्यक्रम को पूरा किए बिना वापस लौटना पड़ा क्योंकि अधिकारियों ने उन्हें हवाई अड्डे से बाहर आने से रोक दिया था।
नागालैंड सरकार ने 11 सितंबर को घोषणा की कि वह 28 सितंबर को कोहिमा में ‘गौ महासभा’ और गौ ध्वज स्थापना भारत यात्रा के आयोजन की अनुमति नहीं देगी।
विभिन्न नागरिक समाजों के नेताओं ने कहा कि गोमांस कई दशकों से लोकप्रिय नागा व्यंजनों का हिस्सा रहा है और सरकार और कोई भी अन्य संगठन लोगों की भावनाओं और राज्य की परंपराओं को नुकसान नहीं पहुंचा सकता।
सत्तारूढ़ नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी), उसके सहयोगी भाजपा और नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ), और प्रभावशाली नागा मदर्स एसोसिएशन और नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन सहित विभिन्न नागरिक समाज संगठनों ने ‘गौ महासभा’ के आयोजन का कड़ा विरोध किया।












