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सौतेले पिता ने किया दुष्‍कर्म

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इरोड (तमिलनाडु), एजेंसियां। तमिलनाडु के इरोड जिले में 16 साल की एक लड़की को अपने अंडे (एग) बेचने के लिए मजबूर करने के मामले में दुष्कर्म और प्रताड़ना के आरोप सामने आए हैं। लड़की की मां और सौतेले पिता द्वारा पिछले पांच वर्षों में कम से कम आठ मौकों पर उसके अंडे (अंडाणु) को बेचने के लिए मजबूर किया गया था। विशेष चिकित्सा टीम ने रविवार को एक नाबालिग लड़की से पूछताछ की। तमिलनाडु पुलिस ने यह जानकारी दी।

तमिलनाडु की चिकित्सा और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा निदेशालय की छह सदस्यीय टीम ने 6 जून को लड़की का बयान दर्ज किया। संयुक्त निदेशक ए विश्वनाथन की अध्यक्षता वाली टीम ने पाया कि पिछले पांच वर्षों में लड़की को अपने अंडे (एग) विभिन्न प्रजनन क्षमता केंद्र को बेचने के लिए मजबूर किया गया था। अधिकारी अब लड़की के बयान के आधार पर राज्य के विभिन्न प्रजनन केंद्रों की जांच कर रहे हैं।

अधिकारियों ने कहा कि यदि अपराध की जानकारी में सही पाई जाती हैं तो उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे और डॉक्टरों की संलिप्तता की भी जांच की जाएगी। शनिवार को मामले के जांच अधिकारी इरोड जिला के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने बांझपन का इलाज करने वाले दो अस्पतालों को समन भेजा। दोनों अस्पतालों के अधिकारी उपस्थित हुए और जांच अधिकारी के सवालों का जवाब दिया।

पुलिस के अनुसार, टीम ने 13 साल की उम्र से लड़की के अंडाणु दान के बारे में आपबीती सुनी। पीड़िता ने बताया कि कैसे उसकी मां इंद्राणी (33) और उसके सौतेले पिता सैयद अली (40) ने उसे पेरुंदुरई (इरोड), सेलम और होसुर इलाकों में निजी अस्पतालों में अंडाणु दान करने के लिए मजबूर किया था।

पुलिस के मुताबिक, लड़की ने यह भी कहा कि सैयद अली ने उसका कई बार दुष्‍कर्म किया। मेडिकल टीम ने सभी विवरण दर्ज किए। पुलिस ने कहा कि उसने जिले में बांझपन का इलाज करने वाले उन अस्पतालों से पूछताछ की, जहां लड़की को अपना अंडाणु दान करने के लिए मजबूर किया गया था।

प्राथमिकी में कहा गया है कि लड़की की मां, एस इंद्राणी (33), जो अपने पहले पति से अलग हो गई थी, जो नाबालिग के पिता है, भी अपराध में शामिल था। एक बिचौलिये की मदद से आधार कार्ड पर नाबालिग की उम्र बदली गई। बिचौलिए को 5,000 रुपये का कमीशन दिया गया था, जबकि लड़की की मां ने हर बार एग की बिक्री 20,000 रुपये में की थी।

कश्मीर में एक मौलवी थांग-टा के संरक्षण में आगे आया

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मोहम्मद इकबाल को उस समय असामान्य सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, जब उन्होंने जम्मू-कश्मीर में युवाओं को मनोरंजक खेल थांग-टा की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।
इकबाल ने कहा कि “बीस साल पहले मैं एक निजी प्रशिक्षक था और लड़कों एवं लड़कियों को मुफ्त कक्षाएं दे रहा था। इकबाल अब राज्य के एक सम्मानित कोच हैं। उन्होंने कहा कि उनकी टीम ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स में भाग लिया था।

इकबाल ने बताया कि स्थानीय लोगों ने मेरी कक्षाओं में लड़कियों के शामिल होने पर आपत्ति जताई थी। उनमें से कई लोगों ने बहुत ही आक्रामक रवैया अपनाया और हमारे प्रशिक्षण सत्रों में बाधा पैदा करते रहे।

इकबाल ने बताया कि जहां पर वह रहते थे, बाद में वहां की एक स्थानीय मस्जिद के प्रमुख ने उनका बचाव किया। उन्होंने बताया कि मौलवी और कई स्कूल के प्रधानाचार्यों ने मेरे चरित्र की पुष्टि की तथा आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया कि मैं बच्चों की अच्छी देखभाल करूंगा, और आज मैं यहां हूं।

इससे मुझे काफ़ी मदद मिली तथा लड़कियों को यह खेल पसंद आया और प्रत्येक ने विरोध के बावजूद इसमें बने रहने के लिए दृढ़ संकल्प किया।

वर्षों से आतंकवाद की छाया में मोहम्मद इकबाल ने हजारों बच्चों को थांग-टा खेलने की ओर आकर्षित किया है और उन्हें मुख्यधारा में बने रहने की सख्त उम्मीद है।

इकबाल ने गर्व से बताया कि ‘‘आज उनमें से कई युवक और युवतियां स्थानीय कोच हैं। लेकिन उस समय, कुछ लोगों को चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों यहां तक कि कोरिया से लेकर दुबई और ईरान तक की यात्रा करनी पड़ी, जिसने दूसरों को भी प्रेरित किया।’’

यह समझना मुश्किल है कि थांग-टा मणिपुर के पूर्वोत्तर राज्य में अपनी उत्पत्ति के साथ भारत के सबसे उत्तरी छोर जम्मू-कश्मीर तक पहुंचने के लिए मैदानी इलाकों, पहाड़ियों और घाटियों को किस तरह से पार किया है।

इकबाल ने कहा कि ‘‘थांग-टा एक घरेलू खेल है। यह एक भारतीय मार्शल आर्ट है और हमने अभी इस खेल को अपनाया है। मैं तब सिर्फ एक स्कूली छात्र था जब इसकी ओर आकर्षित हो गया था।’’

बहुत से लोग मानते हैं कि उस समय के आसपास एक स्थानीय टूर्नामेंट थांग-टा के प्रसार के लिए मुख्य कार्यक्रम था। ‘‘यह हम में से कुछ को तकनीकी को समझने में मदद करने के लिए आयोजित किया गया था और मैंने जल्द ही 1999 में राष्ट्रीय खेलों के लिए खुद को मणिपुर में पाया।’’

मैं कुछ साल बाद समझदार और बड़ा बना था, जब एक कोच बन गया, फिर मुझे मणिपुरी थांग-टा फेडरेशन से बुनियादी और उन्नत प्रशिक्षण दोनों सीखने का निमंत्रण मिला।
आज श्रीनगर शहर में 20 से अधिक थांग-टा क्लब खुल गए हैं। उनके कई पूर्व शिष्य वहां युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर थांग-टा एसोसिएशन के महासचिव अयाज अहमद भट कहते हैं कि यह अब एक खेल परंपरा बन गई है और परिवार अपने बच्चों को प्रशिक्षण के लिए हमारे पास भेजकर खुश हैं।

इकबाल ने गर्व व्यक्त करते हुआ कहा कि ‘‘अब जब लड़कियां आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट सीखना चाहती हैं, तो कई हमारी कक्षाओं में शामिल हो जाती हैं।’’

श्रेयस जी होसुर बने ‘आयरनमैन ट्रायथलॉन’ को पूरा करने वाले पहले भारतीय रेलवे अधिकारी

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दक्षिण पश्चिम रेलवे के डिप्टी एफएएंडसीएओ© श्रेयस होसुर ने कठिन ‘आयरनमैन’ ट्रायथलॉन को पूरा करने वाले पहले रेलवे अधिकारी और बिना वर्दी वाली सिविल सेवाओं के पहले अधिकारी बनकर भारतीय रेलवे को गौरवान्वित किया है।

इस स्पर्धा में 3.8 किलो मीटर की तैराकी, 180 किलो मीटर साइक्लिंग और 42.2 किलो मीटर की दौड़ शामिल थी। श्रेयस ने इसे जर्मनी के हैम्बर्ग में 5 जून, 2022 को 13 घंटे 26 मिनट में पूरा किया।

स्पर्धा समाप्ति करने वाले को ‘आयरनमैन’ के नाम से जाना जाता है, जो स्पर्धा के लिए आवश्यक मानसिक और शारीरिक शक्ति के अनुरूप होता है।

यह स्पर्धा हैम्बर्ग झील के ठंडे पानी में सुबह 6:30 बजे 3.8 किलो मीटर की तैराकी के साथ शुरू हुई, जिसके बाद ग्रामीण क्षेत्र में 180 किलो मीटर लंबी साइकिलिंग हुई और 42.2 किलो मीटर की पूर्ण मैराथन के साथ समाप्त हुई।

अन्तर्यात्री महापुरुष – द वॉकिंग गॉड’ का ट्रेलर व म्यूजिक जारी

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शिरोमणि क्रिएशन के बैनर तले निर्मात्री कामना कुलचैनिया द्वारा निर्मित बायोपिक ‘अन्तर्यात्री महापुरुष – द वॉकिंग गॉड’ का म्यूजिक और ट्रेलर पछले दिनों जारी कर दिया गया है।
दिगंबर संत आचार्य विद्यासागर महाराज के जीवन गाथा पर आधारित इस बायोपिक फिल्म का पटकथा, संवाद लेखन और निर्देशन अनिल कुलचैनिया ने किया है। फिल्म में आचार्य विद्यासागर की भूमिका को विवेक आनंद मिश्रा निभा रहे हैं वहीं उनके माता श्रीमन्ती की भूमिका किशोरी शहाणे विज व पिता मल्लप्पा की भूमिका में गजेंद्र चौहान हैं।
इनके अलावा आचार्य ज्ञानसागर के रुप में दिवंगत बलदेव त्रेहान दिखाई देंगे। साथ ही कृष्णा भट्ट, हार्दिक मिश्रा, अर्जुन, सुधाकर शर्मा, मिलिंद गुणाजी और गुफी पेंटल भी इस बायोपिक में नज़र आएंगे। इस फ़िल्म की शूटिंग आचार्य के जन्मस्थान सदलगा (कर्नाटक) के साथ साथ स्तवनिधि, कोल्हापुर, अजमेर, किशनगढ़, जयपुर, कोटा, हैदराबाद और मुम्बई में की गई है।
इस फिल्म के सह निर्माता उमेश मल्हार व आनंद राठी, कार्यकारी निर्माता योगिता शर्मा, संगीतकार सतीश देहरा, गीतकार सुधाकर शर्मा, सिनेमैटोग्राफर महेश जी. शर्मा, कोरियोग्राफर माधव किशन, एडिटर गुल हैं एवं बैकग्राउंड स्कोर धर्मेंद्र जावड़ा ने तैयार किया है।
 इस फिल्म के गीतों को प्रसिद्ध गायक अमित कुमार, अनूप जलोटा, अनुराधा पौडवाल, साधना सरगम, रामशंकर, पामेला जैन, सलोनी जैन, अरविंदर सिंह, सतीश देहरा, देव राठौड़ और शैलेष श्रीवास्तव ने गाया है।

संपूर्ण पोषण पाने के लिए करें दूध का सेवन

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दूध को संपूर्ण आहार माना जाता है। दूध में इतने पोषक तत्व से भरपूर होता है,जिससे न सिर्फ मांसपेशियां मजबूत बनती हैं बल्कि इससे बच्चों की लम्बाई भी बढ़ती है। आयुर्वेद के अनुसार दूध के सेवन का सही तरीका और समय बताया बताया गया। आयुर्वेद के अनुसार दूध के सेवन से दूध के पोषक तत्व बढ़ाए जा सकते हैं। 

इन पोषक तत्वों से भरपूर है दूध 

दूध प्रोटीन, कैल्शियम और राइबोफ्लेविन (विटामिन बी -२) युक्त होता है, इनके अलावा इसमें विटामिन ए, डी, के और ई सहित फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, आयोडीन व कई खनिज और वसा तथा ऊर्जा भी होती है।

आयुर्वेद के अनुसार क्या हैं नियम,

-आयुर्वेद में मिल्कशेक की मनाही है, इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि आयुर्वेदिक नियमों के अनुसार, आम, केले, खरबूजे और अन्य खट्टे फलों को कभी भी दूध या दही के साथ नहीं खाना चाहिए।

-केला जब दूध के साथ मिलते हैं, तो अग्नि (गैस्ट्रिक फायर) को कम करके आंतों पर प्रभाव डालते हैं, जिसके विषाक्त पदार्थ (टॉक्सिन) बनते हैं, जिससे साइनस, सर्दी, खांसी, एलर्जी, चकत्ते जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

दूध के ज्यादा फायदे के लिए इस समय करें सेवन,

यदि आप अपने शरीर और मसल्स बनाना चाहते हैं, तो आप सुबह दूध होना ले सकते हैं, इसके अलावा दूध के सेवन करने के लिए रात एक बेहतर समय है। अतिरिक्त लाभों के लिए, आप इसे अश्वगंधा के साथ ले सकते हैं, जो नींद में सुधार करने और आपकी याददाश्त को बढ़ाने में मदद करता है। आयुर्वेद हर किसी को दूध पीने की सलाह देता है, लेकिन जिन लोगों को इससे एलर्जी उन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए, लेकिन इसका सेवन करने का सबसे अच्छा समय शाम से लेकर सोने तक का समय होता है। सुबह के समय दूध का सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि प्राचीन मान्यताओं के अनुसार सुबह दूध का सेवन शरीर को पचाने में भारी हो सकता है। यह आपको सुस्त भी महसूस करवा सकता है। पांच वर्ष से अधिक आयु के लोगों को सुबह दूध कभी नहीं पीना चाहिए क्योंकि इससे भारी एसिडिटी हो सकती है। यह भी सलाह दी जाती है कि नमकीन खाद्य पदार्थों के साथ दूध का सेवन न करें, जैसे दूध के साथ चाय या रोटी मक्खन।

रात के समय दूध पीने के फायदे,

आयुर्वेद लोगों को शाम के समय दूध देने की सलाह देता है। रात में दूध पीना ओजस को बढ़ावा देता है। आयुर्वेद में ओजस एक ऐसी स्थिति है, जब जब आप उचित पाचन प्राप्त करते हैं। सोने से पहले दूध पीने से आप शांत हो सकते हैं और आपको नींद लाने में मदद मिल सकती है।

 

भारतीय मुसलमानों के पास इतिहास रचने का सुअवसर है

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‘भारतीय संस्कार’ अर्थात् ‘सर्वधर्म समभाव’। इसे विपरीत क्रम में लिखने पर भी अर्थाभाव नहीं हो सकेगा और उसकी दार्शनिक सादृश्यता अपने मूल भाव का यथावत वहन करती रहेगी। यथा – ‘सर्वधर्म समभाव’ अर्थात् ‘भारतीय संस्कार’ अथवा ‘भारतीय संस्कार’ अर्थात् ‘सर्वधर्म समभाव’।

युगों पूर्व उत्पन्न तथा युगानुयुगों में विकसित इस भारतीय भावना (संस्कार) के बरक्स आधुनिक बुद्धिवादियों ने ‘सेक्युलरिज़्म’ को वैकल्पिक एवं स्वकल्पित भाव के रूप में प्रस्तावित एवं अतिप्रचारित किया। यह सर्वविदित है कि यह समभाव वाला संस्कार, जिसे भाव एवं भावना भी कहा जा सकता है, विश्व में अन्यत्र कहीं भी इस रूप एवं अर्थ में दृष्टिगोचर नहीं होती। यह भारतीय मूल का मूलभूत एवं सर्व युगों में पल्लवित तथा अंगीकृत ‘संस्कार’ है।

यद्यपि वर्तमान समय में इसे ‘भारतीय संस्कार’ कहना अत्यंत जोखिम भरा काम है। क्योंकि ‘नागरिकता’ की दृष्टि से मुसलमान और ईसाई भी ‘भारतीय’ हैं ही। यह बात और है कि उनका दिल मुल्क (भारत) के लिए कम, मजहब (रीलिजन) के लिए ज़्यादा धड़कता है।

परिणामतः प्रसंग-अप्रसंग मजहबी उन्माद तथा रीलिजनिस्टिक कन्वर्ज़न मिशन में ‘सर्वधर्म समभाव’ की भारतीय भावना छिन्न-भिन्न हो जाती है और उनके चरित्र-व्यक्तित्व से ‘समभाव’ का सर्वतः लोप हो जाता है। इसे ‘हिंदू संस्कार’ कहना समीचीन प्रतीत होता है, जो कि वास्तव में ‘हिंदू संस्कार’ ही है, परंतु ‘हिंदू’ संज्ञा प्रयोग से बहुतों के मन-मस्तिष्क में हिकारत की भावना उत्पन्न होती है और आँखों में ही नहीं, अपितु बातों में भी ज्वालामुखी धधकने लगता है। अतः ‘हिंदू’ संज्ञा को इस लेख में वर्जित ही समझा जाना समीचीन है।

अब जब ‘भारतीय संस्कार’ कहा ही गया है और अनेकानेक अवसरों पर सनातन धर्म के ध्वज धारक एवं वाहक ‘डीएनए एक है’ की बात करते अथवा समय-असमय उठाते रहे हैं, तो यह मानने की जोखिम उठाई जा सकती है कि मुसलमान भी इस ‘भारतीय संस्कार’ (समभाव) को युगानुबोध के साथ (नये सिरे से) आत्मसात कर नव भारत की सर्जना का प्रयास करेंगे।

थोड़ी-बहुत उदारता, प्रगतिशीलता और आधुनिक बुद्धिवादियों द्वारा कल्पित तथा अतिप्रचारित सेक्युलरिज्म का ही सही, परिचय अवश्य देंगे। क्योंकि मुल्क बचा रहेगा और विकास करेगा, तो सबका जीवन मंगलकारी बना रहेगा, अन्यथा मजहब के नाम पर बने मुल्क (पाकिस्तान) की आम अवाम की हालत, हालात एवं बददुआओं का स्मरण करना प्रासंगिक हो सकता है।

स्मरणीय है कि अब तक केवल सनातनियों (हिंदू) से ही उपरोक्त ‘भारतीय संस्कार’ के अनुसरण का आग्रह होता रहा है। अब जब सभी भारतीयों का ‘डीएनए एक’ ही बतलाया जा रहा है, तो सबसे इस संस्कार के अनुसरण की अपेक्षा करना अनुचित नहीं हो सकता।

यह शतशः सच है कि सनातनियों को यह संस्कार माँ की कोख से ही प्राप्त होता है। अतः जन्म से मरण तक वे इसी भाव का हर भूमि में संवहन करते दिखाई देते हैं। बहुतांश इसी भावधारा के कारण ही भारत भूमि के टुकड़े-टुकड़े होने की स्थिति में भी उदारवादी तथा कल्पनातीत रूप में सर्वसमावेशी बनने का उपक्रम करते रहे हैं।

अकारण नहीं कि शिरडी के साईंबाबा को मुसलमान मानने-समझने के बावजूद उनके प्रति सनातनियों की अगाध श्रद्धा सहज ही देखी जा सकती है। नानाविध दरगाहों पर मत्था टेकने वाले सनातनियों का जत्था भी संदर्भोचित उल्लेखनीय है। वास्तव में, यही ‘भारतीय संस्कार’ है।

ऐसे भारतीय संस्कारों का अनुधावन करते हुए तथा देशांतर्गत लोकजागृति व युगबोध की दृष्टि से मुसलमानों को अपनी वैचारिक पृष्ठभूमि (मजहबी) में संशोधन कर ‘भारतीयता’ के भाव एवं संस्कारों का अर्थपूर्ण अंगीकार करना चाहिए।

गुरु नानक देव जी ने उचित ही कहा है, ‘नानक उतमु नीचु न कोइ।’ कोई भी व्यक्ति जन्म से महान या नीच नहीं होता, अपितु अपने कर्मों से होता है। वर्तमान घटनाक्रमों को दृष्टिगत रखते हुए भारतीय मुसलमानों को अपने औदात्यपूर्ण विचार एवं समभाव रूपी कर्मों का परिचय देना चाहिए।

अनेकानेक अवसरों पर इस्लाम के संबंध में अत्यंत उदारवादी बातें सुनने को मिलती हैं। प्रायः सुनने को मिलता है कि “दीन-ए-इस्लाम ने मोहब्बत का पैग़ाम दिया है। दीन-ए-इस्लाम सबको जोड़ता है। सबका भला चाहता है। मुसलमान अमन का पैरोकार है। वह सारी दुनिया में अमन-चैन चाहता है।“

ऐसे में, जब ज्ञानवापी का मामला विवाद एवं चर्चा के केंद्र में आ चुका है, मुसलमानों को ‘दीन-ए-इस्लाम की उदारता एवं औदात्य’ का परिचय देते हुए सौहार्द की भावना का विकास एवं विस्तार करना चाहिए। इसे अन्यार्थ बोध में भी देखा-समझा जा सकता है। ‘अतिक्रमित मुल्क’ में प्रसारित अतिरंजित विचारों के लिए संभवतः अब कोई स्थान शेष नहीं रह गया है।

इधर, ‘डीएनए एक है‘ के बोलबाला के साथ-साथ भारतीय संस्कार के संवाहक प्रायः यह भी उद्धृत करने लगे हैं कि ‘समभाव’ अच्छी बात है। नितांत आवश्यक भी परंतु, अतिक्रमित विचार एवं प्रहारों का पुरजोर प्रतिरोध भी आवश्यक है; अन्यथा अहोम राजा पृथु, हेमू विक्रमादित्य, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी जैसे योद्धाओं की कदापि आवश्यकता न पड़ती।

यह भी कि भारतीय मुसलमानों को दारा शिकोह के मार्ग का अंगीकार कर भारतीय दृष्टि से सत्यान्वेषी बनने का उत्कट उपक्रम करना चाहिए, न कि औरंगजेब के दमनकारी तथा जिहादी मनसूबों का निर्वाहक बनना चाहिए। भारतीयों को दारा शिकोह स्वीकार है, औरंगजेब जैसा अविचारी एवं आततायी कदापि नहीं।

ऐसे समय में, भारत के अधिकाधिक भूभाग में विनम्रता के संवाहक तथा समभावी संस्कारों के बावजूद सनातनियों में महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज इत्यादि के संस्कार जाग्रत हो चुके हैं, मुसलमानों को सौहार्द स्थापना की दृष्टि से शर्त रहित पहल करनी चाहिए।

यद्यपि बहुतेरे आधुनिक बुद्धिवादी कह रहे हैं कि संघ-समर्थित भाजपा ने देश के वातावरण में हिंदू-मुसलमान का विष घोल दिया है, तथापि इस सत्य को अनदेखा नहीं किया जा सकता कि यह संघ-भाजपा ही है, जो ‘डीएनए एक है’ और ‘सबका साथ, विकास और विश्वास’ की रट लगाए हुए है।

अतः यह विष वमन की चर्चा अप्रासंगिक है। संघ-भाजपा सही अर्थों में संविधान की भावना का संपोषण करने का कार्य कर रहे हैं। इससे विपरीत कोई तो बात है कि सनातनियों में अपनी धर्म ध्वज रक्षा की भावना का प्रस्फुटन हुआ है। इस पर भारतीय मुसलमानों को अन्वेषण तथा मंथन करना चाहिए।

युगानुबोध एवं हिंदू लोकजागृति की दृष्टि से यह कहना अत्युक्तिपूर्ण न होगा कि जब एक भाई हरसंभव क्षण में लड़ने को उद्यत हो जाए, तो दूसरे को सतत ‘शांति बहाली’ का प्रयास करना चाहिए। मुसलमानों को अब शांति बहाली के अग्रदूत बनने का सतत उपक्रम करना चाहिए। इससे ‘भारतीय संस्कार’ अत्यधिक दृढ़ होगा।

ज्ञानवापी पर जारी हो-हल्ले के बीच मुसलमानों को उदार हृदय से यह कहने में कोई हिचक और हानि नहीं कि बाबरी दे दी, तो ज्ञानवापी, ताजमहल, शाही मस्जिद ईदगाह वगैरह क्या चीज़ है? भारतीय भाईचारा बने रहना चाहिए। कौमी एकता बनी रहनी चाहिए। कुछेक मुसलमानों ने कहा भी कि “हम हिंदू-मुस्लिम भाई साथ-साथ हुक्का पीते थे। अब इक्का-दुक्का भी एकसाथ नहीं दिखते।”

ऐसा कहते हुए उन्हें यह कहने में भी आनाकानी नहीं करनी चाहिए कि “बिना किसी ज़िद और जिरह के भाइयोंकी भावनाओं का सम्मान करते हुए सबकुछ लौटाने को तैयार हैं। कौन-सा इस्लाम भारत में पैदा हुआ था? जाहिलों ने जो किया, वह नहीं करना चाहिए था।”

इस बात का प्रमाण देने का यह सुअवसर है कि मुसलमान विनम्र एवं उदार होते हैं। राष्ट्रभक्ति, भाईचारा और उदारता भी कोई बात होती है। ऐसे लोकोपकारी-राष्ट्रोपकारी विचारों से अखिल विश्व में भारतीय मुसलमान अपनी एक अलग प्रतिष्ठा स्थापित कर पाएँगे। इससे उनका सच्चे अर्थों में ‘भारतीय’ होना भी सुनिश्चित हो सकेगा, सो अलग। माने दोहरा लाभ। मुसलमानों के पास इतिहास रचने का सुअवसर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिक्कों की नई शृंखला लॉन्च की, नेत्रहीन भी कर सकेंगे उपयोग

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (6 जून) को सिक्कों की एक नई शृंखला प्रस्तुत की है। इसको विशेष रूप से दृष्टिहीनों के लिए निकाला गया है।

एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्रालय और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के प्रतिष्ठित सप्ताह समारोह का शुभारंभ करते हुए 1, 2, 3, 4, 5, 10 और 20 रुपये के सिक्कों की एक विशेष शृंखला जारी की।

इन सिक्कों पर स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव का डिजाइन बना हुआ है। ये सिक्के आम चलन के लिए उपयोग किए जाएँगे।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “सिक्कों की यह नई शृंखला लोगों को अमृत काल के लक्ष्य की याद दिलाएगी और लोगों को देश के विकास की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित करेगी।”

इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री ने जन समर्थ पोर्टल को भी आरंभ किया, जो 12 सरकारी योजनाओं का क्रेडिट-लिंक्ड पोर्टल है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “इनमें से हर योजना को पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाएगा। इस पोर्टल से सहूलियत बढ़ेगी और नागरिकों को सरकारी कार्यक्रम का लाभ उठाने के लिए हर बार एक ही सवाल पूछना नहीं पड़ेगा।”

इस्लामी सहयोगी संगठन के बयान की भारत ने की निंदा, “उनका एजेंडा विभाजनकारी है”

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पैगंबर पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर इस्लामी सहयोगी संगठन (ओआईसी) के बयान की भारत ने कड़ी निंदा की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि उनका एजेंडा विभाजनकारी है। 

न्यूज़-18 की रिपोर्ट के अनुसार, नुपुर शर्मा के पैगंबर को लेकर बयान के बाद विवाद उत्पन्न हुआ है। अरब के कई देशों ने उनकी टिप्पणी पर आपत्ति ज़ाहिर की और भारतीय राजदूत को तलब कर नाराज़गी प्रकट की। भाजपा ने भी सभी धर्मों के सम्मान की बात कहकर नुपुर को निलंबित कर दिया है।

ओआईसी के बयान पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, “हमने संगठन द्वारा भारत को लेकर दिए गए बयान देखे हैं। सरकार ओआईसी सचिवालय के गलत और संकीर्ण बयानों को खारिज करती है। भारत सरकार सभी धर्मों को सर्वोच्च सम्मान देती है।” उन्होंने कहा, “ओआईसी सचिवालय ने पुनः प्रेरित, गुमराह करने वाली टिप्पणी की है, जो दुःखद है। यह केवल स्वार्थों के संकेतों पर चलाया जा रहा विभाजनकारी एजेंडा है।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हम इस्लामी सहयोगी संगठन के सचिवालय से अनुरोध करते हैं कि वह सांप्रदायिक रुख को आगे बढ़ाना बंद करें और सभी धर्मों व आस्थाओं के प्रति सम्मान प्रदर्शित करें।”

बागची ने कहा, “कुछ लोगों ने एक धार्मिक व्यक्तित्व को अपमानित करते हुए आपत्तिजनक ट्वीट और बयान दिए थे। ये विवादित बयान भारत सरकार की राय से संबद्ध नहीं हैं। आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की गई है।”  बता दें कि नुपुर शर्मा,के बयान पर पहले कतर, कुवैत व ईरान ने आपत्ति प्रकट की थी। इसके बाद इसमें सऊदी अरब भी सम्मिलित हो गया।

UP Vidhan Mandal Special Session : राष्ट्रपति ने व‍िधानभवन में संयुक्‍त सदन को क‍िया संबोध‍ित

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लखनऊ – राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविंद ने आज (6 जून, 2022) लखनऊ में उत्तर प्रदेश विधानमंडल के दोनों सदनों के विशेष सत्र को संबोधित किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में, राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे बड़े राज्य के विधानमंडल के सदस्यों को संबोधित करते हुए बहुत प्रसन्नता हो रही है। श्री कोविंद ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और भौगोलिक विविधता इसके लोकतंत्र को और भी समृद्ध बनाती है। राष्ट्रपति ने कहा कि इस राज्य की 20 करोड़ से अधिक की आबादी, अनेकता में एकता का बहुत अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि डॉक्टर बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर कहा करते थे कि हमने भारतीय लोकतंत्र के बीज पश्चिमी देशों से प्राप्त नहीं किए हैं, बल्कि यह भगवान बुद्ध के समय में गठित संघों के कामकाज में दिखाई देता है। श्री कोविंद ने कहा कि प्राचीन काल में भी कौशाम्बी और श्रावस्ती में ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के उदाहरण थे, जिनकी चर्चा डॉक्टर अम्बेडकर ने संविधान सभा में अपने भाषण में की थी। राष्ट्रपति ने कहा कि सदन में मौजूद जनप्रतिनिधि उस प्राचीन लोकतांत्रिक विरासत के वारिस हैं। उन्होंने कहा कि यह उन सभी के लिए गर्व की बात है लेकिन साथ ही उन पर भगवान बुद्ध और डॉक्टर अम्‍बेडकर के आदर्शों को आगे बढ़ाने का दायित्व भी है।

राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान विधानमंडल में समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व बहुत व्यापक हो गया है जो सामाजिक समावेश की दृष्टि से एक अच्छी उपलब्धि है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश की विधान सभा में महिला सदस्यों की संख्या 47 है, जो कुल 403 सदस्यों का लगभग 12 प्रतिशत है। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश विधान परिषद के वर्तमान 91 सदस्यों में से महिलाओं की संख्या केवल पांच है, जो आज की स्थिति में लगभग 5.5 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।

श्री कोविंद ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने स्वतंत्र भारत में पहली महिला मुख्यमंत्री के चुनाव के साथ इतिहास रच दिया था। उस ऐतिहासिक घटना को महिला सशक्तिकरण के आरंभिक उदाहरण के रूप में देखा जाना चाहिए और उत्तर प्रदेश को महिला सशक्तिकरण में अग्रणी राज्य बनना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश का प्रथम स्थान है। इसी तरह, यह आम, आलू, गन्ना और दूध के उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है। श्री कोविंद ने कहा कि हाल के वर्षों में, राज्य में सड़क, रेल और हवाई संपर्क में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उत्तर प्रदेश के प्रतिभाशाली युवा दूसरे राज्यों और विदेशों में आर्थिक प्रगति के मानदंड स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण, सूचना प्रौद्योगिकी और शहरी विकास की अपार संभावनाएं हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में उपजाऊ भूमि और कृषि के लिए अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियों को देखते हुए, कृषि में उत्पादन के साथ-साथ उत्पादकता और कृषि आधारित उद्यमों पर अधिक ध्यान केंद्रित करके राज्य की आर्थिक स्थिति में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।

श्री कोविंद ने इस तथ्य की ओर इशारा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश विधानमंडल के सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सम्मानजनक सद्भाव का गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को उत्तर प्रदेश की स्वस्थ राजनीतिक परंपरा को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष की विचारधाराओं में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच वैमनस्य नहीं होना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि हम आजादी की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। इस उत्सव का एक उद्देश्य हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को स्मरण करना है जिन्हें अक्सर भुला दिया जाता है और जिनके बारे में सभी नागरिकों, विशेषकर युवा पीढ़ी को पता होना चाहिए। श्री कोविंद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ऐसे कई अज्ञात और गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं, जिनके बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में अधिक जानकारी के प्रसार से भी लोगों में जागरूकता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में शिक्षण संस्थानों में व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया जा सकता है। श्री कोविंद ने कहा कि अन्य माध्यमों से भी लोगों को स्वतंत्रता सेनानियों की जीवन गाथाओं से अवगत कराया जा सकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विधायिका लोकतंत्र का मंदिर है। उन्होंने कहा कि लोग जनप्रतिनिधियों को अपने भाग्य का निर्माता मानते हैं। श्री कोविंद ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लोगों को उनसे आशाएं हैं और उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरना उनका सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य है। उन्होंने सदस्यों को याद दिलाया कि शपथ के अनुसार वे अपने-अपने क्षेत्र को छोड़कर पूरे राज्य के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

 

कुत्ते-बिल्ली के साथ – साथ गौ पालक भी है कुमार विश्वास

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कुमार विश्वास ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर की है। जिसमें वह अपनी पालतु बिल्ली के साथ नजर आ रहे हैं। इस पर एक शख्स ने उन्हें कुछ ऐसी सलाह दे डाली की कुमार विश्वास से रहा नहीं गया और और उन्होंने उस शख्स को मजेदार जवाब दे डाला।

दो-चार दिन बाहर से कार्यक्रम करके लौटने पर कुछ देर तो सुश्री पुचकी जी का मुक़दमा सुनना ही पड़ता है 😛।आज इन्होंने, इस रील को बना रहीं हमारी पुत्री के ख़िलाफ़ जमकर बयानबाज़ी की।आप भी सुनिए 😂😂😍👍 pic.twitter.com/FbOrNSwgO8

कुमार विश्वास का पोस्ट: सोशल मीडिया पर कवि ने अपनी बिल्ली के साथ वीडियो शेयर किया, साथ ही कैप्सन में लिखा, दो-चार दिन बाहर से कार्यक्रम करके लौटने पर कुछ देर तो सुश्री पुचकी जी का मुक़दमा सुनना ही पड़ता है। आज इन्होंने,इस रील को बना रहीं हमारी पुत्री के खिलाफ जमकर बयानबाजी की।आप भी सुनिए।

लोगों की प्रतिक्रियाओं पर कुमार के जवाब: कुमार विश्वास वीडियो में अपनी बिल्ली को दुलार करते नजर आ रहे हैं। कवि के इस पोस्ट पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। दिनेश भादु नाम के शख्स लिखते हैं, ”कुत्ते बिल्ली की जगह आप यदि गाय के छोटे बछड़े को इस तरह दुलारते तो आपको गौ माता का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता।”दिनेश भादु के इस कमेंट पर कुमार विश्वास ने मजेदार जवाब देते हुए लिखा, ”दिनेश भादु जी, आप की राय का ही इंतजार था बस।” इसी के साथ चाकशू जैन लिखते हैं, इसको अपने अपने राम सुनाइए। इस पर कवि जवाब देते हुए लिखते हैं, ”सुनाता तो हूं लेकिन ये बदले में मुझे महाभारत सुनाने लगती है।”

शोसल मीडिया यूजर्स कभी कभी बिना सोचे समझे भी किसी पर कमेंट मार देते है। कुमार विश्वास पशु प्रेमी है उन्होंने समय समय पर अपने पशु प्रेम और गौ प्रेम को दर्शया भी है। २३ जून २०२१ को उनके यहाँ एक गौमाता का जन्म हुआ जिस की फोटो उन्होंने ट्वीट भी किया था।

गोपाष्टमी २०२० के मौके पर कुमार विश्वास ने क्या कहा था ?

आज गोपाष्टमी है ! मेरे परिवार में, अपने घर-आँगन में, स्वयं मैं तीन पीढ़ियों से गाय-बछड़े-बछिया-बैल और नंदी देखता हुआ बड़ा हुआ हूँ ! भारत में गाय और
भारत में गाय और गोवंश दो संदर्भों में प्रचलित है ! एक वे सच्चे-अच्छे लोग जो ईश्वर की ओर से मनुष्यों के परिवार-संकुल में भेजे गए इस बेहद प्यारे-सरल व उपयोगी प्राणी की महत्ता को जानते-समझते हैं।

कोरोना-काल में खेत पर ज़्यादा रहा तो मैं वहाँ से अपने गोवंश से आपका ज़्यादा परिचय करा सका ! हमारी बछिया लाड़ो व प्यारी, हमारे बछड़े भीष्म व वल्लभ, हमारी गाएँ राधा,गंगा,वापी-तापी के साथ-साथ हमारे गोसेवक सोनू व कुलवंत भी हमारे फ़ेसबुक परिवार में घुलमिल गए !