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चिकन बिरयानी में गोमांस मिलाकर बेचता था गुवाहाटी के रेस्टोरेंट का मालिक

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असम के गुवाहाटी में एक रेस्टोरेंट पर चिकन बिरयानी के नाम पर धोखे से गोमांस खिलने का आरोप लगाया गया है। रेस्टोरेंट पर आरोप है कि उसने एक हिन्दू छात्र को यह बिरयानी परोसी और इसके भीतर बीफ होने की जानकारी नहीं दी। इसको लेकर पुलिस को शिकायत दी गई है।

इंडिया टुडे नार्थईस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह रेस्टोरेंट ‘लजीज सयेम’ नाम से खोला गया था। इस मामले में बीर लछित सेना ने पुलिस को शिकायत दी है। लछित सेना ने आरोप लगाया है कि इस रेस्टोरेंट का मालिक मेघालय से है और वह बिरयानी में गोमांस मिलकर बेचता था। बीर लछित सेना ने खाद्य सुरक्षा और भावनाएँ आहत होने की बात कही है।

*न हिंदुत्व न दल और न नेता ,जीती तो केवल लाड़ली बहना*

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( डॉ.मुकेश “कबीर”-विनायक फीचर्स )

महाराष्ट्र और झारखंड के रिज़ल्ट और इसके पहले हरियाणा के रिजल्ट से यह बात साफ हो गई कि अब देश में मुफ्त की योजनाएं ही चुनाव का आधार बन चुकी हैं । फिर चाहे मुफ्त बिजली पानी हो या फिर लाडली बहना जैसी योजनाओं द्वारा पैसा बांटना हो,लोग अब इसी के आधार पर वोट देते हैं।

महाराष्ट्र के बारे में कहा यह जा रहा है कि हिंदुत्व की जीत हुई लेकिन झारखंड या अन्य राज्यों के परिणाम देखें तो हिंदुत्व कहीं दिखाई नहीं दिया,बल्कि जहां जिस जाति की संख्या ज्यादा थी या जिसकी सरकार थी उनके कैंडिडेट ही जीते। बंगाल में पूरी छह सीट ममता की पार्टी जीती तो वायनाड में प्रियंका को बड़ी जीत मिली,कुल मिलाकर राज्य सरकार का प्रभाव दिखाई दिया।

वैसे महाराष्ट्र की बात करें तो कहा जा रहा है कि वहां हिंदुत्व की सुनामी थी लेकिन यदि वहां हिंदुत्व होता तो लाडली बहना योजना शुरू नहीं करना पड़ती। महाराष्ट्र की सरकार और स्थानीय नेता अच्छे से जानते हैं कि महाराष्ट्र में हिंदुत्व कभी चुनाव जिताऊ मुद्दा नहीं रहा,यही कारण है कि योगी आदित्यनाथ के”बटेंगे तो कटेंगे” का सबसे पहले विरोध महायुति के नेताओं ने ही किया। अजीत पंवार और पंकजा मुंडे दोनों ने इस नारे का विरोध किया। दोनों का कहना था कि महाराष्ट्र में यह नारा व्यर्थ है ।

शिंदे भी पहले ही समझ चुके थे इसीलिए उन्होंने लाडली बहना जैसी लुभावनी योजना शुरू की और सिर्फ शुरू ही नहीं की बल्कि पांच महीने का एडवांस भी दे दिया,हर घर में साढ़े सात हजार मुफ्त में आए तो महिलाओं को महायुति की सरकार भाने लगी वरना लाडली बहना से पहले जितने भी सर्वे आए थे उनमें महायुति की स्थिति कोई खास अच्छी नहीं थी । यदि स्थिति अच्छी होती तो कम से कम महाराष्ट्र में तो लाडली योजना लांच नहीं की जाती लेकिन यह योजना शुरू की गई और एक महीने बाद ही फिजा बदल गई ।

खासकर जो लेबर क्लास की महिलाएं हैं,जो घरों में काम करने वाली मौशीयां हैं उनमें जबरजस्त उत्साह देखा गया और फिर बीजेपी यह नरेटिव सेट करने में भी सफल रही की यदि महायुति की सरकार चली गई तो आघाड़ी इस योजना को बंद कर देगी,जबकि आघाड़ी ने इस योजना का पैसा डबल करने का वादा किया था ।

यहां महिलाओं का भरोसा महायुति के साथ रहा । बहरहाल हिंदुत्व का नारा यहां नहीं चला,यदि हिंदुत्व का नारा चलता तो उद्धव ठाकरे से ज्यादा सीटें राज ठाकरे की आना चाहिए थी क्योंकि राज ठाकरे बीजेपी के साथ थे और उनके भाषणों में भी हिंदुत्व और राष्ट्र के मुद्दे ज्यादा थे साथ ही वे मुस्लिमों पर कड़े शाब्दिक प्रहार भी कर रहे थे,बिल्कुल बाला साहेब की ही तरह लेकिन उनके सवा सौ उम्मीदवारों में से एक भी नहीं जीता ।

उनके खुद के बेटे भी नहीं जीत सके। इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि राज ठाकरे लगातार लाडली बहना योजना का विरोध कर रहे थे । शायद इसीलिए उनकी सभा में आने वाली भीड़ वोट में तब्दील नहीं हो सकी। हालांकि राज ठाकरे की हार पर अभी मीडिया में चर्चा ज्यादा नहीं है बल्कि सारे देश में चर्चा सिर्फ उद्धव की हार ही हो रही है। खासकर हिंदूवादी पार्टियों के समर्थक उद्धव की हार का कारण बीजेपी का साथ छोड़ना ही बता रहे हैं। वैसे यह भी पूरी तरह सच नहीं है क्योंकि उद्धव की इमेज महाराष्ट्र में आज भी हिंदूवादी नेता की है।

उनके बारे में नरेटिव सेट किया जा रहा था कि उन्होंने अपनी हिंदू वादी विचारधारा छोड़ दी है। लोकसभा में वक्फ बिल के मुद्दे पर बॉयकॉट करने से ही उद्धव के मुस्लिम वोटर्स नाराज हो गए थे और मातोश्री के सामने धरना प्रदर्शन भी करने लगे।मातोश्री (बाल ठाकरे का घर) के सामने इतनी बड़ी संख्या में मुस्लिम्स पहली बार देखे गए ,खैर उद्धव को बॉयकॉट का नुकसान हुआ वरना मुस्लिम वोट उनको मिलते तो कुछ सीटें ज्यादा बढ़ जाती ।

यह सॉफ्ट हिंदुत्व ही उद्धव को भारी पड़ा। महाराष्ट्र के बारे में पूरे देश में चर्चा हो रही है और सोशल मीडिया ने तो इसको हिंदुत्व की जीत मान लिया है लेकिन झारखंड में हिंदुत्व क्यों नहीं चला जबकि वहां असम के मुख्यमंती हेमंत विश्वा शर्मा और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुलकर हिंदुत्व की बात की थी।शर्मा तो मिशनरी और मदरसों के खिलाफ खूब बोले थे और हिंदुओं को एकजुट होकर वोट करने की अपील की थी, लेकिन वहां भी हेमंत सोरेन की मईयां सम्मान योजना ने शायद सोरेन को बचा लिया ।

सोरेन ने लाड़ली बहना की ही तरह मईयां सम्मान योजना झारखंड में पहले ही शुरू कर दी थी। महिलाओं को लुभाने वाली योजनाएं बीजेपी का ट्रंप कार्ड रही है लेकिन यह कार्ड सोरेन पहले ही चल चुके तो बीजेपी के पास कुछ रहा नहीं लुभाने के लिए वरना हरियाणा में भी बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में लाडो लक्ष्मी योजना के तहत 2100 रुपए महिलाओं को देने का वादा और प्रचार किया था इसलिए आखिरी के तीन महीने में बीजेपी का माहौल तेजी से बन गया जबकि पहले हरियाणा में भी स्थिति अच्छी नहीं बताई जा रही थी।लगभग यही हाल मध्यप्रदेश का था लेकिन मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान ने चुनाव से ठीक पहले लाडली बहना योजना शुरू की तो बीजेपी की बंपर वापसी हुई और नतीजे बिल्कुल वैसे ही एकतरफा निकले जैसे आज महाराष्ट्र में निकले हैं। बहरहाल हार जीत तो चुनाव का एक हिस्सा है और उसके बाद समीक्षा भी एक परंपरा है ।

जिसमें सब अपनी अपनी भड़ास निकालते हैं और अलग अलग कारण गिनाए जाते हैं लेकिन एक बात पक्की है कि जीत हार के कारण जो भी हों लेकिन यह मुफ्त की योजनाएं अब हमारे चुनाव का हिस्सा बन चुकी हैं । यह देशहित में तो नहीं कही जा सकतीं लेकिन राजनीतिक दलों के लिए सौ फीसदी फायदे का सौदा है। इसलिए सारी पार्टियां आजकल इसी फार्मूले पर काम कर रही हैं।

यह बात अलग है कि इसी मुद्दे पर वो एक दूसरे की आलोचना भी करती हैं । जब केजरीवाल दिल्ली में मुफ्त की योजनाएं लाए तो बीजेपी ने काफी आलोचना की लेकिन अब बीजेपी ने भी ऐसी ही कई योजनाएं शुरू कर दी हैं। उनको भी समझ आ गया है कि जनता को क्या चाहिए इसलिए बीजेपी ने पहले मध्यप्रदेश फिर हरियाणा और अब महाराष्ट्र लाड़ली बहना के सहारे जीता और सोरेन ने लाड़ली बहना के भरोसे झारखंड में सत्ता में वापसी की। अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इतना पैसा लाएंगे कहां से ? महाराष्ट्र में करोड़ों रुपए दिए गए इनकी रिकवरी कैसे होगी,क्योंकि जिन राज्यों में इस तरह की योजनाएं चल रही हैं वहां की सरकारें परेशान हैं।

पैसा देने के लिए पैसा होना भी तो चाहिए और आखिर में पैसा जनता से ही वसूला जाता है,लाड़ली बहना के लिए लाड़ले भाईयों की जेब खाली की जाती है । मध्यप्रदेश में बीस साल पहले ही जनता इसका दुष्परिणाम भुगत चुकी है,जब दिग्विजय सिंह ने पहले तो बिजली मुफ्त की थी लेकिन बाद में बिजली के बिल इतने महंगे कर दिए कि बिजली के कारण ही दिग्विजय की राजनीति फ्यूज हो गई और फिर कभी नहीं चमके।

अब ऐसी योजनाओं का बंद होना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है क्योंकि अब चुनाव जीतने का ट्रंप कार्ड ऐसी योजनाएं ही हैं। वर्तमान चुनाव परिणामों से तो अब ऐसा लगता है कि जिस स्टेट में जिसकी सरकार है वही बार बार रिपीट होगी क्योंकि मुफ्त की योजनाओं की चाबी तो सत्ताधारी दल के पास ही होती है। फिर चाहे वह दिल्ली में आम आदमी हो या महाराष्ट्र में खास आदमी । बहरहाल जो जीते उनको बधाई,आखिर जो जीते वही तो सिकंदर हैं,जो हारा वो अब आलोचना कर सकता है पांच साल तक…(विनायक फीचर्स)

जशपुर में गौ मांस खाने के आरोप में 14 आदिवासी गिरफ्तार

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छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में गौवंश की हत्या कर उसके मांस का सेवन करने के आरोप में पुलिस ने 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. ये सभी आरोपी आदिवासी समजा से हैं. आरोप है कि आरोपियों के पास से भारी मात्रा में गोमांस, हथियार और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है.

सूचना पर तत्काल कार्रवाई

जशपुर एसपी शशिमोहन सिंह ने बताया कि नारायणपुर थाना प्रभारी सतीश सोनवानी को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बहेराखार गांव के निवासी आश्विन कुजूर अपने घर में चोरी-छिपे गौवंश की हत्या कर मांस पकाकर खा रहे हैं. इसके बाद पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की. इस दौरान घटनास्थल पर 10 किलो गोमांस और 2 कड़ाही में पकता मांस भी बरामद हुआ. इसके अलावा, एक टांगी, 2 बैठी, और सफेद प्लास्टिक बोरे में गौवंश का अवशेष भी जब्त किया गया.इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया.

सख्त धाराओं में की गई कार्रवाई

गिरफ्तार किए गए 14 आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ पशु क्रूरता अधिनियम 2004 की धारा 4, 6, 10 और BNS की धारा 325, 3(5) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है.

गिरफ्तार आरोपियों की सूची

  1. रोहित कुजूर (28 साल)
  2. संजय कुजूर (32 साल)
  3. आश्विन कुजूर (32 साल)
  4. अनुरंजन कुजूर (25 साल)
  5. दीप कुमार तिर्की (25 साल)
  6. बरथोलुयिस लकड़ा (50 साल)
  7. प्रकाश तिर्की (45 साल)
  8. पोलडेक लकड़ा (35 साल)
  9. रानू कुजूर (31 साल)
  10. अजमेस लकड़ा (25 साल)
  11. संदीप कुजूर (35 साल)
  12. तेलेस्फोर कुजूर (57 साल), सभी निवासी बहेराखार.
  13. नवीन मिंज (30 साल), निवासी जुड़वाईन चौकी, दोकड़ा थाना कांसाबेल.
  14. आशीष टोप्पो (28 साल), निवासी जुड़वाईन चौकी, दोकड़ा थाना कांसाबेल.

अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

एसपी शशिमोहन सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि जिले में किसी भी प्रकार के अवैध कारोबार और गौवंश तस्करी में शामिल व्यक्तियों को बख्शा नहीं जाएगा. पुलिस की ओर से ऐसी गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी. इसके साथ ही  एसपी ने जनता से अपील की है कि इस तरह की गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके.

स्नेहा पंडित दुबे ने बाहुबली हितेंद्र ठाकुर को वसई में हराकर 35 साल पहले का लिया बदला

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मुंबई: महाराष्ट्र में महायुति की प्रचंड जीत के बीच बीजेपी के टिकट पर लड़ी स्नेहा पंडित दुबे ने वसई में कमल खिलाकर इतिहास रच दिया है। वसई की सीट पर पहली बार बीजेपी को जीत मिली है। उन्होंने बहुजन विकास आघाड़ी (बीवीए) के कद्दावर नेता और इलाके मे एक डॉन की छवि रखने पर पांच बार के विधायक हितेंद्र ठाकुर को शिकस्त दी है। वसई से जीतने के बाद स्नेहा दुबे ने बीजेपी नेता और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

दिग्गज नेता को दी पटखनी
वसई की सीट से 1990 में पहली बार निर्दलीय जीते हितेंद्र ठाकुर इस बार अपनी पार्टी बहुजन विकास आघाड़ी से लड़ रहे थे, लेकिन त्रिकोणीय मुकाबले में स्नेहा पंडित दुबे भारी पड़ीं। स्नेहा पंडित दुबे को 77553 वोट मिले। उन्होंने हितेंद्र ठाकुर को 3153 वोट से हराया। ठाकुर को 74400 वोट मिले। कांग्रेस के कैंडिडेट विजय गोविंद पाटिल को 62324 वोट मिले। स्नेहा पंडित दुबे वसई से एक बार 2009 निर्दलीय जीते विवेक पंडित की बेटी हैं। पंडित का तब मुकाबला बहुजन विकास आघाड़ी के कैंडिडेट नारायण मनकर से हुआ था, हालांकि अगले चुनाव में हितेंद्र ठाकुर ने फिर विवेक पंडित को हरा दिया था।

35 साल बाद लिया बदला
वसई से स्नेहा पंडित दुबे की सुर्खियों में है क्योंकि उन्होंने राजनीतिक तौर पर अपने पति के पिता यानी सुसर की हत्या के आरोपियों से सियासी बदला लिया है। 9 अक्टूबर 1989 को उनके सुसर सुरेश दुबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद नालासोपारा स्टेशन भी हिल गया था। हत्या का आरोप जयेंद्र उर्फ भाई ठाकुर के ऊपर लगा था। यह हत्या भूखंड लेने के मामले में हुई थी। उत्तर भारत से जाकर वसई में बसे सुरेश दुबे ने भाई ठाकुर को भूखंड देने से मना कर दिया था।

हत्या से हिल गया था पूरा इलाका
रेलवे स्टेशन पर हुई हत्या के इस मामले ने तब काफी तूल पकड़ था। इस हाईप्राेफाइल केस में राजनीतिक रखूख का इस्तेमाल सामने आया था। आगे केस के चलने पर रिवॉल्वर भी बदल दिया गया और दूसरे सबूत भी नष्ट कर दिए गए थे, हालांकि बाद में जब सुधाकर सुरादकर ठाणे जिले में बतौर DIG बने तो आगे फिर भाई ठाकुर और अन्य अपराधी टाडा के तहत जेल गए। उन्हें सज़ा दी गई। भाई ठाकुर फिलहाल पैरोल पर है दूसरी ओर इस पूरे मामले को विवेक पंडित ने वसई के नागरिकों, सजक लोगों, श्रमजीवी संगठन के माध्यम से संभाला। आंदोलन चल ही रहा था कि इसी दौरान भाई ठाकुर के भाई हिंतेंद्र ठाकुर राजनीति में सक्रिय हो गए। लगातार कई जीत के बाद ठाकुर परिवार का वसई में वर्चस्व और बढ़ गया। 2024 के चुनावों से पहले ऐसी स्थिति की वसई में हितेंद्र ठाकुर को हराना मुश्किल है, लेकिन स्नेहा पंडित दुबे ने असंभव को संभव कर दिखाया।

पिता के साथ बेटे की भी हार
राजनीति में बिल्कुल नई उम्मीदवार स्नेहा पंडित दुबे ने वसई में हितेंद्र ठाकुर को हरा दिया। ठाकुर को वसई विरार बेल्ट का डॉन कहा जाता है। ऐसे मे स्नेहा की जीत सुर्खियों में है। वसई में पहली बार कमल खिलने से बीजेपी के कार्यकर्ताओं में खुशी है। इतना ही नहीं वसई में जहां हितेंद्र ठाकुर की हार हुई है तो वहीं नालासोपारा में उनके बेटे क्षितिज भी बीजेपी नेता राजन नाईक के सामने हार गए गए हैं। क्षितिज ठाकुर नालासोपारा से जीत की हैट्रिक लगाने के बाद चौथे कार्यकाल के लिए मैदान में उतरे थे। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े के कथित कैश कांड में क्षितिज ठाकुर चर्चा में आए थे।

 

मुंबई से प्रेमी को खोजते हुए गोरखपुर पहुंची प्रेमिका, SSP से लगाई गुहार

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 एक हैरान करने वाली घटना हुई है, जिले का एक युवक मुंबई में एक युवती जो अपने प्रेमजाल में फंसाकर धोखा देकर वापस भाग आया और यहां आकर उसने किसी और से शादी कर ली। इस बात की जानकारी जब प्रेमिका को हुई तो वो सोमवार को युवक की तलाश करते हुए गोरखपुर पहुंच गई। युवती बांद्रा मुंबई से आकर SSP से मिलकर आरोप लगाया कि उसका प्रेमी शादी का झांसा देकर मुबंई में उसके साथ शारीरिक शोषण करता रहा और फिर धोखा देकर किसी और से शादी कर ली।

मुंबई की युवती ने युवक पर लगाया प्रेमजाल में फंसाकर शारीरिक शोषण का आरोप

सोमवार को युवती ने SSP डॉ. गौरव ग्रोवर को प्रार्थना पत्र देकर बताया, उसकी खजनी इलाके सराय तिवारी के रहने वाले हर्ष उदय सिंह मुंबई में मुलाकात हुई थी। हर्ष मुबंई में रहकर एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता था। इसी दौरान दोनों की दोस्ती हो गई।आरोप है कि युवती को हर्ष ने झूठे प्रेम जाल में फसाया और शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। हर्ष ने उसकी अश्लील वीडियो और फोटो बना लिया था। जिसे अब वायरल करने की धमकी भी दे रहा है। पीड़िता ने बताया कि अक्टूबर 2024 में उसे पता चला कि हर्ष अपने परिजनों के साथ मिलकर किसी और लड़की से शादी करने वाला है, जिसको लेकर उसने हर्ष से इस बारे में बात की तो उसने शादी करने इनकार कर दिया।

युवक ने 24 नवंबर को दूसरी लड़की से कर लिया शादी

युवती ने बताया कि 2 नवंबर को हर्ष मुंबई से अपने गोरखपुर चला आया। जिसके बाद युवती को पता चला कि हर्ष ने 24 नवंबर को यहां शादी कर ली है। उसने हर्ष से बात करने की कोशिश की, जिसपर हर्ष युवती को धमकी देने लगा और उससे शादी करने से इनकार कर दिया।युवती ने बताया कि उसने इस मामले में मुंबई के समता नगर थाने में केस भी दर्ज करवाया है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि युवक ने उसे धमकी भी दी है।

अंबरनाथ की फार्मा कंपनी में लगी भीषण आग

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महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंबरनाथ इलाके में भीषण आग लग गई। आनंदनगर एमआईडीसी क्षेत्र स्थित रसिनो फार्मा नामक रासायनिक कंपनी में रविवार रात सवा नौ बजे के करीब भीषण आग लगने की घटना सामने आई है। आग इतनी भयानक थी कि दूर से ही धुएं के बड़े-बड़े गुबार दिखाई दे रहे थे।

मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम

आग की सूचना मिलते ही अंबरनाथ, बदलापुर, उल्हासनगर सहित आसपास क्षेत्र से दमकल की पांच गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं। आग की तीव्रता को देखते हुए और गाड़ियां बुलाने की तैयारी की जा रही है।

भारी नुकसान होने की संभावना

आग लगने का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। इस घटना में कंपनी के भीतर कोई कामगार फंसा है या नहीं, इसकी जानकारी अभी नहीं मिली है। दमकल विभाग आग बुझाने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, इस आग में भारी आर्थिक नुकसान होने की संभावना है।

आसपास की तीन कंपनियां जलकर खाक

घटना के दौरान कंपनी से स्फोट की आवाजें भी सुनाई दी हैं। आग आसपास की अन्य कंपनियों तक न पहुंचे, इसे रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। मौके पर पुलिस बल तैनात है और क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई है। इस फार्मा कंपनी के इलाके के अगल-बगल की तीन कंपनी भी जल कर खाक हो चुकी हैं।

भाजपा के हिंदुत्व  पर भारी पड़ा झारखंड मुक्ति मोर्चा का आदिवासी कार्ड* 

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(कुमार कृष्णन -विनायक फीचर्स)
वनाच्छादित, खनिज संपदा से भरपूर और आदिवासी बहुल झारखंड के अब तक के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है, जब जनता ने लगातार दूसरी बार किसी दल को सत्तासीन होने का जनादेश दिया है। यहां इंडिया गठबंधन   ने 81 सीटों में से 56 सीटें जीतीं, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन  24 सीटों पर सिमट गया । मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा ने सबसे अधिक सीटें (34) हासिल कीं, जबकि कांग्रेस ने 16, राष्ट्रीय जनता दल ने 4 और सीपीआई (एमएल) ने 2 सीटें जीतीं। वहीं, दूसरी तरफ तीन सीट के नुकसान के साथ भाजपा ने 21, दो के नुकसान के साथ एजेएसयू ने एक सीट हासिल की। पहली बार एक सीट जेडीयू के खाते में गई। इनके अन्य सहयोगियों को भी दो सीटों  का नुकसान हुआ, उन्हें केवल एक सीट मिली।वहीं, पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2019 में झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा को 30, भाजपा को 25, कांग्रेस को 16, जेवीएम को तीन तथा एजेएसयू को दो और आरजेडी को एक सीट मिली थी।
 झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार  से मुलाकात के बाद हेमंत सोरेन  सरकार बनाने का दावा पेश कर चुके हैंं। 28 नवंबर को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होगा। इस चुनाव में हाल के वर्षों में  राजनीति व पूंजीपतियों के नये उभरे समीकरण के चलते इस क्षेत्र पर वर्चस्व स्थापित करने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी।  इस बार भाजपा पूरे जोश के साथ झारखंड का चुनाव जीतने के लिये वैसी ही आमादा दिखी,जैसी वह छत्तीसगढ़ और ओडिशा में थी जहां उसने जीत दर्ज करने के लिये सारे पैंतरे लगाये और सफलता पायी थी। झारखंड में आदिवासी वोट निर्णायक होते हैं।  झारखंड में एक तिहाई से ज्यादा (28)  अनुसूचित जनजाति सीटें हैं। आबादी का 26% हिस्सा आदिवासी है। 21सीटों  में आदिवासियों की आबादी कम से कम एक लाख है। इन सीटों पर झामुमो की अच्छी पकड़ है। भाजपा इसे तोड़ने में सफल नहीं रही। इस बार झारखंड में चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छह, अमित शाह ने 16, योगी आदित्यनाथ ने 14 सभाएं कीं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने तो झारखंड में ही डेरा  डाल रखा था।
भाजपा के कई धुरंधर नेताओं ने झारखंड में धुआंधार प्रचार किया। संथाल परगना क्षेत्र में घुसपैठ को लेकर भाजपा काफी आक्रामक रही। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तो यहां तक कहा कि झारखंड में भाजपा  की सरकार बनाइए, घुसपैठियों को उल्टा लटका देंगे। उन्होंने घुसपैठियों को ही झारखंड मुक्ति मोर्चा , राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस का वोट बैंक बताया। जमशेदपुर में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वोट और तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले घुसपैठियों को संरक्षण दे रहे हैं। उन्होंने चंपई सोरेन और सीता सोरेन के अपमान को आदिवासियों का अपमान बताया।
भाजपा ने “बंटोगे तो कटोगे” का नारा देकर घुसपैठ की चर्चा करते हुए हिंदुत्व कार्ड खेला। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए गए नारे बंटोगे तो कटोगे को भाजपा के नेताओं ने इस चुनाव में खूब उछाला। यह नारा बीजेपी के लिए नुकसानदेह ही साबित हुआ।
वहीं, इंडिया गठबंधन की तरफ से राहुल गांधी की छह सभाओं के अलावा लगभग पूरा जोर हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने ही लगाया।
पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने स्टार प्रचारक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की, उन्होंनें पचीस दिनों तक यहां कैंप कर इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों के पक्ष में धुआँधार प्रचार किया,तो हेमंत सोरेन ने पूरी ईमानदारी से गठबंधन धर्म का पालन किया ।
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपनी योजनाओं की चर्चा के साथ आदिवासी कार्ड खेला। झारखंड मुक्ति मोर्चा का आदिवासी कार्ड भाजपा के हिंदुत्व कार्ड पर भारी पड़ गया। आदिवासियों का भरोसा गुरुजी शिबू सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन पर ही रहा। झारखंड में हेमंत सोरेन के पक्ष में सहानुभूति  भी काफी प्रभावी रहा। हेमंत सोरेन अपने चुनाव प्रचार के दौरान लगातार यह संदेश देने की कोशिश करते रहे कि आदिवासी चेहरे को कुचलने के लिए किस तरह उन्हें गलत तरीके से जेल में डाला गया। इसमें वे कामयाब भी रहे। कई विधानसभा सीट पर 40 प्रतिशत से अधिक आदिवासी मतदाता हैं। वे एकजुट होकर उनके पक्ष में खड़े हो गए।
हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद उनकी पत्नी कल्पना सोरेन सामने आईं और जहां-जहां गईं, वहां उन्होंने पति के साथ ज्यादती की बात समझाने की कोशिश की। चुनाव प्रचार के दौरान मंईयां सम्मान योजना की राशि दो हजार से बढ़ाकर प्रतिमाह 2,500 रुपये करने की चर्चा भी उन्होंने खूब की। कल्पना ने सरना धर्म कोड की भी बात की और यह भी कहा कि बीजेपी ने नेता बाहर के हैं, वे हमारी भाषा-संस्कृति तक नहीं जानते। ये भला हमारे लिए क्या नीतियां बनाएंगे। अपने सहज व सरल अंदाज से खासकर महिलाओं से संवाद करने में वे सफल रहीं। वे गांडेय सीट से चुनी गई हैं। महिलाओं की कल्याणकारी योजनाओं का भी असर झारखंड मुक्ति मोर्चा के पक्ष में गया। बेरोजगार महिलाओं के लिए मासिक सहायता, स्कूली लड़कियों को मुफ्त साइकिल, अकेली महिलाओं को नकद सहायता जैसी योजनाओं ने आदिवासी और कमजोर वर्ग की महिलाओं को झारखंड मुक्ति मोर्चा के पाले में लाने का काम तो किया ही, इसके साथ मंईयां सम्मान योजना ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महिलाओं को सालाना 12,000 रुपये देने वाली इस योजना तथा सर्वजन पेंशन योजना ने हेमंत के पक्ष में संजीवनी का काम किया। फिलहाल झारखंड की करीब पचास लाख से अधिक महिलाओं को मंईयां सम्मान योजना के तहत 2,000 रुपये प्रतिमाह की मदद दी जा रही है। चुनाव के पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इस राशि को बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया था।जबकि, गोगो दीदी योजना के तहत भाजपा ने 2,100 रुपये प्रतिमाह देने का वायदा किया था। बिजली बिल माफ करना भी झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए फायदेमंद साबित हुआ। सरकार बनने पर आरक्षण का दायरा बढ़ाने का भी वादा किया गया।
आदिवासियों की भाजपा से नाराज़गी की कई वजहें रहीं। पहली यह कि वे जानते हैं कि भाजपा की नज़रें यहां की खनिज-सम्पन्न ज़मीनों और जंगलों पर हैं जिन्हें वह अपने कारोबारी मित्रों को देना चाहती है। फिर, जब यहां भाजपा शासन था और रघुबर दास मुख्यमंत्री थे, उस दौरान 2016 में छोटा नागपुर किरायेदारी अधिनियम और संथाल परगना अधिनियम में बदलाव की कोशिशें की गयीं जिनका सीधा नुकसान आदिवासियों को होने वाला था। सितंबर 2012 में बनी झारखंड सरकार की ऊर्जा नीति अक्टूबर 2016 में बदल दी गई।
इसके प्रावधानों में मामूली संशोधन किए गए और रघुवर दास की कैबिनेट ने उस पर मुहर लगा दी। इससे पहले झारखंड की भाजपा सरकार ने कोई सर्वे नहीं कराया और न किसी विशेषज्ञ कमेटी ने उसे ऐसा करने की सलाह दी। उस समय पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड विकास मोर्चा के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रघुवर दास की सरकार ने अपनी ऊर्जा नीति एक समूह को फ़ायदा पहुंचाने के लिए बदल दी।”सरकार ने कई स्तरों पर गड़बड़ी की,न केवल ऊर्जा नीति बदली बल्कि जमीन की कीमत के निर्धारण, जनसुनवाई और पर्यावरण सुनवाई में भी फर्जीवाड़ा किया गया। एनटीपीसी, डीवीसी (दामोदर घाटी निगम) और नेशनल ग्रिड से तो सरकार बिजली खरीदती ही है। अदाणी समूह के झारखंड से बाहर स्थित प्लांट से 400 मेगावॉट बिजली खरीदने से भी सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा। ये भाजपा के नकारात्मक पक्ष थे।
 चुनाव में आदिवासियों के वोट लेने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह समेत सारी भाजपा उन्हें यह कहकर डराती रही कि कांग्रेस-झारखंड मुक्ति मोर्चा  की सरकार आई तो उनकी जमीनें ‘घुसपैठिये’ हड़प लेंगे। यह डर झारखंड के साथ पश्चिम बंगाल के आदिवासियों को भी दिखाया जाता रहा । भाजपा के अनुसार ये बांग्लादेशी घुसपैठिये होंगे। उसका दावा है कि भाजपा की सरकार बनी तो आदिवासियों की ज़मीनों को हड़पने से रोकने के लिये कानून लाया जायेगा; जबकि आदिवासी जानते हैं कि उपरोक्त उल्लिखित दोनों अधिनियम इस मामले में पर्याप्त सक्षम है इसलिये इन इलाकों में भाजपा की सभाएं भी फीकी रहीं।
घुसपैठ का डर दिखाकर भाजपा साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का पुराना खेला कर रही थी ताकि हिन्दू-मुस्लिम कार्ड खेला जा सके, तो वहीं वह आदिवासियों को हिन्दू बतलाकर उसे वैमनस्य के खेल में एक पार्टी बना रही है। अमित शाह ने सरायकेला विधानसभा के आदित्यपुर की सभा में कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा -कांग्रेस की सरकार आदिवासियों का आरक्षण छीनकर मुसलमानों को देने जा रही है।’ उनके अनुसार भाजपा ऐसा नहीं होने देगी। चंपई सोरेन के प्रति सम्मान दिखाकर आदिवासियों के वोट पाने का भी प्रयास भाजपा ने किया तभी तो शाह कह रहे थे कि ‘झारखंड मुक्ति मोर्चा ने चंपई सोरेन का अपमान किया है।
यहां धुव्रीकरण की कोशिशों के साथ साथ अब केन्द्रीय जांच एजेंसियों की छापेमारी भी हुई। झारखंड मुक्ति मोर्चा नेता गणेश चौधरी पर आयकर का जो छापा पड़ा  बकौल कल्पना सोरेन ‘चंपई सोरेन के इशारे पर हो रहा है।’ रांची, जमशेदपुर, गिरिडीह में ये छापे मारे गये जिसका मकसद झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े लोगों को डराना था। सोरेन सरकार में मंत्री मिथिलेश ठाकुर, उनके भाई विनय और सचिव हरेन्द्र सिंह के ठिकानों पर अक्टूबर के मध्य में ही ईडी द्वारा छापेमारी हुई थी। इसके बावजूद हेमंत सोरेन के पक्ष में सहानुभूति लहर रही जिन्हें जेल में डालना यहां के लोगों के लिये ‘झारखंडी अस्मिता पर हमला’ था। स्पष्टतः भाजपा एक तरफ़ आदिवासियों को मुस्लिमों का डर दिखाकर वोट लेना चाहती थी, तो वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा  नेताओं को छापों से डराकर चुनाव जीतने के हथकंडे अपनाए, जो नाकाम रहे।
जिस संथाल परगना क्षेत्र के लिए बंटोगे तो कटोगे का नारा गढ़ा गया, वहां की 18 सीट में से केवल एक जरमुंडी सीट बीजेपी जीत पाई। हिंदू वोटरों को एकजुट करने के लिए दिए गए इस नारे ने मुस्लिमों का ध्रुवीकरण कर दिया और उन्होंने एकजुट होकर इंडिया गठबंधन के पक्ष में मतदान कर दिया।
 ‘माटी पुत्रों की पार्टी’ वाली छवि के कारण झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) का इस पर बोलबाला है। वर्ष 2000 में बिहार से अलग होकर बने इस प्रदेश का प्रारम्भिक इतिहास राजनैतिक अस्थिरता तथा व्यापक भ्रष्टाचार का रहा लेकिन पिछले 5 वर्षों के दौरान हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री के रूप में न केवल स्थिरता दी बल्कि जमीनी स्तर पर भी जमकर काम किया। आदिवासियों के उत्थान हेतु वे बतौर मुख्यमंत्री बेहद सक्रिय रहे। राज्य के सर्वांगीण विकास के अलावा वे जल, जंगल व जमीन पर स्थानीयों के हकों की लड़ाई लड़ते रहे। इसलिये वे भाजपा की आंखों में खटकते रहे। उन्होंने इस राज्य में भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ नाकाम कर दिया। कथित जमीन घोटाले में जब उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से छापे डलवाकर कई माह तक जेलों की सलाखों के पीछे डाल दिया गया था, तब उनकी जगह पर बिठाये गये चंपई सोरेन के जरिये भाजपा ने सरकार गिराने की कोशिश की। जेल से बाहर आने पर जब उन्होंने अपना पद वापस सम्हाला तो चंपई सोरेन ने अपने कथित अपमान से नाराज़ होकर दल छोड़ दिया। फिर वे भाजपा में चले गये जहां हेमंत की भाभी सीता सोरेन पहले से आ चुकी थीं।
इनके जरिये सरकार गिराने की भाजपायी कोशिशें भी नाकाम रहीं।हेमंत सोरेन की यह जीत आदिवासीयत की एक बहुत बड़ी जीत है। उनके खिलाफ इडी, सीबीआई, मोदी, शाह, शिवराज, हेमंता, योगी सहित न जाने कितने दिग्गज नेता लगे थे। अब इस बड़ी जीत को हेमंत सोरेन को भरपूर सम्मान देना होगा, जनता की आकांक्षाओं की कसौटी पर खरा उतरना होगा और भाजपा को इस हार को विनम्रता से स्वीकार करना होगा।(विनायक फीचर्स)

रद्द हो सकती है ‘मनसे’ की मान्यता, राज ठाकरे ने बुलाई पार्टी की बैठक

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महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं। 288 सीटों के लिए हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा, शिवसेना और एनसीपी के महायुति गठबंधन ने प्रचंड जीत हासिल की है। हालांकि, चुनाव में राज ठाकरे की पार्टी मनसे का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है। अब बड़ी खबर ये सामने आ रही है कि विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद राज ठाकरे की पार्टी की मान्यता भी रद्द हो सकती है।

क्या है कारण?
सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की मान्यता रद्द कर सकता है। जानकारों के मुताबिक, विधानसभा चुनावों में कम से कम एक विधानसभा सीट या, मतदान का 8 प्रतिशत वोट शेयर ना मिलने पर मान्यता जा सकती है। राज ठाकरे ने अपने घर आज सुबह 10.30 बजे पार्टी के नेताओं की आत्मचिंतन बैठक बुलाई है। बैठक में चुनावों में खराब प्रदर्शन और आगे की रणनीति की हो सकती है चर्चा।

मनसे को कितने वोट मिले?
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने 120 से ज्यादा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और इनमें से एक उम्मीदवार भी चुनाव नहीं जीत सके। राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे भी माहिम सीट से चुनाव हार गए। चुनाव आयोग के मुताबिक, मनसे को चुनाव में महज 1.55 फीसदी वोट मिले हैं।

किसे कितनी सीटें मिली?
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति की भाजपा को 132, एनसीपी को 41 और शिवसेना को 57 सीटों (कुल 230) पर जीत हासिल हुई है। वहीं, महाविकास अघाड़ी की शिवसेना (यूबीटी) को 20, कांग्रेस को 16 और एनसीपी (शरद चंद्र पवार) को 10 (कुल 46) सीटों पर जीत मिली है। बाकी की 12 सीटें अन्य दलों या फिर निर्दलीय ने जीती हैं।

मुस्तफा यूसुफअली गोम को भारत विभूषण पुरस्कार – 2024 मिलना एक बड़ी उपलब्धि है

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मुस्तफा यूसुफअली गोम को भारत विभूषण पुरस्कार – 2024 मिलना एक बड़ी उपलब्धि है! यह पुरस्कार उनके सामाजिक उद्यमिता में महत्वपूर्ण योगदान को मान्यता देता है और उन्हें एक प्रेरणादायक शख्सियत के रूप में स्थापित करता है ¹।

मुस्तफा यूसुफअली गोम की कहानी हमें याद दिलाती है कि एक व्यक्ति समाज को ऊपर उठाने में कितना गहरा प्रभाव डाल सकता है। उनके शब्दों ने कई लोगों को प्रेरित किया है, जो यह विश्वास को मजबूत करते हैं कि उद्यमिता सामाजिक परिवर्तन का एक शक्तिशाली साधन हो सकती है।

यह पुरस्कार न केवल मुस्तफा यूसुफअली गोम की उपलब्धियों को उजागर करता है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक मानक भी स्थापित करता है। यह पुरस्कार मुंबई और उससे आगे के उद्यमियों को सामाजिक प्रभाव के लिए अपने जुनून को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है।

जिसके घर में गाय का कुल, वह घर गोकुल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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घर-घर बछिया उपलब्ध कराकर दुग्ध उत्पादन को बढ़ाया जाएगा
गौ-शाला स्थापित करने की दिशा में सक्रियता से कार्य जारी
प्रदेश में इस वर्ष 300 गौ-शालाओं का हुआ पंजीयन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 10 हजार गायों की क्षमता वाली हाईटेक गौ-शाला का किया भूमि-पूजन
25 एकड़ क्षेत्र में 15 करोड़ रूपए की लागत से बनेगी गौ-शाला
ग्राम सूखी सेवनिया में बनेगा सीएम राइज स्कूल और बरखेड़ी डोब को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा
अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में गौ-माता से संबंधित डिग्री/डिप्लोमा कोर्स आरंभ होंगे
भोपाल जिले के ग्राम बरखेड़ी डोब में हुआ भूमि-पूजन कार्यक्रम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गौ-माता में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास है। जो भी गोवंश का पालन करे वही गोपाल है, जिसके घर में गाय का कुल वह घर गोकुल है। अतः प्रत्येक व्यक्ति और परिवार को घर में गोपालन के लिए पहल करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बिना धर्म, भाषा, जाति और क्षेत्र के भेदभाव के हमें गौ-पालन को प्रोत्साहित करना है। परंपरागत रूप से भी भारत में सभी धर्म और जाति के लोग गौ-पालन करते हैं और यही हमारी सामाजिक समरसता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल के ग्राम बरखेड़ी डोब में 10 हजार गायों की क्षमता वाली हाईटेक गौ-शाला के भूमि-पूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि भोपाल जिले के बरखेड़ी डोब ग्राम में 25 एकड़ क्षेत्र में 15 करोड़ रूपए की लागत से गौ-शाला का निर्माण होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाईटेक गौ-शाला भूमि-पूजन स्थल पहुंचने पर सर्वप्रथम गौ-माता को दुलार कर नमन किया तथा उन्हें आहार सामग्री अर्पित की। इस अवसर पर प्रदेश में गोवंश संरक्षण और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए संचालित गतिविधियों पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, सांसद श्री आलोक शर्मा, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, महापौर श्रीमती मालती राय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रामकुंवर नौरंग सिंह गुर्जर सहित जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे।

बदलती जीवनशैली में निरंतर बढ़ रहा है गौ-शालाओं का महत्व

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्व के अधिकांश देशों में दुग्ध की आपूर्ति गौ-माता ही करती हैं। सनातन संस्कृति में गौ-माता का महत्व इससे स्पष्ट हो जाता है कि मानव जीवन की पूर्णता के लिये गौ-दान आवश्यक बताया गया है। बदलती जीवनशैली में गौ-शालाओं का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। इसे देखते हुए राज्य शासन द्वारा विशाला गौ-शाला स्थापित करने की दिशा में सक्रियता से कार्य किया जा रहा है, वर्तमान वर्ष में अब तक 300 गौ-शालाओं का पंजीयन हुआ है। विभिन्न सामाजिक संगठन भी गौ-शाला संचालन में पहल कर रहे हैं। गौ-पालन परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के साथ परिवार को पोषक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने में भी सहायक है। अत: घर-घर बछिया उपलब्ध कराकर दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार शीघ्र ही दुग्ध उत्पादन पर बोनस देने की व्यवस्था कर रही है। वर्तमान में मध्यप्रदेश, देश के कुल दुग्ध उत्पादन में 9 प्रतिशत का योगदान देता है। इसे अगले पाँच वर्ष में 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है।

सूखी सेवनिया रोड को फोरलेन किया जाएगा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शासकीय विद्यालय सूखी सेवनिया को सीएम राइज विद्यालय बनाने और सूखी सेवनिया रोड को विभागीय मद अनुसार फोरलेन बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बरखेड़ी डोब क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय के माध्यम से गौ-माता से संबंधित डिग्री-डिप्लोमा कोर्स आरंभ किया जाएगा।

स्वामी श्री अच्युतानंद जी महाराज ने गौ-संरक्षण एवं गौ-संवर्धन के क्षेत्र में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकार गठन के बाद अभी तक के अल्प समय में प्रदेश में लगभग 50 हजार गायों के पालन-पोषण की व्यवस्था की है और प्रदेश की लाखों गायों की देखभाल का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश सरकार इस वर्ष को गौ-संवर्धन वर्ष के रूप में मना रही है। आज यहां गोलोक धाम की स्थापना इसी कड़ी में एक सार्थक प्रयास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस प्रयास के लिए सभी महात्मा, सभी ऋषिगण उन्हें कोटि-कोटि धन्यवाद और आशीर्वाद देते हैं। गौ-माता का पालन-पोषण हम सभी सनातनियों का दायित्व है। हमें इस प्रकार के प्रयास करने चाहिएं कि हर घर में एक गाय रहे। गौ-माता के बिना घर सूना होता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के समग्र विकास को समर्पित

विधायक श्री रामेश्वर शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं, युवा, किसानों, मजदूर, वरिष्ठ जन के कल्याण के लिए समर्पित है। राज्य सरकार द्वारा गौ-वंश के संरक्षण के लिए व्यापक स्तर पर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अधोसंरचना विकास, शिक्षा, चिकित्सा सहित प्रदेश के समग्र विकास के लिए सक्रिय हैं। पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल ने आभार व्यक्त किया।

गौ-वंश को कन्वेयर बेल्ट से मिलेगा आहार और सीसीटीवी से होगी मॉनीटरिंग

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में वर्तमान वर्ष (चैत्र माह से फाल्गुन माह तक) गौ-संरक्षण एवं गौ-संवर्धन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए भोपाल के बरखेड़ी डोब में 10 हजार गायों की क्षमता वाली अत्याधुनिक गौ-शाला के निर्माण के लिये शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भूमि-पूजन किया है।

  • इसमें गायों के आधुनिक तरीके से रख-रखाव के साथ उनके उपचार के लिए सभी संसाधनों से युक्त चिकित्सा वार्ड का निर्माण भी किया जाएगा।

  • गौ-शाला में सीसी टीवी के माध्यम से निरंतर मॉनीटरिंग की व्यवस्था रहेगी।

  • लगभग 15 करोड रुपए की लागत की गौ-शाला का निर्माण ग्रामीण यांत्रिकी विभाग द्वारा कराया जाएगा। नगर निगम एवं पशुपालन विभाग नोडल एजेंसी होंगे। गौ-शाला को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और जिला पंचायत द्वारा वित्त पोषण किया जाएगा। गौ-शाला का संचालन नगर निगम द्वारा किया जाएगा।

  • गौ-शाला का निर्माण 3 चरणों में होगा। प्रथम चरण में लगभग 2000 पशु क्षमता का निर्माण किया जाएगा।

  • इस अत्याधुनिक गौ-शाला में गायों को भूसा, हरा घास, पशु आहार आदि कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से पहुंचाया जाएगा।

  • गौ-शाला में गायों के गोबर एवं मूत्र आदि से विभिन्न सामग्री तैयार की जाएगी और जैविक खाद निर्माण के लिए संयंत्र भी लगाया जाएगा।

  • गौ-शाला में रहने वाले पशुओं एवं सड़कों पर घायल एवं बीमार होने वाले पशुओं के उपचार के लिए चिकित्सा वार्ड भी बनाया जा रहा है।