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पीएम के नेतृत्व में सामूहिक प्रयासों से लाखों किसानों की दोगुनी से अधिक हुई आय: श्री तोमर

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New Delhi – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि देश में कृषि क्षेत्र व किसानों का तेजी से विकास हो रहा है। किसानों की आय दोगुना करने के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर केंद्र व राज्य सरकारों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) सहित सभी के सामूहिक प्रयासों से असंख्य किसानों ने आय दोगुना या इससे ज्यादा करने में सफलता हासिल की है। आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में, आय बढ़ने वाले लाखों किसानों में से 75 हजार किसानों का संकलन कर एक ई-प्रकाशन तैयार किया गया है। साथ ही Doubling Farmers Income पर राज्यवार संक्षिप्त प्रकाशन भी तैयार किया गया है। इनका विमोचन कृषि मंत्री श्री तोमर ने इस अवसर पर किया। ई-प्रकाशन आईसीएआर वेबसाइट पर उपलब्ध है। आईसीएआर के 94वें स्थापना दिवस पर श्री तोमर ने वैज्ञानिकों व किसानों को पुरस्कार भी वितरित किए।

आईसीएआर पूसा परिसर, दिल्ली में आयोजित समारोह में श्री तोमर ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है क्योंकि आईसीएआर ने गत वर्ष तय किया था कि आजादी के अमृत महोत्सव में ऐसे 75 हजार किसानों से चर्चा कर उनकी सफलता का दस्तावेजीकरण किया जाएगा, जिनकी आय दोगुनी या इससे ज्यादा बढ़ी है। सफल किसानों का यह संकलन देश के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। श्री तोमर ने आईसीएआर के अन्य प्रकाशनों का भी विमोचन किया। श्री तोमर ने कहा कि आईसीएआर को स्थापना दिवस संकल्प दिवस के रूप में मनाना चाहिए। इस अवसर पर वर्षभर के संकल्प लिए जाएं और अगले स्थापना दिवस तक इन्हें पूरा करना चाहिए।

श्री तोमर ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है और कृषि ऐसा क्षेत्र है, जिसमें निरंतर काम करने की जरूरत है, नित-नई चुनौतियों का समाधान करने की जरूरत है। वर्तमान में चुनौती पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ तकनीक का इस्तेमाल करते हुए आगे बढ़ने की भी है। प्रधानमंत्री की कोशिश है कि गांव, गरीब-किसानों के जीवन में बदलाव आएं, इसलिए ग्रामीण क्षेत्र में अधोसंरचनाएं विकसित हो, जीवन सुगम हो व कृषि मुनाफे में परिवर्तित हो, इसके लिए बहुआयामी प्रयत्न किए हैं। नए रोजगार सृजित करने के लिए योजनाएं लागू कर फंडिंग की जा रही है। लोगों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है, कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा किए जा रहे हैं।

“पढ़ा-लिखा व्यक्ति जब खेती में आता है तो योग्यता व अनुभव के साथ तकनीक को जोड़ने से रोजगार के इतने अवसर पैदा किए जा सकते हैं, जिससे कि रोजगार की समस्या का समधान हो सकता है,” उन्होंने कहा।

केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने कहा कि आईसीएआर की स्थापना को 93 साल हो गए हैं। “वर्ष 1929 में स्थापना से लेकर आज तक इसके द्वारा लगभग 5,800 बीज-किस्में जारी की गई हैं, वहीं इनमें से लगभग दो हजार किस्में तो वर्ष 2014 से अभी तक 8 वर्षों में ही रिलीज की गई है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इनमें बागवानी, जलवायु अनुकूल व फोर्टिफाइड किस्मों की बीज-किस्में भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन की स्थिति आ रही है तो वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता का विषय यही है, इस दिशा में रोडमैप बनाकर आगे बढ़ना, देश को परिणाम देना है ताकि भारत के कृषि उत्पादों के निर्यात की भी और अच्छी स्थिति बन सकें, इसमें सभी केवीके और आईसीएआर के संस्थानों के अन्य वैज्ञानिकों की भूमिका महत्वपूर्ण है,” उन्होंने कहा।

श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री के विजन पर नई शिक्षा नीति का उदय हुआ, अब स्कूली शिक्षा में कृषि पाठ्यक्रम का समावेश किया जा रहा है। “कृषि शिक्षा संस्थान नई शिक्षा नीति को कैसे अंगीकार करें, यह काम आगे बढ़कर आईसीएआर ने किया है, इसका सद्परिणाम आगे देखने को मिलेगा,” उन्होंने कहा।

श्री तोमर ने कृषि उत्पादकता के क्षेत्र में काम करने सहित दलहन, तिलहन, कपास उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी आईसीएआर व केवीके को संकल्पबद्ध होकर प्रयास करने को कहा। इससे पहले देश के विभिन्न हिस्सों के कुछ किसानों से कृषि मंत्री ने आनलाइन संवाद किया। हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, म.प्र., गुजरात आदि के किसानों से कृषि मंत्री की चर्चा में यह बात उभरी कि सरकारी योजनाओं, संस्थागत सहयोग से इनकी आय बढ़ रही हैं, जीवन स्तर सुधर रहा है।

कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री परषोत्तम रूपाला ने आईसीएआर के उपलब्धिपूर्ण इतिहास के दस्तावेजीकरण का सुझाव दिया। उन्होंने पोषक तत्व बढ़ाने वाली फसलों की नई बीज किस्में विकसित करने के लिए आईसीएआर की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृषि व संबद्ध क्षेत्रों में हो रहे नवाचारों की ओर अनुसंधान केंद्रों का ध्यान जाना चाहिए। साथ ही इसे लेकर उत्कृष्ट कार्य करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की पहल पर अंतरराष्ट्रीय पोषक-अनाज वर्ष अगले साल भारत की अगुवाई में मनाया जाएगा। इसके मद्देनजर मिलेट्स को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने पर आईसीएआर को फोकस करना चाहिए।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी ने कहा कि कृषि विकास में किसानों के साथ ही आईसीएआर के वैज्ञानिकों का बहुत योगदान है। पीएम के नेतृत्व में सरकार किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें सुविधाएं-समर्थन देने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर काम कर रही है। कृषि का बजट 8 वर्ष पूर्व करीब 22 हजार करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर अब 1.32 लाख करोड़ रु. कर दिया गया है। पीएम किसान सम्मान निधि के रूप में हर साल 3 किश्तों में 6,000 रु. किसानों के बैंक खातों में दिए जा रहे हैं, वहीं एफपीओ के माध्यम से छोटे किसानों की दिक्कतें दूर की जा रही हैं। नए 10 हजार एफपीओ मील का पत्थर साबित होंगे और इनके जरिये देश ही नहीं बल्कि विश्व के किसी भी कोने में किसान अपने उत्पाद आसानी से बेच सकेंगे।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. रमेश चंद ने कहा कि श्री तोमर ने जो संकल्प की बात की वह अपने आप में महत्वपूर्ण है।  हर इन्स्टीट्यूट को अपना संकल्प बनाना चाहिए ताकि वो सबका संकल्प बन जाये। ICAR  ने KVK  को मानकर जो भी उपलब्धि हासिल की है वो लोगों को भागीदार बना कर की है। पिछले 75 साल में ग्रीन  रेव्यूलूशन का इंजन जेनेटिक इंप्रूवमेंट से हुआ है । भारत सरकार बड़ी जिम्मेदारी के साथ दो रास्तों  पर चल रही है। एक हैं –  ट्रेडिशनल पद्धति। दूसरा – साइंस/ विज्ञान।

संगठनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए व्यक्तिगत कर्मचारियों और टीमों को प्रोत्साहित करने की अपनी परंपरा को जारी रखते हुए और उन्हें नौकरी से संतुष्टि के अपने स्तर में सुधार के अलावा अधिक कुशल, उत्तरदायी और उत्पादक बनाने के लिए, मंत्री ने 4 प्रमुख श्रेणियों में 15 पुरस्कार प्रदान किए। श्रेणियों में कृषि संस्थानों के लिए उत्कृष्टता का राष्ट्रीय पुरस्कार, कृषि अनुसंधान में उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार, कृषि प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार और किसानों द्वारा नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार शामिल हैं।

इस वर्ष, आईसीएआर ने 15 विभिन्न पुरस्कारों के तहत 92 पुरस्कार विजेताओं का चयन किया, जिनमें 4 संस्थान, 1 अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना, 4 कृषि विज्ञान केंद्र, 67 वैज्ञानिक और 11 किसान शामिल थे, जिनमें से 8 महिला वैज्ञानिक और किसान थे।

कार्यक्रम में आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने भी संबोधित किया। उपमहानिदेशक (कृषि विस्तार) डा. ए.के. सिंह ने स्वागत भाषण दिया। सहायक महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अग्रवाल ने आभार माना। महाराष्ट्र के सांसद डा. अनिल बोंडे, आईसीएआर के अधिकारी, कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, वैज्ञानिक व प्रगतिशील किसान भी मौजूद थे। देश के 731 केवीके और आईसीएआर के संस्थानों में भी स्थापना दिवस पर कार्यक्रम हुए, जिनमें हजारों किसानों के साथ स्थानीय सांसद-विधायकों व अन्य जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की।

 

जगदीप धनखड़ जिन्हें NDA ने बनाया उपराष्ट्रपति उम्‍मीदवार

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भाजपा संसदीय बोर्ड ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल राजस्थान मूल के जगदीप धनखड़ को उप-राष्ट्रपति का प्रत्याशी बनाने पर सहमति जताई है। शनिवार को इसका एलान शनिवार को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने किया। जगदीश धनखड़ (NDA VP candidate Jagdeep Dhankhar) अब एनडीए के उप-राष्ट्रपति के प्रत्याशी होंगे। जानिये जगदीश धनखड़ का कैसा रहा है सियासी सफर…

सीएम ममता बनर्जी के मुखर आलोचक

जगदीप धनखड़ वर्तमान में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल हैं। 2019 में बीजेपी ने उनको पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया। तब से लेकर अब तक उनकी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से ठनती रही। पिछले महीने उदयपुर के प्रताप गौरव केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल जगदीप धनखड़ शामिल हुए और उन्होंने कहा था कि ‘पश्चिम बंगाल में कानून का नहीं, शासक का राज है

बंगाल में हुई हिंसा पर मुखर रुख

जगदीप धनखड़ ने कहा था- चुनाव के बाद जो हिंसा का तांडव मैंने देखा, वो बयां नहीं कर सकता। मैंने मौतें देखीं, मार-काट देखी। प्रजातांत्रिक व्यवस्था में वोट देने की कीमत मौत हो सकती है। ये मैंने खुद देखा है। मैंने बंगाल की अवाम की पीड़ा महसूस की है।

स्कूली शिक्षा सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में हुई

राजस्थान के छोटे से गांव से निकले धनखड़, सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ के छात्र रहे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ राजस्थान के शेखावाटी अंचल के झुंझुनूं जिले के एक सुदूर गांव किठाना के रहने वाले हैं। किसान परिवार में जन्मे धनखड़ ने की स्कूली शिक्षा सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में हुई। भौतिकी में स्नातक करने के बाद जगदीप धनखड़ ने राजस्थान विश्वविद्यालय से विधि स्नातक किया और वकालात करने लगे।

अग्रणी वकीलों में शुमार

जगदीप धनखड़ राजस्थान के ही नहीं, वरन देश के अग्रणी वकीलों में शुमार रहे हैं। बार कौंसिल आफ राजस्थान के विभिन्न पदों पर रहने वाले धनखड़ ने साल 1989 में राजनीति में प्रवेश किया। पहली बार झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र से भाजपा से सांसद निर्वाचित हुए। 1990 में वह देश के संसदीय कार्य राज्यमंत्री बने। इसके बाद अजमेर जिले की किशनगढ़ से वह विधायक निर्वाचित हुए।

जाट समाज के मुखर नेता

भाजपा ने साल 2019 में जगदीप धनखड़ को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया था। जाट समाज से आने वाले धनखड़ के दो और भाई हैं, जिनमें से एक कांग्रेस के नेता है, जबकि दूसरे बिजनेस मैन।

ममता बनर्जी से हमेशा ठनी रहती

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहते हुए जगदीप धनखड़ की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कभी नहीं बनी। उन्होंने कहा था कि ‘बंगाल में कानून का नहीं, शासक का राज है। जो किसी भी तरह से प्रजातांत्रिक मापदंडों से मेल नहीं खाता है। राज्यपाल के रूप में धनखड़ ने ममता बनर्जी के कई फैसलों को पलट दिया। कुछ दिनों पहले बीजेपी के खिलाफ जेहाद वाले बयान को लेकर धनखड़ और ममता बनर्जी के बीच जमकर वाद विवाद हुआ।

बच्चों को दिया था संदेश

उदयपुर के प्रताप गौरव केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने बच्चों को संदेश देते हुए कहा था कि आप सभी को भारत के संविधान की प्रस्तावना अवश्य पढ़नी चाहिए। इससे उन्हें राष्ट्रीयता समझ आ जाएगी।

 

कांडी पुलिस के सहयोग से जिले में फल फूल रहा गौ तस्करी का कारोबार : संतोष

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गढ़वा : भाजपा गढ़वा जिला महामंत्री संतोष दुबे ने कहा कि गढ़वा जिला में गौ तस्कर बड़े पैमाने पर फल फूल रहा है। उत्तर प्रदेश से कांडी के रास्ते गौ तस्कर अपना काम धड़ल्ले से कर रहे हैं। कांडी के रास्ते दूसरे प्रदेश में गौ तस्कर अपना कारोबार चला रहे हैं। दो दिन पहले ग्रामीण भाजपा कार्यकर्ता एवं पत्रकार द्वारा गाय से लदी गाड़ी पकड़कर कांडी थाना को सौंपा गया। लेकिन कांडी थाना प्रभारी फैज रब्बानी ने तस्करों के साथ मिलकर भाजपा कार्यकर्ता शशांक शेखर एवं पत्रकार विजय पांडेय के ऊपर फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया। गौ तस्करों को कहीं न कहीं थाना का सहयोग प्राप्त हो रहा है ।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार लगातार गौ की तस्करी जारी है, लेकिन कांडी थाना प्रभारी गौ तस्करों पर कार्रवाई करने में सक्षम नहीं हैं। तस्करों के मिलीभगत से आवाज उठाने वाले को फर्जी मुकदमा दायर कर फंसाया जा रहा है ।

जिससे कोई आवाज नहीं उठाए। लेकिन भाजपा कार्यकर्ता चुप नही बैठेंगे ऐसे अफसरों के खिलाफ भाजपा कार्यकर्ता आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि अगर गलत काम करने वाले को प्रशासन द्वारा इस तरह का संरक्षण मिलेगा तो तस्करी और भी बड़ा रुप ले लेगा और फिर गलत के खिलाफ जनता कैसे आवाज उठाएगी। उन्होंने कहा कि कांडी गौ तस्करी मामले में भाजपा गढ़वा जिला का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही उच्च अधिकारियों से मिलकर मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की मांग करेगी।

अगर मामले पर कार्रवाई नहीं हुई तो भाजपा अपनी अगली रणनीति तैयार करेगी। मौके पर भाजपा जिला मीडिया प्रभारी विवेकानंद तिवारी, भाजयुमो जिलाध्यक्ष रितेश चौबे, अविनाश पासवान, नवीन जायसवाल आदि उपस्थित थे।

 

 

 

 

 

मिसेज कृष्णा सैनानी की भरत श्रीपत सुनंदा निर्देशित फिल्म ‘फ्यूचर फाइट’ की स्पेशल स्क्रीनिंग व प्रेस कॉन्फ्रेंस

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प्लास्टिक के दुष्प्रभाव और दुनिया मे पानी की किल्लत के मुद्दे पर बनी है फिल्म

मुम्बई। पर्यावरण संरक्षण, पानी की किल्लत और ग्लोबल वार्मिंग जैसे गंभीर विषय पर लेखक और निर्देशक भरत श्रीपत सुनंदा ने बेहद प्रभावी शार्ट फ़िल्म ‘फ्यूचर फाइट’ बनाई है जिसकी प्रोड्यूसर मिसेज कृष्णा सैनानी हैं। अंधेरी स्थित व्यंजन बैंक्वेट हॉल में इस फिल्म की प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया जहां फ़िल्म से जुड़ी पूरी टीम और मीडिया की भारी संख्या मौजूद थी। इस फिल्म को त्रिशूल फिल्म कंपनी और कॉन्टेंट प्रोवाइडर इन एसोसिएशन विथ प्रकाश सर्जेराव सदावर्ते ने प्रस्तुत किया है। मिसेज कृष्णा सैनानी, निर्देशक भरत श्रीपत सुनंदा, प्रकाश सर्जेराव सदावर्ते और गेस्ट के रूप में एक्टर जावेद हैदर की उपस्थिति में फिल्म की स्क्रीनिंग हुई उसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई।
निर्देशक भरत श्रीपत सुनंदा ने कहा कि इंसान ने दुनिया के लिए प्लास्टिक नाम का बहुत बड़ा जहर बनाया है। उसके अधिकतर इस्तेमाल से पीने का पानी खत्म होता जा रहा है। हम 5जी और 8जी जैसी नई तकनीकों का इंतजार कर रहे हैं, मगर उधर बुनियादी चीज पानी दुनिया से खत्म होता जा रहा है। आप यकीन करेंगे कि आज पूरी दुनिया मे पीने लायक पानी सिर्फ 2.5 प्रतिशत है। यूएई में दुबई के फ्यूचर म्यूज़ियम में जब ये फिल्म पेश की गई तो दुबई के जाने माने बिज़नेसमैन हैरान रह गए और कहा कि हम यहां भविष्य की योजनाएं बना रहे हैं और यह सोचा ही नहीं, कि दुनिया मे पानी खात्मे के कगार पर है।
मिसेज कृष्णा सैनानी ने बताया कि जब लेखक और निर्देशक भरत श्रीपत सुनंदा उनके पास ये प्रोजेक्ट लेकर आए तो मुझे यह कॉन्सेप्ट काफी पसन्द आया और इसलिए मैं इस फिल्म से जुड़ी। इस शॉर्ट फिल्म को दर्शकों की बड़ी संख्या तक पहुंचाने के लिए हमने कनाडा की एक्ट्रेस घडा लाजमी को कास्ट किया, जाने माने एक्टर रवि भाटिया को लिया, और इसे एक फीचर फिल्म की तरह फिल्माया। इसमें हमने दिखाया है कि पानी के लिए लोग लड़ रहे हैं, एक दूसरे को पानी के लिए मार काट रहे हैं।
मिसेज कृष्णा सैनानी ने आगे बताया कि लॉकडाउन के दौरान यह फ़िल्म बनाई गई थी। बेहतरीन एक्टर्स के साथ उम्दा कैमरे से फिल्माई गई इस फिल्म का पोस्ट प्रोडक्शन बेहतर ढंग से करवाया गया है। 12 मिनट की फिल्म के क्लाइमेक्स में एक प्रभावी मैसेज दिया गया है। इसे दुनिया भर के फिल्म फेस्टिवल में दिखाया जाएगा। ऐसे देशों में भी इसकी स्क्रीनिंग होगी जहां लोगों ने पानी के लिए काफी संघर्ष किया है, सहन किया है। लोगों में पानी व पेड़ को बचाने, प्लास्टिक के इस्तेमाल न करने के लिए जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से यह फिल्म बनाई है। प्लास्टिक बंद नहीं किया गया तो 2065 तक बड़ी तबाही हो जाएगी।
फिल्म के डायरेक्टर ने बताया कि हर साल दुनिया भर में 11 अरब पेड़ काटे जा रहे हैं, इसका नतीजा क्या होगा?
इस फिल्म को सिर्फ हिंदुस्तान में नहीं सारी दुनिया में पेश किया जा रहा है और इस फिल्म से ऐसे देश काफी इन्स्पायर हो रहे हैं जो आज ये सच्चाई देख सकते हैं।
बता दें कि इस फिल्म की निर्मात्री श्रीमती कृष्णा सैनानी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड मुम्बई की सीनियर एग्जीक्युटिव मार्केटिंग रह चुकी हैं। वहीं फिल्म के निर्देशक भरत श्रीपत सुनंदा को दादा साहेब फाल्के गोल्डन कैमेरा अवार्ड 2020 से सम्मानित किया जा चुका है। इस फिल्म के कलाकारों में रवि भाटिया, रंजीत शशिकांत, अभिनेत्री घडा लाजमी का नाम उल्लेखनीय है, साथ ही बाल कलाकार पार्श्व नंदा ने भी काफी बेहतर काम किया है। यह फिल्म लोगों को सोचने पर मजबूर करने वाली है।
फिल्म की सह निर्मात्री दीप्ति, डीओपी सतीश सिस्ता, फाइट मास्टर मोसेस फर्नांडीज, ईपी राजाराम चंदनशिवे, प्रोडक्शन हेड चिनी चेतन, डिज़ाइनर आर राजपाल हैं।

कोरोना – के खिलाफ एक और बड़ी जंग आज से, 75 दिन चलेगा बूस्टर डोज का विशेष अभियान

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देश में कोरोना महामारी का प्रकोप अभी खत्म नहीं हुआ है। हर रोज 15 हजार से अधिक नए मामले सामने आ रहे हैं और मौत के आंकड़े भी बढ़ते जा रहे हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने सभी वयस्कों को एहतियाती खुराक (Precaution dose) देने का फैसला किया है।

केंद्र सरकार ने शुक्रवार से सभी वयस्कों को मुफ्त एहतियाती खुराक लगाने का फैसला किया है। 15 जुलाई से ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के हिस्से के रूप में अगले 75 दिनों तक मुफ्त एहतियाती खुराक के लिए अभियान चलाया जाएगा। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई थी। सरकारी केंद्रों पर सभी वयस्कों को मुफ्त बूस्टर डोज लगाई जाएगी।

लक्षित आबादी में एक प्रतिशत से कम लोगों ने लिया बूस्टर डोज
कोरोना से बचने के लिए जहां सरकार लोगों से टीका लगवाने की अपील कर रही है वहीं अब कुछ लापरवाही भी सामने आई है। दरअसल, बूस्टर डोज को लेकर चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। अभी तक 18-59 वर्ष की लक्षित 77 करोड़ आबादी में मात्र एक प्रतिशत से भी कम लोगों ने बूस्टर डोज लगवाई है।

बुस्टर डोज लेने की समय सीमा हुई कम
कोरोना संक्रमण होने पर मौत से बचाने और गंभीर लक्षण रोकने में वैक्सीन की अहम भूमिका साबित हो चुकी है। इसी बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड रोधी वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के बाद बूस्टर डोज लेने की समय सीमा को भी नौ महीने से घटाकर छह महीने कर दिया है। अब 18 साल से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति सरकारी टीकाकरण केंद्र पर जाकर बूस्टर डोज लगवा सकता है।

राज्यों को स्पुतनिक-वी उपलब्ध कराने के निर्देश
इस विशेष अभियान को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। केंद्र सरकार ने राज्यों को यह सुनिश्चित करने का सुझाव दिया है कि स्पुतनिक-वी टीका उपलब्ध करा रहे निजी टीकाकरण केंद्र टीके की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ लाभार्थियों तक इसकी दूसरी और एहतियाती खुराक उपलब्ध कराएं।

बता दें कि 12 से 18 साल की उम्र के बच्चों के टीकाकरण को भी स्कूल आधारित अभियानों के जरिए पूरा किया जाएगा। टीकाकरण में तेजी को लेकर केंद्र सरकार ने एक जून से दूसरी बार ‘हर घर दस्तक 2.0’ डोर-टू-डोर अभियान शुरू किया था।

केंद्र को 12 साल से कम उम्र के बच्चों को टीके के लिए नहीं मिली वैज्ञानिक सलाह : मांडविया
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने गुरुवार को कहा कि सरकार को 12 साल से कम आयु के बच्चों के लिए टीकों पर वैज्ञानिक समुदाय से कोई सलाह नहीं मिली है। मंत्री ने बंगलुरू में एक कार्यक्रम के इतर संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम वैज्ञानिक समुदाय की सलाह पर निर्णय लेते हैं। हमें 12 साल से ऊपर के बच्चों के लिए अनुमति मिली है। आने वाले दिनों में वैज्ञानिक समुदाय की सलाह के आधार पर निर्णय लिए जाएंगे। अब तक, हमें वैज्ञानिकों से कोई सलाह नहीं मिली है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखे पत्र में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने गुरुवार को कहा कि देखने में आया है कि जिन लोगों को स्पुतनिक-वी टीके की एहतियाती खुराक लेनी है, उनकी संख्या की केवल 0.5 प्रतिशत ही वैक्सीन की प्राप्ति की गई है। उन्होंने कहा कि निजी कोविड टीकाकरण केंद्रों में वैक्सीन की दो खुराक लगवाने वालों को स्पुतनिक-वी के कंपोनेंट-1 का इस्तेमाल करते हुए एहतियाती खुराक दी जा सकती है। इस टीके के लाभार्थी बूस्टर खुराक लें, इसके लिए इसकी उपलब्धता को बढ़ाने के लिहाज से स्वास्थ्य सचिव ने राज्यों से स्पुतनिक वी टीके (कंपोनेंट-1) की उपलब्धता सुनिश्चित करने और निजी कोविड टीकाकरण केंद्रों की सक्रियता सुनिश्चित करने को कहा है।

राष्ट्रीय रत्न सम्मान समारोह के आयोजन के बाद थ्रिलर वेब फिल्म ‘आत्मा डॉट कॉम’ की शूटिंग शुरू होगी

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कृष्णा चौहान फाउंडेशन के संचालक डॉ कृष्णा चौहान के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मुम्बई (अंधेरी) स्थित मेयर हॉल में 20 जुलाई की शाम को कृष्णा चौहान फाउंडेशन के द्वारा आयोजित ‘राष्ट्रीय रत्न सम्मान(2022) समारोह में समाज सेवा और मानव सेवा का उल्लेखनीय योगदान देने वाले शख़्सियतों को अवार्ड दे कर सम्मानित किया जाएगा। इस सम्मान समारोह के समापन के बाद कृष्णा चौहान प्रोडक्शन्स के बैनर तले बन रही थ्रिलर वेब फिल्म ‘आत्मा डॉट कॉम’ की शूटिंग शुरू होगी।
 इस फिल्म के संगीतकार दिलीप सेन और डीओपी पप्पू के शेट्टी हैं। फ़िल्म का स्टोरी आइडिया आर राजपाल का है जो इसके पब्लिसिटी डिज़ाइनर भी हैं। इस फिल्म में नवोदित कलाकारों के साथ बॉलीवुड के कई नामचीन कलाकार अपने अभिनय का जलवा बिखेरते नज़र आएंगे। इस फिल्म की शूटिंग उत्तर भारत की विभिन्न रमणीय लोकेशनों पर की जाएगी। गोरखपुर यूपी के मूल निवासी डॉ कृष्णा चौहान पिछले 20 वर्षों से बॉलीवुड में सक्रिय हैं। डॉ कृष्णा चौहान न केवल बतौर फिल्म निर्देशक व समाज सेवक कर्मपथ पर अग्रसर हैं बल्कि अवार्ड्स फंक्शन करने के मामले में सबसे अधिक सुर्खियों में रहने वाले पर्सनाल्टी के रूप में जाने जाते हैं।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

दिग्गज साहित्यकारों की उपस्थिति में रजनी साहू लिखित काव्य संग्रह ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ का लोकार्पण

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गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सुधा साहित्य सामाजिक संस्था द्वारा आयोजित पुस्तक लोकार्पण समारोह एवं डॉ. राजाराम त्रिपाठी के सम्मान में काव्य संध्या

मुम्बई। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सुधा साहित्य सामाजिक संस्था द्वारा आयोजित पुस्तक सत्यम् शिवम् सुंदरम् काव्य संग्रह की लेखिका रजनी साहू द्वारा उनकी माताजी स्व. श्रीमती सुधा साहू को समर्पित शब्दाजंलि एवं पर्यावरण मित्र ‘मैं बस्तर बोल रहा हूॅं’ के रचनाकार जनकवि समारोह अघ्यक्ष डॉ. राजाराम त्रिपाठी के सम्मान में काव्य संध्या का आयोजन मुंबई प्रेस क्लब में सम्पन्न हुआ।
सत्यम् शिवम् सुंदरम् पुस्तक के विमोचन के अवसर पर प्रमुख रूप से कार्यक्रम के समारोह अध्यक्ष डॉ. राजाराम त्रिपाठी बस्तर से मुम्बई आये। वहीं इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. रमेश यादव, विशेष अतिथि अरविंद शर्मा ‘राही’, अनंत श्रीमाली, प्रमोद कुमार कुश ‘तनहा’, आमंत्रित कविगण डॉ. मुकेश गौतम, डॉ. वर्षा सिंह, रितु भंसाली, जे.पी. सहारनपुरी, मार्गदर्शक सीमा ठाकुर, विशेष सलाहकार छत्रसाल साहू, मंच संचालक की भूमिका में अश्वनी ‘उम्मीद’ उपस्थित थे।
पुस्तक पर डॉ. राजाराम त्रिपाठी, डॉ. रमेश यादव, अरविंद शर्मा ‘राही, अनंत श्रीमाली, प्रमोद कुमार कुश ‘तनहा’ ने अपना वक्तव्य दिया।
दिल्ली से प्रकाशित मासिक पत्रिका ककसाड़ का जुलाई अंक उसके संपादक डॉ. राजाराम त्रिपाठी की पत्रिका का विमोचन का सौभाग्य भी मंच को प्राप्त हुआ।


द्वितीय सत्र में राजाराम त्रिपाठी की कविताएँ से काव्य संध्या का शुभारंभ हुआ। उसके बाद प्रमोद कुमार कुश तनहा ने अपनी ह्दय स्पर्शी गजल और गीत सुनाये। इस समय टीवी शो ‘वाह भाई वाह’ में दर्शकों का मनोरंजन कर रहे डॉ. मुकेश गौतम के हास्य रस से सभा कक्ष ठहाकों से गूँज उठा, साथ ही उन्होंने प्रकृति व साहित्य के प्रति अपना अथाह प्रेम भी प्रकट किया। डॉ. वर्षा सिंह ने मुक्तक, दोहे, सुंदर गीत सुनाए वहीं अश्वनी उम्मीद ने अपनी हिंदी की गजल और कविताओं का बेहतरीन प्रदर्शन किया। सीमा ठाकुर ने श्रृंगार रस की कविता सुनाई तो वहीं रजनी साहू ने क्षणिकाएँ और अपनी अतुकांत कविताएँ पढ़ी। साथ ही नवोदित कवयित्री रितु भंसाली ने कविता के माध्यम से बहुत सुंदर प्रस्तुति दी।
आमंत्रित कवि गणों ने विविध विधाओं और सभी काव्य रस से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर सभी साहित्यकारों ने संस्था अध्यक्ष रजनी साहू ‘सुधा’ को बहुत -बहुत बधाई और ढेर सारी शुभकामनाऍं दी।
मुसलाधार बारिश के बाद भी कार्यक्रम में पहुंचे समारोह अध्यक्ष, सभी अतिथियों और श्रोताओं का संस्थापक संरक्षक छत्रसाल साहू ने सहृदय आभार प्रकट किया।

कामधेनु गाय की मूर्ति लगाने से समृद्धि, संतान, स्वास्थ्य  लाभ होता है

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इस गाय का फोटो खोल सकता है आपकी किस्मत

घर में कामधेनु गाय की मूर्ति लगाने से समृद्धि, संतान, स्वास्थ्य  लाभ होता है। कामधेनु गाय का अर्थ होता है कामनाओं या इच्छाओं को पूर्ण करने वाली गौ माता। पुराणों में वर्णित है कि समुद्र मंथन के समय कामधेनु गाय निकली थी। भारतीय वास्तु शास्त्र में कामधेनु गाय की प्रतिमा का बहुत ही विशिष्ट स्थान है। जहां भी कामधेनु गाय अपने बछड़े के साथ निवास करती है वह घर खुशियों से भरा होता है ऐसा शास्त्रों में वर्णित है।

प्राचीन आख्यानों के अनुसार कामधेनु की पुत्री नंदिनी महर्षि वशिष्ठ के आश्रम में रहती थी। माता अनुसूया उनकी सेवा करती थीं। जब महाराज दिलीप के कोई संतान नहीं हुई तो उनके कुलगुरू महर्षि वशिष्ठ ने नंदिनी गाय की सेवा करने का सुझाव दिया था। महाराज दिलीप में अपनी पत्नी सहित नंदिनी की सेवा की और उसके उनके यहां महाप्रतापी पुत्र रघु उत्पन्न हुए। इससे रघुकुल वंश चला। घर में जिस दिशा में वास्तु दोष है उस दिशा में बछड़े सहित गौ माता का फोटो अथवा चित्र अवश्य स्थापित करें।

कामधेनु गाय का बछड़ा सहित चित्र अथवा फोटो साउथ वेस्ट (नैऋत्य) में लगाने से घर के कार्य में स्थिरता आती है। दक्षिण में लगाने से गृह स्वामी के प्रभाव में वृद्धि होती है। आग्नेय कोण में गौ माता का फोटो लगाने से महिला सदस्य घर में प्रसन्न रहती हैं। पूर्व दिशा में यदि कामधेनु गाय का चित्र का फोटो लगा होगा वहां से दरिद्रता समाप्त हो जाएगी।  ईशान दिशा में कामधेनु गाय का चित्र लगाने से संतान से प्रसन्नता मिलती है। ईश्वर के प्रति ध्यान लगता है और घर में लक्ष्मी विराजमान रहती हैं।

प्रधानमंत्री 16 जुलाई को उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे

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File Photo

New Delhi – प्रधानमंत्री  मोदी 16 जुलाई, को उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे और सुबह लगभग 11:30 बजे जालौन जिले की उरई तहसील के कैथेरी गांव में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे।

केन्द्र सरकार देश भर में कनेक्टिविटी को बेहतर करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसकी एक प्रमुख विशेषता सड़क के बुनियादी ढांचे में सुधार लाने की दिशा में काम करना है। इसी कड़ी में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में प्रधानमंत्री द्वारा 29 फरवरी, 2020 को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया था। इस एक्सप्रेसवे का काम 28 महीने के भीतर पूरा कर लिया गया है और अब इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा।

कुल 296 किलोमीटर लंबे इस चार लेन वाले एक्सप्रेसवे का निर्माण उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीईआईडीए) के तत्वावधान में लगभग 14,850 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है और आगे चलकर इसे छह लेन तक भी विस्तारित किया जा सकता है। यह एक्सप्रेसवे चित्रकूट जिले में भरतकूप के पास गोंडा गांव में राष्ट्रीय राजमार्ग-35 से लेकर इटावा जिले के कुदरैल गांव तक फैला हुआ है, जहां यह आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के साथ मिल जाता है। यह एक्सप्रेसवे सात जिलों यानी चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, औरैया और इटावा से होकर गुजरता है।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे इस इलाके की कनेक्टिविटी में सुधार के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगा, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय लोगों के लिए हजारों रोजगार का सृजन होगा। बांदा और जालौन जिलों में इस एक्सप्रेसवे के समीप औद्योगिक कॉरिडोर बनाने का काम पहले ही शुरू हो चुका है।

 

इंटरनेशनल गौ तस्कर अकबर बंजारा की असम से मेरठ तक अरबों की अवैध संपत्तियां जब्त करेगी यूपी पुलिस

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यूपी पुलिस की जांच में मेरठ के इंटरनेशनल गौतस्कर अकबर बंजारा व उसके अपराधी भाईयों की सैकड़ों करोड़ की संपत्ति का खुलासा हुआ है। अकबर बंजारा व उसका भाई सलमान कुछ माह पहले असम पुलिस की हिरासत के दौरान हुए उग्रवादी हमले में मारे गए थे। पुलिस अब असम से मेरठ तक फैलीं अकबर बंजारा गैंग की अवैध संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई में जुटी है।

मेरठ के फलावदा टाउन के रहने वाला अकर बंजारा व उसके भाई सलमान-शमीम समुद्र के रास्ते गौवंशीय पशुओं का मीट बंग्लादेश आदि देशों को सप्लाई करते थे। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से भी अकबर बंजारा के कनेक्शन बताए जाते थे। 13 अप्रैल को मेरठ पुलिस ने गौकशी के मामले में मेरठ पुलिस ने अकबर बंजारा, सलमान व शमीम को गिरफ्तार किया था। कोर्ट में पेशी के बाद तीनों अपराधी जेल भेज दिए गए थे .

पुलिस के मुताबिक, अकबर बंजारा का रैकेट मेरठ से असम-बंग्लादेश तक फैला था। असम पुलिस ने अकबर बंजारा पर दो लाख का इनाम घोषित कर रखा था। गिरफ्तारी की खबर मिलने पर असम पुलिस बी-वारंट पर अकबर-सलमान को अपने साथ ले गई थी। 18 अप्रैल को असम के कोकराझार में पुलिस कस्टडी के दौरान हुए उग्रवादी हमले में गौ तस्कर अकबर बंजारा व उसका भाई सलमान मारे गए थे। दोनों भाईयों की मौत के बाद भी बंजारा गैंग खत्म नहीं हुआ है। गैंग के बाकी सदस्य अभी भी अपराधों में लिप्त बताए जाते हैं।

पुलिस की जांच में पता लगा है कि मेरठ के शास्त्री नगर इलाके में अकबर बंजारा की आलीशान कोठी है। इसके अलावा उसकी 155 बीघा जमीन बहसूमा में, 20 बीघा महलका,  20 बीघा मारवाड़ी,  18-18 बीघा जमीन नारनौल व फलावदा में बताई गई हैं। असम में बंग्लादेश सीमा पर अकबर का फार्म हाउस भी होने की जानकारी सामने आई है। मेरठ के एसपी ग्रामीण केशव कुमार ने मीडिया को बताया कि अकबर की अवैध तरीके से जुटाई गईं अरबों की संपत्तियां पुलिस ने चिन्हित कर ली हैं। पुलिस अकबर और उसके भाईयों के खिलाफ गैंगस्टर का केस दर्ज कर उनकी संपत्तियां जब्त करने की कार्रवाई में जुटी है।

अकबर बंजारा व उसके दो भाइयों को मेरठ पुलिस ने गौ तस्करी के मामले में अरेस्ट किया था, उन पर असम पुलिस ने पहले से दो लाख का इनाम घोषित कर रखा था, अकबर व सलमान के मारे जाने के बाद मेरठ से असम तक फैलीं उनकी अवैध संपत्तियां पुलिस के निशाने पर हैं।- फाइल फोटो