सवालों के घेरे में न्याय व्यवस्था
- आशीष वशिष्ठ

*– डॉ.नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी*

संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक विश्व जनसंख्या संभावना रिपोर्ट सोमवार (14 नवंबर) को विश्व जनसंख्या दिवस पर प्रकाशित हुई थी। इसमें ये सभी भविष्यवाणियां की गई हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्तमान जनसंख्या वृद्धि दर 1950 के बाद से सबसे कम है। 2020 में जनसंख्या वृद्धि दर 1 प्रतिशत से भी कम थी।
दुनिया की आबादी को 700 करोड़ से 800 करोड़ होने में कुल 12 साल लगे। अब इस आबादी को 800 से बढ़ाकर 900 करोड़ करने में 15 साल लगेंगे। यानी साल 2037 में 900 करोड़ आबादी पहुंच जाएगी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके कारण विश्व की जनसंख्या वृद्धि दर धीमी हो गई है।
ब्रिटिश अर्थशास्त्री थॉमस रॉबर्ट माल्थस ने जनसंख्या वृद्धि पर एक सिद्धांत प्रतिपादित किया। उसका नाम माल्थस थ्योरी है। माल्थस के सिद्धांत के अनुसार जनसंख्या प्रत्येक 25 वर्ष में दोगुनी हो जाती है। जबकि संसाधन सामान्य दर से बढ़ते हैं तो जनसंख्या वृद्धि दर दोगुनी हो जाती है। उदा. यदि जनसंख्या 2 से 4 और 4 से 8 हो जाती है, संसाधन 2 से 3 और 3 से 4 हो जाता है।
जनसंख्या वृद्धि के प्रभाव
माल्थस के सिद्धांत के अनुसार यदि जनसंख्या तेजी से बढ़ती है तो संसाधन कम होने लगते हैं। इससे भोजन और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव पड़ता है। माल्थस का कहना है कि ऐसी स्थिति में जनसंख्या नियंत्रण के लिए स्वतः ही प्राकृतिक घटनाएं घटित होती हैं। उदा. जनसंख्या को सूखा, महामारी, युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं जैसी घटनाओं द्वारा नियंत्रित किया जाता है। हालाँकि, माल्थस के सिद्धांत की कई बार आलोचना की गई है।
जनसंख्या वृद्धि के पीछे कारण
आशीष वशिष्ठ का कॉलम/ बात कुछ ऐसी है…
कोरोना महामारी के दौर में ऑनलाइन पढ़ाई ने बच्चों को मोबाइल फोन का गुलाम बना दिया। अब बच्चों की आदत इतनी बिगड़ गई है कि कुछ देर के लिए उन्हें मोबाइल फोन न मिले तो उनमें चिड़चिड़ापन, बेचैनी, घबराहट, गुस्सा, व्यवहार में आक्रामकता, बातचीत ही बंद कर देना या खाना छोड़ देने जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। स्मार्ट फोन के हाथ में आते ही उनका मूड ठीक हो रहा है। मोबाइल की लत से बच्चों की दैनिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
स्कूल से आते ही बच्चे मोबाइल फोन में ही लगे रहते हैं। इससे आंखों पर बुरा असर तो पड़ ही रहा है, मानसिक विकार भी आ रहे हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार जागरूक अभिभावक तो काउंसलिंग करवा रहे हैं, लेकिन कुछ इन लक्षणों को अनदेखा कर रहे हैं। स्कूल बंद होने से ऑनलाइन पढ़ाई का फायदा हुआ था, लेकिन अब मोबाइल की लत नुकसानदायक साबित हो रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों और किशोरों में मोबाइल की लत मानसिक रोगी बना सकता है। ऐसे में अभिभावक को बहुत अधिक सावधान रहने की जरूरत है। मोबाइल फोन पर बहुत अधिक गेम खेलना, दिनभर वीडियो देखते रहना या इसका किसी भी रूप में बहुत अधिक प्रयोग, उनके स्वास्थ्य के लिए अति नुकसानदायक है।
डाक्टरों के अनुसार मोबाइल ज्यादा इस्तेमाल करने से बच्चों में डिप्रेशन, अनिद्रा और चिड़चिड़ापन जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं। बच्चों में सिर और आंखों में दर्द, भूख न लगना, आंखों की रोशनी कम होना, गर्दन में दर्द जैसी शारीरिक बीमारियां हो रहीं हैं। वहीं अत्यधिक मोबाइल इस्तेमाल से बच्चों में अवसाद और निराशा तेजी बढी है। बच्चे आभासी दुनिया को ही वास्तविक दुनिया समझ बैठे हैं। साथ ही इनको ई-स्पोर्ट के चलते अन्य शारीरिक बीमारियां भी देखने में मिल रही हैं। इसके अलावा इंटरनेट पर फैली अश्लीलता इनके मन मस्तिष्क को को दूषित कर रही है।
छोटे-छोटे बच्चे और किशोर जिस तरह से जघन्य अपराधों में लिप्त होते जा रहे हैं, वह गंभीर चिंता का विषय है। जाहिर है, सोशल मीडिया, इंटरनेट और इलेक्ट्रानिक गैजेट के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के दुष्प्रभाव हैं ये सब। यही कारण है कि बच्चों में नैतिकता की गिरावट साथ ही आदर्श व्यवहार की कमी बड़े रूप में देखी जा सकती है। मोबाइल का कम इस्तेमाल ठीक है, अन्यथा यह लत है। मूड ठीक करने के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल भी ऐसा ही है, जैसे ड्रग्स व्यवहार को प्रभावित करती है।
चिकित्सकों की माने तो बच्चों में मोबाइल की लत को दूर करने के लिए परिवार में अनुशासन जरूरी है। बच्चों को एक निर्धारित समय के लिए मोबाइल फोन के इस्तेमाल के लिए कहा जा सकता है। बच्चों को आउट डोर या इंडोर खेलकूद या दूसरी रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें। पेरेंट्स बच्चों को घर से बाहर घूमने टहलने ले जाएं। अच्छी कहानियां सुनाएं। मोबाइल की आदत को छुड़ाने के लिए उन पर प्रतिबंध भी लगाना जरूरी है।
अभिभावक स्वयं भी मोबाइल के इस्तेमाल में सावधानी बरतें। दिनों दिन गंभीर होती इस समस्या के प्रति अभिभावकों को ध्यान देना होगा कि बच्चे इंटरनेट और मोबाइल का उपयोग कितना और किस उद्देश्य से कर रहे हैं। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो समाज के लिए यह किसी आपदा से कम नहीं होगा। (युवराज)




देहव्यापार के नए ठिकाने स्पा सेंटर
– आशीष वशिष्ठ
जानकारों के मुताबिक, मोटा मुनाफा मिलने की उम्मीद में एस्कोर्ट सर्विस प्रोवाइडरों ने स्पा सेंटरों की शुरुआत की थी। क्योंकि एस्कोर्ट सर्विस प्रोवाइडरों को कॉल गर्ल्स प्रोवाइड कराने व नाइट शिफ्ट में ज्यादा खर्चा आने की वजह से एस्कॉर्ट सर्विस का धंधा फ्लॉप होने लगा था। वहीं मुनाफा भी ज्यादा नहीं थी। जबकि स्पा एंड मसाज सेंटर की आड़ में सेक्स रैकेट चलाने में उन्हें मोटा मुनाफा मिलता था।
स्पा एंड मसाज सेंटरों के संचालक ग्राहकों को लुभाने के लिए आयुर्वेद पद्धित का भी झांसा देते हैं। इसके लिए उन्होंने इस तरह के होर्डिंग्स भी स्पा के बाहर लगाए रहते हैं। वहीं संचालकों ने अपने स्पा सेंटर के नाम भी आयुर्वेद पद्धति के मिलते जुलते नाम से रख रखे हैं, जिससे किसी को भनक न लगे कि यहां जिस्मफरोशी का धंधा चल रहा है।
गत अक्टूबर को कानपुर पुलिस ने में दो स्पा सेंटरों में छापा डालकर 6 लड़कियों और चार युवकों को पकड़ा। वाराणसी पुलिस ने पांडेयपुर क्षेत्र में स्पा सेंटर की आड़ में देह व्यापार के धंधे का भंड़ाफोड़ कर चार युवतियों समेत पांच लोग गिरफ्तार किये।
बीती 1 नवंबर को राजस्थान के अलवर में पुलिस ने एक मॉल में चलने वाले स्पा सेंटरों पर छापा मारकर 21 युवक-युवती पकड़े, इनमें अधिकतर कॉलेज के छात्र थे। इंदौर पुलिस ने बीती 15 सितंबर को स्पा सेंटर की आड़ में सेक्स रैकेट को पकड़ा। पुलिस ने छापा मार 12 लड़कों और 6 लड़कियों को गिरफ्तार किया। बीती 11 अगस्त को हरियाणा के गुरुग्राम में एक स्पा सेंटर की आड़ में सेक्स रैकेट का पुलिस ने भंडाफोड़ करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया।
पिछले साल 14 फरवरी यूपी की राजधानी लखनऊ पुलिस ने गाजीपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई मराज पार्लरों में छापेमारी कर 12 लोगों को गिरफ्तार किया। अप्रैल 2017 में लखनऊ के हुसैनगंज क्षेत्र में एक मसाज पार्लर में पुलिस ने छापेमारी में 17 को गिरफ्तार किया। नवम्बर 2017 को लखनऊ पुलिस ने पाॅश कालोनी गोमती नगर में संचालित आयुर्वेदिक स्पा और मसाज पार्लर की आड़ में संचालित सेक्स रैकेट का पर्दाफाश किया था।
बीते साल 28 सितम्बर को नोएडा में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के दिल्ली में तैनात साइंटिस्ट का मसाज करने के दौरान अपहरण हो गया था। आरोपियों ने साइंटिस्ट को छोड़ने की एवज में फिरौती मांगी थी। नोएडा पुलिस ने तीन अपहरणकर्तााओं को गिरफ्तार किया। मार्च 2018 को नोएडा पुलिस ने स्पा और मसाज पार्लर की आड़ में सेक्टर-18 में एक सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया। पुलिस ने करीब दो दर्जन लोगों को हिरासत में भी लिया था।
देह व्यापार के साथ मसाज पार्लर की आड़ में कई गोरखधंधे हो रहे है। अखबारों में हाई प्रोफाइल लेडीज का मसाज करें जैसे विज्ञापन पढ़ कर कई बेरोजगर युवक इसके जाल में फंसकर अपना पैसा और समय बर्बाद कर रहे हैं। युवतियों को यह कहकर पार्लर ज्वाइन कराया जाता है कि उन्हें अच्छी सैलरी मिलेगी और धीरे-धीरे पैसे का लालच देकर उन्हें देह व्यापार की दलदल में धकेल दिया जाता है।
ऑनलाइन ठग भी स्पा और मसाज के बहाने लोगों को आर्थिक ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसे कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं। स्पा सेंटर के पीछे सफेदपोश, पुलिस और अपराधियों का एक संगठित नेटवर्क है। देहव्यापार के नए अड्डो स्पा सेंटरों पर पुलिस प्रशासन को प्रभावी कार्रवाई कर तत्काल लगाम लगाने की जरूरत है। (युवराज)