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रानी मुखर्जी एमई+ईएम बेज पैंट सूट, पायल खंडेलवाल ब्लैक शर्ट और गुच्ची शूज़ में लगी खूबसूरत

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मुम्बई। मेलबर्न के इंडियन फिल्म फेस्टिवल के मास्टरक्लास सत्र में रानी मुखर्जी ने काली धारियों वाले आकर्षक एमई+ईएम बेज पैंट सूट और पायल खंडेलवाल की काली शर्ट के साथ सुरुचिपूर्ण ढंग से पहनकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। अपने पहनावे के क्लासिक टच के साथ पूरा करते हुए, रानी ने चिकने काले गुच्ची जूते पहने। अभीनेत्री की जटिल शैली पसंद ने सहजता से क्लासिक लूक को कैरी किया जिसमे वे बेहद खुबसूरत नज़र आई।

लिंक: https://www.instagram.com/p/CvwUfyANDx8/

कृषि भवन में केंद्रीय पशुपालन मंत्री परषोत्तम रूपला ने पशु वैक्सीन निर्माताओं से वैक्सीन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया

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दिल्ली – आज कृषि भवन में केंद्रीय पशुपालन मंत्री परषोत्तम रूपला ने पशु वैक्सीन निर्माताओं से वैक्सीन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया साथ ही वैक्सीन उत्पादन की स्थिति की समीक्षा की, वैक्सीन परीक्षण में सामंजस्य स्थापित करने हेतु दिए गए बहुमूल्य सुझाव भी दिए।

Lok Sabha Live – Addressing Finance Minister Nirmala Sitaraman

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No Confidence Motion Debate: ओवैसी ने पूछा- कहां गया सरकार का जमीर?

अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने जयपुर-मुंबई एक्सप्रेस ट्रेन में गोलीकांड का जिक्र करते हुए मोदी सरकार सवाल किया कि क्या ये बहुसंख्यक समुदाय के अतिवाद और कट्टरपंथ की मिसाल नहीं है. अगर है तो सरकार इस पर क्या करेगी. ओवैसी ने कहा, कहां है सरकार का जमीर? नूंह में 750 मुसलमानों के घर बिना किसी प्रक्रिया के गिरा दिए गए क्योंकि वे मुसलमानों के थे. पंजाब-हरियाणा के हाई कोर्ट ने कहा कि ये जातीय सफाया है. ओवैसी ने कहा कि इस मुल्क में मुसलमानों के खिलाफ नफरत का माहौल तैयार कर दिया गया है.

https://www.youtube.com/watch?v=DVhcKSxAEgw

Cow Economy – गोबर से बने कण्डे, गो काष्ठ, वर्मी कम्पोस्ट एवं गोबर पेंट के लिए शुरू किया गया शोरूम, जानें कितनी होती है कमाई

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गोमूत्र एवं गोबर से बने उत्पाद की बिक्री से कमाई देश में गोवंश के संरक्षण तथा किसानों एवं पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएँ शुरू की गई हैं। इसमें छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई “गोधन न्याय योजना” प्रमुख है। योजना के अंतर्गत पशु पालकों एवं ग्रामीणों से 2 रुपए किलो की दर से गोबर एवं 4 रुपए प्रति लीटर की दर से गोमूत्र की खरीदी की जा रही है। सरकार द्वारा गोठानों के माध्यम से खरीदे गए गोबर एवं गोमूत्र से महिला स्व सहायता समूह द्वारा विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाते हैं। जिससे न केवल पशुपालकों की आमदनी बढ़ी है वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार बढ़ा है।

इस कड़ी में छत्तीसगढ़ में अम्बिकापुर की महिलाओं ने नया बिजनेस आइडिया अपनाते हुए गोबर से निर्मित उत्पादों की बिक्री के लिए अंबिकापुर में एक्सक्लूसिव शोरूम शुरू किया गया है। इसे गोधन एम्पोरियम का नाम दिया गया है। इस एम्पोरियम में वर्मी कम्पोस्ट के साथ-साथ गौ काष्ठ, अगरबत्ती, कण्डा और गोबर से निर्मित पेंट की बिक्री की जा रही है।

गोबर से बने उत्पाद बेचकर हुई लाखों रुपए की आमदनी गोधन एम्पोरियम से अब तक तीन वर्षों में कुल 12 लाख 49 हजार रूपए की आमदनी हो चुकी है। वर्ष 2020-21 में 4 लाख 50 हजार, वर्ष 2021-22 में 4 लाख 87 हजार और वर्ष 2022-23 में 3 लाख 12 हजार रूपए की आय हुई है। यहां कार्यरत महिला सदस्यों ने बताया कि यहां से हर महीने समूह की महिलाएं एम्पोरियम से लगभग 40 हजार रूपए कमा रही हैं। यहां गौठान महिला समूह की दो महिला सदस्य बारी-बारी से तैनात रहती हैं। अन्य दुकानों की तरह सप्ताह में एक दिन मंगलवार को एम्पोरियम में अवकाश भी रहता है।

यह एम्पोरियम अम्बिकापुर शहरी गौठान का हिस्सा है। इसे गौठान से जुड़ी महिला समूह ही संचालित करती है, समूह की महिलाएं अम्बिकापुर सिटी लेवल फेडरेशन की सदस्य हैं, यह फेडरेशन अम्बिकापुर शहर में स्वच्छता के लिए काम कर रहा है। अब यहां गोबर से पेन्ट बनाने और दोना पत्तल तैयार करने की यूनिट भी शुरू कर दी गई है। गौठान समूहों की सदस्यों को लाभांश के रूप में हर माह 6 से 7 हजार रुपए मिल जाता है।

रोज़ाना आते हैं 50 से 60 ग्राहक किसी छोटे शॉपिंग मॉल जैसे दिखने वाले इस अनोखे एम्पोरियम में पूजा-पाठ, हवन आदि के लिए अंबिकापुर शहर के लोग गौ काष्ठ, अगरबत्ती खरीदते हैं। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में लिट्टी-चोखा के शौकिन गोबर के कंडे यहां से खरीदीकर लिट्टी-चोखा तैयार करते हैं। वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग शहरी क्षेत्र के लोग घरों के गमलों के साथ ही अन्य बागवानी कार्यों के लिए कर रहे हैं।

गोबर पेंट में तापमान को रोकने की क्षमता के कारण यहां इसकी बिक्री भी हो रही है। इस एम्पोरियम की लोकप्रियता लगातार बढ़ते जा रही है। वर्तमान में यहां प्रतिदिन 40 से 60 ग्राहक का आना-जाना होता है। गोबर के उत्पादों की लोकप्रियता को देखते हुए यहां और भी बिक्री बढ़ने की संभावना है।

Cow Economy – छत्तीसगढ़ सरकार ने गोबर बेचने वाले किसानों एवं पशुपालकों को किया 5 करोड़ 60 लाख रुपये का भुगतान

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Cow Economy – गोबर खरीदी का भुगतान पशुपालन को लाभ का धंधा बनाने एवं किसानों कि आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा गोबर एवं गोमूत्र की खरीदी पर जोर दिया जा रहा है। इस कड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाई जा रही “गोधन न्याय योजना” ने देश में अपना एक अलग स्थान हासिल कर लिया है। योजना के अंर्तगत सरकार ग्रामीण, किसान एवं पशुपालक से गोबर की ख़रीद का उससे विभिन्न उत्पाद तैयार कर रही है।
जिससे ग्रामीणों को रोजगार तो मिल ही रहा है बल्कि उनकी आमदनी में भी वृद्धि हुई है। राज्य में गोबर बेचने वाले ग्रामीण, किसान एवं पशुपालकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इस कड़ी में राज्य के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने 5 अगस्त शनिवार के दिन गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 73वीं किश्त के रूप में 15 करोड़ 29 लाख रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की। 14 से 31 जुलाई के दौरान खरीदे गये गोबर का किया गया भुगतान सरकार द्वारा जारी की गई इस राशि में ग्रामीण, पशुपालक किसानों को गोबर बेचने के बदले में 5 करोड़ 60 लाख रुपये का भुगतान तथा गौठान समितियों एवं महिला स्व–सहायता समूहों को 9 करोड़ 69 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। गोबर खरीदी में भुगतान की जाने वाली राशि में से 60 से 70 प्रतिशत राशि गौठान समितियों द्वारा स्वयं की जमा पूंजी से की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि गौठानों में गोबर खरीदी में स्वावलंबी गोठानों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। गोबर विक्रेताओं को होने वाले 5.60 करोड़ रुपये के भुगतान में से मात्र 2.29 करोड़ रुपये का भुगतान शासन की ओर से किया गया। जबकि 3.31 करोड़ रुपये का भुगतान स्वावलंबी गौठान स्वयं की राशि से किया। राज्य में 10,278 गौठान निर्मित एवं संचालित हैं, जिसमें से 5985 गौठान पूरी तरह से स्वावलंबी हो चुके हैं। स्वावलंबी गौठानों ने अब तक 70.27 करोड़ रुपये का गोबर पशुपालक किसानों से स्वयं की राशि से किया है।

सरकार ने अभी तक किसानों से खरीदा 255 करोड़ रुपये का गोबर गोधन न्याय योजना के तहत सरकार द्वारा तैयार किए गये गौठानों में अब 128.34 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी हो चुकी है, जिसमें से 125.54 लाख क्विंटल गोबर खरीदी की एवज में गोबर विक्रेताओं को 250.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। अभी 5.60 करोड़ रुपये के भुगतान के बाद गोबर खरीदी के एवज में अब तक राशि 255.68 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। वहीं गोधन न्याय योजना के तहत हितग्राहियों को अभी तक 541.66 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

Cow Economy -सरकार डेयरी फार्म खोलने के लिए दे रही है 75 प्रतिशत तक की सब्सिडी, अभी आवेदन करें

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देशी गौपालन प्रोत्साहन योजना के लिए अनुदान हेतु आवेदन पशुपालन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ ही किसानों की दैनिक आय का अच्छा ज़रिया भी है। पशुपालन के महत्व को देखते हुए ही सरकार द्वारा पशुपालन क्षेत्र में कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं। इस कड़ी में बिहार सरकार द्वारा राज्य में देशी गौपालन को बढ़ावा देने के लिए “देशी गौपालन प्रोत्साहन योजना” शुरू की गई है।
योजना के अंर्तगत लाभार्थी व्यक्ति को 02, 04, 15 एवं 20 गाय की डेयरी इकाई स्थापना करने पर अनुदान दिया जाएगा। पशु एवं मत्स्य संसाधन विकास, बिहार सरकार द्वारा योजना को राज्य सभी जिलों में लागू किया गया है, जिससे सभी जिलों के इच्छुक व्यक्ति योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है, इच्छुक व्यक्ति योजना का लाभ लेने के लिए 01 सितंबर 2023 तक ऑनलाइन आवेदन कर योजना का लाभ ले सकते हैं।
देशी गौपालन प्रोत्साहन योजना क्या है? इस योजना का मुख्य उद्देश्य बिहार राज्य में देशी गायों के सम्वर्द्धन हेतु राज्य के सभी वर्गों के कृषकों / पशुपालकों / बेरोजगार युवक–युवतियों के लिए स्व–रोजगार के अवसर सृजित कर उन्हें विकास के मुख्यधारा में शामिल करना है ताकि उनका आर्थिक एवं सामाजिक रूप से उत्थान हो सके एवं राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें। डेयरी फ़ार्म शुरू करने के लिए कितना अनुदान (Subsidy) दिया जाएगा? इस योजना के अन्तर्गत देशी नस्ल के 02 एवं 04 देशी गाय/ बाछी–हिफर की डेयरी इकाई की स्थापना पर अत्यंत पिछड़ा वर्ग / अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। वहीं अन्य सभी वर्गों के व्यक्तियों को लागत मूल्य का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।
इसके अलावा 15 एवं 20 देशी गाय / बाछी–हिफर (साहिवाल, गिर, थारपारकर) की डेयरी इकाई की स्थापना पर सभी वर्गों के लिए 40 प्रतिशत अनुदान देने की व्यवस्था की गयी है।
2 देशी गाय/हिफर की डेयरी स्थापित करने के लिए विभाग द्वारा 2,42,000 रुपए की लागत निर्धारित की गई है। जिसपर अत्यंत पिछड़ा वर्ग / अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को अधिकतम 1,81,500 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। वहीं अन्य सभी वर्गों के किसानों को अधिकतम 1,21,000 रुपये का अनुदान देय होगा।
4 देशी गाय/हिफर की डेयरी स्थापित करने के लिए विभाग द्वारा 5,20,000 रुपए की लागत निर्धारित की गई है। जिसपर अत्यंत पिछड़ा वर्ग / अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को अधिकतम 3,90,000 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। वहीं अन्य सभी वर्गों के किसानों को अधिकतम 2,60,000 रुपये का अनुदान देय होगा।

15 एवं 20 गाय की डेयरी के लिए कितना अनुदान दिया जाएगा?

योजना के तहत 15 देशी गाय/हिफर की डेयरी स्थापित करने के लिए विभाग द्वारा 20,20,000 रुपए की लागत निर्धारित की गई है। जिस पर सभी वर्ग के व्यक्तियों को 40 प्रतिशत का अनुदान दिया जाएगा जो अधिकतम 8,08,000 रुपये है। वहीं 20 देशी गाय/हिफर की डेयरी स्थापित करने के लिए विभाग द्वारा 26,70,000 रुपए की लागत निर्धारित की गई है। जिस पर सभी वर्ग के व्यक्तियों को 40 प्रतिशत का अनुदान दिया जाएगा जो अधिकतम 10,68,000 रुपये है।
यदि शासन द्वारा निर्धारित लागत से डेयरी की लागत अधिक होती है तो ऐसी स्थिति में होने वाले अधिक खर्च का वहन लाभार्थी को ही करना होगा। योजना अंतर्गत किसी भी इकाई की स्थापना अथवा क्रय परियोजना अंतर्गत निर्धारित लागत व्यय से अधिक होने पर भी सब्सिडी का भुगतान परियोजना शर्त के आधार पर ही किया जायेगा।
देशी गौपालन प्रोत्साहन योजना का लाभ कौन ले सकते हैं? बिहार सरकार द्वारा योजना को राज्य के सभी जिलों में लागू किया गया है। जिससे राज्य के सभी इच्छुक व्यक्ति योजना का लाभ लेने के लिये आवेदन कर सकते हैं।
योजना में राज्य के सभी वर्गों के भूमिहीन / कृषकों / लघु कृषक / सीमांत कृषक / गरीबी रेखा से नीचे बसर करने वाले कृषक / शिक्षित बेरोजगार युवक–युवतियों को शामिल किया गया है। इस योजना के आवेदकों की उम्र 55 वर्ष से अधिक नहीं होना चाहिए।
वहीं सरकार द्वारा इन आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी। विभाग द्वारा प्रशिक्षित आवेदकों को, दुग्ध सहकारिता समिति के सदस्यों को, जीविका के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ें व्यक्तियों को क्रमानुसार प्राथमिकता दी जायेगी।
” योजना के तहत 04 देशी गाय / बाछी – हिफर की इकाई की स्थापना हेतु कम से कम 5 (पांच) कठ्ठा तथा 15 एवं 20 देशी गाय / बाछी–हिफर की डेयरी इकाई हेतु कम से कम 10 (दस) कठ्ठा अपनी जमीन या लीज की जमीन होना चाहिए ताकि वे हरे चारे का उत्पादन कर सकें। ऋण लेने वालों को भी मिलेगा योजना का लाभ इस योजना के तहत निर्धारित सब्सिडी लाभूकों को दोनों ही स्थिति में दी जाएगी, यदि लाभुक बैंक से ऋण ले अथवा स्वलागत से डेयरी की स्थापना करें। स्वलागत से डेयरी इकाई की स्थापना करने वाले लाभूकों को योजना लागत की पूर्ण राशि उपलब्ध होने संबंधी प्रमाण संबंधित क्रियान्वयन एजेन्सी यथा जिला गव्य विकास पदाधिकारी के कार्यालय में समर्पित करना होगा। योजना के पूर्ण क्रियान्वयन (Asset creation) के पश्चात् ही सब्सिडी की राशि का भुगतान किया जायेगा।
पशु क्रय के पश्चात् लाभूक एवं क्रय समिति के सदस्यों का एक संयुक्त फोटोग्राफी की जाएगी। दधारु मवेशी के क्रय के पश्चात् मवेशी का डाटा ईयर टैग निश्चित रूप से लगाना होगा तथा जिला गव्य विकास पदाधिकारी को यह प्रमाण पत्र देना होगा कि मवेशी में ईयर टैग लगा दिया गया है। अनुदान पर देशी गाय की डेयरी स्थापना के लिए आवेदन कहाँ करें? बिहार सरकार द्वारा योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। इच्छुक व्यक्ति गव्य विकास निदेशालय, बिहार की वेबसाइट https://dairy.bihar.gov.in/Default.aspx पर 1 सितम्बर 2023 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। वहीं योजना की अधिक जानकारी के लिए अपने ज़िले के गव्य विकास पदाधिकारी कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। ” 

 

 

Raksha Bandhan 2023: रक्षाबंधन पर भद्रा का साया,ऐसे में रात 9 से 31 अगस्त को सुबह 7 बजे तक बहनें भाई को राखी बांध सकती हैं।

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Raksha Bandhan 2023: भाई बहन के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन इस साल 30 अगस्त 2023 को है। रक्षाबंधन का यह पावन पर्व हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखियां बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। वहीं भाई प्रेमरूपी रक्षा धागा को बंधवा कर बहन की उम्र भर रक्षा करने का संकल्प लेते हैं। साथ ही बहनों को उपहार देते हैं। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। यह पर्व बहुत ही शुभ माना जाता है, लेकिन इस साल रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया है और धार्मिक शास्त्रों के अनुसार भद्राकाल में भाईयों को राखी नहीं बांधनी चाहीए। इस समय राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि इस साल रक्षाबंधन पर भद्रा कब से कब तक है और राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या है…
रक्षाबंधन पर भद्रा का साया
इस साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त को है, लेकिन इस दिन भद्रा का साया है। कहा जाता है कि यदि श्रावण पूर्णिमा तिथि पर भद्रा का साया हो तो भद्राकाल तक राखी नहीं बांधी जाती है। उसके समापन के बाद ही राखी बांधनी चाहिए, क्योंकि भद्रा काल में राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता है।
रक्षाबंधन 2023 पर भद्रा का समय
इस साल सावन महीने की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 30 अगस्त को सुबह 10 बजकर 58 मिनट से हो रही है। इसका समापन 31 अगस्त को सुबह 07 बजकर 05 मिनट पर होगा। 30 अगस्त को पूर्णिमा तिथि की शुरुआत से ही यानी सुबह 10 बजकर 58 मिनट से भद्रा शुरू हो जा रही है और रात 09 बजकर 01 मिनट तक है।
ऐसे में 30 अगस्त को भद्रा के कारण राखी बांधने का मुहूर्त दिन में नहीं है। इस दिन रात में 9 बजे के बाद राखी बांधने का मुहूर्त है। यह मुहूर्त अगले दिन 31 अगस्त को 07 बजकर 05 मिनट तक है। इस समय में भद्रा नहीं है। ऐसे में रात 9 से 31 अगस्त को सुबह 7 बजे तक बहनें भाई को राखी बांध सकती हैं।

क्या होती है भद्रा?
रक्षाबंधन के पर्व पर भद्राकाल का विशेष ध्यान रखा जाता है। भद्रा में राखी न बंधवाने के पीछे एक पौराणिक मान्यता प्रचलित है। मान्यता के अनुसार लंकापति राजा रावण ने अपनी बहन से भद्रा के समय ही राखी बंधवाई थी। भद्राकाल में राखी बांधने के कारण ही रावण का सर्वनाश हुआ था। इसी मान्यता के आधार पर जब भी भद्राकाल होता है तो उस समय बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर राखी नहीं बांधती हैं। इसके अलावा भद्राकाल में भगवान शिव तांडव नृत्य करते हैं इस कारण से भी भद्रा में शुभ कार्य नहीं किया जाता है।

Krishna Janmashtami – इस साल कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी 2023

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Krishna Janmashtami Date: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, जन्माष्टमी का त्योहार कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन मनाया जाता है. इस दिन को भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है. जन्माष्टमी का त्योहार पूरे भारत में धूम-धाम से मनाया जाता है. इस त्योहार को कृष्ण जन्माष्टमी, श्री जयंती, गोकुलाष्टमी और श्रीकृष्ण जयंती जैसे अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है. इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल गोपाल स्वरूप की पूजा होती है.

इस साल कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी

कृष्ण जन्मोत्सव के दिन लोग व्रत रखते हैं और रात में 12 बजे कान्हा के जन्म के बाद प्रसाद वितरण करके अपना व्रत खोलते हैं. इस साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की 6 सितंबर को दोपहर 03 बजकर 37 मिनट से हो रही है और इसका समापन अगले दिन 7 सितंबर की शाम 04 बजकर 14 मिनट पर होगा.

पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म रात्रि 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. इस मान्यता के अनुसार गृहस्थ जीवन वाले 6 सितंबर को जन्मोत्सव मनाएंगे. इसी दिन रोहिनी नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है. वहीं वैष्णव संप्रदाय में श्रीकृष्ण की पूजा का अलग विधान है. इसलिए वैष्णव संप्रदाय में 07 सिंतबर को जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जाएगा.

जन्माष्टमी व्रत और पूजन विधि

जन्माष्टमी व्रत में अष्टमी के उपवास से पूजन और नवमी के पारणा से व्रत की पूर्ति होती है. इस व्रत से एक दिन पहले यानी सप्तमी के दिन हल्का और सात्विक भोजन करना चाहिए. उपवास वाले दिन प्रातः स्नानादि से निवृत होकर सभी देवताओं को नमस्कार करके पूर्व या उत्तर को मुख करके बैठें. अब हाथ में जल, फल और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें. मध्यान्ह के समय काले तिलों का जल छिड़क कर देवकी जी के लिए प्रसूति गृह बनाएं. अब इस सूतिका गृह में सुन्दर बिछौना बिछाकर उस पर शुभ कलश स्थापित करें.

भगवान श्रीकृष्ण के साथा माता देवकी जी की मूर्ति या सुन्दर चित्र की स्थापना करें. देवकी, वासुदेव, बलदेव, नन्द, यशोदा और लक्ष्मी जी इन सबका नाम लेते हुए विधिवत पूजन करें. यह व्रत रात में बारह बजे के बाद ही खोला जाता है. इस व्रत में अनाज का उपयोग नहीं किया जाता. फलहार के रूप में कुट्टू के आटे की पकौड़ी, मावे की बर्फी और सिंघाड़े के आटे का हलवे का सेवन कर सकते हैं.

 

No Confidence Motion: राहुल गांधी ने संसद में उछाला फ्लाइंग किस तो भड़कीं स्मृति ईरानी

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No Confidence Motion Debate: लोकसभा में बुधवार (9 अगस्त 2023) को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने के जब उन्होंने सदन में फ्लाइंग किस उछाला तो हंगामा हो गया. केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने उनकी आलोचना की तो वहीं बीजेपी की महिला सांसदों ने इस पर स्पीकर के पास लिखित शिकायत भी की. यह पूरा मामला क्या है हम आपको इसके बारे में बताएंगे.

बुधवार (9 अगस्त 2023) को लोकसभा में राहुल गांधी विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर भाषण दे रहे थे. अपना भाषण खत्म करने के बाद वो संसद से बाहर निकल गये. उनके जाने के बाद सदन में बोलने के लिए खड़ी हुईं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, ‘मुझ से पहले जिनको यहां बोलने का मौका मिला उन्होंने आज असभ्यता का परिचय दिया है. उन्होंने अपना भाषण खत्म करने के बाद अभद्र व्यवहार किया. उन्होंने संसद में फ्लाइंग किस उछाला जिसमें महिलाएं भी बैठी हुई हैं. ऐसा व्यवहार सिर्फ एक स्त्री द्वेषी (Misogynist Man) व्यक्ति ही कर सकता है. ऐसा गरिमा विहीन आचरण इस देश के सदन में कभी नहीं देखा गया. ये उस खानदान के लक्षण हैं इसको सदन और पूरे देश ने देखा है.’

क्या राहुल गांधी ने वाकई फ्लाइंग किस दिया?
यूबीटी सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने राहुल गांधी का समर्थन कर इसे सामान्य व्यवहार करार दिया. शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “जब राहुल गांधी ने ऐसा किया तब मैं विजिटर गैलरी में ही थी. उन्होंने सहजता में साथी सांसदों के प्रति सिर्फ प्यार के भाव के तौर पर ऐसा किया. बीजेपी को नफरत की आदत हो गई है, इसलिए उसको मोहब्बत रास नहीं आ रही है.”

इंडिया टुडे के मुताबिक राहुल गांधी अपना भाषण खत्म करने के बाद जब संसद से बाहर जाने के लिए उठे तो उनके हाथ से कुछ कागज गिर गये. उन कागजों को उठाने के लिए जब वह नीचे झुके तो बीजेपी सांसद उन पर हंसने लगे. इस पर राहुल गांधी ने जाते-जाते सहजता के साथ स्पीकर टेबल की तरफ फ्लाइंग किस उछाल दिया और फिर वहां से निकल गये.

15 अगस्त के बाद सड़कों से गौ माताओं और मवेशियों को कलेक्टर ऑफिस में छोड़ा जाएगा

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प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष श्री नारायण चंदेल ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि जांजगीर चांपा जिले में 15 अगस्त तक सड़कों पर देखने वाली गौ माताओं और मवेशियों को गौठान में सुरक्षित तथा हिफाजत से रखने का इंतजाम कर ले। उन्होंने कहा कि सड़कों पर डेरा जमाए बैठे मवेशियों के कारण किसानों की फसल खतरे में पड़ रही है। सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है।
मवेशी खेतों में लगी धान की फसल को चर कर बर्बाद कर रहे है। उन्होंने जांजगीर चांपा जिले के प्रशासन को चेतावनी दी है कि 15 अगस्त तक सड़कों पर घूमने वाली गौ माताओं की व्यवस्था कर ले। अन्यथा भाजपा अपने किसान मोर्चा के साथियों के साथ सभी गौ माताओं को एकत्र कर कलेक्टर कार्यालय परिसर सभी थानों में एसडीएम ऑफिस और नगर पालिका परिषद के ऑफिस में ले जाकर छोड़ देंगे।