चलाई ‘रिक्शा रोटी बैंक’ मुहिम
घायल असहाय जानवरों का सहारा हैं अनुराग
गौशाला के लिए सरकार से जमीन की मांग
गौ कथा का भंडारे के साथ समापन
गरमपानी। बेतालघाट ब्लॉक के भद्रगड़ी धाम में पिछले सात दिनों से चल रही गो कथा का मंगलवार को समापन हो गया। व्यास पंडित चंद्रशेखर त्रिपाठी ने सुंदर कथा प्रवचन व भजन से सभी क्षेत्र के लोगों को गो कथा का आनंद लिया। इस कार्यक्रम के दैरान बेतालघाट निवासी राहुल अरोरा द्वारा 700 से अधिक महिलाओं को कंबल वितरण किया गया। 300 से अधिक पुरुषों शाल वितरण कर सम्मानित किया गया, वहीं इस कार्यक्रम के भंडारे में 1500 अधिक लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया गया। कार्यक्रम में भावन अरोरा, तारा सिंह भंडारी, रमेश तिवाड़ी, प्रताप सिंह बोहरा, बालम सिंह बोहरा, शंकर जोशी, जीत सिंह बोहरा, भुवन नेगी, चम्पा जलाल, माया बोहरा, नेहा भंडारी, मुन्नी बोहरा, अनीता बोहरा, खषटी जोशी, गीता जोशी आदि सभी लोग उपस्थित रहे।
आतंक के खिलाफ विश्व को होना होगा एकजुट
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 90वीं इंटरपोल महासभा को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह समय भारत और इंटरपोल दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। भारत 2022 में आजादी के 75 साल मना रहा है। यह हमारी संस्कृति, लोगों और उपलब्धियों का उत्सव है। साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि आतंक के खिलाफ विश्व को एकजुट होना होगा। इंटरपोल महासभा की बैठक में 195 इंटरपोल सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल हैं। इसमें मंत्री, देशों के पुलिस प्रमुख, राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो के प्रमुख और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हैं। इंटरपोल महासभा की बैठक में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने के लिए 2 प्रतिनिधिमंडल भी आए हैं। इसमें पाकिस्तान समेत 195 इंटरपोल सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं।
INTERPOL General Assembly में पीएम के संबोधन की खास बातें
– पीएम मोदी ने कहा कि विविधता और लोकतंत्र को कायम रखने में भारत दुनिया के लिए एक केस स्टडी है। पिछले 99 सालों में इंटरपोल ने 195 देशों में विश्व स्तर पर पुलिस संगठनों को जोड़ा है। यह कानूनी ढांचे में मतभेदों के बावजूद है।
– पीएम मोदी ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में बहादुर लोगों को भेजने में शीर्ष योगदानकर्ताओं में से एक है। अपनी आजादी से पहले भी हमने दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के लिए बलिदान दिया है। भारतीय पुलिस बल 900 से अधिक राष्ट्रीय और 10,000 राज्य कानूनों को लागू करता है।
केदारनाथ में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, छह लोगों की मौत की सूचना, रेस्क्यू शुरू
रुद्रप्रयाग : Kedarnath Helicopter Crash : केदारनाथ में एक हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। हादसे में छह लोगों की मौत की सूचना आ रही है।
हेलीकॉप्टर में छह लोग सवार थे। हादसा गौरीकुंड के पास हुआ है। हेलीकॉप्टर आर्यन कंपनी का बताया जा रहा है। रेस्क्यू में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम लगी हुई है।
केदारनाथ में घना कोहरा
#WATCH | Uttarakhand: A helicopter carrying Kedarnath pilgrims from Phata crashes, casualties feared; administration team left for the spot for relief and rescue work. Further details awaited pic.twitter.com/sDf4x1udlJ
— ANI (@ANI) October 18, 2022
वहीं इस घटना में राहत बचाव के लिए टीमें रवाना हो गई हैं। बताया जा रहा है कि केदारनाथ में घना कोहरा लगा हुआ है। तो इस कारण हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हो सकता है।
2019 में भी केदारनाथ में क्रैश हुआ था हेलीकॉप्टर
वर्ष 2019 में भी केदारनाथ में हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ था। केदारनाथ से यात्रियों को लेकर फाटा के लिए उड़ान भरते समय हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी आने से पायलट को इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी थी और इस दौरान हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था।
हेलीकॉप्टर के लैंडिंग करते समय पीछे का हिस्सा जमीन से टकराने के कारण यह दुर्घटना हुई थी। हेलीकॉप्टर के पायलट समेत छह यात्रियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था।
2013 में आपदा राहत बचाव के दौरान तीन हेलीकॉप्टर हुए थे क्रैश
केदारनाथ में हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की ये पहली घटना नहीं है। साल 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान भी रेस्क्यू करते हुए वायु सेना के एमआइ-17 हेलीकॉप्टर समेत तीन हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुुए थे। इन दुर्घटनाओं में 23 लोगों को जान गंवानी पड़ी थी।
Cow Economy – महिला सशक्तिकरण: पशुपालन के माध्यम से
डॉ प्रगति पटेल, डॉ आदित्य मिश्रा, डॉ आनंद जैन, डॉ दीपिका डी सीजर, डॉ पूर्णिमा सिंह, डॉ अनिल गट्टानी, डॉ संजू मंडल एवं डॉ महावेश हिरा खान ,पशु शरीर क्रिया विज्ञान एवं जैव रसायन विभाग पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय, जबलपुर
– Dr . Rajesh Singh
भारत एक कृषि प्रधान देश है और पशुपालन क्षेत्र इसका एक अभिन्न अंग है। पशुधन को आम तौर पर ग्रामीण आजीविका के लिए एक प्रमुख संपत्ति माना जाता है। ग्रामीण महिलाएं देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। साथ ही, वे एक उत्पादक की भूमिका भी निभाती हैं।
महिलाओ का योगदान पशुपालन क्षेत्र में सराहनीय है। गरीब परिवारों में पशुपालन आय का एक प्रमुख स्रोत है, जो विशेषकर गरीब एवं भूमिहीन महिलाओं को आय का साधन उपलब्ध कराता है। महिलाएं घर का सब कार्य करते हुए भी गाय, बकरी, भेड़ ,सूअर ,मुर्गी बत्तख, खरगोश पालन आदि का कार्य आसानी से कर सकती हैं। महिलाओं में निर्णय कौशल का विकास करके एवं उन्हें पशुपालन के तौर पर पहचान देकर उनके आर्थिक एवं सामाजिक विकास का रास्ता आसान किया जा सकता है। खाद्य सुरक्षा एवं पारिवारिक विकास में महिलाओं में तकनीकी कौशल का विकास करके एवं आय के साधनों में वृद्धि करके खाद्य सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकता है। पशुपालन में नवीन तकनीकों का विकास करने की आवश्यकता है जिनकी जरूरत महिलाओं को है जो उनके कार्य के बोझ को कम करें, उत्पादकता में वृद्धि करें एवं अधिक आय का साधन मुहैया कराएं।
महिलाएं पशुपालन के विभिन्न कार्यों जैसे पशुओं की देखभाल एवं खानपान, उत्पादों की बिक्री आदि में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। पशुओं के स्वामित्व विशेषकर बकरी, भेड़, मुर्गी आदि पर महिलाओं का अधिकतर अधिकार होता है। इसके विपरीत जमीन, पूंजी एवं ज्ञान के मामलों में पुरुषों का वर्चस्व होता है। अतः महिला सशक्तिकरण एक व्यवहारिक आवश्यकता है जिससे कि उनकी पहुंच तकनीकों और ज्ञान के क्षेत्र में अधिक सुगम हो सके। इसके दूरगामी प्रभाव के रूप में उनकी सामाजिक अवस्था में सकारात्मक सुधार होगा। आर्थिक सामाजिक व्यवस्था, संस्थानिक एवं नीतिगत फैसले भी कार्यकलापों एवं जिम्मेदारियों को प्रभावित करते हैं। विभिन्न कार्यों में स्त्री पुरुष की भागीदारी एवं संसाधनों का स्वामित्व विभिन्न समाज एवं क्षेत्र में अलग अलग होता है। सामाजिक, नीतिगत एवं संस्थानिक व्यवस्थाएं अक्सर महिलाओं के उत्थान में बाधा उत्पन्न करती हैं जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है। इन बाधाओं को यदि दूर कर दिया जाए तो महिलाएं पशुपालन द्वारा आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन सकेंगी।
महिलाओ की पशुपालन में भूमिका:
भारत में पशुधन उत्पादन काफी हद तक महिलाओं के हाथों में है। वास्तव में पशुपालन नारीकृत हो रहा है। पशुओं की खेती की अधिकांश गतिविधियाँ जैसे चारा संग्रह, पानी और स्वास्थ्य देखभाल, प्रबंधन, दूध देने और घरेलू स्तर पर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन महिलाओं द्वारा किया जाता है। उनकी काफी भागीदारी और योगदान के बावजूद, महत्वपूर्ण लैंगिक असमानताएँ, प्रौद्योगिकी, ऋण, सूचना, इनपुट और सेवाओं की जानकारी न होने की बजह से महिलाये काफी समयस्याओ का सामना कर रही हैं। पशुधन उत्पादों की तेजी से बढ़ती मांग महिलाओं के सशक्तीकरण के अवसर पैदा करती है। लगभग 70 मिलियन ग्रामीण परिवार पशुधन के मालिक हैं। पशुधन क्षेत्र के सतत विकास से महिलाओं का अधिक समावेशी विकास और सशक्तिकरण होगा। एक पशुधन उत्पादन प्रणाली के भीतर महिलाओं की विशिष्ट भूमिका एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में भिन्न होती है, और पुरुषों और महिलाओं के बीच पशुधन के स्वामित्व का वितरण सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक कारकों से दृढ़ता से संबंधित है। महिलाएं आमतौर पर दूध देने, प्रसंस्करण और दूध उत्पादों को बेचने, चारा और पानी उपलब्ध कराने, नवजात मेमनों और बीमार जानवरों की देखभाल करने के लिए जिम्मेदार होती हैं।
पशुपालन के क्षेत्र में स्त्री एवं पुरुष की आवश्यकता एवं रूचि अलग-अलग होती है। इस क्षेत्र में वे अवसर एवं समस्याओं का निराकरण अलग अलग तरीके से करते हैं। पशु एवं पशु उत्पादों की बिक्री तकनीकी जानकारी हासिल करना, सूखा, बाढ़, बीमारियों से लड़ने के तरीके इत्यादि में स्त्री पुरुष का व्यवहार समान नहीं होता है। पशुपालन में महिला सशक्तिकरण निम्नलिखित तथ्यों पर निर्भर करता है:
पशु उत्पादन के प्रकार: पशु उत्पादन की विभिन्न प्रणालियों में स्त्री की भागीदारी अलग-अलग होती है। पशुओं की नस्ल, कृषि पशुपालन के संबंध खानपान व्यवस्था प्राकृतिक संसाधनों की गुणवत्ता एवं उपलब्धता, गोचर भूमि की उपलब्धता आदि भी पशुपालन व्यवस्था में स्त्री पुरुष के योगदान का अध्ययन करते समय हमें सामाजिक व्यवस्था रहन-सहन के तरीके विभिन्न पारिवारिक गतिविधियों मौसमी विस्थापन आदि का भी ध्यान रखना चाहिए। जिन परिवारों में महिलाएं बकरी भेड़ की देखभाल करती हैं उन्हें बच्चे भी अक्सर अपना योगदान देते हैं। छोटे स्तर पर मुर्गी पालन भी ग्रामीण महिलाओं के लिए आय एवं रोजगार का एक महत्वपूर्ण साधन है जिससे परिवार के सदस्यों को पौष्टिक भोजन जैसे मांस और अंडे की आपूर्ति होती है।
Chhindwara – गौ-ग्रास निकालने की परंपरा को लुप्त और सुप्त न होने दें : स्वामी अखिलेश्वारनंद गिरी
भारत वर्ष में गौ पालन की परंपरा अति प्राचीन है। इसको बनाए रखना हम सभी का पुनीत दायित्व है। गौ-वंश के लिये गौ-ग्रास निकालना अति आवश्यक है। गौ-ग्रास निकालने की परंपरा को लुप्त और सुप्त नहीं होने देना है। मध्यप्रदेश गौ संवर्द्धन बोर्ड कार्य परिषद के अध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वारनंद गिरी ने यह बात आज छिन्दवाड़ा जिले के ग्राम उमरी खुर्द में माँ भगवती गौ-शाला ‘श्री राम वाटिका’ निर्माण का शुभारंभ करते हुए कही। वाटिका में विभिन्न तरह के औषधीय, फलदार, छायादार, गृह-नक्षत्रों पर आधारित वृक्षों की वाटिका निर्मित की जाएगी।
गौसेवा और गौवंश की रक्षा सदैव प्रासंगिक
स्वामी श्री गिरी ने इस अवसर पर आयोजित ‘गौ संगोष्ठी’ को संबोधित करते हुए कहा कि गौ-वंश कभी भी अनार्थिक और अनुपयोगी नही होता है। इस तथ्य और सत्य को ध्यान में रखकर ही गौ-सेवा की भावना जनसामान्य में जाग्रत करना वर्तमान समय की आवश्यकता है। गौ-सेवा और गौवंश रक्षा सदैव प्रसांगिक है। इस संगोष्ठी में पार्ण्डुना के और ग्राम उमरी खुर्द के गौ-पालक, गौ-सेवक, किसान और गायत्री पीठ से जुड़े हुए लोगों ने भाग लिया।
दिल्ली-पंजाब से लेकर उत्तराखंड तक 50 जगहों पर NIA की छापेमारी
NIA Raid: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने देशभर में आतंकी कनेक्शन को लेकर कई गैंगस्टर्स के ठिकानों पर छापेमारी शुरू की है. जांच एजेंसी की ये कार्रवाई दिल्ली समेत 50 जगहों पर हो रही है. एनआईए ने भारत और विदेशों में स्थित आतंकवादियों, गैंगस्टरों और ड्रग तस्करों के बीच बढ़ते गठजोड़ को खत्म करने के लिए एक्शन लिया है और पंजाब से लेकर हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में कई स्थानों पर छापेमारी कर रही है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक की छापेमारी में कई हथियार बरामद किए गए हैं. दिल्ली पुलिस ने बीते दिनों UAPA के तहत दो मामले दर्ज किए थे उन्हीं मामलों को संज्ञान में लेते हुए NIA ने एक्शन लिया है. दरअसल जांच में सामने आया कि विदेशों में बैठे गैंगस्टर और हिंदुस्तान की अलग-अलग जेलों में बंद गैंगस्टर अपना एक अलग लेवल का नेटवर्क चला रहे हैं और लगातार वारदातों को अंजाम दे रहे हैं.
National Investigation Agency (NIA) conducted raids at multiple locations in Punjab, Haryana, Rajasthan and Delhi-NCR region today to dismantle the emerging nexus between terrorists, gangsters and drug smugglers/traffickers based in India and abroad. pic.twitter.com/EbzSoxFjNZ
— ANI (@ANI) October 18, 2022









