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नागालैंड में बुनियादी ढांचे के विकास को मंजूरी दी गई

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New Delhi – माननीय प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत-समृद्ध भारत’ के दृष्टिकोण की भावना में, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने नागालैंड में मल्टी-डिसिप्लिनरी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और ‘महिला उद्यमिता सुविधा केंद्र’ के लिए 172.108 करोड़ रुपये आवंटित करके राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

 

स्वीकृत ‘स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स’ न केवल आवश्यक खेल बुनियादी ढांचे के विकास में सहायता करेगा, बल्कि राज्य में खेल या अन्य मनोरंजक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए एक संभावित माध्यम के रूप में कार्य करके आर्थिक विकास को भी प्रोत्साहित करेगा। ‘महिला उद्यमिता सुविधा केंद्र’ राज्य की उद्यमी महिलाओं के साहस को बढ़ावा देगा और साथ ही उनके लिए बाजार संपर्क और बाजार सुविधा भी पैदा करेगा। सामुदायिक संपत्ति होने के कारण खेल परिसर से लगभग 19.8 लाख आबादी जिसमें से 91% अल्पसंख्यक हैं को लाभ होगा। उद्यमिता केंद्रों से 3.25 लाख महिलाओं को लाभ होगा, जिनमें 3.16 लाख अल्पसंख्यक महिला आबादी शामिल है।

समावेशी और समग्र बुनियादी ढांचे के महत्व को स्वीकार करते हुए, खेल परिसर और महिला उद्यमिता केंद्रों को मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय विकास में सहायता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामुदायिक संपत्ति के रूप में मंजूरी दी गई है। यह आयोजन भारत के 2047 दृष्टिकोण के प्रति अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

शाम छह बजे शिवाजी पार्क में शुरू होगी विपक्ष की महारैली

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मुंबई: 2024 लोकसभा चुनावों के ऐलान के साथ ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मुंबई में एक और यात्रा पूरी हो गई। भारत जोड़ो न्याय यात्रा का समापन डॉ. बी आर आंबेडकर के स्मारक चैत्य भूमि पर होगा। राहुल गांधी ने आज मुंबई में मणि भवन से अगस्त क्रांति मैदान तक ‘न्याय संकल्प पदयात्रा’ निकालेंगे। इसके बाद वह शाम को ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में विपक्ष की एक मेगा रैली को संबोधित करेंगे। इस रैली में I.N.D.I.A अलायंस के तमाम नेताओं को आमंत्रित किया गया है। इसे विपक्ष के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इस सब के बीच सवाल बना हुआ कि I.N.D.I.A अलायंस के घटक दलों के बीच सीटों के समझौते पर कब मुहर लगेगी? ऐसी संभावना है कि MVA की सीट शेयरिंग पर भी फैसला हो सकता है। शिवाजी पार्क में महारैली के बीच आज के दिन को काफी अहम माना जा रहा है।
मुंबई के शिवाजी पार्क में आयोजित महारैली में विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (INDIA) के लिए शक्ति प्रदर्शन में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश शामिल होने की उम्मीद है। आम आदमी पार्टी (आप) के नेता सौरभ भारद्वाज, भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला, झारखंड के मुख्यमंत्री चंपई सोरेन और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन भी रैली में हिस्सा लेंगी। रैली में शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे, राकांपा (एसपी) प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी शामिल होंगे।

26 विधानसभा क्षेत्रों के लिए उपचुनाव का कार्यक्रम

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बिहार, हरियाणा, गुजरात, झारखंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के 26 विधानसभा क्षेत्रों के लिए उपचुनाव का कार्यक्रम

निर्वाचन आयोग ने लोकसभा आम चुनाव, 2024 के साथ निम्नलिखित विधानसभा क्षेत्रों में रिक्तियों को भरने के लिए उपचुनाव कराने का निर्णय लिया है:

क्र.सं. राज्य का नाम विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र संख्या एवं नाम रिक्ति का कारण
बिहार 195- अगियान (एससी) श्री मनोज मंज़िल को अयोग्य ठहराया जाना
गुजरात 26 – वीजापुर, डॉ. सी जे चावड़ा का इस्तीफा
108 – खम्‍भात श्री चिरागकुमार अरविंदभाई पटेल का इस्तीफा
136 – वाघोडिया श्री धर्मेन्द्रसिंह रानूभा वाघेला का इस्तीफा
85 – मानावडार श्री अरविंदभाई जिनाभाई लदानी का इस्तीफा
83 – पोरबंदर श्री अर्जुनभाई देवाभाई मोढवाडिया का इस्तीफा
हरियाणा 21-करनाल श्री मनोहर लाल का इस्तीफा
झारखंड 31- गांडेय डॉ सरफराज अहमद का इस्तीफा
महाराष्ट्र 30-अकोला पश्चिम श्री गोवर्धन मांगीलाल शर्मा उर्फ ​​लालाजी का निधन
त्रिपुरा

 

7-रामनगर श्री सुरजीत दत्त का निधन
 

 

त्तर प्रदेश

 

 

136- दादरौल श्री मानवेन्द्र सिंह का निधन
173-लखनऊ पूर्व श्री आशुतोष टंडन ‘गोपाल जी’ का निधन
292-गैसड़ी डॉ शिव प्रताप यादव का निधन
403 – दुधी (एसटी) श्री राम दुलार को अयोग्य ठहराया जाना
पश्चिम बंगाल

 

62-भगवान गोला श्री इदरीस अली का निधन
113- बारानगर श्री तापस रॉय का इस्तीफा
तेलंगाना 71-सिकंदराबाद छावनी (एससी) सुश्री लस्या नंदिता सयाना का निधन
 

 

 

 

 

हिमाचल प्रदेश

18- धर्मशाला श्री सुधीर शर्मा को अयोग्य ठहराया जाना
21 – लाहौल और स्पीति (एसटी) श्री रवि ठाकुर को अयोग्य ठहराया जाना
37-सुजानपुर श्री राजिंदर राणा को अयोग्य ठहराया जाना
39-बारसर श्री इंदर दत्त लखनपाल को अयोग्य ठहराया जाना
42-गागरेट श्री चैतन्य शर्मा को अयोग्य ठहराया जाना
45-कुटलहर श्री देविंदर कुमार (भुट्टो) को अयोग्य ठहराया जाना
राजस्थान 165 – बागीडोरा (एसटी) श्री महेंद्र जीत सिंह मालवीय का इस्तीफा
कर्नाटक 36 – शोरापुर (एसटी) श्री राजा वेंकटप्पा नाइक का निधन
तमिलनाडु 233 – विलावनकोड एस विजयधरानी का इस्तीफा

 

उप-चुनावों का कार्यक्रम अनुलग्नक-I में संलग्न है।

  1. मतदाता सूचियां

आयोग का दृढ़ विश्वास है कि त्रुटिमुक्‍त और अद्यतन मतदाता सूचियां स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनावों का आधार है। इसलिए, इनकी गुणवत्ता, स्थिति और विश्वस्तता में सुधार पर गहन और निरंतर ध्यान दिया जाता है। चुनाव कानून (संशोधन) अधिनियम-2021 द्वारा जन प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 की धारा 14 में संशोधन के बाद, एक वर्ष में मतदाता के रूप में नामांकन के लिए चार अर्हक तिथियों का प्रावधान किया गया है। तदनुसार, आयोग ने अर्हक  तिथि के रूप में 1 जनवरी, 2024 के संदर्भ में मतदाता सूची का विशेष सारांश पुनरीक्षण किया, जिसमें अर्हक तिथि के रूप में 1 जनवरी, 2024 के संबंध में मतदाता सूची में पंजीकरण कराने के इच्‍छुक पात्र नागरिकों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। 1 जनवरी, 2024 को अर्हक तिथि के संदर्भ में मतदाता सूचियों के विशेष सारांश पुनरीक्षण के समयबद्ध समापन के बाद, मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया है –

i गुजरात, हिमाचल प्रदेश और त्रिपुरा के लिए 5 जनवरी, 2024;

ii. बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तमिलनाडु के लिए 22 जनवरी, 2024;

iii. उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के लिए 23 जनवरी, 2024; और

iv. तेलंगाना और राजस्थान के लिए 8 फरवरी, 2024 ।

हालांकि, मतदाता सूची को निरंतर अद्यतन करने की प्रक्रिया, निकटस्‍थ अर्हक तिथि के संबंध में, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि तक जारी रहेगी।

2.इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (ईवीएम) और वीवीपैट

आयोग ने उपचुनाव में सभी मतदान केंद्रों पर ईवीएम और वीवीपैट का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। पर्याप्त संख्या में ईवीएम और वीवीपैट उपलब्ध कराए गए हैं और इन मशीनों की मदद से सुचारू रूप से  मतदान सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव कदम उठाए गए हैं ।

3. मतदाताओं की पहचान

मतदाता की पहचान का मुख्य दस्तावेज मतदाता फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) होगा। हालांकि निम्‍नलिखित पहचान दस्तावेजों में से भी कोई दस्‍तावेज भी मतदान केंद्र पर दिखाया जा सकता है:

i आधार कार्ड,

ii. मनरेगा जॉब कार्ड,

iii. बैंक/डाकघर द्वारा जारी फोटोयुक्त पासबुक,

iv. श्रम मंत्रालय की योजना के तहत जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड,

v. ड्राइविंग लाइसेंस,

vi. पैन कार्ड,

vii. एनपीआर के तहत आरजीआई द्वारा जारी स्मार्ट कार्ड,

viii. भारतीय पासपोर्ट,

ix. फोटो सहित पेंशन दस्तावेज़,

x केंद्र/राज्य सरकार/पीएसयू/सार्वजनिक लिमिटेड कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को जारी किए गए फोटोयुक्त सेवा पहचान पत्र, और

xi. सांसदों/विधायकों/एमएलसी को जारी आधिकारिक पहचान पत्र ।

xii. विशिष्ट दिव्‍यांगता आईडी (यूडीआईडी) कार्ड, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार

4.आदर्श आचार संहिता

आदर्श आचार संहिता उस जिले (जिलों) में तत्काल प्रभाव से लागू होगी, जहां आयोग के दिनांक 02 जनवरी, 2024 के पत्र संख्या 437/6/1NST/ECI/FUNCT/MCC/2024/(उपचुनाव) (आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध) के तहत निर्देश के प्रावधान के अधीन, चुनाव के दायरे में आ रहे किसी विधानसभा क्षेत्र का पूरा या कोई हिस्‍सा में शामिल है।

5. आपराधिक पृष्ठभूमि के संबंध में जानकारी

आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को प्रचार अवधि के दौरान तीन अवसरों पर समाचार पत्रों और टेलीविजन चैनलों के माध्यम से इस संबंध में जानकारी प्रकाशित करनी होती है। आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को चुनाव में उतारने वाले राजनीतिक दल को भी तीन अवसरों पर अपने उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि के बारे में अपनी वेबसाइट और समाचार पत्रों और टेलीविजन चैनलों पर जानकारी प्रकाशित करनी होती है।

आयोग ने दिनांक 16 सितंबर, 2020 के अपने पत्र संख्या 3/4/2019/SDR/Vol. IV के माध्यम से निर्देश दिया है कि निर्दिष्ट अवधि निम्नलिखित तरीके से तीन ब्लॉकों के साथ तय की जाएगी, ताकि ऐसे उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि के बारे में जानने के लिए मतदाताओं के पास पर्याप्त समय हो:

ए. नाम वापसी से पहले 4 दिनों के भीतर

बी. अगले 5वें से 8वें दिन के बीच

सी. 9वें दिन से प्रचार के आखिरी दिन तक (मतदान की तारीख से पूर्व दूसरा दिन)

(उदाहरण: यदि नाम वापस लेने की अंतिम तिथि महीने की 10 तारीख है और मतदान महीने की 24 तारीख को हैतो घोषणा के प्रकाशन का पहला ब्लॉक महीने की 11 और 14 तारीख के बीच होगादूसरा और तीसरा ब्लॉक उस महीने की क्रमशः 15 वीं और 18वीं तथा19वीं और 22वीं तारीख के बीच होगा।)

यह आवश्यकता 2015 की रिट याचिका (सी) संख्या 784 (लोक प्रहरी बनाम भारत संघ और अन्य) और 2011 की रिट याचिका (सिविल) संख्या 536 (पब्लिक इंटरेस्ट फाउंडेशन एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य) में मानीय उच्‍चतम न्यायालय के फैसले के अनुसरण में है।

यह जानकारी अपने उम्मीदवारों को जानें शीर्षक वाले ऐप पर भी उपलब्ध होगी।

6. उप-चुनाव के दौरान कोविड संबंधी व्यवस्था

आयोग ने आम चुनाव और उप-चुनावों के संचालन के दौरान पालन किए जाने वाले कोविड दिशानिर्देश जारी किए हैं जो आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

आज होगा लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान

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चुनाव आयोग शनिवार को शाम 3 बजे लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करेगा. माना जा रहा है कि पिछली बार की तरह इस बार भी 7 चरणों में लोकसभा चुनाव कराए जा सकते हैं. चुनाव आयोग ने 2019 में 10 मार्च को लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया था.  11 अप्रैल से 19 मई तक 7 चरणों में देशभर में मतदान हुआ था. नतीजे 23 मई को आए थे. चुनाव आयोग के तारीखों का ऐलान करते हुए देशभर में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी. आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार के सामान्य कामकाज में महत्वपूर्ण बदलाव आ जाएगा.

1- कितने चरणों में हो सकते हैं चुनाव?

माना जा रहा है कि इस बार लोकसभा चुनाव 7-8 चरणों में हो सकते हैं. 2019 में चुनाव आयोग ने 7 चरणों में चुनाव कराए थे. जबकि 2014 में 7 अप्रैल 2014 से 12 मई 2014 के मध्य 9 चरणों में चुनाव हुए थे. जबकि नतीजे 16 मई को आए थे.

2- क्या होती है आदर्श आचार संहिता?

चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए संवैधानिक अधिकार के तहत आदर्श आचार संहिता लागू करती है. इसके तहत राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए कुछ मानदंड तय किए जाते हैं. आचार संहिता का उद्देश्य सभी के लिए समान अवसर तैयार करना है.

3- आचार संहिता लागू होने के बाद क्या क्या बदल जाएगा?

आचार संहिता लागू होने के बाद सरकारी योजना की घोषणा या फिर शिलान्यास पर रोक रहेगी.

– लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा होने के बाद सरकारी अधिकारियों को छोड़कर कोई भी शिलान्यास या किसी भी प्रकार की परियोजनाओं या योजनाओं को शुरू नहीं कर सकता.

– आचार संहिता के दौरान चुनावी प्रक्रिया से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी अधिकारियों/कर्मचारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग पर रोक रहेगी. केवल चुनाव आयोग की इजाजत पर अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग हो सकती है.

– पार्टी की उपलब्धियों के विज्ञापन सरकारी खर्च पर नहीं दे सकते.

पंजाब में आम आदमी पार्टी ने पुराने चेहरों पर खेला दांव

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 पांच कैबिनेट मंत्रियों को उतारा मैदान में
सुभाष आनंद-
लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी नए चेहरों पर दांव खेलने से घबरा गई लग रही है।संभवतः इसीलिए पार्टी नए चेहरों पर विश्वास न कर पुराने चेहरों खासकर  विधायकों व कैबिनेट मंत्रियों को चुनावी मैदान में उतारने की घोषणा कर चुकी है।पंजाब में आम आदमी पार्टी ने राज्य की 8 लोकसभा सीटों से खड़े होने वाले उम्मीदवारों के नाम की  पहली लिस्ट जारी कर दी है। पार्टी के संचालक केजरीवाल व मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने 5 कैबिनेट मंत्रियों पर फिर से दांव खेला है।मुख्यमंत्री ने अपने खुद के हलके से कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर को चुनावी मैदान में उतारने की घोषणा की  है,जबकि जालंधर लोकसभा से उपचुनाव में विजयी रहने वाले सुशील कुमार रिंकू को फिर से हाईकमान ने मौका दिया है।आप हाईकमान ने खेतीबाड़ी मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां को बठिंडा से चुनाव लड़ाने के लिए मैदान में उतारने का फैसला लिया है जबकि कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर  खडूर साहिब से और पंजाबी फिल्मों के अदाकार व मुख्यमंत्री के साथी कर्मजीत अनमोल को फरीदकोट से चुनावी मैदान में उतारने का फैसला लिया गया है।फतेहगढ़ साहिब से गुरप्रीत सिंह जी.पी और पटियाला से सेहत मंत्री डाक्टर बलबीर सिंह के नाम की घोषणा की गई है।पार्टी ने अमृतसर से कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल पर दांव खेला है,
 अभी आम आदमी पार्टी को पांच सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम की दूसरी लिस्ट जारी करनी है और उस लिस्ट में फिरोजपुर ,गुरदासपुर ,लुधियाना से उम्मीदवारों के नाम की घोषणा होनी बाकी है,इन सीटों पर किस की किस्मत जागेगी अभी यह कहना मुश्किल है।राजनीतिक जानकारों की मानें तो उनका कहना है कि आम आदमी पार्टी अपने विधायकों को चुनावी मैदान में उतारने की इच्छुक लग रही है,हाईकमान का नये नेताओं पर विश्वास न होना इस बात को साबित कर रहा है।वैसे विधानसभा में 92 सीटें जीतने वाली पार्टी अब लोकसभा चुनाव में अपने कितने सदस्य भेज पाएगी यह वोटर ही उजागर करेंगे। (विनायक फीचर्स)

गर्भावस्था जागरूकता और शिक्षा के लिए मल्टीमीडिया प्लेटफॉर्म “रेडी टू बी मॉम” का शुभारंभ

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मुंबई (अनिल बेदाग) : इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को गर्भधारण पूर्व देखभाल के बारे में वैध जानकारी प्रदान करना है, ताकि गर्भावस्था के दौरान जोखिमों को कम करने के लिए गर्भधारण करने का निर्णय लेने से पहले उन्हें नियमित जांच के लिए परामर्श लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
इस पहल के तहत हर महीने एक विषय पर समर्पित इंटरैक्टिव डॉक्टर पॉडकास्ट विभिन्न प्लेटफार्मों पर प्रसारित किया जाएगा। छह-श्रृंखला पहल की पहली श्रृंखला अंग्रेजी और हिंदी दोनों में उपलब्ध है। इसके बाद के धारावाहिक तमिल, बंगाली, कन्नड़ और मलयालम इन चार अतिरिक्त क्षेत्रीय भाषाओं में भी प्रस्तुत किए जाएंगे। प्रत्येक श्रृंखला में इंटरैक्टिव क्विज़, पोल जैसे बहुत कुछ अतिरिक्त तत्व होंगे।
डॉ. रोहन पालशेतकर, प्रख्यात प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ, मुंबई, प्रोफेसर, डीवाई पाटिल स्कूल ऑफ मेडिसिन और अध्यक्ष एफओजीएसआई यंग टैलेंट प्रमोशन कमेटी महत्वपूर्ण बिंदु बताते हैं, “विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में रिपोर्ट दी है कि दुनिया भर में बांझपन दर १० % से १७ %बढ़ गई है।  इस वृद्धि में योगदान देने वाले कारकों में उम्र, विलंबित गर्भावस्था, देर से शादी और करियर प्राथमिकता शामिल हैं और ये कारक प्रजनन दर को प्रभावित करते हैं। हालाँकि ये निर्णय महत्वपूर्ण हैं, फिर भी ये गर्भधारण प्राप्त करने में चुनौतियाँ पेश कर सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान होने वाले संभावित जोखिम कारकों की पहचान करने और उन्हें कम करने के लिए गर्भधारण की इच्छुक महिलाओं के लिए गर्भधारण पूर्व जांच अमूल्य हो सकती है।”
मल्होत्रा नर्सिंग एंड मैटर्निटी होम, आगरा की डॉ नेहरिका मल्होत्रा कहती है , “बड़ी विडंबना है कि हमारे देश में जब तक हम किसी बड़ी मुश्किल में न पड़ जाएं डॉक्टर के पास नहीं जाते हैं। जबकि डॉक्टरों का मानना है कि विवाह से पूर्व भी चिकित्सकीय परामर्श अति आवश्यक होता है। विवाह के बाद कब गर्भधारण करना है, गर्भ निरोधक गोलियों का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में करना है, कब तक करना है आदि प्रश्नों के सही उत्तर आपको एक डॉक्टर ही दे सकता है। जितना आप अपने डॉक्टर से संपर्क में रहेंगे उतना डॉक्टर को भी आपकी मेडिकल हिस्ट्री पता रहेगी। वे आपकी मदद और मार्गदर्शन कर सकेंगे। कुछ उपाय होते हैं जो वे आपको पहले से बता सकते हैं। जैसे फॉलिक एसिड सप्लीमेंट बहुत जरूरी है, हीमोग्लोबिन अच्छा होना चाहिए, आपको अपनी जीवनशैली में क्या बदलाव लाने हैं, खान पान कैसा होना चाहिए, शराब का सेवन नही करना है, व्यायाम कब और कितना करना है, नियमित रूप से नींद पूरी हो रही है या नही, लाइफ स्टाइल में तनाव कितना है। इन सभी बातों की जानकारी आपके डॉक्टर को होना जरूरी है और यह तभी संभव है जब आप नियमित रूप से डॉक्टर के पास जा रहे हैं और आवश्यक जांचें करा रहे हैं।”

कन्नड़ फीचर फिल्म ‘पाउडर’ की शूटिंग संपन्न

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                         द वायरल फीवर बैनर सिनेफलक पर उभरता हुआ एक ऐसा नाम है जो शानदार कंटेंट दर्शकों के सामने पेश करने के लिए जाना जाता है। ‘द वायरल फीवर’ एक इंडियन कंटेंट प्लेयर है जिसके ‘आईएमडीबी’ की टॉप 250 लिस्ट में 7 शोज शामिल हैं, जबकि टोटल इंडिया की ओर से इस लिस्ट में 10 वेब सीरीज शामिल हैं। ‘द वायरल फीवर’ प्रोडक्शन हाउस के पास साल 2024 में कुल 16 शोज का आकर्षक व दिलचस्प लाइनअप है। खास करके सबसे चर्चित शोज ‘पंचायत’, ‘गुल्लक’ और ‘कोटा फैक्ट्री’ के अगले सीजन के साथ ‘द वायरल फीवर’ इस वर्ष धमाल मचाने के लिए तैयार है। अब ‘द वायरल फीवर’ अपनी नवीनतम प्रस्तुति कन्नड़ फीचर फिल्म ‘पाउडर’ के साथ अपने पंख फैला कर अपनी नई उड़ान को भरने के लिए तैयार है। इस फिल्म की शूटिंग पूरी हो चुकी है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

सीएए के सत्य को समझने की ज़रूरत

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(डॉ वंदना गाँधी-विनायक फीचर्स)
देश में वर्तमान समय में बहुत सुखद परिवर्तन हो रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के प्रमुख संकल्पों में से एक ‘नागरिकता संशोधन अधिनियम’ भी लागू हो चुका है। इस क़ानून के माध्यम से कभी भारत का हिस्सा रहे पड़ोसी देश पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान, बांग्लादेश में केवल धार्मिक आधार पर पीड़ित और प्रताड़ित गैर मुस्लिम नागरिकों को एक सुरक्षित और एवं भय मुक्त वातावरण दिया जा सकेगा ताकि वे अपना जीवन मूलभूत सुविधाओं के साथ अपने धर्म का आचरण करते हुए जी सकें। यह कानून ऐसे शरणार्थियों को नागरिकता देने वाला कानून है जिनकी जड़ें भारत में हैं। नागरिकता संशोधन कानून के लागू हो जाने से पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान, बांग्लादेश तीनों मुस्लिम बहुल देशों से परेशान होकर लौटे वहाँ के अल्पसंख्यक नागरिकों के लिए  भारत की नागरिकता के रूप में  एक बड़ी राहत मिल गई है।
हालाँकि दूसरा पक्ष यह भी है कि इस एक्ट को लेकर भ्रम फैलाए जाने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि इस विधेयक के आने के बाद भारत के मुसलमानों की नागरिकता पर बुरा असर पड़ेगा। यहाँ यह ध्यान में रखे जाने की आवश्यकता है कि देश के गृहमंत्री स्वयं संसद में इस बात को स्पष्ट कर चुके हैं कि नागरिकता संशोधन कानून केवल पूर्व में भारत का ही अंग रहे तीनों पड़ोसी देशों से आने वाले गैर मुस्लिम नागरिकों पर ही लागू होगा। ऐसे में दशकों से प्रतीक्षारत पड़ोसी देशों से आए वहाँ के अल्पसंख्यक समुदाय के शरणार्थियों की भारत की नागरिकता की मांग पूरी होने का उदारता से स्वागत किया जाना चाहिए।
नागरिक संशोधन विधेयक दरअसल 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके तीनों पड़ोसी देशों के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के किसी व्यक्ति और जिसे केंद्र सरकार ने पासपोर्ट भारत में प्रवेश अधिनियम, 1920 अथवा विदेशियों विषयक अधिनियम 1946 या उसके अधीन बनाए नियमों से छूट दी है, को इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा। वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश कर गए ऐसे प्रवासियों को अभी तक अवैध प्रवासी माना जाता रहा हैं। सीएए में यह प्रस्ताव है कि उक्त प्रवासियों को भारतीय नागरिकता के लिए पात्र माना जाए।
नागरिकता संशोधन कानून वास्तव में दशकों से पीड़ित शरणार्थियों को सम्मानजनक जीवन देने के साथ ही साथ उनके पुनर्वास और नागरिकता की कानूनी बाधाओं को दूर करने के लिए है। इसके माध्यम से ऐसे शरणार्थियों की सांस्कृतिक, भाषाई और सामाजिक पहचान की रक्षा का मार्ग प्रशस्त होगा। इसके साथ ही आर्थिक, व्यवसायिक, मुक्त परिवहन और भारत में उनके संपत्ति खरीदने जैसे अधिकार सुनिश्चित होंगे। इसके बावजूद नागरिकता संशोधन विधेयक के संबंध में तमाम प्रकार की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। इसे मुस्लिम विरोधी कानून बताया जा रहा है जबकि सत्य यह है कि इस कानून से मुसलमानों का कोई अधिकार नहीं जाता क्योंकि यह नागरिकता देने का कानून है, लेने का नहीं। इसीलिए भारतीय नागरिकों विशेष रूप से मुस्लिमों को किसी भ्रामक प्रचार में नहीं आना चाहिए। इस कानून में भारत के मुसलमानों की नागरिकता को लेकर कोई नया क़ानून अथवा संशोधन नहीं है। स्पष्ट रूप से यह कानून केवल उन शरणार्थियों के लिए है जिन्हें वर्षों से धार्मिक आधार पर उत्पीड़न सहना पड़ा और जिनकी जड़ें भारत में होने से उनके पास दुनिया में इस देश के अलावा अन्य कोई जगह नहीं है। इसलिए भारत का संविधान हमें यह अधिकार देता है कि मानवतावादी दृष्टिकोण से धार्मिक शरणार्थियों को मूलभूत अधिकार मिलें और ऐसे शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान की जा सके।
इस क़ानून और ऐसे शरणार्थियों के विषय को देखने के लिए हमारे पास एक इतिहास दृष्टि एवं वर्तमान में इन तीनों पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों की स्थिति को समझना आवश्यक है। असल में भारत सरकार को इस बिल को लाने की आवश्यकता ही न पड़ती अगर भारत का विभाजन और वह भी धर्म के आधार पर न हुआ होता। ‘नेहरू-लियाकत समझौते’ के तहत दोनों पक्षों ने स्वीकृति दी थी कि अल्पसंख्यक समाज के लोगों को बहुसंख्यकों की तरह सम्मान और सुविधाएँ दी जाएँगी। उनके व्यवसाय, अभिव्यक्ति और उपासना करने की आजादी भी सुनिश्चित की जाएगी। भारत ने तो अपना यह वादा बखूबी निभाया लेकिन पाकिस्तान और उससे विभाजित बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर खूब अमानवीय अत्याचार किए गए। इस्लामिक आधार पर गठित होकर चल रहे इन देशों में धार्मिक अल्पसंख्यक नागरिकों के अधिकारों का हनन हो रहा था। अमानवीय अत्याचारों की लंबी श्रृंखला उनके केवल अल्पसंख्यक होने के कारण चली आ रही थी। इन देशों में महिलाओं की स्थिति तो और भी बहुत ज्यादा खराब रही है। बच्चियों और महिलाओं को उठाकर उनके साथ सामूहिक बलात्कार, हत्या तो कभी जबरन निकाह के द्वारा धर्म परिवर्तन कराया जाना वहाँ आम बात है। इन देशों में हिंदू, जैन, बौद्ध, ईसाई, पारसी सभी के धर्म स्थलों पर हमले होते रहे हैं। ऐसे में या तो लोग मजबूर होकर धर्म परिवर्तन कर लेते थे या अपनी जान गंवा बैठते हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के हर निर्णय का विरोध करने वाली  ताक़तें इस कानून का पुरजोर विरोध करने के लिए अपनी टूल किट के साथ मैदान में उतर गई हैं। आंदोलन करने वाले लोगों की सक्रियता बढ़ने लगी है। भारत में हो रहे किसी भी अच्छे परिवर्तन का विरोध करना ही इनका एजेंडा है।
देश में अवश्य एक अच्छा वातावरण तैयार हुआ है। देश के मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवी अब इन बातों और भ्रम फैलाने वालों की हक़ीक़त समझने लगे हैं। इसीलिए सीएए का नोटिफिकेशन लागू होने पर मुस्लिम धर्मगुरु एवं आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि हमारी लीगल टीम सीएए नोटिफिकेशन को पढ़ेगी और फिर हम किसी नतीजे पर पहुंचेंगे। इसके साथ ही मुस्लिम धर्मगुरु महली ने कहा इस कानून से किसी की नागरिकता पर खतरा नहीं है, लोग अफवाहों और गलतफहमी से बचें। साथ ही उन्होंने विरोध और सियासत करने वालों से अपील की कि इस मुद्दे पर  राजनीति न की जाए। आज बुद्धिजीवी भारतीय मुसलमान भी भारत के सौहार्द, शांति, सद्भाव और विकास की नीति से हर एक भारतीय के रूप में गर्वित हो रहा है। भावनात्मक रूप से मुसलमान को उद्वेलित करके अपनी सियासत चलाने वालों को मुफ्ती ख़ालिद रशीद से सीख लेकर अपने देश के विकास में सहयोगी रहना चाहिए।
भारत की नीति सदैव से ही बहुजन हिताय की रही है। हम विश्व बंधुत्व के दृष्टिकोण से जीवन जीने वाले समाज हैं। कोरोनाकाल में इसीलिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने बिना कोई भेदभाव किए छोटे-बड़े जरूरतमंद देशों को कोविड वैक्सीन एवं अन्य सहायता मुक्तहस्त से उपलब्ध कराई थी। आज विश्व बदल चुका है।  पूरा विश्व भारत की वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा को स्वीकार करने के साथ सराह भी रहा है। यही कारण है कि विश्व के लगभग सभी छोटे बड़े इस्लामी देशों से भारत की अटूट मित्रता है। भारत के मुस्लिम नागरिक भी देश में स्वतंत्रता के साथ सुखी जीवन जी रहे हैं। ऐसे में नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर किसी भी प्रकार के भ्रम में आए बिना देश के प्रत्येक नागरिक को इसका खुले हृदय से स्वागत करना चाहिए।
(विनायक फीचर्स)(लेखिका शिक्षाविद, समाजशास्त्री एवं कथाकार हैं)

दो गाय से शुरू किया था डेयरी फार्म -2 क्विंटल से अधिक है दूध उत्पादन

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कुंदन कुमार/गया : कृषि के बाद पशुपालन ग्रामीण इलाके की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. पशुपालन से किसानों को कई तरह के फायदे हैं. पशुपालन से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की आमदनी बढ़ रही है. बिहार के गया जिले में कई लोग है जो पशुपालन के जरिए अच्छी आय कर रहें हैं. उन्हीं में से एक हैं मानपुर प्रखंड क्षेत्र के सुरहरी गांव निवासी 65 वर्षीय किसान सुरेश प्रसाद जो पिछले 32 वर्षों से पशुपालन कर रहे हैं. सुरेश प्रसाद के पास सब खुद का डेयरी फार्म भी है.

डेयरी फार्मिंग एक ऐसा रोजगार है जिसे आप कहीं पर भी आसानी से कर सकते हैं. डेयरी प्रोडक्ट का डिमांड भी जबरदस्त है. अन्नपूर्णा डेयरी के नाम से इनका डेयरी फार्म चल रहा है और रोजाना 200 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है.

2 गाय से डेयरी फार्म की हुई थी शुरुआत
सुरेश प्रसाद ने 1992 में दो गाय से पशुपालन की शुरुआत की थी और आज इनके डेयरी फार्म में 50 से अधिक गाय का पालन किया जा रहा है. इनके पास साहिवाल, गिर, फ्रिजियन, जर्सी सहित नस्ल की गाय मौजूद है. इनके डेयरी की खासियत यह है कि शुरुआत में 2 गाय से की थी. उन्हें दो गाय का वंश आगे बढ़ रहा है. सुरेश प्रसाद के पास छोटा बड़ा मिलाकर लगभग 60 से अधिक गाय और उनके बच्चे मौजूद हैं. उन्होंने बताया कि बाहर से कभी गाय खरीदा ही नहीं है.

‘नॉट फनी’: नोरा फतेही, दिव्येंदु और अविनाश तिवारी की मडगांव एक्सप्रेस का नया गाना हुआ रिलीज़ 

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रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट तैयार है दर्शकों को एक हंसी से भरी राइड पर मडगाव एक्सप्रेस के साथ लेकर जाने के लिए। यह फिल्म अपने जबरदस्त ट्रेलर और गानों की वजह से दर्शकों के बीच मच अवेटेड फिल्मों में से एक बन गयी है। ऐसे में फिल्म के एक्टर्स भी कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं, अपने फैंस की उत्सुकता को बढ़ाने का और इसी सिलसिले को आगे लेकर जाते हुए एक्टर्स ने फिल्म से BTS को शेयर किया है। दूसरी तरफ फिल्म के चर्चा में रहने की वजह उसके गानों को मिल रहा प्यार भी है। ऐसे में मेकर्स ने उत्साह के पैमाने को और बढ़ाने के लिए दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स में अपना एक और गाना लॉन्च कर दिया है। संगीतकार शारिब और तोशी के म्यूजिकल ब्रिलियंस, शारिब और अकासा सिंह के डायनामिक आवाज़ और कलीम शेख के जबरदस्त लिरिक्स के साथ, “नॉट फनी” एक सेंसेशन बनने का वादा करता है।

दिल्ली ने एक्सेल एंटरटेनमेंट द्वारा किये गए मडगांव एक्सप्रेस के जोश से भरे जबरदस्त इवेंट को देखा! इस इवेंट में निर्देशक कुणाल खेमू, के अलावा लीड कास्ट प्रतीक गांधी, दिव्येंदु, नोरा फतेही और अविनाश तिवारी को देखा गया, इस दौरान फैंस संग मीडिया को देखा गया। सभी को इवेंट में नॉट फनी की जादू को अनुभव करने के लिए उत्साहित देखा गया। दिल्ली में अयोजित ये इवेंट को ग्रैंड तरीके से किया गया था, जिसमें फिल्म और उसके म्यूजिकल ऑफरिंग का सभी द्वारा लुत्फ़ उठाते देखा गया।

नॉट फनी फिल्म मडगाव एक्सप्रेस की सार को समेटे हुए है, जो उसके फ्रेश कहानी और दिलचस्प किरदारों की एक झलक पेश करता है। दिल को छूने वाले रिथम और सुरीली धुन के साथ, यह गाना म्यूजिक लवर्स के लिए सही टोन सेट करता है, साथ ही यह फिल्म की यात्रा पर भी लेकर जाता है, जो एक यादगार सिनेमा देखने के एक्सपीरियंस की शुरुआत है। शारिब और तोशी, शारिब और अकासा सिंह के बीच सहयोग, कलीम शेख के दमदार लिरिक्स के साथ, यह कम्पोजीशन इमोशन को गहराई के तक छूता है।

नोरा फतेही, दिव्येंदु और अविनाश तिवारी की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री गाने में एक एडिशनल चार्म लाती है, जो सीन्स को और भी खास बनाती है। “बचपन के सपने… लग गए अपने,” इस टैगलाइन के साथ, ‘मडगांव एक्सप्रेस’ को रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर के एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनाया गया है। वहीं, कुणाल खेमू द्वारा लिखित और निर्देशित यह फिल्म 22 मार्च, 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

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