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ग्रामीण बच्चों की शिक्षा व विकास के लिए लाइट ऑफ लाइफ ट्रस्ट द्वारा “सुर संगम” का आयोजन

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मुंबई। लाइट ऑफ लाइफ ट्रस्ट ने अपनी 20वीं वर्षगांठ का उत्सव मुंबई के जमशेद भाभा रंगमंच, राष्ट्रीय केंद्र प्रदर्शन कला (एनसीपीए) में संगीतमय कार्यक्रम “सुर संगम” के साथ मनाया। इस सांस्कृतिक संध्या में पद्मश्री गायक सुरेश वाडकर, गायिका संजीवनी भेलांडे, गायक मुख्तार शाह तथा चिराग पांचाल के नेतृत्व में 23 साज़ समूह ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में अभिनेता फिल्मकार राजकपूर को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी फिल्मों के गीतों की प्रस्तुति दी गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र सरकार के कौशल विकास, रोजगार, शिक्षा और नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढा रहे। उन्होंने ट्रस्ट के प्रयासों की सराहना की और सरकार की ओर से निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया। विशिष्ट अतिथियों में हर्षिता नर्वेकर, मंजी लोढा, अमला रूइया, मालती जैन और आभा सिंह शामिल रहीं। इसके अतिरिक्त मिलिंद देवड़ा, मकरंद नर्वेकर और हर्षिता नर्वेकर की शुभकामनाएँ भी प्राप्त हुईं।
ट्रस्ट की स्थापना वर्ष 2005 में विली डॉक्टर ने 25 ग्रामीण बच्चों से की थी। आज यह संस्था पच्चीस हज़ार से अधिक बच्चों और उनके परिवारों तक पहुँच चुकी है तथा छह लाख से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित कर चुकी है।
इस संगीतमय आयोजन का उद्देश्य ट्रस्ट की 20 वर्ष की यात्रा का उत्सव मनाना और ग्रामीण बच्चों की शिक्षा व विकास के लिए सहयोग जुटाना था। इस कार्यक्रम से प्राप्त धनराशि ट्रस्ट के शैक्षिक और सामाजिक कार्यक्रमों में उपयोग की जाएगी।

राष्ट्रीय एकता के लिए सर्वधर्म सद्भाव एवं संवाद की आवश्यकता – आचार्य लोकेश

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गुरु तेग बहादुरजी के बलिदान दिवस पर प्रमुख जत्थेदार, आचार्य लोकेश, स्वामी चिदानन्द आदि संतो ने सर्वधर्म सम्मेलन को संबोधित किया

सिख समाज का गौरवशाली इतिहास युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत – स्वामी चिदानन्द

दिल्ली सरकार के मंत्री मनिंदर सिंह सिरसा, कपिल मिश्रा व DSGMC के अध्यक्ष कालका ने सर्वधर्म संतों को सम्मानित किया

नई दिल्ली, 20 सितंबर 2025 : अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक जैन आचार्य लोकेशजी, अकाल तख्त के प्रमुख जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह जी, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वतीजी, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री श्री मंजिन्दर सिंह सिरसा, सांस्कृतिक मंत्री श्री कपिल मिश्रा, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष श्री हरमीत सिंह कालका, सहित विभिन्न धर्मों के गुरुओं ने श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी, गुरु सिख भाई मति दास जी, भाई दियाला जी के 350 वें शहीदी दिवस को समर्पित सर्वधर्म सम्मेलन को संबोधित किया |

दिल्ली सरकार के मंत्री श्री मंजिन्दर सिंह सिरसा एवं श्री कपिल मिश्रा ने सर्वधर्म संतों का स्वागत करते हुए कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म की रक्षा व अन्याय के विरुध्द जरूरतमंदों और कमज़ोरों की रक्षा करने का संदेश दिया उन्होंने दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष श्री कालका जी के साथ मिलकर सभी संतों का शाल ओढ़ाकर व प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया

विश्व शांतिदूत जैन आचार्य लोकेशजी ने कहा कि राष्ट्रीय एकता के लिए सर्वधर्म सद्भाव और संवाद आवश्यक है| उन्होंने कहा कि सभी को वसुधैव कुटुम्बकम् (विश्व एक परिवार है) के विचार को अपनाना चाहिए, विकास के लिए शांति आवश्यक है |

आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर जी ने अपने विडियो संदेश में कहा कि सिख समाज का गौरवशाली इतिहास युवाओं के लिए प्रेरणा का स्तोत्र है | उनकी शिक्षाएं आज भी समानता, न्याय और सद्भाव के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरणा का स्थायी स्रोत हैं।

अकाल तख्त के प्रमुख जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी रघुबीर सिंह जी ने कहा कि देश की आन बान शान के लिए सिख समाज सदैव प्रथम पंक्ति में खड़ा रहा है |

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी को बलिदान को राष्ट्र कभी भुला नहीं सकता |

दिल्ली सरकार एवं दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी द्वारा आई.सी.ए.आर. कन्वेशन सेंटर नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन को गोस्वामी सुशील जी महाराज, बौद्ध धर्म से भिक्खु संघसेना जी, अजमेर दरगाह से सैयद सलमान चिश्ती, यहूदी धर्म से श्री इजेकील इसाक मालेकर, राजयोगिनी डॉ बिन्नी सरीन जी, श्री रवींद्र पंडिता जी, ईसाई धर्म से श्री अनिल थॉमस टूटू जी स्वामी भव्यतेज जी आदि ने भी संबोधित किया |

अब्दुल अहद और असद सIबरी की सIरंगी विरासत

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अब्दुल अहद सIबरी और असद सIबरी भारतीय शास्त्रीय संगीत की उस गौरवशाली परंपरा के प्रतिनिधि हैं जिसने सरंगी को केवल एक वाद्ययंत्र नहीं, बल्कि आत्मा की आवाज़ बना दिया है। वे मोरादाबाद घराने की आठवीं पीढ़ी से संबंध रखते हैं—एक ऐसा घराना जिसने चार शताब्दियों से भी अधिक समय तक संगीत की साधना और परंपरा को जीवित रखा है। यह वंश परंपरा अपने आप में विश्व संगीत के इतिहास में अनोखी है, क्योंकि इतने लंबे समय तक किसी एक परिवार ने एक ही वाद्य को इतनी निष्ठा और उत्कृष्टता के साथ संरक्षित और संवर्धित किया हो, यह विरल ही है।

इन दोनों का जन्म ऐसे घराने में हुआ जहाँ संगीत जीवन का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन स्वयं है। उनके दादा, सIरंगी सम्राट उस्ताद सIबरी ख़ाँ, ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने सरंगी को उस ऊँचाई पर पहुँचाया जहाँ इसे न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति का प्रतीक माना जाने लगा। दूसरी ओर, उनके पिता उस्ताद कमाल सIबरी, जिन्हें आज “सIरंगी सुल्तान” भी कहा जाता है, ने इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सIरंगी को आधुनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया और उसमें अनेक नवाचार कर उसकी सीमाओं को और विस्तृत किया।


अब्दुल अहद और असद, इस संगीत-मय वातावरण में बचपन से ही रचे-बसे हैं। सरंगी की मधुर ध्वनियाँ उनके जीवन का हिस्सा रही हैं। वे जब छोटे थे तब से ही सुर, ताल और राग उनके दैनिक जीवन के अभिन्न अंग बन गए। उनके लिए संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि साधना, अनुशासन और आत्मिक शुद्धि का साधन है। पिता के मार्गदर्शन में वे कठोर अभ्यास और रियाज़ करते हैं, जिससे उनमें न केवल वादन की दक्षता आती है, बल्कि संगीत का गहरा भाव भी विकसित होता है।
इन दोनों में अपने पूर्वजों की विरासत को आगे बढ़ाने का जोश और जिम्मेदारी का भाव स्पष्ट झलकता है। वे समझते हैं कि सIरंगी केवल एक वाद्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा का स्वरूप है। इसलिए वे परंपरा के सम्मान के साथ-साथ इसे आधुनिक पीढ़ी के लिए प्रासंगिक बनाने की दिशा में भी अग्रसर हैं। उनके दृष्टिकोण में यह विश्वास निहित है कि यदि शास्त्रीय संगीत को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है तो उसे समकालीन प्रयोगों और नई तकनीकों से भी जोड़ना होगा।
मोरादाबाद घराने की यह परंपरा केवल वाद्य का ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन भी सिखाती है। अब्दुल अहद और असद इस मशाल को थामे हुए हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी साधना, ज्ञान और संगीत की रोशनी फैलाती रही है। उनकी उपस्थिति यह सुनिश्चित करती है कि सरंगी की आत्मीय और गहन ध्वनि, जो कभी उस्ताद सबरी ख़ाँ और फिर उस्ताद कमाल सबरी की उंगलियों से विश्वभर में गूँजी, आने वाले समय में भी उतनी ही जीवंत और प्रभावशाली बनी रहेगी।
इस प्रकार, अब्दुल अहद और असद केवल अपने घराने के उत्तराधिकारी नहीं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की उस अमूल्य विरासत के संरक्षक और भविष्य के धरोहर-वाहक हैं। उनकी साधना और संकल्प से आने वाली पीढ़ियाँ प्रेरणा लेंगी, और सIरंगी की ध्वनि सदा अमर बनी रहेगी।

समाज व संस्कृति की भी आधारशिला है गौ रक्षा : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

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पूर्णिया. अपने गौ रक्षा अभियान को लेकर यात्रा पर निकले जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बुधवार को पूर्णिया पहुंचे. एक सभा को संबोधित करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा तभी संभव है जब हम गौ माता का संरक्षण करेंगे. गौ रक्षा हमारी आस्था का विषय ही नहीं, बल्कि यह हमारे समाज और संस्कृति की भी आधारशिला है. उन्होंने सभी से आगामी विधानसभा चुनाव में गौ रक्षा को केंद्र में रखते हुए लोगों से मतदान करने की अपील की. शंकराचार्य जी ने बताया कि गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने के लिए उन्होंने विभिन्न राजनैतिक दलों से बात भी की लेकिन इस मुद्दे पर उनसभी की उदासीनता को देखते हुए बिहार विधानसभा चुनाव में गौ भक्त प्रत्याशी उतारने का मन बनाया है. उन्होंने यह भी घोषणा की कि आगामी विधानसभा चुनावों में सभी विधानसभा क्षेत्रों से अपने उम्मीदवार खड़े करेंगे. उन्होंने कहा कि नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद औपचारिक रूप से बताया जाएगा कि कौन-कौन उम्मीदवार उनकी तरफ से चुनाव लड़ रहे हैं. उनके पूर्णिया प्रवास के दौरान आयोजन स्थल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक माहौल से परिपूर्ण रहा. भक्तों ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के संदेश को श्रद्धा और उत्साह के साथ आत्मसात किया. इस मौके पर वीवीआईटी के निदेशक राजेश मिश्रा, राणाप्रताप सिंह, आतीश सनातनी आदि उपस्थित रहे. उक्त जानकारी शंकराचार्य जी महाराज के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने दी है.

हिसार में 62 बेसहारा पशुओं को पकड़कर भेजा गौ अभ्यारण

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नगर निगम द्वारा सोमवार को 31 बेसहारा पशुओं को पकड़ा गया। वहीं मंगलवार को भी 31 बेसहारा पशुओं को पकड़ा गया। इस प्रकार 2 दिन में 62 पशुओं को पकड़कर गौ-अभ्यारण भेजा गया। पशु पकड़ों अभियान के नोडल ऑफिसर सुरेन्द्र वर्मा ने बताया कि इस दौरान पुलिस व तहबाजारी टीम के इंचार्ज सुरेन्द्र शर्मा और उनकी टीम मौजूद रही। हालांकि इस अभियान का असर शहर में दिखाई नहीं दे रहा है। संदीप एएसआई ने बताया कि निगमायुक्त नीरज के आदेशानुसार शहर से बेसहारा पशुओं को पकडऩे निरंतर जारी है। सोमवार और मंगलवार शांति नगर, राजीव नगर, श्याम लाल ढाणी, पड़ाव क्षेत्र, विकास नगर, बरवाला चुंगी, एयरपोर्ट चौक से 62 पशुओं को पकड़कर गौ-अभ्यारण ढंढूर भेजा गया।

पूनम झावर दोबारा परदे पर कहर ढाने को बेताब!

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एयरपोर्ट पर पूनम झावर का जलवा, हॉट लुक देख फैन्स बोले – “मोहरा की मासूम परी अब भी हॉटनेस में किसी से कम नहीं

90 के दशक की सुपरहिट फिल्म ‘मोहरा’ से रातोंरात फेमस हुईं पूनम झावर ने उस दौर में अपनी भोली-भाली सूरत और मासूम सादगी से लाखों दिलों को दीवाना बना दिया था। उनकी कजरारी आंखें, मीठी मुस्कान और देसी नज़ाकत ने दर्शकों पर ऐसा जादू चलाया कि “ना कजरे की धार…” आज भी लोगों की रोमांटिक प्लेलिस्ट में नंबर वन पर है।

लेकिन हाल ही में जब पूनम मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट हुईं, तो नज़ारा ही कुछ और था। एयरपोर्ट का पूरा माहौल उनके जलवे से चमक उठा। फिट बॉडी, ग्लैमरस आउटफिट और जबरदस्त कॉन्फिडेंस के साथ उनकी एंट्री देखकर फैन्स के होश उड़ गए। किसी ने कहा, “क्या ये वही मोहरा वाली सिंपल साड़ी गर्ल है?” तो किसी ने चुटकी ली – “अब तो ये हॉटनेस की क्वीन लग रही हैं।”

सबसे दिलचस्प बात ये है कि पूनम का ये नया अवतार कॉस्मेटिक सर्जरी या फिल्टर्स का कमाल नहीं है, बल्कि उनकी मेहनत, फिटनेस और पॉजिटिव वाइब्स का नतीजा है।

सोशल मीडिया पर उनका वीडियो आते ही धूम मच गई। एक यूज़र ने लिखा, “बिना सर्जरी इतनी हॉट दिखना कोई मज़ाक नहीं, पूनम झावर सच में नेचुरल ब्यूटी की मूरत हैं।” वहीं दूसरे ने कमेंट किया, “90’s की सादगी गर्ल अब बन गईं बोल्डनेस की ब्रांड एंबेसडर।”

अब सवाल ये है कि जिस एक्ट्रेस ने सिर्फ एक फिल्म और एक गाने से करोड़ों दिलों में जगह बना ली थी, अगर वो दोबारा बड़े पर्दे पर इस ग्लैमरस अंदाज़ में लौटें तो क्या होगा? यकीन मानिए, बॉलीवुड में फिर से हॉटनेस का तूफ़ान आ जाएगा।

पूनम झावर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ नंबर है, लेकिन जलवा हमेशा बरकरार रहता है।

शाहिद कपूर और पवन सिंह को आदर्श मानती है पूजा सिंह

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भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अदाकारी और खूबसूरती से दर्शकों का दिल जीतने आ रही हैं अभिनेत्री पूजा सिंह। उनकी आने वाली फिल्म “मांग भरो सजना” जल्द बड़े पर्दे पर रिलीज़ होने वाली है। प्रदीप के. शर्मा द्वारा निर्मित और राकेश त्रिपाठी के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक शानदार प्रेम त्रिकोण पर आधारित फैमिली ड्रामा है। इसमें पूजा सिंह का किरदार बेहद उम्दा बताया जा रहा है।

पूजा की भोजपुरी इंडस्ट्री में शुरुआत फिल्म “जान” से हुई थी, जिसमें उन्होंने दोस्त का किरदार निभाया था। इसके बाद वह लगातार चार-पांच भोजपुरी और हिंदी फिल्मों के साथ-साथ बीस से अधिक म्यूजिक वीडियो में नज़र आ चुकी हैं। हिंदी शॉर्ट फिल्म “बाबुल की घर की विदाई” में उनके भावनात्मक अभिनय को भी खूब सराहा गया। साथ ही पूजा ने कई ब्रांड्स के लिए प्रिंट शूट किए हैं, जिनमें साड़ी, ज्वेलरी और एथनिक वियर शामिल हैं।

दिल्ली से मुंबई तक का उनका सफर संघर्ष और जुनून से भरा रहा। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली में जॉब की, आर्थिक रूप से मजबूत हुईं और फिर अपने सपनों को पूरा करने मायानगरी पहुंचीं। पहले ही प्रोजेक्ट में पूजा ने अपनी अदाकारी से सबका ध्यान खींच लिया।

आज पूजा सिंह न केवल फिल्मों और म्यूजिक वीडियोज़ में काम कर रही हैं बल्कि अपनी एक्टिंग और डांसिंग स्किल को निखारने के लिए क्लासिकल और बॉलीवुड डांस की ट्रेनिंग भी ले चुकी हैं। उनका मानना है कि कैमरे के सामने नर्वसनेस से जूझने के बाद भी कभी हार नहीं मानना चाहिए।

पूजा की ख्वाहिश है कि वह भविष्य में हॉलीवुड स्टाइल एक्शन रोल्स में भी अपना टैलेंट दिखाए। पवन सिंह और शाहिद कपूर को वह अपना आदर्श मानती है। उनका कहना है कि मुंबई कभी किसी को खाली हाथ नहीं जाने देती, बस आपको धैर्य, लगन और जुनून से आगे बढ़ना होगा।

पूजा सिंह की कहानी इस बात का सबूत है कि सपनों को साकार करने के लिए मेहनत और विश्वास सबसे बड़ी कुंजी है।

सुरेश वाडकर गायेंगे लाइट ऑफ लाइफ ट्रस्ट के सुर संगम कॉन्सर्ट में राजकपूर के फिल्मों के गीत

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मुंबई। लाइट ऑफ लाइफ ट्रस्ट द्वारा ‘सुर संगम’ संगीतमय कॉन्सर्ट का आयोजन 19 सितंबर की शाम 7 बजे जमशेद भाभा थियेटर एनसीपीए मुंबई में किया जाएगा। जहां सुप्रसिद्ध गायक सुरेश वाडकर, संजीवनी भेलांडे, चिराग पांचाल और मुख्तार शाह अपनी प्रस्तुतियां देंगे। कॉन्सर्ट में फिल्मकार राजकपूर की फिल्मों के चुनिंदा गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी।
आजीवासन जुहू में ट्रस्ट की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में गायक सुरेश वाडकर, गायिका संजीवनी भेलांडे, ट्रस्ट की फाउंडर विली डॉक्टर, मैनेजिंग ट्रस्टी अशदीन डॉक्टर और चीफ एक्जिक्यूटिव ऑफिसर रमेश दशवानी उपस्थित रहे। उसी अवसर पर सुरेश वाडकर ने कहा कि संस्था चलाना बड़ी जिम्मेदारी है और इसके लिए फंड व सक्षम लोगों का जुड़ाव बेहद जरूरी है। लाइट ऑफ लाइफ ट्रस्ट ग्रामीण बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए लगातार काम कर रहा है इसीलिए इससे जुड़कर मुझे प्रसन्नता हो रही है। शिक्षा समाज में सम्मान और प्रगति का सबसे बड़ा साधन है। मैं संगीत शिक्षण संस्थान चलाता हूं ताकि लोग अपने जीवन में सम्मान प्राप्त करें। संजीवनी भेलांडे ने राजकपूर के चुनिंदा गीतों की सूची तैयार की है, जिसकी रिहर्सल शुरू हो चुकी है।
इस संगीत कार्यक्रम से प्राप्त होने वाली धनराशि का उपयोग ग्रामीण बच्चों के शिक्षा और विकास के लिए किया जाएगा।

हीना सोनी के अभिनय को परिवार से मिलता है पूरा समर्थन

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अभिनेत्री हीना सोनी मूलतः मध्यप्रदेश राज्य के इंदौर शहर की रहने वाली हैं। पिछले कई वर्षों से वे मुंबई में रह रही हैं और अभिनेत्री के रूप में कार्य कर रही हैं।

हीना ने अपने अभिनय की शुरुआत टिक-टॉक से की। वह शौकिया तौर पर वीडियो बनाती थीं। जब उनके परिवार ने ये वीडियो देखे तो उन्हें बहुत पसंद आए और उन्होंने हीना को पूरा समर्थन दिया। इसके बाद हीना के लाखों सब्सक्राइबर बने और उनके अंदर अभिनय की गहरी रुचि पैदा हुई। इसी जुनून ने उन्हें मायानगरी मुंबई की राह पर ला खड़ा किया।

मुंबई आने के बाद हीना ने कई ऑडिशन दिए। सिर्फ 15 दिन बाद ही उनका चयन दर्शन जरीवाला की एक विज्ञापन फिल्म के लिए हुआ। इसके बाद उन्हें दूरदर्शन के शो जुर्म और सज़ा में काम करने का अवसर मिला, जिसकी शूटिंग सूरत में हुई। हालांकि, किसी कारणवश यह शो रिलीज़ नहीं हो सका।

इसके बाद हीना को छोटी सरदारनी और ससुराल सिमर का जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों में काम करने का अवसर मिला। तभी कोरोना महामारी आई, जिससे फिल्म और टीवी इंडस्ट्री पूरी तरह ठप हो गई। वह वापस अपने घर लौट गई। उस समय इंदौर में धारावाहिक एक दूजे की परछाई की शूटिंग सख्त सुरक्षा व्यवस्था के साथ हो रही थी और हीना को इस धारावाहिक में अभिनय करने का मौका मिल गया।

हीना को डेटॉल जैसे बड़े ब्रांड्स के विज्ञापन करने का मौका मिला। उन्होंने टीवी और प्रिंट के लिए कई विज्ञापन शूट किए। आगे भी वे इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। आज उनके पास खुद का ब्रांड “सोही साड़ीज” भी है।

जल्द ही हीना की आगामी तमिल फिल्म वन बाय फोर रिलीज़ होने जा रही है। इसके साथ ही उनका नया म्यूजिक वीडियो सांग भी आने वाला है, जिसकी शूटिंग पूरी हो चुकी है। इससे पहले भी वे कई म्यूजिक वीडियो, वेब सीरीज़ और विज्ञापनों में काम कर चुकी हैं। उन्होंने मॉडलिंग और रैम्प वॉक भी किया है।

सोशल मीडिया पर भी हीना काफी लोकप्रिय हैं। इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं। अपने यूट्यूब चैनल पर वे ट्रैवलिंग और खूबसूरत लोकेशन से जुड़े ब्लॉग्स डालती हैं, जिन्हें दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। जल्द ही वे अपने चैनल पर दो बड़े सरप्राइज़ भी लेकर आने वाली हैं।

हीना को निर्देशक इम्तियाज अली, संजय लीला भंसाली और अनुराग कश्यप की फिल्में बेहद पसंद हैं। वे मदर टेरेसा को अपना आदर्श मानती हैं और निकट भविष्य में एक एनजीओ खोलना चाहती हैं, जो महिलाओं और वृद्धजनों की सहायता के लिए कार्य करेगा। वैसे वे अभी भी जरूरतमंदों की मदद करती रहती हैं।अगर भविष्य में मौका मिला तो जनसेवा हेतु वह राजनीति में भी आना चाहती हैं।

हीना को डांस और म्यूजिक सुनना पसंद है। उनका मानना है कि हर इंसान को स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर होना चाहिए, खासकर महिलाओं को। वे कहती हैं कि महिलाओं में इतना आत्मविश्वास होना चाहिए कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए उन्हें किसी और का सहारा न लेना पड़े। डर या समाज के बंधनों से पहले ही अपने सपनों को पिंजरे में कैद नहीं करना चाहिए। खुद पर विश्वास इतना मजबूत होना चाहिए कि उड़ान भरने के लिए आसमान भी छोटा पड़ जाए।

शिवजी की अनन्य भक्त है अभिनेत्री माही किरण 

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अभिनेत्री माही किरण मेहनती, स्वाभिमानी और आत्मविश्वास से भरे व्यक्तित्व की धनी हैं। कई वर्षों से वे मुंबई में रह रही हैं और अपने अभिनय के दम पर निरंतर आगे बढ़ रही हैं। उनके लगभग चार म्यूजिक वीडियो जल्द रिलीज़ होने वाले हैं, जिनमें गायक अल्तमस फरीदी का गीत भी शामिल है। इससे पहले वे दिग्गज गायक राहत फतेह अली खान के म्यूजिक वीडियो में अभिनय कर चुकी हैं।

मध्यप्रदेश के सागर ज़िले से ताल्लुक रखने वाली माही का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया है। भगवान शिव की अनन्य भक्त माही मानती हैं कि उन्हीं की कृपा और साहस से उन्होंने अपने सपनों की राह पकड़ी है।

दिलचस्प बात यह है कि माही मुंबई सिंगर बनने आई थीं, लेकिन किस्मत ने उन्हें अभिनय की राह पर मोड़ दिया। एक नामी निर्देशक ने उन्हें गायन के बजाय अभिनय करने का ऑफर दिया और माही ने यह चुनौती स्वीकार कर ली। यही मौका उन्हें राहत फतेह अली खान के गाने में अभिनय के रूप में मिला। इस म्यूजिक वीडियो की शूटिंग पहले हो चुकी थी, मगर बाद में माही के साथ दुबारा कश्मीर की वादियों में इसका फिल्मांकन किया गया।

जल्द ही माही दक्षिण भारतीय फिल्मों के आइटम सॉन्ग में नज़र आएंगी। वे अब तक लगभग दो शॉर्ट फिल्मों में काम कर चुकी हैं। उन्हें स्ट्रॉन्ग और इमोशनल भूमिकाएं करना बेहद पसंद है, हालांकि वे हर तरह की भूमिकाओं के लिए तैयार रहती हैं। माही ने अभिनय और डांस का प्रशिक्षण लिया है। साथ ही उन्हें हॉर्स राइडिंग, ड्राइविंग, सिंगिंग और पर्वतारोहण का भी शौक है।

माही, अभिनेता अजय देवगन से बेहद प्रभावित हैं। उनकी फिल्में जान और इतिहास माही की पसंदीदा फिल्में हैं। माही का कहना है कि वे पहले खुद को इस योग्य बनाएंगी कि भविष्य में अजय देवगन के साथ काम कर सकें। वे अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा और पॉप स्टार शकीरा के व्यक्तित्व से भी प्रेरित हैं, जबकि गायिका सुनिधि चौहान के गाने सुनना उन्हें अच्छा लगता है। माही का सपना है कि यदि अवसर मिला तो वे अभिनय के साथ-साथ गायन में भी अपना हुनर दिखाएंगी।

निर्देशक रोहित शेट्टी, अजय देवगन और संजय लीला भंसाली उनकी पसंदीदा लिस्ट में शामिल हैं और वे इनकी फिल्मों की दीवानी हैं। माही कहती हैं कि उन्होंने जीवन में काफी संघर्ष किया है। अगर वे कामयाब होती हैं, तो अपने शहर और गांव के ज़रूरतमंदों की मदद करेंगी और गांव के लोगों को काम का अवसर देंगी ताकि रोजगार की तलाश में उन्हें बाहर न जाना पड़े।

आज माही किरण का सफर जारी है। वे नए प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं और पूरे जुनून व मेहनत के साथ अपने सपनों को साकार करने में लगी हुई हैं।