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तालाब में उतराते मिले गायों के शव,

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फरीदपुर के गांव पऊनगला में करीब 13 साल से जलकुंभी और अमर बेल से घिरा तालाब अमृत की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा है। जिला प्रशासन ने अमृत योजना के तहत कई तालाबों को अमृत सरोवर में बदला लेकिन इस तालाब की अनदेखी की वजह से इसका अस्तित्व ही समाप्त नहीं हुआ बल्कि यह गोवंशीय पशुओं की कब्रगाह बन रहा है। जनवरी में कई गोवंशों को कुछ लोगों ने दौड़ा दिया, जिनमें से कई गोवंश तालाब में जाकर जलकुंभी और अमरबेल फंस गए और डूबकर उनकी मौत हो गई। अब तालाब से बदबू आने से स्थानीय लोग परेशान हैं। शनिवार को लोगों ने तालाब के पास जाकर विरोध भी जताया।

कुछ दिन से आबादी से घिरे तालाब में गोवंशीय पशुओं के सड़ने से तेज बदबू आ रही है। इससे ग्रामीणों का सांस लेना मुश्किल हो गया। ग्रामीणों ने कई बार तालाब की सफाई कराने के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (1076) पर कॉल करने के साथ प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी से शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। शनिवार सुबह ज्यादा दुर्गंध आने पर तमाम महिलाएं तालाब के पास एकत्र हो गईं और सरकारी व्यवस्था के विरुद्ध आक्रोश जताया।

खंड विकास कार्यालय भुता स्थित नरेगा में कार्यरत एक कर्मचारी ने ग्राम प्रधान से लेकर सचिव और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक समस्या हल न होने पर अमृत विचार को गंभीर मामले से अवगत कराया है। कर्मचारी का कहना है कि कई दिनों से तालाब से आने वाली बदबू ने ग्रामीणों को रहना मुश्किल कर दिया है। साल 2010 में बसपा सरकार में इस तालाब की खुदाई हुई थी। पूरे गांव का गंदा पानी भी इसी तालाब में पहुंचता है। गहरे तालाब में जलकुंभी इतनी हो गयी है कि जानवर फंस जाए तो उसका निकलना मुश्किल है।

लोग पड़ने लगे बीमार, संक्रमण फैलने की आशंका
जनवरी में डूबकर मरे गाेवंशीय पशुओं में से तीन के शव तालाब के ऊपर दिख रहे हैं। कौवे मांस नोच रहे हैं और कुत्ते भी पहुंच रहे हैं। नाराज लोगों का कहना है कि लोग बीमार पड़ने लगे हैं। यदि अभी भी सफाई नहीं हुई तो संक्रमण फैलने से हालात और ज्यादा खराब हो जाएंगे। तालाब में आए दिन ग्रामीणों के पालतू पशु भी गिरते रहते हैं, जिन्हें बड़ी मुश्किल से निकाला जाता है।

गेहूं की फसल खाने गए गोवंश को लोगों ने दौड़ा दिए थे
ग्राम प्रधान सुखवंत सिंह की बागडोर संभालने वाले उनके भाई मुख्त्यार का कहना है कि तालाब के आसपास गेहूं की फसल खड़ी है। गोवंशीय पशु गेहूं की फसल खाने को जाते हैं तो गांव के लोग उनकी जान की फिक्र किए बगैर उन्हें दौड़ाया, जिस वजह से पशु गहरे तालाब में जाकर फंस गए और निकल नहीं सके। इससे उनकी मौत हो गई, जिन लोगों ने पशुओं को दौड़कर तालाब में किया था, यदि वह लोग बता देते तो शायद उनकी जान बच जाती। अब उनके शव पानी में सड़ गल गए और उतराने लगे, उसी से बदबू आ रही है। पुआल मंगाकर मोटा कर ढक दिया है। गोवंशीय पशुओं के शव बुरी तरह से गल गए हैं। उन्होंने अधिकारियों के लिए तालाब की जेसीबी से सफाई के लिए परमिशन लेने के लिए कागजी कार्रवाई कर दी है। कहा कि अब तक वह 31 गायों को दफना चुके हैं और चार गायों को आईवीआरआई भेज चुके हैं। तालाब काफी पुराना और गहरा है। तालाब में बेल की बेल बहुत लंबी-लंबी और घनी झाड़ियां हैं।

क्या कहते हैं पीड़ित ग्रामीण
यहां ये तीसरी बार है जब गोवंशीय पशु तालाब में ऊपर आए हैं और बदबू से यहां रुकना मुश्किल होता है। हमारा घर तालाब के पास ही है, जिससे बच्चों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है– सर्वेश कुमार।

ग्रामीणों के पालतू पशु तालाब में चले जाते हैं। पिछले सप्ताह हमारी भैंस भी तालाब में गिर गई थी, जिससे काफी मशक्कत के बाद निकालना संभव हुआ। यदि सफाई नहीं हुई तो कोई भी हादसा हो सकता है ।

संघ प्रिय गौतम
कई बार अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी समस्या का निस्तारण नहीं हुआ है। इस तालाब की सफाई 13 साल पहले हुई थी, उसके बाद कोई काम नहीं किया गया। अधिकारियों को इसकी सुध लेनी चाहिए- ममता सिंह।

सफाई में बोले बीडीओ और वीडीओ
बस्ती में पानी के मोटर और सबमर्सिबल घर-घर होने की वजह से लोग बेवजह पानी बहुत बर्बाद करते हैं। सारा पानी तालाब में जाता है। तालाब गहरा भी है। गांव जाकर प्रधान और गांव के लोगों के साथ बैठकर तालाब की सफाई के लिए कोई रास्ता निकालेंगे और साफ कराएंगे।

आदेश यादव, ग्राम विकास अधिकारी पाऊनगला
पांच महीने पहले गांव के लोगों ने कुछ गोवंशीय पशु दौड़ा दिये जो तालाब में जाकर फंस गए। अब शव ऊपर आए हैं। तालाब गहरा और खरपतवार से भरा हुआ है। बीच बस्ती में है समस्या बड़ी है फिर भी समस्या का समाधान करने में टीम के साथ लगा हूं-विनय शंकर मनी खंड विकास अधिकारी भुता।

गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने पर चारों शंकराचार्यों का एक मत

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Chhattisgarh News: गौ हत्या के विरोध में और गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने को लेकर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अब सड़क तक लड़ाई लड़ेंगे. इस संकल्प को पूरा करने के लिए सनातनियों के सबसे बड़े धर्मगुरु अब सड़क पर उतरेंगे. इसकी शुरुआत उन्होंने भिलाई से की, जहां आज 10 मार्च को सुबह 10 बजकर 10 मिनट पर 10 मिनट के लिए संकेत स्वरूप धरना दिया. उन्होंने सभी देशवासियों से अपने-अपने स्थानों पर रहते हुए इसके लिए 10 मिनट के सांकेतिक भारत बंद का आह्वान भी किया था.

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी अशोक साहू ने बताया पूज्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज अपने आठ दिवसीय प्रवास पर छत्तीसगढ़ में हैं. इस प्रवास के दौरान उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में पहुँचकर गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने चल रहे आंदोलन के लिए अपने-अपने स्थानों में रहकर सनातनियों से समर्थन मांगा है.

गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने पर चारों शंकराचार्यों का एक मत

बता दें पूर्व में जगद्गुरु शंकराचार्य ने वृंदावन में गौ संसद का आयोजन कर गौमाता राष्ट्रमाता आंदोलन की शुरुआत की थी. फिर दिल्ली के एक सभागार में त्रिदिवसीय गौ संसद का आयोजन कर इससे संबंधित मांग पत्र मीडिया के समक्ष जारी किया गया था. इस आंदोलन में चारों पीठो के शंकराचार्यों की सहमति है.

गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दे केंद्र सरकारः अधीर कौशिक

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हरिद्वार, 09 मार्च (हि.स.)। महाशिवरात्रि पर्व के उपलक्ष्य में शिवमूर्ति व्यापार मंडल व श्री अखण्ड परशुराम अखाड़े ने संयुक्त रूप से शनिवार को शिवमूर्ति चौक पर भगवान शिव का अभिषेक, आरती और पूजा अर्चना की।

इसके उपरांत श्रद्धालुओं को खीर का प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर श्री अखण्ड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग की।

भगवान श्रीकृष्ण भी गाय की सेवा करके गोपाल, गोविन्द आदि नामों से पुकारे गये

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प्राचीन भारत के विचारकों ने गाय के महत्व को पहचाना था। उन्होंने पाया कि गाय की दूध स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक है,बैलों से खेती, आवागमन के साधन, एवं माल वाहन, गोमूत्र से खाद, कीटनाशक एवं औषिधिय उपयोग तथा भूमि की उत्पादकता बढ़ाने हेतु गोबर खाद ही उत्तम है।

जो आधारित कृषि की ग्राम स्वालंबन के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। उन्होंने गौ की महिमा मंडित करते हुए गाय को माता का स्थान दिया। गाय को धर्म में इस तरह गूंथ दिया की भारत के उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम क्षेत्र में अनेक धार्मिक मत-मतोतरों के होते हुए भी गाय को सभी ने पूज्यनीय माना।

भगवान श्रीकृष्ण भी गाय की सेवा करके गोपाल, गोविन्द आदि नामों से पुकारे गये। जब तक गौ आधारित स्वावलंबी खेती होती रही तब तक भारत विकसित धनवान राष्ट्र रहा, यहाँ की सम्पदा के लालच में दिया देशों को लोग भारत पर आक्रमण करते रहे .

गौधन की अवनति के कारण

  1. भैंस का ढूढ़ गाढ़ा व अधिक चिकनाई वाला होने से दूध व्यवसाय में भैंस के दूध को गाय के दूध पर वरीयता दी जाने लगी।
  2. आवागमन के साधन बढ़ने से बैलों की उपयोगिता इस क्षेत्र में सीमित रह गई है।
  3. ट्रेक्टरों के बढ़ते उपयोग से बैलों की उपयोगिता कृषि कार्यों में शनैः – शनै: घटती जा रही है।
  4. रासायनिक खादों एवं कीटनाशक से गोबर, गोमूत्र के उपयोग में कमी आई है। इन सबका प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। गाँव अब गौ आधारित स्वावलंबी नहीं रहे। उन्हें अपने समस्त कार्यों एवं कृषि आदानों के लिए शहर की ओर देखने पड़ रहा है।

गाँव में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए तथा कृषकों की आय में वृद्धि के लिए हमें पुन: गौ आधारित स्वावलंबी कृषि की ओर वापस जाना होगा। बदले हुए हालात में आज कम से कम गाय के दूध का उत्पादन बढ़ाकर तथा गोबर व गौमूत्र की प्रयोग से रासायनिक खाद व कीटनाशकों पर होने वाले खर्च व गौमूत्र के प्रयोग से रासायनिक खाद व कीटनाशकों पर होने वाले खर्च को बचाकर ग्राम लक्ष्मी का पुन: आह्वान किया जा सकता है।

विभिन्न देशों की गायों के दूध उत्पादन के आंकड़ों को देखकर ऐसा लगा कि विकसित राष्ट्रों के गायों का प्रति व्यात दूध उत्पादन विकासशील देशों की गायों के प्रति बयात दूध उत्पादन से कई गुना अधिक है। उदाहरण के लिए इजरायल में 9000 लीटर, अमेरिका में 7000 लीटर, हॉलैंड एवं जर्मनी में 6000 लीटर, जापान में 3000 लिटर दूध एक गाय एक व्यात में देती है जबकि भारत की एक गाय का औसत दूध उत्पदान विकास का पैमाना है। पंजाब, गुजरात, की गायें अधिक दुधारू हैं, ये प्रदेश भी विकसित हैं। म. प्र. में मालवा, निमाड़, मुरैना का गौधन दुधारू है अत: इन क्षेत्रों का किसान भी सम्पन्न है। इससे स्पष्ट है कि एक ब्यात में गाय का दूध जितना अधिक होगा, उतना ही सम्पन्न किसान, प्रदेश और राष्ट्र होगा। कृषि क्षेत्र में अब यह स्थिति आ गई है कि उत्पादन अब लगभग स्थिर हो गया है। उतनी ही उपज प्राप्त करने के लिए अब आदानों पर अधिक व्यय करना पड़ता है। परिवार के आकार बढ़ने से अब जोत के आकार भी छोटे होते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में अब गौपालन ही एक ऐसा व्यवसाय बचा है जिसमें उत्पादन बढ़ाने की अपार संभावना है। अनुभव यह बतलाता है कि एक संकर गाय, औसत देखभाल में एक ब्यात्त में 1500 से 1800 लिटर दूध देती हैं जिसका मूल्य साधारण तथा एक एकड़ दो फसली क्षेत्र से प्राप्त उत्पादन के बराबर होता है।  अत: किसान की आर्थिक हालत पता करने का यह भी एक पैमाना हो सकता है कि जिस किसा के पास जितनी दुधारू संकर गायें हैं, उसकी आमदनी उतनी ही एकड़ों में प्राप्त हो फसली क्षेत्र से प्राप्त आमदनी से होगी। गाय बढ़ाने के लिए गौपालन सर्वोत्तम साधन है।

जहाँ तक भैंस से प्रतियोगिता का प्रश्न है, विश्व में सबसे अच्छी भैंस केवल भारत में ही है। उनका एक ब्यात का दूध उत्पादन 1200 से 1500 लिटर रही है। भैंस के दूध को बढ़ाने की क्षमता सीमित है, उसमें सूखे के दिन अधिक होते हैं तथा उसका प्रजनन मौसमी होता है, उसके रख्राव का खर्च भी अधिक होता है, इसलिए भैंस एक अच्छी दुधारू गाय की तुलना में लम्बे समय तक नहीं टिक पायगी। अत: दूर दृष्टि से सोच कर गाय पालना ही लाभप्रद होगा .

गौपालन में सावधानियाँ

गौपालन में लगे हुए उद्यमियों को निम्न बिंदूओं का ध्यान रखना आवश्यक है, अन्यथा लाभ में निरंतर कमी आती जाएगी।

क. प्रजनन

  • अपनी आय को अधिक दूध वाले सांड के बीज से फलावें ताकि आने वाली संतान अपनी माँ से अधिक दूध देने वाली हो। एक गाय सामान्यत: अपनी जिन्दगी में 8 से 10 बयात दूध देती हैं आने वाले दस वर्षों तक उस गाय से अधिक दूध प्राप्त होता रहेगा अन्यथा आपकी इस लापरवाही से बढ़े हुए दूध से तो आप वंचित रहेंगे ही बल्कि आने वाली पीढ़ी भी कम दूध उत्पादन वाली होगी। अत: दुधारू गायों के बछड़ों को ही सांड बनाएँ।
  • गाय के बच्चा देने से 60 से 90 दिन में गाय पुन: गर्भित हो जाना चाहिए। इससे गाय से अधिक दूध, एवं आधिक बच्चे मिलते हैं तथा सूखे दिन भी कम होते है।
  • गाय के फलने के 60 से 90 दिन बाद किसी जानकार पशु चिकित्सा से गर्भ परिक्षण करवा लेना चाहिए। इससे वर्ष भर का दूध उत्पादन कार्यक्रम तय करने में सुविधा होती है।
  • गर्भावस्था के अंतिम दो माह में दूध नहीं दूहना चाहिए तथा गाय को विशेष आहार देना चाहिए। इससे गाय को बच्चा जनते वक्त आसानी होती है तथा अगले बयात में गाय पूर्ण क्षमता से दूध देती है।

ख. आहार

  • दूध उत्पादन बढ़ाने तथा उसकी उत्पादन लागत कम करने के लिए गाय की सन्तुलित आहार देना चाहिए। संतुलित आहार में गाय की आवश्यकता के अनुसार समस्त पोषक तत्व होते हैं, वह सुस्वाद, आसानी से पचने वाला तथा सस्ता होता है।
  • दूध उत्पादन से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए, पशु को बारह मास पेट भर हरा चारा खिलाएं। इससे दाने का खर्च भी घटेगा तथा गाय का नियमित प्रजनन भी होगा।
  • गाय को आवश्यक खनिज लवण नियमित देंवे।
  • गाय को आवश्यक चारा- दाना- पानी नियत समय के अनुसार देवे। समय के हेर-फेर से भी उत्पादन प्रभावित होता है।

ग. रोग नियंत्रण

  • संक्रामक रोगों से बचने के लिए नियमित टिके लगवाएं।
  • बाह्य परिजीवियों पर नियंत्रण रखे। संकर पशुओं में तो यह अत्यंत आवश्यक है।
  • आन्तरिक परजीवियों पर नियंत्रण रखने के लिए हर मौसम परिवर्तन पर आन्तरिक परजिविनाशक दवाएँ दें।
  • संकर गौ पशु, यदि चारा कम खा रहा है या उसने कम दूध दिया तो उस पर ध्यान देवें। संकर गाय देशी गाय की आदतों के विपरीत बीमारी में भी चारा खाती तथा जुगाली भी करती है।
  • थनैला रोग पर नियंत्रण रखने के लिए पशु कोठा साफ और हवादार होना चाहिए। उसमें कीचड़, गंदगी न हो तथा बदबू नहीं आना चाहिए। पशु के बैठने का स्थान समतल होना चाहिए तथा वहाँ गड्ढे, पत्थर आदि नुकीले पदार्थ नहीं होना चाहिए। थनैला रोग की चिकित्सा में लापरवाही नहीं बरतें।

गौवत्सों का पोषण

गौवत्सों का पोषण सही तरीके से किया जाए तो वे 2.11 से 3 वर्षों की उम्र में गाय बन जायेंगे अन्यथा वे 4 से 5 साल की उम्र में गाय बनेंगे। यह स्थिति लाभप्रद नहीं हैं। गौवत्सों का पालन चिकित्सकों की राय से करें।

लेखा – पशु के दोध उत्पादन, दूध केने के दिन, सूखे दिन, दो बयात में अंतर, प्रजनन,उपचार आदि का भी लेखा- जोखा रखना चाहिए। इससे पशु के मूल्यांकन में सहायता मिलती है तथा कम लाभप्रद या अलाभप्रद पशु के छंटनी आसानी से की जा सकती है।

इसके अतिरिक्त गोबर व गौमूत्र का युक्ति- युक्त उपयोग कर रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर होने वाले खर्च को बचाकर आमदनी बढ़ाई जा सकती है। दूध एक ऐसा पदार्थ है जो जितनी भी मात्रा में उत्पादित किया जावे उसे बाजार मिलना ही है।

जैसे- जैसे समृद्धि बढ़ेगी, वैसे-वैसे भोजन में दूध से बने पदार्थ की खपत बढ़ेगी ही। अत: गौपालन को पूरक आ पूर्णकालिक व्यवसाय के रूप में अपनाकर किसान बंधु अपनी आय बढ़ाकर रोजगार के नये द्वार खोल सकते हैं।

स्रोत : जेवियर समाज सेवा संस्थान, राँची

सरकारी स्कूलों में बच्चों को नहीं मिलेगा गाय का दूध, शिक्षा विभाग का यू टर्न

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Mukhyamantri Bal Gopal Yojana : जयपुर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पहली से 8वीं तक के बच्चों को पाउडर दूध की जगह गाय का दूध देने की तैयारियां की जा रही थी। लेकिन, शिक्षा विभाग ने बच्चों को गाय का दूध उपलब्ध कराने वाले आदेश पर यू टर्न ले लिया है। बता दें कि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के स्कूलों में दिए जाने वाले पाउडर दूध की जगह अच्छी व्यवस्था लागू करने की घोषणा करने के बाद बच्चों को गाय का दूध देने की तैयारी की जा रही थी।

शिक्षा विभाग ने बच्चों को गौ माता का दूध उपलब्ध कराने वाले आदेश पर यू टर्न लेते हुए सोशल साइट एक्स पर स्पष्टीकरण दिया। शिक्षा विभाग ने लिखा कि अशोक असीजा, एडिशनल डायरेक्टर माध्यमिक शिक्षा बीकानेर द्वारा 5 मार्च को आयुक्त राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद् को आवश्यक करवाई के लिए पत्र लिखा गया था। जिसमें राज्य के समस्त विद्यालयों में साफ-सुथरे शौचालय मय जल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था। लेकिन, पत्र में विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को गाय का प्राकृतिक दूध उपलब्ध कराने के कोई निर्देश नहीं दिए गए थे।

शिक्षा विभाग ने बताया कि मीड डे मील कार्यालय जयपुर से विद्यालयों में विद्यार्थियों को गाय का प्राकृतिक दूध उपलब्ध कराने के कोई निर्देश नहीं दिए गए थे। राज्य सरकार के स्तर से भी कोई ऐसा निर्देश नहीं जारी किया गया है और न ही कोई पत्र भेजा गया है। ऐसे में यह तो साफ है कि अभी बच्चोंं को स्कूलों में पाउडर वाला दूध ही पीना पड़ेगा।

क्यों लिया शिक्षा विभाग ने यू टर्न?

शिक्षा विभाग ने स्कूलों में गौ माता का दूध सप्लाई करने और बच्चों को पाउडर के दूध से छुटकारा दिलाने के अधिकारियों को निर्देश दिए थे। लेकिन, शिक्षा विभाग के इस आदेश के बाद सवाल उठने लगे थे कि आखिर रोजाना इतना दूध कहां से आएगा? ऐसे में अब शिक्षा विभा को अपना आदेश वापस लेना पड़ा।

मंत्री दिलावर की इस घोषणा से हरकत में आया था प्रशासन

दरअसल, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के स्कूलों में दिए जाने वाले पाउडर दूध की जगह अच्छी व्यवस्था लागू करने की घोषणा करने के बाद शिक्षा निदेशालय से लेकर आयुक्तालय मिड डे मील तथा राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद तक हरकत में आ गया था। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने तो स्कूल शिक्षा परिषद के राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त को इस बारे में पत्र भी लिखा था। इसमें सरकारी स्कूलों में पाउडर वाले दूध के स्थान पर गौ माता का प्राकृतिक ताजा दूध उपलब्ध कराने के राज्य सरकार के निर्देशों का जिक्र किया गया था।

क्या है मुख्यमंत्री बाल गोपाल योजना?

बता दे कि पहले गांव के बच्चों को गौपालक से दूध लेकर तथा शहरी स्कूलों के बच्चों को डेयरी का दूध दिया जाता था, लेकिन कोरोनाकाल में दूध वितरण योजना ठप हो गई थी। कोरोना के बाद जब इसे पुनः मुख्यमंत्री बाल गोपाल योजना के नाम से शुरू किया गया, तो पाउडर के दूध की सप्लाई देनी शुरू की। इस योजना के तहत अभी कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को 15 ग्राम पाउडर दूध से 150 मिलीलीटर दूध तथा कक्षा छह से आठ के बच्चों को 20 ग्राम पाउडर दूध से 200 मिलीलीटर दूध मिलता है।

हाइफा प्रतियोगिता में ‘फांस-47’ चुनी गई सर्वश्रेष्ठ शॉर्ट फिल्म

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मुंबई (अनिल बेदाग) : युवा प्रतिभाओं को सम्मानित करने के लिए इन दिनों देश भर में अनेक कार्यक्रम चल रहे हैं। अथक प्रयासों के चलते कई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं जिनमें अकूत टैलेंट है जो जब तक नजर नहीं आया था। ऐसे में उन्हें पुरस्कृत करना जरूरी था।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हरियाणवी इनोवेटिव फिल्म एसोसिएशन (हाइफा) ने अपनी तृतीय लघु फिल्म प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा कर दी है। हाइफा के वाइस प्रेसीडेंट एवं प्रख्यात बॉलीवुड अभिनेता यशपाल शर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि इस प्रतियोगिता के लिए एंट्री वर्ष 2023 में  बनी फ़िल्म और वीडियो गीत के लिए मंगवाई गई थी। ज्यूरी कमेटी में फिल्म क्षेत्र से विशिष्ट हस्तियां राजीव भाटिया, प्रतिभा शर्मा, मनु गौतम, विजेता दहिया और संदीप गोयत शामिल रहे।
यशपाल शर्मा ने बताया कि ज्यूरी कमेटी के अनुमोदन पर सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म आकाश सिंह निर्देशित ‘फांस-47’ को चुना गया है। वहीं, अभिमन्यु यादव निर्देशित फिल्म ‘ऊक-चूक’ और राजू मान निर्देशित ‘अहसास’ को क्रमश: द्वितीय व तृतीय स्थान मिला है। सर्वश्रेष्ठ अभिनेता राजकुमार धनखड़ (फिल्म -ऊक चूक) और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री सोनम सैनी (फिल्म -ऊक चूक) रहे।
इसी प्रकार, वीडियो गीत ‘आनंद काया’ पहले स्थान पर तथा ‘आपा दोनों जने’ व ‘याद पुरानी’ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर चुने गए। सर्वश्रेष्ठ गायक  संयुक्त रूप से उमेश वर्मा (गीत -छोरी डट जा) और बी. पारस (गीत -आपा दोनों जने) के लिए चुने गए हैं। वहीं, सर्वश्रेष्ठ गायिका मीनाक्षी पांचाल (गीत -आनंद काया) के लिए चुनी गई हैं। इनके अतिरिक्त, बेस्ट डॉक्यूमेंट्री निमिशा सूर्यांशी निर्देशित धूमिल धरोहर रही।  श्री शर्मा ने बताया कि उपरोक्त सभी विजेतओंं को नकद इनाम व प्रशस्ति पत्र हाइफा के जल्द आयोजित होने वाले वार्षिक समारोह के दौरान प्रदत्त किए जाएंगे।

आजमगढ़ को पीएम नरेंद्र मोदी की सौगात

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लोकसभा चुनाव से पूर्व पीएम नरेंद्र मोदी कई राज्यों की यात्रा कर रहे हैं। इस बीच 9 मार्च को पीएम मोदी वाराणसी पहुंचे। वहीं 10 मार्च को प्रधानमंत्री आजमगढ़ जिले में पहुंचे हैं। यहां उन्होंने हजारों करोड़ों की लागत से बने कई परियोजनाओं का उन्होंने उद्घाटन और शिलान्यास किया। साथ ही आजमगढ़ में एयरपोर्ट और सुहेलदेव यूनिवर्सिटी का भी उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने इस दौरान अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को काम को हम छोटे-छोटे शहरों तक ले जा रहे हैं। बड़े मेट्रो शहर जितने हकदार हैं उतने ही छोटे शहर भी इस विकास के अधिकारी हैं।

क्या बोले पीएम मोदी

हम प्लानिंग को ध्यान में रखकर टियर 2 और टियर 3 शहरों में विकास किया जा रहा है। सबका साथ और सबका विकास का यही विजन है। डबल इंजन सरकार का यही मूल मंत्र है। उन्होंने कहा कि बढ़ती हुई कनेक्टिविटी पूर्वांचल के किसानों और उद्यमियों के लिए सुनहरा भविष्य लिखने जा रही है। हमारी सरकार की प्राथमिकता है कि किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिले। आज पहले की तुलना में कई गुणा बढ़ी हुई एमएसपी दी जा रही है। गन्ना किसानों के लिए इस साल लाभकारी मूल्य में 8 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। अब गन्ने का लाभकारी मूल्य 315 रुपये से बढ़कर 340 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।

समाजवादी पार्टी पर साधा निशाना

उन्होंने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि जब वो सरकार चलाते थे तो गन्ना किसानों के तरसाते और रुलाते थे। उनका पैसा यहां का वहां कर दिया जाता था, कई बार तो उन्हें पैसे तक नहीं मिलते। भाजपा सरकार ने आज गन्ना किसानों के हजारों करोड़ों के बकाये को पूरा कराया है। इसी यूपी में चीनी मिलों को कोड़ियों के दाम बिकते और बंद होते देखा है। अब चीनी मिलें खुल रही हैं और गन्ना किसानों को इसका लाभ भी मिल रहा है। अकेले आजमगढ़ के ही करीब 8 लाख किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के 2000 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार में डूबी परिवारवादी सरकारों में विकास कार्य असंभव था। पिछली सरकारों में आजमगढ़ और पूर्वांचल ने पिछड़ेपन की न केवल तकलीफ उठाई, बल्कि यहां की छवि खराब करने में कोई कमी नहीं छोड़ी गई।

भोजपुरी में क्या बोले पीएम मोदी

पिछड़ी सरकारों ने जिस तरह आतंक और बाहुबल को यहां संरक्षण दिया वो सभी ने देखा है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने यहां सुहेलदेव विश्वविद्यालय की नींव रखी और शुभारंभ भी किया गया। बच्चों को दूसरे शहर पढ़ने के लिए भेजने पर मां बाप पर आर्थिक बोझ पड़ता है जो मैं समझता हूं। उन्होंने भोजपुरी भाषा में कहा कि ई विश्वविद्यालय और एयरपोर्ट बन जाए आजमगढ़, गाजीपुर, मऊ के लोगन के फायदा होई की ना? पीएम मोदी ने आगे कहा कि आंकड़े कह रहे हैं कि आज उत्तर प्रदेश अग्रिम पंक्ति में आकर खड़ा हो गया है। आज यूपी की चर्चा बेहतर कानून व्यवस्था को लेकर होती है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का जो सदियों पुराना इंतजार था, वो भी पूरा हो गया। यूपी में तेजी से पर्यटन बढ़ा है। इसका लाभ पूरे राज्य को मिल रहा है। यही गारंटी 10 साल पहले मोदी ने की थी। आज आपके आशीर्वाद से ये गारंटी पूरी हो रही है।

लोकतंत्र की सेहत के लिए चिंताजनक – के सी वेणुगोपाल

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Image Source : PTI

नई दिल्ली: कांग्रेस ने चुनाव आयुक्त अरुण गोयल के इस्तीफे को भारतीय लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताया है। इसके साथ ही कांग्रेस ने इस घटनाक्रम के बारे में स्पष्टीकरण दिए जाने की बात कही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि अगर संस्थाओं की बर्बादी को नहीं रोका गया तो लोकतंत्र पर तानाशाही का कब्जा हो जाएगा। 

खरगे सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि “भारत में अब केवल एक चुनाव आयुक्त है, जबकि कुछ ही दिनों में लोकसभा चुनावों की घोषणा होनी है। क्यों?” कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा कि “जैसा कि मैंने पहले कहा है, यदि हम अपने स्वतंत्र संस्थाओं की सुनियोजित बर्बादी को नहीं रोकते हैं, तो तानाशाही द्वारा हमारे लोकतंत्र पर कब्ज़ा कर लिया जाएगा।” कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि निर्वाचन आयोग अब ध्वस्त होने वाली आखिर की संवैधानिक संस्थाओं में से एक होगी। खरगे ने कहा कि “मोदी सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए और उचित स्पष्टीकरण देना चाहिए।”

लोकतंत्र की सेहत के लिए चिंताजनक

वहीं कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने भी कहा कि निर्वाचन आयोग के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। वेणुगोपाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि ‘‘दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सेहत के लिए यह बेहद चिंताजनक बात है कि चुनाव आयुक्त अरुण गोयल ने लोकसभा चुनाव के ठीक पहले इस्तीफा दे दिया है। निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था कैसे काम कर रही है? इसमें बिल्कुल भी पारदर्शिता नहीं है।’’

मामले को स्पष्ट करे चुनाव आयोग

वेणुगोपाल ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह निर्वाचन आयोग पर दबाव डालती है। वेणुगोपाल ने दावा किया कि ‘‘2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान अशोक लवासा ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के लिए प्रधानमंत्री को क्लीन चिट देने के खिलाफ असहमति जताई थी। बाद में, उन्हें लगातार पूछताछ का सामना करना पड़ा। यह रवैया दर्शाता है कि शासन लोकतांत्रिक परंपराओं को नष्ट करने पर तुला हुआ है।’’ उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम को स्पष्ट किया जाना चाहिए और आयोग को हर समय पूरी तरह से गैर-पक्षपातपूर्ण होना चाहिए।

चुनाव आयुक्त ने दिया इस्तीफा

बता दें कि चुनाव आयुक्त अरुण गोयल ने 2024 के लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की संभावित घोषणा से कुछ दिन पहले शनिवार को पद से इस्तीफा दे दिया। गोयल का कार्यकाल दिसंबर 2027 तक था। फरवरी में अनूप पांडे की सेवानिवृत्ति और गोयल के इस्तीफे के बाद, तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग में अब केवल मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार हैं।

‘हीरामंडी’ का पहला गाना ‘सकल बन’ हुआ लॉन्च

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मुंबई(अनिल बेदाग):मिस वर्ल्ड 2024 के मौके पर 13 फास्ट ट्रैक टैलेंटेड राउंड की विनर्स को हीरामंडी की कास्ट यानी मनीषा कोइराला, सोनाक्षी सिन्हा, अदिति राव हैदरी, संजीदा शेख और शरमीन सहगल के साथ वॉक करते हुए देखा गया। 20 खूबसूरत महिलाएं पहले गाने सकल बन के कॉस्ट्यूम्स में रैंप पर वॉक करती देखीं गई। ऐसे में मिस वर्ल्ड की कंटेस्टेंट्स को संजय लीला भंसाली और नेटफ्लिक्स की सीरीज हीरामंडी की दुनिया का अनुभव आर्ट, म्यूजिक और कॉस्ट्यूम्स के जरिए मिला। उन्होंने भारतीय संस्कृति और विरासत का अनुभव किया और अपने आप को संजय लीला भंसाली की कहानियों की दुनिया में खोने दिया।
संजय लीला भंसाली ने अपने म्यूजिक लेबल भंसाली म्यूजिक से अपना पहला गाना ‘सकल बन’ को उनके पहले नेटफ्लिक्स सीरीज ‘हीरामंडी: द डायमंड बाजार’ से लॉन्च किया है।  एक ऐसा माहौल बनाया जिसे पहले कभी देखा नहीं गया था, गाने को ग्रैंड तरीके से मिस वर्ल्ड 24 के ग्लोबल स्टेज पर लॉन्च किया है।
हीरामंडी: द डायमंड बाज़ार की लीडिंग लेडीज, भंसाली म्यूज़िक के शो के फर्स्ट ट्रैक पर दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं के साथ चलीं हैं। कास्ट ने लाइव फास्ट ट्रैक टॉप 13 कंटेस्टेंट्स के साथ वॉक किया, जो की पेजेंट में दुनिया भर से आई हुई थी। 140 से ज्यादा देशों में टेलीकास्ट किया गया यह वॉक गाना, सच में एक शानदार लॉन्च था। यह देखना सच में विजुअल ट्रीट था जब सभी बसंत के रंग में सज कर आए थे। इस तरह से संजय लीला भंसाली ने मिस वर्ल्ड को भारत की समृद्ध संस्कृति का अनुभव कराया।
वसंत ऋतु अपने साथ ताजगी और उत्सव की भावना लेकर आती है और भंसाली ने ‘सकल बन’ के साथ इस जीवंत मौसम का स्वागत करने का फैसला किया। यह एक खूबसूरत कंपोजिशन है, जिसे बेहद टैलेंटेड राजा हसन ने गाया है और जिसे अमीर खुसरो के समय के कविताओं से सजाया गया है। इस गाने के साथ पारंपरिक लोक संगीत की महक को महसूस करते म्यूजिक लवर्स भंसाली के जाने जानें वाले शान को भी महसूस कर पाएंगे।

उत्तराखंड में रेल सेवाओं के विकास व विस्तार के लिए प्रतिबद्ध -पुष्कर सिंह धामी

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देहरादून /चम्पावत, 9मार्च, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को रेलवे स्टेशन टनकपुर से टनकपुर-देहरादून साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन का हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया!

मुख्यमंत्री ने टनकपुर से देहरादून के लिए पहली एक्सप्रेस ट्रेन संचालन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताते हुए इसे एक स्वप्न का पूरा होना भी बताया क्योंकि आजादी से पहले बने टनकपुर रेलवे स्टेशन से देहरादून के लिए यह पहली एक्सप्रेस ट्रेन संचालित हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि टनकपुर एक्सप्रेस के संचालन में टनकपुर से देहरादून तक अनेक महत्वपूर्ण शहरों को सीधे जोड़ा गया है, जिससे लोगों को सुविधा होगी। इस एक्सप्रेस के माध्यम से बनबसा, खटीमा, पीलीभीत, भोजीपुरा, बरेली सिटी, बरेली जंक्शन, चंदोसी, मुरादाबाद, नजीबाबाद, लक्सर, हरिद्वार रेलवे स्टेशन से जुड़े लोगों को यात्रा करने का आसानी से विकल्प भी मिलेगा और उनका समय भी बचेगा। इसके साथ ही यह ट्रेन सेवा इन शहरों से मां पूर्णागिरी के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यातायात का एक बेहतर विकल्प भी बनेगी। मुख्यमंत्री ने स्वयं भी ट्रेन से टनकपुर से खटीमा तक की यात्रा की तथा ट्रेन में यात्रियों से मुलाकात कर उनका फीडबैक लिया तथा सभी को शुभकामनाएं दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेल स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रही हैं। पिछले 10 वर्षों में भारतीय रेलवे को नए भारत की आकांक्षाओं तथा आत्मनिर्भर भारत की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए तैयार किया जा रहा है । 2014 के बाद से भारतीय रेल एक नए रूप में हमारे सम्मुख है। आज जहां एक ओर ब्रॉड गेज रेल लाइनों से मानव रहित रेल क्रॉसिंग को ख़त्म करके भारतीय रेलवे को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित बनाया गया है। वहीं दूसरी ओर आज भारतीय रेलवे की रफ्तार भी पहले से कहीं अधिक बढ़ चुकी है। आत्मनिर्भरता और आधुनिकता के प्रतीक चिन्ह के रूप में वंदे भारत जैसी मेड इन इंडिया ट्रेनें रेल नेटवर्क का हिस्सा बन रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड में पहाड़ तक ट्रेन पहुंचाने का सपना सच होने जा रहा है। दुर्गम पहाड़ो के बीच से ऋषिकेश से आगे कर्णप्रयाग तक ट्रेन का संचालन होना किसी सपने का साकार होने जैसा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन पर तेज गति से कार्य चल रहा है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री जी द्वारा अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत उत्तराखंड के छह स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है। देहरादून से आनन्द विहार के बीच इसी वर्ष वन्दे भारत ट्रेन का संचालन होना हमारे लिए बड़ी उपलब्धि है। अब शीघ्र ही हमें देहरादून से अयोध्या और वाराणसी के मध्य भी वंदे भारत ट्रेन के संचालन की सौगात मिलने वाली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनपद चंपावत के विकास के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। हमने मॉ पूर्णागिरी धाम में धार्मिक पर्यटन गतिविधियों को बढाये जाने के उददेश्य से पूर्णागिरी मन्दिर रोपवे के निर्माण हेतु 45 करोड की धनराशि स्वीकृत की है। साथ ही ककरालीगेट से पूर्णागिरी धाम तक अवस्थापना सुविधाओं को विकसित करने एवं श्रद्धालुओं की सुलभ सुविधाओं हेतु केदारनाथ की तर्ज पर मास्टर प्लान बनाये जाने हेतु येजना तैयार की जा रही है। शारदा कॉरिडोर के अंतर्गत हरिद्वार तथा ऋषिकेश की तर्ज पर घाट का निर्माण किया जाएगा जहां प्रातः एवं सायं काल आरती प्रतिदिन भव्य रूप से की जाएगी।

उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ी- गैंडाखाली-खेतखेड़ा में मोटर्स पुल का 13 करोड़ 77 लाख की लागत से निर्माण कार्य किया जा रहा है, जिससे वर्षाकाल में मॉ पूर्णागिरी के दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना नहीं करना पडेगा। भारत एवं नेपाल सीमा में व्यापारिक गतिविधियों को बढावा देने एवं आर्थिक गतिविधियों के विकास हेतु 3.82 किलोमीटर के इंडो नेपाल ड्राई पोर्ट का निर्माण 177 करोड की धनराशि से किया जा रहा है।

टनकपुर एवं बनबसा क्षेत्र में जल निकासी के कार्य हेतु 130 करोड की डी0पी0आर0 का गठन कर लिया गया है। टनकपुर में 56 करोड़ की लागत से बस टर्मिनल का निर्माण प्रारम्भ कर दिया गया है। कुमांऊ के प्रमुख मन्दिरों को मानस खण्ड कोरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें जनपद चम्पावत के लगभग सभी प्रमुख मंदिर हैं।
उत्तराखंड को श्रेष्ठ एंव अग्रणी राज्य बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प“ के मंत्र को साकार करने में भी हम सफल होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने श्रेष्ठ उत्तराखंड निर्माण के लिए सभी से सहयोग और समर्थन की भी अपेक्षा की।
मंडलीय रेल प्रबंधक रेखा यादव ने कहा कि इस रेल सेवा का लाभ सीमांत के चंपावत व पिथौरागढ़ जिले के लोगों को मिलेगा और सस्ती शुलभ और आरामदायक रेल सेवा मिलेगी।

इस अवसर पर भाजपा प्रदेश मंत्री भाजपा हेमा जोशी, जिलाध्यक्ष निर्मल महरा, रेलवे एवं जिला प्रशासन के अधिकारी सहित स्थानीय गणमान्य उपस्थित थे ।