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बैंकों की लूट पर लगाम लगाये सरकार व आरबीआई

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आजकल ज्यादातर बैंक जनता को विभिन्न तरीकों से लूट रही है और जनता को पता ही नहीं चलता है। ज्यादातर बैंकों के फाइन का अलग से एसएमएस नहीं आता है, आखिर क्यों?यदि 3 बार से ज्यादा दूसरी बैंकों के एटीएम से निकालते है तो जो चार्ज लगता है, उसका अलग से मैसेज नहीं आता है। यदि आपके बैंक में 1000 है और चौथी बार निकाल रहे है तो जब तक उसके ऊपर फाइन के रुपये नहीं होंगे तब तक पैसे नहीं निकलते है। आखिर क्यों?

फाइन तो बाद में लगना चाहिए,जब पैसे निकलेंगे, लेकिन चौथी बार निकालते वक्त ही फाइन का पैसा क्यों होना चाहिए? आज भी ज्यादातर एटीएम में केवल 500 के ही नोट होते है, जबकि 100 के नोट जरूरी है, यदि रात में किसी को रिक्शा इत्यादि को छुट्टा देना है तो बड़ी दिक्कत लोगो को होती है।

और एटीएम कार्ड तो एक ही बार कई वर्षों के लिए देते है लेकिन हर साल कार्ड का पैसा लेते है, आखिर क्यों? बैंकें आजकल मिनिमम बैलेंस के नाम पर हर महीने मनमाना पैसा वसूल रही है, जबकि जितना फाइन लेती है, उसका नाममात्र भी ब्याज नहीं देती है। जबकि उनकी बैंक तो जनता के पैसे से ही चल रही है।

 मिनिमम बैलेंस के फाइन को आरबीआई को तय कर देना चाहिए, जिससे वे जनता को ज्यादा लूट ना सके।एसएमएस, मिनिमम बैलेंस, कॉर्ड का चार्ज कभी भी काट लेती है, जिससे कभी भी लोगो के चेक बाउंस हो जाते है। इसका एक फिक्स्ड डेट होना चाहिए कि यह कब कटेगा और कौन सी तारीख को कटेगा।

कई बार बैंकों की मिलीभगत की वजह से बैंक के स्टालमेंट के ठीक दिन ही यह फाइन काटा जाता है, जिससे दोनों बैंकों को फाइन मिलता है।आजकल इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग के नाम पर जनता को सबसे ज्यादा लुटा जा रहा है। आज जब किसी लोन या स्टालमेंट का चेक इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग के जरिए बैंक में आता है तो दो दिन में तीन बार चेक बाउंस करा लिया जाता है और दोनों तरफ की बैंक या फाइनेंस कंपनी तीन तीन बार चेक बाउंस का चार्ज लगा लेती है। जितने का चेक नहीं होता है, उससे ज्यादा फाइन हो जाता है।

 यदि बैंक में किसी कारण पैसा नहीं है तो तीन बार दो दिन में बाउंस कराने का क्या फायदा है? यह कमाने का तरीका बैंकों ने बना रक्खा है।यह बंद होना चाहिए।  एक बार बाउंस होने के बाद बिना पार्टी से पूछे दूबारा क्लेरेंस के लिए चेक नहीं भेजना चाहिए।

आजकल कई बैंक, फाइनेंस कंपनी ऑनलाइन एप्प्स के जरिए लोंगो को ठग रही है।ज्यादातर 10 हज़ार,25 हज़ार या 50 हज़ार देकर 24%से 50 %व्याज साल का वसूल रही है और ऊपर से प्रोसेसिंग फीस अलग से और ज्यादातर जनता इनके जाल में फंसती जा रही है। जो कि आगे चलकर बहुत बड़ा जी का जंजाल सरकार व लोगों के लिए बन सकता है। इसे  सरकार व आरबीआई को रोकना चाहिए या व्याज दर तय करना चाहिए। आज जनता महँगाई व बेरोजगारी से परेशान है और कर्ज ले रही है।लेकिन यह बहुत बड़ा खतरा देश की जनता के लिए बन सकता है। और लोगो के आत्महत्या का कारण बन सकता है। समय रहते सरकार व आरबीआई को जाग जाना चाहिए।

विद्वान और समाजसेवी थे डॉ. भीमराव आंबेडकर,

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डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर की अद्वितीय प्रतिभा अनुकरणीय है। वे एक मनीषी, योद्धा, नायक, विद्वान, दार्शनिक, वैज्ञानिक, समाजसेवी एवं धैर्यवान व्यक्तित्व के धनी थे। वे अनन्य कोटि के नेता थे, जिन्होंने अपना समस्त जीवन समग्र भारत की कल्याण कामना में उत्सर्ग कर दिया। खासकर भारत के 80 फीसदी दलित सामाजिक व आर्थिक तौर से अभिशप्त थे, उन्हें अभिशाप से मुक्ति दिलाना ही डॉ. आंबेडकर का जीवन संकल्प था।

 डॉ. भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू में सूबेदार रामजी शकपाल एवं भीमाबाई की चौदहवीं संतान के रूप में हुआ था। उनके व्यक्तित्व में स्मरण शक्ति की प्रखरता, बुद्धिमत्ता, ईमानदारी, सच्चाई, नियमितता, दृढ़ता, प्रचंड संग्रामी स्वभाव का मणिकांचन मेल था।

 संयोगवश भीमराव सातारा गांव के एक ब्राह्मण शिक्षक को बेहद पसंद आए। वे अत्याचार और लांछन की तेज धूप में टुकड़ा भर बादल की तरह भीम के लिए मां के आंचल की छांव बन गए।

बाबा साहब ने कहा- वर्गहीन समाज गढ़ने से पहले समाज को जातिविहीन करना होगा। समाजवाद के बिना दलित-मेहनती इंसानों की आर्थिक मुक्ति संभव नहीं।
डॉ. आंबेडकर की रणभेरी गूंज उठी, ‘समाज को श्रेणीविहीन और वर्णविहीन करना होगा क्योंकि श्रेणी ने इंसान को दरिद्र और वर्ण ने इंसान को दलित बना दिया। जिनके पास कुछ भी नहीं है, वे लोग दरिद्र माने गए और जो लोग कुछ भी नहीं है वे दलित समझे जाते थे।’

बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ ने भीमराव आंबेडकर को मेधावी छात्र के नाते छात्रवृत्ति देकर 1913 में विदेश में उच्च शिक्षा के लिए भेज दिया।

अमेरिका में कोलंबिया विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, मानव विज्ञान, दर्शन और अर्थ नीति का गहन अध्ययन बाबा साहेब ने किया। वहां पर भारतीय समाज का अभिशाप और जन्मसूत्र से प्राप्त अस्पृश्यता की कालिख नहीं थी। इसलिए उन्होंने अमेरिका में एक नई दुनिया के दर्शन किए।

 डॉ. आंबेडकर ने अमेरिका में एक सेमिनार में ‘भारतीय जाति विभाजन’ पर अपना मशहूर शोध-पत्र पढ़ा, जिसमें उनके व्यक्तित्व की सर्वत्र प्रशंसा हुई।

 डॉ. आंबेडकर के अलावा भारतीय संविधान की रचना हेतु कोई अन्य विशेषज्ञ भारत में नहीं था। अतः सर्वसम्मति से डॉ. आंबेडकर को संविधान सभा की प्रारूपण समिति का अध्यक्ष चुना गया। 26 नवंबर 1949 को डॉ. आंबेडकर द्वारा रचित (315 अनुच्छेद का) संविधान पारित किया गया।

आंबेडकर मधुमेह से पीड़ित थे। 6 दिसंबर 1956 को उनकी मृत्यु दिल्ली में नींद के दौरान उनके घर में हो गई। 1990 में उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

डॉ. आंबेडकर का लक्ष्य था- ‘सामाजिक असमानता दूर करके दलितों के मानवाधिकार की प्रतिष्ठा करना।’ डॉ. आंबेडकर ने गहन-गंभीर आवाज में सावधान किया था, ’26 जनवरी 1950 को हम परस्पर विरोधी जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। हमारे राजनीतिक क्षेत्र में समानता रहेगी किंतु सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में असमानता रहेगी। जल्द से जल्द हमें इस परस्पर विरोधता को दूर करना होगी।

एकनाथ शिंदे का ट्वीट -बालासाहेब ने हमें हिंदुत्व सिखाया

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महाराष्ट्र में सियासी भूचाल आने के बाद अब उद्धव ठाकरे की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि MLC चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद मंत्री और शिवसेना के सीनियर नेता एकनाथ शिंदे सूरत चले गए हैं। जिसके बाद महाराष्ट्र से गायब होने के बाद एकनाथ शिंदे का पहला ट्वीट सामने आया.

शिंदे ने ट्वीट में कहा कि हम सत्ता के लिए कभी धोखा नहीं देंगे और बाल ठाकरे से मिली सीख को कभी नहीं त्यागेंगे। शिंदे ने कहा कि हम सच्चे शिव सैनिक हैं।

 

राज्यपाल कोश्यारी कोरोना संक्रमित, अस्पताल में भर्ती

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महाराष्ट्र में सियासी संकट के बीच बड़ी खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि  राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी कोरोना संक्रमित हो गए हैं। राजभवन के एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार को जांच करने के बाद राज्यपाल कोरोना संक्रमित पाए गए जिसके बाद उन्हें दक्षिण मुंबई के रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

महाराष्ट्र में सियासी संकट
सत्तारूढ़ शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे ने बुधवार को दावा किया कि उनके साथ  40 बागी विधायक असम के गुवाहाटी पहुंच चुके हैं। गुवाहाटी एयरपोर्ट के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए शिंदे ने कहा, यहां 40 विधायक मेरे साथ मौजूद हैं। अतिरिक्त 10 विधायक जल्द ही मेरे साथ जुड़ेंगे। मैं किसी की आलोचना नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि हम दिवंगत बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना को जारी रखने के इच्छुक हैं।

महाराष्ट्र में सियासी संकट
सत्तारूढ़ शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे ने बुधवार को दावा किया कि उनके साथ  40 बागी विधायक असम के गुवाहाटी पहुंच चुके हैं। गुवाहाटी एयरपोर्ट के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए शिंदे ने कहा, यहां 40 विधायक मेरे साथ मौजूद हैं। अतिरिक्त 10 विधायक जल्द ही मेरे साथ जुड़ेंगे। मैं किसी की आलोचना नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि हम दिवंगत बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना को जारी रखने के इच्छुक हैं।

भगवान श्री कृष्ण के द्वारा गौ माता से स्नेह एवं उनका प्रेम

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बचपन मे भगवान श्रीकृष्ण नंगे पैर ही ब्रज में रहा करते थे। जब माता यशोदा उनसे पूछा करती थी की लाला तू अपने पैरों में कुछ धारण क्यों नही करता। तब भगवान कृष्ण बड़े सुंदरता से गौ माता के प्रति प्रेम दर्शाते हुए कहते थे कि,जब ब्रज की गायों ने कुछ धारण नहीं किया तो मैं कैसे धारण कर सकता हूं। एवं वह पूरे ब्रज में नंगे पैर ही घूमा करते थे।

वैसे तो वह भगवान है एवं उनके चरणों को हमारी धरती माता कैसे कष्ट दे सकती हैं। उनके चरणों को भी कुछ नहीं हो सकता परंतु वह यह लीला गौमाता के प्रति अपना स्नेह भाव एवं प्रेम बहुत दर्शाने के लिए करते थे। भगवान कृष्ण 84 लाख योनियों में से इतने सारे प्राणीयों को छोड़कर सिर्फ गौमाता के लिए ही इतना प्रेम और समर्पण इसलिए दिखा रहे थे क्योंकि गौमाता बडी महान है।

सनातन धर्म के शास्त्रों मे गौ माता के दूध को अमृत का दर्जा दिया गया है। गौ माता का दूध अमृत से कम नही है।

1.गौ माता के दूध से हमे शारिरिक बल प्राप्त होता है।

2.गौ माता का दूध पीने से हमारी मानसिक स्थिती में सुधार आता है।

3.गौ माता का दूध पीने से हमारी बुद्धिमत्ता बढती जाती है।

4.गौ माता का दूध सात्त्विक होता है,ऐसे सात्त्विक दूध को पीने से हमारा स्वभाव भी सात्त्विक बनता जाता है।

5.सात्त्विकता की वजह से हमारे अंदर दैवी गुण उत्पन्न होते है। जिससे हम एक सद्गुणी व्यक्ति बन सकते है।

देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाली पहली आदिवासी होंगी द्रौपदी मुर्मू

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एनडीए की तरफ से द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित कर दिया गया है. बीजपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनके नाम पर मुहर लगा दी है. अगर द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति बन जाती हैं तो वे देश की पहली आदिवासी होंगी जो देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचेंगी. उनका राष्ट्रपति बनना आजाद भारत के इतिहास में अपने आप में एक बड़ा पड़ाव साबित हो सकता है.

खुद जेपी नड्डा को भी इस बात का अहसास है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एनडीए की तरफ से इस बार सिर्फ एक महिला उम्मीदवार देने पर फोकस नहीं रहा, बल्कि आदिवासी समुदाय से किसी को आगे करने पर सहमति बनी. वे कहते हैं कि इस बार पूर्वी भारत से किसी को मौके देने पर सभी के बीच में सहमति बनी थी. हमने इस बात पर भी विचार किया कि अभी तक देश को आदिवासी महिला राष्ट्रपति नहीं मिली हैं. ऐसे में बैठक के बाद द्रौपदी मुर्मू के नाम पर मुहर लगाई गई.

द्रौपदी मुर्मू के नाम का ऐलान कर एक तरफ पार्टी ने आदिवासियों को साधने का काम किया है तो वहीं दूसरी तरफ महिला सशक्तिकरण को लेकर भी बड़ी लकीर खींच दी है. इससे पहले भी बीजेपी ने कई मौकों पर ऐसे एक्सपेरिमेंट किए हैं. फिर चाहे निर्मला सीतारमण को देश की पहली पूर्णकालिक रक्षा मंत्री बनाया गया हो या फिर दलित नेता राम नाम कोविंद को राष्ट्रपति बनाने की पहल करना रहा हो. ऐसे में एक बार फिर बीजेपी इसी दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है. एक तरफ पूरे पूर्वी भारत को साधने की तैयारी है तो वहीं दूसरी तरफ आगामी चुनावों को देखते हुए आदिवासी कार्ड भी खेला गया है.

द्रौपदी मुर्मू का हर पद पर बिना विवादों वाला कार्यकाल रहा है. द्रौपदी मुर्मू को देश की पहली आदिवासी महिला राज्यपाल होने का गौरव पहले ही प्राप्त है. झारखंड में राज्यपाल के तौर पर कुल 6 साल एक माह 18 दिन का उनका कार्यकाल निर्विवाद तो रहा ही, राज्य के प्रथम नागरिक और विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति के रूप में उनकी पारी यादगार रही है. कार्यकाल पूरा होने के बाद वह 12 जुलाई 2021 को झारखंड से राजभवन से ओडिशा के रायरंगपुर स्थित अपने गांव के लिए रवाना हुई थीं और इन दिनों वहीं प्रवास कर रही हैं.

18 मई 2015 को झारखंड की राज्यपाल के रूप में शपथ लेने के पहले द्रौपदी मुर्मू ओडिशा में दो बार विधायक और एक बार राज्यमंत्री के रूप में काम कर चुकी थीं. झारखंड के जनजातीय मामलों, शिक्षा, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर वह हमेशा सजग रहीं. कई मौकों पर उन्होंने राज्य सरकारों के निर्णयों में संवैधानिक गरिमा और शालीनता के साथ हस्तक्षेप किया. उन्होंने 2016 में राज्य में उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर खुद लोक अदालत लगायी थी, जिसमें विवि शिक्षकों और कर्मचारियों के लगभग पांच हजार मामलों का निबटारा हुआ था.

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर इरा त्रिवेदी के योग लव सोशलस्वैग अकादमी

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· योग लव सोशलस्वैग अकादमी शुरू करने के लिए इरा त्रिवेदी ने सोशल स्वैग के साथ साझेदारी की।
· लाइव इंटरएक्टिव सत्र पुरे दिन उपलब्ध होगा
· सिर्फ 2 रूपये मिलेगा योगा का प्रशिक्षण

मुम्बई। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त योग शिक्षक इरा त्रिवेदी ने योग लव सोशलस्वैग अकादमी के शुभारंभ की घोषणा की। 22 जून, 2022 से वर्चुअल स्टूडियो के माध्यम से प्रतिदिन हिंदी और अंग्रेजी में योग प्रदान किया जा रहा है।
पिछले 25 सालों से इरा त्रिवेदी योगाभ्यास कर रहें हैं, 11 साल की उम्र में उन्होंने योग का अभ्यास करना शुरू किया था। कई सालों से वह एक योग शिक्षक के रूप में घर-घर में प्रसिद्ध हैं। वह एक अच्छी लेखिका हैं। उन्होंने योगाभ्यास पर कई तरह की किताबे लिखी हैं। वह दुनिया भर की मशहूर हस्तियों को योगासन करना सिखाती हैं। हाल ही में उन्हें योग के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए केरल के राज्यपाल से गंगा पुरस्कार देकर सन्मानिक किया गया है।
सोशल स्वैग पर योग लव एकेडमी का शुभारंभ करते हुए, योगिनी इरा त्रिवेदी ने कहा कि मैंने हमेशा माना है कि किसी व्यक्ति को योग का अभ्यास करने की इच्छा हो तो उसमें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। इस योगाभ्यास का सत्र 60 मिनट तक किया गया है। यह अभ्यास का प्रवेश मुल्य कोई भी व्यक्ती को भरना आसान हो ऐसा ही रखा गया है। इससे कोई भी व्यक्ती योगा अभ्यास का लाभ उठा सकता हैं। यह उन सभी के लिए उपयुक्त है जो योग का उपयोग अपने दिमाग को केंद्रित करने के लिए करना चाहते हैं। शारीरिक वजन औऱ स्वास्थ्य रहने के लिए योगाभ्यास करना काफी फायदेमंद साबित हैं।
योग लव सोशलस्वैग अकादमी, सेलिब्रिटी और प्रभावशाली लोगों के नेतृत्व वाले प्लेटफॉर्म – सोशलस्वैग पर उपलब्ध कराया जाने वाला पहला लाइव सत्र है। इस प्लेटफॉर्म को अप्रैल 2022 में मास्टरक्लास के साथ लॉन्च किया गया। इसमें बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार, मिस यूनिवर्स और एक्ट्रेस लारा दत्ता, सेलिब्रिटी मेकअप आर्टिस्ट नम्रता सोनी, इंटरनेशनल शेफ विक्की रत्नानी सहित भारत के कुछ सबसे बड़े सितारों का समावेश हैं।
योग लव सोशलस्वैग अकादमी 21 जून 2022 को अपना पहिला लाईव्ह क्लासेस शुरू किया। महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने के उद्दिष्ट से यह अकादमी शिक्षक प्रशिक्षण कोर्स शुरू किया है।

अजीत डोभाल ने बताई अग्निपथ योजना की जरूरत क्यों,

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हमारे आसपास माहौल बदल रहा है, हमें भी सुरक्षा के लिए बदलाव करना होगा

अग्निपथ योजना को लेकर पिछले 4 दिनों से देश हिंसा की आग में झुलस रहा है। जगह जगह सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इस बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अग्निपथ योजना भर्ती योजना और इंटरनल सिक्योरिटी के मुद्दे पर बात की।

न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब युद्ध के तरीके बड़े बदलाव से गुजर रहे हैं। हम आमने सामने की लड़ाई की जगह अदृश्य दुश्मनों से युद्ध की तरफ जा रहे हैं। भारत के आसपास माहौल बदल रहा है। तकनीक तेजी से बदल रही है। हम कल जो कर रहे थे वो आज भी करते रहें तो हम सुरक्षित रहेंगे यह संभव नहीं है। अगर कल की तैयारी करनी है तो हमें बदलाव करना होगा।

अग्निपथ एक स्टैंड स्टैंडअलोन योजना नहीं,

उन्होंने आगे कहा- अगर हमें कल की तैयारी करनी है तो हमें बदलना होगा। हमें इसे एक खास नजरिए से देखने की जरूरत है। अग्निपथ अपने आप में एक स्टैंडअलोन योजना नहीं है। 2014 में PM मोदी सत्ता में आए थे, तो भारत को सुरक्षित और मजबूत बनाना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है।

अकेले अग्निवीर पूरी आर्मी कभी नहीं होंगे, अग्निवीर सिर्फ पहले 4 साल में भर्ती किए गए जवान होंगे। बाकी सेना का बड़ा हिस्सा अनुभवी लोगों का होगा। जो अग्निवीर नियमित होंगे (4 साल बाद) उन्हें मजबूत ट्रेनिंग दी जाएगी। रेजिमेंट के सिद्धांत के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। जो रेजिमेंट हैं वे रहेंगी।

पिछले 8 साल में बहुत से स्ट्रक्चरल सुधार हुए,

सेना में हो रहे अन्य बदलावों पर अजील डोभाल ने कहा कि पिछले 8 सालों में बहुत सारे स्ट्रक्चरल सुधार हुए हैं। 25 साल से CDS का मुद्दा पड़ा हुआ था। राजनीतिक इच्छाशक्ति न होने के कारण इसको अमल में नहीं लाया जा सका था। आज हमारे डिफेंस एजेंसी की अपनी स्पेस की स्वतंत्र एजेंसी है। आज भारत में बनी AK-203 के साथ नई असॉल्ट राइफल को सेना में शामिल किया जा रहा है। यह दुनिया की सबसे अच्छी असॉल्ट राइफल है। मिलिट्री इक्विपमेंट में बहुत डेवलपमेंट किए जा रहे हैं।

योग तो सर्वजन कल्याण और ‘भारत भाग्य विधाता’ का प्रमाण है,

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भारत के ऐतिहासिक विरासत की समृद्धता को लेकर कोई आपसे प्रश्न करे तो उसे योग का उदाहरण दीजिएगा। दशमलव और शून्य की खोज के बारे में तो हमें बचपन से पढ़ाया जाता आ रहा है, पर क्या हमने अपने पाठ्यक्रमों में योग की महत्ता को वह दर्जा दिया? 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है, पर क्या यह सिर्फ एक इवेंट भर है जिसमें योग करते हुए फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर चिपका दिया जाए? बस कहानी खत्म? नहीं- योग को सीमित दायरों में बांधना संभव नहीं है।योग तो हमारे पूर्वजों द्वारा हमें दिया गया अतुलनीय उपहार है, हमारी वैश्विक पहचान, हमारा गर्व है।

वैदिक युग की शुरुआत के साथ ही योग मानवता का हिस्सा बना। ऋषि-मुनियों ने इसके प्रभाव को समझते हुए लोगों को योग करने के लिए प्रेरित किया। उस काल में न तो मेडिकल साइंस था, न ही दवाइयां, एक योग ही था जो सुरक्षाकवच बनकर लोगों के संपूर्ण स्वास्थ्य की रक्षा करता था।

देश पर बाहरी आक्रांताओं ने राज किया, उन्होंने उन सभी चीजों को लक्षित किया जो हमारी पहचान थीं, योग भी निशाने पर आया। लिहाजा आजादी के बाद हमने मेडिकल साइंस को बढ़ाने के लिए तो लाख प्रयास किए पर योग जैसी पुरातन और ‘ब्रह्मास्त्रीय विज्ञान’ की तरफ 2014 के पहले कितना ध्यान दिया गया ये किसी से छिपा नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

इस मामले में नरेंद्र मोदी सरकार 110 प्रतिशत तारीफ की काबिल है। इसमें न सिर्फ योग को नई दशा और दिशा मिली, साथ ही योग वैश्विक चर्चा का विषय बना। इसी क्रम में हम इस बार 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की आठवीं सालगिरह है।

8 साल पीछे चलें तो योग दिवस को लेकर भी देश में हर योजनाओं की तरह खूब विरोध हुआ, कारण वही राजनीतिक वोट बैंक। कहा गया योग वैदिक काल, मंत्रोच्चार, ध्यान, साधना जैसी क्रियाओं का समायोजन है, ऐसे में यह एक धर्म विशेष का विषय है। कुछ बुद्धिजीवियों ने कहा- योग को जीवनशैली में शामिल करा कर सरकार देश के अल्पसंख्यकों के अस्तित्व को खत्म करने का प्रयास कर रही है। खैर, समय के साथ जैसे-जैसे इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर महत्व दिया जाने लगा.

हमारे समृद्ध इतिहास का प्रमाण है योग

माना जाता है कि योगाभ्यास की शुरुआत सभ्यता के साथ ही हुई थी। योग विद्या में, शिव को पहले योगी या आदि गुरु के रूप में देखा जाता है। पुराणों में जिक्र मिलता है कि कई हजार साल पहले, हिमालय में कांतिसरोवर झील के तट पर आदियोगी ने अपने गहन ज्ञान की शिक्षा सप्तर्षियों को दी जिन्होंने इस शक्तिशाली योग विज्ञान को एशिया, मध्य पूर्व, उत्तरी और दक्षिण अमेरिका सहित दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाया।

सिंधु सरस्वती घाटी सभ्यता के मुहरों और जीवाश्म अवशेषों में भी योग के प्रमाण मिलते हैं। इसके अलावा वैदिक और उपनिषद विरासत, बौद्ध और जैन परंपराओं, महाभारत और रामायण महाकाव्य, शैव, वैष्णव आदि परंपराओं में भी योग और साधना का जिक्र मिलता है।

यद्यपि पूर्व-वैदिक काल से ही योग का अभ्यास किया जाता रहा था, पर महान ऋषि महर्षि पतंजलि ने अपने योग सूत्रों के माध्यम से इसे व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महर्षि पतंजलि के बाद, कई ऋषियों और योग गुरुओं ने इसे प्रलेखित प्रथाओं और साहित्य के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया।

ऋषि-मुनियों के बाद आधुनिक युग में योग के प्रचार-प्रसार की चर्चा प्रधानमंत्री मोदी के बिना अधूरी मानी जाएगी। 2014 में सत्ता में आने के बाद से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने राजनीतिक दृष्टि से क्या-क्या उपलब्धि हासिल कीं, इससे इतर इस सरकार की सबसे बड़ी कामयाबी योग को वैश्विक मंच पर न सिर्फ लाना, बल्कि पश्चिमी देशों को भी योग के प्रति आकर्षित कर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत कराना है।

बॉलीवुड प्रेस फोटोग्राफर रमाकांत मुंडे को जन्मदिन की बधाई देने पहुंचे दिग्गज

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मुम्बई। फोटोग्राफर रमाकांत मुंडे का जन्मदिन बॉलीवुड हस्तियों, मीडिया के साथ मुंबई में मनाया गया। उसी अवसर पर फिल्म इंडस्ट्री के कई नामी मेहमान मौजूद थे। बॉलीवुड के वरिष्ठ फोटोग्राफर रमाकांत मुंडे ने अपने जन्मदिन के लिए एक पार्टी का आयोजन किया था। संगीतकार दिलीप सेन, अभिनेत्री आरती नागपाल, हर्ष कुमार मुंडे, हैरी वर्मा, प्रवीण चंद्र, इरम फरीदी (निर्माता), रोशन मनसुखानी, मीर अली, सुमित चावला, दिनेश परेश, टिंकू, दिलीप यादव सहित फिल्म उद्योग की हस्तियां मौजूद थी।


साथ अभिनेता अरुण बक्शी और चारुल मलिक ने उन्हें वीडियो कॉल के माध्यम से जन्मदिन की बधाई दी।
रमाकांत मुंडे पिछले कई वर्षों से प्रेस फोटोग्राफर के रूप में शानदार काम कर रहे हैं। अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, जितेंद्र, अकबर खान, सनी देओल, मनीषा कोइराला, संजय दत्त, तब्बू, आमिर खान, शाहरुख खान, सलमान खान, अक्षय कुमार, अजय देवगन, सुष्मिता सेन, बिपाशा बसु, महिमा चौधरी, मुकेश खन्ना, राज बब्बर, राहुल देव, ऐसे कई अलग-अलग कलाकारों की यादगार तस्वीरें उनके कैमरे में कैद हैं। माइकल जैक्सन जब भारत आए तो भी उनकी दुर्लभ तस्वीरों को कैमरे में कैद करने का मौका रमाकांत ने नहीं छोड़ा। उन्होंने कई नए कलाकारों का मार्गदर्शन भी किया है।
रमाकांत मुंडे ने जन्मदिन की बधाई देने पहुंचे सभी अतिथियों का स्वागत किया और आभार जताया।