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शांता फाउंडेशन ने फ्रेंडशिप डे पर पूरा किया 365 दिन गौ सेवा संकल्प

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बिलासपुर। विश्व फ्रेंडशिप डे पर शांता फाउंडेशन ने 365 दिन गौस सेवा का संकल्प पूरा किया। संस्था के सदस्यों ने इस दिन को खास बनाने जुटे हुए हैं। एक वर्ष के भीतर सदस्यों ने 3650 रोटियां एकत्र की।शांता फाउंडेशन बिलासपुर के द्वारा गौ सेवा के लिए प्रतिदिन 100 रोटी गुड़ के संकल्प को एक वर्ष पूर्ण हो गया इस दौरान संस्था के सभी सदस्यों से अपने घरों से रोटियाँ बनवा के हमें सहयोग के रूप में देने की अपील की,सभी ने बढ़ चढ़ कर हमारे कार्यालय में रोटियां भेजवाई इस दौरान हमे 3650 रोटियां एकत्रित हुईं।

शांता फाउंडेशन परिवार अपने जीव दया व सामाजिक सरोकरता के संकल्प को एक और कदम आगे बढ़ाते हुए एक नए संकल्प के साथ न्यायधानी बिलासपुर की इस पुण्य धरा को वृन्दावन बनाने के लिए कृष्ण की प्यारी गय्या मय्या की सेवा के लिए गौ रोटी सेवा का संकल्प पूरा किया। इसी सहयोग की हम आशा करते है की आप सभी इस रोटी सेवा संकल्प में हमारे साथ रहे और आगे साथ बनाये रखेंगे।

 

शांता फाउंडेशन के संस्थापक समाजसेवी नीरज गेमनानी ने कहा कि गौ रोटी सेवा से न्यायधानी बिलासपुर व अन्य जगहों में गय्या मय्या को भूखा और बीमार न रहने देंगे।आप भी गय्या मय्या से प्रेम करते है या गय्या मय्या की सेवा करना चाहतें है तो आप अपने जन्मदिवस बच्चो के जन्मदिवस शादी की सालगिरह माता पिता के या गुरुदेव के जन्मदिवस ईष्ट की कृपा या पितरो की शांति के लिए आप भी शांता फाउंडेशन बिलासपुर परिवार के इस सेवा के साथ जुड़े और दूसरे लोगो को भी इस परम पुनीत पुण्यशाली सत्यसनातन धर्म के काम के सहयोग करे।

Cow Economy- गौ आधारित खेती से शरीर से लेकर जमीन तक को फायदा

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मोतिहारी। गाय आधारित खेती में फसलों पर पेस्टिसाइड का उपयोग नहीं होता।जिससे भूमी मे रोग-प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।गांधी जी की ग्राम स्वराज मे भी गाय आधारित गांव की कल्पना की गई है।उक्त विचार कृषि विज्ञान केंद्र, परसौनी के मृदा वैज्ञानिक डा.आशीष राय ने बताते हुए कहा कि भारत में मानव जीवन के लिए गाय की उपयोगिता का उल्लेख धर्म-शास्त्रों और वेद-पुराणों में भी मिलता है।पुरातन काल की पूरी खेती संरचना गाय आधारित हुआ करती थी।जिसका स्वरूप अब बदल रहा है।जिस कारण मानव जीवन मे कई तरह के रोग भी बढ रहे है।

उन्होंने बताया कि पूर्वी चंपारण जिले के अरेराज प्रखंड के सिरनी, मिश्रौलिया गांव के किसान ने देसी गाय आधारित खेती को अपनाकर न केवल अच्छी उपज प्राप्त किये है बल्कि इस गौ आधारित खेती के कारण उनकी खेती मे लागत भी घटकर महज 5-6 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर तक आ गया है।उन्होंने बताया कि अरेराज के किसान रविभूषण सिंह ने रासायनिक खाद और दवाइयों का उपयोग बिल्कुल बंद कर चुके है।मौके पर उपस्थित किसान रवि भूषण सिंह बताते हैं, मेरे पास लगभग 15 एकड जमीन है, जिसमें गेहूं, धान, फल, सरसो, भिंडी, बैगन, प्याज, मिर्च और अन्य हरी सब्जियां उगाता हूं। शुरुआत में भिंडी के बीज बोए थे तब मैंने खेत में पेस्टिसाइड का उपयोग नहीं किया। सिर्फ गाय के गोबर और गो-मूत्र का ही उपयोग किया और देखा कि अच्छी फसल तैयार हो गई है फसल का टेस्ट भी पहले की तुलना में बहुत अच्छा था।
रवि भूषण सिंह ने बताया कि कि इस प्रयोग से रासायनिक खाद और दवाइयों का काफी खर्च बच गया है। जहां पहले 20-25 हजार रुपए तक खर्च हो जाते थे, उसकी जगह अब एक फसल में 4 से 5 हजार रुपए ही खर्च हुए।उन्होने बताया गाय के गोबर व गोमूत्र से घर पर ही जीवामृत, पंचगव्य, केचुआ खाद जैसी जैविक खाद बनाकर खेती कर रहा हुँ।उन्होने बताया कि तीन साल पहले कृषि एवं मृदा विशेषज्ञ आशीष राय, कृषि विज्ञान केंद्र परसौनी के संपर्क में आए थे तभी से गाय आधारित खेती की शुरुआत की है।
उन्होंने इसके लिए कई ट्रेनिंग भी ली थी। इसके बाद उन्होंने गांव के पास स्थित अपनी गौशाला से रोजाना गोबर और गो-मूत्र का उपयोग से विभिन्न प्रकार के जैविक खाद बनाकर अपनी फसलों पर किया।फसलों पर इसका अच्छा फायदा होते देख उन्होने गिर नस्ल की गायें खरीदी।अब घर पर ही जीवामृत,पंचगव्य बनाकर फसलों पर छिड़काव करना शुरू किया।

बताते चले कि रवि भूषण सिंह के इस प्रयोग से अब आसपास के अन्य किसान भी प्रेरित होकर ऐसा प्रयोग शुरू कर दिया है।अब तो किसानों ने इसके लिए ग्रुप बनाकर रासायनिक खाद रहित फसलों के बारे में गांव-गांव में लोगों को बता रहे है।

-गौ आधारित खेती से शरीर से लेकर जमीन तक को फायदा

डा.आशीष राय व किसान रविभूषण सिंह ने बताया कि गौ आधारित खेती से भूमी के साथ मानव शरीर मे भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है,ऐसा इसलिए क्योंकि फसलों पर पेस्टिसाइड का उपयोग नहीं होता।साथ ही गोबर के प्रयोग से जमीन ठोस नहीं होती और जिस कारण हल भी आसानी से चलते हैं।डा.राय ने बताया कि गौ आधारित खेती अपनाने से क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या से भी निपटा जा सकता है।
उन्होने बताया खेतों में पेस्टिसाइड के उपयोग से जमीन की उर्वरता का क्षरण के साथ मृदा मे उपलब्ध जलवायु अनुकुल कई कीट भी मर जाते है।इससे प्रकृति के साथ मानव शरीर मे कैंसर, डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ रहा है। गौ आधारित जैविक खेती से इन समस्याओं से निपटने के साथ ही किसान अपने खेती की लागत भी कम कर सकते है।
डा.आशीष राय ने बताया जो किसान जैविक खाद से युक्त खेती करना चाहते है वे पूर्वी चंपारण जिले के पहाड़पुर प्रखंड स्थित कृषि विज्ञान केंद्र परसौनी से संपर्क कर सकते है।यहां किसानो को महज 6-7 दिनों की ट्रेनिंग देकर रसायनिक खादो के कई विकल्प बनाने ट्रेनिंग दिया जायेगा।जिसके बाद किसान खुद घर पर जैविक खाद तैयार कर सकते हैं।

इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में फीचर फिल्म ‘द रेपिस्ट’ प्रदर्शित होगी

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बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल, कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, केरल के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में तारीफ बटोरने के बाद, अब अप्लॉज एंटरटेनमेंट की पहली फीचर फिल्म ‘द रेपिस्ट’ को अगस्त में आयोजित इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न में प्रदर्शित किया जाएगा। इस फिल्म को ‘फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न’ में तीन नॉमिनेशन्स भी मिले हैं जिनमें ‘बेस्ट फिल्म’, ‘बेस्ट डायरेक्टर’ और ‘बेस्ट एक्ट्रेस’ शामिल हैं। बता दें, इससे पहले फिल्म बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रतिष्ठित किम जिसोक अवॉर्ड जीत चुकी है।
फीचर फिल्म ‘द रेपिस्ट’ को हर जगह से काफी धमाकेदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। इससे पहले अप्लॉज एंटरटेनमेंट कई सफल प्रीमियम ड्रामा सीरीज दे चुका है जिसमें  ‘क्रिमिनल जस्टिस’, ‘रुद्र: द एज ऑफ डार्कनेस’ और  ‘स्कैम 1992 : द हर्षद मेहता स्टोरी’ भी शामिल है।
अब अप्लॉज एंटरटेनमेंट ने फिल्मों की दुनिया में कदम रखा है और ‘द रेपिस्ट’ के साथ इसकी शुरूआत काफी सॉलिड हुई है जिसे दुनिया भर में सेलिब्रेट किया जा रहा हैं। यह फिल्म राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता अपर्णा सेन द्वारा निर्देशित और क्वेस्ट फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से अप्लॉज एंटरटेनमेंट द्वारा निर्मित है।
*अप्लॉज एंटरटेनमेंट के बारे में :
 
अप्लॉज एंटरटेनमेंट एक प्रमुख कंटेंट और आईपी क्रिएशन स्टूडियो है जो प्रीमियम ड्रामा सीरीज, मूवी, डॉक्यूमेंट्री और एनिमेशन कंटेंट पर फोकस करता है।
मीडिया के दिग्गज समीर नायर के नेतृत्व में आदित्य बिरला ग्रुप का वेंचर, स्टूडियो ने कई शैलियों और भाषाओं में लोकप्रिय सीरीज को प्रोड्यूस और रिलीज किया है जिसमें ‘रुद्र: द एज ऑफ डार्कनेस’, ‘मिथ्या’, ‘क्रिमिनल जस्टिस’, ‘स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी’, ‘अनदेखीं,’ ‘भौकाल’ जैसे क्रिटिकली अक्लेम्ड शो शामिल हैं। इन शोज को दर्शकों ने सराहा है। हाल में प्रोडक्शन में थिएट्रिकल और डायरेक्ट-टू-स्ट्रीमिंग फिल्मों की एक मजबूत स्लेट है जिसमें ‘शर्माजी की बेटी’, ‘जब खुली किताब’ जैसी कुछ और फिल्में शामिल हैं। अप्लॉज की पहली फीचर फिल्म द रेपिस्ट, जिसे अपर्णा सेन ने डायरेक्ट किया है।
‘अप्लॉज’ ने अपने क्रिएटिव आउटपुट के लिए नेटफ्लिक्स, डिज़नी प्लस हॉटस्टार, अमेज़न प्राइम वीडियो, सोनी लिव, एमएक्स प्लेयर, ज़ी5 और वूट सेलेक्ट जैसे प्रमुख ओटीटी प्लेटफार्म्स के साथ भागीदारी की है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

रक्षाबंधन विशेष – भाई-बहन के अटूट रिश्ते के क्या है मायने ?

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भाई-बहन का रिश्ता दुनिया के सभी रिश्तों में सबसे ऊपर है।  हो भी न क्यों, भाई-बहन दुनिया के सच्चे मित्र और एक-दूसरे के मार्गदर्शक होते है। जब बहन शादी करके ससुराल चली जाती है और भाई नौकरी के लिए घर छोड़कर किसी दूसरे शहर चला जाता है तब महसूस होता है कि भाई-बहन का ये सर्वोत्तम रिश्ता कितना अनमोल है।

सरहद पर खड़ा एक सैनिक भाई अपनी बहन को कितना याद करता है और बहनों की ऐसे वक़्त क्या दशा होती है इसके लिए शब्द नहीं है।  रंग-बिरंगे धागे से बंधा ये पवित्र बंधन सदियों पहले से हमारी संस्कृति से बहुत ही गहराई के साथ जुड़ा हैं। यह पर्व उस अनमोल प्रेम का, भावनाओं का बंधन है जो भाई को सिर्फ अपनी बहन की नहीं बल्कि दुनिया की हर लड़की की रक्षा करने हेतु वचनबद्ध करता है।

 

भाई-बहन के आपसी अपनत्व, स्नेह और कर्तव्य बंधन से जुड़ा त्योहार भाई-बहन के रिश्ते में नवीन ऊर्जा और मजबूती का प्रवाह करता है। बहनें इस दिन बहुत ही उत्साह के साथ अपने भाई की कलाई में राखी बांधने के लिए आतुर रहती हैं। जहां यह त्योहार बहन के लिए भाई के प्रति स्नेह को दर्शाता है तो वहीं यह भाई को उसके कर्तव्यों का बोध कराता है।

रक्षाबंधन भाई बहन के रिश्ते का त्योहार है, रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब बाध्य है। रक्षाबंधन के दिन बहने भगवान से अपने भाईयों की तरक्की के लिए भगवान से प्रार्थना करती है। राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बाँधती हैं परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी बाँधी जाती है।

वास्तव में ये त्योहार  से रक्षा के साथ जुड़ा हुआ है, जो किसी की भी रक्षा करने को प्रतिबद्ध करता है। अगर इस पवित्र दिन अपनी बहन के साथ दुनिया की हर लड़की की रक्षा का वचन लिया जाए तो सही मायनों में इस त्योहार का उद्देश्य पूर्ण हो सकेगा। इस पावन त्योहार का अपना एक अलग स्वर्णिम इतिहास है, लेकिन बदलते समय के साथ बाकी रिश्तों की तरह इसमें भी बहुत से बदलाव आए हैं।

 

जैसे-जैसे आधुनिकता हमारे मूल्यों और रिश्तों पर हावी होती जा रही है। संस्कृति में पतन के फलस्वरूप रिश्तों में मजबूती और प्रेम की जगह दिखावे ने ले ली है।  आज के बदलते समय में इस त्योहार पर भी आधुनिकता हावी होने लगी है, तब से आज तक यह परंपरा तो चली आ रही है लेकिन कहीं न कहीं हम अपने मूल्यों को खोते जा रहे हैं।

रंग-बिरंगे धागों में अब अपनत्व की भावना और प्रेम की गर्माहट कम होने लगी है। एक समय में जिस तरह के उसूल और संवेदना राखी को लेकर थी शायद अब उनमें अब रुपयों के नाम की दीमक लगने लगी है फलस्वरूप रिश्तों में प्रेम की जगह पैसे लेने लगे हैं। ऐसे में संस्कृति और मूल्यों को बचाने के लिए आज बहुत जरूरत है दायित्वों से बंधी राखी का सम्मान करने की। क्योंकि राखी का ये अनमोल रिश्ता महज कच्चे धागों की परंपरा भर नहीं है।  लेन-देन की परंपरा में प्यार का कोई मूल्य भी नहीं है ।

 

बल्कि जहां लेन-देन की परंपरा होती है वहां प्यार तो टिक ही नहीं सकता, अटूट रिश्तें कैसे बन पाएंगे। इतिहास मे कृष्ण और द्रौपदी की कहानी प्रसिद्ध है, जिसमे युद्ध के दौरान श्री कृष्ण की उंगली घायल हो गई थी, श्री कृष्ण की घायल उंगली को द्रौपदी ने अपनी साड़ी मे से एक टुकड़ा बाँध दिया था, और इस उपकार के बदले श्री कृष्ण ने द्रौपदी को किसी भी संकट मे द्रौपदी की सहायता करने का वचन दिया था। रक्षा बंधन की कथाएं बताती हैं कि पहले खतरों के बीच फंसी बहन का साया जब भी भाई को पुकारता था, तो दुनिया की हर ताकत से लड़ कर भी भाई उसे सुरक्षा देने दौड़ पड़ता था और उसकी राखी का मान रखता था।

कहते हैं, मेवाड़ की रानी कर्मावती को बहादुरशाह द्वारा मेवाड़ पर हमला करने की पूर्व सूचना मिली। रानी लड़ऩे में असमर्थ थी अत: उसने मुगल बादशाह हुमायूँ को राखी भेज कर रक्षा की याचना की। हुमायूँ ने मुसलमान होते हुए भी राखी की लाज रखी और मेवाड़ पहुँच कर बहादुरशाह के विरूद्ध मेवाड़ की ओर से लड़ते हुए कर्मावती व उसके राज्य की रक्षा की। जब कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई। द्रौपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उँगली पर पट्टी बाँध दी। यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था।

कृष्ण ने इस उपकार का बदला बाद में चीरहरण के समय उनकी साड़ी को बढ़ाकर चुकाया। कहते हैं परस्पर एक दूसरे की रक्षा और सहयोग की भावना रक्षाबन्धन के पर्व में यहीं से प्रारम्भ हुई। आज एक बार फिर भातृत्व की सीमाओें को बहन फिर चुनौती दे रही है, क्योंकि उसके उम्र का हर पड़ाव असुरक्षित है, उसकी इज्जत एवं अस्मिता को बार-बार नोचा जा रहा है।

लड़कों से ज्यादा बौद्धिक प्रतिभा होते हुए भी उसे ऊंची शिक्षा से वंचित रखा जाता है, क्योंकि आखिर उसे घर ही तो संभालना है। उसे नयी सभ्यता और नयी संस्कृति से अनजान रखा जाता है, ताकि वह भारतीय आदर्शों व सिद्धांतों से बगावत न कर बैठे।

 

इन विपरीत हालातों में उसकी योग्यता, अधिकार, चिंतन और जीवन का हर सपना कसमसाते रहते हैं। इसलिए मेरा मानना है कि राखी के इस परम पावन पर्व पर भाइयों को ईमानदारी से पुनः अपनी बहन ही नहीं बल्कि संपूर्ण नारी जगत की सुरक्षा और सम्मान करने की, कसम लेने की अहम जरूरत है। तभी ये राखी का पावन पर्व सार्थक बन पड़ेगा और भाई-बहन का प्यार धरती पर शाश्वत रह पायेगा। यह पर्व भारतीय समाज में इतनी व्यापकता और गहराई से समाया हुआ है कि इसका सामाजिक महत्त्व तो है ही, धर्म, पुराण, इतिहास, साहित्य और फ़िल्में भी इससे अछूते नहीं हैं। रक्षाबन्धन पर्व सामाजिक और पारिवारिक एकबद्धता या एकसूत्रता का सांस्कृतिक उपाय रहा है।

लेकिन अब प्रेम रस में डूबें रंग-बिरंग धागों की जगह चांदी और सोने की राखियों ने ली तो सामाजिक व्यव्हार में कर्तव्यों को समझने के बजाय रिवाज को पूरा करने कि नौबत आई। प्रेम और सद्भावना की जगह दिखावे ने ले ली। तभी तो रक्षा-बंधन के दिन सुबह उठते ही हर किसी के स्टेटस पर बस रक्षाबंधन की तस्वीरें और वीडियो की भरमार होती है, अब बहनों की जगह ई-कॉमर्स साइट ऑनलाइन आर्डर लेकर राखी दिये गये पते पर पहुँचाती है। अगर हम सोशल मीडिया पर दिखावे की जगह असल जिंदगी में इन रिश्तों को प्रेमरुपी जल से सींचा जाए तो हमेशा परिवार में मजबूती बनी रहेगी।

 

राखी के त्योहार का मतलब केवल बहन की दूसरों से रक्षा करना ही नहीं होता है बल्कि उसके अधिकारो और सपनों की रक्षा करना भी भाई का कर्तव्य होता है, लेकिन क्या सही मायनों में बहन की रक्षा हो पाती है। आज के समय में राखी के दायित्वों की रक्षा करना बेहद आवश्यक हो गया है। 

राखी के दिन केवल अपनी बहन की रक्षा का संकल्प मात्र नहीं लेना चाहिए  नहीं बल्कि संपूर्ण नारी जगत के मान-सम्मान और अधिकारों की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए ताकि सही मायनों में राखी के दायित्वों का निर्वहन किया जा सके। रक्षाबंधन पर्व पर हमें देश व धर्म की रक्षा का संकल्प भी लेना चाहिए।

-प्रियंका सौरभ 

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,
कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार,

जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति निर्वाचित – पीएम मोदी से मिले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, मार्गरेट अल्वा ने दी बधाई

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नई दिल्ली, 06 अगस्त  उपराष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) उम्मीदवार जगदीप धनखड़ विजयी घोषित हुए हैं। उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार एवं कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मार्गरेट अल्वा पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की है।

लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह ने उनके निर्वाचन की घोषणा की। जगदीप धनकड़ को 528 प्रथम वरियता मत प्राप्त हुए जबकि उनके प्रतिद्वंदी विपक्ष की मार्गरेट अल्वा को 182 मत मिले। उपराष्ट्रपति चुनाव में 92.94 प्रतिशत मतदान हुआ और 725 सांसदों ने मताधिकार का इस्तेमाल किया था।

 


उपराष्ट्रपति चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने मतदान में हिस्सा न लेने का निर्णय किया था। उसके 34 सांसदों ने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं किया। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के दो सदस्य शिशिर अधिकारी और दिव्येंदु अधिकारी ने मतदान में हिस्सा लिया। वहीं, समाजवादी पार्टी, शिवसेना के दो और बसपा के एक सांसद ने मतदान नहीं किया।

पीएम मोदी से मिले धनखड़, अल्वा ने दी बधाई

उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद देश के नए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पीएम मोदी से मुलाकात की। पीएम ने उन्हें बधाई दी। पीएम के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह, राहुल गांधी, राजस्थान सीएम अशोक गहलोत समेत कई नेताओं ने धनखड़ को बधाई दी। विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा ने भी धनखड़ को नए उपराष्ट्रपति बनने पर बधाई दी।

बलौदाबाजार : गौ-मूत्र खरीद का जायजा लेने कलेक्टर पहुंचे गौठान , अब तक 98 लीटर की हुई है खरीद

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बलौदाबाजार, 6 अगस्त । कलेक्टर रजत बंसल ने गौठानों में संचालित हो रहे गतिविधियों का जायजा लेने जिले के विभिन्न गौठान का शनिवार को आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान वह बलौदाबाजार विकासखंड अंतर्गत ग्राम खम्हारडीह एवं विकासखंड पलारी अंतर्गत ग्राम छेरकापुर के गौठान पहुंचकर व्यवस्थाओं सम्बंधित जानकारी हासिल की।

उन्होंने मुख्य रूप से गौधन न्याय योजना विस्तार के तहत छेरकापुर के गौठान में संचालित गौ-मूत्र खरीदी के संबंध में विस्तृत जायजा लिया। उन्होंने गौ-मूत्र खरीदी से लेकर कीटनाशक बनाने की पूरी गतिविधियों को देखा। उपस्थित गौठान प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं पशु पालन विभाग के अधिकारियों ने गौ-मूत्र खरीदी एवं उसमें उपयोग होने वाले उपकरणों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।

बंसल ने उपस्थित महिला स्व सहायता समूहों के सदस्यों से चर्चा कर उनकी समस्याओं के बारे जानकारी हासिल किया। साथ ही उन्होंने शीघ्र ही समस्या के निराकरण करनें का आश्वासन सदस्यों को दिया।

इसके साथ ही खम्हारडीह के गौठान में गोबर खरीदी,वर्मी कंपोस्ट,टांका निर्माण,महिला स्व सहायता समूहों के कार्य एवं बाड़ी का जायजा लिया।

गौठान में वर्मी कंपोस्ट का कार्य करने वाली भारत माता वाहिनी महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष रजनी वैष्णव एवं बाड़ी की कार्य करने वाली नारी शक्ति महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष उमेश्वरी चंदेल ने शेड की कमी होने के बारे में जानकारी दी।

साथ ही सभी ने मुर्गी पालन की गतिविधियां प्रारंभ करनें इच्छा जतायी जिस पर कलेक्टर बंसल ने जनपद पंचायत सीईओ को एक नये वर्किंग शेड स्वीकृत के साथ ही एक अलग से बड़ा मुर्गी शेड स्वीकृत करनें के निर्देश दिए है। इस अवसर पर गौठान में वृक्षारोपण भी किया गया। पशुपालक ग्रामीणों ने अब तक कुल 98 लीटर गौ-मूत्र विक्रय कर लाभांवित हुए ।

इस मौके पर सरपंच परमेश्वरी पैकरा,जिला पंचायत सीईओ गोपाल वर्मा,जनपद पंचायत सीईओ रूही टेंभुलकर, सहित स्थानीय ग्रामीण एवं जनप्रतिनिधि गण उपस्थित थे।

प्रयागराज – गौ तस्कर की पांच करोड़ की सम्पत्ति कुर्क

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प्रयागराज । जिले के कुख्यात गौ तस्कर की पांच करोड़ की सम्पत्ति शुक्रवार को कुर्क की गई। बता दें कि यह कार्रवाई गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई। इसके बाद पुलिस तस्करों की संपत्ति का ब्यैारा जुटा रही है। यह जानकारी एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने दी है। 

उन्होंने बताया कि गौ तस्करों मुजफ्फर ने अपनी संपत्तियों को अपने सगे-संबंधियों के नाम पर निवेश किया था। जांच के बाद डीएम ने 30 जुलाई को निर्णय पारित किया। उसी क्रम में आज 6 संपत्ति जो मुजफ्फर से जुड़े हुए हैं। जो लोगों द्वारा उसको बचाने की नीयत से विभिन्न नामों द्वारा उपयोग में लायी जा रही है।

उस संपत्ति को कुर्क किया गया है। लोगों को अवगत कराया गया है, यदि इन संपत्तियों पर कोई प्रवेश करता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। ये संपत्ति लगभग 5 करोड़ की है। इसके पहले भी करीब 5 करोड़ की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। धूमनगंज में 2018 में 1800 किलो प्रतिबंधित मांस पकड़ा गया।

इसी मामले में मुजफ्फर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। बाद में पूरामुफ्ती थाने में गौ तस्करी और पुलिस पार्टी पर हमला के मामले में मुजफ्फर के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया। जेल में बंद रहते ही मुजफ्फर ने कौड़िहार ब्लाक प्रमुख का चुनाव जेल में रहते हुए लड़ा और जीता था, लेकिन वह शपथ ग्रहण नहीं कर पाया था।

मध्य प्रदेश में 26 ह़जार किसानों को गौ पालन के लिए 28 करोड़ मिलेंगे

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मध्यप्रदेश प्राकृतिक कृषि विकास योजना

मध्य परिषद् मंत्रि-परिषद ने राज्य में प्राकृतिक कृषि पद्धति के प्रचार-प्रसार के लिये प्रदेश के कृषकों को एक देशी गाय के पालन पर अनुदान तथा प्रत्येक जिले के 100 ग्रामों में प्राकृतिक खेती प्रारंभ करने के उद्देश्य से नवीन “मध्यप्रदेश प्राकृतिक कृषि विकास योजना” संपूर्ण मध्यप्रदेश में क्रियान्वित किए जाने का निर्णय लिया।

900 रूपए प्रतिमाह की सहायता

योजना के अंतर्गत 52 जिलों में 100 ग्रामों का चयन कर कुल 5200 ग्रामों में प्राकृतिक खेती प्रारंभ की जाएगी। प्रत्येक ग्राम से 5,  इस प्रकार कुल 26 हजार प्राकृतिक कृषि करने वाले किसानों का चयन कर उन्हें गौ-पालन के लिए अनुदान दिया जाएगा।

अनुदान के रूप में 900 रूपए प्रतिमाह की सहायता दी जाएगी।

प्राकृतिक कृषि करने वाले कृषकों का एक पोर्टल/एप तैयार किया जाएगा। इस पर पंजीकृत कृषकों को मास्टर ट्रेनर एवं ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।

1 हजार रूपए प्रतिमाह दिया जाएगा

मास्टर ट्रेनर को प्रशिक्षक के रूप में कार्य करने का मानदेय 1 हजार रूपए प्रतिमाह दिया जाएगा और वे प्राकृतिक प्रेरक कहलाएंगे।

प्रशिक्षण पर 400 रूपए प्रति कृषक प्रति दिन का व्यय प्रावधानित किया गया है।

योजना के क्रियान्वयन के लिए 39 करोड़ 50 लाख रूपए की आवश्यकता होगी, जो राज्य शासन द्वारा वहन की जाएगी। प्रशासकीय विभाग ने प्रथम चरण में 26 हजार कृषकों के लिए 900 रूपए प्रतिमाह के मान से 1 वर्ष के लिए 28 करोड 08 लाख रूपए के व्यय की स्वीकृति दी है।

गौ तस्करी मामले में सीबीआई ने अणुव्रत मंडल को भेजा नोटिस

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कोलकाता, 5 अगस्त । केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने राज्य के गौ तस्करी मामले में बीरभूम जिले के विवादित नेता अणुव्रत मंडल को नोटिस भेजा गया है। उन्हें आगामी सोमवार को पूछताछ के लिए निजाम पैलेस स्थित सीबीआई दफ्तर में सुबह 11 बजे हाजिर होने को कहा गया है।

शुक्रवार को सीबीआई क नोटिस को लेकर अणुव्रत मंडल ने बताया कि अभी सोमवार आने में देर है, मैं जाऊंगा या नहीं जाऊंगा वक्त के साथ पता चल जाएगा।

उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले ही उनके करीबी नेता करीम खान के नानूर स्थित घर पर सीबीआई ने छापेमारी की थी। इसके अलावा उन्हीं के करीबी कारोबारी जियाउल हक और ठूलों मंडल के तीन घरों में भी तलाशी अभियान चलाया गया था। पेट्रोल पंप पर भी सीबीआई अधिकारियों ने जांच पड़ताल की थी। उनके बॉडीगार्ड सहगल हुसैन सीबीआई हिरासत में है, जिसके पास से 100 करोड़ से अधिक की संपत्ति मिली है। बंगाल पुलिस का एक साधारण कॉन्स्टेबल होने के बावजूद बॉडीगार्ड होने के नाते कई कंपनियों और बेनामी संपत्तियों का मालिक होने पर उससे लगातार पूछताछ हुई है। कोयला और मवेशी तस्करी के मामले में अणुव्रत मंडल की कथित संलिप्तता को लेकर सोमवार को उनसे पूछताछ की जाएगी।

ताइवान पर तनाव, अमेरिका का चाव, भारत के भाव

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File Photo
   -सत्यवान ‘सौरभ’
अमेरिकी कांग्रेस की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा को लेकर दोनों देशों के बीच तीखा तनाव पैदा हो गया है। मंगलवार को जब अमेरिकी कांग्रेस की स्‍पीकर ताइवान पहुंची तो अमेरिकी फाइटर जेट्स भी पीछे-पीछे सुरक्षा में रवाना हुए। इससे नाराज चीन ने ताइवान के आसपास सैन्य युद्ध अभ्यास का ऐलान कर दिया। चीन भड़का हुआ है। अमेरिका ने भी साफ कर दिया कि सुरक्षा के मुद्दे पर अमेरिका ताइवान के साथ खड़ा है। नैंसी पेलोसी के दौरे पर चीन क्यों खफा है। क्या रूस और यूक्रेन की तरह चीन और ताइवान के बीच युद्ध की संभावना है। अमेरिकी स्पीकर नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा का चीन ने स्वागत नहीं किया है। इसने दो शक्तिशाली देशों- चीन और अमेरिका के बीच तीव्र तनाव पैदा कर दिया है क्योंकि चीन ताइवान को एक अलग प्रांत के रूप में देखता है।

ताइवान, जो खुद को एक संप्रभु राष्ट्र मानता है, मगर चीन ताइवान को अपना अलग प्रांत मानता है। फिर भी ताइवान अमेरिका को अपना सबसे बड़ा सहयोगी मानता है और अमेरिकी स्पीकर नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद दुनिया एक नए टकराव की ओर बढ़ रही है. यात्रा के बाद अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ गया है, जिसके केंद्र में ग्लोबल सेमीकंडक्टर ट्रेड पर वर्चस्व बनाना है. ऐसा अनुमान है कि ग्लोबल सेमीकंडक्टर कैपेसिटी में अकेले ताइवान की 20 फीसदी हिस्सेदारी होगी. दूसरी ओर अमेरिका और चीन सेमीकंडक्टर के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से हैं. बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की एक रिपोर्ट के अनुसार, सेमीकंडक्टर दुनिया में चौथा सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाला प्रोडक्ट है. इसमें दुनिया के 120 देश भागीदार हैं. सेमीकंडक्टर से ज्यादा ट्रेड सिर्फ क्रूड ऑयल, मोटर व्हीकल व उनके कल-पुर्जों और खाने वाले तेल का ही ट्रेड होता है।

ताइवान, आधिकारिक तौर पर चीन गणराज्य, पूर्वी एशिया में एक देश है, और उत्तर पश्चिमी प्रशांत महासागर में पूर्वी और दक्षिण चीन सागर के जंक्शन पर जापान और फिलीपींस के बीच है। अर्धचालकों की अधिकांश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला ताइवान पर निर्भर है। वर्तमान में, केवल 13 देश (प्लस वेटिकन) ताइवान को एक संप्रभु देश के रूप में मान्यता देते हैं। चीन और ताइवान की अर्थव्यवस्थाएं अटूट रूप से जुड़ी हुई हैं। 2017 से 2022 तक 515 बिलियन डॉलर के निर्यात मूल्य के साथ चीन ताइवान का सबसे बड़ा निर्यात भागीदार है, जो अमेरिका से दोगुना से अधिक है। ताइवान अन्य द्वीपों की तुलना में मुख्य भूमि चीन के बहुत करीब है, और बीजिंग इसे अपना समझता है क्योंकि 1949 में चीनी क्रांति के दौरान राष्ट्रवादियों को वहां से खदेड़ दिया था।

अमेरिका और चीन के बीच जिन मुद्दों को लेकर तनाव है, उनमें है ट्रेड वॉर- दोनों ने एक-दूसरे के उत्पादों पर आयात कर बढ़ाया है. हाल के सालों में एक-दूसरे पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए हैं. समंदर में बढ़ते चीन के प्रभाव और दक्षिण चीन सागर में चीन के पैर फैलाने से अमेरिका और पश्चिमी मुल्क नाराज़ हैं. इसे लेकर कई बार दोनों के बीच तनाव चेतावनी तक भी बढ़ा है. चीन की घेराबंदी कर अमेरिका पेसिफिक के देशों के साथ संबंध बढ़ाना चाहता है. यहां वो अपने सहयोगी ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर चीन के प्रभाव को रोकने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका, यूके और ऑस्ट्रेलिया के बीच हाल में ऑकस सुरक्षा गठबंधन बना है. अमेरिका चीन पर वीगर अल्पसंख्यक मुसलमानों के मानवाधिकारों के उल्लंघन का भी आरोप लगाता है, हालांकि चीन इससे इनकार करता रहा है.

अमेरिका और चीन के बीच तनाव के जो मुद्दे हैं वो बने हुए हैं, चाहें वो ताइवान हों, दक्षिण चीन सागर में बढ़ता चीन का प्रभाव हो या फिर दोनों देशों के बीच चल रहा ट्रेड वॉर हो; इन सभी से परे ताइवान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भी साख का सवाल बनता जा रहा है. चीन की आर्थिक हालत इस समय ख़राब है. शी जिनपिंग ऐसे समय में कमजोर नहीं दिखना चाहेंगे, इसलिए वो राष्ट्रवाद का सहारा लेंगे और ताइवान की तरफ जाएंगे. इसलिए चीन ताइवान को लेकर आक्रामक है और भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल कर रहा है.

आज के वैश्विक परिवेश में अमेरिका की शक्ति कम हो रही है और चीन एक उभरती हुई शक्ति है. जहां तक भारत की बात है, भारत एक अनिश्चित शक्ति है, रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत ने भी वही पक्ष लिया है जो चीन ने लिया है. चीन भारत का पड़ोसी है, दोनों करीब 3488 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं. लेकिन बीते कुछ सालों से भारत और चीन सीमा विवाद में उलझे हैं. जून 2020 में गलवान घाटी में दोनों मुल्कों के सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद दोनों के रिश्तों में तनाव बढ़ा है. भारत ने दर्जनों चीनी मोबाइल ऐप्स प्रतिबंधित किए हैं और कुछ चीनी उत्पादों पर एंटी डंपिंग कर भी लगाया है. वहीं, भारत के अमेरिका के साथ मज़बूत रिश्ते रहे हैं. चीन का मुकाबला करने के लिए एशिया में भारत अमेरिका का अहम सहयोगी है.

अमेरिका ने खुलकर भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने के संकेत भी दिए हैं. ऐसे में अगर चीन और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता है तो उसका असर भारत पर पड़ने की आशंका भी है. भारत और चीन के बीच हाल के सालों में रिश्तों में तनाव आया है. इसी बीच भारत ने ताइवान के साथ अपने संबंधों को निभाने की कोशिश की है. 2020 में गलवान में में हुए विवाद के बाद भारत ने विदेश मंत्रालय में तत्कालीन संयुक्त सचिव (अमेरिका) गौरांगलाल दास को ताइवान में राजनयिक नियुक्त किया. भारत ने अभी तक तक ताइवान के साथ औपचारिक राजनयिक रिश्ते नहीं बनाए है।  भारत के लिए अहम ये नहीं है कि चीन और अमेरिका बात कर रहे हैं. भारत के लिए अहम ये है कि चीन ने जिस तरह से अमेरिका को स्पष्ट कहा है कि ताइवान के मामले में वो किसी को दखल नहीं देने देगा. इससे भारत के लिए संकेत ये है कि चीन अपने और भारत के तनाव में भी किसी को दखल नहीं देने देगा.

भारत की एक्ट ईस्ट विदेश नीति के एक हिस्से के रूप में, भारत ने ताइवान के साथ व्यापार और निवेश के साथ-साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण के मुद्दों और लोगों से लोगों के आदान-प्रदान में सहयोग विकसित करने की मांग की है। उदाहरण के लिए, नई दिल्ली में भारत-ताइपे एसोसिएशन  और ताइपे आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र। भारत और ताइवान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन 1995 के बाद से, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की राजधानियों में प्रतिनिधि कार्यालय बनाए रखा है जो वास्तविक दूतावास के रूप में कार्य करते हैं। 1949 से, भारत ने एक चीन नीति को स्वीकार किया है जो ताइवान और तिब्बत को चीन के हिस्से के रूप में स्वीकार करती है।

हालांकि, भारत एक कूटनीतिक बिंदु बनाने के लिए नीति का उपयोग करता है, अर्थात, यदि भारत “एक चीन” नीति में विश्वास करता है, तो चीन को “एक भारत” नीति में भी विश्वास करना चाहिए। भले ही भारत ने 2010 से संयुक्त बयानों और आधिकारिक दस्तावेजों में वन चाइना नीति के पालन का उल्लेख करना बंद कर दिया है, लेकिन चीन के साथ संबंधों के ढांचे के कारण ताइवान के साथ उसका जुड़ाव अभी भी प्रतिबंधित है। आखिरकार, ताइवान का मुद्दा केवल एक सफल लोकतंत्र के विनाश की अनुमति देने के नैतिक प्रश्न के बारे में नहीं है, मगर अंतरराष्ट्रीय नैतिकता के बारे में है, ताइवान पर चीन के आक्रमण के अगले दिन एक बहुत ही अलग एशिया दिखेगा, चाहे कुछ भी हो जाए। ऐसे में ताइवान पर तनाव में, अमेरिका का चाव, भारत के भाव निर्णायक साबित होंगे।

  -सत्यवान ‘सौरभ’

रिसर्च स्कॉलर, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,
333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045