दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर सम्मेलन आईटीसीएक्स 2025 तिरुपति में भव्य समारोह के साथ शुरू हुआ


जम्मू, । जम्मू के आमफला चौक पर मूवमेंट कल्कि के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन 119वें दिन भी जारी रहा। इस आंदोलन का उद्देश्य गाय माता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाना, सनातन बोर्ड का गठन, गौशालाओं का निर्माण, और सख्त गौ संरक्षण कानून लागू कराना है। आज इस आंदोलन के तहत विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें आंदोलन की आगामी रणनीति पर चर्चा की गई। सभी संगठनों ने संयुक्त संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया और सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
योग गुरु श्री श्री 1008 विजय कृष्ण पाराशर जी महाराज ने इस अवसर पर कहा कि यह सिर्फ एक आंदोलन नहीं बल्कि सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा का यज्ञ है। मूवमेंट कल्कि ने सभी सनातन प्रेमियों और गौ भक्तों से अपील की है कि वे इस पवित्र आंदोलन से जुड़ें और धर्म तथा संस्कृति की रक्षा में योगदान दें।
नेशनल डेस्क: महाकुंभ की वायरल गर्ल मोनालिसा फिल्मों में एंट्री करने वाली है। ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ के डायरेक्टर सनोज मिश्रा पर गंभीर आरोप लगे हैं। दावा किया जा रहा है कि मोनालिसा अब एक ट्रैप में फंस गई हैं। एक इंटरव्यू में, बंगाल डायरी, राम की जन्मभूमि और काशी टू कश्मीर फिल्मों के प्रोड्यूसर जितेंद्र नारायण सेंगर उर्फ वसीम रुजवी ने सनोज मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सनोज मिश्रा शराब के नशे में रहते हैं और फिल्म सेट पर भी शराब पीते हैं। शराब पीने के बाद उन्हें लड़कियों की जरूरत होती है।
जितेंद्र नारायण सेंगर ने कहा कि सनोज मिश्रा ने कई फिल्में बनाने का दावा किया, लेकिन उनकी एक भी फिल्म रिलीज नहीं हुई और न ही उसने कोई कमाई की। उन्होंने यह भी कहा कि मोनालिसा का परिवार बहुत सीधा और भोला है। जितेंद्र नारायण सेंगर ने बताया कि हमारी फिल्म की शूटिंग सीतापुर में हो रही थी, जहां सनोज मिश्रा ने सेट पर शराब पीनी शुरू कर दी थी और वहां मौजूद महिलाओं के साथ बदतमीजी की थी।
डायरेक्टर सनोज मिश्रा के बारे में कहा गया कि महाकुंभ में वायरल हुईं मोनालिसा का परिवार बहुत सीधा है। सनोज उनके घर गए और बिना कोई जांच किए मोनालिसा के परिवार ने अपनी बेटी को उनके हवाले कर दिया। जितेंद्र नारायण सेंगर ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की कई लड़कियों ने शिकायत की है कि सनोज मिश्रा उन्हें हीरोइन बनाने का वादा करके मुंबई ले गए थे, जहां उन्होंने उनके साथ गलत काम किया।
बता दें कि मोनालिसा, जो मध्य प्रदेश से हैं, महाकुंभ में अपनी आंखों के कारण सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थीं। वह इतनी वायरल हो गईं कि महाकुंभ में लोग उनकी फोटो और वीडियो बनाने के लिए उन्हें परेशान करने लगे थे। इससे तंग आकर मोनालिसा ने महाकुंभ छोड़ने का फैसला किया था। इसके बाद डायरेक्टर सनोज मिश्रा उनके घर पहुंचे और उन्हें फिल्म का ऑफर दिया।
मुंबई: न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले के आरोपी हितेश मेहता को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक जब पैसे एक ब्रांच से दूसरे ब्रांच के लिए ट्रांसफर किए जाते थे उस दौरान हितेश मेहता चोरी की वारदात को अंजाम दिया करता था। हितेश मनी ट्रांसफर के दौरान गाड़ी से पैसे निकाल कर अपने घर ले जाता था। आरोपी हितेश मेहता पर प्रभादेवी ब्रांच से 112 करोड़ और गोरेगांव ब्रांच से 10 करोड़ गबन करने का आरोप है। हितेश मेहता को सुनवाई के लिए मुंबई की हॉलिडे कोर्ट में लाया गया है।
मुंबई पुलिस ने शनिवार को हितेश मेहता को बैंक से 122 करोड़ रुपये के कथित गबन के आरोप में गिरफ्तार किया। एक अधिकारी ने बताया कि मेहता को शहर पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने तीन घंटे से अधिक समय तक पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया। बैंक के कार्यवाहक मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवर्षि घोष ने शुक्रवार को मध्य मुंबई के दादर पुलिस स्टेशन में जाकर धन के दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार मेहता ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर साजिश रची और बैंक के प्रभादेवी तथा गोरेगांव कार्यालयों की तिजोरियों में रखे धन से 122 करोड़ रुपये का गबन किया।
अधिकारी ने बताया कि मेहता को इस मामले के संबंध में जांच एजेंसी के दक्षिण मुंबई कार्यालय में अपना बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बृहस्पतिवार को सहकारी बैंक पर कई प्रतिबंध लगाए थे, जिसमें जमाकर्ताओं द्वारा धन की निकासी पर प्रतिबंध भी शामिल है। आरबीआई ने बैंक में हाल ही में हुए घटनाक्रमों से पैदा हुई निगरानी संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए यह कदम उठाया। आरबीआई ने शुक्रवार को एक साल के लिए बैंक के बोर्ड को भंग कर दिया था और कामकाज के प्रबंधन के लिए एक प्रशासक नियुक्त किया। प्रशासक की मदद के लिए सलाहकारों की एक समिति भी नियुक्त की गई।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर मेहता और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316 (5) (लोक सेवकों, बैंकरों और भरोसेमंद पदों पर बैठे अन्य लोगों द्वारा आपराधिक विश्वासघात), धारा 61 (2) (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि जांच के दायरे को देखते हुए मामले को ईओडब्ल्यू को सौंप दिया गया है। एजेंसी ने जांच शुरू कर दी है। इस सहकारी बैंक की 28 शाखाओं में ज्यादातर मुंबई महानगर में हैं। गुजरात के सूरत में इसकी दो शाखाएं और पुणे में एक शाखा है। (इनपुट-भाषा)
Mumbai – महाराष्ट्र के कुर्ला में एक पिता ने अपनी तीन महीने की बेटी को जमीन में पटक दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। बताया जा रहा है कि आरोपी का अक्सर उसकी पत्नी के साथ विवाद होता था। वह छह महीने से बेरोजगार भी था। वारदात वाले दिन भी पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ और गुस्साए पति ने पत्नी को पीटने के साथ बेटी की भी हत्या कर दी।
प्राथमिक रूप से मिली जानकारी के मुताबिक घटना मुंबई के कुर्ला इलाके की है। यहां एक 34 वर्षीय बेरोजगार आदमी ने अपनी तीन महीने की बेटी को उठाकर पटक दिया, जिसकी वजह से उसे गंभीर चोट आई। बच्ची को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
आरोपी की पहचान परवेज सिद्दीकी के रूप में हुई है, जो छह महीने से बेरोजगार था। वह पहले एक ठेकेदार के साथ इलेक्ट्रीशियन के रूप में काम करता था, लेकिन छह महीने पहले उसकी नौकरी चली। इसके बाद से पैसे और अन्य चीजों को लेकर पत्नी के साथ उसका विवाद होने लगा। अक्सर पति-पत्नी लड़ते थे। घटना वाले दिन भी लड़ाई हुई और आरोपी ने गुस्से में बेटी को पटक दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। विनोबा भावे पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) अधिनियम की धारा 103(1) और 115(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। हत्या का केस दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।
मुंबई के कुर्ला इलाके में 5 साल की बच्ची के साथ रेप करने के आरोप में दो नाबालिग लड़कों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने दोनों नाबालिगों को हिडोंगरी के बालसुधार गृह में भेज दिया गया है. पीड़िता की मां की शिकायत के आधार पर चूनाभट्टी पुलिस ने दोनों नाबालिग लड़कों के खिलाफ BNS की धारा 64,65(2) और पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया.
लड़की की मां द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, आरोपी लड़के पीड़ित लड़की को कुर्ला इलाके में एक धार्मिक स्थल पर ले गए और आरोपी लड़कों ने उस स्थान पर लड़की के साथ रेप किया. यह घटना तब सामने आई जब असहनीय दर्द से कराह रही लड़की ने अपनी मां को घटना के बारे में बताया. पीड़ित बच्ची को इलाज के लिए मुंबई के एक सरकारी अस्पताल ले जाया गया और वह एडमिट किया गया है. चूनाभट्टी पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है.

अपनी एक पोस्ट मे प्रधानमंत्री ने कहा;
“दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। सभी से शांत रहने, सुरक्षा सावधानियों का पालन करने और संभावित झटकों के प्रति सतर्क रहने का आग्रह है। अधिकारी स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं।”
Tremors were felt in Delhi and nearby areas. Urging everyone to stay calm and follow safety precautions, staying alert for possible aftershocks. Authorities are keeping a close watch on the situation.
— Narendra Modi (@narendramodi) February 17, 2025
Bihar Politics: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार देर रात हुई भगदड़ में करीब 18 लोगों की मौत हुई थी. इसमें अधिकतर कुंभ जाने वाले यात्री थे. हादसे के बाद आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने रेलवे को दोषी ठहराया. साथ ही उन्होंने कहा कि कुंभ का कोई मतलब नहीं है. कुंभ फालतू है. उनके इस बयान के बाद बिहार में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. वार पलटवार का दौर शुरू हो गया है. आज यानी सोमवार को लालू यादव के बयान पर बीजेपी और जेडीयू ने करारा पलटवार किया है.
बीजेपी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने लालू यादव के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि किसी की धार्मिक अस्मिता पर चोट करने वाला लालू प्रसाद यादव का बयान घोर निंदनीय है. जो व्यक्ति अपने बाल-बच्चों के मांगलिक कार्यों में धार्मिक अनुष्ठान करवाता हो उनके मुख से इस तरह का कथन कोई भी सनातनी बर्दाश्त नहीं करेगा. करोड़ों लोग कुंभ में स्नान करके धार्मिक आस्था का परिचय दे चुके हैं, इसलिए लालू यादव को अपने दिए गए बयान का औचित्य बताना चाहिए. क्या राबड़ी देवी छठ पूजा करती हैं तो गंगा स्नान नहीं करती हैं? काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन को क्या उनका परिवार नहीं जाता है? फिर लालू यादव का इस तरह का बेतुका बयान क्यों? इस बार बिहार के विधानसभा चुनाव में सनातनी इसका उन्हें मजा चखाएगा.
वहीं लालू यादव के महाकुंभ वाले बयान पर जवाब देते हुए जदयू प्रवक्ता अरविंद निषाद ने कहा, “लालू यादव 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे. उस दौरान रेलवे में 51 दुर्घटनाएं हुई थीं. 370 रेलवे क्रॉसिंग की घटनाएं हुईं. उनके पांच वर्षों के रेल मंत्री के कार्यकाल में कुल 1034 लोगों की मृत्यु हुई थी. तो अपने कार्यकाल में रेलवे में जो सुधार किया जाना चाहिए था उसको आपने नहीं किया था जिसके कारण 1034 लोगों की मृत्यु हुई? दुर्घटनाएं दुर्भाग्य से घटित होती हैं. इस प्रकार से हिंदू सभ्यता संस्कृति और रेलवे पर सवाल खड़ा करने की जरूरत नहीं है बल्कि सहयोग करने की आवश्यकता है.”
हालांकि, राजद सुप्रीमो लालू यादव की तरफ से बचाव करते हुए आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि लालू यादव के बोलने का मतलब यह था कि जो कुंभ में व्यवस्था की गई है वह फालतू व्यवस्था है. इसके कारण इतने लोगों की मौत हो रही है. पूरी तरह कुंभ की जो व्यवस्था है वह लचर व्यवस्था है. कुंभ पर उनके बोलने का यही मतलब था कि बीजेपी अपने वोट बैंक को साधने के लिए लोगों की जान ले रही है.
जो शोध ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए, वह वह शोध नहीं है जिसकी देश को जरूरत है; शोध अमूर्त नहीं हो सकता: उपराष्ट्रपति
कृषि क्षेत्र के लिए कोई कमी नहीं, किसान के लिए कोई कमी नहीं, यही हमारा आदर्श वाक्य होना चाहिए: उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति ने कहा, विकसित भारत का रास्ता गांवों से होकर गुजरता है
उपराष्ट्रपति ने कहा-हमारे देश में कुछ लोग इस बात पर संदेह कर रहे हैं कि यह सदी भारत की है
Technology transfer to the farm is essential.
A farmer is by and large clinging to his tractor. He wants to use the tractor for as long as it can last, ignorant that the technology of the tractor is undergoing big changes- it is becoming environment friendly, fuel-efficient,… pic.twitter.com/cS0hp0IhQ7
— Vice-President of India (@VPIndia) February 17, 2025
स्टार्टअप्स को गांवों तक पहुंचना चाहिए: उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय कृषि-खाद्य एवं जैव विनिर्माण संस्थान (एनएबीआई) में उन्नत उद्यमिता एवं कौशल विकास कार्यक्रम (ए-ईएसडीपी) परिसर का उद्घाटन किया। भारत के उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने सोमवार को कहा, “मैं एक किसान का बेटा हूँ। किसान का बेटा हमेशा सत्य के प्रति समर्पित रहता है… उन्होंने आगे कहा, “भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है और ग्रामीण व्यवस्था देश की रीढ़ की हड्डी है। विकसित भारत का रास्ता गांवों से होकर गुजरता है। विकसित भारत अब केवल एक सपना नहीं है; यह हमारा लक्ष्य है।” उन्होंने कृषि से अपने गहरे जुड़ाव पर जोर दिया।
मोहाली के राष्ट्रीय कृषि-खाद्य और जैव विनिर्माण संस्थान (एनएबीआई) में उन्नत उद्यमिता और कौशल विकास कार्यक्रम (ए-ईएसडीपी) परिसर के उद्घाटन के अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए श्री धनखड़ ने कहा- “यदि हम अपने गौरवशाली इतिहास को देखें, तो भारत को ज्ञान और बुद्धि की भूमि के रूप में जाना जाता था। विशेष रूप से विज्ञान, खगोल विज्ञान और बहुत कुछ में। मानव जीवन के हर पहलू को हमारे वेदों, उपनिषदों, पुराणों में प्रतिबिंबित किया गया है। हम एक ऐसा राष्ट्र हैं जो नालंदा, तक्षशिला और इस तरह के प्राचीन संस्थानों पर गर्व करता है। हमारे यहां 11वीं या 12वीं शताब्दी के आसपास बहुत कुछ नष्ट कर दिया गया। लुटेरे आए, आक्रमणकारी आए और वे हमारी संस्थाओं को नष्ट करने में बुरी तरह मुब्तिला रहे। नष्ट किए जाने वाली संस्थाओं में, नालंदा एक था। हमारे सांस्कृतिक केंद्र, हमारे धार्मिक केंद्रों पर बहुत अलग तरह के प्रतिशोधी, विकृत होने की हद तक चले गए। उन्होंने अपने खुद के केंद्र बनाए। राष्ट्र ने इसका सामना किया। फिर ब्रिटिश शासन आया। व्यवस्थित रूप से, हमें ऐसे कानून मिले जो उनके अधीन थे। हमें ऐसी शिक्षा मिली जिसने हमारी शिक्षा को नष्ट कर दिया और हमारी प्रतिभा के पूर्ण दोहन का इकोसिस्टम नहीं बन पाया। उपराष्ट्रपति ने कहा, सबसे अच्छी बात यह है कि हम जल्दी से संभल जाते हैं और तेजी से उभर रहे हैं।”
शोध के महत्व पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया: “देश के सभी संस्थानों को लिटमस टेस्ट पास करना होगा। लिटमस टेस्ट यह है कि क्या प्रभाव पैदा हो रहा है? सकारात्मक अर्थों में, यह भूकंप की तरह होना चाहिए, जिसका प्रभाव महसूस किया जा सके। शोध के लिए शोध, स्वयं के लिए शोध, शेल्फ पर रखे जाने वाले शोध, व्यक्तिगत अलंकरण के रूप में सामने आने वाले शोध वह शोध नहीं है जिसकी राष्ट्र को आवश्यकता है। शोध सतही रूप से शोधपत्र देना नहीं है। शोध उस व्यक्ति को प्रभावित करने के लिए नहीं है जो विषय से अनभिज्ञ है। शोध उन लोगों को प्रभावित करने के लिए है जो विषय को उतना ही जानते हैं जितना आप जानते हैं या वैश्विक बेंचमार्क पर आपसे अधिक जानते हैं। और वह शोध केवल अमूर्त नहीं हो सकता। हम जो कर रहे हैं उस पर शोध का प्रभाव होना चाहिए। उन्होंने कहा- “मुझे यकीन है कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ आपके पास पर्याप्त गुंजाइश है।”
भारत की सभ्यतागत ताकत को दोहराते हुए उन्होंने कहा, “यह सदी भारत की है। इस पर हमारे देश के कुछ लोगों को छोड़कर किसी को संदेह नहीं है। एक भारतीय के रूप में मेरी उनसे अपील है: हमारे राष्ट्र के प्रति हमारी प्रतिबद्धता, राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत में विश्वास और इस विचारधारा को अपनाना कि कोई भी हित – व्यक्तिगत, राजनीतिक या अन्य – राष्ट्रीय हित से बड़ा नहीं है।”
श्री धनखड़ ने कहा, “मैं देखता हूं कि कृषि उपज तब बेची जाती है जब यह किसानों का बाजार नहीं होता, यह खरीदारों का बाजार होता है। सरकार बड़े पैमाने पर गोदाम और सहकारी आंदोलन के जरिए स्टॉक को बनाए रखने की सुविधा प्रदान करती है। मैं आपको बता सकता हूं कि सरकार की कृषि नीतियां किसान की बहुत मदद कर रही हैं। किसान को इसके बारे में जानना होगा। आप एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं क्योंकि हम यह अनुमति नहीं दे सकते कि हमारे किसानों को सबसे अच्छे के अलावा कुछ भी मिले। कृषि क्षेत्र के लिए कोई छोटा बदलाव नहीं। किसान के लिए कोई छोटा बदलाव नहीं। यह हमारा आदर्श वाक्य होना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा- आपके जैसे संस्थानों का कृषि विज्ञान केंद्रों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के संस्थानों के साथ सीधा संपर्क होना चाहिए।
श्री धनखड़ ने कृषि और डेयरी उत्पादों में मूल्य संवर्धन करने वाले सूक्ष्म उद्योगों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं के पुनरुद्धार का आह्वान किया, “गांव या गांवों के समूह में एक ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए, जहां आपके खेत में सूक्ष्म उद्योग हों, जो कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन करें, जो उत्पादित पशुधन, उत्पादित दूध में मूल्य संवर्धन करें। इससे एक स्थायी समाज विकसित करने में मदद मिलेगी और निश्चित रूप से पोषण संबंधी खाद्य मूल्य में वृद्धि होगी। हमें गांव के समूहों में आइसक्रीम, पनीर, मिठाई और इसी तरह की अन्य चीजें बनाने के लिए उद्यमशीलता कौशल रखने से कौन रोकता है? यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे रोजगार पैदा होगा और ग्रामीण युवा संतुष्ट होंगे।”
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दक्षता और उत्पादकता में सुधार के लिए कृषि पद्धतियों में प्रौद्योगिकी को एकीकृत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों में हैं। उन्हें अब गांवों तक पहुंचना होगा क्योंकि कृषि उपज अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है, उद्योग के लिए कच्चा माल है। और जब ऐसा होगा, तो ग्रामीण क्षेत्र में कृषि भूमि के करीब, एक क्लस्टर के रूप में विकसित होने से अर्थव्यवस्था में उछाल आएगा और लोग कृषि भूमि पर विश्वास करेंगे।
श्री धनखड़ ने किसानों से आग्रह किया कि वे प्रौद्योगिकी में हो रही प्रगति और इसके संभावित लाभों के बारे में जानकारी रखें। उन्होंने जोर देकर कहा, “किसान आम तौर पर अपने ट्रैक्टर से चिपके रहते हैं। वे ट्रैक्टर का इस्तेमाल तब तक करना चाहते हैं जब तक यह चल सकता है, इस तथ्य से अनभिज्ञ कि नई तकनीक पर्यावरण के अनुकूल, ईंधन कुशल, बहुक्रियाशील और अत्यधिक सब्सिडी वाली होती जा रही है। जागरुकता अभियान चलाने की जरूरत है।”
उन्होंने सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करते हुए कहा, “छोटे-छोटे समूह बनाएं, अपने उत्पाद को अपनी पसंद की कीमत पर बेचें। आपको किसी की मदद की ज़रूरत नहीं है। आपको अपनी अर्थव्यवस्था को बहुत ऊँचे स्तर पर बदलने के लिए बस अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानना होगा।”
इस अवसर पर श्री प्रियांक भारती, आईएएस, प्रशासनिक सचिव, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण, पंजाब सरकार, प्रो. अश्विनी पारीक, कार्यकारी निदेशक, ब्रिक-एनएबीआई, सुश्री एकता विश्नोई, आईआरएस, संयुक्त सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।