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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गोधन न्याय योजना की 51वीं किश्त की राशि 5 करोड़ 9 लाख रूपए दिए

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रायपुर।  मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में गोधन न्याय योजना की 51वीं किश्त की राशि 5 करोड़ 9 लाख रूपए हितग्राहियों को उनके बैंक खाते में अंतरित की, जिसमें गोबर विक्रेताओं को 2 करोड़ 69 लाख रूपए, गौठान समितियों को एक करोड़ 48 लाख रूपए तथा महिला समूहों को 93 लाख रूपए की लाभांश राशि शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा कि गोधन न्याय योजना के अंतर्गत क्रय गए गोबर से निर्मित 15 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का किसान भाईयों ने अपने खेतों में उपयोग किया है। इस योजना के माध्यम से हम गौ माता की सेवा के साथ-साथ धरती माता की भी सेवा कर रहे है। खेतों में रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग वास्तव में धरती माता की सेवा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों से ऐसा फीडबैक मिल रहा है कि वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग से खेतों की मिट्टी मुलायम और उपजाऊ हो रही है। जिन खेतों में वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग किसान भाईयों ने अच्छे से किया है, वहां अब अन्य प्रकार के रासायनिक उर्वरक की जरूरत नहीं पड़ रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के 26 लाख से अधिक किसानों को वर्मी कम्पोस्ट उपलब्ध कराने के लिए इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन जरूरी है। इसके लिए उन्होंने गौठानों में बिना किसी व्यवधान के गोबर की नियमित खरीदी करने तथा आवश्यकतानुसार वर्मी टांकों का निर्माण कराए जाने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि चालू खरीफ सीजन में अब तक राज्य के पौने चार लाख किसानों ने फसल ऋण के रूप में सहकारी समितियों से वर्मी कम्पोस्ट का उठाव किया है, यह उत्साहजनक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोबर खरीदी की शुरूआती दौर में कतिपय लोगों ने इसका मजाक उड़ाया था। आज यह योजना गांवों में लोकप्रिय हो चुकी है। इस योजना की देशभर में सराहना हो रही है। दो सालों के भीतर ही इस योजना के माध्यम से एकसाथ कई लक्ष्यों को साधने के साथ ही महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठान और गोधन न्याय योजना के समन्वय से गांवों में रोजगार के नये अवसर सृजित हुए हैं। राज्य के 5863 गौठान समितियों के बैंक खाते में आज की स्थिति में 79 करोड़ 60 लाख रूपए जमा है। लगभग 2500 गौठान समितियां के पास एक लाख से 10 लाख रूपए तक 46 गौठान समितियों के पास 10 लाख से लेकर 50 लाख रूपए तक स्वयं की पूंजी जमा है।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ग्राम सुराज और स्वावलंबी गांव केे सपने को साकार करने की ओर मजबूत कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि गौठानों में स्थापित ग्रामीण औद्योगिक पार्क से कई युवा उद्यमी जुड़ना चाहते हैं। हमें उन्हें अवसर देना चाहिए इससे गांवों में रोजगार बढ़ेगी, लोगों की आय में वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठानों मे संचालित आयमूलक गतिविधियों और लघु वनोपज के संग्रहण और प्रसंस्करण से लोगों की आमदनी बढ़ी है। उनमें खुशहाली आई है। हमें इस प्रयास को और आगे बढ़ाने की जरूरत है।
कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि गौठानों में अब तक 160 करोड़ रूपए की गोबर खरीदी हो चुकी है। गौठानों से जुड़ी समूह की महिला बहनों ने वर्मी कम्पोस्ट और कृषि से जुड़ी गतिविधियों का संचालन कर 80 करोड़ रूपए की आय हासिल की है। गौठानों में आयमूलक गतिविधियां बेहतर तरीके से संचालित हो, इसका प्रयास सभी विभागों के समन्वय से किया जा रहा है। गौठानों में आयमूलक गतिविधियों का विस्तार शेड का निर्माण का कार्य प्राथमिकता से कराया जा रहा है।
युवा मितान क्लब को भी गौठानों से जोड़ने की पहल शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि गौठान और गोधन न्याय योजना आज की स्थिति में पशुपालकों, महिला समूहों और भूमिहीन परिवारों के आय का जरिया बन गई है। बैठक के प्रारंभ में गोधन न्याय योजना के प्रबंध संचालक डॉ. अयाज तम्बोली ने गोधन न्याय योजना की उपलब्धि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गौठानों में गो-मूत्र की खरीदी भी की जा रही है। अब तक 21 हजार लीटर गो-मूत्र क्रय कर उससे महिला समूह जैविक कीटनाशक, ब्रम्हास्त्र और जीवामृत बनाकर विक्रय कर रहे हैं। गोबर से अब तक 17.57 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट खाद का उत्पादन हुआ है, जिसमें से 15 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री हो चुकी है।
कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री प्रदीप शर्मा, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. आलोक शुक्ला, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह, सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. एस. भारतीदासन, मार्कफेड की प्रबंध संचालक सुश्री किरण कौशल, प्रबंध संचालक समग्र शिक्षा श्री नरेन्द्र दुग्गा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

सायरस मिस्त्री की मौत के लिए कौन जिम्मेदार

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टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री की महाराष्ट्र के पालघर में रविवार को हुई एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक़, ये हादसा उस वक्त हुआ जब मिस्त्री की कार सूर्या नदी के ऊपर बने पुल पर डिवाइडर से टकरा गई.

सायरस मिस्त्री मर्सिडीज कार की पिछली सीट पर केपीएमजे ग्लोबल स्ट्रैटेजी ग्रुप के डायरेक्टर जहांगीर पंडोल के साथ बैठे हुए थे. हादसे में उनकी भी मौत हो गई.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक गाड़ी जानी-मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ अनाहिता पंडोल चला रही थीं. उनकी बगल में उनके पति डेरियस पंडोल बैठे थे.

हादसे में दोनों बुरी तरह घायल हो गए. उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है. डेरियस जेएम फाइनेंशियल इक्विटी के एमडी और सीईओ हैं. सायरस मिस्त्री पंडोल परिवार के दोस्त थे.

ये हादसा रविवार की दोपहर पालघर के कासा इलाके में हुआ. इंडियन एक्सप्रेस ने कासा के एक पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया है कि साइरस मिस्त्री और जहांगीर मर्सिडीज गाड़ी में पिछली सीट पर बैठे हुए थे. लेकिन उन्होंने सीट बेल्ट नहीं बांध रखी थी. जब कार डिवाइडर से टकराई तो वे फ्रंट और बैक सीट के बीच दब गए.

मिस्त्री की मौत की असली वजह का पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही पता चल सकेगा. महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस हादसे की जांच के आदेश दिए हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर सायरस मिस्त्री की मौत को लेकर लोग सवाल भी उठा रहे हैं.

कुछ लोगों का कहना है कि आखिर मिस्त्री दस घंटे का सफर फ्लाइट के बजाय कार से क्यों कर रहे थे? कुछ लोग मर्सिडीज कार के सेफ्टी स्टैंडर्ड को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं.

सायरस मिस्त्री की मौत को लेकर जो सवाल उठाए जा रहे हैं उनका जवाब तो जांच के बाद ही मिलेगा. लेकिन हादसे के बाद हाईवे पर स्पीड लिमिट, एयरबैग की क्वॉलिटी और सीट बेल्ट की भूमिका पर बहस हो रही है.

क्या लापरवाह ड्राइविंग बनी हादसे की वजह?

शुरुआती जांच में पता चता है कि मिस्त्री और उनके दोस्त जहांगीर पंडोल मर्सिडीज जीएलसी कार की पिछली सीट पर बैठे थे.

महाराष्ट्र में पालघर जिले के चारोटी चेकपोस्ट पार करने के बाद इस कार ने नौ मिनट में ही 20 किलोमीटर की दूरी तय कर ली थी. यानी कार की स्पीड काफी ज्यादा थी.

चारोटी चेक पोस्ट पर लगे सीसीटीवी कैमरों को देखने के बाद पालघर पुलिस का कहना था कि यह हादसा ओवर स्पीडिंग और गाड़ी चलाने के दौरान ड्राइवर के सही तरीके से फैसला न लेने की वजह से हुआ होगा.

मिस्त्री की मौत के बाद भारतीय सड़कों पर गाड़ियों की गति पर कड़ी निगरानी का मांग तेज कर दी है.

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के ताजा आंकड़ों के मुताबिक सड़कों हादसों में हुई 1.56 लाख मौतों में से 85 हजार मौतें तेज रफ्तार गाड़ियों की वजह से हुईं थीं.
मर्सिडीज बेंज काफी सुरक्षित गाड़ी मानी जाती है. मिस्त्री मर्सिडीज बेंच एसयूवी में यात्रा कर रहे थे. ये भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाले लग्जरी कार मर्सिडीज बेंज का बेस्ट सेलिंग मॉडल है.

पचास लाख से ज्यादा कीमत की मर्सिडीज़ को यूरो एनसीएपी (यूरोपियन न्यू कार एसेसमेंट प्रोग्राम) ने फाइव स्टार सेफ्टी रेटिंग दी है और यह एमआरए आर्किटेक्चर पर बनी है.

जाने-माने ऑटो एक्सपर्ट टुटु धवन ने इस दुर्घटना पर बीबीसी हिंदी से कहा, “मर्सिडीज़ बेंज पैसेंजर सेफ्टी के हिसाब से काफी आला दर्जे की गाड़ी है. इसके सेफ्टी मानकों को लेकर कोई सवाल नहीं है. सायरस मिस्त्री की मौत जिस सड़क हादसे में मौत हुई वह सिर्फ एरर ऑफ़ जजमेंट (गाड़ी चलाने के दौरान हुई चूक) का नतीजा थी.”

उन्होंने कहा, “ये गाड़ी हाईवे पर 100 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी. आपने देखा होगा कि इतनी ज्यादा स्पीड से डिवाइडर से टकराने के बावजूद कार के छोटे से हिस्से को ही नुकसान पहुंचा है. इसलिए यह कहना गलत होगा कि मर्सिडीज बेंज सुरक्षित गाड़ी नहीं है. पिछली सीट बेल्ट पर बैठ कर बेल्ट न बांधना सायरस के लिए घातक साबित हुआ.”

गौ तस्करी – इनामुल के करीबी जेनारुल शेख को सीआईडी ने गिरफ्तार किया

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मुर्शिदाबाद, । गौ तस्करी के मामले में इनामुल के करीबी जेनारुल शेख को सीआईडी ने गिरफ्तार किया है। उसे रविवार को मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। आरोपित का घर रघुनाथगंज में है।
सूत्रों के मुताबिक, भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र में जेनरुल शेख के खिलाफ गाै तस्करी के आरोप लगाए गए हैं। कथित तौर पर सरकारी खातों में ब्योरा दर्ज किए बिना ही सीमा पर बीएसएफ के एक वर्ग की मदद से गायों की तस्करी की जाती रही थी। आरोप है कि इस काम में मवेशी तस्करी का सरगना इनामुल का साथ जेनारुल शेख दिया करता था।
गौरतलब है कि सीआईडी ने अब्दुल बारिक के करीबी संजय मलिक को शनिवार को सात दिनों के लिए हिरासत में लिया था। संजय मलिक को कोयला तस्करी के मामले में सीआईडी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। उसके बाद उसका नाम गौ तस्करी में भी शामिल था। 2019 में उसके खिलाफ जालंगी थाना क्षेत्र में गो तस्करी के साजिशकर्ता के तौर पर मामला दर्ज किया गया था। बशीरहाट जिला पुलिस ने उसे मुर्शिदाबाद कोर्ट में पेश किया वहां से उसे सीजीएम कोर्ट ले जाया गया। बाद में, सीआईडी ने गाय तस्करी मामले की जांच के उद्देश्य से उसे रिमांड में लेने का अनुरोध किया। बाद में सीजीएम अपर्णा चौधरी ने सात दिन की सीआईडी को रिमांड पर सौंप दिया।
इन दोनों लोगों संजय और अब्दुल पर गाय तस्करी के आरोप पुराने हैं। दावा है कि अब्दुल बारिक के पुलिस और बीएसएफ और पशु व्यापारियों के साथ अच्छे संबंध हैं। सीआईडी को बारिक के साथ इस अच्छे संबंध का पता गौ तस्करी मामले में पकड़े गए लोगों से पूछताछ में चला। फिर जांच में संजय का नाम सामने आया। बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

नंदलाल क्षितिज के कविता संग्रह ‘कल्पना के पंख’ का विमोचन अभिलाष अवस्थी के हाथों सम्पन्न

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मुम्बई। वरिष्ठ गीतकार – कवि नंदलाल क्षितिज के कविता संग्रह ‘कल्पना के पंख’ का विमोचन 3 सितम्बर 2022 की शाम मुम्बई प्रेस क्लब में महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के कार्याध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार अभिलाष अवस्थी के द्वारा गरिमापूर्ण परिवेश में सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में युवा साहित्यकार पवन तिवारी ने पुस्तक पर अपना मन्तव्य प्रकट करते हुए कहा कि एक अच्छा रचनाकार वही है जो जैसा निजी जीवन में है वैसा ही अपनी रचनाओं में भी दिखाई दे। यह ईमानदारी नंदलाल क्षितिज जी की रचनाओं में स्पष्ट झलकती है। उन्होंने संग्रह की कुछ कविताओं का उदाहरण भी दिया। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार एवं समाजसेवी अलका पांडेय ने क्षितिज को आगे भी इसी तरह की रचना के लिए शुभकामनाएं दी।
इसके साथ ही कानपुर से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार और कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीहरि वाणी ने कहा कि केवल पुस्तकें लिखना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि खरीदकर पढ़ना भी महत्त्वपूर्ण है। क्षितिज की रचनाओं को पवन तिवारी ने उदाहरण देते हुए सुनाया। अच्छे लेखकों, साहित्यकारों को प्रोत्साहित कीजिये। केवल बातों से कुछ नहीं होगा।
कार्यक्रम के विशेष अतिथि रामप्यारे सिंह रघुवंशी ने अपने मित्र नंदलाल क्षितिज को बधाई दी एवं भविष्य में उनकी नयी कृति को अपनी संस्था के माध्यम से लाने की बात कही। अपने लेखकीय वक्तव्य में क्षितिज ने अपनी पत्नी रीता कन्नौजिया और पुत्र समीर कन्नौजिया का आभार व्यक्त करते हुए अपने परिवार पर एक सुंदर गीत सुनाया। उन्हें अपनी रचना का प्रेरणा स्रोत बताया। कार्यक्रम का उत्तम संचालन वीर रस की श्रेष्ठ कवयित्री डॉ वर्षा सिंह ने की। कार्यक्रम के संयोजन आर के पब्लिकेशन के स्वामी राम कुमार ने इस अवसर पर पवन तिवारी को महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के कार्याध्यक्ष के हाथों मुम्बई हिंदी अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति का पत्र भी सौंपा। कार्यक्रम के अंत में राम कुमार ने सभी अतिथियों एवं आगन्तुकों का आभार प्रकट किया।
 इस कार्यक्रम में, नागपुर से पधारी वरिष्ठ कवयित्री हेमलता मिश्र मावनी, हिंदी सेवी प्रज्वल वागदरी, उदय नारायण सिंह निर्झर, रामस्वरूप साहू, लेखक शिव प्रसाद तिवारी, शायर तरुण तन्हा, वरिष्ठ कवि विनयदीप शर्मा, जवाहर लाल निर्झर, रामप्यारे सिंह रघुवंशी, युवा कवि संदीप चौरसिया, रवि यादव, समीर कन्नौजिया, रीता कन्नैजिया, कविता, हरिदास अड़सुले, राजेश कुमार त्रिपाठी, ओम प्रकाश पांडेय, अनिल राही, ओम प्रकाश सिंह, उमेश कुमार शर्मा, सन्तोष पांडेय, शिव प्रकाश जौनपुरी, अरुण प्रकाश अनुरागी, कुसुम तिवारी, मुम्बई अमरदीप के संपादक उपेंद्र पंडित, परविंदर सिंह, संजय द्विवेदी सहित अनेक रचनाकर व विशेष अतिथियों की उपस्थिति रही।

Cyrus Mistry Death: साइरस मिस्त्री के पोस्टमार्टम में सामने आई ये बात, परिवार का कोई सदस्य नहीं पहुंचा हॉस्पिटल

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Cyrus Mistry Death: टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री (Cyrus Mistry) की रविवार को मुंबई के पास एक सड़क एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। उनका पोस्टमार्टम बीती रात 2.30 बजे से 3 बजे के आसपास पूरा हुआ। साइरस के परिवार का कोई सदस्य सुबह हॉस्पिटल में नहीं पहुंच सका। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि साइरस का परिवार विदेश में है और उनके आज रात तक मुंबई पहुंचने की संभावना है। कयास लगाए जा रहे हैं कि साइरस का अंतिम संस्कार कल (मंगलवार) को हो सकता है।

साइरस मिस्त्री के पोस्टमार्टम में सामने आई ये बात

साइरस मिस्त्री के पोस्टमार्टम में सामने आया है कि उनके शरीर के इंटरनल vital ऑर्गन बुरी तरह से चोटिल हुए थे। जिसे मेडिकल टर्म में pollytrauma कहते हैं। इसी वजह से साइरस मिस्त्री की मौके पर ही मौत हो गई थी। जेजे अस्पताल प्रशासन ने साइरस मिस्त्री और उनके दोस्त जहांगीर पंडोले की पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट को कासा पुलिस थाने (जहां एक्सिडेंट हुआ उस लोकल पुलिस थाने में ) भेज दी है। सूत्रों के मुताबिक मल्टीपल हेड इंजरी और शरीर के बाएं हिस्से में काफी चोट लगी थी।

तेज रफ्तार में गाड़ी चला रही थीं अनायता पंडोले

पालघर पुलिस के मुताबिक, अनायता पंडोले गाड़ी को तेज रफ्तार में चला रही थीं। उन्होंने गलत दिशा (बांए से) से एक दूसरी गाड़ी से आगे निकलने की कोशिश की थी और उनके पति JM फाइनेंशियल के CEO दरीयस पंडोले उनके बगल वाली सीट पर बैठे थे।

जहांगीर पंडोले कार की पीछे वाली सीट पर बैठे थे। टक्कर के कारण कार की आगे की सीट पर लगे एयरबैग खुल गए थे लेकिन पीछे वाले एयरबैग सही समय पर नहीं खुले। अगर वे खुल जाते तो साइरस मिस्त्री बच सकते थे। मैनुअल के मुताबिक, मर्सिडीज जीएलसी 220डी में कम से कम सात एयरबैग दिए गए हैं।

कार की हो रही फॉरेंसिक जांच

हादसे का शिकार हुई कार की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। इससे यह पता चलेगा कि दुर्घटना का असली कारण क्या है। पुलिस के मुताबिक घटनास्थल पर कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था और न ही उनकी कार में कोई कैमरा था। सड़क की स्थिति भी अच्छी थी। ऐसे में अब यह जांच हो रही है कि आखिर गलती कहां हुई है।

यूके में हैं साइरस के बेटे और पत्नी

साइरस मिस्त्री के बेटे और पत्नी एक फैमिली फंक्शन के लिए यूके में हैं। उनके सोमवार को मुंबई पहुंचने की संभावना है। इसी साल 28 जून को साइरस के पिता और बिजनेस टाइकून पालोनजी मिस्त्री (93) का भी निधन हुआ था।

योगी राज में गौरक्षक की हत्या – गौरक्षक की लाश को खूंटी से लटका दिया गया

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Cow Protector Murder: उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात (Kanpur Dehat) जिले में एक गौरक्षक (Cow Protector) की हत्या कर दी गई और उसके शव को खूंटी से लटका दिया गया. इस मामले पर अकबरपुर निवासी गौरक्षक राजेश द्विवेदी (Rajesh Dwivedi) के शव का अंतिम संस्कार (Last Riots) करने से परिजनों ने इनकार कर दिया है. उन्होंने आरोपियों की गिरफ़्तारी, परिवार के भरण-पोषण की व्यवस्था करने और सुरक्षा प्रदान करने की दशा में ही शव को घर के बाहर से उठाने की बात कही है. पुलिस (Police) के अधिकारी समझाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन बात नहीं बन रही है.
परिजनों के मुताबिक, शनिवार शाम को 7 बजे राजेश द्विवेदी मंदिर में सोने चले गए थे. कुछ देर बाद परिजनों को उनकी मौत की खबर मिलती है. इसके बाद घटना की सूचना पुलिस को दी जाती है और आनन फानन में पुलिस शव का पोस्टमार्टम करा देती है. रविवार यानी आज सुबह जब शव गांव पहुंचा परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया.
हर रोज मंदिर में सोते थे राजेश
मूल रूप से अकबरपुर के ज्योतिष गांव में रहने वाले गौरक्षक राजेश द्विवेदी घर के बाहर मंदिर में ही सोते थे. शनिवार रात को भी वो रोज की तरह खाना खाने के बाद मंदिर में सोने चले गए. देर रात उनका शव मंदिर की दीवार पर लगी खूंटी पर लटका हुआ मिला. मामले की जानकारी मिलते ही उनके घर में कोहराम मच गया. पति की मौत के बाद उनकी पत्नी बदहवास हो गईं. तो वहीं उनका बेटा और बेटी का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया.
सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस (Police) मौके पर पहुंची जिसमें सीओ सदर प्रभात कुमार और अकबरपुर (Akabarpur) कोतवाल प्रमोद शुक्ला भी शामिल थे. पूछताछ के बाद परिजनों ने राजेश (Rajesh Dwivedi) की हत्या कर शव को खूंटी से टांगने का आरोप लगाया है. मृतक राजेश मंदिर (Temple) से 500 मीटर की दूरी पर बने घर में रहते थे. परिजनों ने पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप भी लगाया है. परिजनों का कहना है कि 13 अगस्त को गांव के ही कुछ लोगों के खिलाफ गोवंश पर हमला करने की जानकारी पुलिस को दी थी लेकिन पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की.

गाय के बीमार होने पर अब न हो परेशान, एक फोन पर घर आएगी गौ-एम्बुलेंस

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Bhopal News: मध्य प्रदेश के सभी विकास खंडों में गोवंश को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए हर गौ-एम्बुलेंस होगी. गौ-पालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड की कार्य परिषद के अध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने छिंदवाड़ा में जिले के शासकीय और अशासकीय गौशाला संचालकों और प्रतिनिधियों की बैठक में बताया कि प्रदेश के सभी 313 विकासखण्डों में शीघ्र ही एक-एक अत्याधुनिक गौ-एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. इसके लिए केन्द्र शासन से राशि मिल चुकी है और टेण्डर भी हो चुके हैं. अत्याधुनिक गौ-एम्बुलेंस से दुर्घटना में घायल या बीमार गाय को त्वरित उपचार मिल सकेगा.
महिला स्व-सहायता समूहों की होगी भागीदारी
गिरि ने बताया कि प्रदेश में गाय को चारा व्यवस्था के लिए चरनोई भूमि भी आवंटित हो गई है. चरनोई भूमि विकास मिशन का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा गया है. इस पर शीघ्र ही निर्णय लिया जाकर क्रियान्वयन आरंभ होगा. उन्होंने बताया कि बोर्ड द्वारा प्रदेश में गायों के पालन, संरक्षण और संवर्धन के लिए दो तरह की कार्ययोजना बनाई गईं हैं. जन-भागीदारी से संचालित होने वाली पहली कार्ययोजना में महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी. दूसरी कार्ययोजना में गौशालाओं की अर्थ-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जायेगा.

कार्तिक आर्यन को लेकर ‘आशिकी 3’ का निर्देशन करने वाले हैं अनुराग बसु

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मुकेश भट्ट और भूषण कुमार द्वारा निर्मित आशिकी के इस तीसरी कड़ी में प्रीतम का संगीत होगा

मुम्बई। 1990 में आई फिल्म आशिकी के साथ टी सीरीज और विशेष फिल्म्स ने अपनी पहली पार्टनरशिप की थी, और अब 32 साल बाद एक बार फिर निर्माता मुकेश भट्ट और निर्माता भूषण कुमार आशिकी 3 के लिए एक साथ आ रहे हैं। इस थर्ड इंस्टालमेंट को अनुराग बसु डायरेक्ट करेंगे और फिल्म का म्यूजिक प्रीतम कंपोज करेंगे। आप को बता दें कि इस फिल्म में लीड रोल में नज़र आयेंगे अभिनेता कार्तिक आर्यन। गणेश महोत्सव के इस पावन अवसर पर और उनके आशीर्वाद के साथ टीम ने इस कॉलेबोरेशन की जबरदस्त शुरुआत की है।
आशिकी के फ्रैंचाइजी, प्यार, रोमांस और रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है और इसने आज तक सभी के दिलों में अपनी जगह बनाए रखी है। प्रेम कहानी और संगीत के जादू के साथ राज करने के लिए पूरी तरह तैयार है! लाखों दिलों की धड़कन माने जाने वाले कार्तिक आर्यन हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय फ्रैंचाइजी के थर्ड इंस्टालमेंट में मुख्य भूमिका निभाएंगे। जो इस देश के युवाओं द्वारा पसंद की जाने वाली एक टाइमलेस क्लासिक है।
निर्माता मुकेश भट्ट ने बताया कि आशिकी की रिलीज से एक दिन पहले 16 अगस्त 1990 की शाम, गुलशन जी और मैं बहुत घबराए हुए थे, अगले दिन सारे रिकॉर्ड ब्रेक हो गए और एक नया इतिहास रच दिया गया। आज भूषण, प्रीतम, अनुराग और कार्तिक के साथ, मैं सभी को इस बात का विश्वास दिलाना चाहता हूं कि आशिकी 3 पहले की तरह प्यार का जश्न मनाएगी।
निर्माता भूषण कुमार ने कहा कि जिन फिल्मों की कहानी और संगीत ने हमारे दिलों को छुआ है, उन्हें फिर से जीने का समय आ गया है! मुकेश जी के सहयोग से हमें आशिकी 3 की घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है जिसे मेरे ऑल टाइम फेवरेट निर्देशक अनुराग बसु डायरेक्ट करने जा रहे हैं। हमें कार्तिक से बेहतर अभिनेता नहीं मिल सकता था, जो इस समय एक सच्चे रॉकस्टार बन चुके हैं और बड़े अभिनेताओं के बीच दर्शकों का प्यार सिर्फ उन्हीं पर उमड़ रहा है। रोमांटिक म्यूजिकल में म्यूज़िक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, और प्रीतम के साथ हमारा लक्ष्य इसे और ऊंचा उठाना है। मैं इस ड्रीम टीम के साथ हमेशा से काम करना चाहता था और मुझे इस मैजिक के रीक्रिएट होने का बेसब्री से इंतजार है।
अभिनेता कार्तिक आर्यन ने कहा कि टाइमलेस क्लासिक आशिकी एक ऐसी फिल्म है जिसे देखकर मैं बड़ा हुआ हूं और आशिकी 3 पर काम करना एक सपने के सच होने के समान है मैं इस ऑपर्च्युनिटी और कोलेबोरेशन के लिए भुषण सर और मुकेश सर का आभारी हूं। मैं अनुराग सर के काम का बहुत बड़ा फैन रहा हूं और उनके साथ जुडना निश्चित रूप से कई तरह से दिशा प्रदान करेगी।
निर्देशक अनुराग बसु ने कहा कि विशेष फिल्म्स के साथ काम करना सचमुच घर आने जैसा है और मुझे बेहद खुशी है कि मैं आशिकी 3 को डायरेक्ट कर रहा हूं। भूषण जी और मैं एक लॉन्ग स्टैंडिंग रिलेशनशिप शेयर करते हैं। वह एक सॉलिड सहयोगी है जिसे पाकर मैं खुद को सौभाग्यशाली महसूस करता हूं। आशिकी और आशिकी 2 प्रशंसकों के लिए एक इमोशन फिल्म रही है जो आज तक दिलों में बनी हुई है। इसका उद्देश्य विरासत को बेहतरीन तरीके से आगे बढ़ाना है। यह कार्तिक आर्यन के साथ मेरा पहला वेंचर होगा, जो अपने काम के प्रति अपनी कड़ी मेहनत, समर्पण, धैर्य और दृढ़ संकल्प के लिए जाने जाते हैं और मैं वास्तव में इसके लिए उत्सुक हूं।
संगीतकार प्रीतम ने कहा कि आशिकी की फ्रैंचाइज़ी अपने बेहतरीन संगीत के लिए जानी जाती है और मैं इस अद्भुत फ्रैंचाइज़ी का हिस्सा बनकर वास्तव में बेहद खुश हूँ और इसे अगले स्तर पर ले जाने की पूरी कोशिश करूँगा।

रामकमल मुखर्जी की ‘नटी बिनोदिनी’ बनी बॉलिवूड अभिनेत्री रुक्मणी मैत्रा

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मुम्बई। बंगाल रंगमंच की दिग्गज अदाकारा बिनोदिनी दासी की जीवनी पर आधारित फिल्म ‘नटी बिनोदिनी’ का निर्माण शैलेन्द्र कुमार, सूरज शर्मा और प्रतीक चक्रवर्ती करने जा रहे हैं। यह बायोपिक देव इंटरटेनमेंट वेंचर की प्रस्तुति होगी।
शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर फिल्म निर्देशक राम कमल मुखर्जी ने अपनी बहुचर्चित बायोपिक ‘बिनोदिनी एकती नातिर उपाख्यान’ के मुख्य कलाकारों की घोषणा की। बंगाल की जानी मानी अदाकारा रुक्मिणी मैत्रा इस बहुप्रतीक्षित भूमिका को रुपहले पर्दे पर निभाएंगी। फिल्म के निर्माताओं ने फिल्म का पोस्टर जारी कर दिया है जिसमें रुक्मणी मैत्रा श्री चैतन्य महाप्रभु की भूमिका में दिखेंगी। इस भूमिका को बिनोदिनी दासी ने रंगमंच पर निभाया था। रंगमंच पर निभाई इस भूमिका को बिनोदिनी दासी ने नए मुकाम पर पहुंचाया था। जो दर्शकों के मन पर सराहनीय और विशेष प्रभाव छोड़ता है।


एकता भट्टाचार्य ने मोशन पोस्टर का डिजाइन बनाया है। नीलायन चॅटर्जी ने मीडिया और दर्शकों के लिए म्यूजिक कंपोज किया है।
फिल्म का निर्माण मुम्बई बेस्ड प्रोडक्शन हाउस प्रमोद फिल्म्स, एस एस वन एंटरटेनमेंट और पी के एंटरटेनमेंट, ऐसोर्ट मोशन पिक्चर्स के सहयोग से कर रहे हैं। कहानी, पटकथा, संवाद प्रियंका पोद्दार ने लिखा है। उनका कहना है कि वह हमेशा से चाहती थी कि बंगाल के दर्शकों के लिए एक बेहतरीन और दिल छू लेने वाली कहानी लिखे। इस संगीतमय फ़िल्म के लिए पिछले दो साल से अच्छे बजट की प्रतीक्षा थी। इस समय मेरे साथ चट्टान की तरह केवल रुक्मणी मित्रा का ही साथ और विश्वास था। उन्होंने ‘सीजन ग्रीटिंग’ और ‘एक दुआ’ में मेरे काम को देखा और सराहा था। उन्हे विश्वास था कि बंगाली दिग्गज अभिनेत्री बिनोदिनी दास के सफर और दर्द को बखूबी एक सूत्र में पिरो सकती है ऐसा
बॉलीवुड फिल्म निर्देशक रामकमल मुखर्जी का कहना है | रुक्मणी मैत्रा का बिनोदिनी के रूप में चयन करके मुझे बहुत हर्ष हो रहा है। पिछले दो वर्षों से रुक्मणी मौन रहकर फिल्म से जुड़ी हैं और इसमें अभिनय कर रही है। उन्होंने उस समय के भारतीय क्लासिकल डांस को सीख कर और उस काल में स्त्रियों की दशा और उनकी सामाजिक स्थिति के बारे में पुस्तकों से पढ़कर अध्ययन किया। यह सब मेरे लिए एक अद्भुत सपने के सच होने जैसा था। मैं जनता था कि यह कहानी अलग विषय और दृष्टिकोण पर है लेकिन मैंने बिना किसी सवाल के उन पर पूर्ण विश्वास कर यह काम अपने हाथों में लिया।
रुक्मणी मैत्रा का कहना है कि गत दो वर्षों से कोरोना महामारी ने पूरे परिदृश्य को बदल दिया है। इससे हमारे मनोरंजन उद्योग को सबसे अधिक नुकसान हुआ।लेकिन इस फिल्म को बनाने वाले एक प्रतिष्ठित बैनर और निर्माता और खासकर बोर्ड में देव के आने से यह फिल्म वास्तव में एक नया आयाम बनाएगी।
इस बायोपिक का फिल्मांकन सिनेमैटोग्राफर मोधुरा पालित द्वारा बंगाल और बनारस के खूबसूरत जगहों पर किया जाएगा और अगले साल (बंगाली न्यू ईयर) में रिलीज होगी। चूंकि यह एक पीरियड ड्रामा है इसलिए निर्माताओं को प्राचीन कालीन दृश्य को फिर से बनाने के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता होगी।
बंगाल के सुपरस्टार देव ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि राम कमल एक विशेष व्यक्तित्व के धनी और मुंबई के एक प्रतिभाशाली फिल्म निर्माता हैं। मुझे यह ज्ञात नहीं था कि वह रुक्मिणी के साथ इस फिल्म की योजना बना रहे थे। फिल्म के टीज़र पोस्टर साझा होने पर इसके बारे में जानकारी मिली। फिल्म के बारे में मुझसे छुपा कर रखा गया था। लेकिन जब मैंने इस प्रोजेक्ट को लेकर उनके जोश और जुनून को देखा तो पता चला कि वो एक क्रिएटिव व्यक्ति हैं। बिनोदिनी दासी जैसे अद्भुत विषय पर फिल्म को बनाने के लिए इनका बहुत आभार।हम इन दिनों ऐसी फिल्में नहीं बनाते हैं और ऐसी फिल्मों को बनाने में समय लगता है। रामकमल ने नाटी बिनोदिनी जैसे संवेदनशील विषयों को छूने का साहस किया जो सराहनीय है। मुझे यकीन है कि रुक्मिणी और राम कमल पर्दे पर जादू अवश्य बिखेरेंगे।
मुम्बई के प्रमोद फिल्म्स और दिग्गज फिल्म निर्माता प्रमोद चक्रवर्ती के पोते प्रतीक चक्रवर्ती का कहना है कि मैं फिल्म की कहानी और टीज़र से बेहद प्रभावित हूँ। मुझे पूरा भरोसा है कि यह बंगाली फिल्म्स इंडस्ट्री के लिए गेम चेंजर साबित होगा। रुक्मणी मैत्रा का जानदार अभिनय बिनोदिनी दास के चरित्र को जीवंत बना देगा। एक टीज़र शूट के लिए चरित्र को जीवंत करना, पूरी यूनिट की दक्षता के बारे में बहुत कुछ कहता है। चूंकि हमने भारतीय सिनेमा में निर्माता के रूप में 60 शानदार वर्ष पूरे किए हैं, इसलिए हमने रचनात्मक रूप से संतोषजनक और व्यावसायिक रूप से आशाजनक इस विषय पर साथ काम करने के लिए सोचा।
एस एस वन एंटरटेनमेंट के शैलेंद्र कुमार कहते हैं कि कोलकाता और बंगाल के साथ मेरा व्यक्तिगत संबंध है। चूंकि मैं एक गायक और संगीतकार हूं, इसलिए मैं हमेशा बंगाली कला और साहित्य का प्रशंसक रहा हूं। मैं निर्देशक राम कमल मुखर्जी के निर्देशन में उनकी पहली फिल्म ‘केकवॉक’ देखी। उसके बाद मैं उनसे जुड़ा और मैं जानता हूँ कि वह पिछले दो वर्षों से नाटी बिनोदिनी बनाना चाहते थे। जब उन्होंने मुझे कहानी सुनाई और मुझे रुक्मिणी जी की चैतन्य महाप्रभु के रूप में छवि दिखाई तो मुझे पूरा विश्वास हो गया कि यह फिल्म बेहद खास होगी।
पी के इंटरटेनमेंट के युवा निर्माता सूरज शर्मा ने कहा, यह बेहद खुशी की बात है कि फिल्म निर्माताओं ने रिस्क लेकर इस प्राचीन अनकही कहानी को बताया है। मैंने बिनोदिनी एकती नातीर उपाख्यान को सुना है और महसूस किया है कि इसकी भावना सभी महिलाओं के साथ जुड़ेंगी जिन्होंने इस पुरूष प्रधान समाज में उत्पीड़न को झेला है।
मेकर्स द्वारा फिल्म के कलाकारों और टेक्निशियन का चयन किया जा रहा है। गिरीश घोष, अमृतलाल, रामकृष्णा, कुमार बहादुर और रंगा बाबू जैसे पात्रों के लिए योग्य कलाकार की चयन प्रक्रिया भी जारी है।

– गायत्री साहू

बड़वा में हैं अंग्रेजों के जमाने की शानदार चीजें।

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दक्षिण-पश्चिम हरियाणा में शुष्क ग्रामीण इलाकों का विशाल विस्तार है, जो उत्तरी राजस्थान के रेतीले क्षेत्रों से सटे हुए है, यहाँ बड़वा नामक एक समृद्ध गांव स्थित है। यह राजगढ़-बीकानेर राज्य राजमार्ग पर हिसार से 25 किमी दक्षिण में है।
गढ़ बड़वा जिसे गाँव में ठाकुरों की गढ़ी (एक किला) कहा जाता है। ठाकुर बाग सिंह तंवर के पूर्वज, जो कि बृजभूषण सिंह के दादा थे, ने 600 साल पहले राजपुताना के जीतपुरा गाँव से आकर अपने और अपने संबंधों के लिए इस गाँव की संपत्ति की नक्काशी की थी। संयोग से, राजपूतों की तंवर शाखा ने भिवानी शहर के आसपास के कई गाँवों में खुद को मजबूती से स्थापित किया था। नतीजतन, भिवानी तंवर खाप का प्रधान बन गया यानी गाँवों का एक समूह। मध्ययुगीन काल में, तंवर राजपूतों ने उस समय की राजनीतिक उथल-पुथल से उखाड़ फेंका जब मुस्लिम आक्रमणकारी इस भूमि पर कब्जा करने और अपना वर्चस्व स्थापित करने की प्रक्रिया में थे, हरियाणा और पहाड़ी क्षेत्रों से हिमाचल प्रदेश में चले गए। हालांकि, मुगल काल में, तंवर राजपूत शांतिपूर्वक भिवानी के आसपास अपने गाँव में व्यापार करते थे। लगभग 15,000 की आबादी वाला बड़वा का गाँव, अब भिवानी जिले का एक हिस्सा है।
बाग सिंह तंवर के पूर्वजों, जिन्होंने बारिश के पानी से भरे एक बड़े प्राकृतिक तालाब के आसपास झोपड़ियों में बसे थे, ने गाँव में 14,000 बीघा जमीन पर कब्जा कर लिया था। नतीजतन, बहुत सारी जमीन गांव में उनके वंशजों और अन्य समुदायों को हस्तांतरित कर दी गई थी। मौजूदा गढ़ी, एक मध्ययुगीन शैली का एक विशाल स्मारक, जिसे ब्रांसा भवन भी कहा जाता है, रामसर नामक एक बड़े तालाब के किनारे गाँव के उत्तर-पश्चिम में स्थित है, जिसे 1938 में बनाया गया था, जो गाँव के पुराने लोगों के अनुसार था एक साल मानसून की विफलता के कारण, फसलों को उस वर्ष नहीं उगाया नहीं जा सका। इसलिए, बाग सिंह ने गढ़ी के निर्माण में अपने रिश्तेदारों को शामिल करने के बारे में सोचा और उपयोगी रोजगार पाया। रेतीले टीले पर पारंपरिक स्थापत्य शैली में निर्मित गढ़ी में आज भी लोहे की प्लेट और लकड़ी का एक बड़ा और मजबूत गेट है। आवास और सार्वजनिक उपस्थिति के लिए कई विशाल कमरे, पुआल और अनाज के भंडारण के लिए कई तिमाहियों की एक पंक्ति बिल्डरों द्वारा प्रदान किए गए थे।
गगनचुंबी हवेलियां, मनमोहक चित्रकारी, सूक्ष्म नमूनों से सजे कपाट, कुंड रुपी जलाश्य, हाथीखाने, खजाना गृह की मजबूत दीवार, कवच रुपी मुख्य ठोस द्वार और न जाने क्या क्या। मन में गहरी जिज्ञासा पैदा करती हैं, ये हवेलियां। इन्हें बनाने वालों ने उम्र ही यहां बिता दी। इनकी कब्रें मृत्युपरांत यहीं बनाई गईं। हम बात कर रहे हैं राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित उपमंडल का गांव बड़वा की।
पनघट पर आई थी ‘चंद्रो’
दक्षिण में स्थित कुएं का निर्माण यहां के दूसरे सेठों ताराचंद तथा हनुमान ने करवाया था। सेठ हनुमान व ताराचंद के पुत्रों ने गांव के रूसहड़ा जोहड़ पर चार स्तंभों वाला आकर्षक कुआं बनवाया। इसी के इर्द-गिर्द प्रसिद्ध हरियाणवी फिल्म चंद्रावल और बैरी के कुछ दृश्यों को फिल्माया गया। अंग्रेजों के जमाने की गाड़ी और रथ आज भी हवेलियों में मौजूद हैं। यहां विद्यमान ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा धार्मिक-धरोहरें गांव के अतीत के इतिहास को बयां कर रही है। हवेलियों की आयु का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है लेकिन यह सच है कि ये द्वितीय विश्वयुद्ध से पूर्व की है।
अंग्रेजों के जमाने की गाड़ी और रथ
बड़वा में एक दर्जन हवेलियां हैं। इनमें सेठ परशुराम की हवेलियां खासी प्रसिद्ध हैं। इन्हें बनवाने के लिए पिलानी से कारीगर बुलाए थे। अंग्रेजों के जमाने की गाड़ी और रथ आज भी हवेलियों में मौजूद है। हवेलियों से भी बढ़कर रोचक इतिहास यहां के कुओं तथा तालाबों का भी है। प्राचीन समय में इस स्थान पर एक छोटा सा कच्चा तालाब था। अक्सर सेठ परशुराम की बहन केसर यहां गोबर चुगती थी जो उनके लिए अशोभनीय था। लोगों के ताने सुनकर उन्होंने कच्चे तालाब की जगह एक ऐतिहासिक तालाब का निर्माण करवाया जिसकी पहचान अब केसर जोहड़ के रूप में होती है। इसी के इर्द-गिर्द प्रसिद्ध हरियाणवी फिल्म चंद्रावल और बैरी के कुछ दृश्यों को फिल्माया गया। प्राचीन समय में इस स्थान पर एक छोटा सा कच्चा तालाब था। भिवानी जिले के बड़वा गांव की सेठो की बड़ी-बड़ी हवेलियों के अलावा, तालाब, कुँवें, हवेलियां, नोहरा, धर्म शालाएं, छतरियां आदि में, अनेकों ऐसे चित्रण मिले हैं। इन चित्रों में राजस्थान के चित्रों जैसी विशेषताएं पाई गई।
सेठ परशुराम द्वारा निर्मित केसर तालाब-
यह तालाब सेठ परशुराम ने अपनी बहन की यादगार में बनवाया, कहा जाता है कि सेठ परशुराम ने यहाँ पर केसर तालाब का निर्माण करवाया जोकि यात्रियो का प्रमुख आकर्षण केंद्र रहा है। ऐसा कहा जाता है परशुराम की बहन गोबर चुगती थी। यह सेठ परिवार के लिए शर्म की बात थी और लोग अक्सर ऐसा छोटे कार्य के प्रति ताने मारते थे तब सेठ ने यहां पर मौजूद तालाब को पक्का करवाया और उसका नाम केसर तालाब रखा। इस तालाब का प्रयोग दैनिक क्रियाकलापों के लिए इस्तेमाल होता था। इसके पास एक गहरा जल कुंड है जिसमें दुखी महिलाऐं कूदकर अपनी जान दे ती थी, इसलिए इसको मुक्ति धाम भी कहा जाता है। यहां के लोग इसे आगौर भी कहते हैं। इस तालाब के किनारे के ऊपर की छत पर गुंबद/छतरियां बने हुए हैं जिनमें राधा कृष्ण की रासलीला को चित्रों के माध्यम से प्रमुखता से दर्शाया गया है । इनमें राधा कृष्ण एक दूसरे का हाथ पकड़े घेरे में नृत्य कर रहे हैं और इनके पीछे वाद्य-यंत्रों की आकृतियां चित्रित की गई है जैसे ढोलक, नगाड़े, बाँसुरी, हारमोनियम, शहनाई आदि। और यह शायद किसी समारोह को चित्रित कर रहा है । चित्रों में गतिशीलता और लय है। लाल भूरे रंग उपयोग किया गया है।
श्रीकृष्ण को नीले रंग में दिखाया गया है जबकि राधा का रंग गोरा दिखाया गया है। इन आकृतियों के पीछे पशु पक्षियो को दिखाया गया है, जिनमें मोर, तोता, चिड़ियां आदि है। इसमें लाल, पीले, नीले रंग का इस्तेमाल किया गया है। गुंबद के केंद्र में वृत्ताकार ज्यामितीय अलंकरण किया गया है । गुंबंदों की आकृतियों को गतिशील और समान अनुपात में दिखाया गया है। इनका छोटा कद व चेहरा गोल है। समय के अनुसार आज इनके रंग धूमिल पड़ गए हैं परन्तु केंद्र में फूल आज भी अपने अतीत को समाए हुए हैं।
सेठ हुकुम चंद लाला सोहन लाल की हवेली-
यह हवेली लगभग आज से डेढ़ सौ साल पुरानी है, जिसके प्रमुख द्वार पर एक हष्ट-पुष्ट हाथी को सुसज्जित एवं गतिशील अवस्था में दिखाया गया है। इस हाथी की पीठ एक चतुर्भज ज्यामीतिय डिजाइन का कपड़ा एवं उस पर लकड़ी की काठी को सुसज्जित किया गया है, जिसमें राजा-रानी आमने-सामने और सेवक पीछे चंवर ढूला रहा है। इसमें राजा रानी को फूल देता हुआ अपने प्यार का इजहार कर रहा है। हाथी केसर पर भी चकोर ज्यमीतिय आकार की टोपी रखी गई है जो उसकी शोभा बढ़ा रही है । इसके अलावा यहां दीवार पर धार्मिक चित्र मौजूद है जैसे विष्णु जी लक्ष्मी के साथ अपनी सवारी पर विराजित हैं तथा दूसरे चित्र में शेरावाली माता अपनी सवारी पर विराजित है। इसके अलावा चित्र यहाँ राधा रानी के प्रेम मिलाप को दर्शा रहा है। हाथी का चित्रण कोटा शैली में अधिक किया गया है ।
सेठ लक्ष्मीचंद का कटहरा-
बड़वा में लक्ष्मी चंद के कटहरा के अंदर छत पर राजाओं-महाराजाओं व देवी-देवताओं को एक साथ चित्रित किया गया है । इस चित्र में बाएं ओर से राधा रानी की सवारी को दिखाया गया है जो रथ पर सवार है तथा कुछ महिलाएं रथ के पीछे चल रही है जोकि उनकी सेविकाएं प्रतीत होती हैं । एक घुड़सवार एक हाथ में राज्य का निशान लिए चल रहा है तथा अन्य घुड़सवार पीछे पीछे चल रहे हैजो कि महाराज के अंगरक्षक हैं और सुरक्षा को सुनिश्चित कर रहे हैं। कृष्ण राधा की चोटी बनाते हुए -इस चित्र में श्री कृष्ण जी कुर्सी पर विराजे हैं और राधा मुड्ढे पर बैठी हैं। श्री कृष्णजी राधा की चोटी गूंथ रहे हैं और राधिका हाथ में शीशा पकड़े बैठी हैं। शीशे में राधा का चेहरा स्पष्ट दिर्खाइ दे रहा है। इस चित्र में दिखाए गए कुर्सी व मुड्ढे से इस चित्र पर स्थानीय प्रभाव नजर आता है तथा पहनावे से राजस्थानी प्रभाव नजर आता है।
इस प्रकार चित्रकार के चित्र में तत्कालीन प्रभाव नजर आते हैजो उस समय उसने देखा और चित्रित किया। इस चित्र में आंखें मछली के आकार जैसी , कंलगी व मुकुट से चित्रण में मुग़ल प्रभाव नजर आता है। पृष्ठभूमि हल्के पीले रंग की है तथा शरीर को पतला एवं लंबा दिखाया गया है जबकि बालों की लंबाई शरीर का अनुपात में कम है। दूसरी ओर दाएं से बाएं की ओर देवी देवताओं की सवारी आ रही है जिसमे सभी देवता अपने -अपने वाहन पर बैठे हैं तथा ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसा कि राजा रानी अपने रथ पर सवार होकर देवी देवताओं के स्वागत के लिए पधार रहे हैं। इन चित्रों में हाथी घोड़े आदि को बहुत अच्छे से सुसज्जित किया गया है। इनकी पृष्ठभूमि पीले रंग की है तथा चित्रों में नीला, पीला, हरा, भूरा, आदि रंगो का प्रयोग किया गया है। चित्रो के वस्त्र व आभूषणों को देख इन पर मुगली तथा राजस्थानी प्रभाव प्रतीत होता है।
लाला लायकराम फूलचंद की हवेली-
यह हवेली लगभग 160 साल पुरानी है, इस हवेली की बरामदे की दीवार के ऊपरी भाग में सिपाही का चित्रण किया गया है। इसमें एक व्यक्ति घोड़े पर सवार है तथा तीन सिपाही आगे पीछे एक कतार में तथा पांच सिपाही समानांतर चल रहे हैं। इसकी पृष्ठभूमि पीली है। यह सिपाही पूरे जोश में दिर्खाइ पड़ रहे है।
तुलाराम लाला डूंगरमल की हवेली-
यह हवेली आज से लगभग 100 साल पहले की बनी हुई है। इसकी बाहरी दीवार पर रेल का इंजन डिब्बों सहित दिखाया गया है। इंजन का रंग काला एवं डिब्बों को नीले रंग से चित्रित किया गया है। रेल की खिड़की के ऊपर के भाग में जाली बनाई गई है जिसमें यात्रियों को दिखाया गया है एवं इंजन से धुआं निकल रहा है। रेलों के पीछे प्राकृतिक दृश्य भी दिखा रखा है । दूसरी ओर लक्ष्मीचंद का कटहरा में चालक रेलगाड़ी चला रहा है जोकि बहुत ही आकर्षक एवं सुंदर हैं इसमें 13 डिब्बे और एक इंजन को दर्शाया गया है। इस गाड़ी में यात्रियों को भी चित्रित किया गया है एवं
बाहर इसके सामने एक व्यक्ति हाथ में झंडी लिए खड़ा है जो गाड़ी के लिए एक संकेतक का कार्य कर रहा है ।
इसे देखकर यह लगता है यह चित्र हिंदुस्तान में अंग्रेजों द्वारा 19वी सदी में चलाई गई पहली रेल का चित्रित किया गया है। यह चित्र उस समय की जीवंत व्यवस्था की व्याख्या कर रहा है। डाकिये का चित्र-यहां एक दीवार पर डाकिए का चित्र चित्रित हैं प्रतीत होता है तथा अंग्रेजी भाषा में इन पर कुछ लिखा होना जोकि इस शैली के प्रभाव इसकी आंखें मीनाकृतपान के पत्ते के समान हैं जिसे देख ऐसा प्रतीत होता है कि इस पर स्थानीय कलाकार का प्रभाव रहा है। कपड़े जूतें आदि देखकर इन पर कंपनी शैली का प्रभाव को और सुदृढ़ करता है।
यशोदा कृष्ण का चित्र-
इस चित्र में यशोदा मैया ने श्री कृष्ण को गोद में उठा रखा है तथा यह मातृत्व भाव को दर्शा रहा है। इस चित्र में चेहरा छोटा जबकि शरीर हष्ट पुष्ट बना है, आँखें बादाम जैसी तथा चेहरा गोल है और भोही मोटी-मोटी है। सिर पर कंलगी लगी हुई है जोकि मुग़ल प्रभाव को दर्शाती है। अगर कपड़ों की तरफ देखें तो कपड़ों से राजस्थानी प्रभाव नजर आता है।
कृष्ण व कालिया नाग का चित्र-
चित्र में श्री कृष्ण को नाग पर अपनी लीलाएं करते हुए दिखाया गया है।
श्री कृष्ण बांसुरी बजा रहे हैं तथा उनके दोनों और नाग देवियां विशेष मुद्रा में खड़ी हैं जिनका नीचे का हिस्सा सर्प अवस्था में और ऊपर से नाग देवी के रूप में दिखाया गया है । अर्थात अर्ध नागेश्वरी के रूप में उपस्थित हैं जो कि श्री कृष्ण की तरफ मुख करके हाथ जोड़कर विनती अवस्था में खड़ी है । इस चित्र में एक चश्म चेहरों की आकृति में दर्शाया गया है। आंखें मीन जैसी हैं जोकि जयपुर शैली के अंतरगत । पूरे चित्र पर नाथद्वारा शैली का प्रभाव प्रमुखता से दिखाया गया है।
सरस्वती देवी का हंस पर विराजित चित्र-
इस चित्र में सरस्वती देवी हंस पर विराजित हैं तथा हंस के मुख में माला है, यहां एक चश्म चेहरा चित्रित अवस्था में दिखाया गया हैं। सरस्वती मां के एक बाल की लटा कान के पास से चेहरे पर पड़ी है। सरस्वती माँ के एक हाथ में पुस्तक और दूसरे हाथ में फूल हैं जिन्हें हरे रंग से चित्रित किया है। इस चित्र में पीछे महिला चंवर झुला जैसे प्रतीत होती हैं। इसमें दोनों राजस्थानी व मुग़ल प्रभाव का मिश्रण प्रतीत होता है।
चित्रकार ने अपनी अपनी समझ के अनुसार छवियों के अंदर भेद किया है । हिंदू मिथक के अनुसार देवी सरस्वती को विद्या और संस्कृति की देवी माना गया है। ऋग्वेद में सरस्वती की ख्याति एक पवित्र सरिता के रूप में है। सरस्वती को हंस रूप दिखाया गया है। हरियाणा के अनेक हिंदू आस्था स्थलों पर बनाए गए भवनों और आवासीय भवनों में देवी सरस्वती की छवियों का अंकन हमें भित्ति चित्रों के रूप में उपलब्ध है।
हवेलियों का निर्माण
भित्ति चित्रों में कलात्मकता भिवानी जिले के अन्तरगत आने वाले गांवों में अनेक पुरानी हवेलियों पर भित्ती चित्र पाए गए, इन हवेलियों का निर्माण लगभग 100-150 वर्ष पूर्व माना गया है। इन हवेलियों का निर्माण कुम्हार जाति के राज मिस्त्रिओं के द्वारा लाखोरी ईटों से किया गया है। भित्ति अलंकरण के लिए चूने का प्रयोग किया गया। इन हवेलियों पर हजारो की संख्या में भित्ति चित्र मिले। इन चित्रो में पौराणिक विषय, महाभारत, रामायण, राधा कृष्ण लीला, पशु पक्षी, सामाजिक क्रिया कलाप एवं अन्य पौराणिक कथाओं से सम्बंधित घटनाओं को प्रमुख रूप से दर्शा या गया है। इसके अलावा उस दौर के राजा महाराजाओं के गौरव गाथाओं का सुंदर चित्रण किया गया। इनके द्वारा महत्वपूर्ण न घटनाओं, प्रसंगों , पात्रों, लीलाओ के आदि पात्रो को चित्र के माध्यम से दर्शाया गया। उन्होंने राधा कृष्ण को अधिक मात्रा में और गणेश जी को रिद्धि सिद्धि के साथ
दरवाजे के प्रवेश द्वार पर या हवेलियों के बाहर टोडो के बीच में चित्रित किया गया। पटना एवं कम्पनी शैली के प्रमुख विषयों में व्यक्ति चित्र,पशु-पक्षी एंव साधारण लोगों के व्यक्ति चित्र थे पशुओं में प्रमुखतः हाथी एंव घोंडों या उनकि सवारियों का अंकन किया गया।
शैलियों का प्रभाव
इन चित्रों में शेखावटी शैली का प्रभाव दिखाई पड़ता है और यह मुग़ल शैली से भी अछूते नहीं रहे हैं क्योंकि दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में मुग़ल शैली का प्रभाव रहा हैं , उसका विस्तार आसपास के क्षेत्रों में खूब हुआ। लेकिन इसके बावजूद यहां की परम्परागत शैली का भी बोलबाला रहा है। इन चित्रों में कहीं-कहीं दक्षता का बोलबाला और तो कहीं अभाव प्रतीत होता है। लेकिन फिर भी यह अपने भावों को प्रकट करने में सक्षम रही है। इनकी गुणवत्ता व विषय प्रभावशाली रहे है। आज देखरेख के अभाव में देखभाल के अभाव में और इनका ठीक से प्रयोग न करने पर बहुत से चित्र इन हवेलियों से नष्ट हो गए हैं या धुएँ की परत जम चुकी है और इसके कारण यह चित्र रंगों का चटकपन खो चुके हैं लेकिन भीतरी दीवारों पर मौजूद चित्र धूप और बारिश से बचे होने के कारण अपने मूल अवस्था को आज भी संजोए हुए हैं।
किन्होंने बसाया बड़वा गाँव
बड़वा गांव को बसाने वाले ठाकुर बाघ सिंह तंवर राजपूत वंश से संबंध रखते थे, शायद इसलिए इस गांव की हवेलियों में चित्रांकन करने वाले चितेरे राजपूत क्षेत्र से आए हो । इन चित्रों पर राजपूताना परम्पराओं और उनकी जीवनशैली का प्रभाव दिखाई पड़ रहा है। हवेलियों के चित्रों पर राजपूत व राजसी परिधान का प्रभाव दिखाई पड़ता है। राजसी लोग पशु पक्षी जैसे तोता, हाथी, घोड़ा, ऊंट, आदि पशुओं को पालतू बनाकर रखते थे और शायद इसी कारण उन्हें ही भित्ति-चित्रों के प्रारूप में चित्रित करते थे।अजन्ता की गुफाओं में मनुष्य और महान आत्मा के अन्तर को व्यक्त करने के लिए ये नृत्य मुद्राएं अति उपयुक्त थी पैर की मुद्राओं का भी अजन्ता के चित्रों में विशेष स्थान हैं।
कई सेठ लोगों ने अपने-अपने वैभव, सामाजिक प्रतिष्ठा को दर्शाने लिए हवेलियों का निर्माण करवाया और उन हवेलियों पर चित्रण कराए गए जोकि वहां मौजूद परपरागत आकृतियों एव चित्रों से कुछ भिन्न प्रतीत होते हैं । बड़वा गांव में ठाकुर की हवेली का निर्माण (गाँव का गढ़) लगभग 1910 ईसवी के आसपास मुस्लिम कारीगरों द्वारा निर्मित की गई थी इसलिए शायद यहां के चित्रों पर मुगल शैली का प्रभाव दिखाई पड़ता है।उस दौरानलोक शैली में शरीर के विभिन्न अवयव और परिदृश्य के अनुपात आदि का ध्यान नहीं रखा जाता था चित्रों में प्रतीकात्मक भी बनाया गया है तथा चित्रों में प्राकृतिक दृश्य दिखाए गए हैं।
विरासत सहेजने के प्रयास
गाँव के युवा दोहाकार सत्यवान सौरभ ने बताया कि हवेलियों के रखरखाव के लिए वे कई बार सरकार को लिख चुके हैं। पिछले दो दशकों से वो लगातार गाँव की बहुमूल्य सांस्कृतिक विरासत पर लेख लिक रहे है अभी तक न तो सरकार ने और न ही इन हवेलियों के पुश्तैनी मालिकों ने इनके रख-रखाव के लिए कोई सकारात्मक कदम लिया है सत्यवान सौरभ ने ये भी बताया की कुरुक्षेत्र विश्विधालय के धरोहर विभाग के अधिकारी लगातार उनके संपर्क में है कि कब इनके पुश्तैनी मालिक इनको सहेजने की हामी भरे ताकि सरकारी तौर पर इनको संग्रहालय में रखवाया जा सके ताकि आने वाली पीढ़ियां इनके दीदार कर सके !
— डॉo सत्यवान सौरभ, रिसर्च स्कॉलर, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,
333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045