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ईडी ने गौ तस्करी के मामले में दो आईपीएस अधिकारियों को तलब किया

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कोलकाता, 20 सितंबर । ईडी ने गौ तस्करी के मामले में दो आईपीएस अधिकारियों को तलब किया है। डीसी (दक्षिण) आकाश मघरिया को 26 सितंबर को तलब किया गया है। 28 सितंबर को ज्ञाननाथ सिंह को तलब किया गया है।
इससे पहले केंद्रीय जांच एजेंसी ने कोयला तस्करी मामले में आठ आईपीएस अधिकारियों को तलब किया था। 15 अगस्त के बाद उन आठ आईपीएस अधिकारियों को दिल्ली तलब किया गया। ईडी सूत्रों के मुताबिक जिन आठ आईपीएस अधिकारियों को समन किया गया है उनमें ज्ञानवंत सिंह, सुकेश जैन, राजीव मिश्रा, कोटेश्वर राव, श्याम सिंह, तथागत बसु, सेल्वा मुरुगन, भास्कर मुखर्जी हैं। इससे पहले इस मामले में सात आईपीएस अधिकारियों को तलब किया गया था। केंद्रीय जांच एजेंसी ने ज्ञानवंत सिंह और राजीव मिश्रा से पूछताछ की। ईडी उनसे फिर पूछताछ करना चाहती है।

म्यूजिक एलबम ‘पलकें’ में नायाब अली खान के संगीत का जादू

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मुम्बई। सौ से अधिक म्यूजिक एलबम, सिंगल और फिल्मों में अपनी संगीत का जादू बिखेरने के बाद म्यूजिक डायरेक्टर नायाब अली खान अपने नए सिंगल ‘पलकें’ से फिर एक नई संगीयमयी ऊर्जा श्रोताओं तक लाने वाले हैं। दिल्ली के संगीत घराने के मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर गुलाम अली खान के सुपुत्र नायाब अली बचपन से ही संगीत के प्रति समर्पित रहे हैं। गुलाम अली खान के सानिध्य में कई गायकों और संगीतकारों ने गायकी और संगीत सीखी है।


म्यूजिक एलबम ‘पलकें’ में नायाब के संगीत का जादू तो दिखेगा ही साथ ही एलबम का निर्देशन इन्होंने ही किया है। एलबम में गाने के रोमांचक कहानी को बड़ी खूबसूरती के साथ दिखाया गया है। ‘पलकें’ म्यूजिक एलबम के साथ नायाब अली खान निर्देशन में अपना डेब्यू कर रहे हैं। इस एल्बम के निर्माता सरगम और लिरिक्स राइटर नवीन नीर हैं। जिसे ज़ी म्यूजिक रिलीज कर रही है और इसमें साहिल अख्तर खान और श्वेता दुबे ने अभिनय किया है।
नायाब अली ने कई मशहूर संगीतकारों और गायकों के साथ काम किया है। फिल्म ‘देख भाई देख’ में मशहूर गायक राहत अली खान के गाये गीत को नायाब अली ने संगीत से सजाया है जो काफी कर्णप्रिय है। एलबम ‘हसरतें’ और सोलो गीत ‘जिक्र’ के साथ साथ गुलाम अली खान के गाये कई गीतों को नायाब अली ने ही संगीतबद्ध किया है जो जीमा अवार्ड में नॉमिनेट हुआ।
नायाब अली निर्माता निर्देशक एन चंद्र को अपना गॉडफादर मानते हैं जिनके निर्देशन में बनी सुपरहिट फिल्म ‘स्टाइल’ से इन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। उसी फिल्म के बहुचर्चित गाने ‘स्टाइल में रहने का’ और ‘एक्सक्यूज़ मी’ गाने का म्यूजिक इन्होंने ही दिया है। इस फिल्म के गाने आज भी युवा वर्ग की जुबान पर है। फिल्म ‘पीके लेले’ का मार्मिक गीत ‘जिंदा हूँ मैं’ को भी इन्होंने ही संगीतबद्ध किया है। इसके अलावा फिल्म ‘प्राण जाए पर शान न जाए’ जैसे कई फिल्मों और एलबम में अनगिनत गीतों को स्वरबद्ध करने का श्रेय इन्हें जाता है। कुणाल गांजावाला की एल्बम ‘तेरे बिना’ में इन्ही का दिया संगीत है। नायाब अली खान कुमार शानू की कमबैक एलबम ‘फ्यूज़न’ के म्यूजिक डायरेक्टर हैं जो टी सीरीज म्यूजिक कंपनी ने लांच किया। यूनिवर्सल म्यूजिक कंपनी की कुणाल गांजावाला और कैलाश खेर द्वारा गाया गया गीत का संगीत भी इनका का है। सोनू निगम, कविता कृष्णमूर्ति, अलका याग्निक, जावेद अली, सुखविंदर सिंह जैसे कई प्रसिद्ध गायकों ने इनके संगीत में अपनी आवाज दी है। वह सुखविंदर सिंह के साथ मिलकर भी कई म्यूजिक डायरेक्ट कर रहे हैं। मोहल्ला अस्सी और पिंजर जैसी बेहतरीन फिल्मों के निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी की फिल्म ‘जेड प्लस’ का म्यूजिक डायरेक्शन सुखविंदर सिंह और नायाब ने दिया है जिसके लिरिक्स मनोज मुन्तशिर ने लिखा है। सुखविंदर सिंह व नायाब साथ में कई प्रोजेक्ट कर रहे हैं और फिल्मों में म्यूजिक डायरेक्शन का काम कर रहे हैं जिसमें जल्द ही निर्देशक एन चन्द्रा की फिल्म ‘तेज़ाब 2’, अनिल चौधरी की ‘फाइटर 2’, रजत मुखर्जी की ‘उम्मीद’ और राजकुमार राव की फिल्म ‘रेवपार्टी’ के प्रमोशनल गाने का संगीत है और नवीन नीर द्वारा लिखित गीत ‘तेरे बाद मौसम’ है।
नायाब अली की एलबम ‘नैनों से नैना’ में इनका एक अलग अंदाज का संगीत और इनका गायन सुनने को मिलेगा। जिसमें सूफी, क्लासिकल, वेस्टर्न के फ्यूज़न का समावेश मिलेगा। नायाब अली ने हर तरह के म्यूजिक डायरेक्ट किये है। हिंदी, उर्दू के अलावा राजस्थानी, तमिल, तेलगु, पंजाबी जैसे कई भाषाओं का संगीत भी इन्होंने दिया है। लगभग हर विधा में इन्होंने म्यूजिक कंपोज किया है। रविन्द्र जैन के लिखे गानों का म्यूजिक इन्होंने दिया है जिसके गायक राहत अली खान और अलका है। गायक जावेद अली की पहली एलबम ‘गुजारिश’ और मशहूर गायक ‘पिया बसंती फेम’ सुल्तान खान के एलबम का भी संगीत इन्होंने ही तैयार किया है।
नुसरत फतेह अली खान और ए आर रहमान जैसे दिग्गज संगीतकारो का वह अनुसरण करते हैं और उन्हीं की तरह एक नई संगीत की दुनिया का आगाज़ देना चाहते हैं। वैसे इन्होंने कई प्रसिद्ध संगीतकारों और निर्देशकों के साथ काम किया है और उन्होंने इनके काम को सराहा ही नहीं बल्कि उसकी प्रसंशा भी की है। महेश मांजरेकर, राम गोपाल वर्मा, नितिन गायकवाड़, विपुल शाह, अनिल शर्मा जैसे कई निर्देशकों की फिल्म को नायाब ने अपने संगीत से सजाया है। इरफान खान अभिनीत ‘अपनो से बेवफाई’ गीत जो जल्द ही दर्शकों के समक्ष होगी उसका संगीत भी इन्ही का है।
नायाब अली अपने संगीत में आधुनिक तकनीक के साथ वाद्ययंत्रों का भी प्रयोग करते हैं। बचपन से इन्होंने तबला वादन में महारत हासिल की है। संगीत के साथ गायन भी इनका शौक रहा है। कई म्यूजिक के निर्देशन के साथ उसमें गायन भी किया है। इनका मानना है कि आज आधुनिकता के दौर में म्यूजिशियन पुराने गानों को ही नए संगीत में पिरो कर पेश करते हैं और लोग पसंद भी कर रहे हैं। आज संगीत को पहले से ज्यादा प्लेटफॉर्म और सुविधाएं मिल गयी है। इसलिए एक संगीतकार का भी कर्तव्य है कि वह अपने श्रोताओं को कुछ नया और अलग गीत-संगीत दे।

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस – केवल प्यार ही घृणा को दूर कर सकता है

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आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देती है।” महात्मा गांधी के शब्द हैं जो 21वीं सदी में भी प्रासंगिक हैं। मनुष्य ने हमेशा शांतिपूर्ण और खुश रहने के प्रयास किए हैं – परिवार से लेकर राष्ट्र तक – शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना अनिवार्य है।
अनिवार्य रूप से शांति क्या है? यह मानव मन की एक अवस्था के अलावा और कुछ नहीं है, जो आधुनिक विज्ञान के लिए भी पूरी तरह से समझाने के लिए परिष्कृत बनी हुई है। हालाँकि, शांति / निर्वाण / खुशी की उपलब्धि – चाहे वह कोई भी नाम हो, प्राचीन काल से ही अन्वेषण का विषय रहा है। मानव जाति ने बहुत सी लड़ाइयाँ देखी हैं। मवेशियों, भूमि, संसाधनों, उपनिवेशों, क्षेत्रों आदि के लिए लड़ाई। इनमें से अधिकांश लड़ाई प्रतिद्वंद्वियों के बीच गलतफहमी के कारण हुई। इस प्रकार शांति जो मानव जाति के समग्र विकास के लिए आवश्यक है, उसे मायावी बना दिया गया।

एक शांतिपूर्ण वातावरण सामंजस्यपूर्ण जीवन सुनिश्चित करता है और आपसी समझ के लिए मार्ग प्रदान करता है। यह समझ बातचीत, चर्चा, क्रॉस-सांस्कृतिक आदान-प्रदान आदि के माध्यम से शांति को और मजबूत करती है। इस प्रकार एक पुण्य चक्र बनाया जाता है। दूसरी ओर, यदि बल द्वारा शांति थोपी जाती है, तो प्रतिस्पर्धी व्यक्तियों, समूहों, राज्यों आदि के बीच अविश्वास और शत्रुता की भावनाएँ पैदा होंगी। यहाँ कोई भी छोटी-सी गलतफहमी संघर्ष में बदल सकती है, जिससे परस्पर विरोधी दलों को नुकसान हो सकता है। इसलिए यह स्पष्ट है कि लंबे समय तक शांति कायम रहने के लिए दूसरे पक्ष के हितों की समझ जरूरी है।

मनुष्य के प्राचीन अभिलेखों के अनुसार, चाहे वह बाइबिल हो, कुरान हो या वेद, सभी ने सर्वसम्मति से विभिन्न तरीकों से सुझाव दिया है कि शांति केवल प्रेम, करुणा और समझ के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। ज्ञान के ये शब्द समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं और हमारे अतीत के पन्नों को पलट कर देखे तो इस तथ्य की पुष्टि की जा सकती है।

अभिजात वर्ग कभी भी सफल नहीं हुआ है और न ही कभी युद्ध या विद्रोह किसी समस्या का समाधान रहा है। हिटलर से लेकर सद्दाम तक सभी का कड़ा विरोध किया गया। भारतीय इतिहास पर नज़र डालें तो हम देखते हैं कि उपमहाद्वीप का अच्छा शासन उन शासकों के दिनों में था जो लोगों की समस्याओं और उनकी प्रजा के हितों को समझते थे। यह अशोक के “धम्म” से अकबर के मुगल दरबार में नियुक्तियों तक स्पष्ट है।

भारत ने हमेशा अहिंसा के अपने उपदेश के लिए दुनिया के सामने एक उदाहरण पेश किया है और उन मुद्दों की खोज करने की रणनीति जो उसके सामने हैं या जिनका सामना करना पड़ रहा है। महान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम ने बिना रक्तपात के प्रतिरोध की एक नई पद्धति का आविष्कार किया और तब से दुनिया ने सत्याग्रह का स्वाद चखा। गुटनिरपेक्ष आंदोलन ने दुनिया को दिखाया है कि, कभी-कभी शांति को मौन के साथ बनाए रखा जा सकता है और जरूरी नहीं कि हर बार एक विशेष पक्ष लिया जाए। पंचशील समझौता अलग नहीं है।

भारत, एक राष्ट्र के रूप में, दुनिया के सामने आसानी से यह साबित कर सकता है कि उसकी अहिंसा और समझ की नीति पूर्वी पाकिस्तान के बांग्लादेश में संक्रमण, आईसीजे के लिए एक भारतीय न्यायाधीश के चुनाव जैसी घटनाओं के साथ बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकती है। भारत ने, यहां तक कि एक विकासशील राष्ट्र होने के नाते, अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने की जिम्मेदारी ली है और इस प्रकार तथाकथित “महाशक्तियों” में से कई के लिए एक रोल मॉडल होने के नाते एक नैतिक जिम्मेदारी है क्योंकि हम सभी  धरती माता पर किरायेदार हैं। इसका सीधा सा अर्थ है कि एक देश के रूप में, एक नागरिक के रूप में और एक साथी के रूप में “सामाजिक रूप से जिम्मेदार” होना है।

एक देश के रूप में सामाजिक रूप से जिम्मेदार होने की प्रक्रिया के बीच भी, हमारा देश अन्य राष्ट्रों की तरह कई समस्याओं का सामना कर रहा था और कर रहा है।

लेकिन अधिक समझदार और जिम्मेदार सरकार और समाज के आधार पर, विभिन्न आंतरिक मुद्दों से निपटने के लिए हमेशा अथक प्रयास किए जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के मुद्दों को सरकार द्वारा उनकी समस्याओं के प्रति अधिक समझदार होने से रोका जा सकता है। भारत सरकार की “पूर्व की ओर देखो नीति” ने निपटान की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है पूर्वी राज्यों में अशांति व्याप्त है। बांग्लादेश के साथ एन्क्लेव समझौता दोनों सरकारों की ओर से अधिक समझदारी भरा कदम रहा है और इसने गंभीर चिंता के मुद्दे को शांति से सुलझा लिया है।

धर्म हमेशा से दंगों का कारण रहा है और इसने समाज में असहिष्णुता के लिए एक वातावरण प्रदान किया है और यह राष्ट्रीय और विश्व स्तर पर एक चिंता का विषय है।

अयोध्या हो या यरुशलम, धर्म ने अपनी भूमिका निभाई है और लोगों को एक-दूसरे से अलग किया है। विडंबना यह है कि जो दुनिया को एक करने का उपदेश देता है वह अब दुनिया को अलग कर रहा है! यदि हम विभिन्न धर्मों के विभिन्न उपदेशों पर करीब से नज़र डालें, तो यह समझा जा सकता है कि वे सभी प्रेम का प्रचार करते हैं और शांति फैलाने का इरादा रखते हैं। “अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखो”, बाइबल कहती है; “दयालु की पूजा करो और शांति फैलाओ”, कुरान कहता है; “वसुधैव कुटुम्बकम”, गीता कहती है और “क्रोधित विचारों से मुक्त लोगों को शांति मिलती है” बुद्ध कहते हैं।

दुनिया को रहने के लिए एक शांतिपूर्ण जगह बनाने के लिए विश्व स्तर पर प्रयास भी किए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र और इसी तरह के अंतरराष्ट्रीय संगठनों जैसे डब्ल्यूटीओ, आईसीजे और कई अन्य लोगों ने आपसी समझ और आपसी सम्मान के आधार पर दुनिया में बड़े बदलाव किए हैं।

“नोबेल शांति पुरस्कार” एक अभिनव अवधारणा थी जो वैश्विक परिदृश्य में समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखने के व्यक्तिगत प्रयासों को सामने लाती है और पहचानती है। आतंकवाद से लड़ने के वैश्विक प्रयास और आतंकवाद को खत्म करने के लिए बातचीत हमें एक खूबसूरत कल की तस्वीर देती है। पाकिस्तान की 14 साल की मलाला हो या आईसीएएन जैसी सामाजिक संस्था, इन सभी ने मार्टिन लूथर किंग के शब्दों को सही ढंग से प्रतिध्वनित किया, जिन्होंने एक बार कहा था-
“अंधेरा अंधकार को दूर नहीं कर सकता, केवल प्रकाश ही कर सकता है। घृणा घृणा को दूर नहीं कर सकती; केवल प्यार ही कर सकता है।”

भारतीय सिनेमा के आठ दिग्गज कलाकार एक साथ नज़र आएंगे ‘ऊंचाई’ में

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राजश्री प्रोडक्शन के बैनर तले निर्मित फिल्म ‘ऊंचाई’ में भारतीय सिनेमा के आठ दिग्गज कलाकार एक साथ नज़र आएंगे। अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, बोमन ईरानी, नीना गुप्ता, सारिका और परिणीति चोपड़ा अभिनीत इस फिल्म में, डैनी डेंगज़ोम्पा और नफ़ीसा अली सोढ़ी भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। राजश्री प्रोडक्शन की ये 60वीं फिल्म सूरज बड़जात्या के निर्देशन में बनी है। इस फिल्म से निर्देशक सूरज बड़जात्या 7 सालों बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे हैं। उनकी पिछली रिलीज फिल्म थी ‘प्रेम रतन धन पायो’ जिसमें सलमान खान और सोनम कपूर ने काम किया था। फिल्म ‘ऊंचाई’ का सेकंड लुक(पोस्टर) भी जारी कर दिया गया है। पोस्टर ऐसा जो दोस्ती की गाथा बयां कर रहा है कि चट्टानों की मजबूती से भी कट्टर है, हम तीन यारों की दोस्ती।
 ‘ऊंचाई’ के इस नए पोस्टर में अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर और बोमन ईरानी एक चुनौतीपूर्ण ट्रैक से ब्रेक लेते हुए हिमालय में नक्काशीदार चट्टान पर बैठे नजर आ रहे हैं।  पोस्टर में बैकग्राउंड में माउंट एवरेस्ट अपनी खूबसूरती दर्ज करा रहा है। यहाँ तीनों दोस्तों को घर का खाना खाते हुए देखा जा सकता है, जो इस बात का इशारा करता है कि राजश्री की फिल्में ,दोस्ती, प्यार और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती पर आधारित होती हैं, जो फैंस हमेशा राजश्री की फिल्मों से उम्मीद करते हैं।  इस फिल्म की टैगलाइन है- ‘दोस्ती ही उनकी प्रेरणा थी’। यह पोस्टर बर्फीली पृष्ठभूमि में दोस्ती की गर्माहट को साफ तौर पर दिखाता है।
राजश्री प्रोडक्शन पिछले 75 सालों से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में है और उनके 75वें साल के मौके पर फिल्म ‘ऊंचाई’ रिलीज हो रही है। कमल कुमार बड़जात्या, स्वर्गीय राजकुमार बड़जात्या और राजश्री के अजित कुमार बड़जात्या द्वारा निर्मित, ‘ऊंचाई’ राजश्री प्रोडक्शन की 60वीं फिल्म है।  राजश्री प्रोडक्शन ने महावीर जैन फिल्म्स के महावीर जैन और बाउंडलेस मीडिया की नताशा मालपानी ओसवाल के साथ फिल्म का निर्माण किया है।  यह राजश्री प्रोडक्शन, महावीर जैन फिल्म्स और बाउंडलेस मीडिया की पहली संयुक्त महत्वाकांक्षी फ़िल्म है। इस फिल्म की ज्यादातर शूटिंग दिल्ली, आगरा, मुम्बई, लखनऊ, नेपाल और कानपुर में हुई है। यह फिल्म 11 नवंबर को देशभर में रिलीज होने वाली है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

अभातेयुप द्वारा ऐतिहासिक रक्तदान शिविर का आयोजन सम्पन्न

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केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के अलावा कलेक्टर निधि चौधरी इस महा अभियान की बनीं साक्षी

मुम्बई। ‘रक्तदान महादान’ कहा जाता है और इसी महादान के लिए लोगों को प्रेरित करने और उनसे इस महादान का हिस्सा बनने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस, भगवान विश्वकर्मा जयंती और अभातेयुप के स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद (अभातेयुप) द्वारा मेगा ब्लड डोनेशन कैम्प का आयोजन किया गया। अभातेयुप द्वारा आयोजित इस लोक हितार्थ कार्यक्रम मेगा ब्लड डोनेशन कैम्प (MBDD) ने एक बार फिर इतिहास रचा। रक्तदान के इस महा अभियान को सफल बनाने में जहां एक तरफ मुम्बई सहित आस पास के उपनगरों के युवक परिषदों ने जी जान लगा दिया वहीं आम जनता ने भी इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। अभातेयुप के इस आयोजन में लोगों को उत्साह बढ़ाने के लिए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर एवं मुम्बई सबर्बन की जिला कलेक्टर निधि चौधरी के अलावा अलग-अलग क्षेत्रों के तमाम राजनेताओं, प्रशासन के अधिकारियों ने अपने विशेष रूप से उपस्थिति दर्ज कराई।


उल्लेखनीय है कि एमबीडीडी को महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, कृपाशंकर सिंह का मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ। इनके अलावा कई अन्य मंत्रियों, सांसदों, विधायकों ने अपना समर्थन एवं शुभकामनायें भेजा था।
जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग 2500 कैम्प आयोजित हुए जबकि सिर्फ मुम्बई एवं आसपास के युवक परिषदों द्वारा कुल 125 शिविर आयोजित किया गया जिसमें कुल 11153 यूनिट रक्त का संग्रह किया गया।


उल्लेखनीय है कि अभातेयुप के सह मंत्री भूपेश कोठारी के नेतृत्व में काफी पहले से इसकी तैयारियां की गई जिसमें अभातेयुप की टीम सहित मुम्बई की तमाम युवक परिषदों के कार्यकर्ता इसे सफल एवं ऐतिहासिक बनाने के लिए श्रम कर रहे थे। टीम के लोग पिछले दो महीनों से कई नामी गिरामी समाजसेवियों, राजनीतिज्ञों, खिलाड़ियों, फिल्मी हस्तियों, डॉक्टर्स आदि से मुलाकात करके उन्हें अभियान की जानकारी देते हुए समर्थन की अपील कर रहे थे। इस महाअभियान को भव्य बनाने हेतु चातुर्मास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष मदनजी तातेड़, श्री तुलसी महाप्रज्ञ फॉउंडेशन के अध्यक्ष विनोद बोहरा, अभातेयुप के पूर्व अध्यक्ष बीसी जैन, संदीप कोठारी सहित समाज के अन्य संघीय संस्थाओं के अलावा सभी युवक परिषदों के अध्यक्ष, मंत्री, कन्वीनर सहित तमाम पदाधिकारियों का साथ मिला। जबकि इसे सफल बनाने के लिए भूपेश कोठारी के नेतृत्व में एमबीडीडी ज़ोनल संयोजक दीपक जी समदरिया, मुंबई संयोजक कमलेश भंसाली, राजेश कोठारी, जितेंद्र परमार, मयंक धाकड़, विकास कोठारी, अमित रांका, अभातेयुप टीम के दिनेश सिंघवी, नरेश चपलोत, नरेश सोनी, नवीन लोढ़ा, प्रसन्न पामेचा, अविनाश इंटोदिया, रवि डोशी, गौतम भंडारी, धीरज मेहता, राजू मेहता, पारस कोठारी, नीतेश धाकड़, हेमंत धाकड़, सुनिल कोठारी, शैलेश डुगर, अशोक कोठारी, देवेंद्र डागलिया, गौतम डांगी सहित मुंबई युवक परिषदों के तमाम पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं के अलावा ब्राइट आउटडोर के योगेश लखानी, ऑन एयर मीडिया की उर्वशी मेहता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए इस ऐतिहासिक कार्य को सफल बनाया।


इस कार्यक्रम में अभातेयुप के सभी सदस्यों ने कड़ी मेहनत और लगन से काम किया और लोगों के मध्य जाकर रक्तदान के महत्व को बताया। इस कार्य में विशेष सावधानी रखी गई साथ में रक्तदाताओं को आभतेयुप की ओर से प्रशस्ति पत्र और भेंट दी गयी।
उल्लेखनीय है कि कुछ वर्ष पहले अभातेयुप ने मेगा ब्लड डोनेशन ड्राइव करके एक रिकार्ड बनाया था, जो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ था।

लखनऊ- अखिल भारतीय स्तर पर रे.सु.ब. स्थापना दिवस परेड-2022 का आयोजन

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लखनऊ – जगजीवन राम रेलवे सुरक्षा बल, अकादमी लखनऊ में कल दिनांक 20.09.2022 को रेलवे सुरक्षा बल स्थापना दिवस परेड का भव्य आयोजन किया जा रहा है। बल के महानिदेशक श्री संजय चन्दर, IPS, परेड की सलामी लेंगे। तत्पश्चात मुख्य अतिथि सुश्री दर्शना विक्रम जरदोश, माननीया रेल राज्य मंत्री एवं वस्त्र,  भारत सरकार परेड की सलामी लेंगी व निरीक्षण करेंगी।
उल्लेखनीय है कि 20 सितम्बर 1985 को ही रेलवे सुरक्षा बल को संघ के सशस्त्र बल का दर्जा दिया गया था। तब से ही रेलवे सुरक्षा बल स्थापना दिवस का आयोजन क्षेत्रीय स्तर पर किया जाता रहा है। 22 मई 2006 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भव्य परेड व समारोह में रेलवे सुरक्षा बल को ध्वज प्रदान किया।
 समारोह में महानिरीक्षक अतुल श्रीवास्तव को राष्ट्रपति पुलिस पदक एवं दो सहायक सुरक्षा आयुक्त व 13 अधीनस्थ अधिकारियों व जवानों को विशिष्ट सेवा पुलिस पदक से सम्मानित किया जा रहा है। इनके अतिरिक्त 2 जवानों को सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक एवं 4 जवानों को उत्तम जीवन रक्षक पदक एवं एक जवान को जीवन रक्षा पदक से अलंकृत किया जाएगा।
प्रथम बार जगजीवन राम रेलवे सुरक्षा बल, अकादमी लखनऊ के प्रांगण में  अखिल भारतीय स्तर पर रे.सु.ब. स्थापना दिवस परेड-2022 का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें रेलवे सुरक्षा बल महानिदेशालय के उच्चाधिकारी गण, सभी  क्षेत्रीय रेलों व उत्पादन इकाईयों के महानिरीक्षक व उपमहानिरीक्षक गण एवं बल के अधिकारी व जवान भाग ले रहें हैं। परेड का मुख्य आकर्षण रेलवे सुरक्षा बल कमाण्डो प्लाटून व महिला प्लाटून रहेगी।

उत्तरप्रदेश में 16,500 मदरसे हैं , अब होंगे आधे से ज्यादा बंद , योगी सरकार का फरमान , होने जा रहा है सर्वेक्षण

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कुछ आतंकी वारदाताओं का कनेक्शन भी मदरसों से जुड़ चुका है। आरोप लगते हैं कि मदरसों में मजहबी पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को कट्टरता सिखाई जाती है। इन सब के बीच सरकार ने पूरे प्रदेश में चल रहे मदरसों का रिकॉर्ड बनाना शुरू किया है। जांच में अगर कोई मदरसा गलत मिलता है तो उसे बंद कर दिया जाएगा और बाकी मदरसों पर भी सरकार की निगरानी बढ़ जाएगी।

लखनऊ – उत्तर प्रदेश सरकार इस वक्त प्रदेशभर के निजी मदरसों का सर्वेक्षण करा रही है। इस सर्वेक्षण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी चरम पर है। विपक्षी दल इस सर्वेक्षण को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं जता रहे हैं। यहां तक कि मदरसों पर बुलडोजर चलने का भी डर दिखाया जा रहा है। वहीं, सरकार का कहना है कि ये सर्वेक्षण मदरसों को मुख्यधारा में लाने के लिए किया जा रहा है।
आखिर ये सर्वेक्षण कब से कब तक होना है? सर्वेक्षण कैसे होना है? सर्वेक्षण में कितने मदसरों की जांच होगी? सर्वेक्षण के दौरान कौन-कौन से सवाल पूछे जाएंगे? सर्वेक्षण के बाद क्या मदरसों को बंद भी किया जा सकता है? आइए जानते हैं ऐसे ही दस सवालों के जवाब…
1. कितने मदरसों की हो रही जांच?
यूपी में कुल 16,500 मान्यता प्राप्त मदरसे हैं। इनमें 558 अनुदानित और 7,442 आधुनिक मदरसे हैं। इन मदरसों में 19 लाख से ज्यादा बच्चे हैं। मदरसों के रजिस्ट्रार जगमोहन सिंह बताते हैं कि अनुदानित के साथ-साथ गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की भी जांच चल रही है। इसके लिए सभी जिलों में अलग-अलग टीमें लगाई गई हैं।

2. कब तक पूरा होगा सर्वेक्षण, कब तैयार होगी रिपोर्ट?

प्रदेश सरकार ने 15 अक्तूबर तक सभी मदरसों का सर्वे पूरा करने का आदेश दिया है। इसके बाद सर्वे टीम अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। सर्वे टीम अपने यहां जिलाधिकारी को रिपोर्ट देगी, जिसे 25 अक्तूबर तक शासन को सौंपा जाना है।

3. सर्वे में क्या-क्या सवाल पूछ रहे?
गैर मान्यता प्राप्त मदरसे का नाम?
गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के संचालन करने वाली संस्था कौन है?
मदरसे की स्थापना की तारीख क्या है?
उसका स्टेटस यानी निजी घर में चल रहा है या किराए के
मदरसे में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा कैसी है?
भवन, पानी, फर्नीचर, बिजली, शौचालय के क्या इंतजाम हैं?
छात्र-छात्राओं की कुल संख्या, शिक्षकों की संख्या कितनी है?
वहां पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम क्या है?
मदरसे की आय का स्रोत क्या है?
अगर छात्र अन्य जगह भी नामांकित हैं, तो उसकी जानकारी दी जा रही है
अगर सरकारी समूह या संस्था से मदरसों की संबद्धता है, तो उसका विवरण।

4. जांच में किस चीज का ध्यान रखा जा रहा है?
सर्वे के दौरान टीम मदरसे के आर्थिक दस्तावेजों पर खास ध्यान दे रही है। इस सर्वे के जरिए पता किया जा रहा है कि मदरसों को संचालित करने के लिए फंडिंग कहां-कहां से होती है? कहीं कोई गलत तरीके से तो पैसे नहीं आ रहे? दुश्मन देश या विदेशी फंडिंग तो नहीं मिल रही? अगर हां, तो इसका इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है? ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब इस सर्वे के जरिए तलाशने की कोशिश हो रही है।

5. क्या खुद से जवाब दे सकते हैं मदरसा संचालक?
हां, सरकार ने एक प्रारूप बनाया है। इसमें 11 बिंदुओं में सवाल पूछे गए हैं। इसे भरकर मदरसा संचालक खुद जिलाधिकारी को सौंप सकता है। संचालकों के जवाब के आधार पर बाद में सरकार की टीम उसका भौतिक सत्यापन करेगी। इसमें मालूम किया जाएगा कि जो जानकारियां मदरसा संचालकों ने दी हैं, वो सही हैं या नहीं?

6. सर्वे के बाद क्या बंद किए जा सकते हैं मदरसे?

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी का बयान का कहना है कि ये एक मौका है जिसमें मदरसा संचालक पूरी सूचनाएं दें। यदि वे शर्तें पूरी करेंगे तो उन्हें सरकार की तरफ से मान्यता दी जाएगी। अगर कुछ भी गड़बड़ मिलता है तो जरूर संवैधानिक कार्रवाई होगी।
7. क्यों हो रहा मदरसों का सर्वे?
दरअसल बार-बार मदरसों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कुछ आतंकी वारदाताओं का कनेक्शन भी मदरसों से जुड़ चुका है। आरोप लगते हैं कि मदरसों में मजहबी पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को कट्टरता सिखाई जाती है। इन सब के बीच सरकार ने पूरे प्रदेश में चल रहे मदरसों का रिकॉर्ड बनाना शुरू किया है। जांच में अगर कोई मदरसा गलत मिलता है तो उसे बंद कर दिया जाएगा और बाकी मदरसों पर भी सरकार की निगरानी बढ़ जाएगी।

8. बाल आयोग क्या कहता है?
उत्तर प्रदेश बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. सुचिता चतुर्वेदी का कहना है कि मदरसों में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का तो हाल काफी बुरा है। कुछ अनुदानित मदरसों की भी स्थिति सही नहीं है। डॉ. सुचिता कहती हैं कि उन्होंने कई जिलों के मदरसों का औचक निरीक्षण किया। सरकारी मदरसों में अध्यापकों का शैक्षिक स्तर निम्न है। दसवीं पास शिक्षक दसवीं को और इंटर पास इंटरमीडिएट को पढ़ा रहा है। आधुनिकीरण मदरसों में तनख्वाह विषय विशेषज्ञ की लेते हैं पर पढ़ाते केवल दीनी तालीम (धार्मिक) हैं। गणित पढ़ाने वाले अध्यापक मुझे सात का पहाड़ा तक नहीं सुना पाए। लखनऊ के गोसाईगंज स्थित सुफ्फामदीनतुल उलमा मदरसे में बच्चे को बेड़ियों में रखने का मामला सामने आया ही था। इस पर हमने प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को पत्र भी लिखा। इन बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सर्वे और सही नीतियों का बनना बेहद जरूरी है।

9. विपक्ष का क्या कहना है?

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, बसपा सुप्रीमो मायावती, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई नेता मदरसों के सर्वे पर सवाल उठा चुके हैं। सभी यही आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा सरकार इस्लामिक शिक्षा को बंद करवाना चाहती है। सर्वे करवाकर मदरसों पर सरकार बुलडोजर चलवा सकती है।

10. सरकार का क्या कहना है?

विपक्ष के आरोपों पर प्रदेश के मंत्री धर्मपाल सिंह का कहना है कि हम मुस्लिम बच्चों के विरोधी नहीं हैं। सरकार की मंशा यह कतई नहीं है कि ये बच्चे अरबी, फारसी, उर्दू न पढ़ें लेकिन यह जरूरी है कि उनके साथ ऐसे विषय भी पढ़ें जिनमें वे अपना करिअर बना सकें। यही कारण है कि सरकार मदरसों की शिक्षा पद्धति का ढांचा पूरी तरह से बदलने जा रही है। तैयारी है कि मदरसे में दीनी तालीम का बस एक ही शिक्षक रहे। बाकी सभी शिक्षक बच्चों को अन्य महत्वपूर्ण विषयों की शिक्षा दें।

तेज बारिश में पोती जनाई के साथ जैपनिस खाने का स्वाद लेने निकली आशा भोंसले

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मुम्बई। सदाबहार आवाज की मल्लिका आशा भोंसले अपनी लाडली पोती जनाई भोंसले के साथ वक़्त बिताने का कोई भी मौका हाथ से जाने नही देती। जनाई भोंसले की हर बात पर दादी आशा भोंसले सौ-बार कुर्बान हैं। लाडली पोती जनाई अगर एक फरमाइश करे तो आशा ताई सबसे पहले उसे पूरा करने की कोशिश करती हैं और जनाई भी अपनी दादी पर जान छिड़कती है और यही वजह है कि दादी आशा भोंसले को अक्सर जनाई उनके पसंदीदा जैपनिस होटल में डिनर के लिए ले जाती हैं।
हाल ही में तेज बारिश में भी इन दोनों को मुंबई के बांद्रा में एक जैपनिस होटल में डिनर करते हुए देखा गया। जहाँ दादी आशा ताई का हाथ थामे उनकी ढाल बनकर हमेशा उनके साये की तरह पोती जनाई और आशा ताई मीडिया के कैमरों पर अपनी मुस्कुराहट बिखेर रहे थे और नमश्कार बोलकर मीडिया का अभिनंदन भी किया। जनाई जानती हैं कि उनकी दादी को अलग -अलग तरह के व्यंजन पकाना और खाना बेहद पसंद है खासकर आशा ताई जैपनिस खाना काफी पसंद करती हैं तो ऐसे में दादी के साथ डिनर डेट पर पोती जनाई का साथ मे निकलना तो सहज होगा ही।
आपको बता दें कि दोनों एक दूसरे के साथ काफी वक्त बिताती हैं और दोनों को खाना बनाने का काफी शौक भी है। आशा ताई, रेस्तरां की एक सफल श्रृंखला चलाने के बावजूद, दावा करती है कि उनके व्यंजनों को दुनिया भर में पसंद किया जाता है, पर उनको अपनी बहन लता मंगेशकर के हाथों का बना हुआ मटन धनिया सबसे लज़ीज़ लगता है।
वैसे डाइट नियत्रंण करने की बात हो तो आशा भोसले सुबह हल्का नाश्ता करने की सलाह देती हैं। और दोपहर के खाने में दो तले हुए अंडे चपाती और सब्जियों के साथ उचित भोजन ही उनकी सिफारिश है। हालांकि कभी-कभी अपने स्वाद की कलियों को छोड़कर वो बांद्रा के मिज़ू रेस्टोरेंट में पोती जनाई भोसले के साथ रात के खाने के लिए जाती हैं अपनी पसंदीदा जापानी व्यंजनों का स्वाद चखने के लिए।

गोरखपुर : मुठभेड़ में गौ-तस्कर के पैर में लगी गोली, गिरफ्तार

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शातिर गौ तस्कर और हिस्ट्रीशीटर है जुल्फिकार
– गोरखपुर, कुशीनगर और देवरिया में जुल्फिकार पर दर्ज है 14 केस
गोरखपुर, 18 सितम्बर (हि.स.)। शनिवार की देर रात पशु तस्करों और पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ में बदमाश जुल्फिकार के पैर में गोली लगी है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। जबकि उसके दो अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल हो गए।
जुल्फिकार, कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान का रहने वाला है। इलाज के लिए इसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। फरार हुए बदमाशों की तलाश में दबिश जारी है। पकड़ा गया बदमाश जुल्फीकार शातिर गौ तस्कर और हिस्ट्रीशीटर है। पुलिस के मुताबिक उस पर गोरखपुर के अलावा कुशीनगर और देवरिया में कुल 14 केस दर्ज है।
शनिवार की देर रात में पुलिस को शहर से पशु तस्करों द्वारा शहर से कुछ जानवरों की चोरी की सूचना मिली। सूचना के मुताबिक वे चिलुआताल इलाके से सोनौली रोड की तरफ जा रहे थे। फिर, चिलुआताल पुलिस और स्वाट टीम ने मोहरीपुर तिराहे पर चेकिंग शुरू की। इसी दौरान एक बाईक पर सवार तीन संदिग्ध पुलिस को देखकर भागने लगे। पुलिस ने इनका पीछा किया। थोड़ी दूर भागने के बाद उनमें से एक बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। इधर, खुद के बचाव में पुलिस ने भी फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान एक बदमाश के पैर में गोली लग गई और उसके दो साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।
पुलिस ने घायल बदमाश को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया। उसके पास से तमंचा, कारतूस, खोखा और एक बाइक बरामद हुई। फरार बदमाशों की तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है। पुलिस का दावा है कि जल्दी ही फरार बदमाशों को भी पकड़ लिया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत में यूक्रेन में संघर्ष को जल्द समाप्त करने पर जोर देते हुए कहा कि ‘‘आज का युग युद्ध का नहीं है

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New Delhi – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत में यूक्रेन में संघर्ष को जल्द समाप्त करने पर जोर देते हुए कहा कि ‘‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’’ प्रधानमंत्री ने वैश्विक खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा संकट के समाधान के लिए मार्ग तलाशने का भी आह्वान किया। समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन के इतर एक द्विपक्षीय बैठक में मोदी ने यूक्रेन में अस्थिरता को जल्द से जल्द समाप्त करने का आह्वान करते हुए ‘‘लोकतंत्र, संवाद और कूटनीति’’ के महत्व को रेखांकित किया।
मोदी ने कहा, ‘‘आज दुनिया, खासकर विकासशील देशों के सामने सबसे बड़ी चिंता, खाद्य सुरक्षा, ईंधन सुरक्षा, उर्वरक की है। हमें इन समस्याओं के उपाय खोजने चाहिए और आपको भी इस पर विचार करना होगा। हमें इन मुद्दों पर बात करने का मौका मिलेगा।’’ फरवरी में यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने की यह पहली मुलाकात थी। मोदी ने कहा, ‘‘मुझे पता है कि आज का युग युद्ध का नहीं है। हमने इस मुद्दे पर आपके साथ कई बार फोन पर चर्चा की है कि लोकतंत्र, कूटनीति और संवाद पूरी दुनिया को छूते हैं।
हमें आज बात करने का अवसर मिलेगा कि हम आने वाले दिनों में किस तरह शांति के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं।’’ विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री ने यूक्रेन में मौजूदा संघर्ष के संदर्भ में अस्थिरता को जल्द समाप्त करने और बातचीत तथा कूटनीति की आवश्यकता के लिए अपने आह्वान को दोहराया। पुतिन ने मोदी से कहा कि वह यूक्रेन संघर्ष पर भारत की चिंताओं से अवगत हैं और रूस इसे जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। पुतिन ने अपनी शुरुआती टिप्पणियों में कहा, ‘‘मैं यूक्रेन में संघर्ष पर आपकी स्थिति के बारे में जानता हूं। मैं आपकी चिंताओं के बारे में समझता हूं।
मुझे पता है कि आप इन चिंताओं को साझा करते हैं और हम सभी जल्द से जल्द इन सभी का अंत चाहते हैं।’’ रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि यूक्रेन ने वार्ता प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार कर दिया है और वह ‘‘सैन्य रूप से युद्ध के मैदान पर अपने उद्देश्यों’’ को प्राप्त करना चाहता है। पुतिन ने मोदी से कहा, ‘‘हम आपको वहां होने वाली हर चीज से अवगत कराएंगे।’’ बैठक के बाद मोदी ने बातचीत को ‘शानदार’ बताया। मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘राष्ट्रपति पुतिन के साथ शानदार बैठक हुई। हमें व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में भारत-रूस सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा करने का अवसर मिला। हमने अन्य द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की।’’
प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘राष्ट्रपति पुतिन के साथ शानदार मुलाकात हुई। हमें व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में भारत-रूस सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा करने का अवसर मिला। हमने अन्य द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की।’’ विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर गति की सराहना की, जिसमें विभिन्न स्तरों पर संपर्क शामिल हैं। साथ ही कहा कि उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग के महत्वपूर्ण मुद्दों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। मंत्रालय ने कहा, ‘‘वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति से उत्पन्न चुनौतियों के संदर्भ में वैश्विक खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और उर्वरकों की उपलब्धता पर भी चर्चा हुई।’’
शुरुआती टिप्पणियों में राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि भारत और रूस के बीच लगातार अच्छे संबंध बने हुए हैं और दोनों पक्ष प्रमुख मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय रूप से भागीदारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण है कि हम लगातार तालमेल बनाए रखें।’’ पुतिन ने द्विपक्षीय व्यापार में बढ़ोतरी का भी संदर्भ दिया। पुतिन ने कहा, ‘‘विशेष रूप से आपूर्ति के कारण व्यापार बढ़ रहा है, जैसा कि आपने भारतीय बाजार में रूसी उर्वरकों की अतिरिक्त आपूर्ति के लिए कहा था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘रूस से भारत में उर्वरकों की आपूर्ति में आठ गुणा से अधिक की वृद्धि हुई है।’’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह संघर्ष के शुरुआती चरण में यूक्रेन के विभिन्न क्षेत्रों से भारतीय छात्रों को बचाने में मदद करने के लिए रूस और यूक्रेन के आभारी हैं। मोदी ने कहा, ‘‘मैं यूक्रेन और आपको धन्यवाद देना चाहता हूं क्योंकि इस संकट के शुरुआती दिनों में, हमारे हजारों छात्र यूक्रेन में फंस गए थे। हम आपके और यूक्रेन की मदद से अपने छात्रों को यूक्रेन से सुरक्षित निकालने में कामयाब रहे। मैं दोनों देशों का शुक्रगुजार हूं।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और रूस के बीच संबंध कई गुणा मजबूत हुए हैं और नयी दिल्ली मास्को के साथ अपने संबंधों को महत्व देती है। मोदी ने कहा, ‘‘भारत और रूस के बीच संबंध कई गुणा बढ़ गए हैं। हम रिश्ते को महत्व देते हैं क्योंकि हम ऐसे दोस्त हैं जो कई दशकों से साथ रहे हैं। दुनिया जानती है कि भारत और रूस के किस तरह के संबंध हैं। दुनिया जानती है कि यह एक अटूट दोस्ती है।’’ पुतिन ने पिछले साल दिसंबर में भारत यात्रा की ‘यादों’ के बारे में भी बात की और मोदी को रूस की यात्रा के लिए आमंत्रित किया।
पुतिन ने मोदी को जन्मदिन की बधाई भी दी। मोदी का शनिवार को जन्मदिन है। पुतिन ने कहा, ‘‘मुझे पता है कि कल मेरे प्यारे दोस्त, आप अपना जन्मदिन मनाने वाले हैं। रूसी परंपरा के तहत हम कभी भी अग्रिम बधाई नहीं देते हैं। इसलिए मैं अभी ऐसा नहीं कर सकता…हम मित्र राष्ट्र भारत को शुभकामनाएं देते हैं और हम आपके नेतृत्व में भारत की समृद्धि की कामना करते हैं।’’ एक ट्वीट में, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने वार्ता को ‘सार्थक’ बताया। पीएमओ ने ट्वीट किया, ‘‘दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से व्यापक विषयों पर सार्थक चर्चा की।