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PFI का खूनी खेल उजागर , नृशंस हत्याओं में हाथ, पढ़ें किन कारणों से लगा बैन

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केंद्र सरकार ने आखिरकार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उससे जुड़े संगठनों पर पांच साल की पाबंदी लगा दी है। इसके साथ ही गृह मंत्रालय ने इस संगठन के खूनी खेल व काले कारनामों की लंबी फेहरिस्त भी जारी की है। इससे साफ पता चलता है कि यह तमिलनाडु , केरल, कर्नाटक समेत कई राज्यों में हुई नृशंस हत्याओं में लिप्त रहा है।
केंद्रीय जांच एजेंसियों ने देशभर में दो बार छापेमारी कर इस संगठन के 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं व नेताओं को दबोचा है। पीएफआई के तार खतरनाक आतंकी संगठन आईएसआईएस से भी जुड़े हैं। इसका इरादा देश के लोगों में भय पैदा करना था।
रामलिंगम, नंदू, रुद्रेश, पुजारी, नेट्टारू की हत्याओं में हाथ
अधिसूचना में कहा गया है कि पिछले माहों में देश के विभिन्न राज्यों में हुई हत्याओं में पीएफआई का हाथ रहा है। इनमें केरल में अभिमन्यु की 2018ए संजीथ की नवंबर 2021 में और नंदू की 2021 में हुई हत्याएं, तमिलनाडु में 2019 में रामलिंगम, 2016 में शशि कुमार की हत्या, कर्नाटक में 2017 में शरथ, 2016 में आर. रुद्रेश, 2016 में ही प्रवीण पुजारी और 2022 में प्रवीण नेट्टारू की नृशंस हत्याओं में इसी संगठन का हाथ रहा है। इन हत्याओं का एकमात्र मकसद देश में शांति भंग करना और लोगों के मन में खौफ पैदा करना था।

इराक, सीरिया व अफगानिस्तान तक गए पीएफआई के सदस्य
गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि इस संगठन की गतिविधियों के कई सबूत ऐसे मिले हैं, जिनसे पुष्टि होती है कि यह देश में आतंकी कार्यों लिप्त है। संगठन के सदस्य सीरिया, इराक व अफगानिस्तान में जाकर आईएस के आतंकी समूहों में शामिल हुए, कई वहां मारे गए। कुछ को को विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने गिरफ्तार किया। इसके आतंकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश के साथ संबंध हैं। यह संगठन देश में हवाला व चंदे के माध्यम से पैसा एकत्रित कर कट्टरपंथ फैला रहा है। युवाओं को बरगला कर उन्हें आतंकवाद में धकेल रहा है।

पीएफआई के इन सहयोगी संगठनों पर भी पाबंदी
गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि पीएफआई ने समाज के विभिन्न वर्गों, युवाओं, छात्रों और कमजोर वर्गों को निशाना बनाने के लिए अपने कई सहयोगी संगठनों की स्थापना की। इसका मकसद अपना प्रभाव बढ़ाना और फंड जुटाना रहा। जिन संगठनों पर पाबंदी लगाई गई है, उनमें कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, रिहैब इंडिया फाउंडेशन, ऑल इंडिया इमाम काउंसिल, नेशनल कन्फेडेरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइंजेशन, विमेंस फ्रंट, जूनियर फंर्ट, एंपावर इंडिया फाउंडेशन शामिल हैं।

सरकार का कहना है कि रिहैब इंडिया पीएफआई के सदस्यों के माध्यम से धन जुटाता है और जबकि कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, एम्पार इंडिया फाउंडेशन, रिहैब फाउंडेशन और केरल के कुछ सदस्य पीएफआई के भी सदस्य हैं तथा पीएफआई के नेता जूनियर फ्रंट, ऑल इंडिया इमाम काउंसिल, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स आर्गनाइजेशन और नेशनल वीमेन फ्रंट की गतिविधियों की निगरानी और समन्वय करते हैं।
पीएफआई ने समाज के विभिन्न वर्गों जैसे युवाओं, विद्यार्थियों, महिलाओं, इमामों, वकीलों या समाज के कमजोर वर्गों के बीच अपनी पहुंच को बढ़ाने के इरादे से उक्त सहयोगी संगठनों की स्थापना की है। पीएफआई का संबंध पूर्ववर्ती स्टुडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) के भी सदस्य रहे थे। सिमी पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है।

यूपी, गुजरात, कर्नाटक सरकार ने की पाबंदी की सिफारिश
पीएफआई पर पाबंदी की यूपी, कर्नाटक और गुजरात सरकार ने मांग की थी। इन राज्यों ने केंद्र ने बताया था कि यदि कार्रवाई न हुई तो क्या होगा। केंद्र सरकार का कहना है कि अगर पीएफआई और उसके संगठनों पर कार्रवाई नहीं की गई तो ये अपनी विध्वंसात्मक गतिविधियां जारी रखेंगे। इससे लोक व्यवस्था भंग होती है और राष्ट्र का संवैधानिक ढांचा कमजोर होगा।

एक हफ्ते में दो बार मारे छापे, 300 से ज्यादा गिरफ्तार
बता दें, एनआईए, ईडी और विभिन्न राज्यों की पुलिस ने पीएफआई के खिलाफ बीते एक सप्ताह में देशभर में कई जगह छापे मारकर 300 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। ये कार्रवाई 22 और 27 सितंबर को की गई थी। 22 सितंबर को छापेमारी में 106  पीएफआई कार्यकर्ता व नेता गिरफ्तार हुए थे, जबकि 27 सितंबर को 247 गिरफ्तार किए गए या हिरासत में लिए गए थे।

लता मंगेशकर चौक : सीएम योगी आज करेंगे लोकार्पण , 7.9 करोड़ से हुआ लता मंगेशकर चौक का निर्माण

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सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के नाम पर बने स्मृति चौक का लोकार्पण समारोह बुधवार को आयोजित होगा। सीएम योगी आदित्यनाथ व केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी चौक का उद्घाटन करेंगे। चौक के उद्घाटन समारोह में लता मंगेशकर के भतीजे व बहू भी आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना वीडियो संदेश देंगे। लोकार्पण समारोह सुबह 10:50 बजे शुरू होगा। समारोह को लेकर चौक व कार्यक्रम स्थल रामकथा पार्क को सजाने का काम मंगलवार को दिन भर जारी रहा। अफसर भी लगातार तैयारियों की समीक्षा में जुटे रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवंगत गायिका लता मंगेशकर को उनकी जयंती पर याद करते हुए कहा, “मुझे खुशी है कि आज अयोध्या में एक चौक का नाम उनके नाम पर रखा जाएगा।”
रामनगरी का नयाघाट बंधा चौराहा अब लता मंगेशकर चौराहा के नाम से जाना जाएगा। इस चौराहे का लोकार्पण समारोह के बाद सभी अतिथि मुख्य कार्यक्रम स्थल रामकथा पार्क पहुंचेंगे। जहां लता जी को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
इसके बाद लता के भतीजे आदिनाथ मंगेशकर व बहू कृष्णा मंगेशकर का स्वागत होगा। कार्यक्रम के क्रम में लता के भजनों की प्रस्तुति प्रख्यात गायिका सावनी रविंद्र महाराष्ट्र द्वारा दी जाएगी। लता मंगेशकर चौक के निर्माण को दर्शाती एक लघु फिल्म भी दिखाई जाएगी।अयोध्या शोध संस्थान द्वारा प्रकाशित ग्लोबल इंसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण के 11 पुस्तकों का विमोचन भी होना है। कार्यक्रम के क्रम में ही प्रधानमंत्री का वीडियो संदेश भी प्रसारित किया जाएगा।
समारोह में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास व प्रदेश सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, सांसद लल्लू सिंह, नगर विधायक वेदप्रकाश गुप्ता, महापौर ऋषिकेश उपाध्याय सहित कुछ चुनिंदा संत-धर्माचार्य मौजूद रहेंगे। लोकार्पण समारोह की तैयारियों की मौके पर समीक्षा डीएम नितीश कुमार, विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विशाल सिंह सहित अन्य अधिकारी दिन भर करते रहे।

कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर पांच साल के लिए प्रतिबंध , असम सीएम बोले-मोदी युग का भारत साहसिक

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PFI Ban News: कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर पांच साल के प्रतिबंध के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का ट्वीट सामने आया है। उन्होंने गृह मंत्रालय की अधिसूचना को पोस्ट करते हुए अपने ट्वीट में लिखा है, “बाय-बाय पीएफआई।”
इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने कहा, राजस्थान में जिस प्रकार कई जिलों में दंगा हुआ, उसी समय हम कह रहे थे कि PFI का इसमें हाथ था। कर्नाटक में भी जब सिद्धारमैया कि सरकार थी, उस समय भी 23 से अधिक लोगों की हत्या हुई थी। देश को अखंड रखने के लिए इस पर(PFI) बैन जरूरी था।
विश्व हिंदू परिषद ने भी दी प्रतिक्रिया 
पीएफआई पर प्रतिबंध के बाद विश्व हिंदू परिषद ने भी प्रतिक्रिया दी है। एक ट्वीट में लिखा गया है कि ‘पीएफआई जैसी राष्ट्र विरोधी शक्तियों को समाप्त करने के लिए उठाए गए कदम का विश्व हिंदू परिषद स्वागत करती है। आशा करती है की उनके सहयोगी भी इस घटना से सबक लेंगे। अब यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जिस प्रकार सिम्मी से पीएफआई बना, कोई और ना खड़ा हो जाए।

कर्नाटक सीएम बोले, समय आ गया था 
कर्नाटक सीएम बसवराज बोम्मई ने कहा, देश के लोगों समेत पूरा विपक्ष भी लंबे समय से पीएफआई पर प्रतिबंध की मांग कर रहा था। पीएफआई देश विरोधी गतिविधियों, हिंसा में शामिल था। इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने का समय आ गया था। भारत सरकार ने सही फैसला लिया है। यह सभी राष्ट्र विरोधी समूहों के लिए एक संदेश है। मैं लोगों से ऐसे संगठनों से नहीं जुड़ने का आग्रह करता हूं।

असम सीएम बोले-मोदी युग का भारत साहसिक
केंद्र सरकार के फैसले पर असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, मैं भारत सरकार द्वारा पीएफआई पर प्रतिबंध का स्वागत करता हूं। सरकार यह सुनिश्चित करने के अपने संकल्प में दृढ़ है कि भारत के खिलाफ किसी भी शैतानी, विभाजनकारी या विघटनकारी योजना के खिलाफ मजबूती से निपटा जाएगा। मोदी युग का भारत निर्णायक और साहसिक है।
वोट बैंक के नाम पर आतंकियों को संरक्षण देता था विपक्ष
गृह मंत्रालय के फैसले पर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा है कि केंद्र सरकार ने पीएफआई पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। लेकिन हमने पूर्व में देखा है कि कैसे कांग्रेस, सपा, राजद, वामपंथी आदि ने वोटबैंक के नाम पर आतंक को राजनीतिक संरक्षण दिया। कैसे कांग्रेस ने राजस्थान में PFI को चलाने की अनुमति दी और कर्नाटक में कांग्रेस ने PFI पर केस कैसे वापस लिए थे।
मालवीय बोले, सलमान खुर्शीद इस पर कुछ बोलेंगे 
भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा, सलमान खुर्शीद जैसे कांग्रेसी नेता, जो पहले सिमी जैसे कट्टरपंथी संगठन का बचाव कर चुके हैं, अब प्रतिबंधित आतंकी समूह के लिए कुछ बोलेंगे? उन्होंने आगे कहा, कांग्रेस ने पूर्व में पीएफआई का सक्रिय रूप से बचाव और सहयोग किया है।
किसी ने तो हिम्मत दिखाई: विवेक अग्निहोत्री 
फिल्म निर्माता विवके अग्निहोत्री ने कहा कि पीएम मोदी द्वारा शानदार काम। आखिर में किसी ने तो पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की हिम्मत की। उन्होंने पीएफआई को अर्बन नक्सल का मुख्यालय बताते हुए भारत का सबसे बड़ा दुश्मन बताया। कहा, मुझे खुशी है कि मैं अपने जीवनकाल में अर्बन नक्सलियों की हार देख रहा हूं।
पीएफआई से जुड़े संगठनों पर भी प्रतिबंध 
दरअसल, गृह मंत्रालय ने आतंकी फंडिंग व अन्य देश विरोधी गतिविधियों के चलते भारत में पीएफआई को पांच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। गृह मंत्रालय की ओर से इसके लिए अधिसूचना (नोटिफिकेशन) भी जारी कर दी गई है। यूएपीए एक्ट के तहत इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया है। PFI के अलावा उनके सहयोगी संगठन रिहैब इंडिया फाउंडेशन, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया इमाम काउंसिल, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन, नेशनल विमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन(केरल) पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

फतेहपुर में पुलिस मुठभेड़ में घायल दो गौ-तस्कर गिरफ़्तार

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फतेहपुर। फतेहपुर जिले में बिंदकी कोतवाली पुलिस और विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने मुठभेड़ में घायल दो गौ-तस्करों को गिरफ्तार किया। पुलिस अधीक्षक (एसपी) राजेश कुमार सिंह ने रविवार को बताया कि शनिवार रात करीब 11 बजे मुखबिर की सूचना पर बिंदकी कोतवाली पुलिस और एसओजी प्रथम की टीम आलमगंज प्रतापपुर गांव के पास पहुंची।
पुलिस टीम को देखते ही गौ-तस्करों ने गोलीबारी शुरू कर दी और जवाबी कार्रवाई में गौ-तस्कर अंसार और शाकिब उर्फ चींटा पैर में गोली लगने से घायल हो गए। उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया, जबकि एक अन्य तस्कर फरार हो गया। एसपी ने बताया कि पुलिस ने दोनों अभियुक्तों के पास से दो तमंचा, कारतूस, एक मोटर साइकिल, गोकशी में इस्तेमाल किये जाने वाले औजार और एक गाय बरामद की है। उन्होंने बताया कि अंसार के विरुद्ध गंभीर अपराधों के आठ मुकदमे दर्ज हैं और शाकिब के खिलाफ चार मुकदमे दर्ज हैं।

Cow Economy – 123 देशों तक फैलाया करोड़ों का कारोबार

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Organic Farming: भारत में गाय को मां का दर्जा दिया गया है और कई सदियों से गाय (Cow) की पूजा-आराधना भी की जाती है. पौराणिक काल से ही गाय को खेती और दूध उत्पादन के लिहाज से भी अहम माना गया है. पुराने समय की कारगर मान्यताओं के बलबूते पर ही आज गाय आधारित खेती (Cow Based Farming) करके किसान अच्छा मुनाफा तो कमा ही रहे हैं, साथ ही इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी वापस लौट रही है. खासकर गुजरात में गाय आधारित खेती और इससे जुड़े डेयरी व्यवसायों (Dairy Business)  को काफी बढ़ावा दिया जा रहा है. यही कारण है कि सबसे ज्यादा गाय आधारित खेती की सफलता इसी राज्य से उभर कर सामने आ रही है.
सफलता की इन्हीं कहानियों में शामिल है गोंडल, गुजरात के रमेशभाई रूपरेलिया का नाम, जिन्होंने 80 रुपये की मजदूरी करके जैविक उत्पादों का बड़ा एंपायर खड़ा कर दिया है. कभी पैसों की कमी के कारण रमेशभाई रुपरेलिया को अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी, लेकिन बचपन से ही दिमाग में उपज रहे गौ सेवा के बीज ने इन्हें आज 123 से भी ज्यादा देशों में लोकप्रियता दिलवाई है. बता दें कि आज रमेशभाई रुपरेलिया अपने गाय पालन (Cow Farming) और गाय आधारित खेती के जरिये उपजे अनाज, फल, सब्जी, दूध, मसालों के उत्पाद (Organic Products) बनाकर देश-विदेश में निर्यात कर रहे हैं. रमेशभाई के इन्हीं प्रयासों के चलते सम्मानित भी किए गए हैं.
बचपन से गौ सेवा में हुए लीन
रमेशभाई रुपरेलिया बचपन से ही संगीत के शौकीन रहे हैं, जो गांव में हार्मोनियम बजाकर गाय की महिमा का बखान करते थे. उसी समय से ही दिमाग में गौसेवा का बीज पनपा और लोगों को गौ मूत्र, गोबर और गाय के दूध के फायदे बताने लगे. घर में आर्थिक तंगी के कारण बचपन में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी और 7वीं पास रुपरेलिया मात्र 80 रुपये में मजदूरी करने लगे. उनके साथ उनके माता-पिता भी खेतों में खेतिहर मजदूर के तौर पर काम करते और अपना गुजारा चलाते. साल 1988 तक रमेशभाई का काम होता था दूसरों की गायों की सेवा करना और उन्हें चराने ले जाना. कई सालों तक गाय सेवा और आर्थिक तंगी में गुजारा चलता रहा.
यहीं से मिली गाय आधारित खेती की प्रेरणा
जिंदगी में कुछ करने का जज़्बा और डटकर संघर्ष की चाह ने रमेशभाई को गाय आधारित खेती करने के लिए प्रेरित किया. रमेशभाई के पास खुद की जमीन नहीं थी, लेकिन मजदूरी के साथ-साथ एक जैन परिवार से जमीन किराए पर लेकर खेती करने लगे. खेती के लिए उन्होंने पूरी तरह जैविक विधि अपनाई और जैसे-तैसे गाय का गोबर और गौमूत्र का इंतजाम करके फसलों का उत्पादन लेने लगे. धीरे-धीरे गाय आधारित खेती का नुस्खा काम करने लगा और साल 2010 में 10 एकड़ जमीन से करीब 38,000 किलो प्याज का रिकॉर्ड उत्पादन लिया और जिलेभर में प्रसिद्धि हासिल की. दूसरा रिकॉर्ड उत्पादन हुआ हल्दी, एक एकड़ में गौ आधारित खेती करके हल्दी की 36,000 किलो पैदावार मिले. बस फिर क्या धीरे-धीरे रमेशभाई तरक्की करने लगे और खुद की 4 एकड़ जमीन खरीदकर जैविक खेती के साथ-साथ गौपालन करने लगे.
साइकिल पर डिलीवरी से लेकर ऑनलाइन मार्केटिंग सीखी
वैसे तो रमेशभाई ने सातवीं तक ही पढ़ाई की है, लेकिन समय की मांग को देखते हुए उन्होंने बेसिक कंप्यूटर कोर्स किया, ताकि अपने जैविक उत्पादों की ऑनलाइन मार्केटिंग कर सकें. इससे पहले रमेशभाई खेती और गौपालन के जरिये जैविक उत्पाद और घी आदि बानकर साइकिल पर ही डिलीवरी करते थे. उस समय ऑर्गेनिक प्रॉडक्ट्स को लेकर ज्यादा बातें नहीं होती थीं, इसलिए उत्पादों के भी सही दाम नहीं मिल पाते थे, लेकिन  धीरे-धीरे ई-मेल मार्केटिंग और इंटरनेट का ज्ञान हासिल करने के बाद उन्होंने खुद ही ऑनलाइन मार्केटिंग शुरू कर दी.
बता दें कि रमेशभाई रूपरेलिया ने अपना यूट्यूब (Youtube Marketing) चैनल भी बानया है, जिसके जरिये वो गाय आधारित खेती (Cow Based Farming) और गौ पालन के अपने वीडियो अपलोड करके किसानों को जागरुक करते हैं. शुरूआत में इसी यूट्यूब चैनल के जरिये देश-दुनिया में उनके जैविक उत्पादों की डिमांड बढ़ने लगी थी.
123 देशों तक फैलाया करोड़ों का कारोबार
रमेशभाई की बढ़ती लोकप्रियता को देखकर अडोस-पडोस के गांव से भी किसान ट्रेनिंग के लिये आने लगे. रिपोर्ट्स की मानें तो अभी तक रमेशभाई से करीब 23 देशों के 10 हजार लोगों ने जैविक खेती और गौपालन की ट्रेनिंग (Cow Farming Training) ली है. यहां किसानों ने गाय का देसी घी बनाना तक सीखा है. आज रमेशभाई की सफलता करीब 123 देशों तक फैल चुकी है. आज गोंडल के गोपाल- रमेशभाई रूपरेलिया (Ramesh Rupareliye) जैविक खेती के साथ-साथ ‘श्री गीर गौ कृषि जतन संस्था‘ नाम से गौशाला चलाते हैं.
इस तरह खेती और गौशाला से निकले उत्पादों का प्रसंस्करण और पैकेजिंग कर ऑनलाइन मार्केटिंग करते हैं. बता दें कि आज रमेशभाई रुपरेलिया जैविक उत्पाद और गाय का देसी घी (Cow Ghee) बेचकर सालाना 3 करोड़ से ज्यादा की आमदनी ले रहे हैं. वह खुद तो 150 से भी ज्यादा गौवशों की देखभाल और जैविक खेती (Organic Farming) करते ही है, साथ ही 100 से भी ज्यादा लोगों को अपनी इस सफलता से जोड़कर रोजगार उपलब्ध करवा रहे हैं.

पीएम मोदी जापान पहुंचे, दिवंगत प्रधानमंत्री शिंजो आबे के अंतिम संस्कार में होंगे शामिल

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नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए टोक्यो पहुंच गए हैं। पीएम यहां से अकासाका पैलेस जाएंगे, जहां उनका अभिवादन किया जाएगा। विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने बताया कि इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री बुडोकन में राजकीय अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होंगे। पीएम मोदी की जापान यात्रा कुल 12 से 16 घंटे की है।

जापान के पीएम किशिदा के साथ करेंगे द्विपक्षीय बैठक

इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी जापान के पीएम किशिदा और श्रीमती आबे से भी मुलाकात करेंगे। व्यक्तिगत रूप से अपनी संवेदना व्यक्त करने के लिए पीएम किशिदा के साथ अभिवादन के अवसर के अलावा, पीएम मोदी अपने जापानी समकक्ष के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।

जाने से पहले पीएम ने किया ट्वीट

जापान जाने से कुछ घंटे पहले, पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि कि वह पूर्व पीएम शिंजो आबे जो कि एक प्रिय मित्र और भारत-जापान मित्रता के एक महान चैंपियन थे, उनके अंतिम संस्कार में भाग लेने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं सभी भारतीयों की ओर से प्रधानमंत्री किशिदा और श्रीमती आबे के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करूंगा। पीएम ने कहा कि हम आबे की परिकल्पना के अनुसार भारत-जापान संबंधों को और मजबूत करने के लिए काम करना जारी रखेंगे।

दुनिया भर के हजारों गणमान्य व्यक्ति होंगे शामिल

आबे का राजकीय अंतिम संस्कार आज होगा और इसमें दुनिया भर के हजारों गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे। 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों सहित सौ से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के इस अंतिम संस्कार में भाग लेने की उम्मीद है।

अपना प्रिय मित्र मानते थे मोदी

प्रधानमंत्री मोदी शिंजो आबे को अपना प्रिय मित्रा मानते थे। वे प्रधानमंत्री आबे के साथ गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री रहते हुए कई बार बैठकें कर चुके है। दोनों नेताओं ने भारत-जापान संबंधों को विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का दर्जा दिलाया है।

गोली मारकर की गई थी हत्या

बता दें कि शिंजो आबे की 8 जुलाई को नारा शहर में एक अभियान भाषण के दौरान हत्या कर दी गई थी। भारत ने शिंजो आबे के सम्मान में 9 जुलाई को एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की थी।

गोपाल गौशाला में गायों को मिलेगा हरा चारा

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27 सितम्बर 2022, कटनी: “गोपाल गौशाला में गायों को मिलेगा हरा चारा” – म. प्र. राज्‍य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा जिला परियोजना प्रबंधक कटनी शबाना बेगम के नेतृत्‍व में विकासखण्ड रीठी के ग्राम जमुनिया में संचालित गौशाला में जैविक कृषि‍ प्रशिक्षक राम सुख दुबे जी के सहयोग से परिसर में एजोला पिट का निर्माण कर एजोला खाद्य तैयार किये जाने का कार्य किया गया ।
इस दौरान श्री दुबे द्वारा गौशाला संचालनकर्ता पूर्णिमा स्‍वसहायता समूह के‍ सदस्‍यों को एजोला तैयार करने की विधि, इसका महत्‍तव, उपयोग व देख-रेख का तरीका के बारे में विस्‍तार से जानकारी दी गई। साथ में उपस्थित प्रभारी जिला प्रबंधक कृषि‍ म. प्र. राज्‍य ग्रामीण आजीविका मिशन राम सुजान द्विवेदी ने बताया की गौशाला को सक्षम बनाने के लिए समूह द्वारा गोबर से लकडी (गौ-काष्‍ठ) बनाने की मशीन गौशाला में लाई गई है । जिसके माध्‍यम से उपलब्‍ध गोबर का इस्‍तेमाल किया जायेगा । वर्मी पिट एवं नाडेप के माध्‍यम से खाद निर्माण भी किया जा रहा है ।

गौ तस्करी से जुड़ा मामला – कोल स्मगलिंग केस में ईडी ने बंगाल के एसटीएफ के एडीजी को भेजा समन

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पश्चिम बंगाल में गौ तस्करी मामले में टीएमसी के हैवीवेट नेता अनुब्रत मंडल फिलहाल जेल में है, लेकिन ईडी की कार्रवाई जारी है. पश्चिम बंगाल के आईपीएस अधिकरी आकास नागरिया को ईडी ने समन भेजा है. उनसे कोयला तस्करी मामले में पूछ ताछ की जा सकती है . वहीं पर 28 सितबंर को आला आईपीएस अधिकारी ज्ञानवंत सिंह को भी तलब किया गया है. ईडी सूत्रों के मुताबिक जब कोयला तस्करी के मूल आरोपी अनूप मांझी उर्फ लाला के नेतृत्व में राज्य के पश्चिमी जिलों में कोयले की तस्करी जोरों पर थी, तब ज्ञानवंत सिंह एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के पद पर थे. ऐसे में उन पर ईडी की पैनी नजर बनी हुई है.
अनूप मांझी ने किया था आईपीएस अधिकारियों के नामों का खुलासा
सूत्रों के अनुसार कोयला घोटाले के एक आरोपी अनूप मांझी उर्फ ​​लाला से पूछताछ करने पर जांचकर्ताओं को ज्ञानवंत सिंह के नाम पता चला था. फिर उन्हें तलब किया गया था. एक बार फिर ज्ञानवंत सिंह को ईडी ने तलब किया है. एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के पद पर रहने के बावजूद उनके समय में इस तरह से कोयले की तस्करी कैसे हुई. यह सवाल उठाया गया है. ईडी ने न केवल ज्ञानवंत, बल्कि कुल आठ लोगों को तलब किया था. ये सभी अलग-अलग समय पर महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं. क्या उन्हें कोयले की तस्करी की जानकारी थी ? पुलिस अधिकारियों के सामने कैसे हुई तस्करी ? इसको लेकर सवाल उठाया गया है.
ईडी ने इसके पहले आठ आला आईपीएस अधिकारियों को किया था तलब
ईडी ने कोयला तस्करी मामले में इसके पहले 8 आईपीएस अधिकारियों को तलब किया था, जिनमें ज्ञानवंत सिंह के अलावा आईपीएस श्याम सिंह, राजीव मिश्रा, तथागत बसु, सुकेश जैन, भास्कर मुखोपाध्याय, एस सेल्वामुरुगन और कोटेश्वर राव के नाम शामिल थे. उनमें से कुछ उस समय के डीआईजी, कुछ आईजी, कुछ पुलिस अधीक्षक पद पर कार्यरत थे. ऐसे में ईडी की पैनी नजर बंगाल के आईपीएस अधिकारियों पर टिकी हुई है. कोयला तस्करी मामले में हर रोज नये खुलासे हो रहे हैं.

पशु रोगों की समस्या के लिए ये महत्वपूर्ण नम्बर, संपर्क करें

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 सितम्बर ग्वालियर: पशु रोगों की समस्या के लिए ये महत्वपूर्ण नम्बर, संपर्क करें – गाय एवं भैंस वंशी पशुओं में फैल रहे संक्रामक रोगों से संबंधित समस्या के लिए शहर के नागरिक एवं पशु पालक पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर उनसे जानकारी एवं सलाह ले सकते हैं।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के पशु चिकित्सा विभाग के उप संचालक डॉ. के एस बघेल ने बताया है कि ग्वालियर जिले में पशुओं के उपचार एवं अन्य सहायता के लिए कंट्रोल रूम भी गठित किया गया है। इस कंट्रोल रूम में उप संचालक डॉ. के एस बघेल मोबा. 9009926988, जिला नोडल अधिकारी डॉ. बी  पी शर्मा मोबा. 9826503473 तथा सहायक नोडल अधिकारी डॉ. आर पी शर्मा मोबा. 9009173398 पर कोई भी व्यक्ति सूचना देकर जानकारी प्राप्त कर सकता है। इसके साथ ही विकासखंड मुरार के लिये डॉ. जी एस दुबे मोबा. 8319204003, विकासखंड डबरा के लिये डॉ. एन बी खान मोबा. 8120047600, विकासखंड घाटीगाँव के लिये डॉ. अवनीश शर्मा मोबा. 9926288390 और विकासखंड भितरवार के लिये डॉ. बी एल स्वर्णकार मोबा. 9425063852 पर संपर्क कर बीमार गायों के संबंध में जानकारी एवं सहयोग प्राप्त किया जा सकता है। नगरीय क्षेत्र में आवारा पशुओं, घायल पशुओं और बीमार पशुओं के संबंध में नगर निगम के कंट्रोल रूम 0751-2438358 पर कोई भी नागरिक सूचना देकर सहयोग प्राप्त कर सकता है।

लम्पी रोग के लक्षण एवं सुझाव 

लम्पी रोग से पशुओं को शुरू में बुखार आता है और वे चारा खाना बंद कर देते हैं। इसके बाद चमड़ी पर गाँठें दिखाई देने लगती है, पशु थका हुआ और सुस्त दिखाई देता है, नाक से पानी बहना एवं लंगड़ा कर चलता है। यह लक्षण दिखाई देने पर पशुपालक तुरंत अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु औषधालय से संपर्क कर बीमार पशुओं का उपचार कराएँ। पशु सामान्यत: 10 से 12 दिन में स्वस्थ हो जाता है।

क्या करें, क्या न करें 

संक्रमित पशु को स्वस्थ पशु से तत्काल अलग करें। पशु चिकित्सक से तत्काल उपचार आरंभ कराएँ। संक्रमित क्षेत्र के बाजार में पशु बिक्री, पशु प्रदर्शनी, पशु संबंधी खेल आदि पूर्णत: प्रतिबंधित करें। संक्रमित पशु प्रक्षेत्र, घर, गौ-शाला आदि जगहों पर साफ-सफाई, जीवाणु एवं विशाणु नाशक रसायनों का प्रयोग करें। पशुओं के शरीर पर होने वाले परजीवी जैसे- किलनी, मक्खी, मच्छर आदि को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करें। स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण कराएँ और पशु चिकित्सक को आवश्यक सहयोग भी करें।

महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी व अग्निशिखा मंच का हिंदी दिवस कार्यक्रम संपन्न

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मुख्य अतिथि पवन तिवारी ने हिंदी भाषा पर रखे विचार साथ अलका पांडेय ने साहित्यकारों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया

नवी मुंबई। महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी मुम्बई और अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के संयुक्त तत्वावधान में नवी मुंबई के सानपाडा स्थित होटल हाईवे व्यू शिकारा रेस्टोरेंट में भारतवर्ष के आज़ादी के 75वां अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत हिंदी व्याख्यान तथा काव्य पाठ का आयोजन सम्पन्न हुआ। उसी अवसर पर मुम्बई सहित अन्य राज्यों के साहित्यकारों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने कार्यक्रम की रौनक बढ़ाई।
मंच की अध्यक्ष अलका पाण्डेय ने बताया कि एक दिवसीय कार्यक्रम तीन सत्र में पूरा हुआ। पहला सत्र ‘हिंदी की लघु कथाएं और कहानी का वाचन’ की अध्यक्षता सेवासदन प्रसाद ने की तथा विशेष अतिथि के रूप में अरविंद राही और पूनम पटवा मंच पर विराजमान रहीं। कहानी और लघु कथा का वाचन चंद्रिका व्यास, वंदना श्रीवास्तव, ओम प्रकाश पांडे और नीरजा ठाकुर ने किया और मंच संचालन पवन तिवारी एवं कुमार जैन ने किया।
दूसरा सत्र ‘हिंदी व अन्य भाषाओं का महत्व और भ्रांतियां’ कार्यक्रम की अध्यक्षता पवन तिवारी ने की तथा विशिष्ट अतिथि हेमलता मिश्र मानवी, राम कुमार त्रिपाठी, अलका पांडेय, विधु भूषण त्रिवेदी मंच पर आसीन रहे। मंच संचालन अश्विन पांडे और संतोष पांडे ने किया वहीं डॉ. शिवदत्त शुक्ल स्मृति सम्मान साहित्य भूषण सम्मान से अलंकृत हुए। साहित्यकार, कवियत्री चित्रा देसाई को साहित्य भूषण से सम्मानित किया गया। विधु भूषण त्रिवेदी हृदयांगन को साहित्य सेवी गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया तथा राम कुमार त्रिपाठी को हिंदी सेवी सम्मान से सम्मानित किया गया।


तीसरा सत्र काव्य पाठ का रहा जिसका संचालन पवन तिवारी ने किया और रेखा रोशनी ने अपनी शानदार रचनाओं से शमा बांधा।
मुख्य अतिथि पवन तिवारी ने कहा कि जिस देश में राष्ट्रभाषा नहीं वो राष्ट्र गूंगा होता है। हिंदी के महत्व को पहचानना होगा तथा शैक्षणिक व प्रसाशनिक कार्यों में हिंदी का प्रचलन अधिक से अधिक होना चाहिए तभी हम हिंदी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा बनाने में सफल हो सकते हैं।


कार्यक्रम में कवि कल्पेश यादव, त्रिलोचन सिंह अरोड़ा, रामस्वरुप साहू, नंदलाल क्षितिज, संतोष पांडेय, तनुजा चौहान, शशि सिंह, मीनाक्षी शर्मा, अरुण प्रकाश मिश्र अनुरागी, दिलीप ठक्कर ने काव्य पाठ किया।
सभी कवियों को सम्मान पत्र देकर सम्मान किया गया व कुछ वरिष्ठ साहित्यकार भी सम्मानित हुए। विजय भटनागर, गोपी नाथ बुबना, शशि सिंह, विशंभर दयाल तिवारी, अशोक पांडे, परमिंदर सिंह आदि को अग्निशिखा गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया।
इस कार्यक्रम में कोटक महिंद्रा बैंक के रिप्रेजेंटेटिव भी उपस्थित हुए और उन्होंने बुजुर्गों और गृहिणियों के लिए इनकम प्लान भी बताया जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।
अंत में मंच की अध्यक्ष अलका पाण्डेय ने सबका आभार व्यक्त किया और राष्ट्र गीत के बात स्वादिष्ठ भोजन का आनंद साहित्य से जुड़े सभी अतिथियों ने लिया।
सभी अतिथियों को तुलसी का पौधा भेंटकर विदा किया गया।

– संतोष साहू