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महाराज श्री अंतर्यामी हैं। प्राणनाथ हैं – भगवान हैं , वे मन की बात जान लेते हैं – शिवरंजनी तिवारी

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उनका नाम शिवरंजनी तिवारी (Shivranjani Tiwari) है। उम्र 20 साल बताई जा रही। मीडिया रिपोर्टों में उन्हें एमबीबीएस की छात्रा और भजन गायिका बताया जा रहा है। वे बागेश्वर बाबा पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Pandit Dhirendra Krishna Shastri) को अपना ‘प्राणनाथ’ बता रही हैं। दावा कर रही हैं कि 16 जून 2023 को बागेश्वर सरकार उनके साथ लाइव होंगे। उनके मन की बात बताएँगे।

क्यों चर्चा में हैं शिवरंजनी तिवारी

शिवरंजनी तिवारी अपनी पदयात्रा को लेकर चर्चा में हैं। पदयात्रा उन्होंने गंगोत्री धाम से शुरू की है। बागेश्वर धाम तक जाने का संकल्प है। सिर पर गंगाजल से भरा कलश रखकर वह यह यात्रा कर रही हैं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि ऐसा वह पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से शादी की मनोकामना लेकर कर रही हैं। एक मई को गंगोत्री धाम से यात्रा शुरू कर वह 6 जून को चित्रकूट पहुँची। शिवरंजनी का कहना है कि अपने गुरुदेव के आदेश पर वह इस यात्रा पर निकली हैं।

कौन हैं शिवरंजनी तिवारी

शिवरंजनी तिवारी मूल रूप से मध्य प्रदेश के सिवनी की रहने वाली हैं। पैतृक गाँव चंदौरीकला (दिघौरी) है। परिवार करीब 25 साल से हरिद्वार में रहता है। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के परिवार से उनका ताल्लुक बताया जाता है। आध्यात्म के प्रति बचपन से लगाव रहा है। चार साल की उम्र से भजन गा रही हैं। भागवत कथा भी सुनाती हैं। फिलहाल एमबीबीएस कर रही हैं। लेकिन किस कॉलेज से, यह साफ नहीं है। कहा जा रहा है कि 2021 में NEET की परीक्षा पास की थी।

शिवरंजनी के पिता बैजनाथ तिवारी एक निजी कंपनी में महाप्रबंधक थे। अब नौकरी छोड़ बेटी के भजन कार्यक्रमों में सहयोग करते हैं। उनकी पत्नी कैंसर दवाओं की विशेषज्ञ हैं। फिलहाल अमेरिका के सेंट फ्रांसिस में एक निजी कंपनी कार्यरत हैं।

16 जून को क्या करेंगी शिवरंजनी तिवारी?

शिवरंजनी तिवारी के 16 जून 2023 को बागेश्वर धाम पहुँचने की उम्मीद है। पिता, भाई सहित कई और लोग भी यात्रा में उनके साथ हैं। आज तक से बातचीत में उन्होंने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को ‘प्राणनाथ’ कहकर संबोधित किया। शिवरंजनी ने कहा, “जब से गंगा कलश यात्रा गंगोत्री धाम से शुरू की तरह-तरह की बातें हो रही है। लोग कह रहे कि मनचाहा वर पाने के लिए मैंने यह यात्रा शुरू की है। कई लोग कह रहे हैं कि मैं अपने हाथों में फूलों की माला लेकर जा रही हूँ, जिसे धीरेंद्र शास्त्री के गले में डालने वाली हूँ। लोगों को बताना चाहूँगी कि महाराज श्री अंतर्यामी हैं। प्राणनाथ हैं। भगवान हैं। वे मन की बात जान लेते हैं। मैं सभी से कहना चाहती हूँ कि 16 जून तक का इंतजार कीजिए।”

शिवरंजनी ने अपने मन की बात प्रकट करने से इनकार करते हुए बताया है कि वह 2021 से ही बागेश्वर सरकार का हर वीडियो देखती हैं। इससे उनके मन में भक्ति जगी और उन्होंने बागेश्वर धाम तक कलश यात्रा का संकल्प लिया। इस यात्रा से बागेश्वर बाबा के साथ उनकी शादी को लेकर जो अटकलें शुरू हुई हैं अब 16 जून को उससे पर्दा उठेगा।

प्राकृतिक कृषि – देशी गाय के एक ग्राम गोबर में 300 से 500 करोड़ तक सूक्ष्म जीवाणु होते हैं

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पेड़-पौधों की वृद्धि और उनसे अच्छा उत्पादन लेने के लिए जिन-जिन संसाधनों की आवश्यकता होती है, उन सभी संसाधनों को पौधों को उपलब्ध कराने के लिए प्रकृति को बाध्य करना ‘प्राकृतिक कृषि’ कहलाती है। मुख्य फसल का लागत मूल्य सहयोगी फसलों में से लेना और मुख्य फसल बोनस के रूप में प्राप्त करना सही रूप में कम लागत ‘प्राकृतिक खेती’ है।

प्राकृतिक कृषि (खेती) के सिद्धान्त :-

देशी गाय 

यह कृषि मुख्य रूप से देशी गाय पर आधारित है। देशी गाय के एक ग्राम गोबर में 300 से 500 करोड़ तक सूक्ष्म जीवाणु होते हैं जबकि विदेशी गाय के एक ग्राम गोबर में केवल 78 लाख सूक्ष्म जीवाणु पाये जाते हैं। देशी गाय के गोबर एवं मूत्र की महक से देशी केंचुए भूमि की सतह पर आ जाते हैं और भूमि को उपजाऊ बनाते हैं। देशी गाय के गोबर में 16 मुख्य पोषक तत्व होते हैं। ये 16 तत्व ही हमारे पौधों के विकास के लिए उपयोगी हैं। इन्हीं 16 पोषक तत्वों को पौधे भूमि से लेकर अपने शरीर का निर्माण करते हैं। ये 16 तत्व देशी गाय के आंत में निर्मित होते हैं, इसलिए देशी गाय प्राकृतिक कृषि की मूलाधार है।

जुताई 

प्राकृतिक कृषि में गहरी जुताई नहीं की जाती क्योंकि यह भूमि की उपजाऊ शक्ति को कम कर देती है। 36 डिग्री तापमान होते ही भूमि से कार्बन उठना शुरू हो जाता है और ह्यूमस की निर्माण -क्रिया रूक जाती है जिसके कारण भूमि की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है।

जल प्रबंधन 

प्राकृतिक कृषि में सिंचाई पौधों से कुछ दूरी पर की जाती है। इसमें मात्र 10 प्रतिशत जल का ही उपयोग होता है जिससे 90 प्रतिशत जल की बचत हो जाती है। पौधों को कुछ दूरी से जल देने पर पौधों की जड़ों की लम्बाई बढ़ जाती है। जड़ों की लम्बाई बढ़ जाने से पौधों के तनों की मोटाई बढ़ जाती है। इस क्रिया से पौधों की लम्बाई भी बढ़ जाती है। इसके परिणामस्वरूप उत्पादन बढ़ जाता है।
पौधों की दिशा : प्राकृतिक कृषि में पौधों की दिशा उत्तर-दक्षिण होती है जिससे पौधों को सूर्य का प्रकाश अधिक समय तक मिलता रहे। एक पौधे से दूसरे पौधे की दूरी बढ़ाये जाने के कारण भी पौधों को अधिक मात्रा में सूर्य से ऊर्जा प्राप्त होती है, जिससे पौधे अपने शरीर का निर्माण करते हैं। इससे पौधों पर किसी भी प्रकार के कीट लगने की संभावना भी कम हो जाती है और पौधों में पोषक तत्व भी संतुलित मात्रा में संचित होते हैं। पौधों की दिशा उत्तर-दक्षिण होने से उत्पादन 20 प्रतिशत बढ़ जाता है।

सहयोगी फसलें 

प्राकृतिक कृषि में मुख्य फसल के साथ सहयोगी फसलों की खेती भी एक साथ की जाती है जिससे मुख्य फसल को नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश आदि मिलता रहे। सहयोगी फसलों की जड़ों के पास नाइट्रोजन स्थिरक जीवाणु जैसे राइजोबियम, एजोस्पिरीलम, एजेटोबेक्टर आदि की मदद से पौधों का विकास होता है। प्राकृतिक कृषि में मुख्य फसलों के साथ सहयोगी फसलें लगाने से मुख्य फसल पर कीट नियंत्रण भी साथ-साथ होता है।

आच्छादन

भूमि की सतह के ऊपर फसलों के अवशेष को ढकना ‘आच्छादन’ कहलाता है। इससे पानी की बचत होती है और भूमि से कार्बन भी नहीं उड़ता, जिससे भूमि की उर्वराशक्ति बढ़ती है। आच्छादन हवा से नमी एकत्र करता है और पौधों को प्रदान करता है, इससे सूक्ष्म पर्यावरण का निर्माण होता है और देशी केंचुओं की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। देशी केंचुए अपनी विष्ठा भूमि की सतह पर डालते हैं। केंचुओं की विष्ठा में सामान्य मिट्टी से 7 गुना नाइट्रोजन, 9 गुना फास्फोरस और 11 गुना पोटाश आदि होते हैं जिससे भूमि शीघ्र सजीव हो उठती है।

सूक्ष्म पर्यावरण 

प्राकृतिक कृषि में 65 प्रतिशत से 72 प्रतिशत तक नमी, 25 डिग्री से 32 डिग्री तक वायु का तापमान, भूमि के अंदर अंधेरा, वापसा, ऊब और छाया चाहिए। इन परिस्थितियों के निर्माण को ‘सूक्ष्म पर्यावरण’ कहते हैं। ये परिस्थितियां आच्छादन द्वारा निर्मित की जाती हैं। ‘आच्छादन’ करने से भूमि में अंधेरा, नमी, वापसा, ऊब और छाया का निर्माण होता है।

केषाकर्षण शक्ति (पृष्ठ तनाव Capillary Action) 

प्राकृतिक कृषि में पौधे केषाकर्षण शक्ति के द्वारा मिट्टी की गहराई से पोषक तत्वों को प्राप्त कर लेते हैं जिससे भूमि में जीवाणु की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। भूमि के 5 इंच नीचे की मिट्टी में जीवाणु पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं। रासायनिक खेती में रासायनिक खादों के कारण केषाकर्षण शक्ति कार्य नहीं कर पाती क्योंकि मिट्टी के दो कणों के बीच 50 प्रतिशत नमी व 50 प्रतिशत हवा का संचरण होना चाहिए। रासायनिक खादों से नमक (नैपदा) जमा हो जाता है, जैसे यूरिया में 46 प्रतिशत नाइट्रोजन और 54 प्रतिशत नैपदा (नमक) होता है जो मिट्टी के दो कणों के बीच में जमा हो जाता है। मिट्टी की गहराई में पोषक तत्वों का भंडार होते हुए भी पौधे उन्हें प्राप्त नहीं कर पाते क्योंकि कृषि में केंचुओं की गतिविधियां बढ़ जाने के कारण मिट्टी के दो कणों के बीच 50 प्रतिशत नमी और 50 प्रतिशत हवा का संचरण होता है जिससे प्राकृतिक कृषि में शक्ति का उपयोग करके पौधे अपना विकास कर लेते हैं और अच्छा उत्पादन देने में समर्थ हो जाते हैं।

देशी केंचुओं की गतिविधियां 

हमारे देशी केंचुए धरती माता के हृदय स्थान हैं क्योंकि जैसे हमारा हृदय धडक़ता है, उसी तरह केंचुए भूमि के अंदर जब ऊपर-नीचे आवागमन करते हैं तो इससे भूमि में स्पंदन होता है। देशी केंचुए मानो भूमि की जुताई कर रहे हैं। ये भूमि के अन्दर छेद कर अपनी विष्ठा से भूमि की सतह को खाद्य तत्वों से समृद्ध बनाते हैं लेकिन केंचुओं की गतिविधियों के लिए भूमि की सतह पर आच्छादन चाहिए। भूमि पर अंधेरा होने से सूक्ष्म पर्यावरण का निर्माण होगा। अगर सूक्ष्म पर्यावरण का निर्माण नहीं होता है तो केंचुए अपना कार्य नहीं कर पाते हैं और भूमि बलवान नहीं हो पाती, इसलिए प्राकृतिक कृषि में आच्छादन एक मुख्य घटक होता है।

गुरुत्वाकर्षण बल 

प्राकृतिक कृषि में गुरुत्वाकर्षण बल की मदद से पोषक तत्वों को पौधे बड़ी आसानी से प्राप्त कर लेते हैं क्योंकि जिस पोषक तत्व को पौधा जहां से उठाता है वहां उसको जाना ही पड़ता है। जैसे पौधा अपने शरीर के निर्माण में हवा से 78 प्रतिशत पानी लेता है लेकिन अपने जीवन की समाप्ति पर वह पुन: हवा को ही लौटा देता है। यह कार्य गुरुत्वाकर्षण आदि प्राकृतिक बल की मदद से पूर्ण हो जाता है।

भवंडर 

प्राकृतिक कृषि में भवंडर की मदद से संतुलित वर्षा होती है। वर्षा द्वारा हवा से नाइट्रोजन प्राप्त करके पौधे विकसित होते हैं। भवंडर सदैव अलग-अलग स्थान पर आते हैं जिससे धरती पर पानी की उपलब्धता बनी रहती है और भूमि में पानी का स्तर बढ़ जाता है। वर्षा का सारा पानी भूमि में ही समा जाने के कारण भूमि मुलायम बन जाती है जिससे सूक्ष्म जीव अपना कार्य तेजी से करते हैं। इस तूफान से पौधों के पत्तों में गतिविधियां बढ़ जाती हैं जिससे पौधे सौर ऊर्जा को अच्छी प्रकार से प्राप्त कर उत्पादन में बढ़ोतरी करते हैं।

देशी बीज 

प्राकृतिक कृषि में देशी बीजों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि देशी बीज पोषक तत्व कम लेकर उत्पादन अधिक देते हैं।

US Congress को दूसरी बार संबोधित करने वाले पहले भारतीय बने PM Modi

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PM Modi US Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अमेरिका दौरे को लेकर एक ट्वीट किया। ट्वीट में पीएम मोदी ने कहा कि वह यूएस कांग्रेस को एड्रेस करने के लिए मिले आमंत्रण को स्वीकार कर बेहद सम्मानित महसूस कर रहे हैं।

 

पीएम मोदी ने कहा कि 22 जून को अमेरिकी कांग्रेस के ज्वाइंट सेशन को संबोधित करने के लिए वह उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में कहा-

स्पीकर केविन मैक्कार्थी, लीडर मैककोनेल, चक शूमर और हकीम जेफ्रीज को इस अनुग्रहपूर्ण निमंत्रण के लिए धन्यवाद। मैं एक बार फिर कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित करने के लिए सम्मानित महसूस कर रहा हूं।

पीएम ने आगे कहा, “हमें अमेरिका के साथ हमारी व्यापक ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप पर गर्व है, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, मजबूत पीपल-टू-पीपल संबंधों, ग्लोबल पीस और समृद्धि के लिए एक अटूट प्रतिबद्धता की नींव पर बनी है।”

अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करेंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जून को अमेरिका के दौरे पर रहेंगे, जहां वह अमेरिकी संसद के एक ज्वाइंट सेशन को संबोधित करेंगे। पीएम मोदी को अमेरिका से आए आमंत्रण पत्र में स्पीकर के साथ पक्ष-विपक्ष के नेताओं ने साइन किए हैं। पीएम मोदी के संबोधन को लेकर एक बयान जारी करते हुए US कांग्रेस ने जानकारी दी है।

सदन के स्पीकर केविन मैक्कार्थी, सीनेट में नेता चक शूमर, सीनेट के  रिपब्लिकन नेता मिच मैककोनेल और सदन के डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीस ने पीएम मोदी को भेजे मैसेज में कहा, “आपके संबोधन के दौरान हम भारत के भविष्य के लिए आपके विजन के साथ हमारे दोनों देश जिन ग्लोबल चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उन पर बोलने का अवसर होगा।”

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और फर्स्ट लेडी के निमंत्रण पर जाएंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन के निमंत्रण पर 22 जून को अमेरिकी जाएंगे। इस दौरान पीएम मोदी के सम्मान में जिल बाइडेन डिनर का आयोजन करेंगी।

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के चेयरमैन मीनेश सी शाह को,राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा डॉक्टर ऑफ साइंस (डी.एससी.) की मानद उपाधि दिया गया

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गांधीनगर – कामधेनु विश्वविधयालय के नौवें दीक्षांस समारोह में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के चेयरमैन मीनेश सी शाह को गुजरात के महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा डॉक्टर ऑफ साइंस (डी.एससी.) की ‘मानद’ उपाधि प्रदान किया। 9वें दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों को डिग्रियां और मैडल अर्पित किए। इस समारोह में केंद्रीय पशुपालन मंत्री परषोत्तम रुपाला भी मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड मुख्यता डेरी के क्षेत्र में कार्यरत निर्माता-स्वामित्व और नियंत्रित संगठनों को बढ़ावा देने, वित्त और समर्थन देने के लिए बनाया गया है । एनडीडीबी के कार्यक्रम और गतिविधियां किसानों के स्वामित्व वाली संस्थाओं को मजबूत करने में बहुत सहायक है।
ज्ञात हो कि मीनेश शाह का डेयरी क्षेत्र में 35 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वह अंतर्राष्ट्रीय डेयरी महासंघ (आईडीएफ) की भारतीय राष्ट्रीय समिति (आईएनसी) के सदस्य सचिव हैं और आईडीएफ की डेयरी नीति और अर्थशास्त्र पर स्थायी समिति के सदस्य भी हैं। मीनेश शाह ने शेठ एमसी कॉलेज ऑफ डेरी साइंस (आणंद कृषि विश्वविद्यालय), आणंद से बीएससी की डिग्री प्राप्‍त की है और इंस्‍टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट, आणंद (इरमा) से ग्रामीण प्रबंधन में स्‍नातकोत्‍तर डिप्‍लोमा भी किया है।
डॉक्टर ऑफ साइंस (डी.एससी.) की ‘मानद’ उपाधि मिलने पर डेरी , पशुपालन , से जुड़े सभी लोगो ने श्री शाह को ढेरों शुभकामनाएं दी है।

पशु हमारे देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का तथा कृषि का मुख्य आधार है -पशुओं में नस्ल सुधार का महत्व

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पशु हमारे देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का तथा कृषि का मुख्य आधार है। पशु से अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करना, उनकी नस्ल, जाति तथा उसकी मूल क्षमता पर निर्भर करता है। इसलिये पशु विकास हेतु नस्ल सुधार कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है, जिससे पशुओं की उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो और उनसे अधिक लाभ प्राप्त कर सकें।

उन्नत पशु प्रजनन किस प्रकार संभव है- उन्नत नस्ल के चुने हुए उच्चकोटि के सांड से प्राप्त बछड़े-बछियों में अधिक उत्पादन क्षमता होती है। इसलिये निरंतर विकास हेतु हर समय उन्नत नस्ल के उच्चकोटि के सांड से पशुओं को प्रजनन कराना चाहिए। इसलिये उच्चकोटि के चुने हुए कीमती सांडों का क्रय, उनकी देखभाल, पालन-पोषण की जिम्मेदारी शासन एवं विभिन्न अन्य संस्थानों ने ली है और इन उच्चकोटि के सांडों द्वारा अनेक पशुओं में प्रजनन कराने के उद्देश्य से कृत्रिम गर्भाधान योजना को कार्यान्वित किया गया है।

उन्नत पशु प्रजनन हेतु कृत्रिम गर्भाधान की पद्धति को क्यों अपनाया जाता है?- कृत्रिम गर्भाधान हेतु अनेक पशुओं में गर्भाधान कराने हेतु कम सांडों की आवश्यकता होती है, क्योंकि एक सांड द्वारा कृत्रिम गर्भाधान विधि से 10,000 तक मादाओं में प्रजनन संभव होता है इसलिये उच्चकोटि के सांडों का चयन करना, चुने हुए उच्चकोटि के सांडों का उपयोग मादाओं में प्रजनन हेतु कराना तथा हजारों की संख्या में उन्नत बछड़े-बछिया उत्पन्न कराना कृत्रिम गर्भाधान से ही संभव है। इसलिये कृत्रिम गर्भाधान को पशु विकास का मुख्य आधार तथा पशु विकास की कुंजी कहा जाता है।

क्या प्राकृतिक विधि से सांडों के उपयोग से बड़े पैमाने पर पशु विकास संभव हैं?- प्राकृतिक पद्धति से एक सांड द्वारा एक वर्ष में 60 से 100 पशुओं में ही प्रजनन संभव होता है। इसलिये कोटि के नहीं हो सकते, इसलिये इनसे उत्पन्न संतानें उच्चकोटि की नहीं होगी, परंतु उच्चकोटि का सांड चयन कर कृत्रिम गर्भाधान द्वारा उच्च कोटि की संतानें हजारों की संख्या में उत्पन्न की जा सकती हं।

कार्य क्षेत्र में कृत्रिम गर्भाधान का नियोजन- पुरानी तकनीकी को छोडक़र नई तकनीकी से जुडऩे में काफी समय लग जाता है। यह कार्य सूचना का आदान-प्रदान कर, परिणाम दिखाने व निरन्तर रूप से विभिन्न वर्गों से जीवित संपर्क करके ही किया जाना संभव है। 

प्रजनन योग्य पशुओं का विवरण- कृत्रिम गर्भाधान के कार्यक्रम को सुचारू रूप से प्रारंभ करने के लिये यह आवश्यक है कि कार्यक्षेत्र में 1500-2000 प्रजनन योग्य पशु हो। इसके लिये स्वयं समय-समय पर सर्वेक्षण कर इसकी जानकारी संस्था स्तर पर रखी जाना आवश्यक है। गांव में कम पशु होने की दशा में अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार 10-12 कि.मी. की दूरी तक किया जा सकता है, ताकि समय-समय पर सूचना प्राप्त हो सके एवं समय-समय पर पशु मालिकों से निरन्तर जीवित संपर्क रखा जा सके। इस हेतु मुख्य गांव के आसपास के गांवों का सर्वेक्षण कर,अपनी सुविधा अनुसार ज्यादा से ज्यादा प्रजनन योग्य पशु अपने कार्यक्रम में लें।

अवांछित नर पशुओं का बधियाकरण -गांव में खेती के कार्य हेतु नर पशु पाले जाते हंै, जिनसे ऋतु में आये मादा पशुओं का प्रजनन होकर निम्न गुणवत्ता की संतति पैदा होती रहती है। इस हेतु सामाजिक रूप से भी कुछ नर पशु, चरने वाले मादा पशु समूह में छोड़ दिये जाते हैं। उत्तम संतति पैदा करने में नर का विशेष महत्व है। आगामी पीढ़ी में, अच्छे नर से प्रजनन की क्रिया को सीमित कर अवांछित नर का बधियाकरण कर धीरे-धीरे इनका लुप्त प्राय: किया जाना संभव है। इस हेतु यौवनास्था प्राप्त नर का बधियाकरण करवाने हेतु दुग्ध प्रदायकों को प्रोत्साहित करना एवं बधिया न हुए सांडों को पशु मालिक के द्वारा घर पर ही बंधवाना आवश्यक है।

 संस्था स्तर पर पशु बांझ शिविर का आयोजन – पशु बांझ शिविर के आयोजन में बहुत से कृषक अपने पशुओं को परीक्षण हेतु लाते हैं। इस विषय में शिविर आयोजन होने की तिथि के 4-5 दिन पूर्व से दुग्ध उत्पादकों को सूचित किया जाये।

पशु प्रथमोपचार- पशु प्रथमोपचार कृषक से जीवित संपर्क का अच्छा माध्यम है। बीमार पशु के उपचार के लिए आने पर उसके द्वारा निरन्तर संपर्क किया जा सकता है। इस समय अपने कार्यक्रम में सहभागी होने के लिये उसे प्रोत्साहित किया जा सकता है।

उन्नत नस्ल के पशुओं का संवर्धन- प्रदेश के बाहर प्रगतिशील कृषकों से भेंट एवं अन्य शासकीय योजनाओं के तहत हितग्राहियों को उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध कराये जायें ताकि उक्त नस्ल के पशु से प्राप्त दुग्ध उत्पादन एवं अन्य लाभों की जानकारी ग्राम के सदस्यों को मिल सके एवं वे अच्छी नस्ल के पशु पालन हेतु प्रेरणा ले सकें।

स्वयं के तकनीकी स्तर में सुधार- नैसर्गिक रूप से प्रजनन होने पर सामान्यत: 40 प्रतिशत तक पशु गर्भित होते हैं। कृत्रिम गर्भाधान द्वारा भी यह परिणाम प्राप्त किया जाना संभव है। अपने तकनीकी स्तर के ज्ञान के माध्यम से गर्भित होने के प्रतिशत को ज्यादा से ज्यादा अच्छा रखकर ही पशु पालकों में विश्वास जगाया जा सकता है अन्यथा पशुपालकों द्वारा फिर से अपने पुराने तरीके का प्रयोग किये जाने से कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम असफल हो जाता हैं।

ओडिशा ट्रेन के पीड़ितों को दिव्यांग समाजसेवक नीलोत्पल मृणाल ने दी श्रद्धांजलि

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मुम्बई। भारत के इतिहास में 5 जून 2023 को ओडिशा राज्य के बालासोर में देश की सबसे बड़ी ट्रेन दुर्घटना हुई।
इस दुखद घड़ी में पूरी दुनिया के लोग हादसे में मृतक लोगों को व घायल हुए लोगों के लिए गहरी संवेदना प्रकट कर रहे हैं। वहीं मुम्बई के दिव्यांग व्यवसायी, उद्योगपति व समाजसेवक नीलोत्पल मृणाल अपने हज़ारों समर्थक के साथ कुर्ला टर्मिनस जहां से लंबी दूरी की ट्रेन चलती है वहाँ पीड़ित लोगों को श्रद्धांजलि देने पहुँचे।
नीलोत्पल मृणाल का फाउंडेशन, राष्ट्रीय सवर्ण संघ और उत्तर भारतीय सेवा संघ के द्वारा पुष्प अर्पण कर और सैकड़ो दीये जलाये गये।
नीलोत्पल मृणाल ने कहा कि मुंबई भी ऐसे गम्भीर हादसा बम ब्लास्ट और अन्य हृदय विदारक घटना से पीड़ित रहा है। इसके विपरीत मुंबई के लोग पूरे जोश के साथ देश के खातिर हमेशा खड़े रहते हैं। और इस दुखद घड़ी में भी पूरा मुंबई और यहाँ के लोग ओडिशा ट्रेन हादसे मे मारे गये लोगों के साथ खड़ा है।

साहित्य के माध्यम से सेतु निर्माण

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हिंदी साहित्य के माध्यम से ब्रिटिश और भारत के मध्य सेतु के निर्माण का पहला कार्यक्रम , हाउस ऑफ कॉमन्स, ब्रिटिश पार्लियामेंट, लंदन में आयोजित किया गया।इस दौरान भारत, ब्रिटेन और युरोप के साहित्यकारों, पत्रकारों, अध्यापकों एवं हिन्दी सेवियों को लंदन की संसद में हिन्दी साहित्य के माध्यम से सेतु निर्माण कार्यक्रम हेतु आमंत्रित कर सम्मानित किया गया।
भारत से डॉकनक लता तिवारी, रूपासिंह , डॉमंगला रानी डॉ रीता दास,श्री शतपा.चवन.,अन्नपूर्णागुप्ता, बिट्टूजैन , सीमात्रिवेदी,साहित्यकारों और रोहितराज अभिनय,पवन मेनन wildlife photography, श्रीमती रंजु राजेश झा राजनीति,सिद्धि मोरे मनोरंजन, गोविंदभाई शिक्षा ने कथा यू के और हिंदी साहित्य एकेडमी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में अपनी गरिमामय उपस्थिति तथा ट्रॉफी और सम्मान पत्र देकर कर, इस कार्यक्रम शिरकत हुए गौरवान्वित पल था
इस कार्यक्रम की मेज़बानी लंदन पार्लियामेंट के सांसद वीरेंद्र शर्मा ने की तथा इस अवसर पर भारतीय उच्चायोग के मंत्री समन्वयक दीपक चौधरी, लंदन की काउंसिलर तथा सुप्रसिद्ध प्रवासी साहित्यकार ज़किया ज़ुबैरी पंजाबी लेखक एवं काउंसलर के. सी. मोहन एवं प्रवासी साहित्यकार तेजेन्द्र शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
वरिष्ठ साहित्यकार तेजेन्द्र शर्मा ने संचालन तथा श्रीमती कल्पना ने धन्यवाद दिया। इस कार्यक्रम में अरुणा अजितसरिया, ललित मोहन जोशी, अरुणा सब्बरवाल एवं हिन्दी अधिकारी डॉ. नंदिता साहू सहित भारत एवं यूके व अन्य देशों से लगभग 80 गण्यमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
यह कार्यक्रम हिन्दी अकादमी अध्यक्ष डॉ प्रमोद पांडे और कथा UK तेजेन्द्र शर्मा के सयुंक्त तत्वावधान में हुआ सम्मान मुर्ति श्रीमति रंजू राजेश झा

विश्व पर्यावरण दिवस पर सनटेक ने नायगांव के एक पार्क को किया सुशोभित

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मुंबई। किसी भी पार्क में, हरियाली के बीच, रंगीन फूलों, तितलियों के नज़ारों, पंछियों की चहचहाट का लुफ्त उठाते हुए टहलना मन में नयी ताज़गी, ख़ुशी भर देता है। नायगांव पूर्व के निवासियों को यह ख़ुशी प्रदान करते हुए सनटेक फाउंडेशन ने स्थानीय अधिकारीयों की मदद से विश्व पर्यावरण दिवस पर नायगांव में तिवरी में एक पार्क को सुशोभित किया। आसपड़ोस का इलाका स्वच्छ और हराभरा हो, बच्चों और वयस्कों के खेलने, टहलने के लिए अच्छी जगह हो इस उद्देश्य से सनटेक फाउंडेशन ने यह पहल की।
समुदायों की स्थिति में सुधार लाने और लोगों को पर्यावरण के अनुकूल, स्थिर जीवन शैली अपनाने में सक्षम बनाने के लिए पर्यावरण की सुरक्षा करने में सनटेक रियल्टी का सनटेक फाउंडेशन हमेशा से सबसे आगे रहा है।


सनटेक रियल्टी की कस्टमर एक्सपीरियन्स एवं जलिस्ट अनुपमा खेतान ने कहा, “हमारा संगठन पर्यावरण के अनुकूल जगहों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि विकास हमारे प्रोजेक्ट्स की सीमाओं के भीतर सीमित नहीं होना चाहिए। समुदायों को बेहतर बनाने में हम पर्यावरण और पर्यावरण के अनुकूल जीवन को बढ़ावा देने वाले सामाजिक कार्यों के समर्थन के लिए लगातार प्रयासशील हैं।
नायगांव में कम्युनिटी पार्क विकसित करने की सनटेक की यह पहल पूरे पर्यावरण और समाज की भलाई के लिए लोगों को हरित पहल में शामिल करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल जगह बनाने के लिए की जा रही है। सनटेक ने नायगांव के तिवरी में इस 450 वर्गमीटर के पार्क के विकास में मिट्टी और खाद भरने के साथ-साथ लॉन घास और विभिन्न प्रकार के पौधे और झाड़ियां भी दी हैं, जिनमें कॉलियान्ड्रा ब्रेविप्स (पाउडर पफ), टेकोमा स्टैंस (येलो बेल्स), मुरैया पैनिकुलता (नारंगी चमेली), नेरियम ओलियंडर (मीठी सुगंधित भारतीय ओलियंडर), हिबिस्कस वेरीगेटेड (जावाकुसुम) और अन्य शामिल हैं।

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला टेक्नीशियन सरस्वतीबाई फाल्के की 80वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित ‘बैकबोन अवार्ड समारोह’ सम्पन्न

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भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला टेक्नीशियन सरस्वतीबाई फाल्के की 80वीं पुण्यतिथि (3 जून) के अवसर पर कैफ अवार्ड्स आयोजन समिति के संस्थापक व संचालक रविन्द्र अरोड़ा रवि द्वारा ओशिवारा, मुम्बई स्थित व्यंजन हॉल में ‘बैकबोन अवार्ड’ समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में बॉलीवुड के चर्चित निर्माता पहलाज निहलानी ,सुंदरी ठाकुर, बी एन तिवारी, रजा मुराद, शारुख मुराद, हनुमंत राव पाटिल, अरबिंद कुमार, नीलू, रामा मेहरा, शशि दीप, सुवी मनीष, राजू असरानी, सुनील गावडे, करुणा गावडे, डॉ सय्यदा समीना परवीन, राजू टॉक, गुरमीत टॉक, प्रभुदास वाघेला, मंजुला बेन, जस्मिन कुमार, डॉ शैलेन्द्र एन त्रिपाठी, डॉ अशोक त्रिपाठी, एम एल ए भारती लावेकर, सनाउल्लाह सिद्दकी, कविता मोथै, कल्याणजी जाना, अंकिता, प्रिया (विफपा कॉमेटी मेंबर), वेस्टर्न इंडिया फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी दिलीप दलवी, दीपिका दलवी, दत्तात्रेय जाधव, राजेन्द्र माने, सविता माने,सुनील पाल, सविता पाल, अनिता नायक, अनिल नायक, राज कुमार तिवारी, समी तंबतकर, अमीना समी तंबतकर, प्रिया शहनबाज़ राठौड़, पब्लिसिटी डिजाइनर ज्ञानजी, चाँद पाशा फैमली हैदराबाद, गुरमीत सिंह बेदी और संजना कश्यप, लेस्ली त्रिपाठी और वरिष्ठ फिल्म प्रचारक पुनीत खरे के अलावा बॉलीवुड के  नामचीन शख़्सियतों ने शरीक हो कर सरस्वती बाई  फाल्के को श्रंद्धाजलि अर्पित की। इस समारोह की खास बात ये थी कि शामिल लगभग सभी शख्सियत इस मौके पर सपरिवार आये थे, जिन्हें भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला टेक्नीशियन सरस्वतीबाई दादा साहेब फाल्के की स्मृति में ‘बैकबोन अवार्ड’ से नवाजा गया।

विदित हो कि भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहेब फाल्के की पत्नी सरस्वती बाई ने अपने पति दादा साहेब फाल्के के निर्देशन में फिल्म डेवलपिंग, मिक्सिंग और फिल्म पर केमिकल कैसे इस्तेमाल करना है, यह सब सीखा और इस तरह से भारत की पहली हिंदी फीचर फिल्म ‘ राजा हरिश्चंद्र’ की एडिटिंग सरस्वती बाई फाल्के ने की। इन सबके अलावा इस पितृसत्ता समाज में वह एक औरत थी तो उनकी खुद की जिम्मेदारियां तो थी ही। लेकिन उन्होंने कभी भी उन जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा। सरस्वती बाई ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में पोस्टर बनाने से लेकर फिल्म की एडिटिंग तक, हर जगह सरस्वती बाई ने दादासाहेब फाल्के की मदद की। फाल्के ने उन्हें कैमरा चलाने से लेकर एडिटिंग के लिए शॉट्स हटाने और लगाने तक सभी कुछ सिखाया। उनकी पत्नी सेट पर भरी दोपहरी में घंटों सफेद रंग की चादर लेकर खड़ी रहती थी।

यह सफेद चादर उस समय लाइट रिफ्लेक्टर का काम करती थी। भारतीय फिल्म जगत की पहली फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ को बनाने वाले दादा साहब फाल्के को तो सभी जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ही उनकी पत्नी सरस्वती बाई फाल्के को जानते हैं, जिनके बिना दादा साहब फाल्के की पहली फिल्म कभी बन ही नहीं पाती। दरअसल उनकी पहली फिल्म का निर्माण सरस्वती बाई फाल्के के दृढ़ निश्चय और असाधारण सहयोग के कारण ही संभव हो पाया था। यही वजह है कि सरस्वती बाई फाल्के का नाम भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला टेक्नीशियन के रूप में शुमार है।

इस बात की अवधारणा को आत्मसात कर भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला टेक्नीशियन सरस्वतीबाई की 80वीं पुण्यतिथि (3 जून) के अवसर पर कैफ अवार्ड्स आयोजन समिति के संस्थापक व संचालक रविन्द्र अरोड़ा रवि के द्वारा ‘बैकबोन अवार्ड’ समारोह का आयोजन किया जाना एक शुभ संकेत है। इस आयोजन की तैयारी वो पिछले तीन वर्षों से कर रहे थे। इस सफल आयोजन के बाद उम्मीद की जा रही है कि अन्य अवार्ड शो आयोजकों के सोच को एक नई दिशा मिलेगी।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

भरतपुर न्यूज – गौ तस्कर को गिरफ्तार

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भरतपुर न्यूज: भरतपुर की खोह थाना पुलिस ने एक गौ तस्कर को गिरफ्तार किया है, और उसके कब्जे से 4 गोवंश मुक्त करवाये हैं। गौ तस्कर गोवंश को जंगल के रास्ते पैदल लेकर जा रहा था। जैसे ही पुलिस को सूचना मिली तो पुलिस जाब्ता मौके पर पहुंचा और आरोपी गौ तस्कर को गिरफ्तार कर लिया। खोह कस्बे में पुलिस की नाकाबंदी और गश्त चल रही थी। इस दौरान पुलिस को मुखबिर के जरिये सूचना मिली एक गौ तस्कर हिंगौटा से पालड़ा की तरफ पैदल-पैदल जा रहा है। उसके साथ चार गोवंश भी हैं। जिन्हें वह हरियाणा गोकशी के लिए लेकर जा रहा है। सूचना पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और गौ तस्कर कि घेराबंदी उसे गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार हुआ गौ तस्कर शकील उर्फ अनदल है, जो कि जो खोह थाना इलाके के कावान का वास इलाके का रहने वाला है। फिलहाल पुलिस ने सभी गोवंश को गौशाला भिजवा दिया है। मेवात में गौ तस्करी पर लगाम लगाने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई करती रहती है। आये दिन गौ तस्करों को गिरफ्तार किया जा रहा है, मेवात इलाके से हरियाणा बॉर्डर पास होने के कारण गौ तस्कर मेवात इलाके से होकर गुजरते हैं।