मोतिहारी। गाय आधारित खेती में फसलों पर पेस्टिसाइड का उपयोग नहीं होता।जिससे भूमी मे रोग-प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।गांधी जी की ग्राम स्वराज मे भी गाय आधारित गांव की कल्पना की गई है।उक्त विचार कृषि विज्ञान केंद्र, परसौनी के मृदा वैज्ञानिक डा.आशीष राय ने बताते हुए कहा कि भारत में मानव जीवन के लिए गाय की उपयोगिता का उल्लेख धर्म-शास्त्रों और वेद-पुराणों में भी मिलता है।पुरातन काल की पूरी खेती संरचना गाय आधारित हुआ करती थी।जिसका स्वरूप अब बदल रहा है।जिस कारण मानव जीवन मे कई तरह के रोग भी बढ रहे है।

उन्होंने बताया कि पूर्वी चंपारण जिले के अरेराज प्रखंड के सिरनी, मिश्रौलिया गांव के किसान ने देसी गाय आधारित खेती को अपनाकर न केवल अच्छी उपज प्राप्त किये है बल्कि इस गौ आधारित खेती के कारण उनकी खेती मे लागत भी घटकर महज 5-6 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर तक आ गया है।उन्होंने बताया कि अरेराज के किसान रविभूषण सिंह ने रासायनिक खाद और दवाइयों का उपयोग बिल्कुल बंद कर चुके है।मौके पर उपस्थित किसान रवि भूषण सिंह बताते हैं, मेरे पास लगभग 15 एकड जमीन है, जिसमें गेहूं, धान, फल, सरसो, भिंडी, बैगन, प्याज, मिर्च और अन्य हरी सब्जियां उगाता हूं। शुरुआत में भिंडी के बीज बोए थे तब मैंने खेत में पेस्टिसाइड का उपयोग नहीं किया। सिर्फ गाय के गोबर और गो-मूत्र का ही उपयोग किया और देखा कि अच्छी फसल तैयार हो गई है फसल का टेस्ट भी पहले की तुलना में बहुत अच्छा था।
रवि भूषण सिंह ने बताया कि कि इस प्रयोग से रासायनिक खाद और दवाइयों का काफी खर्च बच गया है। जहां पहले 20-25 हजार रुपए तक खर्च हो जाते थे, उसकी जगह अब एक फसल में 4 से 5 हजार रुपए ही खर्च हुए।उन्होने बताया गाय के गोबर व गोमूत्र से घर पर ही जीवामृत, पंचगव्य, केचुआ खाद जैसी जैविक खाद बनाकर खेती कर रहा हुँ।उन्होने बताया कि तीन साल पहले कृषि एवं मृदा विशेषज्ञ आशीष राय, कृषि विज्ञान केंद्र परसौनी के संपर्क में आए थे तभी से गाय आधारित खेती की शुरुआत की है।
उन्होंने इसके लिए कई ट्रेनिंग भी ली थी। इसके बाद उन्होंने गांव के पास स्थित अपनी गौशाला से रोजाना गोबर और गो-मूत्र का उपयोग से विभिन्न प्रकार के जैविक खाद बनाकर अपनी फसलों पर किया।फसलों पर इसका अच्छा फायदा होते देख उन्होने गिर नस्ल की गायें खरीदी।अब घर पर ही जीवामृत,पंचगव्य बनाकर फसलों पर छिड़काव करना शुरू किया।

बताते चले कि रवि भूषण सिंह के इस प्रयोग से अब आसपास के अन्य किसान भी प्रेरित होकर ऐसा प्रयोग शुरू कर दिया है।अब तो किसानों ने इसके लिए ग्रुप बनाकर रासायनिक खाद रहित फसलों के बारे में गांव-गांव में लोगों को बता रहे है।

-गौ आधारित खेती से शरीर से लेकर जमीन तक को फायदा

डा.आशीष राय व किसान रविभूषण सिंह ने बताया कि गौ आधारित खेती से भूमी के साथ मानव शरीर मे भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है,ऐसा इसलिए क्योंकि फसलों पर पेस्टिसाइड का उपयोग नहीं होता।साथ ही गोबर के प्रयोग से जमीन ठोस नहीं होती और जिस कारण हल भी आसानी से चलते हैं।डा.राय ने बताया कि गौ आधारित खेती अपनाने से क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या से भी निपटा जा सकता है।
उन्होने बताया खेतों में पेस्टिसाइड के उपयोग से जमीन की उर्वरता का क्षरण के साथ मृदा मे उपलब्ध जलवायु अनुकुल कई कीट भी मर जाते है।इससे प्रकृति के साथ मानव शरीर मे कैंसर, डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ रहा है। गौ आधारित जैविक खेती से इन समस्याओं से निपटने के साथ ही किसान अपने खेती की लागत भी कम कर सकते है।
डा.आशीष राय ने बताया जो किसान जैविक खाद से युक्त खेती करना चाहते है वे पूर्वी चंपारण जिले के पहाड़पुर प्रखंड स्थित कृषि विज्ञान केंद्र परसौनी से संपर्क कर सकते है।यहां किसानो को महज 6-7 दिनों की ट्रेनिंग देकर रसायनिक खादो के कई विकल्प बनाने ट्रेनिंग दिया जायेगा।जिसके बाद किसान खुद घर पर जैविक खाद तैयार कर सकते हैं।
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