भोपाल, 12 सितंबर । मध्यप्रदेश गौ-पालन एवं पशुधन संवर्धन कार्य परिषद के अध्यक्ष महामण्डलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने प्रदेश की गौ-शालाओं में कार्यरत गौ-सेवकों से कहा कि वे लंपी पीड़ित बीमार गाय की सेवा करने के बाद अच्छी तरह साबुन से हाथ धोएँ, उसके बाद ही कोई अन्य कार्य करें। उन्होंने कहा कि लंपी चर्मरोग मनुष्यों को प्रभावित नहीं करता है, लेकिन यदि गौ-सेवक बीमार गाय की सेवा वाले हाथों से ही दूसरी गाय को स्पर्श करते हैं तो उस गाय को यह संक्रमण फैल सकता है।
स्वामी जी ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि लंपी के लक्षण मिलते ही तुरंत निकट के पशु चिकित्सालय या औषधालय में सम्पर्क करें। एलोपैथी सहित आयुर्वेद और होम्योपैथी में भी इसका इलाज है। संक्रमित पशु 10 से 12 दिन में ठीक हो जाता है। प्रभावित गाय को गौमूत्र, गोबर और मट्ठा इन तीनों पदार्थों को पानी में मिला कर गाय को स्नान कराने से भी लाभ मिलता है। पानी पीने की नाँद में चूने की पुताई करें और पानी में सेंधा नमक मिलाएं। पानी में नीम की पत्तियाँ और थोड़ी पिसी हल्दी मिला कर उबालें और गुनगुना होने पर गाय को स्नान कराने से भी राहत मिलती है।
उन्होंने कहा कि पंचगव्य डॉक्टर एसोसिएशन चेन्नई के अनुसार 100 मिलीलीटर नीम तेल, 100 ग्राम पिसी हल्दी, 10 मि.ली. तुलसी पत्ता रस और 20 मि.ली. एलोवीरा का रस मिला कर बनाये गये पेस्ट को घाव पर लगाने से एक हफ्ते में रोगी गाय ठीक हो जाती है। पेस्ट के साथ एक मुठ्ठी तुलसी के पत्ते भी गाय को खिलाने चाहिये। होम्योपैथी चिकित्सक के अनुसार छोटी बछिया को दवा बेलाडोना-200 और बड़ी गाय को बेलाडोना-1000 जीभ पर 7-7 बूँदें दिन में 3 बार दी जा सकती है। यह दवा केले में डाल कर भी खिलाई जा सकती है। स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने पशुपालकों से कहा है कि चिकित्सा के पूर्व संबंधित चिकित्सक या वैद्य से परामर्श अवश्य लें।
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