Home Blog Page 686

आदिशक्ति कौन… और दुर्गा कौन?

0

डॉ. मधु धवन

शक्ति या ऊर्जा के बिना प्राणी निर्जीव है। संपूर्ण ब्रह्माïण्ड देवी का प्रतिबिम्ब है अथवा छायामात्र है। भौतिक पदार्थों एवं जीवों में शक्ति अर्थात्ï देवी द्वारा चेतना व प्राण का संचार होता है। अत: यही मुख्य कारण है कि शक्ति की साधना कर मानव अपना-अपना जीवन सफल बना सकता है।
भगवती मां के अनेक नाम और रूप हैं। वे जगत्जननी माहेश्वरी, अम्बा, जगदंबा हैं। मनुष्य क्या, देवता तक अपने कल्याण के लिए मां की वंदना करते हैं। वे पापों का विनाश करती हैं और अपने भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं।

देवी भागवतपुराण में ऐसा उल्लेख मिलता है कि एक बार नारदजी के मन में यह जानने की इच्छा बलवती हुई कि आखिर त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश किसकी उपासना-आराधना करते हैं। अपने मन को शांत करने के लिए नारद भगवान शिवशंकर के समक्ष जाकर नतमस्तक हुए। भगवान शंकर को प्रणाम कर थोड़ी देर उलझन में खड़े रहे कि कैसे अपने संशय का समाधान करें?

भगवान शंकर ने स्वयं ही पूछ लिया- क्या बात है नारद! तुम कुछ चिंतित एवं परेशान हो? नारद ने अपना सिर झुकाया, जय हो भोलेनाथ की जय हो। एक क्षण वे चुप रहकर बोले, प्रभु! भला मैं आपसे अपना मनोभाव प्रकट नहीं करूंगा तो किससे करूंगा। सच तो यही है  भगवान कि मैं यहां कैलाश धाम में, आपके समक्ष उपस्थित हुआ हूं।

कहो, नारद क्या जानना चाहते हो? भगवान शिव मुस्कराए प्रभु, मेरे मन में क्या जानने की इच्छा है यह आपसे छिपी नहीं है। आप त्रिकालदर्शी हैं और आपको सब पता है फिर भी आपकी आज्ञा है तो मैं निवेदन करता हूं।

नारद ने नारायण…नारायण….का उद्ïघोष किया, फिर अत्यन्त विनम्र भाव से कहा- भगवान! मैं यह जानना चाहता हूं कि आप, परमपिता ब्रह्मा तथा श्रीहरि विष्णु तीनों देव किसकी उपासना करते हैं? मुझे तो आप तीनों से बढ़कर कोई और देवता नहीं लगा, जिसकी आप सब उपासना-आराधना करते हैं?

भगवान शिव नारद की चतुराई पर एक क्षण तक मुस्कराते रहे, फिर सहज होकर बताने लगे- नारद! सूक्ष्म एवं स्थूल शरीर से परे जो महाप्राण आदिशक्ति है, वह स्वयं परब्रह्मï स्वरूप हैं। वह केवल अपनी इच्छामात्र से ही सृष्टिï की रचना, पालन एवं संहार करने में समर्थ हैं। वास्तव में वह निर्गुण स्वरूपा हैं परंतु धर्म की रक्षा तथा दुष्टो के विनाश हेतु समय-समय पर दुर्गा, काली, चण्डी, वैष्णो, सरस्वती, पार्वती के रूप धारण करती हैं। प्राय: यह भ्रम होता है कि यह देवी कौन है? और क्या यह परब्रह्म से भी बढ़कर है? स्वयं भगवती ने देवी भागवत पुराण में ब्रह्माजी के इन प्रश्नों का उत्तर दिया है

एक ही वास्तविकता है और वह है सत्य। मैं ही सत्य हूं। मैं न तो नर हूं, न नारी और न ही कोई ऐसा प्राणी हूं जो नर या मादा हो अथवा नर-मादा भी नहीं हूं। ऐसा भी कुछ नहीं हूं, परन्तु कोई वस्तु ऐसी नहीं है, जिसमें मैं विद्यमान नहीं हूं। मैं प्रत्येक भौतिक वस्तु और शरीर में शक्ति रूप में रहता हूं।

मैं संतुष्ट हुआ प्रभु! नारद ने प्रेमभाव से कहा और नारायण… नारायण… कहकर चल पड़े।
इसी महाशक्ति ने कहा है, सृष्टि से पहले मेरा, सिर्फ मेरा अस्तित्व था और कुछ नहीं था। मुझे ही चिंता मेघा, परब्रह्म जैसे अनेक नामों से जाना जाता है। मैं बुद्धि, विचार या किसी भी नाम या संकेत से परे हूं। मेरे समान कुछ नहीं है। मैं जन्म-मृत्यु या किसी अन्य परिवर्तन या रूपांतरण से परे हूं। माया मेरी अन्तर्भूत शक्ति है। जो न विद्यमान है और न ही अनुपस्थित। इसे इन दोनों अवस्थाओं में भी नहीं समझा जा सकता है।

श्री देवी भागवत पुराण में भगवान विष्णु ने यह स्वीकार किया है कि त्रिदेवों में से कोई भी स्वतंत्र नहीं है। वे सब जो कुछ भी कहते या करते हैं, वे सब महादेवी की इच्छा से करते तथा कहते हैं। तात्पर्य यह है कि यदि ब्रह्माïजी सृष्टिï की रचना करते हैं, विष्णु पालन करते हैं और भगवान भोलेनाथ संहार करते है, तो वे केवल यंत्र की भांति कार्यरत हैं, ठीक उसी प्रकार जैसे कोई मशीन अपना कार्य कर रही होती है। उस मशीन की संचालिका उस आदि पराशक्ति देवी मां के हाथ में है।

देवी माहात्म्य में दुर्गा महिषासुर मर्दिनी की उत्पत्ति का उल्लेख इस प्रकार आया है- देवताओं के राजा इन्द्र और असुरों के राजा महिषासुर के बीच महायुद्ध हुआ, जो सौ वर्षों तक चला। इस महायुद्ध में असुरों ने देवताओं की सेना को परास्त कर दिया और असुर महिष सभी देवताओं को जीतने के बाद स्वयं इंद्र बन बैठा।

तब पराजित देवगण परमपिता ब्रह्मा के नेतृत्व में श्रीहरि के पास गए और युद्ध एवं पराजय का रूप बताया। दैत्यराज को वरदान प्राप्त था कि उसकी मृत्यु किसी कुंवारी कन्या के हाथ से होगी। अत: देवताओं के सम्मिलित तेज से देवी को प्रकट करने का निश्चय किया गया।

सर्वप्रथम श्रीहरि विष्णु के मुख से महान ऊर्जा प्रस्फुटित हुई, जो पूर्ण रूप से तीव्र रोष का ही रूप थी। ऐसी ही ऊर्जा भगवान शिव और ब्रह्माï के मुख से तथा इन्द्र के शरीर से भी प्रस्फुटित हुई और अन्य देवों ने भी महान ऊर्जा का अंशदान दिया।

कहते हैं- शिव के तेज से देवी का मुख प्रकट हुआ, यमराज के तेज से देवी का वेश श्रीहरि के तेज से देवी की भुजाएं, चंद्रमा के तेज से स्तन, इन्द्र के तेज से कमर, वरुण के तेज से जंघा, पृथ्वी के तेज से नितम्ब, ब्रह्मïा के तेज से चरण, सूर्य के तेज से पैरों की उंगलियां, प्रजापति के तेज से समस्त दांत, अग्नि के तेज से दोनों नेत्र, संध्या के तेज से भौहें, वायु के तेज कान और इसी तरह अन्य देवताओं की शक्ति से भगवती के अन्य अंग बने।

भगवान शिव ने भगवती को आयु के रूप में अपना त्रिशूल दिया, लक्ष्मीजी ने कमल-पुष्प, श्रीहरि ने चक्र, अग्नि ने शक्ति तथा बाणों से भरा तरकस दिया। प्रजापति ने स्फुटिक मणियों की माला, वरुण ने दिव्य शंख, हनुमानजी ने गदा, शेषनाग ने मणियों से सुशोभित नाग, इन्द्र ने वज्र, वरुण देव ने पाश व तीर, ब्रह्मïजी ने चारों वेद तथा हिमालय ने सवारी के लिए सिंह प्रदान किया। समुद्र ने उज्ज्वल हार और कभी न फटनेवाला दिव्य वस्त्र, चूड़ामणि, कुण्डल, कंगन, नूपुर तथा अंगूठियां भेंट कीं। इन समस्त वस्तुओं को देवी ने अपनी अठारह भुजाओं में धारण किया।

स्वयं देवताओं के पूछने पर देवी ने अपना परिचय मैं ब्रह्म हूं कहकर दिया। मुझसे ही प्रकृति, पुरुष और शून्य-अशून्य जगत् है। मैं ही जानने योग्य आनंद और अनानंद हूं। मैं ही ब्रह्म और अब्रह्म हूं।

देवताओं की प्रार्थना पर दुर्गा मां ने दैत्यराज महिषासुर तथा उसके पराक्रमी असुरों का मर्दन नौ दिनों में कर देवताओं को अभय प्रदान किया। मां ने इस नौ दिन के युद्ध में नौ रूप धारण किए। नवरात्र का देवी उत्सव इन्हीं दिनों की स्मृति का, कल्याण का प्रतीक है। (विभूति फीचर्स)

वनप्लस ने वनप्‍लस ओपन का ग्‍लोबल लॉन्‍च किया

0
मुंबई : ग्लोबल टेक्‍नोलॉजी ब्रैंड वनप्लस ने आज अपने नए फोल्डिंग फ्‍लैगशिप स्मार्टफोन, वनप्लस ओपन के ग्लोबल लॉन्च की घोषणा की। अपनी कभी समझौता न करने की विशेषताओं के साथ वनप्लस का अपनी तरह का अनूठा, वनप्‍लस ओपन स्‍मार्टफोन फोल्डेबल फोन के मार्केट में हलचल मचाने के लिए तैयार है। यह फोन वनप्लस स्मार्ट फोन से मिलने वाला सहज अनुभव यूजर्स को देता है। इसमें फोल्ड के लिए हैजलब्लैड कैमरा है। नए अल्ट्रा-पोर्टेबल और फोल्डेबल डिजाइन के आधुनिक फोन में उपभोक्ताओं को बेमिसाल मनोरंजन का खजाना मिलता है।
     वन प्लस के प्रेसिडेंट और सीओओ  किंडर लियू ने कहा, “ओपन” शब्द केवल नए फोल्डिंग फोन के प्रकार का प्रतिनिधित्व करता है, पर इससे हमारी नए संभावनाओं को खोजने और मार्केट में मौजूद आधुनिक तकनीक को अपनाने की हमारी इच्छा भी सामने आती है। वनप्लस ओपन में नए डिजाइन के फोन के साथ उपभोक्ताओं को बेमिसाल हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर के नए-नए फीचर्स और इस नए फॉर्म फैक्टर के इर्द-गिर्द सर्विसेज मिलती हैं। हम वनप्लस ओपन फोन के फीचर्स में कोई समझौता न करने की विचारधारा पर कायम है। वनप्लस ओपन फोन की पेशकश के साथ हम दुनियाभर के उपभोक्ताओं को किसी भी फीचर्स के साथ समझौता न करने वाला प्रमुख फोल्डेबल अनुभव उपलब्ध कराकर बेहद उत्साहित हैं। वनप्लस ओपन वास्‍तव में एक प्रमुख फोन है, जो फोल्डेबल फोन के मार्केट में बड़ा बदलाव लाने के लिए तैयार है।”

मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के साथ मेरा पुराना नाता है-अनिल कपूर

0
मुंबई : देश के सबसे बड़े आभूषण ब्रांडों में से एक मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स ने बोरीवली में मुंबई का अपना 7वां स्टोर लॉन्च किया है. प्रसिद्ध अभिनेता एवं मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के ब्रांड एंबेसडर अनिल कपूर ने 21 अक्टूबर 2023 को मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के प्रबंधन के प्रमुख अधिकारियों व शुभचिंतकों की उपस्थिति में स्टोर का उद्घाटन किया.
    यह स्टोर वीर सावरकर गार्डन के पास एल.टी. रोड पर स्थित है. यह अत्याधुनिक स्टोर तीन मंजिलों में 10,000 वर्ग फुट से अधिक में फैला हुआ है. इसमें एक प्राइवेट लाउंज है, जो पर्सनलाइज्ड सेवाएं ऑफर करता है और उसमें दुल्हन के आभूषणों की खरीदारी के लिए एक वेडिंग एरीना है. स्टोर में 20,000 से अधिक डिजाइन प्रदर्शित किए गए हैं, जिनमें ब्राइडल, सॉलिटेयर, डायमंड और हल्के आभूषणों के शानदार संग्रह शामिल हैं. इसमें माइन डायमंड ज्वेलरी, एथनिक्स हैंडक्राफ्टेड डिजाइन, प्रीसिया जेमस्टोन कलेक्शन समेत मालाबार के कई प्रसिद्ध उप-ब्रांडों की बेजोड़ किस्मों को भी प्रदर्शित किया गया है.
    मालाबार ग्रुप के चेयरमैन एम.पी. अहमद ने स्टोर के लॉन्च पर कहा, “हमें मुंबई के सबसे व्यस्त सबअर्ब में से एक बोरीवली में अपना स्टोर लॉन्च करते हुए खुशी हो रही है. बोरीवली स्टोर मैक्सिमम सिटी मुंबई के साथ हमारे संबंधों को और मजबूत करेगा. यह स्टोर प्रभावशाली कलेक्शन रेंज, उचित मूल्य, लग्जरी इंटीरियर, शानदार माहौल और असाधारण ग्राहक सेवा के साथ शहर में आभूषण प्रेमियों को आकर्षित करेगा. बोरीवली स्टोर को ग्राहकों के आराम और उनकी सुविधा पर ध्यान केंद्रित करके डिजाइन किया गया है. मालाबार के लोकप्रिय उप-ब्रांडों को प्रदर्शित करने वाले स्पेशल सेक्शन के साथ सोच-समझकर तैयार किए गए इंटीरियर निश्चित रूप से स्टोर के अंदर के अनुभव को बेहतर बनाएंगे. स्टोर में अलग-अलग ग्राहकों की प्राथमिकताओं, अवसरों और बजट को पूरा करने वाले उत्कृष्ट डिजाइनों की एक अद्वितीय श्रृंखला है. मैं खरीदारी के विश्वस्तरीय अनुभव के लिए बोरीवली स्टोर में आने वाले सभी लोगों का स्वागत करता हूं.”
     प्रसिद्ध अभिनेता एवं मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के ब्रांड एंबेसडर अनिल कपूर ने कहा, “मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के साथ मेरा पुराना नाता है. उनके अद्भुत शिल्प कौशल व आभूषणों के उत्कृष्ट संग्रह, व्यापार के पारदर्शी तरीकों व नीतियों और ग्राहकों पर केंद्रित दृष्टिकोण ने उन्हें भारत और भारत से बाहर आभूषण के खुदरा बाजारों में एक अग्रणी नाम बना दिया है. मेरे होम टाउन में उनका स्टोर खुलना निश्चित रूप से मेरे लिए एक विशेष क्षण है. मैं सभी से मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के बोरीवली स्टोर में विश्व स्तरीय खरीदारी अनुभव का आनंद लेने का आग्रह करता हूं.”

भारत के हर कोने तक पहुंची ‘हुनर

0
मुंबई : महिलाओं को कौशल-निर्माण और उद्यमशीलता के अवसर प्रदान करने के लिए समर्पित अग्रणी स्किलटेक प्लेटफॉर्म, हुनर ऑनलाइन कोर्सेस ने भारत में महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया है। मुंबई में आयोजित किए गए एक कार्यक्रम में हुनर ऑनलाइन कोर्सेस ने निवेशक सुश्री शिल्पा शेट्टी कुंद्रा के साथ 28 राज्यों में 55,000 से अधिक महिला उद्यमियों को तैयार करने की एवं भारत के हर कोने तक पहुंचने की अपनी यात्रा की ख़ुशी मनाई। इस अवसर पर प्रेरक ब्रांड फिल्मों का वर्ल्ड प्रीमियर आयोजित किया गया था। इन फिल्मों में दृढ़निश्चयी भारतीय महिलाओं की वास्तविक जीवन की कहानियां बताई गयी हैं, जिन्होंने चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी आंतरिक शक्ति और कौशल का उपयोग करते हुए उल्लेखनीय सफलता हासिल की हैं। इन फिल्मों में जीवन यात्रा को स्क्रीन पर लाते हुए काव्यात्मक और लयबद्ध शैली का उपयोग किया गया है।
     सभी 28 राज्यों के 6000+ कस्बों की 30 लाख से अधिक महिलाओं में गृहिणी, युवा छात्र और कामकाजी महिलाएं शामिल हैं, उनमें से 30% महिलाएं पहले से ही सरकार द्वारा प्रमाणित फैशन, फ़ूड और ब्यूटी कौशल सीखने के बाद सफलतापूर्वक अपना खुद का व्यवसाय चला रही हैं। हुनर ऑनलाइन कोर्सेस ने महिला उद्यमियों के साथ आगे बढ़ते हुए राष्ट्र के निर्माण के अपने दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए अपने निवेशक और ब्रांड एंबेसडर के रूप में शिल्पा शेट्टी कुंद्रा के साथ हाथ मिलाया है।
    हुनर ऑनलाइन कोर्सेस की सीईओ निष्ठा योगेश ने कहा, “कौशल अधिग्रहण के माध्यम से महिलाओं की उन्नति के हमारे मिशन में शामिल होने के लिए हम अपनी निवेशक और भागीदार, शिल्पा शेट्टी कुंद्रा, हमारी गुरु, नीता लुल्ला और सभी उपस्थित लोगों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं। आज का कार्यक्रम कौशल शिक्षा और सशक्तिकरण की परिवर्तनकारी शक्ति का प्रतीक है, जो देश भर में महिलाओं के लिए उज्जवल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है और हमारे समाज की आकांक्षाओं को आवाज देता है। मुझे खुशी है कि हम, एक देश के रूप में, महिलाओं की शक्ति का समर्थन करते हैं, लेकिन हमें अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना है। उद्यमशीलता के अवसरों के साथ महिलाओं को शिक्षित करने, समर्थन करने और सशक्त बनाने में निवेश करने की हुनर की प्रतिबद्धता भारत की महिलाओं की शक्ति का उपयोग करेगी और अर्थव्यवस्था में अद्वितीय परिवर्तन लेकर आएगी!”
     प्रेरक ब्रांड की फिल्मों में दिखाया गया कि कैसे इन महिलाओं ने अपने जीवन भर के सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में पहला कदम उठाया, हर दिन सीखा और अपना नाम और नई पहचान बनाई। फिल्मों का नरेशन शिल्पा शेट्टी कुंद्रा द्वारा किया गया है, जिनकी अपनी यात्रा भी इन्हीं महिलाओं की तरह प्रेरक है। अपने काव्यात्मक आवाज़ का उपयोग करते हुए शिल्पा जी कौशल की ताकत में अपने दृढ़ विश्वास को दोहराती है। हुनर की सभी ब्रांड फिल्मों का उद्देश्य देश भर में महिलाओं को प्रेरित करना है; यह फ़िल्में कहती हैं कि खुद पर विश्वास रखें और हुनर के समर्थन से वित्तीय स्वतंत्रता और सम्मान की दिशा में आगे बढ़ें।
     महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बना यह कार्यक्रम, हुनर के छात्रों के वीडियो टेस्टीमोनियल्स की एक मर्मस्पर्शी श्रृंखला के साथ समाप्त हुआ, जिसमें उनकी परिवर्तनकारी यात्राओं को दिखाया गया। ये कहानियां भारतीय महिलाओं पर पड़ने वाले प्रभाव की एक शक्तिशाली याद के रूप में, उन्हें अपने सपनों को हासिल करने में मदद करती रहेंगी।

37वें राष्ट्रीय खेल में उत्तराखण्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को मुख्यमंत्री धामी ने फ्लैग ऑफ कर किया रवाना।

0
देहरादून 23अक्टूबर 2023, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन, मुख्यमंत्री आवास, देहरादून में आगामी 37वें राष्ट्रीय खेल, गोवा में उत्तराखण्ड राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों के दल को फ्लैग ऑफ कर रवाना किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 37वें राष्ट्रीय खेल में राज्य की ओर से प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ियों को खेल किट/ ट्रैक सूट वितरण कर शुभकामनाएं प्रेषित की।
मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी खिलाड़ी अपने मनोबल एवं लगन से राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्तराखंड का नाम रोशन करेंगे। राष्ट्रीय खेलों में खिलाड़ी अपनी कुशल खेल प्रतिभा के बल पर देवभूमि का नाम अवश्य रोशन करेंगे। उन्होंने कहा इस वर्ष खेल विधाओं एवं खिलाड़ियों की संख्या में वृद्धि हुई है। राज्य में खेल संस्कृति का निरंतर विकास हो रहा है। राज्य सरकार भी राज्य में खेल संस्कृति विकसित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में प्रतिभा को बढ़ाए जाने के मकसद से खेल प्रतिभाशाली और उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए खेल छात्रवृत्ति देने का कार्य जारी है। उन्होंने कहा राज्य में खेल और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन हेतु “नई खेल नीति’’ लाई गई है। खिलाड़ियों को जमीनी स्तर से खेल क्षेत्र में रूचि लाने हेतु 14 से 23 वर्ष तक के खिलाड़ियों को ’’मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना’’ के अंतर्गत 2000 प्रति माह छात्रवृत्ति एवं 10 हजार रुपए प्रति वर्ष संबंधति खेलों हेतु किट खरीदने के लिए दिए जा रहे है। ’’मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना’’ में 08 से 14 वर्ष के उभरते खिलाड़ियों को 1500 रूपये प्रतिमाह की खेल छात्रवृत्ति दी जा रही है। साथ ही खिलाड़ियों को नियमानुसार त्वरित वित्तीय लाभ दिये जाने हेतु ” मुख्यमंत्री खेल विकास निधि’ की स्थापना भी की गयी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने पिथौरागढ़ दौरे के दौरान प्रदेश के प्रत्येक खिलाड़ी का मान बढ़ाया है। राज्य सरकार ने खिलाड़ियों के प्रतियोगिता एवं प्रशिक्षण शिविरों में यात्रा के दौरान दुर्घटना होने पर आर्थिक सहायता की व्यवस्था की है। प्रदेश सरकार विश्वविद्यालयों में व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु 5 प्रतिशत र्स्पोट्स कोटे की व्यवस्था करने के लिये नियमावली बनाने जा रही है। निजी खेल क्षेत्रों के माध्यम से खेल अवस्थापना सुविधाओं के निर्माण हेतु अनुदान दिये जाने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा राज्याधीन सेवाओं में सेवायोजन के लिए 4 प्रतिशत खेल कोटे को पुनः लागू किये जाने की कार्यवाही भी की जायेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी खिलाड़ी दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ भरपूर मेहनत एवं’ विकल्प रहित संकल्प’ के मूल मंत्र को अपनाकर अपने लक्ष्य निर्धारित करें और उस लक्ष्य को पाने के लिए जी जान से जुट जाएं। राज्य सरकार भी आपके साथ हर कदम पर खड़ी है।
खेल मंत्री श्रीमती रेखा आर्या ने सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि खिलाड़ियों के बीच आकर स्वयं को गौरवान्वित एवं ऊर्जावान महसूस कर रही हूं। उन्होंने कहा बदलते समय के साथ लोगों का खेल के प्रति नजरिया भी बदला है। उत्तराखंड खेल के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी के संकल्प अनुसार खेल के क्षेत्र में निरंतर प्रगति हुई है। प्रदेश में खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किए जाने हेतु छात्रवृत्ति भी प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा राज्य सरकार ने खिलाड़ियों का सरकारी सेवा में रास्ता खोला है। आज खिलाड़ियों के वर्तमान के साथ भविष्य भी बनाने का कार्य जारी है।
विशेष प्रमुख सचिव श्री अभिनव कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय खेलों में इस बार राज्य की ओर से 240 सदस्यीय टीम प्रतिभाग कर रही है। जिसमें 177 खिलाड़ियों के साथ 63 टीम ऑफिशियल्स हैं और यह टीम 25 खेल विधाओं में प्रतिभाग करेगी। उन्होंने खिलाडियों को आगामी खेल हेतु शुभकामनाएं दी।
इस दौरान कार्यक्रम में उत्तराचंल ओलंपिक एसोसिएशन संघ के अध्यक्ष निर्मान मुखर्जी, महासचिव डॉ. डी.के सिंह, निदेशक खेल जितेंद्र कुमार सोनकर, डॉ. अलकनंदा अशोक एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

केंद्र ने राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड का किया गठन, 2030 तक हल्दी निर्यात 1 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य

0

21अक्टूबर 2023, नई दिल्ली: केंद्र ने राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड का किया गठन, 2030 तक हल्दी निर्यात 1 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य – भारत सरकार ने अधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड के गठन की घोषणा की हैं। यह बोर्ड देश में हल्दी और उससे संबंधित उत्पादों के विकास और विस्तार पर ध्यान केंद्रित करेगा। भारत में हल्दी की खेती मुख्य रूप से महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में की जाती है।

भारत हल्दी का सबसे बड़ा उत्पादक
भारत विश्व में हल्दी का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक है। वर्ष 2022-23 में 11.61 लाख टन (वैश्विक हल्दी उत्पादन का 75 प्रतिशत से अधिक) के उत्पादन के साथ भारत में 3.24 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हल्दी की खेती की गई थी। भारत में हल्दी की 30 से अधिक किस्में उगाई जाती हैं और यह देश के 20 से अधिक राज्यों में उगाई जाती है। हल्दी के सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु हैं।

2030 तक 1 बिलियन डॉलर तक निर्यात का लक्ष्य
हल्दी के विश्व व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 62 प्रतिशत से अधिक है। 2022-23 के दौरान, 380 से अधिक निर्यातकों द्वारा 207.45 मिलियन डालर मूल्य के 1.534 लाख टन हल्दी और हल्दी उत्पादों का निर्यात किया गया था। भारतीय हल्दी के लिए प्रमुख निर्यात बाजार बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और मलेशिया हैं। बोर्ड की केंद्रित गतिविधियों से यह उम्मीद की जाती है कि 2030 तक हल्दी निर्यात 1 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा।

कौन होगा सदस्य
राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष, आयुष मंत्रालय, केंद्र सरकार के फार्मास्यूटिकल्स, कृषि मंत्रालय, वाणिज्य और उद्योग विभाग, तीन राज्यों के वरिष्ठ राज्य सरकार के प्रतिनिधि (रोटेशन के आधार पर), अनुसंधान में शामिल राष्ट्रीय/राज्य संस्थानों, चुनिंदा हल्दी किसानों और निर्यातकों के प्रतिनिधि होंगे, बोर्ड के सचिव की नियुक्ति वाणिज्य विभाग द्वारा की जाएगी।

राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड हल्दी से संबंधित मामलों में नेतृत्व प्रदान करेगा, प्रयासों को मजबूत बनाएगा तथा हल्दी क्षेत्र के विकास और वृद्धि में मसाला बोर्ड और अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ अधिक समन्वय की सुविधा प्रदान करेगा।

बोर्ड के उद्देश्य
हल्दी के नए उत्पाद विकास और मूल्य वर्धन को बढ़ावा देना।

अंतराष्ट्रीय बाजारों में हल्दी और हल्दी के उत्पादों की जागरूकता और खपत को बढ़ावा देना। अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करना

हल्दी के मूल्य वर्धित उत्पादों के विकास के लिए संभावित अंतरार्ष्ट्रीय बाजारों में बाजार अनुसंधान की सुविधा प्रदान करना।

गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करना .

हल्दी की संभाल और संभावनाओं को बनाने और अधिकतम करने का काम करना.

केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फ़ेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NCCF) के निदेशक मंडल को संबोधित किया

0

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फ़ेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NCCF) के निदेशक मंडल को संबोधित किया। श्री अमित शाह ने कहा कि NCCF को वर्ष 2027-28 तक 50 हजार करोड़ रुपये का टर्नओवर प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनना चाहिये। उन्होंने कहा कि NCCF को देश भर की प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) और अन्य सहकारी संस्थाओं को अपना सदस्य बनाने पर जोर देना चाहिये जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि NCCF की अंश पूंजी में सहकारिता का अनुपात अपेक्षाकृत अधिक हो। केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि इसके लिये NCCF को अपना बिज़नेस प्लान डेवलप करने तथा बिज़नेस एप्रोच में बदलाव लाना होगा।

 

केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विज़न को पूरा करने में NCCF महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, अपने गठन के बाद से, सहकारिता मंत्रालय ने देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने और GDP में सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए पिछले 26 महीनों में 52 पहल की हैं।

श्री अमित शाह ने कहा कि NCCF को आत्मनिर्भर सहकारी संस्था बनने के लिए अगले 10 वर्ष का एक रोडमैप बनाना चाहिए। उन्होने कहा कि इसे क्रियान्वित करने में सहकारिता मंत्रालय अपना पूर्ण सहयोग दे सकता हैं। केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने NCCF द्वारा अपनी सहयोगी कंपनियों के साथ इथेनॉल के उत्पादन के लिये गुजरात, बिहार और अन्य राज्यों के किसानों से मक्के की खरीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष ज़ोर दिया।

 

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि अगर एनसीसीएफ और नेफेड चाहे तो सहकारिता मंत्रालय के सहयोग से राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (NIC) से डिजिटल प्लेटफार्म पर अपना एक कॉमन ऐप तैयार करवा सकते हैं और इस कॉमन ऐप के माध्यम से सामंजस्य स्थापित कर मक्के की खरीदारी की जा सकती हैं। श्री शाह ने NCCF द्वारा किसानों से दलहन की खरीदारी कर निर्यात के अवसर तलाशने और इस खरीद को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने एग्रेसिव एक्सटेंशन और मार्केटिंग अपनाने, किसानो को पूर्व में आश्वासन देकर खरीद करने तथा कॉमन कलेक्शन सेंटर बनाए जाने पर भी ज़ोर दिया।

श्री अमित शाह ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि NCCF प्याज एवं दालों की खरीद के लिये पैक्स के साथ संबद्ध हो सकता है, ताकि सहकारिता के क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी भंडारण योजना के तहत इसके भंडारण की व्यवस्था बनाई जा सके। उन्होंने कृषि उत्पादों में निर्यात के अवसर और चावल की खरीदारी कर राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NECL) द्वारा उसे निर्यात करने के अवसर तलाशने को भी कहा।

NCCF के चेयरमैन श्री विशाल सिंह ने आश्वस्त किया कि वे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता द्वारा सुझाये गए लक्ष्यों को पूर्ण करेंगे। निदेशक मंडल की बैठक में सहकारिता मंत्रालय के सचिव श्री ज्ञानेश कुमार और NCCF के प्रबंध निदेशक एनिस जोसेफ चंद्र भी शामिल हुए।

किसानों के लाभ के लिए मोदी सरकार ने फिर बढ़ाई एमएसपी – श्री तोमर

0
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा विपणन सीजन 2024-25 के लिए सभी अनिवार्य रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि को मंजूरी दे दी गई। इसका स्वागत कर प्रधानमंत्री श्री मोदी को किसानों की ओर से धन्यवाद देते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि मोदी सरकार के इस फैसले ने किसान कल्याण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को फिर सिद्ध किया है। मोदी सरकार ने किसानों की भलाई के लिए गत 9 साल से ज्यादा के समय में एक के बाद एक अनेक कल्याणकारी निर्णय लिए हैं, कई योजनाएं-कार्यक्रम सृजित किए, जिनका बेहतर क्रियान्वयन भी हो रहा है।
केंद्र सरकार ने विपणन सीजन 2024-25 के लिए रबी फसलों के एमएसपी में वृद्धि की है, ताकि उत्पादक किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जा सकें। एमएसपी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दाल (मसूर) के लिए 425 रुपये प्रति क्विंटल, रेपसीड-सरसों हेतु 200 रु. प्रति क्विंटल की मंजूरी दी गई है। गेहूं व कुसुम, हरेक के लिए 150 रु. प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। जौ व चने के लिए क्रमश: 115 रु. प्रति क्विंटल और 105 रु. प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। विपणन सीजन 2024-25 के लिए अनिवार्य रबी फसलों की एमएसपी में वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 की घोषणा के अनुरूप है, जिसमें एमएसपी को अ.भा. भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर निर्धारित करने की बात कही गई थी। अ.भा. भारित औसत उत्पादन लागत पर अपेक्षित लाभ गेहूं के लिए 102 प्रतिशत; रेपसीड-सरसों के लिए 98 प्रतिशत; दाल के लिए 89 प्रतिशत; चने के लिए 60 प्रतिशत; जौ के लिए 60 प्रतिशत व कुसुम के लिए 52 प्रतिशत है। रबी फसलों की इस बढ़ी हुई एमएसपी से किसानों के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित होगा और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन भी मिलेगा।
सरकार खाद्य सुरक्षा बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने व आयात पर निर्भरता कम करने के लिए तिलहन, दलहन और श्रीअन्न/मोटे अनाजों की ऊपज बढ़ाने के क्रम में फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रही है। मूल्य नीति के अलावा, सरकार ने वित्तीय सहायता प्रदान करने व तिलहन व दलहन की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने हेतु गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम), प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) और राष्ट्रीय तिलहन और ऑयल पाम मिशन (एनएमओओपी) जैसी विभिन्न पहलें की हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि व 10 हजार नए एफपीओ बनाने की महत्वपूर्ण योजनाओं से भी किसानों को सीधा फायदा पहुंच रहा है। इसके अतिरिक्त, देशभर में हरेक किसान तक किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना का लाभ पहुंचाने हेतु सरकार ने किसान ऋण पोर्टल (केआरपी), केसीसी घर-घर अभियान और मौसम सूचना नेटवर्क डेटा प्रणाली (विंड्स) का शुभारंभ किया है। विंड्स का उद्देश्य किसानों को अपनी फसल के संबंध में निर्णय लेने में सशक्त बनाने के लिए मौसम की समय पर व सटीक जानकारी प्रदान करना है। इन पहलों का लक्ष्य कृषि में क्रांति लाना, वित्तीय समावेश का विस्तार करना, डेटा उपयोग को अधिकतम करना व किसानों के जीवन को बेहतर बनाना है।
उल्लेखनीय है कि विपणन सीजन 2024-25 के लिए सभी रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया है , जो इस प्रकार है- गेहूं -2275 , जौ- 1850 , चना -5440 , दाल ( मसूर ) – 6425 , रेपसीड एवं सरसों -5650 और कुसुम -5800 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

जानिए खिलारी गाय की विशेषतांए, उत्पत्ति व उपयोग

0
भारत में गाय का पालन कई वर्षों से चलता आ रहा हैं। किसान कई सदियों से खेती के साथ गायो को भी पाल रहे हैं। भारत में गाय की बहुत सारी देसी नस्लें हैं, जिनकी सबकी अपनी-अपनी खासियत होती हैं। इनमें से आपने विभिन्न प्रजातियों की गायो को देखा होगा और कुछ के बारें सुना भी होगा, इन्हीं में शामिल हैं एक खिलारी गाय, जो पश्चिमी महाराष्ट्र में पायी जाती है।
इस नस्ल को मंदेशी या शिकारी या थिल्लर के नाम से भी जाना जाता है। इस नस्ल का मूल स्थान महाराष्ट्र और कर्नाटक के जिले हैं और यह पश्चिमी महाराष्ट्र में पायी जाती है। इस नस्ल का नाम खिलार शब्द से लिया गया है, जिसका मतलब है पशुओं का झुंड।
खिलारी गाय की विशेषताएँ
शरीरः खिलारी मवेशी छोटे आकार के जानवर हैं। इनका शरीर बेलनाकार होता हैं और कमर पर छोटा सा कूबड़ निकला होता हैं।
शरीर का रंगः ये सभी किस्में रंग-रूप में काफी भिन्न होती हैं। दक्कन के पठार की खिल्लारी गाय भरे-सफेद रंग की होती हैं। नर मवेशी के आगे और पीछे का हिस्सा गहरे रंग का होता हैं। इसके अलावा यह मवेशी मुख्य रूप से स्लेटी-सफेद रंग की होती हैं।
सिर व सींगः खिलारी नस्ल की गायो के अंग मजबूत होते हैं। इनके सींग लंबे, सिंर तंग, खाल हल्की (पतली) और छोटे कान होते हैं।
वजनः इस नस्ल के नर का औसतन भार 450 किलो और मादा गाय का औसतन भार 360 किलो होता है। इसके दूध की वसा लगभग 4.2 प्रतिशत होती है। यह नस्ल एक दिन में औसतन 240-515 किलो दूध देती है।
खिलारी गाय की मुख्य पहचान
ये सभी किस्में रंग-रूप में काफी भिन्न हैं। दक्कन के पठार की खिल्लरी, म्हसवद और अटपाडी महल प्रकार भूरे सफेद रंग के होते हैं, नर के अग्रभाग और पिछले भाग पर गहरा रंग होता है, चेहरे पर अजीब भूरे और सफेद धब्बे होते हैं। खिल्लारी मवेशी छोटे आकार के जानवर हैं।
खिलारी गाय का शरीर बेलनाकार होता हैं।
खिलारी मवेशी की कमर पर छोटा सा कूबड़ निकला होता हैं।
खिलारी मवेशी के सींग लंबे और सिर तंग होता हैं।
खिलारी गाय के उपयोग
खिलारी मवेशियों का उपयोग मुख्य रूप से भारवाहक पशु के रूप में किया जाता है। इस नस्ल की गायें अच्छी दूध देने वाली नहीं हैं और लाभदायक दूध उत्पादन के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

सिरीशा भगवातुला और रिदम रोहिन ने गाया रोमांटिक गीत

0

मुम्बई। सिंगल गानों की डिमांड हमेशा से म्यूजिक लवर के लिस्ट में ऊपर रही है और बड़े पैमाने पर सोलो गाने हिट भी हो रहे हैं। हाल ही में प्रसिद्ध संगीतकार शिखर संतोष ने एक रोमांटिक सांग बनाया है जिसे खूबसूरत आवाज़ में गाया है सिरीशा भगवातुला और रिदम रोहिन ने।
रिदम रोहिन की बात करें तो वे अमेरिका में रहते हैं और उन्होंने प्रसिद्ध म्यूज़िक इंस्टिट्यूट कॉलेज ऑफ कंटेम्पररी म्यूजिक इन हॉलीवुड से गायन की शिक्षा ली है। सिरीशा ने हाल में ‘घोड़े पे होके सवार… गीत गाकर रातों रात सुर्ख़ियाँ बँटोरी हैं यह गाना लोगों के बीच काफ़ी पसंद किया जा रहा है।
लता मंगेशकर के साथ काम कर चुके संगीतकार शिखर संतोष ने सिरीशा और रिदम रोहिन की बेहतरीन आवाज़ में जब नया गाना रिकॉर्ड किया तो स्टूडियो में बैठे लोग झूम उठे। स्वयं सिरीशा और रिदम को लगता है कि यह मेलोडी गाना लोगों को बेहद पसंद आएगा। इस गाने को प्रसिद्ध गीतकार असलम साहनी ने लिखा है जबकि म्यूज़िक अरेंजर रिकेश गुरुंग हैं। इस गाने का वीडियो निर्देशन भूषण दहाल करने वाले हैं।

शिखर संतोष ने बताया कि गाने के वीडियो में टीवी जगत के चर्चित चेहरों को लिया जाएगा और इसका म्यूज़िक टी सीरिज़ के साथ रिलीज़ किया जाएगा।