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विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की जरूरत-उपराष्ट्रपति

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New Delhi – उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने आज विकास और संरक्षण के बीच एक नाजुक संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि हमारे नागरिकों की विकास आवश्यकताओं को पूरा करते हुए हमारे जंगल फलते-फूलते रहें। यह देखते हुए कि वन हमारे लाखों नागरिकों, विशेषकर आदिवासी समुदायों की जीवन रेखा हैं, उन्होंने रेखांकित किया कि  हालांकि वनों का संरक्षण, महत्वपूर्ण है तथापि वन संसाधनों पर निर्भर समुदायों को उन से अलग नहीं किया जा सकता है।
देहरादून में वन अनुसंधान संस्थान में वनों पर संयुक्त राष्ट्र मंच – भारत द्वारा देश के नेतृत्व वाली पहल के समापन समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पृथ्वी हमारी नहीं है, और हमें इसे आने वाली पीढ़ियों को सौंपना होगा। जैव विविधता के पोषण और संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि हम केवल इसके ट्रस्टी हैं, और हम अपने लापरवाह दृष्टिकोण और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के साथ अपनी भावी पीढ़ियों के साथ समझौता नहीं कर सकते।
 अपने संबोधन में, उपराष्ट्रपति ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सतत विकास और जलवायु परिवर्तन पर काबू पाना सुरक्षित भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। भावी चुनौतियाँ के प्रति लोगों को आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि यदि विकास टिकाऊ नहीं है तो पृथ्वी पर जीवित रहना मुश्किल होगा।
यह देखते हुए कि हम जिस जलवायु चुनौती का सामना कर रहे हैं, वह किसी व्यक्ति को प्रभावित नहीं करेगी, बल्कि यह पूरी पृथ्वी को प्रभावित करेगी, श्री धनखड़ ने समाधान खोजने के लिए सभी संसाधन जुटाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “कोविड की तरह, जो दुनिया के लिए एक चुनौती थी, जलवायु परिवर्तन कोविड चुनौती से कहीं अधिक गंभीर है।”
उपराष्ट्रपति ने पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए समन्वित वैश्विक रुख को एकमात्र विकल्प बताते हुए कहा कि “एक देश इसका समाधान नहीं ढूंढ सकता है । समाधान खोजने के लिए युद्धस्तर पर सभी देशों को एकजुट होना होगा।”
यह उल्लेख करते हुए कि वन एक कार्बन सिंक प्रदान करते हैं जो हर साल 2.4 बिलियन मीट्रिक टन कार्बन को अवशोषित करता है, उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि हम सभी को यह महसूस करने की आवश्यकता है कि वन ही जलवायु परिवर्तन का एक मात्र समाधान हैं। उन्होंने कहा, “हमारे वन केवल एक संसाधन मात्र नहीं हैं बल्कि देश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक विरासत को भी समाहित करते हैं।”

यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कि गाँव के चरागाहों और तालाबों का कायाकल्प और पोषण हो, जो गाँव के जीवन और मवेशियों के लिए आवश्यक हैं, श्री धनखड़ ने इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर ग्रामीण जनता के बीच जागरूकता पैदा करने का आह्वान किया। उन्होंने अमृत काल में अमृत सरोवर योजना के प्रभावी कार्यान्वयन पर भी प्रसन्नता व्यक्त की.

वैश्विक क्षेत्र में ऊर्जा हथियार के रूप में उपयोग करने का एक तरीका बन गया है, श्री धनखड़ ने स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की दिशा में भारत द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों को रेखांकित किया। स्वच्छ ऊर्जा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि 2030 तक हमारी आधी बिजली नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न होगी।
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को एक दूरदर्शी पहल बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह उद्यमियों के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करता है और जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण की चुनौतियों का भी ध्यान रखता है।
‘अमृतकाल’ को ‘गौरवकाल’ के रूप में बताते हुए श्री धनखड़ ने कहा कि दुनिया हमारी अभूतपूर्व वृद्धि से स्तब्ध है। “2022 में यूके और फ्रांस को पछाड़कर भारत पांचवीं सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बन गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस दशक के अंत तक यानी 2030 तक जापान और जर्मनी के को पीछे छोड़ते हुए भारत तीसरी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बन जाएगा  यह  विकास भारत पर उन वैश्विक मुद्दों से निपटने के लिए बड़ा दायित्व लाता है जिनका दुनिया सामना कर रही है।
जंगलों में लगने वाली आग के बारे में बात करते हुए, वीपी ने कहा कि तकनीकी प्रगति के बावजूद, विकसित देश भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए बहुस्तरीय दृष्टिकोण को अपनाने का आह्वान करते हुए, उन्होंने जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं को कम करने के लिए कुछ कदमों के रूप में प्रौद्योगिकी, के प्रति जागरूकता बढाने को कहा।

उत्तराखंड के दो दिवसीय दौरे पर आए उपराष्ट्रपति ने इससे पहले गंगोत्री , केदारनाथ और बद्रीनाथ का दौरा किया । अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा, “जब से मैं और मेरी पत्नी कल देवभूमि में उतरे हैं तब से दिव्यता, उदात्तता, शांति और मनोरम वातावरण का अनुभव हुआ है।”
गंगोत्री , केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्राएँ उनकी यादों में हमेशा बनी रहेंगी, उपराष्ट्रपति ने कहा, “ये दिव्य स्थान हमारी सभ्यता के लोकाचार और सार को प्रतिबिंबित करते हैं। कई महान लोगों ने शांति और खुशी पाने के लिए इन पवित्र और पूजनीय स्थलों पर आकर इनका लाभ उठाया।

उत्तराखंड के राज्यपाल, लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, वन महानिदेशक, श्री चंद्र प्रकाश गोयल, निदेशक, यूनिसेफ सुश्री जूलियट बियाओ कॉडेनौक पो , अतिरिक्त महानिदेशक वन, महानिदेशक, आईसीएफआरई, श्री बिवाश रंजन ,श्री भरत ज्योति, और विभिन्न देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के सम्मानित प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

Govardhan Puja 2023, श्रीकृष्ण-गाय-गोवर्धन पर्वत की पूजा का विशेष महत्व

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Govardhan Puja 2023 Kab Hai: दिवाली का त्योहार कार्तिक अमावस्या पर मनाया जाता है और इसके अगले दिन यानि कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाते हैं, इसी दिन अन्नकूट भी होता है. गोवर्धन पूजा का पर्व वैसे तो पूरे भारत में मनाया जाता है, लेकिन ब्रज क्षेत्र में इसकी खास रौनक रहती है. गोवर्धन पूजा में घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन बनाकर पूजा की जाती है. इस पर्व का श्रीकृष्ण से भी खास संबंध है. आइए जानते हैं साल 2023 में गोवर्धन पूजा की डेट, पूजा मुहूर्त और महत्व
गोवर्धन पूजा 2023 डेट (Govardhan Puja 2023 Date)
इस साल गोवर्धन पूजा 14 नवंबर 2023, मंगलवार को है. इसी दिन भाई दूज भी है. गोवर्धन पूजा को प्रकृति की पूजा भी कहा जाता है जिसकी शुरुआत खुद भगवान श्री कृष्ण ने की थी. इस दिन प्रकृति के आधार पर्वत के रूप में गोवर्धन पर्वत की पूजा किए जाने का विधान है. साथ ही शुभ मुहूर्त में गायों की पूजा भी की जाती है.
गोवर्धन पूजा 2023 मुहूर्त (Govardhan Puja 2023 Muhurat)
पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रपिपदा तिथि की शुरुआत 13 नवंबर 2023 को दोपहर 02 बजकर 56 मिनट पर होगी और अगले दिन 14 नवंबर 2023 को दोपहर 02 बजकर 36 मिनट पर इसका समापन होगा.
गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त – सुबह 06:43 – सुबह 08:52 (14 नवंबर 2023)
अवधि – 2 घंटे 09 मिनट
गोवर्धन पूजा महत्व (Govardhan Puja Significance)
गोवर्धन पूजा में गौ यानि गायों की पूजा की जाती है. हिंदू धर्म में गायों को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा गया है. इसमें 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना गया है. कहते हैं जो लोग गोवर्धन पूजा के दिन गाय की उपासना करते हैं उन्हें मां लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद मिलता है. मां लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृद्धि प्रदान करती हैं, उसी प्रकार गौमाता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं. गौ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए ही इस दिन का विशेष महत्व है.
क्यों होती है गोवर्धन पर्वत की पूजा (Lord Krishna and Govardhan Parvat Puja)
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार बृज में बहुत अधिक वर्षा होने के कारण पूरे गांव डूब की कगार पर आ गया था. तब श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था. पर्वत के नीचे सभी बृजवासी, पशु-पक्षी अपने प्राण बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत की शरण में आ गए थे. गोवर्धन पर्वत और श्रीकृष्ण की कृपा से गांव वासी बड़े संकट से बच गए, यही वजह है कि इस दिन से गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की परंपरा शुरू हुई.

UP की महिला पुलिस टीम ने गौ-तस्कर इनामुल का किया एनकाउंटर, पैर में लगी गोली: नारी शक्ति का किया गया सम्मान

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस-प्रशासन को अपराधियों से सख्ती से निपटने के आदेश दिए हैं। इसके बाद कई अपराधियों ने आत्मसमर्पण कर दिए। पकड़ने के क्रम में जिन्होंने पलटवार किया, उन्हें पुलिस ने ढेर भी कर दिया। इस बीच, कुशीनगर में ऐसा पहली बार हुआ, जो अब तक नहीं हुआ था। यहाँ महिला पुलिस की टीम ने एक गौ-तस्कर का एनकाउंटर कर उसे पकड़ लिया। गौ-तस्कर का नाम इनामुल उर्फ बिहारी है। उस पर 25 हजार रुपए का ईनाम भी घोषित था।

मामला कुशीनगर के रामकोला थाना इलाके का है। बरवापट्टी थाने की महिला SHO सुमन सिंह के नेतृत्व में टीम ने एनकाउंटर को अंजाम दिया। यह एनकाउंटर बीते गुरुवार (19 अक्टूबर 2023) की रात को हुआ, जब पूरा देश नारी शक्ति की पूजा का त्योहार नवरात्रि मना रहा था। अपराधियों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत मेहदीगंज अमडरिया नगर के पास चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसमें थाना कोतवाली, पडरौना, रामकोला, बरवापट्टी, खड्डा, कप्तानगंज और स्वाट की टीमें संयुक्त रूप से शामिल थीं।

इस दौरान एक व्यक्ति बाइक से आता हुआ दिखाई दिया। पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया, लेकिन उस व्यक्ति ने पुलिस पर ही गोली चला दी। इसके बाद महिला पुलिसकर्मियों की टीम ने मोर्चा संभाल लिया और इनामुल को एनकाउंटर में घायल कर गिरफ्तार कर लिया। जाँच में पता चला कि इनामुल 25 हजार रुपए का ईनामी बदमाश है और उस पर कई मामले दर्ज हैं। वो गौ-तस्करी के मामले में वांछित था। इनामुल के पास से कट्टा, कारतूस और मोटरसाइकिल बरामद हुए हैं।

एडीजी ने किया महिला शक्ति को सम्मानित

इस अभियान में पुरुष पुलिसकर्मियों से भी आगे महिला शक्ति रहीं। इस अभियान की अगुवाई बरवापट्टी की एसएचओ सुमन सिंह कर रही थीं। वहीं, बदमाश का एनकाउंटर करने वाली टीम में एसआई चंदा यादव के अलावा एसआई प्रिंसी पाण्डेय, आरक्षी संगीता यादव और आरक्षी प्रियंका सिंह की अहम भूमिका रही। इस एनकाउंटर को अंजाम देने वाली टीम को मिशन शक्ति के तहत एडीजी ने सम्मानित भी किया।

चेन्नई रोड शो में बोले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी- उत्तराखंड और तमिल संगमम को आगे बढ़ाया जाएगा

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चेन्नई,26 अक्टूबर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड में आगामी 08 और 09 दिसंबर को होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर समिट को लेकर गुरुवार को चेन्नई में आयोजित रोड शो में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री धामी ने इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े निवेशकों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री के साथ चेन्नई रोड शो में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज एवं कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा भी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चेन्नई में आयोजित रोड शो में आए विभिन्न समूहों के निवेशकों को 8 और 9 दिसंबर 2023 को देहरादून में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु और उत्तराखंड का आध्यात्मिक रूप से संबंध है। तमिलनाडु में रामेश्वरम और उत्तराखण्ड में श्री केदारनाथ एवं आदि कैलाश विश्व प्रसिद्ध हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के तमिलनाडु में रामेश्वरम्और उत्तराखंड में श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग विद्यमान हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड और तमिल संगमम को आगे बढ़ाया जाएगा।

उत्तराखण्ड में हैं निवेश की अपार संभावनाऐं——

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड में विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल होने के साथ-साथ फ़ूड प्रोसेसिंग, ऑटो कम्पोनेन्ट मैन्युफैक्चरिंग, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे अनेकों क्षेत्रों में निवेश की अपार संम्भावनाएं हैं। उत्तराखण्ड राज्य को पीस टू प्रोसपेरिटी के मूल मंत्र के साथ सक्रिय एवं निवेश अनुकूल बनाया जा रहा है। इसके लिए सरकार द्वारा उत्कृष्ट मानव श्रम, बेहतर अवस्थापना सुविधायें, शान्तिपूर्ण वातावरण, पारदर्शी प्रोत्साहन नीतियां स्थापित की गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने राज्य के पारम्परिक क्षेत्रों जैसे पर्यटन, आयुष, वेलनेस, फ़ूड प्रोसेसिंग, ऑटो मोबाईल्स, फार्मा के साथ-साथ वैकल्पिक ऊर्जा और सूचना एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र को फोकस सेक्टर के रुप में शामिल किया है।

उत्तराखण्ड की ओर तेज़ी से बढ़ रहा निवेशकों का रुझान

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक आयोजित रोड शो में देश एवं विदेशों से निवेशकों द्वारा उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है जिससे यह स्पष्ट है कि निवेशकों का तेज़ी से रुझान उत्तराखण्ड की ओर बढ़ रहा है। उन्होने कहा कि निजी क्षेत्र के साथ मजबूत सम्बन्ध बनाने एवं साझेदारी स्थापित करने से ही हम राज्य में आर्थिक प्रगति एवं रोजगार के अवसरों के सृजन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकते हैं, यही कारण है कि उत्तराखण्ड में प्रदेश सरकार ने उद्योगों के साथ बेहतर सम्बन्ध एवं तालमेल बढ़ाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को इन्वेस्टर्स फ्रेंडली बनाने के लिए विगत कुछ माह में 30 से अधिक नीतियों में संशोधन किया गया है।

उन्होंने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर समिट की थीम को “पीस टू प्रोस्पेरिटी” रखा गया है। टूरिज्म, वेलनेस और हॉस्पिटेलिटी इंडस्ट्री के साथ-साथ उत्तराखण्ड में अनेक नए एवं गैर परंपरागत उद्योगों को विकसित किया जा रहा है। उत्तराखण्ड, देश के प्रमुख फार्मा हब के रूप में स्थापित हो रहा है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि इन्वेस्टर्स उत्तराखण्ड में भी निवेश करें ताकि प्रदेश में औद्यौगिक विकास की गति बढ़ सके। प्रदेश में निवेश बढ़ने से अर्थव्यवस्था मजबूत होने के साथ ही रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखण्ड पर्यटन प्रदेश होने के साथ ही निवेश हेतु भी बेहतरीन डेस्टिनेशन है।उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में सरकार ने निवेशकों के लिए कई नीतिगत सुधार किए हैं।

कैबिनेट मंत्री सौरव बहुगुणा ने कहा कि उत्तराखण्ड में रोड, एयर और रेल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रदेश में मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में कई इंवेस्टर फ्रेंडली नीतियों को संशोधित किया गया है।

कार्यक्रम में सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिन कुर्वे, डॉ. आर राजेश कुमार, महानिदेशक उद्योग रोहित मीणा और विभिन्न क्षेत्रों के निवेशक उपस्थित रहे। ।

मेरे लिए डांस मेरे सच्चे जुनून में से एक है-कैटरीना कैफ

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कैटरीना कहती हैं, “एक कलाकार के रूप में इतने वर्षों तक, एक चीज जिसने मुझे बनाए रखा है वह है मेरे प्रशंसकों, मीडिया और दर्शकों का प्यार। सफलता का असली पैमाना उस प्यार में है जो किसी को लोगों से स्वाभाविक रूप से मिलता है। लेके प्रभु का नाम को पसंद किया जा रहा है, यह हम सभी के लिए एक अद्भुत एहसास है। मेरे लिए डांस करना मेरे सच्चे जुनून में से एक है और दर्शकों का प्यार देखना बहुत बड़ी खुशी है।”
कैटरीना जबरदस्त डांस हिट देने के लिए जानी जाती हैं और उन्हें खुशी है कि लेके प्रभु का नाम उनके पार्टी एंथम की शानदार लिस्ट में शामिल हो रहा है। उनका मानना है कि लोगों को अभिनेताओं से बहुत उम्मीदें होती हैं कि वे न केवल अपने अभिनय कौशल का प्रदर्शन करें बल्कि उन्हें संजोने और डांस करने के लिए बेहतरीन गाने भी दें!
कैटरीना कहती हैं, “एक फिल्म, एक अभिनय प्रदर्शन, एक गीत इन सभी को सफल कहलाने के लिए हमारे दर्शकों से जुड़ना होगा और मैं आभारी हूं कि मैंने अपने पूरे करियर में ऐसा हुआ है। मैं जानती हूं कि फिल्म में परफॉर्मेंस के साथ-साथ लोग हमारे गाने देखने के लिए भी उत्साहित रहते हैं।”
वह आगे कहती हैं, “मैं इसे एक बड़ी प्रशंसा के रूप में लेती हूं क्योंकि गाने और डांस हमारी संस्कृति और हमारी फिल्मों का हिस्सा हैं और हमेशा से सेलिब्रेट और पसंद किए जाते रहे हैं। मैं हमारे गानों से लोगों की अपेक्षाओं से वाकिफ हूं और यह मुझे हर बार बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करता है।”
वाईआरएफ स्पाई यूनिवर्स की टाइगर 3 का निर्माण आदित्य चोपड़ा ने किया है और इसका निर्देशन मनीष शर्मा ने किया है। यह इस दिवाली, 12 नवंबर, रविवार को हिंदी, तमिल और तेलुगु में रिलीज़ होने के लिए तैयार है!

लेके प्रभु का नाम गाना यहां देखें:

गाने और डांस हमारी फिल्मों, हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं: सलमान खान

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बॉलीवुड के मेगास्टार सलमान खान टाइगर 3 के पहले गाने लेके प्रभु का नाम के जबरदस्त हिट होने से रोमांचित हैं। प्रीतम द्वारा रचित, अरिजीत सिंह और निकिता गांधी (हिंदी संस्करण), बेनी दयाल और अनुषा मणि (तमिल संस्करण और तेलुगु संस्करण) द्वारा गाया गया यह गाना इंटरनेट पर धूम मचा रहा है। लोग आकर्षक बीट्स और सलमान-कैटरीना कैफ की सिज़लिंग केमिस्ट्री के फिर से दीवाने हो गए हैं!
सलमान कहते हैं, ”ट्रैक को मिली प्रतिक्रिया आश्चर्यजनक रूप से सकारात्मक है और मुझे यह पढ़कर खुशी हुई कि कैसे लोगों ने इस छुट्टियों के मौसम के लिए एक पार्टी एंथम ढूंढ लिया है। मुझे अपनी फिल्मों और गानों से लोगों का मनोरंजन करने में हमेशा खुशी महसूस होती है। मुझे इससे बड़ी कोई खुशी नहीं मिली कि लोग अपने जीवन में जो कुछ भी हो रहा है उसे भूल जाएं और उस दुनिया में डूब जाएं जो हमारा सिनेमा थिएटर के अंदर उनके लिए बनाता है!”
वह आगे कहते हैं, “गाने और डांस हमारी फिल्मों, हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं और मुझे अच्छा लगता है जब मेरी फिल्मों में बेहतरीन गाने होते हैं जिनका लोग आनंद लेते हैं। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि एक गीत की प्रासंगिकता पीढ़ियों तक पहुंच सकती है! मैं भाग्यशाली रहा हूं कि मुझे अपने करियर में इनमें से कुछ गाने मिले और मुझे उम्मीद है कि लेके प्रभु का नाम भी समय के साथ उनमें से एक बन जाएगा।”
वाईआरएफ स्पाई यूनिवर्स की टाइगर 3 का निर्माण आदित्य चोपड़ा ने किया है और इसका निर्देशन मनीष शर्मा ने किया है। यह इस दिवाली, 12 नवंबर, रविवार को हिंदी, तमिल और तेलुगु में रिलीज़ होने के लिए तैयार है।

डॉ अरुण कुमार शर्मा द्वारा निर्मित इको-फ्रेंडली दुर्गाजी की मूर्ति का दर्शन करने पहुंचे सेलेब्रिटी

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मुम्बई। डॉ अरुण कुमार शर्मा द्वारा नमो नमो संगठन ट्रस्ट के सहयोग से 12 फुट ऊंची इको-फ्रेंडली माता की मूर्ति बूमरंग में रखी गई। यहां कई सेलेब्रिटीज़ के साथ नवरात्रि उत्सव मनाया गया। माता दर्शन, विशेष कन्या पूजन, दान और भोज प्रोग्राम रखा गया। उसी अवसर पर एक्ट्रेस निहारिका रायजादा, अभिनेत्री उर्वशी, कॉमेडियन वीआईपी सहित कई लोग उपस्थित रहे। सभी ने माता के दर्शन किए और डॉ अरुण कुमार शर्मा के इको फ्रेंडली के कॉन्सेप्ट की सराहना की।
वहीं ढेरो बच्चों को प्रसाद, जूस और भोज के साथ उपहार किट्स बांटे गए जिससे उनके चेहरे पर खुशी झलक पड़ी।
इस भव्य उत्सव में भारी संख्या में लोग शामिल हुए और भक्तों ने इस उत्सव को खूब उत्साह से साथ मनाया।
भक्ति के साथ पर्यावरण को लेकर जागरूकता की एक उल्लेखनीय पहल करने वाले डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने नमो नमो संगठन ट्रस्ट के सहयोग से विश्व की सबसे ऊंची इको-फ्रेंडली गणपति मूर्ति का निर्माण भी करवाया था। इस अविश्वसनीय उपलब्धि को इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा प्रमाणित किया गया।


अरुण कुमार शर्मा ने कहा कि प्यार से तैयार की गई यह माता जी की मूर्ति पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल रही।
नमो नमो संगठन ट्रस्ट के अध्यक्ष अरुण कुमार शर्मा ने कहा कि भक्ति, पूजा और प्रथाओं के माध्यम से, हम परंपरा और आधुनिकता के बीच की खाई को पाट सकते हैं।
मुंबई के चांदीवली में स्थित बूमरंग बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स में नवरात्रि के शुभ अवसर पर नवरात्रि उत्सव में इस इको-फ्रेंडली माताजी की मूर्ति ने सबका ध्यान खींचा।
अरुण कुमार शर्मा का कहना है कि हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के हर घर मोदी जी और हर घर इको फ्रेंडली गणेश जी और माताजी की मूर्ति की सोच को सपोर्ट करते हैं।
इको फ्रेंडली माताजी की मूर्ति भी उन्होंने ही बनाई है जिन्होंने बप्पा जी की मूर्ति भी बनाई थी। इको फ्रेंडली माताजी का यहीं विसर्जन होगा। मेरी पूरे समाज से प्रार्थना है कि पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर घर मे इको फ्रेंडली माताजी रखें।
निहारिका रायजादा, उर्वशी, वीआईपी ने अरुण कुमार शर्मा के इस कार्य की तारीफ की।

सचेत-परंपरा के नए गीत मेरी होजा ने रचा जादू

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गायक-संगीतकार जोड़ी सचेत-परंपरा अपने उत्साही प्रशंसकों के लिए भूषण कुमार द्वारा निर्मित प्यार का एक और राग ‘मेरी होजा’ लेकर आ रहे है। इस जोड़ी ने हाल ही में गाने का टीज़र जारी किया है, जिससे प्रशंसकों को उनके द्वारा रचे गए जादू की एक झलक मिल गई है। यह कहना ठीक होगा कि उनकी केमेस्ट्री स्क्रीन पर आग लगा रही है। सचेत और परंपरा द्वारा गाया और संगीतबद्ध किए गए गाने के स्वप्निल बोल कुमार द्वारा लिखे गए हैं। तानी द्वारा निर्देशित, संगीत वीडियो के टीजर की झलक प्यार की गर्मजोशी से भरा प्रतीत होता है। यह जोड़ी हर रिलीज के बाद संगीत का स्तर ऊंचा कर रही है, चाहे वह उनका वायरल ट्रैक मलंग सजना, दीवानी या नवीनतम मेरी होजा हो।
    सचेत-परंपरा द्वारा मेरी होजा टी-सीरीज़ द्वारा निर्मित है और 27 अक्टूबर 2023 को टी-सीरीज़ यूट्यूब चैनल पर रिलीज़ होगी।

रावण की ओट में राजनीति का राग

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राकेश अचल
रामलीला के मंचों से रावण दहन की ओट में सियासी दलों ने जमकर राजनीति का राग गाया और जनता ठगी सी खड़ी देखती रह गयी, क्योंकि रामलीलाओं  में न असली राम लड़ रहे थे और न असली रावण जल रहे थे ।  सब कुछ नकली था।  असली थे तो सिर्फ नेताओं के चेहरे और उनके भाषण।  जिनमें राम का नाम ले-लेकर अपने विरोधियों की धज्जियां उड़ाई जा रहीं थीं। दिल्ली से पटना तक एक ही माहौल  था। राम और रावण तो केवल निमित्त थे।
दिल्ली में द्वारिका की रामलीला में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने  जनता को विजयादशमी की शुभकामनाओं के साथ ही, इंदिरा गाँधी के बीस सूत्रीय कार्यक्रम  के जवाब में अपने दस सूत्रीय कार्यक्रम को परोसा।  राम मंदिर और रामलला का जिक्र किया। आयोजकों ने भी पूरे मैदान में राम के बजाय मोदी जी के कटआउट लगाकर अपनी मोदी भक्ति का भरपूर मुजाहिरा किया।
देश की आर्थिक  राजधानी मुंबई में भी दिल्ली की तर्ज पर दशहरे पर जमकर राजनीति हुई ।  बाला साहेब की शिवसेना के दोनों गुटों ने एक-दूसरे के प्रति जमकर भड़ास निकाली। जनता रामलीला के बजाय शिवसेना की लीला देखकर दंग रह गयी। शिवसेना का एक धड़ा शिवाजी पार्क  में था तो दूसरा धड़ा आजाद पार्क में। शिवाजी पार्क में उद्धव ठाकरे ने गुजरात के अहमदाबाद में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के स्वागत पर भी सवाल उठाए। उद्धव ठाकरे ने कहा कि गुजरात में नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में पाकिस्तान के क्रिकेटरों का स्वागत फूलों की वर्षा करके किया गया। उनके सम्मान में गरबा का नृत्य किया गया। ठाकरे ने कहा कि इन दृश्यों को देखने के बाद, उन्हें एक पल के लिए लगा कि पाक खिलाड़ी भाजपा में शामिल हो गए हैं क्या? ठाकरे ने कहा कि मौजूदा सरकार जनरल डायर सरकार है जिसने निर्दोष प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया था। उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे गुट के विधायकों की अपात्रता मामले का उल्लेख किया। इससे पहले शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अजित पवार और हसन मुशरिफ का हवाला देकर बीजेपी पर निशाना साधा।
आजाद मैदान में  शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री  एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर पलटवार किया। शिंदे ने कहा कि मैदान-स्थल महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि विचारधारा और विचार महत्वपूर्ण हैं। शिंदे ने कहा कि उनकी रैली में बाला साहेब के विचार हैं। एकनाथ शिंदे ने कहा कि असली शिवसेना आजाद मैदान में है। उन्होंने कहा कि सत्ता के लिए उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व को धोखा दिया। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि आजाद मैदान में आजाद शिवसैनिक जुटे हैं।
रावण के जरिये पटना में भी पॉलीटिक्स हुई ।  जेडीयू ने मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए अपने पांच प्रत्याशी उतारकर सपा की तरह ही आईएनडीआईए गठबंधन  के साथ घात किया। जम्मू-कश्मीर और काँगड़ा में भी रावण जलाये गए लेकिन वहां सियासत नहीं हो पायी, हालाँकि कोशिश की गयी। दशहरे  के दिन पूरे देश में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए गए  वहीं बिसरख में  राम के बजाय शिव जी की पूजा की गयी। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित सेक्टर-1 के पास मौजूद गांव बिसरख को रावण का गांव कहा जाता है। यहां  रावण दहन नहीं किया जाता है, उल्टा दशहरे पर रावण को बेटा मानकर याद किया जाता है। यहां की महिलाएं इस दिन रावण की जन्मस्थली पर बने अष्टकोणीय शिवलिंग की पूजा करने आती हैं। मान्यता  है कि यह वही शिवलिंग है जिसकी आराधना कर रावण ने भगवान शिव से वरदान प्राप्त किया था।
दशहरे पर भले ही देश भर में राम-रावण युद्ध हो,रावण के पुतले जलाये जाएँ लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सुप्रीमो डॉ मोहन भागवत अपनी भागवत बांचते है।  इस बार भी वे चुप नहीं रहे, बोले ।  उन्होंने  मणिपुर के मुद्दे पर वो सब कह दिया जो माननीय प्रधानमंत्री कहने   में हिचकते रहे।  संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि मणिपुर की वर्तमान स्थिति को देखते हैं तो यह बात ध्यान में आती है कि लगभग एक दशक से शांत मणिपुर में अचानक यह आपसी फूट की आग कैसे लग गई? क्या हिंसा करने वाले लोगों में सीमापार के अतिवादी भी थे? अपने अस्तित्व के, भविष्य के प्रति आशंकित मणिपुरी मैतेयी समाज और कुकी समाज के इस आपसी संघर्ष को सांप्रदायिक रूप देने का प्रयास क्यों और किसके द्वारा हुआ? वर्षों से वहां पर सबकी समदृष्टि से सेवा करने में लगे संघ जैसे संगठन को बिना कारण इसमें घसीटने का प्रयास करने में किसका निहित स्वार्थ है? इस सीमा क्षेत्र में नागाभूमि व मिजोरम के बीच स्थित मणिपुर में ऐसी अशांति व अस्थिरता का लाभ प्राप्त करने में किन विदेशी सत्ताओं को रुचि हो सकती है?
रावण तो श्रीमती सोनिया गांधी ने भी लाल किले के मैदान में जलाया लेकिन उन्होंने वहां कोई राजनीतिक भाषण नहीं दिया। उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष  मल्लिकार्जुन खड़गे भी वहां थे।
देश में पहली बार ऐसा लगा कि किसी को रावण से कोई मतलब नहीं है ।  सभी को अपनी-अपनी राजनीति और छवि की फ़िक्र है ।  फिर चाहे वो भाजपा हो,संघ हो, कांग्रेस या शिवसेना। लोकतंत्र में परम्पराओं और धार्मिक आस्थाओं के मंचों का ऐसा दुरूपयोग आखिर कौन रोकेगा? इसके लिए तो कोई कानून फिलहाल है नही।  धर्म और राजनीति का कॉम्बो शेक बनाया और बेचा जा रहा है। अब मर्जी है आपकी कि आप इसे पियें या न पियें। (विभूति फीचर्स)

Dashara special – भगवान राम का वनवास स्थल : चित्रकूट

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दिनेश चंद्र वर्मा – विभूति फीचर्स

भगवान राम की कथा, उनके वनवास की कथा के बिना अधूरी है और उनकी वनवास की कथा उनके चित्रकूट के निवास के उल्लेख के बिना अधूरी कही जा सकती है। अपने बारह वर्ष के वनवास में कोई ग्यारह वर्ष राम ने चित्रकूट में ही बिताये थे। भगवान राम ने अपने वन गमन में चित्रकूट को ही क्यों पसन्द किया? इसका एकमात्र उत्तर है चित्रकूट का प्राकृतिक सौन्दर्य, जो आज भी बरकरार है। हरे-भरे वन, कल-कल बहती हुई मंदाकिनी नदी तथा पहाडिय़ों से गिरते हुए अनेक झरने आज भी मन मोह लेते हैं।

चित्रकूट एक स्थान विशेष का नाम नहीं है, अपितु लगभग पचास वर्ग किलोमीटर में फैले क्षेत्र का नाम है। यह क्षेत्र दो प्रदेशों (उत्तरप्रदेश एवं मध्यप्रदेश) के दो जिलों (बांदा और सतना) में फैला हुआ है। इस क्षेत्र में विंध्याचल पर्वत की शाखाओं के रूप में अनेक पहाडिय़ाँ हैं। किसी समय में यहां अशोक के वन रहे होंगे, क्योंकि चित्रकूट का अर्थ संस्कृत भाषा में अशोक का वन होता है। आज अशोक के वन तो नहीं है किन्तु हरी-भरी पहाडिय़ाँ अपने आकर्षक रूप में आज भी मौजूद हैं। इन पहाडिय़ों की शोभा उसी तरह है, जिस तरह महर्षि वाल्मीकि ने अपनी अमर कृति वाल्मीकीय रामायण में वर्णित की थी। वाल्मीकि ने चित्रकूट की मनोरमता का वर्णन राम के मुंह से इस तरह कराया है- ‘हे भद्रे (सीता) नाना प्रकार के पक्षियों से मुक्त तथा अनेक धातुओं से विभूषित ऊँचे शिखरों वाले पर्वतों को देखो। कोई चांदी की तरह नीलमणि के समान चमकता है, कोई पुष्प राग की तरह और और कोई स्फटिक मणि की तरह है। कोई केतकी के रंग का है, कोई तारे की तरह चमक रहा है तथा कोई पारे की तरह दमक रहा है। अतएव अनेक रंगों की धातुओं के सदृश्य दिखने के कारण इस पहाड़ी क्षेत्र का नाम चित्रकूट पड़ा है।

तीर्थ स्थान- चित्रकूट की गणना भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों में होती है। रामभक्तों की यह मान्यता और धारणा है कि यहाँ राम आज भी निवास करते हैं। इस मान्यता में उस जनश्रुति का भी योगदान है, जिसके अनुसार कहा जाता है कि हनुमान जी की कृपा से चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के घाट पर राम ने तुलसीदास को दर्शन दिये थे। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी पर आज भी वह घाट है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसी घाट पर राम को तुलसीदास ने तिलक लगाया था। इस संबंध में एक दोहा भी प्रचलित है-

चित्रकूट के घाट पर, भई संतन की भीर।

तुलसीदास चन्दन घिसे, तिलक करें रघुबीर।।

तुलसीदास से सम्बन्धित यह कथा जिस घाट से सम्बन्धित है, उसे रामघाट कहा जाता है। रात्रि के समय इस घाट की शोभा देखते ही बनती है। मंदाकिनी के जल में झिलमिलाती चांदनी बड़ी ही मनमोहक होती है। इसी घाट पर तोतामुखी हनुमान की प्रतिमा है। कहा जाता है कि जब तुलसीदास मंदाकिनी में स्नान करने वालों को तिलक लगा रहे थे तब छद्मवेश में राम भी उनके सामने आ गये। तुलसीदास उन्हें पहचान नहीं सके। तब हनुमानजी ने तोते का रूप धारण करके, तुलसीदास को भगवान राम की उपस्थिति की जानकारी दी थी। तोतामुखी हनुमान की प्रतिमा से थोड़ा ऊपर यज्ञबेदी के नाम से प्रसिद्ध एक स्थान है। कहा जाता है कि इस स्थान पर ब्रह्मा ने यज्ञ किया था। यज्ञवेदी के समीप ही पर्णकुटी नामक एक अन्य स्थान है। कहा जाता है कि यहाँ पर कुछ दिनों तक राम और लक्ष्मण पर्णकुटी बनाकर रहे थे।

तुलसीदास और चित्रकूट- रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने चित्रकूट में काफी दिनों तक निवास किया था। उनके निवास के दो स्थान बताये जाते हैं। इनमें से एक निवास तो उसी रामघाट पर है, जहाँ उन्हें भगवान राम ने दर्शन दिये थे। दूसरा स्थान कामदगिरि नामक पहाड़ी पर चरणपादुका के पास स्थित है।

राघव प्रयाग- रामघाट के पास ही राघव प्रयाग नामक स्थान है। यह वह स्थान है, जहाँ मंदाकिनी नदी से पयोष्णी (पाण्यस्विनी) नामक एक छोटी सी नदी का संगम होता है। इस स्थान को प्रयाग (इलाहाबाद) के समान पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। अपने वनवास में जब राम को अपने पिता दशरथ के निधन की सूचना मिली थी, तब उन्होंने यहीं तर्पण किया था, इसीलिए इस स्थान को राघव प्रयाग कहा जाता है। इस घाट पर पन्ना के राजा श्री अमान सिंह द्वारा बनवाया हुआ एक सुन्दर मंदिर भी है। राघव प्रयाग के सामने भी एक घाट है, जिसे मंदाकिनी घाट कहा जाता है। राघव प्रयाग एवं उसके समीप ही मंदाकिनी नदी पर अनेक घाट स्थित हैं। इन घाटों पर अनेक मंदिर हैं, जो काफी ऊँचाई पर बने हुए हैं। ये मंदिर मध्यकालीन भारतीय शिल्पकला के अच्छे उदाहरण कहे जा सकते हैं।

मंदाकिनी नदी : इस स्थान पर मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश की सीमा निर्धारित करती है। नदी का दक्षिणी भाग उत्तरप्रदेश में तथा उत्तरीतट मध्यप्रदेश में है।

जानकी कुंड – मंदाकिनी नदी के तट पर चलते हुए जब हम उत्तर की ओर बढ़ते हैं तो नदी के तट पर एक कुंड है, जिसे जानकारी कुंड कहा जाता है। इस स्थान की प्राकृतिक छटा देखते ही बनती है। नदी के दोनों किनारों पर हरियाले जंगल हैं तथा बीच में सफेद पत्थरों की चट्टानें हैं। इसी कुंड के पास एक सफेद पत्थर पर राम के चरण चिह्न उत्कीर्ण हैं।

स्फटिक शिला- मंदाकिनी नदी के तट पर हम और आगे बढ़ते हैं तो स्फटिक शिला नामक स्थान आता है। यह स्थान रामायण की उस कथा की स्मृति दिलाता है, जब इन्द्र के पुत्र जयन्त ने कौए का रूप धारण कर सीता के चरण पर चोंच मारी थी। स्फटिक शिला नामक स्थान पर दो चमकीली शिलाएं हैं, जिनमें राम, लक्ष्मण और सीता के चरण चिह्न उत्कीर्ण हैंं।

सीता के चरण चिह्न दो स्थानों पर बताये जाते हैं। एक तो कामदगिरि के पास चरणपादुका नामक स्थान पर तथा दूसरे हनुमान-धारा के रास्ते पर। इन सभी चिह्नों की विशेषता यह है कि ये मानव निर्मित नहीं हैं अपितु प्राकृतिक रूप से बने दिखाई पड़ते हैं।

अनुसूया आश्रम- अपने पतिव्रत धर्म के लिए पुराण प्रसिद्ध अनुसूया का आश्रम चित्रकूट में है। इस आश्रम के सामने से ही मंदाकिनी नदी का उद्गम होता है। कहा जाता है कि अनुसूया ने अपने तप के प्रभाव से मंदाकिनी नदी को वहां पर प्रकट किया था।

रामायण में इस बात का भी उल्लेख है कि अनुसूया ने  सीता को पतिव्रत धर्म का उपदेश दिया था। इस आश्रम तथा समीपवर्ती परमहंस आश्रम में सती अनुसूया एवं उनके जीवन से संबंधित अनेक कथाओं की सुन्दर प्रतिमाएं प्रतिष्ठित हैं।

गुप्त गोदावरी- मंदाकिनी नदी के रामघाट से कोई बारह किलोमीटर की दूरी पर स्थित गुप्त गोदावरी नामक स्थान, प्रकृति की शिल्पकला का एक अद्भुत एवं अनुपम नमूना है। गुप्त गोदावरी में दो प्राकृतिक गुफाएं हैं। ये दोनों ही गुफाएं पहाड़ में काफी भीतर तक चली गयी हैं। इनमें से एक गुफा पहाड़ की चोटी पर है तथा दूसरी तलहटी में है।

चोटी पर स्थित गुफा में ही एक झरना है। कहा जाता है कि इसी झरने से गुप्त गोदावरी निकली थी। इस झरने के पास गुफा के भीतर एक स्थान ऐसा है, जो मंदिर के किसी शिखर के भीतरी भाग की तरह लगता है। इसकी विशेषता यह है कि इसे मानव ने नहीं बनाया है, बल्कि प्राकृतिक रूप से ही यह निर्मित हुआ है। पहाड़ी की तलहटी में स्थित गुफा में राम कुंड एवं लक्ष्मण कुंड नामक दो झरने हैं। इस गुफा की दीवारों पर प्रकृति ने अनुपम शिल्पकला दिखाई है। एक स्थान पर ऐसा लगता है कि सहस्रों नागफन उठाये खड़े हैं। इस स्थान को शेषावतार कहा जाता है। दोनों गुफाओं में पानी में से होकर जाना होता है।  गुफाओं में दिन में भी भारी अंधकार रहता है, किन्तु दर्शकों की सुविधा के लिए आजकल बिजली का प्रबन्ध है।

कामदगिरि- कामदगिरि या कामतानाथ के नाम से प्रसिद्ध पहाड़ी के बारे में कहा जाता है कि इस पहाड़ी की स्वयं भगवान राम ने पूजा की थी तथा यहाँ निवास किया था। धार्मिक मान्यता है कि इस पहाड़ी के दर्शन और परिक्रमा से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इन पहाड़ों की परिक्रमा के लिए पक्का रास्ता बना हुआ है, जो पांच किलोमीटर लम्बा है। इस रास्ते का निर्माण सन् 1725 में बुंदेलखण्ड के प्रसिद्ध राजा छत्रसाल की पत्नी महारानी चांदकुंवरी ने किया था। परिक्रमा के रास्ते पर अनेक मंदिर स्थित हैं, जिनमें विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं प्रतिष्ठित हैं। कहा जाता है कि इस परिक्रमा में सारे तीर्थ निवास करते हैं। कामदगिरि या कामतानाथ की पूजा एक देवता के रूप में की जाती है। इस पर्वत का एक प्राकृतिक मुख भी है, जिसको कामतानाथ का मुखारबिन्द कहा जाता है। सैकड़ों श्रद्धालु प्रतिदिन इस पहाड़ी की परिक्रमा करते हैं। इस पर्वत को श्रद्धालुओं द्वारा राम की तरह ही आराध्य एवं वंदनीय माना जाता है।

कामदगिरि विन्ध्याचल की एक शाखा है तथा इसका वर्णन महाकवि कालिदास ने मेघदूत में ‘भ्रकुच’ के रूप में किया है। तुलसीदास ने भी इस पहाड़ी के संबंध में लिखा है-

कामदगिरि भये राम प्रसादा।

अवलोकत अपहरत विषादा।।

हनुमान धारा के नाम से एक पहाड़ी झरना भी काफी प्रसिद्ध है। एक पहाड़ी के ऊपर से यह झरना, हनुमान जी की प्रतिमा के सामने गिरता है। हनुमान धारा के समीप पंचमुखी हनुमान-धारा नामक एक अन्य झरना है। इन दोनों धाराओं के बीच में नरसिंहधारा नामक एक तीसरा झरना है।

हनुमान धारा जिस पहाड़ी पर स्थित है, उसकी चोटी पर सीताजी की रसोई नामक स्थान है। कहा जाता है कि इस स्थान पर सीताजी भोजन बनाती थीं। यहाँ सीताजी का मंदिर तथा पत्थर के चकोटे बेलन दर्शनीय हैं।

भरत कूप- कामदगिरि से कोई 10 किलोमीटर दूरी पर भरत कूप नामक एक कुआँ है। इस कुएं के बारे में कहा जाता है कि जब भरत रामचन्द्र जी को अयोध्या वापस लाने के लिए गये थे तो उन्हें राजतिलक करने के लिए वे अपने साथ सारे तीर्थों का जल ले गये थे। रामचन्द्रजी ने जब राज्याभिषेक कराने से इंकार कर दिया तो भरत ने तीर्थों का जल जिस कुएं में डाल दिया था, वह भरत कूप के नाम से विख्यात है। मान्यता है कि इसके जल के स्नान से सारे तीर्थों के स्नान का पुण्य मिलता है।

रामशैया- यह चट्टान भी प्राकृतिक है और इसमें दो चिह्न ऐसे बने हुए हैं, जैसे किसी के सोने से गद्दे पर बन जाते हैं। कहते हैं कि इस चट्टान पर एक चिह्न रामचन्द्रजी के सोते समय बना था और दूसरा चिह्न सीताजी के सोते समय। इन दोनों चिह्नों के बीच धनुष का भी चिह्न है।

तीन महाकवियों द्वारा वर्णित स्थल- चित्रकूट की विशेषता यह है कि इसकी प्राकृतिक सुषमा का वर्णन भारत के तीन महाकवियों-वाल्मीकि, कालिदास एवं तुलसीदास ने किया है। वाल्मीकि और तुलसीदास के वर्णन तो आप पढ़ ही चुके हैं। कालिदास ने भी चित्रकूट का वर्णन ‘वन्द्य:पुंसां रघुपतिं पंदंरकितं मेखलासु’ के रूप में किया है। अर्थात् चित्रकूट की पर्वतमेखला पर रामचन्द्र के चरण चिह्न अंकित है ।

रामचन्द्रजी अपना वनवास चित्रकूट में ही बितायें यह सुझाव महर्षि वाल्मीकि ने दिया था। इसका उल्लेख वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास कृत रामचरित मानस में मिलता है। वाल्मीकि का आश्रम कामदगिरि से कोई 25 मील दूर लालापुर पहाड़ी पर स्थित है।

महर्षि वाल्मीकि का यह सुझाव कितना उपयुक्त था, इसका अनुमान चित्रकूट पहुंचकर ही लगाया जा सकता है, क्योंकि चित्रकूट के कणकण में जो प्राकृतिक छटा व्याप्त है उसे देखकर मानव का क्या, देवताओं का मन भी नाच उठता है। तभी तो भगवान राम ने अपने वनवास का अधिकांश समय यहीं बिताया था। भगवान राम के वनवास की तो स्मृति ही अब शेष है, किन्तु चित्रकूट की मनमोहक प्राकृतिक सुषमा आज भी दर्शकों का मन मोह लेती है। (विभूति फीचर्स)