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लगभग 50% भारतीय अपने डेडिकेटेड स्टडी स्पेस के लिए ग्रोथ, आकांक्षा और प्रोडक्टिविटी पर देते हैं जोर

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मुंबई, 8 फरवरी 2024 — भारत मेंघर की साजसज्जा पारंपरिक सौंदर्यशास्त्र से परे हैजो सांस्कृतिक मूल्योंभावनात्मक संबंधों और लिविंग स्पेस यानी रहने की जगहों के डायनेमिक इवोल्यूशन (गतिशील विकासके दर्पण के रूप में कार्य करती है। इसका खुलासा गोदरेज एंड बॉयसगोदरेज समूह की प्रमुख कंपनी गोदरेज इंटरियो के एक हालिया अध्ययन ‘होमस्केप्स‘ से हुआ है। यह अध्ययन कन्ज्यूमर्स एक्सप्रेशन को घर और सजावट में उनकी पसंद के माध्यम से बखूबी प्रतिबिंबित करता है। इसके साथ ही उपभोक्ताओं के व्यक्तित्व और मूल्यों की अनूठी अभिव्यक्ति और घरों व व्यक्तिगत विकास के बीच के आंतरिक संबंध को भी रेखांकित करता है।

 

अध्ययन के अनुसार, 25% उत्तरदाता अपने प्रारंभिक घर की खरीद पर विचार करते समय एक व्यक्तिगत कोने या स्थान की कल्पना को प्राथमिकता देते हैंइसे एकान्त गतिविधियों और शांति के लिए एक पवित्र स्थान के रूप में देखते हैं। अध्ययन के सबसे दिलचस्प निष्कर्षों में से एक के अनुसार, 54% से अधिक उत्तरदाताओं ने अपने व्यक्तिगत विकासआकांक्षाओं और उत्पादकता के लिए स्टडी टेबल (अध्ययन मेजऔर कुर्सी के बीच सीधे संबंध पर जोर दिया है। उनके लिए कहीं और ध्यान केंद्रित करना और कुशलता से काम करना एक बड़ी चुनौती है।

 

 

इसके अतिरिक्तलगभग 62% लोगों ने अपने बच्चों के कमरे के लिए स्टडी टेबल (अध्ययन मेजऔर कुर्सियों का चयन करते समय अपने बच्चों की पसंद को भी शामिल करते हैं। गोदरेज इंटेरियो के ‘होमस्केप्स‘ अध्ययन से कई दिलचस्प अंतर्दृष्टि का भी पता चलता हैमसलन लॉजिक एंड रैशनैलिटी यानी तार्किक व विवेकवर्सस क्रिएटिविटी एंड इनोवेशन को लेकर जारी बहस। यह उपभोक्ताओं के सबसे अंदरूनी और महत्वपूर्ण जोन यानी उनके घर में उनके इस तमाम दृष्टिकोणों की गहराई से पड़ताल करता है। यह अध्ययन इसके साथ ही कार्यक्षमता और संगठनात्मक कौशल पर अधिक जोर देने की ओर ध्यान आकर्षित करता है। लगभग 28% उत्तरदाताओं को ‘ऑर्डर ऑब्सेसिव‘ के रूप में पहचान की गई है। इनके अनुसारसफाई के दौरान नौकरों द्वारा अनजाने में भी अगर उनके सामान को थोड़ा भी रीअरेंज्ड ( पुनर्व्यवस्थितकिया जाता हैतो वे काफी असुविधाजनक महसूस करते हैं।

 

गोदरेज इंटेरियो के बिजनेस हेड और वरिष्ठ उपाध्यक्ष स्वप्निल नागरकर के अनुसार, ‘होमस्केप्स‘ स्टडी से व्यक्तियोंउनके परिवारों और उनके घरों के बीच एक गहरे भावनात्मक संबंध का पता चलता है। हमारा शोध उपभोक्ताओं के जीवन के एक महत्वपूर्ण पहलू के बारे में उनकी भावनाओं का पता लगाता है – उनका घरउनके अस्तित्व के दर्पण के रूप में सामने आता है। यह सर्वे डेटा प्रमुख तौर पर बदलाव का सुझाव देता हैक्योंकि लोग तेजी से कार्यक्षमता और सौंदर्यशास्त्र दोनों को प्राथमिकता देने लगे हैंजिससे यह सुनिश्चित होता है कि उनका घर सुव्यवस्थित और स्वागत योग्य तरीके से तैयार रहे। गोदरेज इंटेरियो मेंहम आरामदेह और सौंदर्यशास्त्र को प्राथमिकता देते हैंसाथ ही आपके लिविंग स्पेस (रहने की जगहको बेहतर बनाने के लिए शानदार तरीके डिज़ाइन किया गया और फंक्शनल फर्नीचर को उपलब्ध करते हैं।

 

गोदरेज इंटेरियो अध्ययन कक्षों के लिए ऐसे प्रोडक्ट्स में चैंपियन हैजो कलात्मकता के साथ ही आरामदायक भी हैं और जिसके उपयोग से प्रोडक्टिविटी (उत्पादकताबढ़ती है। इनमें ईज़ीफ्लेक्स सिस्टम की विशेषता वाला मोशन चेयर भी शामिल हैजिसे एक्टिव सीटिंग को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें बैठने की विभिन्न मुद्राओं (पास्चरके दौरान पीठ को ऑप्टिमल सपोर्ट (इष्टतम समर्थनभी सुनिश्चित होता है।

 

एक अन्य नोटवर्दी प्रोडक्ट (उल्लेखनीय उत्पादथ्रिल चेयर भी हैजो फंक्शनलिटी (कार्यात्मकताओं), पर्सनलॉजेशन (वैयक्तिकरणसेटिंग्स और कई मॉडर्न टेक्चर (आधुनिक बनावटऔर रंगों का विकल्प प्रदान करता हैजो इसे कन्टेम्परेरी स्पेस (समकालीन स्थानोंके लिए आदर्श बनाता है। उनके क्यूरेटेड सेट में चॉकलेट वीस्टडी टेबल और एड्रिया वर्कडेस्क जैसी स्टडी टेबल शामिल हैंजो शयनकक्ष के भीतर एक फंक्शनल और प्रोडक्टिव स्पेस (कार्यात्मक और उत्पादक स्थानबनाने में सक्षम बनाती हैं। इन स्टडी टेबल्स को शयनकक्ष या बैठक कक्ष में सहजता से इंटीग्रेट (एकीकृतकिया जा सकता है और ये किसी भी इंटीरियर के साथ अच्छी तरह मेल खा सकते हैं।

 

इस सर्वेक्षण में बेंगलुरुचेन्नईदिल्लीहैदराबादकोलकातामुंबई और लखनऊ जैसे सात शहरों में रहने वाले 2,822 उत्तरदाताओं को शामिल किया गया है।

लता मंगेशकर की दूसरी वर्षगांठ पर रिदम और रचना ने दी श्रद्धांजलि

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मुंबई (अनिल बेदाग )लता मंगेशकर के निधन की दूसरी वर्षगांठ उन्हें रिदम वाघोलिकर और रचना शाह की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। रचना शाह एक भतीजी के रूप में लता दीदी के साथ एक मजबूत बंधन साझा करते थे। रिदम वाघोलिकर, जो अभी भी लताजी की धुनों को अपने दिल में रखते हैं, उन्होंने कहा की, “लताजी एक वैश्विक आइकन से भी कहीं अधिक थीं। वह हमारे लिए एक दोस्त की तरह थी जिस पर हम भरोसा करते थे।” लता मंगेशकर की दूसरी सालगिरह पर, रिदम और रचना ने उनके न होने से हुई क्षति की भावना को व्यक्त किया। रिदम अपनी कलात्मक यात्रा को आकार देने के लिए लताजी को धन्यवाद करते है और उनके गहन प्रभाव को स्वीकार करते है।
उनका रिश्ता दोस्ती से भी आगे बढ़ गया था, जिसे लताजी ने एक सार्वजनिक ट्वीट में स्वीकार किया था और रिदम को एक करीबी पारिवारिक मित्र बताया। रिदम, रचना शाह के साथ भी अपना अनोखा रिश्ता साझा करते हैं, जिन्हें रच्चू दीदी के नाम से जाना जाता है, जो स्वयं लताजी की ओर से एक उपहार है। लताजी की भतीजी रचना, दीदी की अनुपस्थिति पर शोक व्यक्त करती है, क्योंकि वह उनके लिए सबकुछ थी।
एक हालिया ट्वीट में, रचना और रिदम ने इन भावनाओं को साझा किया और दूसरों से लताजी के आदर्शों के अनुसार जीने का आग्रह किया। वे हर किसी को अधिक मुस्कुराने, अधिक महसूस करने, अधिक देने, अधिक प्यार करने, जाने देने और नफरत न करने के लिए प्रोत्साहित करते थे – वास्तव में लताजी को उनके मूल्यों के अनुसार जीकर हम सम्मान देते हैं।
रचना ने दीदी की यादें साझा करते हुए उन्होंने ने बताया की लता दीदी की हंसी को उनकी यादों में अब भी जीवंत है। दीदी की अनुपस्थिति की तुलना उन्होंने एक राग से की, जिसमें उसका मुख्य स्वर गायब है, जो उनके जाने से छोड़े गए खालीपन की लगातार उनको याद दिलाता है।
लताजी द्वारा रचना को अपनी सबसे अच्छी दोस्त के रूप में सार्वजनिक स्वीकारोक्ति उनके संबंधों की गहराई को दर्शाती है। रचना ‘दीदी’ की अनुपस्थिति से हुई अथाह क्षति को व्यक्त करती है, उनकी उपस्थिति को एक अभयारण्य और उनकी अनुपस्थिति को एक स्थायी पीड़ा कहती है। गतिशील जोड़ी, रिदम और रचना ने, दीदी के साथ अपने संबंधों से प्रेरित होकर एक रचनात्मक यात्रा शुरू की, किंवदंतियों पर किताबें लिखीं और प्रेरक टॉक शो की मेजबानी की।
जैसा कि दुनिया एक संगीत दिग्गज लता मंगेशकर की अनुपस्थिति पर शोक मना रही है, तब रिदम वाघोलिकर और रचना शाह स्मृति और प्रेम के चौराहे पर खड़े हैं, दोनों अपने सामूहिक दुख और क़ीमती यादों को साझा कर रहे हैं।

समान नागरिक संहिता विधेयक पर बृहद चर्चा पश्चात मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में पास हुआ यूसीसी बिल

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समान नागरिक संहिता विधेयक पर बृहद चर्चा पश्चात मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में पास हुआ यूसीसी बिल*
8 फरवरी 2024, बुद्धवार, देहरादून
संजय बलोदी प्रखर
मीडिया समन्वयक उत्तराखण्ड प्रदेश
देहरादून,8 फरवरी, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक उत्तराखंड 2024 बुधवार को विधानसभा में पारित कर दिया गया। विधेयक पर दो दिनों तक लंबी चर्चा हुई। सत्ता और विपक्ष के सदस्यों ने विधेयक के प्रावधानों को लेकर अपने-अपने सुझाव दिए। इस प्रकार उत्तराखंड विधानसभा आजाद भारत के इतिहास में समान नागरिक संहिता का विधेयक पारित करने वाली पहली विधानसभा बन गई है।
मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता विधेयक उत्तराखंड 2024 को विधानसभा में पेश किया था। जिसे बुधवार को सदन में विधेयक पर चर्चा के बाद सदन ने इसे पास कर दिया। अब अन्य सभी विधिक प्रक्रिया और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बनेगा। विधेयक में सभी धर्म-समुदायों में विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता और विरासत के लिए एक कानून का प्रावधान है। महिला-पुरुषों को समान अधिकारों की सिफारिश की गई है।अनुसूचित जनजातियों को इस कानून की परिधि से बाहर रखा गया है।
विदित हो कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता से किए गए वायदे के अनुसार पहली कैबिनेट बैठक में ही यूसीसी का ड्रॉफ्ट तैयार करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का फैसला किया। सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई। समिति ने व्यापक जन संवाद और हर पहलू का गहन अध्ययन करने के बाद यूसीसी के ड्रॉफ्ट को अंतिम रूप दिया है। इसके लिए प्रदेश भर में 43 जनसंवाद कार्यक्रम और 72 बैठकों के साथ ही प्रवासी उत्तराखण्डियों से भी समिति ने संवाद किया।
कुप्रथाओं पर लगेगी रोक—
समान नागरिक संहिता विधेयक के कानून बनने पर समाज में बाल विवाह, बहु विवाह, तलाक जैसी सामाजिक कुरीतियों और कुप्रथाओं पर रोक लगेगी, लेकिन किसी भी धर्म की संस्कृति, मान्यता और रीति-रिवाज इस कानून से प्रभावित नहीं होंगे। बाल और महिला अधिकारों की यह कानून सुरक्षा करेगा।
यूसीसी के अन्य जरूरी प्रावधान—
-विवाह का पंजीकरण अनिवार्य। पंजीकरण नहीं होने पर सरकारी सुविधाओं से होना पड़ सकता है वंचित।
-पति-पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह पूर्णतः प्रतिबंधित।
-सभी धर्मों में विवाह की न्यूनतम उम्र लड़कों के लिए 21 वर्ष और लड़कियों के लिए 18 वर्ष निर्धारित।
-वैवाहिक दंपत्ति में यदि कोई एक व्यक्ति बिना दूसरे व्यक्ति की सहमति के अपना धर्म परिवर्तन करता है तो दूसरे व्यक्ति को उस व्यक्ति से तलाक लेने व गुजारा भत्ता लेने का पूरा अधिकार होगा।
-पति पत्नी के तलाक या घरेलू झगड़े के समय 5 वर्ष तक के बच्चे की कस्टडी उसकी माता के पास ही रहेगी।
-सभी धर्मों में पति-पत्नी को तलाक लेने का समान अधिकार।
-सभी धर्म-समुदायों में सभी वर्गों के लिए बेटी-बेटी को संपत्ति में समान अधिकार।
-मुस्लिम समुदाय में प्रचलित हलाला और इद्दत की प्रथा पर रोक।
-संपत्ति में अधिकार के लिए जायज और नाजायज बच्चों में कोई भेद नहीं किया गया है। नाजायज बच्चों को भी उस दंपति की जैविक संतान माना गया है।
-किसी व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात उसकी संपत्ति में उसकी पत्नी व बच्चों को समान अधिकार दिया गया है। उसके माता-पिता का भी उसकी संपत्ति में समान अधिकार होगा। किसी महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे के संपत्ति में अधिकार को संरक्षित किया गया ।
-लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य। पंजीकरण कराने वाले युगल की सूचना रजिस्ट्रार को उनके माता-पिता या अभिभावक को देनी होगी।
-लिव-इन के दौरान पैदा हुए बच्चों को उस युगल का जायज बच्चा ही माना जाएगा और उस बच्चे को जैविक संतान के समस्त अधिकार प्राप्त होंगे।
“हमारे देश के प्रधानमंत्री राष्ट्रऋषि नरेन्द्र मोदी जी विकसित भारत का स्वप्न देख रहे हैं। भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रही है। उनके नेतृत्व में यह देश तीन तलाक और धारा-370 जैसी ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने के पथ पर है”
“समान नागरिक संहिता का विधेयक प्रधानमंत्री द्वारा देश को विकसित, संगठित, समरस और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए किए जा रहे महान यज्ञ में हमारे प्रदेश द्वारा अर्पित की गई एक आहुति मात्र है”
“UCC के इस विधेयक में समान नागरिक संहिता के अंतर्गत जाति, धर्म, क्षेत्र व लिंग के आधार पर भेद करने वाले व्यक्तिगत नागरिक मामलों से संबंधित सभी कानूनों में एकरूपता लाने का प्रयास किया गया है ”

दूसरे राज्यों से मंगाई गीर-साहीवाल नस्ल की गाय, 140 किसानों को मिलेगा अनुदान

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Bihar News: गो पालन से समृद्ध होंगे किसान, दूसरे राज्यों से मंगाई गीर-साहीवाल नस्ल की गाय, 140 किसानों को मिलेगा अनुदान
Banka News जिले के किसान गोपालन कर समृद्ध होंगे। इसके लिए किसानों को सरकार गाय से लेकर शेड तैयार करने के लिए मदद दे रही है। इस बार देसी गोपालन और समग्र गव्य विकास योजना के लिए 140 किसानों का चयन किया गया है। इन किसानों को दो गाय से लेकर 20 गाय की खरीदारी के लिए अनुदान दिया गया जाएगा।
जिले के किसान गोपालन कर समृद्ध होंगे। इसके लिए किसानों को सरकार गाय से लेकर शेड तैयार करने के लिए मदद दे रही है। इस बार देसी गोपालन और समग्र गव्य विकास योजना के लिए 140 किसानों का चयन किया गया है। इन किसानों को दो गाय से लेकर 20 गाय की खरीदारी के लिए अनुदान दिया गया जाएगा। ये गायें उन्हें स्थानीय बाजार से नहीं खरीदनी होगी। इस बार दूसरे राज्यों से गाय मंगाई जा रही है।
देसी गोपालन योजना के तहत किसानों को गीर और साहीवाल नस्ल की गायें उपलब्ध कराई जाएंगी। जबकि समग्र गव्य विकास योजना के तहत जरसी व अन्य नस्ल की गायों की खरीदारी कर सकेंगे। किसानों को एजेंसी के माध्यम से गाय उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए एजेंसी का चयन कर लिया गया है।
देसी गव्य विकास योजना के तहत 45 किसानों का चयन किया गया है। इसमें से दो गाय के लिए 30 किसानों का, चार गाय के लिए 11 किसानों का, 15 गाय के लिए तीन किसानों का और 20 गायों वाले डेयरी के संचालन के लिए एक किसान का चयन किया गया है।
जल्द किसानों को मिलेंगी गायें
जिला गव्य विकास पदाधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि देसी गव्य विकास योजना के तहत कुछ किसानों को जल्द गायें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए खरीद की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसमें गीर और साहीवाल नस्ल की गायें होंगी। जबकि समग्र गव्य विकास योजना के तहत इस बार 95 किसानों का चयन किया गया है।इसमें से दो गाय के लिए 55 किसानों का, चार गाय के लिए 16 किसानों का, 15 गाय के लिए पांच किसानों का और 20 गायों वाले डेयरी के संचालन के लिए एक किसान का चयन किया गया है।
बैंक दे रही किसानों को ऋण
गव्य विकास योजना के तहत किसानों को गाय खरीदने के लिए बैंक किसानों को ऋण भी दे रही है। कुछ किसानों ने स्वलागत से अनुदान के लिए आवेदन किया है। ऐसे किसानों को अनुदान के अलावा शेष राशि बैंक खाते में जमा करानी होगी। जबकि कुछ किसानों ने ऋण के लिए आवेदन किया है। अनुदान के अलावा जो राशि शेष बच जाती है, वह बैंक ऋण के रूप में किसानों को देगी। गव्य विकास कार्यालय से किसानों को ऋण उपलबध कराने के लिए सूची भेज दी गई है।
देसी गोपालन योजना और समग्र गव्य विकास योजना के तहत किसानों को गाय के लिए अनुदान दिया जाएगा। किसानों का चयन कर लिया गया है। एजेंसी के माध्यम से दूसरे राज्यों से गायें मंगाई जा रही है। -अजीत कुमार, जिला गव्य विकास पदाधिकारी।

हरिकेश सिंह, आज गौ रक्षा के साथ कर रहे हैं लाखों की कमाई

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भारत में गाय को माता कहा जाता है और उसकी पूजा की जाती है. मगर अब सड़कों पर विचरण करती बेसहारा गौमाता अपनी भूख मिटाने के लिए कचरा और प्लास्टिक खाने को मजबूर हैं. इससे वो बीमार और मरणासन्न स्थिति में पहुंच जाती हैं. इसे देखकर अमेठी के रहने वाले किसान हरिकेश सिंह का मन व्याकुल हो जाता है. ये सब देखते हुए उन्होंने न सिर्फ गौरक्षा का संकल्प लिया, बल्कि इसे अपने व्यवसाय के रूप में विकसित करते हुए लाखों रुपये की कमाई का जरिया भी बनाया है. साथ ही उन्होंने अन्य लोगों को भी रोजगार दिया है.
हरिकेश सिंह अमेठी जिले के धनापुरगांव के रहने वाले हैं. हरिकेश सिंह ने 150 से अधिक गीर गाय पाल रखी हैं. इनका कहना है कि गाय हमारी माता है हमने गाय को नहीं पाला बल्कि गाय ने हमें पाला है. आज जिस तरीके से गाय की दुर्दशा हो रही है, वो सब बंद होना चाहिए. इसलिए उन्होंने गौ रक्षा की मुहिम उठाई है. उन्हें यह प्रेरणा 1970 में उनके बाबा से मिली है.इसके बाद उन्होंने ऐसा व्यवसाय शुरू किया, जिससे गौरक्षा के साथ कमाई भी हो रही है. उनका कहना है कि हमने गौ सेवा का संकल्प लिया और आज हम गाय पालने का संदेश पूरे समाज को देना चाहते हैं कि गाय हमारी माता है और हम सबको उनका पूरा ख्याल अपने परिवार के सदस्य की तरह रखना चाहिए.
न्यूज़ १८ से साभार आदित्य कृष्ण की रिपोर्ट

छुट्टा पशुओं से छुटकारा दिलाएगी सरकार, खेतों की होगी सोलर फेंसिंग

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उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या इन दिनों छुट्टा पशु बने हुए हैं. रबी सीजन के अंतर्गत किसानों को छुट्टा पशुओं से अपनी फसल को बचाना मुश्किल हो रहा है. किसानों के द्वारा बड़े पैमाने पर गेहूं, सरसों, चना, मटर और मसूर की फैसलें लगाई गई हैं. गेहूं की फसल दो महीने की हो चुकी है. ऐसे में किसानों के लिए अपनी फसल की रक्षा करना भी जरूरी हो गया है, नहीं तो उनकी खड़ी फसल को ये पशु नुकसान पहुंचा सकते हैं. प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक तरफ तो निजी नलकूपों की बिजली बिल में रियायत की घोषणा की है जिसके लिए 2400 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है. वहीं अब छुट्टा पशुओं से छुटकारा दिलाने के लिए सोलर फेंसिंग का प्रावधान किया है. इसके लिए बजट में 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है. हालांकि सोलर फेंसिंग के लिए यह रकम पर्याप्त नहीं है. इस योजना का किसान पिछले एक साल से इंतजार कर रहे थे. 
50 करोड़ से कैसे होगी खेतों की सुरक्षा?
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 5 फरवरी को पेश किए गए अपने बजट में किसानों के लिए मेहरबानी दिखाई है. किसानों के लिए कई योजनाओं का बजट बढ़ाया गया तो वही सिंचाई और खेतों की सुरक्षा के लिए भी विशेष ध्यान दिया गया है. सोलर सिंचाई पंप की स्थापना के लिए बजट में ढाई गुना से ज्यादा की वृद्धि की गई है तो वहीं छुट्टा पशुओं से छुटकारा दिलाने के लिए अब योगी सरकार ज्यादा मुस्तैद दिखाई दी है. लोकसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना की घोषणा की गई है. इस योजना के लिए फिलहाल बजट में 50 करोड़ रुपये की ही व्यवस्था की गई है. हालांकि किसान इस बजट को अपर्याप्त बता रहे हैं.
गांव-गांव बनेंगे मौसम केंद्र
मौसम की सटीक जानकारी किसानों के लिए बेहद जरूरी है. इसके लिए अभी तक किसानों मौसम विभाग के ऐप से ही जानकारी प्राप्त करते हैं या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से उनको जानकारी मिलती है. अब प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार मौसम की जानकारी देने के लिए किसानों को ग्राम पंचायत स्तर पर ही विंड्स कार्यक्रम के तहत ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और ऑटोमेटिक रेन गेज़ की स्थापना करने का फैसला लिया है. इस योजना के लिए फिलहाल बजट में 60 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं .
पीएम कुसुम योजना के लिए बजट में वृद्धि
पीएम कुसुम योजना के तहत सोलर पंपों की स्थापना के लिए 449.45 करोड़ रुपये की व्यवस्था बजट में की गई है जो मौजूदा वित्त वर्ष की अपेक्षा दोगुनी से भी अधिक है. सोलर पंप के माध्यम से जहां किसानों को मुफ्त सिंचाई की सुविधा मिल रही है, वहीं ऊर्जा की बचत भी होगी.

अदा शर्मा अभिनीत विपुल अमृतलाल शाह की फिल्म ‘बस्तर: द नक्सली स्टोरी’ का टीज़र रिलीज

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मुम्बई। विपुल अमृतलाल शाह ने जिस दिन से ‘द केरल स्टोरी’ टीम सुदीप्तो सेन और अदा शर्मा के साथ ‘बस्तर: द नक्सल स्टोरी’ के लिए फिर से हाथ मिलाया है, तब से फिल्म को लेकर लोगों में उत्साह देखा गया और दर्शक इसके टीजर का इतंजार करने लगे। और अब फाइनली फिल्म के टीजर से पर्दा उठ गया है और यह दिल छू लेने वाला, मजबूत, इमोशनल और साहसी है।
इस फिल्म में अदा शर्मा आईपीएस नीरजा माधवन के किरदार में है और टीजर में उनके द्वारा बोला गया एक मिनट लंबा मोनोलॉग हर किसी के रोंगटे खड़े कर देता है।
यह मोनोलॉग फिल्म की दमदार कहानी और कुछ सच्चाइयों की झलक है, जिसे फिल्म की टीम सामने लाएगी।
टीज़र में निर्माताओं ने शहीदों की संख्या के बारे में सच्चाई उजागर की है और बताया है कि कैसे हमारे देश में सूडो इंटेलेक्चुअल्स चीन के पैसे से देश को तोड़ने के लिए प्रोपेगेंडा चला रहे हैं। इस पर अब गहराई से सोचने का समय है।
विपुल अमृतलाल शाह द्वारा निर्मित और आशिन ए शाह द्वारा सह-निर्मित, ‘बस्तर: द नक्सल स्टोरी’ सुदीप्तो सेन द्वारा निर्देशित है और इसमें अदा शर्मा मुख्य भूमिका में है। ये फिल्म सनशाइन पिक्चर्स के बैनर तले बनाई जा रही है। यह फिल्म 15 मार्च 2024 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने दुनिया को भारत के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया

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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारत ऊर्जा सप्ताह 2024 में अपने उद्घाटन भाषण में दुनिया को भारत के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया


भारत ऊर्जा सप्ताह (आईईडब्‍ल्‍यू) सिर्फ भारत का आयोजन नहीं है बल्कि ‘भारत दुनिया के साथ और दुनिया के लिए’ की भावना का प्रतिबिंब है: प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी

आज भारत 67 अरब डॉलर के निवेश के अवसर प्रदान कर रहा है क्योंकि हम अपने ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर रहे हैं: प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी

भारत तेजी से दुनिया के लिए ऊर्जा विकास केन्‍द्र बन रहा है: पेट्रोलियम मंत्री हरदीप एस पुरी

New Delhi 06 FEB 2024 – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज गोवा में भारत ऊर्जा सप्ताह 2024 के दूसरे संस्करण का उद्घाटन किया। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुखों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ऊर्जा क्षेत्र में अभूतपूर्व स्तर के निवेश के लिए भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सरकारी खर्च भारत में निवेश के नए रास्ते तैयार करेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने केन्‍द्रीय बजट में बुनियादी ढांचे पर 11 ट्रिलियन रुपये खर्च करने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की है। “भारत बुनियादी ढांचे पर 11 ट्रिलियन रुपये खर्च करने जा रहा है। इसका एक बड़ा हिस्सा निश्चित रूप से ऊर्जा क्षेत्र को जायेगा। पीएम मोदी ने सबसे प्रतीक्षित वैश्विक ऊर्जा सम्मेलनों में से एक के उद्घाटन दिवस पर कहा, आप देख सकते हैं कि भारत कैसे लगातार ऊर्जा क्षमता बढ़ा रहा है”।

वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारत की केन्‍द्रीय भूमिका के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत, जो तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता, चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक, रिफाइनर और ऑटोमोबाइल बाजार भी है।
बढ़ते ऊर्जा उपयोग और ऊर्जा परिवर्तन के प्रयास पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में दो और चार पहिया वाहनों की बिक्री रिकॉर्ड तोड़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत की इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग भी बढ़ रही है। उम्मीद है कि 2045 तक भारत की ऊर्जा मांग दोगुनी हो जाएगी।”
सभी को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने की सरकार की प्राथमिकता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “वैश्विक कारकों के बावजूद, भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां पेट्रोल और डीजल की दरें कम हुई हैं। ऐसे प्रयासों के कारण ही भारत आज ऊर्जा क्षेत्र में सबसे आगे है।”
इसके अलावा, सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने के सरकार के प्रयासों के बारे में बताते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमने 1 करोड़ घरों के लिए सौर छत स्थापना की घोषणा की है। इन घरों से उत्पादित बिजली सीधे ग्रिड तक पहुंचेगी। सौर मूल्य श्रृंखला निवेश के बेहतरीन अवसर प्रदान करती है।”
वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारत की केन्‍द्रीय भूमिका पर, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत न केवल अपनी ऊर्जा की मांग को पूरा कर रहा है बल्कि दुनिया के लिए विकास पथ भी निर्धारित कर रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकार द्वारा तेजी से किए जा रहे सुधार भारत को ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए एक वैश्विक गंतव्य बना रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,“हमारे सुधारों ने यह सुनिश्चित किया है कि घरेलू गैस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। आज भारत 67 बिलियन डॉलर निवेश के अवसर प्रदान करता है क्योंकि हम अपने ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर रहे हैं।”
प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के स्वागत के लिए उद्घाटन समारोह में बोलते हुए, केन्‍द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री, श्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत तेजी से दुनिया के लिए ऊर्जा विकास केन्‍द्र बन रहा है।
भारत ऊर्जा सप्ताह के इस वर्ष के संस्करण के बारे में, श्री पुरी ने कहा कि यह कार्यक्रम वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समय के दौरान आयोजित किया जा रहा है, जहां इसका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ऊर्जा की उपलब्धता, किफायती और स्थिरता सुनिश्चित करने की वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करना है।
भारतीय ऊर्जा के कथानक में वैश्विक कम्‍पनियों और संस्‍थानों की बढ़ती रुचि पर प्रकाश डालते हुए, केन्‍द्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि 900 से अधिक राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शक आईईडब्ल्यू 2024 के दूसरे संस्करण में “पिछले वर्ष की तुलना में 30 प्रतिशत की वृद्धि” के साथ अपनी प्रदर्शनीय वस्‍तुएं प्रदर्शित करेंगे।
श्री पुरी ने कहा कि अगले चार दिनों में, आईईडब्‍ल्‍यू 2024 में 400 से अधिक वैश्विक वक्ता 46 से अधिक रणनीतिक सत्रों और 46 तकनीकी सत्रों में योगदान देंगे। उन्होंने कहा, “नवाचार और अनुसंधान को लक्षित करते हुए, सभी ऊर्जा वर्गों में 2000 से अधिक तकनीकी पेपर प्रस्तुत किए जाएंगे।”
केन्‍द्रीय मंत्री श्री पुरी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में, पीएम उज्ज्वला योजना और वैश्विक जैव ईंधन समझौते जैसी भारत की प्रमुख योजनाओं ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है और उसे अपनाया है।
मंत्री ने कहा, “विपदा को अवसर में बदलने की प्रधानमंत्री की कल्‍पना को ध्यान में रखते हुए, अपने पास कोई बड़ा तेल भंडार नहीं होने के बावजूद, भारत, रणनीतिक योजना और रिफाइनिंग क्षेत्र में निवेश के माध्यम से एक बड़े तेल उद्योग को सफलतापूर्वक विकसित करने में कामयाब रहा है।” उन्होंने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में कच्चा तेल भारत की सबसे बड़ी आयात वस्तु थी, जबकि पेट्रोलियम उत्पादों की निर्यात में सबसे बड़ी हिस्सेदारी थी।
मंत्री महोदय ने आशा व्यक्त की कि प्रतिभाओं के मेल से आईईडब्‍लयू 2024 इस अस्थिर, अनिश्चित, जटिल और अस्पष्ट वातावरण में दुनिया के सामने आने वाली चुनौतियों के लिए अभिनव समाधान का नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा, हम मिलकर इन चुनौतियों से निपट सकते हैं और वैश्विक स्तर पर सकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकते हैं।
इससे पहले गोवा के लिए भारत ऊर्जा सप्ताह 2024 के दूसरे संस्करण के आस-पास प्रमुख अवसरों पर प्रकाश डालते हुए, राज्य के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि ऊर्जा सम्मेलन गोवा के लिए वैश्विक ऊर्जा केन्‍द्र के रूप में उभरने का एक अवसर है।
भारत ऊर्जा सप्ताह पृष्ठभूमि
इस दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए, भारत ऊर्जा सप्ताह 2024 6 से 9 फरवरी तक गोवा में आयोजित किया जा रहा है तथा यह भारत की सबसे बड़ी और एकमात्र सर्वव्यापी ऊर्जा प्रदर्शनी और सम्मेलन है, जो भारत के ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों के लिए संपूर्ण ऊर्जा मूल्य श्रृंखला को एक साथ लाएगा, और एक उत्प्रेरक के रूप में काम करेगा। प्रधानमंत्री ने वैश्विक तेल एवं गैस सीईओ और विशेषज्ञों के साथ एक गोलमेज बैठक भी की।
स्टार्टअप को प्रोत्साहित करना और बढ़ावा देना तथा उन्हें ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में एकीकृत करना भारत ऊर्जा सप्ताह 2024 का एक महत्वपूर्ण केन्‍द्र बिन्‍दु होगा। इसमें विभिन्न देशों के लगभग 17 ऊर्जा मंत्रियों, 35,000 से अधिक उपस्थित लोगों और 900 से अधिक प्रदर्शकों की भागीदारी की उम्मीद है। इसमें छह समर्पित देशों- कनाडा, जर्मनी, नीदरलैंड, रूस, यूके और यूएसए के मंडप होंगे। भारतीय एमएसएमई ऊर्जा क्षेत्र में जिन नवीन समाधानों का नेतृत्व कर रहे हैं, उन्हें प्रदर्शित करने के लिए एक विशेष मेक इन इंडिया पवेलियन का भी आयोजन किया जा रहा है।

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कृषि विकास योजना -रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

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New Delhi – 6th Feb 2024-  सरकार परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) के तहत भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (बीपीकेपी) नामक एक उप-योजना के माध्यम से 2019-2020 से प्राकृतिक खेती को रसायन मुक्त खेती के रूप में बढ़ावा दे रही है। देश भर में बीपीकेपी के तहत 8 राज्यों में प्राकृतिक खेती के लिए अब तक 4.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को मंजूरी दी गई है और 70.13 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। गंगा कॉरिडोर के किनारे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 1.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को भी मंजूरी दी गई है। किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने और प्राकृतिक खेती की पहुंच बढ़ाने के लिए, सरकार ने बीपीकेपी को बढ़ाकर एक अलग और स्वतंत्र योजना के रूप में प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमएनएफ) तैयार किया है।

किसानों के लाभ के लिए, भारत सरकार कृषि के क्षेत्र में ड्रोन को बढ़ावा दे रही है जो उन्नत प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने, दक्षता में सुधार करने, फसल की उपज बढ़ाने और संचालन की लागत को कम करने में मदद करेगा।
सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (एसएमएएम) के तहत ड्रोन की खरीद की लागत के 100 प्रतिशत की दर से अधिकतम 10 लाख रुपये प्रति ड्रोन की खरीद और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), फार्म मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (एसएयू), राज्य और अन्य केंद्र सरकार के कृषि संस्थानों/विभागों और कृषि गतिविधियों में लगे हुए भारत सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के अधीन संस्थानों द्वारा किसानों के खेतों पर प्रदर्शन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को किसानों के खेतों पर इसके प्रदर्शन के लिए किसान ड्रोन की लागत का 75 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जाता है। इन कार्यान्वयन एजेंसियों को 6000 रुपये प्रति हेक्टेयर का आकस्मिक व्यय प्रदान किया जाता है जो ड्रोन खरीदना नहीं चाहते हैं लेकिन कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी), हाई-टेक हब, ड्रोन निर्माताओं और स्टार्ट-अप से प्रदर्शन के लिए ड्रोन किराए पर लेंगे। ड्रोन प्रदर्शनों के लिए ड्रोन खरीदने वाली कार्यान्वयन एजेंसियों का आकस्मिक व्यय 3000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक सीमित है। किसानों को किराये के आधार पर ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए, किसानों, एफपीओ और ग्रामीण उद्यमियों की सहकारी समिति के तहत सीएचसी द्वारा ड्रोन की खरीद के लिए 40% की दर से अधिकतम 4.00 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। सीएचसी स्थापित करने वाले कृषि स्नातक ड्रोन की लागत का 50 प्रतिशत की दर से अधिकतम 5.00 लाख रुपये प्रति ड्रोन तक वित्तीय सहायता प्राप्त करने के पात्र हैं। व्यक्तिगत स्वामित्व के आधार पर ड्रोन की खरीद के लिए लघु और सीमांत, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, महिलाओं और उत्तर-पूर्वी राज्य के किसानों को लागत का 50 प्रतिशत की दर से अधिकतम 5.00 लाख रुपये तक और अन्य किसानों को 40 प्रतिशत की दर से अधिकतम 4.00 लाख रुपये तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
एसएमएएम के तहत, किसान ड्रोन को बढ़ावा देने के लिए 141.39 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है, जिसमें किसान ड्रोन की खरीद और 100 केवीके, 75 आईसीएआर संस्थानों और 25 एसएयू के माध्यम से किसानों के खेतों पर उनके प्रदर्शनों के आयोजन के लिए आईसीएआर को जारी किए गए 52.50 करोड़ रुपये शामिल हैं। किसानों को सब्सिडी पर 461 किसान ड्रोन की आपूर्ति और किसानों को ड्रोन सेवाएं प्रदान करने के लिए 1585 किसान ड्रोन सीएचसी की स्थापना के लिए राज्य सरकारों को धन उपलब्ध कराया गया है। देश भर में आईसीएआर के 193 संस्थानों द्वारा 263 एग्री-ड्रोन खरीदे गए हैं। इन संस्थानों के 260 कर्मियों ने ड्रोन पायलट प्रशिक्षण लिया है। कृषि में ड्रोन के फायदों के बारे में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से, इन संस्थानों ने 16,471 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का पालन करते हुए पोषक तत्वों, उर्वरकों, रसायनों (कीट और कीटनाशक) अनुप्रयोगों पर 15,075 ड्रोन प्रदर्शन किए हैं।
सरकार ने हाल ही में 1261 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ड्रोन प्रदान करने के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना “नमो ड्रोन दीदी” को भी मंजूरी दे दी है। इस योजना का लक्ष्य कृषि प्रयोजन (उर्वरकों और कीटनाशकों के अनुप्रयोग) के लिए किसानों को किराये की सेवाएं प्रदान करने के लिए 15000 चयनित महिला एसएचजी को ड्रोन प्रदान करना है। कुल 15,000 ड्रोनों में से, पहले 500 ड्रोन 2023-24 में लीड फर्टिलाइजर कंपनियों (एलएफसी) द्वारा खरीदे जाएंगे, जो चयनित एसएचजी को वितरण के लिए अपने आंतरिक संसाधनों का उपयोग करेंगे। इस योजना के तहत, 2024-25 और 2025-26 के दौरान शेष 14500 ड्रोन प्रदान किए जाएंगे और महिला एसएचजी को खरीद के लिए ड्रोन की लागत का 80 प्रतिशत केंद्रीय वित्तीय सहायता के रूप में और उपकरण/सहायक शुल्क के लिए 8.0 लाख रुपये तक दिये जाएंगे। एसएचजी के क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) राष्ट्रीय कृषि इन्फ्रा फाइनेंसिंग सुविधा (एआईएफ) के तहत ऋण के रूप में शेष राशि (खरीद की कुल लागत घटाकर सब्सिडी) बढ़ा सकते हैं। सीएलएफ को एआईएफ ऋण पर 3 प्रतिशत की दर से ब्याज छूट प्रदान की जाएगी। यह योजना किसानों के लाभ के लिए बेहतर दक्षता, फसल की पैदावार बढ़ाने और संचालन की कम लागत के लिए कृषि में उन्नत प्रौद्योगिकी को शामिल करने में मदद करेगी। यह योजना एसएचजी को स्थायी व्यवसाय और आजीविका सहायता भी प्रदान करेगी और वे प्रति वर्ष कम से कम 1.0 लाख रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित करने में सक्षम होंगे।
जैसा कि राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा सूचित किया गया है, उन्होंने पायलट आधार पर पूर्ण वाटरशेड और जनजातीय विकास परियोजनाओं में रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती के माध्यम से कृषि-पारिस्थितिकी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए वाटरशेड और जनजातीय विकास निधि के तहत जीवा कार्यक्रम शुरू किया है। संयोग से, जिन गैर सरकारी संगठनों ने वाटरशेड और जनजातीय विकास परियोजनाओं को लागू किया है, वे जीवा कृषि-पारिस्थितिकी कार्यक्रम (प्राकृतिक खेती) की कार्यान्वयन एजेंसियों के रूप में कार्य कर रहे हैं।
यह जानकारी केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

Mainpuri UP News – पैसेंजर ट्रेन से गांव मोहनपुर के पास गोवंश टकराया चालक ने ट्रेन पर पाया काबू

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 मैनपुरी। मंगलवार की शाम फर्रुखाबाद टूंडला पैसेंजर ट्रेन से गांव मोहनपुर के पास गोवंश टकरा गया। चालक ने किसी प्रकार से ट्रेन पर काबू पाया। मौके पर करीब 10 मिनट तक ट्रेन रुकी रही। उच्चाधिकारियों को जानकारी के बाद ट्रेन आगे के लिए रवाना हुई।
जिले में बड़ी संख्या में गोवंश छुट्टा घूम रहा है। जो आए दिन हादसों को आमंत्रण दे रहा है। सोमवार की रात कोहरे के चलते बिछवां क्षेत्र में गोवंश को बचाने के प्रयास में ट्रक पलट गया जिसमें चालक की मौत हो गई। वहीं मंगलवार की शाम फर्रुखाबाद से टूंडला जा रही पैसेंजर ट्रेन से एक गोवंश टकरा गया। इस दौरान चालक की समझदारी से हादसा तो टल गया। लेकिन यदि चालक लापरवाही करता तो हादसा भी हो सकता था। गोवंश के टकराने के कारण करीब 10 मिनट तक गांव मोहनपुर के पास ट्रेन रुकी रही। चालक और परिचालक ने मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी।
मोहनपुर के पास फर्रुखाबाद-टूंडला पैसेंजर से गोवंश टकरा गया था। इससे ट्रेन थोड़ी देर के लिए रुकी रही। किसी प्रकार की कोई क्षति नहीं हुई है। छुट्टा गोवंश के कारण आए दिन इस प्रकार की घटनाएं होती रहती हैं। एचएस मीणा, स्टेशन अधीक्षक मैनपुरी