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कन्फ्यूज्ड और दिशाहीन राजनीतिज्ञ हैं राज ठाकरे- श्री संजय पांडेय

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भाषावाद और प्रांतवाद की राजनीति पर भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा (महाराष्ट्र) के अध्यक्ष श्री संजय पांडे का मनसे पर करारा प्रहार
-नासिक। भारतीय जनता पार्टी (महाराष्ट्र) उत्तर भारतीय मोर्चा के अध्यक्ष श्री संजय पांडे ने कहा कि राज ठाकरे कन्फ्यूज्ड और दिशाहीन राजनीतिज्ञ है। “मोदी@9″ और “संपर्क से समर्थन” के अभियान के तहत उत्तर महाराष्ट्र की यात्रा पर निकले श्री संजय पांडेय ने बुधवार को नासिक में रह रहे उत्तर भारतीयों के ज्ञापन का संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे पर यह करारा हमला बोला।
  भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री संजय पांडे ने कहा कि राज ठाकरे ने जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना पार्टी बनाई थी तब वह सेकुलर थे। उसके बाद नासिक महानगरपालिका में भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा की। फिर मोदी भक्त हुए और कुछ दिनों के लिए मोदी विरोधी भी बने। उसके बाद उन्होंने हिंदुत्व का दामन थामा। हिंदुत्व के मुद्दे पर भी जब उनकी दाल नहीं गली तो एक बार फिर प्रांत वाद और भाषावाद की राजनीति पर उत्तर पड़े हैं। श्री संजय पांडे ने कहा कि राज ठाकरे दिशाहीन राजनीतिज्ञ है। अब सनातन धर्मी हिंदू न वर्ण व्यवस्था, न प्रांतवाद, न भाषावाद के बहकावे में आने वाला है। महारष्ट्र और देश की जनता यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को विश्व गुरू बनाने के लिए सज्ज है और महाराष्ट्र में हमारे नेता उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य में विकास हो रहा है। अब देखना है कि राज ठाकरे भाषावाद और प्रांतवाद की राजनीति में परास्त होने के बाद कौन सी डगर पर जाएंगे।

नासिक से “मोदी @9” और “संपर्क से समर्थन अभियान” का शुभारंभ

भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा का दोबारा प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद श्री संजय पांडेय जी बुधवार को सुबह 8 बजे त्रयम्बकेश्वर महादेव का दर्शन करने के बाद उत्तर महाराष्ट्र में नासिक से “मोदी @9″ और “संपर्क से समर्थन” की शुरुआत की। त्रयम्बकेश्वर महादेव के दर्शन के बाद सबसे पहले सुबह 10.30 बजे नासिक में भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा की जिला कार्यकारिणी की बैठक की। इसके बाद जिले के प्रमुख प्रतिष्ठित व प्रबुद्ध उत्तर भारतीयों से मुलाकात की।

देवेन्द्र फडणवीस को बताएंगे उत्तर भारतीयों की व्यथा

इस दौरान नासिक में रहने वाले उत्तर भारतीयों के एक प्रतिनिधि मंडल ने श्री संजय पांडे से मिलकर अपनी समस्याओं का एक ज्ञापन सौंपा। साथ ही, नाशिक में मनसे के कार्यकर्ताओं द्वारा कवि सम्मेलन रुकवाने की शिकायत की। इस दौरान श्री संजय पांडेय ने मनसे पर हमला बोला। श्री संजय पांडेय ने दो टूक कहा कि प्रदेश में उत्तर भारतीयों के हितों का पूरी तरह संरक्षण होगा। राज्य सरकार आपके साथ है। हम इस मामले को उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस तक लेकर जाएंगे। उत्तर भारतीयों को किसी से डरने की आवश्यकता नही है। 

करमपुर में कसाई ने चुराई गाय को बनाया दावत का खाना, ग्रामीणों ने पुलिस में दी शिकायत

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उत्तर प्रदेश: करमपुर चौधरी में एक गौ माता और एक बछड़ा जो कि हर दरवाजे पर सुबह जाती थी सभी लोग उसके लिये रोटी रात में बढ़ती से कर रखते थे। आज महीना भर से गाय और बछड़ा दोनों नजर नहीं आए, फिर किसी गांव वाले व्यक्ति के द्वारा जानकारी मिली कि, गांव के कसाई ने गौ माता और बछड़े को काट दिया है। किसी की बारात में परोसा गया था।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: करमपुर चौधरी में एक गौ माता और एक बछड़ा जो कि हर दरवाजे पर सुबह जाती थी सभी लोग उसके लिये रोटी रात में बढ़ती से कर रखते थे। आज महीना भर से गाय और बछड़ा दोनों नजर नहीं आए, फिर किसी गांव वाले व्यक्ति के द्वारा जानकारी मिली कि, गांव के कसाई ने गौ माता और बछड़े को काट दिया है। किसी की बारात में परोसा गया था। बैरियर 1 पुलिस चौकी को सूचना दी थी।
उन्होंने एप्लीकेशन मांगी, अगर उस कसाई को पुलिस ने नहीं पकड़ा तो एसपी के यहां जाकर उनसे बात की जाएगी। बैरियर बन चौकी चौकी पुलिसकर्मी सत्य से सख्त कार्रवाई करें उसी में अच्छाई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य गृह विभाग से संबंधित लंबित प्रकरणों को पूर्ण किये जाने के दिये कड़े निर्देश

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दिनांक 10. अक्टूबर ,देहरादून सचिव, गृह मंत्रालय, भारत सरकार की उपस्थिति में मा० गृहमंत्री, भारत सरकार द्वारा विभिन्न विभागों के लंबित प्रकरणों के संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा समीक्षा बैठक आहूत की गयी!,
जिसके तहत अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग, उत्तराखण्ड शासन द्वारा निम्नवत निर्देश दिये गये हैं:-

मा0 गृहमंत्री, भारत सरकार द्वारा पुलिस अधिकारियों / कार्मिकों को गुणात्मक प्रशिक्षण दिये जाने के संबंध में पुलिस मुख्यालय देहरादून से सुस्पष्ट प्रस्ताव अविलम्ब प्राप्त किये जाने के निर्देश दिये गये हैं।

एस0आई0एस0एफ0 तथा पर्यटन पुलिस के गठन के संबंध में समयबद्ध रूप से पुलिस मुख्यालय, देहरादून से सुस्पष्ट प्रस्ताव प्राप्त कर आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिये गये हैं।

गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रख्यापित “मॉडल जेल मैनुअल” एवं “मॉडल जेल एक्ट 2023” को उत्तराखण्ड राज्य की परिस्थिति के अनुरूप कतिपय संशोधन के साथ राज्य में लागू किये जाने तथा “मॉडल फायर बिल” के संबंध में सुस्पष्ट प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय, देहरादून से समयबद्ध रूप से प्राप्त किये जाने के निर्देश दिये गये हैं।

गृहमंत्री, भारत सरकार द्वारा नशीले पदार्थों की तस्करी पर कड़ी रोकथाम लगाये जाने संबंधी निर्देशों के आलोक में अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग, उत्तराखण्ड शासन द्वारा राज्य में नशीले पदार्थों के विरुद्ध टास्क फोर्स (A.N.T.F.) के समयबद्ध गठन के निर्देश दिये गये हैं, साथ ही साथ NCORD की जनपद स्तरीय मासिक बैठकों को नियमित रूप से किये जाने के निर्देश दिये गये तथा गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नशीले पदार्थों से संबंधित संवेदनशील प्रकरणों, जिनका अन्तर्राज्यीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय गठजोड़ परिलक्षित होता हो ऐसे प्रकरणों में एन०आई०ए० एवं एन०सी०बी० का सहयोग प्राप्त किये जाने के निर्देश दिये गये हैं।

राज्यान्तर्गत संचालित होटलों में ठहरने वाले विदेशी नागरिकों से C-Forms भराये जाने संबंधी बाध्यता का कड़ाई से अनुपालन कराये जाने के निर्देश दिये गये हैं साथ ही राज्य सरकार द्वारा Foreigners Registration Act के नियमों में यथाआवश्यक संशोधन हेतु प्रस्ताव उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिये गये हैं।

Vehicle Scrapping Policy में विहित निर्देशानुसार सुस्पष्ट प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार को यथाशीघ्र प्रेषित किये जाने के निर्देश दिये गये हैं।

वोकल फॉर लोकल’और ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ को समर्पित खादी महोत्सव

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अनिल बेदाग, मुंबई
खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन और वोकल फॉर लोकल के विचार। एक बार फिर
खादी अपने नए विचारों के साथ सामने आई है  जिसका उद्देश्य नागरिकों को आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में योगदान देने के लिए खादी उत्पाद खरीदने और पहनने के लिए प्रोत्साहित करना है।
     अक्टूबर खादी महोत्सव का महीना है। यह महोत्सव “वोकल फॉर लोकल” पहल और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सोचे गए ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ का समर्थन करने को समर्पित है। महात्मा गांधी की 154वीं जयंती मनाते हुए केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री नारायण राणे ने मुंबई में खादी यात्रा को हरी झंडी दिखाई थी और 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2023 तक होने वाले ‘खादी महोत्सव’ की घोषणा की।
       इस अभियान का उद्देश्य खादी और ग्रामोद्योग, हथकरघा, हस्तशिल्प, ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) उत्पादों और स्थानीय स्तर पर उत्पादित विभिन्न पारंपरिक और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना है। यह महोत्सव विभिन्न राज्यों के खादी उत्पादों की एक विविध शृंखला का प्रदर्शन करता है। इसमें खादी के कपड़े, रेशम की साड़ी, ड्रेस मटीरियल, कुर्ते, जैकेट, बेडशीट, कालीन, रसायन मुक्त शैंपू, शहद, अन्य घरेलू सामान, और साथ ही उत्कृष्ट कला और हस्तशिल्प शामिल हैं।

      सरकार ने ठोस नतीजे पाने के लिए देश भर में शुरू की जाने वाली कई विशिष्ट जागरूकता गतिविधियों की पहचान की है। इन मुख्य गतिविधियों में सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर छात्रों और आम जनता के लिए क्विज़ प्रतियोगिताएं और निबंध लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित करना और साथ-साथ सेल्फी प्रतियोगिताएं, ई-प्रतिज्ञाएं, जिंगल प्रतियोगिताएं, क्रिएटिव फिल्म प्रतियोगिताएं, नुक्कड़ नाटक और वीडियो गेम प्रतियोगिताएं आयोजित करना शामिल है। इसका उद्देश्य युवाओं को खादी, ‘वोकल फॉर लोकल’ के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें हमारी अर्थव्यवस्था, पारिस्थितिकी और महिला सशक्तिकरण के लिए इनसे होने वाले लाभों के बारे में जागरूक करना है। यह बड़े पैमाने पर जनता और विशेष रूप से युवाओं को खादी और स्थानीय उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित करेगा और उनमें स्थानीय उत्पादों के प्रति गौरव पैदा करेगा।
इस अनुसरण में, भारत सरकार ने ठोस परिणाम प्राप्त करने के लिए देश भर में की जाने वाली विशिष्ट जागरूकता गतिविधियों की पहचान की है। सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर छात्रों और आम जनता के लिए आयोजित की जा रही क्विज़ प्रतियोगिता और निबंध लेखन प्रतियोगिता के जरिये खादी प्रेमियों के बीच वोकल फॉर लोकल की भावना को जगाने और उन्हें भारत के इतिहास के इस शानदार अध्याय की याद दिलाने का एक प्रयास है। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को उचित पुरस्कार दिया जाएगा।
     इसी तरह नारा प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को ‘खादी महोत्सव’ विषय पर ध्यान आकर्षित करने वाले नारे के साथ आना होगा। नारा लेखन प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य नागरिकों के बीच खादी और एक कपड़े के रूप में इसके प्रचार के बारे में जागरूकता पैदा करना, स्थानीय पहल के लिए मुखर के महत्व के बारे में नागरिकों के बीच ज्ञान विकसित करना, फोकस क्षेत्रों की प्रासंगिकता के बारे में समझ को बढ़ावा देना और नागरिकों को प्रोत्साहित करना है। भारत को आत्मनिर्भर बनाने में खादी और स्थानीय उत्पादों पर रचनात्मक रूप से अपने विचार व्यक्त करना।    ई-प्रतिज्ञा सरकार की वेबसाइट पर पोस्ट की जाएगी और नागरिकों को एक प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।
       सेल्फी प्रतियोगिता के माध्यम से सभी नागरिकों, फैशन के प्रति उत्साही और टिकाऊ कपड़ों के समर्थकों से खादी और स्थानीय उत्पादों, हमारे देश की विरासत के कपड़े के प्रति अपना प्यार सबसे रचनात्मक तरीके से दिखाना है।
      अभियान के तहत वीडियो गेम प्रतियोगिता जहां प्रतिभागी एक गेम तैयार कर सकते हैं। और 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2023 तक प्रस्तावित साइट पर अपलोड कर सकते हैं।
खादी यात्रा स्थानीय उत्पादों, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र के लिए खादी और फैशन के लिए खादी के महत्व के बारे में युवाओं के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए खादी यात्रा के अलावा पूरे भारत में भी आयोजित की जाएगी।
   जिंगल प्रतियोगिता और क्रिएटिव फिल्म प्रतियोगिता 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक आयोजित की जा रही है। भारतीय नागरिक प्रतियोगिताओं में भाग लेने के पात्र हैं और विजेताओं को उचित पुरस्कार दिया जाएगा।
     5000 दुकानों के माध्यम से खादी, हथकरघा और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक सफल बिक्री अभियान बनाना एक सुविचारित रणनीति तैयार करना और उपभोक्ताओं को खादी और हथकरघा की विशिष्टता और लाभों के बारे में शिक्षित करना होगा।
    नुक्कड़ नाटक के अंतर्गत बढ़ती जागरूकता की अवधारणा पर विभिन्न स्तरों पर मैदानी स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी और प्रतिभागियों को उचित पुरस्कार दिया जाएगा।
 उपयुक्त पाए जाने पर प्रतियोगिता ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में होगी। सभी प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित किए जाएंगे।

गिरिडीह गौशाला प्रांगण में श्री हरी गौ ग्राम योजना के तहत 5 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

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गौशाला प्रांगण में एकल अभियान के द्वारा संचालित “श्री हरी गौ ग्राम योजना” के तहत 5 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त परिवार को गौशाला के सहयोग से एक गौवंश दिया जाएगा तथा साथ में एक वर्ष की गौ पालन पोषण की राशि भी दी जाएगी।

गौवंश के गोबर को लाभुक के द्वारा सुखाकर रखा जाएगा जिसे संस्था के द्वारा वापस ख़रीद किया जाता है। संस्था के द्वारा ख़रीद किए गए गोबर में कुछ आवश्यक सामग्री मिलाकर एक रेडीमेड प्रिमिक्स को वापस लाभुक को दिया जाता है।

उपरोक्त प्रिमिक्स से लाभुक परिवार के सदस्यों के द्वारा दिया वग़ैरह बनाया जाता है जिसे एकल संस्था के द्वारा ख़रीद कर बहुत ही सुंदर तरीक़े से पैकिंग कर महानगरों में बेचा जा रहा है। अनुपयोगी गोवंश को बचाने के लिए किया जा रहा यह कार्य वाक़ई आने वाले भविष्य में एक मिसाल क़ायम होगी।

भगवान की पूजा से घर की रौनक

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आर. सूर्य कुमारी –

1998 के मार्च महीने में मेरी माताजी चल बसी थीं। उनको स्वस्थ करने के मेरे और मेरे भाई साहब के सारे प्रयास
विफल हो गए थे। ऐन मौके पर तो मैंने दृढ़ता से सब कुछ संभाल लिया, बाद में गंभीर डिप्रेशन से घिर गई। किसी तरह
भारी मन लिए भाई साहब को आफिस भेजती थी। मेरे समय का एक बहुत बड़ा हिस्सा माताजी को याद करने,
चुपचाप बैठे या लेटे रहने में बीतता था। इसी तरह दो साल बीत गए।

मेरी माताजी के चल बसने के बाद एक तो विषाद के कारण और दूसरा भगवान से नाराजगी के कारण मैंने माताजी के
सारे पूजा के सामानों को एक पेटी में बंद कर दिया। पूजा-पाठ बंद कर दिया। समय-समय पर जाला-वाला भी साफ
नहीं कर पाती थी। दो साल में घर की व्यवस्था बिल्कुल डगमगा गई थी। भाई साहब बीच बीच में नाराज होते थे, मगर
मेरी मानसिक स्थिति को देखते हुए दबाव भी नहीं बना पाते है।

सन् 2000 के सितंबर माह में एक दिन मैं सोफे पर लेटी हुई थी। जब उठी तो पैर के नीचे कुछ गीला-गीला सा लगा।
मैंने बत्ती जलाकर देखा तो पाया कि फर्श पर खून की कुछ बूंदे गिरी हुई हैं। मैंने फिर ध्यान से देखा। खून, सरसों का
तेल व दूध इन तीनों को मिलाकर जिस तरह के मिश्रण की हम कल्पना कर सकते है, वैसा ही मिश्रण था वह। मैंने
सूंघ कर देखा तो बड़ी विचित्र सी गंध थी। घर में कोई भी जानवर नहीं था और तैलीय खून किस जानवर का है यह भी

पता नहीं लगा पा रही थी। मुझे एक बार आभास हुआ कि कहीं कोई बला ने तो घर में प्रवेश नहीं कर लिया। फिर भी
मैंने बात को अपने आप से टाल दिया। भाई साहब जब शाम को लौटे तो उनसे भी नहीं बतलाया, चुप रही।

कुछ समय बाद फिर एक बार इस घटना की पुनरावृत्ति हुई। वैसी ही खून दूध के मिश्रण सी लगने वाली बूंदे गिरी हुई
थीं। अब मुझे पक्का समझ में आ गया कि यह किसी बला का कारनामा है। मैंने फर्श साफ किया और नहा लिया। मैं
अज्ञात बला से प्रार्थना की कि वह मुझे अपना पूरा कष्ट दे दे, लेकिन अब कभी घर के अंदर न आए। फिर बहुत दिन
तक बला नहीं आई। उस दिन की दहशत खौफ से बचने के लिए मैंने भाई साहब को कुछ नहीं बतलाया।

अब दीपावली को आने में मात्र दस-बारह दिन बाकी थे। मैं रसोई में खाना बनाने की तैयारी कर रही थी। कुकर में पानी
डालकर दाल-चावल के बर्तन उतारकर ढक्कन की ओर बढ़ी। देख के अवाक रह गई। ढक्कन पर वही बूंदे गिरी हुई थीं।

मैंने ढक्कन साफ कर कुकर तो चढ़ा दिया, फिर फटाफट तैयार होकर बाजार गई। हनुमान जी का एक फोटो, फूल-
माला, प्रसाद, सब कुछ पूरी पूजन सामग्री खरीद लाई और एक टेबल पर हनुमान जी को आसीन कर उनकी पूजा की।
भाई साहब लौटे तो उनको पूरी कहानी कह सुनाई। उन्होंने कहा कि खून का सैम्पल रूई मे ले लेना चाहिए था। यह भी
कहा कि घर की स्थिति ही कुछ ऐसी बन गई कि अब भूत-प्रेत पिशाच अड्डा जमाने की सोच रहे हैं। थोड़ा समय
निकालकर पूजा-पाठ मे मन लगाओ। बाद वाले दिन मैंने माताजी की सभी पूजन-सामग्री निकाली, स्थल को भी साफ किया। भगवान को विराजकर पूजा की। इस घटना के बाद और चार साल हम धनबाद में इस मकान में रहे, मगर उस तरह की घटना की चौथी बार पुनरावृत्ति नहीं हुई।

इसलिए एक बात आपसे बताना चाहती हूं, आपके यहां भी कभी कोई गम आ सकता है, अप्रिय घटना घट सकती है,
कोई गंभीर रूप से बीमार हो सकता है। अगर बहुत दिनों तक घर में क्रन्दन मचा रहे, शोक-दुख मचा रहे दीप बत्ती बंद
हो गई हो तो बलाएं, आपके घर को अपना अड्डा बना सकती है, आपको नुकसान पहुंचा सकती है। आपके घर में
रौनक बनी रहे, सुख-दुख के बीच ही सही सुबह-शाम भगवान की पूजा-आरती होनी चाहिए अगर परिस्थिति इस
लायक नहीं हो तो भी सुबह-शाम हनुमान जी को दो अगरबत्ती दिखाकर हाथ जोडऩा कभी न भूलें।

उपरोक्त घटना सत्य घटना है, मुझे भी भूत, प्रेत, पिशाचों पर विश्वास नहीं था। मगर अब मुझे पता चल गया कि ये
पैशाचिक हवाएं खण्डहरों में, वीरानों में या जहां पूजा पाठ नहीं होता है, वहां रहती है, तथा वहीं अपना अड्डा बनाने की
कोशिश करती हैं। (विभूति फीचर्स)

मैहर की शारदा माता , भारत में जगत जननी भगवती दुर्गा

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दिनेश चंद्र वर्मा –
भारत में जगत जननी भगवती दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा, आराधना, उपासना और भक्ति की जाती है। इन स्वरूपों में एक स्वरूप महासरस्वती का भी है। महासरस्वती विद्या, बुद्धि, सुख और शांति की दाता हैं। उनका स्वरूप सौम्य है। इसी तरह शांत एवं सौम्य मुद्रा की प्रतिमा मध्यप्रदेश के सतना जिले के मैहर नामक स्थान पर  प्रतिष्ठित है। यह प्रतिमा हंस पर आरूढ़ है तथा पुस्तक धारण किये हुए है। लोकमान्यता में शारदा माता के नाम से  प्रसिद्ध इस स्थान को भगवती दुर्गा का शक्ति पीठ कहा जाता है।  धर्मग्रन्थों के अनुसार भगवती सती ने जब यज्ञ कुंड में गिरकर आत्मदाह किया था तब उनके कंठ में शोभायमान हार  जिस स्थान पर आकर गिरा वह स्थान 'माई का हार के नाम से प्रसिद्ध हुआ जो कालांतर में मैहर कहलाने लगा। एक उल्लेख यह भी मिलता है कि मय दानव के वध के उपरांत भगवती दुर्गा ने इस स्थान पर विश्राम किया तथा अपने उग्र रूप को शांत किया। इसलिये यह स्थान मैहर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

मध्यकाल में मैहर की शारदा मां की कीर्ति सारे उत्तर भारत में व्याप्त थी। वे मध्यकाल के दो महान योद्धा आल्हा- ऊदल की आराध्य देवी रही हैं। लोकमान्यता है कि विभिन्न युद्धों में विजय प्राप्त करने के लिये आल्हा ने शारदा  माता को प्रसन्न करने के लिये घोर तपस्या की थी तथा अपने पुत्र इंदल की बलि दे दी थी। किवंदती है कि इस भक्ति- भावना से प्रसन्न होकर मां शारदा ने इंदल को जीवित कर दिया था तथा आल्हा को अमर होने का वरदान दिया था। आज भी कई लोग यह कहते हुये पाये जाते हैं कि आल्हा आज भी जीवित है और वे प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में मां शारदा की पूजा करने आते हैं। रात्रि को मैहर के मंदिर में किसी को रहने और ठहरने नहीं दिया जाता है। इसके पीछे यही धारणा है कि आल्हा की पूजा और आराधना में कोई व्यवधान न हो। आल्हा जीवित है या नहीं यह विवाद और  अविश्वास का विषय हो सकता है, पर इस बारे में दो राय नहीं हो सकती कि बुंदेलखंड के लोक जीवन में आल्हा का नाम अमर है। जिसका प्रमाम है जगनिक द्वारा रचित लोक काव्य आल्हखंड जिसे बुंदेलखंड के गांव-गांव में आज भी गाया जाता है।
मैहर इलाहाबाद-कटनी रेलमार्ग के बीच एक स्टेशन है, जहां रेल और बस दोनों से पहुंचा जा सकता है। शारदा माता का मंदिर त्रिकूट नामक एक पहाड़ी पर स्थित है जिस पर पहुंचने के लिये 565 सीढिय़ां चढऩा पड़ती है। पहले ये साीढिय़ां काफी ऊंची थी, पर अब मार्ग के कुछ स्थानों पर छोटी सीढिय़ां भी बना दी गई है। इस तरह अब सीढिय़ों की संख्या 1200 हो गयी है। कार, स्कूटर तथा अन्य वाहनों के लिये भी एक मार्ग भी बना दिया गया है। शारदा माता के मूल मंदिर का निर्माण दसवीं शताब्दी के आसपास हुआ। मंदिर की दीवार पर एक शिलालेख भी है पर  अब मंदिर का मूल स्वरूप परिवर्तित हो गया है एवं दिन-प्रतिदिन यह मंदिर भव्य स्वरूप धारण करता जा रहा है। मंदिर में शारदा माता की भव्य एवं दिव्य प्रतिमा प्रतिष्ठित है। प्रतिमा के बायीं ओर भगवान नरसिंह की भी एक प्रतिमा प्रतिष्ठित है। इसी परिसर में काल भैरव की प्रतिमा है, दायीं ओर हनुमान जी की प्रतिमा है।
मां शारदा की लोकमान्यता कितनी अधिक है, इसका उदाहरण महान संगीतकार अलाउद्दीन खां की भक्ति है। वे वृद्धावस्था तक में प्रतिदिन 565 सीढिय़ां चढ़कर इस मंदिर में जाते थे तथा वहां सरोद वादन करते थे। मां शारदा या सरस्वती संगीत की भी देवी हैं। वे स्वयं वीणा वादिनी है। इसलिये यह धारणा है कि मां शारदा की कृपा से उस्ताद अलाउद्दीन खां विश्वविख्यात संगीताकर बने।
शारदा देवी को पुत्रदाता एवं संतान दाता माना जाता है। एक मान्यता यह भी है पुत्र प्राप्ति के लिये मां पार्वती ने देवी शारदा के बीज मंत्र का जाप किया था, जिससे भगवान गणेश की उत्पत्ति हुई थी। पुत्र प्राप्ति तथा अन्य
मनोकामनाओं को लेकर प्रतिदिन सैकड़ों नर-नारी मैहर में शारदा माता के दर्शन करने पहुंचते हैं।
एक परंपरा मनौती पूरी हो जाने पर अपनी संतानों या अपना स्वयं का मुंडन कराने की भी है। मंदिर के परिसर के बाहर पाहड़ी पर रोज सैकड़ों मुंडन होते हैं। चैत्र और आश्विन की नवरात्रियों में मैहर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या  हजारों में होती है। इन अवसरों पर विशाल मेले लगते हैं। मैहर के आसपास भी कुछ महत्वपूर्ण स्थान है, जिनमें  गोलमठ, आल्हाताल, गणेश घाटी तथा आल्हा का अखाड़ा आदि उल्लेखनीय है। (विभूति फीचर्स)

वैज्ञानिक आधार पर बरसाती नदियों को ग्लेशियर आधारित नदियों से जोड़ने के प्रयास किये जाएँ – मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड

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टिहरी गढ़वाल ,नरेंद्र नगर 8 अक्टूबर 2023,मध्य क्षेत्रीय परिषद की आयोजित बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सहित प्रतिभाग कर रहे अन्य महानुभावों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस महत्वपूर्ण बैठक को उत्तराखण्ड में आयोजित किये जाने के लिये केंद्रीय गृह मंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मध्य क्षेत्रीय परिषद केंद्र तथा राज्यों के मध्य आपसी सहयोग एवं समान प्रकार के मामलों में सेतु के समान है।
परिषद आपसी विचारों एवं अनुभवों को साझा करने का भी सशक्त माध्यम है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में उत्तराखण्ड से संबंधित कतिपय नीतिगत विषयों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड का 71 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र से आच्छादित है। राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उत्तराखण्ड में अवस्थापना सुविधाओं के विकास तथा आवश्यक सेवाओं के सृजन में अन्य राज्यों की अपेक्षा लागत अधिक रहती है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यावरणीय प्रतिबंधों के कारण विकास कार्यों के संचालन में कतिपय कठिनाइयां रहती है, जबकि हमारे आर्थिक संसाधन भी सीमित हैं। इन परिस्थितियों एवं संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बावजूद राज्य की प्रति व्यक्ति आय को राष्ट्रीय औरत से लगभग दो गुना करने में हम सफल हुए हैं, तथा राज्य के विकास की दिशा में कई उपलब्धियां हासिल कर उत्तराखण्ड को उत्कृष्ट एवं आदर्श राज्य बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड से निकलने वाली गंगा, यमुना, काली सहित अनेक बारहमासी नदियां मैदानी क्षेत्रों की जीवन रेखा भी है। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि वैज्ञानिक आधार पर बरसाती नदियों को ग्लेशियर आधारित नदियों से जोड़ने का अभिनव प्रयास किया जाना चाहिए, इसका लाभ न केवल उत्तराखण्ड को बल्कि पूरे देश को होगा। इसके लिये उत्तराखण्ड सहित अन्य मध्य क्षेत्रीय राज्यों को केंद्र सरकार से तकनीकि एवं वित्तीय सहयोग दिये जाने पर भी उन्होंने बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपने सीमांत क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में ऑल वेदर रोड के अन्तर्गत राज्य में तेजी से काम हो रहा है परन्तु इसे सीमान्त क्षेत्र तक बढ़ाने की आवश्यकता है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन की तर्ज पर राज्य के दूसरे मण्डल में टनकपुर से बागेश्वर रेलवे लाइन का निर्माण किया जाना भी सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का आपदाओं जैसे भूस्खलन, अतिवृष्टि, वनाग्नि, ग्लेशियर खिसकना इत्यादि से चोली दामन का साथ है। इसके लिये राज्य को एक सशक्त वेदर फोर कास्टिंग सिस्टम, डॉप्लर रडार से युक्त अवस्थापना की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीणों को बैंक की सुविधा हो, इसके लिए हम निरंतर कार्य कर रहे हैं इसके लिये उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित ऐसे गांवों में विद्युत व्यवस्था, मोबाइल कनेक्टिविटी तथा बैंकिंग सेवा व्यवस्था में सुधार हेतु केन्द्र सरकार से सहयोग की अपेक्षा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 को ‘‘अन्तर्राष्ट्रीय मिलेट ईयर‘‘ घोषित किया गया है, अतः मिड डे मील में अनिवार्य रूप से बच्चों को मिलेट प्रदान किया जाय ताकि बच्चे स्वस्थ रहें, इस बारे में शिक्षा मंत्रालय तथा खाद्य मंत्रालय के समन्वय से समुचित कार्यवाही किए जाने का भी मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने परिषद की 25वीं बैठक काशी विश्वनाथ की नगरी में रखे जाने का किया प्रस्ताव।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में दुनिया ने देश के सामर्थ्य और शांति के प्रदर्शन को स्वीकार किया है। विभिन्न क्षेत्रों की परिषदों की बैठकों का आयोजन केन्द्र राज्य संबंधों को बेहतर बनाने का कार्य कर रहे है जो समस्याओं के समाधान का उपयुक्त मंच बन रहा है। उन्होंने मध्य क्षेत्रीय परिषद की 25वीं बैठक काशी विश्वनाथ की नगरी में आयोजित किये जाने का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा गृहमंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में बीमारू से समृद्ध राज्य के रूप में पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान उत्तराखण्ड व हिमाचल के साथ हिमालयी राज्यों को आपदा की समस्या का सामना करना पड़ा है। अब कई नए क्षेत्र भी इसमें शामिल हो रहे है। इसके लिए उन्होंने नदियों के केचमेंट एरिया को सुरक्षित किये जाने के साथ ही नदियों के चैनलाइजेशन की दिशा में पहल किये जाने की बात कही। उन्होंने आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं को रोकने में भी मिशन मोड में कार्य करने पर बल दिया। मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में भी सभी राज्य आपसी सहभागिता से इस दिशा में क्या कुछ बेहतर कर सकते है इस पर चिन्तन किये जाने की उन्होंने जरूरत बतायी।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल, श सुबोध उनियाल, मुख्य सचिव डॉ. एस.एससंधू सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।

राज्यपाल रमेश बैस से टीम मिशन पत्रकारिता और एमएनबी की सदिच्छा भेंट

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दिव्यांग बच्चों से मुलाकात कर राज्यपाल ने उनके हैंडीक्राफ्ट वस्तुओं का भेंट किया स्वीकार

महामहिम की शुभकामनाओं से दिव्यांग करेंगे अब प्रखर पत्रकारिता

मुंबई। महाराष्ट्र के महामहिम राज्यपाल रमेश बैंस ने एम.एन.बी इंडस्ट्रियल होम फॉर द ब्लाइंड तथा मिशन पत्रकारिता टीम के साथ मुंबई के वालकेश्वर स्थित राजभवन में एक सदिच्छा भेंट वार्ता का आयोजन किया। इस अवसर पर दृष्टि बाधित बच्चों ने उन्हें हैंडीक्राफ्ट से बने वस्तुएं भेंट की।
महामहिम राज्यपाल बैंस के साथ इस विशेष मुलाकात में मिशन पत्रकारिता के अध्यक्ष शैलेश जायसवाल ने संस्था के सकारात्मक पत्रकारिता को लेकर जारी विचार क्रांति अभियान की जानकारी देते हुए उन्हे बताया कि देश में पहली बार मिशन पत्रकारिता एक ऐसा कदम उठाने जा रही है, जिसमें नेत्रहिन, गूंगे बहरे तथा अन्य दिव्यांग छात्रों को टीवी न्यूज पत्रकारिता का प्रशिक्षण देकर उनके द्वारा मीडिया जगत में सकारात्मक क्रांति लाने का प्रयास किया जाएगा। जहां संस्था के डिजिटल न्यूज चैनल के माध्यम से दिव्यांग जन पत्रकारिता में अपनी प्रतिभा से जनजागृति लाने का सार्थक प्रयास करेंगे। जायसवाल ने गर्व किया कि राज्यपाल बैस जैसे महान व्यक्तियों के साथ मिलकर हम सभी समाज के लिए बेहतर बदलाव लाने का काम कर रहे हैं। साथ ही नैब इंडिया संस्था के अध्यक्ष विमल कुमार डेंगला ने भी सभी का धन्यवाद जताया।
इस आयोजन की मुख्य सूत्रधार समाज सेविका बबीता वर्मा ने इस अवसर पर कहा कि वे हमेशा से दिव्यांगजनों के आर्थिक प्रबोधन के लिए उनके साथ खडी रही है। साथ ही मिशन पत्रकारिता के माध्यम से वे समाज और मीडिया जगत में सकारात्मक विचार क्रांति लाने का निरंतर प्रयास करती रहेगी।


इस विशेष अवसर पर खुद को मूर्तिकार बताते हुए महामहिम ने दिव्यांग छात्रों द्वारा बनाए गए हैंडीक्राफ्ट वस्तुओं की भरपूर तारीफ की। यह वस्तुएँ दिव्यांग छात्रों के कौशल और सृजनात्मकता का प्रमोशन करती हैं और उन्हें स्वावलंबी बनने के लिए साहसित करती हैं। उन्होंने दिव्यांग छात्रों के सहायता के लिए पांच लाख रूपए की धनराशि दान की। इस दान के माध्यम से, राज्यपाल ने दिव्यांग छात्रों के जीवन में एक बड़ी मदद प्रदान की है और उन्हें एक उत्कृष्ट शिक्षा की ओर प्रोत्साहित किया है। राज्यपाल बैस ने दिव्यांग छात्रों के साथ बिताई इस मूल्यवान समय के लिए बड़े ही प्रेरणास्पद और महत्वपूर्ण संदेश दिया है, और उन्होंने इस मौके को उनके लिए यादगार बना दिया है।
इस चर्चासत्र में दिव्यांग छात्रों की ओर से MNB के CEO तथा पत्रकार मयंक शेखर ने संचालन करते हुए दोनों संस्थाओं के कार्य का परिचय देते हुए महामहिम का अभिवादन किया।
इस विशेष मुलाकात में खास तौर पर मिशन पत्रकारिता वूमेन जोन की अध्यक्षा श्रीमती बबीता वर्मा, श्रद्धा सिंह, प्रिंस करण सिंह वर्मा, नैब इंडिया की ED पल्लवी कदम, एमएनबी होम फॉर ब्लाइंड के CES रमाकांत साटम, दिव्यांग कोरियोग्राफर ज्योति तथा शमीम अहमद आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे।