मुम्बई – अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही सामाजिक संस्था ” शिक्षा सेवा फाऊंडेशन ” के द्वारा एक कार्यक्रम का आयोजन दहीसर के स्वामी विवेकानंद स्कूल में आयोजित किया जहां मुख्य अतिथि के तौर पर सुश्री श्वेता रॉय एस.आर क्वींस मीडिया की संस्थापक मौजूद रही। सैकड़ो की संख्या में स्कूल की क्षत्राओं और अध्यापकों तथा महिलाओ ने भाग लिया। इस अवसर पर शिक्षा सेवा फाउंडेशन द्वारा प्रोजेक्ट अस्तित्व की घोषणा की गई , अस्तित्व एक ऐसी परियोजना है जहां ” शिक्षा सेवा फाउंडेशन ” सभी वंचित महिलाओं को एक छत के नीचे लाने के प्रयासरत होगा। इस परियोजना के माध्यम से उन जरुरत मंद महिलाओँ को ट्रेनिंग दे कर उन्हें रोजगार मुहैया करवाना है।
Launching Project Aastitav by siksha Seva Foundation
संस्था के संस्थापक सीईओ श्री मणिकांत रामसजीवन तिवारी ने बताया कि अस्तित्व परियोजना के माध्यम से हम समाज की उन महिलाओं को मदद पहुंचाने की पूरी कोशिश करेंगे जो सामाजिक और आर्थिक तौर पर बहुत पिछड़ी है। उन्हें ट्रेनिंग दे कर जैसे सिलाई इत्यादि , उन्हें रोज़गार दे कर मजबूत बनाना है। अस्तित्व परियोजना का पहला सेंटर बांद्रा खेरवाड़ी में खोला जा रहा है।
यह कार्यक्रम स्वामी विवेकानंद स्कूल में सुबह १० बजे से शुरू हो कर दोपहर १२ बजे समाप्त हुआ। कार्यक्रम अन्य अतिथियों में स्कूल की प्रिंसिपल सुरेखा सुड़े , ” शिक्षा सेवा फाउंडेशन ‘ की वित्त और परिचालन प्रमुख – सुश्री वर्षा गुडेकर , संस्था के उपाध्यक्ष आरिफ शेख , तथा नवीन कंचन आदि उपस्थित थे।
आलिया भट्ट की हालिया रिलीज फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ बॉक्स ऑफिस की खिड़की पर धमाल मचाती हुई नजर आ रही है , जो कोरोनोवायरस महामारी के बाद सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर में इतिहास रचने की दिशा में अग्रसर है। फिल्म ट्रेड के आंकड़ों के अनुसार, रॉबर्ट पैटिनसन अभिनीत बैटमैन का प्रतिद्वंद्वी के रूप में सामना करने के बावजूद फिल्म ने अच्छा प्रदर्शन किया है।फिल्म ने रिलीज के दिन शुक्रवार को 5.01 करोड़ की कमाई की, जबकि शनिवार और रविवार को इसने क्रमश: 8.20 करोड़ और 10.08 करोड़ की कमाई की और दूसरे सप्ताहांत में कुल 23.29 करोड़ की कमाई की।
जबकि बैटमैन ने उसी वीकेंड में 21.50 करोड़ की कमाई की। एक अच्छी शुरुआत के बाद फिल्म के कारोबार ने अपने शुरुआती सप्ताहांत और पहले सप्ताह में भी जबरदस्त वृद्धि देखी। अब, अपने दूसरे वीकेंड पर, गंगूबाई काठियावाड़ी के कलेक्शन में एक और उछाल देखने को मिला है। यह फिल्म 100 करोड़ के काफी करीब है और फिल्म प्रेमियों की पहली पसंद बनी हुई है।
यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट लंदन (यूईएल) के द्वारा भारत में पहला कार्यालय ग्लोबल स्टूडेंट सेंटर के नाम से पुणे में स्थापित किया गया है। आइंस्टीन और न्यूटन हॉल, हयात रीजेंसी, पुणे में एक प्रेस मीट में, डैनियल कफ, भर्ती निदेशक, पूर्वी लंदन विश्वविद्यालय और अमोल वर्पे, प्रबंध निदेशक – उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालय भागीदारी, ग्लोबल एजुकेशन सेंटर लंदन, इंग्लैंड, यूके और एशले वेरेस, ग्लोबल सेल्स हेड – मालवर्न इंटरनेशनल ने भारत में उद्योग 4.0 रोजगार को बढ़ावा देने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट लंदन के रणनीतिक दृष्टिकोण की घोषणा की है। पूर्वी लंदन विश्वविद्यालय (यूईएल) न्यूहैम, लंदन, इंग्लैंड के लंदन बरो में स्थित एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय है, जिसकी स्थापना 1898 में हुई थी और 1992 में पब्लिक विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त कर चुका ये विश्वविद्यालयईस्ट लंदन में तीन जगहों पर मौजूद हैं। जिनमें से एक रॉयल डॉकलैंड्स में और अन्य दो स्ट्रैटफ़ोर्ड में स्थित हैं। 2018-19 शैक्षणिक वर्ष से पूर्वी लंदन विश्वविद्यालय क्रमवार अपने पाठ्यक्रमों को विकसित कर रहा है और अपने छात्रों के हित में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अपने पाठ्यक्रम, शिक्षाशास्त्र, अनुसंधान प्रभाव और साझेदारी को बदलने के लिए और सामुदायिक सफलता के लिए एक नई प्रस्तावित योजना के तहत10-वर्षीय रणनीति ‘विजन 2028’ को भारतवर्ष में लागू करना शुरू कर रहा है।
‘यूईएल’ को दुनिया के शीर्ष 200 युवा विश्वविद्यालयों में स्थान दिया गया है, इसके अलावा मनोविज्ञान अनुसंधान के प्रभाव के लिए यूके में पहला, आर्किटेक्चर के लिए लंदन में दूसरा और सिविल इंजीनियरिंग के लिए तीसरा स्थान प्राप्त किया गया है। यूईएल को अंतरराष्ट्रीय समर्थन और वीज़ा सलाह के लिए यूके में भी प्रथम स्थान दिया गया है, और यह लंदन का एकमात्र विश्वविद्यालय है जो परिसर में आवास प्रदान करता है। वैश्विक बाजार सिकुड़ने के साथ, यूईएल पुणे का यह विस्तार एक स्वागत योग्य कदम है।बकौल डेनियल कफ (भर्ती निदेशक, पूर्वी लंदन विश्वविद्यालय) पूर्वी लंदन विश्वविद्यालय को अक्सर करियर के नेतृत्व वाले विश्वविद्यालय के रूप में सर्वोपरि मान्यता दी गई है, और हम यह सुनिश्चित करने की एकमात्र प्रतिबद्धता से वचनबद्ध हैं कि पूर्वी लंदन विश्वविद्यालय के छात्र नियोक्ताओं के लिए पहली पसंद बनें। प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय
30 साल में पहली बार भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी गढ़ माने जाने वाले कांथी नगर पालिका के 21 में से 18 वार्डों में जीत हासिल कर तृणमूल कांग्रेस ने किला ढहा दिया है। भाजपा ने दो वार्डों में जीत हासिल की है और एक वार्ड में एक निर्दलीय आगे चल रहा है। 30 वर्षों में यह पहली बार है जब कांथी नगर पालिका अधिकारी परिवार के बिना होगी। 108 नगर निकायों में यह स्तंभ लिख्रे जाने तक क़रीब 80 पर तृणमूल का क़ब्ज़ा हो गया है। यहां तक कि अधीर रंजन चौधरी क़ा गढ़ कहलाने वाला बरहमपुर में भी तृणमूल लगभग आ गई है। भाजपा सांसद अर्जुन सिंह का गढ़ भाटपाड़ा भी तृणमूल के क़ब्ज़े में आ गया है। हुगली की सभी 12 नगरपालिका पर तृणमूल का कब्जा हो गया है। चपदानी नगरपालिका के 22वार्ड मे तृणमूल ने 11 सीट हासिल की है जबकि 1 कांग्रेस और बाकी 10 निर्दल प्रत्याशियो ने जीता है। संघमित्रा ने सुर बदला
स्वामी प्रसाद मौर्य के काफिले पर पथराव के बाद उनकी बेटी संघमित्रा का सुर बदल गया है। उन्होंने फेसबुक लाइव के जरिये कहा कि पिता के रोड शो पर हमला करने वाले भाजपा प्रत्याशी और नेताओं पर कार्रवाई होनी चाहिए। हमले की जानकारी मिली तो कुशीनगर से फाजिलनगर जाते समय बेवली बाजार में मुझे भी घेरा गया। अभद्रता करने वाले लोग शीर्ष नेतृत्व की सुनने वाले नहीं हैं। मुझे प्रताड़ित करने वालों पर अब कार्रवाई होनी चाहिए। मैंने कहा था कि पिता के प्रचार में नहीं जाऊंगी, मगर अब कहती हूं कि फाजिलनगर की जनता स्वामी प्रसाद का साथ दे। संघमित्रा मौर्य ने आगे कहा, ‘मैं भाजपा की कार्यकर्ता हूं। मैं भाजपा की सांसद हूं और बनी रहूंगी। मुझे किसी की सलाह की जरूरत नहीं है। बदायूं की जनता के वोट से चुनकर मैं संसद में गई, किसी की दयादृष्टि वाली सांसद नहीं हूं। न पार्टी से इस्तीफा दूंगी और न सांसदी से।’
पूर्वांचल की वे 16 सीटें
उत्तर विधानसभा चुनाव आखिरी चरण की ओर बढ़ चला है। छठे और सातवें चरण की 111 सीटों पर 3 मार्च और 7 मार्च को मतदान होना है। पूर्वांचल की 8 जिलों की 16 सीटें ऐसी हैं, जहां अभी तक भाजपा का खाता नहीं खुल सका है। आजमगढ़ की आजमगढ़ सदर, गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर, अतरौलिया, निजामाबाद दीदारगंज और मऊ सदर की सीट पर हमेशा गैर भाजपा दलों जीत होती रही है। गोरखपुर की चिल्लूपार सीट पर भी भाजपा का अब तक खाता नहीं खुला है। पिछले तीन चुनाव में बसपा यहां से जीतती रही है। देवरिया की भाटपाररानी अब तक हुए चुनावों में कांग्रेस चार बार, तीन बार सपा जीत चुकी हैं। इस सीट से मौजूदा विधायक समाजवादी पार्टी से है। इसी तरह जौनपुर की मछलीशहर सीट पर भी आज तक कमल नहीं खिला है। यहां पांच बार कांग्रेस, तीन बार जनता दल, दो बार सपा व बसपा जीत चुके हैं।
दिल्ली दरबार में उत्तराखंड दंगल
उत्तराखंड भाजपा के अखाड़े में जारी दंगल दिल्ली दरबार तक पहुँच गया है। चुनाव नतीजों से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अचानक दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के यहाँ हाजिरी पर सियासी अटकलों का बाज़ार गर्म हैं। पिछले दिनों से उत्तराखंड भाजपा में जिस तरह प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक पर भितरघात के आरोप लगे हैं उससे पार्टी संगठन में बड़ा बदलाव की आहट महसूस की जा रही है ओर वह भी 10 मार्च को चुनाव नतीजे आने से पहले ही। पार्टी के भीतर खेमेबाज़ी के चलते राज्य के नेताओं के एक-एक कर दिल्ली जाकर बैठकें करने को भले ही मतदान के बाद की समीक्षा बताया गया हो मगर लेकिन असल जड़ में सत्ता में वापसी या सत्ता से बाहर होने की सूरत में पार्टी के भीतर होने वाला बदलाव है। इनमें प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी में बदलाव पहले नंबर पर है। संविधान के मुताबिक 2023 में संगठन के चुनाव होने ही हैं। पार्टी प्रदेश संगठन के लिए नया चेहरा तलाश करने की जुगत में हो सकती है।
( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनके स्तंभ प्रकाशित होते हैं।)
झारखंड प्रदेश के जमशेदपुर स्टील सिटी के संस्थापक जमशेद जी नसरवानजी टाटा के जन्म दिन( 3 मार्च ) के अवसर पर बॉलीवुड की चर्चित म्यूजिक कंपनी सान म्यूजिक द्वारा गीतकार हरिशंकर सूफी की नई पेशकश म्यूजिक वीडियो ‘तेरे शहर में’ जारी किया गया।
बॉलीवुड की मशहूर गायिका साधना सरगम के स्वर से सजे इस म्यूजिक सिंगल ‘तेरे शहर में’ के ऑडियो को भी अलग अलग प्लेटफॉर्म क्रमशः यूट्यूब म्यूजिक, गाना, स्पॉटीफाई, हंगामा म्यूजिक, जिओ सावन, आई ट्यून स्टोर, साउंड क्लाउड, विंक और अन्य डिजिटल म्यूजिक स्टोर और चैनल पर बहुत जल्द ही रिलीज किया जाएगा। इस म्यूजिक वीडियो में अभिनेता शान्तनु भाभरे अपनी भावपूर्ण अदायगी पेश करते नज़र आएंगे। शांतनु भामरेकला और वाणिज्य के क्षेत्र में एक जाने माने शख्सियत हैं और राजीव चौधरी एवं अशोक त्यागी की फिल्म ‘रेड’ में अभिनेता कमलेश सावंत ( फेम दृश्यम) और मेगा स्टार अमिताभ बच्चन के साथ ‘भूतनाथ रिटर्न्स’ आदि में काम कर चुके हैं। शान से एंटरटेनमेंट के सहयोग से सीफेस प्रोडक्शन और एच एल प्रोडक्शन के संयुक्त तत्वाधान में निर्मित इस म्यूजिक वीडियो के निर्माता हीरा लाल(अधिवक्ता), निर्देशक आगा रिज़वी, क्रिएटिव डायरेक्टर पवन शर्मा, पी आर ओ काली दास पाण्डेय, गीतकार हरिशंकर सूफी और संगीतकार शौरिष हैं।
मुंबई। उपनगर मलाड पश्चिम में जवाहर ताराचंद कौल चौक का उद्घाटन करने के लिए महाविकास अघाड़ी सरकार के कैबिनेट मंत्री असलम शेख, भाजपा अध्यक्ष मंगल प्रभात लोढ़ा ,फिल्म अभिनेता सुनील शेट्टी और भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी विशेष रूप से पहुंचे। ज्ञात हो कि जवाहर तारा चंद क़ौल ७० के दशक के फिल्म सुपरस्टार रहे है। जवाहर कौल ने कई सुपर हिट फिल्मो में अपने अभिनय का जादू बिखेरा है। २७ सितंबर १९२७ को जन्मे जवाहर कौल का संबंध श्रीनगर कश्मीर से है आप का परिवार भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के परिवार का अंश है और उनसे सम्बंधित है। श्री कौल की प्रमुख फिल्मे ” पहली झलक ” ” पापी ” , ” अदालत ” ” दाग ” है जो उस समय सुपर हिट थी। आप का देहांत अप्रैल १५ , २०१९ , को ९१ वर्ष की उम्र में हो गया था।
जवाहर कौल एक अच्छे अभिनेता ही नहीं समाज सेवक भी थे श्री कौल ने हमेशा से समाज की चिंता की और शिक्षा को बढ़ावा दिया। आज उनके बेटे प्राचार्य अजय कौल उसी मुहीम को आगे बढ़ाते हुए कार्य कर रहे है। अजय कौल अपने एकता मंच व चिल्ड्रेन वेल्फेअर सेंटर हाईस्कूल के माध्यम से सामाजिक और देश हित में कार्य करते हुए शिक्षा को हर वर्ग तक पहुंचाने में लगे है।
Jawahar Kaul Chawk at malad west , marve road
जवाहर कौल चौक का अनावरण उनकी स्मृति में बनवाया गया है। जिससे हमारा युवा समाज प्रेरणा ले और सामाजिक कार्य करते हुए देश की सेवा में आगे बढे। चौक के उद्घाटन समारोह में लगभग सैकड़ो लोगो ने भाग लिया जिसमे सभी राजनीतिक पार्टियों के लोग शामिल थे। प्राचार्य अजय कौल ने अपनी राजनीतिक सूझ बूझ का परिचय देते हुए शिक्षा के मंदिर में समाज के सभी लोगो को बुला कर एक नई ऊर्जा भरते हुए कला , संस्कृति और सिनेमा के उन सभी कलाकारों को प्रेरणा स्वरुप जवाहर कौल की स्मृति का अनावरण करवाया।
भाजपा अध्यक्ष मंगल प्रभात लोढ़ा ने इस अवसर पर कहा कि – ”युवा समाज को प्रेरणा देगा जवाहर ताराचंद कौल चौक , यह मात्र चौक नहीं है अपने आप में एक युग का इतिहास है जो समय समय पर दुहराया जायेगा।
UP Election 2022: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए छठें चरण के मतदान के लिए मंगलवार शाम प्रचार का शोर थम गया. अब 3 मार्च यानी गुरुवार को 10 जिलों की 57 सीट पर मतदान होगा. इन 57 सीटों पर मंगलवार शाम 6 बजे से ही प्रचार थम गया और अब 48 घंटे तक यह प्रतिबंध जारी रहेगा.
छठें चरण में गोरखपुर, देवरिया, अंबेडकरनगर, बस्ती, बलिया, बलरामपुर, संतकबीरनगर, कुशीनगर, महराजगंज और सिद्धार्थनगर में मतदान होगा. इस चरण में कटेहरी, टांडा, आलापुर, जलालपुर, अकबरपुर, तुलसीपुर, गैनसारी, उतरौला, बलरामपुर, शोहरतगढ़,कपिलवस्तु, बांसी, इटवा और डुमरियागंज में मतदान होगा.
इन सीटों पर भी होगा मतदान इसके साथ ही हर्रैया, कप्तानगंज, रुधौली, बस्ती सदर, महादेवा, मेहदावल, खलीलाबाद, धनघटा, फरेंदा, नौतनवा और सिसवा में भी गुरुवार को वोटिंग होगी. इसी चरण में महाराजगंज, पनियरा, कैंपियरगंज, पिपराइच, गोरखपुर शहर, गोरखपुर ग्रामीण, सहजनवा, खजनी, चौरी चौरा, बांसगांव, चिल्लूपार, खड्डा और पडरौना में लोग वोट करेंगे.
इसके साथ ही तमकुही राज, फाजिलनगर, कुशीनगर, हाटा, रामकोला, रुद्रपुर, देवरिया, पथरदेवा और रामपुर कारखाना विधानसभा क्षेत्र में गुरुवार को मतदान होगा. वहीं भाटपाररानी, सलेमपुर, बरहज, बेल्थरा रोड, रसड़ा, सिकंदरपुर, फेफाना, बलिया नगर, बांसडीह और बैरिया में वोटिंग होगी.
292 सीटों पर हो चुकी है वोटिंग बता दें यूपी में सात चरणों में वोटिंग होगी और 10 मार्च को काउंटिंग कराई जाएगी.
58 सीटों पर 10 फरवरी, 14 फरवरी को 55 सीटों पर, 20 फरवरी को 59, 23 फरवरी को 59 सीट, 61 सीटों पर 27 फरवरी को मतदान के साथ 292 सीटों पर नेताओं का भाग्य ईवीएम में कैद हो चुका है. वहीं 3 मार्च के बाद 7 मार्च को 54 सीटों पर मतदान होगा.
भगत सिंह कोश्यारी राजनीति में अपनी सादगी के लिए जाने जाते है. इस वजह से उन्हें उत्तराखंड में बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक प्यार से भगत दा के नाम से पुकारते हैं. वह उत्तराखंड गठन के बाद बनी अंतरिम सरकार में मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.
‘भगत दा’. RSS प्रचारक से राज्यपाल तक का सफर कर चुके भगत सिंह कोश्यारी ने महाराष्ट्र में एक नई तरह की राजनीति की शुरुआत की है। आम तौर पर एक राज्यपाल एक रबर स्टैम्प की तरह से होता है मगर भगत सिंह कोश्यारी ने एक राज्यपाल की भूमिका की पूरी की पूरी पृष्ठ्भूमि ही बदल कर रख दी है। महानगर मुम्बई की तमाम स्वमसेवी संगठनों और संस्थाओ को पुनर्जीवित कर दिया है , हर दिन कुछ न कुछ सांस्कृतिक , सामाजिक कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के तौर पर भाग ले कर राजभवन से सामाजिक समरसता और समाज सेवा की प्रेरणा देने वाले भगत सिंह कोश्यारी आज महानगर मुम्बई ही नहीं सम्पूर्ण महाराष्ट्र की जनता के लाडले बन चुके है। भगत दा में एक जननायक की भूमिका में नजर आते है। जनता के बीच रहना उन्हें सामाजिक कार्यो की प्रेरणा देना , देश की सेवा में प्रेरक बनाना उनकी ख़ासियत है। आज भले ही महाराष्ट्र की तिकड़ी सरकार के साथ उनका विवाद समय – समय खुल कर सामने आते रहे हो मगर उनके सामने सभी ने मुँह की खाई है। अभी अभी ताजे विवाद को भी ले कर उन्होंने एक साधे हुए राजनेता के तौर पर ज़वाब दे कर विरोधी पार्टियों को आईना दिखा दिया है।
घटना क्रम के अनुसार , महाराष्ट्र (Maharashtra) के कई नेताओं ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) की, समर्थ रामदास को छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) का गुरु बताने वाली टिप्पणी पर सोमवार को आपत्ति जताई. इन नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता एवं छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज उदयनराजे भोंसले का नाम भी शामिल है. उन्होंने कोश्यारी के बयान पर आपत्ति जताते हुए उनसे तत्काल इसे वापस लेने को कहा है. कोश्यारी ने रविवार को औरंगाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज और चंद्रगुप्त मौर्य का उदाहरण देते हुए गुरु की भूमिका को रेखांकित किया था.
उन्होंने कहा था, ‘‘इस भूमि पर कई चक्रवर्ती (सम्राट), महाराजाओं ने जन्म लिया, लेकिन चाणक्य न होते तो चंद्रगुप्त के बारे में कौन पूछता? समर्थ (रामदास) न होते तो छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में कौन पूछता.’’ कोश्यारी ने कहा था, ‘‘मैं चंद्रगुप्त और शिवाजी महाराज की योग्यता पर सवाल नहीं उठा रहा हूं. जैसे एक मां, बच्चे का भविष्य बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, उसी तरह हमारे समाज में एक गुरु का भी बड़ा स्थान है.’’ खैर भगत दा के साथ विवादों का पुराना नाता है। वह राज्यपाल से ज्यादा एक नायक और जननायक की भूमिका में रहते है जिसे महाराष्ट्र की जनता बहुत प्यार करती है।
Shri Bhagat Singh Koshyari ji
देश की सियासत में भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) किसी पहचान के मोहताज नहीं है. राजनीति में अपनी सादगी के लिए पहचाने जाने वाले भगत सिंंह कोश्यारी को प्यार से ‘भगत दा’ के नाम से पुकारा जाता है. भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड बीजेपी (Uttarakhand BJP) के दिग्गज और वरिष्ठ नेताओं में शुमार रहे हैं. उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के प्रचारक से महाराष्ट्र के राज्यपाल तक का सफर तय किया है, लेकिन भगत दा का यह राजनीतिक सफर बेहद ही उतार- चढ़ाव भरा रहा है. राजनीति में आने से पहले वह कॉलेज में एक शिक्षक के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे. जिसके बाद वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) में पूर्णकालिक हो गए और अविवाहित रहते हुए RSS के स्वयं सेवक के साथ ही BJP की राजनीति में सक्रिय रहे.
एटा के इंटर कॉलेज में किया अध्यापन, RSS के संपर्क में आए और पूर्णकालिक हो गए
अंग्रेजी से परास्नातक करने के बाद भगत सिंह कोश्यारी ने अध्यापन के क्षेत्र में भविष्य बनाने का प्रयास किया. जिसके तहत उन्होंने 1964 में एटा के राजाराम इंटर कॉलेज में बतौर प्रवक्ता काम करना शुरू किया और कुछ वर्षों तक पढ़ाया. इसके बाद वह 1966 में RSS के संपर्क में आए और पूर्णकालिक हो गए. इसके बाद उन्होंने प्रवक्ता की नौकरी छोड़ कर पिथौरागढ़ की तरफ वापिस रूख किया और पिथौरागढ़ को अपनी कर्मभूमि बनाया.
पिथौरागढ़ के सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना के साथ ही यहीं पढ़ाया भी
पिथौरागढ़ लौटे भगत सिंह कोश्यारी ने 1977 में जिले के अंदर सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की और लंबे समय तक इस स्कूल में अध्यापन का काम भी किया. इसके साथ ही उन्होंने पर्वत पीयूष नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का संपादन और प्रकाशन किया. जिसमें वह जनसरोकारों के मुद्दे उठाते रहे. वह आपतकाल के दौरान तकरीबन दो सालों तक फतेहगढ़ जेल में बंद भी रहे.
1997 में विधानपरिषद पहुंचे, 2001 में बने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री
भगत सिंह कोश्यारी लंबे समय तक कुमाऊं विवि की कार्यकारी परिषद के सदस्य भी रहे. तो वहीं वह 1997 में पहली बार विधानपरिषद पहुंचे. इसके बाद जब 2000 में पृथक उत्तराखंड बना तो गठित पहली अंतरिम सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया, लेकिन एक साल बाद ही वह अंतरिम सरकार के मुख्यमंत्री बनाए गए. इसके एक साल बाद 2002 में उत्तराखंड का पहला विधानसभा चुनाव आयोजित किया गया. इस चुनाव में भगत सिंह कोश्यारी कपकोट से विधानसभा पहुंचे, लेकिन बीजेपी को बहुमत नहीं मिला. इस दौरान भगत सिंह कोश्यारी ने नेताप्रतिपक्ष के तौर पर जिम्मेदारी संभाली.
दोबारा मुख्यमंत्री बनने से चूके तो राज्यसभा पहुंचे
2007 के चुनाव में बीजेपी को भगत सिंह कोश्यारी के नेतृत्व में सफलता मिली, लेकिन बहुमत का आंकड़ा प्राप्त कर लेने के बाद भी बीजेपी ने भगत सिंह कोश्यारी को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया. उनकी जगह पर केंद्र की राजनीति में सक्रिय भुवन चंद्र खंडूरी को मुख्यमंत्री बनाया गया. इसके बाद 2008 में भगत सिंह कोश्यारी को उत्तराखंड कोटे से राज्यसभा का सदस्य बनाया गया. वहीं इस दौरान भगत सिंह कोशियारी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे.
2014 में लोकसभा पहुंचे, 2019 में बने महाराष्ट्र् के राज्यपाल
भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड की कपकोट विधानसभा सीट से 2 बार विधायक रह चुके हैं. वहीं उन्होंने 2014 में नैनीताल सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा. जिसमें उन्हें जीत मिली. इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव से उन्होंने दूरी बनाई. 2019 जब दोबारा मोदी सरकार सत्ता में आई तो 31 अगस्त 2019 को सरकार ने उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया.
महर्षि दयानन्द ,कखन जी भाई नमक औचित्य ब्राह्मण गुजरात के टंकारा गाँव मे करीबन 200 साल पहले जमादार थे।वे शिव भक्त थे,इन्हे मूलशंकर नामक पुत्र था मूल शंकर धर्म,श्लोक और सूत्र सीखाते थे।,सैट साल की उम्र मे इन्हे जनोई धरण करने सीखा दिया।यजुर्वेद भी पढ़ाया मूलशंकर ने व्याकरण वेद का अभ्यास कर लिया 14 साल की उम्र मे अर्थववेद संहिता सीख ली,21 साल की उम्र मे शादी करनी थी,उसे शादी देना चाहते थे उनके मातपिता , 1903 मे एक शाम को मूल शंकर ने गृह त्याग कर दिया
मूलशंकर लाला भगत की भूमि मे साला पहुचे।वहा ब्रह्मचर्य की दीक्षा ली,भगवा धारण कर लिया,वे सिध्ध्पुर मेले मे एक दिन पाहुच गए,वहा इनके पिताजी से भेट हुई ,मूलशंकर ने पिताजी के पेर पकड़ लिया वहा से अहमदाबाद,अहमदाबाद से बड़ौदा पहुच गए,वहा से चनोद करनाली जा पहुचे।पिताजी ने उसे समझाने के लिए दो पहरेदार रखे थे,वहा से वे सिध्ध्पुर से रात मे अंधेरे मे निकल पड़े,महाराष्ट्र के श्रुंगेरी मठ के परमानंद सरस्वती ने उन्हे ब्रह्मचारी सन्यासी की दीक्षा दी,यहा से इन्हे दयानन्द सरस्वती नाम प्राप्त हुआ.दयानन्द ने हरद्वार के कुम्भ के मेले मे योगियो से ज्ञान समागम किया,काँगड़ी गुरुकुल रम्या तपोवन मे गौरी कुंड मे जलस्रोत पर बैठकर एक माह अघोर तपस्या की त्रिस साल की उम्र मे विध्याचल घूमे।बतिस वे वर्ष मे दुर्गाकुंड मंदिर मे चंडालगढ़ पहुचे,वहा आननका त्याग किया और शुद्ध दूध हारी बने,
दयानन्द 1914 मे तैतीस साल की उम्र मे नर्मदा नदी के दर्शन को निकल पड़े,नर्मदाके मूल की शोध की त्रिस साल वे घूमते रहे,1917 मे विध्या प्राप्त की,बाद मे मथुरा पहुच गए॰अमरीका के कर्नल ओलकोट और ऋषि रमणी मेडम ब्लेवेरस्की थियोसोफ़िकल सोसाइटी के स्थापक थे,उनहो ने दयानन्द सरस्वती जी की बाते सुनी थी,थियोसोफ़िकल सोसाइटी ने उन्हे आर्य समाज का एक अंग बना दिया था,वे डौनो स्वामी जी के शिष्य बन गए।1937 मे मुजफ्नगर मे आर्य समाज मे दूसरे वार्षिकोत्सव मे उपस्थित होकर सरस्वती जी ने दो भाषण दिये,थियोसोफ़िकल सोसाइटी से सावधानी बरतने के संकेत दिये और मेडम ब्लेवस्की की सख्त आलोचना की,महर्षि का जीवन चरित्र विरतव की घटनाओ से भरा हुआ हे,मणिरत्न जेसे उनका जीवन प्रकाशित हे।मतभेद रखनेवालों सत्या की पहचान कराई हे।उन्होने एक साथ चालीस से पचास राजपूतो को यज्ञोपवीत दिया हे,स्त्रियो को गायत्री मंत्र पढ़ने का अधिकार मरशी दयानन्द सरस्वती ने दिलाया,मेरठ मे महाराज ने श्रद्धा का खंडन करने के लिए भाषण किया था।
दयानन्द जी को मूर्ति पुजा मे विरोध था,नौवि सदी मे विदेशी आक्रमण को रोकने मे भारत तददन निसफल साबित हुआ था,छोटे छोटे जमी के विभाजित राजाओ अपने को पृथ्वीपति मानने लगे थे,ज्ञाति प्रथा बढ़ रही थी,बल विवाह की रस्म सर्व सामान्य बन गई थी.विवाह करके पाँच साल मे विधवा बनी हुई पुत्री का दुख मात पिता के दिल को नहीं छु सका था,लिखने पढ़ने को सिख ले तो अभ्यास पूर्ण हो गया समझा जाता था।ब्रहमीन का लड़का क्रियाकन्द सीखने पाठशाला जाता था,व्याकरण न्याय वेदान्त विज्ञान और इतिहास का अभ्यास क्रम मे स्थान नहीं था,धर्म मे बिता समय और परमानंद के अनुसार संध्या वंदन ,पुजा पाठ देव दर्शन और कीर्तन किए जाते थे।
इस परिस्थिति मे परिवर्तन लाने वाले राजा राम मोहन राय इलाहि से प्राश्चर्यार्थ संस्कृति की अवर से जन्मा था,इस समय मे स्वामी नारायण ,महर्षि दयानन्द और राम कृष्ण परमहंस का उदभवस्वयं और इस देश की धर्म संस्कृति पर आधारित था,महर्षि दयानंद उज्ज्वल ज्योति पुंज थे,मूलशंकर से दयानंद मे परिवर्तन की कथा ,त्याग ,तपस्या ,लगन और ध्येय प्राप्ति की कथा उल्का मे तेजस्वी लाइन जेसे हे,जाती प्रथा तोड़ने की अन्य धर्म के लोगो को हद धर्म मे लानेकी कन्या पढ़ाई की महर्षि की बाते आज भी कम नहीं हुई हे,मूर्ति पुजा का विरोध किया था,उनके वक्तव्य के सामने पंडित भी अवाक बन जाते थे,उनका कार्य क्षेत्र पांचाल था,एक हजार साल से विदेशियों को रोकने वाले पंपावियों के धर्म ने क्रांति की चिंगारी उन्हे स्पर्श कर गई,थी,देश के विभिन्न प्रांतो मे उन्होने प्रवास किया था,अलवर के राजा उनसे प्रभावित हुए थे,और अपने साथ अलवर ले गए थे,किन्तु राजा के पास साई जा नहीं सकते थे,इस लिए अलवर छोड़ दिया,और मथुरा मे वेद पाठशाला की स्थापना की,वे प्रामाणिक ग्रंथ ही छात्रों को पढ़ाते थे,आगरा मे वे गीता कथा करते थे,एक माह तक वहा रहे थे,मूर्ति पुजा नहीं करना हे,यह बात सभी को वे समझाते थे,उनकी बाते सुनकर लोग मूर्तिया नदी मे फेंक आते थे,हरद्वार मे गए तो अंध श्रद्धा देखकर बहुत व्यथित हुये ,
वेद धर्म का गौरव बढ़े और युवाओ आगे बढ़े एसी उनकी सोच थी,विध्यालय बनाने और गुरुकुल चलाकरयुवाओ को तालिम देकर सशक्त बनाने की बात इनहो ने काही थी।
हिन्दी भाषी द्रष्टि कोण प्रचार के लिए प्रकाश डालते थे।हिन्दी भाषा मे लेख प्रकाशित करते थे,लोगो को समझाने के कम उन्होने किया हे,वे काशी गए थे,अंध विश्वास देखा डरने लगे,काशी नरेश के पंडित तैयार करो शास्त्रार्थ करने को कहा,वहा से वे कोलकाता गए,वहा के अग्रणी उनके पास जाते थे,केशव सेन के साथ बहुत चर्चा हीदी मे ही होती थी,कोलकाता से वे मुंबई हुगली नासिक मथुरा गए,गुजरात सारा और वहा से चितोड़ जोधपुर उड़ेपुर गए।उड़ेपुर के राजा जसवंत उनसे प्रभावित थे,वे वेदगन स्तुति संस्कृत मे करते थे,प्रार्थना के बाद हिन्दी मे गायत्री मंत्र करते थे। लोगो मे राष्ट्र भावना जताने ,देश भक्ति जताने के लिए कार्य करते थे,एक धर्म और एक भाषा हीदी का लक्ष रखकर देश की उन्नति की खेवना करते थे,महर्षि दयानन्द आज भी उनके विचारो से हमारे बीच जीवित हे,उनके चरणों मे कोटी कोटी वंदन करते हुए जन्म दिन अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित करते हे।
फिल्म समीक्षा : गंगूबाई काठियावाड़ीरिलीज डेट : 25 फरवरी 2022कलाकार : आलिया भट्ट, अजय देवगन, शान्तनु माहेश्वरी, विजय राज, सीमा पाहवा, इंदिरा तिवारी, जिम सरभ, वरुण कपूर और हुमा क़ुरैशी आदि।क्रिटिक्स रेटिंग : *** 3.5डायरेक्टर : संजय लीला भंसालीनिर्माता : संजय लीला भंसाली और जयंतीलाल गड़ाशैली : बायोपिकसंगीत : संचित बल्हारा , अंकित बल्हाराछायांकन : सुदीप चटर्जी
आलिया भट्ट की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ वेश्यावृत्ति पर आधारित है। भंसाली प्रोडक्शन की यह फिल्म हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया क्वींस ऑफ मुंबई’ के अध्यायों का रूपांतरण है और इसमें आलिया मुख्य भूमिका में है। इस फिल्म के माध्यम से एक गंभीर मुद्दे को सरलता के साथ रखा गया है जो वाकई काबिले तारीफ है। आलिया भट्ट इस फिल्म में यकीनन अपने फिल्मी करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की है। इस फ़िल्म में अजय देवगन की उपस्थिति 10 मिनट की है।सीमा पाहवा ने अपने किरदार को बहुत सही तरीके से जीवंत किया है। अपने छोटे से रोल में विजय राज बहुत जंचते हैं । शांतनु माहेश्वरी ने अपनी अदायगी का अमिट छाप छोड़ है। उन्हें इस रोल के लिए पसंद किया जाएगा । वरुण कपूर ठीक हैं । जिम सरभ (पत्रकार अमीन फैजी) बेहतरीन हैं । इंदिरा तिवारी (कमली) जो आखिरी बार सीरियस मेन [2020] में नजर आईं थीं इस फिल्म में उनकी उपस्थिति एक सरप्राइज है । राहुल वोहरा (प्रधानमंत्री) ठीक हैं । मधु (गंगूबाई द्वारा बचाई गई लड़की), शौकत अब्बास खान, बिरजू, डेंटिस्ट आदि का किरदार निभाने वाले कलाकार अपने हिसाब से ठीक हैं। इनसे संजय लीला भंसाली और अच्छा काम ले सकते थे। ‘शिकायत’ गाने में हुमा कुरैशी अच्छी लगती हैं । संगीतकार संचित बल्हारा और अंकित बल्हारा का बैकग्राउंड स्कोर काफी बेहतर है । सुदीप चटर्जी की सिनेमेटोग्राफ़ी उम्दा है और कमाठीपुरा सेट के दृश्यों को खूबसूरती से कैप्चर किया गया है । सुब्रत चक्रवर्ती और अमित रे का प्रोडक्शन डिजाइन आंखों को भाता है और वास्तविक भी लगता है। शीतल इकबाल शर्मा की वेशभूषा आकर्षक है, खासकर आलिया द्वारा पहनी गई सफेद ड्रेसेस । शाम कौशल का एक्शन ठीक है । वीएफएक्स बढ़िया है । संजय लीला भंसाली की एडिटिंग कुछ जगहों पर और बेहतर हो सकती थी जो नहीं हो सकी। फिर भी ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ एक दमदार कहानी से सजी आलिया भट्ट के फिल्मी करियर की अब तक की सबसे असरदार अभिनय से सजी फिल्म है जिसमें कुछ मानवीय संवेदनाओं से जुड़े बेहद ही शानदार सीन्स हैं। उम्मीद की जा रही है कि बॉक्स ऑफ़िस की कसौटी पर खरी उतरेगी। समीक्षक : राज दीप पाण्डेय