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शहीदी दिवस : 17 दिसंबर महान परोपकारी व समाज कल्याणकारी श्री गुरू तेग बहादुर

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माधवदास ममतानी – विभूति फीचर्स
श्री गुरू नानक देवजी के नवें स्वरूप ‘श्री गुरू तेग बहादरजीÓ का जन्म पंजाब के प्रसिद्ध शहर अमृतसर में वैशाख वदी 5 संवत 1678 अर्थात 12 अप्रैल 1621 को हुआ। इनके पिता का नाम श्री हरगोबिंद है, जो सिख धर्म के छठवें गुरू हैं। इनकी माता का नाम नानकी है।

श्री गुरू तेग बहादुर को प्रारंभिक शिक्षा विद्वान बाबा बुढ्ढा से प्राप्त हुई। बालक तेग बहादुर को पंजाबी के साथ-साथ ब्रज (हिंदी) भाषा की शिक्षा भी दी गयी। सिख धर्मदर्शन के अधिकारी विद्वान भाई गुरदास ने बालक को दर्शन-साहित्य आदि विषयों में प्रवीण किया। बालक ने इसी दौरान हिंदू, इस्लाम आदि धर्मो का गहन अध्ययन किया।

महान परोपकारी व समाज कल्याणकारी:- श्री गुरु तेग बहादुर जी ने कीरतपुर शहर से 6 मील की दूरी पर स्थित रियासत कलिलूर दून में राजा भीमचंद के पिता दिलीपचंद से 5 मील ‘मुरबा माखोवलÓ गांव की जमीन 1 लाख 57 हजार रुपए में खरीदकर अनंदपुर नगर बसाया जो कि गुरूओं के बसाये गए पांच प्रमुख तख्तों में से एक है। समाज कल्याणकारी व परोपकारी गुरुजी ने साधसंगत व गरीबों-अनाथों के रहने के लिए यह नगर बसाया, जहां वे सुख व आराम को प्राप्त कर सकें। सन् 1721 विक्रमी को अनंदपुर साहिब का निर्माण कार्य संपूर्ण करने के पश्चात परिवार सहित कुछ संगत लेकर अंतर्यामी गुरुजी पूरब दिशा की ओर चल दिए। रास्ते में अनेक तीर्थ स्थानों पर संतों एवं नाम जपने वालों को सही राह बताई और श्रद्धालुओं-प्रेमियों को दर्शन देकर निहाल किया। गुरूजी ने अनेक अहंकारियों का अहंकार तोड़ उन्हें प्रभु सिमरन व सत व्यवहार का उपदेश देकर जगह-जगह गरीबों व जरुरतमंदों को अन्न-वस्त्र दान दिया। वे रोपड़ होकर मूलोवाल गांव पहुंचे। वहां के रहवासी भाई मैया और गोंदा गुरुजी का दर्शन करने आए और माथा टेककर गुरुजी के पास श्रद्धा से बैठ गए। गुरुजी ने कहा कि पीने का ठंडा जल लेकर आओ। भाई गोंदे ने कहा महाराज यहां जो कुंआ है उसका जल खारा है और उसमें बहुत कचरा पड़ा रहता है। गांव वाले इस कुंए का पानी नहीं पीते यदि आप हुकुम करें तो यहां से कुछ दूर एक कुंआ है उसका पानी लाएं।

परोपकारी गुरुजी ने कहा कि इस कुंए में से कचरा निकलवाकर मरम्मत कराओ व इस कुंए में से ‘वाहिगुरुÓ उच्चारण कर हमारे पीने के लिए पानी ले आओ। भाई गोंदा कुंआ साफ कर कुंए से पानी लेकर आया व पानी को मीठा, ठंडा व स्वच्छ देखकर हैरान हो गया। गुरुजी ने उस जल को पीकर प्रसन्न होकर वचन फरमाया कि यह जल स्वच्छ और बहुत मीठा है, आज से यह कुंआ ‘गुरु का कुंआÓ कहलाएगा। अब इसका पानी खारा नहीं रहेगा और गांव वालों को दूर-दूर से पानी लाने का कष्ट नहीं करना पड़ेगा। इस गांव में और नौ कुएं बनेेंगे परंतु यदि कोई ग्यारवां कुंआ बनवाएगा तो वह ढह जाएगा। गुरुजी के वचनानुसार आज तक उस गांव में दस ही कुंए हैं कोई ग्यारहवां कुंआ नहीं बना है।

जब लोगों को ज्ञात हुआ कि गुरु के वचन से कुंए का खारा जल मीठा हो गया है तो बड़ी श्रद्धा व भावना से भेंट लेकर गुरुजी के दर्शन के लिए आए और गुरुजी ने वहां सभी को सतिनाम और सतव्यवहार का उपदेश देकर परमात्मा के नाम से जोड़ा।

गुरुजी ने अपने जीवन काल में कई शहरों का भ्रमण किया व अपनी आध्यात्मिक वाणी से शिष्यों को उपदेश दिये। पूर्व के तीर्थों के उद्धार व सुधार के लिए चक माता नानकी (आनंदपुर) से यात्रा आरंभ की। चक माता नानकी के निर्माण के बाद पहले कीतरपुर से 3 मील दूर एक गांव में पड़ाव लगाया। उस समय वर्षा से उस क्षेत्र के गरीब किसानों व कामगारों की फसलें, कच्चे मकान इत्यादि तबाह होकर गिर गए थे। गुरुजी ने अपने कोषपति को हुकुम दिया कि वे उस भेंट में मिले धन को जिन-जिन गावों में मकान गिर गए हैं जिनकी फसलें तबाह हो गई हैं उन्हें सहायता देने में लगाएं। उस गांव में शुद्ध पानी की गंभीर समस्या थी। गुरुजी ने नए कुंए बनाने के लिए पर्याप्त धन की सहायता की। गुरुजी उस गांव के लोगों के भोलेपन व भक्तिभाव पर इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने उस गांव वालों को वर दिया कि ”जो आपको दुख देगा वह कभी सुखी नहीं रहेगा।

कीरतपुर के पश्चात गुरुजी सेफाबाद पहुंए। वहां के नवाब सैफुद्दीन की हार्दिक तमन्ना थी कि गुरुजी उसे परिवार सहित घर में दर्शन दें। गुरुजी सैफुद्दीन के यहां दो सप्ताह रहे व जाते समय गुरुजी ने उसे उपदेश दिया ”हर क्षण परमात्मा को याद रखना, आए हुए फकीरों व दरवेशों की सेवा करना, गरीबों अनाथों की सहायता करना तथा शुभ कर्मों से कभी भी संकोच न करना।ÓÓ इस तरह गुरुजी हमेशा दीन दुखियों की सहायता करने के लिए सभी को प्रेरित करते थे।
तद्नंतर गुरुजी केथल, पहोवा, बरना, करणखेड़ा होते हुए कुरुक्षेत्र पहुंचे। कुरुक्षेत्र में गुरुजी उस पवित्र स्थान के निकट ठहरे जहां गुरु नानक, गुरु हरिगोबिंद और गुरु हरिराय साहब ने चरण डाले थे। कुरुक्षेत्र से गुरुजी बानपुर पहुंचे, जहां एक किसान ने गुरुजी को गांव में पानी की विकट समस्या व गांव की गरीबी से अवगत कराया। तब दयालु गुरुजी ने मोहरों से भरा हुआ बदरा (थैली) दिया और आदेश दिया कि यहां एक कुंआ बनवाओ व जमीन खरीदकर सुंदर धर्मशाला बनवाओ जहां हरी सिमरन/कीर्तन हो। तब से इस गांव का नाम ‘बानी बदरपुरÓ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

इस तरह गुरुजी ने अपनी यात्रा के दौरान दीन दुखियों व जरुरत मंदों की सामयिक सहायता की। उन स्थानों पर स्थित गुरुद्वारों में अभी भी संतों-फकीरों, यात्रियों को गुरु का लंगर व अन्य सहायता प्रदान होती हैं। परोपकारी गुरुजी परमात्मा के नाम से जोड़ने के साथ-साथ समाज कल्याण के कार्यों में भी रुचि रखते थे जिसके ज्वलंत उदाहरण उपरोक्त वर्णित है। अन्तत: हमें भी गुरुजी द्वारा बताए मार्ग पर चलकर प्रभु सिमरन के साथ-साथ समाज कल्याण के कार्यों एवं सतव्यवहार में रुचि लेनी चाहिए।

कालांतर में गुरुजी ने हिंदू धर्म के तिलक जनेऊ की रक्षा के लिए 19 दिसंबर 1675 ईसवी (साका मघर सुदी 5 संवत् 1732) को शहीदी दी। जिसकी समकक्ष अंग्रेजी तिथि इस वर्ष रविवार 17 दिसंबर 2023 को है। ऐसे महान परोपकारी व समाज कल्याणकारी श्री गुरू तेग बहादर को उनके शहीदी दिवस पर कोटि कोटि नमन। (विभूति फीचर्स)

पंजाब के आई.ए.एस और आईपीएस अफसरों की पहली पसंद बना मोहाली

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सुभाष आनंद – विभूति फीचर्स
पंजाब के आई ए एस और आई.पी.एस अफसरों की पहली पसंद चंडीगढ़ हुआ करता था जबकि हरियाणा केडर के
अफसरों की पहली पसंद पंचकूला हुआ करता था । नए आंकड़ों के अनुसार अब पंजाब के बड़े अफसरों की पहली पसंद मोहाली बनता जा रहा है। सूत्रों से पता चला है कि मोहाली पंजाब का हिस्सा होने के कारण यहां कोठी बनाना बड़ा
आसान है और पंजाब के अन्य शहरों की अपेक्षा मोहाली कम प्रदूषण वाला इलाका भी है।

पंजाब के बड़े अधिकारी जो अपनी रिटायरमेंट पर बैठे हुए हैं उनकी पहली पसंद है कि उनका घर अपना हो और
अधिकतर चंडीगढ़ के आसपास हमेशा के लिए सैट होना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि उनके बच्चे अच्छे कालेजों में
पढकऱ नौकरी की तलाश कर सकें। पंजाब हरियाणा व हिमाचल के 844 आई.ए.एस और आई.पी.एस अफसरों में 243 अफसरों के रेनबसेरे इन बड़े शहरों में बने हुए हैं।

पंजाब के 62 अफसर ऐसे हैं जिनकी मोहाली में 2 से ज्यादा जायदादें है, जबकि 14 अफसर ऐसे हैं जिनकी मोहाली में
3 से ज्यादा जायदादें हैं। 2019 में एक महिला आई.ए.एस अधिकारी ने एक रिहायशी कोठी सवा करोड़ में खरीदी थी।
आज उसकी कीमत 3 करोड़ से ज्यादा आंकी गई है। हरियाणा के 240 अफसरों ने अपने नाम पर जायदादें चंडीगढ़
और पंचकूला में बनाई थी, कई बेनामी जायदादें भी खरीदी गई। सूत्रों से मिली जानकारी के कारण यह बड़े अधिकारी
पंजाब के अन्य शहरों में इसलिए नहीं रहना चाहते,क्योंकि इन शहरों में भीड़-भाड़ ज्यादा होती है। सूत्रों से पता चला है
कि कई बड़े -बड़े अफसरों ने फ्लैटों की खरीद-फरोख्त का धंधा भी शुरू किया हुआ है। कई बड़े अधिकारियों ने अपने
बच्चों और पत्नी के नाम पर जायदादें खरीद रखी हैं। हरियाणा के 87 अफसरों ने गुडग़ांव में रिहायशी कोठियां बना
रखी है। फरीदाबाद में 24 अफसरों ने अपना रेनबसेरा बना रखा है,कई अफसरों ने तो फार्म हाऊस बना रखे हैं,
एक कनाल के प्लाट यहां सबकी पसंद बने हुए हैं,जिनकी कीमत करोड़ों रुपए की आंकी जा रही है। सूत्रों से मिली
जानकारी के अनुसार सिविल सर्जन,डिप्टी डायरेक्टर पदों पर तैनात अधिकारी भी चंडीगढ़ के आसपास सैटल होना
चाहते हैं।

मोहाली में ऐसी कालोनियां भी काटी जा रही है जहां सिर्फ बड़े अफसरों को प्लाट दिए जाने का मालिक द्वारा फैसला
किया गया है ताकि प्लाटों के अधिक से अधिक पैसे कमा सकें। पंजाब के कुछ बड़े अधिकारियों के आमदनी से ज्यादा
जायदाद बनाने के केस भी विजीलैंस विभाग में पैंडिंग पड़े हुए हैं। इसी प्रकार हिमाचल के आई.ए.एस, आई.पी.एस
और कई बड़े अधिकारियों ने अपना रेनबसेरा शिमला में बनाया हुआ है,आंकड़ों के अनुसार 32 रिटायर्ड अफसरों में से
12 शिमला में रह रहे हैं,शिमला की आबो हवा भी बहुत अच्छी मानी जाती है। (विभूति फीचर्स)

जन्मतिथि के अंकों से जानिये अपना व्यक्तित्व

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सुनील जैन राना’ – विभूति फीचर्स
जिस प्रकार जन्मपत्री एवं हस्तरेखाओं द्वारा ज्योतिषी भूत-भविष्य का पता लगा लेते हैं, उसी प्रकार अंक विज्ञान
द्वारा भी मानव के व्यक्तित्व के बारे में काफी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। प्राचीनकाल में भारतीय
खगोलशास्त्री, मि व बैवीलोनिया के विद्वानों ने अंकों के रहस्य के बारे में बहुत सटीकता से बताया है। सुप्रसिद्ध
पाश्चात्य अंकशास्त्री कीरो ने ग्रहों के रहस्य को उजागर कर सभी लोगों को इस ज्ञान से लाभान्वित किया है। इन सब
ज्ञाताओं ने अनेक रहस्यों को खोलकर रख दिया था, जिसे आज के आधुनिक विज्ञान ने सैकड़ों वर्ष बाद सही बताया
है।

अंक से व्यक्तिव की जानकारी- अंकों द्वारा हम किसी भी व्यक्ति के बारे में काफी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अंक
से तात्पर्य 1 से 9 तक के अंकों से है। हमारी जन्मतिथि के अंक के आधार पर हमारे व्यक्तित्व का पता चल जाता है।
यूं तो अंकों से जानकारी के कई तरीके हैं और उनका वर्णन करना भी काफी व्यापक है। हम आपको यहां तरीकों के
नाम संक्षिप्त में बता रहे हैं एवं मुख्य तरीका थोड़ा विस्तार से बता रहे हैं। अंक ज्ञान 5 प्रकार से किया जा सकता है।
1. मूलांक, 2. भाग्यांक, 3. नामांक, 4. स्तूपांक, 5. संयुक्तांक।
मूलांक- इससे तात्पर्य जन्मांक से है अर्थात हमारी जन्मतिथि का अंक। हमारी जन्मतिथि 1 से 9 तक के मूल अंकों में
निहित है। जिनकी जन्मतिथि दो अंकों में है, उन्हें उन दोनों अंकों को जोड़कर योग द्वारा एक अंक निकाल लेना
चाहिए जैसे अंक 10=1+0=1 अंक 19=1+9=10=1+0=1 अंक। हमारी जन्मतिथि से हमारे व्यक्तित्व के बारे में काफी
कुछ बताया जा सकता है।
भाग्यांक- इसका तात्पर्य जन्मतिथि, माह एवं वर्ष से होता है। उदाहरण- यदि आपका जन्म 6 मार्च 1965 को है तो
भाग्यांक इस प्रकार निकलेगा, 6+3+ 1+ 9+ 6+ 5= 30= 3+0=3 अर्थात् भाग्यांक 3 होगा।
नामांक- नामांक जानने के लिए प्रचलित नाम के अंग्रेजी के अक्षरों को बताये गये नम्बरों से गणना कर एवं जोड़कर
नामांक निकाला जाता है।
स्तूपांक एवं संयुक्तांक के लिए भी कुछ सटीक फॉर्मूले हैं। उनके द्वारा गणना कर ही एक अंक निकाल सकते हैं।
उपरोक्त सभी विधियों में मूलांक या जन्मांक की सर्वाधिक उपयोगिता है। मूलांक द्वारा कुछ बातें इस प्रकार बतायी
गयी हैं।
अंक 1- जन्मांक 1, 10, 19, 28 वाले इसी श्रेणी में आते हैं। यह सूर्य का प्रतिनिधि अंक है। इस अंक वाले व्यक्ति
स्वाभिमानी, उच्चाभिलाषी, दृढ़निश्चयी, आत्मनिर्भर, शक्तिशाली एवं प्रखर बुद्धि वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति अपने
साथ अच्छा व्यवहार करने वालों के साथ हित एवं अपने को हानि पहुंचाने वालों के साथ दुष्टïता करना नहीं भूलते।
ऐसे लोगों से उनकी इच्छा के विपरीत कार्य करवाना असम्भव-सा होता है। ये अपनी प्रखर बुद्धि से अपने व्यवसाय,
अपने पद की गरिमा बनाये रखते हैं। नेतृत्व करने की इनमें अत्यधिक क्षमता होती है।
अंक 2- जन्मांक 2, 11, 20, 29 वाले इसी श्रेणी में आते हैं। यह चन्द्रमा का प्रतिनिधि अंक है। 2 अंक वाले व्यक्ति
विनम्र, उदार, कल्पनाशील, कलाप्रिय, धैर्यवान व भावुक होते हैं। इसी भावुकता के कारण ये ज्यादा तरक्की नहीं कर
पाते हैं। विनय तथा उदार स्वभाव इनके आत्मविश्वास को डगमगा देता है, जिसके कारण ये चाहकर भी ज्यादा आगे
नहीं बढ़ पाते हैं। इनकी सोच प्राय: इन तक ही सीमित रहती है।

अंक 3- जन्मांक 3, 12, 21, 30 वाले इसी श्रेणी में आते हैं। यह देवगुरु बृहस्पति का प्रतिनिधि अंक है। इस अंक वाले
व्यक्ति महत्वाकांक्षी, स्वाभिमानी, दृढ़ निश्चयी, बुद्धिमान, अनुशासनप्रिय एवं एकांतप्रिय होते हैं। खूब धन कमाना
एवं खर्च कर डालना इनका स्वभाव होता है। तानाशाही प्रवृत्ति के कारण अपनी बात को मनवाने के चक्कर में वे अपने
शत्रु भी बना लेते हैं। ऐसे व्यक्ति जिस भी क्षेत्र में कार्य करें, उच्चतम सफलता प्राप्त करते हैं, लेकिन आकस्मिक
कार्यों से इनको धनहानि भी बहुत होती है।
अंक 4 -जन्मांक 4, 13, 22, 31 वाले इसी श्रेणी में आते हैं। यह अंक यूरेनस या हर्षल का प्रतिनिधित्व अंक है। 4 अंक
वाले व्यक्ति व्यवहार कुशल, आत्माभिमानी, व्यवस्थित, अपरम्परावादी होते हैं। कम विनोदप्रियता, धन अपव्यय,
स्वास्थ्य के प्रति सतर्क, कम मिलनसार इनका स्वभाव होता है। लीक से हटकर कार्य करना, परम्परागत नियमों से
कमी ढूंढऩा, किसी भी बात को विपरीत दृष्टिïकोण से देखना इनकी आदत होती है। 4 अंक वाले व्यक्ति कुछ अलग ही
स्वभाव व सोच वाले होते हैं।
अंक 5- जन्मांक 5, 14, 23 वाले इसी श्रेणी में आते हैं। यह अंक बुध का प्रतिनिधि अंक है। 5 अंक वाले महत्वाकांक्षी,
लेकिन सरल स्वभावी एवं सेवाभावी होते हैं। किसी से भी मित्रता कर लेना एवं अपने को कष्टï में डालकर भी मित्रों की
सहायता करना इनका स्वभाव होता है। बड़े-बड़े कार्यों की योजनाएं बनाना, लेकिन पूरी न कर पाना, शीघ्र धन प्राप्ति
के कार्यों में रुचि रखना, किसी से आचरण में अच्छे तो अच्छे रहना एवं किसी से आचरण में बुरे हैं तो बुरे ही रहना
इनकी आदत होती है। अपने ऊपर थोड़ा-सा मानसिक दबाव पड़ते ही इनमें चिड़चिड़ापन आ जाता है।
अंक 6- जन्मांक 6, 15, 24 वाले इसी श्रेणी में आते हैं। यह अंक शुक्र का प्रतिनिधि अंक है। 6 अंक वाले व्यक्ति
व्यवहारकुशल, आत्मविश्वासी, दृढ़निश्चयी, हाजिर जवाब, स्पष्टï वक्ता, सौन्दर्योपासक, अनुशासनप्रिय, देशभक्त
एवं हठी होते हैं। किसी भी कार्य को योजनापूर्वक दृढ़ता से करना, चातुर्यपूर्ण बातें कर दूसरों को प्रभावित करना, अपने
आकर्षण से मित्र बनाना एवं अपनी बात को मनवाने में इन्हें महारथ हासिल होती है। विपरीत परिस्थितियों में भी ये
अपनी बात से पीछे नहीं हटते।
अंक 7- जन्मांक 7, 16, 25 वाले इसी श्रेणी में आते हैं। यह अंक नेप्चून का प्रतिनिधि अंक है। 7 अंक वाले व्यक्ति
स्वतंत्र स्वभावी, विचारशील, धार्मिक, मौलिक, सतर्क, तीव्र बुद्धिमान, हिम्मती, दृढ़निश्चयी, विवेकवान होते हैं। ये
किसी भी कार्य को प्रारंभ कर उसे पूरा करके ही छोड़ते हैं। कठिनाइयों से घबराते नहीं, बहुत सोच-समझकर
योजनाबद्ध एवं बुद्धिमानीपूर्वक कार्य करते हैं। ये रूढि़वादी नहीं होते। अपने विवेक से मौलिक बातें कहना इनका
स्वभाव होता है। मौलिकता उनके व्यवहार में, उनके व्यवसाय में दृष्टिगोचर होती है।
अंक 8- जन्मांक 8, 17, 26 वाले इसी श्रेणी में आते हैं। यह अंक शनि का प्रतिनिधि अंक है। अधिकांशत: 8 अंक को
सौभाग्यशाली अंक नहीं माना जाता है। इस अंक वाले व्यक्ति को जीवन भर संघर्ष, प्रतिस्पर्धा, ईष्र्या का सामना
करना पड़ता है। ये लोग तीव्र महत्वाकांक्षाओं के कारण सफलता के शॉर्टकट तलाशते रहते हैं, जिसके कारण व्यर्थ के

झंझट में पड़ जाते हैं। ऐसे लोग गंभीर प्रकृति और धार्मिक रुचि के होते हैं, लेकिन कभी-कभी इनकी कट्टïर धार्मिकता
के कारण स्थिति विकट हो जाती है। समाज में उनके प्रति गलतफहमी बनी रहती है।
अंक 9- जन्मांक 9, 18, 27 वाले इस श्रेणी में आते हैं। यह अंक मंगल का प्रतिनिधित्व करता है। 9 अंक वाले
आत्मविश्वासी, शौकीन, हितैषी सौन्दर्योपासक, अनुशासनप्रिय, संघर्षशील, दृढ़निश्चयी, परोपकारी होते हैं। मित्र
बनाने में दक्ष, कार्य को समय पर सफलतापूर्वक करना इनका स्वभाव होता है। कार्य में बाधा आने पर भी निरन्तर
संघर्ष कर दृढ़ इच्छाशक्ति से ये सभी बाधाएं पार कर लेते हैं। कार्य में दूसरों का दखल ये बर्दाश्त नहीं कर पाते। ये
स्वतंत्र स्वभाव के होते हैं। स्त्री के प्रेमजाल में फंस जायें तो अपना सब कुछ गंवा सकते हैं। (विभूति फीचर्स)

अरिष्टदायक ग्रहों को शुभदायक बनाने के लिए कुछ सरल उपाय

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ब्रह्मïर्षि वैद्य पं. नारायण शर्मा कौशिक – विभूति फीचर्स
प्रत्येक प्राणी पर ग्रहों का प्रभाव पड़ता है यथा पिण्डे तथा ब्राह्मणे’ के अनुसार अरिष्टदायक स्थिति को शुभ
मंगलमय बनाने के लिए कुछ सरल उपाय करें तो निश्चित ही हमें शुभदायक परिणाम मिलेंगे तथा जीवन में नए
कार्य के प्रति बनायी गयी योजनाओं में लाभ भी प्राप्त होगा। पुण्य कार्य सुफलम् दायकम् हम करें। उपाय सरल एवं
सर्वजन हेतु करने योग्य कुछ इस प्रकार हैं-

1. प्रात:काल उठते ही माता-पिता, गुरु एवं वृद्धजनों को प्रणाम नित्य करें तथा उनका आत्मिक आशीर्वाद प्राप्त
करके नित्य सुफल प्राप्त करें।
2. नित्य प्रति गाय को गुड़, रोटी देवें। हो सके तो गाय का पूजन करके आज के दिन यह कामधेनु वांछित कार्य करेगी,
ऐसे भावना करें।
3. नित्य प्रति कुत्तों को रोटी खिलानी चाहिए। पक्षियों को दाना भी डालें तो शुभ है।
4. यदि आपके शहर, गांव के पास तालाब, नदी या सागर हो तो उसमें कछुए और मछलियों को कुछ आटे की गोलियां
बनाकर खिलानी चाहिए।
5. नित्य प्रति चील-कौओं को खाने-पीने की वस्तुओं में से कुछ हिस्सा अवश्य डालना चाहिए तथा गौ ग्रास भी भोजन
करते समय नियमित निकालें।
6. घर आये अतिथियों की सेवा निष्काम भाव से करनी चाहिए तथा उनकी ओर से प्राप्त संदेश ध्यान से सुनकर योग्य
संदेश का अनुकरण करना चाहिए।
7. हमेशा प्रात:काल भोजन बनाते समय माता-बहनें एक रोटी अग्निदेव के नाम से बनाकर घी तथा गुड़ से बृहस्पति
भगवान को अर्पित करें तो घर में वास्तु पुरुष को भोग लग जाता है, इससे अन्नपूर्णा भी प्रसन्न रहती है।
8. प्रात: स्नान करके भगवान शंकर के शिवलिंग पर जल चढ़ाकर 108 बार 'ऊँ नम: शिवाय’ मंत्र की पूजा से युक्त
दण्डवत नमस्कार करना चाहिए।
9. स्नान के पश्चात प्रात: सूर्यनारायण भगवान को लाल पुष्प चढ़ाकर बार-बार हाथ जोड़कर नमस्कार करना चाहिए।
10. प्रत्येक शनिवार को पीपल के वृक्ष पर जल + कच्चा दूध थोड़ा चढ़ाकर सात परिक्रमा करके सूर्य, शंकर, पीपल इन
तीनों की सविधि पूजा करें तथा चढ़े जल को नेत्रों में लगावें और पितृ देवाय नम: भी 4 बार बोलें तो राहु+केतु+शनि+
पितृ दोष का निवारण होता है।
11. प्रात:काल सूर्य के सम्मुख बैठकर एकान्त में भगवत भजन या मंत्र या गुरु मंत्र का जप करना चाहिए।
12. यथा शक्ति कुछ न कुछ गरीबों को दान देना चाहिए।
13. प्रत्येक प्राणी पर दया भाव के साथ तन-मन-धन से सहयोग यथा योग्य करना चाहिए। सेवा कर यश प्राप्ति की
भावना नहीं रखें।
14. अमक्ष्य वस्तुओं को कभी ग्रहण नहीं करना चाहिए।

15. सदैव ईश्वर की महान शक्ति पर पूर्ण विश्वास करते हुए जीवन जीना चाहिए तथा अधर्म (हिंसा) से डरते हुए यानी
बचते हुए धर्म (अहिंसा) की भावना से मानव मात्र का कल्याण हो, ऐसा चिन्तन होना चाहिए।
16. प्रत्येक प्राणी के प्रति यथा शक्ति दया, स्नेह और सेवा की भावना रखें।
17. रविवार या मंगलवार को कर्ज नहीं लेवें, बल्कि बुधवार को कर्ज लेवें।
18. मंगलवार को कर्ज चुकाना चाहिए तथा यह भी ध्यान रखें कि संक्राति हो और वृद्धि योग हो अथवा हस्त नक्षत्र
हो, तब कर्ज नहीं लेवें।
19. नियमित रूप से घर की प्रथम रोटी गाय को तथा अन्तिम रोटी कुत्ते को देवें तो घर में रिद्धि-सिद्धि का आगमन
एवं भाग्योदय होगा।
20. पितृ दोष से मुक्ति के लिए नित्य महा गायत्री के महामंत्र की नियमित साधना करें तथा श्री रामेश्वर धाम की
यात्रा कर वहां पूजन करें।
21. मातृ दोष से मुक्ति के लिए विष्णु भगवान की पूजा करें, उनकी कथा सुनें, चन्द्रायण व्रत करें और यथा संभव
यमुना नदी में स्नान तर्पण करें।
22. दरिद्रता दूर करने के लिए 108 लौंग और 108 इलायची के दाने लें। उन्हें ग्रहण काल में अथवा दीपावली के दिन
जलाकर भस्म बना लें। इस भस्म को देवी-देवताओं की तस्वीर पर लगाकर नित्य दर्शन तथा प्रार्थना करें।
23. यदि पलंग या खाट पर सोते हैं तो प्रात:काल उठते ही पृथ्वी को नमन करें।
24. किसी भी नये कार्य के लिए प्रस्थान से पूर्व मंगलीक (गुड़) का सेवन जरूर करें। (विभूति फीचर्स)

अगर आपकी जिंदगी से चले जाएं सुगंध और स्वाद?

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सुभाष बुड़ावनवाला – विभूति फीचर्स

ओलंपिक में दो बार स्वर्ण पदक जीत चुके जेम्स क्रैकनेल न सूंघ सकते हैं और नही किसी चीज का स्वाद ले सकते हैं।
एक दिमागी चोट के कारण उनकी सूंघने और स्वाद लेने की शक्ति कमजोर हो गई है- जिंदगी कैसी हो, अगर हमारी
ये महत्वपूर्ण इंद्रियां काम करना बंद कर दें?

इसी तरह डंकन बोक 2005 में गिरने से दिमाग में लगी गंभीर चोट के कारण अपनी सूंघने की शक्ति खो बैठे थे। कहा
जाता है कि खाने का स्वाद 80 प्रतिशत तक उसकी खुशबू से होता है। ऐसे में सूंघने की शक्ति के चले जाने का डंकन के जीवन पर व्यापक असर हुआ।

डंकन कहते हैं सूंघने की शक्ति खोने के बाद व्यक्ति अपने जीवन में ही एक दर्शक बन कर रह जाता है। यह उसी तरह है जैसे आप सभी चीजों के शीशे के पीछे से देख रहे हैं। ऐसा महसूस होता है कि जैसे आप जीवन में पूरी तरह से रम नहीं पा रहे हैं और जिंदगी के रंग उड़ गए हैं। हम दूसरों से अलग और अकेले हो जाते हैं।‘

जेम्स क्रैकनेल को अमरीका में बाइक चलाते हुए पेट्रोल टैंकर ने टक्कर मार दी थी। रेडियो टाइम्स को दिए एक
साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि वे अब न सूंघ सकते हैं और नही स्वाद ले सकते हैं। वे अब बस जीवित रहने के लिए ही
खाते हैं। खाना उनके लिए ऐसे ही जैसे कार के लिए पेट्रोल।

बेशकीमती खुशबू स्वाद न ले पाने की बीमारी को एजोसिया (अस्वाद) कहा जाता है। यह बहुत ही असाधारण लेकिन दुर्लभ बीमारी है, हालांकि इसका असर बहुत व्यापक नहीं होता।

अधिकतर लोग जिन्हें लगता है कि वे स्वाद नहीं महसूस कर पा रहे हैं, वे असल में अपनी सूंघने की क्षमता खो चुके
होते है। इस बीमारी को अनोसमिया (गंधज्ञानाभाव) कहते हैं और इसका मनोवैज्ञानिक और शारीरिक प्रभाव भयानक
हो सकता है।

सेंटर फॉर स्टडी ऑफ सेंसेज के सह-निदेशक प्रोफेसर बैरी सी स्मिथ कहते है, 'अध्ययनों से पता चला है कि जो लोग सूंघने की क्षमता खो देते हैं, वह अंधे हो गए लोगों से भी ज्यादा अवसाद के शिकार हो जाते हैं और लंबे समय तक
इसमें रहते हैं।

स्थिम का कहना है, सूंघने की शक्ति को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती है। लेकिन इसे खो देना न सिर्फ खाने का मजा
छीन लेता है बल्कि कोई भी व्यक्ति या जगह भी जानी पहचानी नहीं लगती। यह स्मृति से भी बहुत ही बारीकी से जुड़ी
हुई है। जीवन से इस भावनात्मक गुण को खो देने का बहुत ही व्यापक दुष्प्रभाव होता है और इससे निपटना भी
मुश्किल होता है।‘  फ्लू के कारण सुई माउनफील्ड अपनी सूंघने की शक्ति खो बैठी थीं। वे कहती हैं कि जिन गंधों की कमी वे सबसे ज्यादा महसूस करती हैं, वो भोजन से जुड़ी हुई नहीं हैं।

वे कहती हैं,मैं अपने बच्चों, अपने घर और अपने बगीचे की खुशबू की कमी महसूस करती हूं। जब ये नहीं होती तब  हमें अहसास होता है कि यह खुशबू कितनी आरामदायक और बेशकीमती थीं। ये आपको व्यवस्थित और जमीन से जुड़े होने का अहसास देती है। इन खुशबुओं के बिना मुझे लगता है कि मैं अपने जीवन को देख तो रही हूं लेकिन उसमें हिस्सा नहीं ले पा रही हूं।‘

न सूंघ पाने के खतरे
सूंघने की शक्ति खो देना दुनिया को और भी खतरनाक जगह बना देता है, स्मिथ कहते हैं, 'गंध और स्वाद उस
चौकीदार का काम करते हैं जो विषैले पदार्थों को हमारे शरीर में घुंसने से रोक देते हैं।‘ एलनकर जब आठ साल के थे
तब जिम में गिरने के कारण वह अपनी सूंघने की शक्ति खो बैठै थे। इसके कारण वह कई बार खतरे उठा चुके हैं।
गंध और स्वाद
– स्वाद ग्रंथियां जीभ के ऊपर, नीचे और बगल में और तथा मुंह में ऊपर और पीछे बनी होती हैं।
– यह ग्रंथियां भोजन के अणुओं के साथ मिलकर दिमाग को संदेश भेजती हैं।
– इन संदेशों से हमारा मस्तिष्क जो छवि बनाता है वही स्वाद होता है जिसे नमकीन, कड़वा, मीठा, तीखा या नीरस
कहा जा सकता है।
– जब मुंह के पिछले हिस्से से भोजन के अणु नाक में चले जाते हैं तब मुंह के जरिये भी हमें भोजन की गंध मिलती है।

स्मिथ बताते हैं, 'जब मैं यूनिवर्सिटी में था, तब दुर्घटनावश गैस खुली छोड़ गया। मैं पूरा दिन घर पर ही था लेकिन
मुझे पता ही नहीं चल पाया। तीन बजे के करीब जब मेरे साथ रहने वाले छात्र आए तब उन्हें गंध आई और गैस खुली
होने का पता चल सका। मैं थोड़ा असहज तो था लेकिन यह नहीं जान पा रहा था कि क्यों ऐसा हो रहा था।‘
वहीं बोक कहते हैं कि दुर्घटना के छह साल बाद उन्हें अवसाद का कारण पता चला। सूंघने की शक्ति के बारे में पढऩे के
बाद उन्हें जीवन बदल जाने जैसा अनुभव हुआ। उन्हें पता चला कि वह अवसाद में क्यों रहते हैं। अनोसमिया के
मरीजों की मदद के लिए उन्होंने अब ब्रिटेन का पहला सहायता समूह 'फिक्थ सेंस’ शुरू किया है। इस बात के कोई
अधिकारिक आंकड़े नहीं है कि ब्रिटेन में कितने लोग सूंघने की शक्ति खो देने की बीमारी से ग्रसित हैं लेकिन यूरोप
और अमरीका के आंकड़ों को एक साथ रखने पर यह कुल आबादी का करीब पांच प्रतिशत है।
नजरअंदाज करते हैं डॉक्टर सूंघने की शक्ति कई कारणों से चली जाती है। कुछ लोग जन्म से ही गंध नहीं ले पाते हैं। कईबार यह दिमाग में चोट लगने तो कई बार इंफेक्शन के कारण भी चली जाती है। बुढ़ापा भी इस बीमारी का एक कारण है। 75 वर्ष की उम्र के बाद सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता तेजी से कम होती है।

सूंघने और स्वाद लेने में आने वाली अबूझ दिक्कतें कईबार स्लेरोसिस, पार्किंसस और अलजाइमर जैसी गंभीर
बीमारियों का भी संकेते होती हैं। यह इन बीमारियों को ज्ञात संकेतों से सालों पहले ही सामने आ जाती हैं।
स्मिथ कहते हैं, 'स्वाद और गंध लेने में आ रही दिक्कतें इसबात का संकेत होती हैं कि कहीं कुछ गलत है। लोगों को इसका परीक्षण करवाना चाहिए लेकिन वे ऐसा नहीं करते। कई बार चिकित्सा विशेषज्ञ भी ऐसी दिक्कतों को
नजरअंदाज कर देते हैं।‘

ग्रसित लोग बताते हैं कि डॉक्टर इस बीमारी को अजीब बताते हुए उन्हें यह कहकर लौटा देते हैं कि इसका कोई इलाज
ही नहीं है। माउनफील्ड कहती हैं, 'चूंकि इसमें दर्द नहीं होता है, इसलिए बहुत से डॉक्टर मरीजों को इस बीमारी के साथ जीना सीख लेने की सलाह देते हैं।‘

वहीं चिकित्सा जगत से बाहर के लोग इस बीमारी को मनोरंजक मानते हुए एक विषमता के रूप में देखते हैं।
इस बीमारी के भौतिक परिणाम भी घातक हो सकतह्य है। ग्रसित लोगों का वजन कम हो जाता है। क्योंकि उन्हें खाने
में मजा नहीं आता। बोक बताते हैं कि उनसे ऐसे लोगों ने भी संपर्क किया है जिन्हें अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा
क्योकि उनके लिए भोजन करना एक मुश्किल काम हो गया था।

अनोसमिया को ठीक किया जा सकता है या नहीं, यह इस बीमारी के होने की वजह पर निर्भर करता है। कुछ लोगों की
गंध लेने की क्षमता में सुधार होता है तो कुछ लोग जीवन भर के लिए इससे वंचित रह जाते हैं।

अगर सुधार होता है भी है तब भी चीजों का स्वाद पहले जैसा नहीं रह जाता क्योंकि दिमाग गंधों की पहचान अलग रूप
में बना लेता है। ऐसे में चॉकलेट का स्वाद मांस जैसा लग सकता है।

जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ ड्रेस्डेन के 'स्मैल एंड टेस्ट क्लीनिक’ के प्रोफेसर थॉमस हम्मल के अध्ययन से पता चला है कि 12 हफ्तों तक रोज ऑयल, नींबू और लौंग जैसी तीव्र गंधों को लेने से सूंघने की क्षमता में सुधार होता है।
बोक की स्वाद ग्रंथियां अब भी काम कर रही हैं। जो रह गया है, वे उसी से काम चला रहे हैं। वे नमकीन या मीठे में फर्क कर पाते हैं। चीजों की बनावट भी उनके लिए महत्वपूर्ण हो गई है। वे बताते हैं, 'अब मैं बनावट के जरिए ही टमाटरों में फर्क कर सकता हूं। सूघने की शक्ति खोने से पहले मैं इस बारे में सोच भी नहीं सकता था।‘ (विभूति फीचर्स)

प्रज्ञान : बच्चों के लिए संवेदनात्मक रचनाएँ

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प्रज्ञान, बाल साहित्यकार डॉ सत्यवान सौरभ जी की इक्यावन बाल कविताओं का सुन्दर संग्रह है। इन कविताओं में जीवन के विविध रंग देखने को मिलते हैं। इनमें प्रकृति का सौन्दर्य है तो समाज की कुरूपता भी है। जहाँ बचपन के आनंद का सजीव चित्रण है वहीं आर्थिक विवशताओं के कारण काम के बोझ तले दबे बच्चों का मर्मस्पर्शी वर्णन है। बचपन जीवन का स्वर्णिम काल होता है लेकिन सभी बच्चों का बचपन एक – सा नहीं होता। कुछ बच्चों का बचपन काल के क्रूर हाथों द्वारा मसल दिया जाता है। इस कसक की झलक इस संग्रह में देखी जा सकती है-
कागज़ पर शिक्षा मिले,  वादों में बस प्यार।
बाल दिवस पर बाँटते, भाषण प्यार-दुलार।।
दो रोटी की चाह में, लूटता है संसार।
फुटपाथो पर रेंगते, झोली रहे पसार।।
 संग्रह की पहली कविता ‘बने संतान आदर्श हमारी’ है इसमें एक माता-पिता अपने आने वाले बच्चे के लिए सपने संजोते है। माता-पिता अपना बच्चा कैसा चाहते है। अपने आने वाले बच्चे के बारे में कवि सोचता  है। हमारे नायकों का उदाहरण देते हुए कवि का कहना है कि उनका  बच्चा भी जीवन में उनके अच्छे गुणों का समावेश करें और उनके बताये रास्ते पर चले। इस कविता में हमारे वीर-वीरांगनाओं  का स्वाभाविक चित्रण हुआ है। कवि का मानना है कि हर आम बच्चे में हमारे आदर्शों का होना जरूरी है –
पुत्र हो तो प्रह्लाद-सा, राह धर्म की चलता जाये।
ध्रुव तारा सा अटल बने वो, सबको सत्य पथ दिखलाये।।
पुत्री जनकर मैत्रियी, गार्गी, ज्ञान की ज्योत जलवा दूँ मैं।
बने संतान आदर्श हमारी, वो बातें सिखला दूँ मैं।।
बालसाहित्य बच्चों का साहित्य है। इसमें बच्चों की कोमल भावनाओं का ध्यान रखा जाता है। बच्चे मनोरंजन पसन्द करते हैं, लेकिन कवि चाहता है कि बच्चे जीवन के विषय में भी जानकारी प्राप्त करें। आसपास जो विसंगतियाँ फैली हुई हैं उनसे बच्चों को अवगत कराना भी कवि अपना धर्म समझता है। वह बच्चों की संवेदनशीलता को सम्पूर्ण समाज तक विस्तृत करना चाहता है। ‘गूगल की आगोश में ‘ कविता में कवि की यह भावप्रवण संवेदना मर्मस्पर्शी है –
छीन लिए हैं फ़ोन ने, बचपन से सब चाव।
दादी बैठी देखती, पीढ़ी में बदलाव।।
मन बातों को तरसता, समझे घर में कौन ।
दामन थामे फ़ोन का, बैठे हैं सब मौन।।
बच्चे प्रकृति से अपनापन अनुभव करते हैं। प्राकृतिक दृश्य उन्हें बहुत लुभाते हैं। कवि के अन्दर का नन्हा बच्चा भी प्रकृति के इन मनोरम दृश्यों को मुग्ध होकर देखता है। ‘बचपन के वो गीत’ एक ऐसी ही कविता है जिसमें कवि ने बचपन का मानवीकरण करते हुए इसके क्षण – क्षण परिवर्तित रूप का बड़ा ही मनोहारी चित्रण किया है। प्रतीकात्मक और लाक्षणिक शैली का प्रयोग देखते ही बनता है –
 बैठे-बैठे जब कभी, आता बचपन याद ।
मन चंचल करने लगे, परियों से संवाद ।।
छीन लिए हैं फ़ोन ने, बचपन से सब चाव ।
दादी बैठी देखती, पीढ़ी में बदलाव ।।
बच्चे की दुनिया माँ के आसपास घूमती है और माँ की दुनिया तो बच्चे ही होते हैं। माँ स्वयं दुःख सहकर बच्चे को हर सुख देना चाहती है। ‘माँ हरियाली दूब’ एक छोटी – सी कविता है लेकिन इस कविता में कवि ने माँ की सारी ममता को गहराई के साथ उकेर दिया है –
 तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास।
सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास।।
माँ ममता की खान है, धरती पर भगवान।
माँ की महिमा मानिए, सबसे श्रेष्ठ-महान।।
माँ, परिवार की धुरी होती है। माँ के त्याग और समर्पण के कारण ही घर सुचारू रूप से संचालित होता है। घर के सदस्यों की सुख – सुविधाओं का ध्यान रखते – रखते माँ अपने सुख की ओर कभी ध्यान नहीं देती। ‘आँचल की छाया’ कविता में माँ के इसी त्यागमय स्वरूप के प्रति अपनी निश्छल संवेदना दर्शाता एक बच्चा कहता है –
त्याग और बलिदान का, माँ ही है प्रतिरूप।
आँचल की छाया करे, हर संकट की धूप।।
माँ जैसा संसार में, सौरभ नहीं सुजान।
माँ की वाणी में निहित , गीता का सब ज्ञान।।
कवि का मानना है कि हमें परिवर्तनों को सहज स्वीकार करना चाहिए। बड़े – बुजुर्ग लोग हर समय परिवार के लिए मजबूत स्तम्भ रहें हैं। कवि को उनका जाना पसंद नहीं है।  दादा -दादी के जाने के बाद कवि का जीवन सूना हो गया है, कवि तरह – तरह की कल्पना करता है जिससे कि हर समय उसे उनकी याद आती है।  ‘दादा-दादी ‘ कविता में कवि की कल्पना की ताजगी द्रष्टव्य है –
दादा-दादी बन गए, केवल अब फरियाद।
खुशियां आँगन की करे, रह-रह उनको याद।।
रो ले, गा ले, हँस ले, दादा-दादी साथ।
ये आँगन से क्या गए, जीवन हुआ अनाथ।।
इस कृति की कविता ‘अनुपम त्यौहार’ में कवि ने त्योहारों का महत्व प्रतिपादित करते हुए कहा है कि त्यौहार प्यार और सद्भाव का भंडार होते हैं। त्यौहार न केवल हमारा मनोरंजन करते हैं, वरन तरह-तरह की जानकारियां देकर ये हमारे अनुभव का विस्तार भी करते हैं। स्वस्थ मनोरंजन और शिक्षा प्रदान करने वाले त्यौहार, बच्चों के सच्चे साथी होते हैं –
 आभा जीवन की रहे, “तीज” और “त्यौहार”।
“रंग” भरे मन में करे, नव जीवन संचार।।
त्याग तपस्या जाप से, उगे नेह के बीज।
हो पूरी मन कामना, पूजे भादो तीज।।
कवि की संवेदनशीलता का हाल यह है कि वह पुराने हो चुके झाड़ू में भी वृद्ध लोगों की छवि देखता है। कवि का हृदय वृद्धों की उपेक्षा से व्यथित है। ‘काम लेकर फेंक देने की प्रवृत्ति’, स्वार्थ और संकीर्णता पर आधारित है। वृद्धों का सम्मान करने की सीख देती कविता ‘वृद्धों की हर बात का’  अद्भुत है –
 वृद्धों की हर बात का, रखता कौन खयाल।
आधुनिकता की आड़ में, हर घर है बेहाल।।
होते बड़े बुजुर्ग है, सारस्वत सम्मान।
मिलता इनसे ही हमें, है अनुभव का ज्ञान।।
उक्त उदाहरणों से स्पष्ट है कि प्रज्ञान बाल संग्रह की रचनाओं का प्रमुख स्वर मानवीय संवेदना और करुणा है। शांत नदी की तरह बहती ये कविताएँ पाठक के मन को शीतल भावों की लहरों से भिगो देती हैं। ये रचनाएँ एक हल्के – से घटनाक्रम को लेकर आगे बढ़ती हैं अतः इनमें कथातत्त्व का भी समावेश है जो जिज्ञासा से बालमन को अंत तक बाँधे रखता है। इन कविताओं में बच्चों ही नहीं, अभावों से जूझते समाज के श्रमिक वर्ग का भी चित्रण है। इन सबका उद्देश्य यह है कि कवि बच्चों की कोमल भावनाओं की रक्षा करते हुए उनमें दुखियों के प्रति संवेदना का भाव जगाना चाहता है।
छन्द में लिखी ये रचनाएँ गीत और कविता का मिलाजुला रूप है। इनमें लय और प्रवाह है जो इन कविताओं को प्रभावशाली बनाता है। भाषा बालमन के अनुरूप सरल, सरस और सहज बोधगम्य है। मुद्रण सुन्दर एवं त्रुटिरहित है। फैलते आकाश के साथ प्रज्ञान के मनमोहक चित्र से सजा आवरण अत्यंत आकर्षक है। बालमन को लुभाने वाले मनोरंजक एवं संवेदनशील कविताओं से सजी पठनीय कृति ‘प्रज्ञान’ के सृजन के लिए डॉ सत्यवान सौरभ जी को हार्दिक बधाई।
प्रज्ञान : बच्चों के लिए संवेदनात्मक रचनाएँ
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पुस्तक का नाम : प्रज्ञान
लेखक : डॉ. सत्यवान ‘सौरभ’
लेखकीय पता : परी वाटिका, कौशल्या भवन,
बड़वा (सिवानी) जिला भिवानी, हरियाणा – 127045
मोबाइल : 9466526148, 7015375570
विधा : बाल काव्य
प्रकाशक : नोशन प्रकाशन समूह, चेन्नई।
संस्करण : 2023
मूल्य : ₹ 160/-
पृष्ठ संख्या : 100
अमेज़न, फ्लिपकार्ट और अन्य ऑनलाइन प्लेटफार्म  पर हर जगह उपलब्ध।

सभी विभाग बेहतर वर्क कल्चर के साथ जीरो पेडेंसी का लें संकल्प- मुख्यमंत्री

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जल विद्युत निगम राज्य में उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप विद्युत उत्पादन पर दे ध्यान-मुख्यमंत्री

सभी विभाग बेहतर वर्क कल्चर के साथ जीरो पेडेंसी का लें संकल्प- मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री ने किया यूजेवीएनएल के नये कारपोरेट भवन का लोकार्पण

16 दिसम्बर 2023,शनिवार देहरादून
संजय बलोदी प्रखऱ
मीडिया समन्वयक उत्तराखण्ड प्रदेश

देहरादून 16 दिसम्बर, मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी शनिवार को सायं उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम के 23वें स्थापना दिवस समारोह में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को जल विद्युत निगम के एम.डी ने 20 करोड़ 09 लाख 58 हजार 211 रूपये का लाभांश का चेक भेंट किया।
मुख्यमंत्री ने यूजेवीएनएल के कारपोरेट भवन का लोकार्पण के साथ ही सी.एम.आर के तहत सरस्वती विद्या इण्टर कॉलेज भानियावाला को दी गई बस को फ्लेग ऑफ कर रवाना किया।

उपस्थित जन सामान्य को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में आयोजित हुए ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में लक्ष्य से अधिक 3.50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों में ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव शामिल है। उन्होंने जल विद्युत निगम से 2030 तक विद्युत उत्पादन के लक्ष्य 2200 मेगावाट को और अधिक बढ़ाये जाने पर बल देते हुए अपेक्षा की कि जल विद्युत निगम प्रदेश में स्थापित तथा नये स्थापित होने वाले उद्योगों की विद्युत जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान देना सुनिश्चित करें। उन्होंने सभी विभागों एवं संस्थानों से बेहतर वर्क कल्चर के साथ जीरो पेडेंसी का संकल्प लेने को भी कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य स्थापना के उपरांत यूजेवीएनएल का गठन उत्तराखण्ड को सही अर्थों में ऊर्जा प्रदेश बनाने के लिए किया गया था। जिसे निगम द्वारा प्रतिवर्ष किए जाने वाले अपने रिकार्ड उत्पादनों के माध्यम से साबित भी किया जा रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि निगम अपनी बेहतर कार्यसंस्कृति और कुशल प्रबन्धन के बल पर इसी प्रकार ऊर्जा के क्षेत्र में नित नए कीर्तिमान स्थापित करता रहेगा। राज्य निर्माण के समय ऊर्जा क्षेत्र को हमारी आर्थिकी का मूल आधार माना गया था, परंतु हमारा यह लक्ष्य अभी तक पूर्णरूपेण सफल नहीं हो पाया है। अब समय आ गया है कि हम सभी मिलकर यह विचार करें कि इस दिशा में कैसे तेजी से आगे बढ़ा जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र की विकास योजनाओं को समय पर पूर्ण करने में हमें केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है।इसका उदाहरण लखवाड़ बहुउद्देश्यीय जल विद्युत परियोजना है जिसमें तेजी से कार्य किया जा रहा है। इस परियोजना से करीब 475 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन हो सकेगा, जो हमारे प्रदेश के लिए ऊर्जा क्षेत्र में नए अवसर सृजित करेगा। इसके साथ ही जमरानी बांध परियोजना के लिए भी केंद्र सरकार की मंजूरी मिल चुकी है, जिस पर भी कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।

यूजेवीएनएल द्वारा अप्रैल-मई 2022 में व्यासी परियोजना (120 मे.वा.) का कार्य पूर्ण कर एक ऐतिहासिक कार्य किया गया है, जो देवभूमि के ऊर्जा क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। इस परियोजना से जहां एक ओर जौनसार बावर के क्षेत्रों को उच्च गुणवत्ता की विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी, वहीं दूसरी और स्थानीय लोगों के जीवन में आर्थिकी का सुधार भी हो सकेगा। लखवाड (300 मे.वा.) जैसी बहुउद्देशीय परियोजना पर कार्य प्रारम्भ होने पर उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि इससे 05 राज्यों को पीने एवं सिंचाई हेतु जल की आपूर्ति सहित उत्तराखंड को अतिरिक्त 300 मे०वा० की बिजली मिल सकेगी। इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 15 मे.वा. की मदमाहेश्वर परियोजना भी सफलतापूर्वक अपना उत्पादन प्रारम्भ करेगी। वृहद परियोजनाओं के अन्तर्गत यमुना घाटी में त्यूनी-प्लासू 72 मे.वा. जल विद्युत परियोजना और आराकोट-त्यूनी की 81 मे.वा. की परियोजना की डी०पी०आर० बनाने की प्रक्रिया भी वर्तमान में चल रही है। राज्य सरकार जीरो पेंडेसी वर्क कल्चर पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिये हर क्षेत्र में सरलीकरण, समाधान, निस्तारिकरण एवं संतुष्टि के मूलमंत्र के आधार पर निर्णय लिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा विभाग में 2008 में केंद्र सरकार द्वारा जल विद्युत नीति लायी गयी थी, जिसे लागू नहीं किया गया था, लेकिन हमने कैबिनट की बैठक में जल विद्युत नीति लाकर उसे लागू करने का प्रयास किया है। उन्होंने यूजेवीएनएल सहित अन्य संस्थानों को अपनी संपत्तियों का भी ध्यान रखने को कहा। ऐसे कई मामले संज्ञान में आ रहे है, जिनमें संस्था की जमीन पर अवैध अतिक्रमण हुआ है। संस्थानों को सरकार की जमीन मिलती है तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उनकी है, इसलिए सभी विभाग अपने-अपने क्षेत्र का अवलोकन करे और जमीनों को कब्जामुक्त करायें। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी सूरत में अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखण्ड का दशक बताया है और हमारी सरकार संकल्पबद्ध होकर इसे पूर्ण करने की दिशा में कार्यरत है। हम अपने ‘विकल्प रहित संकल्प‘ के साथ उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए कृत संकल्पित हैं। इस लक्ष्य को पूर्ण करने एवम् उत्तराखंड को विकसित, सक्षम व आदर्श राज्य बनाने के लिए हमारी सरकार दिन-रात कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने यूजेवीएनएल सहित अन्य ऊर्जा निगमों से अपेक्षा की कि वे उपलब्ध संसाधनों का सही प्रयोग कर प्रदेश को उर्जा क्षेत्र में देश का नंबर वन राज्य बनाने के लिए निरंतर अपना योगदान देते रहें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें ऊर्जा के क्षेत्र में ज्ञान, विज्ञान एवं नवाचार के साथ ग्रीन इनर्जी के क्षेत्र में भी इकोलॉजी तथा इकोनामी का समन्वय बनाकर आगे बढ़ना होगा। हमे राज्य की जीडीपी को दुगना करने की दिशा में कार्य करना है। इस दिशा में प्रधानमंत्री श्री मोदी हमें प्ररेणा देने के साथ कर्तव्य बोध भी कराते है। हमें इस चुनौती का मिलकर सामना करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा में उत्तराखण्ड वेडिंग डेस्टिशन बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री के आदि कैलाश, गूंजी आदि क्षेत्रों के भ्रमण से यहां देश व दुनिया के लोग आने लगे है। मुख्यमंत्री ने सभी से अपेक्षा की कि वे देहरादून शहर की साफ-सफाई एवं सुंदरता के लिए किये गये प्रयासों में सहयोगी बने ताकि साफ सफाई व सुन्दरता में देश के प्रमुख शहरों में हमारा शहर शामिल हो।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने यूजेवीएन लिमिटेड द्वारा निगम की बेहतर कार्यसंस्कृति बनाए रखने तथा निगम के कार्मिकों का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2022-23 में सराहनीय प्रदर्शन पर विभिन्न विद्युतगृहों एवं परियोजनाओं को पुरस्कार भी प्रदान किए गए। इस कड़ी में आर.एम.यू. के साथ सर्वश्रेष्ठ विद्युतगृह का पुरस्कार खटीमा विद्युतगृह को प्रदान किया गया। इसके साथ ही आर.एम.यू. के बिना सर्वश्रेष्ठ विद्युतगृह का पुरस्कार कुल्हाल विद्युतगृह को तथा द्वितीय पुरस्कार खोदरी विद्युतगृह को दिया गया। सर्वश्रेष्ठ निर्माणाधीन परियोजनाओं में काली गंगा द्वितीय परियोजना को सर्वश्रेष्ठ निर्माणाधीन परियोजना का पुरस्कार प्रदान किया गया। साथ ही इस अवसर पर ऑल इंडिया इलेक्ट्रिसिटी स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड द्वारा हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित 45वीं ऑल इंडिया पावर बैडमिंटन प्रतियोगिता में रजत पदक विजेता उत्तराखंड पावर स्पोर्ट्स ग्रुप की बैडमिंटन टीम के सदस्यों जी.एस. बुदियाल, गोपाल सिंह, ललित कुमार, आदित्य राठी, रक्षित भंडारी तथा सुमित राणा को भी सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव एवं अध्यक्ष उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम श्रीमती राधा रतूड़ी ने कहा कि हम पिछले दो वर्षों से प्रदेश को ऊर्जा प्रदेश बनाने की दिशा में अग्रसर हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इन्वेसमेंट के तहत उद्योगों की स्थापना के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। ऊर्जा इंडस्ट्री में आक्सीजन की भांती होती है। यहां टैरिफ अधिक नही है। उन्होंने ऊर्जा निगमों में इकोलॉजी तथा इकोनामी के समन्वय के साथ 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखण्ड का ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने पर ध्यान देने को कहा तभी हम उत्तराखण्ड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के मुख्यमंत्री जी के संकल्प को पूरा करने में सफल होंगे।

अपने संबोधन में यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री संदीप सिंघल ने कहा कि यूजेवीएन लिमिटेड का गठन उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने तथा राज्य को विद्युत उत्पादन की नई ऊंचाइयों की ओर ले जाने हेतु किया गया था जिसे निगम द्वारा अपने रिकॉर्ड उत्पादनों द्वारा बार-बार साबित भी किया गया है। श्री संदीप सिंघल ने बताया कि निगम की परियोजनाओं द्वारा वर्ष 2022-23 में 5433 मिलियन ऊर्जा का उत्पादन करते हुए 115.64 करोड़ रुपए का लाभ अर्जित किया गया। उन्होंने कहा कि यूजेवीएन लिमिटेड द्वारा लगातार पिछले सात वर्षों से राज्य सरकार को लाभांश प्रदान किया जा रहा है। श्री संदीप सिंघल ने यूजेवीएन लिमिटेड को हनोल त्यूणी जल विद्युत परियोजना एवं लखवाड़ पंप स्टोरेज परियोजना सहित यूजेवीएन लिमिटेड तथा टीएचडीसी के संयुक्त उपक्रम को 489 मेगावाट की तीन जल विद्युत परियोजनाएं तथा 1230 मेगावाट की दो पंप स्टोरेज परियोजनाएं आवंटित करने पर माननीय मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद भी दिया।

कार्यक्रम में विधायक देहरादून कैंट श्रीमती सविता कपूर, यू.ई.आर.सी. के अध्यक्ष श्री डी.पी. गैरोला, अपर मुख्य सचिव एवं अध्यक्ष यूजेवीएन लिमिटेड श्रीमती राधा रतूड़ी, निदेशक परियोजनाएं श्री सुरेश चंद्र बलूनी, निदेशक वित्त श्री सुधाकर बडोनी के साथ ही बड़ी संख्या में निगम के अधिकारी कर्मचारी व अन्य लोग उपस्थित थे।

जापान ने बनाया सस्ता फॉर्मूला, गाय के गोबर से उड़ान भरेगा रॉकेट

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नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अब तक गाय के गोबर का इस्तेमाल जैव उर्वरक, देशी खाद, रसोई गैस जैसी कई बुनियादी जरूरतों और अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठानों तक ही होता था लेकिन अब इसका इस्तेमाल रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजने के लिए किया जा सकता है। जापान में इंजीनियरों ने गाय के गोबर से प्राप्त तरल मीथेन गैस से संचालित एक नए किस्म के रॉकेट इंजन का परीक्षण किया है, जो अधिक टिकाऊ प्रणोदक के विकास की ओर ले जा सकता है।
स्टार्टअप इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीज इंक (IST) ने एक बयान में कहा है कि रॉकेट इंजन, जिसे ज़ीरो कहा जाता है, का जापान के होक्काइडो स्पेसपोर्ट में 10 सेकंड तक “स्थैतिक अग्नि परीक्षण” किया गया है। कंपनी ने कहा कि छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान यानी जीरो, तरल बायोमीथेन (Liquid biomethane- LBM) द्वारा संचालित है। यह बायोमीथेन पशुओं के गोबर से प्राप्त होता है। कंपनी को यह होक्काइडो के डेयरी फार्मों से प्राप्त हुआ है।

IST ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रॉकेट इंजन के परीक्षण का फुटेज साझा किया है। वीडियो में दिख रहा है कि इंजन चालू हो रहा है और उससे शक्तिशाली क्षैतिज नीली लौ निकलती दिखाई दे रही है।

 

कंपनी ने कहा कि यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) द्वारा इस तरह का रॉकेट इंजन विकसित करने के बाद किसी निजी कंपनी द्वारा पहली बार इस तरह का LBM ईंधन तैयार किया गया है। कंपनी ने इसे रॉकेट इंजन साइंस के विकास में एक मील का पत्थर करार दिया है और कहा है कि ऐसा विश्व में पहली बार हुआ है। कंपनी ने ये भी कहा है कि एलबीएम ईंधन बायोगैस के मुख्य घटक मीथेन को अलग और परिष्कृत करके और बाद में इसे लगभग 160 डिग्री सेल्सियस पर द्रवीकृत करके तैयार किया गया है।
यह अनूठा प्रयोग ऐसे समय में हुआ है, जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर मंथन कर रही है कि कैसे पूरी दुनिया में कार्बन उत्सर्जन कम किया जाय और ग्लोबल वार्मिंग को कम किया जाय। हाल की कई स्टडीज में यह खुलासा हुआ है कि पारंपरिक रूप से उपयोग किए जाने वाले रॉकेट ईंधन से विश्व पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। रॉकेट इंजन में पारंपरिक ईंधन के जलने से कालिख और अन्य प्रदूषकों के अलावा ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है, जो चिंताएं पैदा करती हैं।
रिसर्च में ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन में योगदान देने वाले मवेशियों और अन्य पशुओं से निकलने वाली मीथेन गैस के बारे में भी चिंता जताई है लेकिन कंपनी को उम्मीद है कि LBM का इस्तेमाल करने से ना सिर्फ रॉकेट इंजन के ईंधन का एक नया विकल्प मिलेगा बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी यह मील का पत्थर साबित हो सकेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17और 18 दिसंबर को सूरत तथा वाराणसी के दौरे पर

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Narendra Modi, India's prime minister, gestures during a joint news conference with Kyriakos Mitsotakis, Greece's prime minister, in Athens, Greece, on Friday, Aug. 25, 2023. Modi arrived in Greece on Friday for talks to strengthen bilateral ties. Photographer: Yorgos Karahalis/Bloomberg via Getty Images

 

प्रमुख सार
प्रधानमंत्री वाराणसी में 19,150 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे , प्रधानमंत्री लगातार दो दिन वाराणसी में विकसित भारत संकल्प यात्रा में शामिल होंगे , प्रधानमंत्री स्वर्वेद महामंदिर का उद्घाटन करेंगे , प्रधानमंत्री काशी तमिल संगमम 2023 का भी उद्घाटन करेंगे , प्रधानमंत्री वाराणसी-नई दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे ,पर्यटकों को बाधामुक्त अनुभव प्रदान करने के लिए, प्रधानमंत्री एकीकृत पर्यटक पास प्रणाली का शुभारंभ करेंगे ,प्रधानमंत्री सूरत हवाईअड्डे पर नए एकीकृत टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे।

प्रधानमंत्री सूरत डायमंड बोर्स का भी उद्घाटन करेंगे

New Delhi – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17-18 दिसंबर को गुजरात के सूरत और उत्तर प्रदेश के वाराणसी का दौरा करेंगे। 17 दिसंबर को सुबह करीब 10:45 बजे प्रधानमंत्री सूरत एयरपोर्ट पर नई एकीकृत टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री सुबह करीब 11:15 बजे सूरत डायमंड बोर्स का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद वह वाराणसी जाएंगे और करीब साढ़े तीन बजे वह विकसित भारत संकल्प यात्रा में भाग लेंगे। शाम करीब 5:15 बजे वह नमो घाट पर काशी तमिल संगमम 2023 का उद्घाटन करेंगे।

18 दिसंबर को सुबह करीब 10:45 बजे प्रधानमंत्री स्वर्वेद महामंदिर जाएंगे, इसके पश्चात करीब 11:30 बजे एक सार्वजनिक समारोह में इसका उद्घाटन किया जाएगा। दोपहर करीब 1 बजे प्रधानमंत्री विकसित भारत संकल्प यात्रा में भाग लेंगे। इसके बाद, एक सार्वजनिक समारोह में, लगभग 2:15 बजे, प्रधानमंत्री 19,150 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।

सूरत में प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री सूरत हवाई अड्डे के नए एकीकृत टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। टर्मिनल भवन व्यस्त घंटों के दौरान 1200 घरेलू यात्रियों और 600 अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों को संभालने की क्षमता रखता है और इसमें सर्वाधिक व्यस्त घंटों के दौरान की क्षमता को 3000 यात्रियों तक बढ़ाने का प्रावधान है, साथ ही वार्षिक प्रबंधन क्षमता 55 लाख यात्रियों तक बढ़ रही है। टर्मिनल भवन एक तरह से सूरत शहर का प्रवेश द्वार है, इसलिए इसे स्थानीय संस्कृति और विरासत के साथ डिजाइन किया गया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि यहां आने वाले आगंतुकों के लिए आंतरिक और बाहरी दोनों संस्कृतियों का प्रतिबिंब देखने को मिले और उनमें स्थानीय स्थल के प्रति आकर्षण का भाव उत्पन्न हो। अत्याधुनिक टर्मिनल भवन के अग्रभाग को इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है कि सूरत शहर के ‘रांदेर’ क्षेत्र के पुराने घरों की समृद्ध और पारंपरिक लकड़ी के काम का समृद्ध अनुभव यात्रियों के मिल सके। जीआरआईएचए IV के अनुरूप हवाई अड्डे का नया टर्मिनल भवन डबल इंसुलेटेड रूफिंग सिस्टम, ऊर्जा बचत के लिए कैनोपी, गर्मी को कम करने वाली डबल ग्लेज़िंग यूनिट, वर्षा जल संचयन, जल उपचार संयंत्र, सीवेज उपचार संयंत्र और भूनिर्माण और सौर ऊर्जा संयंत्र के लिए पुनर्नवीनीकरण जल के उपयोग के अलावा अन्य दूसरी सुविधाओं से सुसज्जित है।

प्रधानमंत्री सूरत डायमंड बोर्स का भी उद्घाटन करेंगे। यह अंतरराष्ट्रीय हीरे और आभूषण कारोबार के लिए दुनिया का सबसे बड़ा और आधुनिक केंद्र होगा। यह कच्चे और पॉलिश किए गए हीरों के साथ-साथ आभूषणों के व्यापार का एक वैश्विक केंद्र होगा। आयात-निर्यात के लिए एक्सचेंज में अत्याधुनिक ‘सीमा शुल्क निकासी गृह’, खुदरा आभूषण व्यवसाय के लिए आभूषण मॉल और अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग और सुरक्षित वॉल्ट की सुविधा इसमें शामिल होगी।

वाराणसी में प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री 17 दिसंबर को वाराणसी के कटिंग मेमोरियल स्कूल मैदान में विकसित भारत संकल्प यात्रा में हिस्सा लेंगे। वहां प्रधानमंत्री पीएम आवास, पीएम स्वनिधि, पीएम उज्ज्वला जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से वार्तालाप करेंगे।

एक भारत, श्रेष्ठ भारत के अपने दृष्टिकोण के अनुरूप, प्रधानमंत्री नमो घाट पर काशी तमिल संगमम 2023 का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री कन्याकुमारी-वाराणसी तमिल संगमम ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाएंगे।

18 दिसंबर को प्रधानमंत्री वाराणसी के उमराहा में नवनिर्मित स्वर्वेद महामंदिर का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर वह महामंदिर के श्रद्धालुओं को भी संबोधित करेंगे।

इसके पश्चात, प्रधानमंत्री अपने संसदीय क्षेत्र के ग्रामीण इलाके सेवापुरी में विकसित भारत संकल्प यात्रा में भाग लेंगे। वह काशी संसद खेल प्रतियोगिता 2023 के प्रतिभागियों के कुछ लाइव खेल कार्यक्रमों को देखने के बाद, वह कार्यक्रम के विजेताओं के साथ बातचीत भी करेंगे। कार्यक्रम के दौरान वह विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से भी बातचीत करेंगे।

पिछले नौ वर्षों में, प्रधानमंत्री ने वाराणसी के परिदृश्य को बदलने और वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए जीवनयापन को आसान बनाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। इसी दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री करीब 19,150 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।

प्रधानमंत्री लगभग 10,900 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित न्यू पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर-न्यू भाऊपुर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना का उद्घाटन करेंगे। जिन अन्य रेलवे परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा उनमें बलिया-गाजीपुर सिटी रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना, इंदारा-दोहरीघाट रेल लाइन आमान परिवर्तन परियोजना सहित अन्य परियोजनाऐं शामिल है।

प्रधानमंत्री नए उद्घाटन किए गए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर वाराणसी-नई दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन, दोहरीघाट-मऊ मेमू ट्रेन और लॉन्ग हॉल मालगाड़ियों की एक जोड़ी को हरी झंडी दिखाएंगे। वह बनारस लोकोमोटिव वर्क्स द्वारा निर्मित 10,000वें लोकोमोटिव को भी रवाना करेंगे।

प्रधानमंत्री 370 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से दो आरओबी के साथ-साथ ग्रीन-फील्ड शिवपुर-फुलवरिया-लहरतारा सड़क का उद्घाटन करेंगे। इससे वाराणसी शहर के उत्तर और दक्षिण हिस्से के बीच यातायात सुगम हो जाएगा और आगंतुकों की सुविधा बढ़ जाएगी। प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन की जाने वाली अन्य प्रमुख परियोजनाओं में 20 सड़कों का सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण शामिल है, इनमें कैथी गांव में संगम घाट सड़क एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में आवासीय भवनों का निर्माण शामिल है।

इसके अतिरिक्त, पुलिस कर्मियों की आवास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पुलिस लाइन और पीएसी भुल्लनपुर में 200 और 150 बिस्तरों वाले दो बहुमंजिला बैरक भवन, 9 स्थानों पर बने स्मार्ट बस शेल्टर और अलाईपुर में बने 132 किलोवाट के सबस्टेशन का भी उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा।

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत पर्यटकों की विस्तृत जानकारी के लिए एक वेबसाइट और एकीकृत पर्यटक पास प्रणाली का शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा। एकीकृत पास के माध्यम से श्री काशी विश्वनाथ धाम, गंगा क्रूज़ और सारनाथ के लाइट एंड साउंड शो के लिए एकल प्लेटफ़ॉर्म टिकट बुकिंग सुविधा प्रदान की जाएगी, इससे एकीकृत क्यूआर कोड सेवाएं प्रदान की जाएगी।

प्रधानमंत्री 6500 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे। गैर-नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री लगभग 4000 करोड़ करोड़ रुपये की लागत से चित्रकूट जिले में 800 मेगावाट के सौर पार्क की आधारशिला रखेंगे। पेट्रोलियम आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ाने के लिए, वह मिर्ज़ापुर में 1050 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाले एक नए पेट्रोलियम तेल टर्मिनल के निर्माण की आधारशिला रखेंगे।

प्रधानमंत्री जिन अन्य परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे, उनमें 900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से वाराणसी-भदोही एनएच 731 बी (पैकेज -2) का चौड़ीकरण; 280 करोड़ की लागत से जल जीवन मिशन के तहत 69 ग्रामीण पेयजल योजनाएं; बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में 150 बिस्तर क्षमता की क्रिटिकल केयर यूनिट का निर्माण; 8 गंगा घाटों का पुनर्विकास कार्य, दिव्यांग आवासीय माध्यमिक विद्यालय का निर्माण कार्य सहित अन्य कार्य शामिल हैं।

विकसित भारत संकल्प यात्रा – 100 साल पूरे करे तब भारत पूर्ण विकसित हो उसका संकल्प लेने की यात्रा है , अमित शाह

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विकसित भारत संकल्प यात्रा 2047 में जब देश की आज़ादी के 100 साल पूरे करे तब भारत पूर्ण विकसित हो उसका संकल्प लेने की यात्रा है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश में पिछले 10 सालों में सुरक्षा, अर्थव्यवस्था सहित हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं

देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों के सपनों का भारत बनाने का समय अब आ गया है

मोदी जी ने देश में 2 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है, इस योजना के देश के हर गांव तक पहुंचने पर पूरे भारत में सही मायने में परिवर्तन आ जायेगा

मोदी जी ने गुजरात में शांति, विकास, समृद्धि और गरीब से गरीब व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने की जो परंपरा बनाई है, ये विकसित भारत संकल्प यात्रा उसी परंपरा को आगे बढाने का काम करेगी

 New Delhi ,  केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने आज गुजरात के साणंद में विकसित भारत संकल्प यात्रा को संबोधित किया।

इस अवसर पर श्री अमित शाह ने कहा कि विकसित भारत संकल्प यात्रा 2047 में जब देश की आज़ादी के 100 साल पूरे करे तब भारत पूर्ण विकसित हो उसका संकल्प लेने की यात्रा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश में पिछले 10 सालों में सुरक्षा, अर्थव्यवस्था सहित हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश की सुरक्षा को सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा कि कश्मीर से धारा 370 हटाने का स्वप्न सरदार पटेल और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के समय से अधूरा था, प्रधानमंत्री मोदी इसे पूरा करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में भव्य राममंदिर भी बनने जा रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी जी के ही शासनकाल में हमारा चंद्रयान चांद पर पहुंचा और चांद पर तिरंगा फहराया गया।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज़ादी के बाद 75 सालों में पहली बार देश की अर्थव्यवस्था इतनी सुदृढ़ हुई है और औद्योगिक विकास सबसे ज़्यादा हुआ है। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों गरीबों के जीवनस्तर को उठाने का काम प्रधानमंत्री मोदी ने किया है। उन्होंने कहा कि यहां चांगोदर में भी हर घर में नल से जल पहुंचाने का काम नरेन्द्र मोदी सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने हर गांव को सड़क से जोड़ने, हर घर में बिजली पहुंचाने, हर घर में बैंक खाता पहुंचाने और हर गरीब को प्रति माह पांच किलो अनाज मुफ्त देने की व्यवस्था की है।

श्री अमित शाह ने कहा कि पिछले 75 सालों में देश ने अनेक क्षेत्रों में बहुत प्रगति की है, लेकिन जिन भी लोगों ने आज़ादी के लिए बलिदान दिया, उन्होंने भारत को दुनिया में हर क्षेत्र में सर्वप्रथम बनाने की लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने कहा कि देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों के सपनों का भारत बनाने का समय अब आ गया है। श्री शाह ने कहा कि जब भारत की आज़ादी के 100 साल पूरे होंगे, तब देश में कोई व्यक्ति ऐसा ना हो जिसके घर में गैस सिलिंडर, शौचालय, खाना, बिजली ना हो, कोई अशिक्षित ना हो, ये कार्यक्रम एक ऐसे विकसित भारत की रचना का संकल्प लेने का कार्यक्रम है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने लक्ष्य रखा है कि देश में 2 करोड़ लखपति दीदी बनानी हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना अगर देश के हर गांव तक सफलता के साथ पहुंच जाये, तो भारत में सही मायने में परिवर्तन आ जायेगा। उन्होंने कहा कि देश की गरीब बहनों की आमदनी में वृद्धि होने से उनके जीवन की अनेक छोटी-छोटी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी और इसी प्रकार की व्यवस्था की कल्पना विकसित भारत संकल्प यात्रा में की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही सभी जनकल्याणकारी योजनाओं की मोदी गारन्टी है। उन्होंने कहा कि केन्द्र में मोदी जी की सरकार होने से गुजरात को तो डबल फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार औऱ गुजरात में भूपेन्द्र पटेल जी की सरकार के रूप में डबल इंजिन सरकार का लाभ गुजरात में देखने को मिला है। श्री शाह ने कहा कि गुजरात में अच्छी सड़कें बनाने और 24 घंटे बिजली देने का काम नरेन्द्र मोदी सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात में शांति, विकास, समृद्धि और गरीब से गरीब व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने की जो परंपरा बनाई है, ये विकसित भारत संकल्प यात्रा उसी परंपरा को आगे बढाने वाली है।