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राम, राम , जय – जय राजा राम

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राम, राम जय राजा राम

आर.के. भारद्वाज – विनायक  फीचर्स
कभी-कभी ऐसी घटनायें घटती हैं, जो प्रारंभ में कठिन और दु:खदायी प्रतीत होती हैं परन्तु परिणाम में उत्तम, श्रेष्ठ और सुखप्रद होती हैं। ऐसा ही राम वनवास के समय हुआ। जब राम को वनवास हुआ तो पूरी अयोध्या, प्रशासन और प्रजा सिवाय राम के बहुत दु:खी, व्यथित और परेशान हुई। लोगों ने आंसू बहाये और रोये। यह सब लोगों का राम के प्रति प्यार, आदर, मान-सम्मान व श्रद्धा के कारण हुआ। लोगों के इस जज्बे से राम के स्वभाव की सौम्यता, वाणी की मधुरता और उनके अनगिनत सद्ïगुणों की झलक मिलती है, इसलिये राम के वन जाने के लाभ और उपलब्धियों का बखान करने से पहले उनके गुणों पर प्रकाश डालना आवश्यक है।
नारदजी राम को जितेन्द्रिय, धैर्यवान, महाबलवान और कांतियुक्त बताते हैं। उनका अपने मन, इन्द्रियों पर संयम है। वह नीति को जानने वाले हैं और बुद्धिमान हैं। राम धर्म के रहस्य को जानते हैं तथा सदैव सत्य पर स्थित रहते हैं। उनमें शत्रुओं को समाप्त करने की सामथ्र्य है और वह सदैव प्रजा के हित में लगे रहते हैं। उनकी स्मरण शक्ति अद्भुत है और सभी शास्त्रों के पण्डित हैं। धर्म की रक्षा करने में वह  ब्रह्मïा के समान हैं। विष्णु के समान बलवान हैं और उनका क्रोध मृत्यु की ज्वाला रूपी अग्नि के समान भयंकर है। उनकी सहन करने की शक्ति पृथ्वी के समान है और त्याग करने में कुबेर। सत्य का पालन करने में वह दूसरे धर्मराज हैं।

 

वाल्मीकि कहते हैं कि मीठे शब्दों में दूसरों का साहस बढ़ाना राम की विशेषता है। राम स्वभाव से शांतचित हैं। कोई उनको कठोर बात कह देता है तो वह उसका उत्तर सख्ती से नहीं देते। कोई उन पर एकबार उपकार कर दे तो वह उसको जीवन भर नहीं भूलते। सतपुरुषों की संगत और उनसे शिक्षा प्राप्त करने का उनको बहुत शौक है। उनमें घमण्ड नाम की बू तक नहीं है। बढ़े-बूढ़ों और ब्राह्मïणों का वह बहुत सत्कार करते हैं। राम के यह बहुत सारे गुण नि:संदेह उनकी वास्तविकता, ऐतिहासिकता को दर्शाते हैं, क्योंकि किसी  काल्पनिक व्यक्ति के इतने गुणों का बखान हो ही नहीं सकता, जब तक कि जाना, समझा, देखा और परखा न जाये। राम के जन्मसिद्ध, गुणों, बुद्धि और प्रतिभा को संवारने, निखारने, सजाने तथा विस्तार देने में ऋषि-मुनियों का बड़ा योगदान रहा। यह सब बच्चों में हुआ। वन जीवन राम के लिये वरदान सिद्ध हुआ।
कुछ विद्वानों का मत है कि राम को वनवास भिजवाने में ऋषि-मुनि की चाह थी, कैकेयी तो एक माध्यम थीं। ऋषि-मुनि मुख्यत: वशिष्ठ, वाल्मीकि, भारद्वाज, विश्वामित्र, अगस्त्य, परशुराम आदि-आदि रावण की बढ़ती शक्ति, आतंक तथा अत्याचार से तंग आ चुके थे। लगभग आधे आर्यवर्त पर रावण और उसकी मित्र शक्तियों का शासन था। रावण का अन्त और नाश करने में राम से उपयुक्त कोई वीर शिरोमणि नहीं था।
चौदह वर्ष वनवास से पहले भी राम ने वन जीवन का अनुभव प्राप्त कर लिया। जब वह और लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ उनके यज्ञ में रक्षार्थ गये थे। उस दौरान विश्वामित्र ने प्रसन्न होकर राम को अनेक अस्त्र दिये, जिनमें कुछ के नाम है- दिव्य दण्डचक्र, धर्मचक्र, कालचक्र, विष्णुचक्र, वृहत इन्द्रास्त्र, वज्रास्त्र, ब्रह्मïशिर अस्त्र, दो शुभ गदायें मोदकी और शिकरी, धर्मपाश, कालपाश, वरुणपाश, शुष्क एवं आद्र दो बिजली के अस्त्र, पिनाक अस्त्र, नारायण अस्त्र, आग्नेय अस्त्र, दो शक्ति अस्त्र हयशिर और कौञ्च, कंकाल, मूसल, घोर कपाल किंकिरणी, नन्दन अस्त्र आदि-आदि। इन अस्त्रों के प्रयोग का अवसर राम को राक्षसों के विरुद्ध लड़ाइयों में मिल गया। उन दिनों राक्षसों ने लूटमार व हत्या का कहर मचा रखा था, जिससे लोग भयभीत व आतंकित थे। राम ने बलवान और खूंखार राक्षसों जैसे ताड़का और सुबाहु को मार भगाया और ताड़का पुत्र मारीच को घायल कर दूर फैंक दिया। इस प्रकार राम ने आसपास के लोगों को न केवल राक्षसों के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई, बल्कि अपने सैन्य बल व युद्ध कौशल का भी परिचय दिया।
इसी काल में राम ने जनकपुर जाते हुए रास्ते में गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या जो इन्द्र द्वारा धोखे से बलात्कार किये जाने के पश्चात दु:ख, पीड़ा, तनाव के कारण शिलावत हो गई थी, का उद्धार किया। राम ने अहिल्या को सांत्वना दी और बलात्कारी इन्द्र की घोर भत्र्सना की। महामुनि विश्वमित्र का राम को अपने साथ ले जाने का मुख्य उद्देश्य केवल राम का विवाह ही था। ताड़का आदि का वध तो एक बहाना था। आदि कवि बाल्मीकि ने विवाह, वनवास, सीताहरण और बालि वध इन्हीं चार मुख्य घटनाओं का रामायण में सविस्तार वर्णन किया है। इन्हीं घटनाओं का ही सीधा संबंध रावण के मारे जाने से है।
जनकपुर में राम ने बड़े अद्भुत शिव धनुष रत्न जिसकी प्रत्यंचा महाबली राजा और राजकुमार भी न चढ़ा सके, बीच से पकड़कर लीलापूर्वक उठा लिया और खेल-सा करते हुए उस पर प्रत्यंचा चढ़ा दी। धनुष भंग कर राम ने अपनी शक्ति और शौर्य का परिचय दिया। इससे राम की वाह-वाही हुई, सब लोगों ने इनकी जय-जयकार की। राम की कीर्ति और यश दूर-दूर तक फैल गया। यह सुनकर परशुराम जी आश्चर्य से चकित हो राम की परीक्षा लेने एक वैसे ही बड़े धनुष के साथ जनकपुर आ धमके। उस उत्तम धनुष और बाण की भी प्रत्यंचा चढ़ा दी। इस कृत्य से प्रसन्न होकर परशुराम ने राम को आशीर्वाद दिया। राम जैसे सर्वगुण सम्पन्न देव पुरुष जिसे रामायण में ‘सर्वविद्याव्रत स्नात:Ó कहा गया है और सीता सम गुरुवान, बुद्धिमान, विषुधी देवी के विवाह से दोनों के जीवन में निखार आ गया, बहार आई तथा यह दोनों के लिये सोने पे सोहागा था।
दूसरी ओर अयोध्या के कर्म परायण और न्यायप्रिय राजा दशरथ और मिथिला के विद्वान और आध्यात्मवादी राजा जनक की मैत्री तथा संबंध से दोनों राज्यों की न केवल शक्ति बढ़ी, बल्कि ख्याति भी दूर-दूर तक फैल गई। चौदह वर्ष वनवास काल में राम को भारत की चप्पा-चप्पा धरती, नदी-नालों, पहाड़, पशु-पक्षी, जंगल तथा वन में रहने वालीं विभिन्न जाति व उनकी समस्याओं को निकट से देखने का अवसर मिला। उनके जीवन की प्रमुख घटनाएं व उपलब्धियां वन से जुड़ी हुई हैं। यदि वह वन नहीं जाते तो केवल अयोध्या के राजा ही रह जाते और हो सकता है कि उनकी सीता से शादी भी न होती। राम को इतना आदर, मान-सम्मान, यश और कीर्ति न मिलती, जितनी उनको वन जाने से मिली। वन जाने से इनकी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शक्तियां जो उनमें पहले से थीं और ज्यादा उन्नत व विकसित हो गईं। वन के कठोर जीवन से उनका शरीर और पुष्टï हुआ। ऋषि-मुनियों विशेषकर भारद्वाज, अत्रि, शरभंग, अगस्त्य के प्रवचनों और उपदेशों से मानसिक शक्ति में और वृद्धि हुई।
वन के शान्त, एकान्त वातावरण में प्रार्थना, उपासना से आध्यात्मिक शक्ति में भी बढ़ोतरी हुई। ऋषि-मुनियों विशेषकर विश्वमित्र और अगस्त्य ने जो नये-नये प्रभावकारी और अचूक अस्त्र राम को प्रदान किये थे, उनका राक्षसों के विरुद्ध लड़ाइयों में प्रयोग करने का अवसर मिल गया। इन अस्त्रों के बल पर राम ने कई क्रूर व अत्याचारी राक्षसों को बड़ी आसानी से मार गिराया और तपस्वियों, मुनियों तथा वनवासियों को भयमुक्त कर सुख पहुंचाया। महाबली खर, उसके बलवान सेनापति दूषण और चौदह हजार शक्तिशाली सैनिकों को भी राम ने मार गिराया। इस विजय से राम के सैन्यबल और युद्ध कौशल की बड़ी प्रशंसा हुई और लोगों को राक्षसों के अत्याचारों से मुक्ति मिली।
वन में रहते हुए राम ने निषाद राजगूह को गले लगाया, स्वर्ण मृग के वेश में आये मारीच को सुगमता से मार गिराया, मरणासन्न जटायु को सुख पहुंचाया और शबरी भीलनी के भक्तिवश झूठे बेर खाये और उसका उद्धार किया। अत्याचारी बालि को मारकर सुग्रीव को गद्दी पर बैठाया और वानरों को भयमुक्त कर उनसे मित्रता स्थापित की। इन सब कार्यों से राम ने आपसी भाईचारे का संदेश दिया और बताया कि आदमी जन्म से नहीं, कर्म से बड़ा होता है। इससे राम की दयालुता व उदारता की झलक मिलती है किन्तु राम का सबसे बड़ा काम व उपलब्धि रावण जैसी महाशक्ति को हराना थी। इसका अवसर रावण द्वारा सीता हरण से मिल गया।  लंका विजय, राम ने बिना अयोध्या से सैनिक सहायता लिये जनजाति-वानर आदि सैनिकों के बल पर प्राप्त की। रावण और उसकी राक्षसी सत्ता के अंत से लोगों ने चैन की सांस ली और राम का यश दूर-दूर तक फैल गया।
राम की शूरवीरता, युद्ध कौशल, सैन्य संचालन जिसमें समुद्र पर पुल बनाना भी शामिल है तथा अन्य अनेक गुण लोगों के सामने उजागर हुए और उनकी प्रशंसा व जय-जयकार होने लगी। यह राम के जीवन का चर्मोत्कर्ष था। राम विश्व के प्रथम सम्राट बन गये। (विनायक फीचर्स)

लघु उद्योग भारती के सदस्य अलग-अलग 84 प्रकार के भोग को लेकर गौशाला पहुंचे

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Agra News: आगरा में लघु उद्योग भारती ने आज हाथरस रोड स्थित श्री राधा कृष्ण गौशाला में 84 भोग का आयोजन किया. लघु उद्योग भारती के पदाधिकारी गायों के लिए 84 प्रकार के भोग लेकर पहुंचे और एक भव्य कार्यक्रम करते हुए सदस्यों ने गौ पूजन और गौ मुख सेवा की. उसके बाद गौशाला की गायों को 84 प्रकार का भोग लगाया .

लघु उद्योग भारती के सदस्य अलग-अलग 84 प्रकार के भोग को लेकर गौशाला पहुंचे. 84 भोग को बड़े ही सुंदर प्रकार से सजाया गया और गौ सेवा करते हुए गाय का पूजन किया. श्री राधा कृष्ण गौशाला में गायों को 84 प्रकार का भोग लगाया गया. हिंदू धर्म में गौ सेवा को सबसे सर्वश्रेष्ठ माना गया है इसी भावना के साथ लघु उद्योग भारती के पदाधिकारी ने गौशाला में गायों को 84 प्रकार का भोग अर्पण किया है. जिसमें फल, सब्जियां, ड्राई फ्रूट्स, पुआ, रोटी सहित हरा चारा शामिल है जिसे गाय बड़े चाव के साथ खा रही हैं.

लघु उद्योग भारती ने की गौ सेवा
लघु उद्योग भारती के पदाधिकारी का कहना है कि सनातन धर्म में गोमुख का पूजन करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है और आज मकर संक्रांति के दिन हमने सबसे पहले गाय पूजन करते हुए गौशाला में गायों को 84 प्रकार का भोग अर्पण किया है, अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है जिसको लेकर लघु उद्योग भारती उत्सव की तैयारी में है.

’22 मनाई जाएगी भव्य दिवाली’ 
संगठन के पदाधिकारियों बताया कि रामलला प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर दिवाली से ही बड़ी और भव्य दिवाली बनाई जाएगी. हम सभी लोग अपने घर और प्रतिष्ठा को सजाएंगे दीप उत्सव करेंगे साथी बड़े स्तर पर आतिशबाजी की जाएगी. आज गौ सेवा करने का सौभाग्य लघु उद्योग भारती को प्राप्त हुआ है, उसके लिए हम खुद को धनी मानते हैं. आज गोमुख का पूजन कर हमने हिंदू धर्म के सभी देवी देवताओं का पूजन किया है क्योंकि सनातन धर्म में माना जाता है कि गाय में सभी देवी देवताओं का वास होता है.

PM Modi with Cows – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की गौ सेवा , गौमाता को खिलाया चारा

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मकरसंक्रांति के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर गायों को चारा खिलाया। सोशल मीडिया पर गायों के साथ पीएम मोदी के कुछ तस्वीरें वायरल हो रही है। यह पहली मौका नहीं है कि जब दुनिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गौ-प्रेम को देखा है। इससे पहले पिछले साल जब वो वारंगल शहर में भद्रकाली मंदिर पहुंचे थे तब भी उनको गौ-सेवा करते देखा गया था।

एएनआई, नई दिल्ली। PM Modi with Cows। देशभर में कल (15 जनवरी) मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। इसी बीच आज पीएम मोदी की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों में वो गायों को चारा खिलाते नजर आ रहे हैं।

हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि जब दुनिया ने  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गौ-प्रेम को देखा है। इससे पहले पिछले साल जब वो वारंगल शहर में भद्रकाली मंदिर पहुंचे थे, तब भी उनको गौ-सेवा करते देखा गया था।

पीएम मोदी ने पोंगल, मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दी

पीएम मोदी ने आज देशवासियों को पोंगल की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि यह त्योहार ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को दर्शाता है। पीएम ने राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय राज्य मंत्री (MoS) एल मुरुगन के आवास पर पोंगल समारोह में भाग लेने के दौरान यह बात कही।

पीएम मोदी ने कहा, “देश ने कल लोहड़ी का त्योहार मनाया। कुछ लोग आज मकर संक्रांति मना रहे हैं और कुछ लोग कल मनाएंगे, माघ बिहू भी आ रहा है, मैं देशवासियों को इन त्योहारों की शुभकामनाएं देता हूं।”

बता दें कि 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह हो। इस पूजन में पीएम मोदी मुख्य यजमान हैं। पीएम ने 11 दिवसीय अनुष्ठान शुरू किया है। पीएम नरेंद्र मोदी समेत सभी यजमानों को 11 दिनों तक एक समय सेंधा नमक युक्त सात्विक आहार ग्रहण करना होगा।

‘पोंगल एक भारत श्रेष्ठ भारत की राष्ट्रीय भावना को दर्शाता है’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि पोंगल एक भारत श्रेष्ठ भारत की राष्ट्रीय भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यही भावनात्मक जुड़ाव काशी-तमिल संगमम और सौराष्ट्र-तमिल संगमम में भी देखने को मिला।

केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के नई दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित पोंगल समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि तमिलनाडु के हर घर में उत्सव का उत्साह देखा जा रहा और सभी लोगों के जीवन में खुशी, समृद्धि और संतुष्टि की कामना की।

प्रधानमंत्री ने कोलम (रंगोली) के साथ भारत की विविधता की समानता बताते हुए कहा कि जब देश का हर कोना एक-दूसरे के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ता है, तो देश की ताकत एक नए रूप में दिखाई देती है।

 

मकर संक्रांति कई फलों का दाता है स्नान

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मकर संक्रांति
कई फलों का दाता है स्नान
इन्द्रकुमार जैन – विभूति फीचर्स
महाभारत के उद्योग पर्व में आया है- गुणा दश स्नानशीलं भजन्ते बलं रूपं स्वर वर्ण प्रशुद्धि:। स्पर्शश्च गंधश्च
विशुद्धता च श्री: सौकुमार्य प्रवराश्च नार्य:॥ ऐसा ही स्मृत्यर्थसार में लिखा है। तात्पर्य यह है कि स्नान से बल, रूप,

स्वर, वर्ण की शुद्धि, माधुर्य, सुगंध, विशुद्धता, श्री सौकुमार्य और सुन्दर स्त्री प्राप्त होती है। धर्मशास्त्रों में दो प्रकार
के स्नान वर्णित हैं। जल के साथ किया गया स्नान मुख्य और जलहीन स्नान गौण माना गया है। इनके भी तीन भेद
हैं। प्रतिदिन किया गया स्नान नित्य, विशेष अवसरों पर किया गया स्नान नैमित्तिक और किसी फल की इच्छा से
किया जाने वाला स्नान काम्य कहलाता है। मनुस्मृति और बोधायनसूत्र के अनुसार सभी लोगों को प्रतिदिन सिर से
पांव तक स्नान करना चाहिए। शरीर से निरंतर गन्दगी निकलती रहती है इसलिए प्रात: स्नान कर स्वच्छ हो जाना
चाहिए। कुछ जातियों के लिए मंत्र जाप करते हुए स्नान करने के निर्देश हैं।

नित्य स्नान शीतल जल से ही किया जाना चाहिए। साधारणत: गर्म जल का प्रयोग वर्जित है। कुछ वर्णों को दो बार,
ब्रह्मचारियों को एक बार और कुछ को तीन बार स्नान करना चाहिए। रात्रि स्नान वर्जित है। ग्रहण, विवाह, जन्म-
मरण या व्रत के समय रात्रि स्नान किया जा सकता है। धर्मग्रंथों के अनुसार गर्म जल या दूसरे के लिए रखे जल में
स्नान करने से सुन्दर फल नहीं मिलता। नैमित्तिक और काम्य स्नान प्रत्येक दशा में शीतल जल से ही किया जाता है।
स्नान के लिए नदियों, वापियों, झीलों, गहरे कुण्डों और पर्वत प्रपातों के स्वाभाविक जल का उपयोग किया जाना
चाहिए। कम से कम 8000 धनुष लम्बाई की नदी मानी गई है। इससे छोटे नदी नाले गर्त कहे गए हैं। श्रावण-भादो में
नदियां रजस्वला होती हैं। अत: उनमें स्नान वर्जित है मगर ऐसी नदियों में स्नान किया जा सकता है जो समुद्र में
मिलती हैं। उपाकर्म, उत्सर्ग, तथा ग्रहण के समय इन नदियों में भी स्नान करना चाहिए। विष्णु धर्म सूत्र के अनुसार
पात्र-जल, कुण्ड-जल, प्रपात-जल, नदी-जल, भद्र लोगों द्वारा प्राचीनकाल से प्रयुक्त जल और गंगा जल क्रमश:
अच्छा होता है।

विभिन्न सूत्रों, स्मृतियों एवं निबंधों में स्नान विधियों पर प्रकाश डाला गया है। प्रात: एवं मध्यान्ह स्नान की विधि
समान है। कात्यायन के स्नानसूत्र में स्नानविधि का विस्तार से वर्णन किया गया है। स्नान के उपरांत भीगे कपड़ों में
ही देवताओं और पितरों का तर्पण करना चाहिए। यदि कोई पूरा स्नान न करना चाहे तो उसे जल का अभिमंत्रण
आचमन, मार्जन और अद्यमर्षण करना चाहिए। जल के भीतर मल-मूत्र त्याग नहीं करना चाहिए। शरीर नहीं रगडऩा
चाहिए। जल को पैरों से नहीं पीटना चाहिए। प्राचीनकाल में स्नान के लिए पवित्र मिट्टी का प्रयोग किया जाता था।
एक ग्रंथ में बताया गया है कि आठ अंगुल नीचे की मिट्टी का प्रयोग किया जाना चाहिए। ब्रह्मचारियों को क्रीड़ा-
कोतुक के साथ स्नान वर्जित है।

शंख-स्मृति, अग्नि-पुराण तथा कतिपय अन्य ग्रंथों में जल स्नान छह श्रेणियों में विभक्त है- नित्य, नेमित्तिक,
काम्य, क्रियांग, मलापकर्षण (अभ्यंग) और क्रिया स्नान। दैनिक नित्य स्नान की चर्चा हो चुकी है। पुत्रोत्पत्ति,
यज्ञान्त, मरण, ग्रहण, रजस्वला स्पर्श, शव-चाण्डाल स्पर्श, उल्टी, दस से ज्यादा बार शौच, दु:स्वप्न देखने, संभोग के
बाद, बाल कटाने पर, श्मशान जाने पर, मानव अस्थि छू लेने पर, कुत्ता काटने पर या कुछ पक्षियों के छू जाने पर
स्नान किया जाना चाहिए। उक्त सभी स्नान नैमित्तिक हैं। पुण्य प्राप्ति या इच्छा पूर्ति के लिए काम्य स्नान किया

जाता है। माघ और वैशाख में पुण्य के लिए प्रात: स्नान किया जाता है। कूप-मंदिर, वाटिका तथा अन्य
जनकल्याणकारी निर्माण-कार्य के पूर्व क्रियांग स्नान किया जाता है। तेल और आंवला लगाकर मलापकर्षक का
अभ्यंग स्नान किया जाता है। सप्तमी, नवमीं और पर्व की तिथियों में आमलक प्रयोग वर्जित है। तीर्थयात्रा में फल
प्राप्ति के लिए किया गया स्नान क्रिया स्नान कहलाता है।

बीमार व्यक्ति गर्म जल से स्नान कर सकता है। यदि ऐसा न हो सके तो उसका शरीर पोंछ देना चाहिए। इसे कपिल
स्नान कहते हैं। यदि रोगी का स्नान आवश्यक हो तो कोई अन्य व्यक्ति उसे छूकर दस बार स्नान कर सकता है।
इससे रोगी पवित्र हो जाता है। यदि रजस्वला नारी चौथे दिन रोग-ग्रस्त हो जाए तो कोई अन्य स्त्री दस-बारह बार
वस्त्रयुक्त स्नान कर उसे शुद्ध कर सकती है। इसके बाद रजस्वला स्त्री की साड़ी बदल दी जाती है। जब रोगादि
कारणों से साधारण स्नान करने में कठिनाई हो तो सात प्रकार के गौण स्नानों की शास्त्रीय व्यवस्था है। जल द्वारा
किया गया स्नान 'वारूण स्नान’ कहलाता है। अन्य गौण स्नानों में मंत्र स्नान, भोम स्नान, आग्नेय स्नान, वायव्य
स्नान, दिव्य स्नान और मानस स्नान सम्मिलित हैं। कहीं-कहीं मंत्र स्नान को ब्राह्म स्नान लिखा गया है। वृहस्पति
ने सारस्वत स्नान का वर्णन किया, जिसमें कोई विद्वान व्यक्ति आशीर्वचन कहता है। मंत्र स्नान में मंत्र बोलकर
जल छिड़का जाता है, भौम स्नान में भुरभुरी मिट्टी शरीर पर पोती जाती है, आग्नेय में पवित्र राख से शरीर स्वच्छ
किया जाता है, वायव्य में गौ-खुरों से उठी धूल से स्नान किया जाता है सूर्य की किरणों के रहते वर्षाजल से स्नान दिव्य
और भगवान विष्णु का स्मरण मात्र मानस स्नान है। वर्तमान में काक स्नान की काफी चर्चा होती है मगर संभवत:
यह कपिल-स्नान या मंत्र-स्नान का पर्यायवाची है। पुरातन ग्रंथों में काक स्नान का उल्लेख नहीं मिलता। (विभूति
फीचर्स)

कामगार नेता अभिजीत राणे ने महासचिव सुनील राणे की प्रमुख उपस्थिती में भाजपा में प्रवेश किया!

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भाजपा के मुंबई सचिव पद पर नियुक्ति
◆ धडक कामगार युनियन के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भी भाजपा में प्रवेश किया
◆ धडक कामगार युनियन की श्री राम दिनदर्शिका लोकार्पण
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विशेष प्रतिनिधि, मुंबई
धडक कामगार युनियन महासंघ के संस्थापक सचिव अभिजीत राणे ने मुंबई भाजपा के महासचिव सुनील राणे की प्रमुख उपस्थिति में गोरेगाव बांगुरनगर के श्री अयप्पा मंदिर सभागृह में भाजपा में प्रवेश किया। इस अवसर पर सुनील राणे ने अभिजीत राणे को भाजपा के मुंबई सचिव के पद पर नियुक्ति की घोषणा की।
बता दें कि गोरेगाव (प.) बांगुर नगर के श्री अय्यपा सेवा संगम सभागृह में धडक कामगार युनियन का एक भव्य कामगार मेला आयोजित हुआ था। इसमें मुंबई भाजपा के महासचिव की प्रमुख उपस्थिति में युनियन के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ दर्जनों पदाधिकारियों ने भी अभिजीत राणे के फैसले में आस्था जताते हुए भाजपा में प्रवेश किया और पार्टी के प्रति निष्ठा की शपथ ली।
अभिजीत राणे ने धडक कामगार युनियन की स्थापना 28 अप्रैल, 2011 की। आज युनियन को 13 वर्ष हो गए और इन 13 वर्षों में युनियन के सदस्यों की संख्या साढ़े सात लाख से ज्यादा हो गए हैं। पहले एक ही युनियन थी लेकिन आज धडक कामगार युनियन महासंघ के अंतर्गत 75 से अधिक इकाइयां व यूनियन हैं।
द्वीपप्रज्वलन व गणेशवंदना से कार्यक्रम से शुभारंभ हुआ. मंच ओर सुनील राणे व अभिजीत राणे के साथ धडक कामगार युनियन के उपाध्यक्ष ॲड. मुरली पणिकर व भाजपा नेते रामकुमार पाल भी उपस्थित थी. इस अवसर पर धडक कामगार युनियन के श्री राम दिनदर्शिका के साथ मोबाईल स्टँड, कंप्युटर डेस्क पॅड आदि का लोकार्पण भी प्रमुख अतिथियों के कर कमलों द्वारा हुआ।
सुनील राणे ने भाजपा का अंगवस्त्र देकर अभिजीत राणे का भाजपा में प्रवेश व स्वागत किया। इस अवसर पर अभिजीत राणे ने शाल, पुष्पगुच्छ व उपहार देकर सत्कार किया. युनियन के सभी पदाधिकारियों की ओर से सुनील राणे व अभिजीत राणे को भव्य पुष्पहार से शुभेच्छा दी गई।
सुनील राणे ने धडक के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि, मैं अभिजीत राणे का भाजपा परिवार में स्वागत करता हूँ. मैंने उनके धडक कामगार युनियन के काम से परिचित हूं। वे समर्पण भाव व अनुशासन से यूनियन चलाते हैं। भाजपा मुख्यतः अनुशासित पार्टी के रूप में जानी जाती हैं, और वे भाजपा परिवार में भी समर्पित भाव से कार्य करेंगे, इसका मुझे भरोसा है। आज उनकी मुंबई सचिव के रूप में नियुक्ति की गई है इसलिए मैं उनका अभिनंदन करता हूं.
अभिजीत राणे ने आभार व्यक्तव्य में कहा कि आज मी धड़क कामगार युनियन को हर बार आशीर्वाद देने व मेरे प्रत्येक कार्य में दृढ़ता से मेरा समर्थन करने वाले राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्रजी फडणवीस के आशीर्वाद से भाजपा के मुंबई अध्यक्ष ॲड. आषिश शेलार निदेशानुसार भाजपा मुंबई महासचिव सुनीलजी राणे की मुख्य उपस्थिति में मैंने भाजपा में प्रवेश किया है। मेरा ये निर्णय योग्य है कि नहीं, ये अपने धड़क के साथियों से जानने के लिए आज का धड़क कामगार मेला आयोजित किया गया है। अब मैंने धडक कामगार युनियन के साथ एक नवीन जबाबदारी स्वीकार की है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सत्ता में आने के साथ भाजपा की आज तक दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति हो रही है। 1980 में स्थापित पार्टी आज अगर कई सालों से सत्ता में है तो इसके पीछे अनेक सालों का निरन्तर संघर्ष है। ये संघर्ष हमें काफी कुछ सिखा देता है। तब की जनसंघ और आज सत्तासीन भाजपा का अप्रतिम व अभिनव संघर्ष मुझे इस पार्टी में लाया। मेरे साथ आए सभी कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों का मैं स्वागत करता हूं। इस कार्यक्रम का संचालन सुरज भोईर ने किया। सुप्रसिद्ध हिंदीहास्य कवि महेश दुबे ने हास्य कविताएं पेश की। गणेशवंदना कथक नृत्यांगना मुद्रा तांबोळी ने पेश किया. कार्यक्रम में राजेश विक्रांत, फरीद शेख, कमलेश वैष्णव, नितीन खेतले, प्रकाश पवार, मनीषा यादव, महेश पवार, रवि बनसोडे, बबन आगडे, आरती सावंत, सत्यविजय सावंत, रोहीत गुडेकर, अभिषेक चव्हाण आदि ने विशेष मेहनत की.

स्पाइना बिफिडा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मुंबई में शिवर 30 जनवरी को

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मुंबई: महाराष्ट्र के साथ देशभर में स्पाइना बिफिडा (जन्मदोष) बिमारी के मामले बढ रहे हैं।  यह कोई अनुवांशिक बिमारी नही हैं। बल्कि गर्भावस्था के शुरू में माताओं में फोलिक एसिड की कमी के कारण बच्चे को यह समस्या होती हैं। 
लिलावती अस्पताल के सलाहकार बाल चिकित्सा सर्जन डॉ. संतोष करमरकर ने कहा 
 कि , “स्पाइना बिफिडा रीढ़ की हड्डी का एक जन्म दोष है जो बचपन में पक्षाघात (पोलियो से भी बदतर) का कारण बनता है, और भारत में हर साल 5०००० से अधिक बच्चे इस जन्म दोष के साथ पैदा होते हैं। लीलावती अस्पताल के सलाहकार कार्डियोवास्कुलर सर्जन और मुख्य परिचालन अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) वी रविशंकर ने कहा,“लीलावती अस्पताल बाल चिकित्सा सर्जरी विभाग ने स्पाइना बिफिडा के सैकड़ों मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया है। इतना ही नहीं बल्कि 30 जनवरी को लीलावती अस्पताल में स्पाइना बिफिडा फाउंडेशन के साथ बाल चिकित्सा सर्जरी विभाग द्वारा विनामूल्य शिविर का आयोजन किया है। 

बिप्लब कुमार देब ने गौमाता के साथ फोटो शेयर किया

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बिप्लब कुमार देब एक सांसद , त्रिपुरा से राज्यसभा सदस्य और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री है एवं प्रभारी भाजपा हरियाणा है। उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल से गौमाता के साथ फोटो ले कर ट्वीट किया और लिखा कि – ” रोहतक से दिल्ली जाते हुए रास्ते में गौमता का आशीर्वाद लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

 

ज्ञात हो कि बिप्लब कुमार देब (Biplab Kumar Deb) एक गौभक्त है जब वो मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने अपने राज्य में गौ-पालन के जरिए स्वरोजगार को बढ़ावा देने की वकालत की थी। उस समय उन्होंने अपने सरकारी आवास में गाय पालने की घोषणा की थी। उस समय उन्होंने कहा था कहा कि परिवार गायों की देखभाल करने के साथ दूध का उपभोग भी करेगा एक मुख्यमंत्री के तौर पर उनके मुताबिक इस कदम से राज्य के लोगों को भी गौ-पालन की प्रेरणा मिलेगी.बिप्लब कुमार देब द्वारा युवाओं को सरकारी नौकरी के पीछे भागने की बजाय गाय पालने की सलाह दी जा चुकी है।

 

22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए गाय के गोबर से 21 हज़ार दीये बनाए जा रहे हैं

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22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में गाय के गोबर से 21 हज़ार दीये बनाए जा रहे हैं. ये दीये अयोध्या भेजे जाएंगे और रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के दिन जलाए जाएंगे. 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आह्वान किया है कि इस दिन देशवासी अपने-अपने घरों में दीपक जलाएं. 

गाय के गोबर से बने दीयों की मांग बढ़ी है. अयोध्या में राम मंदिर में प्रभु श्रीराम की प्रतिमा में प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन होना है. 

गाय के गोबर से मोबाइल स्टैंड, घड़ी, झूमर, पेन स्टैंड, नेम प्लेट, चाबी रिंग, और बच्चों के खेलने वाले खिलौने भी बनाए जा रहे हैं.

जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर में प्रभु श्रीराम की प्रतिमा में प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन होना है. इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आह्वान किया है कि इस दिन देशवासी अपने-अपने घरों में दीपक जलाएं. इसके अलावा भी इस अनुष्ठान में खुद और समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लोग अलग-अलग तरह की पूजा सामग्री बनाकर अयोध्या भेज रहे हैं या फिर भेजने की तैयारी कर रहे हैं. मुजफ्फरपुर के सकरा प्रखंड में भी यहां की महिलाएं गोबर के दीपक तैयार कर रही हैं, जिसे अयोध्या को रोशन करने के लिए भेजा जाएगा.

मुखिया के साथ महिलाएं बना रहीं दीप
मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड अंतर्गत विशुनपुर बघनगरी गांव की महिलाएं दीपक बनाने में जुट गई हैं. खास बात यह है कि यहां की महिलाएं गाय के गोबर से दीपक तैयार कर रही हैं. जो जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है. बताया जा रहा है कि अयोध्या के अलावा प्रखंड क्षेत्र के 27 पंचायतों में पांच-पांच दीपक भेजा जाएगा. आपको बता दें कि इस दीपक को बनाने के में गाय के शुद्ध गोबर इस्तमाल किया जाता है और फिर हाथों से उसे बेहतर रूप दिया जाता है.

सूख जाने के बाद उसे पैक कर अयोध्या भेजा जाएगा. इस काम में ग्रामीण महिलाओं के साथ-साथ विशुनपुर बघनगरी पंचायत की मुखिया बबिता कुमारी भी जुटी हुई हैं.

21 हजार दीपक भेजेंगी अयोध्या
मुखिया बबिता कुमारी बताती हैं कि यह दीपक गाय के गोबर से बनाया जा रहा है. 21 हजार दीया बनाया जा रहा है, जिसे राम मंदिर अयोध्या भेजा जाएगा. इसके अलावा पांच-पांच दीयासकरा प्रखंड के सभी पंचायतों में भी भेजा जाएगा.

धर्म गुरुओं के बीच जंग-असली और नकली की लड़ाई – राम मंदिर बन रहा राजनीतिक अखाड़ा

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राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर धर्म गुरुओं में जंग जारी है। जहा एक तरफ २२ जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा को ले कर चारो शंकराचार्य अयोध्या नहीं जा रहे है वही अब नई खबर के अनुसार पांचवें शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती स्वामीगल का उदय हो गया है और उन्होंने कहा है कि -‘, “भगवान राम के आशीर्वाद से अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी को होगा. हमारी काशी स्थित यज्ञशाला भी भव्य आयोजन के साथ 40 दिनों तक विशेष पूजा करेगी. 100 से अधिक विद्वान यज्ञशाला में पूजा और हवन करेंगे.” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि पीएम देश भर के तीर्थ स्थलों और परिसरों के विकास पर जोर दे रहे हैं. उनके नेतृत्व में केदारनाथ और काशी विश्वनाथ मंदिरों का विस्तार किया गया है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर चारों प्रमुख पीठ के शंकराचार्य एकमत नजर नहीं आ रहे हैं. ज्योतिष और गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य जहां इस समारोह का विरोध कर रहे हैं, तो श्रृंगेरी मठ के शंकराचार्य कार्यक्रम का समर्थन करते नजर आ रहे हैं. अब इन चार प्रमुख पीठों से अलग चलने वाला कांची कामकोटि पीठ और उसके शंकराचार्य भी इसके समर्थन में आ गए हैं.

तमिलनाडु के कांचीपुरम में कांची कामकोटि मठ के शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती स्वामीगल ने शुक्रवार (12 जनवरी) को कहा कि पीठ काशी में यज्ञशाला मंदिर में 22 जनवरी के कार्यक्रम को चिह्नित करने के लिए 40 दिवसीय पूजा कार्यक्रम आयोजित करेगी. यह पूजा कार्यक्रम 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा के साथ होगा और 40 दिनों तक चलेगा.

क्या है कांची कामकोटि पीठ?

अभी तक चार आदि पीठ और चार शंकराचार्य़ की बात की जाती रही, लेकिन अचानक एक और शंकराचार्य का नाम सामने आने के बाद से कई लोगों के मन में ये सवाल है कि ये पांचवा मठ और शंकराचार्य़ क्या हैं.

दरअसल, आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म की रक्षा और प्रसार के लिए देश की चार दिशाओं में चार पीठ की स्थापनी की. चारों पीठों के प्रमुख को शंकराचार्य कहा जाता है. ये चार प्रमुख मठ द्वारका, ज्योतिष, गोवर्धन और श्रृंगेरी पीठ हैं, लेकिन तमिलनाडु के कांची कामकोटि पीठ भी महापीठ का दावा करता है और यहां के शंकराचार्य खुद को अन्य चार शंकराचार्य की तरह मानते हैं, लेकिन प्रमुख चारों पीठ कांची कामकोटि पीठ को आदि पीठ नहीं मानते हैं और न हीं वहां के शंकराचार्य को शंकराचार्य कहने को राजी होते हैं.खैर राम मंदिर का विषय अब लगता है कि राजनीति और अहम् का मुद्दा बनता जा रहा है। देखते है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन से कैसे निपटते है।

Kota News – 2600 गोवंश सर्दी में कहर रहीं , बंधा धर्मपुरा गोशाला और कायन हाउस गोशाला में सर्दी का सितम , 184 गोवंशों ने तोड़ा दम

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Kota News: कांग्रेस (Congress) हो या बीजेपी (BJP) की सरकार हो कोटा की बंधा धर्मपुरा गोशाला और कायन हाउस गोशाला हमेशा से ही गोवंश की मौत के लिए चर्चा में रहती है.  यहां बजट भरपूर है, लेकिन उसके बाद भी लगातार यहां गोवंश की मौत होती है. जब भी इन दोनों गोशालाओं में गोवंश की मौत होती है, तो उसका मामला जोर शोर से उठता है, लेकिन कुछ दिन बाद मामला ठंडा हो जाता है. एक बार फिर यहां गायों की मौत से हाहाकार शुरू हो गया है.

नगर निगम कमिश्नर सरिता सिंह से जब यह सवाल पूछा गया की 184 से ज्यादा गायें मर गई जिम्मेदार कौन है? इस पर कमिश्नर ने कहा की व्यवस्थाएं तो सभी प्रकार की है. सर्दी ज्यादा होने के कारण गायें मर गई. पहले भी नगर निगम के महापौर आकर गए हैं, निगम की ओर से व्यवस्थाएं हुई हैं. उन्होंने कहा कि गौशाला में अब जो भी कमियां हैं कल पूर्ति करवा देंगे. तापमान का इश्यू था, सर्दी ज्यादा थी इसीलिए गायें मरी है.

गौशाला में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं

नगर निगम कमिश्नर से जब यह सवाल पूछा गया की डेढ़ साल से गौशाला में डॉक्टर ही नहीं है तो कमिश्नर ने यह कहते हुए बात को टाल दिया कि कंपाउंडर लगाए हुए हैं. हम डॉक्टर भी अब लगा देंगे. कमिश्नर से जब टीन सेट को लेकर सवाल पूछा गया की ठंड शुरू होने से पहले टिन सेट क्यों नहीं लगवाए गए, इस पर कमिश्नर ने सवाल को टाल दिया और कहा कि हम लगवा रहे हैं. कोटा संभाग के सबसे बड़े गौशाला बंधा धर्मपुरा में ठंड से 10 दिन में 184 गायों की मौत हो गई. 10 दिनों से गाय तड़प तड़प कर मर रही है, गौशाला में मौजूद 2600 गाय अभी भी बर्फीली सर्दी में खुले में रह रही है. गायों की मौत के आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है.

क्षमता से अधिक गौवंश मौजूद

इस गौशाला में तीन प्रमुख बाड़े हैं, जिनमें स्वस्थ गायों का बाड़ा, दूसरा नंदी शाला और तीसरा बीमार गौवंश बाड़ा है. क्षमता से ज्यादा गोवंश 800 की जगह 1200 गोवंश यहां हर बाड़े में मौजूद है. यहां स्थिति खराब है और गायों की संख्या काफी ज्यादा है. हालत यह है कि गोवंशों को ठुस-ठुस कर रखना पड़ता है. नंदी शाला में 1000 की क्षमता है और यहां 1500 गोवंशों को रखा हुआ है.

दूसरी गौशाल में हर रोज 2 मौतें

वहीं कोटा के काएन हाउस किशोरपुरा गौशाला में रोज दो गायों की मृत्यु हो रही है और नवंबर और दिसंबर के आंकड़े की बात करें तो नवंबर के महीने में 45 गायों की मौत हुई तो दिसंबर के महीने में आंकड़ा 68 हो गया. किशोरपुरा गौशाला में 1 जनवरी से 10 जनवरी तक रोजाना दो गायों की मौत हो रही है.

पिछले 12 दिन में सैकड़ों गायों की सांसे थमी
जितेन्द्र सिंह ने बताया कि इसका परिणाम यह निकाला की एक दिन में कभी 30 तो कभी 20 गोवंश दम तोड़ता रहा. पिछले 12 दिन में तो सैकड़ों गायों की सांसे थम गई. गोशाला समिति के चेयरमैन ने बताया कि यहां गाय पॉलिथिन खाती है, ऐसे में उनका लीवर कमजोर हो जाता है और खून भी कम होता है. पहले जब यहां इन गायों का पोस्टमार्टम कराया गया, तो उनकी मौत का कारण पॉलिथिन को बताया गया. निगम को गोशाला में कमजोर गोवंश के बारे में पहले ही अवगत करा दिया था.

2600 गोवंश सर्दी में कहर रहीं
उन्होंने बताया कि साथ ही निगम से अधिक सर्दी को देखते हुए इन्हें बचाने के लिए भी कहा गया था, लेकिन निगम ने ध्यान नहीं दिया. हम सेवा कर रहे हैं, लगातार सफाई पर ध्यान  देर रहे हैं, लेकिन सर्दी में तिरपाल, हीटर, के साथ-साथ  पोष्टिक आहार के इंतजाम तो निगम को ही करने थे, जो समय रहते नहीं किए गए. कोटा शहर में इन दिनों कडाके की सर्दी पड़ रही है. ऐसे में गोवंश को बंधा धर्मपुरा और कायन हाउस गोशाला में मरने के लिए छोड़ रखा है. इतनी गायों की मौत के बाद भी यहां अभी 2600 गोवंश सर्दी में कहर रही हैं.

बंधा धर्मपुरा गोशाला में तीन प्रमुख बाड़े

इन दोनों  गोशालाओं का बजट भी किसी से छुपा नहीं है. बताया जा रहा है कि 18 करोड़ का बजट गोशालाओं के लिए आता है, जिसके बाद भी यहां व्यवस्थाओं के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है. यहां गायों को ना ही पोष्टिक आहार दिया जा रहा है. ना ही उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा रहा है. बता दें बंधा धर्मपुरा गोशाला में तीन प्रमुख बाड़े हैं, जिनमें स्वस्थ गायों का, दूसरा नंदी शाला और तीसरा बीमार गोवंशों का बाड़ा है. चौथा बाड़ा बड़ा है, लेकिन चौथे बाड़े में केवल गोशाला में सफाई के समय ही गोवंशों को छोड़ा जाता है.

बंधा धर्मपुरा गोशाला में हमेशा ही कीचड़
स्वस्थ गायों के बाड़े में ऊपर टीनशेड लगे हुए हैं. बाकी कुछ जगह से खुला है. बारिश में तो इन गायों का बचाव हो जाएगा, लेकिन सर्दी को रोका नहीं जा सकता. सर्दी से बचाव के दूसरे और कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं. वहीं बंधा धर्मपुरा गोशाला की क्षमता से अधिक गोवंश को वहां रखा जा रहा है. उसकी क्षमता केवल 700 गायों की हैं, जबकी यहां एक हजार के करीब गायों को ढूस-ढूस कर रखा गया. बंधा धर्मपुरा गोशाला में हमेशा ही कीचड़ देखने को मिलता है, जिस कारण गोवंश गिरते रहते हैं. घायल हो जाते हैं और पर्याप्त मात्रा में विचरण भी नहीं कर पाते.

निगम की गोशालाओं में गोवंश को संभालने के लिए पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था नहीं हैं. यदि गोवंश बीमार हो जाए तो डॉक्टर तक नहीं है. केवल कंपाउंडर के भरोसे दोनों गोशालाएं चल रही है. करीब आठ कंपाउंडर गोशालों में गायों का इलाज करने के लिए हैं. पोष्टिक आहार की बात करें तो गायों को गुड, हल्दी, तेल, अजवाइन, हरा चारा दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है. सर्दी से बचाव के लिए चारों और से ढका हुआ परिसर होना चाहिए, लेकिन ऐसा भी नहीं है.