Home Blog Page 511

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुआ ‘गौ राष्ट्र’ पुस्तक का विमोचन

0
दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में धुव्र फाउंडेशन के द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें गौ राष्ट्र पुस्तक का विमोचन हुआ। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला और सुदर्शन न्यूज के प्रधान संपादक श्री सुरेश चव्हाणके जी बतौर अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में मौजूद रहे। श्रीकृष्णा मित्तल जी की पुस्तक का विमोचन करते हुए श्री चव्हाणके जी ने सभा को संबोधित किया और साथ ही सरकार के सामने तीन मांगे भी रखीं।
उन्होनें पहली मांग में कहा कि केवल बातों के वजह काम से भी संदेश जाता है। इसलिए में मांग रखता हूं कि जो देश 75वां स्वतंत्र दिवस मना रहा है सेंट्रल विस्टा पर कई करोड़ रूपए खर्ज हो रहे है। तो वहीं पर इतने सारे प्रोजेक्ट में एक गौशाला बने, तब ही सही संदेश जाएगा। भले वो कही बने या न बनो लेकिन वहां प्रधानमंत्री का आवास बन रहा है, तो उस आवास में ये बने तो इससे बहुत बड़ा संदेश जाएगा।

दूसरी मांग में रखना चाहता हूं कि गौ सेवको को तो बहुत सम्मान मिलता ही है, लेकिन गौ रक्षकों को भी सम्मान मिलना चाहिए, क्योंकि गौ सेवको के साथ तो मंत्री भी स्टेज शेयर कर लेते है, सांसद भी कर लेते है, मीडिया भी कर लेते है, लेकिन गौ रक्षको को अपराधी और खलनायकों की कैटेगरी में रख कर कोई खड़ा नहीं होता है। मुझे लगता है, कि अगर गौ रक्षक नहीं है, तो गौ सेवा भी संभव नहीं है, तो इसलिए गौ रक्षको के लिए जो हो सकता है, जैसे उनका  इंश्योरेंस हो सकता है, उनके लिए हम कोई पहचान पत्र दे सकते है, ऐसे अन्य- अन्य विषयों पर हमे चर्चा करनी चाहिए।
गौ माता पर्यावरण का भी समाधान है, या जो विश्व की सारी समस्या है, हम सभी इसके जानकार है, केवल मैं उनका उल्लेख करना चाहूंगा। परिवार का भी समाधान है, क्योकि आज कल कोई माता-पिता को नहीं संभालता है, लेकिन जो गाय की रक्षा करेगा, वो कभी भी अपने माता या पिता को अनाथ आश्रम में नहीं छोड़ेगा।
आपको बता थे कि उन्होनें आगे कहा कि छोटे-छोटे उद्योगों के लिए बैंकों में खर्च दिया जाता है, काफी अच्छी बात है मुद्राएं देने जैसी योजनाएँ है, तो ये गौपालन के लिए भी दिया जा सकता है।

कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर गौशालाओं में पूजी गईं गौ माता

0
कानपुर,19अगस्त । गाय में 33 कोटि भगवानों की संरचना रहती है। गाय को पूजने वाला कभी दुखी नहीं रहता है। उक्त शुक्रवार को जन्माष्टमी पर्व पर कानपुर गौशाला सोसायटी भौती शाखा में पहुंचे गोविन्द नगर विधायक सुरेन्द्र मैथानी ने गौ पूजा करने के बाद कही। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने कहा कि जब जब पृथ्वी पर अधर्म सीमा से अधिक बढ़ा है तो भगवान ने धरती पर अवतार लिया है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की अपेक्षा के अनुरूप कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर 6200 गौशालाओं में जनप्रतिनिधियों द्वरा गौ पूजन किया जायेगा। जबकि गौशाला में पदाधिकारियों द्वारा प्रतिवर्ष मनाया जाता रहा है। इस वर्ष भी उसी क्रम में मै गौ पूजा करने के लिए यहां आया हूॅं।
मंत्री राकेश सचान ने मौजूद गौ भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि जब जब पृथ्वी पर अधर्म सीमा से अधिक बढा़ है भगवान ने अवतार धरती पर लिया है। भगवान विष्णु ने किसी न किसी रूप में अवतरित हुए हैं, कृष्ण भगवान भी विष्णु के अवतार हैं, श्रीकृष्ण के जीवन से कई वृतांत सुनाएं जो मानव समाज को सीख देते हैं उनके जन्मदिन को उत्सव की तरह देश में मनाया जाता है जो अपने आप में अद्वितीय है।
इस मौके पर कानपुर गौशाला सोसायटी के अध्यक्ष तिलक राज शर्मा ने बताया कि विश्व में मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने धरती पर कंस के अत्याचारों से मुक्त कराने के लिए धरती पर अवतरित हुए और अत्याचारी कंस का वध किया। भगवान कृष्ण की कृपा पाने के लिए लोग व्रत रखते हैं।
कार्यक्रम के संयोजक सुरेश गुप्ता ने आए हुए अतिथियों का अंग वस्त्र व माला पहनाकर सम्मान किया। पुरुषोत्तम लाल तोषनीवाल महामंत्री , नंद किशोर मिश्रा, प्रबंधक संजीव दुबे, वैध वी डी चंदेल, विवेक राजावत, दिनेश शुक्ला, गणेश पांडेय, नरेंद्र सिंह, शिवनाथ, रिषभ दुबे, आयुष दुबे, सौरभ शुक्ला अधिकारी गणों में आर.पी.मिश्रा मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, डॉ सुधीर श्रीवास्तव उप प्रमुख् पशु चिकित्सा अधिकारी ,डॉक्टर ओपी वर्मा ,डॉक्टर नीरज सचिव ,राज कुमार दोहरे आदि अधिकारी मौजूद रहे।

जन्माष्टमी पर सीएम योगी आदित्यनाथ तथा डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने की गौ सेवा

0
लखनऊ, । भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण दिवस यानी जन्माष्टमी पर्व पर उत्तर प्रदेश सरकार के गौ-पूजा तथा गौ-सेवा के अभियान के तहत शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गाय की पूजा तथा सेवा करने के साथ उनको हरा चारा भी खिलाया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नियमित दिनचर्या में गौ-सेवा तथा गौ-पूजा भले ही है, लेकिन आज की दिन खास था। उत्तर प्रदेश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पहली बार गौ-पूजा का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में पहुंचकर गायों को चारा खिलाया।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ के कान्हा उपवन के बाद उन्नाव में गौशाला में पूजा करने के साथ ही गौ सेवा भी की। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, नवाबगंज उन्नाव में औचक निरीक्षण के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की अति प्रिय गौ माता की सेवा की।
उन्नाव में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र नवाबगंज, में औचक निरीक्षण के दौरान चिकित्सालय परिसर में पौधरोपण किया। उच्च प्राथमिक विद्यालय, सोहरामऊ, नवाबगंज, उन्नाव में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होकर बच्चों के साथ वात्सल्यपूर्ण अविस्मरणीय पल बिताये एवं सभी को जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई देने के साथ विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण भी किया।
ब्रजेश पाठक ने आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के शुभावसर पर कान्हा उपवन, लखनऊ में पौधरोपण कर सभी प्रदेशवासियों की सुख शांति व आनंदपूर्ण जीवन की कामना की। इसका उन्होंने ट्वीट भी किया।
उन्होंने कहा कि आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के शुभावसर पर कान्हा उपवन, लखनऊ में भगवान श्री कृष्ण को अतिप्रिय गौमाता की सनातन संस्कृति से विधि विधान से पूजा अर्चना कर गौमाता का वात्सल्य व आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान सभी प्रदेशवासियों के सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हुए पौधरोपण भी किया।

दही हांडी उत्सव की धूम, 111 घायल, 23 का इलाज जारी

0
महाराष्ट्र में दो साल के बाद शुक्रवार को धूमधाम के साथ दही हांडी उत्सव मनाया गया। शुक्रवार को मटकी फोड़ प्रतियोगिता के दौरान करीब 24 लोगों के घायल होने की खबर है। मुंबई में निगम अधिकारियों ने बताया कि उत्सव के दौरान 111 लोगों के घायल होने की सूचना है .
मुंबई में दही हांडी समारोह के दौरान घायलों की संख्या पर बीएमसी ने बताया कि कुल 111 लोग घायल हुए, जिनमें से 88 का इलाज कर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है। 23 लोगों का इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर है। कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
शिंदे भी पहुंचे
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जन्माष्टमी के अवसर पर मुंबई के घाटकोपर में दही हांडी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने पिछले महीने घोषणा की थी कि इस साल दही हांडी और गणेश चतुर्थी सहित धार्मिक त्योहारों को मनाने पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बीते दिन ही दही हांडी को खेल का दर्जा देने का एलान किया था।

दो वर्ष से आयोजन नहीं हो पाया था
इसके साथ ही किसी खिलाड़ी के हताहत होने की स्थिति में प्रतिभागियों या उनके परिवारों को मुआवजा देने का भी फैसला किया गया था। बता दें कि कोरोना महामारी के कारण पिछले दो वर्ष से इसका आयोजन नहीं हो पाया था।

हमने जून में तोड़ी थी एक दही हांडी: शिंदे
इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना नेतृत्व पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जून में उन्होंने और उनके समर्थकों ने बहुत ही चुनौतीपूर्ण दही हांडी फोड़ी थी। उन्होंने कहा कि आप लोग अब दही हांडी तोड़ रहे हैं। हमने डेढ़ महीने पहले एक बहुत ही कठिन दही हांडी को तोड़ा था। यह बहुत कठिन था, ऊंचा था, और हमें उसे तोड़ने के लिए 50 मजबूत परतों की मदद लेनी पड़ी, लेकिन हम सफल हुए।

साँवरिया तोहरे प्यार में का पोस्ट प्रोडक्शन सम्पन्न

0
रति कल्याण फिल्म्स एवं माँ मथुराशिनी प्रोडक्शन कृत भोजपुरी फिल्म “साँवरिया तोहरे प्यार में” का संपूर्ण पोस्ट प्रोडक्शन कार्य आई फोकस स्टूडियो, अंधेरी (प.), मुंबई में हाल ही में सम्पन्न हुआ। निर्माता शशिकांत कुमार व अनिल कुमार की इस रोमांटिक एक्शन थ्रिलर फिल्म के लेखक – निर्देशक संजय कुमार सिन्हा हैं। गीतकार हैं विजय चौहान, राजेश मिश्रा, प्यारेलाल यादव ‘कवि’, शेखर मधुर व अमर विदेशी। इनके गीतों को मधुर संगीत से सजाया है अमन श्लोक ने और गायक गायिका हैं – शिल्पी राज, विजय चौहान, सोनू शैलेश, अनूप मिश्रा, खुशबू जैन, चंदन सिंह, अमित सिंह, अनुज, अमन श्लोक, प्रियंका सिंह, इंदु सोनाली, प्रियंका मौर्या, राजू, माही और मोहन राठौड़।
बिहार में वारिसगंज, मोहिउद्दीन नगर, पूसा कृषि विश्वविद्यालय (समस्तीपुर), पटना एवं कुछ अन्य सुरम्य स्थलों पर फिल्माई गई इस मनोरंजक फिल्म की कोरियोग्राफी जे डी, एडिटिंग गोविन्द दुबे, आर्ट मुकेश कुमार सिन्हा, एक्शन प्रदीप खड़का एवं सिनेमैटोग्राफी शानू सिन्हा की है। फिल्म के प्रचारक समरजीत हैं। “साँवरिया तोहरे प्यार में” एक रहस्यमय प्रेम कहानीवाली फिल्म है जिसमें निर्देशक संजय कुमार सिन्हा हीरो के रूप में अमन कपसिमे (ए.के.) को इंट्रोड्यूस कर रहे हैं। ए.के. की नायिका ऋतु सिंह हैं। मुख्य सहयोगी कलाकार हैं – ब्रजेश त्रिपाठी, अनूप अरोड़ा, सुबोध सेठ, प्रिया सिन्हा, मनीष चतुर्वेदी, नेहा मेहता, पिंकी सिंह, शशिकांत गुप्ता, सुबोध विश्वास, बृजेश कुमार, रौशन आर्या, सीमा सरगम, रवि अवस्थी, आशीष शर्मा, जयप्रकाश और आइटम गर्ल त्रिशा खान।

Krishna Janmashtami- भगवान श्रीकृष्ण का बाल्यजीवन गौसेवा में बीता, इसीलिए उनका नाम गोपाल पड़ा

0

 

 

राधिकापति भगवान श्रीकृष्ण के मन में दूध पीने की इच्छा होने लगी। तब भगवान ने अपने वामभाग से लीलापूर्वक सुरभि गौ को प्रकट किया। उसके साथ बछड़ा भी था जिसका नाम मनोरथ था। उस सवात्सा गौ को सामने देख श्रीकृष्ण के पार्षद सुदामा ने एक रत्नमय पात्र में उसका दूध दुहा और उस सुरभि से दुहे गए स्वादिष्ट दूध को स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने पीया।
मृत्यु तथा बुढ़ापा हरने वाला वह दुग्ध अमृत से भी बढ़कर था। सहसा दूध का वह पात्र हाथ से छूटकर गिर पड़ा और पृथ्वी पर सारा दूध फैल गया। उस दूध से वहां एक सरोवर बन गया जो गोलोक में क्षीरसरोवर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। गोपिकाओं और श्रीराधा के लिए वह क्रीड़ा सरोवर बन गया। उस क्रीड़ा सरोवर के घाट दिव्य रत्नों द्वारा निर्मित थे। भगवान की इच्छा से उसी समय असंख्य कामधेनु गौएं प्रकट हो गईं जितनी वे गौएं थीं, उतने ही बछड़े भी उस सुरभि गौ के रोमकूप से निकल आए। इस प्रकार उन सुरभि गौ से ही गौओं की सृष्टि मानी गई है। भगवान श्रीकृष्ण सांदीपनि मुनि के आश्रम में विद्याध्ययन के लिए गए। वहां उन्होंने गौसेवा की। भगवान श्रीकृष्ण को केवल गायों से ही नहीं अपितु गोरस दूध, दही, मक्खन, आदि से अद्भुत प्रेम था। श्रीकृष्ण द्वारा ग्यारह वर्ष की अवस्था में मुष्टिक, चाणूर, कुवलयापीड हाथी और कंस का वध गोरस के अद्भुत चमत्कार के प्रमाण हैं और इसी गोदुग्ध का पान कर भगवान श्रीकृष्ण ने दिव्य गीतारूपी अमृत संसार को दिया।
भगवान श्रीकृष्ण सांदीपनि मुनि के आश्रम में विद्याध्ययन के लिए गए। वहां उन्होंने गौसेवा की। भगवान श्रीकृष्ण को केवल गायों से ही नहीं अपितु गोरस दूध, दही, मक्खन, आदि से अद्भुत प्रेम था। श्रीकृष्ण द्वारा ग्यारह वर्ष की अवस्था में मुष्टिक, चाणूर, कुवलयापीड हाथी और कंस का वध गोरस के अद्भुत चमत्कार के प्रमाण हैं और इसी गोदुग्ध का पान कर भगवान श्रीकृष्ण ने दिव्य गीतारूपी अमृत संसार को दिया।
गौ रक्षक भगवान श्रीकृष्ण ने गौमाता की रक्षा के लिए क्या-क्या नहीं किया? उन्हें दावानल से बचाया, इंद्र के कोप से गायों और ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गिरिराज गोवर्धन को कनिष्ठिका उंगली पर उठाया। तब देवराज इंद्र ने ऐरावत हाथी की सूंड के द्वारा लाए गए आकाशगंगा के जल से तथा कामधेनु ने अपने दूध से उनका अभिषेक किया और कहा कि जिस प्रकार देवों के राजा देवेन्द्र हैं उसी प्रकार आप हमारे राजा गोविंद हैं।

भगवान श्रीकृष्ण का बाल्यजीवन गौसेवा में बीता, इसीलिए उनका नाम गोपाल पड़ा

भगवान श्रीकृष्ण का बाल्यजीवन गौसेवा में बीता, इसीलिए उनका नाम गोपाल पड़ा। पूतना के वध के बाद गोपियां श्रीकृष्ण के अंगों पर गोमूत्र, गोरज व गोमय लगा कर शुद्धि करती हैं क्योंकि उन्होंने पूतना के मृत शरीर को छुआ था और गाय की पूंछ को श्रीकृष्ण के चारों ओर घुमाकर उनकी नजर उतारती हैं। तीनों लोकों के कष्ट हरने वाले श्रीकृष्ण के अनिष्ट हरण का काम गाय करती है। जब-जब श्रीकृष्ण पर कोई संकट आया नंदबाबा और यशोदा माता ब्राह्मणों को स्वर्ण, वस्त्र तथा पुष्पमाला से सजी गायों का दान करते थे। यह है गौमाता की महिमा और श्रीकृष्ण के जीवन में उनका महत्व।
नंद बाबा के घर सैंकड़ों ग्वालबाल सेवक थे पर श्रीकृष्ण गायों को दुहने का काम भी स्वयं करना चाहते थे। कन्हैया ने आज माता से गाय चराने के लिए जाने की जिद की और कहने लगे कि भूख लगने पर वे वन में तरह-तरह के फलों के वृक्षों से फल तोड़कर खा लेंगे। पर मां का हृदय इतने छोटे और सुकुमार बालक के सुबह से शाम तक वन में रहने की बात से डर गया और वह कन्हैया को कहने लगीं कि तुम इतने छोटे-छोटे पैरों से सुबह से शाम तक वन में कैसे चलोगे, लौटते समय तुम्हें रात हो जाएगी। तुम्हारा कमल के समान सुकुमार शरीर कड़ी धूप में कुम्हला जाएगा परन्तु कन्हैया के पास तो मां के हर सवाल का जवाब है। वह मां की सौगंध खाकर कहते हैं कि न तो मुझे धूप लगती (गर्मी) है और न ही भूख और वह मां का कहना न मानकर गोचारण की अपनी हठ पर अड़े रहे।
मोरमुकुटी, वनमाली, पीताम्बरधारी श्रीकृष्ण यमुना में अपने हाथों से मल-मल कर गायों को स्नान कराते, अपने पीताम्बर से ही गायों का शरीर पोंछते, सहलाते और बछड़ों को गोद में लेकर उनका मुख पुचकारते और पुष्पगुच्छ गुंजा आदि से उनका शृंगार करते। तृण एकत्र कर स्वयं अपने हाथों से उन्हें खिलाते। गायों के पीछे वन-वन वह नित्य नंगे पांव, कुश, कंकड़, कण्टक सहते हुए उन्हें चराने जाते थे। गाय तो उनकी आराध्य हैं और आराध्य का अनुगमन पादत्राण (जूते) पहनकर तो होता नहीं। परमब्रह्म श्रीकृष्ण गायों को चराने के लिए जाते समय अपने हाथ में कोई छड़ी आदि नहीं रखते थे। केवल वंशी लिए हुतेए ही गाएं चराने जाते थे। वह गायों के पीछे-पीछे ही जाते हैं और गायों के पीछे-पीछे ही लौटते हैं वह गायों को मुरली सुना हैं।
सुबह गोसमूह को साष्टांग प्रणिपात (प्रणाम) करते और सायंकाल गायों के खुरों से उड़ी धूल से उनका मुख पीला हो जाता था। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए देवी-देवता अपने लोकों को छोड़कर ब्रज में चले आते और आश्चर्यचकित रह जाते कि जो परमब्रह्म श्रीकृष्ण बड़े-बड़े योगियों के समाधि लगाने पर भी ध्यान में नहीं आते, वे ही श्रीकृष्ण गायों के पीछे-पीछे नंगे पांव वनों में हाथ में वंशी लिए घूम रहे हैं। मोहन गाएं चराकर आ रहे हैं। उनके मस्तक पर नारंगी पगड़ी है जिस पर मयूरपिच्छ का मुकुट लगा है, मुख पर काली-काली अलकें बिखरी हुई हैं जिनमें चम्पा की कलियां सजाई गई हैं।
गोप बालकों की मंडली के बीच मेघ के समान श्याम श्रीकृष्ण रसमयी वंशी बजाते हुए चल रहे हैं और सखामंडली उनकी गुणावली गाती चल रही है। गेरु आदि से चित्रित सुंदर नट के समान भेस में ये नवल-किशोर मस्त चलते हुए आ रहे हैं। चलते समय उनकी कमर में करधनी के किंकणी और चरणों के नुपूरों के साथ गायों के गले में बंधी घंटियों की मधुर ध्वनि सब मिलकर कानों में मानो अमृत घोल रहे हों।

श्री कृष्ण ने धरती पर रहते हुए इस दुनिया को जीने का सलीका बताया.

भगवान श्री कृष्ण की महिमा का गुणगान जितना किया जाए उतना कम है. श्री कृष्ण ने धरती पर रहते हुए इस दुनिया को जीने का सलीका बताया. द्वापरयुग में भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री कृष्ण का जन्म हुआ था. श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को ही जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं. श्री कृष्ण को आज पूरी दुनिया पूजती है. श्री कृष्ण के साथ-साथ गौ माता का भी लोग बहुत आदर करते हैं और उनका भी पूजन किया जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं आज श्री कृष्ण और गौ माता के रिश्ते के बारे में .
आप गोपाष्टमी के त्यौहार से श्री कृष्ण और गौ माता के रिश्ते के बारे में जान सकते हैं. बताया जाता है कि गोपाष्टमी के दिन ही पहली बार श्री कृष्ण ग्वाला बने थे और उन्होंने गाय चराना शुरू किया था. यह त्यौहार कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है. इस दिन गौ माता के पूजन का विधान है.
गौ माता से भगवान श्री कृष्ण का ख़ास लगाव और जुड़ाव है. श्री कृष्ण के कारण ही आज गाय को माता की संज्ञा दी जाती है. ऐसे भी मान्यता है कि जिस स्थान पर गौ माताएं होती है या वे भ्रमण करती है वहां सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीव देखने को नहीं मिलते हैं. सच्चे दिल से गौ माता की भक्ति, सेवा और पूजा करने वाला व्यक्ति आने वाली समस्याओं से छुटकारा पा लेता है. साथ ही उस पर भगवान श्री कृष्ण की कृपा भी बनी रहती है. एक प्रचलित धार्मिक मान्यता इस प्रकार से भी है कि गौ माता में 33 कोटि देवी-देवता निवास करते हैं. अतः गौ माता का पूजन करने से 33 कोटो देवी-देवताओं की पूजा का फल भी हमें मिलता है. जब भी कभी गौ माता के बात होती है, तो श्री कृष्ण का नाम भी जुबान पर आ ही जाता है.

मनीष सिसोदिया के घर सीबीआई का छापा 21 ठिकानों पर कार्रवाई

0
दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर जानकारी दी कि सीबीआई आई है, जिसका स्वागत है। हम कट्टर ईमानदार हैं। लाखों बच्चों का भविष्य बना रहे हैं। बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश में जो अच्छा काम करता है उसे इसी तरह परेशान किया जाता है। इसीलिए हमारा देश अभी तक नंबर-1 नहीं बन पाया है। बता दें कि सीबीआई की दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के आवास सहित आबकारी नीति मामले में दिल्ली-एनसीआर में 21 स्थानों पर कार्रवाई चल रही है।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि ये लोग दिल्ली की शिक्षा और स्वास्थ्य के शानदार काम से परेशान हैं। इसीलिए दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और शिक्षा मंत्री को पकड़ा है। ताकि शिक्षा स्वास्थ्य के अच्छे काम रोके जा सकें। सिसोदिया ने कहा कि हम दोनों के ऊपर झूठे आरोप हैं। कोर्ट में सच सामने आ जाएगा।

देश में अच्छी शिक्षा के लिए मेरा काम रोका नहीं जा सकता
सिसोदिया ने कहा कि हम सीबीआई का स्वागत करते हैं। जांच में पूरा सहयोग देंगे ताकि सच जल्द सामने आ सके। अभी तक मुझ पर कई केस किए गए लेकिन कुछ नहीं निकला। इसमें भी कुछ नहीं निकलेगा। देश में अच्छी शिक्षा के लिए मेरा काम रोका नहीं जा सकता।

75 सालों में जिसने भी अच्छे काम की कोशिश की, उसे रोका गया

सीबीआई की कार्रवाई पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के शिक्षा और स्वास्थ्य मॉडल की पूरी दुनिया चर्चा कर रही है। इसे ये(केंद्र सरकार) रोकना चाहते हैं। इसीलिए दिल्ली के स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रियों पर छापेमारी और गिरफ्तारी की जा रही है। 75 सालों में जिसने भी अच्छे काम की कोशिश की, उसे रोका गया। इसीलिए भारत पीछे रह गया .
पहले भी कई जांच और रेड हुईं
सीएम केजरीवाल ने कहा कि हम दिल्ली के अच्छे कामों को रुकने नहीं देंगे। जिस दिन अमेरिका के सबसे बड़े अखबार एनवाईटी के फ्रंट पेज पर दिल्ली शिक्षा मॉडल की तारीफ और मनीष सिसोदिया की तस्वीर छपी, उसी दिन मनीष के घर केंद्र ने सीबीआई भेजी। सिसोदिया की तरह केजरीवाल ने भी कहा कि सीबीआई का स्वागत है। पूरा सहयोग करेंगे। पहले भी कई जांच और रेड हुईं लेकिन कुछ नहीं निकला। अब भी कुछ नहीं निकलेगा।

ॐ देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते.देहिमे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणंगत:।।

0
भगवान श्री कृष्ण के भक्तों को भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष में पड़ने वाली अष्टमी का पूरे साल इंतजार रहता है क्योंकि इसी दिन मुरली मनोहर भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है. जिसे मनाने के लिए लोग बड़ी संख्या में कान्हा से जुड़े तीर्थ स्थानों पर पहुंचते हैं और जो लोग किसी कारणवश ऐसे पावन तीर्थों पर नहीं जा पाते हैं, वे अपने घर में विधि-विधान से लड्डू गोपाल की पूजा, जप-तप आदि करते हैं. हिंदू धर्म में किसी भी देवी-देवता के लिए जपे जाने वाले मंत्र का बहुत महत्व होता है. ऐसे में जन्माष्टमी पर नंद गोपाल की कृपा बरसाने वाला चमत्कारिक मंत्र जानने के लिए के लिए जरूर पढ़ें ये लेख
संतान सुख दिलाने वाला मंत्र
यदि विवाह के कई वर्ष बाद भी आपको अभी तक संतान सुख नहीं मिल पाया है और आपकी गोद अभी तक सूनी है तो अपने इस कष्ट को दूर करने और मनचाही संतान को पाने के लिए इस साल जन्माष्टमी के पावन पर्व पर कान्हा के इस मंत्र का वैजयंती या फिर तुलसी की माला से जप करें.
ॐ देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते.देहिमे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणंगत:।।
काम में आने वाली बाधा दूर करने का मंत्र
जीवन में कई बहुत प्रयास और परिश्रम के बावजूद व्यक्ति के काम नहीं पूरे हो पाते हैं और उसमें तमाम तरह की अड़चन एक के बाद एक आती ही चली जाती हैं. यदि आपके साथ भी इन दिनों कुछ ऐसा ही चल रहा है और आप अपने अधूरे पड़े काम को लेकर बहुत चिंतित हैं तो अपनी चिंताओं को दूर करने के लिए इस जन्माष्टमी पर कान्हा की पूजा करते समय नीचे दिए गए मंत्र का जप पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ कीजिए.
मंत्र: ॐ श्रीं नम: श्रीकृष्णाय परिपूर्णतमाय स्वाहा।।
शीघ्र विवाह के लिए जपें ये मंत्र
सनातन परंपरा में समय पर सुयोग्य लड़के या लड़की के साथ विवाह होना भी एक सौभाग्य माना गया है, लेकिन कई बार कुछ लोगों को यह बहुत समय बीत जाने के बाद भी नहीं प्राप्त हाे पाता है. यदि आपके अथवा आपके परिवार के साथ यह समस्या बनी हुई है तो शीघ्र ही मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए नीचे दिए गए भगवान श्रीकृष्ण मंत्र पूरी श्रद्धा विश्वास के साथ जपें.
मंत्र : ॐ क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्ल्भाय स्वाहा।।
करियर में सफलता दिलाने वाला मंत्र
यदि आप अपनी रोजी-रोजगार की सफलता को लेकर बहुत परेशान चल रहे हैं और बहुत परिश्रम के बावजूद भी करियर-कारोबार में तरक्की नहीं हो पा रही है तो इस साल जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में नीचे दिए गये मंत्र कर जप करना बिल्कुल न भूलें. इससे न सिर्फ आपको अपने करिअर में बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी.
मंत्र: ॐ श्री कृष्णः शरणं ममः।।
सुख और सौभाग्य दिलाने वाला मंत्र
कलयुग में भगवान श्री कृष्ण की साधना सभी दु:खों को दूर करने वाली मानी गई है. भगवान श्री कृष्ण की पूजा से जुड़े तमाम मंत्रों में नीचे दिया गया मंत्र न सिर्फ बेहद सरल बल्कि शीघ्र ही सभी प्रकार के सुख और सौभाग्य को दिलाने वाला माना गया है. इसलिए यदि आपको संस्कृत के मंत्रों को पढ़ने में कठिनाई आए तो आप नीचे दिए गये सरल मंत्र इस जन्माष्टमी में जरूर जपें.
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।।

गौ आधारित प्राकृतिक खेती से होगी किसानों की आय में वृद्धि

0
मीरजापुर : कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में द मिलियन फार्मर्स स्कूल किसान पाठशाला 2022-23 के तहत खरीफ सत्र में मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण बुधवार को एनआइसी में वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुआ। प्रशिक्षण में गौ आधारित प्राकृतिक खेती, पराली प्रबंधन, खरीफ फसल प्रबंधन एवं किसानों की आय वृद्धि के उपाय पर प्रशिक्षित किया गया।
उप कृषि निदेशक डा. अशोक उपाध्याय ने बताया कि पाठशाला का प्रथम चरण 30 से 31 अगस्त तथा द्वितीय चरण पांच से छह सितंबर तक होगा। प्रथम एवं द्वितीय माड्यूल में ग्राम के प्राथमिक विद्यालय अथवा पंचायत भवन में जनपद के 70-70 किसान पाठशालाओं में प्रशिक्षण देने के लिए ड्यूटी आवंटित की गई है। किसानों को सम-सामयिक, तकनीकी ज्ञान (मृदा स्वास्थ्य, उर्वरक एवं जल प्रबन्धन, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, पराली प्रबन्धन, कीट रोग प्रबंधन, विभिन्न योजना तहत किसानों को देय सुविधा, कृषक उत्पादक संगठन, जैविक व प्राकृतिक खेती, मूल्य संवर्धन व मूल्य संवर्धन) के बारे में प्रशिक्षित करेंगे।
किसान अपनी आय को दोगुनी कर सके और अच्छे गुणवत्ता का खाद्यान्न उत्पादित कर सके। इसमें राज्यमंत्री कृषि बलदेव सिंह औलख, अपर मुख्य सचिव देवेश चतुर्वेदी, कृषि निदेशक विवेक कुमार सिंह रहे। जनपद स्तर पर एनआइसी मीरजापुर से संयुक्त कृषि निदेशक एके सिंह, सहायक निदेशक मृदा परीक्षण प्रयोगशाला महेंद्र सिंह, जिला कृषि अधिकारी पवन प्रजापति, पशु चिकित्साधिकारी सदर डा. ओम प्रकाश सोनकर आदि रहे।

818 करोड़ रुपये लागत वाली भू मानचित्रण परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई

0
New Delhi – राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने एनएमसीजी के महानिदेशक श्री जी अशोक कुमार की अध्यक्षता में कल कार्यकारी समिति की 44वीं बैठक का आयोजन किया था। बैठक में, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भू मानचित्रण, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में सीवरेज प्रबंधन, उत्तराखंड में रिवर फ्रंट विकास कार्यों, कोलकाता में आर्द्र भूमि संरक्षण, अर्थ गंगा, बेलिया सर्कुलर कैनाल के फाटकों के नवीनीकरण से जुड़ी 13 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत लगभग 818 करोड़ रुपये है।
गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के वैज्ञानिक भू मानचित्रण के लिए 3 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। इनमें नीर द्वारा ‘हिंडन नदी क्षेत्र का नदी संबंधी भू-आकृति का मानचित्रण’ शामिल है। मानवजनित गतिविधि या प्राकृतिक वजहों के चलते आए प्रदूषण के बिंदु स्रोतों के साथ-साथ नदी के भू-आकृति विज्ञान संबंधी बदलावों के मानचित्रण से सहायक नदी कायाकल्प में सहायता मिलेगी और और मुख्य नदी प्रणालियों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए निचले स्तर से काम करने के दृष्टिकोण को लागू किया जा सकेगा। इस परियोजना के मुख्य उद्देश्यों में हिंडन नदी क्षेत्र से जुड़ी भू-आकृति विज्ञान संबंधी विशेषताओं का चित्रण, नदी संबंधी भू-आकृति में दशक के दौरान हुए बदलावों की पहचान, धारा नेटवर्क और उपयुक्त पुनर्भरण क्षेत्रों का चित्रण, हिंडन नदी के संगम के करीब प्रदूषण के प्रवाह के स्रोतों के बिंदु के चित्रण की जांच और जीआईएस, सतत नदी तटबंध रणनीतियों पर वास्तु संबंधी हस्तक्षेप और घाट विकास के लिए संभावित क्षेत्रों की पहचान शामिल हैं। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 16.4 लाख रुपये है। बैठक में देहरादून के लिए 5.4 करोड़ रुपये की लागत के प्रस्ताव- यूएवी/ सर्वेक्षण/ और रिमोट सेंसिंग तकनीकों के इस्तेमाल से ‘जिओ गंगा : गंगा नदी का अंतरिक्ष आधारित मानचित्रण और निगरानी’ को हरी झंडी दे दी गई। इस परियोजना को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, देहरादून द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा।
इसके अलावा, ‘हाई रिजॉल्युशन वाली छवियों, थेमेटिक लेयर ऑफ ड्रेन, रेत खनन, अवैध डंपिंग, नदी की तलहटी पर अतिक्रमण, वायु जनित एलआईडीएआर और ऑप्टिकल सेंसर के उपयोग से भूमि उपयोग/ भूमि कवर के मानचित्रण’ के लिए एक अन्य परियोजना को स्वीकृति दे दी गई। यह एनसीटी दिल्ली और उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, बागपत और उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर के कुछ हिस्सों में 12.65 करोड़ रुपये की लागत से लागू की जाएगी।
गंगा बेसिन में सीवरेज प्रबंधन के लिए 5 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। इनमें 57.09 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से सुपौल, बिहार में एसटीपी और आईएंडडी सहित 3 एसटीपी (एसटीपी-1 : 8.9 एमएलडी; एसटीपी-2 : 1.9 एमएलडी; एसटीपी-3 : 1.1 एमएलडी) 6 ड्रेन टैपिंग, ड्रेन्स के लिए 6 आईएंडडी स्ट्रक्चर आदि का विकास शामिल है। बिहार में रामनगर कस्बे के लिए एक अन्य एसटीपी और आईएंडडी परियोजना को स्वीकृति दे दी गई, जिसमें 56.97 करोड़ रुपये की लागत से 4.5-4.5 एमएलडी क्षमता के 2 एसटीपी और इंटरसेप्शन वं डायवर्जन कार्य शामिल हैं।
यमुना नदी पर मथुरा के लिए एक 282 करोड़ रुपये लागत की बड़ी परियोजना को भी स्वीकृति दे दी गई, जिसमें एक नया 60 एमएलडी एसटीपी, 4 आईएंडडी स्ट्रक्चर, 1.97 किमी लंबा आईएंडडी नेटवर्क बिछाना आदि शामिल है। उत्तराखंड में 91 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली एक परियोजना को स्वीकृति दे दी गई, जिसमें ऋषिकेश में मुनि की रेती, नीलकंठ महादेव, जोंक स्वर्गाश्रम के लिए इंटरसेप्शन और डायवर्जन, एसटीपी कार्य शामिल हैं।
ईसी ने कोलकाता, पश्चिम बंगाल में गार्डन रीच के लिए एक नए 65 एमएलटी एसटीपी के निर्माण के लिए बड़ी सीवरेज प्रबंधन परियोजना को स्वीकृति दी गई, जिसकी अनुमानित लागतर 275.07 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के अन्य कार्यों में 8 एसपीसी के सुधार/ मरम्मत, सिविल और ईएंडएम कार्य, एसटीपी तक संपर्क मार्ग का निर्माण/ मरम्मत आदि शामिल हैं।
उत्तराखंड में रिवर फ्रंट के विकास से जुड़ी दो परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिसमें 27.57 करोड़ रुपये की कुल लागत से नए घाटों, सार्वजनिक सुविधाओं, ईवी ट्रैक, साइनेज, लैंडस्केप, पैवेलियन, शौचालय, पेयजल सुविधाओं, शॉपसैट सहित प्लाजा प्रोमेनेड और परिक्रमा का निर्माण शामिल है।
एचईएससीओ, देहरादून द्वारा “अर्थ गंगा मॉडल को अपनाने के लिए प्रौद्योगिकी पर आधारित सामुदायिक संसाधनों और उपयुक्त स्थानीय संसाधनों का लाभ उठाने के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम” पर एक परियोजना को भी स्वीकृति दे दी गई, जिसकी अनुमानित लागत 5.20 करोड़ रुपये है। इस प्रस्ताव के उद्देश्यों में ग्रामीण समुदाय के लिए गंगा आधारित विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए एक सामान्य मंच के रूप में उपयोग के लिए एचईएससीओ ग्राम में अर्थ गंगा प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना, गंगा बेसिन में गंगा संसाधन केंद्रों का निर्माण जिसमें लगभग 500 परिवार को फलों के बाग, मशरूम की खेती, सब्जियों की खेती, ग्रामीण ऊर्जा, जल पुनर्भरण, होम स्टे आदि आर्थिक गतिविधियों पर आधारित संबंधित संसाधन शामिल होंगे।
साथ ही इसमें भरोसेमंद और अनुभवी स्वयंसेवी संगठनों की पहचान भी शामिल है। इससे गंगा नदी के तट पर रहने वाले लोगों में उद्यमशीलता बढ़ाने में सहायता मिलेगी। अर्थ गंगा केंद्र सभी आवश्यक ज्ञान और प्रौद्योगिकी से युक्त एक संस्थान के रूप में काम करेगा, जिसकी जिम्मेदारी जीआरसी और अन्य शोध संस्थानों के बीच एक संपर्क की भूमिका निभाने की होगी। यह विशेष रूप से पंचायत स्थानीय मीडिया, स्वयंसेवी संगठनों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ क्षेत्रवार बैठक करने की भी होगी। कुल 1,500 परिवारों को प्रत्यक्ष रूप से प्रशिक्षण दिया जाएगा और इससे अप्रत्यक्ष रूप से 20,000 सदस्यों को फायदा होगा।
नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत आर्द्र भूमि संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। 26 रामसर आर्द्र भूमि स्थलों में से 23 गंगा बेसिन में हैं। नमामि गंगे मिशन-2 के तहत साहिबगंज जिला, झारखंड में ‘उधवा झील पक्षी अभयारण्य का संरक्षण और सतत प्रबंधन’ नाम की 50 लाख रुपये की अनुमानित लागत वाली एक परियोजना को स्वीकृति दे दी गई है। परियोजना का उद्देश्य झील पक्षी अभयारण्य के एकीकृत संरक्षण और प्रबंधन और इस महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि के संरक्षण, पुनर्स्थापित करने और विकास के लिए एक दोहराने और विस्तार योग्य नमूना उपलब्ध कराना है। यह उधवा झील पक्षी अभयारण्य के लिए हितधारक परामर्श और आधारभूत जल विज्ञान मूल्यांकन के आधार पर एकीकृत प्रबंधन योजना की परिकल्पना करता है। हस्तक्षेपों का उद्देश्य गंगा रिवरस्केप की पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के बेहतर प्रवाह के लिए उधवा झील का संरक्षण, जलीय और स्थलीय जैव विविधता और उत्पादकता, महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र के संरक्षण और स्थायी बाढ़ के मैदान का संरक्षण करना है।
बेलियाघाट सर्कुलर कैनाल के किनारे (पूर्वी और पश्चिमी) 5 नए जल मार्गों की स्थापना, 28 मौजूदा जल मार्गों के नवीकरण आदि के लिए लगभग 4.25 करोड़ रुपये की एक अन्य परियोजना को स्वीकृति दे दी गई है। यह परियोजना कोलकाता, पश्चिम बंगाल में नदी में पेनस्टॉक गेटों के रिसाव को बंद करने और अपशिष्ट जल के उत्सर्जन से जुड़ी नालियों को बंद करने के लिए आवश्यक है।
एनएमसीजी की कार्यकारी समिति की बैठक में एनएमसीजी में ईडी (प्रशासन) श्री एस पी वशिष्ठ, एनएमसीजी में ईडी (तकनीक) श्री डी पी मथुरिया, एनएमसीजी में ईडी (परियोजना) श्री हिमांशु बदोनी, एनएमसीजी में ईडी (वित्त) श्री भास्कर दासगुप्ता और जल संसाधन विभाग, नदी विकास और गंगा संरक्षण, जल शक्ति मंत्रालय में जेएसएंडएफए सुश्री रिचा मिश्रा ने भाग लिया था।