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मैं कभी भी  इंसेक्योर एक्टर नहीं रहा : अर्जुन कपूर

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अर्जुन कपूर, जिन्हें रोहित शेट्टी की बहुप्रतीक्षित सिंघम अगेन में खलनायक के रूप में उनके निर्दयी दुष्ट रूप के लिए सर्वसम्मत प्यार मिल रहा है, उनका का कहना है कि उन्हें कोई भी भूमिका निभाना पसंद है जो उनके निर्देशक को लगता है कि वह उनके के लिए उपयुक्त हैं। अर्जुन का कहना है कि यह उनका प्यार है सिनेमा के लिए जो उन्हें उन भूमिकाओं के साथ प्रयोग करने की अनुमति देता है जिन्हें वह स्क्रीन पर निभाना चाहते हैं!
अर्जुन कहते हैं, “मैंने कभी एक्टर बनने की योजना नहीं बनाई थी, लेकिन मुझे फिल्मों से प्यार हो गया क्योंकि मैंने यह देखने में अधिक समय बिताया कि हमारे देश के लोगों को संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करने के लिए इस इंडस्ट्री में लोग कितने समर्पित और भावुक हैं। यह देखकर खुशी हुई कि मेरे करीबी और प्रिय लोग अपने काम के माध्यम से खुशियाँ फैलाना चाहते हैं।”
वह आगे कहते हैं, “इसलिए जब मैं अभिनय के बारे में जानना चाहता था, तो मैं सिर्फ अभिनय करना और कैमरे का सामना करना चाहता था। मैं कभी भी इस बात पर केंद्रित नहीं था कि मुझे स्क्रीन पर रोल के लिए क्या चुना गया है। मैं वही जुनून और खुशी महसूस करना चाहता था जो मैंने अभिनेताओं को शॉट देते समय महसूस करते देखा था। मैं कैमरे के सामने आने की हड़बड़ी महसूस करना चाहता था और अच्छा काम करने के लिए बहुत मेहनत करना चाहता था।
अर्जुन ने खुलासा किया कि उन्हें नहीं पता था कि इश्कजादे में नायक की भूमिका निभाने के लिए उनका ऑडिशन लिया जा रहा है। वह कहते हैं, ”मुख्य भूमिका के तौर पर लॉन्च होना इसलिए भी हुआ क्योंकि आदित्य चोपड़ा ने देखा कि मेरे अंदर स्क्रीन पर हीरो के रूप में अभिनय करने की आग है। मैंने यह जानते हुए कभी ऑडिशन नहीं दिया कि इशकजादे में मुख्य भूमिका के लिए मेरा ऑडिशन किया जा रहा है। जब मुझे यह भूमिका मिली तो मैं अभिभूत हो गया। मुझे आज भी वह दिन याद है। यह शायद मेरे जीवन के सबसे ख़ुशी के दिनों में से एक था।”
अभिनेता भावनात्मक रूप से कहते हैं, “मेरे अंदर केवल इस बात के लिए आभार है कि मुझे अभिनय करने का मौका मिलता है और मैं हर दिन वही कर रहा हूं जो मुझे पसंद है। इसलिए, मैं कभी भी  इंसेक्योर एक्टर नहीं रहा। मैंने मुख्य भूमिका निभाई है, मैं अपने समय में गुंडे में दो हीरो वाली फिल्म करने वाला पहला व्यक्ति था, मुबारकां में एक ग्रुप में काम करने वाला पहला, की एंड का में करीना कपूर खान के हाउस हसबैंड हीरो का किरदार निभाने के लिए चुना गया था।और अब मैं एक पूर्णतः एंटी-हीरो की भूमिका निभा रहा हूं!”
अर्जुन आगे कहते हैं, ”मैं उन सभी निर्देशकों और निर्माताओं का बहुत आभारी हूं जिन्होंने मुझे चमकने का मौका दिया। इसलिए, मैं इस बात से बेहद खुश हूं कि रोहित शेट्टी जैसे दिग्गज फिल्म निर्माता ने देखा कि मुझमें उनकी विशाल सिंघम अगेन में खलनायक की भूमिका निभाने की क्षमता है, जिसमें इतने सारे सितारे हैं। मैं जानता हूं कि मैंने इसमें अपना सब कुछ लगा दिया है और मैं यह देखने के लिए उत्सुक हूं कि जब फिल्म रिलीज होगी तो लोग मुझ पर कैसी प्रतिक्रिया देंगे।”

अनगिनत आत्माओं को प्रेरित और उत्थान करती रहेगी अमीन सयानी की आवाज़ : रिदम वाघोलिकर

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मुंबई (अनिल बेदाग ) : प्रसिद्ध रेडियो उद्घोषक अमीन सयानी ने इस नश्वर क्षेत्र को अलविदा कह दिया। सात दशकों से अधिक के करियर में सयानी की आवाज़ आकाशवाणी में गूंजती रही, जिसने दुनिया भर के श्रोताओं के दिल और दिमाग पर एक अमिट छाप छोड़ी। जैसा कि हम उनकी अद्वितीय विरासत पर विचार करते हैं। हम उस व्यक्ति को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिनकी आवाज़ वास्तव में पीढ़ियों को जोड़ने वाला एक पुल थी।
लेखक और साक्षात्कारकर्ता रिदम वाघोलिकर, जिन्हें अपनी पुस्तकों के लिए सयानी के साथ बातचीत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था, अस्सी के दशक के अंत में भी सयानी के पास मौजूद ज्ञान और अंतर्दृष्टि को दर्शाते हैं। वाघोलिकर जोर देकर कहते हैं, “प्रसारण की दुनिया में अमीन सयानी का योगदान अतुलनीय है। उनके साथ मेरी बातचीत में, मैं उनकी विनम्रता और उनकी कला के प्रति जुनून से प्रभावित हुआ। उनकी आवाज़ महज़ एक आवाज़ नहीं थी; यह एक ऐसी शक्ति थी जो समय और स्थान से परे थी और श्रोताओं को सादगी और आकर्षण के बीते युग में ले गई।”
दरअसल, सयानी की समृद्ध मध्यम आवाज़ और विशिष्ट शैली ने उन्हें एक घरेलू नाम बना दिया, जिससे उन्हें दशकों तक समर्पित अनुयायी अर्जित हुए। उनके प्रतिष्ठित शो “बिनाका गीतमाला” से लेकर उनके यादगार फिल्मी कथनों तक, सयानी की आवाज़ भारतीय लोकप्रिय संस्कृति के पूरे युग का पर्याय बन गई।
सयानी का प्रभाव प्रसारण के दायरे से बाहर तक फैला; वह एक सांस्कृतिक राजदूत थे जिनका प्रभाव सीमाओं से परे था। संगीत और कहानी कहने की सार्वभौमिक भाषा के माध्यम से श्रोताओं को एकजुट करते हुए, उनकी आवाज़ दक्षिण एशिया और उसके बाहर के घरों में एक परिचित उपस्थिति बन गई।
वाघोलिकर कहते हैं, ”जैसा कि हम अमीन सयानी को विदाई दे रहे हैं, हमें उस विरासत का भी जश्न मनाना चाहिए जो वह अपने पीछे छोड़ गए हैं। उनकी आवाज़ अब प्रसारित नहीं हो सकती है, लेकिन इसकी गूँज आने वाली पीढ़ियों तक गूंजती रहेगी, जो हमें कहानी कहने की शक्ति और एक आवाज़ के स्थायी प्रभाव की याद दिलाती रहेगी।”
वास्तव में, अमीन सयानी की आवाज़ बहुत याद की जाएगी, लेकिन इसकी गूंज आने वाले वर्षों में अनगिनत आत्माओं को प्रेरित और उत्थान करती रहेगी। जैसा कि हम उनकी स्मृति का सम्मान करते हैं, हमें यह जानकर सांत्वना मिलती है कि उनकी विरासत उन लोगों के दिलों में जीवित रहेगी जो उनकी अद्वितीय प्रतिभा और कालातीत ज्ञान से प्रभावित थे।

परिवार को समर्पित किया अनिल कपूर ने दादा साहेब फाल्के पुरस्कार

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मुंबई (अनिल बेदाग) : सिनेमा आइकन अनिल कपूर को एनिमल में उनकी भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता की श्रेणी में प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवार्ड्स 2024 से सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने के लिए कार्यक्रम में मौजूद अभिनेता ने अपनी जीत सभी माता-पिता और बच्चों को समर्पित की। अभिनेता ने अपने विजयी भाषण के दौरान कहा, “मैं इस पुरस्कार को हर जगह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले माता-पिता और बच्चों को समर्पित करना चाहता हूं। हम भले ही एक-दूसरे को न समझ पाएं, लेकिन परिवार के लिए प्यार को कभी खत्म नहीं होने देंगे।”
अभिनेता ने आगे कहा , “इस पुरस्कार के लिए धन्यवाद। मैं एनिमल की पूरी टीम, सभी कलाकारों और निर्देशक संदीप वांगा रेड्डी को धन्यवाद देना चाहता हूं। यह उनका दृढ़ विश्वास और जुनून था। हम सभी ने उनके जुनून का समर्थन किया और एनिमल को वह बना दिया जो वह बन गया है।”
कार्यक्रम की मेजबानी कर रहे अभिनेता जावेद जाफ़री ने अनिल कपूर की प्रशंसा करते हुए कहा कि कैसे इंडस्ट्री में लंबी यात्रा के बाद भी, अनिल हर प्रोजेक्ट को अपनी पहली फिल्म मानते हैं और उसी तरह का समर्पण और प्रयास करते हैं। जब जावेद ने मेगास्टार से पूछा कि क्या चीज उन्हें आगे बढ़ने में मदद करती है, तो अनिल कपूर ने कहा, “जो चीज मुझे आगे बढ़ाती है वह यह है कि मैं जो करता हूं, वह मुझे पसंद है।”

अंतरराष्ट्रीय विश्व मातृ भाषा दिवस पर संगोष्ठी संपन्न आवाज के जादूगर अमीन सयानी को दी गई श्रद्धांजलि

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                      विश्व हिन्दी अकादमी,मुम्बई और मालवा रंगमंच समिति की ओर से अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के मौके पर एक संगोष्ठी का आयोजन फ़नकार  स्टूडियो, अंधेरी पश्चिम, मुम्बई में किया गया। विषय था: ‘अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस और भाषाई आंदोलन’। कार्यक्रम के आरम्भ में जाने-माने उदघोषक अमीन सयानी के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। फिर सुरेश शर्मा जी ने विषय परिवर्तन किया और मोहम्मद वजीहउद्दीन, आनन्द कुमार श्रीवास्तव, दयानंद तिवारी, निलेश दवे, दिनेश लखनपाल, मनीषा उपाध्याय, कालीदास पाण्डेय, अमर सिंह आदि वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस मौके पर परवेज़ आलम और अवनीश कुमार ने काव्यपाठ, मंजरी देवरस ने लेखक मधु कांकरिया की कहानी का पाठ और रंजना पराशर ने गजल, जूनियर साधना सरगम ने भोजपुरी गीत तथा राज बिसेन ने बॉलीवुड गीत प्रस्तुत किये। इस कार्यक्रम का संचालन केशव राय ने किया और अंत में इरफान श्रीवास्तव ने सभी का आभार व्यक्त किया।
सर्वविदित है कि 21 फरवरी को सारे विश्व में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्रसंघ ने 21 फरवरी 2000 को हर वर्ष मातृभाषा दिवस मनाने का निर्णय किया था। आज अपने देश भारत में दर्जनों मातृभाषाओं में सुरक्षित भारतीय संस्कृति और संवेदनाओं को बचाने का प्रयास जरूरी है। इससे भारत की प्रमुख भाषा हिन्दी देश-विदेश में और समृद्ध होगी। इस संगोष्ठी में वक्ताओं ने यह बात जोर देकर कही कि, हमें अपनी मातृभाषा के साथ हिन्दी को सम्पर्क भाषा और राष्ट्रभाषा के रूप में सशक्त करने का भी प्रयास करना होगा।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

भावनाओं को छूने के लिए तैयार है लेखिका मेधा पुष्करणा की नई पुस्तक “वर्ड्स बिहाइंड बार्स”

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मुंबई (अनिल बेदाग) : मेधा पुष्करणा, ‘द ग्रेट ट्रायल’ की पुस्तक के लिए प्रशंसा पाने वाली लेखिका, अपनी नई पुस्तक ‘वर्ड्स बिहाइंड बार्स’ के माध्यम से भावनाओं को छूने के लिए तैयार हैं। इस कविता संग्रह में, उन्होंने भय, पीड़ा, आघात और धोखे के सृष्टि को सुंदरता से पकड़ा है, जो अदृश्य सलाखों द्वारा सीमित दुनिया को प्रदर्शित करती है।
मुख्य पात्र की गुप्त डायरी में लिखी गई कविताएँ, पिताजी और दादी के लिए भावनात्मक पत्रों के रूप में सामने आती हैं। प्रत्येक कविता एक विविध चित्र बनाती है, जिसमें भावनाएँ “बार्स” के पीछे महसूस की जाने वाली आत्मा को प्रकट करती हैं। एक में, लेखिका मित्रता की जटिलताओं से निकलती है, जबकि दूसरे में, वह दुश्मन बनती है।
“यह अलविदा नहीं है” और “केवल वे क्षण जिनके पास थे” जैसे शक्तिशाली छंद अत्यधिक भावनात्मक भार रखते हैं। बाद की कविता एक सार्वभौमिक विषय को दर्शाती है, जो आज कई घरों से परिचित कहानी बताती है – टूटे हुए रिश्तों के बीच क़ीमती समय की हानि।
“पिता ने बेटी को खो दिया
और बेटी ने पिता को खो दिया,
और दोनों ने वे क्षण खो दिए जो उनके पास थे।”
कविताओं के साथ लेखक के यूट्यूब चैनल पर दो वीडियो ट्रेलर भी उपलब्ध हैं। एक ट्रेलर कहता है, “यह अलविदा नहीं है”, एक प्यारी दादी के साथ अंतिम क्षणों को याद करते हुए। ट्रेलर छंदों की भावनात्मक गहराई को प्रदर्शित करते हुए पुस्तक के मर्म की एक झलक पेश करते हैं।
दादी को संबोधित एक और हृदय-विदारक कविता “वह” के चरित्र का परिचय देती है, एक सबसे अच्छी दोस्त जो अंत तक एक दृढ़ साथी बनी रहती है। इन छंदों में व्यक्त कच्ची भावनाएँ पाठकों को कथाकार के अंतरतम विचारों और भावनाओं के साथ गहरा और घनिष्ठ संबंध प्रदान करती हैं।
‘द ग्रेट ट्रायल’ सीरीज के बाद मेधा पुष्करणा ने एक बार फिर अपनी कहानी कहने की क्षमता का प्रदर्शन किया है। ‘वर्ड्स बिहाइंड बार्स’ के साथ, मेधा पाठकों को एक भावनात्मक रोलर-कोस्टर यात्रा पर ले जाती है जो एक गहरी व्यक्तिगत डायरी के लेंस के माध्यम से एक अद्वितीय परिप्रेक्ष्य पेश करती है।

गोवंश की मौत पर उसका अंतिम संस्कार करना अनिवार्य -मोहन यादव सरकार

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मोहन यादव सरकार शीघ्र ही एक प्रस्ताव तैयार करने जा रही है, जिसमें मप्र में अब गोवंश की मौत पर उसका अंतिम संस्कार करना अनिवार्य होगा और ऐसा नहीं करने पर गोपालकों पर सजा के साथ ही जुर्माने का प्रावधान भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अक्सर वर्षा काल में प्रमुख सड़कों और राजमार्गों पर गौ माता के बैठे रहने की बातें सामने आती हैं। इसी दौरान गौ माता दुर्घटनाओं की शिकार भी हो जाती हैं। ऐसी व्यवस्था आवश्यक है कि गौ माता सड़कों पर न दिखें। इनके लिए गौशालाओं के लिए राशि और मानदेय वृद्धि का निर्णय लिया जाएगा।
यह बात मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने गौशाला संचालकों की बैठक में कही। इस बैठक में पशुपालन मंत्री लखन पटेल भी थे। पटेल ने कहा कि वे शीघ्र ही गौशाला संचालकों को बैठक में आमंत्रित कर सुझाव प्राप्त करेंगे। मुख्यमंत्री ने इसी माह यह बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए।
नगरों के महापौर और अन्य जनप्रतिनिधि भी इस बैठक में शामिल किए जाएं, बैठक में गौ शालाओं के बेहतर संचालन, गौ पालकों द्वारा सहयोग प्राप्त करने और केंद्र सरकार से इस संबंध में अधो संरचनात्मक कार्यों के लिए राशि प्राप्त करने पर भी चर्चा हुई।
धार्मिक रस्में भी होंगी
मृत गौवंश का विधि-विधान से अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत गौशालाओं के पास मृत गौवंश की समाधि बनाई जाएगी। इस दौरान अंतिम विदाई देने के लिए धार्मिक रस्में भी अदा करना होंगी। यह देश का पहला राज्य है, जहां मृत गौवंश की समाधि बनाई जाएगी। दरअसल, पिछले करीब डेढ़ साल से गौशालाओं के पास बड़ी संख्या में गायों के कंकाल मिलने की खबरें मिली थीं। इससे सरकार की छवि खराब हो रही है।
गौरतलब है कि प्रदेश में 1758 गौशालाएं संचालित हो रही हैं, जिनमें दो लाख 76 हजार गौवंश हैं। करीब 1500 गौशालाएं निर्माणाधीन हैं। इनका निर्माण पूरा होने पर करीब डेढ़ लाख गौवंश गौशालाओं में पहुंच जाएगा। सडक़ों पर करीब साढ़े चार लाख गौवंश है।

स्मृति शेष – मौन हुई अमीन सयानी की मीठी और मोहक आवाज 

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(राकेश अचल-विभूति फीचर्स) अमीन सयानी हमारे जमाने के ऐसे अकेले रेडियो उद्घोषक थे जिन्हे देश उनकी शक्ल से नहीं बल्कि आवाज से पहचानता था। अमीन सयानी ने अपने जीवन के 91 साल की यात्रा में से लगभग 60 साल तक देश की जनता को अपनी आवाज के जादू से बांधे रखा। आज की पीढ़ी को शायद इस बात पर भरोसा नहीं होगा कि कोई व्यक्ति केवल अपनी आवाज की दम पर लोगों के दिलो-दिमाग पर छाया रह सकता है।
अमीन सयानी से मैं कभी मिला नहीं किन्तु मुझे और मेरे जैसे असंख्य लोगों को ये लगता है कि अमीन सयानी उनके परिवार के सदस्य हैं ।रह वह जमाना था जब देश में कोई टीवी चैनल नहीं था। रेडियो भी आजादी के पांच साल बाद आया था । तब अमीन सयानी ने रेडियो पर लोकप्रिय फिल्मी गीतों के कार्यक्रमों के जरिये देश को एक सूत्र में बांधा। सुबह से देर रात तक अमीन सयानी की आवाज हर घर में गूंजती थी। यानि अमीन सयानी की आवाज से ही आम आदमी की सुबह होती थी और वे ही अपनी आवाज से लोगों को सुलाते थे।
हरदिल अजीज अमीन सयानी समाचार वाचक नहीं थे किन्तु किसी भी लोकप्रिय समाचार वाचक से ज्यादा लोकप्रिय थे ।  उस जमाने में समाचार वाचक के रूप में देवकी नंदन पांडे और रेडियो कार्यक्रम उद्घोषक के रूप में अमीन सयानी जाने जाते थे।  वे देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की तरह अपनी आवाज के बूते पर जाने जाते थे।
आज हजारों टीवी चैनल हैं ,रेडियो हैं लेकिन आप शायद ही किसी एक उद्घोषक को उसकी आवाज से पहचानते हों। आज उद्घोषकों की भीड़ है,उस जमाने में अमीन सयानी जैसे गिने-चुने उद्घोषक थे। रेडियो पर ‘ भाइयों और बहनों ‘ के संबोधन के जरिए  पहचाने जाने वाले सयानी साहब ने करीब 54 हजार रेडियो कार्यक्रम किए और 19 हजार स्पाट्स या जिंगल्स किए। इनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में भी शामिल है।
बहुत कम लोगों को ये सौभाग्य हासिल होता है कि वे जिस मिट्टी में पैदा हुए हों ,उसी में उन्हें अंतिम साँस लेने का मौक़ा भी मिले । अमीन सयानी ऐसे ही खुशनसीब लोगों में से एक थे।  अमीन सयानी का जन्म 21 दिसंबर 1932 को मुंबई में हुआ था। देश में पहली रेडियो सेवा शुरू हुई तो अमीन सयानी एक उद्घोषक के रूप में उसमें भर्ती हो गए। सयानी साहब ने सन  1951 में रेडियो उद्घोषक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो मुंबई से की थी। अपनी आवाज के जादू से वे समां बांध देते थे। शुरुआत में उन्होंने अंग्रेजी कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। ऑल इंडिया रेडियो को लोकप्रिय बनाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। अमीन सयानी  ने कई फिल्मों में रेडियो अनाउंसर के तौर पर भी अपनी  उपस्थिति दर्ज कराई।
मुझे याद है कि वे तीन देवियां, भूत बंगला और बॉक्सर फिल्म में एक उद्घोषक के रूप में ही नजर आये थे।मुझे अच्छी तरह से याद है कि उन दिनों जब हम स्कूल में थे तब भी अमीन सयानी के शो ‘बिनाका गीतमाला ‘ को सुनने के लिए रेडिओ से चिपके रहते थे।  जिनके घरों पर रेडियो नहीं था वे बाजार में किसी पान  वाले या किसी चाय वाले के यहां बजने वाले रेडियो के आसपास जमा हो जाते थ।  कस्बों में तो बिनाका गीतमाला के फिल्मी गीत सुनने के लिए जाम की स्थिति बन जाती थी ।  उस जमाने में केवल बिनाका गीतमाला सुनने के लिए रेडियो खरीदने का चलन था और इसका श्रेय था अमीन सयानी साहब की आवाज को।
अच्छी और सुरीली आवाज के लोग प्राय: गायक बनना चाहते है।  
कहते हैं कि अमीन सयानी भी एक गायक बनना चाहते थे लेकिन गायक बनना उनके नसीब में नहीं था। उन्हें तो एक कामयाब रेडियो उद्घोषक बनने के लिए पैदा किया गया था। वे मानते थे कि अच्छी हिंदी बोलने के लिए थोड़ा-सा उर्दू का ज्ञान होना आवश्यक है। उनका परिवार बहुभाषी  था इसका लाभ उन्हें मिला ।  उनके यहां हिंदी,अंग्रेजी के अलावा उनकी अपनी मातृ भाषा उर्दू बोली,लिखी और पढ़ी जाती थी। अमीन सयानी को उनके भाई हामिद सयानी ने उन्हें रेडियो से जोड़ा था।10 साल तक वे इंग्लिश कार्यक्रम  का हिस्सा रहे।आजादी के बाद उन्होंने हिंदी की ओर रुख किया।
शो की बढ़ती लोकप्रियता और श्रोताओं की भारी मांग  पर इसे ‘काउंट डाउन ‘ शो बना दिया गया था। रेडियो पर अपने पसंदीदा गाने सुनने के लिए लोग वोट करते थे।  वोटिंग के आधार पर गाने चलाये जाते थे हालांकि, कई लोग अपना पसंदीदा गाना सुनने के लिए फर्जी वोटिंग भी करते थे।   अमीन सयानी का शो ‘बिनाका गीतमाला’ लगभग 42 साल तक चला।  इसके बाद इस शो में लोगों की दिलचस्पी कम होने लगी और इसे बंद कर दिया गया।
एक साक्षात्कार में खुद अमीन सयानी ने बताया था कि उनकीभाषा कई मरहलों, कई तूफ़ानों और पथरीली राहों से होकर यहां तक पहुँची थी। वे एक ऐसे घर में पैदा हुए थे  जहाँ कई भाषाओं का मिश्रण था। उनके पिताजी ने बचपन में कभी पारसी सीखी थी और मां गुजराती, अंग्रेज़ी और हिंदी बोलती थी।  खुद अमीन सयानी अपने  बचपन में गुजराती बोलते थे। उनकी  मां गांधीजी की शिष्या थी। गांधी जी ने उनकी माँ को हिंदी, गुजराती और उर्दू में पत्रिका निकालने की सलाह दी थी। उनकी  मां ने ये काम अमीन सयानी को सौंपा और इससे भी उन्हें अपनी भाषाओं के विस्तार में काफ़ी मदद मिली।
अमीन सयानी उन लोगों में से थे जिनकी नकल की जाती थी।  महिला उद्घोषकों में उनका मुकाबला अक्सर तबस्सुम से हुआ करता था। लेकिन ऐसा उन्होंने कभी स्वीकार नहीं किया। उन जैसे लोग सदी में कभी-कभी जन्म लेते हैं। मोहक आवाज और मधुर मुस्कान से भरे इस व्यक्तित्व को विनम्र श्रृद्धांजलि।(विभूति फीचर्स

लेखा परीक्षक के पद पर चयनित 51 अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री धामी ने वितरित किये नियुक्ति पत्र

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देहरादून,21 फरवरी, बुधवार, मुख्यमंत्री आवास परिसर में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में लोक सेवा आयोग के माध्यम से वित्त विभाग के अंतर्गत लेखा परीक्षक के पद पर चयनित 51 अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नियुक्ति पत्र प्रदान किये।
इस अवसर पर वित्त राज्य मंत्री प्रेम चन्द्र अग्रवाल भी उपस्थित थे !मुख्यमंत्री ने सभी नव नियुक्त कार्मिकों को शुभकामनायें देते हुए कहा कि अब वे उत्तराखंड शासन, प्रशासन का हिस्सा बनने जा रहे हैं। सभी सच्ची लगन और मेहनत से अपने कार्य को निपुणता से करेंगे, यह आप लोगों से अपेक्षा की जाती है । उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध हों, हमारा यह प्रयास धीरे-धीरे धरातल पर उतरने लगा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में अधिक से अधिक युवाओं को प्रदेश में ही रोजगार के और अधिक अवसर मिल पाएंगे।
मुख्यमंत्री धामी ने अपने सम्बोधन में नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले युवाओं से कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि आपको एक ऐसे प्रदेश में सेवा का मौका ईश्वर ने दिया है, जिसमें आपकी एवं राज्य की प्रगति की असीम संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि जो भी कार्य करें, उसे पूर्ण ईमानदारी और लगन से करें तथा पूरी कोशिश करें कि जो काम आज होना है, उसे आज ही सम्पन्न करें तथा उस काम को कभी भी कल के लिये मत छोड़ें एवं उत्तराखंड को श्रेष्ठ व नम्बर-एक राज्य बनाने में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के हजारों युवाओं में से आपको यह अवसर विशिष्ट कार्य के लिए प्रदान किया गया है। आपको अपने कार्यक्षेत्र में मानक तय करने होंगे। अनुशासित होकर ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का लक्ष्य बनाना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एक नई कार्य संस्कृति विकसित हुई है। हमारी सरकार प्रदेश के हर वर्ग के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध होकर निरंतर कार्य कर रही है और करती रहेगी तथा अपेक्षा की कि आप सभी उत्तराखण्ड को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के हमारे ‘विकल्प रहित संकल्प’ की सिद्धि में भी इसी प्रकार अपना सहयोग देते रहेंगे।
वित्त मंत्री प्रेम चन्द्र अग्रवाल द्वारा भी नियुक्ति पत्र पाने वाले सभी युवाओं को बधाई एवं शुभकामनायें दी गयी ।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्दवर्द्धन, सचिव सुरेन्द्र नारायण पाण्डेय, उप निदेशक वीरेश कुमार सिंह, सहायक निदेशक महीप कुमार सिंह, नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले युवा सहित सम्बन्धित पदाधिकारी एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

जानवरों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण के साथ प्रौद्योगिकी का सतर्क उपयोग जरूरी है : श्री भूपेन्द्र यादव

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केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव ने कहा है कि मानव-पशु टकराव की समस्या को जंगली जानवरों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण रखते हुए प्रौद्योगिकी के सतर्क उपयोग से हल किया जा सकता है।
आज सुबह बेंगलुरु में केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने पर मीडियाकर्मियों से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री यादव ने कहा, “हमें पता चला कि पशु-मानव टकराव जारी है, खासकर वायनाड और बांदीपुर तथा वायनाड की सीमा पर।”
श्री भूपेंद्र यादव ने कहा, “जारी मानव-पशु टकराव की समस्य़ा का हल करने के लिए, हमें जानवरों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रौद्योगिकी का सतर्कता से उपयोग करना चाहिए। केंद्र सरकार इस संबंध में सलाह जारी करती रही है।”
श्री यादव ने स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए कहा, ”मंत्रालय के अधिकारियों ने मुझे मौजूदा स्थिति से अवगत कराया है। मैंने स्थिति पर चर्चा करने के लिए डब्ल्यूआईआई के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, मंत्रालय के अधिकारियों और राज्य के अधिकारियों को बुलाया है। हम इसका ध्यान रखेंगे।”
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि वह पीड़ितों से मिलेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि केंद्र सरकार द्वारा जारी मुआवजा पीड़ितों तक सकारात्मक रूप से पहुंचे।

मध्यप्रदेश – सम्मान, समन्वय और सुशासन की सरकार

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मध्यप्रदेश की नई सरकार के कामकाज को दो महीने का समय पूरा हो गया है।  प्रदेश के मुखिया के तौर पर सत्ता संभालने के बाद से ही डॉ. मोहन यादव सम्मान, समन्वय और सुशासन के मामले में चर्चा में बने हुए हैं। 2 महीने के कम समय में ही मोहन यादव ने न सिर्फ प्रशासनिक कसावट करने के लिए कई बड़े निर्णय लिए हैंं बल्कि कई बार तत्काल निर्णय लेकर भी सभी को चौंकाया हैं। उन्होंने मोदी जी की गारंटी पूरे करने और संकल्प पत्र में किए गए वादों को पूरा करने में भी फुरती दिखाई है। उन्होंने प्रदेश में हुई घटनाओं-दुर्घटनाओं पर भी तुरंत रिएक्ट करते हुए तत्काल कदम उठाए हैं। गुना और हरदा में हुए दु:खद हादसों की सूचना मिलते ही हर संभव कार्यवाही करने के निर्देश दिए एवं स्वयं भी सारी परिस्थिति पर नजर बनाए रखी।
जनहित में लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय
डॉ. यादव भले ही पहली बार मुख्यमंत्री बने हैं लेकिन उनके पास जनहित में निर्णय लेने और जनता की जरूरतों को समझने की क्षमता है साथ ही लंबे राजनीतिक जीवन का अनुभव भी है। संघ से लेकर संगठन और सरकार में जनता की भलाई के लिए किस तरह काम किया जाना चाहिए यह डॉ. मोहन यादव को बखूबी आता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 60 दिनों में जनता की भलाई के लिए भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उन्होंने कार्यभार संभालते ही धार्मिक स्थलों पर लाउड स्पीकर और खुले में मांस बिक्री पर रोक लगा दी। इस फैसले को आम जन ने खूब सराहा। जनता के साथ कैसे समन्वय स्थापित करना है और कैसे उनकी समस्याओं का हल निकालना हैं, इसके लिए भी डॉ. यादव ने रूपरेखा तैयार कर ली है।
सुशासन और जनता के सम्मान से समझौता नहीं
डॉ. मोहन यादव उस तरह के मुख्यमंत्री हैं जो जनता के सम्मान और सुशासन से समझौता करने में विश्वास नहीं रखते। इसके कई उदाहरण उनके दो महीने के कार्यकाल में प्रदेश की जनता ने देखे हैं। कई ऐसे मामले सामने आए जिनमें अधिकारी आम जनता की तकलीफें सुनने के बदले उनसे अभद्रता करते नजर आए। ऐसे मामलों में मुख्यमंत्री ने तत्काल ही ऐसे अधिकारियों पर कार्यवाही करने का काम किया। सबसे ज्यादा चर्चा में रहा शाजापुर में ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल के दौरान ड्राइवर से कलेक्टर की अभद्रता का मामला। ऐसी ही कई और घटनाएं सामने आईं जैसे उमरिया में एसडीएम द्वारा महिला कर्मचारी से जूते के फीते बंधवाने, बांधवगढ़ एसडीएम की कार को ओवरटेक करने पर दो लोगों को पीटने, देवास में महिला तहसीलदार द्वारा किसान से अभद्र भाषा का प्रयोग करना। सभी मामलों में सीएम ने संवेदनशीलता दिखाई और अधिकारियों को साफ मैसेज दिया कि उनके लिए जनता का सम्मान और सुशासन का संकल्प सर्वोपरि है।
मोदी जी की गारंटी पूरी करने मिशन मोड में जुटे डॉ. मोहन यादव
विधानसभा चुनाव के पहले पीएम मोदी ने प्रदेश की जनता से जो वादे किए थे उन्हें पूरा करने के लिए मोहन यादव मिशन मोड में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने सभी विभागों और मंत्रियों को संकल्प पत्र – 2023 की घोषणाओं और वचनों को पूरा करने और उसे जमीन पर उतारने के लिए मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए हैं। मोदी जी की गारंटी वाली गाड़ी प्रदेश के गांव-गांव और शहर-शहर तक पहुंची है और लगभग 50 लाख लोगों को विभिन्न योजनाओं का फायदा पहुंचाया है। संकल्प पत्र की घोषणा को पूरा करते हुए मोहन यादव सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों का मानदेय 3 हजार रुपए से बढ़ाकर 4 हजार रुपए प्रति मानक बोरा कर प्रदेश के 35 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के चेहरे पर सम्मान की मुस्कान बिखेरी है।
पुराने मामले निपटाने में दिखाई सक्रियता
डॉ.मोहन यादव ने सीएम बनते ही पुराने मामलों की फाइलों को निपटाने में भी सक्रियता दिखाई। उन्होंने सबसे पहले इंदौर की प्रसिद्ध हुकुमचंद मिल के मजदूरों को उनकी बकाया राशि देने संबंधी फाइल को आगे बढ़ाया और राशि मिलने की प्रक्रिया को पूरा किया। किसानों की समृद्धि के लिए खेती में सिंचाई का पानी पहुँचे, इसके लिए लंबे समय से लंबित पार्वती कालीसिंध चम्बल लिंक परियोजना के करार पर राजस्थान के साथ एमओयू किया। इसके साथ ही राजधानी भोपाल में यातायात की सुगमता के लिए बीआरटीएस कॉरिडोर को हटाने संबंधी निर्णय लेकर क्रियान्वयन भी प्रारंभ कराया।
विकास के साथ संस्कृति का तालमेल
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव न सिर्फ राजनीति की दृष्टि से बल्कि प्रदेश
की सांस्कृतिक विरासतों को सहेजने के लिए भी कई अहम फैसले लिए हैं। अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के लिए मध्यप्रदेश में खास आयोजन हुए हैं। पूरे प्रदेश में अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर दीपावली मनाई गई ।उज्जैन से 5 लाख लड्डू प्रसाद के रूप में अयोध्या भी भेजे गए। इसके साथ ही चित्रकूट को अयोध्या के तर्ज पर विकसित करने का ऐलान भी मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने किया।
मध्यप्रदेश में डबल इंजन सरकार पर जनता ने चुनाव में जिस विश्वास के साथ वोट दिया था डॉ.मोहन यादव उसे पूरा करने में जुटे हैं। भले ही एमपी के मन में मोदी और मोदी के मन में एमपी हो लेकिन मोहन यादव प्रधानमंत्री की च्वाइस हैं। ऐसे में मोहन यादव भी पार्टी से लेकर केन्द्र के बड़े नेताओं और प्रदेश की जनता तक सभी के भरोसे पर खरे उतरने की पुरजोर कोशिश करते हुए नजर आ रहे हैं।(विनायक फीचर्स)