गौ तस्करी में सैगल की जमानत फिर नामंजूर
आसनसोल : गौ तस्करी मामले में आसनसोल जेल में बंद सैगल हुसैन को गुरुवार को आसनसोल सीबीआइ अदालत में पेश किया गया। सैगल हुसैन बीरभूम के तृकां नेता अनुब्रत मंडल का अंगरक्षक था।
सीबीआइ अदालत में बहस के बाद जज ने आरोपित सैगल हुसैन की जमानत अर्जी निरस्त कर उसे जेल भेज दिया और इस मामले की अगली तिथि 1 सितंबर 2022 को रखी है। इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से बहस करते हुए कोलकाता हाईकोर्ट से आये अनिर्बान गुहा ठाकुरता ने कहा कि 22 जून 2022 को जब सीबीआइ ने सैगल हुसैन के बीरभूम आवास में छापा मारा था तो उसके पत्नी का गहना भी जब्त किया था, जिसे वापस किया जाए।
उन्होंने कहा कि इस मामले सैगल हुसैन को 70 दिन जेल में हो गए। उनकी पत्नी एवं मां की तबीयत खराब है तथा सैगल की भी तबीयत खराब है। इसलिए सैगल हुसैन को जमानत दी जाए। सीबीआइ ने अनुब्रत मंडल से दो मोबाइल जब्त किया था, जिसकी फोरेंसिक जांच की मांग की गई। सीबीआइ के वकील राकेश कुमार ने कहा कि बीरभूम मुर्शीदाबाद से लेकर बांग्लादेश सीमा तक सैगल हुसैन ने गौ तस्करी में एनामुल हक से करोड़ों रुपये कमाए एवं उसका बड़ा हिस्सा अनुब्रत मंडल तथा अधिकारियों तक पहुंचता था।
‘देस मेरे देस’ गीत को बीस साल बाद टिप्स म्यूजिक ने किया प्रस्तुत
मुम्बई। टिप्स म्यूजिक ने भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, देशभक्ति गीत “देस मेरे देस” को नये रूप में पेश किया है। साल 2002 में अजय देवगन की फिल्म “द लीजेंड ऑफ भगत सिंह” में “देस मेरे देस” गीत था और आज फिर से 20 साल बाद हम उसी गीत को नए रूप मैं देख पाएंगे। देशभक्ति गीत के इतिहास में पहली बार हम नए युग के संगीत की दृष्टि से देशभक्ति गीत को देखेंगे।
बंदिश और दीक्षा तूर द्वारा गाया गया, हुमा सैय्यद ने रैप के लिए अपने अद्भुत स्वर दिए हैं। संगीत सिड पॉल का है और गीत ऋषि पाठक ने लिखे हैं।
इस गीत को बंदिश और दीक्षा टूर ने अपनी मदुर आवाज़ दी है। रैप के बोल हुमा सय्यद ने आपने मजेदार अंदाज़ मैं दिया है। सिड पॉल ने संगीत और ऋषि पाठक ने गीत को लिखा है।
“देस मेरे देस” एक ऐसा गीत है जो भारत के लिए अपने अटूट प्रेम को दर्शाता है। इस गीत में भारत के प्रति पहचान, प्रेम और एकता के विषय में बताया गया है। यह एक भावुकतापूर्ण गीत है, लेकिन इस गीत में उन लोगों के अनगिनत बलिदानों के बारे में सभी को याद दिलाते हैं जिन्होंने इस देश की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, जिसपे हर भारतीय को अपनी राष्ट्रीयता पर गर्व करवाया और सैनिकों द्वारा किए गए बलिदान श्रोताओं के रोंगटे खड़े कर देते है।
बंदिश कहते हैं, “यह पहली बार है के किसी देशभक्ति गीत को रैप बनाया गया है। हालांकि मूल गीत हमेशा विशेष होगा, पर ये गीत भी देशभक्ति की भावनाओं को जगाता है और देश के सैनिकों द्वारा किए गए बलिदान को दर्शाता है।
हुमा सैय्यद कहती हैं, ”इस तरह के काफी देशभक्ति गीत बनाए गए हैं पर किसी ने भी इस गीत को रैप के अंदाज़ में बनाने की कल्पना भी नहीं की होगी। “देस मेरे देस” इस गीत में हमारी एक एक शैली जुड़ी हुई है और हम इस गीत को अपने दिल और आत्मा से जुड़े रखते हैं।
सिड पॉल कहते हैं,”हम दो साल बाद अपने स्वतंत्रता दिवस को शारीरिक रूप से वैसे ही मना रहे हैं जैसे हम इसे कोविड के पहले मनाते थे। हमारे राष्ट्र कई मुद्दों से जूझ रहे होंगे पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, स्वतंत्रता का जश्न मनाने के लिए सभी लोग एक साथ खड़े होते हैं।
ऋषि पाठक कहते हैं, “इस गीत में हमने रैप के माध्यम से लोगों को प्रेरित करने की और संदेश देने की कोशिश की है। इस रैप के शब्दों से हम लोगों के दिलों की गहराई में दबी भावनाओं को प्रज्वलित कर सकते है। “देस मेरे देस” के इस गीत से हमारा उद्देश्य लोगों को एकता का संदेश देना था।
संवाद लेखक गोपाल राम की 150वीं फिल्म है ‘कार्तिकेय 2’, फिल्म हो गई ब्लॉकबस्टर
मुम्बई। हाल ही में ‘कार्तिकेय 2’ फिल्म रिलीज हुई और बहुत बड़ी हिट भी हो गई है। दर्शकों ने इस फिल्म को बहुत पसंद किया है। इस फिल्म के हिंदी संवाद गोपाल राम ने लिखे हैं। दर्शक सिनेमा हाल में संवाद का भरपूर आनंद उठा रहे हैं।
गोपाल राम ने काफी दक्षिण भारतीय फिल्मों के संवाद लिखे हैं। इनमें अपरिचित, इंद्रा द टाइगर, मानिकबाशा, पुली, गीता गोविंदा, स्पाइडर, किलर आदि फिल्में प्रमुख हैं।
रामगोपाल वर्मा की पहली फिल्म ‘क्षणम क्षणम’ जो हिंदी में ‘हैरान’ नाम से रिलीज हुई थी, वह बहुत बड़ी हिट साबित हुई थी। गोपाल राम को करीब सात भाषाएं आती है ये बखूबी से हिंदी संवाद का लेखन करते हैं।
कार्तिकेय 2 के संवाद बहुत सरल हैं और दर्शकों को बहुत पसंद आ रहे हैं।
गोपाल राम ने तीन फिल्में ‘अनोखा प्रेम युद्ध, कॉलेज की जंग और ओह माई गॉड बालाजी’ का निर्देशन भी किया है जिसका शीघ्र ही जी टीवी पर प्रदर्शन होने वाला है।
गोपाल राम दो और फिल्मों के संवाद लिख रहे हैं जिनका काम जोरों में चल रहा है और शीघ्र ही प्रदर्शित होने वाली है। इस फिल्म को हिंदी दर्शकों के दिलों तक लाने के लिए गोपाल राम की कलम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आपको ये बता दें कि गोपाल राम को उनके लेखन के लिए दादा साहेब फाल्के एकेडमी अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है।
गोपाल राम भविष्य में भी अच्छी फिल्मों का लेखन करके दर्शकों का दिल जीतेंगे हम उम्मीद करते हैं।
– गायत्री साहू
पिनगवां पुलिस की रेड से गौ-तस्करों में हड़कंप, दो गिरफ्तार, 3 गौवंश छुड़ाए, 50 किलो मांस बरामद
पिनगवां पुलिस की रेड से गौ-तस्करों में हड़कंप, दो गिरफ्तार, 3 गौवंश छुड़ाए, 50 किलो मांस बरामद
नूंह/मेवात. पिनगवां थाना क्षेत्र के रिठट गांव में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. पुलिस ने गौ रक्षा दल के सदस्यों की सूचना पर दबिश देकर 3 गोवंश और तकरीबन 50 किलो गोमांस के अलावा दो बाइक बरामद की हैं. इस कार्रवाई में इनामुल हक व फरमान नाम के दो आरोपियों को भी पकड़ा गया है. पिनगवां पुलिस ने इस कार्रवाई के बाद 5 लोगों के खिलाफ सीएस एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है. पकड़े गए लोगों से पूछताछ शुरू कर दी गई है.
पिनगवां थाना प्रभारी सतबीर सिंह ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि पुलिस व गौ रक्षा दल के सदस्यों ने मिलकर रिठट गांव में छापेमारी की थी. सुबह करीब 4- 5 बजे की गई इस छापेमारी में जफरू के मकान से तीन जिंदा गाय व करीब 50 किलो गोमांस बरामद करने के अलावा दो बाइक भी वहां से पुलिस ने कब्जे में ली हैं. उन्होंने बताया कि इनामुल हक तथा फरमान नाम के व्यक्ति को दबोच लिया गया है. बाकी तीन आरोपी भागने में कामयाब हो गए हैं.
गौरक्षा दल की सूचना पर पुलिस ने दी दबिश, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ
उन्होंने कहा कि पकड़े गए आरोपियों को अदालत में पेश करने की तैयारी की जा रही है. बाकि बचे आरोपियों को भी पुलिस जल्द ही दबोच लेगी. खबर मिल रही है कि गौ रक्षा दल के सदस्यों की सूचना के बाद पुलिस ने तकरीबन 8 – 9 गाड़ियों के साथ सुबह करीब 4 – 5 बजे रिठट गांव में सूचना के आधार पर दबिश दी. जिसके चलते यह कामयाबी हाथ लगी.
गौ हत्या को रोकने पुलिस एक्टिव
एसएचओ ने बताया है कि क्षेत्र में गौ हत्या को रोकने के लिए समय -समय पर लोगों से बैठक कर बातचीत की जाती है. क्षेत्र में गौ हत्या को किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
कवि लेखक अनुवादक डॉ गुलाब चंद पटेल जी का हिंदी काव्य संग्रह “आषाढ़ के बादल “पब्लिश हुआ
गांधीनगर गुजरात के हिन्दी गुजराती कवि लेखक अनुवादक और नशा मुक्ति अभियान प्रणेता ब्रेस्ट कैंसर अवेर्नेस प्रोग्राम आयोजक तथा आत्म हत्या निवारण संस्था गांधीनगर अध्यक्ष महात्मा गांधी साहित्य मंच गांधीनगर, उपाध्यक्ष इंडियन लायंस गांधीनगर स्वर्णिम क्लब के डॉ गुलाब चंद पटेल जी का हिंदी भाषा मे “आषाढ़ के बादल” हिंदी काव्य संग्रह पब्लिश हुआ है.
इस पुस्तक में कुल मिलाकर 97 रचनाए प्रस्तुत की गयी है, किताब आई एस बी एन नमबर के साथ नोशन प्रेस सिंगापुर मलेशिया प्रकाशक द्वारा साहित्य धरा अकादमी झारखंड के सहयोग से प्रकाशित हुई है. इस पुस्तक एम ए जॉन और फ्लॉप कर्ट पर उपलब्ध होगी.
डॉ गुलाब चंद पटेल अध्यक्ष ऊमिया गौ शाला एवं गुरुकुल गांधीनगर और अखिल भारतीय गुरुकुल एवं अनुसंधान संस्थान न्यू दिल्ली के अध्यक्ष पद पर नियुक्त हे.डॉ पटेल राष्ट्र भाषा हिंदी प्रचार समिति अहमदाबाद के कार्यकारिणी सदस्य है. सामयिक परिवेश हिंदी पत्रिका दिल्ली के राज्य प्रभारी गुजरात प्रदेश के पद पर नियुक्त किया गया है. कवि निराला हिंदी साहित्य अकादमी नागदा जंक्शन मध्य प्रदेश के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्त है. वे साहित्यकार एवं सामाजिक कार्य कर के रूप में 350 से अधिक स्कूल एवं कॉलेज में व्यसन मुक्ति प्रोग्राम कर चुके हैं. आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इन्हें महात्मा गांधी जी की जन्म भूमि पर सम्मानित किया गया है इसके अलावा सान्दीपनि आश्रम के पुज्य गुरु जी अंतरराष्ट्रीय कथाकार श्री रमेश भाई ओझा जी ने गुरु पूर्णिमा के दिन शिक्षको के सन्मान कार्यक्रम में इन्हें भी सम्मानित किया गया है.
इनकी यह सातवीं किताब है. इनकी किताब “वैश्विक परिप्रेक्ष्य में गांधीजी और अन्य शोध” को हरियाणा से प्रति योगिता मे दूसरा क्रम प्राप्त हुआ है. इन्हें रुपये 1500 की धन राशि का भुगतान चेक द्वारा किया गया है. ट्रॉफी और सम्मान पत्र और चेक कूरियर के जरिए उन्हें प्राप्त हुआ है
डॉ गुलाब चंद पटेल जी को साहित्यकार सम्मान एवं पुरस्कार 400 से अधिक और सामाजिक कार्य के लिए एक्सा सो से अधिक सम्मान एवं पुरस्कार राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त हुआ है.
डॉ पटेल जी को खम्भोंलज साहित्य सेवा संस्था आणंद के अध्यक्ष श्री शैलेष वाणिया जी ने अभिनंदन प्रदान किया गया है
डॉ गुलाब चंद पटेल अध्यक्ष महात्मा गांधी साहित्य मंच गांधीनगर Mo 8849794377
नित्यानंद बाबा ज्ञान की गंगा
ज्ञान की गंगा – गायत्री साहू
महाराष्ट्र राज्य में मुम्बई के समीप के थाने जिले में गणेशपुरी नाम का एक गाँव है। जहाँ नित्यानंद महाराज का भव्य मंदिर है। इस स्थान पर देश विदेश से लोग दर्शन करने हेतु आते हैं। गणेशपुरी में श्री भीमेश्वर सद्गुरु नित्यानंद संस्थान द्वारा संचालित विशाल आध्यात्मिक केंद्र और गुरुदेव सिद्धपीठ है। यह स्थान सिद्धयोग के स्वामी श्री नित्यानंद और उनके शिष्य स्वामी श्री मुक्तानंद की समाधियों के लिए प्रसिद्ध है। स्वामी नित्यानंद ने 1936 से 1961 तक गणेशपुरी में ही रहकर तप, योग और मनन किया था।
स्वामी मुक्तानंद यहां सन 1956 में आए थे। 70 के दशक में 75 एकड़ क्षेत्र में बना यहां का विशाल सिद्धपीठ तथा गणेशपुरी उपवन के किनारे संगमरमर से निर्मित विशाल श्री भीमेश्वर महादेव मंदिर उन्हीं द्वारा स्थापित किया हुआ है। ‘गणेशपुरी’ नाम पड़ने के पीछे लोकोक्ति यह है कि त्रेता काल में महर्षि वशिष्ठ ने यहां गणेशजी की प्रतिमा की स्थापना करके भीषण तपस्या भी की थी। यह स्थान भगवान राम और परशुराम के चरण पड़ने से भी पवित्र माना जाता है। नाथों की धरती होने के कारण यह संपूर्ण क्षेत्र ‘नाथ भूमि’ के नाम से भी प्रसिद्ध है।
गणेशपुरी में गुरुदेव सिद्धपीठ के भव्य हॉल में गुरुदेव की भव्य प्रतिमा के समक्ष भक्तगणों को मनन और ध्यान करते देखा जा सकता है। कैलास निवास में स्वामी नित्यानंद सात वर्षों तक रहे और बैंगलोरवाला में उन्होंने 1961 में देह त्याग किया था। इसके अलावा स्वामी मुक्तानंद, शालिग्राम स्वामी, गोविंद स्वामी और दिगंबर स्वामी की समाधियां यहां के अन्य आकर्षण केंद्र हैं। यहां अतिथिगृह और भोजनशाला की व्यवस्था भी है। गुरु पूर्णिमा गणेशपुरी का सबसे प्रमुख उत्सव है।
गणेशपुरी परिसर और आस-पास दर्शन के लिए रामेश्वर महादेव, भद्रकाली, हनुमान, गणेश, जलाराम धाम, साई धाम और ग्रामदेवी के कई मंदिर और मिलेंगे।
एक लोक कथा के अनुसार, केरल के तुनेही गांव में एक तूफानी रात में चतु नायर नाम के मजदूर को एक नवजात मिला। इस शिशु के पास में एक कोबरा फन फैलाये हुए शिशु की रक्षा कर रहा था। चतु नायर और उन्नी अम्मा ने अपने नियोक्ता और स्थानीय वकील ईश्वर अय्यर के पास बच्चे को लाया और नवजात के बारे में बताया। फिर दोनों ने मिलकर बच्चे को पाला और उसका नाम रामन रखा। बाल्यकाल से ही यह बच्चा अनोखी प्रतिभा का धनी था। लोगों ने भी उनका चमत्कार देखा।

जब ईश्वर अय्यर अपने अंतिम दिनों के करीब पहुंचे, उन्होंने रामन से भगवान सूर्य नारायण के दर्शन पाने का अनुरोध किया। उनकी यह इच्छा पूरी हुई और जब अय्यर ने इस घटना का अनुभव किया, तो वह अभिभूत हो गया और रामन से कहा कि आपने मुझे सर्वोच्च आनंद दिया है, इसलिए आप मेरे नित्यानंद हैं। नित्यानंद जब युवा हुए तो योग और तपस्या में लीन हो गए। उन्होंने हिमालय, वाराणसी, कोलंबो, रामेश्वरम, उडिपी, मंगलौर आदि की यात्रा की। वे जहां भी गए वहाँ लोगों को दिव्य उपचार के माध्यम से बीमारी, दुख और गरीबी से मुक्त किया। जब तक श्री नित्यानंद कान्हागढ़ पहुंचे, तब तक उनकी प्रसिद्धि ने अनगिनत भक्तों को आकर्षित किया और अब उनकी कीर्ति दूर-दूर तक फैल चुकी थी।
कान्हांगड और पास के गुरुवन में, उन्होंने निवास और ध्यान के लिए गुफाओं की एक बस्ती की स्थापना की। उन्होंने पेड़ भी लगाए और एक धारा का निर्माण किया, जिसे बाद में पापनाशिनी गंगा नाम दिया गया जो आज भी बह रही है।
उनकी यात्रा का अंतिम चरण उन्हें मुंबई ले आया जहां लोगों ने उनके उपचार क्रिया और चमत्कार को देखा। 1937 में, वह तानसा घाटी से अकोली और वज्रेश्वरी के लिए रवाना हुए। जहाँ उन्होंने स्कूलों, विश्राम गृहों, चिकित्सालयों की स्थापना की और मंदिरों का जीर्णोद्धार किया और ध्यान पर जोर देते हुए अपना उपदेश जारी रखा।
इसके तुरंत बाद वे पास के गणेशपुरी आए और प्राचीन श्री भीमेश्वर महादेव मंदिर के पास बस गए। आध्यात्मिक भौतिक उत्थान की तलाश में आने वाले लोगों के लिए आस-पास के गांवों और दूर-दूर से हजारों आगंतुक इस नए निवास में आते थे, जो धीरे-धीरे तीर्थ यात्रा के एक शक्तिशाली केंद्र के रूप में विकसित हो गया है।
पशुओं में लम्पि बीमारी (एल० एस० डी० ) के रोकथाम हेतु उत्तर प्रदेश पशुचिकित्सा विज्ञानं विश्वविद्यालय द्वारा पशुपालकहित में जारी अनुदेश
पशुओं में लम्पि बीमारी (एल० एस० डी० ) के रोकथाम हेतु उत्तर प्रदेश पशुचिकित्सा विज्ञानं विश्वविद्यालय द्वारा पशुपालकहित में जारी अनुदेश
लम्पि बीमारी गाय, भैस में होने वाला एक संकामक रोग है । राजस्थान, हरयाणा, पंजाब, उत्तराखंड राज्यों में मवेशियों में लंपी बीमारी का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिससे भारी तादाद में पशु बीमारी की चपेट में आ रहे हैं । इस बीमारी से मवेशियों की सभी उम्र और नस्लें प्रभावित होती हैं, लेकिन विशेष रूप से कम उमर के दुधारू मवेशी अधिक प्रभावित होती हैं। इस रोग से पशुधन उत्पादन में भारी कमी आती है । ऐसे में यह अनुदेश प्रदेश के पशुपालकों को, समय रहते बीमारी की पहचान एवं बचने के उपायों से अवगत कराने में सहायक सिद्ध होगी।
लक्षण
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तेज बुखार (41 डिग्री सेल्सियस ) ।
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आँख एवं नाक से पानी गिरना ।
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पैरों में सूजन।
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वायरल संक्रमण के 7 से 19 दिनों के बाद पूरे शरीर में , कठोर, चपटे गांठ उभर आना।
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गाभिन पशुओं के गर्भपात।
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दुधारू गायों में दुग्ध उत्पादन काफी कम।
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पशुओं में वजन घटना , शारीरिक कमजोरी।
रोग संचरण
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रोग के विषाणु बीमार पशु के लार, नासिका स्राव, दूध, वीर्य में भारी मात्रा में पाए जाते हैं।
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स्वस्थ पशु के बीमार पशु के सीधे संपर्क में आने से।
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रोग ग्रसित पशु के स्राव से संदूषित चारा पानी खाने से ।
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बछड़ों में रोग ग्रसित पशु के दूध से।
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मच्छरों, काटने वाली मक्खियों, चमोकन/किलनी आदि जैसे खून चूसने वाली कीड़ोंके काटने से।
उपचार
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यह एक विषाणुजनित रोग है जिसका कोई उचित अनुशंसित उपचार नहीं है। चिकित्सक के परामर्श से लक्षणात्मक उपचार किया जा सकता है।
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बुखार की स्थिति में ज्वरनाशक का प्रयोग ।
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सूजन एवं चर्म रोग की स्थिति में पशु चिकित्सक की सलाह से दवाईयां तथा द्वितीयक जीवाणु संक्रमण को रोकने हेतु 3-5 दिनों तक एन्टीबायोटिक दवाईयों का प्रयोग ।
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घावों को मक्खियों से बचाने हेतु नीम की पत्ती, मेहंदी पत्ती, लहसुन, हल्दी पाउडर को नारियल या सीसेम तेल में लेह बनाकर घाओं पर लेप का प्रयोग ।
निवारण :
बीमारी की रोकथाम के लिए टीकाकरण सबसे अच्छा तरीका है। इंडियन इम्युनोलॉजिकल अथवा हेस्टर बायोसाइंस द्वारा निर्मित गॉटपॉक्स टिका पशुओं को बीमारी से बचाने में अत्यंत कारगर है। इस टिके को ३-५ मी ली मात्रा चमड़े में दिए जाने से एक वर्ष तक प्रभावी प्रतिरक्षा प्रदान करता है।
रोग प्रकोप के समय क्या करें, क्या नहीं करें ?
क्या करें,
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निकटतम सरकारी पशुचिकित्सा अधिकारी को सूचित करें।
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प्रभावित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग करें ।
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प्रभावित पशुओं की आवाजाही को प्रतिबंधित करें ।
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रक्त-आश्रित की कीट के काटने से बचने के लिए पशुओं के शरीर पर कीट निवारक का प्रयोग करें.
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स्वस्थ पशुओं को दाना चारा देने दूध निकलने के बाद ही रोग-ग्रसित पशुओं को देखभाल करें।
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बीमारी को फैलने से बचाने के लिए परिवेश और पशु खलिहान की फिनोल (2%/15 मिनट), सोडियम हाइपोक्लोराइट (2–3%), आयोडीन यौगिकों (1:33), चतुर्धातुक अमोनियम यौगिकों (0.5%) और ईथर (20%) इत्यादि का छिड़काव कर उचित कीटाणुशोधन करें।
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रोग प्रकोप फैलने पर पशु मेला एवं प्रदर्शनी पर रोक लगा देनी चाहिए ।
क्या नहीं करें
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सामुहिक चराई के लिए अपने पशुओं को नहीं भेजें ।
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पशुओं को पानी पीने के लिए आम स्रोत जैसेकि तालाब, धाराओं, नदियों से सीधे उपयोग नहीं करना चाहिए, इससे बीमारी फैल सकती है |
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प्रभावित क्षेत्र से पशुओं की खरीदी न करें।
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मृत पशुओं के शव को खुले में न फेंके ।
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लंपि रोग का विषाणु मनुष्यों को प्रभावित नहीं करता अतः रोगी पशु के दूध को उबाल कर पीने या रोगी पशु के संपर्क में आने से मनुष्यों में रोग फैलने की कोई आशंका नहीं है।अवांछित अफवाहों से खुद को बचाएं।
वरिष्ठ फिल्म पत्रकार काली दास पाण्डेय झारखंड में सम्मानित
15 अगस्त 2022 को आज़ादी के 75वें वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रीय स्तर पर संकल्पित आयोजन ‘अमृत महोत्सव’ के अवसर पर स्थानीय स्तर पर हजारीबाग बार एसोसिएशन के द्वारा आयोजित भव्य समारोह में अधिवक्ता संघ के तमाम सदस्यों व हजारीबाग व्यवहार न्यायालय के सभी न्यायिक पदाधिकारियों की मौजूदगी में, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री राजकुमार राजू द्वारा अधिवक्ता काली दास पाण्डेय को स्मृति चिन्ह व अंगवस्त्र दे कर सम्मानित किया।
हजारीबाग बार एसोसिएशन के तरफ से यह सम्मान उन्हें वकालत पेशे के अलावा सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यों व अतिरिक्त फिल्मी गतिविधियों के लिए दिया गया। विदित हो कि इस वर्ष 26 मार्च को मालाबार हिल, वालकेश्वर रोड मुम्बई स्थित राज भवन में आयोजित राष्ट्रीय सेवा सम्मान समारोह में वरिष्ठ फिल्म पत्रकार/ अधिवक्ता काली दास पाण्डेय को महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी ने ‘राष्ट्रीय सेवा सम्मान’ अवार्ड दे कर सम्मानित किया था।
4 मई को अंधेरी (वेस्ट) मुम्बई स्थित मेयर हॉल में कृष्णा चौहान फाउंडेशन (केसीएफ) के द्वारा आयोजित भव्य समारोह में वरिष्ठ फिल्म पत्रकार काली दास पाण्डेय को लीजेंड दादा साहेब फाल्के अवार्ड दे कर सम्मानित किया जा चुका है। इसके साथ ही16 मई को अंधेरी (वेस्ट)मुम्बई स्थित मुक्ति फाउंडेशन के प्रेक्षागृह में आयोजित सिनेमा आजतक एचीवर्स अवार्ड 2022 समारोह में वरिष्ठ फिल्म पत्रकार सह अधिवक्ता काली दास पाण्डेय को फिल्म निर्माता निर्देशक सुजॉय मुखर्जी (अभिनेता स्व जॉय मुखर्जी के पुत्र) के द्वारा बेस्ट जर्नलिस्ट अवार्ड से नवाजा गया था।
यहाँ उल्लेखनीय है कि बॉलीवुड के चर्चित फिल्म पत्रकार काली दास पाण्डेय ने अपना करियर 1981 में स्वतंत्र पत्रकार के रूप में जमशेदपुर (झारखंड) से प्रकाशित हिंदी दैनिक समाचार पत्र ‘उदित वाणी’ से किया था। 80 के दशक से वर्तमान समय तक बतौर फिल्म पत्रकार बॉलीवुड में सक्रियता जारी है । हजारीबाग (झारखंड) बार एसोसिएशन की सदस्यता ग्रहण कर 1992 से वकालत के पेशे में क्रियाशील काली दास पाण्डेय को बॉलीवुड में फिल्म निर्माता व निर्देशक रमेश सिप्पी की कालजयी फिल्म-‘शोले’ के इतिहास के साथ एक नया अध्याय जोड़ने वाले फिल्म पत्रकार के रूप में जाना जाता है।
70 के दशक की सर्वाधिक कमाई करने वाली फिल्म के रूप में ‘शोले’ की चर्चा आज के दौर में भी होते रहती है। 3 घंटा 24 मिनट की म्यूजिकल/कॉमेडी युक्त एक्शन फिल्म ‘शोले’ सिर्फ रमेश सिप्पी की नहीं, बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा की अबतक की सदाबहार फिल्म है। 15 अगस्त 1975 को प्रदर्शित इस फिल्म की सफलता का श्रेय इसकी पटकथा और पार्श्व संगीत को ही दिया जाता है। आसमान में गोलियों की गूंजती आवाज, झूले के चरचराहट, डाकुओं की फिल्म होते हुए भी नई कहानी के जरिये मध्यमवर्गीय जीवन के नए पहलू उद्घाटित हुए थे , इसी सबने मिलकर ‘शोले’ को महान बनाया।
वर्ष 2005 में 50वें फिल्मफेयर समारोह में फिल्म को पिछले 50 साल की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का दर्जा दिया गया था। साथ ही ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट ने वर्ष 2002 की वोटिंग में शीर्ष 10 भारतीय फिल्मों की सूची में ‘शोले’ को प्रथम स्थान दिया था। ‘शोले’ के प्रदर्शित होते ही फिल्म के संवाद और कुछ साइलेंट पात्र की जीने वाले कलाकार बेहद लोकप्रिय हो गए थे उनमें से चरित्र अभिनेता मेजर आनंद का नाम सर्वोपरि है। वैसे अभिनेता मेजर आनंद अब इस दुनिया में नहीं हैं, उन्होंने 3 सितंबर 2020 को इस दुनियां को अलविदा कहा। फौज की नौकरी छोड़ कर 70 के दशक में ही रामसे ग्रुप की फिल्म-‘अंधेरा’ से फिल्मी कैरियर शुरू करने वाले अभिनेता मेजर आनंद ने अपने जीवन काल में ‘शोले’ समेत 75 फिल्मों में काम में काम किया।
अभिनेता मेजर आनंद के अभिनय कौशल और लोकप्रियता को देखते हुए बी एफ सी पब्लिकेशन्स (लखनऊ) के द्वारा अभिनेता मेजर आनंद की बायोग्राफी प्रकाशित की गई है । इसके लेखक काली दास पाण्डेय हैं। इसके साथ ही रमेश सिप्पी की फिल्म-‘शोले’ के इतिहास के साथ एक नया अध्याय जुड़ गया है। इसके पूर्व ‘शोले’ के नामचीन कलाकारों को छोड़ कर फिल्म से जुड़े किसी भी कैरेक्टर आर्टिस्ट की बायोग्राफी अब तक प्रकाशित नहीं हुई थी। फिल्म पत्रकार काली दास पाण्डेय द्वारा लिखी गई बायोग्राफी ‘मेजर आनंद- ख़्वाबों की मंज़िल का नायक’ (सफरनामा फौज से फिल्मों तक) की खास बात यह है कि इसमें अभिनेता मेजर आनंद के फिल्मी कैरियर से जुड़े अनछुए पहलुओं को शामिल किया गया है। साथ ही साथ फिल्म विधा में रुचि रखने वाले नवोदित कलाकारों व फिल्म निर्माताओं के लिए इस बायोग्राफी में फिल्म डायरेक्टरी का भी समावेश किया गया है। पाठकों के लिए यह बायोग्राफी काफी उपयोगी साबित होगी। बायोग्राफी का किंडल (ई बुक) संस्करण और पेपर बैक संस्करण अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में अर्जुन देशपांडे ने जेनेरिक आधार के तहत 51 नई दवाओं को लॉन्च किया
जेनेरिक दवाइयों के लॉन्च के अवसर पर खली और गुलशन ग्रोवर की भी उपस्थिति रही
ठाणे। भारत में हेल्थकेयर को और भी अधिक किफ़ायती बनाने के लक्ष्य के एक कदम और नज़दीक पहुँचते हुए जेनेरिक आधार के संस्थापक व सीईओ अर्जुन देशपांडे ने भारत में उपभोक्ताओं के लिए 51 नई दवाएँ शुरू करने की घोषणा की। यह दवाएँ अब लोगों को 80% कम कीमत पर उपलब्ध होंगी। इन उत्पादों के लॉन्च की घोषणा के अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर द ग्रेट खली और अभिनेता गुलशन ग्रोवर उपस्थित रहे।

भारत के अग्रणी फार्मा स्टार्टअप, जेनेरिक आधार ने पुराने फ़ार्मा जगत के समकक्ष एक नया इकोसिस्टम खड़ा कर दिया है। 16 वर्ष की अल्पायु में अर्जुन द्वारा स्थापित यह कंपनी अपने फ्रैंचाईज़ी स्टोर्स के माध्यम से लोगों को किफ़ायती दामों पर उच्च-गुणवत्ता वाली दवाएँ उपलब्ध कराने के लिए सीधे विनिर्माताओं के साथ काम करते हुए फ़ार्मा सेक्टर में नई क्रान्ति लेकर आई है।
जेनेरिक आधार एक ऐसे समय पर सीधे एंड-यूज़र्स तक उच्च गुणवत्ता वाली दवाएँ पहुंचाने के काम कर रही है जब लोग कोविड महामारी और बढ़ती महंगाई की दोहरी मार झेल रहे हैं। ऐसे में जेनेरिक आधार ने अपने ब्रांडेड प्रतिपक्षियों की तुलना में दवाओं की कीमत को 80% तक कम रखा है। उदाहरण के तौर पर आमतौर पर ₹13 रुपए में मिलने वाली दवा फ्लुकोनाज़ोल 150 mg का दाम जेनेरिक आधार द्वारा मात्र ₹4.53 ही रखा गया है। ₹195 में मिलनेवाली नॉर्ट्रिपटाइलीन 10mg + मिथाइलकोबालामीन 1500mcg + प्रीगाबालीन 75mg की कीमत जेनेरिक आधार द्वारा ₹38.85 के लगभग (80% कम कीमत पर) ही रखी गई है।
इनका फार्मेसी-ऐग्रिगेटर फ़्रैंचाईज़ी मॉडल उपभोक्ताओं को जेनेरिक आधार ऐप के माध्यम से दवाएँ ऑर्डर करने में समर्थ बनाता है जो उन तक दो घंटों में ही डिलीवर कर दी जाती हैं। इसके अलावा भौतिक रूप से स्टोर्स पर भी वॉक-इन ग्राहकों का स्वागत किया जाता है। फरवरी 2019 में लॉन्च होने के बाद से ही जेनेरिक आधार देश के 150 से भी अधिक शहरों में अपनी 1500 फार्मेसी खोल चुका है।
जेनेरिक आधार के संस्थापक व सीईओ अर्जुन देशपांडे कहते हैं कि छोटे शहरों पर विशेष रूप से फ़ोकस करते हुए जेनेरिक आधार निम्नतम संभव लागत में लोगों के लिए दवाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अपने इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए हमने जेनेरिक आधार के सभी प्लैटफ़ार्म पर 51 नई दवाएँ लॉन्च की हैं। यह कुछ आम समस्याओं की दवाएँ हैं जैसे कि पथरी, न्यूरोपैथिक दर्द, सामान्य सर्दी, खांसी, एलर्जी व फंगल इन्फेक्शन। हम देश के 130 करोड़ लोगों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली दवाएँ तैयार कर रहे हैं। उद्यमिता की बढ़ती मांग के साथ ही हमें भविष्य में सफलता की कई कहानियों में अपना योगदान देने पर गर्व महसूस हो रहा है।
वर्तमान में जेनेरिक दवाओं के मामले में भारत दुनिया के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक है जिसकी वैश्विक फार्मास्युटिकल बाज़ार में 20% की हिस्सेदारी है। अपने फ़्रैंचाईज़ी मॉडल के माध्यम से जेनेरिक आधार न केवल रोज़गार पैदा कर रहा है बल्कि ढेरों सूक्ष्म-उद्यमियों के विकास को भी बढ़ावा दे रहा है। इस क्रम में अब तक 1500 से भी अधिक सूक्ष्म-उद्यमियों व रोज़गार के 8000 से अधिक प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष अवसरों का सृजन हो चुका है।










