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अरुणाचल प्रदेश में सेना का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त

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अरुणाचल प्रदेश में बड़ा हादसा हुआ है। तूतिंग मुख्यालय (Tuting headquarters) के पास आर्मी का हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया है। राहत और बचाव के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है।

समाचार एजेंसी के मुताबिक, ये हादसा ऊपरी सियांग जिले में तूतिंग मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर सिंगिंग गांव के पास हुआ है। अरुणाचल प्रदेश में रक्षा मंत्रालय के पीआरओ ने इसकी जानकारी दी है। पीआरओ ने बताया कि ये हादसा शुक्रवार सुबह लगभग 10 बजकर 40 मिनट पर हुआ है। ऊपरी सिंयाग जिले में आर्मी का एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

एसपी जुम्मर बसर ने कहा कि जिस जगह हादसा हुआ है वो जगह सड़क मार्ग से जुड़ी नहीं है। बचाव के लिए रेस्क्यू टीम फौरन भेजी गई। अभी और जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

Arunachal Pradesh 5 अक्टूबर को भी हुआ था हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त

गौरतलब है कि इससे पहले अरुणाचल प्रदेश में ही पांच अक्टूबर को ही चीता हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हो गया है। तवांग में हुए इस हादसे में भारतीय सेना के एक पायलट की मौत हो गई थी। सेना के अधिकारियों ने कहा था कि तवांग के पास नियमित उड़ान के दौरान सुबह 10 बजे दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दोनों पायलटों को नजदीकी सैन्य अस्पताल ले जाया गया था।

विशेष -गोपाल के देस में गऊ ग्राम महोत्सव ‘ संपन्न

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लगभग एक हज़ार पूर्व तक अनेक आक्रमणों के बाद भी हर बार हमारा भारतवर्ष नई समृद्धि के साथ ‘स्वर्ण पाखी’ के रूप में सज्ज हो जाता था तो इसलिए कि हम ‘गोपालक देस’ थे ,गाय हमारी अर्थव्यवस्था की मेरुदंड थी और हमारी हिन्दू अर्थव्यवस्था में भोग नहीं उपयोग की महत्ता थी ,हमारी अर्थव्यवस्था का उद्देश्य ‘पूँजी निर्माण’ नहीं ,परमार्थ का पोषण हुआ करता था। जबसे हमारे जीवन से गायों का महत्त्व घटा ,हमारी अर्थव्यवस्था का संकुचन भी बढ़ा ,बढ़ता गया और कालांतर में हम ‘देश’ हो गए – हमारा ‘स्व’ लुट गया। यह स्वागतयोग्य है कि ‘गऊ भारत भारती’ ने पुनश्च गौवंश की महत्ता को जन -जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। इसके लिए ‘ गऊ महोत्सव का आयोजन किया गया । परमादरणीय राज्यपाल डॉ भगत सिंह कोशियारी और केंद्रीय पशुपालन मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने इसका शुभारम्भ किया तो वही इसका समापन उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल के हाथों संपन्न हुआ।

समापन समारोह में कृपा शंकर सिंह , राधे गुरु माँ , इस्कॉन के प्रमुख देवकीनंदन दास जी , विधायक प्रकाश सुर्वे , विनोद शेलार , मनोभाव त्रिपाठी , चिराग गुप्ता ,अभिजीत राणे , टल्ली बाबा , संजीव गुप्ता और अन्य महानुभाव की उपस्थिति रही .

ज्ञात हो कि दिनाँक १२ अक्टूबर को “गऊ ग्राम महोत्सव” The Festival Of Cow का उद्घाटन महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी जी ने मंत्रोच्चार व रणभेरी के प्रफ्फुलित वातावरण में किया इसका उद्घघाटन किया था। और समापन उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नाईक जी के हाथो संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के आयोजन में विशेष तौर पर ” राष्ट्रीय कामधेनु आयोग ” ,जीव जंतु कल्याण बोर्ड , ( पशुपालन और डेयरी विभाग भारत सरकार ) महाराष्ट्र सरकार (पशुपालन और डेयरी विभाग ) का विशेष सहयोग रहा। विभाग के मुख्य सचिव श्री जगदीश गुप्ता जी ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। तथा पूरे सप्ताह विचार -विनिमय को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय कामधेनु आयोग , जीव जंतु कल्याण बोर्ड भारत सरकार व महाराष्ट्र राज्य सरकार के विशेषज्ञ अधिकारी उपस्थित रहेंगे ।

गाय की पीठ पर विद्यमान सूर्यके्तु नाडी सौर मंडल की समस्त ऊर्जा को अवशोषित कर अपने गव्यों (दूध ,मूत्र,गौमय) में डालकर समस्त मानव जीवन और प्रकृति को निरोगी एवं सम रखने का कार्य करती हैं। हमारा शरीर पंचमहाभूतों से बना हैं ये पंचमहाभूत्त है पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु एंवआकाश । इन पंचमहाभूतों मैं असंतुलन ही विभिन्न रोगों का कारण हें। किन्तु ईश्वर ने हमें गाय दी है जो अपने पंचगव्यो (गोमय दूध, घृत, गोमूत्र, छाछ) से इन पंचमहाभूतों को संतुलित करती है और हमें निरोगी रखती है। शरीर का पृथ्वी तत्व असंतुलित हुआ है तो हमें गोबर का रस या गोबर के कंडों से बनी भस्म का सेवन कर अपने पृथ्वी तत्व को संतुलित किया जा सकता है ।

जल तत्व को संतुलित करने के लिए गो मां का दूध ,वायु तत्व के लिए गोमूत्र , आकाश तत्व के लिए छाछ एंव अग्नि के लिए घृत है। अर्थात अपने पाँच महाभूतों को नियमित संतुलित करने के लिए हमें पांचों गव्यों का सेवन करना चाहिए। किंतु पाँचों महाभूतों की बात तो दूर हम एक भी महाभूत को संतुलित नही कर रहे है।

अगर पंचमहाभूतों को संतुलित करने के इस सूत्र को हम समझ ले तो हम समझ जाऐंगे की गाय के बिना हमारा अस्तित्त्व सम्भव ही नहीं है। जिस प्रकार शरीर के महाभूतों को गाय के गव्यो से संतुलित किया जा सकता है ठीक उसी प्रकार प्रकृति के महाभूतों को भी बिना गाय के गव्यों से संतुलित्त नही रख सकते है। अर्थात् गाय के बिना पर्यावरण को भी बचाना मुश्किल है। इसीलिए कहा गया है “गावो विश्वस्य मातर:”अर्थात गाय ही संपूर्ण जगत की मां है।

गऊ ग्राम महोत्सव the Festival of Cow का आयोजन गोरेगाँव पूर्व संमित्र मैदान चाफेकर चौक के पास किया गया है जो ७ दिनों तक चला जिसका समापन १८ अक्टूबर को हो गया । इसमें गौ केंद्रित अर्थव्यवस्था (COW BAESD Economy) को खड़ा करने के लिए भारतीय गौवंश से उत्पन्न विभिन्न प्रकार के प्रॉडक्ट(उत्पादों ) की प्रदर्शनी लगाई जा रही है। भारत के सभी गऊ आधारित उत्पादन को बनाने वाले,गऊ माता वैज्ञानिकता के प्रचार – प्रसार में जुड़े लोगों के लिए यह एक साँझा मंच है जहां भारत वर्ष के सभी गौ भक्तों और गऊ आधारित प्रॉडक्ट बनाने वालों को आमंत्रित किया गया है और साथ में भारत सरकार के पशुपालन व डेरी मंत्रालय के सभी लाभकारी योजनाओं की जानकारी साँझा करने के लिए सम्बंधित विशेषज्ञ बुलाए गए थे जो भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस सपने को साकार करने में सहभाग करेंगे जिसमें ‘स्टार्टअप’ , ‘वोकल फोर लोकल’ जैसे मन्त्र सिद्ध होने हैं।

इंडोनेशिया के मडुरा में गायों की सुंदरता का उत्सव होता है जिसका नाम है सोपी सोनोक फ़ेस्टिवल.सोपी सोनोक फेस्टिवल के दौरान बड़ी संख्या में लोग सुंदर गायों की इस प्रतियोगिता को देखने के लिए जमा होते हैं.महोत्सव के दौरान गायों की सुंदरता की प्रतियोगिता होती है और विजेता का चुनाव साज-सज्जा, सफ़ाई और चाल के आधार पर किया जाता है।आशा है,हम भी अपनी इस भुला दी गयी सांस्कृतिक धरोहर को पुनश्व अपने जीवन का अंग और अंश बनाएंगे। कल्याणम अस्तु।

राजेश झा
अतिथि सम्पादक ‘गऊ भारत भारती’

PM MODI – 75 हजार को, तो बिहार के सीएम नीतीश 9500 को देंगे नियुक्‍त‍ि पत्र ,सरकारी नौकरियों का बंपर दीपावली गिफ़्ट

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पटना। Sarkari Naukari in Bihar: बिहार समेत हिंदी भाषी राज्‍यों में सरकारी नौकरी बेहद बड़ा मसला है। बिहार में पिछले विधानसभा चुनावों के बाद यह मसला खूब चर्चा में रहा। नतीजा है कि केंद्र और बिहार की सरकारों में युवाओं को नौकरी देने की होड़ दिखने लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को 10 लाख नौकरियों के लिए अभियान की शुरुआत करेंगे, तो नीतीश कुमार शुक्रवार को ही करीब 9500 कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देने जा रहे हैं।

रोजगार मेले में 75 हजार को मिलेंगे नियुक्ति पत्र

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 22 अक्टूबर की सुबह 11 बजे वीडियो कांफ्रेंङ्क्षसग के माध्यम से 10 लाख कर्मियों के लिए भर्ती अभियान ‘रोजगार मेला’ का पूरे देशभर में शुभारंभ करेंगे। समारोह के दौरान 75,000 नवनियुक्त कर्मियों को नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे। बिहार में तीन स्थानों पर रोजगार मेला का आयोजन होने जा रहा है।

हाजीपुर, पटना और मुजफ्फरपुर में कार्यक्रम

रेलवे की तरफ से हाजीपुर में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, डाक विभाग की तरफ से पटना के अधिवेशन भवन में आयोजित कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री आरके सिंह और मुजफ्फरपुर में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री पशुपति नाथ पारस नियुक्ति पत्र प्रदान करेंगे।

38 मंत्रालयों और विभागों में होगी नियुक्‍ति‍

देश भर से चयनित नए कर्मियों को भारत सरकार के 38 मंत्रालयों व विभागों में नियुक्त किया है। नवनियुक्त कर्मी विभिन्न स्तरों पर सरकार में शामिल होंगे, जैसे समूह-ए, समूह-बी (राजपत्रित), समूह-बी (अराजपत्रित) और समूह-सी। जिन पदों पर नियुक्तियां की गई है, उनमें केंद्रीय सशस्त्र बल कार्मिक, उप निरीक्षक, कांस्टेबल, एलडीसी, स्टेनो, पीए, आयकर निरीक्षक, एमटीएस तथा अन्य शामिल हैं।

अलग-अलग चैनल से हुई भर्तियां

ये भर्तियां, मंत्रालयों और विभागों द्वारा मिशन मोड में या तो स्वयं या यूपीएससी, एसएससी, रेलवे भर्ती बोर्ड जैसी भर्ती एजेंसियों के माध्यम से की गई है। चयन प्रक्रियाओं को सरल और तकनीकी रूप से सक्षम बनाया गया है। यह जानकारी पूर्व मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क पदाधिकारी वीरेंद्र कुमार ने दी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार देंगे नियुक्ति पत्र

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के लिए चयनित साढ़े नौ हजार अभ्यर्थियों को एक कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र देंगे। इसके साथ ही वे कई योजनाओं उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे। इन कर्मियों में साढ़े आठ हजार एएनएम और एक हजार अन्य कर्मचारी हैं।

बापू सभागार में होगा ये कार्यक्रम

मुख्यमंत्री कार्यालय की जानकारी के अनुसार बापू सभागार के सम्राट अशोक कंवेंशन सेंटर कार्यक्रम का आयोजन राज्य स्वास्थ्य समिति की किया गया है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ ही स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव, शिक्षा मंत्री विजय चौधरी के अलावा अन्य मंत्री व पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट 2022 के लिए कर्नाटक राज्य द्वारा मुंबई में रोड शो आयोजित

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राज्य के विकास के लिए कर्नाटक ने निवेशकों को किया आमंत्रित

मुंबई। 2 से 4 नवंबर तक बेंगलुरु में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट (जीआईएम) के लिए कर्नाटक राज्य ने महाराष्ट्र से निवेशकों को जीआईएम 2022 में भाग लेने, और राज्य में निवेश करने के लिए मुंबई में रोड शो में आमंत्रित किया। मुंबई में ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट में डॉ. ई.वी. रमना रेड्डी, सुश्री गुंजन कृष्णा, अर्जुन रंगा, सुशांत नाइक और कश्मीरा मेवावाला रोड शो में शामिल हुए। राज्य ने संभावित निवेशकों को निवेश जुटाने और नए व्यवसाय लाने के लिए कई प्रोत्साहन प्रदान करके कर्नाटक को देश के एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में देने के लिए अपना घरेलू रोड शो आयोजित किया।

राज्य प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डॉ. ई.वी. रमना रेड्डी (अतिरिक्त मुख्य सचिव, कर्नाटक सरकार, वाणिज्य और उद्योग) ने अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ मुंबई में संभावित निवेशकों से मुलाकात की और उन्हें बेंगलुरु में 2-4 नवंबर के दौरान होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट में आमंत्रित किया, जहां फॉर्च्यून 500 कंपनियों की 400 से अधिक शाखाओं का घर है। इससे पहले उद्योग मंत्री डॉ. मुरुगेश आर. निरानी के नेतृत्व में राज्य के प्रतिनिधिमंडल ने अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ दिल्ली, हैदराबाद में कई संभावित निवेशकों से मुलाकात की और उन्हें ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट में आमंत्रित किया। जीआईएम 2022 कर्नाटक राज्य के लिए एक प्रमुख निवेशक कार्यक्रम है। आयोजन का उद्देश्य मजबूत औद्योगिक-अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र का प्रदर्शन करना, वैश्विक निवेशकों से निवेश आकर्षित करना और राज्य भर में औद्योगीकरण का प्रसार करना है।

रोड शो के दौरान डॉ रेड्डी ने कहा कि कर्नाटक राज्य विनिर्माण और स्थिरता क्षेत्रों में निवेश के लिए पसंदीदा स्थान है। हम व्यापार करने में आसान सुविधा के लिए प्रतिबद्ध हैं और राज्य में निवेशकों को सभी समर्थन और बुनियादी ढांचा सुविधाएं प्रदान करेंगे। सरकार एक मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करने के लिए अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए नीतिगत हस्तक्षेप और उद्योग के दृष्टिकोण से लगातार काम कर रही है। हमने महाराष्ट्र के निवेशकों के साथ निवेश के अवसरों और हमारी औद्योगिक नीति पर चर्चा की है।

कई शीर्ष कॉर्पोरेट और उत्कृष्ट निवेशकों ने राज्य में अपने कारोबार का विस्तार करने और निवेश करने के लिए रुचि व्यक्त की है। कर्नाटक सरकार द्वारा किए गए कई सुधार उपायों के माध्यम से भारत के प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में उभरा है।

समझौता ज्ञापन के क्रियान्वयन के माध्यम से 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की पुष्टि की गई है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के लिए, कुल 50,000 एकड़ भूमि – बेंगलुरु में 20,000 एकड़ और राज्य भर में 30,000 एकड़ जमीन निर्धारित की गई है। राज्य जीआईएम के माध्यम से निवेश में 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक और 5 लाख नौकरियों के सृजन की उम्मीद कर रहा है।

दीपावली -2022 , दीपावली भगवान रामचंद्र के सम्मान में मनाई जाती है

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दिवाली रोशनी का त्योहार है। यह मुख्य रूप से भारत में मनाए जाने वाले सबसे बड़े और भव्य त्योहारों में से एक है। दिवाली खुशी, जीत और सद्भाव का जश्न मनाने के लिए मनाया जाने वाला एक अवकाश है। दीवाली, जिसे दीपावली के नाम से भी जाना जाता है, अक्टूबर या नवंबर के महीने में आती है। यह दशहरा उत्सव के 20 दिनों के बाद मनाया जाता है। शब्द “दीपावली” एक हिंदी शब्द है जिसका अर्थ है दीयों की एक श्रृंखला (“दीप” का अर्थ है जमीन पर दीपक और “अवली” का अर्थ है एक पूंछ या एक श्रृंखला )।

दिवाली का त्योहार क्यो मनाया जाता है?

दीपावली भगवान रामचंद्र के सम्मान में मनाई जाती है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान राम 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। वनवास की इस अवधि के दौरान, उन्होंने राक्षसों और राक्षस राजा रावण के साथ युद्ध किया, जो लंका के शक्तिशाली शासक थे। जब राम लौटे, तो अयोध्या के लोगों ने उनका स्वागत करने और उनकी जीत का जश्न मनाने के लिए दीया जलाया। तब से, बुराई पर अच्छाई की जीत की घोषणा के लिए दिवाली मनाई जाती है।

2022 की दिवाली कितने तारीख को हैं?  24 October 2022

दिवाली का महत्व क्या हैं?

दिवाली की पूर्व संध्या पर लोग देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा भी करते हैं। विघ्न-विनाशक कहे जाने वाले भगवान गणेश अपनी बुद्धि और बुद्धि के लिए पूजनीय हैं। इसके अलावा, दिवाली के अवसर पर धन और समृद्धि के लिए देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि दिवाली पूजा इन देवताओं के आशीर्वाद का आह्वान करती है।

दिवाली / दीपावली त्योहार कैसे मनाए?

Diwali त्योहार के कई दिन पहले से त्योहार की तैयारी शुरू हो जाती है। घरों और दुकानों की गहरी सफाई से शुरुआत करें। बहुत से लोग त्योहार शुरू होने से पहले सभी पुराने घरेलू सामानों को फेंक देते हैं और सभी मरम्मत करते हैं। यह एक प्राचीन मान्यता है कि दीपावली की रात देवी लक्ष्मी लोगों को आशीर्वाद देने के लिए उनके घर जाती हैं। इसलिए, सभी भक्त माता लक्ष्मी के लिए अपने घरों को परी रोशनी, फूल, रंगोली, मोमबत्तियां, दीये, माला आदि से साफ और सजाते हैं। यह त्योहार आमतौर पर तीन दिनों तक मनाया जाता है। पहले दिन को धनतेरस कहा जाता है जहां नए सामान, विशेष रूप से गहने खरीदने की परंपरा है। अगले दिन दिवाली के उत्सव के लिए समर्पित हैं जब लोग पटाखे फोड़ते हैं और अपने घरों को सजाते हैं। दोस्तों और परिवार से मिलने और उपहारों का आदान-प्रदान करने का भी रिवाज है। इस मौके पर कई मिठाइयां और भारतीय व्यंजन बनाए जाते हैं. दिवाली एक लोकप्रिय छुट्टी है।

Eco-friendly दिवाली कैसे  Celebrate करें?

लेकीन दोस्तों इस खुशी के बीच, हम यह भूल जाते हैं कि फटने वाले पटाखों से ध्वनि और वायु प्रदूषण होता है। यह बच्चों के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है और जानलेवा भी हो सकता है। पटाखों के फोड़ने से वायु गुणवत्ता सूचकांक और कई जगहों पर दृश्यता कम हो जाती है जो अक्सर त्योहार के बाद होने वाली घटनाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसलिए, एक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल दिवाली होना महत्वपूर्ण है। दिवाली को सही मायने में प्रकाश का त्योहार कहा जाता है क्योंकि इस दिन पूरी दुनिया रोशनी से जगमगाती है। त्योहार खुशी लाता है और इसलिए यह मेरा पसंदीदा त्योहार है!

दीपावली हमे क्यो पसंद हैं?

दीपावली हमे पसंद है, क्योंकी यह त्योहार हम सभी को एक करता हैं| हमारी संस्कृती की याद दीलाता हैं| दीपावली के दीन हम सभी नए कपडे पहँकर, घर को दीयो से सजाकर, छोटे छोटे बच्चे पटाके फोडकर इस दिवाली त्योहार का आनंद लेते हैं|

दीपावली त्योहार के यह पांच  प्रमुख दीन होतें हैं :

धनतेरस :

धनतेरस पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली त्योहार के पहले दिन मनाया जाता है। हिंदी में प्रत्यय ‘तेरस’ संस्कृत में त्रयोदशी शब्द का पर्याय है जो चंद्रमा के घटते चरण के तेरहवें दिन को संदर्भित करता है। धनतेरस से जुड़े विभिन्न अनुष्ठानों का उद्देश्य घर की समृद्धि और पति के स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करना है। धनतेरस के दिन कई घरों में लक्ष्मी पूजा की जाती है। धनतेरस दिवाली समारोह के लिए शुभ और उत्सव का मूड सेट करता है। पेश है धनतेरस से जुड़ी एक बेहद दिलचस्प पौराणिक कहानी

नरक चतुर्दशी :

 इस त्योहार को धनतेरस उत्सव के अगले दिन ‘नरक चतुर्दशी’ के रूप में मनाते हैं| नरक चतुर्थी या छोटी दिवाली इस वर्ष 13 November 2021 को मनाई जाएगी| यह छोटी दिवाली या नरक निवारण चतुर्दशी के रूप में प्रसिद्ध, का शाब्दिक अर्थ है नरक की रोकथाम| (नरक- नरक, निवारण-रोकथाम)| इसलिए यह माना जाता है कि जो लोग इस दिन बड़ी श्रद्धा के साथ अनुष्ठान करते हैं और पवित्र डुबकी लगाते हैं, वे आसानी से नरक या नरक में जाने से बच सकते हैं|

लक्ष्मी पूजा :

दिवाली के दिन देश के हर हिंदू घर में लक्ष्मी पूजा की जाती है। लक्ष्मी धन की देवी हैं। घर पर देवी लक्ष्मी को आमंत्रित करने के लिए शाम को लक्ष्मी पूजा की जाती है। लोग प्रार्थना करते हैं और अपने और अपने परिवार के सदस्यों के जीवन में शांति, धन और समृद्धि की कामना करते हैं।

लक्ष्मी पूजन कैसे करे?

  • अपने घर को शुद्ध करें|
  • पूजा मंच स्थापित करें|
  • कलश लगाकर, पूजा के लिए लक्ष्मी और गणेश की मूर्ति स्थापित करें|
  • खाता बही/धन से संबंधित सामान रखें|
  •  तिलक लगाएं और दीया जलाएं|
  • फूल चढ़ाकर पूजा मंत्र का जाप करें|
  • जल अर्पित करें फल और मिठाई अर्पित करें|
  • लक्ष्मी आरती करें और घरके सभी सद्यसो के साथ माता लक्ष्मी की पुजा करे|

गोवर्धन पूजा : गोवर्धन पूजा कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) के हिंदू महीने में शुक्ल पक्ष के पहले दिन मनाई जाती है, आमतौर पर गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन होती है और उस दिन को मनाने के रूप में मनाया जाता है जब भगवान कृष्ण ने स्वर्ग के राजा इंद्र से बातचीत की थी।

हरे कृष्ण मंत्र एक लोकप्रिय मंत्र है जिसका जाप कृष्ण गोवर्धन पूजा के दिन किया जाता है।

भाई- दुज : महाराष्ट्र में भौबीज उत्सव कई मायनों में एक विशेष महत्व रखता है। हालांकि भारत का एक बड़ा हिस्सा दिवाली के दौरान त्योहार मनाता है, कुछ लोग होली के त्योहार के एक या दो दिन बाद भाई दूज भी मनाते हैं। दक्षिण भारत के कई हिस्सों में इसे यम द्वितीया के रूप में मनाया जाता है। यम द्वितीया क्यों? यहाँ भाई दूज के पीछे की कहानी है और इसे यम द्वितीया क्यों कहा जाता है।

उत्तर प्रदेश में 7500 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त , मुरादाबाद में मिले सर्वाधिक 550 अवैध मदरसे

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लखनऊ, Madarsa Survey In UP प्रदेश में सर्वे के दौरान करीब 7500 गैर मान्यता प्राप्त मदरसे मिले हैं। गुरुवार को मदरसा सर्वे का अंतिम दिन था। प्रदेश के सभी 75 जिलों में सर्वे का काम लगभग पूरा हो गया है। मदरसों के सर्वे के लिए गठित टीम अपनी रिपोर्ट अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) के माध्यम से 31 अक्टूबर तक जिलाधिकारियों को देंगी। जिलाधिकारी 15 नवंबर तक शासन को उपलब्ध कराएंगे सर्वे की र‍िपोर्ट

  • प्रत्येक जिलाधिकारी सर्वे की रिपोर्ट संकलित कर 15 नवंबर तक शासन को उपलब्ध कराएंगे। प्रदेश में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त कुल 16,513 मदरसे हैं। बड़ी संख्या में मदरसे बगैर मान्यता के भी चल रहे हैं। इन्हीं के बारे में जानकारी करने के लिए सरकार ने मदरसा सर्वे कराया है।

  • इसमें 7500 गैर मान्यता प्राप्त मदरसे मिले हैं। ऐसे में प्रदेश में कुल मदरसों की संख्या अब 24 हजार से अधिक हो गई है। मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डा. इफ्तिखार अहमद जावेद ने बताया कि सर्वे से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ही यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था सरकार करेगी। यहां के बच्चों को देश व समाज की मुख्यधारा में लाने की कोशिश की जाएगी।उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट किया कि गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे से किसी भी प्रकार का वैध अथवा अवैध का डाटा नहीं मिल पाएगा।

मुरादाबाद में मिले सर्वाधिक 550 से अधिक गैर मान्यता प्राप्त मदरसे

यह सर्वे असली नकली का नहीं बल्कि शिक्षा और शिक्षा के केंद्र की उनकी संख्या, उनकी व्यवस्था आदि की सही जानकारी प्राप्त करना है। चेयरमैन ने बताया कि सर्वाधिक 550 से अधिक गैर मान्यता प्राप्त मदरसे मुरादाबाद में मिले हैं। बस्ती में 350, लखनऊ में 100, प्रयागराज में 90, आजमगढ़ 95, मऊ में 90 व कानपुर में 85 से अधिक मदरसे मिले हैं।

पीएम मोदी के दौरे से पहले बदरी-केदारनाथ में हुई बर्फबारी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित उत्तराखंड दौरे को लेकर महकमा अलर्ट हो गया है। पीएम मोदी का 21 अक्टूबर और 22 अक्टूबर को केदारनाथ, बद्रीनाथ धाम के दर्शन के साथ ही पुर्ननिर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग का कार्यक्रम तय माना जा रहा है। हालांकि अभी अधिकारिक तौर पर कुछ भी स्पष्ट नहीं है। लेकिन सीएम पुष्कर सिंह धामी का केदारनाथ में जाकर पुर्ननिर्माण कार्यों का जायजा लेना और अधिकारियों से फीडबैक लेने से साफ हो गया है कि पीएम दिवाली से पहले उत्तराखंड दौरे पर आएंगे। इधर रूद्रप्रयाग और चमोली जिले का प्रशासन तैयारियों में जुटा है।

पुलिस महकमे में दिवाली तक सभी पुलिसकर्मियों की छुट्टी केसिंल कर दी गई है। साथ ही दूसरे जनपदों से फोर्स मांगी गई है। जिससे साफ है कि आने वाले दिनों में पीएम मोदी केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम आ सकते हैं। अभी तक जो जानकारी मिली है उसके हिसाब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब 21 अक्तूबर को केदारनाथ पहुंच सकते हैं।

प्रशासनिक व विभागीय स्तर पर केदारनाथ में तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रधानमंत्री बाबा के दर्शनों के साथ ही पुनर्निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण भी करेंगे। संभावना जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री केदारनाथ धाम के लिए स्वीकृत सोनप्रयाग.केदारनाथ 13 किमी लंबे रोपवे का शिलान्यास भी कर सकते हैं। चर्चा है कि प्रधानमंत्री 21 अक्टूबर को सुबह जौलीग्रांट पहुंचेगे और फिर केदारनाथ जाकर बाबा केदार के दर्शन करेंगे। वह पुनर्निर्माण कार्यों का जायजा भी लेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री बदरीनाथ जाएंगे और वहां पूजा.अर्चना व पुनर्निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने बाद देश के अंतिम गांव माणा में सभा को संबोधित कर सकते हैं।

शुक्रवार को भी चोटियों पर बर्फबारी के आसार

शुक्रवार को देहरादून में मौसम साफ बना हुआ है और बदरीनाथ धाम में भी इसी प्रकार का मौसम बना हुआ है। आज केदारनाथ में बारिश हो सकती है। वहीं मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को भी चोटियों पर बर्फबारी के आसार हैं। घने बादलों के बीच केदारघाटी में हल्की वर्षा के भी हो सकती हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई सेवाओं को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

गुरुवार को केदारनाथ धाम में जमकर बर्फबारी हुई। शाम को बर्फबारी से धाम में सफेद चादर बिछ गई। बदरीनाथ की चोटियों पर भी बर्फबारी का क्रम जारी है।

इसके अलावा हेमकुंड साहिब, गंगोत्री, यमुनोत्री समेत आसापास की चोटियों पर भी बर्फबारी हो रही है। कुमाऊं में बागेश्वर और पिथौरागढ़ में भी बर्फबारी जारी है।

आज 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का अनुमान

मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के अनुसार, प्रदेश में शुक्रवार को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं हल्की वर्षा हो सकती है। 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का अनुमान है।

केदारनाथ और बदरीनाथ में छाए रह सकते हैं बादल

निचले क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहने के आसार हैं। केदारनाथ और बदरीनाथ में बादल छाए रह सकते हैं। बर्फबारी और बूंदाबांदी की आशंका है। हवाई सेवाओं को लेकर बेहद सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

वर्षाकाल चला गया, सर्दी शुरू हो गई है, लेकिन जनजाति क्षेत्र जौनसार बावर में भूस्खलन की समस्या थम नहीं रही है। जिसके चलते भूस्खलन की वजह से मलबा गिरने पर छह मोटर मार्ग बंद होने के कारण लोग परेशान हैं।

बंद मार्गों से जुड़े किसानों की कृषि उपज अदरक, गागली, टमाटर, बीन्स, हरा धनिया समय पर मंडी नहीं पहुंचने से नुकसान उठाना पड़ रहा है। बंद मार्गों की वजह से वाहन चालक भी परेशान हैं। त्योहारी सीजन को देखते हुए ग्रामीणों ने लोनिवि अधिकारियों से बंद मार्गों को जल्द खोलने की मांग की है।

लोनिवि साहिया का एक व लोनिवि चकराता के पांच मोटर मार्ग बंद होने के कारण तीन दर्जन से अधिक गांवों, मजरों आदि के ग्रामीणों की दुश्वारियां बढ़ गई है। मलबा आने से बंद लोनिवि साहिया का निछिया पिहानी मोटर मार्ग नौ दिन बाद भी नहीं खुल पाया है।

लोनिवि चकराता का बिरमौ मार्ग दूसरे दिन भी नहीं खुल पाया है। गुरुवार सुबह रोटा खड्ड अटाल, बौराड़, सजड़, क्वांसी जोगियो मोटर मार्ग बंद हो गए। बंद मार्गों के कारण ग्रामीणों की दिक्कतें बढ़ गई है। उधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता प्रत्युष कुमार के अनुसार बंद मार्गों को खोलने के लिए जेसीबी मशीनें लगाई गई हैं।

भाजपा गाय के नाम पर वोट मांग सकते हैं, परन्तु गौ माता की सेवा नहीं कर सकते : भूपेश बघेल

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रायपुर। ये लोग (भाजपा) गाय के नाम पर वोट मांग सकते हैं, परन्तु गौ माता की सेवा नहीं कर सकते। इतने गौठान बने हैं, आप जाकर एक मुट्ठी चारा दे दीजिए, ये काम भाजपा के लोगों से नहीं होगा। कमी गिनाने जरूर जाएंगे: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, रायपुर

Gau Seva Dham: गौ सेवा धाम में महिला सशक्तिकरण को दिया जा रहा बढ़ावा

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Gau Seva Dham Hospital: देवी चित्रलेखा जी द्वारा संचालित गौ सेवा धाम हॉस्पिटल एक बेहतर भारत की तरफ एक बड़ा कदम साबित हुआ है। देवी चित्रलेखा जी के हॉस्पिटल में जानवरों व गौ माता का इलाज और पालन-पोशन होता है। वो तो सराहनीय है ही, इसके साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की तरफ भी देवी जी काम कर रही हैं। बहुत सी गांव की महिलाओं को रोजगार देकर, उनको आर्थिक रूप से स्वतंत्र करने में देवी जी का बहुत बड़ा हाथ है।

कई महिलाएं यहां जूट का सामान बनाना, गायों की सेवा और भी अलग-अलग काम करती हैं। इससे न केवल महिलाओं का  सशक्तिकरण हो रहा है, बल्कि भारत की रचनात्मक हस्त-शिल्प को भी बढ़ावा मिल रहा है। देवी जी ने सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी कई कथाएं करके व पुरस्कार जीतकर भारत का नाम रोशन किया है। देवी जी के इन सभी नेक कार्यों व भारत को आगे बढ़ाने की लगन से हम सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए।