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गाय का मीट खाना चाहिए – जीडी गोएनका अंग्रेजी माध्यम स्कूल , हिंदू विरोधी ज्ञान

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गुजरात के कच्छ के गाँधीधाम में जीडी गोएनका अंग्रेजी माध्यम स्कूल में बच्चों को शिक्षा के नाम पर हिंदू विरोधी ज्ञान दिया जा रहा था। स्कूल द्वारा दी गई पाठन सामग्री में गाय के बारे में प्रकाशित जानकारी बता रही थी कि गाय का मीट खाना चाहिए। जब इसका पता हिंदू संगठनों को चला तो उन्होंने इसका विरोध किया और स्कूल को माफी माँगनी पड़ी। सोशल मीडिया पर भी नेटिजन्स स्कूल के इस हरकत की आलोचना कर रहे हैं।

सामने आए स्टडी मटेरियल की तस्वीर में देख सकते हैं लिखा है- “ये गाय है। ब्लैक एंड वहाइट। ये Mooo कहती है। घास खाती है। हमें इसका दूध पीना बहुत अच्छा लगता है। हम इसका माँस खा सकते हैं। इसके सिर पर दो सींघ होती है और इसे खेतों में रहना अच्छा लगता है।” बच्चों को दी जा रही इस शिक्षा की जानकारी होने के बाद लोगों ने इसका विरोध शुरू किया। इसे शर्मनाक बताया गया और हैरानी जताई गई कि ये शिक्षा व्यवस्था को क्या होता जा रहा है।

वहीं दूसरी ओर इस टेक्स्ट के पता चलने के बाद हिंदू संगठनों ने भी इसका जमकर विरोध किया और स्कूल से माँफी माँगने को कहा। इस बीच ऑपइंडिया ने भी स्कूल से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं हो सकी। हालाँकि इस बीच स्कूल की ओर से एक पत्र सामने आया।

इसमें उन्होंने सनातनियों से माफी माँगते हुए कहा कि स्कूल की सनातन धर्म को नीचा दिखाने की कोई मंशा नहीं थी। अपने पत्र में स्कूल ने बताया कि जो कंटेंट स्टडी मटेरियल में पब्लिश हुआ वो पिंटरेस्ट से लिया गया था।

उन्होंने कहा, “हम सनातन के सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों को समझते हैं और उनका सम्मान करते हैं और हमारे अभियान के कारण हुए किसी भी अपराध या गलतफहमी के लिए हम क्षमा चाहते हैं।” स्कूल के माफी पत्र में कहा गया है, “किसी भी आस्था या प्रथा का अनादर या अवहेलना करना हमारा इरादा नहीं था।”

 

 

 

भगोरिया:केवल उत्सव ही नहीं, पुरातन भारतीय संस्कृति का प्रतिबिंब भी 

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 कैलाश विजयवर्गीय-
झाबुआ जनजातीय संस्कृति का महापर्व है भगोरिया ।मालवा-निमाड़ के ग्रामीण अंचल फिर उमंग और उल्लास के साथ तैयारियों में जुट रहे हैं। पड़ोसी राज्यों में मजदूरी करने गए  मेहनतकश परिवारजन भी भगोरिया और होली मनाने के लिए अपने-अपने गांव-फलियों में लौटने लगे हैं। ग्रामीण ढोल-मांदल की दुरुस्ती करने जुट गए हैं।
भगोरिया को पिछले साल ही मध्यप्रदेश सरकार ने राजकीय पर्व घोषित किया था। वैसे भी परंपरागत मेले और पर्व हमारे गौरवशाली इतिहास का वर्तमान से मेल करवाते हैं। युवा पीढ़ी संस्कारों और सरोकारों का यह पाठ पढ़कर अपनी परंपराओं को न केवल स्वीकार करती है बल्कि अनुशासित रूप से अनुकरण के लिए भी स्वयं को समर्पित करती है।
भगोरिया की एक पहचान यह भी है कि हजारों की तादाद में उमड़ने वाली ग्रामीणों की भीड़ के बावजूद अनुकरणीय अनुशासन होता है। हर तरफ पारंपरिक वाद्य यंत्र ढोल-मांदल के साथ थाली की खनक पर लयबद्ध थिरकन का दौर चलता है। पूरे सात दिनों तक कहीं भी इतने वृहदस्तर पर ऐसा कोई भी उत्सव नहीं मनाया जाता। 
माना जाता है कि भगोरिया की शुरुआत राजा भोज के कालखंड में हुई थी। तत्कालीन भील राजाओं कासूमरा और बालून ने अपनी राजधानी भगोर में मेले की शुरुआत की। इसके बाद अन्य क्षेत्रों में भी यह आयोजन होने लगा। कालांतर में स्थानीय हाट और मेलों में लोग इसे भगोरिया कहने लगे। पश्चिमी निमाड़, झाबुआ-आलीराजपुर, धार, बड़वानी में भगोरिया अधिक धूमधाम से मनाया जाता है। भगोरिया के दौरान ग्रामीण जन ढोल-मांदल एवं बांसुरी बजाते हुए मस्ती में झूमते हैं। गुड़ की जलेबी, भजिये, खारिये (सेंव), पान, कुल्फी की दुकानों से मेले सजे रहते हैं।
दरअसल, भारत के अनेक भागों में आदिवासी समुदायों की एक विशेष महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर है। यहां तक कि उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक आयुष्य का अंग-अंग है। भगोरिया एक ऐसा महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे अलग-अलग तरीकों के साथ मध्य भारत के छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार और महाराष्ट्र में मनाया जाता है। इसे अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है, जैसे कि भागोरा, भगौरिया, भगोरी, भगोरीया, भगोरिया, बघोरिया आदि। मध्य प्रदेश के लिए यह विशेष गर्व का पर्व इसलिए भी है कि इसे आदिवासी समुदायों के सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व की प्रतीक के रूप में अब अधिक मान्यता मिलती जा रही है।
सत्य तो यह भी है कि भगोरिया का पर्व आदिवासी समुदायों की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। इसका आयोजन समाज में एकता, सामाजिक समरसता और समृद्धि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जाता है। इस पर्व के माध्यम से लोग अपनी परंपराओं को समझते हैं और इसे अपने जीवन में अमल में भी लाते हैं। भगोरिया पर्व का आयोजन समाज के प्राचीन रीति-रिवाजों और संस्कृति को मजबूत करने का भी प्रभावी माध्यम है। इसे पर्व के दौरान आदिवासी समुदाय परंपरा के साथ अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता को भी दोहराता है। यही पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि यह आदिवासी समुदायों की भावनाओं, संस्कृति और ऐतिहासिक पारंपरिकता को दर्शाता है। भगोरिया पर्व का आयोजन भले ही साल में एक बार होता है लेकिन इससे जुड़ी स्मृतियां वर्षभर मन को आनंदित रखती हैं।
भगोरिया पर्व एक महत्वपूर्ण आदिवासी पर्व है जो भारतीय समाज की विविधता और समृद्धि का प्रतीक है। यह आदिवासी समुदायों की भावनाओं, संस्कृति, और परंपराओं को मजबूत करने का एक माध्यम है। इस पर्व के माध्यम से लोग अपने समुदाय के गौरव को महसूस करते हैं और अपने धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का संकल्प लेते हैं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस वर्ष भी भगोरिया पर्व समाज में एकता, सद्भावना, और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और प्रेम और सद्भावना की नई मिसाल बनेगा।
पर्व के लिए पधारने वाले सभी परिवार जनों को मेरी ढेर सारी बधाई और अग्रिम शुभकामनाएं।
*(लेखक भाजपा के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री हैं)*

योद्धा में सिद्धार्थ ने फिर जीता लोगों का दिल और  जगाई देश भक्ति की लहर 

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(अर्चित सक्सेना-विनायक फीचर्स)
 सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अपनी फिल्म योद्धा में एक कमांडो मैन “अविनाश कटियार” का किरदार निभाया है। इस फिल्म में सिद्धार्थ ने शेरशाह की तरह ही फिर से आर्मी मैन का रोल प्ले किया है।फ़िल्म योद्धा एक फ़िक्शिसियस स्टोरी है जिसमें टास्क फ़ोर्स पर कहानी फिल्माई गई है। इसमें सिद्धार्थ ने एयर कमांडो बनकर प्लेन हाइजैक की स्टोरी में योद्धा (कमांडो) का रोल निभाया है।  सिद्धार्थ ने जोशीले कमांडो का किरदार बखूबी निभाया है ।
कहानी में वे एक बार अपने इसी जोश को लेकर आए हैं।इस फिल्म में निर्णय लेने में देरी के कारण , भारत अपना एक साइंटिस्ट खो देता है और इस गलती का पूरा दोष  योद्धा नामक टास्क फोर्स पर डाल दिया गया । बाद में योद्धा टास्क फोर्स पर कार्रवाई हुई और धीरे धीरे पूरी योद्धा टीम ने अपना ट्रांसफर करवा लिया सिवाए अविनाश कटियार यानि सिद्धार्थ मल्होत्रा के। कुछ सालों बाद वह  दुबई की फ्लाइट में  उन्हें एक अनजान व्यक्ति से दिल्ली का टिकट मिलता है जो कि उनके नाम का ही था । कुछ गलतफहमियों के कारण वे एक व्यक्ति पर अटैक करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वह व्यक्ति आतंकवादी है जबकि एक एयर होस्टेस  आतंकवादी थी जिसने इंजेक्शन बदलकर यह बताना चाहा कि फ्लाइट योद्धा अविनाश ने हाईजैक की  है ।
बाद में पता चलता है कि फ्लाइट का एक पायलट बदल गया था और उसकी जगह जो पायलट आया था वह भी अआतंकवादी था और उनका प्लान फ्लाइट को इस्लामाबाद में क्रैश करवाने का था क्योंकि उस दिन भारत पाकिस्तान के बीच एक बड़ा समझौता  होने वाला था । बाद में अपनी जांबाजी दिखाते हुए अविनाश कटियार ने सबको बचाया और आतंकियों का सच भी सबके सामने लाया। अंत  में फिर योद्धा टास्क फोर्स पुनः शुरू हुई ।देश भक्ति से भरपूर इस फिल्म में पूरी तरह से सिद्धार्थ मल्होत्रा ही छाए रहे।(विनायक फीचर्स)

Lok Sabha Elections: बिहार NDA की सीटों का बंटवारा

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नई दिल्ली: Lok Sabha Elections 2024:  बिहार एनडीए (NDA) के अंदर सीट बंटवारे पर सहमति बन गई है. दरअसल, बिहार में सीटों के समझौते को लेकर एनडीए ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेस के जरिए बड़ी जानकारी दी. एनडीए के नेताओं ने  सीट शेयरिंग को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि बिहार में भाजपा 17, जेडीयू 16, लोजपा रामविलास 5 और उपेंद्र कुशवाहा 1 और जीतन राम मांझी 1 सीट पर चुनाव लड़ने वाली है.  दरअसल, नई दिल्ली में सोमवार को भाजपा नेता व बिहार के प्रभारी विनोद तावड़े, सम्राट चौधरी, मंगल पांडे, जेडीयू नेता संजय झा, जीतन राम मांझी पार्टी की पार्टी हम के दिल्ली अध्यक्ष रजनीश कुमार, आरएलएम के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान की पार्टी की ओर से राजू तिवारी ने प्रेसवार्ता में सीट शेयरिंग को लेकर बड़ी घोषणा की है. इस दौरान एनडीए के सभी नेताओं ने कहा कि वे लोग बिहार में 40 सीटों पर चुनाव जीतने वाले हैं.
एनडीए के अंदर तय फॉर्मूले के अनुसार भाजपा पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, अररिया, दरभंगा उजियारपुर, सारण, महाराजगंज,बेगूसराय, नवादा, पटना साहिब, पाटलिपुत्र, अररिया, आरा, बक्सर से चुनावी मैदान में उतरी है. वहीं जेडीयू के पक्ष में वाल्मिकीनगर, सीतामढ़ी, झंझारपुर, सुपौल, कटिहार, बांका, नालंदा, शिवहर, किशनगंज, मधेपुरा, सीटें आई हैं. जीतन राम मांझी की पार्टी HAM को गया की सीट दी गई है. उपेंद्र कुशवाहा कारकाट से चुनाव लड़ेंगे. वहीं चिराग पासवान को हाजीपुर, वैशाली, जमुई, खगड़िया, समस्तीपुर की सीट मिली है.
NDA का क्या है फॉर्मूला
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए में सीटों के बंटवारे को लेकर फार्मूला तय किया गया है. इसके तहत भाजपा को 17 सीटें, जेडीयू को 16 सीटें, चिराग पासवान की पार्टी को LJP (RV) को 5 सीटें मिली है. वहीं जीतन राम मांझी की पार्टी ( HAM) को एक सीट प्राप्त हुई है. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी (RLM) को सिर्फ एक सीट दी गई है. मगर जो जानकारी सामने आई है, उसके तहत उपेंद्र कुशवाहा 1 सीट नहीं बल्कि दो सीट चाहते हैं. पशुपति पारस को एनडीए गठबंधन में एक भी सीट नहीं दी गई है.  वहीं मुकेश सहनी को को लेकर अभी तक तस्वीर साफ नहीं हुई है.

CAA के खिलाफ दाखिल 237 याचिकाओं पर आज से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

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नई दिल्ली:  CAA: नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के देशभर में लागू होने के इसे लेकर विरोध भी देखने को मिला. इसके साथ ही सीएए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 237 से अधिक में याचिकाएं भी दाखिल की गई. जिन पर सुप्रीम कोर्ट आज यानी मंगलवार को सुनवाई करेगा. नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ दाखिल इन याचिकाओं पर स्‍वयं चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच सुनवाई करेगी. सीजेआई की इस बैंच में उनके अलावा दो अन्‍य न्यायाधीश भी होंगे.

2019 में संसद में पास हुआ था सीएए

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून संसद के दोनों सदनों- लोकसभा और राज्यसभा में दिसंबर 2019 में पास हो गया था. तब सीएए के खिलाफ कई याचिकाएं दाखिल की गई थी. केंद्र सरकार ने 11 मार्च 2024 को सीएए के नियमों को अधिसूचित किया. इसके बाद एक बार फिर से नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई. साथ ही इन याचिकाओं पर जल्द सुनवाई करने का भी अनुरोध किया गया. इन याचिकाओं में सीएए को धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाला और संविधान के खिलाफ बताया गया.

क्या है सरकार का सीएए पर तर्क

केंद्र सरकार ने बीते मंगलवार को देशभर में नागरिकता संशोधन कानून लागू कर दिया. सीएए के प्रावधानों के मुताबिक, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत में आए गैर मुस्लिमों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है. सीएए में मुस्लिम समाज को शामिल न करने की वजह से इसे मुस्लिम विरोधी कहा जा रहा है. हालांकि गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि सीएए से किसी भारतीय की नागरिकता नहीं आएगी. बल्कि ये कानून नागरिकता देने वाला है. गृह मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय मुसलमानों को सीएए से चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. क्योंकि नागरिकता संशोधन अधिनियम उनकी नागरिकता को प्रभावित नहीं करेगा.

दस्तावेज पेश करने की नहीं होगी जरूरत

इसके साथ ही गृह मंत्रालय का कहना है कि इस अधिनियम के बाद किसी भी भारतीय नागरिक को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कोई दस्तावेज पेश करने की जरूरत नहीं होगी. खासकर भारतीय मुसलमानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सीएए में उनकी नागरिकता को प्रभावित करने का कोई प्रावधान नहीं है. इसका वर्तमान 18 करोड़ भारतीय मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं है और उनके पास भी हिंदूओं के बराबर अधिकार हैं.

 

विजय मंदिर आंदोलन के प्रणेता निरंजन वर्मा

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(अंजनी सक्सेना-विभूति फीचर्स)
मध्यभारत प्रांत के नेता प्रतिपक्ष रहे स्वर्गीय निरंजन वर्मा न केवल एक उत्कृष्ट राजनीतिज्ञ थे बल्कि वे एक कुशल इतिहासकार भी थे।पर उन्हें सर्वाधिक ख्याति प्राप्त हुई विदिशा के विजय मंदिर आंदोलन से।अपने इस आंदोलन के द्वारा उन्होंने न केवल  विदिशा के जनमानस को आंदोलित किया बल्कि उन्होंने देश के उस गौरव पूर्ण इतिहास को भी दुनिया के समक्ष लाने की कोशिश की जिसे बलपूर्वक दबा दिया गया। 
विदिशा जिले के छोटे से गांव पुरैनिया में जन्मे श्री निरंजन वर्मा  ने विदिशा के एक शताब्दी के  इतिहास को सामने लाने के  सार्थक प्रयास किए।इसके लिए उन्होंने न केवल जनांदोलन किए बल्कि अपनी लेखनी द्वारा भी जनमानस को जागृत किया।
श्री वर्मा को पूर्व मध्य भारत प्रांत के जननेता आंदोलनकर्ता एवं इतिहास ,संस्कृति के लेखक के रुप में भी राष्ट्रीय ख्याति और प्रतिष्ठा प्राप्त हुई । 1952 के चुनाव में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबू तख्तमल जैन को बासौदा विधानसभा से पराजित करके तहलका मचा दिया था।तत्कालीन मुख्यमंत्री को हराकर वे मध्य भारत विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता बने थे। 1966 से 1972 तक वे भारतीय जन संघ की ओर से राज्यसभा के सांसद भी रहे ।इस दौरान वे कई समितियों के अध्यक्ष और सदस्य भी रहे। उन्होंने चीन,जापान और बर्मा(म्यामांर) जाकर वहां भी विदिशा के गौरवपूर्ण इतिहास को सबके सामने रखा।इतिहास के विषय में उनकी विद्वता के श्री अटल बिहारी वाजपेई एवं लक्ष्मीमल्ल सिंघवी भी कायल थे।
हिंदू धर्म एवं संस्कृति के अनन्य उपासक श्री वर्मा  भारत  की एकता और अखंडता के प्रति सदैव समर्पित रहे।
 विदिशा के बीजा मंडल अर्थात विजय मंदिर के आंदोलन  के तो वे प्रणेता ही थे।दसवीं शताब्दी में यह एक भव्य एवं विशालकाय मंदिर था।इस मंदिर को पहले इल्तुतमिश फिर अलाउद्दीन खिलजी के मंत्री मलिक काफूर उसके बाद मांडू के शासक महमूद खिलजी ने जमकर लूटा।बाद में गुजरात के बहादुर शाह और अंत में औरंगजेब ने इस मंदिर को तहस नहस कर दिया लेकिन किंवदंतियों में यह मंदिर निरंतर जीवित रहा।बाद में कुछ वर्षों तक यहां वाद विवाद भी चलता रहा । इसी बीच श्री वर्मा ने कई आंदोलनों द्वारा इस मंदिर की मुक्ति के लिए अभियान चलाया।इसके लिए उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।विजय मंदिर के अलावा काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनरुद्धार आंदोलन में भी उन्होंने कई बार जेल यात्राएं की।विजय मंदिर के मामले में पुरातात्विक उत्खनन के बाद अंततः उनका सच साबित हुआ कि बीजा मंडल ही वह भव्य विजय मंदिर है जिसे तोड़कर मस्जिद बनायी गई थी।
श्री वर्मा ने अपने पैतृक गांव पीपलखेड़ा में हिंदू महासभा का प्रांतीय अधिवेशन भी आयोजित कराया था जो उस दौर में एक अचंभा ही था।इसके साथ ही वे हिंदी साहित्य सम्मेलन से भी  जुड़े रहे और सन 1975 में विदिशा में इसके प्रांतीय सम्मेलन का आयोजन भी उन्होंने ही किया ,जिसमें तत्कालीन गृहमंत्री  बाबू जगजीवन राम  सहित देश के 100 से अधिक प्रमुख लेखकों और कवियों की उन्होंने मेजबानी की।
 श्री निरंजन वर्मा  आंदोलन कारी जननेता के साथ-साथ कुशलअध्येता,प्रखर इतिहासविद् तथा शोधार्थी भी थे।उन्होंने
20 से अधिक पुस्तकें भी लिखी जो खासी चर्चित एवं लोकप्रिय रहीं।दशार्ण दर्शन, असंधिमित्रा तथा युद्ध एवं जौहरगाथाएं उनकी लोकप्रिय एवं चर्चित पुस्तकें रही। विदिशा के प्राचीन वैभव के साथ ही देश के धर्म और संस्कृति पर भी उन्होंने कई लेख लिखे ।
निरंजन वर्मा का विजय मंदिर आंदोलन अंततः सही और सफल तो सिद्ध हुआ लेकिन उनके जानने वालों का मानना है कि अभी उनकी यह सफलता अधूरी है,उनका यह आंदोलन तभी पूर्णतः सफल और सार्थक सिद्ध होगा जब विजय मंदिर अपने पुरातन वैभव और गरिमा को पुनः प्राप्त कर लेगा और शायद यह निकट भविष्य में यह संभव भी होगा।(विभूति फीचर्स)

100+ करोड़ पर कायम है शैतान का जादू

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जियो स्टूडियोज, देवगन फिल्म्स और पैनोरमा स्टूडियोज की अलौकिक थ्रिलर *#शैतान* ने अपने दूसरे सप्ताहांत में रविवार को ₹10.17 करोड़ और सप्ताहांत में कुल ₹24.41 करोड़ की कमाई के साथ पूर्ण प्रभुत्व बनाए रखा है।
पहला सप्ताह – ₹ 81.60 करोड़
दूसरा शुक्रवार – ₹5.12 करोड़
दूसरा शनिवार – ₹9.12 करोड़
दूसरा रविवार- ₹10.17 करोड़
कुल दूसरा सप्ताहांत – ₹24.41 करोड़
कुल – ₹106.01 करोड़ एनबीओसी (भारत) और – ₹152.11 करोड़ दुनिया भर में सकल
Shaitaan’s spell remains unbroken at 100+ crs!
Jio Studios, Devgn Films & Panorama Studios’ supernatural thriller #Shaitaan maintains absolute dominance in its second weekend collecting  ₹10.17 crores on Sunday and a weekend total of ₹24.41 cr.
Week 1 – ₹ 81.60 cr
2nd Fri – ₹5.12 cr
2nd Sat – ₹9.12 cr
2nd Sun- ₹10.17 cr
Total 2nd weekend – ₹24.41 cr
Total – ₹106.01 Crores NBOC (India) & ₹152.11 Crores Worldwide Gross

दंगल टीवी पर नया धारावाहिक ‘दीवानी’ 

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                  निर्माता श्यामाशीष भट्टाचार्य और नीलिमा बाजपेयी की बहुप्रतीक्षित टीवी शो ‘दीवानी’ का प्रसारण दंगल टीवी पर 18 मार्च से शुरू हो गया है। प्रत्येक सप्ताह सोमवार से शनिवार रात 10 बजे प्रसारित होने वाला यह धारावाहिक दर्शकों को एक भावनात्मक रोलरकोस्टर सवारी पर ले जाने का वादा करती है, जिसमें वफादारी, बलिदान और प्यार की स्थायी शक्ति के विषयों की खोज की गई है। उम्मीद है कि निडर प्रेम, न्याय और परिवार से जुड़ाव की एक मनोरम कहानी ‘दीवानी’, अपने दर्शकों को प्यार की गिरफ्त में डूबी एक युवा लड़की मीरा और सच्चे प्यार में विश्वास करने वाले पार्थ की मनोरंजक कहानी जिसमें पारिवारिक अपेक्षाएँ और सामाजिक निर्णय की बंदिश भी है, आकर्षित करने में कामयाब होगी। अभिनेत्री अदिति शर्मा द्वारा भावनात्मक गहराई के साथ चित्रित मीरा और पार्थ (नितिन गोस्वामी) की बेगुनाही में उसका अटूट विश्वास एक मनोरंजक गाथा की आधारशिला बन जाता है जो हर गुजरते एपिसोड के साथ सामने आएगी।
शकुंतलम टेलीफिल्म्स की नवीनतम प्रस्तुति ‘दीवानी’ के केंद्र में वह दुखद घटना है जो पार्थ के जीवन की दिशा को अपरिवर्तनीय रूप से बदल देती है। उस अपराध का आरोप जो उसने नहीं किया था, पार्थ खुद को दोहरेपन और विश्वासघात के जाल में फंसा हुआ पाता है, पायल (सैयद सेहरिश अली) के लिए उसका प्यार संदेह और अन्याय की छाया से ढका हुआ है। दंगल टीवी वर्तमान समय में मनोरंजन के क्षेत्र में एक विश्वसनीय टीवी चैनल के रूप में अग्रणी है और अपनी रचनात्मकता, अखंडता और समावेशिता के अपने मूल मूल्यों को बरकरार रखते हुए कहानी कहने की सीमाओं को आगे बढ़ा रहा है। साथ ही साथ अब सभी प्रमुख डीटीएच प्लेटफार्मों और प्रमुख केबल टीवी नेटवर्क पर उपलब्ध है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

गाय को ज्योतिष में विशेष महत्व दिया जाता है

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Jyotish Shastra: गाय को ज्योतिष में विशेष महत्व दिया जाता है. गाय को ज्योतिष में संयुक्त कर्क (Taurus) राशि का प्रतिनिधित्व करने वाला पशु माना जाता है. ज्योतिष के अनुसार, गाय को स्थिर, संतुलित, और स्नेही गुणों का प्रतिनिधित्व करता है. इसके अलावा, गाय को सौंदर्य, सच्चाई, और परोपकार के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है. इसके द्वारा प्राप्त दूध और गौवंश के उपयोग से व्यक्ति को आर्थिक, शारीरिक, और मानसिक स्वास्थ्य में लाभ मिलता है. इसलिए, गाय को ज्योतिष में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है और उसे पूजनीय माना जाता है.

1. गाय को रोटी खिलाना: सुबह जल्दी उठकर गाय को स्नान कराएं. उसके बाद गाय को गेहूं की आटे की रोटी खिलाएं. रोटी में घी और गुड़ भी मिला सकते हैं. गाय को रोटी खिलाते समय “ॐ गौ माताय नमः” मंत्र का जाप करें.

2. गाय को हरा चारा खिलाना: गाय को हरा चारा खिलाने के लिए आप पालक, मेथी, धनिया, बाजरा, ज्वार आदि हरा चारा खरीद सकते हैं. आप घर पर भी हरा चारा उगा सकते हैं. गाय को हरा चारा खिलाते समय “ॐ गो माताय नमः” मंत्र का जाप करें.

3. गाय को गोबर दान करना: गाय के गोबर को इकट्ठा करके किसी गौशाला या गरीब व्यक्ति को दान कर सकते हैं. गोबर दान करते समय “ॐ गो माताय नमः” मंत्र का जाप करें.

4. गाय को पानी पिलाना: गाय को पानी पिलाने के लिए आप एक बाल्टी में पानी भरकर गाय को पिला सकते हैं. गाय को पानी पिलाते समय “ॐ गो माताय नमः” मंत्र का जाप करें.

5. गाय को स्नान कराना: गाय को स्नान कराने के लिए आप गाय को पानी से नहला सकते हैं. गाय को स्नान कराते समय “ॐ गो माताय नमः” मंत्र का जाप करें.

6. गाय को गौशाला में दान करना: आप गाय को गौशाला में दान करना चाहते हैं तो आप किसी गौशाला में जाकर गाय को दान कर सकते हैं. गाय को गौशाला में दान करते समय “ॐ गो माताय नमः” मंत्र का जाप करें.

गाय के उपाय करते समय गाय के प्रति सम्मान और प्रेम का भाव रखना आवश्यक है. ये उपाय किसी भी ज्योतिषी से सलाह लेने के बाद ही करना चाहिए.

 

एसडीएम गौशाला पहुंचे और गाय एवं गौशाला कर्मियों को मिठाई खिलाई

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शाहबाद। क्षेत्र के ग्राम किरा स्थित गौशाला में एक गाय ने दो बच्चों को जन्म दिया है। इनमें एक बछड़ा एवं एक बछिया है। एसडीएम सुनील कुमार ने गौशाला पहुंचकर गौशाला स्टाफ को मिठाई वितरित कर गाय के बच्चों के नाम भी रखे हैं।

गौशाला की एक गाय ने रविवार की रात 11 बजे एक बच्चे को जन्म दिया। गौशाला में काम करने वाले कर्मचारियों ने गाय और बच्चे की देखभाल शुरू ही की थी कि तब तक गाय ने एक और बच्चे को जन्म दे दिया।

दो बच्चों के जन्म की सूचना पर सुबह एसडीएम गौशाला पहुंचे और गाय एवं गौशाला कर्मियों को मिठाई खिलाई। इस दौरान एसडीएम ने गाय का नाम रानी, बछड़े का नाम वीरा और बछिया का नाम मीरा रख दिया।

सूचना पर पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एके चतुर्वेदी ने टीम के साथ गाय और उसके दोनों बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि गाय और दोनों बच्चे स्वस्थ हैं।