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एकता कपूर और रिया कपूर का “क्रू” के ट्रेलर को मिल रहे पॉजिटिव रिस्पॉन्स से नहीं है खुशी का ठिकाना

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जब से क्रू का जबरदस्त एंटरटेनमेंट ट्रेलर रिलीज हुआ है पूरे देश भर में इसी की चर्चा हो रही है। ट्रेलर को फैंस और ऑडियंस से बहुत पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला रहा। बता दें कि सभी को फिल्म में मौजूद कॉमेडी एलिमेंट के साथ, तब्बू, करीना कपूर खान और कृति सेनन की सेंसेशनल तिगड़ी के साथ -साथ दिलजीत दोसांझ और कपिल शर्मा की मौजूदगी को खास तौर पर पसंद किया जा रहा है।

ट्रेलर ने ऑडियंस की उत्सुकता को और भी बढ़ा दिया है और यह वादा करता है की फिल्म एकदम क्रेज़ी और एंटरटेनिंग राइट होने वाली है। सब तरफ से तारीफों को पाते हुए, हर तरफ बढ़ रही चर्चा को देख कर प्रोड्यूसर, एकता कपूर और रिया कपूर ने फैंस और ऑडियंस को अपना आभार व्यक्त किया है।

कंटेंट क्वीन एकता आर कपूर ने रिस्पांस के लिए अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, “हम ट्रेलर को मिल रहे जबरदस्त रिस्पांस से बहुत खुश हैं! ये देखना बहुत ख़ुशी भरा है कि ओसिएनस ‘क्रू’ के मज़ेदार सिचुएशन और दिलचस्प किरदारों के साथ किस तरह जुड़े हैं। ऑडियंस से मिल रहा प्यार हमें और भी अनोखी कहानियाँ बनाने के लिए प्रेरणा देती हैं और हमारे जुनून को और भी बढाती हैं!”

रिस्पॉन्स से बेहद खुश होकर रिया कपूर ने कहा है, “मैं क्रू के ट्रेलर को मिले रहे शानदार रिस्पॉन्स से बहुत खुश हूं। हमने प्रोजेक्ट में अपना दिल डाला है और इससे दर्शकों के बीच पसंद करते हुए देखना बेहद संतुष्ट करने वाला है।”

“क्रू” राजेश ए कृष्णन के डायरेक्शन और बालाजी टेलीफिल्म्स और अनिल कपूर फिल्म एंड कम्युनिकेशन नेटवर्क के सहयोग में बनी है, यह फिल्म 29 मार्च 2024 को सिनेमाघर में रिलीज होने के लिए तैयार है। फिल्म से उम्मीद है कि यह एक ऐसी सिनेमैटिक स्पेक्टाकल देगी जो यादगार पलों में ले जाएगी।

बदायूं – साजिद ने 24 बार किए बच्चों पर वार

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बदायूं: उत्तर प्रदेश का बदायूं (Badaun Case) शहर सदमे से बाहर नहीं निकल सका है। हर शख्स की जुबां पर मासूम बच्चों के साथ हुए जघन्य हत्याकांड की ही चर्चा है। सवाल बना हुआ है कि आखिर साजिद और जावेद ने आखिर क्यों इस वहशियाना घटना को अंजाम दिया। आरोपियों ने जघन्य तरीके से वारदात को अंजाम दिया। जिस किसी ने भी घटनास्थल पर जाकर उस मंजर को देखा, उसके होश उड़ गए। गर्दन काटने के बाद भी शरीर के अन्य हिस्सों पर वार करते रहे।

गर्दन, सीने, पीठ, हाथ पर कई वार
हेयर ड्रेसर साजिद और जावेद ने घर में आकर उधार लेने और चाय पीने के बाद ऊपर जाकर मासूम बच्चों को मार डाला। कमरे में अचानक से मुंह दबाकर गर्दन पर उस्तरे से गर्दन काट दिया। फिर सीने, पीठ, हाथ पर ताबड़तोड़ कई वार किए। आयुष और अहान के साथ नृशंसता की हदें पार कर दी गईं। दोनों बच्चे करीब 10 मिनट तक जान बचाने के लिए जूझते रहे।

साजिद ने 24 बार किए बच्चों पर वार
पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट हुई है कि साजिद ने 24 बार उस्तरे और चाकू से वार किया। रिपोर्ट के अनुसार छोटे बच्चे अहान के शरीर पर 9 वार और आयुष के शरीर पर 14 वार हुए। बुधवार सुबह ही दोनों बच्चों का पोस्टमॉर्टम कर दिया गया। फिर 10 बजे कछला घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं आरोपी साजिद का एनकाउंटर के बाद पोस्टमॉर्टम हुआ, जिसमें उसके शरीर में 3 गोलियां लगी मालूम हुईं। सखानू में उसे सुपुर्दे खाक कर दिया गया।

रिलायंस कैपिटल के लिए हिंदूजा ने लगाई बोली

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नई दिल्ली: कर्ज में डूबे उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कैपिटल को खरीदने के लिए कोर्ट ने 27 मई की डेडलाइन रखी है। इसे खरीदने के लिए हिंदूजा ग्रुप की कंपनी इंडसइंड इंटरनेशनल होल्डिंग्स लिमिटेड (IIHL) ने 9,650 करोड़ रुपये का ऑफर दिया था। लेकिन इसके लिए फंड जुटाना मुश्किल हो रहा है। कोई भी बैंक कंपनी को सस्ता लोन देने को तैयार नहीं है। सूत्रों के मुताबिक IIHL ने 8,000 करोड़ रुपये तक फंड जुटाने के लिए जापानी बैंकों से संपर्क साधा है। जापानी बैंकों के लिए अच्छी बात यह है कि रिलायंस कैपिटल का निप्पॉन लाइफ के संबंध रहा है। दोनों का भारत में एक जॉइंट इश्योरेंस वेंचर है। माना जा रहा है कि जापानी बैंक IIHL को अन्य बैंकों की तुलना में सस्ते दर पर लोन दे सकते हैं।

ईटी ने सबसे पहले 12 जुलाई को बताया था कि रिलायंस कैपिटल की डील को फंडिंग करने के लिए हिंदूजा ग्रुप ग्लोबल प्राइवेट क्रेडिट फंड्स से एक बिलियन डॉलर जुटाने की कोशिश में है। लेकिन उन स्रोतों से फंड 15-16% की दर से मिल सकता है। यही वजह है कि ग्रुप अब सस्ते स्रोतों की तलाश में है। सूत्रों के अनुसार हिंदूजा ग्रुप की तीन जापानी बैंकों मिजुहो, SMBC और MUFG के साथ बातचीत चल रही है। ग्रुप को यह लोन पांच साल के लिए सालाना 8-9% की दर पर मिल सकता है। लेकिन फंडिंग को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। IIHL इस नए रूट के जरिए से कम से कम आधी राशि जुटा सकता है लेकिन हिंदूजा परिवार को कुल फंडिंग की बाकी राशि अपनी जेब से भरनी होगी। हिंदूजा ग्रुप ने इस बारे में ET के सवालों का जवाब नहीं दिया। मिजुहो के अधिकारी टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे जबकि MUFG और SMBC ने प्रतिक्रिया देने से इन्कार कर दिया।

सेल्फ़ डिस्कवरी वाया रीडिस्कवरी इंडिया’ प्रदर्शनी का आयोजन

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                      कला, सिनेमा और उससे संबंधित क्षेत्र की जानकारियां सार्वजनिक रूप से लोगों के साथ साझा करने के उद्देश्य से तुली रिसर्च सेंटर के संचालक नेविल तुली ने ‘सेल्फ़ डिस्कवरी वाया रीडिस्कवरी इंडिया’ प्रदर्शनी का आयोजन मैक्स मुलर मार्ग, नई दिल्ली स्थित ‘इंडिया इंटरनैशनल सेंटर गैलेक्सी’ के प्रेक्षागृह में ‘सेल्फ़ डिस्कवरी वाया रीडिस्कवरी इंडिया’ प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया है।15 मार्च से 30 मार्च तक चलने वाले इस प्रदर्शनी में तुली रिसर्च सेंटर ऑफ़ इंडिया स्टडीज़ की ओर से भारत की मूल व डिजिटाइज़्ड कलाकृतियों, आर्टिफ़ैक्ट्स, आरकाइव्स, स्मृति चिह्नों को शामिल किया गया है।
उल्लेखनीय है कि इस प्रदर्शनी के केंद्र में मुख्यत: भारत और भारतीय सिनेमा, आधुनिक व समसामयिक ललित कला व प्रचलित कला, फ़ोटोग्राफ़ी, वास्तुशिल्प संबंधी विरासत, पशु कल्याण, पारिस्थितिकीय जीव विज्ञान और समाजशास्त्र है। बकौल नेविल तुली यह प्रदर्शनी एक शख़्स के नज़रिए से  क़दम-दर-क़दम लोगों तक भारत के दिल, दिमाग और आत्मा की अद्भुत झलक दिखलाने की एक नायाब कोशिश है। ज़मीनी स्तर पर इसे तीन स्तर पर तैयार किया गया है। वस्तुनिष्ठ रूप में, आरकाइव के तौर पर और डिजिटल फॉर्मेट में शोध संबंधी इसकी 16 श्रेणियां हैं जो भारतीय शिक्षा संबंधी फ़्रेमवर्क की नींव हैं। भारत को लेकर मेरी सैद्धांकित व व्यवहारिक समझ और ज्ञान पिछले 30 सालों के अनुभवों का नतीजा है जो दिनों-दिन उन्नत होती गई है प्रतिफल स्वरूप इस प्रदर्शनी का आयोजन मैने किया है।
आज ज़रूरत इस बात की है कि कला और संस्कृति को सिर्फ़ संप्रभु और इच्छुक लोगों तक ही नहीं, बल्कि आम जनमानस तक पहुंचाया जाए. भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाना इसे आम लोगों तक पहुंचाने का सबसे आदर्श तरीका है। इस पहली प्रदर्शनी के आयोजन का मूल मक़सद एकनिष्ठ रूप से प्राचीन, मध्यकालीन व आधुनिक भारत की आत्मा को आकर्षक रूप में लोगों के सम्मुख रखना है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

महाराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश सुबह भूकंप के झटकों से हिल उठे.

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Earthquake in Arunachal Pradesh: महाराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश गुरुवार (21 मार्च) सुबह भूकंप के झटकों से हिल उठे. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया है कि देश के पश्चिमी राज्य महाराष्ट्र में आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.5 मापी गई है, जबकि पूर्वोत्तर के अरुणाचल में आया भूकंप 3.7 की तीव्रता वाला था. सुबह-सुबह आए भूकंप की वजह से अभी तक किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है.

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, महाराष्ट्र के हिंगोली में 10 किमी की गहराई पर भूकंप का केंद्र रहा है. भूकंप के झटकों को सुबह 6.08 बजे महसूस किया गया. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.5 मापी गई. 4 से लेकर 4.9 की तीव्रता वाले भूकंप को हल्के भूकंप के तौर पर परिभाषित किया जाता है. ऐसे में महाराष्ट्र में आया भूकंप हल्की तीव्रता वाला रहा, लेकिन इसकी वजह से लोगों के मन में डर जरूर पैदा हुआ. कुछ लोग झटके महसूस करने के बाद घर से बाहर निकल आए.

भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, भूकंप का पहला झटका अरुणाचल प्रदेश में रिपोर्ट किया गया. देश के पूर्वोत्तर राज्य में कुछ घंटों के अंतराल पर भूकंप के दो झटके महसूस किए गए. भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया कि सबसे पहला झटका गुरुवार तड़के 1.49 बजे रिकॉर्ड किया गया. राज्य के पश्चिमी कामेंग में लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए. इसका केंद्र 10 किमी की गहराई में था. रिक्टर स्केल पर भूकंप के झटकों की तीव्रता 3.7 मापी गई.

वहीं, दो घंटों बाद अरुणाचल प्रदेश एक बार फिर से भूकंप के झटकों से हिल उठा. सुबह 3.40 बजे राज्य में धरती के हिलने की जानकारी मिली. इस भूकंप की तीव्रता 3.4 मापी गई. भूकंप का केंद्र पश्चिमी कामेंग रहा. इस भूकंप के केंद्र की गहराई 5 किमी थी. रिक्टर स्केल पर 3 से 3.9 की तीव्रता के बीच रहने वाले भूकंप के झटकों को मामूली भूकंप के तौर पर जाना जाता है. यही वजह है कि अभी तक जान माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है.

 

मुंबई में महिला डाक्टर ने अटल सेतु से लगाई छलांग

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Atal Setu - फोटो : सोशल मीडिया
Atal Setu - फोटो : सोशल मीडिया

दक्षिण मुंबई को नवी मुंबई से जोड़ने के लिए समुद्र पर बनाए गए अटल सेतु से एक महिला ने छलांग लगा दी। पेशे से वह चिकित्सक बताई जा रही हैं। उनकी उम्र करीब 43 साल रही होगी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अब तक महिला के शव का पता नहीं लग सका है, लेकिन उनके मुंबई स्थित आवास से कथित सुसाइड नोट जरूर मिला है।

अवसाद से पीड़ित थीं महिला
पुलिस ने बताया कि पेशे से डॉक्टर किंजल कांतिलाल शाह अवसाद से पीड़ित थीं। उनका इलाज चल रहा था। वह अपने पिता के साथ मुंबई के परेल इलाके में दादा साहब फाल्के रोड स्थित नवीन आशा इमारत में रहती थीं। सोमवार की दोपहर किंजल ने अपने घर के पास से अटल सेतु जाने के लिए टैक्सी ली और वहां से समुद्र में छलांग लगा दी।

चालक ने तुरंत नवी मुंबई पुलिस को जानकारी दी
न्हावा शेवा पुलिस थाना के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक राजेंद्र कोटे ने बताया कि महिला ने पुल पर टैक्सी चालक से गाड़ी रोकने को कहा। चालक ने इनकार कर दिया तो उन्होंने उस पर दबाव बनाया। जिद की वजह से चालक ने गाड़ी रोक दी। इसके बाद वह गाड़ी से बाहर निकलीं और पुल से कूद गईं। टैक्सी चालक ने तुरंत नवी मुंबई पुलिस को घटना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद तटीय पुलिस ने स्थानीय ग्रामीणों और बचाव दल की मदद से उसे ढूंढने के लिए अभियान चलाया।

सुसाइड नोट में किए गए कई दावे
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, महिला ने सोमवार को अपने पिता को फोन करके बताया था कि वह किसी काम से बाहर जा रही है। जब उसके पिता घर लौटे तो उन्होंने उसका सुसाइड नोट देखा। इसमें लिखा था कि वह अपनी जिंदगी खत्म करने के लिए अटल सेतु जा रही है। सुसाइड नोट में महिला ने आत्महत्या के लिए आठ साल से चल रहे गंभीर अवसाद को जिम्मेदार बताया। महिला के पिता ने मुंबई के भोईवाडा पुलिस थाना में मामले की शिकायत दर्ज कराई।

गौ माता को राष्ट्रीय दर्जा दिलाने के लिए नागौर से निकला साइकिल यात्री

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 गौ माता को बचाने और संरक्षण को लेकर नागौर से निकला साइकिल यात्री आज डूंगरपुर पहुंचा. गौ भक्तों ने गौ रक्षक का कलेक्ट्रेट परिसर में स्वागत किया. इस दौरान यात्रा लेकर निकले युवक ने एडीएम को सीएम के नाम ज्ञापन देकर गौमाता को बचाने के साथ ही बजट को बढ़ाने की गुहार लगाई. गौ रक्षक नीरसिंह राठौड़ 13 जिलों का सफर पूरा कर आज बुधवार को डूंगरपुर पहुंचे. नीर सिंह साइकिल लेकर डूंगरपुर शहर में आते ही गोरक्षा दल के देवीसिंह समेत कई गो भक्तों ने स्वागत किया.

Cow produce insulin milk-अब इंसुलिन वाला दूध देगी गौ माता

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Cow produce insulin milk: गाय का दूध वैसे ही अमृत तुल्य है लेकिन अब यह एक और बीमारी का सत्यानाश करने वाला है. इस मामले में वैज्ञानिकों ने कमाल कर दिया है. दरअसल, वैज्ञानिकों ने जीन में परिवर्तन कर ऐसी गाय बनाई है जिसके दूध में ही इंसुलिन लबालब भरा रहेगा. इसका सीधा मतलब यह हुआ है कि दुनिया से डायबिटीज पर करारा प्रहार हो सकेगा क्योंकि डायबिटीज में इंसुलिन की कमी हो जाती है जिसके कारण खून से शुगर का अवशोषण नहीं हो पाता है यह बढ़ी हुई शुगर किडनी, लिवर, आंख, हार्ट जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाती है. अब वैज्ञानिकों द्वारा बनाई गई गाय से डायबिटीज के खिलाफ जंग में महत्वपूर्ण सफलता हाथ लेगेगी क्योंकि दुनिया भर में डायबिटीज के 50 करोड़ मरीज हैं, इनमें अकेले भारत में 10 करोड़ मरीज शुगर के हैं. टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों को रोजाना इंसुलिन लेना पड़ता है.

पहला ट्रांसजेनिक गाय से निकाला गया दूध
दरअसल, अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोएस में जानवरों के वैज्ञानिक मैट व्हीलर रिसर्च कर रहे थे. उन्होंने गाय के जीन में इंजीनियरिंग करके यह कमाल किया है. ब्राजील में पहला ट्रांसजेनिक गाय इंसुलिन वाला दूध देने योग्य हो गई है. मैट व्हीलर ने बताया कि मां का दूध वास्तव में प्रोटीन की फैक्ट्री होता है. हमने इसका फायदा उठाया और इसी प्रोटीन को इस तरह बना दिया जो दुनिया भर में हजारों लोगों के लिए रामबाण साबित हो सकता है. मैट व्हीलर के नेतृत्व में किस तरह गाय के जीन में परिवर्तन किया गया, यह बायोटेक्नोलॉजी जर्नल में विस्तार से प्रकाशित हुआ है. वर्तमान में कई ऐसे मरीज हैं जिन्हें रोजाना इंसुलिन की जरूरत पड़ती है. यह इंसुलिन जेनेटिकली मोडिफाइड बैक्टीरिया से बनाया जाता है जो महंगा भी होता है. लेकिन अगर यह दूध से डायरेक्ट मिल जाए तो इसका फायदा लाखों लोगों को होगा.

वैज्ञानिकों ने कैसे किया कमाल
मैट व्हीलर की टीम ने गाय के भ्रुण को निकालकर उसके जीन में इंसुलिन प्रोटीन वाला इंसानी डीएनए के सेगमेंट को सेट कर दिया. इस डीएनए में इंसानी डीएनए का कोड मौजूद रहता है. इस जीन में इंजीनियरिंग करने के बाद इस भ्रुण को सामान्य गाय के गर्भाशय में पहुंचा दिया गया. इससे एक सुंदर बछिया का जन्म हुआ. इसके बाद यह गाय बड़ी होकर प्रेग्नेंट हुई और उसने दूध देना शुरू कर दिया. जब दूध का परीक्षण किया गया तो पाया गया कि दूध में वहीं प्रोटीन मौजूद है जो मानव इंसुलिन में है. यानी ठीक यह इंसुलिन ही होता है. अध्ययन में पाया गया कि दूध का प्रोइंसुलिन इंसान के शरीर में जाकर इंसुलिन बन जाता है.

By – Lakhan Narayan News 18

नूंह में गौ-तस्करी को लेकर चौंकाने वाली खबर, गौ-सेवक ही निकले तस्कर

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नूंह(अनिल मोहनिया): फिरोजपुर झिरका की गौशाला में गौसेवकों द्वारा की जा रही गौ-तस्करी से पूरे मेवात में हड़कंप मच गया है। अब मेवात में बनी इन गौशालाओं पर उंगली उठने लगी है। आखिर इन गौशालाओं के संचालक ऐसे कोन से कार्य में बिजी थे, जो गौशालाओं में रखी गई गायों का भी हिसाब नहीं रख सके। जिससे आए दिन गौ सेवक गाड़ियों में भर भर कर गौशालाओं से इन गायों की तस्करी करते रहे।

इस मामले में पुलिस ने बताया कि गोरक्षा दल के सदस्य खेम सिंह, जितेंद्र, छब्बू बैशाला को फोन पर सूचना मिली कि रात्रि के समय नंदी गौशाला से नंदी बैलों की तस्करी की जाएगी। जिसके बाद इन लोगों लोगों ने मामले की सूचना पुलिस और संबंधित गौरक्षा दल की टीम के सदस्यों को दी। इसके बाद तस्करों को रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई। जैसे ही गौरक्षा दल के सदस्य नंदी गौशाला पहुंचे तो तस्करों ने तुरंत गाड़ी भगा दी। गाड़ी को भागते देख गौरक्षा दल के सदस्यों ने तस्करों का पीछा किया। लेकिन अंधेरे का फायदा उठाते हुए तस्कर फरार हो गए।

वहीं गौरक्षा दल के सदस्य जब वापस गौशाला पहुंचे तो वहां पर दो कर्मचारी फरार होने की फिराक में थे, जिन्हें मौके से ही दबोच लिया गया। इस मामले में फिरोजपुर झिरका सिटी चौकी प्रभारी भरत सिंह का कहना है कि गौरक्षा दल के सदस्यों द्वारा लिखित रूप से शिकायत मिल गई है। दो नामजद और चार अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। पकड़े गए दोनों आरोपियों को आज स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा।

आपको बता दें कि मेवात एक मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है, यहां पर पुलिस जब को तस्करों से गायों को पकड़ती हैं तो उन्हें गौशालाओं में भिजवाती है। लेकिन अब सबसे बड़ी बात यह है कि जहां पुलिस गौशालाओं में गायों को सुरक्षित रखने के लिए भिजवाती है, लेकिन गौशालाओं से ही गौशालाओं में लगे हिंदू समाज के सेवाकर्मी इन गायों की तस्करी कर रहे हैं।

वैमनस्य भूल, नई शुरुआत करने का पर्व होली

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विवेक रंजन श्रीवास्तव –

हमारे मनीषियों द्वारा समय समय पर पर्व और त्यौहार मनाने का प्रचलन ऋतुओं के अनुरूप मानव मन को बहुत समझ बूझ कर निर्धारित किया गया है।

 जब ठंड समाप्त होने लगती है, गेंहूं चने की  नई फसल आने को होती है, मौसम में आम की बौर की महक की  मस्ती छाने लगती है, बाग बगीचों में, जंगलों तक में टेसू व अन्य फूल खिले होते हैं तब फागुन की पूर्णिमा की रात लकडिय़ों व उपलों से बनी  होली का  विधिवत पूजन कर, गुझिया पपड़ी आदि पकवानों का  भोग लगा कर होलिका दहन किये जाने की परम्परा है। इस बहाने लोग एकत्रित होते हैं, उत्सवी माहौल में नाचने गाने मिलने मिलाने और किंचित पनपी परस्पर कुंठायें व वैमनस्य भूल कर नई शुरुवात करने के अवसर उत्पन्न होते हैं। दूसरी सुबह लोग रंग गुलाल लगा कर खुशियां साझा करते हैं।

सारी दुनिया की विभिन्न सभ्यताओं में  रंगो से मन का उल्लास प्रगट किया जाता है होली की ही तरह रंगो के तथा अग्नि जलाने के अनेक त्यौहार विश्व के अलग अलग भूभाग पर अलग अलग समय में अलग अलग नामों से मनाये जाते हैं, जो किंचित सभ्यताओ के मिलन या परस्पर प्रभाव जनित हो सकते हैं  किन्तु यह तथ्य है कि होली भारत का अति प्राचीन पर्व है, जो होली, होलिका या होलाका नाम से मनाया जाता था।  वसंत की ऋतु में हर्षोल्लास के साथ मनाए जाने के कारण इसे वसंतोत्सव भी कहा जाता है. यह पर्व अधिकांशत: उत्तरी  भारत में प्रमुखता से  मनाया जाता है।

होली मनाये जाने का उल्लेख  कई पुरातन  पुस्तकों में भी मिलता है जैसे जैमिनी के पूर्व मीमांसा-सूत्र और कथा गार्ह्य-सूत्र , नारद पुराण औऱ भविष्य पुराण जैसे पुराणों की प्राचीन हस्तलिपियों  में भी होली का वर्णन मिलता है। प्रसिद्ध मुस्लिम पर्यटक अलबरूनी ने  अपने ऐतिहासिक यात्रा संस्मरण में होलिकोत्सव का उल्लेख किया है।  भारत के अनेक मुसलमान कवियों ने अपनी रचनाओं में इस बात का उल्लेख किया है कि होली का त्यौहार केवल हिंदू ही नहीं मुसलमान भी मनाते थे। अकबर और जोधा  तथा जहाँगीर का नूरजहाँ के  साथ होली खेलने का वर्णन मिलता है। अलवर संग्रहालय के एक चित्र में जहाँगीर को होली खेलते हुए दिखाया गया है।

वर्णन है कि शाहजहाँ के ज़माने में होली को ईद-ए-गुलाबी या आब-ए-पाशी (रंगों की बौछार) कहा जाता था। अंतिम मुगल बादशाह, बहादुर शाह जफ़ऱ के बारे में प्रसिद्ध है कि होली पर उनके मंत्री उन्हें रंग लगाने जाया करते थे। मध्ययुगीन हिन्दी साहित्य में दर्शित कृष्ण की लीलाओं में भी होली का विस्तृत वर्णन मिलता है।  प्राचीन चित्रों, भित्तिचित्रों और मंदिरों की दीवारों पर होलिका दहन व रंग खेलने के चित्र देखने मिलते हैं.  विजयनगर की राजधानी हंफी के 16वीं शताब्दी के एक चित्र फलक पर  राजकुमारों और राजकुमारियों को दासियों सहित रंग और पिचकारी के साथ राज दम्पत्ति को होली के रंग में रंगते हुए दिखाया गया है।

संस्कृत साहित्य में होली के अनेक रूपों का विस्तृत वर्णन है।  श्रीमद्भागवत महापुराण में रसों के समूह रास का वर्णन है। अन्य रचनाओं में रंग नामक उत्सव का वर्णन है जिनमें हर्ष की प्रियदर्शिका व रत्नावली तथा कालिदास की कुमारसंभवम् तथा मालविकाग्निमित्रम् शामिल हैं।  कालिदास रचित ऋतुसंहार में पूरा एक सर्ग ही वसन्तोत्सव को अर्पित है। भारवि, माघ और अन्य कई संस्कृत कवियों ने वसन्त की खूब चर्चा की है।

चंद बरदाई द्वारा रचित हिंदी के पहले महाकाव्य पृथ्वीराज रासो में होली का वर्णन है। भक्तिकाल और रीतिकाल के हिन्दी साहित्य में होली और फाल्गुन माह का विशिष्ट महत्व रहा है। आदिकालीन कवि विद्यापति से लेकर भक्तिकालीन सूरदास, रहीम, रसखान, पद्माकर, जायसी, मीराबाई, कबीर और रीतिकालीन कवि बिहारी, केशव, घनानंद आदि अनेक कवियों को होली वर्णन  प्रिय रहा है।

राधा कृष्ण के बीच खेली गई प्रेम और छेड़छाड़ से भरी होली के माध्यम से सगुण साकार भक्तिमय प्रेम और निर्गुण निराकार भक्तिमय प्रेम का निष्पादन कवियों ने किया है।

सूफ़ी संत हजऱत निज़ामुद्दीन औलिया, अमीर खुसरो और बहादुर शाह जफ़ऱ जैसे मुस्लिम संप्रदाय का पालन करने वाले कवियों ने भी होली पर सुंदर रचनाएँ लिखी हैं जो आज भी जन सामान्य में लोकप्रिय हैं।

आधुनिक हिंदी कहानियों में प्रेमचंद की राजा हरदोल, प्रभु जोशी की अलग अलग तीलियाँ, तेजेंद्र शर्मा की एक बार फिर होली, ओम प्रकाश अवस्थी की होली मंगलमय हो तथा स्वदेश राणा की हो ली में होली के अलग अलग रूपों के वर्णन देखने को मिलते हैं।  भारतीय फिल्मों में भी होली के दृश्यों और गीतों को प्रमुखता व सुंदरता के साथ चित्रित किया गया है।

वैष्णव व शैव संप्रदायों ने होली की व्याख्या अपने अपने इष्ट के अनुरूप कर ली थी।  होलिका  दहन की प्रह्लाद की सुप्रसिद्ध कथा के अतिरिक्त यह पर्व  राधा कृष्ण के रास और कामदेव के पुनर्जन्म से भी जोड़ कर मनाया जाता है तो दूसरी ओर शैव संप्रदाय का  मानना है कि होली में रंग लगाकर, नाच-गाकर लोग शिव के गणों का वेश धारण करते हैं तथा शिव की बारात का दृश्य बनाते हैं।

वर्तमान स्वरूप में होली का त्यौहार सार्वजनिक उत्सव के रूप में ही अधिक लोकप्रिय हो चला है।  मोहल्लो के चौराहो, क्लबो, सोसायटियों में या सार्वजनिक मैदाननों पर युवको की टोलियां सार्वजनिक चंदे से होली का झंडा गाड़कर उसके चारो और लकडिय़ां लगाकर और होलिका व प्रहलाद की मूर्तियां सजाकर विद्युत प्रकाश से रंगबिरंगी सजावट कर डी जे पर गीत संगीत बजाकर होली का दहन का आयोजन करते हैं।

पारम्परिक रूप से गांवो में  भरभोलिए जलाने की भी परंपरा है। भरभोलिए गाय के गोबर से बने ऐसे उपले होते हैं जिनके बीच में छेद होता है, इस छेद में मूँज की रस्सी डाल कर माला बनाई जाती है। एक माला में सात भरभोलिए होते हैं। होली में आग लगाने से पहले इस माला को बहने भाइयों के सिर के ऊपर से सात बार घूमा कर फेंक देती है।  रात को होलिका दहन के समय यह माला होलिका के साथ जला दी जाती है। इसका यह आशय है कि होली के साथ भाइयों पर लगी बुरी नजऱ भी जल जाए।  इस आग में नई फसल की गेहूँ की बालियों और चने के होले को भी भूना जाता है।  होलिका का दहन समाज की समस्त बुराइयों के अंत का प्रतीक है। कटते जंगलो को बचाने और व्यर्थ जलाई जाती लकड़ी के अपव्यय को रोकने के लिये इस वर्ष गोबर के कंडो की ही होली जलाने की अपील नेताओ द्वारा की जाती दिख रही है यह शुभ संकेत है, हमेशा से हिन्दू परम्परायें समय के साथ नव परिवर्तन को स्वीकारती आई हैं। यह परिवर्तन भी पर्यावरण की रक्षा हेतु उठाया जा रहा एक स्वागतेय कदम है।

होली से अगला दिन धूलिवंदन कहलाता है,  इस दिन लोग गुलाल और  रंगों से खेलते हैं।   सुबह होते ही सब अपने मित्रों और रिश्तेदारों से मिलने निकल पड़ते हैं।  गुलाल और रंगों से सबका स्वागत किया जाता है। लोग अपनी ईष्र्या-द्वेष की भावना भुलाकर प्रेमपूर्वक गले मिलते हैं तथा एक-दूसरे को रंग लगाते हैं।  इस दिन जगह-जगह टोलियाँ रंग-बिरंगे कपड़े पहने नाचती-गाती दिखाई पड़ती हैंन  बच्चे पिचकारियों से रंग छोड़कर अपना मनोरंजन करते हैं।  सारा समाज होली के रंग में रंगकर एक-सा बन जाता है।  रंग खेलने के बाद देर दोपहर तक लोग नहाते हैं और शाम को नए वस्त्र पहनकर सबसे मिलने जाते हैं।  प्रीति भोज तथा गाने-बजाने, कविताओं, हास्य विनोद के कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।

घरों में गुझिये, खीर, पूरी कचौड़ी, दही बड़े आदि विभिन्न व्यंजन बनाये जाते हैं,  भांग और ठंडाई इस पर्व के विशेष पेय होते हैं।

स्थानीय परम्पराओं के साथ होली का पर्व मनाने में विभिन्नता परिलक्षित होती है।  ब्रज की होली आज भी सारे देश के आकर्षण का बिंदु होती है.  बरसाने की लठमार होली काफ़ी प्रसिद्ध है। इसमें पुरुष महिलाओं पर रंग डालते हैं और महिलाएँ उन्हें लाठियों तथा कपड़े के बनाए गए कोड़ों से मारती हैं।  इसी प्रकार मथुरा और वृंदावन में भी 15 दिनों तक होली का पर्व मनाया जाता है।  कुमाऊँ की गीत बैठकी में शास्त्रीय संगीत की गोष्ठियाँ होती हैं।  हरियाणा की धुलंडी में भाभी द्वारा देवर को सताए जाने की प्रथा है।  बंगाल की दोल जात्रा चैतन्य महाप्रभु के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है,  जलूस निकलते हैं और गाना बजाना भी साथ रहता है। महाराष्ट्र की रंग पंचमी में सूखा गुलाल खेलने, गोवा के शिमगो में जलूस निकालने के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन तथा पंजाब के होला मोहल्ला शक्ति प्रदर्शन तो  तमिलनाडु की कमन पोडिगई मुख्य रूप से कामदेव की कथा पर आधारित वसंतोत्सव है।  मणिपुर में  योंगसांग उस नन्हीं झोंपड़ी का नाम है जो पूर्णिमा के दिन प्रत्येक नगर-ग्राम में नदी अथवा सरोवर के तट पर बनाई जाती है, दक्षिण गुजरात के आदिवासियों के लिए होली सबसे बड़ा पर्व है, छत्तीसगढ़ की होरी में