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मैं सेमीकंडक्टर्स में आरआरपी इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रवेश से उत्साहित हूं-सचिन तेंदुलकर

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मुंबई : आरआरपी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने एक प्रतिष्ठित यूरोपीय कंसोर्टियम के साथ एक ऐतिहासिक सहयोग में गर्व से महाराष्ट्र की अग्रणी सेमीकंडक्टर सुविधा के उद्घाटन की घोषणा की। यह अभूतपूर्व प्रयास एक बड़ी छलांग का प्रतीक है, जो महाराष्ट्र को सेमीकंडक्टर इनोवेशन और विनिर्माण में एक वैश्विक पावरहाउस के रूप में स्थापित करता है। देश को सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी में अद्वितीय नवाचार और वैश्विक नेतृत्व की ओर प्रेरित कर रहा है।
      श्री राजेंद्र के चोदनकर (आरआरपी एस4ई इनोवेटिव प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक, प्रमोटर, अध्यक्ष और सीईओ) का कहना है, “मैं आरआरपी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा महाराष्ट्र की अग्रणी सेमीकंडक्टर सुविधा के अनावरण से उत्साहित हूं। यह महत्वपूर्ण अवसर न केवल हमारी तकनीकी यात्रा में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है, बल्कि नवाचार और आकार देने के लिए हमारी अटूट प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।
     प्रसिद्ध भारतीय परमाणु भौतिक विज्ञानी और मैकेनिकल इंजीनियर डॉ. अनिल काकोडकर कहते हैं, _”महाराष्ट्र की अग्रणी सेमीकंडक्टर सुविधा का उद्घाटन भारत की तकनीकी शक्ति में एक लंबी छलांग का प्रतीक है। मैं इस परिवर्तनकारी यात्रा का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं, जो हमारे देश को सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी में अद्वितीय नवाचार और वैश्विक नेतृत्व की ओर प्रेरित कर रहा है।
     सचिन तेंदुलकर कहते हैं, “आज हम रोमांचक समय में रह रहे हैं, जब भारत ऐसे उद्योगों का निर्माण कर रहा है जो भविष्य में दुनिया पर सकारात्मक प्रभाव डालेंगे। मैं उन प्रौद्योगिकियों और उद्यमियों का समर्थन करके खुश हूं जो इस कहानी का हिस्सा हैं। सेमीकंडक्टर्स में आरआरपी इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रवेश के लिए मेरा समर्थन इसी विश्वास से उपजा है। मैं आरआरपी इलेक्ट्रॉनिक्स की टीम को उनके प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देता हूं।”

गणेश शंकर विद्यार्थी : बलिदान दिवस 25 मार्च -पत्रकार लिखते ही नहीं हैं शहीद भी होते हैं

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दिनेश चंद्र वर्मा –

आज जब पत्रकारिता मात्र व्यवसाय में परिवर्तित हो गई है, तब यह प्रश्न भी उठता है कि क्या पत्रकारों का काम लिखना मात्र ही है? इस प्रश्न का उत्तर दुनिया के अन्य देशों के पास हो ना हो, भारत की पत्रकारिता के पास अवश्य है।  भारत में पत्रकारिता का उद्भव और विकास केवल लिखने के लिये नहीं हुआ, अपितु भारतीय पत्रकारिता ने शहादत के सुनहरे अध्याय भी लिखे हैं। स्व. गणेश शंकर विद्यार्थी का जीवन और बलिदान इसका श्रेष्ठ उदाहरण है।
बलिदानी पत्रकार गणेशशंकर विद्यार्थी इसी दृष्टि से न केवल भारतीय पत्रकारिता के अपितु विश्व पत्रकारिता के प्रेरणापुंज बन गये हैं।  वस्तुत: उनका जीवन पत्रकारिता का ऐसा आदर्श है, जिसमें तत्कालीन समाज, देश और काल का  आवश्यकताओं का संपूर्ण समावेश था। राष्ट्र और समाज के लिये अपने जीवन की आहुति देकर विद्यार्थी जी ने जो उदाहरण उपस्थित किया है, वह पत्रकारों के लिये ही नहीं अपितु देश और समाज के लिये भी एक अनुपम उदाहरण है।
विदिशा और मुंगावली में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात गणेश शंकर जी को विद्या अध्ययन हेतु अपने बड़े भाई श्री शिवव्रत नारायण के पास कानपुर जाना पड़ा।  कानपुर के क्राइस्ट चर्च कालेज से उन्होंने उच्च श्रेणी में एन्ट्रेन्स परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद विद्या अध्ययन हेतु वे इलाहाबाद गये। इलाहाबाद में उनकी भेंट कर्मवीर सुंदरलाल जी से हुई। फलस्वरूप विद्यार्थी जी सुंदरलाल जी के पत्र कर्मयोगी के अतिरिक्त स्वराज्य में भी राजनीति और क्रांतिकारी लेख लिखने लगे। इन लेखों में स्वतंत्रता के प्रति उनकी तड़प उजागर होती थी। इसके उपरांत उन्होंने सरस्वती में उपसंपादक का कार्य करना शुरू किया। इलाहाबाद में सरस्वती में काम करने के साथ उनका महान पत्रकार, समाजसेवी एवं राजनेता पंडित मदनमोहन मालवीय से संपर्क हुआ। मालवीय जी से प्रभावित होकर विद्यार्थी जी ने अभ्युदय नामक समाचार पत्र में काम करना शुरू किया, जो स्वयं मालवीय जी निकालते थे। इस अवधि में उनका देश के क्रांतिकारियों से भी संपर्क हुआ।
सरदार भगत सिंह, विद्यार्थी जी को अपना गुरू मानते थे।  चंद्रशेखर आजाद, बटुकेश्वर दत्त, सुखदेव और राजगुरू सरीखे अमर क्रांतिकारियों से विद्यार्थी जी के इस अवधि में निकट संबंध रहे। दूसरी ओर अहिंसा के मार्ग से स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय नेताओं से भी उनके मधुर संबंध थे। गांधीजी उन्हें अहिंसा का पुजारी कहते थे।
अभ्युदय में विद्यार्थी जी को बीस रुपये मासिक वेतन मिलता था, पर इसके बदले में उन्हें रात- दिन मेहनत करनी पड़ती थी। अधिक मेहनत के कारण विद्यार्थी जी बीमार हो गये और काफी समय तक अस्वस्थ रहे। बीमारी से उठने के बाद विक्रमी संवत् 1970 की देवोत्थान एकादशी अर्थात 9 नवम्बर 1913 को विद्यार्थी जी ने कानपुर से प्रताप का प्रकाशन एवं संपादन प्रारंभ किया। प्रताप उन दिनों राष्ट्रीयता और देशभक्ति का प्रतीक पत्र था। उसके प्रथम पृष्ठ पर यह पंक्तियां अंकित रहती थी।
जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है।
वह नर नहीं नर पशु निरा और मृतक समान है।
प्रताप पहले साप्ताहिक समाचार पत्र था, पर वह जनता में इतना लोकप्रिय हो गया कि सात वर्ष बाद वह दैनिक के रूप में प्रकाशित होने लगा।  प्रताप ने देशभक्ति का जो उद्घोष किया उससे विद्यार्थी जी अंग्रेजों की आंख की किरकिरी बन गये। उन्हें पांच बार जेल यात्रा करनी पड़ी। प्रताप उन दिनों देश के स्वतंत्रता संग्राम की धुरी में परिवर्तित हो चुका था। विद्यार्थी जी और उनका प्रेम क्रांतिकारियों के लिये शरणस्थली था। श्री भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, बटुकेश्वर दत्त, शचिंद्र सान्याल, रामेंद्र लाहिड़ी एवं अशफाक उल्ला आदि क्रांतिकारी महीनों तक प्रताप प्रेस में ही रहते थे तथा क्रांति की योजनायें बनाते थे।
अंग्रेज भारत की आजादी की लड़ाई का मुकाबला फूट डालो और राज करो की कलुषित कूटनीति से कर रहे थे। इसी कूटनीति के फलस्वरूप सन् 1931 में कानपुर में भयानक दंगा फैल गया।  9 मार्च सन् 1931 को विद्यार्थी जी जेल से छूटे और रात दिन इन दंगों में सांप्रदायिक सद्भावना स्थापित करने के लिये अथक परिश्रम करते रहे।  पूरे कानपुर शहर में मारकाट मची हुई थी। मकान जल रहे थे। ऐसी ही हालत में विद्यार्थी जी दो अन्य समाजसेवी ज्वाला दत्त और शंकर राव कालीगार के साथ दंगाग्रस्त क्षेत्रों में अमन-चैन के प्रयास कर रहे थे। कानपुर के बकरमंडी क्षेत्र में एक परिवार को बचाने का जब वे प्रयास कर रहे थे तब दो सौ से अधिक आतताईयों ने उन पर प्राणघातक हमला कर दिया और इस तरह विद्यार्थी जी राष्ट्र के लिये और समाज के लिये शहीद हो गये।
अंग्रेजों ने विद्यार्थी जी की मौत को बिल्कुल गुप्त रखा था।  कानपुर में कर्फ्यू लगा हुआ था, फिर भी उनके अंतिम संस्कार में भारी संख्या में लोग शामिल हुए और इसी शहादत ने यह सिद्ध कर दिया कि पत्रकार केवल लिखते ही नहीं बल्कि, देश, समाज और सांप्रदायिक एकता के लिये शहीद भी होते हैं। (विनायक फीचर्स)

होली उत्सव में जानवरों को सुरक्षित रखें-लिज़ा मलिक

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मुंबई (अनिल बेदाग ) : लिज़ा मलिक को भारतीय मनोरंजन उद्योग में न केवल अपनी प्रतिभा और क्षमता के कारण प्यार और सम्मान मिलता है, बल्कि इससे भी बहुत कुछ है।  किसी भी अन्य चीज़ से अधिक, वह एक अच्छी इंसान के रूप में जानी जाती हैं, जो एक बहुत बड़ी पशु प्रेमी भी हैं और यह निश्चित रूप से उनके दयालु हृदय के बारे में बताता है। वह एक विशाल पशु प्रेमी है और जिस तरह से वह अपनी ‘फर बेबी’ एम्मा से प्यार करती है और उसका पालन-पोषण करती है, वह इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है।  एम्मा के चेहरे पर स्याही लगवाने से लेकर अपनी एड्रेस प्लेट के एक हिस्से को ‘एम्मा हाउस’ कहकर समर्पित करने तक, उन्होंने दिल जीतने के लिए कई मनमोहक काम किए हैं।  हालाँकि, इस बार, सबसे अधिक उत्साहजनक बात यह है कि वह आसपास के सभी जानवरों के लिए स्टैंड लेने के लिए खुले में आ गई है।  हाँ यह सही है।
 होली पर जहां कुछ लोग जानवरों पर रंगों के हानिकारक प्रभावों को जाने बिना प्यार और करुणा के कारण ऐसा करते हैं, वहीं कुछ लोग जानबूझकर जानवरों को परेशान करने के लिए अमानवीय तरीके से ऐसा करते हैं।
बेजुबानों के लिए स्टैंड लेते हुए लिज़ा ने दृढ़ता से अपनी राय व्यक्त की और कहा कि कुछ लोगों को वास्तव में शिक्षित होने की ज़रूरत है। कुछ लोग इसे केवल मनोरंजन के लिए करते हैं क्योंकि उनका दोषी आनंद बेजुबानों को परेशान करना है। जबकि इस देश के एक व्यक्ति और जिम्मेदार नागरिक के रूप में मैं केवल इतना ही कह सकती हूं कि कृपया अपने उत्सवों को केवल होली तक ही सीमित रखें। जानवरों का होली से कोई लेना-देना नहीं है और न ही उन्होंने आपसे उन्हें शामिल करने के लिए कहा है। इसलिए, कृपया उन्हें मनाएं। मैं केवल अपने तक ही सीमित हूं। मैं किसी के भी त्योहार मनाने के खिलाफ नहीं हूं। कृपया जश्न मनाएं और आनंद लें। कृपया सुनिश्चित करें कि जानवर सुरक्षित हैं क्योंकि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है कि उन्हें किसी भी तरह का गलत व्यवहार करना पड़े। कम से कम हम उनके प्रति दयालु हो सकते हैं। .हमारी ओर से उन्हें सचमुच बस यही चाहिए।

‘दो और दो प्यार’ का टीजर हुआ रिलीज़ 

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विद्या बालन, प्रतीक गांधी, इलियाना डिक्रूज  और सेंथिल राममूर्ति अभिनीत बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘दो और दो प्यार’ का टीज़र रिलीज कर दिया गया है, जिसमें एक प्रेम कहानी की झलक दिखाई गई है जो जितनी आश्चर्यजनक है उतनी ही मनोरंजक भी। टीज़र भावनाओं, मज़ेदार संवादों और रिश्तों के उलझे जाल को दर्शाता है। अवार्ड विनिंग ऐड फिल्म मेकर शीर्ष गुहा ठाकुरता द्वारा निर्देशित फ्रेश पेयरिंग इस जॉनर की फिल्म में एक नई एनर्जी लाती है। दर्शकों को बहुत आनंद आएगा क्योंकि वे प्यार, हँसी और मॉडर्न रिलेशनशिप की कॉम्प्लिकेशन से खुद को रिलेट कर पाएंगे। इस फिल्म का म्यूजिक निश्चितरूप से सिनेप्रेमियों के दिल को छू जायेगा।अप्लॉज़ एंटरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत एलिप्सिस एंटरटेनमेंट प्रोडक्शन की फिल्म ‘दो और दो प्यार’ 19 अप्रैल को सभी सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

नाइट्रो सौंदर्य प्रतियोगिता 2024 में सौंदर्य, प्रतिभा और सशक्तिकरण का उत्सव

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मुंबई (अनिल बेदाग): नाइट्रो बेस्पोक फिटनेस ने बहुप्रतीक्षित नाइट्रो ब्यूटी कॉन्टेस्ट की गर्व से मेजबानी की। यह आयोजन उम्मीदों से बढ़कर था, जो सुंदरता, प्रतिभा और सशक्तिकरण का एक रोमांचक उत्सव पेश करता था। इसने एक मनोरम शाम में ग्लैमर, खेल कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी का सहज मिश्रण किया जिसने उपस्थित लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया।
इस आयोजन का एक मुख्य आकर्षण वसंत डावखरे फाउंडेशन द्वारा समर्थित छोटी अनाथालय की बच्चियों को शामिल करना था, जिन्होंने अन्य प्रतियोगियों के साथ भाग लिया, जिससे प्रतियोगिता में एक उत्साहजनक आयाम जुड़ गया।
शाम की शुरुआत शॉर्टलिस्टिंग राउंड से हुई, जहां प्रतिभागियों ने रैंप पर अपनी बेहतरीन अदाएं और सुंदरता और आकर्षण का प्रदर्शन किया।
 सैलून” ने प्रतिभागियों की उपस्थिति को निखारने के लिए ग्रूमिंग सत्र आयोजित किए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे रैंप पर आत्मविश्वास और शैली बिखेरें।
स्टर्च ब्रांड द्वारा प्रायोजित, इस अनूठे राउंड में एक स्पोर्ट्स वॉक का आयोजन किया गया, जिससे प्रतिभागियों को रैंप के सबसे आगे प्रभावशाली गतिविधियों के साथ अपनी फिटनेस कौशल प्रदर्शित करने का मौका मिला।
 ग्रैंड फिनाले में एक ग्लैमरस वॉक और एक आकर्षक प्रश्नोत्तर सत्र शामिल था। इंटरैक्टिव सत्र के दौरान वॉक और प्रतिभागियों की वाक्पटुता दोनों के लिए अंक प्रदान किए गए।
 इस कार्यक्रम में दिल छू लेने वाला स्पर्श जोड़ते हुए, वसंत डावखरे फाउंडेशन द्वारा समर्थित अनाथ बच्चों ने रैंप की शोभा बढ़ाई, जो परोपकार और समावेशिता का प्रतीक है।
कड़े राउंड के बाद, शीर्ष 3 प्रतिभागियों को उनके असाधारण प्रदर्शन और शालीनता को स्वीकार करते हुए विजेताओं का ताज पहनाया गया।
नाइट्रो फिटनेस के अध्यक्ष प्रबोध वी दावखरे ने कहा, ”नाइट्रो सौंदर्य प्रतियोगिता के माध्यम से, हमारा लक्ष्य न केवल बाहरी सुंदरता, बल्कि आंतरिक शक्ति, आत्मविश्वास और लचीलेपन का भी जश्न मनाना है। यह एक ऐसा मंच है जहां व्यक्ति अपने अद्वितीय आकर्षण और प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं, दूसरों को अपने व्यक्तित्व को अपनाने और जुनून और दृढ़ संकल्प के साथ अपने सपनों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। उन खूबसूरत बच्चों का होना हमारे लिए अत्यंत सम्मान की बात थी। “

जो पार्टियां भारत की भूमि से गौ हत्या बन्द करने का शपथ-पत्र देंगी उसे समर्थन

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पलवल  गौ को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए पदयात्रा कर रहे जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने पलवल में प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा की सनातन धर्म में गौ हत्या महापाप है। गोहत्या करने वाले को समर्थन देने वाले को भी यह पाप लगता है। इसलिये सत्ता में आकर गोहत्या करने वाले राजनीतिक दलों को मत देकर उन्हें सत्ता में लाने वाले मतदाताओं को भी गोहत्या का पाप लग रहा है। हिन्दुओं को इससे बचने और अपने मताधिकार का सही प्रयोग करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा की इसी उद्देश्य को लेकर उन्होंने यह पदयात्रा शुरू की है।

जगदगुरू शंकराचार्य ने कहा कि हमारे शास्त्र हमें बताते हैं कि गौमाता सर्वदेवमयी है। इनकी पूजा करने से 33 करोड देवी-देवताओं की पूजा एक साथ हो जाती है। इनका स्थान सर्वोपरि है। तभी तो सनातन धर्म में देवता और गुरु के लिए नहीं, अपितु गौमाता के लिए पहली रोटी (गौ-ग्रास) निकालने का नियम है।
हमारे देश का यह भी गौरवपूर्ण इतिहास रहा है कि चक्रवर्ती सम्राट दिलीप और भगवान राम कृष्ण आदि ने भी गौ सेवा की है। परन्तु बहुसंख्यक गौ-पूजक सनातनियों के इस देश में आज गौमाता की हत्या हो रही है जो हम सबके लिए कलंक है। इसी कलंक को भारत की भूमि से मिटाने के लिए पूर्व में भी अनेक संतों ने धर्म सम्राट स्वामी श्री करपात्री जी महाराज एवं शंकराचार्यों के नेतृत्व में गोरक्षा आंदोलन किया था।
तब से अब तक अनेक सरकारें आईं पर किसी ने भी गोहत्या बंदी की उद्घोषणा नहीं की बल्कि मुगलों, आक्रमणकारियों और अंग्रेजों द्वारा की जा रही गौ हत्या को बढ़ावा देती रहीं। अब जब देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है और रामजी के आने की बात कही जा रही है तब भी अमृत (दूध) देने वाली गोमाता की हत्या होती रहे तो ये सरासर अन्याय है और आम हिन्दू मतदाताओं को पाप में डालने वाला काम है जिसे किसी भी दशा में रोका जाना चाहिए। इसलिए हम सब हिन्दू सनातनी चाहते हैं कि भारत में गोहत्या को दंडनीय अपराध माना जाए और गौमाता को पशु सूची से निकालकर राष्ट्रमाता का सम्मान दिया जाए। उन्होंने कहा की आगामी चुनाव में कौन सी पार्टी सत्ता में आएगी यह अभी से नहीं कहा जा सकता।
इसलिए आप सब यह स्पष्ट निर्णय कर लें कि जिस भी पार्टी की सरकार बने उसे शपथ ग्रहण करते ही सबसे पहला कार्य गोहत्या बंद कराकर गौ को राष्ट्र माता घोषित करने का कार्य करना होगा। आपके द्वार पर जो भी वोट लेने आए उनसे आप ये कह सकते हैं कि गौ हत्या न करने का शपथ-पत्र लिखित रूप से देने पर ही वोट दिया जाएगा ताकि आपको स्वयं गोहत्या का पाप न लगे।गोमाता को राष्ट्र माता घोषित कराने के लिए हम स्वयं 14 फरवरी 2024 को  वृंदावन से दिल्ली तक की पदयात्रा कर रहे हैं। यह यात्रा गोवर्धन परिक्रमा से आरम्भ होगी और वर्ष 1966 में जहाँ गौ भक्तों पर गोली चली थी संसद भवन दिल्ली के उस स्थान पर जाकर गो की रक्षा करने के संकल्प के साथ पूर्ण होगी। मार्ग में सभी राजनीतिक दलों को अवसर होगा कि वे यात्रा में सम्मिलित होकर गोरक्षा का संकल्प लें और उद्घोषणा करें।
एनडीए और इंडिया की तर्ज पर होगा गो-गठबंधन
जो पार्टियां भारत की भूमि से गौ हत्या बन्द करने का शपथ-पत्र देंगी वे पार्टियां इस यात्रा में सम्मिलित होकर अपना शपथ-पत्र दे सकती हैं। जो भी राजनीतिक दल इस प्रकार का शपथ-पत्र देकर भारत से गौ हत्या बन्द कराने की स्पष्ट घोषणा करेगा हम उस दल को गो-गठबन्धन का अंग मानकर मतदान करने के लिए सनातनी हिन्दू समाज से अपील करेंगे क्योंकि ऐसे दल को वोट देने से कम से कम गोहत्या का पाप तो हम और आप सब हिन्दुओ को न लगेगा।

मध्य प्रदेश तमाशा -ए -आईएएस बेलगाम अफसर, शिष्टाचार होता तार-तार

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 *पवन वर्मा, विनायक फीचर्स*
मध्य प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस )के अफसर हो या भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस ) के अफसर हो, अधिकांश को  अपने कुशल व्यवहार और शिष्टाचार के लिए जाना जाता रहा है। मध्य प्रदेश के लोग भी शिष्टाचार के लिए अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं, लेकिन पिछले कुछ महीनों से भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर अपने व्यवहार से पूरे देश की ब्यूरोक्रेसी में चर्चा का विषय बन गए हैं।  मध्य प्रदेश के ये अफसर अपने अच्छे कामों की जगह  अपने खराब व्यवहार और शिष्टाचार को तार-तार करने के कारण पूरे देश में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। खासबात यह है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव  खराब व्यवहार और काम के प्रति लापरवाह अफसरों को लेकर सख्त है, इसके बाद भी अफसर उसी परिसर में भिड़ गए जहां मुख्यमंत्री स्वयं बैठते हैं। 
ताजा मामला जेल विभाग के प्रमुख सचिव (प्रिंसिपल सैकेट्री) मनीष रस्तोगी और इसी विभाग के सचिव ललित दाहिमा का सामने आया है। दोनों ही आईएएस अफसर हैं। अंतर इतना है कि मनीष रस्तोगी डायरेक्ट आईएएस बने हैं, जबकि दाहिमा मध्य प्रदेश राज्य प्रशासनिक सेवा से पदोन्नत होकर आईएएस अवार्ड हुए हैं। दोनों अफसरों का विवाद उस परिसर में हुआ जिसमें मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सहित सभी मंत्री और मध्य प्रदेश की मुख्य सचिव वीरा राणा का दफ्तर हैं। उसी परिसर में दोनों अफसरों के बीच जमकर तू-तू-मैं-मैं हो गई।
 * आखिर क्यों देश भर में चर्चित हुए मध्य प्रदेश के अफसर* 
विभाग के सचिव ललित दाहिमा ने विवाद से एक दिन पहले ही कार्यभार संभाला था। बीस मार्च की सुबह लगभग दस बजे प्रमुख सचिव की पीए ने फोन कर सचिव दाहिमा, उपसचिव कमल नागर और अन्य संबंधित अफसरों – कर्मचारियों को चर्चा के लिए बुलाया था। दाहिमा मंत्रालय आए तो चार मिनट लेट हो गए। रस्तोगी अपने सचिव के देरी से आने पर नाराज हो गए और इसके साथ ही विवाद शुरू हो गया। दोनों अफसर एक दूसरे से तेज आवाज में बात करने लगे। मनीष रस्तोगी के कक्ष के दरवाजे बंद नहीं रहते इसलिए आवाज बाहर तक जा रही थी और मंत्रालय के कई कर्मचारी  और अन्य लोग वहां एकत्रित हो गए। रस्तोगी ने फाइलों पर नोटिंग को लेकर भी आपत्ति जताते हुए दाहिमा को इससे रोका। इससे विवाद और बढ़ गया। अब मामला मध्य प्रदेश की मुख्य सचिव वीरा राणा तक पहुंच गया है। ललित दाहिमा ने इस पूरे मामले की शिकायत मुख्य सचिव को की है। जब यह विवाद हुआ तब प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी के चैम्बर का दरवाजा खुला हुआ तो जेल विभाग के अधिकांश अफसरों और कर्मचारियों ने इस विवाद को देखा और सुना। इसके बाद यह खबर मध्य प्रदेश की सुर्खियों में आ गई।
 *रस्तोगी का विवादों से रहा है नाता-* 
सामान्य प्रशासन विभाग और जेल विभाग के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी का विवादों से पुराना नाता रहा है। राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव रहते हुए उनके अधीनस्थ उपसचिव रहे राजेश ओगरे से भी उनका विवाद हो चुका है। ओगरे अपनी बहन के दिवंगत होने पर तीन दिन छुट्टी लेकर चले गए थे। वापस आने पर बातचीत के दौरान रस्तोगी ने उनसे यह बोल दिया था कि किसी की मृत्यु होने से कामकाज नहीं रुक जाता। इस पर ओगरे पंद्रह दिन की मेडिकल लीव लेकर चले गए और दुबारा यहां वापस नहीं आए। उनकी मेडिकल लीव रस्तोेगी ने स्वीकृत नहीं की। इसी तरह राजस्व विभाग में पोस्टिंग के बाद काम नहीं मिलने पर प्रमुख सचिव से मिलने पहुंची उपसचिव नेहा मारव्या से भी रस्तोगी का विवाद हो गया था। नेहा ने इसकी शिकायत भी उच्च स्तर पर की थी।
 *आईएएस अफसर कन्याल दिखा रहे थे ड्राइवर को औकात* 
शाजापुर के पूर्व कलेक्टर किशोर कन्याल बीते दिनों ट्रक ड्राइवर को ‘तुम्हारी औकात क्या है’ से चर्चा में आ गए थे। दरअसल ट्रक ड्राइवर्स के साथ मीटिंग में तत्कालीन कलेक्टर किशोर कन्याल उग्र हो गए, क्योंकि एक ड्राइवर ने उनकी बात काट कर अपनी बात रखी। इस पर कलेक्टर साहब ने ट्रक ड्राइवर को कह दिया कि तुम्हारी औकात क्या है।इस घटना का  वीडियो देश भर में जमकर वायरल हुआ। इसके बाद कलेक्टर को यहां से हटाया गया। यह मामला दो महीने पहले का है।(विनायक फीचर्स)

कामदेव की पूजा का पर्व :  होली

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(डॉ. हरिप्रसाद दुबे – विनायक फीचर्स)

प्रेम की होली ऐसी है जिसका रंग कभी नहीं छूटता। अन्य सारे रंग कच्चे रंग हैं। होली बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है। यह प्रेम के रंग में रंगकर आनन्द लुटाने आती है। होली प्रेम के विस्तार का पर्व है।  बसन्तोत्सव, कामोत्सव अथवा मदनोत्सव या होली सभी काम के उदात्तीकरण के उत्सव हैं।
फाल्गुन मास की पूर्णिमा को अनंग उत्सव मनाने की परम्परा ही होलिका दहन के रूप में परिवर्तित हो गई। होली प्रकृति का रसीला पर्व है। बसंत के मुख्य मास चैत्र, बैसाख ‘मधुमाधव  है। बसन्त में मधु रस वर्षण होता है। कवि कालिदास ऋतुसंहार में कहते हैं बसन्त आगमन पर सभी वृक्ष फूलों से लदे हैं जल में कमल खिले हैं। स्त्रियां मतवाली हो चली हैं। सांझ सुहावनी दिन सुन्दर हो गए हैं।  मानव की मूल प्रवृत्ति काम को देवत्व प्रदान करना भारतीय मनीषा द्वारा ही संभव है। काम का संदर्भ ऋग्वेद से लेकर उपनिषद तक सर्वत्र प्राप्त होता है। महाकाव्य परम्परा और पौराणिक परंपरा में कामदेव वेशभूषा के देवता के रूप में प्रतिष्ठित हैं। इनके लिए पूजा, यज्ञ, मंत्र का विधान है। कामदेव पूजा का पात्र बनते हैं। शिशिर से ठिठुरी प्रकृति जब बसन्त में अंगड़ाई लेकर जाग जाती है तब उसकी अनुभूति अधिक ही होती है। यही कारण है कि संस्कृत परम्परा में बसन्त को कामदेव का सहचर मित्र कहा गया है। मनुष्य ही नहीं प्रकृति भी काम से झंकृत होती है। होली भेद मिटाने आती है। काम उल्लास, उमंग आनन्द के गीत गाता अपने मित्र बसन्त सहित होली में आता है।
इसी बसन्तोत्सव में काम, मदन या मदन गोपाल कृष्ण की तो कहीं कामदेव रूप में प्रद्युम्न आदि की अर्चना स्त्री, पुरुष करने लगे। आम्रमज्जरी देव को समर्पित किया जाता था। इसका प्रसाद रूप ग्रहण करते थे। पूजा के साथ-साथ यज्ञ भी होता था। पुष्प पराग, कस्तूरी चन्दन से परस्पर खेलने की परम्परा थी। जीवन ऊर्जा, प्राण-ऊर्जा काम से है। मानव ने इस काम ऊर्जा को ग्रहण कर अपना धर्म मानते हुए सृष्टि संवर्धन में सहयोग दिया।  गीता में कृष्ण धर्मानुकूल काम की उपादेयता स्वीकारते हैं। काम अर्थ लोकोपकारक है भोग का अधिक आश्रय विनष्ट करता है। भारतीय संस्कृति में काम त्यागभावना पर आधारित रहा है। पार्वती तप करते करते जब अपर्णा बनती हैं, शिव जब तीसरे नेत्र की अग्रि से कामदेव को भस्म कर देते हैं तब काम अनंग बनकर मंगलमय बनता है। इसी समय असुर विनाशक कुमार संभव कुमार का अवतरण होता है। ‘काम’ प्रेम-सौन्दर्य की अभिव्यक्ति करता है। कामदेव कामनाओं का देव, प्रेम का देव, सुन्दरता का देव है। जिसे ईश्वर सृजन की कामना से रचता है, वह सत्यं-शिवं-सुन्दरम्ï है। सृष्टिï मूल सनातन तत्व काम अपने देवत्व में सत्य-शिव है। सत्य-शिव कभी असुन्दर नहीं हो सकता। अत: काम मात्र भोग दमन नहीं है बल्कि जागरण ज्ञान है। बसन्त उत्सव विद्या की देवी सरस्वती के जन्मोत्सव का भी पर्व है। ज्ञान से काम आत्मसात करने पर कला मर्मज्ञ बनेंगे। संस्कृति की चौसठ कलाओं में मानवता को समाविष्ट करने पर ही होली, काम का दर्शन पूर्णता पाएगा। होली की रात मंत्र जाप सिद्ध ही नहीं होता बल्कि विशेष फलदायक और सुरक्षा कवच बनता है। होली कामदेव की पूजा का उत्सव है। (विनायक फीचर्स)

इम्पा की पहल के बाद सरकारी भूमि पर मुफ्त होगी फिल्मों की शूटिंग, महाराष्ट्र सरकार ने की घोषणा

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मुंबई। महाराष्ट्र में अब सरकारी भूमि पर शूटिंग के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। राज्य सरकार ने बकायदे 16 मार्च 2024 को एक आदेश कर स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर फिल्मों, वृत्तचित्रों और विज्ञापनों की मुफ्त शूटिंग की अनुमति दी जाएगी। इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (इम्पा) द्वारा किए गए लगातार पत्र व्यवहार का यह सकारात्मक परिणाम दिखा है।

राज्य सरकार की घोषणा के मुताबिक महाराष्ट्र में सरकारी भूमि (मुंबई में दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी और कोल्हापुर में फिल्मसिटी को छोड़कर) में मुफ्त शूटिंग की घोषणा की गई है। इम्पा के प्रेसिडेंट अभय सिन्हा ने महाराष्ट्र सरकार के इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि निर्माताओं के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करते हुए, महाराष्ट्र फिल्म थिएटर और सांस्कृतिक विकास महामंडल, गोरेगांव, मुंबई में एक एकल खिड़की योजना शुरू की गई है। संशोधित फैसले के अनुसार, शूटिंग नि:शुल्क होगी। हालांकि, विज्ञापनों के लिए 40,000 रुपये, टीवी धारावाहिकों के लिए 1 लाख रुपये और फिल्मों के लिए 2.5 लाख रुपये की मामूली सुरक्षा जमा राशि आवश्यक है। सिन्हा ने कहा है कि राज्य सरकार की सुव्यवस्थित मंजूरी प्रक्रिया और मुफ्त फिल्मांकन सुविधाओं का प्रावधान महाराष्ट्र को फिल्म निर्माताओं के लिए एक अधिक आकर्षक स्थान बनाता है और इम्पा जो सक्रिय रूप से फिल्म उद्योग को समर्थन और बढ़ावा देने वाले उपायों की वकालत कर रही है, इस प्रगतिशील पहल के लिए महाराष्ट्र सरकार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करती है।

संजय निरुपम का उत्तर भारतीयों के बीच अच्छा नाम है -चंद्रशेख बावनकुले

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Maharashtra News: क्या बीजेपी संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) को अपने खेमे में लेना चाहती है? दरअसल, यह चर्चा अचानक इसलिए होने लगी जब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेख बावनकुले )Chandrashekhar Bawankule) ने शुक्रवार को एक बयान दिया. बावनकुले ने कहा कि संजय निरुपम का उत्तर भारतीयों के बीच अच्छा नाम है. उन्होंने मुझसे अभी तक कोई बात नहीं की है लेकिन मैं इतना कहूंगा कि अगर कोई मोदी के काम से कोई प्रभावित होता है तो बीजेपी हमेशा उन जैसे लोगों के लिए तैयार है.

बीजेपी की तरफ से खुला ऑफर ऐसे समय में दिया जा रहा है जब कांग्रेस ने पश्चिम मुंबई लोकसभा सीट का दावा छोड़ दिया है. सूत्र बताते हैं कि इसी सीट से संजय निरुपम लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे. इस फैसले को संजय निरुपम के लिए झटका माना जा रहा है. संजय निरुपम मुंबई उत्तर सीट से सांसद रहे हैं. हालांकि 2014 के चुनाव में उन्हें बीजेपी के गोपाल शेट्टी के हाथों हार झेलनी पड़ी थी.

शिंदे गुट के पास मुंबई पश्चिम सीट
जिस मुंबई पश्चिम  सीट से वह चुनाव लड़ना चाहते हैं वहां से एकनाथ शिंदे के गुट वाली शिवसेना के गजानन कीर्तिकर सांसद हैं. महाराष्ट्र में लोकसभा की छह सीटें हैं. माना जा रहा है कि महाविकास अघाड़ी के बीच हुए तय हुए फॉर्मूले के तहत चार सीटों पर शिवसेना-यूबीटी और दो पर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी. इसी वजह से यह सीट से कांग्रेस अपना दावा हटा रही है.

चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका
महाराष्ट्र में न तो महाविकास अघाड़ी और न ही महायुति गठबंधन ने सीट शेयरिंग को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा की है. हालांकि बीजेपी ने कई सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं. जबकि चुनाव से पूर्व दल-बदल का सिलसिला जारी है. कांग्रेस नेता नितिन कोडवते और उनकी पत्नी चंदा कोडवते बीजेपी में शामिल हो गए जिसको लेकर बावनकुले ने कहा कि दोनों के हमारी पार्टी ज्वाइन करने से गढ़चिरौली जिले में बीजेपी मजबूत होगी.