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नालासोपारा पश्चिम में ढाई हजार वर्ष पुराने बौद्ध स्तूप के दर्शन के लिए पहुंचे बीएसएस के सैकड़ों लोग

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पालघर। फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर नालासोपारा पश्चिम में तथागत बुद्ध स्तूप पर सैकड़ों की संख्या में बहुजन सुधारवादी संघ (बीएसएस BSS) संस्था के लोग दर्शन के लिए पहुंचे। दर्शन के लिए पहुंचे समाजसेवक डॉ सी आर सरोज ने जानकारी देते हुए बताया कि नालासोपारा स्थित बुद्ध स्तूप ढाई हजार वर्ष पुराना है यहां पर भगवान तथागत स्वयं आये थे, उस समय नालासोपारा बन्दरगाह होने के कारण यह एक व्यापारिक स्थान था। यहां पर बाबासाहेब अम्बेडकर भी आते थे दर्शन के लिए जिस पेड़ की छांव में बैठते थे वह आम का पेड़ आज भी मौजूद है।

BSS संस्था के लोगों ने उत्तर प्रदेश से अपने अध्यक्ष देवेंद्र यादव को भी बुलाया था। संस्था एक मिशन चला रहा है जो भारत के 85% लोग शुद्र हैं उनके हक अधिकार के लिए उन्हें जगाने का कार्य कर रहा है।
देवेंद्र यादव ने सबसे पहले बुद्ध वंदना, और संविधान शपथ दिलाने के बाद अपने वक्तव्य में कहा कि देश में मात्र दो मॉडल का तंत्र काम कर रहा है।
देवेंद्र यादव ने बताया धर्मतन्त्र का जो मॉडल है उसका अपना ‘भगवा’ झण्डा है, ‘मनुस्मृति’ उसका संविधान है, ‘मठ, मन्दिर, आश्रम’ उसके संविधान की प्रशासनिक संस्थाएं हैं।
‘ईश्वर’ इस मॉडल का खूँटा है, जिसके साथ ‘आस्था’ रूपी रस्सी से जनता को बांध दिया जाता है। ‘असत्य’ इसका ‘दर्शन’ है। ‘विषमता’ इसकी ‘विचारधारा’ है। ‘जन्म आधारित पितृसत्तात्मक चातुरवर्णीय’ इसका ‘प्रबंधन’ है। ‘भक्ति’ इसका मार्ग है। इस तरह धर्मतंत्र के अनुसार ‘15% सवर्ण’ (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य) मालिक हैं तो ‘85% शूद्र'(obc/sc/st/mino.) उसके गुलाम हैं।
देवेंद्र यादव ने कहा कि धर्मतंत्र को ब्राह्मणों ने इस तरह परिभाषित किया है कि विषमता परतंत्रता शत्रुता अन्याय के अनैतिक सिद्धांतों को अपना कर ब्राह्मणों ने, ब्राह्मणों द्वारा, ब्राह्मणों के लिए बनाई गई यह जन्म आधारित पितृसत्तात्मक चातुरवर्णीय विषमतावादी व्यवस्था है।” अर्थात ब्राह्मण के हाथ में धर्मतन्त्र की कमान बाकि सबका शोषण और सबका अपमान !
ब्राह्मण अपने इस विषमता के मॉडल को सनातन धर्म या हिन्दू धर्म के नाम से प्रचारित करता है तथा इसे ईश्वर द्वारा रचित व्यवस्था बताकर और धार्मिक आस्था का वास्ता देकर अपने नेतृत्व में समाज को संगठित रखता है। ऐसे में ईश्वरीय आस्था से बंधे हुए लोग धर्मतन्त्र की प्रशासनिक संस्थाऐं मठ, मन्दिर, आश्रम की तरफ बिन बुलाए नाक रगड़ते हुए पहुँच जाते हैं, फिर वहाँ इन संस्थाओं के मालिक ब्राह्मण के चरणों में जाकर गिर जाते हैं। ऐसे गिरे हुए लोगों को ब्राह्मण हिन्दू कहता है और उन पर मनुस्मृति के नियमों को थोप देता है, अब यह कहने की जरूरत नही है कि धर्मतन्त्र की व्यवस्था में ब्राह्मण श्रेष्ठ है और बाकी सारे नीच, यह एक प्रशासनिक व्यवस्था है जो भी इस व्यवस्था की आस्था मान्यता परम्परा संस्कार त्योहार व्रत आदि से अपना सम्बन्ध रखेगा उसका वर्ण/जाति स्वभाविक तौर पर अपने आप तय हो जाता है अब आप लाख कोशिश कर लीजिए, भले ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का फायदा उठाकर CM, PM बन जाइए लेकिन धर्मतन्त्र की व्यवस्था में आप नीच ही माने जायेंगे। उन्होंने भूतपूर्व मुख्यमंत्री का उदाहरण दिया अखिलेश यादव के घर का शुद्धिकरण इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
धर्मतन्त्र का यह षड्यंत्र इतना बारीक है जो आम शूद्रों को समझ नही आता है यदि शूद्रों में से कुछ मुठ्ठीभर शूद्रों को समझ भी आ जाता है तो ये मनुवादी ब्राह्मण इन्हें नास्तिक, कम्युनिष्ट, अर्बन नक्सल, अम्बेडकरवादी, खालिस्तानी, पाकिस्तानी समर्थक, हिन्दू धर्म विरोधी आदि बताकर पहचान देकर अपने ही शूद्र भाइयों से अलग थलग कर देते हैं तथा अन्य धर्मों का डर दिखाकर जाति में बंटे हुए ना समझ बहुसंख्यक शूद्रों को अपने धार्मिक आस्था के दायरे में संघठित रखकर उनका निरन्तर नेतृत्व करते हैं।
लोकतंत्र का जो दूसरा मॉडल है इसका भी अपना ‘तिरंगा’ झण्डा है, ‘भारत का संविधान’ इसका संविधान है, ‘राष्ट्रपति, संसद, सरकारी विभाग’ इसके संविधान की प्रशासनिक संस्थाएं हैं।
‘उत्तरदायित्व’ लोकतंत्र का खूँटा है जिस पर सवाल उठाना जनता का ‘अधिकार’ है। ‘समता’ इसकी ‘विचारधारा’ है, ‘सत्य’ इसका ‘दर्शन’ है। ‘ध्यान’ इसका ‘मार्ग’ है। ‘कर्म आधारित चतुरवर्गीय’ इसका ‘प्रबंधन’ है। अर्थात हम अपनी योग्यता का प्रदर्शन कर अपने वर्ग को बदल सकते हैं। लोकतांत्रिक कानून की नजर में हम केवल भारतीय है तथा धर्म हमारी निजी प्रेक्टिस है। जनता लोकतंत्र की ताकत है जो इसे अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रण में रखती है जनता के सारे हित इस लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ जुड़े हुए हैं, इसलिए इसकी रक्षा करना जनता का नैतिक दायित्व है।
लोकतंत्र को इस तरह परिभाषित किया जा सकता है कि समता स्वतंत्रता बन्धुता न्याय के नैतिक सिद्धान्तों को अपना कर लोगों ने, लोगों द्वारा, लोगों के लिए बनाई गई यह कर्म आधारित समतावादी चतुरवर्गीय व्यवस्था है। अर्थात जनता के हाथ में लोकतंत्र की कमान सबको अवसर और सबको सम्मान देता है।
धर्मतन्त्र और लोकतंत्र आज देश की जनता के पास दो मॉडल है, धर्मतन्त्र देश की जनता को मन्दिर की तरफ ले जाता है तो लोकतंत्र स्कूल की तरफ। ये दोनों तंत्र एक दूसरे के दुश्मन है, इनमें से आज नही तो कल एक की मौत निश्चित है। ऐसे में यदि धर्मतन्त्र की मौत और लोकतंत्र की जीत हो जाती है तो 85% बहुजन शूद्र को सम्मान और स्कूल का कलम मिलेगा, इसके विपरीत यदि लोकतन्त्र की मौत और धर्मतन्त्र की जीत हो जाती है तो 85% बहुजन शूद्र को मिलेगा अपमान और मन्दिर का घण्टा। अब निर्णय 85% बहुजन शूद्र (obc/sc/st) को करना है उन्हें सम्मान और स्कूल की कलम चाहिए या अपमान और मन्दिर का घण्टा ?
उपरोक्त लोकतांत्रिक बिंदुओं को जब लोकतन्त्र के समर्थक अपने सामाजिक जीवन में व्यवहारिक तौर पर अपनायेंगे तब समाज का लोकतांत्रिक चरित्र निर्माण होगा। जब समाज का लोकतांत्रिक चरित्र निर्माण होगा तब संविधान की किताब पर छपा हुआ लोकतांत्रिक चरित्र व्यवहारिक रूप लेकर सही मायने में देश में लोकतन्त्र को स्थापित करेगा। अर्थात यदि हमें धर्मतन्त्र के बजाय लोकतन्त्र को स्थापित करना है तो हमें अपना धार्मिक चरित्र बदलकर लोकतांत्रिक चरित्र बनाना होगा। देवेंद्र यादव ने बखूबी विश्लेषण करके लोगो को समझाया उसके बाद अन्य लोगों ने भी अपने विचार दिए।
उत्तर प्रदेश से रामचंद्र यादव, ओपी बैरवा, नरेश जाधव, सिद्धार्थ बर्वे, भगवान काम्बले, डॉ. सी.आर. सरोज, कुसुम निसाद, सधीर कुमार, रामसागर, फूला ताई जाधव, रमेश गौतम ने सभा का संचालन किया। इस अवसर पर दीनानाथ मौर्या, संगीता मौर्या, अशोक निषाद, डॉ. रमेश यादव, अमित यादव, रेलवे अधिकारी मीना, चन्द्रभान पाल, शिवजी पाल, जयकुमार, रवि प्रजापति, वाल्के सर आदि मुख्य लोग उपस्थित थे।

अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच का पुस्तक लोकार्पण के साथ डॉ शिवदत्त शुक्ल स्मृति एवं देवेंद्र पाण्डेय स्मृति सम्मान समारोह संपन्न

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नवी मुंबई। अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच की ओर से आयोजित पुस्तक लोकार्पण एवं सम्मान समारोह 22 मार्च 2024 की शाम सानपाड़ा स्थित शिकारा होटल के सभागृह में गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता प्रसिद्ध कवि एवं उपन्यासकार पवन तिवारी ने की। मुख्य अतिथि रहे महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के सदस्य अरविंद राही तथा विशेष अतिथि के रूप में कवयित्री सीमा त्रिवेदी, आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली, आर के पब्लिकेशन के निदेशक रामकुमार त्रिपाठी एवं लघुकथाकार सेवा सदन प्रसाद, नगरसेवक सयाली शिंदे, समाजसेविका उषादत्त, समाजसेवक गोकुलधाम से सुभाष अग्रवाल की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का संचालन अश्वनी पांडेय एवं कुमार जैन ने किया।
कार्यक्रम का आरंभ अनीता मेहरा द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात अलका पांडेय के प्रथम उपन्यास अनुराग का अवसाद का लोकार्पण हुआ।
पुस्तक के संदर्भ में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में पवन तिवारी ने कहा कि अलका पांडे के उपन्यास की केंद्रीय पात्र एक स्त्री है। जो प्रेम और प्रतिरोध करना दोनों जानती है। एक स्त्री जब तक प्रेम करती है तब तक राधा दिखाई देती है और जब प्रतिरोध करती है तो दुर्गा के स्वरूप में दिखाई देती है। यही इस उपन्यास का मूल है। उपन्यास का कथ्य और उसका शिल्प मोहक है जो पाठक को बांधे रखता है। कथा में आगे क्या होगा इसके लिए उत्सुकता जगाये रखता है। इस उपन्यास में लेखकीय अनुभव और परिपक्वता दिखाई पड़ती है। वर्तमान समय में विवाहेत्तर प्रेम और उसमें निहित विद्रुपताओं का बड़ा ही स्पष्ट रूप इस उपन्यास में दिखाई पड़ता है। इस उपन्यास के लिए अलका पांडेय को अनेक बधाई एवं शुभकामनाएं। कार्यक्रम का दूसरा सत्र डॉ शिवदत्त शुक्ल स्मृति सम्मान एवं देवेंद्र पांडेय स्मृति सम्मान का था। इस वर्ष वरिष्ठ कवि डॉ अरुण प्रकाश अनुरागी एवं वरिष्ठ कवयित्री अलका शरर को डॉ शिवदत्त शुक्ल स्मृति साहित्य भूषण सम्मान प्रदान किया गया। देवेंद्र पांडे स्मृति समाज भूषण सम्मान विकास आर. अग्रवाल को दिया गया।
डॉ शिवदत्त शुक्ल स्मृति साहित्य गौरव सम्मान वरिष्ठ कवि रामस्वरूप साहू, नीरज ठाकुर मदन गोपाल अकिंचन, डॉ मनोज गोयल, राजेंद्र वामन कटकरे, ओम प्रकाश पांडेय, शारदा प्रसाद दुबे एवं विजय भटनागर, अलका गोयल, चम्पा सिंह को प्रदान किया गया। इसके पश्चात अंतिम सत्र में कविता पाठ हुआ। कविता पाठ करने वाले कवियों में अश्विनी पाण्डेय, सत्यभामा सिंह, अन्नपूर्णा गुप्ता, बिट्टू जैन, त्रिलोचन सिंह अरोरा, दिलीप ठक्कर, शोभा ठक्कर, अलका पांडेय, सीमा त्रिवेदी, मंजू गुप्ता, नीलम गुप्ता, डॉ अंजू शर्मा, चंद्रिका व्यास, जे पी सिंह, ओम प्रकाश सिंह प्रमुख रहे। कार्यक्रम के अंत में अलका पांडेय ने सभी अतिथियों एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।

मंत्री रेखा ने महादेव का पूजन और गौ सेवा कर मनाई होली

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देहरादून, 25 मार्च । कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बाबा बनखण्डी नाथ मंदिर, बरेली में महादेव का पूजन और गौसेवा कर होली मनाई।

इस अवसर मंत्री रेखा आर्या के साथ पति गिरधारी लाल साहू पुत्री वैष्णवी के साथ महादेव का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। साथ ही गौ सेवा कर होली मनाई। मंत्री ने अयोध्या में हुए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष होली सभी राम भक्तों के लिए स्पेशल है क्योंकि भगवान राम 500 सालों के अंतराल के बाद रंगों का त्योहार मना रहे हैं। साथ ही यह होली भगवान राम के प्रत्येक भक्त के लिए विशेष है। वहीं इस दौरान समस्त प्रदेशवासियों के सुख समृद्धि व खुशहाली की कामना की।

गौ भक्त बाप-बेटे निस्वार्थ भाव से करते हैं गायों की सेवा

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दमोह: हिन्दू धर्म में गाय को गौ माता कहकर संबोधित किया जाता है, जिसमें 33 कोटि देवी देवताओं का वास माना गया है. कहा जाता है यदि व्यक्ति अलग-अलग देवी देवता की भक्ति करने की बजाए 1 गाय की निस्वार्थ भाव से सेवा करता है तो 33 कोटि देवी देवताओं का आशीर्वाद उसके परिवार पर बना रहता है.

दमोह जिले में ऐसा ही एक यादव परिवार है, जो जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर जरुआ गांव का रहने वाला है. इस परिवार के प्रत्येक व्यक्ति ने निस्वार्थ भाव से गौ सेवा के लिए जीने का संकल्प लिया है. परिवार के एक नौजवान हल्ले भाई यादव बीते 10-15 सालों से बिना किसी सरकारी सहायता के करीब 100 गायों की निस्वार्थ भाव से सेवा करते आ रहे हैं.

हल्ले भाई यादव का पूरा परिवार गौ भक्त
दरअसल, हल्ले भाई के पिता हल्लू यादव जिनकी उम्र करीब 59 से 60 साल है. उन्होंने गौ सेवा भाव की शुरुआत की थी. उनके दोनों बेटे ने भी सेवा भाव को आगे बढ़ाया. हल्ले ने बताया कि बरसात के दिनों में गायों को चराने की जिम्मेदारी बड़े भाई और पिता की होती है. वहीं, गर्मियों के दिनों में गायों की देखरेख का जिम्मा उन्हें सौंप दिया जाता है. इस इलाके में मवेशियों से लेकर आम जनता के लिए भी पेयजल की बहुत समस्या है. चूंकि जिस राजस्व की जमीन पर हल्ले भाई का परिवार अन्न उगाता है, उसके नजदीक से एक नाला निकला हुआ है. जिसमें बने कुंड में साल भर पानी बना रहता है. जहां सारे मवेशी एक एक कर पानी पीते हैं.

घर का एक-एक पैसा गौ सेवा में
हल्ले भाई यादव ने बताया कि उनके पास निजी जमीन नहीं है, कुछ जमीन जो राजस्व विभाग की है, उसी पर फसलों की बुवाई कर लेते हैं. इससे भूसा का इंतजाम हो जाता है. इसके अलावा गांव में जिन खेतों में कृषि कार्य नहीं होता, उन खेतों में उगने वाली खरपतवार, हरी घास की रखवाली कर लेते हैं, जिसे काटकर जमा कर लेते हैं. इसके अलावा जो गायों के गोबर से जैविक खाद बनती है, उसे किसानों को बेचकर कुछ पैसे मिल जाते हैं. इन सभी उपायों को अपनाकर जो भी जमा पूंजी इकट्ठा होती है, सभी की सभी गौ माता की सेवा में लगा देते हैं. वर्तमान समय में करीब 5 गाय दुधारू है और 10 बैल हैं.

Report By अर्पित बड़कुल News 18

Lok Sabha Election 2024 – महाराष्ट्र में महायुति के साथ चुनाव लड़ेगी RSP

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Maharashtra Lok Sabha Election 2024: ( पीटीआई- भाषाराष्ट्रीय समाज पार्टी (RSP) के प्रमुख महादेव जानकर ने रविवार (24 मार्च) को महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन ‘महायुति’ के साथ बने रहने की प्रतिबद्धता जताई. महादेव जानकर ने कुछ दिन पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार से मुलाकात की थी और पवार ने उन्हें माढा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए कहा था.

महादेव जानकर ने अपने रुख में तब बदलाव किया, जब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (शिवसेना), उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (बीजेपी) और अजित पवार (एनसीपी) ने उनसे मुलाकात की. इससे पहले महादेव जानकर ने बुधवार को शरद पवार से मुलाकात के बाद बीजेपी पर उन्हें विश्वास में लिए बिना माढा लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित करने पर नाराजगी व्यक्त की थी. महादेव जानकर ने पत्रकारों से कहा था कि चर्चा सकारात्मक रही.

जानकर की पार्टी को मिलेगी एक सीट
सीएम शिंदे, अजित पवार और फडणवीस की महादेव जानकर से मुलाकात के बाद रविवार (24 मार्च) को एक संयुक्त बयान जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास के मामले में काफी प्रगति कर रहा है और इसलिए जानकर ‘महायुति’ के साथ बने रहेंगे. बयान में कहा गया है कि बैठक में निर्णय लिया गया कि जानकर की पार्टी को एक संसदीय सीट आवंटित की जाएगी.

आरएसपी नेता ने कहा कि वह लोकसभा चुनाव में महायुति उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे. अपनी पहली सूची में महाराष्ट्र से 20 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करने वाली बीजेपी ने माढा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से रंजीत सिंह नाइक निंबालकर को फिर से उम्मीदवार बनाया है. साल 2014 में शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के खिलाफ बारामती लोकसभा सीट से महादेव जानकर ने चुनाव लड़ा था.

धनगर समुदाय में जानकर की अच्छी पकड़
महादेव जानकर का पश्चिमी महाराष्ट्र में धनगर समुदाय के बीच अच्छा प्रभाव है. माढा लोकसभा सीट साल 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. इस सीट से पहला चुनाव 2009 में शरद पवार ने जीता था. साल 2014 में, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अविभाजित) ने इस सीट को बरकरार रखा था और विजयसिंह मोहिते-पाटिल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार सदाभाऊ खोत को हराया था.

बॉलीवुड फ‍िल्‍म अभ‍िनेत्री कंगना रनौत को लोकसभा टिकट

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BJP Candidates 5th List 2024: भारतीय जनता पार्टी ने रव‍िवार (24 मार्च) को लोकसभा चुनाव  के ल‍िए कैंड‍िडेट्स की पांचवीं ल‍िस्‍ट जारी कर दी है. इसमें बॉलीवुड फ‍िल्‍म अभ‍िनेत्री कंगना रनौत को भी ट‍िकट दी गई है. बीजेपी ने उनको मंडी लोकसभा टिकट सीट से चुनावी मैदान में उतारा है.

कंगना रनौत ने ट‍िकट म‍िलने के बाद सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर पोस्‍ट शेयर करते हुए खुशी जताई है. कंगना ने कहा कि मेरे प्‍यारे भारत और अपनी पार्टी भारतीय जनता, भारतीय जनता पार्टी को मैं हमेशा बि‍ना शर्त के समर्थन करती रही हूं. आज बीजेपी के शीर्ष नेतृत्‍व में मुझे मेरे जन्‍मस्‍थान ह‍िमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा सीट से उम्‍मीदवार घोषित क‍िया है. मैं, इस प्‍यार और व‍िश्‍वास को जताते के ल‍िए बीजेपी हाईकमान के प्रत‍ि आभार व्‍यक्‍त करती हूं.

Kangana Ranaut: 'बीजेपी से हमेशा समर्थन मिला', मंडी से लोकसभा टिकट मिलने के बाद क्या बोलीं कंगना रनौत

उन्‍होंने यह भी कहा कि मैं आध‍िकार‍िक तौर पर पार्टी में शामिल होकर सम्मानित और उत्साहित महसूस कर रही हूं. मैं एक कर्मठ कार्यकर्ता और भरोसमंद लोक सेवक बनने का प्रयास करूंगी.

बीजेपी ने 111 उम्‍मीदवारों को क‍िया ऐलान  

बीजेपी की ओर से रव‍िवार को कुल 111 सीटों पर उम्‍मीदवारों के नामों का ऐलान क‍िया गया है. इस ल‍िस्‍ट में पश्चिम बंगाल के तमलुक सीट से जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय को भी उम्मीदवार बनाया गया है ज‍िन्‍होंने कुछ दिन पहले ही हाई कोर्ट से इस्तीफा देकर बीजेपी ज्वाइन की थी.

My beloved Bharat and Bhartiya Janta’s own party, Bharatiya Janta party ( BJP) has always had my unconditional support, today the national leadership of BJP has announced me as their Loksabha candidate from my birth place Himachal Pradesh, Mandi (constituency) I abide by the high…

इसके अलावा कैंड‍िडेट्स की ल‍िस्‍ट जारी होने से कुछ घंटे पहले ही कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शाम‍िल हुए कुरुक्षेत्र के पूर्व सांसद नवीन ज‍िंदल को भी ट‍िकट द‍िया गया है. बीजेपी ने उनको कुरुक्षेत्र से ही चुनावी मैदान में उतारा है. कई और बड़े नाम और खास चेहरों को भी ल‍िस्‍ट में शाम‍िल क‍िया गया है. आंध्र प्रदेश की राजमुंदरी सीट से पूर्व केंद्रीय राज्‍यमंत्री डी पुरंदेश्वरी को भी ट‍िकट द‍िया गया है.

रामायण में राम की भूमिका निभाने वाले अरुण गोविल को टिकट

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लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए रविवार को उत्तर प्रदेश के 13 उम्मीदवारों की सूची जारी की. पार्टी ने जहां पूर्व केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी को सुल्तानपुर से दोबारा मौका दिया है, वहीं उनके बेटे और पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी का टिकट काट दिया है और उनकी जगह जितिन प्रसाद को मैदान में उतारा है. केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा की यह पांचवीं सूची है. हालांकि, पहली सूची में 51 उम्मीदवार घोषित करने के बाद पार्टी ने बाकी तीन सूचियों में राज्य के लिये किसी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की गई थी. पांचवीं सूची में उत्तर प्रदेश के कुल 13 उम्मीदवार घोषित किये गये हैं जिनमें पार्टी ने अपने नौ मौजूदा सांसदों को मौका नहीं दिया है.

पार्टी ने जिन नौ सांसदों का टिकट काटा है उनमें गाजियाबाद के सांसद व केंद्रीय मंत्री (रिटायर जनरल) वीके सिंह, पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी, बरेली से संतोष गंगवार, कानपुर के सत्‍यदेव पचौरी, बदायूं से पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की पुत्री डॉक्टर संघमित्रा मौर्य, बाराबंकी के उपेंद्र सिंह रावत, हाथरस (आरक्षित) के सांसद राजवीर सिंह दिलेर, बहराइच (आरक्षित) से अक्षयवर लाल गौड़ और मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल शामिल हैं. मेरठ में राजेंद्र अग्रवाल की जगह सिने अभिनेता और रामायण धारावाहिक में भगवान राम की भूमिका अदा कर चुके अरुण गोविल को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है; वहीं बाराबंकी में पहली सूची में घोषित मौजूदा सांसद उपेंद्र सिंह रावत की जगह जिला पंचायत की अध्यक्ष राजरानी रावत को उम्मीदवार बनाया गया है.

वरुण गांधी ने कई मुद्दों पर सरकार का किया था विरोध
उपेन्द्र रावत का कथित तौर पर एक अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हुआ था, जिसके बाद उन्होंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया था. वरुण गांधी केंद्र के तीन कृषि कानूनों के आने के बाद से ही अपनी पार्टी और सरकार के खिलाफ मुखर रहे. हालांकि, बाद में सरकार ने इन कानूनों को वापस ले लिया. उन्होंने रोजगार और स्वास्थ्य समेत कई मुद्दों पर भाजपा के खिलाफ आवाज उठायी. वैसे पार्टी ने उनकी मां मेनका गांधी पर भरोसा जताया, जिन्हें सुल्तानपुर से फिर से टिकट दिया गया है. जनरल वीके सिंह और सत्यदेव पचौरी दोनों ने रविवार को ही 2024 का चुनाव लड़ने के लिए ‘अनिच्छा’ व्यक्त की थी.

अरुण गोविल को टिकट
भाजपा की सूची के मुताबिक सहारनपुर से राघव लखनपाल, मुरादाबाद से सर्वेश सिंह, मेरठ से रामानंद सागर कृत धारावाहिक रामायण में राम की भूमिका निभाने वाले अरुण गोविल, गाजियाबाद से विधायक व पूर्व मंत्री अतुल गर्ग, अलीगढ़ से मौजूदा सांसद सतीश गौतम, हाथरस (आरक्षित) से अलीगढ़ के खैर क्षेत्र के विधायक अनूप वाल्मीकि, बदायूं से दुर्गविजय सिंह शाक्य, बरेली से पूर्व मंत्री छत्रपाल सिंह गंगवार, पीलीभीत से प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद, सुलतानपुर से मेनका गांधी, कानपुर से वरिष्ठ पत्रकार रमेश अवस्थी, बाराबंकी (आरक्षित) राजरानी रावत और बहराइच (आरक्षित) से डॉक्टर अरविंद गौड़ को उम्मीदवार बनाया गया है. भाजपा के 51 उम्मीदवारों की पहली सूची में उत्तर प्रदेश की पांच सीट पर महिला उम्मीदवारों को मौका मिला; वहीं इस बार 13 सीट में दो सीट पर महिला उम्मीदवारों को उतारा गया है.

लोकसभा चुनाव 2024 में मैं प्रतिभाग नहीं करना चाहता हूं – Satyadev Pachauri

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UP Lok Sabha Election 2024: बीजेपी (BJP) के एक और सांसद ने चुनाव लड़ने के इनकार कर दिया है. कानपुर (Kanpur) से बीजेपी सांसद सत्यदेव पचौरी ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है. उन्होंने ये जानकारी सोशल मीडिया (Social Media) पर एक चिट्ठी साझा कर दी है. उन्होंने यह चिट्ठी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को चिट्ठी लिखी है.

कानपुर से बीजेपी सांसद ने अपने सोशल मीडिया के एक्स प्लेट फॉर्म पर एक चिट्ठी साझा की है. यह चिट्ठी उन्होंने जेपी नड्डा को लिखी है. उन्होंने इस चिट्ठी को साझा करते हुए लिखा, ‘आप सभी को अवगत कराना है कि आगामी लोकसभा चुनाव 2024 में मैं प्रतिभाग नहीं करना चाहता हूं. इस निर्णय से मैंने माननीय प्रधानमंत्री एवं माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष को अवगत करा दिया है.’

भाजपा सांसद ने आगे लिखा, ‘मैं पार्टी का निष्ठावान कार्यकर्ता हूं और पार्टी द्वारा दिए जाने वाले दायित्वों का निर्वहन करता रहूंगा.’ उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा है, ‘आपसे विनम्र आग्रह है कि मैं वर्तमान कानपुर लोकसभा 2024 का चुनाव लड़ने का इच्छूक नहीं हूं .

मेरे नाम पर विचार न किया जाए- बीजेपी सांसद
उन्होंने अपनी चिट्ठी में आगे लिखा, ‘अत: मेरे नाम पर विचार न किया जाए. मैं पार्टी का निष्ठावान कार्यकर्ता हूं. पार्टी के द्वारा दिए गए सभी दायित्वों का निर्वहन करता रहूंगा.’ बीजेपी सांसद ने यह चिट्ठी 24 मार्च यानी रविवार को लिखी है.

गौतरलब है कि बीते 2019 के लोकसभा चुनाव में सत्यदेव पचौरी करीब 1.55 लाख वोटों के अंतर से चुनाव जीते थे. उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी कांग्रेस उम्मीदवार प्रकाश जायसवाल को हराया था. तब बीजेपी सांसद को करीब 4.68 लाख वोट मिले थे. वहीं कांग्रेस उम्मीदवार को 3.13 लाख वोट मिले थे.

बता दें कि सत्यदेव पचौरी 2004 के लोकसभा चुनाव में भी कानपुर सीट पर उम्मीदवार थे. तब इस चुनाव में प्रकाश जायवाल ने उन्हें हराया था. इस चुनाव में प्रकाश जायवाल ने करीब छह हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी.

 

उल्लास, उमंग और आनन्द की अभिव्यक्ति का पर्व होली

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(रामभुवन सिंह ठाकुर-विनायक फीचर्स)

रंगों का त्यौहार होली समस्त त्यौहारों का शिरोमणि है। यह हर्षोल्लास, उमंग, उत्साह, एकता, प्रेम और मेल-मिलाप का अनुपम उपहार लेकर आता है।  फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह त्यौहार भारत में ही नहीं, वरन् विदेशों में भी बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। भले ही इसका नाम और मनाये जाने का तरीका भिन्न-भिन्न हो, परंतु उन सब में भी होली की छटा दृष्टिगोचर होती है।   आनन्द एवं उल्लास की अनुपम छटा बिखेरते इस अनूठे, चमत्कारी पर्व पर सभी प्रसन्न मुद्रा में दिखाई देते हैं।

चारों ओर रंग, अबीर, गुलाल की फुहार उड़ती दिखाई देती है। लोग अजीब-अजीब विकृत स्वांग बनाते, एक दूसरे को विनोदमय उपाधियों से विभूषित कर,

‘बुरा न मानो होली है’  की अलख जगाते हुए, उनके विशिष्ट गुणों-अवगुणों को उजागर कर, सुधार का संदेश देते हैं। आपस में हंसी-मजाक करते, नाचते-गाते, मस्ती भरे फागुन गीतों का आनंद लेते  हैं। अंग-अंग, रंग-तरंग से मस्त झूमते हुए दिखाई देते हैं एवं समवेत स्वर गूंज उठता है।

‘रंग बरसे, भीगे चुनर वाली, रंग बरसे।‘

ऋतु चक्रानुसार फाल्गुन पूर्णिमा को ऋतुराज बसंत  अपने पूर्ण यौवन  पर आ जाता है जिससे सम्पूर्ण सृष्टि में उन्मादी माधुर्य छा जाता है। प्रकृति की मन मोहकता को देखकर वसुन्धरा खिल उठती है, उसका रोम-रोम आनन्दातिरेक की सिहरन से भर उठता है। अर्ध मुकुलित नाना वर्णो के पुष्प प्रकृति की नाना इच्छाओं के रूप में विकसित हो उठते हैं एवं फलों में भी गुणवृद्घि हो जाती है, इसी से होली पर्व को फाल्गुनी भी कहते हैं। प्रकृति मानव की सदैव चिरसहचरी रही है। वह हमारे सुख-दुख की सहभागिनी है।

‘किसलय वसना, नव वय-लतिका।‘

‘मिली मधुर प्रिय उर, तरू-पतिका।‘

प्रकृति जब भीनी-भीनी सुगन्ध एवं माधुर्य से गदरा उठती है और उसके सौन्दर्य की  मादकता, उस अपूर्व माधुर्य भार को सम्हाल नहीं पाती है तो कली-कली में बसंत किलकारी मारने लगता है। सौरभ भार से अवनत वायु मानव-हृदय को भी मादकता से भर देती है। तब मानव अपने उन्मादी मनोभावों को हास्य-विनोद, चुटकुलों में अभिव्यक्त करने, हंसने-हंसाने का माहौल बना लेता है और इस अलमस्त होली के त्यौहार को आनन्दाभिव्यक्ति का समवेत रूप निर्मित करते हुए इन्द्रधनुषी रंगों की अनुपम छटा बिखेरता हुआ रंगों का पर्व मानता है।

”सह न सकी भार धरा, मधुमास के यौवन का।

सौरभ सुगन्ध बिखेरता, बीता मास फाल्गुन का।

आया त्यौहार उल्लास, उमंग प्रेम-मिलाप का।

उड़त रंग, अबीर, गुलाल, आया मौसम रंगों का।‘

एक किवदन्ती के अनुसार यह पर्व ‘शिव वरदानी ढूंढसा’  नामक राक्षसी से भी जुड़ा है, जो अपना वीभत्स रूप धरकर गांव में आती, बच्चों को डराती तथा उठाकर ले जाती थी, जिससे तंग आकर उस भयावह राक्षसी को भगाने के लिए बालकों ने एक जुट होकर रंग-बिरंगे अद्भुत, डरावने स्वांग बनाये और उस राक्षसी से मुक्ति पाने में सफलता हासिल की। कहते हैं तभी से एक दूसरे पर रंग-रोगन, कीचड़, गोबर आदि डालने, वीभत्स स्वांग बनाने, चिढ़ाने, हा-हा- हू-हू करते हुए खुशी से उछलने, नाचने, मौज-मस्ती मनाने की प्रथा चली आ रही है।

आमोद-प्रमोद, रंग-तरंग, उमंग भरे इस त्यौहार में अबाल, वृद्घ नर-नारी सभी सप्त रंगी, रंगों में सराबोर हो बसन्ती बयार के संग-संग मस्ती में झूमने लगते हैं, उन्मादी मन मचलने लगता है। झांझ मंजीरे के साथ जब ढोलक की थाप पर फाल्गुनी गीतों के मधुर स्वर गूंजते हैं, तो पैर अपने आप थिरकने लगते हैं, बिन पायल ही घुंघरू बज उठते हैं, मन कूंह-कूंह कर नाचने लगता है। रंग-बिरंगे, अनोखे स्वांग में मतवाले, बिन सुर-ताल ही, भंग-तरंग, सुरा-संग मदमस्त हो झूम उठते हैं। ऐसे अनूठे माहौल में बूढ़ा भी जवान और कलुआ भी ललुआ नजर आता है। संपूर्ण वातावरण रंगीन हो उठता है। इसी से इसे मदनोत्सव भी कहा जाता है।

”जहं-तहं जनु उमंग अनुरागा। देखि मुएहू मन मनंसिजज जागा’ (तुलसीदास)

उन्मादी मन का उन्माद और गुबार निकालने एवं जीवन की एक रसता से मुक्ति पाने, हंसने-हंसाने के लिए, मूर्ख

कोली आगरी महोत्सव” में अभिनेत्री एकता जैन ने समाँ बांधा

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मुंबई (अनिल बेदाग) : कोली आगरी महोत्सव के अध्यक्ष चंदू दादा पाटील ने एरोली नवी मुंबई में “कोली आगरी महोत्सव” का भव्य आयोजन हुआ। इस महोत्सव में ऎक्ट्रेस और इंफ्लुएंसर एकता जैन, डॉ संतोष पाण्डेय, सचिन दनाई, राहिला रहमान जैसी हस्तियां पहुंचीं।
डॉ संतोष पाण्डेय ने बताया कि मैं चंदू दादा पाटील को बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने मुझे इस कोली महोत्सव में बुलाया। यहां का माहौल, उत्साह, गीत संगीत और नृत्य देखकर बड़ा अच्छा अनुभव हुआ। इतना अच्छा कार्यक्रम करने के लिए दादा बधाई के पात्र हैं।
अभिनेत्री और इंफ्लुएंसर एकता जैन ने कहा कि मुझे यहां आकर बहुत अच्छा लगा। मैं पहली बार कोली महोत्सव में आई हूं। मुझे पता नहीं था कि इतना बड़ा महोत्सव का आयोजन होता है। मुझे बचपन की यादें ताजा हो गई। कई लोकगीत सुने। यहाँ सिंगर्स लाइव गा रहे थे, म्यूजिशियन लाइव संगीत बजा रहे थे और डांसर उन गीतों पर डांस कर रहे थे। बहुत उत्साह का माहौल रहा। चंदू पाटिल जी ने जो माहौल बनाया है वह बेहद खूबसूरत है बहुत मजा आ रहा है। यहां बड़े अच्छे झूले लगे हुए हैं और उन्हें देखकर मेरा मन भी झूले पर बैठने का हो रहा है। मेरा मानना है कि आपका दिल हमेशा बच्चा रहना चाहिए भले ही आप बड़े हो जाएं मगर मन को चंचल और मासूम बने रहने दें। आज यहाँ मैंने भी कोली गीत पर डांस किया।