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द्वारका एक्सप्रेस-वे 2023 में चालू हो जायेगा -नितिन गडकरी

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New Delhi – सड़क यातायात और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने कहा है कि द्वारका एक्सप्रेस-वे, जिसे हरियाणा वाले हिस्से में नार्दर्न पेरीफेरल रोड कहते हैं, उसे भारत में पहले एलिवेटेड शहरी एक्सप्रेस-वे के रूप में विकसित किया जा रहा है।

ट्वीट की एक श्रृंखला में श्री गडकरी ने कहा है कि द्वारका एक्सप्रेस-वे से दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेस-वे (स्वर्णिम चतुर्भुज सम्बंधी दिल्ली-जयपुर-अहमदाबाद-मुम्बई राजमार्ग का हिस्सा) तथा आर्टेरियल रोड पर दबाव कम होगा। अभी इन मार्गों पर भारी यातायात रहता है, जिनमें ज्यादातर पश्चिम दिल्ली से आने वाले वाहन शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि एनएच-8 का 50 से 60 प्रतिशत यातायत इस नये एक्सप्रेस-वे की तरफ मुडेगा, जिससे सोहना रोड़, गोल्फ कोर्स रोड आदि की तरफ जाने वाले यातायात में सुधार आयेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में चालू हो जाने के बाद, इससे दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को भी कम करने में बेहद मदद मिलेगी।

श्री गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्र सरकार देश के कोने-कोने में विश्वस्तरीय अवसंरचना के विकास को सक्रिय प्राथमिकता दे रही है और ‘संपर्कता से समृद्धि’ का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

श्री गडकरी ने बताया कि दिल्ली से हरियाणा के गुरुग्राम को जोड़ने वाला एक्सप्रेस-वे 9,000 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। इस एक्सप्रेस-वे में सड़क की दोनों तरफ न्यूनतम तीन लेन सर्विस रोड हैं, जो 16 लेन एक्सेस कंट्रोल्ड राजमार्ग से जुड़ी हैं। यह एक्सप्रेस-वे 29 किलोमीटर लंबा है, जिसमें से 19 किलोमीटर का हिस्सा हरियाणा में और शेष 10 किलोमीटर लंबा हिस्सा दिल्ली में पड़ेगा।

श्री गडकरी ने कहा कि द्वारका एक्सप्रेस-वे पर चार बहुस्तरीय इंटरचेंज होंगे। प्रमुख जंक्शनों पर सुरंग/अंडरपास, एट-ग्रेड रोड, एलीवेटेड फ्लाईओवर और फ्लाईओवर के ऊपर फ्लाईओवर बनाये जायेंगे, जिनमें भारत की सबसे लंबी (3.6 किलोमीटर) और सबसे चौड़ी (8 लेन) शहरी सड़क सुरंग का निर्माण शामिल है। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेस-वे की शुरूआत एनएच-8 (दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेस-वे) पर शिव-मूर्ति से होगी और वह द्वारका सेक्टर 21, गुरुग्राम सीमा तथा बसई से गुजरता हुआ खिड़की दौला टोल प्लाजा के निकट समाप्त हो जायेगा।

श्री गडकरी ने कहा कि यह प्रतिष्ठित परियोजना का विकास राजधानी दिल्ली में भीड़-भाड़ कम करने की योजना में प्रमुख भूमिका निभायेगी। द्वारका एक्सप्रेस-वे जब पूरा हो जायेगा, तो उसके जरिये द्वारका के सेक्टर 25 स्थित इंडिया इंटरनेशनल कनवेंशन सेंटर (आईआईसीसी) तक सीधी पहुंच हो जायेगी। साथ ही इसके जरिये एक कम गहरी सुरंग के जरिये आईआईजी एयरपोर्ट तक जाने का एक वैकल्पिक रास्ता मिल जायेगा। उन्होंने कहा कि उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली, टोल प्रबंधन प्रणाली, सीसीटीवी कैमरों, सतर्कता आदि जैसे उत्कृष्ट बौद्धिक यातायात प्रणालियां आसन्न विश्वस्तरीय गलियारे का अभिन्न होंगी।

श्री गडकरी ने कहा कि द्वारका एक्सप्रेस-वे के आसपास भारी मात्रा में वृक्षारोपण किया जायेगा। पूरे क्षेत्र 12,000 पेड़ लगाये गये हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना इंजीनियरिंग का शानदार नमूना है। निर्माण में 34 मीटर चौड़ी आठ लेन की एकल पाए वाली सड़क शामिल है। अनुमान है कि परियोजना में दो लाख मीट्रिक टन (एफिल टावर में इस्तेमाल इस्पात से तीस गुना अधिक) इस्पात की खपत होगी। इसी तरह इसके निर्माण में 20 लाख क्यूबिक मीटर कंक्रीट की खपत होगी, जो बुर्ज खलीफा में लगे कंक्रीट से छह गुना अधिक है।

 

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में एक नई कार्य संस्कृति की शुरुआत की है

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New Delhi – केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार);पृथ्वी विज्ञानराज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); प्रधानमंत्री कार्यालय,कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज यहां कहा कि भारत में नई कार्य संस्कृति की शुरुआत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हमेशा श्रेय दिया जाएगा, जिसमें प्रत्येक गरीब और जन कल्याणकारी योजनाओं को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वो जाति, पंथ, धर्म या वोट के नफा-नुकसान पर विचार किए बिना सबसे जरूरतमंद या कतार में खड़े आखिरी व्यक्ति तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि, इसी तरह,समकालीन भारत के उभरते परिदृश्य को देखते हुएश्री मोदी ने स्टार्टअप्स को लगातार बढ़ावा दिया है,जिन्हें अपनी आजीविका कमाने में सक्षम होना चाहिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुएकहा कि जहां पहले जरूरतें पूरी नहीं हुई वहां की जरूरतें पूरी करने के लिए और जहां अतीत में न्याय नहीं किया गया वहां न्याय दिलाने के लिए शुद्ध रूप से निष्पक्ष मापदंडों का पालन किया गया। उन्होंने कहा कि यहकांग्रेस और उसकी सहयोगी सरकारों द्वारा अपनाए गए पिछले कार्य व्यवहार से काफी हटकर है जिसमें वोट बैंक की राजनीति के चलते राज्य से मिलने वाले लाभों को चयनित लोगों तक ही पहुंचाया जाना तय कर दिया जाता था।श्री मोदी ने सभी के लिए न्याय के सिद्धांत के आधार पर सार्वजनिक वितरण के मानकों को सफलतापूर्वक वोट के नफा-नुकसान के विचार से बहुत ऊपर उठाया और फिर यह तय करने के लिए जनता पर छोड़ दिया कि वे किसे वोट देना चाहते हैं,और जनता ने भी मोदी सरकार को पहले के चुनाव की तुलना में बहुत अधिक जनादेश के साथ दूसरे कार्यकाल के लिए वापस लाकर पीएम की इस सोच का समर्थन किया।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, शौचालय आदि जैसी नागरिक केंद्रित योजनाएं ऐसे हर घर में पहुंचीं जहां इन सुविधाओं का अभाव पाया गया और अधिकारियों ने यह कभी नहीं पूछा कि लाभ प्राप्त करने वाला परिवार किस धर्म या जाति का है या पिछले चुनाव में उन्होंने किस राजनीतिक दल को वोट दिया था। उन्होंने कहा कि यह नई कार्य संस्कृति भारतीय राजनीति में एक नया मानदंड बन जाएगी और जनता हर राजनीतिक दल से इसका पालन करने की उम्मीद करेगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 8 वर्षों की छोटी अवधि के दौरानकेंद्र कई योजनाओं को करीब 100% पूरा करने में सक्षम रहा है। उन्होंने कहा कि “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के सिद्धांत का पालन करते हुए जरूरतमंद लोगों तक लाभ पहुंचाया जाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि गरीब कल्याण अन्न योजना,जन धन,उज्ज्वला,शौचालय,पीएम आवास,हर घर जल,हर घर बिजली और आयुष्मान जैसी परिवर्तनकारी योजनाओं के कारण देश की जनता ने केंद्र और अधिकांश राज्यों दोनों मेंबार-बार मोदी सरकार पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि पहले जब देश में तुष्टिकरण की नीति चलती थी, उसके विपरीत अब लोगों को बिना किसी भेदभाव के कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि इन कल्याणकारी उपायों ने करोड़ों लोगों को घोर गरीबी के चंगुल से बाहर निकाला और उन्हें सम्मान का जीवन उपलब्ध कराया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पत्रकारों से कहा कि वे स्वयं पता लगा सकते हैं कि इन कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थी सभी जाति, पंथ और धर्म के हैं क्योंकि लाभार्थियों की सूची पूरी निष्पक्षता और बिना किसी पूर्वाग्रह के बनाई जाती है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि गरीबी हटाने के लिए ग्रामीण रोजगार योजना जैसे अन्य उपायों के साथ इन योजनाओं ने गरीब से गरीब व्यक्ति के जीवन को बदल दिया है और उनके जीवन स्तर को सम्मान के स्तर तक बढ़ाने में मदद की है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बिना की किसी कमी के पारदर्शी और कुशल वितरण तंत्र के माध्यम से सीधे जरूरतमंदों तक पूरा लाभ पहुंच रहा है।

उत्तर-पूर्वी क्षेत्र का उदाहरण देते हुएडॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2014 से पहले,इस क्षेत्र को केंद्र सरकारों की अदूरदर्शी नीतियों के कारण लगातार आर्थिक रूप से नुकसान होता रहा,लेकिन 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के तुरंत बादप्रधानमंत्री ने कहा था कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र को देश के अधिक विकसित क्षेत्रों के बराबर लाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले आठ वर्षों में न केवल विकासात्मक कमियों को सफलतापूर्वक पाट दिया गया है,बल्कि उत्तरपूर्वी क्षेत्र को भी मनोवैज्ञानिक भरोसा हासिल हुआ है। उन्होंने कहा कि सड़क, रेल और हवाई संपर्क के मामले में महत्वपूर्ण विकास न केवल पूरे क्षेत्र में बल्कि पूरे देश में माल और लोगों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने में मदद कर रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पत्रकारों को मिजोरम का उदाहरण भी दिया कि यह राज्य हमेशा से भाजपा का विरोध करता रहा है,लेकिन मोदी सरकार ने बिना किसी भेदभाव के मिजोरम में इजराइली तकनीक की मदद से साइट्रस फ्रूट “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” की स्थापना में मदद की। उन्होंने बताया कि यह साइट्रस फ्रूट सेंटर भारत में अपनी तरह के एक अनूठे संस्थान के रूप में उभरा है, जो मिजोरम में स्थित होने के बावजूद पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र और असल में पूरे देश की जरूरतों को पूरा करता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने दोहराया कि साल 2015 में लाल किले की प्राचीर से “स्टार्टअप इंडिया स्टैंडअप इंडिया” के लिए प्रधानमंत्री के आह्वान के साथ शुरू हुए उनके प्रोत्साहन के कारणभारत में स्टार्टअप की संख्या लगभग 300 से 400 से बढ़कर 70,000 हो गई है। इसे उत्तर प्रदेश के उन युवाओं द्वारा पोषित किया जाना चाहिए जो विभिन्न स्टार्ट-अप में अपना करियर बनाना चाहते हैं। भारत में 100 से अधिक यूनिकॉर्न (ऐसी स्टार्टअप कंपनी जिसका मूल्य 1 अरब डॉलर से अधिकहो गया हो) हैं और बायोटेक स्टार्टअप्स ने तो अपने प्रदर्शन के दम पर काफी उम्मीद जताई है।

केंद्रीय मंत्री ने स्टार्टअप की विशाल संभावनाओं और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ सरकार द्वारा स्टार्टअप्स को दी जा रही वित्तीय सहायता के बारे में, विशेष रूप से युवाओं के बीच, जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि मोदी सरकार के आठ वर्षों ने देश में ‘युवा शक्ति’ और ‘नारी शक्ति’ कोउनकी आकांक्षाओं,उद्देश्यों और लक्ष्यों को प्रमुखतादेते हुए एक नया सवेरा और नई दिशा दी है।

 

खानों की सफल नीलामी के लिये राज्यों को प्रोत्साहन दिया जायेगा – श्री प्रह्लाद जोशी

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New Delhi – केंद्रीय कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि खानों की सफल नीलामी के लिये राज्य सरकारों को और जिन्होंने संभावित खनिज ब्लॉकों को चिह्नित किया है, उन्हें प्रोत्साहन दिया जायेगा। श्री जोशी ने कहा कि सफल राज्यों को कल नई दिल्ली में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय खान तथा खनिज सम्मेलन के दौरान पुरस्कृत किया जायेगा।

श्री प्रह्लाद जोशी आज खान मंत्रालय के आजादी का अमृत महोत्सव प्रतीक सप्ताह का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री श्री अमित शाह इस एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के मुख्य अतिथि होंगे। आजादी का अमृत महोत्सव प्रतीक सप्ताह समारोहों में हिस्सा लेते हुये खान मंत्रालय में सचिव, श्री आलोक टंडन ने कहा कि देशभर में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम/मंत्रालय के अधीनस्थ कार्यालय 11 से 17 जुलाई, 2022 तक प्रतीक सप्ताह मनायेंगे।

लड़की : गर्ल ड्रैगन’ 15 जुलाई को रिलीज़ होगी

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बॉलीवुड के जाने-माने फिल्ममेकर रामगोपाल वर्मा की मार्शल आर्ट्स पर आधारित बहुप्रतीक्षित फिल्म  ‘लड़की : गर्ल ड्रैगन’ का ट्रेलर, पिछले दिनों मुम्बई के जेडब्ल्यू मैरियट होटल में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान जारी किया गया इसके साथ ही इस फिल्म को 15 जुलाई को रिलीज़ करने‌ की घोषणा कर दी गई। इस फिल्म में अभिनेत्री पूजा भालेकर की काफी दमदार भूमिका में नज़र आएगी, जो असल ज़िंदगी में ख़ुद मार्शल आर्ट्स में माहिर हैं।
‘रात’, ‘शिवा’, ‘रंगीला’, ‘भूत’, ‘सत्या’ जैसी एक से बढ़कर एक उम्दा फ़िल्में बनानेवाले निर्माता निर्देशक रामगोपल वर्मा ‘लड़की: ड्रैगन गर्ल’ की रिलीज़ को लेकर  फिलवक्त बेहद उत्साहित हैं। यह फ़िल्म रामगोपाल वर्मा के गृह राज्य आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में तेलुगू भाषा में तो रिलीज़ की जाएगी, साथ ही इसे तमिल, मलयालम और कन्नड़ भाषा में भी बड़े पैमाने पर रिलीज़ किया जाएगा। इस फिल्म को भव्य स्तर पर ना सिर्फ़ भारत में रिलीज़ की जाएगी, बल्कि फिल्म के चीनी वर्ज़न को चीन के तकरीबन 40,000 सिनेमाघरों में रिलीज़ किया जाएगा।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच द्वारा 421वी काव्य गोष्ठी संपन्न

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अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच द्वारा 421वी काव्य गोष्ठी संपन्न

संतोष साहू,

नवी मुम्बई। अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच एक सामाजिक और साहित्यिक संस्था है जो समाज के लिए और साहित्य के लिए निरंतर कार्यक्रम करती आ रही है। इसी क्रम में 9 जुलाई को कोपरखैरने, नवी मुंबई में काव्य गोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता की सेवा सदन प्रसाद ने तथा मुख्य अतिथि रहे रामस्वरूप साहू।
मंच संचालन किया युवा कवि साहित्यकार पवन तिवारी ने और मां सरस्वती की वंदना की वंदना श्रीवास्तव ने।
प्रस्तुत है कार्यक्रम रचनाकारों की खूबसूरत पंक्तियां :-
बहुत याद कर लिया जीवन में
हम सबने जन्म से अब तक
ये जो तुमारा सुंदर रूप है
या पूनम का चांद है यह
– ओमप्रकाश पांडेय

प्रियतम किधर गए
सखी मुझे बतलाओ
प्रियतम किधर गए
जीवन को त्योहार बनाकर
यादों का गलहार सजाकर
सपनों का संसार दिखाकर
हृदय द्वार पर मुझे बिठाकर
अब क्यों चुप्पी साधे
प्रियतम किधर गए
सखी मुझे बतलाओ
प्रियतम किधर गए
– अलका पांडेय

पीछा मुझसे प्रभुजी छुड़ा ना पाओगे
जब कभी भी सुनोगे विनती मेरी मेरे ऊपर दया दिखाओगे
– विशंभर तिवारी

पिता मेरी जान है
पिता मेरी पहचान है
– नीरजा ठाकुर

लोभ लालच के दाने बिखरे बीच डगरिया तेरी
चुगने कि तू आस ना कर यह नहीं नजरिया तेरी
– त्रिलोचन सिंह

भूल गया इंसान सभी रीति रस्में, रामायण बाइबल कुरान की कस्मे।
इसीलिए इतना परेशान है इंसान, इंसान से हैवान बन गया इंसान
– रवि यादव

परछाई की मानिद यादें तेरी पीछे पड़ी रहती हैं
जाओ चाहे जितनी दूर मगर यह पास खड़ी रहती हैं
तुम आ जाती हो तो हंसने लगती हैं घर की दीवारें
वरना तेरे जाने के बाद यह खामोश खड़ी रहती हैं
– जे पी सहारनपुरी

रिमझिम रिमझिम पड़े फुहार
गाये गोरी गीत मल्हार
तेरी मेरी प्रेम कहानी
मन में कुमुद खिले हजार
– रामस्वरूप साहू

सो गई है जो संवेदना
वह जगाने आया हूं
गांव छोड़कर शहर में
यारों कुछ मांगने आया हूं
– सेवासदन प्रसाद

बंजर जमीन थी कोई फूल फुला नहीं
कितने ही ख्वाब आंख में बोने के बावजूद
– वंदना श्रीवास्तव

कल्पना में तुम्हारी बनी अल्पना। अन्य कोई नहीं क्यों तुम्हें सोचना
– पवन तिवारी

कार्यक्रम में उपस्थित सभी कवियों ने अपनी अपनी स्वरित रचनाओं से काव्य गोष्ठी को गौरव प्रदान किया। अंत में नीरजा ठाकुर ने सभी कवियों का आभार व्यक्त किया और परिचर्चा के साथ गोष्ठी का समापन हुआ।

नेटफ्लिक्स (Netflix) ने की ‘टेकटेन’ की घोषणा

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नेटफ्लिक्स इंडिया और फिल्म कंपेनियन द्वारा संयुक्त रुप से भारत के फिल्म निर्माताओं औरकहानीकारों की अगली पीढ़ी का समर्थन करने के लिए ‘टेकटेन’ की घोषणा कर दी गई है। ‘टेक टेन’ एक लघु फिल्म कार्यशाला और प्रतियोगिता है जिसका उद्देश्य भारत में विविध पृष्ठभूमि के उभरते फिल्म निर्माताओं को खोजना और उनका समर्थन करना है। ‘टेकटेन’ वर्कशॉप में एडिटिंग, प्रोडक्शन डिजाइन, स्क्रीनप्ले डेवलपमेंट, म्यूजिक, सिनेमैटोग्राफी, लाइटिंग और शॉर्ट फिल्मों की नींव रखने के सत्र  को शामिल किया गया है। ‘टेक टेन’ के अंतर्गत क्रमवार रूप से 10 फिल्म निर्माताओं को क्रिएटिव इंडस्ट्री के दिग्गजों की कार्यशालाओं में भाग लेने का रोमांचक अवसर दिया जायेगा। साथ ही $10,000 के अनुदान समेत पूरी तरह से वित्त पोषित लघु फिल्म बनाने का मौका दिया जायेगा। फिल्मों को नेटफ्लिक्स के इंडिया यूट्यूब चैनल पर दिखाया जाएगा।
हाल ही मेंं आयोजित कार्ययशाला मेंं रीमा कागती, टिस्का चोपड़ा, गुनीत मोंगा, नीरज घायवान, जयदीप अहलावत, कबीर खान, विशाल ददलानी और शकुन बत्रा जैसे शख़्सियतों ने अपनी रचनात्मक यात्रा का हवाला देते हुए उभरते फिल्म निर्माताओं का मार्गदर्शन किया। ‘टेकटेन’ के फाइनलिस्ट में गोवा से बरखा नाइक और सुयश कामत, मुंबई से हितार्थ राकेश देसाई, रिया नलवडे और समीहा सबनीस, तिरुवनंतपुरम से मुरली कृष्णन, चेन्नई से मनस्विनी बूवराहन और संदीप किशन अंबुसेलवन, कोलकाता से रोहन श्याम चौधरी और अदिति शर्मा हैं।
फिल्म समीक्षक, लेखक और फिल्म सहयोगी संपादक, अनुपमा चोपड़ा, जो कार्यक्रम का नेतृत्व कर रही हैं, उन्होंने कहा, “टेक टेन कहानी कहने और मौलिकता का सेलिब्रेशन है। कार्यशाला और प्रतियोगिता का उद्देश्य समावेशी होना और भारत में कैमरे के पीछे और सामने की विविध आवाजों को प्रदर्शित करना है।” “मुझे उम्मीद है कि टेक टेन भारत भर के कलाकारों को अपने पैर जमाने और ऊंची उड़ान भरने में सक्षम बनाएगा।”
नेटफ्लिक्स दुनिया की अग्रणी स्ट्रीमिंग मनोरंजन सेवा है, जिसमें 190 से अधिक देशों में 222 मिलियन सशुल्क सदस्यताएं हैं, जो विभिन्न प्रकार की शैलियों और भाषाओं में टीवी श्रृंखला, वृत्तचित्र, फीचर फिल्मों और मोबाइल गेम्स का आनंद ले रही हैं। सदस्य किसी भी इंटरनेट से जुड़ी स्क्रीन पर जितना चाहें, कभी भी, कहीं भी देख सकते हैं। सदस्य बिना विज्ञापनों या प्रतिबद्धताओं के खेल सकते हैं, रोक सकते हैं और देखना फिर से शुरू कर सकते हैं। जब से भारत में नेटफ्लिक्स (Netflix) का आगमन हुआ है तब से भारतीय सिनेदर्शकों में इसके प्रति दीवानगी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। खासकर युवावर्ग को अपने कंटेंट के माध्यम से अपनी ओर आकर्षित करने की दिशा में ‘नेटफ्लिक्स’ अग्रसर है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा “हरियाली महोत्सव” का आयोजन

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पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय “आजादी का अमृत महोत्सव” की भावना के तहत 8 जुलाई, 2022 को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में “हरियाली महोत्सव” का आयोजन करेगा।

हरियाली महोत्सव-  “वृक्ष महोत्सव” का आयोजन न सिर्फ वर्तमान पीढ़ी के जीवन को बनाए रखने बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने में पेड़ों के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए किया जा रहा है। जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में पेड़ अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस महोत्सव को वन संरक्षण एवं वृक्षारोपण के प्रति जनता में उत्साह पैदा करने के एक प्रभावी उपकरण के तौर पर देखा जाता है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सरकार की नीतियों एवं कार्यक्रमों से संबंधित पहल के पूरक के रूप में इस महोत्सव का बेहद महत्व है। पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और इस धरती को इकोसिस्टम से जुड़ी विभिन्न सेवाएं प्रदान करने में वन/हरियाली की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करने के उद्देश्य से देशभर में हरियाली महोत्सव मनाया जाता है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा हरियाली महोत्सव 2022 का आयोजन इस अवसर पर वृक्षारोपण अभियान चलाने के लिए राज्य सरकारों, पुलिस संस्थानों और दिल्ली के स्कूलों के सहयोग से किया जा रहा है। इस महोत्सव के हिस्से के रूप में देशभर के 75 नगर वनों, दिल्ली/एनसीआर के 75 पुलिस स्टेशनों एवं 75 स्कूलों की भागीदारी के साथ और विभिन्न राज्यों के 75 अवक्रमित वृक्षारोपण स्थलों पर समारोहपूर्वक वृक्षारोपण अभियान आयोजित किए जा रहे हैं।

इस आयोजन में केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा श्रम और रोजगार मंत्री  श्री भूपेंद्र यादव, केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी, केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे और जीएनसीटीडी के उपराज्यपाल श्री विनय कुमार सक्सेना शामिल होंगे।

इस आयोजन के मुख्य आकर्षण में रिकी केज का संगीत कार्यक्रम शामिल है।

मैं हूँ पाकिस्तानी पर मेरा दिल है हिन्दुस्तानी ‘ अभियान से पाक -सरकार के कान खड़े -४० पॉइंट

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वर्ष १९४७ में १४ अगस्त को जन्मे पाकिस्तान में भी इतिहास पुनर्लेखन की लहर उठी है।पाकिस्तान का एक वर्ग यह मानता है कि उनके बच्चों को उनके देश के वास्तविक इतिहास से वंचित कर दिया गया है। ऐसे में अब कुछ लोग अपने देश का प्राचीन और मध्ययुगीन इतिहास खंगालने लगे हैं। इस बीच राजा दाहिर की आए दिन चर्चा होती रहती है। वर्तमान में सिंध के राजा दाहिर, पंजाब के महाराज रणजीत सिंह और सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में पाकिस्तान में जोर-शोर से चर्चाएं चल रही हैं। भारत में भी इसको लेकर कुछ जगहों पर चर्चा है।पाकिस्तान में चल रहे ” मैं हूँ पाकिस्तानी , पर दिल है हिन्दुस्तानी ” अभियान से वहां की सरकार भी सांसत में आ गयी है।

दाहर (दाहिर) सन्‌ ६७९ में सिंध के राजा बने। कुछ इतिहासकारों के अनुसार उनका शासनकाल:६९५ -७१२ ई. के बीच रहा। कहते हैं कि सिंधु देश पर राजपूत वंश के राजा रायसाहसी का राज्य था। रायसाहसी का कोई उत्तराधिकारी नहीं था अत: उन्होंने अपने प्रधानमंत्री कश्मीरी ब्राह्मण चच को अपना राज्य सौंपा। राजदरबारियों एवं रानी सोहन्दी की इच्छा पर राजा चच ने रानी सोहन्दी से विवाह किया। राजा दाहिर चच के पुत्र थे। राजा चच की मृत्यु के बाद उनका शासन उनके भाई चंदर ने संभाला, जो कि उनके राजकाल में प्रधानमंत्री थे। राजा चंदर ने ७ वर्ष तक सिंध पर राज्य किया। इसके बाद राज्य की बागडोर महाराजा दाहिर के हाथ में आ गई।

कहते हैं कि खलीफाओं के ईरान और फिर अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद वहां की हिन्दू, पारसी और बौद्ध जनता को इस्लाम अपनाने पर मजबूर करने के बाद अरबों ने भारत के बलूच, सिंध, पंजाब की ओर रुख किया।सिंध पर तब ब्राह्मण राजा दाहिर का शासन था। राजा दाहिर का शासन धार्मिक सहिष्णुता और उदार विचारों वाला था जिसके कारण विभिन्न धर्म के लोग शांतिपूर्वक रहते थे; जहां हिन्दुओं के मंदिर, पारसियों के अग्नि मंदिर, बौद्ध स्तूप और अरब से आकर बस गए मुसलमानों की मस्जिदें थीं। अरब मुसलमानों को समुद्र के किनारे पर बसने की अनुमति दी गई थी। जहां से अरब देशों से व्यापार चलता था, लेकिन इन अरब व्यापारियों ने राजा दाहिर के साथ धोखा किया।

राजा दाहिर के संबंध में सभी इतिहासकारों का दृष्टिकोण अलग -अलग है। कई विद्वान मानते हैं कि चचनामा में उनके संबंध में जो लिखा है वह तथ्‍यों से परे हैं क्योंकि चचनामा सन्न १२१६ में अरब सैलानी अली कोफी ने लिखी थी और इसमें अरब जगत के नैरेटिव्ज़ का ध्यान रखा गया है। मुमताज पठान ने ‘तारीख़-ए-सिंध’ में राजा दाहिर के संबंध में लिखा है और जीएम सैय्यद की लिखी ‘सिंध के सूरमा’ नामक पुस्तक में भी इसका उल्लेख मिलता है। इसी तरह सिंधियाना इंसाइक्लोपीडिया भी है जिसमें राजा दाहिर का उल्लेख मिलता है। परंतु राजा दाहिर के संबंध में जो भारतीय इतिहास और सिंधियों द्वारा लिखा इतिहास है उसे पढ़ना भी जरूरी है।

कुछ इतिहासकारों के अनुसार मुहम्मद बिन कासिम एक नवयुवक अरब सेनापति था। उसे इराक के प्रांतपति अल हज्जाज ने सिन्ध के शासक दाहिर को एक गलतफहमी के कारण दण्ड देने के लिए भेजा था। असल मामला चचनामा के अनुसार श्रीलंका के राजा ने बगदाद के गवर्नर हुज्जाज बिन यूसुफ के लिए कुछ तोहफे भेजे थे जो दीबल बंदरगाह के करीब लूट लिये गए। इन समुद्री जहाजों में औरतें भी मौजूद थीं। कुछ लोग भाग कर हुज्जाज के पास पहुंच गए और उन्हें बताया दाहिर के क्षेत्र में लूट दाहिर के आदमियों ने की। हुज्जाज बिन यूसुफ ने राजा दाहिर को पत्र लिखा और आदेश जारी किया कि औरतें और लूटे गए माल और सामान वापस किया जाए हालांकि राजा दाहिर ने इससे इनकार किया और कहा कि ये लूटमार उनके इलाके में नहीं हुई और ना ही हमने ये लूट की है। परंतु हुज्जाज नहीं माना।

असल घटना कुछ इतिहासकार इस तरह बयां करते हैं कि सिंध का समुद्री मार्ग पूरे विश्व के साथ व्यापार करने के लिए खुला हुआ था। सिंध के व्यापारी उस काल में भी समुद्र मार्ग से व्यापार करने दूर देशों तक जाया करते थे और अरब, इराक, ईरान से आने वाले जहाज सिंध के देवल बंदर होते हुए अन्य देशों की तरफ जाते थे। जहाज में सवार अरब व्यापारियों के सुरक्षाकर्मियों ने देवल के शहर पर बिना कारण हमला कर दिया और शहर से कुछ बच्चों और औरतों को जहाज में कैद कर लिया। जब इसका समाचार सूबेदार को मिला तो उसने अपने रक्षकों सहित जहाज पर आक्रमण कर अपहृत औरतों ओर बच्चों को बंधनमुक्त कराया। अरबी जान बचाकर अपना जहाज लेकर भाग खड़े हुए।

उन दिनों ईरान में धर्मगुरु खलीफा का शासन था। हुज्जाज या हजाज उनका मंत्री था। खलीफा के पूर्वजों ने सिंध पर विजय प्राप्त करने की योजना बनाई थी , लेकिन अब तक उन्हें कोई सफलता नहीं मिली थी। अरब व्यापारी ने खलीफा के सामने उपस्थित होकर सिंध में हुई घटना को लूटपाट की घटना बताकर सहानुभूति प्राप्त करनी चाही। खलीफा स्वयं सिंध पर आक्रमण करने का बहाना ढूंढ रहा था। उसे ऐसे ही अवसर की तलाश थी। उसने अब्दुल्ला नामक व्यक्ति के नेतृत्व में अरबी सैनिकों का दल सिंध विजय करने के लिए रवाना किया। युद्ध में अरब सेनापति अब्दुल्ला को जान से हाथ धोना पड़ा। खलीफा अपनी हार से तिलमिला उठा।

इसके बाद दस हजार सैनिकों का एक दल ऊंट-घोड़ों के साथ सिंध पर आक्रमण करने के लिए भेजा गया। सिंध पर ईस्वी सन् ६३८ से ७११ ई.तक के ७४ वर्षों के काल में नौ खलीफाओं ने १५ बार आक्रमण किया। पंद्रहवें आक्रमण का नेतृत्व मोहम्मद बिन कासिम ने किया। कहते हैं कि ७१२ में अल हज्जाज के भतीजे एवं दामाद मुहम्मद बिन कासिम ने १७ वर्ष की आयु में सिन्ध के अभियान का सफल नेतृत्व किया। इसने सिंध और उसके आसपास के क्षेत्रों में बहुत खून-खराबा किया और पारसी व हिन्दुओं को पलायन करने पर मजबूर कर दिया।

सिन्ध के कुछ किलों को जीत लेने के बाद बिन कासिम ने इराक के प्रांतपति अपने चाचा हज्जाज को लिखा था- ‘सिवस्तान और सीसाम के किले पहले ही जीत लिये गए हैं। गैर- मुसलमानों का धर्मांतरण कर दिया गया है या फिर उनका वध कर दिया गया है। मूर्ति वाले मंदिरों के स्थान पर मस्जिदें खड़ी कर दी गई हैं, बना दी गई हैं।किताब ‘चचनामा अलकुफी’ { (खण्ड १ पृष्ठ १६४ ), लेखक एलियट और डाउसन }देवल, नेऊन, सेहवान, सीसम, राओर, आलोर, मुल्तान आदि पर विजय प्राप्त कर कासिम ने यहां अरब शासन और इस्लाम की स्थापना की।

इतिहासकारों के अनुसार सिंध के दीवान गुन्दुमल की बेटी ने सर कटवाना स्वीकर किया, पर मीर कासिम की पत्नी बनना नहीं। इसी तरह वहां के राजा दाहिर और उनकी पत्नियों और पुत्रियों ने भी अपनी मातृभूमि और अस्मिता की रक्षा के लिए अपनी जान दे दी। सिंध देश के सभी राजाओं की कहानियां बहुत ही मार्मिक और दुखदायी हैं। आज सिंध देश पाकिस्तान का एक प्रांत बनकर रह गया है। राजा दाहिर अकेले ही अरब और ईरान के दरिंदों से लड़ते रहे। उनका साथ किसी ने नहीं दिया बल्कि कुछ लोगों ने उनके साथ गद्दारी की।

सिंधी शूरवीरों को सेना में भर्ती होने और मातृभूमि की रक्षा करने के लिए सर्वस्व अर्पण करने का आह्वान किया। कई नवयुवक सेना में भर्ती किए गए। सिंधु वीरों ने डटकर मुकाबला किया और कासिम को सोचने पर मजबूर कर दिया। सूर्यास्त तक अरबी सेना हार के कगार पर खड़ी थी। सूर्यास्त के समय युद्धविराम हुआ। सभी सिंधुवीर अपने शिविरों में विश्राम हेतु चले गए। ज्ञानबुद्ध और मोक्षवासव नामक दो लोगों ने कासिम की सेना का साथ दिया और रात्रि में सिंधुवीरों के शिविर पर हमला बोल दिया गया।महाराज की वीरगति और अरबी सेना के अलोर की ओर बढ़ने के समाचार से रानी लाडी अचेत हो गईं। सिंधी वीरांगनाओं ने अरबी सेनाओं का स्वागत अलोर में तीरों और भालों की वर्षा के साथ किया। कई वीरांगनाओं ने अपने प्राण मातृभूमि की रक्षार्थ दे दिए। जब अरबी सेना के सामने सिंधी वीरांगनाएं टिक नहीं पाईं तो उन्होंने अपने सतीत्व की रक्षा के लिए जौहर किया।

बच गईं दोनों राजकुमारियां सूरजदेवी और परमाल ने युद्ध क्षेत्र में घायल सैनिकों की सेवा की। तभी उन्हें दुश्मनों ने पकड़कर कैद कर लिया। सेनानायक मोहम्मद बिन कासिम ने अपनी जीत की खुशी में दोनों राजकन्याओं को भेंट के रूप में खलीफा के पास भेज दिया। खलीफा दोनों राजकुमारियों की खूबसूरती पर मोहित हो गया और दोनों कन्याओं को अपने जनानखाने में शामिल करने का हुक्म दिया, लेकिन राजकुमारियों ने अपनी चतुराई से कासिम को सजा दिलाई। लेकिन जब राजकुमारियों के इस धोखे का पता चला तो खलीफा ने दोनों को कत्ल करने का आदेश दिया तभी दोनों राजकुमारियों ने खंजर निकाला और अपने पेट में घोंप लिया और इस तरह राजपरिवार की सभी महिलाओं ने अपने देश के लिए बलिदान दे दिया।

पाकिस्तान में उठी यह लहर अपने देश की सरकार को समाज की वह तस्वीर को दिखाने में कामयाब हो जाएगी जिस समाज में उसी के दुशमन रहते हैं और वह दुश्मन भी ऐसा कि उसे हर खूबसूरत चीज़ से बैर है ,मौशिकी यानी गीतों से नफरत है, उस चीज़ से नफरत है जिसमें आजादी है, खुशी है उस दिन एशिया पैसिफिक की तस्वीर मोहक हो जाएगी। कयास है कि इस मुहिम से पाकिस्तान की विदेश -व्यापार एवं रक्षा नीति प्रभावित हो सकती है। उसकी हालत फैज अहमद फैज की शेर की तरह हो गयी लगती है – :

“सामने उसके कभी उसकी सताईश ( जिसकी  तारीफ न हो सके )  नहीं की
दिल ने चाहा भी अगर होंठों ने जुंबिश (हलचल)  नहीं की

’48 कोस’ में अभिनेता, गायक और संगीतकार के रूप में अरुण बक्शी

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मुम्बई। आसमान को धरती पर लाने वाला चाहिए तुन्ना तुन्ना, दुनिया दी ठा ठा ठा, जैसे गीतों के लिए मशहूर अरुण बख्शी अब फ़िल्म 48 कोस में न सिर्फ बतौर एक्टर नजर आएंगे बल्कि संगीतकार और गायक के रूप में भी उन्होंने इस फ़िल्म के लिए काम किया।
लेखक, निर्माता, निर्देशक राजिंदर वर्मा ‘यशबाबू’ की हिंदी फिल्म ’48 कोस’ 8 जुलाई को रिलीज हो रही है। मुंबई में यश बाबू की हिन्दी फिल्म “48 कोस” का एक गाना और ट्रेलर लांच किया गया जहां अरुण बख्शी, पंकज बेरी, राजेश बब्बर भी उपस्थित थे। फ़िल्म का ट्रेलर काफी दमदार है और गाना अरुण बख्शी ने कम्पोज़ किया और गाया है।
खास बात यह है कि अरुण बख्शी अपना हर एक गाना लता मंगेशकर के स्टूडियो में रिकॉर्ड करते हैं। जहां क्वालिटी भी मिलती है और दुआएं भी मिलती हैं। अरुण बख्शी की छोटी सी म्युज़िक टीम है, उनका म्युज़िक प्रोग्रामर दिनेश रहाते हैं जिन्होंने इस गाने में उनका साथ दिया है।
यश बाबू का कहना है कि हमारे साहित्य में ऐसे कई पात्र एवं चरित्र है जिन्हें शायद हमारी नौजवान पीढ़ी भूल गयी है। हमारे इतिहास के गर्भ में ऐसी कई कहानियां है जो आज भी अनकही हैं, प्रासंगिक हैं।
हिन्दी फीचर फिल्म ‘48 कोस’ द्वारा उनकी कोशिश कुरुक्षेत्र का नाम विश्व पटल पर ले जाने की है। राजिंदर वर्मा ने कहानी के संदर्भ में बताया कि बचपन से ही वह महाभारत से प्रभावित थे। 48 कोस के द्वारपाल यक्षों की कहानियां उनको बहुत आकर्षक लगती थी। इन्हीं कहानियों को वह आधुनिक रूप में दर्शकों के सामने प्रस्तुत करना चाहते थे। कहानी को अपने स्वरूप में आने में डेढ़ साल लगा।
अरुण बख्शी का कहना है कि यह फीचर फिल्म दर्शकों के दिलों को छू लेगी और सोचने पर मजबूर कर देगी। इस फिल्म में नामी कलाकार पंकज बेरी, अनिल धवन, अरुण बक्शी, सोहित सोनी, अनिल वर्मा, जागृति ठाकुर, नलिनी खत्री, योगिता पॉल के अलावा बाल कलाकार आरव वाधवा, गर्वित खुराना, रीतिका राय, जय रल्हन ने काम किया है।
यशबाबू एंटरटेनमेंट द्वारा निर्मित फिल्म ‘48 कोस’ सिनेमाघरों में 8 जुलाई को रिलीज हो रही है।

प्रो डॉ कुंजल त्रिवेदी के संचालन में वर्ष 2022 अंतर्गत ” ‘आषाढ़स्य प्रथम दिवसे’ कार्यक्रम संपन्न

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प्रो डॉ कुंजल त्रिवेदी के अद्भुत संचालन में संस्कृत विभाग द्वारा वर्ष 2022 अंतर्गत “
‘आषाढ़स्य प्रथम दिवसे’
कार्यक्रम संपन्न हुआ
इस कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. डॉ कुंजल त्रिवेदी की सरस्वती वंदना वेदों के स्तुति गान के बाद किया गया
उपस्थित अतिथियों का शाब्दिक स्वागत भी प्रोफेसर डॉ कुंजल त्रिवेदी द्वारा किया गया
उसके बाद कॉलेज के प्रिन्सिपल श्री डॉ राजेश त्रिवेदी द्वारा संस्कृत में साहित्य की सुन्दर विगत दी गई, संस्कृत विभाग के अध्यापक डॉ नीरव कंसारा द्वारा मेघदूत खंड काव्य का विस्तृत विवरण दिया गया
  कॉलेज के संचालक श्री नवीन भोजन साहब द्वारा अध्यक्षीय वक्तव्य दिया गया. इस कार्यक्रम में कॉलेज के प्रोफेसर और विद्यार्थि बड़ी संख्या में उपस्थित हुए थे.
  इस कार्यक्रम का सुंदर संचालन और आभार प्रकट संस्कृत की प्रोफेसर कवयित्री, संस्कृत भारती की कार्यकर्ता और भाजपा महिला मोर्चा पाटण जिला मंत्री डॉ कुंजल त्रिवेदी ने किया था.
डॉ गुलाब चंद पटेल