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जुलाई 2022 में 1,48,995 करोड़ रुपये का सकल जीएसटी राजस्व संकलित

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जुलाई 2022 में सकल जीएसटी राजस्व संकलन 1,48,995 करोड़ रुपये है, जिसमें जीएसटी 25,751 करोड़ रुपये, एसजीएसटी 32,807 करोड़ रुपये, आईजीएसटी 79,518 करोड़ रुपये है (इसमें आयातित माल पर 41,420 करोड़ रुपये सहित) और उपकर 10,920 करोड़ रुपये (आयातित माल पर 995 करोड़ रुपये सहित) है। यह जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक का दूसरा सर्वाधिक राजस्व है।

सरकार ने आईजीएसटी से सीजीएसटी में 32,365 करोड़ रुपये और एसजीएसटी में 26,774 करोड़ रुपये समायोजित कर दिये हैं। जुलाई 2022 के मद्देनजर नियमित समायोजन के बाद केंद्र और राज्यों का कुल राजस्व सीजीएसटी के मद में 58,116 करोड़ रुपये और एसजीएसटी के मद में 59,581 करोड़ रुपये है।

पिछले वर्ष इसी माह के 1,16,393 करोड़ के प्राप्त जीएसटी राजस्व की तुलना में इस बार का राजस्व 28 प्रतिशत अधिक है। पिछले वर्ष के इसी महिने में इन्हीं स्रोतों से प्राप्त राजस्व की तुलना में जुलाई 2022 के दौरान, माल के आयात से प्राप्त होने वाला राजस्व 48 प्रतिशत अधिक तथा स्वदेशी लेने से प्राप्त होने वाला राजस्व (सेवाओं के आयात सहित) 22 प्रतिशत अधिक है।

अब लगातार पांच महिनों से मासिक जीएसटी राजस्व 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक दर्ज किया गया। इस तरह हर महिने उसमें सतत बढ़ोतरी होती रही। पिछले वर्ष के इसी समय की तुलना में जुलाई 2022 तक जीएसटी राजस्व की बढ़ोतरी 35 प्रतिशत अधिक रही, जिससे पता चलता है कि उसमें तेजी कायम थी। इससे साफ पता चलता है कि परिषद ने पूर्व में बेहतर कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के जो विभिन्न उपाय किये थे, यह उसी का परिणाम है। बेहतर तौर-तरीके के साथ आर्थिक बहाली का भी जीएसटी राजस्वों पर सकारात्मक प्रभाव पड़। जून 2022 के दौरान 7.45 करोड़ ई-वे बिल बनाये गये, जो मई 2022 की तुलना में थोड़ा सा अधिक हैं।

नीचे दी गई तालिका से वर्तमान वर्ष के दौरान मासिक सकल जीएसटी राजस्वों के रुझान का पता चलता है। तालिका में जुलाई 2021 की तुलना में जुलाई 2022 के दौरान हर राज्य द्वारा संकलित जीएसटी के राज्यवार आंकड़े दर्शाये गये हैं।

9 बिल्डर को 47 एकड़ जमीन बेच ₹1034 करोड़ बनाए -संजय राउत क्यों गिरफ्तार ?

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शिवसेना सांसद संजय राउत के कारण पात्रा चॉल केस लंबे समय से काफी चर्चा में बना हुआ है। 1034 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले मामले में राउत की गिरफ्तारी को देख लोग जानना चाह रहे हैं कि आखिर ये स्कैम था क्या और कब इसे अंजाम दिया गया था। इसके अलावा जो सबसे बड़ा सवाल है वो ये कि इस केस में संजय राउत की संलिप्ता कैसे है?

तो, आइए आज इन्हीं प्रश्नों के उत्तर जानते हैं और समझते हैं कि किस तरह निजी संस्था की धोखाधड़ी से इतना बड़ा घोटाला हुआ और उसमें गरीबों के सिर से छत छीन कर उसे अमीरों में दे दी गई।

पात्रा चॉल जमीन घोटाला क्या है?
इस घोटाले की शुरुआत साल 2007 में हुई थी। तब, महाराष्ट्र हाउसिंग एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) की 47 एकड़ जमीन पर 672 किराएदार रहते थे। इन्हीं 672 किराएदारों के पुनर्वास के लिए पात्रा चॉल परियोजना के तहत चॉल के विकास का काम प्रवीण राउत की कंपनी गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन और हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को सौंपा गया।

कॉन्ट्रैक्ट में कहा गया था कि 47 एकड़ पर जो बिल्डिंग बनेगी उसके 672 फ्लैट चॉल के किराएदारों को देने होंगे और तीन हजार फ्लैट एमएचडीए को हैंडओवर करने होंगे। बाद में जो जमीन बचेगी उसे बेचने और विकसित करने के लिए भी अनुमति जरूरी होगी। अब चॉल विकास के कॉन्ट्रैक्ट में सब चीजें तय थीं। लेकिन घोटाले की शुरुआत तब हुई जब कंपनी ने न तो इस जगह का विकास किया और न किराएदारों को मकान दिए और न ही MHADA को फ्लैट हैंडओवर किए।

प्राइवेट कंपनी पर आरोप है कि उन्होंने 47 एकड़ जमीन पर गरीबों के लिए फ्लैट बनाने की बजाए उसे 9 अलग-अलग बिल्डरों को बेचा और खासा पैसा कमाया। जब म्हाडा को इसकी सूचना हुई तो उन्होंने 2018 में जाकर उनके विरुद्ध एफआईआर करवाई और केस अपराध विंग के पास गया। इसके बाद 2020 में प्रवीण राउत की गिरफ्तारी हुई और यही से शुरु हुआ संजय राउत का इस केस से कनेक्शन।

संजय राउत और पत्नी वर्षा राउत की भूमिका
संजय राउत और प्रवीण राउत एक दूसरे के करीबी हैं। प्रवीण घोटाला करने वाली कंपनी में सारंग वधावन और राकेश वधावन के साथ डायरेक्टर थे। ये लोग पीएमसी बैंक घोटाले के भी आरोपित हैं। इसलिए 2020 में राउत की गिरफ्तारी के बाद जब कोर्ट से उन्हें जमानत मिली तो ईडी ने उन्हें दूसरे केस में पकड़े रखा। पूछताछ चलती रही। धीरे-धीरे सुजीत पाटकर का नाम सामने आया। ईडी ने पाटकर के ठिकाने पर छापा मारा तो कई दस्तावेज मिले।

ईडी की जाँच में सामने आया कि प्रवीण राउत की पत्नी माधुरी राउत ने संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत को 55 लाख रुपए का लोन दिया था जोकि बैंक से पास नहीं हुआ। इन्हीं पैसों से संजय राउत की पत्नी ने दादर का फ्लैट खरीदा था।

अब ये लोन जाँच का कारण इसलिए थी क्योंकि ईडी अधिकारियों ने कुछ समय पहले बताया था कि 2010 में, प्रवीण राउत ने इक्विटी सेल और भूमि सौदों की आड़ में अपने बैंक खाते में 95 करोड़ रुपए प्राप्त किए थे, हालाँकि कंपनी प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर सकी और उनकी कोई कमाई नहीं हुई।

प्रवीण पर एजेंसी ने आरोप मढ़ा कि एचडीआईएल कंपनी से प्रवीण राउत के खाते में 100 करोड़ ट्रांस्फर किए गए। इसके बाद उसने ये पैसा अपने करीबियों व परिजनों के अकॉउंट में डाल दिया।वर्षा के पास जो रकम माधुरी के जरिए आई वो इसी अपराध से जुड़ी रकम थी। ईडी का आरोप ये भी था कि खिम बीच के पास जो 8 प्लॉट थे वो भी वर्षा राउत और स्वप्ना पाटकर के नाम पर थे। इन्हें ईडी अपनी पिछली कार्रवाई में जब्त कर चुकी है।

संजय राउत ने घोटाले की संलिप्ता से किया इनकार
बता दें कि संजय राउत अपने ऊपर लगे हर इल्जाम को झूठा बता रहे हैं। उनका कहना है कि वो किसी घोटाले में शामिल नहीं है। ईडी उनके विरुद्ध गलत जानकारी के आधार पर कार्रवाई कर रही है। अपने आप को बेगुनाह बताने के लिए राउत ने बालासाहेब की कसम भी खाई। उन्होंने कहा कि वो न तो खुद को सरेंडर करेंगे और न शिवसेना को छोड़ेंगे।

फिलहाल, राउत ईडी की गिरफ्त में हैं। आज उन्हें पीएमएलए कोर्ट में पेश किया जाना है। यहाँ से उनकी हिरासत ईडी को दी जाएगी। कल करीबन 17 घंटे की पड़ताल के बाद राउत गिरफ्तार हुए थे।

दक्षिण एशिया के पत्रकारों का संगठन ‘सारा’ के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव पद पर जीतु सोमपुरा की नियुक्ति

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दीव। समग्र दक्षिण एशिया के देशों के पत्रकारों के हित में विभिन्न कार्य करने के लिए स्थापित किये गए साउथ एशिया रिपोर्टर्स एसोसिएशन (सारा) के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव पद पर पत्रकार जीतु सोमपुरा को नियुक्त किया गया है। इसकी घोषणा संस्था के अध्यक्ष डॉ. सीमा बेन पटेल ने एक समारोह में की थी।
दीव में विशेष पत्रकारों के सम्मान हेतू आयोजित पत्रकार रत्न एक्सेलेंस अवॉर्ड समारोह के अध्यक्ष पद पर दीव के मेयर हेमलता बेन सोलंकी तथा अतिथि विशेष पद पर पूर्व केबिनेट मंत्री धारासभ्य जवाहर भाई चावड़ा उपस्थित थे। इस अवसर पर सुख शांति समृद्धि धार्मिक पत्रिका के संपादक जीतु भाई सोमपुरा को पत्रकार रत्न अवॉर्ड देकर सम्मानित किया गया।
पत्रकारिता के इतिहास में धर्मक्षेत्र में सर्व प्रथम 65 साल के जीतु सोमपुरा ने विशेष योगदान दिया है।
18 साल से अधिक समय तक मुंबई के जन्मभूमि प्रवासी दैनिक में संतो और पाठकों के बिच धर्म सेतू के निर्माण में अनोखी भूमिका निभाकर समाज के समक्ष प्रेरणा का उत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया।
धार्मिक पत्रकारिता के साथ साथ 6 गुजराती फिल्म और टीवी सीरीयल का लेखन किया। एक फिल्म को गुजरात सरकार का श्रेष्ठ पटकथा लेखक का अवॉर्ड मिला।
फिल्म टीवी क्षेत्र को त्याग कर धार्मिक पत्रकारिता में संतो और पाठकों के बिच प्रेरणा सेतू के निर्माण में अपना योगदान देने पर ध्यान केंद्रित किया।
गुजराती चैनल गुर्जरी में धार्मिक कार्यक्रमों के प्रमुख पद से दिन रात की मेहनत की वजह से गुर्जरी चैनल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धर्म क्षेत्र में लोकप्रियता हासिल की।
गुजराती गुर्जरी चैनल की पांच साल की सफलता से प्रेरणा लेकर आरंभ हुई हिंदी धार्मिक चैनल आस्था और संस्कार चैनल में विशेष योगदान दिया।
जीतु सोमपुरा जी की धर्मयात्रा में देश की प्रथम IPTV ज्ञान चैनल तथा ब्रह्माकुमारी की पीस ऑफ माइंड चैनल का भी समावेश है।
धार्मिक पत्रकारिता की यात्रा के दौरान उन्होंने गुजराती भजनों के 50 घंटे का वीडियो इतिहास तथा हिंदी में चार सौ से ज्यादा प्रेरणात्मक कार्यक्रमों का निर्माण किया है।
उन्होंने पूज्य प्रमुख स्वामी महाराज की मुलाकात पर आधारित अक्षर संवाद पुस्तक समेत कुल 4 धार्मिक पुस्तक लिखे हैं।
वर्तमान में वे धार्मिक सुख शांति समृद्धि हिंदी पत्रिका के संपादक हैं। संतो के जीवन तथा आश्रमों द्वारा हो रही लोक सेवा पर आधारित लघु दस्तावेजी चलचित्रों का निर्माण करते रहते हैं।
अब तक पत्रकार जितु सोमपुरा को समग्र जीवनकाल के दौरान धार्मिक पत्रकारिता क्षेत्र में दिए हुए योगदान के लिए कुल पाँच अवॉर्ड मिले हैं।

यूपी लेखपाल परीक्षा में धांधली को लेकर STF की बड़ी कार्रवाई, अबतक 23 लोग गिरफ्तार

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UP News: यूपी में राजस्व लेखपाल मुख्य परीक्षा (Lekhpal Exam) में अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर साल्वर बैठाने, ब्लूटूथ के जरिए नकल कराने और परीक्षा केंद्रों (Examination Center) की शुचिता भंग करने के आरोप में 23 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें पेपर साल्वर, गैंग लीडरों और अभ्यर्थी शामिल हैं. इन्हें यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने लेखपाल परीक्षा में कथित पेपर लीक (Paper Leak) को लेकर सरकार पर हमला बोला है.

एसटीएफ को मिल गई थी पहले से जानकारी

बता दें कि यूपी में आज राजस्व लेखपाल परीक्षा आयोजित की जा रही है. वहीं गिरफ्तारी को लेकर एडीजी एसटीएफ अमिताभ यश ने बताया, ‘राज्य के 12 जनपदों में लेखपाल राजस्व मुख्य परीक्षा आयोजित कराई जा रही है. एसटीएफ को पहले से जानकारी मिली थी कि कुछ गैंग, साल्वर और ब्लूटूथ का इस्तेमाल करके अभ्यर्थियों को नकल कराने का प्रयास करेंगे.’ यूपी एसटीएफ ने बताया कि अलग-अलग स्थानों से कुल 23 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

इन नकल माफिया, अभ्यर्थियों की हुई गिरफ्तारी

एसटीएफ ने नकल माफिया, अभ्यर्थियों और साल्वर को गिरफ्तार किया है. ये साल्वर केवल यूपी के नहीं बल्कि बिहार से भी बुलाए गए थे. पुलिस ने नकल माफिया नरेंद्र कुमार पटेल, संदीप पटेल, विजयकांत पटेल, सहयोगी दिनेश कुमार यादव और सोनू कुमार को गिरफ्तार किया है. बताया जा रहा है कि विजयकांत ने अभ्यर्थियों से 10-10 लाख रुपये लिए थे और उन्हें बदले में ब्लूटूथ डिवाइस उपलब्ध कराई थी. वहीं पुलिस ने प्रयागराज से अभ्यर्थी दिनेश कुनार साह, वाराणसी से दिलीप गुप्ता, कानपुर से करण कुमार को गिरफ्तार किया जबकि पटना के रहने वाले साल्वर संजय कुमार यादव, मुरादाबाद से रविंद्र कुमार, मेरठ से मोहित और लखनऊ से साल्वर राजू कुमार को अरेस्ट किया है. पुलिस ने हरियाणा के सोनीपत निवासी नीरज को भी गिरफ्तार किया है जिसपर साल्वर की व्यवस्था करने के आरोप हैं.

9 घंटे की पूछताछ के बाद हिरासत में लिए गए संजय राउत

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पात्रा चॉल जमीन से जुड़े 1034 करोड़ रुपए के घोटाले (Patra Chawl Land Scam) की जाँच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रविवार (31 जुलाई, 2022) को शिवसेना के सांसद नेता संजय राऊत (Sanjay Raut) को अपनी हिरासत में ले लिया है।

इससे पहले रविवार की सुबह ही छापेमारी करने के लिए ईडी के अधिकारी सुबह के सात बजे ही भांडुप स्थित उनके घर पहुँच गए थे। उसके बाद से ही जाँच एजेंसी लगातार कार्रवाई कर रही है। इस दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने करीब 9 घंटे तक लगातार संजय राउत से पूछताछ की। उनके घर की तलाशी लेने के बाद जाँच एजेंसी ने उन्हें अपनी कस्टडी में ले लिया।

इससे पहले 27 जुलाई को जब ईडी ने राउत को तलब किया था तो उन्होंने संसद सत्र का हवाला देते हुए जाँच एजेंसी के समक्ष पेश होने से इनकार कर दिया था। ED की कार्रवाई पर संजय राऊत ने कहा, “बाला साहेब की कसम मेरा इस मामले से कोई वास्ता नहीं है। हमने बाला साहेब ने लड़ना सिखाया है और हमारी लड़ाई जारी रहेगी। मैं शिवसेना नहीं छोड़ने वाला भले ही मेरे खिलाफ झूठे सबूतों के आधार पर झूठी कार्रवाई की जा रही है। भले मैं मर जाऊँ पर झुकने के लिए तैयार नहीं।”

पात्रा चॉल घोटाले में 5 अप्रैल 2022 को ED ने संजय राऊत और उनकी पत्नी वर्षा राऊत से जुड़ी 11 करोड़ रुपए से अधिक की सम्पति कुर्क कर ली थी। ED ने उन्हें 28 जून को पेश होकर जवाब देने के लिए कहा गया था, पर वो उपस्थित नहीं हुए। तब उन्होंने खुद को गिरफ्तार करने की चुनौती भी दी थी। राऊत को सबसे हालिया समन 27 जुलाई को भेजा गया था।

गौरतलब है कि ये वही संजय राउत हैं, जिनका एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो थिततौर पर मराठी फिल्मों की प्रोड्यूसर डॉ स्वप्ना पाटकर के साथ गाली-गलौच करते सुने गए। इस ऑडियो में जो पुरुष है, उसकी ओर से महिला को गंदी-गंदी गाली दी जा रही है। ऑडियो में औरत से बात करते हुए “स%$ली, मादरच&^द और बहन&^%” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है।

₹5000 करोड़ का बंगाल भर्ती घोटाला -6वीं पास भी बना टीचर, सामने आई लिस्ट

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (West Bengal CM Mamata Banerjee) की कैबिनेट के पूर्व सहयोगी पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) जिस शिक्षक भर्ती (Teacher Recruitment Scam) में गिरफ्तार हुए हैं, उसकी परतें खुलने लगी हैं। मामले में गिरफ्तार अर्पिता मुखर्जी सहित TMC के कई नेताओं ने अपने-अपने लोगों की नौकरी की सिफारिश की थी।

खबर सामने आ रही है कि साल 2014 के इस घोटाले को कई तरह से अंजाम दिया गया था। इसमें बिना मेरिट वालों को नौकरी दी गई। जो छठी कक्षा पास थे, उन्हें भी टीचर बना दिया गया। इतना ही नहीं, जिन्होंने एग्जाम ही नहीं दिया, उनका भी सिलेक्शन हो गया था।

इन भर्तियों के लिए अभ्यर्थियों से लाखों रुपए लिए गए। इस भर्ती घोटाले से संबंधित तीन सूची सामने आई है। इसकी एक लिस्ट किसी एजेंट की बताई जा रही है। इस लिस्ट में उन लोगों के नाम दिए गए हैं, जिनसे रिश्वत ली गई थी। इसमें उनके नाम, मोबाइल नंबर और कितना पैसा लिया गया है, दर्ज है।

इसके साथ ही एक दूसरी लिस्ट है। यह लिस्ट बंगाल के सत्ताधारी दल तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के विधायकों से जुड़ी है। इसमें उन विधायकों और मंत्रियों के नाम दिए गए हैं, जिन्होंने उम्मीदवारों को नौकरी देने के लिए उनका नाम आगे बढ़ाया था।

दैनिक भास्कर ने अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में बताया है कि TMC नेता मुकुल रॉय के बेटे सुभ्रांशु रॉय, पार्टी के राज्य सचिव असीम माझी और अखिल गिरी के साइन किए हुए अलग-अलग लेटर मिले हैं। ये पत्र साल 2013 में लिखे गए हैं और इनमें परीक्षार्थियों के नाम और उनके रोल नंबर लिखकर भर्ती बोर्ड को भेजे गए थे।

यह बात भी सामने आई है कि पार्थ चटर्जी के पूर्व बॉडीगार्ड के परिवार के 13 लोगों को शिक्षा विभाग में नौकरी दी गई है। इनमें एक महिला ऐसी भी है, जो छठी पास है। इसी तरह अर्पिता की सिफारिश पर भी उसके कई रिश्तेदारों को नौकरी दी गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में पिटीशन दाखिल करने वाले वकील तरुण ज्योति तिवारी ने बताया कि शिक्षक भर्ती का पैसा TMC के कई नेताओं के जरिए तत्कालीन शिक्षा मंत्री तक पहुँच रहा था। तिवारी के मुताबिक, यह पूरा घोटाला 5,000 करोड़ का है, क्योंकि हर कैंडिडेट से 18-20 लाख रुपए लिए गए और यह सब पिछले 10 साल से चल रहा था।

बता दें कि हाईकोर्ट के निर्देश पर इस भर्ती घोटाले की सीबीआई जाँच कर रही है। वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। दूसरी तरफ, भर्ती प्रक्रिया में शामिल विद्यार्थी पिछले 503 दिनों से कोलकाता के मेयो रोड पर कोर्ट की अनुमति के बाद प्रदर्शन कर रहे हैं। हालाँकि, इन अवैध भर्ती वालों में से अभी तक किसी को हटाया नहीं गया है।

MAN KI BAAT – आज़ादी का अमृत महोत्सव एक जन आंदोलन का रूप ले रहा है – पीएम मोदी

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आज पीएम मोदी अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 91वें एपिसोड के जरिए देश की जनता से मुखातिब हुए. शुरुआत उन्होंने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं से की. साथ ही इस बार शुरू हुए हर-घर तिरंगा अभियान से जुड़ने की अपील भी की. जानते हैं क्या रहीं आज के कार्यक्रम की खास बातें- :

मन की बात’ का ये 91वाँ episode है। हम लोगों ने पहले इतनी सारी बातें की हैं, अलग-अलग विषयों पर अपनी बात साझा की है, लेकिन, इस बार ‘मन की बात’ बहुत खास है। इसका कारण है, इस बार का स्वतंत्रता दिवस, जब भारत अपनी आज़ादी के 75 वर्ष पूरे करेगा। हम सभी बहुत अद्भुत और ऐतिहासिक पल के गवाह बनने जा रहे हैं। ईश्वर ने ये हमें बहुत बड़ा सौभाग्य दिया है। आप भी सोचिए, अगर हम गुलामी के दौर में पैदा हुए होते, तो, इस दिन की कल्पना हमारे लिए कैसी होती ? गुलामी से मुक्ति की वो तड़प, पराधीनता की बेड़ियों से आज़ादी की वो बेचैनी – कितनी बड़ी रही होगी। वो दिन, जब हम, हर दिन, लाखों-लाख देशवासियों को आज़ादी के लिए लड़ते, जूझते, बलिदान देते देख रहे होते। जब हम, हर सुबह इस सपने के साथ जग रहे होते, कि मेरा हिंदुस्तान कब आज़ाद होगा और हो सकता है हमारे जीवन में वो भी दिन आता जब वंदेमातरम और भारत माँ की जय बोलते हुए, हम आने वाली पीढ़ियों के लिए, अपना जीवन समर्पित कर देते, जवानी खपा देते।

साथियो, 31 जुलाई यानी आज ही के दिन, हम सभी देशवासी, शहीद उधम सिंह जी की शहादत को नमन करते हैं। मैं ऐसे अन्य सभी महान क्रांतिकारियों को अपनी विनम्र श्रद्दांजलि अर्पित करता हूँ जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

साथियो, मुझे ये देखकर बहुत ख़ुशी होती है, कि, आज़ादी का अमृत महोत्सव एक जन आंदोलन का रूप ले रहा है। सभी क्षेत्रों और समाज के हर वर्ग के लोग इससे जुड़े अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। ऐसा ही एक कार्यक्रम इस महीने की शुरुआत में मेघालय में हुआ। मेघालय के बहादुर योद्धा, यू. टिरोत सिंह जी की पुण्यतिथि पर लोगों ने उन्हें याद किया। टिरोत सिंह जी ने खासी हिल्स (Khasi Hills) पर नियंत्रण करने और वहाँ की संस्कृति पर प्रहार करने की अंग्रेजों की साजिश का जमकर विरोध किया था। इस कार्यक्रम में बहुत सारे कलाकारों ने सुंदर प्रस्तुतियाँ दी। इतिहास को ज़िंदा कर दिया। इसमें एक carnival का आयोजन भी किया गया, जिसमें, मेघालय की महान संस्कृति को बड़े ही खूबसूरत तरीके से दर्शाया गया। अब से कुछ हफ्ते पहले, कर्नाटका में, अमृता भारती कन्नडार्थी नाम का एक अनूठा अभियान भी चलाया गया। इसमें राज्य की 75 जगहों पर आज़ादी के अमृत महोत्सव से जुड़े बड़े भव्य कार्यक्रम    आयोजित किये गए। इनमें कर्नाटका के महान स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने के साथ ही स्थानीय साहित्यिक उपलब्धियों को भी सामने लाने की कोशिश की गई।

साथियो, इसी जुलाई में एक बहुत ही रोचक प्रयास हुआ है जिसका नाम है – आज़ादी की रेलगाड़ी और रेलवे स्टेशन। इस प्रयास का लक्ष्य है कि लोग आज़ादी की लड़ाई में भारतीय रेल की भूमिका को जानें। देश में अनेक ऐसे रेलवे स्टेशन हैं, जो, स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से जुड़े हैं। आप भी, इन रेलवे स्टेशनों के बारे में जानकार हैरान होंगे। झारखंड के गोमो जंक्शन को, अब आधिकारिक रूप से, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन गोमो के नाम से जाना जाता है।

जानते है क्यों? दरअसल इसी स्टेशन पर, कालका मेल में सवार होकर नेताजी सुभाष, ब्रिटिश अफसरों को चकमा देने में सफल रहे थे। आप सभी ने लखनऊ के पास काकोरी रेलवे स्टेशन का नाम भी जरुर सुना होगा। इस स्टेशन के साथ राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्लाह खान जैसे जांबांजों का नाम जुड़ा है। यहाँ ट्रेन से जा रहे अंग्रेजों के खजाने को लूटकर वीर क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को अपनी ताक़त का परिचय करा दिया था। आप जब कभी तमिलनाडु के लोगों से बात करेंगे, तो आपको, थुथुकुडी जिले के वान्ची मणियाच्ची जंक्शन के बारे में जानने को मिलेगा। ये स्टेशन तमिल स्वतंत्रता सेनानी वान्चीनाथन जी के नाम पर है। ये वही स्थान है जहाँ 25 साल के युवा वान्ची ने ब्रिटिश कलेक्टर को उसके किये की सजा दी थी।

साथियो, ये लिस्ट काफी लम्बी है। देशभर के 24 राज्यों में फैले ऐसे 75 रेलवे स्टेशनों की पहचान की गई है। इन 75 स्टेशनों को बहुत ही खूबसूरती से सजाया जा रहा है। इनमें कई तरह के कार्यक्रमों का भी आयोजन हो रहा है। आपको भी समय निकालकर अपने पास के ऐसे ऐतिहासिक स्टेशन पर जरुर जाना चाहिए। आपको, स्वतंत्रता आंदोलन के ऐसे इतिहास के बारे में विस्तार से पता चलेगा जिनसे आप अनजान रहे हैं। मैं आसपास के स्कूल के विद्यार्थियों से आग्रह करूँगा, टीचर्स से आग्रह करूँगा कि अपने स्कूल के छोटे-छोटे बच्चों को ले करके जरुर स्टेशन पर जाएँ और पूरा घटनाक्रम उन बच्चों को सुनाएँ, समझाएँ।

मेरे प्यारे देशवासियो, आज़ादी के अमृत महोत्सव के तहत, 13 से 15 अगस्त तक, एक Special Movement – ‘हर घर तिरंगा- हर घर तिरंगा’ का आयोजन किया जा रहा है। इस movement का हिस्सा बनकर 13 से 15 अगस्त तक, आप, अपने घर पर तिरंगा जरुर फहराएं, या उसे, अपने घर पर लगायें। तिरंगा हमें जोड़ता है, हमें देश के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित करता है।

मेरा एक सुझाव ये भी है, कि 2 अगस्त से 15 अगस्त तक, हम सभी, अपनी Social Media Profile Pictures में तिरंगा लगा सकते हैं। वैसे क्या आप जानते हैं, 2 अगस्त का हमारे तिरंगे से एक विशेष संबंध भी है। इसी दिन पिंगली वेंकैया जी की जन्म-जयंती होती है जिन्होंने हमारे राष्ट्रीय ध्वज को design किया था। मैं उन्हें, आदरपूर्वक श्रद्दांजलि अर्पित करता हूँ। अपने राष्ट्रीय ध्वज के बारे में बात करते हुए मैं, महान क्रांतिकारी Madam Cama को भी याद करूँगा। तिरंगे को आकार देने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।

साथियो, आज़ादी के अमृत महोत्सव में हो रहे इन सारे आयोजनों का सबसे बड़ा सन्देश यही है कि हम सभी देशवासी अपने कर्तव्य का पूरी निष्ठा से पालन करें। तभी हम उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों का सपना पूरा कर पायेंगे। उनके सपनों का भारत बना पाएंगे। इसीलिए हमारे अगले 25 साल का ये अमृतकाल हर देशवासी के लिए कर्तव्यकाल की तरह है। देश को आज़ाद कराने, हमारे वीर सेनानी, हमें, ये जिम्मेदारी देकर गए हैं, और हमें, इसे पूरी तरह निभाना है।

मेरे प्यारे देशवासियो, कोरोना के खिलाफ हम देशवासियों की लड़ाई अब भी जारी है। पूरी दुनिया आज भी जूझ रही है। Holistic Healthcare में लोगों की बढ़ती रुचि ने इसमें सभी की बहुत मदद की है। हम सभी जानते हैं कि इसमें भारतीय पारम्परिक पद्धतियाँ कितनी उपयोगी हैं। कोरोना के खिलाफ लड़ाई में, आयुष ने तो, वैश्विक स्तर पर, अहम भूमिका निभाई है।

दुनियाभर में आयुर्वेद और भारतीय औषधियों के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। ये एक बड़ी वजह है कि Ayush Exports में record तेजी आई है और ये भी बहुत सुखद है कि इस क्षेत्र में कई नए Start-Ups भी सामने आ रहे हैं। हाल ही में, एक Global Ayush Investment और Innovation Summit हुई थी। आप जानकर हैरान होंगे, कि इसमें, करीब दस  हज़ार करोड़ रूपए के Investment Proposals मिले हैं। एक और बड़ी अहम बात ये हुई है, कि कोरोना काल में, औषधीय पौधों पर research में भी बहुत वृद्धि हुई है। इस बारे में बहुत सी Research Studies Publish हो रही हैं। निश्चित रूप से एक अच्छी शुरुआत है।

साथियो, देश में विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों को लेकर एक और बेहतरीन प्रयास हुआ है। अभी-अभी जुलाई महीने में Indian Virtual Herbarium को launch किया गया। यह इस बात का भी उदाहरण है, कि कैसे हम, Digital World का इस्तेमाल अपनी जड़ों से जुड़ने में कर सकते हैं। Indian Virtual Herbarium, Preserved Plants या plant parts की Digital Images का एक रोचक संग्रह है, जो कि, Web पर, Freely Available है।

इस Virtual Herbarium पर अभी लाख से अधिक Specimens और उनसे जुड़ी Scientific Information उपलब्ध है। Virtual Herbarium में, भारत की ,  Botanical Diversity की समृद्ध तस्वीर भी दिखाई देती है। मुझे विश्वास है Indian Virtual Herbarium, भारतीय वनस्पतियों पर research  के लिए एक important resource  बनेगा।

मेरे प्यारे देशवासियो, ‘मन की बात’ में हम हर बार देशवासियों की ऐसी सफलताओं की चर्चा करते हैं जो हमारे चेहरे पर मीठी मुस्कान बिखेर देती हैं। अगर कोई success story, मीठी मुस्कान भी बिखेरे, और स्वाद में भी मिठास भरे, तब तो आप इसे जरुर सोने पर सुहागा कहेंगे। हमारे किसान इन दिनों शहद के उत्पादन में ऐसा ही कमाल कर रहे हैं। शहद की मिठास हमारे किसानों का जीवन भी बदल रही है, उनकी आय भी बढ़ा रही है। हरियाणा में, यमुनानगर में, एक मधुमक्खी पालक साथी रहते हैं – सुभाष कंबोज जी।  सुभाष जी ने वैज्ञानिक तरीक़े से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने केवल छःह बॉक्स के साथ अपना काम शुरू किया था। आज वो करीब दो हज़ार बॉक्सेस में मधुमक्खी पालन कर रहे हैं।

उनका शहद कई राज्यों में supply होता है। जम्मू के पल्ली गाँव में विनोद कुमार जी भी डेढ़ हज़ार से ज्यादा कॉलोनियों में मधुमक्खी पालन कर रहे हैं। उन्होंने पिछले साल, रानी मक्खी पालन का प्रशिक्षण लिया है। इस काम से, वो, सालाना 15 से 20 लाख रूपए कमा रहे हैं।

कर्नाटक के एक और किसान हैं – मधुकेश्वर हेगड़े जी। मधुकेश्वर जी ने बताया कि उन्होंने, भारत सरकार से 50 मधुमक्खी कॉलोनियों के लिए subsidy ली थी। आज उनके पास 800 से ज्यादा कॉलोनियां हैं, और वो कई टन शहद बेचते हैं। उन्होंने अपने काम में innovation किया, और वो जामुन शहद, तुलसी शहद, आंवला शहद जैसे वानस्पतिक शहद भी बना रहे हैं। मधुकेश्वर जी, मधु उत्पादन में आपके innovation और सफलता, आपके नाम को भी सार्थक करती है।

साथियो, आप सब जानते हैं कि, शहद को, हमारे पारंपरिक स्वास्थ्य विज्ञान में कितना महत्व दिया गया है। आयुर्वेद ग्रंथों में तो शहद को अमृत बताया गया है। शहद, न केवल हमें स्वाद देता है, बल्कि आरोग्य भी देता है। शहद उत्पादन में आज इतनी अधिक संभावनाएं हैं कि professional पढ़ाई करने वाले युवा भी, इसे, अपना स्वरोजगार बना रहे हैं। ऐसे ही एक युवा हैं – यू.पी. में गोरखपुर के निमित सिंह। निमित जी ने बी.टेक किया है। उनके पिता भी डॉक्टर हैं, लेकिन, पढाई के बाद नौकरी की जगह निमित जी ने स्वरोजगार का फैसला लिया। उन्होंने शहद उत्पादन का काम शुरू किया। Quality Check के लिए लखनऊ में अपनी एक लैब भी बनवाई। निमित जी अब शहद और Bee Wax से अच्छी कमाई कर रहे हैं, और अलग-अलग राज्यों में जाकर किसानों को प्रशिक्षित भी कर रहे हैं। ऐसे युवाओं की मेहनत से ही आज देश इतना बड़ा शहद उत्पादक बन रहा है।

आपको जानकार ख़ुशी होगी कि देश से शहद का निर्यात भी बढ़ गया है। देश ने National Beekeeping and Honey Mission जैसे अभियान चलाए, किसानों ने पूरा परिश्रम किया, और हमारे शहद की मिठास, दुनिया तक पहुँचने लगी। अभी इस क्षेत्र में और भी बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। मैं चाहूँगा कि हमारे युवा इन अवसरों से जुड़कर उनका लाभ लें और नई संभावनाओं को साकार करें।

मेरे प्यारे देशवासियो, मुझे हिमाचल प्रदेश से ‘मन की बात’ के एक श्रोता, श्रीमान आशीष बहल जी का एक पत्र मिला है I उन्होंने अपने पत्र में चंबा के ‘मिंजर मेले’ का जिक्र किया है I दरअसल, मिंजर मक्के के फूलों को कहते हैं I जब मक्के में मिंजर आते हैं, तो मिंजर मेला भी मनाया जाता है और इस मेले में, देशभर के पर्यटक दूर-दूर से हिस्सा लेने के लिए आते हैं। संयोग से मिंजर मेला इस समय चल भी रहा है I आप अगर हिमाचल घूमने गए हुए हैं तो इस मेले को देखने चंबा जा सकते हैं I चंबा तो इतना ख़ूबसूरत है, कि यहाँ के लोक-गीतों में बार-बार कहा जाता है –

“चंबे इक दिन ओणा कने महीना रैणा”।

यानि, जो लोग एक दिन के लिए चंबा आते हैं, वे इसकी खूबसूरती देखकर महीने भर यहां रह जाते हैं I

साथियो, हमारे देश में मेलों का भी बड़ा सांस्कृतिक महत्व रहा है I मेले, जन-मन दोनों को जोड़ते हैं I हिमाचल में वर्षा के बाद जब खरीफ की फसलें पकती हैं, तब, सितम्बर में, शिमला, मंडी, कुल्लू और सोलन में सैरी या सैर भी मनाया जाता है I सितंबर में ही जागरा भी आने वाला है। जागरा के मेलों में महासू देवता का आह्वाहन करके बीसू गीत गाए जाते हैं। महासू देवता का ये जागर हिमाचल में शिमला, किन्नौर और सिरमौर के साथ-साथ उत्तराखंड में भी होता है।

साथियो, हमारे देश में अलग- अलग राज्यों में आदिवासी समाज के भी कई पारंपरिक मेले होते हैं। इनमें से कुछ मेले आदिवासी संस्कृति से जुड़े हैं, तो कुछ का आयोजन, आदिवासी इतिहास और विरासत से जुड़ा है, जैसे कि, आपको, अगर मौका मिले तो तेलंगाना के मेडारम का चार दिवसीय समक्का-सरलम्मा जातरा मेला देखने जरुर जाईये। इस मेले को तेलंगाना का महाकुम्भ कहा जाता है।

सरलम्मा जातरा मेला, दो आदिवासी महिला नायिकाओं – समक्का और सरलम्मा के सम्मान में मनाया जाता है। ये तेलंगाना ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और आन्ध्र प्रदेश के कोया आदिवासी समुदाय के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है।

आँध्रप्रदेश में मारीदम्मा का मेला भी आदिवासी समाज की मान्यताओं से जुड़ा बड़ा मेला है। मारीदम्मा मेला जयेष्ठ अमावस्या से आषाढ़ अमावस्या तक चलता है और यहाँ का आदिवासी समाज इसे शक्ति उपासना के साथ जोड़ता है। यहीं, पूर्वी गोदावरी के पेद्धापुरम में, मरिदम्मा मंदिर भी है। इसी तरह राजस्थान में गरासिया जनजाति के लोग वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को ‘सियावा का मेला’ या ‘मनखां रो मेला’ का आयोजन करते हैं।

छत्तीसगढ़ में बस्तर के नारायणपुर का ‘मावली मेला’ भी बहुत खास होता है। पास ही, मध्य प्रदेश का ‘भगोरिया मेला’ भी खूब प्रसिद्ध है। कहते हैं कि, भगोरिया मेले की शुरूआत, राजा भोज के समय में हुई है। तब भील राजा, कासूमरा और बालून ने अपनी-अपनी राजधानी में पहली बार ये आयोजन किए थे। तब से आज तक, ये मेले, उतने ही उत्साह से मनाये जा रहे हैं। इसी तरह, गुजरात में तरणेतर और माधोपुर जैसे कई मेले बहुत मशहूर हैं।

‘मेले’, अपने आप में, हमारे समाज, जीवन की ऊर्जा का बहुत बड़ा  स्त्रोत होते हैं। आपके आस-पास भी ऐसे ही कई मेले होते होंगे। आधुनिक समय में समाज की ये पुरानी कड़ियाँ ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने के लिए बहुत ज़रूरी हैं। हमारे युवाओं को इनसे जरुर जुड़ना चाहिए और आप जब भी ऐसे मेलों में जाएं, वहां की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी शेयर करें। आप चाहें तो किसी खास हैशटैग का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे उन मेलों के बारे में दूसरे लोग भी जानेंगे। आप Culture Ministry की website पर भी तस्वीरें upload कर सकते हैं। अगले कुछ दिन में Culture Ministry एक competition भी शुरू करने जा रही है, जहाँ, मेलों की सबसे अच्छी तस्वीरें भेजने वालों को इनाम भी दिया जाएगा  तो फिर देर नहीं कीजिए, मेलों में घूमियें, उनकी तस्वीरें साझा करिए, और हो सकता है आपको इसका ईनाम भी मिल जाए।

मेरे प्यारे देशवासियो, आपको ध्यान होगा, ‘मन की बात’ के एक Episode में मैंने कहा था कि भारत के पास Toys Exports में Powerhouse बनने की पूरी क्षमता है। मैंने Sports और Games में भारत की समृद्ध विरासत की खासतौर पर चर्चा की थी। भारत के स्थानीय खिलौने – परंपरा और प्रकृति, दोनों के अनुरूप होते हैं, Eco-friendly होते हैं। मैं आज आपके साथ भारतीय खिलौनों की सफलता को share करना चाहता हूँ।

हमारे Youngsters, Start-ups और Entrepreneurs के बूते हमारी Toy Industry ने जो कर दिखाया है, जो सफलताएँ हासिल की हैं, उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। आज, जब भारतीय खिलौनों की बात होती है, तो हर तरफ, Vocal for Local की ही गूंज सुनाई दे रही है। आपको ये जानकर भी अच्छा लगेगा, कि भारत में अब, विदेश से आने वाले खिलौनों की संख्या, लगातार कम हो रही है।

पहले जहाँ 3 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के खिलौने बाहर से आते थे, वहीँ अब इनका आयात 70 प्रतिशत तक घट गया है और खुशी की बात ये, कि इसी दौरान, भारत ने, दो हज़ार छःह सौ करोड़ रुपए से अधिक के खिलौनों को विदेशों में निर्यात किया है, जबकि पहले, 300-400 करोड़ रुपए के खिलौने ही भारत से बाहर जाते थे और आप तो जानते ही हैं कि ये सब, कोरोना काल में हुआ है।

भारत के Toy सेक्टर ने खुद को Transform करके दिखा दिया है। Indian Manufacturers, अब, Indian Mythology, History और Culture पर आधारित खिलौने बना रहे हैं। देश में जगह-जगह खिलौनों के जो Clusters हैं, खिलौने बनाने वाले जो छोटे-छोटे उद्यमी हैं, उन्हें, इसका बहुत लाभ हो रहा है। इन छोटे उद्यमियों के बनाए खिलौने, अब, दुनियाभर में जा रहे हैं।

भारत के खिलौना निर्माता, विश्व के प्रमुख Global Toy Brands के साथ मिलकर भी काम कर रहे हैं। मुझे ये भी बड़ा अच्छा लगा, कि, हमारा Start-Up Sector भी खिलौनों की दुनिया पर पूरा ध्यान दे रहा है। वे इस क्षेत्र में कई मजेदार चीजें भी कर रहे हैं। बेंगलुरु में, Shumme (शूमी) Toys नाम का Start-Up Eco-friendly खिलौनों पर focus कर रहा है। गुजरात में Arkidzoo (आर्किड्जू) Company AR-based Flash Cards और AR-based Storybooks बना रही हैं। पुणे की Company, Funvention (फन्वेंशन) Learning, खिलौने और Activity Puzzles (पजल्स) के जरिये Science, Technology और Maths में बच्चों की दिलचस्पी बढ़ाने में जुटी है। मैं खिलौनों की दुनिया में शानदार काम कर रहे ऐसे सभी Manufacturers को, Start-Ups को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। आईये, हम सब मिलकर, भारतीय खिलौनों को, दुनियाभर में, और अधिक लोकप्रिय बनायें। इसके साथ ही, मैं, अभिभावकों से भी आग्रह करना चाहूँगा कि वे अधिक से अधिक भारतीय खिलौने, Puzzles और Games खरीदें।

साथियो, Classroom हो या खेल का मैदान, आज हमारे युवा, हर क्षेत्र में, देश को गौरवान्वित कर रहे हैं। इसी महीने, PV Sindhu ने Singapore Open का अपना पहला ख़िताब जीता है। Neeraj Chopra ने भी अपने बेहतरीन प्रदर्शन को जारी रखते हुए World Athletics Championship में देश के लिए Silver Medal जीता है। Ireland Para Badminton International में भी हमारे खिलाड़ियों ने 11 पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। Rome में हुए World Cadet Wrestling Championship में भी भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। हमारे एथलीट सूरज ने तो Greco-Roman Event में कमाल ही कर दिया। उन्होंने 32 साल के लंबे अंतराल के बाद इस Event में Wrestling का Gold Medal जीता है।

खिलाड़ियों के लिए तो ये पूरा महीना ही action से भरपूर रहा है। Chennai में 44वें Chess Olympiad की मेजबानी करना भी भारत के लिए बड़े ही सम्मान की बात है। 28 जुलाई को ही इस Tournament का शुभारंभ हुआ है और मुझे इसकी Opening Ceremony में शामिल होने का सौभाग्य मिला। उसी दिन UK में Commonwealth Games की भी शुरुआत हुई। युवा जोश से भरा भारतीय दल वहाँ देश को Represent कर रहा है। मैं सभी खिलाड़ियों और Athletes को देशवासियों की ओर से शुभकामनाएँ देता हूँ। मुझे इस बात की भी खुशी है कि भारत FIFA Under 17 Women’s World Cup उसकी भी मेजबानी करने जा रहा है। यह Tournament अक्तूबर के आस-पास होगा, जो खेलों के प्रति देश की बेटियों का उत्साह बढ़ाएगा।

साथियो, कुछ दिन पहले ही देशभर में 10वीं और 12वीं कक्षा के परिणाम भी घोषित हुए हैं। मैं उन सभी Students को बधाई देता हूँ जिन्होंने अपने कठिन परिश्रम और लगन से सफलता अर्जित की है। महामारी के चलते, पिछले दो साल, बेहद चुनौतीपूर्ण रहे हैं। इन परिस्थितियों में भी हमारे युवाओं ने जिस साहस और संयम का परिचय दिया, वह अत्यंत सराहनीय है। मैं, सभी के सुनहरे भविष्य की कामना करता हूँ।

मेरे प्यारे देशवासियो, आज हमने आजादी के 75 साल पर, देश की यात्रा के साथ, अपनी चर्चा शुरू की थी। अगली बार, जब हम मिलेंगे, तब, हमारे अगले 25 साल की यात्रा भी शुरू हो चुकी होगी। अपने घर और अपनों के घर पर, हमारा प्यारा तिरंगा फहरे, इसके लिए हम सबको जुटना है। आपने इस बार, स्वतंत्रता दिवस को कैसे मनाया, क्या कुछ खास किया, ये भी, मुझसे, जरुर साझा करिएगा। अगली बार, हम, अपने इस अमृतपर्व के अलग-अलग रंगों पर फिर से बात करेंगे, तब तक के लिए मुझे आज्ञा

PM Modi’s Mann Ki Baat with the Nation, July 2022 – Live

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सांकेतिक नियुक्ति के बाद भी केवल रबर स्टाम्प नहीं है राष्ट्रपति।

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महामहिम राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई, 2022 को समाप्त हो रहा है, भारत के 16 वें राष्ट्रपति के पद को भरने के लिए चुनाव 18 जुलाई को होगा। राष्ट्रपति कोविंद का उत्तराधिकारी चुनने के लिए मतदान में सांसदों और विधायकों सहित 4,809 मतदाता शामिल होंगे। 2017 में हुए पिछले चुनाव में संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार मीरा कुमार को हराकर रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति बने थे. कोविंद को कुल 10,69,358 मतों में से कुमार के 3,67,000 मतों की तुलना में 7,02,000 मत मिले। लेकिन एक बार राष्ट्रपति चुने जाने के बाद उत्साह कम हो जाता है और अगले पांच साल तक राष्ट्रपति भवन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता है।

अध्याय I (कार्यकारी) के तहत संविधान (संघ) के भाग V में भारत के राष्ट्रपति की योग्यता, चुनाव और महाभियोग की सूची है। भारत का राष्ट्रपति भारत गणराज्य के राज्य का प्रमुख होता है। राष्ट्रपति भारत की कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका का औपचारिक प्रमुख होता है और भारतीय सशस्त्र बलों का कमांडर-इन-चीफ भी होता है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 53 में कहा गया है कि राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का प्रयोग सीधे या अधीनस्थ प्राधिकारी द्वारा कर सकते हैं, कुछ अपवादों के साथ, राष्ट्रपति में निहित सभी कार्यकारी अधिकार, व्यवहार में, मंत्रिपरिषद द्वारा प्रयोग किए जाते हैं। अनुच्छेद 57 के तहत, एक व्यक्ति जो राष्ट्रपति के रूप में पद धारण करता है, या जिसने पद धारण किया है, इस संविधान के अन्य प्रावधानों के अधीन, उस पद के लिए फिर से चुनाव के लिए पात्र होगा।

भारतीय राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल प्रणाली के माध्यम से किया जाता है, जिसमें वोट राष्ट्रीय और राज्य स्तर के सांसदों द्वारा डाले जाते हैं। चुनाव भारत के चुनाव आयोग (ईसी) द्वारा आयोजित और देखरेख करते हैं। निर्वाचक मंडल में संसद के ऊपरी और निचले सदनों के सभी निर्वाचित सदस्य (राज्य सभा और लोकसभा सांसद) राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं (विधायकों) के निर्वाचित सदस्य होते हैं। प्रत्येक सांसद या विधायक द्वारा डाले गए वोट की गणना एक वोट के रूप में नहीं की जाती है।

राज्यसभा और लोकसभा के एक सांसद द्वारा प्रत्येक वोट का निश्चित मूल्य 708 है। इस बीच, प्रत्येक विधायक का वोट मूल्य एक गणना के आधार पर एक राज्य से दूसरे राज्य में भिन्न होता है, जो कि इसकी संख्या की तुलना में इसकी जनसंख्या का कारक है। इसकी विधान सभा में सदस्य। उत्तर प्रदेश में अपने प्रत्येक विधायक के लिए सबसे अधिक वोट मूल्य 208 है। महाराष्ट्र में एक विधायक के वोट का मूल्य 175 है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में सिर्फ 8 है। प्रत्येक विधायक के वोट का मूल्य निर्धारित किया जाता है।

एक मनोनीत उम्मीदवार साधारण बहुमत के आधार पर जीत हासिल नहीं करता है बल्कि वोटों के एक विशिष्ट कोटे को हासिल करने की प्रणाली के माध्यम से होता है। मतगणना के दौरान, चुनाव आयोग ने पेपर मतपत्रों के माध्यम से निर्वाचक मंडल द्वारा डाले गए सभी वैध मतों का योग किया और जीतने के लिए, उम्मीदवार को डाले गए कुल मतों का 50% + 1 सुरक्षित करना होगा। आम चुनावों के विपरीत, जहां मतदाता किसी एक पार्टी के उम्मीदवार को वोट देते हैं, निर्वाचक मंडल के मतदाता मतपत्र पर उम्मीदवारों के नाम वरीयता क्रम में लिखते हैं। राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से होता है और मतदान गुप्त मतदान द्वारा होता है।

राष्ट्रपति के चुनाव में देश की जनसंख्या जनसंख्या की भूमिका और उनके प्रति जिम्मेदारी एक महत्वपूर्ण कारक है, जिसका अर्थ है कि राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया में लोगों की उपस्थिति बहुत अधिक दिखाई देती है। यह एक सदस्य, एक वोट के आधार पर विधायकों द्वारा केवल वोट की तुलना में राष्ट्रपति को व्यापक आधार देता है। यह राष्ट्रपति को अधिक नैतिक अधिकार भी देता है।वह सीधे संघ के कार्यकारी अधिकार का प्रयोग नहीं करता है, लेकिन वह मंत्रिपरिषद के निर्णय से असहमत हो सकता है, उन्हें सावधान कर सकता है, उन्हें सलाह दे सकता है, आदि। निर्णय पर पुनर्विचार के लिए कह सकते हैं राष्ट्रपति मंत्रिमंडल से अपने निर्णयों पर पुनर्विचार करने के लिए कह सकते हैं।

सरकार की कैबिनेट प्रणाली के तहत, यह कैबिनेट है जो सरकार के फैसलों के लिए जिम्मेदार है। राष्ट्रपति किसी भी तरह से उन निर्णयों के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं है जिन्हें वह अनुमोदित करता है। भारत का संविधान चाहता है कि राष्ट्रपति सतर्क और उत्तरदायी हों, और उन्हें कार्यपालिका के संकीर्ण राजनीतिक दृष्टिकोण से अप्रभावित चीजों के बारे में व्यापक दृष्टिकोण रखने की स्वतंत्रता देता है। लोगों की भलाई के साथ-साथ संविधान की रक्षा और रक्षा करेगा और राष्ट्रपति स्वयं को भारत के लोगों की सेवा और भलाई के लिए समर्पित करेगा।

पंजाब के शमशेर सिंह राज्य में, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्यपाल और राष्ट्रपति केवल राज्य के पूर्व प्रमुख हैं जब उन्हें संविधान द्वारा अपेक्षित संतुष्टि की आवश्यकता होती है, तो यह उनकी व्यक्तिगत संतुष्टि नहीं होती है, बल्कि मंत्रिपरिषद की संतुष्टि होती है, जिसकी सहायता और सलाह पर वे शक्तियों और कार्यों का प्रयोग करते हैं। राजनीतिक वंशवाद के अलावा, राष्ट्रपतियों की नियुक्ति में अक्सर सांकेतिकता की बू आती है।

राष्ट्रपति केवल मंत्रिमंडल की सलाह पर फैसले लेंगे। उन्हें केंद्र या राज्य सरकार के कामकाज में दखल देने का अधिकार नहीं है। हालांकि, यह सच नहीं है। राष्ट्रपति सरकार के किसी भी फैसले से जुड़ी फाइल मंगवा सकता है। नीलम संजीव रेड्डी राष्ट्रपति थे तो भारत-पाक संबंधों पर पाकिस्तान में तैनात नटवर सिंह से सीधे रिपोर्ट लेते थे। नटवर सिंह शुरुआत में झिझके। लेकिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर वह राष्ट्रपति को भी रिपोर्ट देने लगे। डॉ. कलाम राष्ट्रपति थे तो उन्होंने गुजरात दंगों के बाद नरोडा पाटिया का दौरा किया। राज्य से राहत कार्यों पर रिपोर्ट भी मांगी।

राष्ट्रपति की प्रमुख भूमिका संसदीय सरकार को संसदीय अराजकता बनने से रोकना है और यह राष्ट्रपति का अधिकार है जो देश और लोगों को एक साथ बांधे रखता है। राजेंद्र प्रसाद और सर्वपल्ली राधाकृष्णन जैसे राष्ट्रपति थे जो कुछ नीतिगत मुद्दों पर सरकार के साथ खुले तौर पर मतभेद रखते थे और सरकार पर जबरदस्त प्रभाव डाल सकते थे। राष्ट्रपति के लिए यह संभव है कि वह सरकार से असहमत हो या कार्यपालिका के अत्याचार के खिलाफ नागरिकों की ओर से हस्तक्षेप करे और उसे अपने तरीके छोड़ने के लिए राजी करे। राष्ट्रपति जो गंभीर शपथ लेता है, उसे करने की आवश्यकता होती है।

अनुच्छेद 78 के तहत राष्ट्रपति को संघ के मामलों के प्रशासन के बारे में प्रधान मंत्री से जानकारी प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त है। स्थापित परंपरा के तहत, राष्ट्रपति को अपनी शक्ति के प्रयोग में मंत्री परिषद को चेतावनी देने या प्रोत्साहित करने का अधिकार है। इसे साकार करने के लिए, भारत को राष्ट्रपतियों की आवश्यकता है, राष्ट्रपति पद के पदाधिकारियों की नहीं।

-प्रियंका सौरभ 

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,
कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार,

खेतों में करंट से मरते किसान, क्या हो समाधान?

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भारत में हर साल  लगभग 11 हजार कृषि श्रमिकों की मौत बिजली के करंट से हो रही है। हर दिन औसतन 50 लोगों की मौत हो रही है। इसका कारण वायरिंग, कट और गिरी हुई ट्रांसमिशन लाइनों में मानकों का पालन न करना, उम्र बढ़ने, जंग और नम परिस्थितियों में मोटर केसिंग और कंट्रोल बॉक्स पर कंडक्टिव पथ के गठन के कारण होता है। कारण जो भी हो, यह बहुत दुखद है कि हमारे किसान, हमारे देश के खाद्य प्रदाता, अपनी दैनिक दिनचर्या को ईमानदारी से निभाने में मर रहे हैं।

देश भर में किसानों के खेतों से गुजरने वाली उच्च वोल्ट विद्युत धारा के लिए लगाए गए टावर पोल जन जीवन एवं जीव-जंतुओं के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। एक और मोबाइल टावरों की भरमार हो गई है वहीं अब किसानी भूमि में न केवल कम वोल्ट के लिए लगाए गए पोल बल्कि उच्च वोल्ट के पोल की भरमार हो गई है। किसानों के खेतों में बिजली की लाइनों का जाल बिछा है।

किसानों, जीवों एवं आम जन के लिए सबसे अधिक खतरा उच्च वोल्ट की लाइन ले जाने वाली टावर पोल से बन गया है। इन लाइनों के चलते किसानों का जीना ही हराम हो गया है। टावर पोल के पास से गुजरने वाली या उसके नीचे से गुजरने वाली बिजली लाइन पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। किसानों को अपने खेतों में फव्वारा पाइप को ऊंचा उठाने से जान को खतरा बढ़ जाता है। जरूरी नहीं टावर पोल की लाइन से पाइप का छूना अपितु इसके नजदीक जाने पर ही यह बिजली लाइन अपनी ओर पाइप को  खींच लेती है।

खेतों से गुजरने वाली टावर लाइन का कुप्रभाव जन-जीवन पर पड़ रहा है। यही नहीं अगर कोई व्यक्ति  लोहे का छलना लेकर भी टावर के पास से गुजरा तो बिजली का झटका लगता है। जब फसल को काटकर इकट्ठा करके बड़ी लाइन के नीचे से ले जाते हैं तो कई बार करंट आ जाता है।  किसानों के साथ-साथ जंगली पक्षियों पर विशेषकर इन टावर पोल की लाइन से निकलने वाली बिजली तरंगें तथा मोबाइल टावर की विकिरण पक्षियों के लिए घातक साबित हो रही है। पास में रहने वाले लोगों में कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। पेड़ पौधे भी नष्ट हो जाते हैं या फिर लाइन बिछाते वक्त काट डाले हैं।

टावर पोल भी तीन प्रकार के होते हैं। जिनमें से एक पावर हाउस में बिजली लाने या ले जाने के लिए बनाए जाते हैं जो छोटे होते हैं दूसरे पोल मध्यम दर्जे के तथा तीसरे मास्टर पोल होते हें जिन्हें निचाई वाले स्थानों पर लगाया जाता है। एक टावर पोल करीब 200 गज के करीब जगह में लगाया जाता है। इनके ऊपर से गुजरने वाले तारों से जब बिजली गुजरती है तो दूर तक आवाज सुनाई पड़ती है।

जिस जगह से लाइन गुजरने के लिए मंजूर हो जाती है उसी जगह से ही गुजरती है। जिस किसी किसान के खेत से लाइन गुजरती है और पोल गाड़ा जाता है उसे करीब 60 हजार रुपये का मुआवजा मिलता है मगर पूरी जिंदगी इस समस्या को झेलना पड़ता है।  जिस खेत से टावर पोल की बिजली गुजर रही है उसके नीचे से गुजरने वाली छोटी बिजली की लाइन अक्सर फाल्ट हो जाती है। यदि ट्रांसफार्मर पर फ्यूज लगाना हो तो भी उस लाइन के ऊपर से गुजरने वाली बड़ी लाइन का कई बार झटका सहना पड़ता है।

देशभर में बिजली के करंट से होने वाली किसानों की मौत को देखें तो इन मौतों के कई कारण है।  जैसे खेतों से गुजर रही बिजली की लाइंस के तारों का ढीला होना।  आमतौर पर यह तारे इतनी ढीली हो जाती है कि जमीन और इनका फर्क बहुत कम रह जाता है।  कई बार तो यह मामूली अंधड़ में टूटकर खेतों में गिर जाती है और जब किसान रात को खेतों को पानी देने पहुंचते हैं तो उनको इनका आभास नहीं होता और वह इनकी चपेट में आकर मर जाते हैं।  दूसरा खेतों से गुजर रही हाई वोल्टेज तारों की ताकत इतनी ज्यादा होती है कि वह इंसानों और सामान्य जीव जंतुओं को अपनी तरफ खींच लेती है।
जिसकी वजह से इनकी मौत हो जाती है।

तीसरा कारण देखें तो आवारा पशुओं से बचने के लिए किसानों ने अपने क्षेत्रों के चारों तरफ जालियां लगाई है और उनमें यह करंट देते हैं जिसे से पशुओं को खेत की बाड़ के पास जाते ही झटका लगे ताकि आवारा पशु उनके खेतों में ना घुसे।  मगर जाने-अनजाने यह करंट वाली जालीदार तारे पशुऒं के साथ-साथ किसानों की  मौत का कारण बन जाती है।  यह झटका मशीन आमतौर पर लगाई तो नीलगाय और छोटा पशुओं से खेती को बचाने के लिए जाती है।  मगर किसान खेतों में काम करते वक्त लापरवाही से इनकी चपेट में आ जाते हैं।  अन्य कारणों को देखें तो किसानों की खुद की लापरवाही खेतों में पानी देते वक्त या टूबवेल चलाते वक्त  तारों के संपर्क में आने से ऐसी मौतों की केस सामने आए हैं।

इंसुलेशन के टूटने, जंग लगने और आर्द्र मौसम के दौरान कंडक्टिव पथ के बनने के कारण मोटर या कंट्रोल बॉक्स की केसिंग के संपर्क में आने वाला लाइव कंडक्टर अक्सर होने वाली घटना है। ऐसी स्थिति में, मोटर पम्पसेट और नियंत्रण बॉक्स के धातु के आवरण के साथ शारीरिक संपर्क से उचित अर्थिंग प्रदान न करने पर घातक आघात होता है। कृषि जल पम्पिंग सिस्टम में अर्थिंग के लिए आवश्यक देखभाल नहीं की जा रही है। यहां तक कि अनुचित अर्थिंग परिस्थितियों में भी यदि कम ऑपरेटिंग वोल्टेज को चुना जाता है, तो बिजली के झटके पूरी तरह से समाप्त हो सकते हैं।

भारत ने वर्ष 2019 में प्रधान मंत्री की कुसुम योजना (किसान ऊर्जा सुरक्षा और उत्थान महाभियान) शुरू की है। कुसुम योजना के घटक बी के तहत, अकेले 17.5 लाख, सौर ऊर्जा संचालित कृषि पंप स्थापित किए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक की अधिकतम क्षमता 7.5 एचपी होगी, जहां ग्रिड आपूर्ति नहीं है। उपलब्ध। 7.5 एचपी से अधिक क्षमता के पंप भी स्थापित किए जा सकते हैं, हालांकि, वित्तीय सहायता 7.5 एचपी क्षमता तक सीमित है। बिजली के झटके से होने वाली मौतों की रोकथाम कुसुम योजना द्वारा प्राप्त अतिरिक्त लाभ है, एक छिपा हुआ तथ्य, जिसके व्यापक प्रचार की आवश्यकता है।

मामूली संशोधन के साथ, यदि इस योजना का विस्तार ग्रिड संचालित पंपों को बदलने के लिए भी किया जाता है (अब यह योजना ग्रिड संचालित पंपों को कवर नहीं कर रही है), तो यह किसानों को बिजली के झटके से होने वाली मौतों को अधिकतम सीमा तक कम करने में मदद करती है। कुसुम योजना को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ लागू किया जाना चाहिए – और जहां तक संभव हो अधिक संख्या में पानी पंपिंग सिस्टम को कवर करने के लिए विस्तारित किया जाना चाहिए। इससे हमारे किसानों को बड़ी राहत मिलने वाली है।

नयी योजनाओं के साथ-साथ बिजली के ढीले तार ठीक करना, हाईवोल्टेज बिजली पोल का समाधान ढूंढना, खेत में लगाई जाली से बचना, रात को पानी चलाते समय सावधानी खेतों में किसानों को असमय मौत से बचा सकती है।

-प्रियंका सौरभ 

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,
कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार,