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निर्माता-अभिनेता शांतनु भामरे और अभिलाषा सूर्यवंशी अभिनीत ‘बेबी दे एक चांस’ की शूटिंग अलीबाग बीच में पूरी

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मुम्बई। रोमांटिक बॉलीवुड हिंदी वीडियो सॉन्ग एल्बम ‘बेबी दे एक चांस’ का निर्माण शान से एंटरटेनमेंट के बैनर तले हो रहा है और यूएसस्क्वेयर मीडिया और पब्लिसिटी के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। वीडियो की शूटिंग अलीबाग बीच पर, उद्धव खराद के निर्देशन में पूरी हुई। इस म्यूजिक वीडियो की मानसी मोहोल कोरियोग्राफर और सुनील गायकवाड़ सिनेमैटोग्राफर हैं। वहीं राहुल सूर्यवंशी ने गीत के बोल लिखे हैं।
इसे शांतनु भामरे (Shantanu Bhamare) और उद्धव खराड द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित किया जा रहा है और जल्द ही जारी किया जाएगा।
‘बेबी दे एक चांस’ में शांतनु भामरे और अभिलाषा सूर्यवंशी के साथ अश्विनी भागवत, अंजलि दलवी, जीविका मराठे, साक्षी काची, टीना शर्मा, माधुरी पवार, सरोज धोड़ी, लोकेश जाधव, प्रतीक राउत, तेजस जाधव भी दिखाई देंगे।


इस वीडियो के अलावा इसे ऑडियो के रूप में भी अलग अलग प्लेटफॉर्म में रिलीज़ किया जाएगा। इस ऑडियो गीत को यूट्यूब म्यूजिक, गाना, जीओ सावन, स्पॉटीफाई, हंगामा म्यूजिक, जिओ सावन, आई ट्यून स्टोर, साउंड क्लाउड, विंक आदि पर सुन सकते हैं। यह एल्बम एमएक्सप्लेयर, हंगामा, वन प्लस टीवी, टीसीएल टीवी, एमआई टीवी, अमेज़ॅन फायरस्टीक, आदि जैसे कई ओटीटी पर भी जारी किया जाएगा।
शांतनु भामरे ने हिंदी फीचर फिल्म ‘रेड’ से डेब्यू किया है। जिसमें शांतनु ने कमलेश सावंत (दृश्यम, खाकी फेम अभिनेता) के साथ एक जेलर की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हाल ही में शांतनु का रोमांटिक वीडियो सॉन्ग एल्बम ‘तेरी आशिकी में’ रिलीज हुई है जिसमें उनके साथ एलेना टुटेजा थीं। यह दर्शकों द्वारा बहुत पसंद किया गया है और इसे 1 मिलियन से अधिक ऑर्गेनिक व्यू मिले हैं जो कि सराहनीय है।
एल्बम यूट्यूब लिंक : https://www.youtube.com/watch?v=9up084TmJMU

शांतनु अलग-अलग भूमिकाएँ करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं, चाहे वह गंभीर हो, रोमांटिक हो या कॉमेडी हो।
शांतनु आगामी बॉलीवुड हिंदी फिल्में ‘शक- द डाउट!, न्यूयॉर्क से हरिद्वार, ब्रेकिंग न्यूज, भगवा, सॉरी मदर’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

शिवमुद्रा प्रतिष्ठान द्वारा कोराकेंद्र में भव्य दही हांडी महोत्सव संपन्न

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विधायक सुनील राणे द्वारा आयोजित दही हांडी महोत्सव में देवेंद्र फडणवीस और आशीष शेलार की उपस्थिति

मुंबई। शिव मुद्रा प्रतिष्ठान द्वारा दही हांडी का भव्य आयोजन बोरिवली स्थित कोराकेंद्र ग्राउंड में किया गया। बोरिवली के विधायक सुनील राणे के संकल्पना और निर्देशन में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुति के साथ ही लोकनृत्य और बॉलीवुड गीतों पर भी संगीतमय प्रस्तुति को भारी संख्या में उपस्थित दर्शकों ने बहुत पसंद किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
इस कार्यक्रम की शुरूआत गणेश और सरस्वती वंदना से शुरू हुई फिर परम्परागत और हिंदी फिल्म के लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति स्थानीय कलाकारों ने दिया।

आला रे आला… गोविंदा आला ये एक ऐसा नारा था जिसे हर कोई कोरा केंद्र में आयोजित शिवमुद्रा प्रतिष्ठान के दही हांडी महोत्सव में सुन सकता था। विभिन्न आयु वर्ग के गोपालों को उनके सांस्कृतिक प्रदर्शन के माध्यम से खुश करने के लिए विभिन्न हस्तियां मौजूद थीं। इस अवसर पर शिवमुद्रा प्रतिष्ठान के अध्यक्ष और भाजपा के बोरिवली के विधायक सुनील राणे के साथ भाजपा के दिग्गज नेता देवेंद्र फडणवीस, आशीष शेलार सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।
शिव साई मित्र मंडळ के गोविंदा पथको को शिवमुद्रा प्रतिष्ठान व भारतीय जनता पार्टी बोरीवली की तरफ़ से आयोजित दहीहंडी प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किए गए।
इस कार्यक्रम में दही हांडी के प्रतियोगिता के लिए गोविंदा पथकों लिए कुल पाँच लाख, पचपन हज़ार, पाँच सौ पचपन रुपए की पुरस्कार राशि दी गयी जिसमें प्रथम पुरस्कार एक लाख, ग्यारह हज़ार एक सौ ग्यारह विजेता गोविंदा पथक को दिया गया।


शिवमुद्रा प्रतिष्ठान के अध्यक्ष और बोरिवली के विधायक सुनील राणे ने कहा कि गोकुलाष्टमी का आयोजन बहुत ही भव्य और भक्तिमय वातावरण में किया गया। हमने यह सुनिश्चित करने के लिए सभी सुरक्षा उपायों का पालन किया है कि एक भी गोविंदा को चोट न पहुंचे।

– संतोष साहू

ड्रैगन फ्रूट के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एपीडा, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा क्रेता-विक्रेता बैठक आयोजित की गई

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अपनी तरह की प्रथम पहल के तहत ड्रैगन फ्रूट के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जीकेवीके कैम्पस, बेंगलुरू में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), बेंगलुरू क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, बेंगलुरू और केएपीपीईसी के सहयोग से ‘ड्रैगन फ्रूट पर क्रेता-विक्रेता बैठक’ आयोजित की गई थी।
एपीडा के अध्यक्ष डॉ. एम. अंगमुथु ने मुख्य भाषण देते हुए कहा कि ड्रैगन फ्रूट एवं मूल्य वर्धित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए भविष्य में और भी अधिक हितधारकों या संबंधित पक्षों से बातचीत की जाएगी और एक रिवर्स क्रेता-विक्रेता बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि इनका निर्यात बढ़ सके। उन्होंने उद्योग की मदद करने के लिए फलों के मापदंडों और मूल्य वर्धित उत्पादों के मानकीकरण के लिए आई.आई.एच.आर. के साथ सहयोग करने का संकेत दिया। इस बैठक में किसानों/एफपीओ और निर्यातकों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम के दौरान जेडीजीएफटी, केएपीपीईसी, यूएएस के पदाधिकारी उपस्थित थे। यूएएस(बी) के कुलपति डॉ. एस. राजेंद्र प्रसाद ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीनस्‍थ एक वैधानिक निकाय एपीडा दरअसल भारतीय कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्‍पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नोडल एजेंसी है और इसे बागवानी, फूलों की खेती या पुष्पकृषि, प्रसंस्कृत खाद्य उत्‍पादों, पोल्ट्री उत्पादों, डेयरी एवं अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को सुविधाजनक बनाने और बढ़ावा देने का दायित्‍व सौंपा गया है।
एपीडा ने वर्चुअल ट्रेड फेयर, फार्मर कनेक्ट पोर्टल, ई-ऑफिस, हॉर्टिनेट ट्रेसेबिलिटी सिस्टम, क्रेता-विक्रेता बैठकों, रिवर्स क्रेता-विक्रेता बैठकों, उत्पाद विशिष्ट अभियानों, इत्‍यादि के आयोजन के लिए अनेक वर्चुअल पोर्टल के विकास के जरिए अनगिनत निर्यात प्रोत्साहन गतिविधियां और पहल की हैं। एपीडा बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के निर्माण और राज्य से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करता रहा है।

राजनाथ सिंह ने सैनिक मेजर ईश्वर लाल सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की

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New Delhi – रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह  नई दिल्ली में आयोजित एक मेमोरियल के दौरान आज़ाद हिंद फौज (आईएनए) के पूर्व सैनिक मेजर ईश्वर लाल सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मेजर ईश्वर लाल सिंह की अस्थियों वाले कलश पर माल्यार्पण करने के बाद रक्षा मंत्री ने लगभग तीन साल पहले सिंगापुर में आईएनए के इस पूर्व सैनिक के साथ अपनी मुलाकात को याद किया। उन्होंने कहा कि आज़ाद हिंद फौज (आईएनए) और उसके नेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जवानों के बलिदान को भारत नहीं भूलेगा राजनाथ सिंह ने कहा कि नेताजी मूल्यों एवं आदर्शों के प्रतीक थे और उन्होंने मूल्यों के लिए लड़ाई लड़ी तथा स्वतंत्रता के आदर्शों से कभी समझौता नहीं किया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आम धारणा के विपरीत नेताजी के मन में महात्मा गांधी के लिए बहुत सम्मान था और उन्होंने महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता करार दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि नेताजी ने अपनी एक ब्रिगेड को महात्मा गांधी ब्रिगेड के रूप में नामित किया था।
मेजर ईश्वर लाल के सम्मान में इस मेमोरियल का आयोजन संस्कृति मंत्रालय एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किया गया था। इस अवसर पर सेना के अनेक पूर्व सैनिक मौजूद थे और उन्होंने आईएनए के इस पूर्व सैनिक के पार्थिव शरीर पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
मेजर ईश्वर लाल सिंह जो आज़ाद हिंद फौज के एक 92 वर्षीय सिंगापुर के पूर्व सैनिक थे, ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में सेवाएं प्रदान की। अपनी शुरुआती किशोरावस्था में, उनके पिता ने उन्हें आज़ाद हिंद फौज (आईएनए) में शामिल होने की व्यवस्था की थी। वह यिशुन में श्री नारायण मिशन नर्सिंग होम के निवासी थे। दिनांक 5 अगस्त, 2022 को उनका निधन हो गया।

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुआ ‘गौ राष्ट्र’ पुस्तक का विमोचन

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दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में धुव्र फाउंडेशन के द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें गौ राष्ट्र पुस्तक का विमोचन हुआ। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला और सुदर्शन न्यूज के प्रधान संपादक श्री सुरेश चव्हाणके जी बतौर अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में मौजूद रहे। श्रीकृष्णा मित्तल जी की पुस्तक का विमोचन करते हुए श्री चव्हाणके जी ने सभा को संबोधित किया और साथ ही सरकार के सामने तीन मांगे भी रखीं।
उन्होनें पहली मांग में कहा कि केवल बातों के वजह काम से भी संदेश जाता है। इसलिए में मांग रखता हूं कि जो देश 75वां स्वतंत्र दिवस मना रहा है सेंट्रल विस्टा पर कई करोड़ रूपए खर्ज हो रहे है। तो वहीं पर इतने सारे प्रोजेक्ट में एक गौशाला बने, तब ही सही संदेश जाएगा। भले वो कही बने या न बनो लेकिन वहां प्रधानमंत्री का आवास बन रहा है, तो उस आवास में ये बने तो इससे बहुत बड़ा संदेश जाएगा।

दूसरी मांग में रखना चाहता हूं कि गौ सेवको को तो बहुत सम्मान मिलता ही है, लेकिन गौ रक्षकों को भी सम्मान मिलना चाहिए, क्योंकि गौ सेवको के साथ तो मंत्री भी स्टेज शेयर कर लेते है, सांसद भी कर लेते है, मीडिया भी कर लेते है, लेकिन गौ रक्षको को अपराधी और खलनायकों की कैटेगरी में रख कर कोई खड़ा नहीं होता है। मुझे लगता है, कि अगर गौ रक्षक नहीं है, तो गौ सेवा भी संभव नहीं है, तो इसलिए गौ रक्षको के लिए जो हो सकता है, जैसे उनका  इंश्योरेंस हो सकता है, उनके लिए हम कोई पहचान पत्र दे सकते है, ऐसे अन्य- अन्य विषयों पर हमे चर्चा करनी चाहिए।
गौ माता पर्यावरण का भी समाधान है, या जो विश्व की सारी समस्या है, हम सभी इसके जानकार है, केवल मैं उनका उल्लेख करना चाहूंगा। परिवार का भी समाधान है, क्योकि आज कल कोई माता-पिता को नहीं संभालता है, लेकिन जो गाय की रक्षा करेगा, वो कभी भी अपने माता या पिता को अनाथ आश्रम में नहीं छोड़ेगा।
आपको बता थे कि उन्होनें आगे कहा कि छोटे-छोटे उद्योगों के लिए बैंकों में खर्च दिया जाता है, काफी अच्छी बात है मुद्राएं देने जैसी योजनाएँ है, तो ये गौपालन के लिए भी दिया जा सकता है।

कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर गौशालाओं में पूजी गईं गौ माता

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कानपुर,19अगस्त । गाय में 33 कोटि भगवानों की संरचना रहती है। गाय को पूजने वाला कभी दुखी नहीं रहता है। उक्त शुक्रवार को जन्माष्टमी पर्व पर कानपुर गौशाला सोसायटी भौती शाखा में पहुंचे गोविन्द नगर विधायक सुरेन्द्र मैथानी ने गौ पूजा करने के बाद कही। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने कहा कि जब जब पृथ्वी पर अधर्म सीमा से अधिक बढ़ा है तो भगवान ने धरती पर अवतार लिया है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की अपेक्षा के अनुरूप कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर 6200 गौशालाओं में जनप्रतिनिधियों द्वरा गौ पूजन किया जायेगा। जबकि गौशाला में पदाधिकारियों द्वारा प्रतिवर्ष मनाया जाता रहा है। इस वर्ष भी उसी क्रम में मै गौ पूजा करने के लिए यहां आया हूॅं।
मंत्री राकेश सचान ने मौजूद गौ भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि जब जब पृथ्वी पर अधर्म सीमा से अधिक बढा़ है भगवान ने अवतार धरती पर लिया है। भगवान विष्णु ने किसी न किसी रूप में अवतरित हुए हैं, कृष्ण भगवान भी विष्णु के अवतार हैं, श्रीकृष्ण के जीवन से कई वृतांत सुनाएं जो मानव समाज को सीख देते हैं उनके जन्मदिन को उत्सव की तरह देश में मनाया जाता है जो अपने आप में अद्वितीय है।
इस मौके पर कानपुर गौशाला सोसायटी के अध्यक्ष तिलक राज शर्मा ने बताया कि विश्व में मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने धरती पर कंस के अत्याचारों से मुक्त कराने के लिए धरती पर अवतरित हुए और अत्याचारी कंस का वध किया। भगवान कृष्ण की कृपा पाने के लिए लोग व्रत रखते हैं।
कार्यक्रम के संयोजक सुरेश गुप्ता ने आए हुए अतिथियों का अंग वस्त्र व माला पहनाकर सम्मान किया। पुरुषोत्तम लाल तोषनीवाल महामंत्री , नंद किशोर मिश्रा, प्रबंधक संजीव दुबे, वैध वी डी चंदेल, विवेक राजावत, दिनेश शुक्ला, गणेश पांडेय, नरेंद्र सिंह, शिवनाथ, रिषभ दुबे, आयुष दुबे, सौरभ शुक्ला अधिकारी गणों में आर.पी.मिश्रा मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, डॉ सुधीर श्रीवास्तव उप प्रमुख् पशु चिकित्सा अधिकारी ,डॉक्टर ओपी वर्मा ,डॉक्टर नीरज सचिव ,राज कुमार दोहरे आदि अधिकारी मौजूद रहे।

जन्माष्टमी पर सीएम योगी आदित्यनाथ तथा डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने की गौ सेवा

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लखनऊ, । भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण दिवस यानी जन्माष्टमी पर्व पर उत्तर प्रदेश सरकार के गौ-पूजा तथा गौ-सेवा के अभियान के तहत शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गाय की पूजा तथा सेवा करने के साथ उनको हरा चारा भी खिलाया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नियमित दिनचर्या में गौ-सेवा तथा गौ-पूजा भले ही है, लेकिन आज की दिन खास था। उत्तर प्रदेश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पहली बार गौ-पूजा का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में पहुंचकर गायों को चारा खिलाया।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ के कान्हा उपवन के बाद उन्नाव में गौशाला में पूजा करने के साथ ही गौ सेवा भी की। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, नवाबगंज उन्नाव में औचक निरीक्षण के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की अति प्रिय गौ माता की सेवा की।
उन्नाव में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र नवाबगंज, में औचक निरीक्षण के दौरान चिकित्सालय परिसर में पौधरोपण किया। उच्च प्राथमिक विद्यालय, सोहरामऊ, नवाबगंज, उन्नाव में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होकर बच्चों के साथ वात्सल्यपूर्ण अविस्मरणीय पल बिताये एवं सभी को जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई देने के साथ विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण भी किया।
ब्रजेश पाठक ने आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के शुभावसर पर कान्हा उपवन, लखनऊ में पौधरोपण कर सभी प्रदेशवासियों की सुख शांति व आनंदपूर्ण जीवन की कामना की। इसका उन्होंने ट्वीट भी किया।
उन्होंने कहा कि आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के शुभावसर पर कान्हा उपवन, लखनऊ में भगवान श्री कृष्ण को अतिप्रिय गौमाता की सनातन संस्कृति से विधि विधान से पूजा अर्चना कर गौमाता का वात्सल्य व आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान सभी प्रदेशवासियों के सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हुए पौधरोपण भी किया।

दही हांडी उत्सव की धूम, 111 घायल, 23 का इलाज जारी

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महाराष्ट्र में दो साल के बाद शुक्रवार को धूमधाम के साथ दही हांडी उत्सव मनाया गया। शुक्रवार को मटकी फोड़ प्रतियोगिता के दौरान करीब 24 लोगों के घायल होने की खबर है। मुंबई में निगम अधिकारियों ने बताया कि उत्सव के दौरान 111 लोगों के घायल होने की सूचना है .
मुंबई में दही हांडी समारोह के दौरान घायलों की संख्या पर बीएमसी ने बताया कि कुल 111 लोग घायल हुए, जिनमें से 88 का इलाज कर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है। 23 लोगों का इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर है। कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
शिंदे भी पहुंचे
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जन्माष्टमी के अवसर पर मुंबई के घाटकोपर में दही हांडी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने पिछले महीने घोषणा की थी कि इस साल दही हांडी और गणेश चतुर्थी सहित धार्मिक त्योहारों को मनाने पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बीते दिन ही दही हांडी को खेल का दर्जा देने का एलान किया था।

दो वर्ष से आयोजन नहीं हो पाया था
इसके साथ ही किसी खिलाड़ी के हताहत होने की स्थिति में प्रतिभागियों या उनके परिवारों को मुआवजा देने का भी फैसला किया गया था। बता दें कि कोरोना महामारी के कारण पिछले दो वर्ष से इसका आयोजन नहीं हो पाया था।

हमने जून में तोड़ी थी एक दही हांडी: शिंदे
इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना नेतृत्व पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जून में उन्होंने और उनके समर्थकों ने बहुत ही चुनौतीपूर्ण दही हांडी फोड़ी थी। उन्होंने कहा कि आप लोग अब दही हांडी तोड़ रहे हैं। हमने डेढ़ महीने पहले एक बहुत ही कठिन दही हांडी को तोड़ा था। यह बहुत कठिन था, ऊंचा था, और हमें उसे तोड़ने के लिए 50 मजबूत परतों की मदद लेनी पड़ी, लेकिन हम सफल हुए।

साँवरिया तोहरे प्यार में का पोस्ट प्रोडक्शन सम्पन्न

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रति कल्याण फिल्म्स एवं माँ मथुराशिनी प्रोडक्शन कृत भोजपुरी फिल्म “साँवरिया तोहरे प्यार में” का संपूर्ण पोस्ट प्रोडक्शन कार्य आई फोकस स्टूडियो, अंधेरी (प.), मुंबई में हाल ही में सम्पन्न हुआ। निर्माता शशिकांत कुमार व अनिल कुमार की इस रोमांटिक एक्शन थ्रिलर फिल्म के लेखक – निर्देशक संजय कुमार सिन्हा हैं। गीतकार हैं विजय चौहान, राजेश मिश्रा, प्यारेलाल यादव ‘कवि’, शेखर मधुर व अमर विदेशी। इनके गीतों को मधुर संगीत से सजाया है अमन श्लोक ने और गायक गायिका हैं – शिल्पी राज, विजय चौहान, सोनू शैलेश, अनूप मिश्रा, खुशबू जैन, चंदन सिंह, अमित सिंह, अनुज, अमन श्लोक, प्रियंका सिंह, इंदु सोनाली, प्रियंका मौर्या, राजू, माही और मोहन राठौड़।
बिहार में वारिसगंज, मोहिउद्दीन नगर, पूसा कृषि विश्वविद्यालय (समस्तीपुर), पटना एवं कुछ अन्य सुरम्य स्थलों पर फिल्माई गई इस मनोरंजक फिल्म की कोरियोग्राफी जे डी, एडिटिंग गोविन्द दुबे, आर्ट मुकेश कुमार सिन्हा, एक्शन प्रदीप खड़का एवं सिनेमैटोग्राफी शानू सिन्हा की है। फिल्म के प्रचारक समरजीत हैं। “साँवरिया तोहरे प्यार में” एक रहस्यमय प्रेम कहानीवाली फिल्म है जिसमें निर्देशक संजय कुमार सिन्हा हीरो के रूप में अमन कपसिमे (ए.के.) को इंट्रोड्यूस कर रहे हैं। ए.के. की नायिका ऋतु सिंह हैं। मुख्य सहयोगी कलाकार हैं – ब्रजेश त्रिपाठी, अनूप अरोड़ा, सुबोध सेठ, प्रिया सिन्हा, मनीष चतुर्वेदी, नेहा मेहता, पिंकी सिंह, शशिकांत गुप्ता, सुबोध विश्वास, बृजेश कुमार, रौशन आर्या, सीमा सरगम, रवि अवस्थी, आशीष शर्मा, जयप्रकाश और आइटम गर्ल त्रिशा खान।

Krishna Janmashtami- भगवान श्रीकृष्ण का बाल्यजीवन गौसेवा में बीता, इसीलिए उनका नाम गोपाल पड़ा

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राधिकापति भगवान श्रीकृष्ण के मन में दूध पीने की इच्छा होने लगी। तब भगवान ने अपने वामभाग से लीलापूर्वक सुरभि गौ को प्रकट किया। उसके साथ बछड़ा भी था जिसका नाम मनोरथ था। उस सवात्सा गौ को सामने देख श्रीकृष्ण के पार्षद सुदामा ने एक रत्नमय पात्र में उसका दूध दुहा और उस सुरभि से दुहे गए स्वादिष्ट दूध को स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने पीया।
मृत्यु तथा बुढ़ापा हरने वाला वह दुग्ध अमृत से भी बढ़कर था। सहसा दूध का वह पात्र हाथ से छूटकर गिर पड़ा और पृथ्वी पर सारा दूध फैल गया। उस दूध से वहां एक सरोवर बन गया जो गोलोक में क्षीरसरोवर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। गोपिकाओं और श्रीराधा के लिए वह क्रीड़ा सरोवर बन गया। उस क्रीड़ा सरोवर के घाट दिव्य रत्नों द्वारा निर्मित थे। भगवान की इच्छा से उसी समय असंख्य कामधेनु गौएं प्रकट हो गईं जितनी वे गौएं थीं, उतने ही बछड़े भी उस सुरभि गौ के रोमकूप से निकल आए। इस प्रकार उन सुरभि गौ से ही गौओं की सृष्टि मानी गई है। भगवान श्रीकृष्ण सांदीपनि मुनि के आश्रम में विद्याध्ययन के लिए गए। वहां उन्होंने गौसेवा की। भगवान श्रीकृष्ण को केवल गायों से ही नहीं अपितु गोरस दूध, दही, मक्खन, आदि से अद्भुत प्रेम था। श्रीकृष्ण द्वारा ग्यारह वर्ष की अवस्था में मुष्टिक, चाणूर, कुवलयापीड हाथी और कंस का वध गोरस के अद्भुत चमत्कार के प्रमाण हैं और इसी गोदुग्ध का पान कर भगवान श्रीकृष्ण ने दिव्य गीतारूपी अमृत संसार को दिया।
भगवान श्रीकृष्ण सांदीपनि मुनि के आश्रम में विद्याध्ययन के लिए गए। वहां उन्होंने गौसेवा की। भगवान श्रीकृष्ण को केवल गायों से ही नहीं अपितु गोरस दूध, दही, मक्खन, आदि से अद्भुत प्रेम था। श्रीकृष्ण द्वारा ग्यारह वर्ष की अवस्था में मुष्टिक, चाणूर, कुवलयापीड हाथी और कंस का वध गोरस के अद्भुत चमत्कार के प्रमाण हैं और इसी गोदुग्ध का पान कर भगवान श्रीकृष्ण ने दिव्य गीतारूपी अमृत संसार को दिया।
गौ रक्षक भगवान श्रीकृष्ण ने गौमाता की रक्षा के लिए क्या-क्या नहीं किया? उन्हें दावानल से बचाया, इंद्र के कोप से गायों और ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गिरिराज गोवर्धन को कनिष्ठिका उंगली पर उठाया। तब देवराज इंद्र ने ऐरावत हाथी की सूंड के द्वारा लाए गए आकाशगंगा के जल से तथा कामधेनु ने अपने दूध से उनका अभिषेक किया और कहा कि जिस प्रकार देवों के राजा देवेन्द्र हैं उसी प्रकार आप हमारे राजा गोविंद हैं।

भगवान श्रीकृष्ण का बाल्यजीवन गौसेवा में बीता, इसीलिए उनका नाम गोपाल पड़ा

भगवान श्रीकृष्ण का बाल्यजीवन गौसेवा में बीता, इसीलिए उनका नाम गोपाल पड़ा। पूतना के वध के बाद गोपियां श्रीकृष्ण के अंगों पर गोमूत्र, गोरज व गोमय लगा कर शुद्धि करती हैं क्योंकि उन्होंने पूतना के मृत शरीर को छुआ था और गाय की पूंछ को श्रीकृष्ण के चारों ओर घुमाकर उनकी नजर उतारती हैं। तीनों लोकों के कष्ट हरने वाले श्रीकृष्ण के अनिष्ट हरण का काम गाय करती है। जब-जब श्रीकृष्ण पर कोई संकट आया नंदबाबा और यशोदा माता ब्राह्मणों को स्वर्ण, वस्त्र तथा पुष्पमाला से सजी गायों का दान करते थे। यह है गौमाता की महिमा और श्रीकृष्ण के जीवन में उनका महत्व।
नंद बाबा के घर सैंकड़ों ग्वालबाल सेवक थे पर श्रीकृष्ण गायों को दुहने का काम भी स्वयं करना चाहते थे। कन्हैया ने आज माता से गाय चराने के लिए जाने की जिद की और कहने लगे कि भूख लगने पर वे वन में तरह-तरह के फलों के वृक्षों से फल तोड़कर खा लेंगे। पर मां का हृदय इतने छोटे और सुकुमार बालक के सुबह से शाम तक वन में रहने की बात से डर गया और वह कन्हैया को कहने लगीं कि तुम इतने छोटे-छोटे पैरों से सुबह से शाम तक वन में कैसे चलोगे, लौटते समय तुम्हें रात हो जाएगी। तुम्हारा कमल के समान सुकुमार शरीर कड़ी धूप में कुम्हला जाएगा परन्तु कन्हैया के पास तो मां के हर सवाल का जवाब है। वह मां की सौगंध खाकर कहते हैं कि न तो मुझे धूप लगती (गर्मी) है और न ही भूख और वह मां का कहना न मानकर गोचारण की अपनी हठ पर अड़े रहे।
मोरमुकुटी, वनमाली, पीताम्बरधारी श्रीकृष्ण यमुना में अपने हाथों से मल-मल कर गायों को स्नान कराते, अपने पीताम्बर से ही गायों का शरीर पोंछते, सहलाते और बछड़ों को गोद में लेकर उनका मुख पुचकारते और पुष्पगुच्छ गुंजा आदि से उनका शृंगार करते। तृण एकत्र कर स्वयं अपने हाथों से उन्हें खिलाते। गायों के पीछे वन-वन वह नित्य नंगे पांव, कुश, कंकड़, कण्टक सहते हुए उन्हें चराने जाते थे। गाय तो उनकी आराध्य हैं और आराध्य का अनुगमन पादत्राण (जूते) पहनकर तो होता नहीं। परमब्रह्म श्रीकृष्ण गायों को चराने के लिए जाते समय अपने हाथ में कोई छड़ी आदि नहीं रखते थे। केवल वंशी लिए हुतेए ही गाएं चराने जाते थे। वह गायों के पीछे-पीछे ही जाते हैं और गायों के पीछे-पीछे ही लौटते हैं वह गायों को मुरली सुना हैं।
सुबह गोसमूह को साष्टांग प्रणिपात (प्रणाम) करते और सायंकाल गायों के खुरों से उड़ी धूल से उनका मुख पीला हो जाता था। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए देवी-देवता अपने लोकों को छोड़कर ब्रज में चले आते और आश्चर्यचकित रह जाते कि जो परमब्रह्म श्रीकृष्ण बड़े-बड़े योगियों के समाधि लगाने पर भी ध्यान में नहीं आते, वे ही श्रीकृष्ण गायों के पीछे-पीछे नंगे पांव वनों में हाथ में वंशी लिए घूम रहे हैं। मोहन गाएं चराकर आ रहे हैं। उनके मस्तक पर नारंगी पगड़ी है जिस पर मयूरपिच्छ का मुकुट लगा है, मुख पर काली-काली अलकें बिखरी हुई हैं जिनमें चम्पा की कलियां सजाई गई हैं।
गोप बालकों की मंडली के बीच मेघ के समान श्याम श्रीकृष्ण रसमयी वंशी बजाते हुए चल रहे हैं और सखामंडली उनकी गुणावली गाती चल रही है। गेरु आदि से चित्रित सुंदर नट के समान भेस में ये नवल-किशोर मस्त चलते हुए आ रहे हैं। चलते समय उनकी कमर में करधनी के किंकणी और चरणों के नुपूरों के साथ गायों के गले में बंधी घंटियों की मधुर ध्वनि सब मिलकर कानों में मानो अमृत घोल रहे हों।

श्री कृष्ण ने धरती पर रहते हुए इस दुनिया को जीने का सलीका बताया.

भगवान श्री कृष्ण की महिमा का गुणगान जितना किया जाए उतना कम है. श्री कृष्ण ने धरती पर रहते हुए इस दुनिया को जीने का सलीका बताया. द्वापरयुग में भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री कृष्ण का जन्म हुआ था. श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को ही जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं. श्री कृष्ण को आज पूरी दुनिया पूजती है. श्री कृष्ण के साथ-साथ गौ माता का भी लोग बहुत आदर करते हैं और उनका भी पूजन किया जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं आज श्री कृष्ण और गौ माता के रिश्ते के बारे में .
आप गोपाष्टमी के त्यौहार से श्री कृष्ण और गौ माता के रिश्ते के बारे में जान सकते हैं. बताया जाता है कि गोपाष्टमी के दिन ही पहली बार श्री कृष्ण ग्वाला बने थे और उन्होंने गाय चराना शुरू किया था. यह त्यौहार कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है. इस दिन गौ माता के पूजन का विधान है.
गौ माता से भगवान श्री कृष्ण का ख़ास लगाव और जुड़ाव है. श्री कृष्ण के कारण ही आज गाय को माता की संज्ञा दी जाती है. ऐसे भी मान्यता है कि जिस स्थान पर गौ माताएं होती है या वे भ्रमण करती है वहां सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीव देखने को नहीं मिलते हैं. सच्चे दिल से गौ माता की भक्ति, सेवा और पूजा करने वाला व्यक्ति आने वाली समस्याओं से छुटकारा पा लेता है. साथ ही उस पर भगवान श्री कृष्ण की कृपा भी बनी रहती है. एक प्रचलित धार्मिक मान्यता इस प्रकार से भी है कि गौ माता में 33 कोटि देवी-देवता निवास करते हैं. अतः गौ माता का पूजन करने से 33 कोटो देवी-देवताओं की पूजा का फल भी हमें मिलता है. जब भी कभी गौ माता के बात होती है, तो श्री कृष्ण का नाम भी जुबान पर आ ही जाता है.