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जब रिश्ते हैं टूटते, होते विफल विधान। गुरुवर तब सम्बल बने, होते बड़े महान

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मनुष्य के जीवन में जन्म से ही ज्ञान, विचारों, मूल्यों का क्रमिक विकास होता है, जो उसे अन्य पशुओं से अलग कर मनुष्य बनाता है। परिवार के बाद, शिक्षक इस विकास में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। हालांकि, भारतीय समाज में, शिक्षकों को बहुत उच्च सम्मान में रखा जाता है, प्राचीन काल से वे नैतिकता का प्रमुख स्रोत रहे हैं और समाज में शिक्षा को महत्व देंते रहे है। शिक्षकों ने पूरे समाज के लिए एक दार्शनिक-मार्गदर्शक-मित्र के रूप में कार्य करने के लिए अपने  ज्ञान का इस्तेमाल किया, उनमें से कई ने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ काम किया।
समकालीन दुनिया में भी, अकादमिक प्रतिभा के अलावा, वे नैतिकता के लिए खड़े हैं और हमारे अत्यधिक ग्रामीण और अनपढ़ समाज में, लोग शिक्षकों को अपने बच्चों के भविष्य के निर्माता के रूप में देखते हैं।
बच्चों के विकास में, शिक्षकों की आदर्श भूमिका सही मूल्यों और गुणों के प्रवर्तक और प्रेरक की होनी चाहिए। इस प्रकार, छात्रों को ज्ञान सीधे चम्मच खिलाने के बजाय, उन्हें बच्चों में पूछताछ, तर्कसंगतता की भावना विकसित करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि वे अपने दम पर, जुनून के साथ सीखने के लिए सशक्त महसूस करें। साथ ही, शिक्षकों को अच्छे नैतिक मूल्यों जैसे सत्य, ईमानदारी, अनुशासन, नम्रता, धार्मिक सहिष्णुता, लिंग समानता आदि को बच्चों में विकसित करने का प्रयास करना चाहिए ताकि अच्छे इंसानों की नींव रखी जा सके।

समकालीन दुनिया में एक गहरे मूल्य संकट का सामना करना पड़ रहा है, अगर हमें विकसित और समृद्ध होना है, तो हमारे शिक्षकों की एक बड़ी भूमिका है। शिक्षक का मूल्य प्राचीन भारत के सुंदर श्लोक द्वारा स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है – गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा:, गुरु साक्षात परम ब्रह्मा, तस्मै श्री गुरुवे नम:। जिसका अर्थ है “गुरु निर्माता (ब्रह्मा) हैं, गुरु संरक्षक (विष्णु) हैं, गुरुदेव संहारक (महेश्वर) हैं। गुरु स्वयं पूर्ण (एकवचन) भगवान हैं, उस श्री गुरु को नमस्कार” शिक्षक केवल पैसे के लिए पढ़ाने वाला नहीं है, पढ़ाने का जुनून बहुत आगे है।

यह हमारे समाज का कड़वा सच है कि कुछ शिक्षकों में वास्तव में पढ़ाने के लिए जुनून और ज्ञान नहीं है, ऐसे कई उदाहरण हैं जैसे बिहार के स्कूलों में क्या हो रहा है, अगर शिक्षक में शिक्षण की गुणवत्ता की कमी है तो हम छात्रों से क्या उम्मीद कर सकते हैं, शिक्षा प्रणाली में बदलाव की जरूरत है, एनसीईआरटी का पैटर्न पुराना है और इसे 2015 से संशोधित नहीं किया गया है। साक्षर शिक्षक होने चाहिए लेकिन शिक्षित शिक्षक भी होने चाहिए।

किसी भी बच्चे की पहली शिक्षिका माँ होती है, जिसके द्वारा बच्चा उन बुनियादी बातों को सीखता है जिनका उसके व्यक्तित्व पर मौलिक प्रभाव पड़ता है। शिक्षक के पास ज्ञान का पोषण करके अपने छात्रों के माध्यम से क्रांति लाने की शक्ति है। इसलिए शिक्षक छात्रों के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, वह छात्रों को प्रेरित करके सही  मार्गदर्शन करता है और छात्रों की जरूरतों और समस्याओं को भी समझता है और सर्वोत्तम समाधान प्रदान करके इसका समाधान करता है।

शिक्षक का मिलनसार स्वभाव वाकई काबिले तारीफ है। इस प्रकार एक शिक्षक में वे सभी गुण होते हैं जिनके द्वारा वह किसी भी छात्र को सर्वोत्तम शिक्षा प्रदान करके और उसे प्रेरित करके उसका भाग्य बदल सकता है। भारतीय समाज में गुरु का स्थान ऊँचे पद पर आसीन था।
शास्त्रों में, गुरु को अक्सर भगवान के समान माना गया है। यहां तक कि सामाजिक-धार्मिक सुधारकों ने भी अपने जीवन में गुरुओं की सर्वोत्कृष्टता पर टिप्पणी की। गुरु को न केवल एक मार्गदर्शक, शिक्षक, मित्र, सत्य साधक के रूप में देखा गया है, बल्कि एक ऐसा व्यक्ति भी है जो ब्रह्मांड में किसी की क्षमता और स्थान को महसूस करने में सक्षम बनाता है।

बच्चे और मानव के भविष्य को आकार देने में शिक्षक की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण  रही। वर्तमान में समाज ने मानवीय स्पर्श खो दिया है – करुणा, सहानुभूति, मूल उद्देश्य और सहिष्णुता का सार, अब समय आ गया है कि ऐसे मूल्यों को बच्चों में विकसित किया जाए।

इस संदर्भ में गुरु महत्वपूर्ण है। सामाजिक मूल्य, सद्भाव, उत्कृष्टता की भावना समय की मांग है। इसलिए शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्य विकास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मानव आत्म के समग्र विकास तक – सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और प्रासंगिक – अधिकतम क्षमता की प्राप्ति के लिए है। भारत में अनादि काल से गुरु-शिष्य परम्परा विद्यमान रही है।  शिष्यों के सभी मुद्दों के लिए गुरु एकल बिंदु संदर्भ हुआ करते थे और साथ ही वे मूल्यों और गुणों के प्रतीक थे और उन्हें विद्यार्थियों में स्थापित करना उनका कर्तव्य था।
नैतिक और नैतिक मूल्यों में बहुत उच्च आदर्शों पर नागरिकों का एक वर्ग बनाना, अहिंसा और सहानुभूति का प्रचार करना और विद्यार्थियों को गरीबी, दर्द और समाज की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाना था। आजकल यह सब लुप्त हो रहा है और स्कूल रटने वाले लेकिन बौद्धिक पक्ष की कमी के साथ यांत्रिक छात्रों को पैदा कर रहे हैं। आधुनिक समय के शिक्षक स्वयं मूल्य प्रणालियों में अच्छी तरह से सुसज्जित नहीं हैं और अक्सर राजनीतिक विचारधाराओं के अग्रदूत होते हैं जो शिक्षण को प्रचार से बदल देते हैं और छात्रों और राष्ट्र दोनों के लिए खतरनाक होते हैं।

समय की मांग है कि शिक्षकों को उचित प्रशिक्षण दिया जाए और उन्हें सख्ती से निर्देश दिया जाए कि वे प्रचार में न उलझें, बल्कि संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता और समावेशिता के सिद्धांतों पर बच्चों के दिमाग का विकास करें।  भारतीय समाज में शिक्षक को ईश्वर के समान स्थान दिया गया है। बच्चों के दूसरे अभिभावक माने जाने वाले शिक्षक की तुलना अक्सर अंधेरे में आशा के प्रकाश से की जाती है।

मनुष्य की नींव बनाने में उनके द्वारा निभाई गई बहुत महत्वपूर्ण भूमिका के कारण शिक्षक को बहुत उच्च स्थान पर रखा गया है। न केवल ज्ञान बल्कि वे व्यक्ति के  नैतिक, सामाजिक मूल्यों के स्रोत भी हैं। भारत को गुरु-शिष्य संबंध  की एक महान परंपरा विरासत में मिली है।
माता-पिता जन्म देते हैं शिक्षक छात्र को मूल्य और चरित्र सम्मान देते हैं। हमें याद नहीं है कि शिक्षक ने क्या पढ़ाया है लेकिन शिक्षक कैसा है, याद रहता है इसलिए शिक्षक रोल मॉडल बनकर इस उम्र में अनुशासन और चरित्र के मूल्यों को विकसित करता है, बच्चे जो देखते हैं उसे दोहराते हैं। शिक्षक को यह नहीं सिखाना चाहिए कि क्या सोचना है बल्कि कैसे सोचना है ताकि व्यक्तिगत लक्षण विकसित हों। शिक्षक को चाहिए कि वह बच्चे की सीमाओं को आगे बढ़ाए और उन्हें खुद का अन्वेषण करने में सक्षम बनाए। शिक्षक को प्रश्न करने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करना चाहिए। लीक से हटकर सोच के कन्फ्यूशियंस ने वही किया और अब्दुल कलाम हमेशा प्रश्न उठाते रहे, सरल शब्दों में एक शिक्षक को बच्चों के आत्म विकास के लिए एक आईना रखना चाहिए।
-प्रियंका सौरभ 
रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,
कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार,
उब्बा भवन, आर्यनगर, हिसार (हरियाणा)-127045

TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के बिगड़े बोल लगाया गृह मंत्री अमित शाह पर गलत आरोप

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नई दिल्ली: TMC सांसद अभिषेक बनर्जी आज कोयला घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय के समक्ष पेश हुए. इस पेशी के बाद अभिषेक ने एक बार फिर से बीजेपी पर निशाना साधा है. साथ ही उन्होंने बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए हैं. समाचार एजेंसी के अनुसार उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि, ‘मैं उनके सामने झुकने को तैयार नहीं हूं. जो हमसे राजनीतिक रूप से नहीं लड़ सकते, वे हमें डराने के लिए ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं.’
उन्होंने आगे कहा कि, ‘यह कोयला घोटाला या मवेशी घोटाला नहीं है. यह गृह मंत्री घोटाला है. उन्हें इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी. बीएसएफ की मौजूदगी में गायों की तस्करी कैसे हो सकती है? गौ तस्करी का पैसा सीधे गृह मंत्री अमित शाह के पास गया.’
अभिषेक ने आगे कहा है कि, ‘अगर मेरे खिलाफ आरोप सही साबित होते हैं तो मैं मौत की सजा को स्वीकार करने के लिए तैयार हूं.’
केंद्रीय जांच एजेंसी ED ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के भतीजे अभिषेक बनर्जी से अनुप मांझी के कोयला घोटाले मामले में पूछताछ कर रही है.
मैं उनके सामने झुकने को तैयार नहीं हूं। जो हमसे राजनीतिक रूप से नहीं लड़ सकते, वे हमें डराने के लिए ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं: अभिषेक बनर्जी, टीएमसी सांसद, कोलकाता

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि, ‘सिर्फ इसलिए कि मैंने राष्ट्रीय ध्वज के मुद्दे पर अमित शाह के बेटे पर हमला किया, मुझे ईडी या सीबीआई द्वारा धमकी नहीं दी जा सकती.’

खबरों के अनुसार, जांच एजेंसी ने अभिषेक बनर्जी की साली मेनका गंभीर को भी इस मामले में पांच सितंबर को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है.

मुश्किल में गुजरात का 4.50 लाख गौ वंश – सरकारी सहायता नहीं मिलने से 219 पांजरापोलों व 1418 गौ शालाओं की हालत पतली

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सूरत. भोजन की तलाश में शहरों और गांवों की सड़कों पर भटक रहा गौ वंश आए दिन हादसों की वजह बन रहा। हाईकोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए गौवंश को सड़कों से हटाने का आदेश दिया है। इसके बाद से गौ संरक्षण और संवर्धन को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाली गुजरात सरकार समस्या का हल ढूंढने में लगी है।
पशु बाड़े बनाने की बात की जा रही है, हालांकि ये बाड़े कहां और कैसे बनेंगे इसको लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हैं। मालधारी समाज (पशुपालकों ) पर भी शिकंजा कसा जा रहा हैं, जिसका विरोध हो रहा है। जानकारों की माने तो गौ वंश की इस स्थिति के लिए सरकार नीति जिम्मेदार है।
गत वर्ष सितंबर में भूपेंद्र पटेल के मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2022-23 में “मुख्यमंत्री गौ माता पोषण योजना” के तहत 500 करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की थी। जिसे प्रदेश की विभिन्न 219 पांजरापोलों व 1418 गौ शालाओं में आधारभूत सुविधाओं के विकास पर खर्च करने का प्रावधान रखा था। इन पांजरापोलों व गौ शालाओं में गौवंश की संख्या करीब 4.50 लाख हैं।
घोषणा के महीनों बाद भी सरकार ने इस योजना के तहत एक रुपया भी खर्च नहीं किया। इतना ही नहीं कोरोना काल में प्रति गाय 25- 30 रुपए की जो सहायता राशि मिल रही थी, उसे भी बंद कर दिया है। कोई सहायता नहीं मिलने से धार्मिक व सामाजिक ट्रस्टों के माध्यम से संचालित होने वाली इन पांजरापोलों व गौ शालाओं की हालत पतली हो गई हैं।
नोटबंदी, जीएसटी व उसके बाद कोरोना की मार पड़ने से अब इन्हें पर्याप्त दान भी नहीं मिल रहा हैं। पांजरापोलों को तो किसी तरह की कोई खास आमदनी भी नहीं होती। यहां ऐसे मवेशी व पशु-पक्षी लाए जाते हैं, जो बीमार होते हैं या फिर उनका कोई उपयोग नहीं होता। उनके भोजन के साथ उपचार का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ता हैं।
सहायता राशि के अभाव में पांजरापोलों को अपनी बैंक एफडी तुड़वा कर किसी तरह खर्च चलाना पड़ रहा हैं। कई पांजरापोलें नए मवेशियों को लेने से कतरा रहीं हैं। वे मवेशी के साथ उस पर होने वाले खर्च की भी दान के रूप में मांग करती हैं।
पांजरापोलों व गौ शालाओं द्वारा और अधिक मवेशियों को नहीं लिए जाने से बिना मालिक के कई मवेशी भोजन की तलाश में सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं। यदि सरकार पांजरापोलों और गौशालाओं को घोषित योजना का तुरंत लाभ देकर सक्षम बनाए तो सड़कों पर आवारा घूमने वाले मवेशियों को भी ठिकाना मिल सकता हैं।
नहीं मिल रहा जवाब

 

पांजरापोलों व गौशालालों में को घोषित 500 करोड़ सरकारी मदद नहीं मिलने पर हमने गौ सेवा व गौचर विकास बोर्ड व मुख्य मंत्री कार्यालय से संपर्क किया। बोर्ड प्रमुख ने बताया कि उन्होंने प्रोजेक्ट फाइल सीएम ऑफिस भेज दिया, लेकिन वहां से कोई फंड नहीं मिला है। वहीं सीएम ऑफिस से भी कोई जवाब नहीं मिला है।
– धर्मेश गामी ( भारतीय गौ रक्षा मंच, सूरत)

 

मेरी टर्म खत्म हो गई

 

500 करोड़ के खर्च की योजना गुजरात सरकार की है। गौ सेवा व गौचर विकास बोर्ड में मेरी टर्म खत्म हो गई है। शायद अभी कोई चेयरमैन नहीं है। इस लिए मैं इस बारे में कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं हूं।
– डॉ. वल्लभ कथीरिया ( गौ सेवा व गौचर विकास बोर्ड, गुजरात)

मानव कल्याण में सहभागिता निभाती है ब्रह्माकुमारी

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माउंट आबू। ब्रह्मकुमारी संस्‍था की स्‍थापना सन 1930 में लेखराज कृपलानी ने की, जिन्हें यह संस्था प्रजापिता ब्रह्मा मानती है।
दादा लेखराज अविभाजित भारत में हीरों के व्‍यापारी थे। वे बाल्‍यकाल से ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे। 60 वर्ष की आयु में उन्‍हें परमात्‍मा के सत्‍यस्‍वरूप को पहचानने की दिव्‍य अनुभूति हुई। उन्‍हें ईश्‍वर की सर्वोच्‍च सत्‍ता के प्रति खिंचाव महसूस हुआ। इसी काल में उन्‍हें ज्‍योति स्‍वरूप निराकार परमपिता शिव का साक्षात्‍कार हुआ। इसके बाद धीरे-धीरे उनका मन मानव कल्‍याण की ओर प्रवृत्‍त होने लगा।
उन्‍हें सांसारिक बंधनों से मुक्‍त होने और परमात्‍मा का मानवरूपी माध्‍यम बनने का निर्देश प्राप्‍त हुआ। उसी की प्रेरणा के फलस्‍वरूप सन् 1937 में उन्‍होंने इस विराट संगठन की छोटी-सी बुनियाद रखी। सन् 1937 में आध्‍यात्मिक ज्ञान और राजयोग की शिक्षा अनेकों तक पहुँचाने के लिए इसने एक संस्‍था का रूप धारण किया।
इस संस्‍था की स्‍थापना के लिए दादा लेखराज ने अपना विशाल कारोबार कलकत्‍ता में अपने साझेदार को सौंप दिया। फिर वे अपने जन्‍मस्‍थान हैदराबाद सिंध (वर्तमान पाकिस्‍तान) लौट आए। यहाँ पर उन्‍होंने अपनी सारी चल-अचल संपत्ति इस संस्‍था के नाम कर दी। सन 1950 में लेखराज जी राजस्थान स्थित आबू पर्वत पहुंचे और योग साधना करते हुए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था का मुख्यालय स्थापित किये। प्रारंभ में इस संस्‍था में केवल महिलाएँ ही थी। माउंट आबू में ब्रह्मकुमारी की मुख्य प्रशासिका जगदम्बा सरस्वती, दादी मनमोहिनी, दादी प्रकाशमणि, दादी जानकी, दादी हृदयमोहिनी, दादी रत्नमोहिनी रहीं। दादा लेखराज को ‘प्रजापिता ब्रह्मा’ नाम दिया गया। सभी ब्रह्माकुमारी द्वारा उन्हें शिव बाबा भी कहा जाता है। जो लोग आध्‍या‍त्मिक शांति को पाने के लिए ‘प्रजापिता ब्रह्मा’ द्वारा उच्‍चारित सिद्धांतो पर चले, वे ब्रह्मकुमार और ब्रह्मकुमारी कहलाए तथा इस शैक्षणिक संस्‍था को ‘प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्‍वरीय विश्‍व विद्यालय’ नाम दिया गया।
इस विश्‍वविद्यालय की शिक्षाओं (उपाधियों) को वैश्विक स्‍वीकृति और अंतर्राष्‍ट्रीय मान्‍यता प्राप्‍त हुई है।
ओम शांति

माउंट आबू से संवाददाता संतोष साहू

फिल्म निर्माता अशोक प्रसाद ‘अभिषेक’ को बेस्ट आईटी सर्विसेज के लिए इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल द्वारा मिला प्रतिष्ठित अवार्ड

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इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल द्वारा बेस्ट आईटी सर्विसेज 2022 के लिए आईटी प्रोफेशनल अशोक प्रसाद अभिषेक को प्रतिष्ठित अवार्ड से सम्मानित किया गया। ह्यूमन राइट्स काउंसिल के एंटरटेनमेंट क्षेत्र के अध्यक्ष सोनू कुंतल के हाथों अशोक प्रसाद अभिषेक को यह ट्रॉफी मिली। कोलकाता के मूल निवासी अशोक प्रसाद ‘अभिषेक’ ने लंदन से उच्च शिक्षा हासिल की। अशोक प्रसाद ‘अभिषेक’ को आइटी बिजनेस और इवेंट मैनेजमेंट का कमाल का अनुभव है और अपने कार्यों में वह उन सभी एक्सपीरियंस का भरपूर इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल द्वारा अशोक प्रसाद अभिषेक को बेस्ट आईटी सर्विसेज 2022 के लिए प्रतिष्ठित अवार्ड से सम्मानित किया गया है। वह इस सम्मान को पाकर बेहद उत्साहित हैं।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी अशोक प्रसाद ‘अभिषेक’ ने सन 2000 में आईई एरा आईटी से अपनी जर्नी स्टार्ट की, आईई एरा ट्रेंडिंग कंपनी का निर्माण कर के उन्होंने अपनी व्यवसायिक यात्रा को और अधिक विस्तार दिया।
फिलवक्त अशोक प्रसाद ‘अभिषेक’ फिल्म निर्माण के क्षेत्र में क्रियाशील हैं। वो अपने बैनर आईईव एरा फिल्म्स के बैनर तले हिंदी सहित कई रीजनल भाषाओं की फिल्मे भी प्रोड्यूस कर रहे हैं। उन्होंने रवि किशन, दिनेश लाल यादव निरहुआ और मनोज तिवारी सहित कई चोटी के कलाकारों के साथ काम किया है। वह कई बेहतरीन शार्ट फिल्मों के जाने-माने निर्माता और निर्देशक भी हैं। हाल ही में उन्होंने भोजपुरी फिल्म जगत के चर्चित सिंगर व अभिनेता दिनेशलाल यादव निरहुआ के जीवन वृत पर आधारित भोजपुरी की पहली बायोपिक फिल्म ‘ अभिनेता से राजनेता’ के निर्माण की घोषणा की है। यह फ़िल्म बहुत जल्द ही फ्लोर पर जाने वाली है।
संतोष मिश्रा इसके लेखक और निर्देशक हैं। इस फिल्म में दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ के साथ रवि किशन और मनोज तिवारी भी विशेष भूमिका में होंगे। वहीं पाखी हेगड़े और आम्रपाली दुबे भी इस फिल्म का विशेष आकर्षण होंगी।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

दिहाड़ी मजदूरों की समस्याओं को लेकर फिल्म स्टूडियो सेटिंग एंड अलाइड मजदूर यूनियन की राज्यपाल से भेंट

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मुम्बई। फिल्म निर्माण क्षेत्र में कार्यरत दिहाड़ी मजदूरों की विभिन्न समस्याओं के संबंध में फिल्म स्टूडियो सेटिंग एंड अलाइड मजदूर यूनियन के जनरल सेक्रेटरी गंगेश्वर लाल श्रीवास्तव ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलकर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। गंगेश्वर लाल ने इस अवसर पर राज्यपाल का ध्यान दिलाते हुए कहा कि फिल्म निर्माण में काम करने वाले दैनिक वेतन भोगी प्रवासी मजदूरों की स्थिति बहुत कठिन है। गरीब दिहाड़ी मजदूरों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हमारे दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलता है और वे पीएफ, ग्रेच्युटी, ईएसआईसी जैसी सभी योजनाओं से वंचित हैं। यह बड़े खेद की बात है कि ये मजदूर दिन-रात मेहनत कर राज्य के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था में भी अपना योगदान दे रहे हैं लेकिन खुद सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं। हाल ही में, फिल्म निर्माता तानाशाहों की तरह व्यवहार कर रहे हैं और श्रमिकों को दो-तीन महीने के लिए अपनी मेहनत की कमाई दिए बिना 20-24 घंटे काम कर रहे हैं। कई निर्माता साल-दर-साल पैसे का भुगतान करने में चूक करते हैं।गंगेश्वरलाल श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि फिल्म निर्माता करोड़ों रुपये कमाते हैं लेकिन दिहाड़ी मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं करते हैं। ऐसे निर्माताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले मजदूरों को या तो नौकरी से निकाल दिया जाता है या उनके खिलाफ झूठी शिकायत कर पुलिस कार्रवाई की जाती है। मज़दूरों का यह उत्पीड़न जारी है और पुलिस अधिकारियों की मनमानी के कारण निर्माता मज़दूरों को भुगतान किए बिना आसानी से भाग जाते हैं। कई निर्माता हैं जो हमारे कामगारों का कई तरह से शोषण कर रहे हैं। श्रमिक मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। सेट पर काम करते समय उन्हें अच्छा खाना नहीं दिया जाता है, साथ ही इन श्रमिकों को अक्सर दुर्घटनाएं और गंभीर चोटें आती हैं क्योंकि वे बहुत ऊंचाई पर काम करते हैं। ऐसे में न तो सेट पर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है और न ही सेट पर एम्बुलेंस की व्यवस्था। कई बार समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण श्रमिकों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। बीएमसी, फायर ब्रिगेड या अन्य सरकारी विभागों द्वारा सेट का नियमित ऑडिट समय-समय पर सेट पर किया जाना अनिवार्य है। हालांकि, कोई भी निर्माता नियम का पालन नहीं कर रहा है और सेट पर कोई नियमित ऑडिट नहीं किया जाता है। यहां निर्माता केवल धनबल का उपयोग करके बिना किसी प्रतिबंध के श्रमिकों के जीवन से खेल रहे हैं। हाल के दिनों में कई आग दुर्घटनाएं हो चुकी हैं जिनमें इन दिहाड़ी मजदूरों की जान चली गई है।
इन श्रमिकों और उनके परिवारों को किसी भी प्रकार की सरकारी सुरक्षा नहीं मिलती है। ये मजदूर आजीविका कमाने के लिए पलायन कर जाते हैं और उनके परिवार दूर-दराज के गांवों में रहते हैं। उक्त दिहाड़ी मजदूर यहां होने वाली आय से अपना व अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा है। यदि श्रमिकों को उनका दैनिक वेतन मिलता है, तो वे इसमें से कुछ अपने परिवारों को खिलाने के लिए भेज सकते हैं। मजदूरों को साल-दर-साल मेहनत का भुगतान नहीं मिलेगा तो वे अपना और अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे कर सकते हैं। यह एक गंभीर मुद्दा है और किसी भी सरकार ने इन मुद्दों पर कभी विचार नहीं किया और इसके लिए कोई ठोस समाधान नहीं दिया।
फिल्म स्टूडियो सेटिंग एंड अलाइड मजदूर यूनियन के जनरल सेक्रेटरी गंगेश्वर लाल श्रीवास्तव ने इस पत्र के माध्यम से राज्यपाल से अनुरोध किया है कि कृपया इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार करें और हमारे श्रमिकों को नियमित वेतन दिलाने में हमारी सहायता करें। यह विनम्र अनुरोध है कि संबंधित अधिकारियों और श्रम कार्यालय को दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को दैनिक आधार पर मजदूरी का भुगतान करने के निर्देश दिए जाएं।

लंदन. बोरिस जॉनसन के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में शामिल भारतवंशी ऋषि सुनक को हाल में लंदन में गौ पूजा करते देखा गया

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लंदन. बोरिस जॉनसन के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में शामिल भारतवंशी ऋषि सुनक को हाल में लंदन में गौ पूजा करते देखा गया था। हिंदू समुदाय का ध्यान खींचते वायरल वीडियो में पूर्व वित्त मंत्री सुनक अपनी पत्नी और इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति की बेटी अक्षता मूर्ति के साथ गौ पूजा करते दिख रहे हैं। वीडियो में सुनक गाय की आरती उतारते व पीतल के गिलास से गाय को जल अर्पित करते देखे जा रहे हैं। एक पंडित, जो अनुष्ठान कर रहा है, एक दीया हाथ में लेता है और युगल को गाय के चारों ओर आरती के लिए कहता है। यह वीडियो सनक द्वारा जन्माष्टमी मनाने के लिए लंदन के बाहरी इलाके में भक्तिवेदांत मनोर जाने के कुछ दिनों बाद आया है।

पहले मनाई थी दीवाली

श्री सनक ने नवंबर 2020 में चांसलर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, दिवाली का त्योहार मनाते हुए ब्रिटेन के भारतीय समुदाय की प्रशंसा प्राप्त की थी। उन्होंने 11 डाउनिंग स्ट्रीट में चांसलर के आधिकारिक निवास के सामने की सीढ़ी पर दीपक जलाए थे। इस दौरान उन्होंने कोरोना-नियमों का पालन करते हुए लोगों से अपने घर रहते हुए त्योहार मनाने की अपील की थी।

पांच सितंबर को मिलेगा नया पीएम
पूर्व वित्त मंत्री सुनक पीएम पद की दौड़ में अंतिम दो फाइनलिस्ट में हैं। उनकी प्रतिद्वंद्वी विदेश मंत्री लिज ट्रस हैं। पार्टी सदस्यों की वोटिंग के बाद पांच सितंबर को ब्रिटेन के नए पीएम की घोषणा होनी है। भारतीय मूल के ऋषि सुनक ने 2015 में, 35 साल की उम्र में, पहली बार संसद का चुनाव जीता। आज प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में हैं। अगर वो कामयाब हुए तो ब्रिटेन के पहले भारतीय मूल के प्रधानमंत्री होंगे।

 

फिल्म ‘भारत के अग्निवीर’ की घोषणा राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने की

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मुम्बई। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के हाथों फिल्म “भारत के अग्निवीर” की घोषणा हाल ही में की गयी। राज भवन में आयोजित हुये समारोह में महामहिम द्वारा फिल्म का पोस्टर लॉन्च किया गया और फिर क्लैप देकर फिल्म के निर्माण की घोषणा की गयी।
पुरुषोत्तम शर्मा के निर्देशन में बनने जा रही फिल्म की कहानी भारत सरकार द्वारा घोषित की गयी अग्निवीर स्कीम पर आधारित है। फिल्म में यह दर्शाया जाएगा कि यह योजना देश व युवाओं के लिये कितनी लाभदायक है।
फिल्म के बारे में जानकारी देते हुए निर्माता निर्देशक पुरुषोत्तम शर्मा कहते हैं कि जब भारत सरकार द्वारा अग्निवीर स्कीम की घोषणा की गयी तब अधिकतर लोगों ने इसका स्वागत किया और इसे सही करार दिया। दूसरी तरफ कुछेक ने विरोध किया और विरोध के नाम पर योजना का गलत प्रचार किया और हिंसा का मार्ग अपनाकर राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान भी पहुंचाया। युवाओं में योजना का दुष्प्रचार होता देख मुझे लगा कि फ़िल्म के माध्यम से युवाओं को इस योजना के बारे में सही ढंग मे समझाया जा सकता है और फिर फिल्म के निर्माण की योजना बनी।
फिल्म के निर्माण का स्वागत करते हुये महामहिम ने अपने भाषण में कहा, “यह बात लंबे समय से चलती आ रही है कि देश में युवाओं के लिये आर्मी की ट्रेनिंग आवश्यक हो। अब अग्निवीर योजना के तहत इस दिशा में देश ने कदम बढ़ा लिया है। अग्निवीर के तहत देश के सुरक्षा बलों को और ताकत मिलेगी और ताकत में इजाफा हुआ देख कोई भी देश हमारे देश को आंख दिखाने की हिम्मत नहीं कर पाएगा। सच तो यह भी है कि राष्ट्र है तो हम हैं। ऐसे में राष्ट्र की सुरक्षा से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। अग्निवीर योजना से युवाओं में देशभक्ति का जज्बा बढ़ेगा। साथ ही अनुशासन के प्रति और जागरुकता बढ़ेगी। मैं इस योजना पर बन रही फ़िल्म के लिये सफलता की कामना करता हूँ।
महंत रविन्द्र पुरी क्रिएशन व सत्या ऑनलाइन प्रोडक्शन के बैनर के अंतर्गत निर्माण की जा रही इस फिल्म के अन्य निर्माता हैं महेश प्रताप सिंह, विनीत गर्ग व डॉ. विजय मिश्रा। फिल्म की अधिकतर शूटिंग उत्तराखंड में की जाएगी और आर्मी द्वारा भी पूरा सहयोग देने की बात कही गयी है।
इस फ़िल्म को 23 जनवरी को प्रदर्शित करने की योजना है। फिलहाल कलाकारों के चयन की प्रक्रिया जारी है और फ़िल्म से जो आय होगी उसका 40 प्रतिशत आर्मी वेलफेयर फंड में दिया जाएगा।

गुलाम नहीं रहे अब कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद

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नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया है। पिछले कुछ दिनों से पार्टी से नाराज चल रहे आजाद ने कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है।

भारी मन से लिया फैसला- आजाद

आजाद ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा सौंपा है। उन्होंने सोनिया गांधी को पांच पेज की लंबी चिट्ठी लिखी है। आजाद ने चिट्ठी में लिखा कि मैंने भारी मन से कांग्रेस छोड़ने का फैसला लिया है। आजाद ने लिखा, ‘बहुत खेद के साथ मैंने कांग्रेस से अपना सालों पुराना रिश्ता संबंध तोड़ने का फैसला किया।’ उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने पार्टी चलाने वाली मंडली के संरक्षण में इच्छाशक्ति और क्षमता खो दी है। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुरू करने से पहले नेतृत्व को ‘कांग्रेस जोड़ो यात्रा’ करनी चाहिए थी।

गौ तस्कर साथ पुलिस की मुठभेड़

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झाँसी : गोवध अधिनियम में वाँछित 25 ह़जार रुपए के इनामी बदमाश को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया। बदमाश ने भी पुलिस पर गोलियाँ चलाई, मगर वह पुलिस की गोली लगने से घायल हो गया, जबकि उसका साथी वहाँ से भाग निकला।
रक्सा थाने की डोंगरी चौकी प्रभारी निर्मल सिंह पुलिस बल के साथ ग्राम डेली में पुल के पास चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान बिहारी तिराहे की ओर से एक बाइक पर सवार दो युवक आते दिखे। रुकने का इशारा किया तो युवक ग्राम बाजना को जाने वाली सड़क की ओर भाग निकले। इसकी जानकारी चौकी प्रभारी ने वायरलेस सेट पर कण्ट्रोल को दी।
सूचना मिलते ही रक्सा थाना प्रभारी जितेन्दर सिंह तक्खर व सीपरी बा़जार थाना प्रभारी निरीक्षक देवेश शुक्ला ने पुलिस बल के साथ बाजना जाने वाले मार्ग को घेर लिया। रक्सा थाना प्रभारी को देख बचने के लिए बाइक सवार एक युवक ने गोली चला दी। थानाध्यक्ष ने जवाबी फायर किया जो बाइक सवार एक युवक को गोली लग गई और वह गिर गया, जबकि उसका साथी अँधेरे का लाभ उठाते हुए वहाँ से भाग गया। पुलिस के अनुसार घायल युवक ने अपना नाम मथुरा के फराह थाना क्षेत्र स्थित व्यापारी मण्डी निवासी फारूख बताया।
उसके पास से पुलिस ने 315 बोर का एक तमंचा, दो ़िजन्दा, एक मिस व एक खोखा कारतूस, एक बाइक, पॉकेट डायरी, मोबाइल फोन, एफआइआर की कॉपी आदि बरामद की। थाना प्रभारी रक्सा के अनुसार मुठभेड़ में पकड़ा गया युवक सीपरी बा़जार थाने में गोवध निवारण अधिनियम व 7 सीएलए ऐक्ट के तहत वाँछित था।
उस पर झाँसी पुलिस ने 25 ह़जार रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। फारूख ने बताया कि वह अपने ऊपर दर्ज मु़कदमे के सिलसिले में झाँसी के वकील से मिलने आया था। घायल युवक को उपचार के लिए मेडिकल कॉलिज ले जाया गया। पुलिस के अनुसार इस गोवध अधिनियम के मामले में पहले ही 4 आरोपी जेल जा चुके हैं और सभी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्यवाही की गई है।