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गोमाता से आशीर्वाद लेकर क्लब का शुभारंभ किया

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हनुमानगढ़ टाउन की जागरूक महिलाओं द्वारा वूमेन पावर क्लब का शुभारंभ नगर परिषद की गौशाला, फाटक गौशाला, बरकत कॉलोनी में आज गौ माता की पूजा अर्चना कर व सवामणी कर क्लब का शुभारंभ किया । इस मौके पर रितिका छाबड़ा ने बताया टाउन की महिलाओं द्वारा एक सोशल वेलफेयर के लिए कलब की स्थापना की है, जिसमें गरीब व जरूरतमंद कन्याओं की शादी हेतु एवं महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों की आवाज उठाने हेतु क्लब का गठन किया गया है । इस मौके पर आज गौ माता की पूजा अर्चना की व सवामणी कर गो माता से आशीर्वाद लेकर क्लब के श्री गणेश किया है और समय समय पर क्लब फाटक गोशाला में भी सहयोग करता रहेगा ।

इस अवसर पर वूमेन पावर क्लब की वर्षा करमचंदानी ,रितिका छाबड़ा,विमला जाखड़, सीमा कक्कड़, भूमि बाबानी, गजल करमचंदानी, पलक छाबड़ा, नेहा वधवा,रेनू गर्ग,  वीना गोयल, पूनम शर्मा, अर्चना प्रभाकर, कशिश अरोड़ा, भावना वर्मा, रुबीना नागपाल, किरण नागपाल आदि उपस्थित रही । इस मौके पर फाटक गौशाला के अध्यक्ष मुरलीधर अग्रवाल ने महिला क्लब का धन्यवाद व आभार व्यक्त किया और कहा कि अधिक से अधिक गो भगत इस गौशाला के साथ जुड़े ताकि एक्सीडेंटल, बीमार एवं बेसहारा गोवंश की सेवा की जा सके ।

मवेशियों का सहारा बनेगी योगी सरकार, प्रदेश में बनेंगे गौ आश्रय

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उत्तर प्रदेश में आए दिन सड़कों और खेतों में आवारा मवेशियों घूमते रहते हैं, जिसके कारण अनेकों दुर्घटनाएं और किसानों की फसलों को काफी नुकसान होता है. इस समस्या के समाधाने के लिए योगी सरकार टीपीपी मॉडल पर बने गौ आश्रयों को शुरू करने की योजना बना रही है. साथ ही प्रदेश सरकार गाय आश्रय को अपनी आय खुद करने के लिए आत्मनिर्भर बनाएगी.

बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी ने आवारा मवेशियों का समाधान करने और बायो फार्मिंग से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान की बात कही थी.

पशुपालन और डेयरी विभाग ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की थी. 20वीं पशुधन गणना के मुताबिक पता चलता है कि देश में 50.21 लाख आवारा मवेशी सड़कों पर घूम रहे हैं. जिसमें राजस्थान के सबसे अधिक मवेशी शामिल हैं. राजस्थान में 12.72 लाख मवेशी हैं,जो सड़को पर घूम रहे हैं, वहीं दूसरे नबंर पर उत्तर प्रदेश है. यूपी में 11.84 लाख मवेशी सड़कों पर आवारा घूम रहे हैं.

आंकड़ो के मुताबिक देश में मवेशियों को पालने की वार्षिक लागत करीब 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक है. गौरतलब है कि मवेशियों की हत्या पर पांबदी और गौरक्षकों के डर से आवारा पशुओं की समस्या तेजी से बढ़ी है, साथ ही यूपी में दूध न देने वाले पशुओं को पालना भी किसानों के लिए एक परेशानी हो गई है.

योगी 1.0 सरकार की कैबिनेट ने साल 6 अगस्त 2019 को मुख्ममंत्री निराश्रित गोवंश सहायता मंजूरी दी थी. जिसके तहत प्रदेश सरकार आवारा पशुओं का संरक्षण या उन्हें रखने वालों को प्रतिदिन 30 रुपये देती थी. प्रदेश की योगी सरकार ने इस योजना के लिए 109.5 करोड़ के खर्च का अनुमान लगाया था.

इंडियास्पेंड की एक रिपोर्ट के मुताबिक 25 सितंबर 2021 तक 53,522 लोगों को 98,205 आवारा मवेशी दिए गए हैं. वहीं इसकी तुलना अगर प्रदेश के आवारा मवेशियों से करें तो यह संख्या बहुत कम है.

आवारा पशुओं के संरक्षण को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गौशाला चलाने के  लिए अर्थव्यवस्था बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इसके लिए एक सेल्फ सस्टेनेबल मॉडल बनाया जाना चाहिए.

सीएम योगी ने कहा कि पीपीपी मोड पर गौशालाओं का निर्माण हो और इसे प्राकृतिक खेती, गोबर पेंट, सीएनजी और सीबीजी से जोड़ा जाए, जिससे गौशालाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी और गायों के रख-रखाव और पालन-पोषण का खर्च के लिए वह खुद आत्मनिर्भर हो सकेंगी.

सीएम योगी ने आगे कहा कि इन गौशालाओं के लिए इच्छुक एनजीओ से एमओयू करें और उन्हें आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध कराएं जाने के आधिकरियों को निर्देश दिए हैं.

असम में गौ माता की हत्या का खेला… प्रशासन की नाक के नीचे जारी गौ मांस का अवैध व्यापार

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नहीं थम रहा असम में गौ माता की हत्या का खेला… प्रशासन की नाक के नीचे जारी गौ मांस का अवैध व्यापार

असम के होजई जिले के लंका थाने के अंतर्गत उदाली में बीते दो दिन पूर्व खुलेआम अवैध गोमांस काटा जा रहा था. वहीं उदाली पुलिस को खबर मिलते ही तुरंत उदाली में विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की.

असम के होजई जिले के लंका थाने के अंतर्गत उदाली में बीते दो दिन पूर्व खुलेआम अवैध गोमांस काटा जा रहा था. वहीं उदाली पुलिस को खबर मिलते ही तुरंत उदाली में विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की. जिसके बाद उदाली बाजार से एक और लंकाजान गांव से दो लोगों को गोमांस विक्रेता को गिरफ्तार किया गया है.

बता दें कि गौमांस विक्रेता की पहचान जिहादी गुलजार हुसैन, रेजाकुल इस्लाम और जिराजुल हक को पुलिस ने मौके से गिरफ्तार कर लिया है.

वहीं पुलिस ने जानकारी दी कि अवैध गोमांस विक्रेताओं के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी साथ बी जब्त किए गए गोमांस को जला दिया गया हैं.

 समाजरत्न पुरस्कार से सम्मानित हुए डॉ संतोष सावंत

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मुंबई: उर्जा फाऊंडेशन व आरोग्य भारती द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक समारोह के दौरान समाज में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए डॉ. ॲड संतोष देवजी सावंत को “समाजरत्न पुरस्कार २०२३” दिया गया.
दादर स्थित हॅाटेल कोहीनूर पार्क में उर्जा फाऊंडेशन व आरोग्य भारती द्वारा संयुक्त रूप से एक समारोह का आयोजन किया गया. इस समारोह में आरोग्य भारती के संगठन सचिव व आयुष मंत्रालय के सलाहकर डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय के हाथों डॉ. ॲड संतोष सावंत को “समाजरत्न पुरस्कार २०२३” प्रदान किया गया. इस दौरान न्यायाधीश श्रीमती स्नेहा सचिन म्हात्रे, डॉ. संतोष पांडे, डॉ. सुनील खन्ना, डॉ. विजय जंगम स्वामी, डॉ. वैभव देवगिरिकर व डॉ. दीपक देशमुख आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे.
रत्नागिरी जिले के खेड तालुका के प्रतिभाशील कवि जो सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक, कला, साहित्यिक, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर साहित्यिक विचारमंच व महाराष्ट्र साहित्यिक संस्था के सलाहकार डॉ. ॲड संतोष सावंत समाज मे उत्कृष्ट कार्य करने पर इसके पहले भी कई पुरस्कार पा चुके हैं.

UP: आवारा पशुओं पर योगी सरकार का मेगा प्लान, गोशालाओं के लिए बनेंगे सेल्फ सस्टेनेबल मॉडल

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Uttar Prdaesh News: उत्तर प्रदेश में गाय और मवेशियों को बेहतर आश्रय प्रदान करने के लिए योगी सरकार टीपीपी मॉडल पर बने गौ आश्रयों को शुरू करने की योजना बना रही है. यहीं नहीं सरकार गाय आश्रयों को अपनी आय उत्पन्न करने के लिए आत्मनिर्भर भी बनाएगी. फसल की बर्बादी और यहां तक कि बड़ी दुर्घटनाएं झेल रहे किसानों के लिए आवारा मवेशियों का मुद्दा अब भाजपा सरकार की प्राथमिकता बन गई है. यूपी चुनाव के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इसे बायो फार्मिंग से जोड़कर समस्या के स्थायी समाधान की बात कही थी.

मवेशियों के वध पर प्रतिबंध और गौरक्षकों के डर से आवारा पशुओं की समस्या तेजी से बढ़ी है और यूपी में दूध न देने वाले पशुओं को पालना किसानों के लिए मुश्किल होता जा रहा है. 6 अगस्त, 2019 को उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहायता योजना’ को मंजूरी दी थी. जिसके तहत आवारा पशुओं को रखने वाले लोगों को राज्य सरकार प्रतिदिन 30 रुपये देती है. राज्य सरकार ने इस योजना पर करीब 109.5 करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान लगाया था. इंडियास्पेंड में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, 25 सितंबर, 2021 तक 53,522 लोगों को 98,205 मवेशी दिए जा चुके हैं. हालांकि अगर इसकी तुलना उत्तर प्रदेश में आवारा पशुओं की संख्या से करें तो यह बहुत कम है. यानी सरकार को अभी इस पर और काम करने की जरूरत है.

अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गौशाला चलाने के लिए अर्थव्यवस्था बनाने की जरूरत है. इसके लिए एक सेल्फ-सस्टेनेबल मॉडल बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि पीपीपी मोड पर गौशालाओं का निर्माण कराया जाए। साथ ही उन्हें प्राकृतिक खेती, गोबर पेंट, सीएनजी और सीबीजी से जोड़ा जाए. इससे गौशालाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी और गायों के रख-रखाव और पालन-पोषण का खर्च वे खुद वहन कर सकेंगी. सीएम योगी ने कहा कि इन गौशालाओं के लिए इच्छुक एनजीओ से एमओयू करें और उन्हें आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध कराएं.

सफल मौद्रिक प्रबंधन और सफल विदेश नीति से विश्व पटल पर भारत की बढ़ती साख , भारत 2021-24 के दौरान विश्व की प्रमुख तीव्रगामी अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

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– विवेक रंजन श्रीवास्तव

विगत वर्ष के परिप्रेक्ष्य में दुनिया के अन्य देशो  की तुलना में भारत की प्रगति के आंकड़े देखें तो जहाँ कोरोना जनित कारणों  से दुनिया के अनेक देशो की आर्थिक प्रगति बाधित रही है वहीँ आर्थिक समीक्षा 2021-22 के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था  9.2 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि दर्ज कर रही है।  वर्ष 2022-23 में भारत की आर्थिक विकास दर 8 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया है। विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमानों के अनुसार भी भारत 2021-24 के दौरान विश्व की प्रमुख तीव्रगामी अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

 देश ने अंतरिक्ष , रक्षा , सोलर पावर , तथा ओषधि अनुसन्धान तथा निर्माण के क्षेत्रों में असाधारण सफलताएं अर्जित की हैं।  पारम्परिक निर्यात क्षेत्रो के अतिरिक्त कृषि निर्यात , रक्षा उपकरणों के निर्यात , वेक्सीन तथा दवा निर्यात , के साथ साथ विकसित देशों को भी अंतरिक्ष सेवाये देने  में वैश्विक स्तर पर देश ने अनेकानेक सफलताएं पाई हैं।  कृषि क्षेत्र में लगभग 4  प्रतिशत वृद्धि , औद्योगिक क्षेत्र में  7 प्रतिशत की विकास दर , सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर लगभग  8 प्रतिशत दर्ज की गई है।  दिसंबर 2021 में  विदेशी मुद्रा भंडार 634 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा, जो 13 महीनों से अधिक के आयात के समतुल्य और देश के विदेशी ऋण से भी अधिक है , 2021-22 में निवेश में 15 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि होने का अनुमान व्यक्त किया गया है।

इन सारे आंकड़ों से परे यदि समवेत स्वरूप में देश को  विश्व गुरु बनाने के संकल्प से सिद्धि के सूत्र को ध्यान में रखते हुए देखा  जावे तो जहाँ एक ओर दुनियां के इंग्लैण्ड जैसे कई विकसित देशों सहित हमारे पडोसी देशों श्रीलंका , पाकिस्तान आदि की अर्थव्यवस्थाये ध्वस्त हो रही दिखती हैं , वहीँ भारत के राजकोषीय घाटे को बजट अनुमानों के 46 प्रतिशत तक सीमित कर लिया गया है , दुनिया पर मंडराते विश्व युद्ध के खतरे और महामारी के बावजूद पूंजी बाजार में अप्रैल-नवम्बर 2021 के दौरान 75 आईपीओ जारी करके 89 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जुटाई गई है , जो पिछले दशक के किसी भी वर्ष की तुलना में  अधिक है।  नवंबर, 2021 के अंत तक चीन, जापान और स्विट्ज़रलैंड के बाद भारत विश्व में चौथा सबसे अधिक विदेशी मुद्रा भंडार वाला देश है।  देश के स्वर्ण भंडार में वृद्धि ,सुनियोजित  मौद्रिक प्रबंधन का ही परिणाम है की रूपये को परस्पर व्यापार में वैश्विक मुद्रा के रूप में स्वीकार्यता हेतु अनेक देशों से सहमति प्रतिलक्षित हो रही है।

 

ई  रूपये की व्यवस्था , यू पी आई भुगतान प्रणाली , जैसे कदमो ने भारत को मुद्रा पप्रबंधन में विश्व गुरु के रूप में  प्रस्तुत किया है। भारतीय समरसता की मुक्त वैश्विक विदेश नीति ने यू एन ओ  जैसे संगठन के सम्मुख भी भारत विश्व गुरु की तरह सबका मार्ग प्रशस्त करता दिखता है।  मैं विगत लगभग पांच महीनो से अमेरिका भ्रमण पर हूँ , मैं अपनी पिछली विदेश यात्राओं की तुलना में दुनियां के कई देशो  के सामान्य नागरिको का भारत के प्रति बदलता नजरिया अनुभव करता हूँ तो गर्व से सीना फूल जाता है।  मेरी दृष्टि में विश्व पटल पर भारत की धाक जमाने मे भारत के  समवेत प्रयासों में हमारा मौद्रिक प्रबंधन मुझे गेम चेंजर प्रतीत होता है। (युवराज)

एक और शाहीन बाग बनाने की तैयारी

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भारत के एक छोटे से शहर को धर्म के नाम पर भड़काया जा रहा है। ये शहर उत्तराखंड का हल्द्वानी है जहां दावा किया जा रहा है कि मुसलमान खतरे में हैं। आरोप लग रहे हैं कि बीजेपी की सरकार उनके घर गिराने जा रही है जबकि हकीकत ये है कि ये पूरी कार्रवाई अतिक्रमण की वजह से हो रही है। क्योंकि आरोप है कि इन लोगों ने रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण किया हुआ है। अब रेलवे अपनी जमीन खाली करवा रही है लेकिन इस जमीन पर 95 प्रतिशत की आबादी मुसलमानों की है इसीलिए आगे के कुछ दिनों के लिए यहां राजनीतिक मसाला तैयार हो रहा है।

दरअसल, हाईकोर्ट ने हल्द्वानी में रेलवे ट्रैक के पास बसी अवैध कॉलोनियों को गिराने के लिए एक निर्णय सुनाया है। जिसके बाद लिबरल गैंग के अंदर खलबली मच गई है और ईमानदार पत्रकार रवीश कुमार से लेकर मोहम्मद जुबैर तक सभी लिबरल गैंग के लोग इस मामले को शाहीन बाग जैसा मामला बताने में जुट गुए हैं। हालांकि सरकार द्वारा इन अवैध कॉलोनियों पर अभी कोई कार्रवाई नहीं की गई है फिर भी लिबरल गैंग के पेट में दर्द हो रहा है।सबसे पहले जानते हैं कि पूरा मामला क्या है? तो उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे स्टेशन के किनारे लगभग 2।5 किलोमीटर लंबी पट्टी पर अवैध कॉलोनियां बसी हुई हैं और ये कॉलोनियां स्वतंत्रता के बाद से बसना शुरू हुई थीं। रेलवे के अनुसार वनभूलपुरा में अवैध कब्जे के दायरे में आने वाली ढोलक बस्ती, गफूर बस्ती के साथ ही इंदिरा नगर, लाइन नंबर 17, बड़ी ठोकर और छोटी ठोकर के इलाके शामिल हैं।

जब देश को स्वतंत्रता मिली उस दौर में इस क्षेत्र के आसपास बड़े बगीचे, लकड़ी के गोदाम और लकड़ी के कारखाने हुआ करते थे, इन्हीं बगीचों और कारखानों में काम करने के लिए रामपुर, मुरादाबाद और बरेली से मुस्लिम समुदाय के लोगों को यहां लाया गया था। बगीचों में काम करते हुए लोगों ने रेलवे लाइन के पास पहले अपनी झुग्गियां लगाईं और वे झुग्गियां कच्चे मकानों से होती हई धीरे-धीरे पक्के मकानों में परिवर्तित हो गईं। रेलवे द्वारा दिए गए आंकड़ों को देखा जाए तो यह कोई छोटा-मोटा अतिक्रमण नहीं है बल्कि 78 एकड़ भूमि पर किया गया कब्जा है जिसमें 4000 से अधिक परिवार यहां पर रह रहे हैं और इन परिवारों में अधिकतर मुस्लिम परिवार हैं।

वहीं रेलवे ने यह भी दावा किया है कि जिस जगह पर अतिक्रमण हुआ है वहां पर कभी ट्रेन की पटरियां हुआ करती थीं। जिसका नक्शा आज भी रेलवे के पास मौजूद है। ऐसे में रेलवे ने कोर्ट के आदेश के बाद उसी जगह को चिह्नित किया है जहां पटरियों के निशान आज भी मौजूद हैं। अब जब कार्रवाई की बारी आई है तो बैनर पोस्टर लेकर महिलाओं और बच्चों के साथ लोग बैठे हुए हैं। ये लोग एक तरफ कार्रवाई को गलत ठहरा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ लिबरल गैंग के लोगों ने इसके कानूनी पक्ष की जांच परख किए बिना ही सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है और हल्द्वानी में दिल्ली जैसा शाहीन बाग बनाने के लिए गला फाड़-फाड़ कर चिल्लाने लगे हैं।

प्रश्न है कि मामला कोर्ट में कैसे पहुंचा और हाइकोर्ट ने इस पर निर्णय क्या दिया है? साल 2016 में हल्द्वानी के गौलापार निवासी रवि शंकर जोशी ने एक जनहित याचिका दायर कर इस मामले को कोर्ट में उठाया था। मामले पर लंबी सुनवाई और सभी पक्षों व साक्ष्यों को देखने और सुनने के बाद हाईकोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा कि हल्द्वानी रेलवे स्टेशन से सटी 78 एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है जिसे हटाया जाना जरूरी है। 20 दिसंबर को नैनीताल कोर्ट द्वारा यह निर्णय सुनाया गया। ऐसे में प्रशासन हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश का पालन कर कार्रवाई कर रहा है।

ज्ञात हो कि हल्द्वानी के इस मामले से पहले साल 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम के संसद में पारित होने के बाद उसे अकारण ही एक बड़ा मुद्दा बनाने का प्रयास किया गया था। इसके अलावा NRC को लेकर भी विरोध प्रदर्शन किए गए। इन मुद्दों को माध्यम बनाकर सरकार के विरुद्ध माहौल बनाने का बहुत प्रयास किया गया और 2020 के मार्च महीने तक प्रदर्शन किया गया था। इस कथित आंदोलन का केंद्र दिल्ली का शाहीन बाग था जहां लोगों ने लगभग चार महीनों तक राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद करके रखा था जिसके चलते बहुत सारे लोगों को आने जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

अब आप कहेंगे कि यहां इस आंदोलन का उल्लेख करने का औचित्य ही क्या है। दरअसल, जिस तरह से शाहीन बाग में महिलाओं को आगे करके कथित आंदोलन चलाया जा रहा था और लिबरल गैंग पर्दे के पीछे से उस षड्यंत्रकारी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे उसी तरह हल्द्वानी में भी महिलाओं को आगे करके लिबरल गैंग उनका नेतृत्व कर रहा है जबकि यह साफ-साफ दिख रहा है कि भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। ये तो ऐसा ही कि पहले चोरी करो फिर सीना जोरी करो और कहो कागज नहीं दिखाएंगे। देश संविधान से चलता है ना कि भावनात्मक या धार्मिक आधार पर। अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच चुका है तो नेताओं को बड़बोले बयान देने की बजाय अदालत के आदेश का इंतजार करना चाहिए। वैसे हल्द्वानी में आंदोलन का जो स्वरूप दिखाई दे रहा है उससे एक बात साबित हो गयी है कि शाहीन बाग कोई संयोग नहीं बल्कि प्रयोग था जोकि अब जगह-जगह दोहराया जा रहा है। अवैध कॉलोनियों से जब भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है तो उसे सियासी लोग धार्मिक रंग देने का काम करते हैं। दिल्ली में पिछले साल एमसीडी का बुलडोजर शाहीन बाग समेत कई अन्य इलाकों में पहुँचा तो इस कार्रवाई को एक धर्म विशेष के लोगों के खिलाफ अभियान करार दिया गया। अब उत्तराखंड चर्चा में है क्योंकि हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के पास रेलवे की जमीन पर बनी अवैध कॉलोनी से कब्जा हटाने का जो आदेश उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने दिया है उसके खिलाफ सियासत शुरू हो गयी है। एकदम शाहीन बाग के आंदोलन की तर्ज पर महिलाओं और बच्चों को ठंड के मौसम में आगे कर प्रदर्शन करवाया जा रहा है, कैंडल मार्च निकाले जा रहे हैं। यहाँ हमें समझना होगा कि सरकारी जमीन सार्वजनिक संपत्ति होती है किसी एक की बपौती नहीं। सरकारी जमीन से कब्जा छुड़वाने के प्रयास को अन्याय का रूप देना गलत है।

इस पूरे घटना चक्र का एक मानवीय पहलू भी हैं । उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 20 दिसंबर को हल्द्वानी में बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण करके बनाए गए ढांचों को गिराने के आदेश दिए थे। न्यायालय ने कहा था कि अगर जरूरत पड़े तो जिला प्रशासन अतिक्रमण हटाने के लिए पैरा मिलिट्री फोर्स की मदद ले, फिर भी कोई दिक्कत हो तो बलपूर्वक कार्रवाई की जाए। इसके बाद जगह खाली करने के लिए स्थानीय समाचार पत्रों की मदद से नोटिस दिये गये। जिसके बाद हल्द्वानी से कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश के नेतृत्व में क्षेत्र के निवासियों ने उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। इलाके के लोगों का कहना है कि वे लोग इस क्षेत्र में 70 साल से रह रहे हैं। वहां 20 मस्जिदें, 9 मंदिर, पानी की टंकी, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, 1970 में डाली गई एक सीवर लाइन, दो इंटर कॉलेज और एक प्राथमिक विद्यालय है इसलिए यह क्षेत्र अवैध कब्जे वाला नहीं है। इलाके के लोगों का कहना है कि हम प्रधानमंत्री, रेल मंत्री और मुख्यमंत्री से अपील करते हैं कि वे इस तथा-कथित अतिक्रमण को हटाने पर मानवीय पहलू से विचार करें। इलाके के लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर यह रेलवे की जमीन थी तो सरकार ने इसे पट्टे पर कैसे दिया था?

इस मामले में क्षेत्र के कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने कहा, ”करीब सौ साल से इस क्षेत्र में लोग बसे हुए हैं। यहां 70 साल पुरानी मस्जिदें और मंदिर हैं। यहां नजूल जमीन, पूर्ण स्वामित्व वाली भूमि और लीजधारक हैं।” उन्होंने कहा, ”रेलवे जिस 78 एकड़ जमीन को अपना बताता है, उसे खाली करने का विरोध करने के लिए हम व्यक्तिगत रूप से उच्च न्यायालय गये। हम उच्चतम न्यायालय भी गये जहां हमारे वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद मामले की पैरवी कर रहे हैं लेकिन जिस सरकार ने जमीन पर स्कूल एवं अस्पताल बनवाये, उसने अपने नागरिकों की कोई परवाह नहीं की।’’ विधानसभा में हल्द्वानी सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे सुमित हृदयेश ने हाल में प्रदर्शनकारियों के धरने में भी हिस्सा लिया था। हम आपको बता दें कि यह सीट पारंपरिक रूप से वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं उनकी मां इंदिरा हृदयेश जीतती थीं।

जहां तक इस पूरे मामले का सवाल है तो आपको बता दें कि उत्तराखंड उच्च न्यायायल ने हल्द्वानी के इस इलाके में रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने का 20 दिसंबर को आदेश दिया था। न्यायालय ने अतिक्रमणकर्ताओं को वह जगह खाली करने के लिए एक हफ्ते का नोटिस देने का आदेश दिया था। हालांकि बनफूलपुरा के हजारों बाशिंदों ने अतिक्रमण हटाने का यह कहते हुए विरोध किया कि वे बेघर हो जायेंगे और स्कूल जाने वाले उनके बच्चों का भविष्य तबाह हो जाएगा।

इस बीच, कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी अनुरोध किया है कि वे अतिक्रमण हटाने संबंधी इस आदेश पर मानवीय तरीके से विचार करें क्योंकि ऐसा होने पर हजारों लोग बेघर हो जाएंगे। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम एक खुला पत्र लिखते हुए इसे सोशल मीडिया पर शेयर भी कर दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है कि कानूनी पक्ष के इतर मानवीय दृष्टिकोण से मामले में कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए। हरीश रावत ने अपने पत्र के माध्यम से सवाल भी किया है कि यदि 50 हजार से ज्यादा लोगों को हटाया जाएगा तो ये लोग कहां जाएंगे? हरीश रावत ने कहा है कि अशांति का वातावरण पूरे हल्द्वानी और कुमाऊं के अंचल में फैलेगा जोकि ठीक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि आज भले कुछ लोग चुप हों लेकिन जब स्थितियां बिगड़ेंगी तो वो लोग भी सरकार के विवेक पर उंगली उठाएंगे। हरीश रावत ने पत्र के माध्यम से चेतावनी भी देते हुए कहा है कि जहां तक सवाल हमारे कर्तव्य का है, तो हम केवल इतना भर कर सकते हैं कि जब घर तोड़ने के लिए हथौड़ा उठेगा तो हम उसके आगे बैठ सकते हैं। वहीं एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि प्रधानमंत्री को इंसानियत की बुनियाद पर हल्द्वानी के लोगों की मदद करनी चाहिये और उन्हें वहां से नहीं निकालना चाहिए। उन्होंने सवाल किया है कि हल्द्वानी के लोगों के सर से छत छीन लेना कौन-सी इंसानियत है?

फ़िलहाल हल्द्वानी जमीन खाली करने के उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला आ गया  है। सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया है। इसके साथ ही उत्तराखंड सरकार को नोटिस भी जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण और तोड़फोड़ पर रोक लगा दी है। अगली सुनवाई 7  फरवरी को होगी । दोनों पक्षों का साक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है । बहरहाल, मामला  जब  न्यायालय में है इसलिए प्रदर्शनकारियों को भी घरों में बैठना चाहिए और नेताओं को भी जुबान पर काबू रखना चाहिए साथ ही सोशल मीडिया पर तनाव बढ़ाने जैसी पोस्ट करने से भी बचना चाहिए। सांप्रदायिक सौहार्द्र कायम रख कर ही हम देश को आगे बढ़ा सकते हैं।हालांकि इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है और ऐसे वक्त जब  को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी हैं  दोनों पक्षों को संयम रखना चाहिए ।

अशोक भाटिया

सम्मेद शिखरजी पर इको टूरिज्म गतिविधि पर रोक लगी

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सम्मेद शिखरजी पर केंद्र का बड़ा फैसला, झारखंड सरकार को इको टूरिज्म गतिविधि पर रोक लगाने के निर्देश

केंद्र सरकार ने गुरुवार को तीन साल पहले जारी किए गए अपने आदेश को वापस ले लिया है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से कहा है कि वह इस समिति में शामिल होने के लिए जैन समुदाय से दो सदस्यों और स्थानीय जनजातीय समूह से एक सदस्य को स्थायी सदस्य के रूप में आमंत्रित करे।

झारखंड के पारसनाथ में स्थित जैन समुदाय का पवित्र तीर्थ स्थल सम्मेद शिखर पर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है। केंद्र के मुताबिक, यह अब पर्यटन क्षेत्र नहीं होगा। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में सभी पर्यटन और इको टूरिज्म गतिविधि पर पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने ट्विटर के जरिए इसकी जानकारी दी है।

केंद्र सरकार ने गुरुवार को तीन साल पहले जारी किए गए अपने आदेश को वापस ले लिया है। भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से आज पांच जनवरी को जारी दो पेज की चिट्ठी के दूसरे पेज पर लिखा गया है, ”इको सेंसेटिव जोन अधिसूचना के खंड-3 के प्रावधानों के कार्यान्वयन पर तत्काल रोक लगाई जाती है, जिसमें अन्य सभी पर्यटन और इको-टूरिज्म गतिविधियां शामिल हैं। राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया जाता है।”

केंद्र सरकार ने निगरानी समिति बनाई। राज्य सरकार से कहा गया है कि वह इस समिति में शामिल होने के लिए जैन समुदाय से दो सदस्यों और स्थानीय जनजातीय समूह से एक सदस्य को स्थायी सदस्य के रूप में आमंत्रित करे।

फैसले के खिलाफ आंदोलन कर रहा था जैन समुदाय
सम्मेद शिखर को पर्यटन क्षेत्र घोषित किए जाने के खिलाफ पिछले कुछ दिनों से जैन समुदाय आंदोलन कर रहा है। इसके खिलाफ कई जैन मुनियों ने आमरण अनशन भी शुरू कर दिया था। इसमें जैन मुनि सुज्ञेयसागर महाराज ने मंगलवार को प्राण भी त्याग दिया था।

जैनियों का पवित्र तीर्थ है सम्मेद शिखरजी
सम्मेद शिखरजी जैनियों का पवित्र तीर्थ है। जैन समुदाय से जुड़े लोग सम्मेद शिखरजी के कण-कण को पवित्र मानते हैं। झारखंड के गिरिडीह जिले में पारसनाथ पहाड़ी पर स्थित श्री सम्मेद शिखरजी को पार्श्वनाथ पर्वत भी कहा जाता है। ये जगह लोगों की आस्था से जुड़ी हुई है। बड़ी संख्या में हिंदू भी इसे आस्था का बड़ा केंद्र मानते हैं। जैन समुदाय के लोग सम्मेद शिखरजी के दर्शन करते हैं और 27 किलोमीटर के क्षेत्र में फैले मंदिरों में पूजा करते हैं। यहां पहुंचने वाले लोग पूजा-पाठ के बाद ही कुछ खाते-पीते हैं।

1 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर तैयार मिलेगा : अमित शाह

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1 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर तैयार मिलेगा, अमित शाह का एलान

राम मंदिर के लिए कानूनी लड़ाई 135 सालों से ज्यादा लंबी चली है। 15वीं सदी से चली आ रही इस लड़ाई पर साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने विराम लगा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में विवादित जमीन पर राममंदिर का निर्माण करने की अनुमति देते हुए मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह जमीन देने का आदेश दिया था।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अयोध्या में तैयार हो रहे राम मंदिर को लेकर बड़ा एलान किया है। उन्होंने कहा कि 1 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर तैयार मिलेगा। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब से देश आजाद हुआ, तब से कांग्रेसी इसको कार्ट में उलझा रहे थे। मोदी जी आए एक दिन सुबह सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया और मोदी जी ने उसी दिन राम मंदिर का भूमि पूजन पूरा कर मंदिर निर्माण शुरू कराया। 1 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर तैयार मिलेगा। गौरतलब है कि राम मंदिर के लिए कानूनी लड़ाई 135 सालों से ज्यादा लंबी चली है। 15वीं सदी से चली आ रही इस लड़ाई पर साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने विराम लगा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में विवादित जमीन पर राममंदिर का निर्माण करने की अनुमति देते हुए मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह जमीन देने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक एक ट्रस्ट बनाकर भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। पांच अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया था।

स्थापत्य कला के लिए नजीर बनेगा राममंदिर
राममंदिर स्थापत्य कला के लिए भी नजीर होगा। 70 एकड़ के रामजन्मभूमि परिसर में संपूर्ण भारत को संजोने की योजना है। यहां हो रहे निर्माण कार्य में भारतीय संस्कृति के नायाब कला की झलक दिखेगी। राममंदिर जिन 400 स्तंभों पर टिका होगा उनमें देवी-देवताओं के चित्र उकेरे जाएंगे तो आठ एकड़ में बनने वाले परकोटे में रामकथा के 100 प्रसंगों का चित्रांकन किया जाएगा।

400 स्तंभों पर टिका होगा राममंदिर
राममंदिर न सिर्फ तकनीक बल्कि भव्यता में भी दुनिया के चुनिंदा मंदिरों में शामिल होगा। तीन मंजिला राममंदिर 400 स्तंभों पर टिका होगा। कुशल कारीगरों द्वारा इन स्तंभों में रामकथा के प्रसंगों सहित कुल 6400 मूर्तियां प्राचीन पद्धति से उकेरी जाएंगी, जो मंदिर को हेरिटेज लुक देने का काम करेंगी। मंदिर के हर खंभे में देवी-देवताओं की 16 मूर्तियों को उकेरा जाएगा।

रामायण के 100 प्रसंगों को भी उकेरा जाएगा
साथ ही राममंदिर के 2500 वर्ग फीट के क्षेत्र में बनने वाले परकोटे में रामायण के 100 प्रसंगों को भी उकेरा जाएगा। इसके लिए मूर्तिकारों सहित रामनगरी व देश के संत-धर्माचार्यों से भी सलाह ली जा रही है। मूर्तियों का निर्माण सबसे पहले पेंसिल से होगा फिल क्ले बनाया जाएगा उसके बाद मॉडलिंग की जाएगी।

मंदिर के इतिहास पर बनेगी फिल्म, महानायक देंगे आवाज
राममंदिर के लिए हुए पांच सौ वर्षों के संघर्ष पर एक फिल्म बनाने की ट्रस्ट की योजना है। फिल्म का निर्माण दूूरदर्शन कर रहा है। फिल्म में बॉलीवुड के सुपर स्टर अभिनेता अमिताभ बच्चन अपनी आवाज देंगे। राममंदिर के 500 साल के इतिहास को लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी मशहूर लेखक और फिल्म सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून को दी गई है। उनके साथ छह सदस्यीय टीम काम करेगी। इस काम के लिए अमिताभ व प्रसून जोशी कोई फीस नहीं ले रहे हैं।

अयोध्या मामले का घटनाक्रम

  • 1528: बाबर ने यहां एक मस्जिद का निर्माण कराया जिसे बाबरी मस्जिद कहते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार इसी जगह पर भगवान राम का जन्म हुआ था।
  • 1853: हिंदुओं का आरोप कि भगवान राम के मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण हुआ। मुद्दे पर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच पहली हिंसा हुई।
  • 1859: ब्रिटिश सरकार ने तारों की एक बाड़ खड़ी करके विवादित भूमि के आंतरिक और बाहरी परिसर में मुस्लिमों और हिदुओं को अलग-अलग प्रार्थनाओं की इजाजत दे दी।
  • 1885: मामला पहली बार अदालत में पहुंचा। महंत रघुबर दास ने फैजाबाद अदालत में बाबरी मस्जिद से लगे एक राम मंदिर के निर्माण की इजाजत के लिए अपील दायर की।
  • 23 दिसंबर 1949: करीब 50 हिंदुओं ने मस्जिद के केंद्रीय स्थल पर कथित तौर पर भगवान राम की मूर्ति रख दी।  इसके बाद उस स्थान पर हिंदू नियमित रूप से पूजा करने लगे। मुसलमानों ने नमाज पढ़ना बंद कर दिया।
  • 16 जनवरी 1950: गोपाल सिंह विशारद ने फैजाबाद अदालत में एक अपील दायर कर रामलला की पूजा-अर्चना की विशेष इजाजत मांगी।
  • 5 दिसंबर 1950: महंत परमहंस रामचंद्र दास ने हिंदू प्रार्थनाएं जारी रखने और बाबरी मस्जिद में राममूर्ति को रखने के लिए मुकदमा दायर किया. मस्जिद को ‘ढांचा’ नाम दिया गया
  • 17 दिसंबर 1959: निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल हस्तांतरित करने के लिए मुकदमा दायर किया।
  • 18 दिसंबर 1961: उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर किया।
  • 1984: विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने बाबरी मस्जिद के ताले खोलने और राम जन्मस्थान को स्वतंत्र कराने व एक विशाल मंदिर के निर्माण के लिए अभियान शुरू किया. एक समिति का गठन किया गया।
  • 1 फरवरी 1986: फैजाबाद जिला न्यायाधीश ने विवादित स्थल पर हिदुओं को पूजा की इजाजत दी। ताले दोबारा खोले गए। नाराज मुस्लिमों ने विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया।
  • जून 1989: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने वीएचपी को औपचारिक समर्थन देना शुरू करके मंदिर आंदोलन को नया जीवन दे दिया।
  • 1 जुलाई 1989: भगवान रामलला विराजमान नाम से पांचवा मुकदमा दाखिल किया गया।
  • 9 नवंबर 1989: तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने बाबरी मस्जिद के नजदीक शिलान्यास की इजाजत दी।
  • 25 सितंबर 1990: बीजेपी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली, जिसके बाद साम्प्रदायिक दंगे हुए।
  • नवंबर 1990: आडवाणी को बिहार के समस्तीपुर में गिरफ्तार कर लिया गया। बीजेपी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया।
  • अक्टूबर 1991: उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह सरकार ने बाबरी मस्जिद के आस-पास की 2.77 एकड़ भूमि को अपने अधिकार में ले लिया।
  • 6 दिसंबर 1992: हजारों की संख्या में कार सेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद ढाह दिया। इसके बाद सांप्रदायिक दंगे हुए। जल्दबाजी में एक अस्थायी राम मंदिर बनाया गया।
  • 16 दिसंबर 1992: मस्जिद की तोड़-फोड़ की जिम्मेदार स्थितियों की जांच के लिए लिब्रहान आयोग का गठन हुआ।
  • जनवरी 2002: प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यालय में एक अयोध्या विभाग शुरू किया, जिसका काम विवाद को सुलझाने के लिए हिंदुओं और मुसलमानों से बातचीत करना था।
  • अप्रैल 2002: अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर उच्च न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की।
  • मार्च-अगस्त 2003: इलाहबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अयोध्या में खुदाई की. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का दावा था कि मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष होने के प्रमाण मिले हैं। मुस्लिमों में इसे लेकर अलग-अलग मत थे।
  • सितंबर 2003: एक अदालत ने फैसला दिया कि मस्जिद के विध्वंस को उकसाने वाले सात हिंदू नेताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जाए।
  • जुलाई 2009: लिब्रहान आयोग ने गठन के 17 साल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
  • 28 सितंबर 2010: सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहबाद उच्च न्यायालय को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका खारिज करते हुए फैसले का मार्ग प्रशस्त किया।
  • 30 सितंबर 2010: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा जिसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े में जमीन बंटी।
  • 9 मई 2011: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी।
  • जुलाई 2016: बाबरी मामले के सबसे उम्रदराज वादी हाशिम अंसारी का निधन।
  • 21 मार्च 2017: सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की बात कही।
  • 19 अप्रैल 2017: सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित बीजेपी और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया।8 फरवरी, 2018: सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपीलों पर सुनवाई शुरू की।
  • 2019:  सुप्रीम कोर्ट ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय संविधान पीठ का गठन किया।
  • 6 अगस्त, 2019: सुप्रीम कोर्ट ने रोजाना मामले की सुनवाई शुरू की।
  • 16 अक्तूबर, 2019: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा।
  • 9 नवंबर, 2019: सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा: विवादित भूमि पर बनेगा मंदिर, मुस्लिम पक्ष को कहीं और मिलेगी जमीन

‘कमीने’ के बाद ‘कुत्ते’ के लिए विशाल भारद्वाज ने रिक्रिएट किया गाना ‘फिर धन ते नान’

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मुम्बई। विशाल भारद्वाज और लव रंजन की ‘कुत्ते’ में नया और अनोखा ‘फिर धन ते नान’ गाना लाने की घोषणा ने अपने आप में दर्शकों के बीच काफी उत्साह पैदा कर दिया है। 2023 के पहले ब्लॉकबस्टर गाने के लिए दर्शकों के लंबे इंतजार पर अब फुर स्टॉप लग गया है क्योंकि ‘फिर धन ते नान’ आखिरकार सामने आ गया है और साल के चार्टबस्टर गाने की परिभाषा को फिर से परिभाषित करने के लिए तैयार है।
केपर शैली की खोज करते हुए, बेसब्री से इंतजार किया जाने वाला ‘फिर धन ते नान’ गीत दर्शकों को कुत्ते की ब्लैक कॉमेडी थ्रिलर दुनिया से रूबरू कराएगा। कुछ अद्भुत संगीत बनाने के लिए पहचाने जाने वाले विशाल भारद्वाज ने गुलज़ार के लीरीक्स के लिए म्यूजिक दिया है। इस गाने को दो दमदार गायक सुखविंदर सिंह और विशाल डडलानी ने गाया है।
इस बहुप्रतीक्षित गाने के म्यूजिक कंपोजर विशाल भारद्वाज ने इसे बनाने के पीछे का कारण बताते हुए अपने विचार साझा किए। ‘फिर धन ते नान’ एक ऐसा इमोशन है जो आपके भीतर उमड़ता है। यह आकर्षक है, फिर भी ओरिजनल गाने, धन ते नान की यादें ताजा करता है, जो एक चार्टबस्टर था जिसने अपना आकर्षण कभी नहीं खोया। यह आज भी प्ले किया जाता है। शायद इसीलिए, शुरू में हमारे लिए फिर धन ते नान की रचना करना चुनौतीपूर्ण था और ओरिजनल धुन में बदलाव करने के बारे में सोचा। पहले वाले गाने की वास्तविकता को नए वाले गाने की ताजगी के साथ बरकरार रखते हुए हमें दोनों को इंटीग्रेट करने की जरूरत थी। एक और चुनौती यह थी कि धन ते नान एकदम परफेक्ट है। इसलिए नए वर्जन को अंतिम रूप देने से पहले कई मीटिंग्स, डिस्कशन्स और जैमिंग सेशन करने पड़े। धन ते नान की रचना सालों पहले की गई थी, इसलिए हमें यह ध्यान रखना था कि नए वर्जन में किए गए बदलावों को आज के कंटेंपरेरी बीट्स और म्यूजिक को शोकेस करे और फिर भी इसकी खासियत बरकरार रहें। एक बड़ा फैसला ओरिजनल सिंगर्स और लिरिसिस्ट – सुखविंदर और विशाल ददलानी को फिर से बनाए रखना था और लेजेंड्री गुलज़ार साहब लीरिक्स पर फिर धन ते नान गाना था। इसमें भी हमारी मदद करने के लिए हम हमेशा गुलजार साहब के बेहद शुक्रगुजार रहेंगे। विशाल की हस्की, वाइब्रेंट आवाज के साथ सुखविंदर की गुनगुनाहट हमारे गाने में जादू बिखेरती हैं। यह सेंसुअस, सुरिला और झूमने पर मजबूर करने वाला है। अब यह गाना जारी कर दिया गया है और जिसका जादू आप सब भी महसूस कर पाएंगे।
इसके अलावा, ‘फिर धन ते नान’ गाना निस्संदेह सबसे खास और सबसे बड़ा गाना है जो आखिरकार रिलीज हो चुका है। यह फिल्म निश्चित रूप से साल की शुरुआत में दर्शकों के लिए एक बड़ी ट्रीट के रूप में आई है और फिल्म की रिलीज के लिए उत्साह का लेवल बढ़ गया है। दर्शकों ने एक बार शाहिद कपूर को इस गाने की ट्यून पर झूमते देखा था और अब अर्जुन कपूर, तब्बू, राधिका मदान, शार्दुल भारद्वाज, नसीरुद्दीन शाह, कोंकणा सेन शर्मा और कुमुद मिश्रा की नई कलाकारों की टुकड़ी इस पर डांस रही है। गाने का नए वर्जन जो वास्तव में पर्दे पर देखने के लिए दर्शक क्रेजी हुए जा रहे हैं।
लव फिल्म्स और विशाल भारद्वाज फिल्म्स के बैनर तले लव रंजन, विशाल भारद्वाज, अंकुर गर्ग और रेखा भारद्वाज द्वारा निर्मित ‘कुत्ते’ गुलशन कुमार और भूषण कुमार की टी-सीरीज़ द्वारा प्रस्तुत है। इस फिल्म का निर्देशन विशाल-रेखा के पुत्र आसमान भारद्वाज ने किया है। फिल्म के संगीतकार विशाल भारद्वाज हैं और इसके बोल गुलजार ने लिखे हैं। कुत्ते 13 जनवरी 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।