Home Blog Page 299

चरखी दादरी में 25 एकड़ भूमि पर लगेगा पशुधन मेला

0

चरखी दादरी: 25 एकड़ भूमि पर लगेगा पशुधन मेला, बीस हजार किसानों के ठहरने का रहेगा प्रबंध

चरखी दादरी। तीन दिवसीय प्रदेश स्तरीय पशु मेला की तैयारियों को लेकर कृषि मंत्री जेपी दलाल ने मंगलवार को लघु सचिवालय में अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने कहा कि दादरी में 11 मार्च से शुरू होने जा रहे पशुधन मेला की तैयारियों के लिए जिला प्रशासन और विभाग अपनी जिम्मेदारी संभाल लें। प्रदेशस्तरीय इस मेले के आयोजन में प्रशासन व पुलिस विभाग अपना पूरा सहयोग दें। कृषि मंत्री ने कहा कि करीब 25 एकड़ भूमि में इस मेले का आयोजन किया जाएगा जिसमें बीस हजार से अधिक किसानों के ठहरने की व्यवस्था की जानी है। मेला स्थल पर सार्वजनिक शौचालय का प्रबंध किया जाए। पशुपालन विभाग की ओर से यहां हरे व सूखे पशु चारे की व्यवस्था की जाए। मेले में पानी और बिजली का सुचारू प्रबंध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को वर्ष 2019 और वर्ष 2020 का फसल मुआवजा दिया जाए। उन्होंने उपायुक्त प्रीति को निर्देश दिए कि बेसहारा पशुओं को आश्रय देने की कोई ठोस योजना तैयार की जाए।

कृषि मंत्री ने कहा कि दादरी शहर और आसपास के गांवों में बिजली की आपूर्ति नियमित रूप से होनी चाहिए, जिससे कि मेले में आने वाले किसानों को कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि पाला से जो भी फसलों का नुकसान हुआ है, उसका आकलन कर एक रिपोर्ट उनको दी जाए। कृषि मंत्री ने कहा कि एसटीपी के पानी को सिंचाई के कार्य में प्रयोग में लाया जाए। बैठक में बाढड़ा के एसडीएम डा. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि किसानों को मुआवजा बांटा जा रहा है। बैठक में दादरी के विधायक सोमबीर सांगवान, पशुपालन व मत्स्य पालन विभाग के विशेष सचिव जयबीर आर्य, उपायुक्त प्रीति, भाजपा जिलाध्यक्ष सतेंद्र परमार, जिला परिषद चेयरमैन मनदीप डालावास, पशुपालन विभाग के महानिदेशक डॉ. वीरेंद्र लोहरा, प्रबंध निदेशक लालचंद रंगा, एसडीएम नवीन कुमार, नगराधीश रेणुका नांदल, डीएसपी वीरेंद्र सिंह, पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डा. जसवंत जून, कृषि उपनिदेशक डॉ. बलवंत सहारण आदि मौजूद रहे।
जेपी दलाल ने बैठक के बाद शाम को पशुधन मेला के लिए प्रस्तावित भूमि का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि सभी पशुओं के लिए अलग-अलग जोन बनाए जाएंगे। मुख्य मंच के लिए अलग से वीआईपी पार्किंग और पांडाल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि बेहतरीन नस्ल की गाय, ऊंट, भैंस आदि रैंप पर कैटवॉक करेंगी, उसके लिए रेड कारपेट का एक रैंप बनाया जाए। पशुपालकों के ठहराव के लिए तंबू और पशुओं को बांधने का सारा इंतजाम यहां होना चाहिए।

 

अभिनेता चंदन रॉय सान्‍याल ‘द प्‍लेबैक सिंगर’ का करेंगे निर्देशन

0

पटना। एक्‍टर चंदन रॉय सान्‍याल (Chandan Roy Sanyal) ने कमीने सहित कई फिल्मों और वेब सीरीज ‘आश्रम’, हवा बदले हस्सू’ में अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता है और अब वह फिल्म ‘द प्‍लेबैक सिंगर’ (The Playback Singer) में मुख्‍य भूमिका निभाने के लिये तैयार हैं। इसके साथ ही चंदन इस फिल्म के निर्देशन की बागडोर भी संभाल रहे हैं।
वहीं ‘पद्मावत’, ‘वॉर’, ‘क्रिमिनल जस्टिस’, ‘आश्रम’, ‘असुर’ जैसी फिल्में व वेब सीरीज में अपनी दमदार अभिनय का प्रदर्शन कर मशहूर हुईं अनुप्रिया गोयनका (Anupriya Goyanka) और ‘परमानेंट रूममेट्स, मिसमैच्‍ड, अपहरण’ वेब सीरीज की अभिनेत्री निधि सिंह (Nidhi Singh) इस फिल्म में चंदन रॉय सान्याल का साथ दे रही हैं।

‘द प्‍लेबैक सिंगर’ पटना की पृष्‍ठभूमि पर आधारित एक म्‍यूजिकल पीरियड रोमांस है, जिसमें तीन किरदारों और उनके संघर्षों का सफर दिखाया जाएगा। यह फिल्‍म एक लड़की और उसकी संगीतमय दुनिया की पुरानी यादें ताजा करने वाली एक अभिनव कहानी है, जिसमें उसकी आकांक्षा, उसके प्‍यार और दोस्‍तों का सफर है। इनमें उसे आइकॉन बनाने वाले उन गानों और किस्‍मत के उस मोड़ को दिखाया गया है जो आखिरकार उसकी जिन्‍दगी को तय करते हैं।

इस फिल्‍म का प्रोडक्‍शन लोनस्‍टार फिल्‍म्‍स और चंदन रॉय सान्‍याल मोशन पिक्‍चर कंपनी कर रही है। ‘द प्‍लेबैक सिंगर’ 2023 में ‘कैंसर’ के बाद लोनस्‍टार फिल्‍म्‍स की दूसरी फिल्‍म है और एक निर्देशक के तौर पर चंदन रॉय सान्‍याल की भी दूसरी फिल्‍म है।

‘द प्‍लेबैक सिंगर’ के बारे में एक्‍टर और डायरेक्‍टर चंदन रॉय सान्‍याल ने कहा कि यह प्रोजेक्‍ट कई साल से मेरे दिमाग में था और फिर कुछ साल कागजों पर रहा। यह मेरे दिल के बहुत करीब है और मैं इस पर काम करने से पहले इसे अपने दिमाग में स्‍पष्‍ट रूप से देखना चाहता था। यह एक पीरियड पीस है, इसलिये इसका प्री-प्रोडक्‍शन बहुत तगड़ा है और इसके लिये बहुत शोध किया गया है। इसमें कोई गलती न रहे, उसके लिये मेरे पास एक बड़ी मजबूत टेक्निकल टीम है। जब मैंने लोनस्‍टार के पंकज और देवांश को इसकी कहानी सुनाई, तब रिसर्च के मामले में उन्‍होंने मुझे पूरा सहयोग दिया। इसे बड़े प्‍यार और लगन के साथ बनाया गया है।
आपको बता दें कि लोनस्‍टार फिल्‍म्‍स Lonstar Films अमेरिका का एक प्रोडक्‍शन हाउस है, जिसने हाल ही में भारत में कदम रखा है। इसके मुखिया पंकज ममतोरा (Pankaj Mamtora) हैं, जो अमेरिका में रहते हैं और देवांश पटेल बतौर चीफ क्रियेटिव ऑफिसर इसकी भारतीय शाखा का नेतृत्‍व करते हैं।
यह फिल्‍म इसी साल की दूसरी छमाही में प्रदर्शित की जाएगी।

पथमेड़ा गाेशाला में सजा मंडप:11 हजार गोवंश के बीच फेरे, एक हजार गोपालक बने विशेष अतिथि, गोबर की कुटिया में मेहमान, फिर गायों के लिए भोज

0

जालोर में देश की सबसे बड़ी पथमेड़ा गाेशाला की शाखा नंदगांव में वेडिंग डेस्टिनेशन चर्चा में रही। भीलवाड़ा के व्यवसायी कोठारी परिवार के इस आयोजन ने प्राचीन काल की गो आधारित संस्कृति को पुनर्जीवित कर दिया। अशाेक कुमार-सुशीला देवी के बेटे विशाल व कैलाशचंद्र तातेड़-नीमा की बेटी पूर्विता की शादी यहां हुई। शादी समारोह तीन दिन तक चले। इस गोशाला में 11 हजार से अधिक गोवंश हैं, जिनकी रोज आरती होती है। गोवंश के लिए महाभोज किया गया। वर-वधू पक्ष की ओर से गाेवंश के लिए भेंट दी गई। गोशाला में कार्यरत 1000 गोपालक इस विवाह समारोह के विशेष अतिथि बने।

विवाह का नया डेस्टिनेशन बनने लगी हैं गोशालाएं

  • पिछले वर्षों में मैरिज डेस्टिनेशन के रूप में गोशालाओं की ओर से रुख होने लगा है। हाल ही में अंबानी परिवार से अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की सगाई के बाद दोनों ने नाथद्वारा स्थित गोशाला में जाकर गो पूजन किया था।
  • नंदगांव के निकट रायपुर निवासी जस्सीराम जोशी ने अपने पुत्र के विवाह में गोशाला आकर रस्में करवाईं। विवाह की पत्रिका में भी एक विशेष कार्यक्रम के रूप में गोपूजन का उल्लेख किया।
  • हरियाणा में पानीपत के निकट माता भगवती देवी गोशाला प्रसादपुर में कुछ वर्ष पूर्व चार आदर्श विवाह हुए थे। नरवाना के हिसार रोड पर राधे श्याम गोशाला में जाने-माने बिजनेसमैन कैलाश गोयल ने अपने बेटे अंशुल की शादी और प्रीतिभोज किया था। इंदौर के निकट ग्राम आशापुरा के योगेश उपाध्याय का विवाह भी गोकुलम गोशाला में हुआ था।
  • आसपास की 25 गोशालाओं को भेजा निमंत्रण

विवाह समाराेह में आसपास के 25 गोशालाओं के गोपालकों को भी निमंत्रण दिया । गाय के गोबर से बनी विशेष कुटियाओं में मेहमान ठहराया गया। मेहमान भी बोल पड़े कि यह स्वर्ग का दूसरा रूप लग रहा है। मिठाइयां में केवल गाय के दूध व घी का उपयोग किया गया।

धूम मचा रही है गीतकार-संगीतकार प्रवीण भारद्बाज की नई पेशकश ‘मोहब्बत तुम्हारी’

0

मुम्बई। हिंदी गीतों की दुनिया में एक अनूठे हस्ताक्षर के रूप में अपनी पहचान रखने वाले गीतकार और संगीतकार प्रवीण भारद्वाज अपनी नई और सुरीली पेशकश के साथ हाज़िर हैं. इस गीत का शीर्षक ‘मोहब्बत तुम्हारी’ जिसे लिखने के अलावा इसे स्वरबद्ध करने का श्रेय भी प्रवीण भारद्बाज को जाता है.
‘मोहब्बत तुम्हारी’ को सुरीली आवाज़ में शंकर भट्टाचार्यजी ने सजाया है और इस म्यूज़िक वीडियो को डायरेक्ट‌ किया है इरफ़ान इसाक‌ ने. इस गाने के कोरियोग्राफर ली हैं, वहीं डीओपी गिफ्टी मेहरा हैं. गाने में लीड‌‌‌ एक्टर‌ के तौर पर‌ आसिफ खान और जस भालसे की रोमांटिक जोड़ी ने अपनी पुरज़ोर अदाकारी से चार चांद लगा दिये हैं. इस गीत को निर्मित किया है प्रखर भारद्वाज और नजमा खान ने एवं प्रस्तुतकर्ता हैं ‘सानवी एंटरटेनमेंट’.
म्यूज़िक वीडियो ‘तुम्हारी मोहब्बत’ के डायरेक्टर इरफ़ान इसाक‌ की‌ तारीफ़ करते हुए गीतकार और संगीतकार प्रवीण भारद्वाज़ कहते हैं कि इरफ़ान ने‌ जिस तरह से इस म्यूज़िक‌ वीडियो को डायरेक्ट किया है, वो बहुत ही काब़िल-ए-तारीफ़ और दिल को छूने वाला है. बिना किसी तड़क-भड़क‌ के उन्होंने बड़े ही नैचुरल तरीके से इस गाने को पेश किया है. उन्होंने मेरे बोल और संगीत के साथ पूरी तरह से न्याय किया है.
एक कपल के तौर पर आसिफ ख़ान और जस भालसे ने गाने के अनुरूप छोटे शहर के कपल के तौर पर उम्दा अभिनय किया है और गाने में दोनों की जोड़ी बहुत निखर कर आई है. प्रवीण भारद्बाज कहते हैं, “दोनों का अभिनय क़ाबिल-ए-तारीफ़ है. यह है संवेदनशील गाना है और गाने के तमाम जज़्बातों को दोनों कलाकारों ने बख़ूबी पेश किया है.


उल्लेखनीय है कि प्रवीण भारद्वाज ने एक गीतकार के तौर पर एक बेहद हिट गीत ‘उसने‌ बोला प्रेम छे’ से शुरुआत की थी, जो गोविंदा स्टारर फ़िल्म ‘जिस देश म गंगा रहता है’ का गाना है. अपने पहले ही लिखे गाने के हिट होने के बाद प्रवीण भारद्वाज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक से बढ़कर एक हिट गाने लिखकर फ़िल्मी गीतों की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई. बाद में उन्होंने लफ़्ज़ों की जादूगारी दिखाते हुए महेश खट्टर की कई फ़िल्मों जैसे कि गुनाह, साया, इंतेहा, फुटपाथ जैसी क‌ई फ़िल्मों के लिए हिट गाने लिखे. इसके अलावा उन्होंने आंखें, जाँनशीन, चॉकलेट जैसी फ़िल्मों के लिए भी गाने लिखे और बाद में उन्होंने‌ संगीतकार‌ के तौर पर‌‌‌ भी क‌ई सुरीले गीत दिये.
फ़िल्मी गीतों के अलावा प्रवीण भारद्वाज ने सोनी टीवी के म्यूजिक एलबम ‘तेरा मेरा प्यार’ के सभी गीत लिखे और इस एलबम के सभी गाने हिट साबित हुए. ग़ौरतलब है कि सालों बाद रिलीज़ किये गये इस एलबम का रिक्रिएटेट वर्जन भी लोगों द्वारा बहुत पसंद किया गया. अपने डेढ़ हज़ार गीतों के करियर में प्रवीण भारद्वाज ने रोमांटिक गाने से लेकर हर तरह के भावों को व्यक्त करनेवाले गाने लिखे और एक सशक्त गीतकार के साथ-साथ एक‌ बढ़िया संगीतकार के रूप में अपना जलवा दिखाया.
एक‌ गीतकार और संगीतकार के तौर पर हमेशा मशरूफ़ रहनेवाले प्रवीण भारद्वाज अपने आने वाले गीतों के बारे में कहते हैं, “मैं अपने आने वाले गानों के बारे में फ़िलहाल कोई खुलासा नहीं कर पाऊंगा, लेकिन मैं इतना ज़रूर कह सकता हूं कि हर महीने आपको मेरे 10-12 गाने ज़रूर सुनाई देंगे जो विभिन्न मूड्स के‌ होंगे और हमेशा की तरह सुरीले होंगे.

महा मुंबई मेट्रो ने मेट्रो लाइनों 2 ए और 7 पर परिचालन घंटे बढ़ाने का फैसला किया

0

महा मुंबई मेट्रो ने मेट्रो लाइनों 2 ए और 7 पर परिचालन घंटे बढ़ाने का फैसला किया

मुंबई। महा मुंबई मेट्रो ने मेट्रो लाइनों 2 ए और 7 पर परिचालन घंटे बढ़ाने का फैसला किया है और 22.09 बजे अंतिम ट्रेन के प्रस्थान के बजाय परिचालन समय को 22.30 बजे तक बढ़ाने के लिए दोनों लाइनों पर दो अतिरिक्त सेवाएं शुरू की जाएंगी। इन अतिरिक्त मेट्रो सेवाओं को 14.02.2013 से शुरू करके दो महीने के लिए चलाने का निर्णय लिया गया है।
एक ट्रेन अंधेरी पश्चिम से दहिसर पूर्व को 22.20 और 22.30 बजे (दो सेवाएं) और दूसरी ट्रेन 22.20 और 22.30 बजे गुंदवली से दहाणुकरवाड़ी वाया दहिसर पूर्व (दो सेवाएं) को चलेंगी।
ज्ञात हो िक फेज-2 सेवाओं के चालू होने के बाद सेवाओं की संख्या और परियोजना लाइनों की पूरी लंबाई दोनों में वृद्धि हुई है।
विभिन्न गंतव्यों के लिए अंतिम ट्रेनों का विवरण इस प्रकार है:
अंधेरी पश्चिम के लिए गुंदवली से अंतिम ट्रेन – 21:30 बजे। गुंदवली से दहाणुकरवाड़ी के लिए अंतिम ट्रेन – 22:30 बजे। गुंदवली के लिए अंधेरी पश्चिम से अंतिम ट्रेन – 21:30 बजे। दहिसर पूर्व के लिए अंधेरी पश्चिम से अंतिम ट्रेन – 22:30 बजे। अंधेरी पश्चिम के लिए दहिसर पूर्व से अंतिम ट्रेन – 22:03 बजे। दहिसर पूर्व से गुंदवली के लिए अंतिम ट्रेन – 22:08 घंटे। दहिसर पूर्व से दहाणुकरवाड़ी के लिए अंतिम ट्रेन – 23:11 बजे चलेगी।
एमएमआरडीए के महानगर आयुक्त एस वी आर श्रीनिवास ने बताया िक “एमएमएमओसीएल ने यात्रियों की सुविधा के लिए मेट्रो सेवाओं के समय को बढ़ाने का फैसला किया है। वर्तमान में हमारे पास 28 मेट्रो रेक हैं जो दोनों लाइनों को संचालित करने के लिए पर्याप्त हैं। हम इन अतिरिक्त सेवाओं के प्रति यात्रियों की प्रतिक्रिया का अवलोकन करेंगे, और यदि आवश्यक हुआ तो हम पीक आवर्स के दौरान सेवाओं को बढ़ाने के लिए कॉल करेंगे।

गोबर बेचकर चरवाहे ने खरीदी खुद की जमीन

0

गोबर बेचकर चरवाहे ने खरीदी खुद की जमीन, योजना ने बदल दी मोहितराम की किस्मत

गोधन न्याय योजना किस कदर आम लोगों के जीवन में खुशियां ला रही है। इसकी बानगी चरवाह मोहित खुद है। मेहनत और लगन से मोहित ने गोबर बेचकर जमीन खरीदने का सपना पूरा किया है।

रायपुर। कुछ सालों पहले शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि गोबर भी किसी का जीवन बदल सकता है। लेकिन छत्तीगढ़ में गोधन न्याय योजना के लागू होते ही कई लोगों के जीवन में सुखद परिवर्तन देखने को मिल रहा है। यहां गौठान समितियां आर्थिक रूप से सशक्त तो बन ही रही हैं, बल्कि आम ग्रामीणों और गोधन की सेवा से जुड़े चरवाहों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आया है। गोबर से कंडे बनाने तक सीमित रहने वाले चरवाहों के भाग्य भी इस योजना से खुलने लगे हैं। धमतरी जिले के ग्राम पोटियाडीह के 61 वर्षीय चरवाहे मोहित ने गोबर बेचकर जमा की राशि से अपने जमीन खरीदने के सपने को पूरा कर लिया। मोहितराम यादव ने बताया कि लगभग ढाई साल पहले तक वह गोबर से कंडे बनाकर उसका उपयोग घरेलू ईंधन के तौर पर करते थे। बचे हुए कण्डों को वे औने-पौने दाम में बेच दिया करते थे। गोधन न्याय योजना के लागू होने से प्रतिदिन गोबर बेचकर उन्होंने एक लाख से अधिक की राशि अर्जित कर ली। जब से गोधन न्याय योजना आई है तब से उनका भाग्य चमक उठा है।

उन्होंने उत्साहित होकर ठेठ बोली में कहा कि- हमर सरकार हमरे मन असन रोजी-मजदूरी करके गुजारा करने वाला मन बर ए योजना ल बनाय हवै..। कभू नई सोंचे रेहेन कि गउठान म गोबर बेच के हमर जिंदगी संवर जाही…! मोहितराम ने बताया कि पोटियाडीह में गौठान बनने के बाद से वह रोजाना औसतन 50 किलोग्राम गोबर बेचा करते हैं, जिससे उनकी चरवाहे के काम के अतिरिक्त 100 रूपए प्रतिदिन की कमाई हो जाती है। अब तक उन्होंने 550 क्विंटल गोबर बेचकर एक लाख 10 हजार रूपए की आय अर्जित की है। उन्होंने ने बताया कि बड़े बेटे की शादी के बाद उन्होंने घर बनाने की सोचा। उन्होंने जमा पूंजी से गांव में ही 14 डिसमिल प्लॉट खरीदने का सौदा कर लिया, लेकिन रजिस्ट्री के लिए एक लाख से अधिक राशि लगने का पता चला तो उनकी चिंता बढ़ गयी। फिर उनकी पत्नी द्रौपती ने शासन से गोबर बेचने से मिली राशि की याद दिलाई।
फिर क्या था, जमा राशि को निकालकर मोहितराम ने जमीन की तत्काल रजिस्ट्री करा ली। जमीन खरीद कर मोहितराम और उनका परिवार बेहद खुश हैं। श्रीमती द्रौपती ने बताया कि वह गौठान समिति की सक्रिय सदस्य हैं। उनके घर में 8 गाय-भैंस, 26 बकरे-बकरियां और लगभग 32 मुर्गे-मुर्गियां हैं। कल तक मुश्किल से जीवनयापन करने वाले  यादव परिवार के जीवन में गोधन न्याय योजना ने खुशियों के नये रंग भरे हैं इसके लिए उन्होंने राज्य सरकार का आभार जताया है।

सरकार दे रही प्रति गाय 2.73 रुपये, गायों तक पहुंच रहे सिर्फ 83 पैसे

0

सरकार दे रही प्रति गाय 2.73 रुपये, गायों तक पहुंच रहे सिर्फ 83 पैसे, गायें बनी असहाय

हिसार। गोसेवा आयोग के अनुसार प्रदेश की 600 पंजीकृत गोशालाओं में पांच लाख गायें हैं, प्रदेश सरकार आयोग के जरिये हर साल 50 करोड़ रुपये गोशालाओं को अनुदान देती है। गोशाला संचालकों के अनुसार वर्तमान में प्रदेश की गोशालाओं में 16.50 लाख गोवंश है। दूध से आय और समाजसेवियों की मदद के बाद भी एक गाय पर रोजाना 130 से 150 रुपये खर्च आता है।

गोवंश संरक्षण के लिए संकल्पबद्ध मनोहर सरकार ने गायों की सुरक्षा और उनके संवर्धन के लिए अपने पहले कार्यकाल में गोसेवा आयोग का गठन किया था। सरकार आयोग के माध्यम से 600 पंजीकृत गोशालाओं को आर्थिक मदद देती है। लेकिन हकीकत यह है कि सरकार प्रति गाय प्रति दिन के हिसाब से 2.73 रुपये दे रही है, लेकिन गायों के पास सिर्फ 83 से 85 पैसे ही पहुंच रहे हैं। इसी पैसे से गोशाला संचालकों को गायों के खाने, रहने और इलाज का खर्च उठाना पड़ रहा है। गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्रवण कुमार गर्ग ने बताया कि प्रदेश की 600 पंजीकृत गोशालाओं में पांच लाख गायें हैं। प्रदेश सरकार की ओर से हर वर्ष 50 करोड़ रुपये गोशालाओं को दिए जाते हैं। इस हिसाब से एक गाय के हिस्से में रोजाना के 2.73 रुपये आते हैं। वहीं हिसार के बालसमंद में चलने वाली गोशाला के प्रधान अनिल दत्त ने बताया कि प्रदेश की गोशालाओं में गोवंशों की संख्या 16.50 लाख से ज्यादा है। इसलिए एक गाय के हिस्से में 83 से 85 पैसे ही आते हैं। गाय के संरक्षण और भरण-पोषण के नाम पर यह सरकारी अनुदान केवल नाममात्र है।
गोशाला में रखी जा रही एक गाय पर रोजाना औसतन 130 से 150 रुपये खर्च हो रहे हैं। सरकार को प्रति गाय 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से अनुदान देना चाहिए। सिरसा की केलनियां नंदीशाला के प्रधान पवन बंसल ने बताया कि वेटरनरी सर्जन की ओर से गायों की संख्या की रिपोर्ट आयोग को भेजी जाती है। इसके बाद आयोग गोशाला को अनुदान राशि जारी करता है।

एक गाय के खाने का खर्च ही 180 रुपये
सिरसा की श्री गोशाला के महासचिव प्रेम कुमार कंदोई ने बताया कि एक गाय दिन में करीब 10 से 13 किलो चारा खाती है। चारे में घास, तूड़ी, ज्वार और दालों के छिलके मिलाए ते हैं। इस समय सूखी तूड़ी का दाम भी कम से कम 10 से 12 रुपये किलो है। दुधारू गायों को करीब चार किलो खल या चूरी भी डाली जाती है, जो कि औसतन 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मिलता है।
इस प्रकार एक गाय पर दिन में करीब 180 रुपये खर्चा आता है। इसके अलावा गायों की सेवा के लिए कर्मचारी भी रखने पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि दूध आदि से होने वाली आय और समाजसेवियों की मदद को भी जोड़ लिया जाए तब भी एक गाय पर रोजाना 130 से 150 रुपये का खर्च है।

 

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की भूमिका निभाएंगे अन्नू कपूर, बायोपिक ‘मैं दीनदयाल हूँ’ का मुहूर्त सम्पन्न

0

मुम्बई। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि के अवसर पर मुम्बई में हिन्दी फ़िल्म ‘मैं दीनदयाल हूँ’ का मुहूर्त सम्पन्न हुआ। सबसे पहले दीनदयाल उपाध्याय की एक तस्वीर पर अन्नू कपूर सहित फ़िल्म के निर्माता, निर्देशक और पूरी टीम ने श्रद्धासुमन अर्पित करके उन्हें याद किया। अन्नू कपूर ने कुछ लाइन कहकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि अर्पित की। “इस सदन में मैं अकेला ही दिया हूँ, मत बुझाओ जब मिलेगी रौशनी मुझसे मिलेगी।पांव तो मेरे थकन ने छील डाले, बस विचारों के सहारे चल रहा हूँ।”
अन्नू कपूर ने क्लैप देकर फ़िल्म का मुहूर्त किया, उसके बाद निर्देशक पवन केके नागपाल, निर्माता रंजीत शर्मा, सह-निर्माता हरीश रेड्डी नगलमदका, कार्यकारी निर्माता राजीव धमीजा और लेखक राशिद इकबाल ने फ़िल्म के संदर्भ में मीडिया से बात की। टीजीएम फिल्म्स के बैनर तले बन रही इस फ़िल्म की शूटिंग उत्तर प्रदेश में मई से शुरु होगी।


बेजोड़ अभिनेता अन्नू कपूर ने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक राजनीतिक दार्शनिक थे, वह केवल एक राजनेता नहीं थे। देश और मातृभूमि के प्रति उनका बेमिसाल योगदान रहा है। उनके विचार, उनके दर्शन बहुत बड़े थे। उनके जीवन पर फ़िल्म बनाना निर्माता, निर्देशक, लेखक सभी के लिए बहुत हिम्मत और बहादुरी का काम है। इस फ़िल्म की टीम के पास वीरता, हिम्मत, उत्साह, लगन देखकर संघ ने कहा कि तुम आगे बढ़ो हम तुम्हारे साथ हैं। अब मीडिया का साथ चाहिए और मीडिया के माध्यम से जनता का साथ चाहिए। लेखक राशिद इकबाल जी ने मजबूत पकड़ के साथ इस सब्जेक्ट को पेपर पर उतारा है, यह पॉलिटिकल थ्रिलर तो है ही, साथ ही इसमें बहुत से सवाल उठाए गए हैं। क्या पंडित जी का जाना एक राजनीतिक साजिश थी या प्राकृतिक मौत थी? इसका जवाब गुजरे हुए समय के तमाम राजनीतिज्ञों को देना होगा। दीनदयाल जी ने अपना सब कुछ अपनी मातृभूमि के लिए निस्वार्थ रूप से समर्पित किया था ताकि उनका देश सम्पन्न हो सके। उन्होंने देश के हर नागरिक के हित और कल्याण के बारे में सोचा। हम अगर उनकी मौत के रहस्य को नहीं सुलझाएंगे तो हम उनके साथ अन्याय करेंगे।
हम सब पर इस फ़िल्म को लेकर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है कि हमें सच्चाई भी दिखानी है और इतनी कड़क रूप से, रोमांचक ढंग से दर्शाना है कि आप अपनी कुर्सी छोड़कर एक मिनट के लिए भी न जा सकें।”
निर्देशक पवन केके नागपाल ने कहा कि जब लेखक राशिद इकबाल ने इस फ़िल्म की कहानी मुझे सुनाई तो मुझे तुरंत लगा कि इस विषय पर जल्द फ़िल्म बननी चाहिए। स्क्रिप्ट सुनते ही दीनदयाल उपाध्याय की भूमिका निभाने के लिए मेरी ज़ुबान से जिस ऎक्टर का नाम निकला वह थे अन्नू कपूर। मुझे लगा कि अन्नू कपूर जितने बेहतरीन ढंग से इस किरदार को जी सकते हैं वह कोई और नहीं कर सकता। वह इतने अनुभवी अभिनेता हैं, आप फ़िल्म के पोस्टर में देखें कि उन्होंने खुद को कैसे दीनदयाल उपाध्याय के रूप में ढाल लिया है। यह हम सब के लिए सौभाग्य की बात है कि उन्होंने यह टाइटल रोल निभाने की हामी भरी। दीनदयाल जी ने जो नीतियां बनाई थीं, उस समय वह काम जो वह करना चाहते थे, वह कहीं न कहीं अधूरे रह गए और जो आगे जाकर हो रहे हैं। उनकी मृत्यु भी एक सस्पेंस, मिस्ट्री है। हम उसी रहस्य को जानने की कोशिश कर रहे हैं, जो इस फ़िल्म में दर्शाया जाएगा।
वहीं फ़िल्म के निर्माता रंजीत शर्मा ने बताया कि जब आरएसएस के इंद्रेश कुमार से मैंने ज़िक्र किया कि मैं दीनदयाल उपाध्याय पर फ़िल्म बनाना चाहता हूँ तो उन्होंने मुझे हौसला दिया और कहा कि आप बिलकुल बनाएं। उनका आशीर्वाद पाने के बाद हमने इस प्रोजेक्ट को शुरू करने का सोचा।
लेखक राशिद इकबाल ने बताया कि दीनदयाल जी की मौत का रहस्य अब तक नहीं सुलझाया जा सका है। उसी विषय पर यह फ़िल्म लिखी है। जब अन्नू कपूर जी इस रोल के लिए फाइनल हुए तो मुझे बड़ी खुशी हुई कि वह एक ऐसे ऎक्टर हैं जो उस आदमी को भी अपनी अदाकारी से जीवित कर देंगे जो हमारे बीच से चले गए हैं। अन्नू कपूर का हां कहना हम सबके लिए बड़ी हिम्मत देने वाली बात रही। मुझे लगता है कि अन्नू कपूर 1 घण्टा 45 मिनट तक सिनेमाघर में किसी को अपनी कुर्सी से हिलने नहीं देंगे। हमारे पीछे जो ताकत खड़ी रही वह हैं रंजीत शर्मा, इस फ़िल्म के निर्माता। संघ के बड़े लोगों के साथ अच्छी मीटिंग हूई। मैंने इस कहानी में दीनदयाल उपाध्याय की जीवनी के साथ उनकी मौत के रहस्य को पिरो दिया है। उनकी बॉयोपिक भी चल रही है और उनकी मौत की मिस्ट्री भी रोमांचक रूप से जारी है।

ईस्लापुर पुलीस ने मन मे गुस्सा रखकर शिवणी जिल्हा नांदेड के गौरक्षक युवाओ को गैरकानूनी तरीके से पीटा

0

शिवणी तालुका किनवट जिल्हा नांदेड के तेलंगणा सिमा पर है, यहाँ पुलीस खुद कारवाई करती नहीं है. काफी पत्रचार के बादभी पुलीस ने खुद कारवाई नहीं की हैं.

फिरभी दि 01 फरवरी 2023 को बजरंग दल के गोरक्षक कार्यकर्ता को तल्लारी गांव से गोवंश कत्तलखाना जारहे हैं, ऐसी जानकारी मिली थी, हमने तुरंत मा पुलीस अधिक्षक श्री कोकाटेजी और सहाय्यक पुलीस निरीक्षक श्री रघुनाथ शेवाळेजी को जाणकारी दी, पर शेवाळेजी को पहुचने मे देर होते देखकर मवेशीयो की गाडीयां गोरक्षकोने सिर्फ रोककर रखी थी. शेवाळेजी पहुचतेही बोले आपको गाडी रोखनेका अधिकार नही हैं. आप गाडी नहीं रोख सकते हो, आपके केस करनी चाहिए.

तब गोरक्षकोने पुलीस इन्स्पेक्टर को काफी समझाने की कोशीश की, ईन दो गाडी मे से MH 26 BE2128 ईस गाडीपर पहलेभी तामसा पुलीस स्टेशन मे गुन्हा दाखील हैं, और ईसी गाडी का मालीक शेख पाशा शेख जमाल कुरेशी पर 2 गुन्हे दाखील हैं. ईनकी आप जांच करीये पर शेवाळेजी ने एक नहीं सुनी कसाईयो को भागने दिया और सभी गोरक्षकोको पुलीस गाडी मे बंद कर दिया. वहां से 7-8 कसाई भाग गये. फिरभी शेवाळेजी सुनने के विचार मे नहीं दिखे तब किरण बिच्चेवार नांदेड विभाग गोरक्षा प्रमुख, विश्व हिंदु परिषद देवगीरी प्रांत ईन्होने मा श्री सुधिरभाऊ मुनगंटीवार वन मंत्री को और पुलीस महासंचालक को जाणकारी दी, तब कारवाई की गयी पर यह सब करने के लिये 7 घंटे का समय लगा था. शाम 5 बजे को कसाईयो के खिलाफ fir register किया गया.

आखरीतक पुलीस की कारवाई करणे की मनशा नहीं थी, मजबुरन कसाईयो के खिलाफ कारवाई करनी पडी थी. पर दि 1 फरवरी को सभी गोरक्षको को जबरन नोटीस थमाकर आजके बाद आप कोईभी गोवंश की गाडी नहीं पकडोगे ऐसे बोलकर नोटीस दी हैं.

दि 04 फरवरी को शिवणी के मेले मे तल्लारी गांव से कुछ युवा शराब पिकर माहोल बिघाड रहे थे, तब शिवणी के मेले के समीती के लोगोने समझाने की कोशीश की, पर शराब मे धुंद युवा लढाई झगडे पर ऊतरे ऊस झगडे मे लगभग 60-70 लोग थे, पर शेवाळेजी ने जो गोरक्षक कार्यकर्ता हैं, ऊनको ही लक्ष करके दि 05 फरवरी 2023 को सुबह 10 बजे सिर्फ 6 लोगो को पुलीस स्टेशन बुलाया, और जैसे ही यह कार्यकर्ता पुलीस स्टेशन पहुचे वैसे ऊनके कपडे ऊतारकर गैरकानुनुनन जिस गांव के गोवंश पकडे गये ऊसी गांववालो के सामने जानबुजकर पिटाई की.

पिटाई के समयपर जो 3 गोरक्षक हमेशा कानुन को ध्यान मे रखकर गोरक्षा करते हैं, ऊनको ” तुमको बार बार बोलनेपर भी, तुम गोवंश की गाडीयाॅं क्यु पकड रहे हो ” ऐसा बोल कर बाकी युवाओ से ज्यादा गैरकानुनी पिटाई की हैं.

ईस प्रकरण मे विश्व हिंदु परिषद ने जबतक सहाय्यक पुलीस इन्स्पेक्टर को निलंबित नहीं किया जायेगा तब तक हम शांत नहीं बैठेंगे ऐसा कहा हैं

Cow Hug Day : भारतीय पशु कल्याण बोर्ड ने 14 फरवरी को ‘काउ हग डे’ मनाने की अपील वापस ली

0

Cow Hug Day : भारतीय पशु कल्याण बोर्ड ने अपने उस आदेश को वापस ले लिया है जिसमें 14 फरवरी को ‘काउ हग डे’ मनाने की बात कही गयी थी। वेलेंटाइन डे मनाए जाने को लेकर हर साल देश में एक तबका विरोध करता हुआ दिखाई देता है। कुछ लोग इस दिन को माता-पिता को समर्पित करने की बात करते हैं तो कुछ वेलेंटाइन डे को पश्चिमी सभ्यता की रिवायत बता कर नकारने की बात करते हैं। लेकिन इस बार भारतीय पशु कल्याण बोर्ड ने एक ऐसा आदेश दे दिया था जिसकी चर्चा हर तरफ होने लगी थी।

बोर्ड के आदेश में क्या था ?

पशुपालन और डेयरी विभाग के तहत आने वाले भारतीय पशु कल्याण बोर्ड ने एक नोटिस जारी करते हुए 6 फरवरी, 2023 को अपील जारी की थी।इस अपील में लोगों से 14 फरवरी को ‘काउ हग डे’ मनाने को कहा गया था। इस नोटिस में कहा गया था कि सभी गाय प्रेमी गो माता की महत्ता को ध्यान में रखते हुए और जिंदगी को खुशनुमा और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण बनाने के लिए 14 फरवरी को काउ हग डे मना सकते हैं। हालांकि बोर्ड ने 14 फरवरी को ‘काउ हग डे’ मनाने की अपनी अपील शुक्रवार को वापस ले ली है। भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) ने शुक्रवार को यह आदेश जारी किया है।

योग दिवस की तरह ही भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के सहयोग से मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ‘काउ हग डे’ मनाने की पहल की थी। हालाँकि बोर्ड द्वारा इस फैसले को वापस लेने के पीछे के कारण का खुलासा अब तक नहीं हो सका। बता दें कि भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) भारत सरकार का एक संवैधानिक निकाय है, जिसे पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (पीसीए एक्ट) के अंतर्गत बनाया गया था।

इससे पहले बोर्ड की तरफ से की गई अपील में कहा गया था, “हम सब जानते हैं कि गाय भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। गाय हमारे जीवन को बनाए रखने के अलावा पशुधन और जैव विविधता का प्रतिनिधित्व भी करती है। माँ के समान पोषक प्रकृति और दूध देने के कारण गायों को कामधेनु और गौमाता के नाम से जाना जाता है। अपील में आगे लिखा है कि पश्चिमीकरण के कारण हमने अपनी संस्कृति और वैदिक परंपराओं को भुला दिया है।”

अपील में यह भी कहा गया था, “गाय के उपकारों के बदले उसे गले लगाने से गायों के साथ हमारा भावनात्मक जुड़ाव होगा। इसलिए गाय से प्रेम रखने वाले लोगों को 14 फरवरी को COW HUG DAY मनाना चाहिए। इस दिन को मनाते हुए हमें मानव जीवन पर गाय के उपकारों और गाय की महत्ता को याद करना चाहिए। ताकि हमारा जीवन सकारात्मक और खुशहाल बना रहे।”