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कुरैशी समाज ने गोकशी नहीं करने का दिया आश्वासन

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कुरैशी समाज ने गोकशी नहीं करने का दिया आश्वासन

दमोह के कसाई मंडी क्षेत्र में गोकशी की शिकायतों के बीच कुरैशी समाज ने गलत काम न करने का

Seeing the complaints of Gokshi, the Qureshi society took oath, will never do any wrong thing

संकल्प लिया है। पुलिस को भरोसा दिलाया गया कि कोई गलत काम करेगा तो वह खुद उसकी शिकायत करेंगे।

दमोह शहर के कसाई मंडी क्षेत्र से लगातार गोकशी की शिकायतें मिल रही थी। इसके चलते दो दिन पहले विवाद भी हुआ था। पुलिस ने तब कुछ लोगों पर कार्रवाई की थी।

इस कार्रवाई के बाद कुरैशी समाज के लोगों ने कोतवाली पुलिस को कसाई मंडी में बुलाकर शपथ ली कि अब उनके समाज में इस तरह का कोई भी गलत काम नहीं करेगा। पूर्व पार्षद मुरसलीम कुरैशी ने कसाई मंडी में आयोजित बैठक में समाज के सभी लोगों से ये वचन दिलाया कि वह अब किसी भी तरह का गलत काम नहीं करेंगे। हमेशा पुलिस का सहयोग करेंगे। यदि कोई उनके क्षेत्र में इस तरह का गलत काम करेगा, तो वह सभी मिलकर उसकी शिकायत और जानकारी पुलिस को देंगे।

कोतवाली टीआई विजय सिंह राजपूत ने बताया कि गोकशी की शिकायतें मिल रही थी। इसे लेकर पुलिस अपने स्तर से कार्रवाई कर रही थी, जो सही थी। अब कुरैशी समाज के लोगों ने यह आश्वासन दिया है कि वह इस तरह का कोई भी गलत काम नहीं करेंगे और पुलिस का सहयोग करेंगे। पुलिस ने उनके इस सहयोगात्मक रवैये का स्वागत किया है।

दो दिन पहले ही एक गाय चोरी करने के आरोप में दो पक्षों में विवाद हुआ था। इस विवाद ने दो-तीन घंटे बाद सांप्रदायिक रूप लेना शुरू कर दिया था। गनीमत रही कि समय पर सभी को पुलिस ने तितर-बितर कर दिया। इसके बाद एक पक्ष के साथ पुलिस का कुछ विवाद भी हुआ। पुलिस ने उसके बाद कार्रवाई शुरू कर दी थी।

गौ हत्या को लेकर दो गुट आमने सामने, सैकड़ों लोगों ने मचाया हंगामा

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दमोह। मध्यप्रदेश के जिला दमोह से बड़ी खबर सामने आई है। जहां जिले मे लगातार बढ़ रही गौ कसी और गौ हत्या को लेकर अब समुदाय बिशेष के लोग भी मैदान मे उतर गए है, और कहा है कि अब शहर मे गौ कसी और गौ हत्या बर्दास्त नहीं कि जाएगी। बता दें कि मामला दमोह शहर कि सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र कि कसाई मंडी का है। जहां हमेशा से गौ हत्या तथा गौ कसी के लिए बदनाम कसाई मंडी के कुरैसी समाज यानि समुदाय विशेष के लोगों ने देर रात कोतवाली पुलिस को बुलाकर एक बैठक रखी।
ज्ञात हो कि दमोह कि कसाई मंडी हमेसा से गौ कसी तथा गौ हत्या को लेकर सुर्खियों मे रही है। वही करीब 4 दिन पहले भी दमोह मे गौ कसी तथा गौ हत्या को लेकर शहर कि सिटी कोतवाली थाना मे दो गुट आमने सामने हो गए थे। जिसके बाद जमकर हंगामा हुआ था। वही हंगामा के बाद पुलिस ने कमान संभालकर दोनों को अलग-अलग किया था। जिसके बाद अब कसाई मंडी के निवासी सभी समुदाय विशेष के लोगों ने आगे आकर यह फैसला लिया था। उन्होंने कहा कि अब इस घटना पर हम लोग स्वयं अंकुश लगाएंगे, ताकि दुबारा शहर का माहौल ख़राब न हो।

पाकिस्तान में जन्मे लेखक तारेक फ़तह का निधन, बेटी ने कहा- ‘नहीं रहे हिंदुस्तान के बेटे

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पाकिस्तान में जन्मे लेखक और पत्रकार तारेक फ़तह का सोमवार को निधन हो गया. वह 73 साल के थे.

तारेक फ़तह की बेटी नताशा ने ट्विटर पर इसकी जानकारी दी है.

नताशा फ़तह ने ट्विटर पर लिखा, ” पंजाब के शेर, हिंदुस्तान के बेटे, कनाडा से प्यार करनेवाले, सच बोलने वाले, न्याय की लड़ाई लड़ने वाले. वंचितों की आवाज तारेक फ़तह का निधन हो गया. उन्हें जानने वाले और प्यार करने वाले लोगों के दिलों में उनकी अलख जगी रहेगी.”

तारेक फ़तह कनाडा के नागरिक थे लेकिन वो अपनी पहचान भारत से जोड़कर बताते थे. अपने बयानों की वजह से वो अक्सर चर्चा में रहते थे. कई बार उनके बयानों को लेकर विवाद भी खड़े हुए.

अपना परिचय देते हुए तारेक फ़तह ने एक ब्लॉग में लिखा था , “मैं एक भारतीय हूँ जो पाकिस्तान में पैदा हुआ है. मैं सलमान रुश्दी के बहुत सारे ‘मिडनाइट चिल्ड्रेन’ में से एक हूँ जिसे एक महान सभ्यता के पालने से उठा कर स्थाई शरणार्थी बना दिया गया. मैं इस बात का खुद गवाह हूँ कि किस तरह उनकी उम्मीदों के सपनों को नाकामयाबी के दु:स्वप्न में बदल दिया गया.”
तारेक फ़तह का जन्म 20 नवंबर, 1949 को हुआ था. वो शुरुआत पढ़ने में तेज़ थे.
उन्हें कराची विश्वविद्यालय में बायोकेमेस्ट्री पढ़ने के लिए वज़ीफ़ा दिया गया था.
उसी दौरान उनकी मुलाकात एक शिया युवती नरगिस तपाल से हुई जिनसे उन्होंने चार साल बाद शादी कर ली.
1970 में पढ़ाई करते हुए ही उनकी कराची के एक अख़बार ‘सन’ में नौकरी लग गई.
बाद में वो पाकिस्तान टेलीविजन में प्रोड्यूसर हो गए. इस बीच उन्हें वहाँ की सैनिक सरकार ने विरोध प्रकट करने के लिए दो बार जेल में भेजा.
1978 में उन्होंने पाकिस्तान छोड़ कर सऊदी अरब का रुख़ किया, जहाँ उन्होंने दस सालों तक एक एडवरटाइज़िंग अधिकारी के रूप में काम किया.
1987 में वो वहां से कनाडा जा कर टोरंटो के पास एजेक्स शहर में बस गए. शुरू में वो और उनकी पत्नी मिल कर वहाँ एक ड्राइक्लीनिंग कंपनी चलाते थे. ख़ाली समय में वो सीटीएस टेलीविजन पर मुस्लिम क्रॉनिकल कार्यक्रम भी किया करते थे.

कहार समाज चैरिटेबल ट्रस्ट ने किया संजना कहार को सम्मानित

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संजना को मिली द्वारकामाई चैरिटी संस्था से बधाई

मुंबई। सामाजिक कार्यो के लिए पर्याय बन चुकी संजना कहार को ग्लोबल कहार समाज चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा सम्मानित किया गया।
बता दें कि द्वारिकामाई चैरिटी संस्था के ‘भिक्षा नही शिक्षा’ अभियान को सुचारू रूप से चला कर सर्व समाज के बच्चो को निःशुल्क शिक्षित करने के प्रयास को ध्यान में रखते हुए कहार समाज के अतिविशिष्ट लोगों द्वारा पिछले दिनों संजना कहार को ट्रॉफी व सम्मानपत्र देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर सामाजिक संस्था द्वारिकामाई चैरिटी परिवार के समस्त सदस्यों व पदाधिकारियों की ओर से संजना को बधाई व शुभकामनाएं दी गयी।

चैरिटी संस्था से बधाई

मुंबई। सामाजिक कार्यो के लिए पर्याय बन चुकी संजना कहार को ग्लोबल कहार समाज चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा सम्मानित किया गया।
बता दें कि द्वारिकामाई चैरिटी संस्था के ‘भिक्षा नही शिक्षा’ अभियान को सुचारू रूप से चला कर सर्व समाज के बच्चो को निःशुल्क शिक्षित करने के प्रयास को ध्यान में रखते हुए कहार समाज के अतिविशिष्ट लोगों द्वारा पिछले दिनों संजना कहार को ट्रॉफी व सम्मानपत्र देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर सामाजिक संस्था द्वारिकामाई चैरिटी परिवार के समस्त सदस्यों व पदाधिकारियों की ओर से संजना को बधाई व शुभकामनाएं दी गयी।

Rajasthan – बाड़मेर जिले के पाबूजी राठौड़ गौशाला के संचालक साधु दयालपुरी महाराज ने गौशाला में ही आत्महत्या कर ली

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Barmer: राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक छोटे से गांव दांता में बनी गौशाला में साधु दयालपुरी ने फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया. साधु ने सुसाइड करने से पहले एक वीडियो भी बनाया. साधु ने वीडियो में अपनी मौत का जिम्मेदार 3 लोगों को बताया है. वीडियो में तीनों के नाम लेकर कहा कि उन्होंने मुझे इतना टॉर्चर किया है कि अब मैं परेशान होकर जान दे रहा हूं. ये लोग जेल भेजे जानें चाहिए.
गौशाला में फंदे से लटका मिला साधु का शव
बाड़मेर जिले के ग्रामीण पुलिस थाना क्षेत्र के दांता गांव में शुक्रवार सुबह 5 बजे गौशाला में फंदा लगाकर साधु ने सुसाइड कर लिया. उसके बाद साधु का वीडियो सामने आया तो पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई. थानाधिकारी परबत सिंह ने बताया कि दाता गांव में पाबूजी राठौड़ नाम की गौशाला है. यहां 70 वर्षीय साधु दयालपुरी पिछले 7-8 वर्षों से गौशाला का संचालन कर रहे थे. दयालपुरी गौशाला में ही रहते थे. उनके साथ कुछ स्टाफ भी गौशाला में थे. रात में दयालपुरी सहित अन्य स्टाफ सो गए.थानाधिकारी परबत सिंह ने बताया कि रात में ही साधु दयालपुरी ने गौशाला में टीन सेट पर रस्सी का फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया. सुबह 5 बजे जब गौशाला के स्टाफ ने उठाकर देखा तो साधु दयालपुरी फंदे से लटके हुए थे. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाड़मेर के जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया.
फांसी लगाने से पहले का वीडियो जिसमे संत दयालपुरी जी महाराज ने सारी घटना का ज़िक्र किया है।
गौशाला का अकाउंटेंट सारे कागजात लेकर फरार
साधु दयालपुरी ने सुसाइड से पहले एक वीडियो बनाया था. उस वीडियो में कहा था कि मुझे टॉर्चर किया जा रहा है. वीडियो में 3 लोगों पर आरोप लगाया. वीडियो में साधु दयालपुरी बोल रहे हैं. जय गोपाल, जय गौ माता, मेरा नाम दयालपुरी महाराज है.मैं श्री पाबूजी राठौड़ गौशाला चला रहा हूं. आज बहुत ही दुख भरी खबर हैं. मैं मेरी जिंदगी को समाप्त कर रहा हूं. भरे मन से और प्रेम से जीवन को समाप्त कर रहा हूं. मुझे चेनाराम बेनीवाल और उसकी पत्नी ने इतना टॉर्चर किया है कि मैं आज आत्महत्या कर रहा हूं. गोपाल जोशी गौशाला का अकाउंटेंट है. जिस पर मैंने बहुत भरोसा किया था. लेकिन वो मेरी गौशाला के सभी डॉक्यूमेंट लेकर फरार हो गया हैं. उसको 2 दिन हो गए हैं व डॉक्यूमेंट लेकर फरार हो चुका है. इसका मास्टरमाइंड चेनाराम और उसकी पत्नी है. मैं चाहता हूँ मुझे टॉर्चर करने वाले ये लोग जेल जाएं.
पुलिस मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश में जुटी
मेरे पूजनीय 1008 प्रताप पुरी जी को मैं कहना चाहता हूं. जैसा अभी गौ माता को रखा है. वैसे आगे रखें, मेरा डॉक्टर है जसवंत सिंह जो बड़े भाव के साथ गौसेवा कर रहा है. इस वीडियो में उन्होंने यह भी बताया कि कुछ लोगों का हिसाब- किताब करना है. कुछ लोगो को रुपये भी देने हैं. वीडियो के आखिर में कहते नजर आ रहे हैं. कि मैं सुसाइड कर रहा हूं क्योंकि में बहुत परेशान हो चुका हूं. बाड़मेर डीएसपी आनंद सिंह राजपुरोहित ने बताया कि साधु दयालपुरी के घरवालों की रिपोर्ट पर धारा 306 में मामला दर्ज कर लिया गया है. सुसाइड से पहले एक वीडियो भी सामने आया है. वीडियो में 3 लोगों के ऊपर टॉर्चर करने को परेशान करने का आरोप लगाते हुए मरने की वजह बताई है. तीनो लोगो की तलाश जारी हैं. सुसाइड करने वाले साधु दयालपुरी सरणू गांव के रहने वाले थे. पहले वे ड्राइवर थे ड्राइविंग छोड़कर तारातरा मठ में सन्यासी बन गए. इसके बाद से 7-8 सालों से पाबूजी राठौड़ गौशाला का संचालन कर रहे थे. इस गौशाला में करीब एक हजार गौवंश मौजूद हैं.

महिलाओं की राजनीति में बाधा बनते सरपंचपति

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महिलाएं भारत की आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं। महिलाएं न केवल मानव जाति को बनाए रखने में उनके महत्व के कारण बल्कि सामाजिक-आर्थिक प्रगति में उनके महत्वपूर्ण योगदान के कारण भी सामाजिक संरचना का एक अभिन्न अंग रही हैं। इसके बावजूद, महिलाओं को सामाजिक दृष्टिकोण और सामाजिक प्रथाओं में लिंग-पूर्वाग्रह के कारण भेदभाव का शिकार होना पड़ा है, जिसके परिणामस्वरूप सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में स्थिति और अवसरों की समानता से इनकार किया गया है।
अप्रैल 1993 में, भारत ने संविधान के 73वें संशोधन के कार्यान्वयन के साथ विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया, जिसमें पंचायत राज संस्थानों में आबादी के कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण प्रदान किया गया था। इस संशोधन के माध्यम से, इन संस्थानों के सदस्यों और अध्यक्षों के रूप में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। 1995 तक, पंचायतों में महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी, केरल और मध्य प्रदेश में उच्चतम प्रतिनिधित्व के साथ जहां महिलाओं ने 38% सीटें भरीं (अहमद और अन्य, 2008)। 3 मिलियन प्रतिनिधियों में से 1.3 मिलियन महिलाएँ हैं जो अब पंचायतों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं (भटनागर, 2019)। वर्तमान में, भारत के 20 राज्यों ने अपने संबंधित राज्य पंचायती राज अधिनियमों में प्रावधान किए हैं और महिलाओं के आरक्षण को 50% तक बढ़ा दिया है। इसके अतिरिक्त, ओडिशा जैसे राज्यों ने यह अनिवार्य कर दिया है कि यदि किसी गाँव में अध्यक्ष एक पुरुष है, तो उपाध्यक्ष एक महिला होनी चाहिए (मोहंती, 1995)। महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रावधानों ने जमीनी लोकतंत्र को बदल दिया है और ग्रामीण महिलाओं को अपने अधिकार का प्रयोग करने और ग्राम प्रशासन में शामिल होने की शक्ति प्रदान की है।
जमीनी स्तर की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पितृसत्तात्मक मानसिकता के कारण कम रही है कि महिलाएं घर पर हैं, जहां उनकी जिम्मेदारियां घरेलू काम और बच्चों के पालन-पोषण तक ही सीमित हैं। इस प्रकार महिलाओं के साथ सक्रिय रूप से भेदभाव किया जाता है और चूंकि उनके पास घर में सीमित निर्णय लेने की शक्तियां होती हैं, इसलिए यह मान लेना अवास्तविक है कि उनके पास समुदाय के लिए निर्णय लेने के कई अवसर हैं। 73वें संशोधन द्वारा बदलाव की नींव रखे जाने के साथ ही राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव आया है और महिलाएं अधिक सक्रिय हो रही हैं। निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों ने समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों की स्थिति को मजबूत करके और आवाज न उठाने वालों को सशक्त बनाकर स्थानीय शासन को बदल दिया है। इसके अलावा, वे समाज में अन्य महिलाओं को लैंगिक रूढ़िवादिता को तोड़ने और निर्णय लेने की प्रक्रिया में खुद को शामिल करने के लिए प्रेरित करती हैं।
एक और महत्वपूर्ण भूमिका जो चुनी हुई महिला प्रतिनिधि निभाती है वह है ग्रामीण विकास लाना। वे विभिन्न राजनीतिक बाधाओं से निपटने और अपने समुदायों की भलाई के लिए सर्वोपरि परिवर्तन लाने में सक्षम हैं। महिलाओं को प्रभावी नेता के रूप में जाना जाता है और वे अपने दैनिक कर्तव्यों और प्रशासन में पारदर्शिता और दक्षता लाती हैं। वे अपने समुदाय की जरूरतों को समझते हैं और जागरूकता लाने और समुदाय के सामने आने वाले मुद्दों को हल करने के लिए अच्छी तरह से काम करते हैं। इसलिए, कई मामलों में, अतिरिक्त धन और संसाधनों के लिए कड़ी पैरवी करने जैसी विभिन्न बाधाओं से निपटने के बावजूद, महिला नेता अपने पुरुष पूर्ववर्तियों की तुलना में तेजी से ग्रामीण विकास करती हैं। इसके अलावा, महिलाओं को सामाजिक रूप से प्रतिगामी प्रथाओं जैसे बाल विवाह, पर्दा प्रथा और दहेज प्रथा के खिलाफ उत्पीड़न और भेदभाव से मुक्त समाज बनाने के लिए सामाजिक क्रांति का सही एजेंट माना जाता है।
राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं के प्रवेश के साथ, लोकतंत्र का चेहरा एक प्रतिनिधि लोकतंत्र से एक सहभागी लोकतंत्र में बदल गया है। गांवों में नेतृत्व की भूमिका निभाने वाली महिलाओं के साथ, उन्हें किसी भी प्रकार की जाति-आधारित या लैंगिक हिंसा के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए जाना जाता है। महिलाओं को कल्याणकारी लाभों के प्राप्तकर्ता के रूप में देखने से लेकर उन्हें क्रांति के सफल एजेंट के रूप में शामिल करने तक, महिला सशक्तिकरण पर बहस आगे बढ़ी है। हालाँकि, नेता होने के बावजूद, महिलाओं को कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है जो उन्हें भेदभाव और दुर्व्यवहार के प्रति संवेदनशील बनाती हैं।
हमारे देश में पंचायती राज संस्थाओं की स्थापना से एक महिला को एक अच्छे प्रशासक, निर्णयकर्ता या एक अच्छे नेता के रूप में अपनी उपयोगिता साबित करने का अवसर मिलता है। 73वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 इस संबंध में एक मील का पत्थर है। इससे महिलाओं को आगे आने का मौका मिलता है। विशेषकर महिलाओं को अपने घरों से बाहर निकलकर प्रशासनिक और राजनीतिक क्षेत्र में भाग लेने का अवसर प्रदान कर यह प्रयोग बड़ी सफलता सिद्ध हो रहा है। यह विचार करना होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाओं के अंतर्संबंध की प्रारंभिक अवस्था में ग्राम पंचायती में सुयोग्य महिलाओं का समावेश सामाजिक स्थिति में सुधार और महिलाओं को सशक्त बनाने की योजना बनाने में एक महत्वपूर्ण सहायक उपाय होगा। महिलाएं हमारे देश की आधी आबादी हैं।
दुनिया के इतने बड़े लोकतंत्र में महिलाओं को प्रोत्साहित करना हमारा कर्तव्य है। महिलाओं को उचित दर्जा देने के लिए सरकार, गैर-सरकारी संगठनों और विश्वविद्यालयों को इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। महिलाओं का यह समूह, यदि ग्राम पंचायत स्तर पर प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाता है, तो मजबूती से उठ सकता है और महिलाओं की बेहतरी से संबंधित मुद्दों को संभाल सकता है, निर्णय लेने की प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभा सकता है और बैठक में महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए उपयुक्त सिफारिश कर सकता है। यह महिलाओं के लिए सेवाओं के प्रावधानों और इससे लाभान्वित होने वाले संसाधनों के प्रबंधन पर अधिक नियंत्रण रखने के अवसर पैदा करता है। स्थानीय राजनीति में पुरुषों के साथ प्रतिस्पर्धा करने वाली महिलाओं की अच्छी संख्या, लिंग संबंधी एजेंडा को आगे बढ़ाने को लिंग समानता की दिशा में देखा जाता है।

गौ तस्करी में भाजपा विधायक पुत्र की भूमिका की हो जांच- तृणमूल कांग्रेस

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बंगाल आसनसोल : आसनसोल के राहा लेन इलाके में बने टीएमसी पार्टी कार्यालय में आज पश्चिम बर्दवान तृणमूल कांग्रेस के तरफ से एक संवाददाता सम्मेलन किया गया इस मौके पर यहां पश्चिम बर्दवान जिला तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती मंत्री मलय घटक, प्रदेश सचिव वी शिवदासन उर्फ दासु , पश्चिम बर्दवान जिला तृणमूल कांग्रेस चेयरमैन उज्जवल चटर्जी मेयर विधान उपाध्याय पत्रकारों से मुखातिब हुए नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती ने कुल्टी के भाजपा विधायक डॉ अजय पोद्दार और उनके बेटे केशव पोद्दार को लेकर जो ऑडियो वायरल हुआ है उस ऑडियो को लेकर पत्रकारों के सामने अपनी बातें रखी है ।

उन्होंने कहा कि जो ऑडियो वायरल हुआ है जिसमें भाजपा के ही दो पदाधिकारी विभाष सिंह और कंचन सिन्हा बात करते हुए सुनाई दे रहे हैं उनके वार्तालाप से यह स्पष्ट है कि डॉ अजय पोद्दार के बेटे केशव पोद्दार गौ तस्करी में संलिप्त है और इसका पैसा कुलटी के विधायक तक भी पहुंचता है उन्होंने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए वही मलय घटक ने कहा कि जो आरोप भाजपा के विधायक और उनके बेटे पर लग रहे हैं और टीएमसी द्वारा नहीं लगाया जा रहा बल्कि भाजपा के ही पदाधिकारियों द्वारा लगाए जा रहे हैं ।

उन्होंने भी इसकी जांच की मांग की जब पत्रकारों से यह पूछा गया कि किस एजेंसी द्वारा यह जांच की जानी चाहिए तो मेयर विधान उपाध्याय ने कहा कि जो एजेंसी आज पूरे बंगाल में जांच कर रहे हैं वही एजेंसिया करें लेकिन सच्चाई की तह तक पहुंचे नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती ने कहा कि सोमवार को टीएमसी विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के आयुक्त से मिलेगा और इस मामले की निष्पक्ष तथा सघन जांच करवाने की मांग करेगा।

वहीं दूसरी ओर र कल ही भाजपा की ओर से इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस किया गया था और इन आरोपों को निराधार बताया गया था।

राहुल ने 19 वर्षों के बाद खाली किया सरकारी बंगला, कहा- सच बोलने की मिली सजा

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नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मानहानि के मामले में दोषी ठहराए जाने और सांसद के रूप में अयोग्य घोषित किए जाने के हफ्तों बाद शनिवार को अपना आधिकारिक बंगला खाली कर दिया। जानकारी के मुताबिक, उनका सामान पहले ही उनके आधिकारिक आवास से उनकी मां सोनिया गांधी के घर 10 जनपथ में स्थानांतरित कर दिया गया है।

राहुल गांधी ने कहा- सच बोलने की मिली सजा
सरकारी बंगला खाली करने के बाद, राहुल गांधी ने कहा, ”हिंदुस्तान के लोगों ने मुझे 19 साल के लिए यह घर दिया, मैं उन्हें धन्यवाद देना चाहता हूं, लेकिन अब मुझसे घर छीन लिया गया। आजकल सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ती है। मैं सच बोलने के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हूं।”
क्या है पूरा मामला?
इससे पहले, राहुल गांधी को ‘मोदी सरनेम’ टिप्पणी मामले में सूरत की एक अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद वायनाड के सांसद के रूप में उनकी अयोग्यता के बाद 22 अप्रैल तक उन्हें आवंटित सरकारी बंगला खाली करने के लिए कहा गया था।
पीटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने 14 अप्रैल को अपने कार्यालय और कुछ निजी सामानों को बंगले से अपनी मां सोनिया गांधी के आधिकारिक आवास में स्थानांतरित कर दिया था।
पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि राहुल गांधी ने शुक्रवार शाम बंगले से अपने बचे हुए सामान को हटा दिया है। एक ट्रक को उनके सामान के साथ इमारत से बाहर निकलते देखा गया।
करीब दो दशक से राहुल गांधी बंगले में रह रहे हैं। पीटीआई सूत्रों ने कहा कि अपना कार्यालय बदलने के बाद, वह अपनी मां और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ उनके 10, जनपथ स्थित आवास पर रहने लगे हैं।
सूरत की एक अदालत ने 23 मार्च को गांधी को एक आपराधिक मानहानि मामले में दोषी ठहराया और उन्हें दो साल की सजा सुनाई, जिससे उनकी अयोग्यता हो गई। उन्होंने सूरत की सत्र अदालत में मजिस्ट्रियल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, जिसने सजा को रद्द करने की उनकी अपील को खारिज कर दिया था।
उनकी अयोग्यता के एक दिन बाद, लोकसभा सचिवालय ने गांधी को 22 अप्रैल तक परिसर खाली करने का नोटिस भेजा।

नरेंद्र मोदी के करिश्मे के कारण भाजपा का बीते वर्षों में उदय हुआ है – अजीत पवार

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पुणे, एजेंसी। महाराष्ट्र की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में मचे सियासी घमासान के बीच अजीत पवार ने अहम बयान दिया है। अजीत पवार ने कहा कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के इंतजार करने के बजाय एनसीपी सीएम पद के लिए अभी दावा कर सकती है। एक अखबार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वह 100 फीसदी राज्य का सीएम बनना पसंद करेंगे। अजीत ने कहा, “मैंने सुना था कि जून 2022 से पहले शिवसेना नेतृत्व के खिलाफ अपने विद्रोह से पहले मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नाराज हैं और उनके दिमाग में कुछ चल रहा है।”
अजीत पवार ने खुलासा किया कि 2004 में उनके सहयोगी दिवंगत आरआर पाटिल मुख्यमंत्री बन सकते थे। तब एनसीपी ने अपने सहयोगी कांग्रेस की तुलना में अधिक विधानसभा सीटें जीतीं थी, लेकिन दिल्ली से एक संदेश आया कि उनकी पार्टी को डिप्टी सीएम का पद मिलेगा। अजीत से पूछा गया कि क्या एनसीपी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के लिए दावा पेश करेगी। उन्होंने कहा, “2024 ही क्यों… हम अब भी मुख्यमंत्री पद के लिए दावा पेश करने के लिए तैयार हैं।” जब उनसे पूछा गया कि क्या वह मुख्यमंत्री बनना चाहेंगे। इस पर उन्होंने कहा, “हां, मैं 100 प्रतिशत मुख्यमंत्री बनना चाहूंगा।”
अजीत पवार से पूछा गया कि एनसीपी को डिप्टी सीएम पद से इतना लगाव क्यों है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “साल 2004 में एनसीपी और कांग्रेस ने गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़ा था और एनसीपी ने अधिक सीटें जीतीं। उन्होंने कहा, “हमें 71 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस ने 69 सीटें जीतीं। कांग्रेस समेत सभी ने सोचा कि सीएम एनसीपी से होगा, लेकिन दिल्ली से एक संदेश आया कि एनसीपी को डिप्टी सीएम का पद मिलेगा।”
अजीत पवार ने कहा कि उनके सहयोगी पाटिल को विधानसभा के नेता के रूप में चुना गया था। अगर एनसीपी को शीर्ष पद दिया जाता तो वह 2004 में मुख्यमंत्री बनते। उन्होंने कहा कि बाद में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को एनसीपी से अधिक सीटें मिलीं। स्वाभाविक रूप से कांग्रेस ने मुख्यमंत्री का पद अपने पास रखा।
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें कांग्रेस के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण या शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे के साथ काम करने में मजा आया, जिन्होंने नवंबर 2019 से जून 2022 सीएम पद संभाला। इसके जवाब में अजीत पवार ने कहा कि उन्हें पृथ्वीराज चव्हाण के साथ काम करके मजा नहीं आया, उन्होंने उद्धव के साथ खुशी से काम किया।
अजीत पवार ने एक बार फिर पीएम मोदी की तारीफ भी की। अजीत ने कहा कि नरेंद्र मोदी के करिश्मे के कारण भाजपा का बीते वर्षों में उदय हुआ है। मोदी 2014 और 2019 में लगातार लोकसभा चुनावों में पार्टी को बहुमत दिलाने में कामयाब रहे, जो एक उपलब्धि है। यहां तक कि पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे दिग्गज भी ये कमाल नहीं कर पाए। अजीत से पूछा गया कि मोदी के बाद कौन है, तो बोले की कोई नाम सामने नहीं आता है।

Poonch Terrorist Attack – गृह मंत्री राजनीति में ‘व्यस्त’, आतंकी उठा रहे फायदा

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मुंबई, एजेंसी। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में हमले को लेकर बीजेपी सरकार पर आरोप भी लगाए गए हैं।
शिवसेना (यूबीटी) ने ‘सामना’ के संपादकीय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर निशाना साधा है। इसमें लिखा गया है कि पार्टी के ये बड़े नेता राजनीतिक कार्यों में व्यस्त थे और आतंकवादियों ने इसका फायदा उठाते हुए सेना के एक वाहन पर बम फेंका।
संपादकीय में ये भी कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद भी कश्मीर घाटी में हिंसा जारी है और वहां अब भी शांति नहीं है।
पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट ने ली हमले की जिम्मेदारी
जम्मू-कश्मीर के पुंछ में गुरुवार को एक आतंकवादी हमले के बाद उनके वाहन में आग लग गई और पांच जवानों ने बलिदान दे दिया। ये जवान काउंटर टेररिस्ट ऑपरेशन के लिए तैनात राष्ट्रीय राइफल्स की एक इकाई से थे।
वहीं हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद से ही जुड़े एक आतंकी संगठन पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट ने ली है। संपादकीय में कहा गया, “प्रधानमंत्री पाकिस्तान के साथ युद्ध की भाषा बोलते हैं और जब चीन की बात आती है तो उन्हें गौतम बुद्ध की शांति की शिक्षा याद आती है।”
केंद्रीय एजेंसियां मोदी-शाह का हैं हथियार- सामना
संपादकीय में पीएम और गृह मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा गया है कि जब देश में “मजबूत प्रधानमंत्री और दृढ़ गृह मंत्री” होते हैं और ऐसे में अगर आतंकवादी हमला करने की हिम्मत करते हैं, तो इसमें जरूर कुछ गड़बड़ है। इसमें ये भी लिखा गया है कि केंद्रीय एजेंसियां मोदी-शाह का हथियार हैं और ऐसा लगता है कि आतंकवादी उनसे डरते नहीं हैं।
आतंकी हमले पर सेना की तरफ से क्या बोला गया?
पुंछ में हुए आतंकी हमले के बाद सेना की ओर से भी इसे लेकर जानकारी दी गई। सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट के जवानों को ले जा रहा ये ट्रक राजौरी सेक्टर से गुजर रहा था। तभी अचानक भीमबेर गली और पुंछ के बीच हाइवे पर आतंकियों ने गोलीबारी कर ग्रेनेड से हमला कर दिया। इसमें पांच जवानों ने बलिदान दे दिया।