Home Blog Page 185

सिनेड्रीम्स इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल की घोषणा

0
मुंबई (अनिल बेदाग )फाउंडर और आयोजक अयूब खान द्वारा आज मुम्बई के पीवीआर आइकॉन थिएटर में सिनेड्रीम्स इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल की ऑफिशियल घोषणा की गई। इस अवसर पर फाउंडर व आयोजक अयूब  खान, सय्यद अहमद, निर्माता निर्देशक मेहुल कुमार, ब्राइट आउटडोर मीडिया के डॉ योगेश लखानी, श्याम सिंघानिया, निर्देशक जय प्रकाश, अमित ख़ान राइटर , पराग चापेकर सहित कई गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं।
इस फ़िल्म फेस्टिवल के संस्थापक और ऑर्गनाइजर अयूब  खान हैं, उनके साथ सय्यद अहमद भी जुड़े हुए हैं। ये बिल्कुल नए ढंग का और काफी अलग किस्म का फेस्टिवल है जिसमें फ़िल्म कंपटीशन के लिए हर भाषा, हर अवधि की फिल्मों की एंट्री की जाएगी और विनर को सर्टिफिकेट के साथ कैश प्राइज भी दिया जाएगा।
सबसे खास बात यह है कि इस फ़िल्म फेस्टिवल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में पहलाज निहलानी, श्याम सिंघानिया, गीतकार समीर अंजान, रईस अहमद, जरीना वहाब, कौसर खालिद जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
वहीं इस फेस्टिवल के ज्यूरी सदस्यों में मेहुल कुमार, कोमल नाहटा, संजय मासूम, जितेंद्र वत्स, सुभाष साहू ,पराग चापेकर, राजीव वर्मा, सतलज धीर, सैकत दास, तुषार थोरात , के एस adiyaman , सीमा पहवा, अतुल मोहन और अनिल दुबे का नाम उल्लेखनीय है। आज ही इस फ़िल्म फेस्टिवल की वेबसाइट भी लॉन्च की गई।
फ़िल्म जगत में पिछले 4 दशकों से निर्माता निर्देशक लेखक और डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में काम कर रहे अयूब खान ने कहा कि इस अनूठे फ़िल्म फेस्टिवल का आयोजन मुम्बई के जुहू पीवीआर सिनेमा में 28 और 29 मई 2024 को होगा और 30 मई को अवार्ड दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि वह बचपन से फिल्मों के शौकीन रहे हैं और फ़िल्म को हो वह अपना सब कुछ मानते हैं। फ़िल्म और फ़िल्म मेकर के प्रति इसी प्रेम की वजह से वह इस फ़िल्म महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं जहां अच्छी फिल्मो और उनसे जुड़े अदाकारों, निर्देशक, निर्माता, टेक्नीशियन को सराहेंगे। इस फ़िल्म फेस्टिवल से पैसा कमाना उनका उद्देश्य नहीं बल्कि बेहतर सिनेमा को दर्शकों तक पहुंचाना चाहते हैं, उन्हें बनाने वालों का सम्मान करना चाहते हैं।
यहाँ आए सभी अतिथियों मेहुल कुमार, योगेश लखानी और श्याम सिंघानिया ने अयूब खान के विज़न की प्रशंसा की और अपना पूरा सपोर्ट इस फेस्टिवल को देने का वादा किया। सभी गेस्ट्स ने अय्यूब खान को इस आयोजन के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं दीं। एक्ट्रेस और इन्फ्लुएंसर एकता जैन ने इस लांच इवेंट की एंकरिंग की।

नादिर गोदरेज हुए पीएमएफएआई के लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित  

0

 

मुंबई, 9 फरवरी, 2024 – गोदरेज इंडस्ट्रीज लिमिटेड (जीआईएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक और गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड (जीएवीएल) तथा एस्टेक लाइफसाइंसेज लिमिटेड के अध्यक्ष, नादिर गोदरेज को पेस्टिसाइड्स मैन्युफैक्चरर्स एंड फॉर्म्युलेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (पीएमएफएआई) की ओर से प्रतिष्ठित लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार कल पीएमएफएआई-एसएमएल वार्षिक एग्केम अवार्ड्स (2024) के 5वें संस्करण में प्रदान किया गया, जिसका आयोजन 19वें अंतर्राष्ट्रीय फसल विज्ञान सम्मेलन एवं प्रदर्शनी (आईसीएससीई दुबई 2024) के मौके पर किया गया था।

पीएमएफएआई की स्थापना 1967 में हुई थी और यह कृषि रसायन/कीटनाशक उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाला राष्ट्रीय संघ है। 221 बड़े, मध्यम और छोटे पैमाने के भारतीय एग्रोकेमिकल उद्योग इसके सदस्य हैं। पीएमएफएआई उन प्रौद्योगिकियों में सुधार और नवोन्मेष की वकालत कर कृषि प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने का प्रयास करती है जो किसानों को गुणवत्तापूर्ण फसल सुरक्षा उत्पाद प्रदान करते हैं। पीएमएफएआई ने भारतीय कृषि रसायन (एग्रोकेमिकल) उद्योग में असाधारण उपलब्धियों और योगदान को सम्मानित करने के लिए 2018 में वार्षिक एगकेम पुरस्कारों की स्थापना की थी।

नादिर गोदरेज को दिया गया यह लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार भारतीय एग्रोकेमिकल उद्योग में उनके उत्कृष्ट योगदान और प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने और भारतीय एग्रोकेमिकल उद्योग तथा भारतीय कृषि के विकास में योगदान के उल्लेखनीय प्रयास का सम्मान है।

श्री गोदरेज ने इस सम्मान के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मैं पीएमएफएआई से लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्राप्त कर बेहद सम्मानित महसूस कर रहा हूं। यह पुरस्कार पूरी टीम के सामूहिक समर्पण और अथक प्रयासों का सम्मान है। नवोन्मेषी और वहनीय फसल सुरक्षा समाधान प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता पीएमएफएआई के कृषि प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और सतत विकास को बढ़ावा देने के मिशन के अनुरूप है। मैं इस सम्मान के लिए आभारी हूं और उन सहयोगात्मक प्रयासों से प्रेरित हूं जो हमें इस मुकाम तक लेकर आए हैं।”

एग्रोकेमिकल और सीडीएमओ क्षेत्र के प्रति समूह की प्रतिबद्धता के बारे में उन्होंने कहा, “नवोन्मेष और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता, हमारी समर्पित अनुसंधान एवं विकास इकाइयों से स्पष्ट है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ सहयोग और सक्रिय रूप से जुड़ने की शक्ति में हमारा दृढ़ विश्वास हमें लगातार अनुरूप समाधान प्रदान करने में मदद करता है जो किसानों की चुनौतियों को दूर करते हैं और साथ ही इनसे कृषि क्षेत्र में उत्कृष्टता तथा निरंतर प्रदर्शन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता सुनिश्चित होती है। यह सम्मान कृषि क्षेत्र में उत्कृष्टता और वहनीयता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।”

यह पुरस्कार न केवल जीवन भर के असाधारण योगदान का, बल्कि गोदरेज की प्रगतिशील योगदान की लंबी विरासत का भी सम्मान है।

Bharat Ratna Award 2024: चौधरी चरण सिंह, पीवी नरसिम्हा राव और वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न की घोषणा

0
Bharat Ratna Award: एजेंसी, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने चौधरी चरण सिंह, पीवी नरसिम्हा राव और वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न से सम्मानित करने की घोषणा की है। तीनों का भारत के विकास में अहम योगदान रहा है। एमएस स्वामीनाथन को देश में हरित क्रांति का जनक माना जाता है।
देश के किसानों की लंबे समय से मांग रही थी कि चौधरी चरण सिंह को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया जाना चाहिए। उनके परिवार की भी शिकायत थी कि चौधरी चरण सिंह को वो सम्मान नहीं मिला, जिसके वो हकदार हैं। पिछले दिनों कर्पूरी ठाकुर के साथ ही भाजपा के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न को देने की घोषणा की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया
हमारी सरकार का यह सौभाग्य है कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जा रहा है। यह सम्मान देश के लिए उनके अतुलनीय योगदान को समर्पित है। उन्होंने किसानों के अधिकार और उनके कल्याण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हों या देश के गृहमंत्री और यहां तक कि एक विधायक के रूप में भी, उन्होंने हमेशा राष्ट्र निर्माण को गति प्रदान की। वे आपातकाल के विरोध में भी डटकर खड़े रहे। हमारे किसान भाई-बहनों के लिए उनका समर्पण भाव और इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र के लिए उनकी प्रतिबद्धता पूरे देश को प्रेरित करने वाली है।

गौ तस्करों ने अपनी गाड़ी से एक पुलिसकर्मी को कुचला – मौके पर ही मौत

0
राजनांदगांव। जिले के बाघनदी थाना क्षेत्र में शुक्रवार को गौ तस्करों ने अपनी गाड़ी से एक पुलिसकर्मी को कुचल दिया। हादसे में पुलिसकर्मी शिवकुमार मांडवी की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद से आरोपित मवेशी तस्कर फरार हो गया। बाघनदी पुलिस आरोपित की तलाश में महाराष्ट्र के लिए रवाना हुई है।
राजनांदगांव एसपी मोहित गर्ग ने बताया कि देर रात गश्त के लिए पुलिस की टीम थाने से रवाना हुई थी। इसी दौरान मवेशी तस्करों को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन मवेशी तस्करों ने पुलिसकर्मी पर गाड़ी चढ़ा दी। घटना में पुलिसकर्मी शिवकुमार की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद तस्कर महाराष्ट्र की ओर भाग गया। पुलिस की टीम आरोपितों की तलाश के लिए महाराष्ट्र के लिए रवाना हो गई है।
मिली जानकारी के अनुसार मृतक शिवकुमार मांडवी का परिवार पहले अंबागढ़ चौकी क्षेत्र में निवास करता था। वह अपने पिता के साथ नक्सली संगठन में जुड़ा था। लगभग 12 वर्ष पहले शासन की योजना का लाभ उठाते हुए दोनों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। उसके बाद शिवकुमार को पुलिस की नौकरी मिली थी। पुलिस लाइन से दो दिन पूर्व ही शिव कुमार ने बागनदी थाना में ज्वाइनिंग ली थी।

 

उत्तराखंड NEWS – समान नागरिक संहिता विधेयक के पारित होने पर मुख्यमंत्री धामी का किया गया सम्मान

0

 

देहरादून, 8 फरवरी, चर्चित यूसीसी विधेयक के पारित होने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का गुरूवार को सर्वे चौक स्थित आई.आर.डी.टी. सभागार में पार्टी पदाधिकारयों व प्रदेशवासियों द्वारा गर्मजोशी से सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
स्वर्णिम देवभूमि परिषद द्वारा आयोजित नागरिक अभिनंदन कार्यक्रम में बडी संख्या में बुद्धिजीवियों, जनप्रतिनिधियों एवं अन्य गणमान्य लोगों द्वारा प्रतिभाग किया गया। प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू किये जाने के लिये मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों की उपस्थित जनसमुदाय ने प्रशंसा की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य विधान सभा में नागरिक संहिता विधेयक पास होने के पीछे उत्तराखण्ड की जनता की शक्ति बताते हुये कहा कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह कानून मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्र सरकार तथा प्रदेश की देवतुल्य जनता का भी आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं कि हमारे देश का नेतृत्व आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सक्षम हाथों में है, जिनके लिए देश सर्वप्रथम है, जो इस देश को ही अपना परिवार समझते हैं और अपने परिवारजनों का सुख-दुःख ही उनका सुख-दुःख है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने समान नागरिक संहिता पर देवभूमि की सवा करोड़ जनता से किये गए अपने वादे को निभाया है। हम जनता के हैं और जनता हमारी है, यह कानून जनता के लिये है, जनता की भलाई, समता और समानता के लिये बनाया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने 2022 के विधान सभा चुनाव से पहले 
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लाने का वादा किया था। प्रदेश की देवतुल्य जनता ने हमें इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए अपना आशीर्वाद देकर पुनः सरकार बनाने का अवसर दिया। सरकार गठन के तुरंत बाद, जनता जर्नादन के आदेश को सिर माथे पर रखते हुए हमने अपनी पहली कैबिनेट की बैठक में ही समान नागरिक संहिता बनाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन का निर्णय लिया और 27 मई 2022 को उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्रीमती रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में पांच सदस्यीय समिति गठित की। इस समिति के सदस्यों में सिक्किम उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश प्रमोद कोहली जी, समाजसेवी मनु गौड़ जी, उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह एवं दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो० सुरेखा डंगवाल को सम्मिलित किया गया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्राप्त सुझावों का अध्ययन कर समिति ने उनका रिकॉर्ड समय में विश्लेषण कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट 02 फरवरी 2024 को सरकार को सौंपी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार से इस देवभूमि से निकलने वाली मां गंगा बिना भेदभाव के अभिसिंचित करती है उसी प्रकार राज्य विधान सभा से पारित समान नागरिक संहिता के रूप में निकलने वाली समान अधिकारों की संहिता रूपी ये गंगा हमारे सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित करेगी।
क्योंकि हमारा संविधान एक पंथनिरपेक्ष संविधान है। यह एक आदर्श धारणा है, जो हमारे समाज की विषमताओं को दूर करके, हमारे सामाजिक ढांचे को और अधिक मजबूत बनाती है।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 44 में उल्लिखित होने के बावजूद अब तक इसे दबाये रखा गया। 1985 के शाह बानो केस के साथ इसी देवभूमि की बेटी शायरा बानो ने दशकों तक न्याय के लिये संघर्ष किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता, विवाह, भरण-पोषण, गोद लेने, उत्तराधिकार, विवाह विच्छेद जैसे मामलों में भेदभाव न करते हुए सभी को बराबरी का अधिकार देगा और जो प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार भी है। समान नागरिक संहिता समाज के विभिन्न वर्गों, विशेष रूप से माताओं-बहनों और बेटियों के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि महिलाओं के साथ होने वाले अत्यचारों को रोका जाए।
हमारी आधी आबादी को सच्चे अर्थों में बराबरी का दर्जा देकर हमारी मातृशक्ति को संपूर्ण न्याय दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह देश तीन तलाक और धारा-370 जैसी ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने के पथ पर अग्रसर है। उनके नेतृत्व में सैंकड़ों वर्षों के बाद अयोध्या में रामलला अपने जन्मस्थान पर विराजमान हुए हैं, और मातृशक्ति को सशक्त करने के लिए विधायिका में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे इस कदम से उन कुप्रथाओं का अंत होगा जिनसे महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाई जाती थी।

मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता में लिव इन संबंधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हुए कहा कि एक वयस्क पुरुष जो 21 वर्ष या अधिक का हो और वयस्क महिला जो 18 वर्ष या उससे अधिक की हो, वे तभी लिव इन रिलेशनशिप में रह सकेंगे, जब वो पहले से विवाहित या किसी अन्य के साथ लिव इन रिलेशनशिप में न हों और कानूनन प्रतिबंधित संबंधों की श्रेणी में न आते हों। लिव-इन में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को लिव-इन में रहने हेतु केवल पंजीकरण कराना होगा जिससे भविष्य में हो सकने वाले किसी भी प्रकार के विवाद या अपराध को रोका जा सके।

हल्द्वानी के बनभूलपुरा में अवैध निर्माण(मदरसा )को हटाये जाने पर अराजक विशेष तत्त्वों ने मचाया उपद्रव

0
हल्द्वानी के बनभूलपुरा में अवैध निर्माण(मदरसा )को हटाये जाने पर अराजक विशेष तत्त्वों ने मचाया उपद्रव
मुख्यमंत्री ने बुलाई उच्च स्तरीय बैठक
दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के दिये गये आदेश
देहरादून,8 फरवरी, हल्द्वानी के बनभूलपुरा में अवैध मदरसे निर्माण को हटाये जाने के दौरान पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारियों एवं कार्मिकों पर हुए हमले तथा क्षेत्र में अशान्ति फैलाने की घटना को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गम्भीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित अधिकारियों को क्षेत्र में शान्ति एवं कानून व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने के सख्त निर्देश भी दिये हैं ।

मुख्यमंत्री ने इस संबंध में गुरूवार सांय मुख्यमंत्री आवास में मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूडी, पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार तथा अन्य उच्चाधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों से शान्ति बनाये रखने की अपील करते हुए अराजक तत्वों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही के निर्देश दिये है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना के दोषियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही कर क्षेत्र में शान्ति व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिये कि प्रदेश में किसी को भी कानून व्यवस्था से खिलवाड करने की छूट नहीं दी जानी चाहिए। प्रशासनिक अधिकारी निरंतर क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये प्रयासरत रहे।

जिलाधिकारी द्वारा दूरभाष पर मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि अशान्ति वाले क्षेत्र बनभूलपुरा में कर्फ्यू लगाया गया है तथा स्थिति को सामान्य बनाये रखने के लिये दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिये गये है।

हेल्थ न्यूज – डॉ. धीरज सोनावणे ने की चुनौतीपूर्ण “स्पाइन सर्जरी”

0
नासिक का रहने वाला 14 साल का लड़का,जिसका पिता किसान है। जन्म के बाद से हाल ही में 2 वर्षों से पीठ में कूबड़ दिखाई दे रहा था। कुछ महीनों से पहले वह चंचल था, जब उसे कमजोरी और लकवा होने लगा, पिछले कुछ सप्ताह में उसके दोनों पैरों में पूरी तरह से लकवा हो गया। दोनों पैरों में सारी संवेदनाएं खत्म हो गईं। उसे पेशाब आना बंद हो गया या चेहरे पर नियंत्रण नहीं रह गया। माता-पिता नासिक में स्पाइन डॉक्टरों के पास गए, जिन्होंने मुंबई जाने और जेजे अस्पताल में ऑर्थोपेडिक यूनिट के प्रमुख, विशेषज्ञ स्पाइन सर्जन डॉ. धीरज सोनावणे से मिलने का सुझाव दिया। डॉ. धीरज से मिलने पर उन्होंने सीटी स्कैन, एमआरआई और विशेष एक्सरे से माता-पिता को गंभीर काइफोस्कोलियोसिस के साथ न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस नामक बीमारी के बारे में परामर्श दिया। इस मरीज़ के सामने कई चुनौतियाँ थीं जैसे रीढ़ की हड्डी का 150 डिग्री का मोड़ जो चट्टान की तरह था, फेफड़ों की ख़राब क्षमता, असामान्य कशेरुकाओं का आपस में चिपक जाना।
        बेहतर प्लानिंग के लिए डॉ. धीरज ने पूरी रीढ़ की हड्डी का 3डी प्लास्टिक मॉडल बनाया और सर्जरी करने का फैसला किया। ऑर्थोपेडिक्स के स्पाइन सर्जनों की टीम में डॉ. अजय चंदनवाले (संयुक्त निदेशक डीएमईआर), डॉ. सागर जावले, डॉ. संतोष घोटी, डॉ. कुशल घोइल और मुख्य एनेस्थेटिक डॉ. संतोष गिते शामिल थे।
गंभीर रूप से मुड़ी हुई रीढ़ की हड्डी को ठीक करने के लिए रीढ़ की हड्डी को 11 स्तरों पर तोड़ा गया और 20 स्पाइन स्क्रू और 3 धातु की छड़ों के साथ इसे ठीक किया गया। पक्षाघात से बेहतर रिकवरी के लिए रीढ़ की हड्डी को असामान्य रीढ़ की हड्डी के कशेरुकाओं के बीच फंसा हुआ पाया गया और सभी तरफ से मुक्त कर दिया गया। अक्षय ने कुछ ही दिनों में पैरों की संवेदना ठीक होने और पेशाब और चेहरे पर नियंत्रण लौटने के अच्छे संकेत दिखाए। पीठ में सुधार और सामान्य रूप देखकर माता-पिता बेहद खुश हुए।
डीन डॉ. पल्लवी सपले ने असाधारण उपचार और परिणाम के लिए आर्थोपेडिक विभाग और डॉक्टरों की टीम को बधाई दी। विभाग के प्रमुख डॉ. एकनाथ पवार ने कहा, ”तृतीयक देखभाल वाला सरकारी अस्पताल होने के नाते जेजे में सबसे जटिल मामलों को रेफर किया जाता है। हमने रीढ़ की हड्डी की विशेषज्ञता विकसित की है और इसे रीढ़ की हड्डी के लिए अत्याधुनिक केंद्र बनाने के लिए आगे काम कर रहे हैं।”
     संयुक्त निदेशक डॉ. अजय चंदनवाले ने कहा, “ये बेहद चुनौतीपूर्ण सर्जरी हैं जो भारत में बहुत कम संस्थानों में की जाती हैं, ऐसे परिणाम इस टीम की अत्यधिक कड़ी मेहनत और समर्पण के कारण हैं

जैन धर्म के संस्थापक और प्रथम तीर्थंकर थे भगवान ऋषभदेव

0
अतिवीर जैन पराग – विनायक फीचर्स
जिस अयोध्या नगरी में 22 जनवरी 2024 को श्री राम जी के मंदिर की 496 वर्षों के बाद पुनस्र्थापना हुई है। उस अयोध्या नगरी को साकेतपुरी, सुकौशल तथा विनीता भी कहते थे। उसी अयोध्या नगरी में करोडों वर्ष पूर्व महाराजा नाभिराय का शासन था। उनकी धर्मपत्नी महारानी मरुदेवी थी। महारानी मरुदेवी के गर्भ से चैत्र कृष्ण पक्ष नवमी को सुबह एक बालक ऋषभनाथ का जन्म हुआ। बालक ऋषभ के युवा होने पर उनका विवाह कच्छ और महाकच्छ की दो बहनों यशस्वती (नंदा) और सुनंदा के साथ कर दिया गया। रानी यशस्वती से भरत आदि सौ पुत्र और एक पुत्री ब्राह्मी हुई। तो रानी सुनंदा से एक पुत्र बाहुबली और एक पुत्री सुंदरी हुई। ऋषभदेव ने अपनी पुत्री ब्राह्मी को अक्षर ज्ञान दिया तो सुंदरी को अंक विद्या का ज्ञान दिया। ब्राह्मी लिपि आज भी प्राचीनतम है। सभी पुत्रों को शस्त्र और शास्त्रों का ज्ञान दिया और प्रजा पालन करना सिखाया।
यह वह समय था जब भोगभूमि का काल पूर्ण होकर कर्मभूमि का काल प्रारंभ हो गया था। भोगभूमि में दस   कल्पवृक्ष होते थे जो मनुष्य की सभी आवश्यकताओं को पूर्ण करते थे। मनुष्य को कोई काम नहीं करना पड़ता था। धीरे-धीरे काल के प्रभाव से यह कल्पवृक्ष लुप्त होते गए। और मनुष्य के सामने भूख प्यास, गर्मी सर्दी और बीमारियों की समस्याएं आने लगी। प्रजा अपने राजा नाभिराय के पास गई और उपाय पूछा तो राजा ने प्रजा को युवराज ऋषभदेव के पास भेज दिया।
   भगवान ऋषभदेव या भगवान आदिनाथ ने संसारी रहते हुए प्रजाजनों को शस्त्र, लेखनी, विद्या, व्यापार, खेती एवं शिल्प इन छह कार्यों को करना सिखलाया। उन्होंने जनता को इन छह कार्य के द्वारा आजीविका पैदा करने के उपदेश दिए। इसीलिए वे युगकर्ता और सृष्टि के ब्रह्मा कहलाए। इस रचना के द्वारा ऋषभदेव ने प्रजा का पालन किया। इसलिए उन्हें प्रजापति भी कहा गया।
उस समय ऋषभदेव ने प्रजा को असी , मसी, कृषि, विद्या, वाणिज्य, शिल्प, छह उपाय बताएं। इन्हें  षटकर्म कहा गया।
राजा नाभि राय ने कुछ समय पश्चात राज सिंहासन ऋषभदेव को सौंप दिया और खुद तपस्या करने के लिए वन में चले गए। राजा ऋषभदेव ने प्रजा को योग एवं क्षेम  (नवीन वस्तु की प्राप्ति तथा प्राप्त वस्तु की रक्षा) के नियम बताएं। गन्ने के रस का उपयोग करना बताया। खेती के लिए बैल का प्रयोग करना सिखाया।  इसीलिए ऋषभनाथ को वृषभनाथ भी कहा जाता है।
एक बार जब महाराज ऋषभदेव के जन्मदिन के दिन उत्सव मनाया जा रहा था। स्वर्ग की अप्सराएँ नृत्य कर रही थी। उनमें एक मुख्य अप्सरा नीलांजना नृत्य करते-करते मृत्यु को प्राप्त हो गई। क्योंकि उसकी आयु पूर्ण हो गई थी। यह देखकर राजा ऋषभदेव को वैराग्य हो गया। और उन्होंने अपने सबसे बड़े पुत्र भरत का राज्याभिषेक कर दीक्षा ले ली। अयोध्या से दूर सिद्धार्थ नामक वन में पवित्रशिला पर विराजकर छह माह का मोन लेकर उपवास और तपस्या की। जब छह माह का ध्यान योग समाप्त हुआ तो वे आहार के लिए निकल पड़े। चलते-चलते छह माह बाद  हस्तिनापुर में पहुंचे। वहां के राजा सोमप्रभ और भाई श्रेयांश कुमार ने महाराज को प्रथम आहारदान गन्ने के रस का दिया। भगवान ने दोनों हाथों की अंजलि बनाकर खड़े रहकर उसमें इक्षारस का आहार  लिया। और तभी से आज तक जैन मुनियों द्वारा खड़े होकर अपनी अंजलि में लेकर आहार करने की परंपरा चली आ रही है। वैशाख शुक्ल तृतीया के इसी दिन को अक्षय तृतीया कहते हैं। इस समय से  ही आर्यखंड में दान की प्रथा प्रारंभ हुई।
ऋषभदेव ने एक हजार वर्षो तक कठोर तपस्या की। इसके बाद इन्हें फाल्गुन कृष्ण एकादशी को कैवल्यज्ञान प्राप्त हुआ। इन्होंने अपनी इंद्रियों और इच्छाओं पर विजय पाई। जिससे यह जिन कहलाए। इन्होंने जो मार्ग बताया उसे जैन धर्म कहा जाने लगा। और तभी से जैन धर्म का प्रारंभ हुआ। इंद्र ने भगवान का उपदेश सुनने के लिए समोसरण की धर्म सभा की व्यवस्था की। भगवान के इस सभा मंडप में देव, मनुष्य, पशु ,पक्षी सभी प्राणी आए। भगवान ने सभी को सच्चे सुख का मार्ग बताया। भरत के लघु भ्राता वृषभसेन ने समोसरण में वैराग्य होने पर मुनि दीक्षा धारण की और भगवान के प्रथम गणधर  हुए। ऋषभदेव की पुत्री ब्राह्मी देवी दीक्षित होकर प्रथम अर्जिका और अर्जिका संघ की गणिनी प्रमुख बनी। दूसरी पुत्री सुंदरी भी दीक्षा लेकर अर्जिका बन गयी। सम्राट भारत ने अपने परिवार सहित भगवान की वंदना की। जब भरत ने उनसे उपदेश देने को कहा तो आपने बताया। जीव आत्मस्वरूप है। वह संसारी है और संसार को छोड़कर मुक्ति भी प्राप्त कर सकता है। मोक्ष प्राप्ति के लिए उसे रत्नत्रय का मार्ग अपनाना होगा। रतनत्रय से आशय है सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र। सम्यक दर्शन का अर्थ देव, शास्त्र, गुरु का ज्ञान प्राप्त करना है और यह मोक्ष मार्ग की प्रथम सीढ़ी है। पदार्थों के यथार्थ स्वरूप को प्रकाशित करने वाला और अज्ञान को नाश करने वाला सम्यक ज्ञान कहलाता है। समता भाव धारण कर निज रूप में विचरण ऐसे लक्षण को सम्यक चारित्र कहा जाता है। सम्यक दर्शन के बिना सम्यक ज्ञान और चरित्र को प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसी प्रकार सम्यक दर्शन के बिना सम्यक दर्शन , सम्यक ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। इन तीनों को मिलाकर ही मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।
जब भगवान ऋषभदेव या भगवान आदिनाथ के मोक्ष गमन में चौदह दिन शेष रह गए तब पौष शुक्ल पूर्णिमा के दिन आप कैलाश पर्वत पर जाकर योग निरोध में लीन हो गए। भगवान की दिव्य ध्वनि नजदीक आ गई। भगवान के मोक्ष का समय नजदीक जान महाराजा भरत अपने अन्य भाइयों और प्रजाजनों के साथ कैलाश पर्वत पर भगवान की शरण में आ पहुंचे और 14 दिन की महामह नाम की पूजा प्रारंभ की। माघ कृष्णा चतुर्दशी के दिन सूर्योदय के समय भगवान ऋषभदेव पूर्वमुख से अनेक मुनियों सहित विराजमान हुए और तीसरे शुक्ल ध्यान में तीनों योगों का निरोध करते हुए अयोगि हो गए। इस प्रकार भगवान ऋषभदेव ने कैलाशगिरी से अशरीरी सिद्ध पद प्राप्त किया। आत्म सुख में तल्लीन रूप में भगवान वहां आज भी विराजमान है ऐसी मान्यता है। भगवान का मोक्ष जानकर इंद्रगणों ने और चक्रवर्ती भरत आदि ने भगवान के मोक्ष निर्वाण कल्याणक का उत्सव मनाया।
जनसाधारण में यह भ्रांति है कि जैन धर्म के संस्थापक भगवान महावीर थे। जबकि जैन धर्म में कुल मिलाकर 24 तीर्थंकर हुए हैं। जिनमे प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव थे। जिन्होंने जैन धर्म का प्रारंभ किया। और भगवान महावीर अंतिम 24वें तीर्थंकर थे। इतिहास की कुछ पुस्तकों में यहां तक कि सरकारी पाठ्यक्रम की किताबों में भी भगवान महावीर को जैन धर्म का संस्थापक बताया गया है। जिसका सरकार को सुधार करना चाहिए। भगवान ऋषभदेव के मोक्ष/निर्वाण कल्याणक के अवसर पर माघ कृष्ण चतुर्दशी के दिन सारे देश में जैन समाज के लोग मंदिरों मे  भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा का नवन करते हैं। पूजा पाठ के साथ दीप जलाकर भगवान का मोक्ष निर्वाण कल्याणक धूमधाम से मनाते हैं। (विनायक फीचर्स)

इंडिया आर्ट फेस्टिवल 2024 में राजस्थान के उदयपुर की  रिया वैष्णव और पिचवाईवाला भी हुए शामिल

0
इंडिया आर्ट फेस्टिवल 2024 में राजस्थान के उदयपुर की  रिया वैष्णव और पिचवाईवाला भी हुए शामिल
                     मुंबई में आयोजित चार दिवसीय इंडिया आर्ट फेस्टिवल 2024 में राजस्थान की संस्कृति, विरासत और प्रकृति से प्रेरित एक उभरती हुई युवा कलाकार रिया वैष्णव और पिचवाईवाला भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। रिया वैष्णव एक समर्पित कलाकार हैं, जिन्होंने 2 साल की उम्र से ही ड्राइंग शीट पर ब्रश करना शुरू कर दिया था, 16 साल की उम्र में उन्हें पेंटिंग के क्षेत्र में एक दर्जन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्होंने एफएजी इंटरनेशनल द्वारा आयोजित “स्पेक्ट्रम 2023” गोवा प्रदर्शनी जैसी अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लिया, जहां उन्हें माननीय गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत, इंडिया आर्ट फेस्टिवल मुंबई आर्ट फेयर और इंडिया आर्ट फेस्टिवल दिल्ली, इंडिया आर्ट फेस्टिवल बेंगलुरु द्वारा सम्मानित किया गया। उन्हें इतनी कम उम्र में ही रंगों, कला और रंगों के सामंजस्य का अद्भुत ज्ञान है। वो ऐसी कलाकार हैं जो कला की अपनी नई दृष्टि के साथ कलाकारों की नई पीढ़ी का नैतृत्व करती हैं। कला के प्रति उनका युवा उत्साह और समर्पण प्रकृति और विरासत से प्रेरणा लेने के लिए प्रेरित करता है। रंग, विषय और कहानी  से भरी उनकी कला प्रभावशाली ज्ञान को दर्शाती है जिसमें अनुशासन के साथ हमारी पुरातन कला को बचाने और विकसित करने की झलक मिलती है।यह रिया और उसके परिवार की निरंतर दृढ़ता का ही परिणाम है कि वह विभिन्न कला मंचों पर स्थापित, कुशल और वरिष्ठ कलाकारों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रही है। रिया को यथार्थवादी, विरासत और प्रकृति पेंटिंग बनाना पसंद है। हाल ही में उन्हें असम के माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी द्वारा सम्मानित किया गया क्योंकि उन्होंने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया द्वारा आयोजित 10वीं बर्ड फेस्टिवल उदयपुर पेंटिंग प्रतियोगिता जीती थी। पिचवाई
एक नई दृष्टि के साथ दशकों पुरानी संस्कृति की अद्भुत कलात्मक पिचवाई पेंटिंग के लिए प्रतिबद्ध है। वह कला प्रेमियों को नई रचनात्मकता और अनुभवी विशिष्ट कला का दुर्लभ अवसर प्रदान करते हैं। पिछवाई कला मनोरम और सांस्कृतिक भारतीय कला रूप है अर्थात मेवाड़ राजस्थान की रचना है। इसकी उत्पत्ति 400 शताब्दी पूर्व पुष्टिमार्ग हवेली में सम्राट महाराणा राज सिंह के समय हुई थी। पिचवाईवाला परिवार के सदस्यों ने लघु पिछवाई पेंटिंग में विश्व रिकॉर्ड बनाए। परिवार हवेली (महल) पर काम कर रहा था। पिचवाई कला अपने जीवंत रंगों और सख्त विवरण के लिए प्रसिद्ध है। पिछवाई कला मुख्य रूप से भगवान कृष्ण की दैनिक दिनचर्या का वर्णन करती है। पिचवाईवाला परिवार पिछले 7 से 8 दशकों से इस कला के लिए समर्पित है और वे दादाजी जय किशन जी, पिता नरेंद्र सिंह जी, स्वयं करण सिंह और परिवार के सदस्यों महेंद्र सिंह, चंदर सिंह, राहुल कुमार सोनी और कैलाश के साथ इसे लगातार निखार रहे हैं। राहुल कुमार सोनी ने अपनी अनूठी कला तकनीक में विश्व रिकॉर्ड बनाया है। उनके पास दर्जन भर से अधिक मान्यता प्राप्त पुरस्कार हैं।
उनके समर्पण और कड़ी मेहनत ने उत्कृष्टता के लिए एक नया मानक स्थापित किया है और हम सभी को महानता तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया है। राहुल सोनी को अपनी मां से प्रेरणा मिली, जो मिनिएचर आर्टिस्ट थीं और वह कम उम्र से ही अपनी मां का अनुसरण करते थे, लेकिन 14 साल की उम्र से उन्होंने पेशेवर कलाकार के रूप में काम करना शुरू कर दिया। इसके बाद वह पिचवाईवाला श्री करण सिंह से मिले और पिचवाई कला शुरू की। करण सिंह और राहुल सोनी ने पिछवाई कला के बारे में रोचक बातें साझा करते हुए बताया कि यह केवल पत्थर के रंगों के साथ प्राकृतिक रोशनी में ब्रश की मदद से तैयार की जाती है, जिसमें केवल एक बाल होते हैं। राहुल सोनी ने अपने रचनात्मक कौशल से पिछवाई कला में एक नया मानक स्थापित किया।
राहुल सोनी ने राई के दाने पर अनूठी अतिसूक्ष्म-लघु कला बनाई, उन्होंने किंगफिशर की चोंच बनाई, फिर चोंच में एक मछली बनाई जिसमें मछली की आंख तक देखी जा सकती है। राहुल सोनी ने माइक्रो-पिछवाई और माइक्रो-मिनिएचर का एक नया युग बनाया। 8 फरवरी से 11फरवरी तक चलने वाले इस चार दिवसीय इंडिया आर्ट फेस्टिवल में रिया वैष्णव और पिचवाईवाला, काका – भतीजी की जोड़ी की नवीनतम कला कृतियों के साथ
जिस अतुल्य ‘पिछवाई कला’ का अवलोकन करने का मौका कलाप्रेमियों को मिल रहा है उसका एक महान इतिहास, सदियों की स्वर्णिम ऐतिहासिक यात्रा के साथ पीढ़ियों की कड़ी मेहनत है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

सी.बी.एस.ई. दसवीं एवं बारहवीं के पेपर कैसे साल्व करें जानें पुनीत सर से

0
सी.बी.एस.ई. दसवीं एवं बारहवीं के पेपर कैसे साल्व करें जानें पुनीत सर से
अर्चित सक्सेना – विनायक फीचर्स
सी.बी.एस.ई. की दसवीं एवं बारहवीं की परीक्षाएं शीघ्र ही शुरु होने वाली है। विद्यार्थियों को परीक्षाओं को लेकर काफी तनाव होता है। कई बार उनके पास सही मार्गदर्शन भी नहीं होता जिससे वे कुछ छोटी-छोटी गलतियां भी करते हैं। इसी कारण कुछ प्रश्नों के हल वे आते हुए भी गलत कर जाते हैं। सीबीएसई की परीक्षाओं को लेकर विद्यार्थियों की परेशानियों और तनाव को दूर करने के लिए हमने युवा शिक्षाविद् एवं यूट्यूूब चैनल ”पुनीत सर की पाठशालाÓÓ के संचालक पुनीत दुबे से चर्चा की, उन्होंने बच्चों को बेहद आसान से टिप्स दिए जिससे बच्चे सरलता से बिना किसी तनाव के अपने प्रश्न पत्र हल कर सकें।
पेपर साल्व करने से पहले यह ध्यान रखें कि आप परीक्षा कक्ष में समय पर पहुंचे और जो आपको 15 मिनिट का समय पेपर पढऩे के लिए मिला है उसमें एकाग्रता के साथ पेपर पढ़ें। तभी यह तय कर लें कि कौन सा प्रश्न आपको सबसे अच्छी तरह से करना है। उसे सबसे पहले करें। पन्द्रह मिनिट के इस रीडिंग सेशन को बिल्कुल भी वेस्ट न करें।
किस सेक्शन को कितना समय दें?
पेपर में आपको एक, दो, तीन और पांच नंबर के प्रश्न हल करना है। इसमें आप एक नंबर के प्रश्न के लिए दो से तीन मिनिट, दो नंबर के प्रश्न के लिए 4 से 5 मिनिट, तीन नंबर के प्रश्न के लिए 5 से 6 मिनिट, 5 नंबर के प्रश्न के लिए कुल 10 मिनिट का समय बांट दें। समय बांटकर प्रश्न करने से आप हर सेक्शन को बराबर समय दे पाएंगे और पूरे प्रश्नों को समय सीमा में पूरा कर पाएंगे। यदि किसी प्रश्न में इससे ज्यादा समय लगता है तो उसे छोड़ दें बाद में समय मिलने पर उस प्रश्न को करने की कोशिश करें।
क्या सावधानियां रखें?
सबसे पहले हैंडराइटिंग का ध्यान रखें। साफ-सुथरी लिखावट में लिखें। डिजिट्स का खास ध्यान रखें। लिखने में ओवर राइटिंग न करें। साफ-सुथरी लिखावट से जहां कापी परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़ता है वहीं आपकी डिजिट्स सही लिखे होने से आखिरी आंसर में गलती होने की संभावना भी नहीं रहती।
जो प्रश्न सबसे अच्छा आता हो उसे सबसे पहले करें।
उत्तर पुस्तिका में प्रश्नों के उत्तर अस्त-व्यस्त तरीके से न करें। बड़े उत्तरों को अलग लिखें तो एक-एक नंबर वाले सभी प्रश्नों को एक जगह एक साथ करें। यही क्रम दो नंबर वाले प्रश्नों के साथ भी रखें।
जो प्रश्न अधिक नंबरों वाले हैं उन्हें पूरी क्रमबद्धता के साथ स्टेप वाइज करें। किसी भी स्टेप को छोड़े नहीं हर एक स्टेप कापी में लिखें। यदि आप कोई स्टेप छोड़ देंगे तो आपके नंबर भी कट जाएंगे।
पर यदि दो नंबर वाले सवाल हैं तो उनमें आप अपनी सुविधानुसार स्टेप लिख सकते हैं। कम नंबर के प्रश्नों में ज्यादा स्टेप्स लिखने से ज्यादा नंबर नहीं मिलेंगे। लेकिन ज्यादा नंबर के प्रश्नों में कम स्टेप लिखने से नंबर कट जाएंगे। वस्तुनिष्ठ प्रश्न (एमसीक्यू) के उत्तर लिखते समय सही विकल्प के साथ उत्तर भी लिखें। अर्थात् यदि आपका उत्तर ए है तो  ए लिखकर कोष्ठक में उसका सही उत्तर भी लिखें।
गणित में किन बातों का ध्यान रखें
जहां आवश्यक हो वहां चित्र भी बनाएं।
अंतिम उत्तर यूनिट के साथ पूरा लिखें उसे अंडर लाइन भी करें।
जिस फार्मूले का सवाल में उपयोग कर रहे हैं उसे भी पूरी तरह स्पष्ट लिखें।
यदि किसी थ्योरम का उपयोग कर रहे हैं तो प्रश्न में उसका भी उल्लेख करें।
साइंस
साइंस में जीव विज्ञान का सेक्शन हल करते समय लिखने से ज्यादा चित्रों और उनकी लेबलिंग पर ध्यान दें। चित्र को साफ-सुथरा बनाकर पर्याप्त लेबलिंग करें फिर प्रश्न का पर्याप्त उत्तर दें। फिजिक्स में भी जहां आवश्यक हो वहां अपने उदाहरण चित्रों के माध्यम से समझाएं। चित्रों पर लेबलिंग एनसीईआरटी की पुस्तकों के अनुरूप करें तो नंबर नहीं कटेंगे। (विनायक फीचर्स)