ग्वालियर में गौ हत्या की ग्लानि व डर से फांसी पर झूला बुजुर्ग
ग्वालियर (नन्यू)। भितरवार थाना क्षेत्र के जतरथी गांव में एक 72 वर्षीय बुजुर्ग ने गाय के बछड़े को डंडा मार दिया। बछड़े की मौत के बाद ग्रामीणों ने शुद्धिकरण, गंगा स्नान की बात कही। गो हत्या की ग्लानि और डर से घबराकर उसने खेतों पर लगे नीम के पेड़ से लटककर फांसी लगा ली।
जानकारी के अनुसार डबरा ब्लॉक एवं भितरवार पुलिस थाना क्षेत्र के गांव जतरथी निवासी 72 वर्षीय बुजुर्ग भूप सिंह गुर्जर पुत्र राम प्रसाद गुर्जर ने गुरुवार को गांव से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित खेत में नीम के पेड़ पर गमछे का फंदा बनाकर फासी लगा ली। बताया जाता है कि बुजुर्ग के हाथों से गलती से गाय के बछड़े को डंडा लग गया था, जिससे उसकी मौत हो गई।
लोगों ने बुजुर्ग से कहा कि अब शुद्धिकरण और गंगा स्नान करना पड़ेगा नहीं तो गौ हत्या का पाप सिर लग जाएगा। गलती से बछड़े की हत्या का पाप और शुद्धिकरण की बात से वह घबरा गया था। जब सांझ ढलने तक बुजुर्ग रोजाना की तरह घर नहीं पहुंचा तो स्वजन तलाश में निकले तो वह फांसी के फंदे पर झूलता हुआ मिला। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।
एक जागरूक सिनेमा दर्शकों के बीच हाजिर ‘आखिर पलायन कब तक’
रेटिंग – 3 स्टार
निर्देशक मुकुल विक्रम की फिल्म ‘आखिर पलायन कब तक’ एक संवेदनशील और ज्वलनशील मुद्दे पर बनी फिल्म है।
उत्तराखंड पर आधारित यह फिल्म लगती तो वहां की पलायनवाद पर है जैसा कि वहां के स्थानीय लोग दिल्ली, मुंबई के अलावा विदेशों में बस गए हैं। लेकिन फिल्म देखने के बाद पता चलता है कि यह फिल्म दो धर्मों के बीच की लड़ाई है जहां कट्टरपंथी लोग भले लोगों का जीना हराम कर देते हैं। फिल्म की कहानी मुस्लिम बाहुल्य इलाके पर रहने वाले हिन्दुओं पर हो रहे प्रताड़ना को दर्शाती है। फिल्म की कथा में वास्तविकता की छाप है। एक विशेष धर्म के लोगों का अन्य धर्म के लोगों के प्रति किये गए कटु व्यवहार का वर्णन है। और भारत में पारित मुस्लिम वफ्फ बोर्ड की नीतियों के दुरुपयोग का भी जिक्र है।
फिल्म की शुरुआत में ही निर्देशक ने सस्पेन्स और थ्रिल डालने की कोशिश की है फिल्म को देखने पर लगता है कि यह शायद कोई मर्डर मिस्ट्री कहानी है। लेकिन जैसे ही कहानी आगे बढ़ती है कहानी का मूल मुद्दा ज्ञात हो जाता है। इंस्पेक्टर सूरज शर्मा और उसकी टीम हवलदार अकरम और राजेश नेगी को खबर मिलती है कि उन्हें एक सिर कटी लाश मिली है। पुलिस पूरे छानबीन में जुट जाती है और उन्हें मालूम होता है कि पास में ही रहने वाले दुकानदार सुनील बिष्ट का पूरा परिवार लापता है। पुलिस की छानबीन जारी रहती है तभी एक और लाश मिलने की खबर आती है। यह मंदिर का पुजारी था किंतु वह केवल मूर्छित था लोग उसे मृत समझ रहे थे। पुजारी के होश में आने के बाद इंस्पेक्टर सूरज को एक विशेष धर्म द्वारा फैलाये षडयंत्र के बारे में परत दर परत जानकारियां मिलती है इसी इलाके का रसूकदार और बड़े ओहदे वाला बदरुद्दीन कुरैशी कहीं ना कहीं इस घटना के पीछे मजबूत ढाल बनकर खड़ा है। और साथ ही यहीं से एक परिवार के गुम होने की सच्चाई ज्ञात होती है। इन सभी घटना में पत्रकार मुकेश यादव भी अपना पूर्ण सहयोग देता है। क्या वाकई इंस्पेक्टर सूरज सच्चाई तक पहुँच पाता है? क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिला और आखिर वह सिर कटी लाश किसकी थी ? इन रहस्य भरे प्रश्नों का उत्तर फिल्म देखकर ज्ञात होगा।
फिल्म की कहानी बेहद उम्दा और मार्मिक है जो सत्य घटना पर आधारित भी है।
फिल्म में केवल एक ही बैकग्राउंड गीत है जो फिल्म में पात्रों की मार्मिकता को बीच बीच में दर्शाते रहता है। फिल्म की पटकथा मजबूत है लेकिन निर्देशन कहानी को रोचक बनाने में चूक गए। द कश्मीर फाइल्स फिल्म की तरह यह भी सत्य घटनाओं से प्रेरित है लेकिन उस फिल्म वाली संवेदना की कमी इस फिल्म में साफ दिखाई पड़ती है।
फिल्म में राजेश शर्मा, भूषण पटियाल, गौरव शर्मा, चितरंजन गिरी, धीरेंद्र द्विवेदी और सोहनी कुमारी ने अभिनय किया है।
कई बड़ी फिल्मों में अपने अभिनय से लोगों का दिल जीतने वाले अनुभवी अभिनेता राजेश शर्मा ने एक बार फिर अपनी उपस्थिति से सबका ध्यान आकर्षित किया है। अन्य कलाकारों ने भी अपने अभिनय कौशल का ठीक ठाक प्रदर्शन किया है।
मनोरंजन की चाह रखने वाले दर्शकों को इस फिल्म से निराशा होगी लेकिन वे सोचने पर मजबूर हो सकते हैं।
– संतोष साहू
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राजकुमार संतोषी की फिल्म ‘लाहौर 1947’ में अभिमन्यु सिंह निभाएंगे विलेन का किरदार
फिल्म में सनी देओल की है मुख्य भूमिका
राजकुमार संतोषी की अगली फिल्म ‘लाहौर 1947’ को लेकर हर दिन एक नई अपडेट सामने आ रही है। इस फिल्म में जहां सनी देओल मुख्य किरदार निभाते नजर आएंगे, वहीं राजकुमार संतोषी, आमिर खान और सनी की तिकड़ी को ये पहली बार साथ लेकर आई है। अब इस फिल्म में विलेन के किरदार के लिए एक्टर अभिमन्यु सिंह फाइनल किए जा चुके हैं।
इस पर बात करते हुए फिल्म के निर्देशक राजकुमार संतोषी ने कहा हैं कि आमतौर पर, जब भी हम किसी खलनायक के किरदार के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले कुछ नाम अमरीश जी और डैनी जी आते हैं, लेकिन हमें आगे देखना होगा और देखना होगा कि कौन आगे की कमान संभालता है। दिलचस्प बात यह है कि हमने अभिमन्यु सिंह को शामिल किया है जो लाहौर 1947 में खलनायक के रूप में एक मजबूत और मुख्य भूमिका निभाते नजर आएंगे। उनकी इंटेंसिटी, उनकी आवाज और उनका दृढ़ विश्वास वास्तव में बेजोड़ है। वह यकीनन हमारी इंडस्ट्री के सबसे प्रतिभाशाली अभिनेताओं में से एक हैं।
अभिमन्यु सिंह मुख्य रूप से हिंदी, तेलुगु और तमिल भाषा की फिल्मों में काम करते हैं। उनके पास लक्ष्य, ढोल, वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई दोबारा!, गोलियों की रासलीला राम-लीला, बच्चन पांडे, किसी का भाई किसी की जान जैसी कई अन्य फिल्मों में काम करने का व्यापक अनुभव है। उन्होंने हमेशा अपनी भूमिकाओं से दर्शकों को प्रभावित किया है और अब लाहौर 1947 में उन्हें विलेन के रूप में देखना यकीनन शानदार अनुभव होगा।
जहां तक ‘लाहौर 1947’ की बात करें तो इस फिल्म को आमिर खान अपने प्रोडक्शन बैनर तले प्रोड्यूस कर रहे हैं, जबकि कुशल निर्देशक राजकुमार संतोषी इस प्रोजेक्ट को डायरेक्ट करने जा रहे हैं। इस फिल्म में सनी देओल और प्रीति जिंटा लीड एक्टर्स के रूप में दिखाई देंगे।
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गौ सेवा करने के साथ ही कमाई भी करना चाह रहे हैं – करना होगा ये काम
अगर आप भी गौ सेवा करने के साथ ही कमाई भी करना चाह रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. दरअसल, यूपी सरकार द्वारा निराश्रित गोवंश के संरक्षण एवं उनके भरण -पोषण के लिए सहभागिता योजना शुरू की गई है. जिससे जुड़कर आप घर बैठे अच्छी कमाई कर सकते हैं. इसके लिए आपको किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं देना होगा. इस योजना के अंतर्गत सरकार आपको आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगी.
गोवंश के संरक्षण एवं उनके भरण पोषण के लिए चलाई जा रही सहभागिता योजना के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति किसी भी गौशाला से गोवंश लेकर उनका भरण पोषण करें. उसके एवज में सरकार गौ-वंश का संरक्षण करने वाले व्यक्ति को 50 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से उपलब्ध कराएगी यानी कि महीने में एक पशु पर 1500 रुपए की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगी. आप भी इस योजना से जुड़कर निशुल्क गाय लेकर गौ सेवा भी कर सकते हैं और पैसे भी कमा सकते हैं.
करना होगा ये काम
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. इंद्रजीत वर्मा(एमवीएससी वेटनरी) के मुताबिक इस योजना के तहत एक व्यक्ति अधिकतम चार गोवंश ले सकता है. प्रति गोवंश 50 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से उसे मिलेंगे यानी की चार गोवंश पर आप घर बैठे 6 हजार रुपए प्रति माह की कमाई करने के साथ ही गौ-सेवा भी कर सकते हैं. सहभागिता योजना के तहत गोवंश लेने के लिए आपको अपने निकटतम पशु चिकिसालय में सहभागिता योजना के फार्म भर जमा करने के साथ ही एक शपथ पत्र भी देना होगा. उसके बाद आप गोवंश ले सकते हैं.
घर बैठे कर सकते हैं कमाई
रायबरेली के पशु चिकित्सालय शिवगढ़ के पशु चिकित्सा अधीक्षक डॉ. इंद्रजीत वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री सहभागिता योजना से जुड़कर आप गौ-सेवा करने के साथ ही घर बैठे कमाई भी कर सकते हैं जो भी व्यक्ति गौ सेवा करके कमाई भी करना चाह रहे हैं वह इस योजना से जुड़कर इसका लाभ ले सकते हैं. लाभार्थी को प्रतिदिन 50 रुपए यानी कि महीने का 1500 रुपए मिलेगा. साथ ही एक व्यक्ति अधिकतम चार गोवंश ले सकता है जिससे उसे 6000 हजार रुपए प्रति माह मिल सकेंगे.
Cow Smuggling in Chhattisgarh- सदन में गूंजा गायों की तस्करी का मुद्दा
Cow Smuggling: विधानसभा में बुधवार को विपक्ष के विधायकों ने गायों की तस्करी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। सरकार को घेरते हुए विधायकों ने गो-तस्करों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वो राजधानी से कंटेनर में गाय की तस्करी कर रहे हैं। 13 गायों की मौत हो गई है। इसमें सरकार का वक्तव्य आना चाहिए। इसे लेकर विपक्ष के विधायकों ने जमकर नारेबाजी भी की। विधानसभा में एक ध्यानाकर्षण समाप्त होने के बाद विपक्ष के विधायक विक्रम मंडावी और रामकुमार यादव ने इस मुद्दे को उठाया। यह छत्तीसगढ़ की पहली घटना है।












